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जाटों और गुर्जरों को एकजुट कर के रोक लिया था हिन्दुओं का नरसंहार, भड़के सिद्दीक कप्पन ने जारी किया था कपिल मिश्रा और परवेश वर्मा की मौत का फरमान

UAPA के तहत 2 साल से ज्यादा समय तक जेल काटने वाले केरल के कथित पत्रकार सिद्दीक कप्पन के बारे में नई जानकारी सामने आई है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सिद्दीक कप्पन ने आतंकी संगठन PFI को भाजपा नेता कपिल मिश्रा और परवेश वर्मा की हत्या का निर्देश दिया था। इस मामले के खुलासा NIA (राष्ट्रीय जाँच एजेंसी) द्वारा PFI कमांडर कमाल केपी से हुई पूछताछ के बाद हुआ है। UP ATS द्वारा गिरफ्तार कमाल केपी फिलहाल लखनऊ की जेल में बंद है।

केरल के एक स्थानीय मलयालम मीडिया आउटलेट जन्मभूमि ने मंगलवार (19 मार्च, 2024) को इस बाबत एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। रिपोर्ट में बताया गया है कि दिल्ली में 2020 के हिन्दू विरोधी दंगों में प्रतिबंधित आतंकी संगठन PFI (पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया) के सदस्य हिन्दुओं को बहुत बड़े स्तर पर नुकसान पहुँचाने में नाकाम रहे थे। इसकी वजह सिद्दीक कप्पन भाजपा नेता कपिल मिश्रा और परवेश वर्मा को मानता था। उसे लगता था कि कपिल मिश्रा और परवेश वर्मा ने गुर्जरों और जाटों को हिंसा कर रहे उपद्रवियों के खिलाफ एकजुट किया।

कप्पन को लगता था कि जाटों और गुर्जरों के कड़े प्रतिरोध की वजह से हिंसक भीड़ हिन्दुओं को उतना नुकसान नहीं पहुँचा सकी जितना साजिशकर्ता PFI के सदस्यों का इरादा था। वह हिन्दुओं द्वारा दिखाए गए इस प्रतिरोध की वजह कपिल मिश्रा और परवेश वर्मा को मानता था। बताया जा रहा है कि सितंबर 2020 में केरल के मलप्पुरम की मंजरी नाम की जगह पर एक मीटिंग हुई थी। इस मीटिंग में PFI की हिट स्क्वाड का कमांडर कमाल केपी अपने सहयोगियों बदरुद्दीन और फ़िरोज़ खान के साथ मौजूद था।

तब सिद्दीक कप्पन ने इस सभा को सम्बोधित करते हुए कहा था कि जाटों और गुर्जरों को एकजुट कर के कपिल मिश्रा और परवेश वर्मा ने वो कर दिखाया जो दिल्ली पुलिस भी नहीं कर पाई। अंत में उसने PFI की हिट स्क्वायड को निर्देश दिया कि वो कपिल मिश्रा और परवेश वर्मां की हत्या कर दें। इस साजिश का खुलासा PFI के हिट स्क्वाड गैंग के कमांडर कमाल केपी से NIA की पूछताछ के बाद हुआ। उस पर साल 2020 में हाथरस में दलित महिला की मौत के बाद हाथरस में अशांति फैलाने का आरोप है।

केरल के मलप्पुरम निवासी कमाल को उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने 3 मार्च 2023 को गिरफ्तार किया था। तब से वह लखनऊ की जेल में बंद है। कमाल केपी PFI के हिट स्क्वायड के अन्य सदस्यों बदरुद्दीन और फ़िरोज़ खान का लीडर था। कमाल की तरह बदरुद्दीन और फ़िरोज़ को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। कमाल केपी पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) के टॉप 5 सदस्यों में से एक है। दावा यह भी किया गया है कि बदरुद्दीन और फ़िरोज़ खान सिद्दीक कप्पन के साथ दिल्ली भी आए थे। यहाँ ये तीनों एक साथ राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन (NCHRO) के ऑफिस में भी गए थे।

दिल्ली दंगों के महज कुछ ही दोनों बाद उत्तर प्रदेश में हाथरस की घटना हुई थी। तब सिद्दीक कप्पन एक कार से हाथरस जा रहा था। आरोप है कि इस कार में PFI की छात्र शाखा CFI (कैम्पस फ्रंट ऑफ़ इंडिया) के कुछ अन्य सदस्य भी सवार थे। वहीं बदरुद्दीन और फ़िरोज़ को एक दूसरी कार से कपिल मिश्रा और परवेश वर्मा को ठिकाने लगाने के टारगेट पर भेजा गया था। यह साजिश तब फेल हो गई जब 5 अक्टूबर 2020 को UP पुलिस ने हाथरस जाते समय कप्पन को गिरफ्तार कर लिया गया था।

कप्पन के पकड़े जाने की खबर सुन कर बदरुद्दीन और फिरोज खान डर गए। उन्होंने अपना प्लान कैंसिल कर दिया था। हाथरस की घटना के चार महीने बाद फरवरी 2021 में UP ATS ने बदरुद्दीन और फ़िरोज़ खान को गिरफ्तार कर लिया। उन पर आरोप है कि ये दोनों लखनऊ और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में विस्फोट करने वाले थे। दोनों के पास से बंदूकें और विस्फोटक भी बरामद हुए थे। पूछताछ में इन दोनों ने अपने लीडर के तौर पर कमाल केपी का नाम लिया था। आखिरकार 2 साल तक फरार रहने के बाद 4 मार्च 2023 को कमाल केपी को भी UP ATS ने दबोच लिया। उसे लखनऊ जेल में रखा गया जहाँ NIA ने उस से पूछताछ की। दावा किया जा रहा है कि इसी पूछताछ में कमाल केपी ने कपिल मिश्रा और परवेश वर्मा की हत्या की साजिश का खुलासा किया।

बताया यह भी जा रहा है कि फ़िरोज़ खान और बदरुद्दीन ने भी मजिस्ट्रेट को दिए बयान में यह कबूल किया है कि कमाल केपी की तरफ से उन्हें दोनों भाजपा नेताओं की हत्या के निर्देश दिए गए थे। इसी बयान में इन दोनों आरोपितों ने आगे बताया था कि सिद्दीकी कप्पन ने PFI के इस हिट दस्ते को भाजपा नेताओं की हत्या के लिए तैयार करने वाली मानसिक ट्रेनिंग दी थी। UP पुलिस की चार्जशीट में भी यह बताया गया है कि कप्पन प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) का सदस्य है।

कप्पन को 9 सितंबर 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने UAPA एक्ट के तहत जमानत दे दी थी। जमानत का आधार उसके मीडिया में काम करने को बनाया गया था। हालाँकि अपने खिलाफ चल रहे धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के एक अन्य मुकदमे की वजह से वह जेल में ही रहा था। इस केस में भी उसे फरवरी 2023 में लखनऊ की सत्र अदालत से जमानत मिल गई थी। इसके बाद लगभग 26 माह तक जेल में रहे कप्पन की रिहाई सम्भव हो पाई थी थी। हालाँकि फिरोज खान, कमाल केपी और अंशद बदरुद्दीन अभी भी लखनऊ जेल में बंद हैं।

बताते चलें कि 24 और 25 फरवरी 2020 को भारत की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बड़े पैमाने पर हिंदू विरोधी दंगे हुए थे। ये दंगे लम्बे समय से शाहीन बाग और अन्य क्षेत्रों में चरमपंथियों द्वारा CAA को ले कर फैलाई गई नफरत की उपज थे। इन दंगों में शाहदरा, मौजपुर, भजनपुरा, ब्रह्मपुरी और पूर्वोत्तर दिल्ली के अन्य हिस्सों सबसे अधिक प्रभावित हुए। इन दंगों में 53 लोगों की जान चली गई थी जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए। मृतकों और घायलों में दिल्ली पुलिस के स्टाफ भी शामिल हैं।

दिल्ली आकर अमित शाह से मिले राज ठाकरे, भतीजे को ‘भाव’ मिलने पर चाचा का मोदी कैबिनेट से इस्तीफा: झारखंड में BJP के साथ सीता

लोकसभा चुनाव से पहले बिहार से लेकर झारखंड और महाराष्ट्र तक राजनीतिक सरगर्मियाँ बढ़ रही हैं। बिहार में हाजीपुर के सांसद पशुपति पारस ने खुद को तवज्जो न मिलने पर केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया, तो झारखंड में राज्य की सत्ताधारी पार्टी जेएमएम की महासचिव और मौजूदा विधायक सीता सोरेन ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया है। वहीं, महाराष्ट्र में राजनीतिक बदलाव भी दिख रहा है। महाराष्ट्र की पार्टी मनसे के प्रमुख राज ठाकरे दिल्ली पहुँचे और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की है। माना जा रहा है कि वो एनडीए में शामिल हो सकते हैं और उनकी पार्टी मनसे को लोकसभा चुनाव में 2 सीटें मिल सकती हैं।

महाराष्ट्र में नए सियासी समीकरण!

लोकसभा चुनाव 2024 से पहले महाराष्ट्र में नए सिरे से सियासी समीकरण बैठते दिख रहे हैं। मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव विनोद तावड़े से मुलाकात के बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की है। माना जा रहा है कि मनसे को एनडीए में शामिल कराया जाएगा और उसे 2 सीटें मिल सकती हैं। राज ठाकरे को उद्धव ठाकरे का कट्टर प्रतिद्वंदी समझा जाता है और उद्धव ठाकरे की वजह से उन्होंने शिवसेना छोड़कर अपनी पार्टी बनाई थी। वो महाराष्ट्र में भले ही बड़ी राजनीतिक ताकत नहीं बन पाए, लेकिन हमेशा एक गंभीर नेता माने गए। उनके एनडीए में शामिल होने से मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में एनडीए को काफी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

सुप्रिया सुले ने सम्मान का दिया वास्ता

राज ठाकरे की दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात और उनकी एनडीए में शामिल होने की चर्चाओं के बीच एनसीपी(शरद गुट) की नेता सुप्रिया सुले ने उन्हें सम्मान का वास्ता दिया है। सुप्रिया सुले ने कहा कि राज ठाकरे अगर इंडी अलायंस में आते हैं, तो उन्हें उचित सम्मान मिलेगा। सुले ने कहा कि राज ठाकरे को एमवीए (महा विकास आघाड़ी) गठबंधन में शामिल होना चाहिए न कि एनडीए में।

पशुपति पारस ने छोड़ा केंद्रीय मंत्रिमंडल, अगले कदम पर सस्पेंस

बिहार में एनडीए के सीट बंटवारे में खुद को जगह न देने से नाराज पशुपति पारस ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने दिल्ली में अपने इस्तीफे का ऐलान किया और कहा कि उनके साथ नाइंसाफी हुई। पारस ने कहा, “मैं पूरी ईमानदारी और लगन के साथ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सिपाही के रूप में मंत्रीपद संभालते हुए काम कर रहा था। पिछले हफ्ते मैंने बिहार में प्रेस को बताया था कि सीटों को लेकर मुझसे किसी की बात नहीं हुई है। मैं एनडीए की ओर से विधिवत घोषणा का इंतजार कर रहा था। सोमवार को जब एनडीए ने सीट बंटवारे की घोषणा की तो मुझे एहसास हुआ कि मेरे साथ व्यक्तिगत रूप से और मेरी पार्टी के साथ भी नाइंसाफी हुई है। इसलिए, मैंने केंद्रीय मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया है।” हालाँकि उन्होंने पीएम मोदी तारीफ की।

झारखंड में राजनीतिक घमासान, सीता सोरेन ने पार्टी के साथ परिवार भी छोड़ा

झारखंड में शिबू सोरेन की बड़ी बहू, सत्ताधारी पार्टी झामुमो की महासचिव और विधायक सीता सोरेन ने पार्टी के साथ ही परिवार भी छोड़ दिया। उन्होंने इस संबंध में एक चिट्ठी लिखी है और इसे पार्टी अध्यक्ष यानी अपने ससुर शिबू सोरेन को भेजी है। सीता ने कहा कि मेरे और मेरे परिवार के खिलाफ गहरी साजिश रची जा रही है। सीता सोरेन ने पत्र में लिखा है कि मुझे हाल ही में यह ज्ञात हुआ है कि मेरे और मेरे परिवार के खिलाफ भी गहरी साजिश रची जा रही है। मैं अत्यंत दुखी हूं. मैंने यह दृढ़ निश्चय किया है कि मुझे झारखंड मुक्ति मोर्चा और इस परिवार को छोड़ना होगा। इसके बाद उन्होंने बीजेपी ज्वॉइन कर लिया।

सीता सोरेन ने कहा कि मैंने झामुमो के लिए 14 साल तक काम किया, लेकिन मुझे सम्मान कभी नहीं मिला। ऐसे में मैंने आज बीजेपी ज्वॉइन कर लिया है। बता दें कि हेमंत सोरेन के जेल जाने के बाद सीता सोरेन मुख्यमंत्री पद के सबसे करीब थी, लेकिन उन्हें पद नहीं दिया गया। यही नहीं, वो हेमंत की पत्नी कल्पना सोरेन के बढ़ते कदम से भी परेशान बताई जा रही हैं। हालाँकि अब उन्होंने जेएमएम और सोरेन परिवार से नाता तोड़ लिया है।

‘3 दिन से अन्न का दाना तक नहीं खाया’ : मीडिया के सामने भावुक हुए एल्विश यादव के माता-पिता, बोले- हजार बार भी जन्म लें तो ऐसा बेटा चाहिए

यूट्यूबर एल्विश यादव के गिरफ्तार होने के बाद उनके माता-पिता अपने बेटे के लिए परेशान हैं। मीडिया में ऐसी खबरें आने के बाद कि एल्विश ने अपना गुनाह स्वीकार लिया, उन्होंने जेल में जाकर एल्विश से मुलाकात की। उनसे पूछा कि खबरों में जो बताया जा रहा है उसमें कितना सच है। इसके बाद वो मीडिया संस्थानों के पास ये अपील लेकर आए कि उनके बेटे के बारे में गलत खबर न चलाई जाए। इस दौरान उनकी मीडिया चैनलों से क्या बात हुई आइए बताते हैं।

आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, एल्विश यादव के माता सुषमा यादव और पिता राम अवतार यादव ने बताया कि वो लोग अपने बेटे से मिलकर आए हैं और उनके बेटे ने कोई गुनाह नहीं कबूला है। ऐसी खबर न चलाई जाए। उन्होंने कहा कि उनका बेटा बिलकुल निर्दोष है और साफ सुथरा है। उसने कुछ गलत नहीं किया।

उनसे जब एल्विश यादव के लग्जरी लाइफस्टाइल के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा अगर उनका बेटा लग्जरी लाइफस्टाइल जीता है तो इसका मतलब ये नहीं कि उसपर संदेह किया जाए। एल्विश के पिता ने बताया कि उनके बेटे के पास कोई लग्जरी गाड़ी नहीं है। दो गाड़ियाँ हैं- फॉर्च्यूनर और वैगनआर। उन्होंने बताया कि एल्विश की वीडियो में जो दिखती हैं वो लोन पर ले रखी हैं। इसके अलावा कुछ गाड़ियाँ वो दोस्तों से लेता है।

उन्होंने बताया कि जो प्लॉट उन्हें मिला है वो उनकी जमीन के बदले है। इसके अलावा ये भी बोले कि उनका बेटा किसी भी रेव पार्टी में नहीं जाता था। उसके नाम का गलत फायदा उठाया जा रहा है। वहीं माँ ने कहा कि कोई कुछ भी कहे वो लोग जानते हैं कि उनके बेटे ने गलत काम नहीं किया, जो वीडियो चलाई जा रही है वो अलग-अलग लोकेशन की है। उनका बच्चा ऐसी लोकेशन में नहीं गया। चूँकि उनके बच्चे का नाम है इसलिए एनजीओ वाले उन्हें जानबूझकर फँसा रहे हैं।

पिता ने एल्विश को बेकसूर बताते हुए कहा- “मैं चाहता हूँ हमारी बात को सुना जाए, हमें भी हक है। मैं हजार जन्म भी लूँ तब भी मुझे ऐसा ही बेटा चाहिए। मैं फक्र करता हूँ उसपर। वो बिलकुल निर्दोष है। जब से वो बिग बॉस जीतकर निकला है लोग उसके पीछे पड़ गए। हम कल मिलकर आए, उसने बताया कि उसने कोई गुनाह नहीं कबूला है। पता नहीं उसे क्यों फँसाया जा रहा है।”

माता-पिता ने जानकारी दी कि उनका बेटा जैकेट बेचकर, यूट्यूब वीडियोज आदि बनाकर पैसे कमाता है। हालाँकि जब उनसे एल्विश की यूट्यूब इनकम आदि पूछी गई तो उन्होंने कहा कि एल्विश आएगा तब वो खुद इसका जवाब देगा।

इसी तरह एबीपी से बात करते हुए, एल्विश यादव के माता-पिता ने मेनका गाँधी से कहा कि वो उस संस्था की अध्यक्ष हैं जिसने एल्विश पर केस किया है। अगर एल्विश की गिरफ्तारी के बाद उन्हें खुशी मिल गई हो तो वो उनके बेटे पर थोड़ी सी दया दिखाएँ। अपनी बात कहते हुए एल्विश के माता-पिता कई बार भावुक हुए। उन्होंने कहा कि तीन दिन से उन दोनों के पेट में अन्न का दाना तक नहीं गया। पता नहीं लोग क्यों उनके बच्चे को परेशान कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि चूँकि उनका बेटा कम उम्र में इतना मशहूर हो गया इसलिए लोगों को उससे जलन होने लगी। पिता बोले कि वो खुद एक टीचर हैं। जब वो दूसरों के बच्चों को पढ़ाते हैं तो क्या अपने बच्चे को नहीं पढ़ाया होगा। उन्होंने कहा- “मुझे अपनी परवरिश पर गर्व है और मैं हर जन्म में उसका पिता बनना चाहूँगा।”

नाले से मिली थी अनु की अर्धनग्न लाश, हत्या में मुजीब रहमान गिरफ्तार: पहले से दर्ज हैं 50+ केस, बुजुर्ग महिला से भी कर चुका है रेप

केरल के कोझिकोड में 11 मार्च 2024 को अनु नाम की एक 26 वर्षीया महिला की हत्या कर दी गई थी। मृतका का अर्धनग्न शव एक नाले से मिला था। इस मामले में पुलिस ने मुजीब रहमान को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि 48 वर्षीय मुजीब ने अनु को लिफ्ट देने के बहाने गाडी में बिठाया था और रास्ते में लूटपाट कर उसकी हत्या कर दी। पुलिस की जाँच के दौरान पता चला है कि मुजीब रहमान का बहुत बड़ा और पुराना आपरधिक रिकॉर्ड पहले से भी है। इनमें रेप और लूट जैसी वारदातें शामिल हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला कोझिकोड के वलूर क्षेत्र की है। यह इलाका पेरंबरा के पास पड़ता है। 11 मार्च को मुजीब ने अस्पताल से घर जाते हुए अनु को देखा। वह चोरी की बाइक से था और हेलमेट पहन रखा था। मुजीब ने रास्ते में अनु को लिफ्ट का ऑफर किया। पीड़िता को लगा कि मुजीब उसका पड़ोसी है और वो बाइक पर बैठ गई। रास्ते में एक सुनसान नाले के पास मुजीब ने अनु को धक्का दे कर गिरा दिया। फिर उसका सिर जमीन पर पटक हत्या कर दी।

अनु की हत्या के बाद मुजीब ने उसके सारे गहने उतार लिए। इसके बाद उसका अर्धनग्न शरीर नाले में फेंक फरार हो गया। घटना के अगले दिन 12 फरवरी को अनु का शव मिलने पर पुलिस ने जाँच पड़ताल शुरू की। जाँच के दौरान पुलिस को घटनास्थल पर CCTV फुटेज में एक लाल रंग की संदिग्ध बाइक दिखी। पुलिस ने इसी बाइक के आधार पर जाँच शुरू की और आखिरकार मुजीब रहमान को दबोच लिया। पूछताछ में उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया है।

जब मुजीब का आपराधिक इतिहास खँगाला गया तो उस पर 50 से अधिक क्रिमिनल केस पाए गए। इन अपराधों में बलात्कार और लूट जैसे केस भी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि मुजीब ने महज 20 साल की उम्र में पहली हत्या की थी। तब उसने एक ज्वैलरी शॉप के मालिक को मार डाला था। साल 2020 में मुजीब ने केरल के ही मुक्काम के पास एक बुजुर्ग महिला से रेप किया था। कोंडोट्टी में जन्मे मुजीब रहमान के खिलाफ अकेले इसी जगह पर 13 केस दर्ज हैं। मुजीब के यौन उत्पीड़न की शिकार बुजुर्ग महिला ने इतने केस होने के बावजूद उसके जेल से आजाद होने पर हैरानी जताई है। महिला का कहना है कि अगर मुजीब को उसके किए की सजा मिली होती तो आज अनु जिन्दा होती।

‘प्रियंका गाँधी ने मेरे पति से कहा- अदिति सिंह के चरित्र को बदनाम करो, तब दूँगी टिकट’: रायबरेली की विधायक का खुलासा, सुनाई राहुल गाँधी से मुलाकात की कहानी

रायबरेली से BJP विधायक अदिति सिंह ने कॉन्ग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गाँधी को लेकर बड़ा दावा किया है। असल में अदिति सिंह और भाजपा के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने ANI की स्मिता प्रकाश के साथ एक पॉडकास्ट शूट किया। इस पॉडकास्ट में अदिति सिंह ने ये भी बताया कि कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं में गाँधी परिवार भी ज़्यादा अकड़ है। अदिति सिंह ने ये भी बताया कि जब वो 2017 में पहली बार विधायक बनी थीं तो संयोग से राहुल गाँधी से भी उनकी मुलाकात हुई थी।

अदिति सिंह ने बताया कि उस दौरान राहुल गाँधी ऐसे दिख रहे थे जैसे उन्हें किसी चीज की खबर न हो और कोई जानकारी न हो। बकौल अदिति सिंह, राहुल गाँधी उस दौरान उनसे पूछा कि उत्तर प्रदेश में हमारे पास कितने विधायक हैं? अदिति सिंह ने जवाब दिया – सात। बकौल महिला विधायक, इसके बाद राहुल गाँधी ने अपना सिर ऊपर की तरफ उठाया और जोर से हँसने लगे। अदिति सिंह उस समय चौंक उठी थीं। अदिति सिंह ने इस दौरान ये खुलासा भी किया कि अंगद सिंह से उनका तलाक हो चुका है।

बता दें कि अंगद सिंह पंजाब के नवाँशहर (शहीद भगत सिंह नगर) से विधायक थे। वो भी 2017 में ही पहली बार MLA चुने गए थे। वो तब कॉन्ग्रेस में हुआ करते थे। अदिति सिंह ने बताया कि टिकट बँटवारे के दौरान प्रियंका गाँधी ने उनके तत्कालीन पति के सामने शर्त रखी थी कि वो अपनी पत्नी अदिति सिंह के चरित्र पर लाँछन लगाएँ, तभी उन्हें टिकट दिया जाएगा। बता दें कि 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में वो निर्दलीय उतरे थे और उनकी हार हुई थी। अदिति सिंह का परिवार कॉन्ग्रेसी रहा है, लेकिन उन्होंने 2021 में बगावत के बाद भाजपा का दामन थामा था।

अदिति सिंह का कहना है कि उनके पूर्व पति को उनके खिलाफ अपमानजनक बयान देने के लिए कहा गया। अदिति और अंगद, दोनों ही बड़े राजनीतिक घरानों से आते हैं। उनके पिता अखिलेश कुमार सिंह 24 वर्षों तक विधायक बने, वो लगातार 5 बार चुने गए। उनकी बेटी दूसरी बार विधायक हैं। वहीं अंगद सिंह के दादा दिलबाग सिंह 6 बार नवाँशहर के विधायक रहे। अंगद के पिता प्रकाश सिंह और माँ गरिकबाल कौर भी एक-एक बार विधायक रह चुकी हैं।

2022 में अंगद सिंह ने भी बताया था कि उन पर उनकी पत्नी के खिलाफ जाने का दबाव है। निर्दलीय नामांकन दर्ज कराते समय उन्होंने बताया था कि अदिति सिंह के साथ उनकी शादी को एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया गया, ताकि उन्हें टिकट से वंचित किया जा सके। अंगद ने बताया कि उन्हें उन्हें ऐसा महसूस कराया गया जैसे उन्होंने कोई अपराध कर दिया हो। उन्होंने बताया था कि उन पर अदिति सिंह के खिलाफ सोशल मीडिया में पोस्ट लिखने का दबाव बनाया गया, जबकि तब वो 15 महीने से अलग रह रहे थे।

दलित की हत्या, कहीं धारदार हथियार से हमला, किसी की दुकान फूँकी… लोकसभा चुनाव से पहले बंगाल में फिर TMC गुंडों के टारगेट पर BJP वर्कर

पश्चिम बंगाल में पिछले कुछ दिनों में बीजेपी कार्यकर्ताओं पर हमलों की संख्या बढ़ गई है। लोकसभा चुनाव 2024 की घोषणा होते ही राजनीतिक हिंसा की नई लहर चल पड़ी है, जिसमें टीएमसी के कार्यकर्ता बीजेपी कार्यकर्ताओं, नेताओं पर जानलेवा हमले कर रहे हैं। बीजेपी कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने की प्रवृत्ति साल 2021 के विधानसभा चुनावों के दौरान हुई भीषण राजनीतिक हिंसा के दौर को याद दिला रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में बीजेपी कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने वाली खबरें चौंकाने वाली हैं।

दिनाजपुर में बीजेपी कार्यकर्ता पर धारदार हथियारों से हमला

बीते शनिवार (16 मार्च 2024) को दिनाजपुर में जॉयदेब दास के बीजेपी कार्यकर्ता पर टीएमसी कार्यकर्ताओं ने हमला किया। टीएमसी कार्यकर्ताओं ने न सिर्फ दास की बेरहमी से पिटाई की, बल्कि धारदार हथियारों से बुरी तरह घायल कर दिया गया। ये वारदात दक्षिण दिनाजपुर जिले के गंगारामपुर उपखंड के कुशमंडी की है।

ईटीवी भारत की रिपोर्ट के मुताबिक, यह हमला स्थानीय टीएमसी नेता तरुण पाल और उनके साथियों ने किया था।

जॉयदेब दास तभी से टीएमसी के गुंडों के निशाने पर थे, जब साल 2023 में पंचायत चुनाव के लिए उनकी भाभी मिताली चुनावी मैदान में उतरी। जॉयदेब दास को गंभीर हालत में गंगारामपुर सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस हमले में दास के पिता भी घायल हो गए। बीजेपी के पश्चिम बंगाल के अध्यक्ष सुकांत मजूमदार पीड़ित भाजपा कार्यकर्ता से मिलने अस्पताल पहुँचे। मजूमदार ने दावा किया कि टीएमसी के नेता तरुण पाल और उसके गुंडों ने दास की पत्नी के साथ भी छेड़छाड़ की।

टीएमसी कार्यकर्ताओं ने ये हमला चुनाव आयोग द्वारा लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा के तुरंत बाद की। इस घटना के बाद मजूमदार अस्पताल पहुँचे और घायलों से मुलाकात की। उन्होंने रविवार (17 मार्च) को ट्वीट में इस बात की जानकारी दी। सुकांत मजूमदार ने लिखा, “टीएमसी के गुंडे राजनीतिक विरोधियों पर हमले कर रहे हैं। मैंने कल रात (शनिवार रात) गंगारामपुर सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में कुशमंडी विधानसभा के भाजपा कार्यकर्ता से मुलाकात की, जिसपर टीएमसी के गुंडों ने हमला किया था।”

दक्षिण 24 परगना जिले में दो हमले

टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने कई जगहों पर बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हमले बोले। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अमित मालवीय ने बताया कि पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बसंती ग्राम पंचायत इलाके में टीएमसी के गुंडों ने सुप्रभा मजूमदार नाम की महिला बीजेपी कार्यकर्ता के साथ मारपीट की। मालवीय ने कहा कि 75 वर्षीय महिला और 17 वर्षीय लड़की पर भी उन्हीं गुंडों ने हमला किया।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि बुरखाली ग्राम पंचायत क्षेत्र के बलिखाल में भाजपा बूथ अध्यक्ष और पार्टी कार्यकर्ताओं पर फावड़े और लोहे की छड़ों से हमला किया गया। अमित मालवीय ने एक ट्वीट में कहा, “हम उनके (भाजपा के पीड़ित कार्यकर्ताओं के) साथ खड़े हैं और उन्हें सभी कानूनी और चिकित्सा सहायता दी जा रही है।”

बीजेपी कार्यकर्ता की दुकान को फूँका

टीएमसी के गुंडों ने रविवार (17 मार्च 2024) की रात करीब 2 बजे रीना ठाकुर नाम की एक गरीब बीजेपी कार्यकर्ता की दुकान में आग लगा दी। यह घटना पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्धमान जिले के पडबेश्वर में हुई। आनंदबाजार पत्रिका की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़िता रीना ठाकुर पडबेश्वर में भाजपा के महिला मोर्चा मंडल की महासचिव हैं। वह पहले तृणमूल कांग्रेस की सदस्य थीं लेकिन करीब 6 महीने पहले उन्होंने टीएमसी छोड़ कर बीजेपी का दामन थाम लिया था। तब से उन्हें टीएमसी के गुंडे परेशान कर रहे हैं और डरा-धमका रहे हैं। उनके ऊपर हमला भी किया गया, ताकि वो बीजेपी छोड़कर फिर से टीएमसी में शामिल हो जाएँ।

चुनाव आयोग द्वारा लोकसभा चुनाव की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद उनकी दुकान को आग के हवाले कर दिया गया। आनंद बाजार पत्रिका से बात करते हुए पीड़ित ने बताया, ”रात करीब 2 बजे मेरे पड़ोसी तुलसी बाउरी ने मुझे फोन किया और बताया कि मेरी दुकान में आग लग गई है।” उन्होंने कहा, “मेरी दुकान पूरी तरह से खाक हो चुकी है। मैंने पुलिस को भी सूचना दी, लेकिन अब मेरी दुकान में कुछ नहीं बचा।”

रीना ठाकुर ने बताया कि पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बावजूद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गयी है। उन्होंने एक स्थानीय टीएमसी नेता पर आरोप लगाया है। सीना ठाकुर ने टीएमसी के स्थानीय नेता संतोष पर आरोप लगाते हुए कहा, “जब से मैं बीजेपी में शामिल हुई हूँ, तब से टीएमसी के गुंडे मुझे प्रताड़ित कर रहे हैं। संतोष ने मुझे कई बार जान से मारने की धमकी दी है। एक माह पहले उसके लोगों ने मुझे पीटा था। मैंने तब भी पुलिस में शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। अब उन्होंने मेरी दुकान ही फूँक दी है।”

ये हमले 2021 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान सत्तारूढ़ टीएमसी सरकार द्वारा भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ की गई चुनाव बाद हिंसा और 2023 पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव के दौरान चुनाव पूर्व हिंसा की याद दिलाते हैं।

दलित बीजेपी नेता की हत्या

सोमवार (18 मार्च 2024) को भाजयुमो बोलपुर के उपाध्यक्ष कृष्णु सिन्हा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी दी कि एक दलित भाजपा नेता की कथित तौर पर टीएमसी के गुंडों ने हत्या कर दी है। पीड़ित की पहचान तन्मय दास के रूप में हुई, जो नानूर में भाजपा एससी मोर्चा मंडल का अध्यक्ष था। सिन्हा ने ट्वीट किया, ”लोकसभा चुनाव से पहले टीएमसी के गुंडों द्वारा एक और हत्या। बैठक के बाद घर जाते समय नानूर के भाजपा एससी मोर्चा मंडल अध्यक्ष तन्मय दास की पूरी प्लानिंग के साथ हत्या कर दी गई। “

उन्होंने आगे कहा, “जिला अध्यक्ष सहित हम सभी लोग सही तरह से पोस्टमार्टम की माँग को लेकर शांतिनिकेतन पुलिस स्टेशन भी गए।”

साल 2021 में पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हिंसा

बता दें कि अपने राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए हिंसा का इस्तेमाल टीएमसी की खासियत बन चुकी है। जब से पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी की सरकार आई है, तब से विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न और तेज हो गया है। विधानसभा चुनाव में टीएमसी पार्टी की जीत के बाद हुई चुनाव बाद हिंसा में एक दर्जन से अधिक भाजपा कार्यकर्ताओं की जान चली गई। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल में महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया, उन पर हमला किया गया और कुछ मामलों में तो उनकी हत्या भी कर दी गई, सिर्फ इसलिए क्योंकि वे एक अलग राजनीतिक विचारधारा से जुड़े थे।

साल 2021 में एक लड़की का उसके पिता के सामने ही टीएमसी के गुंडों ने बलात्कार किया था। पीड़ित ने ऑपइंडिया के साथ अपनी दर्दनाक आपबीती भी साझा की थी। उन्होंने बताया कि कैसे टीएमसी पार्टी से जुड़े अपराधियों ने उन पर हमला किया और यौन उत्पीड़न किया। विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद टीएमसी के गुंडों ने जमकर उत्पात मचाया, अपने विरोधियों के घरों पर हमला किया और लूटपाट की। ऐसे ही एक हमले में टीएमसी के गुंडों ने बीजेपी कार्यकर्ता अविजीत सरकार की पीट-पीटकर हत्या कर दी।

सुप्रीम कोर्ट ने शाही ईदगाह कमेटी को दिया झटका, कहा- पहले हाई कोर्ट जाओ: श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़ी याचिकाओं की एकसाथ सुनवाई का कर रहा था विरोध

मथुरा के विवादित शाही ईदगाह और श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले में आज सुप्रीम कोर्ट ने शाही ईदगाह कमिटी की याचिका खारिज कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने कमिटी को कहा है कि पहले वह इलाहाबाद हाई कोर्ट जाए। यह मामला इस विषय की याचिकाओं को एक साथ किए जाने से जुड़ा हुआ था।

सुप्रीम कोर्ट में शाही ईदगाह कमिटी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस निर्णय पर रोक लगाने की माँग की थी जिसमें इस विषय से जुड़ी सभी याचिकाओं के एक साथ सुनवाई का आदेश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में ईदगाह कमिटी की याचिका खारिज कर दी।

शाही ईदगाह कमिटी ने सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया कि जिन याचिकाओं को एक साथ किया गया है, उनमें से कई के दावे एक-दूसरे के विरोधी हैं। इसके अलावा उन्होंने दावा किया कि इस सम्बन्ध में निर्णय जल्दबाजी में किया गया था। हालाँकि, कोर्ट ने उनकी दलीलें नहीं मानी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले पर पुर्नविचार सम्बन्धी याचिका इलाहाबाद हाई कोर्ट में भी दाखिल की गई है, ऐसे में पहले वहाँ निर्णय हो जाना चाहिए। वहाँ निर्णय हो जाने के बाद ही सुप्रीम कोर्ट आया जाए। इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने मामले की आगे सुनवाई से इंकार कर दिया।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले में हिन्दू पक्ष ने इलाहाबाद हाई कोर्ट से माँग की थी कि इस मामले में दायर की गईं 15 अलग-अलग याचिकाओं को एक साथ मिला लिया जाए और तब सुनवाई की जाए। हिन्दू पक्ष का कहना था कि इससे मामले की सुनवाई में तेजी आएगी और साथ ही इसके पक्षकारों को भी आसानी होगी। इसी सम्बन्ध में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 11 जनवरी, 2024 को एक आदेश में सारी याचिकाओं के एक साथ किए जाने को लेकर आदेश दिया था।

इस मामले में हिन्दू पक्ष की तरफ से पेश हुए वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने शाही ईदगाह मस्जिद को कहा कि वह अपनी बात इलाहाबाद हाई कोर्ट के सामने रखें। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 15 मुकदमों को एक साथ सुनने का आदेश दिया था। इसी आदेश के खिलाफ शाही ईदगाह कमिटी सुप्रीम कोर्ट आई थी। मुझे यह नहीं समझ आया कि इस आदेश में क्या गलत था जिसके कारण वह सुप्रीम कोर्ट आए थे।”

उन्होंने आगे बताया, “इससे एक दिन मुकदमे लगते हैं और सभी पक्षकारों को आसानी होती है। जो लोग यह चाहते हैं कि मुकदमे में देरी हो और यह मामला खींचे वह यहाँ यह याचिका लेकर आए थे। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट जाने को कहा है।”

हिन्दू पक्ष का कहना है कि मथुरा में स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर के बराबर में बनी शाही ईदगाह वाला ढाँचा जबरन वही बना दिया गया जहाँ भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। इस जगह पर कब्जा करके ढाँचा बनाया गया है। यहाँ अभी भी कई ऐसे सबूत हैं जो कि यह सिद्ध करते हैं कि यहाँ पहले एक मंदिर हुआ करता था।

हिन्दू पक्ष का दावा है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म राजा कंस के कारागार में हुआ था और यह जन्मस्थान शाही ईदगाह के वर्तमान ढाँचे के ठीक नीचे है। सन् 1670 में मुगल आक्रांता औरंगज़ेब ने मथुरा पर हमला कर दिया था और केशवदेव मंदिर को ध्वस्त करके उसके ऊपर शाही ईदगाह ढाँचा बनवा दिया था और इसे मस्जिद कहने लगे। मथुरा का मुद्दा नया नहीं है।

अदालत में इस मामले में याचिकाएँ दाखिल की गई हैं और उन पर सुनवाई होती रही है। 13.37 एकड़ जमीन पर दावा करते हुए हिन्दू यहाँ से शाही ईदगाह ढाँचे को हटाने की माँग करते रहे हैं। 1935 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वाराणसी के हिन्दू राजा को भूमि के अधिकार सौंपे थे।

ऑडिटर रमेश को याद कर तमिलनाडु में भावुक हुए PM मोदी, आतंकियों ने घर में घुस कर BJP नेता को मार डाला था: 1 दशक तक न्याय के लिए लड़ती रहीं माँ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (19 मार्च, 2024) को तमिलनाडु के सेलम को एक जनसभा को संबोधित करते हुए भाजपा नेता ऑडिटर रमेश की हत्या का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सेलम में उनकी आत्मीयता KN लक्ष्मणन से भी थी, जो राज्य में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे। पीएम मोदी ने याद किया कि कैसे उन्होंने तमिलनाडु में भाजपा के विस्तार में बड़ी भूमिका निभाई, आपातकाल के दौरान संघर्ष किया, कई विद्यालय शुरू करवाए। इसके बाद पीएम मोदी अचानक से भावुक हो उठे।

उन्होंने कहा कि अब जब वो सेलम आए हैं तो ऑडिटर रमेश की याद आनी भी स्वाभाविक है। इसके बाद वो कुछ देर तक भावुक हो गए और कुछ बोल नहीं सके। प्रधानमंत्री ने कहा, “दुर्भाग्य से सेलम का मेरा वो रमेश हमारे बीच नहीं है। पार्टी के लिए रमेश दिन-रात काम करने वाले हमारे साथी थे, एक अच्छे प्रवक्ता थे। लेकिन, उनकी हत्या कर दी गई। मैं उन्हें आज उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।” इसके बाद सभी नेताओं एवं वहाँ आई जनता ने खड़े होकर ऑडिटर रमेश को श्रद्धांजलि अर्पित की।

याद दिला दें कि सेलम में ही जुलाई 2013 में ऑडिटर रमेश की हत्या कर दी गई थी। वो राज्य में तब पार्टी के स्टेट जनरल सेक्रेटरी थे। 54 वर्षीय V रमेश की हत्या मरावानेरी स्थित उनके घर में घुस कर की गई थी। वो दिन भर आम लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं से मिल कर रात 10 बजे घर पहुँचे थे, जहाँ हत्यारे पहले से छिपे हुए थे। उनके गर्दन पर वार किया गया था। मौके पर ही उनकी मौत हो गई थी। उससे पहले ‘हिन्दू मुन्नानी’ संगठन के वेल्लईअप्पन की हत्या हुई थी।

तब हिन्दू कार्यकर्ताओं को सुरक्षा देने की माँग भी की गई थी। 1994 में ‘हिन्दू मुन्नानी’ के प्रदेश अध्यक्ष राजगोपालन की हत्या हुई थी। CB-CID ने इस मामले में बिलाल मलिक और पुलिस फखरुद्दीन को गिरफ्तार किया था। ये दोनों 2011 में तिरुमंगलम (मदुरै) में हुए पाइप बम ब्लास्ट में भी शामिल थे। इन दोनों के अलावा अबू बकर सिद्दीकी और पन्ना इस्माइल भी इस बम धमाके में शामिल थे। इन आतंकियों का नाम वेल्लईअप्पन की हत्या और अप्रैल 2013 में बेंगलुरु स्थित भाजपा दफ्तर में हुए बम ब्लास्ट में भी आया था।

ऑडिटर रमेश 1978 से ही RSS से जुड़े हुए थे। उनकी माँ ने उनकी हत्या के बाद न्याय की लड़ाई लड़ी। उनकी माँ ने बताया था कि बम धमाकों के बाद कई हिन्दू कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया गया, जिनमें उनका बेटा भी था। 2014 में चार्जशीट दायर होने के बावजूद ये केस खिंचता रहा, जिस पर 2023 में उन्होंने नाराज़गी भी जताई थी। मद्रास हायकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के रवैया पर नाराज़गी जताई थी और केस को जल्द खत्म करने के लिए कहा था।

पीएम मोदी ने सेलम की रैली में राहुल गाँधी द्वारा शक्ति से लड़ने वाला बयान दिए जाने पर फिर से निशाना साधा। उन्होंने कहा कि हमारे शास्त्र साक्षी हैं कि विनाश उनका होता है, जो शक्ति को खत्म करने का विचार रखते हैं। पीएम मोदी ने ऐलान किया कि ऐसे खतरनाक विचारों को हराने की शुरुआत 19 अप्रैल को सबसे पहले तमिलनाडु करेगा। उन्होंने कहा कि INDI एलायंस वाले लोग बार-बार, जानबूझकर हिंदू धर्म का अपमान करते हैं, हिंदू धर्म के खिलाफ इनका हर बयान बहुत सोचा समझा हुआ होता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी और धर्म के खिलाफ इनकी जुबान से एक शब्द नहीं निकलता, लेकिन हिंदू धर्म को गाली देने में ये एक सेकंड नहीं लगाते। उन्होंने कहा, “मोदी, देश की नारीशक्ति की हर परेशानी के आगे ढाल बनकर खड़ा है। महिलाओं को धुआँ मुक्त जीवन देने के लिए हमने उज्ज्वला LPG गैस कनेक्शन दिए, हमने फ्री मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए आयुष्मान योजना शुरू की। इन सभी योजनाओं के केंद्र में नारीशक्ति ही है।”

‘मेरे साथ दोगला व्यवहार हुआ’: महेश भट्ट का ‘कैरेक्टर’ एक्टर रणवीर शौरी ने बताया, कहा- जो सुशांत सिंह राजपूत के साथ हुआ वो बॉलीवुड का सच

बॉलीवुड अभिनेता रणवीर शौरी हाल में स्मिता प्रकाश के पॉडकॉस्ट में नजर आए। इस दौरान उन्होंने बॉलीवुड फिल्मों से लेकर बॉलीवुड में राजनीति तक के मुद्दे पर चर्चा की और इसी दौरान उन्होंने एक्टर सुशांत सिंह राजपूत को लेकर भी बात की। रणवीर शौरी ने सुशांत का मुद्दा छिड़ने पर बताया कि उन्हें भी भट्ट परिवार द्वारा मैन्युपुलेट किया गया था। इंटरव्यू में 55 मिनट के बाद इस मुद्दे पर चर्चा देख सकते हैं।

रणवीर शौरी ने कहा, “मेरे मन में मिस्टर भट्ट (महेश भट्ट) के लिए बहुत सम्मान था, लेकिन जब तक उनकी बेटी के साथ वह बवाल नहीं हुआ था, तब तक। जब मैं उनकी बेटी (पूजा भट्ट) को डेट कर रहा था, तो मैंने देखा कि वास्तव में उनके प्रति मेरे मन में जो भी सम्मान था, उसका इस्तेमाल वह मुझे बरगलाने के लिए कर रहे थे। मेरे साथ बहुत ही दोगला व्यवहार किया जा रहा था।”

उन्होंने सुशांत के बारे में बात करते हुए कहा कि सुशांत के साथ जो भी हुआ उसके बाद उन्होंने इस पर बोलने की ठानी। वह बताते हैं कि सुशांत सिंह के साथ जो हुआ वो इंडस्ट्री का सच है। फिल्म इंडस्ट्री में खूब गुटबाजी होती है और ऑफ द रिकॉर्ड हर कोई इस बात को स्वीकार करता है।

उन्होंने कहा, “यह इंडस्ट्री में खूब होता है…किसी के खिलाफ गैंग बनाना, उन्हें साइडलाइन कर देना, किसी और का सहारा लेकर उसके ऊपर खड़े हो जाना, किसी के करियर को बर्बाद करना। यह होता है। यह सच है। ऐसा राजनीति, कॉरपोरेट और मीडिया में भी होता है, लेकिन यह ग्लैमरस नहीं है।”

इस दौरान शौरी ने बताया कि वो और सुंशांत सिंह राजपूत एक दूसरे के दोस्त थे। दोनों ने एक साथ ‘सोनचिरैया’ में काम किया था। फिल्म शूटिंग के दौरान दोनों का बॉन्ड फिजिक्स के कारण डेवलप हुआ। दोनों को फिजिक्स पसंद थी और दोनों इस पर काफी बात करते थे। शौरी ने यह भी बताया कि जब वो लोग शूटिंग पर थे उस समय चंद्र ग्रहण होने वाला था। उसे देखने के लिए सुशांत ने मुंबई से अपना टेलिस्कोप मंगवाया था।

नाम बदल हिंदू लड़की को फँसाया, रेप-कई बार गर्भपात: असम पुलिस ने हमीदुल इस्लाम को दबोचा, पीड़िता बोली- लव जिहाद का हुई शिकार

असम के गुवाहाटी से लव जिहाद का एक नया मामला सामने आया है। हमीदुल इस्लाम पर हिन्दू पहचान से लड़की को प्यार के जाल में फँसाने और रेप करने का आरोप है। पीड़िता का कई बार गर्भपात भी करवाया गया है। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने FIR दर्ज कर सोमवार (18 मार्च 2024) को हमीदुल इस्लाम को गिरफ्तार कर लिया। मामले की जाँच जारी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना गुवाहाटी के चाँदमारी थाना क्षेत्र की है। हिन्दू पीड़िता ने अपनी शिकायत में कहा है कि हमीदुल इस्लाम ने उसे अपना नाम ‘जून’ बताया था। कुछ ही समय की बातचीत में उसने पीड़िता का भरोसा जीत लिया। दोनों में मेल-मिलाप होने लगा। कुछ समय बाद हमीदुल ने पीड़िता से शारीरिक संबंध भी बनाने शुरू कर दिए। इस दौरान पीड़िता कम से कम 5 बार गर्भवती हुई। हर बार हमीदुल ने उसका गर्भपात करवा दिया।

शिकायत में पीड़िता ने खुद को लव जिहाद की शिकार बताया है। उसने कहा है कि जब तक वह हमीदुल के चंगुल से निकल पाती तब तक वह उससे 12 लाख रुपए भी हड़प चुका था। पैसे लेने के लिए हमीदुल पीड़िता को अलग-अलग बहाने से मजबूर करता था। कभी-कभार धमकी भी देता था। पीड़िता की शिकायत पर FIR दर्ज कर चाँदमारी पुलिस जाँच कर रही है। केस दर्ज होने की जानकारी मिलते ही हमीदुल फरार हो गया था। लेकिन पुलिस ने 18 मार्च को उसे गुवाहाटी के जीएस रोड इलाके से गिरफ्तार कर लिया।

उससे पूछताछ चल रही है। मिली जानकारी के अनुसार हमीदुल एक स्थानीय यूट्यूबर सनी गोल्डन का भाई है। फेसबुक पर सनी गोल्डन के 1,28,000 फॉलोअर्स हैं। वहीं उसके यूट्यूब चैनल पर 6,39,000 सब्सक्राइबर हैं। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि इस घटना के बाद सनी गोल्डन ने अपना इस्टाग्राम पेज बंद कर दिया है।