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क्या CAA पर लगेगी रोक? सुप्रीम कोर्ट में 200+ याचिकाओं पर होगी सुनवाई, बोले CM सरमा- असम में 3-5 लाख प्रताड़ित हिन्दू नागरिकता के लिए करेंगे आवेदन

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत असम के भीतर लगभग 3-5 लाख लोग नागरिकता के लिए आवेदन करेंगे। उन्होंने लोगों के 1-1.5 करोड़ लोगों के असम में नागरिकता लेने के दावों को नकार दिया। उधर CAA सम्बंधित याचिकाओं पर आज (19 मार्च, 2024) सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है।

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने मीडिया से एक बातचीत में बताया अप्रैल माह के अंत तक असम में CAA सम्बन्धित स्पष्ट तस्वीर सामने आ जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि CAA के तहत NRC में जगह ना पाने वाले हिन्दुओं को भी नागरिकता मिल सकेगी।

मुख्यमंत्री सरमा ने कहा, “पिछले सप्ताह CAA के लागू होने की घोषणा की गई थी और 19 अप्रैल तक, इसके 40 दिन हो जाएँगे जिससे हमें राज्य में साफ़ तस्वीर मिलेगी। 13 हिन्दू परिवारों को गुजरात में CAA के तहत नागरिकता दी जा चुकी है लेकिन असम में अभी CAA के अंतर्गत ज्यादा आवेदन नहीं हुए हैं।”

उन्होंने NRC के विषय में बताते हुए कहा कि 1971 के युद्ध के समय बड़ी संख्या में हिन्दू परिवार भारत आए थे लेकिन उनमें से कई वापस भी चले गए थे। उन्होंने कहा, “इनमें से बहुत से परिवारों को तब प्रशासन द्वारा राशन कार्ड देने से मना कर दिया गया था, इसलिए उनके पास केवल शरणार्थी पंजीयन कार्ड था, लेकिन प्रतीक हजेला (NRC के अधिकारी) ने इस कार्ड को NRC में शामिल नहीं किया था इसलिए बड़ी संख्या में परिवार नागरिकता नहीं ले पाए।”

CM सरमा ने बताया कि असम में NRC की अंतिम सूची जारी होने के बाद लगभग 16 लाख लोगों को इसमें जगह नहीं मिली थी। इसमें 7 लाख मुस्लिम हैं जबकि बाकी कोच-राजबंशी और दास जैसे उपनाम वाले असमिया हिन्दू हैं। इनको CAA के तहत नागरिकता पर भी उन्होंने बात की।

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि CAA के अंतर्गत 3 से 6 लाख लोग आवेदन असम में करेंगे, ना कि 18-20 लाख या 1.5 करोड़, जिसका दावा किया जा रहा है। इसमें 10% ऊपर नीचे हो सकता है लेकिन आँकड़ा 6 लाख से ऊपर नहीं जाएगा।” CM सरमा ने बताया कि उन्होंने यह आँकड़ा राज्य पर अपनी पकड़ के चलते अनुमान से दिया है।

उन्होंने बांग्लादेश में हिन्दुओं की जनसंख्या घटने को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा, “लोगों का दावा है कि बांग्लादेश में 1.5 करोड़ हिंदू जनसंख्या में कम हो गई है, यह सभी असम में आ गए हैं। असल सच है कि बांग्लादेश में 2 करोड़ मुस्लिम आबादी बढ़ गई, और हिंदू आबादी इसलिए कम हो गई क्योंकि धर्मांतरण हो गया।”

गौरतलब है कि हाल ही में केंद्र सरकार ने CAA कानून को देश भर में लागू किया है। इसके अंतर्गत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आने वाले गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता का देने का प्रावधान है। इसके नियमों के अंतर्गत 2014 से पहले वैध रूप से भारत आए सभी हिन्दू, सिख, जैन, पारसी, बौद्ध और ईसाई शरणार्थियों को नागरिकता दी जाएगी। इसके लिए केंद्र सरकार ने एक पोर्टल और मोबाइल एप भी लॉन्च किया है।

‘क्या मरे हुए लोग फिर जिन्दा होंगे?’: गाजियाबाद में ईसाई मिशनरियों के कार्यक्रम में अमेरिका और कोरिया के लोग शामिल, गरीबों के धर्मांतरण के खिलाफ शिकायत

उत्तर प्रदेश के गाजियाबद में ईसाई धर्मान्तरण का मामला सामने आया है। यहाँ एक कार्यक्रम के दौरान हिन्दू संगठनों ने पहुँच कर हंगामा किया है। हिन्दू संगठनों का आरोप है कि ईसाई मिशनरियों ने हिन्दुओं को धोखे से बुलाया और उन्हें धर्मान्तरित करने की कोशिश में जुटे थे। पुलिस ने केस दर्ज कर के कुछ लोगों को हिरासत में लिया है। घटनास्थल से ईसाई मत से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए हैं। जमावड़े में कुछ विदेशी लोगों की भी मौजूदगी की जानकारी मिली है। मामले की जाँच की जा रही है। घटना रविवार (17 मार्च, 2024) की है।

यह मामला गाजियाबाद के थाना क्षेत्र कौशाम्बी का है। हिन्दू संगठन के सदस्यों ने मामले की शिकायत थाने में दी है। उन्होंने अपनी शिकायत में बताया है कि रविवार को कुछ बाहरी लोगों ने कौशाम्बी थानाक्षेत्र के निर्धन और मेहनतकश परिवारों के बीच ईसाई मत के प्रचार वाले पर्चे बँटवाए हैं। इन पर्चों में सबको एक जगह जुटने के लिए कहा गया था। इस जमावड़े की सूचना विश्व हिन्दू परिषद को भी मिली। विहिप के कई कार्यकर्ता मौके पर पहुँचे तो वहाँ विदेशी नागरिकों सहित कई नाबालिग बच्चे भी मौजूद मिले।

VHP कार्यकर्ताओं का आरोप है कि कार्यक्रम स्थल पर हिन्दुओं को पैसों का भी लालच दिया जा रहा था। इन पैसों की एवज में उन्हें भ्रम फैलाने वाली तमाम मज़हबी बातें लिखी किताबें पकड़ाई जा रहीं थी। हिन्दू संगठनों के हंगामे के चलते मौके पर पुलिस पहुँच गई। बताया जा रहा है कि पुलिस को इस कार्यक्रम की पूर्व सूचना भी नहीं दी गई। पुलिस ने पहले विरोध कर रहे लोगों को समझा कर शांत करवाया। बाद में कार्य्रकम के आयोजकों को साथ ले कर थाने गई। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

मंच पर मौजूद लोगों में अमेरिका और कोरिया के कुछ लोग भी बताए जा रहे हैं। आयोजकों में महिलाएँ भी शामिल थीं। कुछ लोगों को हिरासत में ले कर पूछताछ की जा रही है। ऑपइंडिया को वो पर्चा मिला जिसे बाँट कर लोगों को बुलावा भेजा गया था। इस पर्चे में हेडलाइन के तौर पर ‘यीशु की क़ुरबानी को याद करें’ लिखा हुआ था। नीचे बाइबिल के लूका 22:19 का हवाला दे कर लिखा था, “मेरी याद में ऐसा ही किया करना।” पर्चे के नीचे 24 मार्च 2024 को पार्क क्राउन बैंक्वेट हॉल कौशाम्बी में सभी को शाम 7:45 पर जुटने का आह्वान किया गया है। आह्वान के साथ इस साल यीशु की मौत का स्मारक मनाने का भी एलान छपा हुआ है।

एक अन्य पर्चे में बाइबिल पर आधारित ख़ास भाषण का भी जिक्र है। इसका टाइटल है, “मरे हुए फिर से जिन्दा होंगे। सपना नहीं, सच।” अधिक जानकारी के लिए jw.org नाम की वेबसाइट और उसका बारकोड भी छपा हुआ है। इन सभी का कॉपीराइट अमेरिका के पेंसिल्वेनिया स्थित वॉच टॉवर बाइबल एंड ट्रैक्ट सोसाइटी के पास बताया गया है। बाँटे जा रहे अन्य पर्चों में ‘शैतान का शासन खत्म होने के बाद दुनिया कैसी होगी’ और ‘क्या मरे हुओं को दोबारा जीवन मिलेगा’ जैसे सवाल छपे हुए हैं। फ़िलहाल इस मामले पर पुलिस ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। पुलिस का बयान जारी होने पर उसे खबर में अपडेट किया जाएगा।

‘च*टे तेरे परिवार को खत्म कर देंगे, तू गाँव छोड़ कर भाग जा’: दलित नेत्रपाल जाटव को परिवार सहित धमकी, पेड़ भी काट कर ले गए नसीम, तपीस, हारिस, मुश्ताक और यासीन

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में एक दलित परिवार पर गाँव छोड़ कर चले जाने का दबाव बनाने का मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार को जातिसूचक शब्द, बोल कर और गालियाँ देते हुए हथियार दिखाए जा रहे हैं। साथ ही उनकी हत्या की धमकियाँ दी जा रही हैं। इस मामले में पीड़ित ने अदालत के माध्यम से नसीम, तपीस, हारिस, मुश्ताक और यासीन के खिलाफ नामजद FIR दर्ज करवाई है। शनिवार (16 मार्च 2024) को दर्ज हुई इस FIR में कुछ अन्य अज्ञात लोगों का भी जिक्र है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

यह मामला बुलंदशहर के थानाक्षेत्र कोतवाली देहात का है। यहाँ के गाँव दरियापुर के रहने वाले नेत्रपाल जाटव ने अदालत के माध्यम से शनिवार को पुलिस में अपनी FIR दर्ज करवाई है। FIR में नेत्रपाल ने खुद को सीधा-साधा व्यक्ति बताते हुए कहा है कि उनके खेत में एक शीशम का पेड़ लगा था जिसे 5 जनवरी 2024 को नसीम, तपीस, हारिस, मुश्ताक और यासीन ने जबरन काट लिया था। यह पेड़ लगभग 50 साल पुराना था जिसे नामजद आरोपितों ने कुछ अज्ञात लोगों के साथ काट कर ट्रॉली में लाद लिया और अपने साथ ले गए।

जब नेत्रपाल की पत्नी ने आरोपितों को ऐसे करने से रोका तो उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। शिकायत में बताया गया है कि आरोपितों ने नेत्रपाल जाटव की पत्नी से कहा, “च*टे तेरे परिवार को खत्म कर देंगे। तूने थाने में शिकायत की तो जान से मार देंगे। पुलिस हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकती।” पीड़ित का दावा है कि उसने तब पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी। हालाँकि इस शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि उलटे पीड़ित को ही मुचलके में पाबन्द कर दिया गया था।

इसके घटना के कुछ दिन बाद 28 जनवरी 2024 को पीड़ित नेत्रपाल जाटव गाँव के ही विजेंद्र और जगवीर के साथ कहीं जा रहा था। तभी रास्ते में उसे नसीम, तपीस, हारिस, मुश्ताक और यासीन ने घेर लिया। इन सभी ने पीड़ित को पहले तो गालियाँ देते हुए जातिसूचक शब्द बोले। बाद में आरोपितों ने कहा, “तू गाँव छोड़ कर भाग जा नहीं तो हम कहीं का नहीं छोड़ेंगे।” पीड़ित ने इस धमकी के बाद खुद को बेहद डरा हुआ बताया है। शिकायत में कहा गया है कि तब जिले के एसएसपी से शिकायत का भी कोई असर नहीं हुआ।

नेत्रपाल जाटव ने अदालत में अर्जी दे कर FIR दर्ज करने की गुहार लगाई थी। अदालत के आदेश पर पुलिस ने नसीम, तपीस, हारिस, मुश्ताक और यासीन के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। इन सभी पर IPC की धारा 379, 504 और 506 के अलावा SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

ग़रीबी का सफाया, आतंक पर प्रहार, भ्रष्टाचार पर कार्रवाई, किसानों की समृद्धि, युवाओं को अवसर… कर्नाटक में PM मोदी ने बताया क्यों 400 पार, बोले – झूठी-लुटेरी है कॉन्ग्रेस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक के शिवमोग्गा में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए समझाया कि आखिर इस लोकसभा चुनाव में NDA का 400 के पार जाना क्यों ज़रूरी है। पीएम मोदी ने कर्नाटक की जनता से सोमवार (18 मार्च, 2024) को कहा कि वो प्रार्थना करने आए हैं कि 4 जून को 400 पार। उन्होंने कहा कि इस मिशन में कर्नाटक के मतदाताओं की बहुत बड़ी भूमिका है। इसके बाद उन्होंने जवाब दिया कि वो 400 सीटों की बात क्यों कर रहे हैं।

पीएम मोदी ने समझाया कि विकसित भारत और विकसित कर्नाटक के 400 पार का नारा लगाया। उन्होंने कहा कि ग़रीबी कम करने के लिए, आतंकवाद पर प्रहार के लिए, भ्रष्टाचार पर कार्रवाई के लिए, किसानों की समृद्धि के लिए, युवाओं को नए अवसर देने के लिए 400 पार सीटों का नारा दिया। पीएम मोदी ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में देश ने भाजपा का काम देखा है, पार्टी की सबसे बड़ी प्राथमिकताएँ हैं – विकास, ग़रीब कल्याण और सामर्थ्यवान भारत।

पीएम मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस के पास विकास का एजेंडा नहीं है, इसलिए वह तरह-तरह के हथकंडे अपनाती है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस का पहला हथकंडा है – झूठ बोलो! बड़े-बड़े झूठ बोलो! कॉन्ग्रेस का दूसरा हथकंडा है – अपने झूठ को ढकने के लिए, नए झूठ बोलो। उन्होंने समझाया कि कॉन्ग्रेस का तीसरा हथकंडा है – जब पकड़े जाओ, तो अपनी करतूतों का ठीकरा दूसरों के सर फोड़ दो। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि कॉन्ग्रेस की मंशा कभी काम की नहीं होती। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस का केवल एक ही इरादा होता है- लोगों को लूटना, अपनी जेबें भरना।

पीएम मोदी ने कर्नाटक में कहा, “मुंबई में इंडी अलायंस की तरफ से एक खुला ऐलान किया गया है। वे लोग हिंदू धर्म में समाहित शक्ति को समाप्त करना चाहते हैं। हिंदू समाज जिन्हें शक्ति मानता है, उस शक्ति के विनाश का ऐलान कर दिया है। अगर शक्ति विनाश का उनका ऐलान है, तो शक्ति उपासना का मेरा भी ऐलान है। मैं जब सार्वजनिक जीवन में आया, जब मैंने अपने समय का पल-पल और शरीर का कण-कण लोगों की सेवा के लिए समर्पित करने का संकल्प लिया तो मुझे इसी शक्ति ने ऊर्जा दी। आज भी मैं शक्ति की उपासना करता हूं, देश के कोटि-कोटि लोग हिंदू धर्म की इस शक्ति के उपासक हैं।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उनके लिए देश की नारी शक्ति, इसी शक्ति का प्रतिबिंब है। पीएम मोदी ने बताया कि कैसे कई राजनीतिक जानकार कहते रहे हैं कि नारी शक्ति मोदी की साइलेंट वोटर है। उन्होंने कहा कि मेरे देश की नारी शक्ति वोटर नहीं, बल्कि माँ शक्ति स्वरूपा है। पीएम मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने सबसे पहले देश को जाति में बांटा, समुदाय में बाँटा, धर्म, क्षेत्र और भाषा के आधार पर लोगों को बाँटा और सत्ता हासिल करने के लिए कांग्रेस ने देश का बँटवारा भी किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब कॉन्ग्रेस फिर से देश को बाँटने वाले खतरनाक खेल खेलने लगी है।

क्लास में गैर-मुस्लिम बच्चों के पानी पीने पर बैन, क्योंकि चल रहा है रमजान का रोजा: जर्मनी के उसी शहर की घटना, जहाँ ‘भाईचारे’ के लिए लगाई गई थीं लाइटें

जर्मनी के एक स्कूल में 2 टीचरों द्वारा कक्षा 5 में पढ़ने वाले सभी गैर-मुस्लिम छात्रों के पानी पीने पर रोक लगा दी गई है। बताया जा रहा है कि यह फरमान दोनों टीचरों में क्लास में पढ़ने वाले उन मुस्लिम छात्रों की सुविधा को देख कर दिया है जिनके रमजान माह में रोज़े चल रहे हैं। कुल 27 छात्रों की इस कक्षा में मुस्लिम बच्चों की तादाद महज 3 है। इस मामले में अभी तक स्कूल की तरफ से कोई सफाई नहीं आई है।

यह मामला जर्मनी के फ्रैंकफर्ट शहर का है। यह घटना सबसे पहले बुधवार (13 मार्च 2024) को NIUS नाम के जर्मन न्यूज़ संस्था में प्रकाशित हुई है। इस न्यूज़ में हेडलाइन के तौर पर लिखा गया, “फ्रैंकफर्ट के पास एक बड़ा स्कूल जहाँ पाँचवी क्लास के छात्रों को पानी नहीं पीना चाहिए क्योंकि रमजान है।” इसी रिपोर्ट में क्लास में पढ़ने वाले 27 छात्रों में 3 मुस्लिम छात्र बताए गए हैं। सभी छात्रों की उम्र 10 से 11 साल के बीच है। इन छात्रों ने घर जा कर अपने अभिभावकों को बताया कि उन्हें सहपाठी मुस्लिम छात्रों के रोज़े होने की वजह से पानी नहीं पीने दिया गया।

न्यूज़ संस्था NIUS ने एक गैर मुस्लिम छात्रा के पिता से भी बात करने का दावा किया है। उस पिता ने बताया कि वो स्कूल से आने के बाद अपनी बेटी से दिन भर के बारे में बातचीत करते हैं। इस बातचीत में स्कूल का माहौल और बेटी की दिनचर्या आदि मुद्दे शामिल होते हैं। रात में खाने के समय उस छात्रा ने अपने पिता को बताया कि 2 टीचरों ने उसे क्लास में पानी इसलिए नहीं पीने दिया क्योंकि 27 में से 3 छात्रों के रोजे चल रहे थे। बच्ची से मिली जानकारी हैरान पिता ने इसे एक बेहद अजीब फरमान बताया।

बच्ची के पिता ने आगे कहा कि एक आम मुस्लिम के लिए भी रोज़े आदि रखने की आदर्श उम्र 14 साल मानी जाती है लेकिन क्लास में अधिकतर बच्चे महज 10-11 साल के ही हैं। छात्रा की माँ ने अपनी बेटी से कहा कि अब आगे सेउन्हें स्कूल में जब भी प्यास लगे तो उसे पानी पी लेना चाहिए। हालाँकि अब तक सामने आए तथ्यों के मुताबिक यह निर्णय पूरे स्कूल के बजाय महज 2 टीचरों का ही लग रहा है। अन्य क्लास के छात्रों के साथ ऐसी किसी पाबंदी की जानकारी फ़िलहाल अभी तक सामने नहीं आई है।

हालाँकि NIUS द्वारा कई बार सम्पर्क की कोशिश के बावजूद स्कूल प्रशासन ने इस फरमान पर अभी तक अपना कोई आधिकरिक बयान जारी नहीं किया है। यह घटना जर्मनी के उसी फ्रैंकफर्ट की हैं जिसने मार्च 2024 में शहर में रमजान के मौके पर लाइटें लगवाई थीं। यह लाइटें फ्रैंकफर्ट के सिटी सेंटर क्षेत्र में लगीं थीं। तब जर्मनी की ग्रीन पार्टी ने इसे भाईचारे का प्रतीक बता कर मुस्लिमों को दोस्ती का पैगाम देने वाला कदम बताया था। इसी ग्रीन पार्टी से फ्रैंकफर्ट के मेयर नर्गेस एस्कंदारी-ग्रुनबर्ग ने भी इसे ‘एकजुटता की रोशनी’ बताया था।

बकाया मजदूरी माँगने पर भड़क गया ठेकेदार मोहम्मद रफीक, एक दर्जन मजदूरों के घर में लगा दी आग: जलने से बचे गंगाराम यादव की शिकायत पर गिरफ्तार

गुजरात के कच्छ जिले में दिहाड़ी मजदूरों की झोपड़ियों में आगजनी का मामला सामने आया है। प्रभावित 12 झोपड़ियों में हुई इस आगजनी का आरोप ठेकेदार मोहम्मद रफीक पर लगा है। आरोप है कि अपनी बकाया मजदूरी माँग रहे मजदूरों को रफीक उनके परिवार सहित जिन्दा जलाना चाहता था। पुलिस ने FIR दर्ज कर के रफीक को गिरफ्तार कर लिया है। घटना रविवार (17 मार्च 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना कच्छ जिले के अंजार इलाके की है। यहाँ के खत्री चौक के पास मोची बाजार है जहाँ कई दिहाड़ी मजदूर झुग्गियों में अपने परिवार के साथ रहते हैं। इन सभी का ठेकेदार मोहम्मद रफीक है। रफीक पर आरोप है कि वो यहाँ से मजदूरों को ऊँचे दामों पर मजदूरी करवाने ले जाता था। हालाँकि वह मजदूरों को महज 100 रुपए प्रतिदिन का दिया करता था और बाकी पैसे अपने पास रख लेता था। इसके अलावा रफीक ने तमाम मजदूरों की लम्बे समय से मजदूरी भी बकाया कर दी थी।

काफी समय बीत जाने पर मजदूरों ने रफीक से अपना तगादा शुरू किया। जब रफीक ने उनके पैसे नहीं दिए तो शनिवार (16 मार्च, 2024) को मजदूरों ने आगे से उसके साथ आगे काम न करने का सीधा जवाब दे दिया। आरोप है कि मजदूरों की न सुन कर रफीक को बेहद गुस्सा आया था। उसने तब ही लेबरों को जिन्दा जलाने की धमकी दी थी। रविवार की सुबह अचानक मजदूरों की झुग्गियों में आग लग गई। कुछ ही देर में 12 झुग्गियाँ इस आग की चपेट में आ गई। घटना के समय अधिकतर मजदूर झोपड़ियों में सो रहे थे।

आग लगने से मोची बाजार में अफरातफरी मच गई। पुलिस के साथ फायर ब्रिगेड भी मौके पर पहुँची। काफी प्रयासों के बाद आग पर काबू पाया गया। गनीमत की बात यह रही कि इस अगिनकांड में किसी की जान नहीं गई। हालाँकि मजदूरों की गृहस्थी जल कर राख हो गई। आग बुझने के बाद गंगाराम यादव सहित कुछ अन्य पीड़ितों ने ठेकेदार रफीक के खिलाफ पुलिस को शिकायत दी। शिकायत में बताया गया है कि मोहम्मद रफीक ने पहले मजदूरों की झोपड़ियों पर ज्वलनशील पदार्थ फेंका और बाद में आग लगा कर भाग गया।

इस आगजनी की वजह से आसपास से गुजर रहे बिजली के तारों में भी स्पार्किंग हो रही थी। आखिरकार पुलिस ने पीड़ित मजदूरों की शिकायत पर ठेकेदार रफीक पर FIR दर्ज कर ली है। यह FIR हत्या के प्रयास और आगजनी सहित अन्य धाराओं में हुई घटना के बाद रफीक फरार हो गया था। पुलिस ने दबिश दे कर उसे रेलवे स्टेशन के पास से गिरफ्तार कर लिया। अंजार के पुलिस इंस्पेक्टर एसडी सिसौदिया ने मीडिया से बात करते हुए इस कार्रवाई की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि मामले में आगे की जाँच जारी है।

बिहार में NDA के सीट शेयरिंग फॉर्मूले की घोषणा, चाचा पर भारी पड़ा भतीजा: माँझी-कुशवाहा को एक-एक सीट, जानिए किस पार्टी के हिस्से में गई कौन सी सीटें

बिहार में NDA के घटक दलों के बीच लोकसभा चुनाव 2024 के लिए सीटों के बँटवारे पर मुहर लग गई है। राज्य में भाजपा सबसे अधिक 17 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि जदयू के कोटे में 16 सीटें गई हैं। चिराग पासवान की LJP (रामविलास) को 5 सीटें दी गई हैं। उनके चाचा पशुपति कुमार पारस खाली हाथ रहे। वहीं उपेंद्र कुशवाहा की RLJP व जीतन राम माँझी की HAM (सेक्युलर) को एक-एक सीटों से संतोष करना पड़ेगा। आइए, अब जानते हैं कि किसके हिस्से में कौन-कौन सी सीटें गईं।

BJP इन सीटों पर चुनाव लड़ेगी – पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, औरंगाबाद, मधुबनी, अररिया, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, महराजगंज, सारण, उजियारपुर, बेगूसराय, नवादा, पटना साहिब, पाटलिपुत्र, आरा, बक्सर, सासाराम। जदयू के हिस्से में जो सीटें गई हैं, वो हैं – वाल्मीकिनगर, सीतामढ़ी, झंझारपुर, सुपौल, किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया, मधेपुरा, गोपालगंज, सिवान, भागलपुर, बांका, मुंगेर, नालंदा, जहानाबाद, शिवहर। गया से HAM तो करकट से RLJP ताल ठोकेगी।

वहीं लोजपा (रामविलास) के हिस्से में जो सीटें गई हैं, वो हैं – हाजीपुर, वैशाली, समस्तीपुर, जमुई और खगड़िया। जिस नवादा से पशुपति कुमार पारस कैम्प के चन्दन सिंह सांसद हैं, वहाँ से भाजपा उम्मीदवार उतारेगी। बिहार भाजपा के प्रभारी विनोद तावड़े ने पटना स्थित भाजपा प्रदेश मुख्यालय में सीट शेयरिंग फॉर्मूले को सार्वजनिक किया। इस दौरान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी और जदयू नेता संजय झा समेत अन्य दलों के नेता भी मौजूद रहे।

हालाँकि, प्रेस कॉन्फ्रेंस में पशुपति कुमार पारस की पार्टी का कोई नेता मौजूद नहीं था। अब कहा जा रहा है कि भतीजे ने चाचा को पटखनी दे दी। लोजपा (R) के प्रदेश अध्यक्ष राजू तिवारी इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद रहे। 7 ऐसी लोकसभा सीटें हैं, जहाँ नए उम्मीदवार आएँगे। यह सीटें हैं– शिवहर से रामा देवी, हाजीपुर से पशुपति पारस, गया से हरि मांझी, काराकाट से महाबली सिंह, समस्तीपुर से प्रिंस राज, नवादा से चंदन सिंह और सीतामढ़ी से सुनील कुमार पिंटू।

चाटुकार अपूर्वानंद, कितना भी लगा लो पोछा नहीं धुलेंगे पप्पू के दाग पर हिंदी का प्रोफेसर होने के नाते ‘राम की शक्ति पूजा’ का तो रख लेते लाज

भारत में एक खास नस्ल है, जिसका कार्य है उनके आका द्वारा दिए गए अनाप-शनाप बयानों का येन-केन-प्रकारेण बहाव करना, भले ही इसके लिए तथ्यों को मटियामेट ही क्यों न करना पड़े या फिर हजार झूठ ही क्यों न बोलना पड़े। अब देखिए, मुंबई में ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के समापन के दौरान कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने कह दिया कि हिन्दू धर्म के एक शब्द है शक्ति, उनकी लड़ाई उसी शक्ति से है। भारत में प्राचीन काल से शक्ति की आराधना होती रही है, ऐसे में राहुल गाँधी के इस हिन्दू विरोधी बयान का विरोध होना स्वाभाविक है।

अब एक खास ब्रीड राहुल गाँधी के इस बयान के बचाव में भी उतर आया है। ताज़ा विवाद के बीच इसे ‘महिषासुर गिरोह’ कह सकते हैं। खुद को बुद्धिजीवी दिखाने वाली इस जमात का इतिहास ऐसा रहा है कि सोशल मीडिया में इनके द्वारा लिखे जाने वाले एक शब्द से भी पता चल जाता है कि इनका इशारा किस तरफ है। जैसे, दिल्ली विश्वविद्यालय में हिन्दी के प्रोफेसर अपूर्वानंद झा ने ट्वीट किया, “अन्याय जिधर, हैं उधर शक्ति! (राम की शक्तिपूजा, निराला)।

पहले तो एक हिन्दी के प्रोफेसर के ट्वीट में त्रुटियाँ देखिए। कौमा के बाद उन्होंने कोई स्पेस नहीं दिया। उन्होंने इस ट्वीट के माध्यम से एक तरह से ये साबित करने का प्रयास किया है कि देवी शक्ति अन्याय का साथ देती हैं। यानी, अपूर्वानंद झा के लिए चण्ड-मुण्ड, शुम्भ-निशुम्भ, रक्तबीज और महिषासुर ही देवता हैं क्योंकि उनके हिसाब से देवी ने अन्याय का साथ देते हुए इन सबका संहार किया। आइए, DU प्रोफेसर के इस प्रोपेगंडा की तह तक जाते हैं।

“अन्याय जिधर, है उधर शक्ति” – अपूर्वानंद झा का प्रोपेगंडा

सबसे पहले ‘राम की शक्तिपूजा’ कविता के बारे में जानते हैं, जिसकी रचना 20वीं शताब्दी के महान छायावादी कवि सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ ने की है। ये बंगाली भाषा के 15वीं शताब्दी की लोकप्रिय रामकथा ‘कृत्तिवास रामायण’ पर आधारित है, जिसकी रचना कृत्तिवास ओझा ने की थी। इसमें एक जगह जिक्र है कि कैसे रावण पर शक्ति का आशीर्वाद देख कर श्रीराम ने शक्ति की आराधना करने की ठानी। देश, काल और समाज को ध्यान में रखते हुए निराला ने इसी को ‘राम की शक्तिपूजा’ के रूप में ढाला।

‘राम की शक्तिपूजा’ और ‘कृतिवास रामायण’ में अंतर ये है कि निराला ने राम को एक आम आदमी के रूप में चित्रित किया है। उन्होंने राम को भी एक आम आदमी की तरह संशय में पड़ने वाला व्यक्ति माना है, उन्हें भी निराशा होती है, वो भी आगामी परिणाम के पक्ष में आने या न आने को लेकर सोचते हैं। वो रावण के पक्ष में शक्ति का संतुलन देख कर खिन्न हैं। आइए, अब अपूर्वानंद झा ने जिन पंक्ति का जिक्र किया उसका संदर्भ देते हैं। उसके लिए उससे पहले और बाद की पंक्तियों को देखिए:

कुछ क्षण तक रहकर मौन सहज निज कोमल स्वर
बोले रघुमणि—मित्रवर, विजय होगी न समर;
यह नहीं रहा नर-वानर का राक्षस से रण,
उतरीं पा महाशक्ति रावण से आमंत्रण;
अन्याय जिधर, हैं उधर शक्ति! कहते छल-छल
हो गए नयन, कुछ बूँद पुनः ढलके दृगजल,

इन पंक्तियों का अर्थ है कि भगवान राम जीत को लेकर आश्वस्त नहीं है, एक आम आदमी की तरह वो कह रहे हैं कि ये सिर्फ नर-वानर बनाम राक्षस का युद्ध नहीं है बल्कि रावण ने महाशक्ति का भी आह्वान कर दिया है। राम रुंधे गले से कह रहे हैं कि अन्यायी रावण की तरफ शक्ति चली गई हैं। आगे वो “देखा, हैं महाशक्ति रावण को लिए अंक, लांछन को ले जैसे शशांक नभ में अशंक;” कहते हैं, मतलब वो महाशक्ति के अंक में रावण को देख कर निराश हैं और शक्ति को अपनी तरफ करना चाहते हैं।

ध्यान दीजिए, यहाँ राम ये नहीं कह रहे कि उन्हें शक्ति का विनाश करना है। वो ये भी नहीं कह रहे कि उनकी लड़ाई शक्ति से है। वो ये भी नहीं कह रहे कि शक्ति का उन्हें विनाश करना है। उन्हें बस शक्ति को अपनी तरफ करना है। रावण शिव का बहुत बड़ा भक्त था, विद्वान और तपस्वी था। कथा है कि उसने अपने सिर काट-काट कर शिव को अर्पित किए गए। रावण के तप के कारण ही शक्ति उसकी तरफ थीं। राम ये नहीं कह रहे हैं कि शक्ति हमेशा अन्याय के साथ होती है, वो उस स्थिति में एक आम मनुष्य की तरफ निराश होकर मनन कर रहे हैं।

‘राम की शक्तिपूजा’ में बुजुर्ग ऋक्षपति जामवंत राम को सलाह देते हैं कि वो भी शक्ति की पूजा करें और उन्हें प्रसन्न कर के अपनी तरफ करें, यानी शक्ति अर्जित करें। जामवंत कहते हैं, “हे पुरुष-सिंह, तुम भी यह शक्ति करो धारण, आराधन का दृढ़ आराधन से दो उत्तर“। फिर राम को न सिर्फ शक्ति का आशीर्वाद मिलता है, बल्कि शक्ति उनके शरीर में भी समा जाती है, एकाकार हो जाती है। महाशक्ति ने उन्हें “होगी जय, होगी जय, हे पुरुषोत्तम नवीन!” कह कर आशीर्वाद दिया।

कौन है अर्बन नक्सल अपूर्वानंद झा?

अपूर्वानंद झा अर्बन नक्सल है, यानी कलम चला कर नक्सलवाद का काम करने वाला। उसने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में एक लेख लिख कर उमर खालिद को अपने बेटा बताया था। वही उमर खालिद, जिसे दिल्ली पुलिस ने फरवरी 2020 में राष्ट्रीय राजधानी में हुए दंगों का मास्टरमाइंड माना है। फ़्रांस में आतंकियों द्वारा ‘सर तन से जुदा’ की घटनाओं के बाद उसने लिखा था कि ‘अल्लाहु अकबर’ और हत्याएँ एक साथ नहीं आते। जबकि दिल्ली दंगों में भीड़ ने यही नारा लगा कर हत्याएँ की थीं।

खुद अपूर्वानंद पर भी दिल्ली दंगों में हाथ होने का आरोप लग चुका है। UAPA के तहत गिरफ्तार दिल्ली दंगों की एक आरोपित गुलफिशा उर्फ़ गुल ने दिल्ली पुलिस की पूछताछ में कबूल किया था कि दंगों को भड़काने के पीछे प्रोफेसर अपूर्वानंद ही मास्टरमाइंड था। उसने बुर्कानशीं ख्वातीन की एक टीम तैयार की थी। उसने जामिया के छात्रों को टास्क दिया था कि वो विरोध प्रदर्शन के जरिए भारत सरकार को मुस्लिमों से भेदभाव करने वाला साबित करें। अपूर्वानंद झा हिन्दुओं को ‘बीमार समाज’ भी बता चुका है।

फिर भी, ताज़ा विवाद की बात करें तो एक प्रोफेसर से अपेक्षा की जाती है कि अगर वो कुछ बता रहा है तो उसके सन्दर्भ की भी बात करे, न कि भ्रम फैलाए। उसे अपनी गति का खूब पता है, तभी उसने रिप्लाइज भी ऑफ कर रखी है उस ट्वीट पर। यानी, उसे खूब पता है कि वो प्रोपेगंडा का प्रसार कर रहा है लेकिन ये तो बेशर्म ब्रीड है। इन्हें क्यों शर्म आने लगी भला। अब राहुल गाँधी का बचाव करने के लिए बुद्धि को ताक पर रखना ही पड़ेगा ना। अपूर्वानंद ने इसीलिए शक्ति को ही अन्यायी बता दिया, माँ दुर्गा का अपमान किया।

PM मोदी पर शक्ति का आशीर्वाद, ‘असुर’ की तरह व्यवहार कर रहा विपक्ष

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कह चुके हैं कि हमलोग शक्ति के आराधक हैं और 4 जून को फैसला हो जाएगा कि शक्ति का आशीर्वाद किस पर है। जबकि विपक्ष खुद को शक्तिहीन पाकर शक्ति को ही कोस रहा है। अब आपने गठबंधन नहीं बनाया, जन-सरोकार के मुद्दों को नहीं उठाया, हिन्दू धर्म का बार-बार अपमान किया, परिवारवाद को बढ़ावा दिया, सत्ता मिलने पर भ्रष्टाचार किया तो दोष शक्ति को क्यों? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने RSS संगठन, पार्टी और फिर बतौर मुख्यमंत्री-प्रधानमंत्री काम किया।

नरेंद्र मोदी ने उस परिवार से अपना सफर शुरू किया, जहाँ उन्हें स्टेशन पर चाय बेच कर गुजारा करना पड़ता था और उनकी माँ को दूसरों के घरों में बर्तन माँजने पड़ते थे। उन्होंने एक कमरे में अपनी अधिकतर ज़िन्दगी गुजारी है, वो भी दूसरों की। उन्होंने बतौर CM गुजरात को चमकाया, तब जाकर देश ने उन पर भरोसा जताया। जनता का विश्वास ही उनकी शक्ति है और इसी के बलबूते वो लगातार तीसरी बार सत्ता में आने के लिए आश्वस्त हैं।

जबकि विपक्ष ‘आसुरी शक्तियों’ का प्रदर्शन कर रहा है। नरेन्द्र मोदी, भाजपा और उनके समर्थक ही राम को लेकर आए हैं, अयोध्या में भव्य राम मंदिर बना है। विपक्षी दल इसका विरोध करते थे, अंत में उन्हें जनमानस के सामने झुकना पड़ा। जब मौका था, उन्होंने ऐसा नहीं किया। आज राम के सहारे ही कॉन्ग्रेस समर्थक बुद्धिजीवी राहुल गाँधी को सही साबित करने पर तुले हुए हैं। एक तरफ नरेंद्र मोदी के संघर्षों के तप की शक्ति है, दूसरी तरफ परिवारवाद और भ्रष्टाचार के साथ-साथ हिन्दू विरोधी सोच जहाँ सनातन धर्म को डेंगू-मलेरिया बता कर इसे खत्म करने की बात की जाती है।

दिल्ली के मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर सलीम शेख ने MBBS छात्राओं का किया यौन उत्पीड़न, 13 ने दर्ज कराई शिकायत: हिन्दू संगठन बोले- नहीं बनने देंगे संदेशखाली

दिल्ली के रोहिणी इलाके में स्थित डॉ बाबा भीमराव अम्बेडकर हॉस्पिटल एंड मेडिकल कॉलेज में छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। MBBS का कोर्स कर रहीं 13 छात्राओं ने प्रोफेसर सलीम शेख पर शारीरिक शोषण और यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है।

घटना 31 जनवरी 2024 की बताई जा रही है जब 2 छात्राओं ने सलीम के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी। महिला आयोग ने इस मामले का संज्ञान लिया है और कॉलेज के डॉयरेक्टर प्रिंसिपल को नोटिस जारी कर के 4 दिनों के अंदर जवाब माँगा है। मामले की जानकारी होने से लोगों में नाराजगी है। कॉलेज के बाहर सोमवार (18 मार्च) को हिन्दू संगठनों द्वारा प्रदर्शन किया गया है जिसको देखते हुए पुलिस तैनात कर दी गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना दिल्ली के रोहिणी इलाके की है। यहाँ स्थित डॉ बाबा भीमराव अम्बेडकर हॉस्पिटल एंड मेडिकल कॉलेज में देश के कई हिस्सों से छात्र और छात्राएँ आ कर पढ़ाई करते हैं। इसी कॉलेज में सलीम शेख असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर तैनात है। 31 जनवरी को एक एग्जाम का VIVA था जो कि सलीम शेख ले रहा था। आरोप है कि इसी VIVA (साक्षात्कार) में उसने 2 छात्राओं का यौन शोषण किया। कुछ समय तक तो यह बात दबी रही लेकिन धीरे-धीरे कुछ अन्य लड़कियाँ भी खुद को सलीम शेख के शारीरिक और यौन शोषण का शिकार बताने लगीं।

आखिरकार 22 फरवरी 2024 को असिस्टेंट प्रोफेसर सलीम शेख के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी गई। बताया जा रहा है कि शिकायत पर 13 MBBS छात्राओं के हस्ताक्षर हैं। इस शिकायत के आधार पर दिल्ली के रोहिणी नार्थ थाने में FIR दर्ज हो गई। पीड़िताओं की माँग थी कि आरोपित प्रोफेसर पर जल्द से जल्द कार्रवाई हो। FIR के 20 दिन से अधिक बीत जाने के बाद मामले की जानकारी हिन्दू संगठनों को हुई तो उन्होंने कॉलेज का रुख किया। कॉलेज गेट पर सोमवार को जोरदार प्रदर्शन हुआ।

इस प्रदर्शन के दौरान सलीम शेख के साथ उसे बचा रहे कॉलेज प्रबंधन पर भी कार्रवाई की माँग की गई। प्रदर्शनकारियों में महिलाएँ ही शामिल थीं। प्रदर्शन में शामिल एक महिला ने कहा, “हम यह जगह संदेशखाली नहीं बनने देंगे।” हंगामे की वजह से कॉलेज के बाहर जा रही सड़क पर जाम लग गया। मामले की जानकारी मिलते ही मौके पर पुलिस बल पहुँचा। लोगों को समझा कर वापस भेजा गया। इस बीच महिला आयोग ने घटना का संज्ञान लिया है। आयोग ने डॉ भीमराव अम्बेडकर मेडिकल कॉलेज के डॉयरेक्टर प्रिंसिपल को नोटिस जारी कर के 4 दिनों के भीतर जवाब तलब किया है।

‘घुसपैठिया’ कहने पर अफगान सिख ने केजरीवाल को लताड़ा, गुरुद्वारा कमेटी के अध्यक्ष बोले- हम कागजों पर आए हैं, CAA से दूर होगी समस्या

केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में लागू किए गए नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) को बड़े स्तर पर समर्थन मिल रहा है। इसकी आलोचना करने वालों को, इस कानून के लाभार्थी हिन्दू-सिख अपने आप ही जवाब दे रहे हैं।

इसी कड़ी में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पाकिस्तान-अफगानिस्तान के हिन्दू-सिखों पर दिए गए बयान का अफगानिस्तान में प्रताड़ित सिख ने जवाब दिया है। दिल्ली के गुरुद्वारा श्री अर्जन देब सिंह जी की प्रबन्धक समिति के अध्यक्ष और अफगानिस्तान से आए शरणार्थी सिख एस प्रताप सिंह ने कहा, “हम अफगानिस्तान से हैं। जब से वहां 1990 में सरकारें बदलना चालू हुईं तो हम यहाँ (भारत) आ गए। हम हिन्दू-सिख अटारी सीमा से भारत में आए थे।”

उन्होंने बताया, “इसके हमने रहने की जगह और कामकाज की जगह की तलाश की। हमारे पास तब कोई राष्ट्रीय नागरिकता नहीं थी। अफगानिस्तान में हमें भारतीय और भारत में हमें अफगानी माना जाना था। लेकिन हम लोग तो भारतीय हैं, जब देश का विभाजन हुआ उससे पहले तो हम अफगानी थे। यहाँ रहने वाले अफगानी सिख बच्चों के पास कोई कागज नहीं था। नए CAA कानून के अंतर्गत हमें नागरिकता मिलेगी और हमारे कागज बन सकेंगे जिससे सुविधा होगी। इसके लिए हम पीएम मोदी समेत सभी लोगों का शुक्रिया करते हैं।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि हिन्दुओं और सिखों के लिए दुनिया में केवल भारत ही एक शरणस्थली है। यही देश उनका शुरू से है और आगे भी रहेगा। उन्होंने बताया कि अब उन्हें पूरी तरीके से नागरिकता मिलने के बाद कोई समस्या नहीं होगी।

CM केजरीवाल के बयानों पर उन्होंने कहा, “हम वैध तरीके से यहाँ रह रहे हैं। 1991 से लेकर 2014 तक हमने देश से कुछ नहीं माँगा। जो लोग पहले से ही भारत में रहा रहे हैं, उनके पास काम धंधा है।” उन्होंने सभी से इस नागरिकता कानून का समर्थन करने की अपील भी की।

CAA को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल लगातार हमले कर रहे हैं। उन्होंने एक बयान में कहा था कि भारत सरकार पाकिस्तानियों को भारत में बसा रही है जिससे यहाँ के लोगों की नौकरियाँ जाएँगी। जब इन शरणार्थियों ने CM केजरीवाल के घर के बाहर प्रदर्शन किया था तो उन्होंने इन लोगों को पाकिस्तानी कह कर इनका अपमान किया था। केजरीवाल ने इन शरणार्थियों को अवैध तरीके से घुसे घुसपैठिये बताया था और इन्हें जेल में डालने की बात की थी। इस पर उनका कड़ा विरोध हुआ था।

गौरलतब है कि हाल ही में केंद्र सरकार ने CAA कानून को देश भर में लागू कर दिया है। इसके अंतर्गत वर्ष 2014 से पहले पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आने वाले हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के लोगों को नागरिकता के देने का प्रावधान है। इसके लिए केंद्र सरकार ने वेबसाइट और मोबाइल एप भी लॉन्च किया है।