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ऑडिटर रमेश को याद कर तमिलनाडु में भावुक हुए PM मोदी, आतंकियों ने घर में घुस कर BJP नेता को मार डाला था: 1 दशक तक न्याय के लिए लड़ती रहीं माँ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (19 मार्च, 2024) को तमिलनाडु के सेलम को एक जनसभा को संबोधित करते हुए भाजपा नेता ऑडिटर रमेश की हत्या का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सेलम में उनकी आत्मीयता KN लक्ष्मणन से भी थी, जो राज्य में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे। पीएम मोदी ने याद किया कि कैसे उन्होंने तमिलनाडु में भाजपा के विस्तार में बड़ी भूमिका निभाई, आपातकाल के दौरान संघर्ष किया, कई विद्यालय शुरू करवाए। इसके बाद पीएम मोदी अचानक से भावुक हो उठे।

उन्होंने कहा कि अब जब वो सेलम आए हैं तो ऑडिटर रमेश की याद आनी भी स्वाभाविक है। इसके बाद वो कुछ देर तक भावुक हो गए और कुछ बोल नहीं सके। प्रधानमंत्री ने कहा, “दुर्भाग्य से सेलम का मेरा वो रमेश हमारे बीच नहीं है। पार्टी के लिए रमेश दिन-रात काम करने वाले हमारे साथी थे, एक अच्छे प्रवक्ता थे। लेकिन, उनकी हत्या कर दी गई। मैं उन्हें आज उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।” इसके बाद सभी नेताओं एवं वहाँ आई जनता ने खड़े होकर ऑडिटर रमेश को श्रद्धांजलि अर्पित की।

याद दिला दें कि सेलम में ही जुलाई 2013 में ऑडिटर रमेश की हत्या कर दी गई थी। वो राज्य में तब पार्टी के स्टेट जनरल सेक्रेटरी थे। 54 वर्षीय V रमेश की हत्या मरावानेरी स्थित उनके घर में घुस कर की गई थी। वो दिन भर आम लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं से मिल कर रात 10 बजे घर पहुँचे थे, जहाँ हत्यारे पहले से छिपे हुए थे। उनके गर्दन पर वार किया गया था। मौके पर ही उनकी मौत हो गई थी। उससे पहले ‘हिन्दू मुन्नानी’ संगठन के वेल्लईअप्पन की हत्या हुई थी।

तब हिन्दू कार्यकर्ताओं को सुरक्षा देने की माँग भी की गई थी। 1994 में ‘हिन्दू मुन्नानी’ के प्रदेश अध्यक्ष राजगोपालन की हत्या हुई थी। CB-CID ने इस मामले में बिलाल मलिक और पुलिस फखरुद्दीन को गिरफ्तार किया था। ये दोनों 2011 में तिरुमंगलम (मदुरै) में हुए पाइप बम ब्लास्ट में भी शामिल थे। इन दोनों के अलावा अबू बकर सिद्दीकी और पन्ना इस्माइल भी इस बम धमाके में शामिल थे। इन आतंकियों का नाम वेल्लईअप्पन की हत्या और अप्रैल 2013 में बेंगलुरु स्थित भाजपा दफ्तर में हुए बम ब्लास्ट में भी आया था।

ऑडिटर रमेश 1978 से ही RSS से जुड़े हुए थे। उनकी माँ ने उनकी हत्या के बाद न्याय की लड़ाई लड़ी। उनकी माँ ने बताया था कि बम धमाकों के बाद कई हिन्दू कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया गया, जिनमें उनका बेटा भी था। 2014 में चार्जशीट दायर होने के बावजूद ये केस खिंचता रहा, जिस पर 2023 में उन्होंने नाराज़गी भी जताई थी। मद्रास हायकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के रवैया पर नाराज़गी जताई थी और केस को जल्द खत्म करने के लिए कहा था।

पीएम मोदी ने सेलम की रैली में राहुल गाँधी द्वारा शक्ति से लड़ने वाला बयान दिए जाने पर फिर से निशाना साधा। उन्होंने कहा कि हमारे शास्त्र साक्षी हैं कि विनाश उनका होता है, जो शक्ति को खत्म करने का विचार रखते हैं। पीएम मोदी ने ऐलान किया कि ऐसे खतरनाक विचारों को हराने की शुरुआत 19 अप्रैल को सबसे पहले तमिलनाडु करेगा। उन्होंने कहा कि INDI एलायंस वाले लोग बार-बार, जानबूझकर हिंदू धर्म का अपमान करते हैं, हिंदू धर्म के खिलाफ इनका हर बयान बहुत सोचा समझा हुआ होता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी और धर्म के खिलाफ इनकी जुबान से एक शब्द नहीं निकलता, लेकिन हिंदू धर्म को गाली देने में ये एक सेकंड नहीं लगाते। उन्होंने कहा, “मोदी, देश की नारीशक्ति की हर परेशानी के आगे ढाल बनकर खड़ा है। महिलाओं को धुआँ मुक्त जीवन देने के लिए हमने उज्ज्वला LPG गैस कनेक्शन दिए, हमने फ्री मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए आयुष्मान योजना शुरू की। इन सभी योजनाओं के केंद्र में नारीशक्ति ही है।”

‘मेरे साथ दोगला व्यवहार हुआ’: महेश भट्ट का ‘कैरेक्टर’ एक्टर रणवीर शौरी ने बताया, कहा- जो सुशांत सिंह राजपूत के साथ हुआ वो बॉलीवुड का सच

बॉलीवुड अभिनेता रणवीर शौरी हाल में स्मिता प्रकाश के पॉडकॉस्ट में नजर आए। इस दौरान उन्होंने बॉलीवुड फिल्मों से लेकर बॉलीवुड में राजनीति तक के मुद्दे पर चर्चा की और इसी दौरान उन्होंने एक्टर सुशांत सिंह राजपूत को लेकर भी बात की। रणवीर शौरी ने सुशांत का मुद्दा छिड़ने पर बताया कि उन्हें भी भट्ट परिवार द्वारा मैन्युपुलेट किया गया था। इंटरव्यू में 55 मिनट के बाद इस मुद्दे पर चर्चा देख सकते हैं।

रणवीर शौरी ने कहा, “मेरे मन में मिस्टर भट्ट (महेश भट्ट) के लिए बहुत सम्मान था, लेकिन जब तक उनकी बेटी के साथ वह बवाल नहीं हुआ था, तब तक। जब मैं उनकी बेटी (पूजा भट्ट) को डेट कर रहा था, तो मैंने देखा कि वास्तव में उनके प्रति मेरे मन में जो भी सम्मान था, उसका इस्तेमाल वह मुझे बरगलाने के लिए कर रहे थे। मेरे साथ बहुत ही दोगला व्यवहार किया जा रहा था।”

उन्होंने सुशांत के बारे में बात करते हुए कहा कि सुशांत के साथ जो भी हुआ उसके बाद उन्होंने इस पर बोलने की ठानी। वह बताते हैं कि सुशांत सिंह के साथ जो हुआ वो इंडस्ट्री का सच है। फिल्म इंडस्ट्री में खूब गुटबाजी होती है और ऑफ द रिकॉर्ड हर कोई इस बात को स्वीकार करता है।

उन्होंने कहा, “यह इंडस्ट्री में खूब होता है…किसी के खिलाफ गैंग बनाना, उन्हें साइडलाइन कर देना, किसी और का सहारा लेकर उसके ऊपर खड़े हो जाना, किसी के करियर को बर्बाद करना। यह होता है। यह सच है। ऐसा राजनीति, कॉरपोरेट और मीडिया में भी होता है, लेकिन यह ग्लैमरस नहीं है।”

इस दौरान शौरी ने बताया कि वो और सुंशांत सिंह राजपूत एक दूसरे के दोस्त थे। दोनों ने एक साथ ‘सोनचिरैया’ में काम किया था। फिल्म शूटिंग के दौरान दोनों का बॉन्ड फिजिक्स के कारण डेवलप हुआ। दोनों को फिजिक्स पसंद थी और दोनों इस पर काफी बात करते थे। शौरी ने यह भी बताया कि जब वो लोग शूटिंग पर थे उस समय चंद्र ग्रहण होने वाला था। उसे देखने के लिए सुशांत ने मुंबई से अपना टेलिस्कोप मंगवाया था।

नाम बदल हिंदू लड़की को फँसाया, रेप-कई बार गर्भपात: असम पुलिस ने हमीदुल इस्लाम को दबोचा, पीड़िता बोली- लव जिहाद का हुई शिकार

असम के गुवाहाटी से लव जिहाद का एक नया मामला सामने आया है। हमीदुल इस्लाम पर हिन्दू पहचान से लड़की को प्यार के जाल में फँसाने और रेप करने का आरोप है। पीड़िता का कई बार गर्भपात भी करवाया गया है। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने FIR दर्ज कर सोमवार (18 मार्च 2024) को हमीदुल इस्लाम को गिरफ्तार कर लिया। मामले की जाँच जारी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना गुवाहाटी के चाँदमारी थाना क्षेत्र की है। हिन्दू पीड़िता ने अपनी शिकायत में कहा है कि हमीदुल इस्लाम ने उसे अपना नाम ‘जून’ बताया था। कुछ ही समय की बातचीत में उसने पीड़िता का भरोसा जीत लिया। दोनों में मेल-मिलाप होने लगा। कुछ समय बाद हमीदुल ने पीड़िता से शारीरिक संबंध भी बनाने शुरू कर दिए। इस दौरान पीड़िता कम से कम 5 बार गर्भवती हुई। हर बार हमीदुल ने उसका गर्भपात करवा दिया।

शिकायत में पीड़िता ने खुद को लव जिहाद की शिकार बताया है। उसने कहा है कि जब तक वह हमीदुल के चंगुल से निकल पाती तब तक वह उससे 12 लाख रुपए भी हड़प चुका था। पैसे लेने के लिए हमीदुल पीड़िता को अलग-अलग बहाने से मजबूर करता था। कभी-कभार धमकी भी देता था। पीड़िता की शिकायत पर FIR दर्ज कर चाँदमारी पुलिस जाँच कर रही है। केस दर्ज होने की जानकारी मिलते ही हमीदुल फरार हो गया था। लेकिन पुलिस ने 18 मार्च को उसे गुवाहाटी के जीएस रोड इलाके से गिरफ्तार कर लिया।

उससे पूछताछ चल रही है। मिली जानकारी के अनुसार हमीदुल एक स्थानीय यूट्यूबर सनी गोल्डन का भाई है। फेसबुक पर सनी गोल्डन के 1,28,000 फॉलोअर्स हैं। वहीं उसके यूट्यूब चैनल पर 6,39,000 सब्सक्राइबर हैं। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि इस घटना के बाद सनी गोल्डन ने अपना इस्टाग्राम पेज बंद कर दिया है।

‘ये ऐसे राम निकले जिन्होंने सीता को बाजार में बिकने के लिए रख दिया’: लद्दाख में आमरण अनशन पर बैठे एक्टिविस्ट वांगचुक का विवादित बयान

लद्दाख के इंजीनियर सोनम वांगचुक इस समय विभिन्न माँगों को लेकर आमरण अनशन पर हैं। इस दौरान उन्होंने विभिन्न मीडिया संस्थानों को इंटरव्यू भी दिया। सोनम वांगचुक पिछले 2 सप्ताह से आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं। NDTV से बात करते हुए अब उन्होंने एक ऐसी टिप्पणी कर दी है, जिसे हिन्दू विरोधी बताया जा रहा है। ‘क्लाइमेट फ़ास्ट’ के दौरान उनकी इस टिप्पणी को लेकर उनका विरोध हो रहा है। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। सोनम वांगचुक के जीवन से प्रेरित ‘थ्री इडियट्स’ (2009) फिल्म भी बन चुकी है, जिसमें उनका किरदार आमिर खान ने निभाया था।

असल में सोनम वांगचुक केंद्र की मोदी सरकार से भी नाखुश हैं। NDTV की एंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू कश्मीर यात्रा के दौरान कहा था कि वो वहाँ के लोगों का दिल जीतने और उनके साथ कनेक्ट करने के लिए आए हैं। इसके बाद एंकर नीता शर्मा ने सवाल पूछा कि क्या पीएम मोदी लद्दाख के लोगों का दिल जीत पाए हैं या नहीं? इस पर सोनम वांगचुक ने जवाब दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लद्दाख के लोगों का दिल जीत चुके थे 2019 में।

सोनम वांगचुक ने कहा कि उन्होंने लद्दाख के लोगों को इतना ज़्यादा कृतज्ञ कभी नहीं देखा, जितने वो तब थे जब लद्दाख को एक अलग केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा दिया गया। सोनम वांगचुक ने कहा कि अब लोगों को ये लग रहा है कि उन्हें आसमान से बचाया और खजूर पर अटकाया। एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक बोले, “मैं तो इसे इस तरह देखता हूँ – ये ऐसे राम निकले जो सीता को रावण से छुड़ा कर लाए, लेकिन घर नहीं ले गए बल्कि भरी बाजार में बिकने के लिए रख दिया।”

ऊपर संलग्न किए गए वीडियो में आप 8:20 के बाद सोनम वांगचुक का ये बयान सुन सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि उद्योग और खनन के अलावा खरीद-फरोख्त के लिए लद्दाख को खुला छोड़ दिया गया है। उन्होंने कहा, “रामभक्त जो राम के मंदिर बनाते हैं, वो उनके आदर्शों पर चलेंगे ना? राम मूर्तियों से ज्यादा आदर्शों में हैं। राम का आदर्श रहा है – प्राण जाए पर वचन न जाए।” उन्होंने पीएम मोदी पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। बकौल सोनम वांगचुक, आमरण अनशन की मुख्य माँगें हैं – लद्दाख की संस्कृति का संरक्षण, वहाँ लोकतंत्र बहाल हो।

नारायणमूर्ति का 4 महीने का पोता अरबपतियों की लिस्ट में शामिल, दादा ने दिए इंफोसिस के ₹240 करोड़ के शेयर

भारतीय टेक कम्पनी इंफोसिस के संस्थापक नारायणमूर्ति ने अपने चार महीने के पोते को ₹240 करोड़ का उपहार दिया है। उन्होंने यह उपहार इंफोसिस के शेयर के रूप में दिया है, जिसकी चर्चा अब सब कहीं हो रही है। इसी के साथ उनका पोता अब भारत के अरबपतियों की सूची में शुमार हो गया है।

इंफोसिस के संस्थापक नारायणमूर्ति के बेटे रोहन मूर्ति और बहू अपर्णा कृष्णन के यहाँ चार माह पहले बच्चे ने जन्म लिया था। बच्चे का नाम एकाग्रह रखा गया है। अपने पोते एकाग्रह को नारायणमूर्ति ने अपनी कम्पनी इंफोसिस के 15 लाख शेयर दिए हैं। यह शेयर उन्होंने अपने हिस्से गिफ्ट के तौर पर दिए हैं। इन 15 लाख शेयरों का बाजार भाव लगभग ₹240 करोड़ होता है। इसी के साथ उनका पोता एकाग्रह भी अरबपति के साथ साथ इंफोसिस के प्रमोटर समूह का हिस्सा बन गया है।

यह जानकारी स्टॉक एक्सचेंज में दी गई एक सूचना के बाद सामने आई है। इसके अनुसार, नारायणमूर्ति ने जितने शेयर उपहार के तौर पर दिए हैं, वह पूरी कम्पनी का 0.04% हिस्सा हैं। इसी के साथ नारायणमूर्ति की इंफोसिस में हिस्सेदारी 0.40% से घट कर 0.36% पर आ गई।

नारायणमूर्ति के बेटे और एकाग्रह के पिता रोहन सोरोको कम्पनी के फाउंडर हैं। रोहन की इंफोसिस में 1.6% की हिस्सेदारी है। वह अन्य कई सम्मनित संस्थाओं के सदस्य भी हैं। उनका विवाह 2018 में अपर्णा कृष्णन से हुआ था। उनका इससे पहले एक और विवाह भारत की बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनी TVS के मालिक की बेटी लक्ष्मी वेणु से हुआ था। हालाँकि, दोनों के बीच 2015 में तलाक हो गया।

नारायणमूर्ति के बेटे रोहन की बहन अक्षता मूर्ति इंग्लैण्ड के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक की पत्नी हैं। उनके भी दो बेटियाँ हैं। अक्षता मूर्ति की भी इंफोसिस में हिस्सेदारी है। वह कम्पनी में 1% की हिस्सेदारी रखती हैं। अक्षता और रोहन की माता तथा नारायणमूर्ति की पत्नी तथा हाल ही में राज्यसभा सांसद मनोनीत की गईं सुधा मूर्ति के पास भी इंफोसिस में 0.9% की हिस्सेदारी है। नारायणमूर्ति की पत्नी और समाजसेवी सुधा मूर्ति को राष्ट्रपति ने राज्यसभा में मनोनीत किया था।

गौरतलब है कि इससे पहले भी इंफोसिस के संस्थापक सदस्यों में से एक नंदन नीलेकणी के पोते तनुष नीलेकणी को भी अरबों के शेयर दिए गए थे। वह वर्तमान में 6 वर्ष के हैं। जब उन्हें 7.76 लाख शेयर दिए गए थे। इनकी वर्तमान में बाजार कीमत ₹120 करोड़ के आसपास है।

मंदिर में तोड़फोड़, मूर्ति को पहनाई जूतों की माला… मजदूरों को जिंदा जलाने की कोशिश करने वाला मोहम्मद रफीक गुजरात दंगों में भी था एक्टिव

गुजरात के कच्छ जिले के अंजार में रविवार (17 मार्च 2024) को मजदूरी माँगने पर ठेकेदार मोहम्मद रफीक ने 12 मजदूरों को उनके परिवार सहित जिन्दा जलाने का प्रयास किया था। एक दर्जन झोपड़ियों में आग लगाने वाले मोहम्मद रफीक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। अब जाँच में रफीक के कई पुराने कारनामे भी सामने आए हैं। गुजरात में 2002 में हुए दंगों में सक्रिय रहे रफीक ने एक मंदिर में बजरंग बली की मूर्ति तोड़ कर जूतों की माला पहना दी थी। इस मामले में उसे सजा भी हो चुकी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कच्छ के अंजार में हिंदू मजदूरों की झोपड़ियों में जानबूझकर आग लगाने का आरोपित रफीक का आपराधिक रिकॉर्ड सामने आया है। साल 2002 में वह हिन्दू आस्था को ठेस पहुँचाने के एक केस में जेल भी जा चुका है। तब 2002 के दंगों में सक्रिय रहा मोहम्मद रफीक अपने साथियों सहित अंजार के एक मंदिर में घुस गया था। यहाँ उसने न सिर्फ मंदिर में तोड़फोड़ की थी, बल्कि बजरंग बली की मूर्ति की आँखें फोड़ दी थीं। इसके बाद उसने बजरंग बली की मूर्ति को जूतों की माला पहनाई थी।

साल 2002 के दंगों में पुलिस ने रफीक के खिलाफ इसी मामले को ले कर FIR भी दर्ज की थी। इस FIR में हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाने सहित अन्य धाराओं में कार्रवाई हुई थी। बाद में केस का ट्रायल कोर्ट में चला था। अदालत ने रफीक को 3 साल की सजा भी सुनाई थी। अदालत के इस आदेश की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। इस आदेश के मुताबिक 2 अप्रैल 2002 की रात मोहम्मद रफीक अपने साथियों कासम और दिलावर के साथ अंजार के तुरियावाड इलाके में आने वाले एक हिन्दू मंदिर में घुसा था।

इस घटना के समय मोहम्मद रफीक महज 19 साल का था। अदालत में यह आरोप सिद्ध हुआ था कि रफीक ने साथियों के साथ बजरंग बली की मूर्ति की आँखें निकाली थी। मूर्ति को कई तरफ से क्षतिग्रस्त कर दिया था। मूर्ति तोड़ने के बाद रफीक ने पहले उस पर हरा रंग डाला और बाद में जूतों की माला भी पहना दी थी। तब मंदिर की सुरक्षा में तैनात होमगार्ड जवान किसी काम से बाहर गया था। वापस लौटने के बाद हुई जाँच पड़ताल में इस करतूत के पीछे रफीक का हाथ निकला था।

उस समय श्रद्धालुओं की तरफ से दी गई शिकायत का आधार पर रफीक और उसके साथियों पर आईपीसी की धारा 457, 295, 295-K, 153-K, 120-B के तहत FIR दर्ज हुई थी। अदालत में रफीक अपने गुनाह को कबूल करने से बचता रहा। हिंदू पक्ष के गवाहों के अलावा 28 सबूत कोर्ट के सामने पेश किए गए थे। अंत में अदालत ने तीनों आरोपितों को दोषी माना था। अंजार कोर्ट ने 28 अगस्त 2014 को रफीक, कासम और दिलावर को 3-3 साल की सजा सुनाई थी। इन सभी पर 5-5 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया था।

बताया जा रहा है कि रफीक साल 2017 में जेल काट कर बाहर आ गया था। फिलहाल उसे 12 मजदूरों और उनके परिवारों को जान से मार डालने की नीयत से की गई आगजनी मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।

‘शानदार… पत्रकार हो पूनम जैसी’: रवीश कुमार ने ठोकी जिसकी पीठ इलेक्टोरल बॉन्ड पर उसकी झूठ की पोल खुली, वायर ने डिलीट की खबर

इलेक्टोरल बॉन्ड पर चल रही सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बीच वामपंथियों का एक नया खेल सामने आया। ‘द वायर’ ने हाल में अपनी साइट पर एक रिपोर्ट पब्लिश करते हुए द क्विंट की पत्रकार पूनम अग्रवाल का महिमामंडन किया क्योंकि पूनम ने चुनावी बॉन्ड की जारी लिस्ट पर सवाल खड़े कर दिए थे।

इस स्टोरी के बाद पूरी वामपंथी जमात पूनम अग्रवाल की ‘खोजी’ और ‘जुनूनी’ पत्रकारिता की तारीफ करने लगी। आरफा खानुम शेरवानी से लेकर रवीश कुमार तक ने जो पूनम की हवा बनाई वो देखने वाली थी। लेकिन, इन सबकी फजीहत तब हुई जब पूनम के किए दावे सच साबित नहीं हुए और द वायर को अपनी रिपोर्ट ही डिलीट करनी पड़ी।

नीचे स्क्रीनशॉट में आप डिलीट कंटेंट देख सकते हैं जिसका शीर्षक था- “वो पत्रकार जिसने इलेक्टोरल बॉन्ड की जारी लिस्ट में खामियाँ बताईं।”

क्यों डिलीट की द वायर ने स्टोरी

दरअसल, द वायर के इस आर्टिकल में एक जगह पूनम अग्रवाल का ट्वीट एड था जो कि 17 मार्च 2024 को किया गया था। इसमें दावा था कि एसबीआई ने इलेक्टोरल बॉन्ड की जानकारी देते हुए जो अपनी लिस्ट जारी की है, उसमें कहा गया है कि उन्होंने 20 अक्टूबर 2020 में बॉन्ड खरीदा था जबकि हकीकत में उन्होंने तो अप्रैल 2018 में खरीदा है। उन्होंने अपने इस ट्वीट में एसबीआई पर डेटा से छेड़छाड़ करने की बातें कहीं।

उनके इस ट्वीट के बाद वामपंथियों ने हल्ला मचा दिया कि एसबीआई बॉन्ड खरीदने वालों के विवरण के साथ छेड़छाड़ कर रहा है और पूनम की खोजी की पत्रकारिता को सलाम होना चाहिए कि उन्होंने इसे उजागर किया। खुद पूनम भी इन ट्विट्स में हो रही वाह वाही से खुश होने लगीं।

हालाँकि कुछ समय बाद पूनम अग्रवाल एक नए ट्वीट के साथ आई। इस ट्वीट में उन्होंने अपने लगाए आरोपों पर सफाई दी थी।

18 मार्च को किए गए उनके ट्वीट में देख सकते हैं, वो लिखती हैं- “मुझे एक वीडियो दिखी जो मैंने क्विंट के लिए रिकॉर्ड की थी और उसमें 20 अक्टूबर 2020 को जारी इलेक्टोरल बॉन्ड दिखा रही थी। मुझे नहीं याद है कि मैंने 2020 में खरीदा या 2018 में। यूनिक नंबर से मेरे डाउट क्लियर होंगे। तब तक एसबीआई डेटा पर कोई सवाल नहीं।”

इसके बाद अगले ट्वीट में पूनम अग्रवाल ने कहा कि आप चाहें तो मेरी कमजोर यादाश्त को दोषी ठहरा सकते हैं। 2020 कोविड वाला साल था। उस समय बहुत सारी चीजें हो रहीं थीं। शायद इसीलिए मुझे नहीं याद रहा। मेरी कमजोर यादाश्त के लिए क्षमा।

द वायर ने माँगी माफी लेकिन वामपंथी नहीं थक रहे तारीफ करते-करते

बता दें कि इस पूरे विवाद में पूनम अग्रवाल के दावे से लेकर ‘द वायर’ ने जो प्रोपगेंडा फैलाया उसे उन्होंने हटा लिया है लेकिन रवीश समेत कई वामपंथी पत्रकार सोशल मीडिया पर पूनम की तारीफ करते नहीं थक रहे। ट्वीट में उन्हें असली खोजी पत्रकार कहा जा रहा है। पूनम अग्रवाल के नए चैनल को सब्सक्राइब करने की अपील की जा रही है।

सुशांत सिंह ने लिखा- पूनम अग्रवाल तो असली पत्रकार हैं। लेकिन मोदी सरकार कभी नहीं मानेगी कि वो सीक्रेट नंबर के लिए बॉन्ड की जानकारी रख रहे थे।

आरफा ने लिखा- पूनम अग्रवाल का यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब करें और उनकी इलेक्टोरल बॉन्ड पर शानदार वीडियोज देंखें।

रवीश कुमार ने लिखा- बिलकुल। पूनम का काम शानदारा है। मैं सोचता हूँ जो सैंकड़ों संपादक हैं न्यूज रूम में दादा बनकर घूमते हैं वो पूनम जैसी पत्रकार को देखकर क्या सोचते होंगे। अपने पत्रकारों से कहते होंगे तुम लोग भजन करो साहेब का।

बता दें कि चुनावी बॉन्ड में विसंगति के बारे में पूनम अग्रवाल के दावे धराशायी होने के बाद यह भी जानना जरूरी है कि खोजी पत्रकार ने जिस यूनिक नंबर को लेकर सवाल खड़े किए थे, उस पर एसबीआई ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वो नंबर संख्यात्मक कोड है।

एसबीआई का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने खुलासा किया कि बैंकों द्वारा जारी किए गए बांड नंबर केवल बांड पर उपलब्ध हैं, कहीं और नहीं। बैंक ने यह भी कहा कि छिपा हुआ अल्फ़ान्यूमेरिक कोड एक सुरक्षा सुविधा थी और ऑडिटिंग उद्देश्यों के लिए नहीं।

सुप्रीम कोर्ट में बाबा रामदेव को लगानी होगी हाजिरी, आचार्य बालकृष्ण भी तलब: पतंजलि के विज्ञापन को लेकर कार्रवाई, पूछा- क्यों न की जाए अवमानना की कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट ने बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण को तलब किया है। यह मामला पतंजलि आयुर्वेद के भ्रामक विज्ञापनों से जुड़ा है। कोर्ट ने बाबा रामदेव और कंपनी के एमडी आचार्य बालकृष्ण को दो हफ्ते बाद व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने को कहा है। कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई कि जब पतंजलि को जवाब देने के लिए 2 सप्ताह का समय दिया गया था, इसके बावजूद पतंजलि की तरफ से कोई जवाब क्यों नहीं दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने कंपनी और बालकृष्ण को पहले जारी किए गए अदालत के नोटिसों का जवाब दाखिल नहीं करने पर कड़ी आपत्ति जताई। सुप्रीम कोर्ट द्वारा उन्हें नोटिस जारी कर पूछा गया था कि अदालत को दी गई अंडरटेकिंग का पहली नजर में उल्लंघन करने के लिए उनके खिलाफ अवमानना कार्यवाही क्यों नहीं शुरू की जाए। सुप्रीम कोर्ट ने उनके वकील को भी फटकार लगाई और कहा कि जब 2 सप्ताह का समय नोटिस का जवाब देने के लिए दिया गया था, तब क्यों नहीं इसका जवाब दिया गया।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, पतंजलि की तरफ से कोर्ट में हाजिर हुए मुकुल रोहतगी से कहा कि अब वादी नंबर 5 (पतंजलि के एमडी) आचार्य बालकृष्ण और बाबा रामदेव, दोनों को ही अगली सुनवाई के समय कोर्ट में हाजिर रहना पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहले दिनए गए निर्देशों के मुताबिक क्यों नहीं काम किए गए? क्यों न तुम्हारे (बाबा रामदेव) के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए?

सुप्रीम कोर्ट इंडियन मेडिकल एशो की उस याचिका की सुनवाई कर रहा है, जिसमें बाबा रामदेव पर कोरोना की वैक्सीन और एलोपैथिक दवाओं के खिलाफ मुहिम चलाने का आरोप लगाया गया है। कोर्ट ने पहले भी बाबा रामदेव को नोटिस जारी कर कोर्ट में बुलाया था। तीन हफ्ते में बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण से जवाब माँगा गया था। साथ ही कंपनी के विज्ञापन छापने पर भी रोक लगा दी थी। इसके लिए कंपनी ने कोर्ट में अंडरटेकिंग भी दी थी लेकिन इसके बावजूद विज्ञापन छपवाया। इस पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।

इन विज्ञापनों में बाबा रामदेव की भी तस्वीर लगी थी, इसलिए उन्हें भी पार्टी बनाया गया। इस दौरान कोर्ट ने केंद्रीय आयुष मंत्रालय को भी फटकार लगाई और कहा कि उसने एक दिन पहले क्यों जवाब दाखिल किया? इस पर केंद्र ने अदालत को बताया कि उन्हें समुचित जवाब देने के लिए और समय चाहिए।

‘प्रथम दृष्टया मनी लॉन्डरिंग के दोषी हैं सत्येंद्र जैन, ED के पास पर्याप्त सबूत’: सुप्रीम कोर्ट ने दिया तुरंत सरेंडर करने का आदेश, नहीं काम आईं कॉन्ग्रेस नेता सिंघवी की दलीलें

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (18 मार्च, 2024) को माना कि AAP (आम आदमी पार्टी) नेता सत्येंद्र जैन प्रथम दृष्टया मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में दोषी हैं। उनके सहयोगियिं वैभव जैन और अंकुश जैन को लेकर भी सर्वोच्च न्यायालय की यही राय है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले के तथ्यों एवं परिस्थितियों की संपूर्णता को ध्यान में रखे जाने पर हमारी राय है कि अपीलकर्ता हमें संतुष्ट करने में पूरी तरह विफल रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि सत्येंद्र जैन और उनके सहयोगी ये साबित करने में विफल रहे कि वो दोषी नहीं हैं।

वहीं ED (प्रवर्तन निदेशालय) के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जाँच एजेंसी के पास पर्याप्त सामग्रियाँ हैं जिनसे पता चलता है कि सत्येंद्र जैन प्रथम दृष्टया दोषी हैं। सत्येंद्र जैन को फिर से जमानत देने से भी सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया और कहा कि वो शर्तों को पूरा करने में विफल रहे हैं। ये मामला 2010-12 और 2015-16 का है। सत्येंद्र जैन को 2022 में ही गिरफ्तार किया गया था। मनी लॉन्ड्रिंग के लिए 4 फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल किया गया था।

इन कंपनियों में सत्येंद्र जैन का प्रभाव था। सत्येंद्र जैन की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में कॉन्ग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी बतौर वकील पेश हुए। जस्टिस बेला M त्रिवेदी और पंकज मिथल की पीठ ने कहा कि इसमें जरा सा भी शक नहीं है कि मनी लॉन्ड्रिंग में सत्येंद्र जैन का रोल था। IT स्कीम,2016 के तहत अंकुश और वैभव ने झूठी घोषणाएँ दर्ज की। दोनों ने 8.26 करोड़ रुपयों की अलग-अलग एंट्री की। आयकर विभाग ने इन डिक्लेरेशन को Void माना। यानी, इन्होंने दिखाया कि कंपनियों में ये निवेश उनका है जबकि ये सत्येंद्र जैन का था।

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सत्येंद्र जैन को कहा है कि वो तुरंत विशेष अदालत के समक्ष तुरंत आत्म-समर्पण करें। सत्येंद्र जैन को मई 2022 में गिरफ्तार किया गया था। फ़िलहाल वो जमानत पर बाहर चल रहे हैं। अप्रैल 2023 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्पीडी ट्रायल का अधिकार और न्याय तक पहुँच भारत के संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार हैं। इन आरोपों के बावजूद AAP संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन का बचाव करते रहे हैं।

बुल्गारिया के राष्ट्रपति ने कहा ‘थैंक यू’ तो बोले PM मोदी- आतंकवाद से लड़ने को हैं प्रतिबद्ध, भारतीय नौसेना ने समुद्री डाकुओं से छुड़ाए जहाज और बंधक

भारतीय नौसेना ने हाल ही में बुल्गारिया के 7 नागरिकों समेत 17 नागरिकों को सोमालिया के जल दस्युओं के चंगुल के बचाया है। नौसेना ने यह ऑपरेशन भारत से हजारों किलोमीटर दूर समुद्र में किया। नौसेना के 7 नागरिकों को बचाने को लेकर बुल्गारिया के राष्ट्रपति रूमेन रादेव ने भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी धन्यवाद कहा है। पीएम मोदी ने भी उनके सन्देश का जवाब देते हुए कहा है कि बुल्गारिया के सातों नागरिक जल्द ही अपने देश लौटेंगे।

बुल्गारिया के राष्ट्रपति ने भारतीय नौसेना के ऑपरेशन में बचाए गए बुल्गारियन नागरिकों को छुड़वाने के लिए एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “डाकुओं के कब्जे से बुल्गारिया के जहाज “रुएन” और 7 नागरिकों सहित सभी नाविकों को बचाने की भारतीय नौसेना की बहादुर कार्रवाई के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति मैं आभार व्यक्त करता हूँ।”

इस पर पीएम मोदी ने भी उन्हें जवाब दिया है। उन्होंने लिखा, “बुल्गारिया के राष्ट्रपति रादेव जी, आपके संदेश के लिए धन्यवाद। हमें प्रसन्नता है कि बुल्गारिया के 7 नागरिक सुरक्षित हैं और वह जल्द ही अपने घर लौटेंगे। भारत समुद्र में नौवहन की स्वतंत्रता की रक्षा और हिंद महासागर क्षेत्र में डकैती तथा आतंकवाद से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है।”

इससे पहले बुल्गारिया की विदेश मंत्री मारिया जिबराइल ने भी भारतीय नौसेना को धन्यवाद किया था। उन्होंने एक्स पर लिखा, “मैं डाकुओं के कब्जे से जहाज रुएन और उसके नाविक दल के सदस्यों, जिनमें 7 बुल्गारिया के नागरिक भी शामिल हैं, को बचाने के सफल ऑपरेशन के लिए भारतीय नौसेना के प्रति अपना आभार व्यक्त करती हूँ। आपके सहयोग और इस कोशिश के लिए धन्यवाद। हम नाविकों के जीवन की रक्षा के लिए मिलकर काम करना जारी रखेंगे।”

इस पर भारतीय विदेश मंत्री ने कहा था कि दोस्त इसीलिए होते हैं।

गौरतलब है कि भारतीय नौसेना ने हिन्द महासागर क्षेत्र में बुल्गारिया की कम्पनी द्वारा संचालित एक जहाज एमवी रुएन पर बंधक बनाए गए 17 नाविकों को मुक्त करवाया था। इस जहाज को सोमालिया के डाकुओं के कब्जे से छुड़वा लिया गया था। नौसेना ने इस ऑपरेशन में 35 सोमालियाई डाकुओं को पकड़ा गया था और उन्हें भारत लेकर आने की कार्रवाई चालू कर दी थी। भारतीय नौसेना के कमांडो ‘मार्कोस’ ने इस जहाज पर पहुँच कर इन डाकुओं का आत्मसमर्पण करवा दिया था।

इस जहाज को सोमालिया के डाकुओं ने दिसम्बर 2023 में बंधक बना लिया था। इसके बाद वह इसे सोमालिया ले गए थे। वह वापस इसे समुद्र में भी लाए थे और इस जहाज के जरिए इस इलाके में लूटमार को अंजाम दे रहे थे। भारतीय नौसेना लगातार इस जहाज पर नजर रख रही थी। इस पर मौजूद डाकुओं ने भारतीय नौसेना पर गोलीबारी की थी। उन्होंने नौसेना का एक ड्रोन भी गिराया था। इसके बाद नौसेना के कमांडो को भारतीय वायु सेना के विमान से समुद्र में उतारा गया और उन्होंने इस जहाज को मुक्त करवाया।

भारतीय नौसेना के अंतरराष्ट्रीय समुद्र में इस बहादुरी के काम की काफी प्रशंसा हुई है। इसके साथ ही भारत की नौसेना का इस इलाके में वर्चस्व भी बढ़ा है। गौरतलब है कि बीते कुछ समय में इस इलाके में जहाज़ों पर हमले बढ़े हैं। भारतीय नौसेना लगातार इस इलाके में जहाज़ों के सुरक्षित निकलने को लेकर गश्त कर रही है।