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‘ये ऐसे राम निकले जिन्होंने सीता को बाजार में बिकने के लिए रख दिया’: लद्दाख में आमरण अनशन पर बैठे एक्टिविस्ट वांगचुक का विवादित बयान

लद्दाख के इंजीनियर सोनम वांगचुक इस समय विभिन्न माँगों को लेकर आमरण अनशन पर हैं। इस दौरान उन्होंने विभिन्न मीडिया संस्थानों को इंटरव्यू भी दिया। सोनम वांगचुक पिछले 2 सप्ताह से आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं। NDTV से बात करते हुए अब उन्होंने एक ऐसी टिप्पणी कर दी है, जिसे हिन्दू विरोधी बताया जा रहा है। ‘क्लाइमेट फ़ास्ट’ के दौरान उनकी इस टिप्पणी को लेकर उनका विरोध हो रहा है। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। सोनम वांगचुक के जीवन से प्रेरित ‘थ्री इडियट्स’ (2009) फिल्म भी बन चुकी है, जिसमें उनका किरदार आमिर खान ने निभाया था।

असल में सोनम वांगचुक केंद्र की मोदी सरकार से भी नाखुश हैं। NDTV की एंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू कश्मीर यात्रा के दौरान कहा था कि वो वहाँ के लोगों का दिल जीतने और उनके साथ कनेक्ट करने के लिए आए हैं। इसके बाद एंकर नीता शर्मा ने सवाल पूछा कि क्या पीएम मोदी लद्दाख के लोगों का दिल जीत पाए हैं या नहीं? इस पर सोनम वांगचुक ने जवाब दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लद्दाख के लोगों का दिल जीत चुके थे 2019 में।

सोनम वांगचुक ने कहा कि उन्होंने लद्दाख के लोगों को इतना ज़्यादा कृतज्ञ कभी नहीं देखा, जितने वो तब थे जब लद्दाख को एक अलग केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा दिया गया। सोनम वांगचुक ने कहा कि अब लोगों को ये लग रहा है कि उन्हें आसमान से बचाया और खजूर पर अटकाया। एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक बोले, “मैं तो इसे इस तरह देखता हूँ – ये ऐसे राम निकले जो सीता को रावण से छुड़ा कर लाए, लेकिन घर नहीं ले गए बल्कि भरी बाजार में बिकने के लिए रख दिया।”

ऊपर संलग्न किए गए वीडियो में आप 8:20 के बाद सोनम वांगचुक का ये बयान सुन सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि उद्योग और खनन के अलावा खरीद-फरोख्त के लिए लद्दाख को खुला छोड़ दिया गया है। उन्होंने कहा, “रामभक्त जो राम के मंदिर बनाते हैं, वो उनके आदर्शों पर चलेंगे ना? राम मूर्तियों से ज्यादा आदर्शों में हैं। राम का आदर्श रहा है – प्राण जाए पर वचन न जाए।” उन्होंने पीएम मोदी पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। बकौल सोनम वांगचुक, आमरण अनशन की मुख्य माँगें हैं – लद्दाख की संस्कृति का संरक्षण, वहाँ लोकतंत्र बहाल हो।

नारायणमूर्ति का 4 महीने का पोता अरबपतियों की लिस्ट में शामिल, दादा ने दिए इंफोसिस के ₹240 करोड़ के शेयर

भारतीय टेक कम्पनी इंफोसिस के संस्थापक नारायणमूर्ति ने अपने चार महीने के पोते को ₹240 करोड़ का उपहार दिया है। उन्होंने यह उपहार इंफोसिस के शेयर के रूप में दिया है, जिसकी चर्चा अब सब कहीं हो रही है। इसी के साथ उनका पोता अब भारत के अरबपतियों की सूची में शुमार हो गया है।

इंफोसिस के संस्थापक नारायणमूर्ति के बेटे रोहन मूर्ति और बहू अपर्णा कृष्णन के यहाँ चार माह पहले बच्चे ने जन्म लिया था। बच्चे का नाम एकाग्रह रखा गया है। अपने पोते एकाग्रह को नारायणमूर्ति ने अपनी कम्पनी इंफोसिस के 15 लाख शेयर दिए हैं। यह शेयर उन्होंने अपने हिस्से गिफ्ट के तौर पर दिए हैं। इन 15 लाख शेयरों का बाजार भाव लगभग ₹240 करोड़ होता है। इसी के साथ उनका पोता एकाग्रह भी अरबपति के साथ साथ इंफोसिस के प्रमोटर समूह का हिस्सा बन गया है।

यह जानकारी स्टॉक एक्सचेंज में दी गई एक सूचना के बाद सामने आई है। इसके अनुसार, नारायणमूर्ति ने जितने शेयर उपहार के तौर पर दिए हैं, वह पूरी कम्पनी का 0.04% हिस्सा हैं। इसी के साथ नारायणमूर्ति की इंफोसिस में हिस्सेदारी 0.40% से घट कर 0.36% पर आ गई।

नारायणमूर्ति के बेटे और एकाग्रह के पिता रोहन सोरोको कम्पनी के फाउंडर हैं। रोहन की इंफोसिस में 1.6% की हिस्सेदारी है। वह अन्य कई सम्मनित संस्थाओं के सदस्य भी हैं। उनका विवाह 2018 में अपर्णा कृष्णन से हुआ था। उनका इससे पहले एक और विवाह भारत की बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनी TVS के मालिक की बेटी लक्ष्मी वेणु से हुआ था। हालाँकि, दोनों के बीच 2015 में तलाक हो गया।

नारायणमूर्ति के बेटे रोहन की बहन अक्षता मूर्ति इंग्लैण्ड के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक की पत्नी हैं। उनके भी दो बेटियाँ हैं। अक्षता मूर्ति की भी इंफोसिस में हिस्सेदारी है। वह कम्पनी में 1% की हिस्सेदारी रखती हैं। अक्षता और रोहन की माता तथा नारायणमूर्ति की पत्नी तथा हाल ही में राज्यसभा सांसद मनोनीत की गईं सुधा मूर्ति के पास भी इंफोसिस में 0.9% की हिस्सेदारी है। नारायणमूर्ति की पत्नी और समाजसेवी सुधा मूर्ति को राष्ट्रपति ने राज्यसभा में मनोनीत किया था।

गौरतलब है कि इससे पहले भी इंफोसिस के संस्थापक सदस्यों में से एक नंदन नीलेकणी के पोते तनुष नीलेकणी को भी अरबों के शेयर दिए गए थे। वह वर्तमान में 6 वर्ष के हैं। जब उन्हें 7.76 लाख शेयर दिए गए थे। इनकी वर्तमान में बाजार कीमत ₹120 करोड़ के आसपास है।

मंदिर में तोड़फोड़, मूर्ति को पहनाई जूतों की माला… मजदूरों को जिंदा जलाने की कोशिश करने वाला मोहम्मद रफीक गुजरात दंगों में भी था एक्टिव

गुजरात के कच्छ जिले के अंजार में रविवार (17 मार्च 2024) को मजदूरी माँगने पर ठेकेदार मोहम्मद रफीक ने 12 मजदूरों को उनके परिवार सहित जिन्दा जलाने का प्रयास किया था। एक दर्जन झोपड़ियों में आग लगाने वाले मोहम्मद रफीक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। अब जाँच में रफीक के कई पुराने कारनामे भी सामने आए हैं। गुजरात में 2002 में हुए दंगों में सक्रिय रहे रफीक ने एक मंदिर में बजरंग बली की मूर्ति तोड़ कर जूतों की माला पहना दी थी। इस मामले में उसे सजा भी हो चुकी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कच्छ के अंजार में हिंदू मजदूरों की झोपड़ियों में जानबूझकर आग लगाने का आरोपित रफीक का आपराधिक रिकॉर्ड सामने आया है। साल 2002 में वह हिन्दू आस्था को ठेस पहुँचाने के एक केस में जेल भी जा चुका है। तब 2002 के दंगों में सक्रिय रहा मोहम्मद रफीक अपने साथियों सहित अंजार के एक मंदिर में घुस गया था। यहाँ उसने न सिर्फ मंदिर में तोड़फोड़ की थी, बल्कि बजरंग बली की मूर्ति की आँखें फोड़ दी थीं। इसके बाद उसने बजरंग बली की मूर्ति को जूतों की माला पहनाई थी।

साल 2002 के दंगों में पुलिस ने रफीक के खिलाफ इसी मामले को ले कर FIR भी दर्ज की थी। इस FIR में हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाने सहित अन्य धाराओं में कार्रवाई हुई थी। बाद में केस का ट्रायल कोर्ट में चला था। अदालत ने रफीक को 3 साल की सजा भी सुनाई थी। अदालत के इस आदेश की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। इस आदेश के मुताबिक 2 अप्रैल 2002 की रात मोहम्मद रफीक अपने साथियों कासम और दिलावर के साथ अंजार के तुरियावाड इलाके में आने वाले एक हिन्दू मंदिर में घुसा था।

इस घटना के समय मोहम्मद रफीक महज 19 साल का था। अदालत में यह आरोप सिद्ध हुआ था कि रफीक ने साथियों के साथ बजरंग बली की मूर्ति की आँखें निकाली थी। मूर्ति को कई तरफ से क्षतिग्रस्त कर दिया था। मूर्ति तोड़ने के बाद रफीक ने पहले उस पर हरा रंग डाला और बाद में जूतों की माला भी पहना दी थी। तब मंदिर की सुरक्षा में तैनात होमगार्ड जवान किसी काम से बाहर गया था। वापस लौटने के बाद हुई जाँच पड़ताल में इस करतूत के पीछे रफीक का हाथ निकला था।

उस समय श्रद्धालुओं की तरफ से दी गई शिकायत का आधार पर रफीक और उसके साथियों पर आईपीसी की धारा 457, 295, 295-K, 153-K, 120-B के तहत FIR दर्ज हुई थी। अदालत में रफीक अपने गुनाह को कबूल करने से बचता रहा। हिंदू पक्ष के गवाहों के अलावा 28 सबूत कोर्ट के सामने पेश किए गए थे। अंत में अदालत ने तीनों आरोपितों को दोषी माना था। अंजार कोर्ट ने 28 अगस्त 2014 को रफीक, कासम और दिलावर को 3-3 साल की सजा सुनाई थी। इन सभी पर 5-5 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया था।

बताया जा रहा है कि रफीक साल 2017 में जेल काट कर बाहर आ गया था। फिलहाल उसे 12 मजदूरों और उनके परिवारों को जान से मार डालने की नीयत से की गई आगजनी मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।

‘शानदार… पत्रकार हो पूनम जैसी’: रवीश कुमार ने ठोकी जिसकी पीठ इलेक्टोरल बॉन्ड पर उसकी झूठ की पोल खुली, वायर ने डिलीट की खबर

इलेक्टोरल बॉन्ड पर चल रही सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बीच वामपंथियों का एक नया खेल सामने आया। ‘द वायर’ ने हाल में अपनी साइट पर एक रिपोर्ट पब्लिश करते हुए द क्विंट की पत्रकार पूनम अग्रवाल का महिमामंडन किया क्योंकि पूनम ने चुनावी बॉन्ड की जारी लिस्ट पर सवाल खड़े कर दिए थे।

इस स्टोरी के बाद पूरी वामपंथी जमात पूनम अग्रवाल की ‘खोजी’ और ‘जुनूनी’ पत्रकारिता की तारीफ करने लगी। आरफा खानुम शेरवानी से लेकर रवीश कुमार तक ने जो पूनम की हवा बनाई वो देखने वाली थी। लेकिन, इन सबकी फजीहत तब हुई जब पूनम के किए दावे सच साबित नहीं हुए और द वायर को अपनी रिपोर्ट ही डिलीट करनी पड़ी।

नीचे स्क्रीनशॉट में आप डिलीट कंटेंट देख सकते हैं जिसका शीर्षक था- “वो पत्रकार जिसने इलेक्टोरल बॉन्ड की जारी लिस्ट में खामियाँ बताईं।”

क्यों डिलीट की द वायर ने स्टोरी

दरअसल, द वायर के इस आर्टिकल में एक जगह पूनम अग्रवाल का ट्वीट एड था जो कि 17 मार्च 2024 को किया गया था। इसमें दावा था कि एसबीआई ने इलेक्टोरल बॉन्ड की जानकारी देते हुए जो अपनी लिस्ट जारी की है, उसमें कहा गया है कि उन्होंने 20 अक्टूबर 2020 में बॉन्ड खरीदा था जबकि हकीकत में उन्होंने तो अप्रैल 2018 में खरीदा है। उन्होंने अपने इस ट्वीट में एसबीआई पर डेटा से छेड़छाड़ करने की बातें कहीं।

उनके इस ट्वीट के बाद वामपंथियों ने हल्ला मचा दिया कि एसबीआई बॉन्ड खरीदने वालों के विवरण के साथ छेड़छाड़ कर रहा है और पूनम की खोजी की पत्रकारिता को सलाम होना चाहिए कि उन्होंने इसे उजागर किया। खुद पूनम भी इन ट्विट्स में हो रही वाह वाही से खुश होने लगीं।

हालाँकि कुछ समय बाद पूनम अग्रवाल एक नए ट्वीट के साथ आई। इस ट्वीट में उन्होंने अपने लगाए आरोपों पर सफाई दी थी।

18 मार्च को किए गए उनके ट्वीट में देख सकते हैं, वो लिखती हैं- “मुझे एक वीडियो दिखी जो मैंने क्विंट के लिए रिकॉर्ड की थी और उसमें 20 अक्टूबर 2020 को जारी इलेक्टोरल बॉन्ड दिखा रही थी। मुझे नहीं याद है कि मैंने 2020 में खरीदा या 2018 में। यूनिक नंबर से मेरे डाउट क्लियर होंगे। तब तक एसबीआई डेटा पर कोई सवाल नहीं।”

इसके बाद अगले ट्वीट में पूनम अग्रवाल ने कहा कि आप चाहें तो मेरी कमजोर यादाश्त को दोषी ठहरा सकते हैं। 2020 कोविड वाला साल था। उस समय बहुत सारी चीजें हो रहीं थीं। शायद इसीलिए मुझे नहीं याद रहा। मेरी कमजोर यादाश्त के लिए क्षमा।

द वायर ने माँगी माफी लेकिन वामपंथी नहीं थक रहे तारीफ करते-करते

बता दें कि इस पूरे विवाद में पूनम अग्रवाल के दावे से लेकर ‘द वायर’ ने जो प्रोपगेंडा फैलाया उसे उन्होंने हटा लिया है लेकिन रवीश समेत कई वामपंथी पत्रकार सोशल मीडिया पर पूनम की तारीफ करते नहीं थक रहे। ट्वीट में उन्हें असली खोजी पत्रकार कहा जा रहा है। पूनम अग्रवाल के नए चैनल को सब्सक्राइब करने की अपील की जा रही है।

सुशांत सिंह ने लिखा- पूनम अग्रवाल तो असली पत्रकार हैं। लेकिन मोदी सरकार कभी नहीं मानेगी कि वो सीक्रेट नंबर के लिए बॉन्ड की जानकारी रख रहे थे।

आरफा ने लिखा- पूनम अग्रवाल का यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब करें और उनकी इलेक्टोरल बॉन्ड पर शानदार वीडियोज देंखें।

रवीश कुमार ने लिखा- बिलकुल। पूनम का काम शानदारा है। मैं सोचता हूँ जो सैंकड़ों संपादक हैं न्यूज रूम में दादा बनकर घूमते हैं वो पूनम जैसी पत्रकार को देखकर क्या सोचते होंगे। अपने पत्रकारों से कहते होंगे तुम लोग भजन करो साहेब का।

बता दें कि चुनावी बॉन्ड में विसंगति के बारे में पूनम अग्रवाल के दावे धराशायी होने के बाद यह भी जानना जरूरी है कि खोजी पत्रकार ने जिस यूनिक नंबर को लेकर सवाल खड़े किए थे, उस पर एसबीआई ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वो नंबर संख्यात्मक कोड है।

एसबीआई का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने खुलासा किया कि बैंकों द्वारा जारी किए गए बांड नंबर केवल बांड पर उपलब्ध हैं, कहीं और नहीं। बैंक ने यह भी कहा कि छिपा हुआ अल्फ़ान्यूमेरिक कोड एक सुरक्षा सुविधा थी और ऑडिटिंग उद्देश्यों के लिए नहीं।

सुप्रीम कोर्ट में बाबा रामदेव को लगानी होगी हाजिरी, आचार्य बालकृष्ण भी तलब: पतंजलि के विज्ञापन को लेकर कार्रवाई, पूछा- क्यों न की जाए अवमानना की कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट ने बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण को तलब किया है। यह मामला पतंजलि आयुर्वेद के भ्रामक विज्ञापनों से जुड़ा है। कोर्ट ने बाबा रामदेव और कंपनी के एमडी आचार्य बालकृष्ण को दो हफ्ते बाद व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने को कहा है। कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई कि जब पतंजलि को जवाब देने के लिए 2 सप्ताह का समय दिया गया था, इसके बावजूद पतंजलि की तरफ से कोई जवाब क्यों नहीं दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने कंपनी और बालकृष्ण को पहले जारी किए गए अदालत के नोटिसों का जवाब दाखिल नहीं करने पर कड़ी आपत्ति जताई। सुप्रीम कोर्ट द्वारा उन्हें नोटिस जारी कर पूछा गया था कि अदालत को दी गई अंडरटेकिंग का पहली नजर में उल्लंघन करने के लिए उनके खिलाफ अवमानना कार्यवाही क्यों नहीं शुरू की जाए। सुप्रीम कोर्ट ने उनके वकील को भी फटकार लगाई और कहा कि जब 2 सप्ताह का समय नोटिस का जवाब देने के लिए दिया गया था, तब क्यों नहीं इसका जवाब दिया गया।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, पतंजलि की तरफ से कोर्ट में हाजिर हुए मुकुल रोहतगी से कहा कि अब वादी नंबर 5 (पतंजलि के एमडी) आचार्य बालकृष्ण और बाबा रामदेव, दोनों को ही अगली सुनवाई के समय कोर्ट में हाजिर रहना पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहले दिनए गए निर्देशों के मुताबिक क्यों नहीं काम किए गए? क्यों न तुम्हारे (बाबा रामदेव) के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए?

सुप्रीम कोर्ट इंडियन मेडिकल एशो की उस याचिका की सुनवाई कर रहा है, जिसमें बाबा रामदेव पर कोरोना की वैक्सीन और एलोपैथिक दवाओं के खिलाफ मुहिम चलाने का आरोप लगाया गया है। कोर्ट ने पहले भी बाबा रामदेव को नोटिस जारी कर कोर्ट में बुलाया था। तीन हफ्ते में बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण से जवाब माँगा गया था। साथ ही कंपनी के विज्ञापन छापने पर भी रोक लगा दी थी। इसके लिए कंपनी ने कोर्ट में अंडरटेकिंग भी दी थी लेकिन इसके बावजूद विज्ञापन छपवाया। इस पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।

इन विज्ञापनों में बाबा रामदेव की भी तस्वीर लगी थी, इसलिए उन्हें भी पार्टी बनाया गया। इस दौरान कोर्ट ने केंद्रीय आयुष मंत्रालय को भी फटकार लगाई और कहा कि उसने एक दिन पहले क्यों जवाब दाखिल किया? इस पर केंद्र ने अदालत को बताया कि उन्हें समुचित जवाब देने के लिए और समय चाहिए।

‘प्रथम दृष्टया मनी लॉन्डरिंग के दोषी हैं सत्येंद्र जैन, ED के पास पर्याप्त सबूत’: सुप्रीम कोर्ट ने दिया तुरंत सरेंडर करने का आदेश, नहीं काम आईं कॉन्ग्रेस नेता सिंघवी की दलीलें

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (18 मार्च, 2024) को माना कि AAP (आम आदमी पार्टी) नेता सत्येंद्र जैन प्रथम दृष्टया मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में दोषी हैं। उनके सहयोगियिं वैभव जैन और अंकुश जैन को लेकर भी सर्वोच्च न्यायालय की यही राय है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले के तथ्यों एवं परिस्थितियों की संपूर्णता को ध्यान में रखे जाने पर हमारी राय है कि अपीलकर्ता हमें संतुष्ट करने में पूरी तरह विफल रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि सत्येंद्र जैन और उनके सहयोगी ये साबित करने में विफल रहे कि वो दोषी नहीं हैं।

वहीं ED (प्रवर्तन निदेशालय) के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जाँच एजेंसी के पास पर्याप्त सामग्रियाँ हैं जिनसे पता चलता है कि सत्येंद्र जैन प्रथम दृष्टया दोषी हैं। सत्येंद्र जैन को फिर से जमानत देने से भी सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया और कहा कि वो शर्तों को पूरा करने में विफल रहे हैं। ये मामला 2010-12 और 2015-16 का है। सत्येंद्र जैन को 2022 में ही गिरफ्तार किया गया था। मनी लॉन्ड्रिंग के लिए 4 फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल किया गया था।

इन कंपनियों में सत्येंद्र जैन का प्रभाव था। सत्येंद्र जैन की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में कॉन्ग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी बतौर वकील पेश हुए। जस्टिस बेला M त्रिवेदी और पंकज मिथल की पीठ ने कहा कि इसमें जरा सा भी शक नहीं है कि मनी लॉन्ड्रिंग में सत्येंद्र जैन का रोल था। IT स्कीम,2016 के तहत अंकुश और वैभव ने झूठी घोषणाएँ दर्ज की। दोनों ने 8.26 करोड़ रुपयों की अलग-अलग एंट्री की। आयकर विभाग ने इन डिक्लेरेशन को Void माना। यानी, इन्होंने दिखाया कि कंपनियों में ये निवेश उनका है जबकि ये सत्येंद्र जैन का था।

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सत्येंद्र जैन को कहा है कि वो तुरंत विशेष अदालत के समक्ष तुरंत आत्म-समर्पण करें। सत्येंद्र जैन को मई 2022 में गिरफ्तार किया गया था। फ़िलहाल वो जमानत पर बाहर चल रहे हैं। अप्रैल 2023 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्पीडी ट्रायल का अधिकार और न्याय तक पहुँच भारत के संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार हैं। इन आरोपों के बावजूद AAP संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन का बचाव करते रहे हैं।

बुल्गारिया के राष्ट्रपति ने कहा ‘थैंक यू’ तो बोले PM मोदी- आतंकवाद से लड़ने को हैं प्रतिबद्ध, भारतीय नौसेना ने समुद्री डाकुओं से छुड़ाए जहाज और बंधक

भारतीय नौसेना ने हाल ही में बुल्गारिया के 7 नागरिकों समेत 17 नागरिकों को सोमालिया के जल दस्युओं के चंगुल के बचाया है। नौसेना ने यह ऑपरेशन भारत से हजारों किलोमीटर दूर समुद्र में किया। नौसेना के 7 नागरिकों को बचाने को लेकर बुल्गारिया के राष्ट्रपति रूमेन रादेव ने भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी धन्यवाद कहा है। पीएम मोदी ने भी उनके सन्देश का जवाब देते हुए कहा है कि बुल्गारिया के सातों नागरिक जल्द ही अपने देश लौटेंगे।

बुल्गारिया के राष्ट्रपति ने भारतीय नौसेना के ऑपरेशन में बचाए गए बुल्गारियन नागरिकों को छुड़वाने के लिए एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “डाकुओं के कब्जे से बुल्गारिया के जहाज “रुएन” और 7 नागरिकों सहित सभी नाविकों को बचाने की भारतीय नौसेना की बहादुर कार्रवाई के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति मैं आभार व्यक्त करता हूँ।”

इस पर पीएम मोदी ने भी उन्हें जवाब दिया है। उन्होंने लिखा, “बुल्गारिया के राष्ट्रपति रादेव जी, आपके संदेश के लिए धन्यवाद। हमें प्रसन्नता है कि बुल्गारिया के 7 नागरिक सुरक्षित हैं और वह जल्द ही अपने घर लौटेंगे। भारत समुद्र में नौवहन की स्वतंत्रता की रक्षा और हिंद महासागर क्षेत्र में डकैती तथा आतंकवाद से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है।”

इससे पहले बुल्गारिया की विदेश मंत्री मारिया जिबराइल ने भी भारतीय नौसेना को धन्यवाद किया था। उन्होंने एक्स पर लिखा, “मैं डाकुओं के कब्जे से जहाज रुएन और उसके नाविक दल के सदस्यों, जिनमें 7 बुल्गारिया के नागरिक भी शामिल हैं, को बचाने के सफल ऑपरेशन के लिए भारतीय नौसेना के प्रति अपना आभार व्यक्त करती हूँ। आपके सहयोग और इस कोशिश के लिए धन्यवाद। हम नाविकों के जीवन की रक्षा के लिए मिलकर काम करना जारी रखेंगे।”

इस पर भारतीय विदेश मंत्री ने कहा था कि दोस्त इसीलिए होते हैं।

गौरतलब है कि भारतीय नौसेना ने हिन्द महासागर क्षेत्र में बुल्गारिया की कम्पनी द्वारा संचालित एक जहाज एमवी रुएन पर बंधक बनाए गए 17 नाविकों को मुक्त करवाया था। इस जहाज को सोमालिया के डाकुओं के कब्जे से छुड़वा लिया गया था। नौसेना ने इस ऑपरेशन में 35 सोमालियाई डाकुओं को पकड़ा गया था और उन्हें भारत लेकर आने की कार्रवाई चालू कर दी थी। भारतीय नौसेना के कमांडो ‘मार्कोस’ ने इस जहाज पर पहुँच कर इन डाकुओं का आत्मसमर्पण करवा दिया था।

इस जहाज को सोमालिया के डाकुओं ने दिसम्बर 2023 में बंधक बना लिया था। इसके बाद वह इसे सोमालिया ले गए थे। वह वापस इसे समुद्र में भी लाए थे और इस जहाज के जरिए इस इलाके में लूटमार को अंजाम दे रहे थे। भारतीय नौसेना लगातार इस जहाज पर नजर रख रही थी। इस पर मौजूद डाकुओं ने भारतीय नौसेना पर गोलीबारी की थी। उन्होंने नौसेना का एक ड्रोन भी गिराया था। इसके बाद नौसेना के कमांडो को भारतीय वायु सेना के विमान से समुद्र में उतारा गया और उन्होंने इस जहाज को मुक्त करवाया।

भारतीय नौसेना के अंतरराष्ट्रीय समुद्र में इस बहादुरी के काम की काफी प्रशंसा हुई है। इसके साथ ही भारत की नौसेना का इस इलाके में वर्चस्व भी बढ़ा है। गौरतलब है कि बीते कुछ समय में इस इलाके में जहाज़ों पर हमले बढ़े हैं। भारतीय नौसेना लगातार इस इलाके में जहाज़ों के सुरक्षित निकलने को लेकर गश्त कर रही है।

‘भौकाल’ और ‘पैसों’ के लिए रेव पार्टी करते थे एल्विश यादव: रिपोर्ट में दावा, एक्स-GF ने मुश्किल वक्त में यूट्यूबर का किया सपोर्ट

बिग बॉस फेम एल्विश यादव रेव पार्टियाँ पैसों के अलावा अपना भौकाल बनाने के लिए और स्वैग कायम करने के लिए आयोजित करते थे। ऐसी जानकारी इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में पुलिस सत्रों के हवाले से दी गई है। इसी रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से यह भी कहा गया है कि एल्विश यादव ने अपने जुर्म को नहीं कबूला है जबकि कल ही कुछ मीडिया खबरें दावा कर रही थीं कि यूट्यूबर ने अपना गुनाह पुलिस के सामने मान लिया है।

इंडियन एक्सप्रेस पर प्रकाशित, ताजा रिपोर्ट में पुलिस अधिकारी का नाम लिए बिना उन्हें कोट करके कहा गया- “पूछताछ के दौरान यादव ने अपना गुनाह नहीं कबूला… लेकिन हमारे पास बहुत से सबूत हैं कि वो ऐसा अपना स्वैग और भौकाल बनाने के लिए कर रहा था। वह अपने फैंस में यह बताना चाहता था कि उसे कानून का डर नहीं है और वो जो चाहे वो कर सकता है।”

बता दें कि एल्विश यादव के खिलाफ यह मामला 3 नवंबर 2023 को प्रकाश में आया था उसके बाद मामले में एफआईआर हुई और वो लगातार विवादों में घिरे रहे। गुरुग्राम पुलिस भी लगे हाथ उनकी हिरासत माँग रही है। गुरुग्राम पुलिस सागर ठाकुर से जुड़े मामले में उनकी कस्टडी की डिमांड कर रही है जहाँ एल्विश ने मॉल में घुस उन्हें थप्पड़ मारा था। पुलिस ने कहा है कि वो मामले की जाँच कर रहे हैं और जल्द ही एल्विश को हिरासत में लेंगे।

कीर्ति मेहरा का पोस्ट

एल्विश पर एक साथ टूटी मुसीबतों के बीच उनके फैंस और साथी लगातार उनके समर्थन में पोस्ट कर रहे हैं। इस बीच उनकी एक्स गर्लफ्रेंड कीर्ति मेहरा ने भी एक पोस्ट शेयर किया है। ये एक क्रिप्टिक पोस्ट है इसमें कीर्ति ने बिन कोई नाम लिए कहा, “गीता में लिखा है- कमजोर तेरा वक्त है, तू नहीं।” उनके इस वक्त किए गए पोस्ट से यही अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह एल्विश के लिए किया गया है।

रामजन्मभूमि के बाद अब जानकी प्राकट्य स्थल की बारी, ‘भव्य मंदिर’ के लिए 50 एकड़ जमीन का अधिग्रहण करेगी बिहार सरकार: अयोध्या की तरह होगा पुनौरा धाम का विकास

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के बाद अब बिहार के सीतामढ़ी में माता सीता की जन्मभूमि को लेकर भी प्रयास तेज हो गए हैं। सीतामढ़ी में माता सीता की जन्मस्थली पर नया मंदिर बनाने और इस इलाके का विकास किए जाने की योजना पर बिहार सरकार ने काम चालू कर दिया है।

सीतामढ़ी में अब अयोध्या की तरह ही एक नए भव्य मंदिर का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए पुराने मंदिर के आसपास की 50 एकड़ से अधिक जमीन अधिग्रहित की जाएगी। यह निर्णय हाल ही में बिहार कैबिनेट की एक बैठक में लिया गया है।

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए नए मंदिर के लिए प्रयासरत कामेश्वर चौपाल ने बताया, “माता सीता के लिए सीतामढ़ी का वही महत्व है जो भगवान राम के लिए अयोध्या का है। यह हिन्दुओं के लिए पवित्र है। विश्व भर से लोग अयोध्या के राम मंदिर में दर्शन करने आएँगे और माता सीता की जन्मभूमि भी देखना चाहेँगे। हम चाहते हैं कि सीतामढ़ी में माता सीता का उसी तरह का एक भव्य का निर्माण किया जाए।” चौपाल ने बताया कि अभी जो मंदिर सीतामढ़ी में है, वह 100 वर्ष पूर्व बनाया गया था और उसकी स्थिति अब अच्छी नहीं है।

कामेश्वर चौपाल ने कहा कि सीतामढ़ी में अयोध्या के राम मंदिर जैसा ही एक भव्य मंदिर बनना चाहिए। गौरतलब है कि कामेश्वर चौपाल ने ही अयोध्या के राम मंदिर आन्दोलन के समय शिलान्यास में पहली ईंट रखी थी। वह वर्तमान में राम जन्मभूमि ट्रस्ट के सदस्य भी हैं।

बिहार सरकार ने इससे पहले सीतामढ़ी के पुनर्विकास की योजना के लिए 16.63 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था। इसके अंतर्गत नई सुविधाएँ विकसित की जानी थी। इसके लिए हाल ही में ₹72 करोड़ का बजट भी पास किया गया था।

इसके अंतर्गत सीतामढ़ी में पर्यटकों की सुविधा हेतु मुख्य मंदिर के चारों ओर परिक्रमा पथ, जानकी महोत्सव मैदान में वाहनों की पार्किंग, आगंतुकों के लिए कैफेटेरिया, कियोस्क तथा शौचालय की सुविधाओं का निर्माण कराया जाना था। इसके लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने यहाँ मंदिर, जिसे पुनौरा धाम कहा जाता है, का दौरा भी किया था।

अब 50 एकड़ के अधिग्रहण का प्रस्ताव इससे अलग है। इसमें नए मंदिर का निर्माण किया जाएगा। मंदिर का निर्माण अयोध्या धाम के तर्ज पर ही होगा। इसके लिए पैसे की व्यवस्था आम जनता से चंदा लेकर की जाएगी। इसके बाद मंदिर का निर्माण होगा।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रमुख सचिव एस सिद्धार्थ ने बताया है कि 50 एकड़ जमीन अधिग्रहण का प्रस्ताव भव्य मंदिर और उसमे आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बढ़ाने को लेकर ध्यान में रख कर लाया गया है। उन्होंने बताया कि मंदिर की माँग लम्बे समय से है लेकिन जबसे अयोध्या में राम मंदिर बन कर तैयार हुआ है तबसे यह माँग और जोर पकड़ रही है।

बिहार सरकार के मंदिर के पुनर्निर्माण के इस निर्णय को काफी समर्थन मिल रहा है। लोगों का कहना है कि उनका सीतामढ़ी से धार्मिक और भावनात्मक जुड़ाव है। यदि नया मंदिर बनता है तो उनके इलाके में धार्मिक पर्यटन बढ़ने से समृद्धि आएगी। इससे ख्याति भी बढ़ेगी।

केजरीवाल-सिसोदिया के साथ मिलकर K कविता ने रची थी साजिश, AAP को दिए थे ₹100 करोड़: दिल्ली शराब घोटाले पर ED का बड़ा खुलासा

दिल्ली शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED/ईडी) ने जाँच के बाद कुछ और खुलासे किए हैं। जाँच एजेंसी ने बताया है कि बीआरएस नेता के कविता और कुछ अन्य लोगों ने आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ मिलकर शराब नीति कार्यान्वयन मामले में साजिश रची थी। ईडी ने यह भी जानकारी दी है कि आप नेताओं को के कविता ने 100 करोड़ रुपए से ज्यादा का भुगतान किया था ताकि वह उत्पाद शुल्क नीति में खुद भी आगे लाभ पा सकें।

ईडी द्वारा दी गई जानकारी

मामले की जानकारी साझा करते हुए ईडी ने बताया कि उन्होंने तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव की बेटी के कविता को 15 मार्च को इसी केस में अरेस्ट किया था। बाद में दिल्ली की विशेष पीएमएलए कोर्ट ने उन्हें 7 दिन की रिमांड में भेज दिया। अब वह 23 मार्च तक ईडी की हिरासत में रहेंगी। ईडी ने यह भी बताया कि उन्होंने के कविता पर कार्रवाई करते हुए हैदराबाद स्थित उनके घर पर जाँच भी की थी। इस दौरान कविता के परिजनों ने जाँच करते अधिकारियों को रोकने का प्रयास किया।

बता दें कि इस मामले में अब तक प्रवर्तन निदेशालय की टीम दिल्ली, हैदराबाद, चेन्नई, मुंबई और अन्य जगहों की 245 लोकेशनों पर छापे मार चुकी है। वहीं आप नेता मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और विजय नायर समेत कई लोगों को गिरफ्तार भी किया है। ईडी ने इस मामले में 1 अभियोजन शिकायत और 5 पूरक शिकायतें मिलाकर 6 आरोप पत्र दायक किए है। एजेंसी के बयान में यह भी कहा गया है कि उन्होंने अब तक अपनी कार्रवाई करते हुए 24 जनवरी 2023 से 3 सितंबर 2023 के बीच में 128.79 करोड़ की संपत्ति को जब्त किया है। आगे की जाँच जारी है।

गौरतलब है कि बीआरएस नेता कविता की गिरफ्तारी के बाद मीडिया में बताया गया था कि ईडी उनसे तीन बार पहले भी पूछताछ कर चुकी थी, लेकिन पिछली बार के 2 समन में वो ईडी के सामने पेश नहीं हुई। इसके बाद इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया।