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तेजस्वी सूर्या को कर्नाटक पुलिस ने हिरासत में लिया: हनुमान चालीसा बजाने पर दुकानदार की हुई थी पिटाई, विरोध प्रदर्शन करने पहुँचे थे BJP नेता

बेंगलुरु में हनुमान चालीसा बजाने पर एक दुकानदार पर हुए हमले के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस मामले में बीजेपी कार्यकर्ताओं और नेताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और आरोपितों की गिरफ्तारी की माँग की। इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए भाजयुमो अध्यक्ष और बेंगलुरु के सांसद तेजस्वी सूर्या को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

विरोध प्रदर्शन से पहले बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने दुकानदार मुकेश से मुलाकात भी की थी। बीजेपी सांसद सूर्या ने आरोप लगाया कि पुलिस से शिकायत करने के बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं की गई। उन्होंने कहा, “स्थानीय बीजेपी नेताओं, मेरे और पीसी मोहन के हस्तक्षेप के बाद ही एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने इस मामले में सिर्फ तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि हमारी माँग है कि सीसीटीवी में दिख रहे सभी आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। इस मामले की पेशेवर और निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए।” हालाँकि अब इस मामले में पुलिस ने दो अन्य लोगों समेत कुल पाँच लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।

इसी मामले में मंगलवार (19 मार्च) को बीजेपी द्वारा विरोध-प्रदर्शन किया गया। इस विरोध प्रदर्शन में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सांसद तेजस्वी सूर्या भी शामिल हुए। जहाँ कर्नाटक पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने लॉ एंड ऑर्डर मेंटेन करने के लिए हल्का बल प्रयोग भी किया। तेजस्वी सूर्या ने प्रदर्शनकारियों से वापस जाने का आग्रह किया।

केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे और बीजेपी विधायक एस सुरेश कुमार उन लोगों में शामिल थे, जिन्हें पुलिस ने एहतियातन हिरासत में ले लिया। पुलिस ने कहा कि घटना के सिलसिले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें से दो को मंगलवार को गिरफ्तार किया गया है। बीजेपी ने पीड़ित मुकेश की दुकान से शांतिपूर्ण जुलूस निकालने का आह्वान किया था, जिसमें लोगों ने ‘हनुमान चालीसा’ का जाप किया गया।

बता दें कि कुछ युवाओं ने रविवार (17 मार्च 2024) को जुमा मस्जिद रोड पर अपनी दुकान में ‘अजान’ के दौरान लाउडस्पीकर पर मुकेश द्वारा ‘हनुमान चालीसा’ बजाने पर आपत्ति जताई और इसके बाद उसके साथ मारपीट की। सुरेश कुमार ने आरोप लगाया, “हनुमान चालीसा बजाने वाले व्यापारी पर इस तरह का हमला होते देखना बेहद दर्दनाक है। समाज में शांति भंग करने की कोशिश की जा रही है।”

3 साल की बच्ची से रेप के बाद हत्या, प्राइवेट पार्ट पर नाखून और शरीर पर दाँतों के निशान: बाथरूम में ले गया था नाबालिग किशोर, सबूत मिटाने वाला चाचा भी गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ के विलासपुर में एक 3 वर्षीया बच्ची से रेप का मामला सामने आया है। रेप की वजह से बच्ची की मौत हो गई है। बलात्कार का आरोप एक 15 वर्षीय नाबालिग पर लगा है। नाबालिग आरोपित ने बाथरूम में ले कर कर बच्ची से रेप किया था। घटना के बाद आरोपित फरार है। घटना से नाराज पीड़िता के परिजनों ने अस्पताल के बाहर हंगामा किया है। पुलिस ने केस दर्ज कर के आरोपित को हिरासत में ले लिया है। सबूत मिटाने के आरोप में नाबालिग के चाचा को भी गिरफ्तार किया गया है। घटना रविवार (17 मार्च, 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला विलासपुर के थानाक्षेत्र सिरगिट्टी का है। यहाँ 17 मार्च को थाने पर पीड़िता की माँ ने शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में बताया गया है कि रविवार को उनकी 3 वर्षीया बच्ची घर एक बाहर खेल रही थी। कुछ ही देर में वो लापता हो गई। परिजनों ने काफी खोजबीन की पर वो नहीं मिली। तभी किसी ने बताया कि बच्ची को पड़ोस में रहने वाला 15 वर्षीय किशोर अपने साथ बाथरूम के अंदर ले गया है। बच्ची की माँ कुछ पड़ोसियों के साथ बाथरूम तक पहुँची तो दरवाजा अंदर से बंद मिला।

काफी देर खटखटाने के बाद भी दरवाजा अंदर से नहीं खोला गया। आखिरकार सभी ने मिल कर दरवाजे को तोड़ डाला। अंदर आरोपित और बच्ची दोनों मौजूद थे। बच्ची बेहोश हो चुकी थी। वह खून से लथपथ थी। बच्ची के प्राइवेट पार्ट पर नाखूनों से घाव किए गए थे जिस से लगातार खून निकल रहा था। कहा यह भी जा रहा है कि रेप के दौरान जब बच्ची दर्द से चीखी थी तब आरोपित ने दाँतों से उसे कई हिस्सों में काट डाला था। पीड़िता के परिजन बच्ची को ले कर अस्पताल पहुँचे। डॉक्टरों ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया।

पीड़िता की मौत की जानकारी मिलते ही उसके परिजनों ने अस्पताल के बाहर हंगामा शुरू कर दिया। हंगामे की सूचना पर पुलिस पहुँची और लोगों को समझा कर शाँत किया। फ़ौरन ही केस दर्ज कर के आरोपित किशोर को हिरासत में ले लिया गया। उस पर पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। आरोपित के चाचा पर भी सबूतों को मिटाने की कोशिश करने का आरोप है। इस हरकत की वजह से किशोर के चाचा को भी IPC की धारा 201 के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

10 करोड़ घरों में पहुँचा गैस सिलिंडर, महिलाओं को मिली धुएँ से आजादी: उज्ज्वला से बदल गई करोड़ों घरों की किस्मत

ये साल 2014 है, मैं गाँव में रहने वाले एक रिश्तेदार के यहाँ बैठा हूँ। इस परिवार की आर्थिक हालत बाकी करोड़ों भारतीय परिवारों की तरह ही बहुत अच्छी नहीं है। इस घर में एक महिला देश में पाए जाने वाले अतिथि भाव के चलते चाय बना रही हैं, यह महिला मेरी दूर की मौसी लगती हैं। हालाँकि, चाय से कम और चूल्हे से धुआँ अधिक उठ रहा है। दरअसल, इस घर में एक अदद एलपीजी सिलिंडर नहीं है। महिला, जो कि मौसी हैं, लकड़ी और कोयले से जलने वाले चूल्हे पर चाय-खाना बनाने पर मजबूर हैं। यह उज्ज्वला योजना से पहले का दौर है।

दरअसल, यह कहानी आज से 10 वर्ष पूर्व देश के करोड़ों परिवारों की थी जहाँ महिलाएँ धुएँ के बीच खाना बनाने को मजबूर थीं। इससे जहाँ एक और खाना बनाने में देरी होती थी, उनके स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता था। हालाँकि, इस समस्या का समाधान यानी गैस सिलिंडर जो कि स्वच्छ ईंधन है, उसका कनेक्शन लेना मुश्किल काम था। सामान्य मेहनत मजदूरी करके अपना घर चलाने वाला कोई व्यक्ति एलपीजी कनेक्शन लेने के लिए पैसे इकट्ठा ही नहीं कर पाता था। जिस परिवार की मैंने कहानी बयान की, वह भी उनमें से एक है।

लेकिन यह तस्वीर 2014 के बाद बदलना चालू हुई। 2014 के आम चुनाव देश में 30 वर्षों के बाद एक स्पष्ट बहुमत वाली सरकार ले कर आए थे। इसके मुखिया नरेन्द्र मोदी थे। पीएम मोदी ने सत्ता में आने के साथ ही देश की मूलभूत समस्याओं को एक एक करके चालू किया। इसके अंतर्गत प्रधानमंत्री आवास योजना, जन धन योजना और सौभाग्य जैसी योजनाएँ चालू की गई। इसी के साथ चालू हुई उज्ज्वल योजना।

उज्ज्वला योजना से पहले मात्र आधे घरों में था एलपीजी सिलिंडर

उज्ज्वला योजना के शुरू होने से पहले देश के लगभग आधे घरों में ही गैस सिलिंडर की सुविधा थी। इनमें से भी बड़ी सँख्या में कनेक्शन शहरों में थे। एलपीजी की सुविधा ग्रामीण क्षेत्रों में नगण्य थी। आँकड़े बताते हैं कि 2014 में देश के मात्र 55% जबकि 2016 में जब उज्ज्वला योजना चालू की गई थी तब देश के 61% घरों में ही गैस सिलिंडर की पहुँच थी।

2016 में देश के लगभग 16 करोड़ परिवारों के पास एलपीजी कनेक्शन था। इसके अलावा देश में एलपीजी कनेक्शन देने के लिए गैस एजेंसियाँ भी कम थी। 2016 में देश में मात्र 13896 एलपीजी वितरक थे, जिनसे सीमित क्षेत्रों तक ही गैस सिलिंडर पहुँच पाते थे। इन्हीं कारणों से महिलाएँ लकड़ी और कोयले के चूल्हों पर खाना बनाने को मजबूर थीं।

धुएँ से मुक्ति पाने का संघर्ष उज्ज्वला

उज्ज्वला योजना की शुरुआत 1 मई, 2016 को की गई थी। इसका लक्ष्य था कि देश में गरीबी की रेखा से नीचे रहने वाले प्रत्येक परिवार के पास एलपीजी कनेक्शन हो। उज्ज्वला योजना के तहत पहले लक्ष्य रखा गया था कि देश के 5 करोड़ BPL परिवारों को एलपीजी कनेक्शन दिया जाएगा।

उज्ज्वला योजना के अंतर्गत सरकार ने परिवारों को एलपीजी कनेक्शन देने के साथ ही उन्हें गैस चूल्हा, रेगुलेटर और अन्य सामग्री भी देने का निर्णय लिया। यह योजना क्रांतिकारी साबित होने वाली थी। योजना की शुरुआत उत्तर प्रदेश के बलिया से की गई थी। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के शुरू होने के बाद मात्र एक वर्ष में ही 2.2 करोड़ से अधिक एलपीजी कनेक्शन दिए गए। यानी देश के 2 करोड़ से अधिक परिवारों तक स्वच्छ ईंधन पहुँचा और साथ ही उन्हें धुएँ वाले चूल्हे से मुक्ति मिल गई।

केंद्र सरकार ने उज्ज्वला योजना में इतनी तेज गति से काम किया कि पहले वर्ष में लक्ष्य से अधिक कनेक्शन दिए गए। दरअसल, पहले वर्ष में सरकार ने 1.5 करोड़ कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा था लेकिन स्पष्ट नीति और भ्रष्टाचार रहित व्यवस्था के कारण यह आँकड़ा कहीं आगे पहुँच गया। उज्ज्वला का लाभ लेने वालों की सँख्या दो वर्ष के भीतर 3.6 करोड़ पहुँच गई। यानी दो तिहाई लक्ष्य लगभग दो वर्ष में ही पूरा कर लिया गया था। इसके बाद लगातार यह संख्या बढ़ती रही।

समय से पहले पूरे हुए लक्ष्य

केंद्र सरकार ने सबसे पहले 5 करोड़ घरों तक एलपीजी कनेक्शन का लक्ष्य रखा था। हालाँकि, अप्रैल 2018 में इस योजना का और विस्तार कर दिया गया तथा इसका लक्ष्य बढ़ा कर 8 करोड़ घरों तक कर दिया गया। इस योजना के तहत अब अन्य वर्गों की महिला लाभार्थियों को जोड़ने का भी निर्णय लिया गया। 8 करोड़ घरों तक स्वच्छ ईंधन पहुँचाने का लक्ष्य मार्च 2020 तक का था। हालाँकि, इसमें भी तेज गति से काम हुआ और यह लक्ष्य अगस्त 2019 में पा लिया गया।

इसके बाद अगस्त 2019 में उज्ज्वला 2.0 की शुरुआत की गई। यह इस योजना का दूसरा चरण था। इसके अंतर्गत सरकार ने 1 करोड़ और ऐसे घरों को स्वच्छ ईंधन देने का निर्णया लिया था जो योजना के पहले चरण में रह गए थे। इसी तरह यह लक्ष्य भी समय से पहले अगस्त 2019 में पूरा हो गया था और देश में उज्ज्वला के लाभार्थियों की सँख्या बढ़ कर 9 करोड़ पहुँच गई थी। योजना को विस्तार देते हुए सरकार ने इसमें 60 लाख लाभार्थी और जोड़े।

समय के अनुसार योजना को विस्तार देते हुए सितम्बर 2023 में इस योजना का तीसरा चरण भी लाया गया। इसके अंतर्गत 75 लाख अतिरिक्त उज्ज्वला लाभार्थी बनाने का लक्ष्य रखा गया। वर्तमान में यह चरण चल रहा है। इसके तहत लक्ष्य रखा गया है कि कुल लाभार्थियों की सँख्या को 10.35 करोड़ तक पहुँचाया जाए।

उज्ज्वला योजना का लाभ उत्तर प्रदेश के तराई इलाके में पड़ने वाले जिले लखीमपुर खीरी की रहने वाली सुनीता को भी मिला है। वह इस बारे में बताती हैं, “पहले खाना पकाने का इंतजाम करने के लिए लकड़ी चुनने जाना पड़ता था। बरसात में सूखी लकड़ी ना मिलने से बड़ी दिक्कत होती थी। इसके बाद भी धुएँ वाला चूल्हा फूंकना पड़ता था। गर्मियों में समस्या और भी बढ़ जाती थी। धुएँ से आँखों में जलन होती थी। जब से उज्ज्वला का लाभ मिला है, तब से सारी समस्याएँ दूर हो चुकी हैं। ना अब बाहर लकड़ी लेने जाना पड़ता है और ही बरसात की चिंता रहती है।”

10 करोड़ से अधिक घरों में पहुँची उज्ज्वला योजना

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ऐसी योजना बन कर उभरी है, जिसका देश के अधिकाँश परिवारों ने लाभ उठाया है। इस योजना के आँकड़े बताते हैं कि अब तक देश में 10.32 करोड़ लोग इसका लाभ लेकर धुएँ वाले चूल्हे से मुक्ति पा चुके हैं। 2011 की जनसँख्या के अनुसार, देश में परिवारों की सँख्या लगभग 25 करोड़ है। उज्ज्वला के आँकड़ों से स्पष्ट है कि देश की आबादी का लगभग 50% हिस्सा इस योजना से लाभान्वित हुआ है।

उज्ज्वला के जरिए मात्र महिलाओं को चूल्हे से ही मुक्ति नहीं मिल रही बल्कि इससे सरकार को सही लाभार्थियों तक सहायता पहुँचाने में भी आसानी हो रही है। मोदी सरकार उज्ज्वला के लाभार्थियों को लगातार अधिक रियायती दरों पर एलपीजी सिलिंडर उपलब्ध करवाती रही है। हाल ही में मोदी सरकार ने निर्णय लिया है कि वह उज्ज्वला के लाभार्थियों को ₹300 की सब्सिडी हर सिलिंडर पर देगी। मोदी सरकार ने निर्णय लिया है कि वह उज्ज्वला के लाभार्थियों को प्रति वर्ष 12 सिलिंडर पर यह लाभ उपलब्ध करवाएगी।

जाटों और गुर्जरों को एकजुट कर के रोक लिया था हिन्दुओं का नरसंहार, भड़के सिद्दीक कप्पन ने जारी किया था कपिल मिश्रा और परवेश वर्मा की मौत का फरमान

UAPA के तहत 2 साल से ज्यादा समय तक जेल काटने वाले केरल के कथित पत्रकार सिद्दीक कप्पन के बारे में नई जानकारी सामने आई है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सिद्दीक कप्पन ने आतंकी संगठन PFI को भाजपा नेता कपिल मिश्रा और परवेश वर्मा की हत्या का निर्देश दिया था। इस मामले के खुलासा NIA (राष्ट्रीय जाँच एजेंसी) द्वारा PFI कमांडर कमाल केपी से हुई पूछताछ के बाद हुआ है। UP ATS द्वारा गिरफ्तार कमाल केपी फिलहाल लखनऊ की जेल में बंद है।

केरल के एक स्थानीय मलयालम मीडिया आउटलेट जन्मभूमि ने मंगलवार (19 मार्च, 2024) को इस बाबत एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। रिपोर्ट में बताया गया है कि दिल्ली में 2020 के हिन्दू विरोधी दंगों में प्रतिबंधित आतंकी संगठन PFI (पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया) के सदस्य हिन्दुओं को बहुत बड़े स्तर पर नुकसान पहुँचाने में नाकाम रहे थे। इसकी वजह सिद्दीक कप्पन भाजपा नेता कपिल मिश्रा और परवेश वर्मा को मानता था। उसे लगता था कि कपिल मिश्रा और परवेश वर्मा ने गुर्जरों और जाटों को हिंसा कर रहे उपद्रवियों के खिलाफ एकजुट किया।

कप्पन को लगता था कि जाटों और गुर्जरों के कड़े प्रतिरोध की वजह से हिंसक भीड़ हिन्दुओं को उतना नुकसान नहीं पहुँचा सकी जितना साजिशकर्ता PFI के सदस्यों का इरादा था। वह हिन्दुओं द्वारा दिखाए गए इस प्रतिरोध की वजह कपिल मिश्रा और परवेश वर्मा को मानता था। बताया जा रहा है कि सितंबर 2020 में केरल के मलप्पुरम की मंजरी नाम की जगह पर एक मीटिंग हुई थी। इस मीटिंग में PFI की हिट स्क्वाड का कमांडर कमाल केपी अपने सहयोगियों बदरुद्दीन और फ़िरोज़ खान के साथ मौजूद था।

तब सिद्दीक कप्पन ने इस सभा को सम्बोधित करते हुए कहा था कि जाटों और गुर्जरों को एकजुट कर के कपिल मिश्रा और परवेश वर्मा ने वो कर दिखाया जो दिल्ली पुलिस भी नहीं कर पाई। अंत में उसने PFI की हिट स्क्वायड को निर्देश दिया कि वो कपिल मिश्रा और परवेश वर्मां की हत्या कर दें। इस साजिश का खुलासा PFI के हिट स्क्वाड गैंग के कमांडर कमाल केपी से NIA की पूछताछ के बाद हुआ। उस पर साल 2020 में हाथरस में दलित महिला की मौत के बाद हाथरस में अशांति फैलाने का आरोप है।

केरल के मलप्पुरम निवासी कमाल को उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने 3 मार्च 2023 को गिरफ्तार किया था। तब से वह लखनऊ की जेल में बंद है। कमाल केपी PFI के हिट स्क्वायड के अन्य सदस्यों बदरुद्दीन और फ़िरोज़ खान का लीडर था। कमाल की तरह बदरुद्दीन और फ़िरोज़ को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। कमाल केपी पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) के टॉप 5 सदस्यों में से एक है। दावा यह भी किया गया है कि बदरुद्दीन और फ़िरोज़ खान सिद्दीक कप्पन के साथ दिल्ली भी आए थे। यहाँ ये तीनों एक साथ राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन (NCHRO) के ऑफिस में भी गए थे।

दिल्ली दंगों के महज कुछ ही दोनों बाद उत्तर प्रदेश में हाथरस की घटना हुई थी। तब सिद्दीक कप्पन एक कार से हाथरस जा रहा था। आरोप है कि इस कार में PFI की छात्र शाखा CFI (कैम्पस फ्रंट ऑफ़ इंडिया) के कुछ अन्य सदस्य भी सवार थे। वहीं बदरुद्दीन और फ़िरोज़ को एक दूसरी कार से कपिल मिश्रा और परवेश वर्मा को ठिकाने लगाने के टारगेट पर भेजा गया था। यह साजिश तब फेल हो गई जब 5 अक्टूबर 2020 को UP पुलिस ने हाथरस जाते समय कप्पन को गिरफ्तार कर लिया गया था।

कप्पन के पकड़े जाने की खबर सुन कर बदरुद्दीन और फिरोज खान डर गए। उन्होंने अपना प्लान कैंसिल कर दिया था। हाथरस की घटना के चार महीने बाद फरवरी 2021 में UP ATS ने बदरुद्दीन और फ़िरोज़ खान को गिरफ्तार कर लिया। उन पर आरोप है कि ये दोनों लखनऊ और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में विस्फोट करने वाले थे। दोनों के पास से बंदूकें और विस्फोटक भी बरामद हुए थे। पूछताछ में इन दोनों ने अपने लीडर के तौर पर कमाल केपी का नाम लिया था। आखिरकार 2 साल तक फरार रहने के बाद 4 मार्च 2023 को कमाल केपी को भी UP ATS ने दबोच लिया। उसे लखनऊ जेल में रखा गया जहाँ NIA ने उस से पूछताछ की। दावा किया जा रहा है कि इसी पूछताछ में कमाल केपी ने कपिल मिश्रा और परवेश वर्मा की हत्या की साजिश का खुलासा किया।

बताया यह भी जा रहा है कि फ़िरोज़ खान और बदरुद्दीन ने भी मजिस्ट्रेट को दिए बयान में यह कबूल किया है कि कमाल केपी की तरफ से उन्हें दोनों भाजपा नेताओं की हत्या के निर्देश दिए गए थे। इसी बयान में इन दोनों आरोपितों ने आगे बताया था कि सिद्दीकी कप्पन ने PFI के इस हिट दस्ते को भाजपा नेताओं की हत्या के लिए तैयार करने वाली मानसिक ट्रेनिंग दी थी। UP पुलिस की चार्जशीट में भी यह बताया गया है कि कप्पन प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) का सदस्य है।

कप्पन को 9 सितंबर 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने UAPA एक्ट के तहत जमानत दे दी थी। जमानत का आधार उसके मीडिया में काम करने को बनाया गया था। हालाँकि अपने खिलाफ चल रहे धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के एक अन्य मुकदमे की वजह से वह जेल में ही रहा था। इस केस में भी उसे फरवरी 2023 में लखनऊ की सत्र अदालत से जमानत मिल गई थी। इसके बाद लगभग 26 माह तक जेल में रहे कप्पन की रिहाई सम्भव हो पाई थी थी। हालाँकि फिरोज खान, कमाल केपी और अंशद बदरुद्दीन अभी भी लखनऊ जेल में बंद हैं।

बताते चलें कि 24 और 25 फरवरी 2020 को भारत की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बड़े पैमाने पर हिंदू विरोधी दंगे हुए थे। ये दंगे लम्बे समय से शाहीन बाग और अन्य क्षेत्रों में चरमपंथियों द्वारा CAA को ले कर फैलाई गई नफरत की उपज थे। इन दंगों में शाहदरा, मौजपुर, भजनपुरा, ब्रह्मपुरी और पूर्वोत्तर दिल्ली के अन्य हिस्सों सबसे अधिक प्रभावित हुए। इन दंगों में 53 लोगों की जान चली गई थी जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए। मृतकों और घायलों में दिल्ली पुलिस के स्टाफ भी शामिल हैं।

दिल्ली आकर अमित शाह से मिले राज ठाकरे, भतीजे को ‘भाव’ मिलने पर चाचा का मोदी कैबिनेट से इस्तीफा: झारखंड में BJP के साथ सीता

लोकसभा चुनाव से पहले बिहार से लेकर झारखंड और महाराष्ट्र तक राजनीतिक सरगर्मियाँ बढ़ रही हैं। बिहार में हाजीपुर के सांसद पशुपति पारस ने खुद को तवज्जो न मिलने पर केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया, तो झारखंड में राज्य की सत्ताधारी पार्टी जेएमएम की महासचिव और मौजूदा विधायक सीता सोरेन ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया है। वहीं, महाराष्ट्र में राजनीतिक बदलाव भी दिख रहा है। महाराष्ट्र की पार्टी मनसे के प्रमुख राज ठाकरे दिल्ली पहुँचे और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की है। माना जा रहा है कि वो एनडीए में शामिल हो सकते हैं और उनकी पार्टी मनसे को लोकसभा चुनाव में 2 सीटें मिल सकती हैं।

महाराष्ट्र में नए सियासी समीकरण!

लोकसभा चुनाव 2024 से पहले महाराष्ट्र में नए सिरे से सियासी समीकरण बैठते दिख रहे हैं। मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव विनोद तावड़े से मुलाकात के बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की है। माना जा रहा है कि मनसे को एनडीए में शामिल कराया जाएगा और उसे 2 सीटें मिल सकती हैं। राज ठाकरे को उद्धव ठाकरे का कट्टर प्रतिद्वंदी समझा जाता है और उद्धव ठाकरे की वजह से उन्होंने शिवसेना छोड़कर अपनी पार्टी बनाई थी। वो महाराष्ट्र में भले ही बड़ी राजनीतिक ताकत नहीं बन पाए, लेकिन हमेशा एक गंभीर नेता माने गए। उनके एनडीए में शामिल होने से मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में एनडीए को काफी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

सुप्रिया सुले ने सम्मान का दिया वास्ता

राज ठाकरे की दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात और उनकी एनडीए में शामिल होने की चर्चाओं के बीच एनसीपी(शरद गुट) की नेता सुप्रिया सुले ने उन्हें सम्मान का वास्ता दिया है। सुप्रिया सुले ने कहा कि राज ठाकरे अगर इंडी अलायंस में आते हैं, तो उन्हें उचित सम्मान मिलेगा। सुले ने कहा कि राज ठाकरे को एमवीए (महा विकास आघाड़ी) गठबंधन में शामिल होना चाहिए न कि एनडीए में।

पशुपति पारस ने छोड़ा केंद्रीय मंत्रिमंडल, अगले कदम पर सस्पेंस

बिहार में एनडीए के सीट बंटवारे में खुद को जगह न देने से नाराज पशुपति पारस ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने दिल्ली में अपने इस्तीफे का ऐलान किया और कहा कि उनके साथ नाइंसाफी हुई। पारस ने कहा, “मैं पूरी ईमानदारी और लगन के साथ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सिपाही के रूप में मंत्रीपद संभालते हुए काम कर रहा था। पिछले हफ्ते मैंने बिहार में प्रेस को बताया था कि सीटों को लेकर मुझसे किसी की बात नहीं हुई है। मैं एनडीए की ओर से विधिवत घोषणा का इंतजार कर रहा था। सोमवार को जब एनडीए ने सीट बंटवारे की घोषणा की तो मुझे एहसास हुआ कि मेरे साथ व्यक्तिगत रूप से और मेरी पार्टी के साथ भी नाइंसाफी हुई है। इसलिए, मैंने केंद्रीय मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया है।” हालाँकि उन्होंने पीएम मोदी तारीफ की।

झारखंड में राजनीतिक घमासान, सीता सोरेन ने पार्टी के साथ परिवार भी छोड़ा

झारखंड में शिबू सोरेन की बड़ी बहू, सत्ताधारी पार्टी झामुमो की महासचिव और विधायक सीता सोरेन ने पार्टी के साथ ही परिवार भी छोड़ दिया। उन्होंने इस संबंध में एक चिट्ठी लिखी है और इसे पार्टी अध्यक्ष यानी अपने ससुर शिबू सोरेन को भेजी है। सीता ने कहा कि मेरे और मेरे परिवार के खिलाफ गहरी साजिश रची जा रही है। सीता सोरेन ने पत्र में लिखा है कि मुझे हाल ही में यह ज्ञात हुआ है कि मेरे और मेरे परिवार के खिलाफ भी गहरी साजिश रची जा रही है। मैं अत्यंत दुखी हूं. मैंने यह दृढ़ निश्चय किया है कि मुझे झारखंड मुक्ति मोर्चा और इस परिवार को छोड़ना होगा। इसके बाद उन्होंने बीजेपी ज्वॉइन कर लिया।

सीता सोरेन ने कहा कि मैंने झामुमो के लिए 14 साल तक काम किया, लेकिन मुझे सम्मान कभी नहीं मिला। ऐसे में मैंने आज बीजेपी ज्वॉइन कर लिया है। बता दें कि हेमंत सोरेन के जेल जाने के बाद सीता सोरेन मुख्यमंत्री पद के सबसे करीब थी, लेकिन उन्हें पद नहीं दिया गया। यही नहीं, वो हेमंत की पत्नी कल्पना सोरेन के बढ़ते कदम से भी परेशान बताई जा रही हैं। हालाँकि अब उन्होंने जेएमएम और सोरेन परिवार से नाता तोड़ लिया है।

‘3 दिन से अन्न का दाना तक नहीं खाया’ : मीडिया के सामने भावुक हुए एल्विश यादव के माता-पिता, बोले- हजार बार भी जन्म लें तो ऐसा बेटा चाहिए

यूट्यूबर एल्विश यादव के गिरफ्तार होने के बाद उनके माता-पिता अपने बेटे के लिए परेशान हैं। मीडिया में ऐसी खबरें आने के बाद कि एल्विश ने अपना गुनाह स्वीकार लिया, उन्होंने जेल में जाकर एल्विश से मुलाकात की। उनसे पूछा कि खबरों में जो बताया जा रहा है उसमें कितना सच है। इसके बाद वो मीडिया संस्थानों के पास ये अपील लेकर आए कि उनके बेटे के बारे में गलत खबर न चलाई जाए। इस दौरान उनकी मीडिया चैनलों से क्या बात हुई आइए बताते हैं।

आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, एल्विश यादव के माता सुषमा यादव और पिता राम अवतार यादव ने बताया कि वो लोग अपने बेटे से मिलकर आए हैं और उनके बेटे ने कोई गुनाह नहीं कबूला है। ऐसी खबर न चलाई जाए। उन्होंने कहा कि उनका बेटा बिलकुल निर्दोष है और साफ सुथरा है। उसने कुछ गलत नहीं किया।

उनसे जब एल्विश यादव के लग्जरी लाइफस्टाइल के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा अगर उनका बेटा लग्जरी लाइफस्टाइल जीता है तो इसका मतलब ये नहीं कि उसपर संदेह किया जाए। एल्विश के पिता ने बताया कि उनके बेटे के पास कोई लग्जरी गाड़ी नहीं है। दो गाड़ियाँ हैं- फॉर्च्यूनर और वैगनआर। उन्होंने बताया कि एल्विश की वीडियो में जो दिखती हैं वो लोन पर ले रखी हैं। इसके अलावा कुछ गाड़ियाँ वो दोस्तों से लेता है।

उन्होंने बताया कि जो प्लॉट उन्हें मिला है वो उनकी जमीन के बदले है। इसके अलावा ये भी बोले कि उनका बेटा किसी भी रेव पार्टी में नहीं जाता था। उसके नाम का गलत फायदा उठाया जा रहा है। वहीं माँ ने कहा कि कोई कुछ भी कहे वो लोग जानते हैं कि उनके बेटे ने गलत काम नहीं किया, जो वीडियो चलाई जा रही है वो अलग-अलग लोकेशन की है। उनका बच्चा ऐसी लोकेशन में नहीं गया। चूँकि उनके बच्चे का नाम है इसलिए एनजीओ वाले उन्हें जानबूझकर फँसा रहे हैं।

पिता ने एल्विश को बेकसूर बताते हुए कहा- “मैं चाहता हूँ हमारी बात को सुना जाए, हमें भी हक है। मैं हजार जन्म भी लूँ तब भी मुझे ऐसा ही बेटा चाहिए। मैं फक्र करता हूँ उसपर। वो बिलकुल निर्दोष है। जब से वो बिग बॉस जीतकर निकला है लोग उसके पीछे पड़ गए। हम कल मिलकर आए, उसने बताया कि उसने कोई गुनाह नहीं कबूला है। पता नहीं उसे क्यों फँसाया जा रहा है।”

माता-पिता ने जानकारी दी कि उनका बेटा जैकेट बेचकर, यूट्यूब वीडियोज आदि बनाकर पैसे कमाता है। हालाँकि जब उनसे एल्विश की यूट्यूब इनकम आदि पूछी गई तो उन्होंने कहा कि एल्विश आएगा तब वो खुद इसका जवाब देगा।

इसी तरह एबीपी से बात करते हुए, एल्विश यादव के माता-पिता ने मेनका गाँधी से कहा कि वो उस संस्था की अध्यक्ष हैं जिसने एल्विश पर केस किया है। अगर एल्विश की गिरफ्तारी के बाद उन्हें खुशी मिल गई हो तो वो उनके बेटे पर थोड़ी सी दया दिखाएँ। अपनी बात कहते हुए एल्विश के माता-पिता कई बार भावुक हुए। उन्होंने कहा कि तीन दिन से उन दोनों के पेट में अन्न का दाना तक नहीं गया। पता नहीं लोग क्यों उनके बच्चे को परेशान कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि चूँकि उनका बेटा कम उम्र में इतना मशहूर हो गया इसलिए लोगों को उससे जलन होने लगी। पिता बोले कि वो खुद एक टीचर हैं। जब वो दूसरों के बच्चों को पढ़ाते हैं तो क्या अपने बच्चे को नहीं पढ़ाया होगा। उन्होंने कहा- “मुझे अपनी परवरिश पर गर्व है और मैं हर जन्म में उसका पिता बनना चाहूँगा।”

नाले से मिली थी अनु की अर्धनग्न लाश, हत्या में मुजीब रहमान गिरफ्तार: पहले से दर्ज हैं 50+ केस, बुजुर्ग महिला से भी कर चुका है रेप

केरल के कोझिकोड में 11 मार्च 2024 को अनु नाम की एक 26 वर्षीया महिला की हत्या कर दी गई थी। मृतका का अर्धनग्न शव एक नाले से मिला था। इस मामले में पुलिस ने मुजीब रहमान को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि 48 वर्षीय मुजीब ने अनु को लिफ्ट देने के बहाने गाडी में बिठाया था और रास्ते में लूटपाट कर उसकी हत्या कर दी। पुलिस की जाँच के दौरान पता चला है कि मुजीब रहमान का बहुत बड़ा और पुराना आपरधिक रिकॉर्ड पहले से भी है। इनमें रेप और लूट जैसी वारदातें शामिल हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला कोझिकोड के वलूर क्षेत्र की है। यह इलाका पेरंबरा के पास पड़ता है। 11 मार्च को मुजीब ने अस्पताल से घर जाते हुए अनु को देखा। वह चोरी की बाइक से था और हेलमेट पहन रखा था। मुजीब ने रास्ते में अनु को लिफ्ट का ऑफर किया। पीड़िता को लगा कि मुजीब उसका पड़ोसी है और वो बाइक पर बैठ गई। रास्ते में एक सुनसान नाले के पास मुजीब ने अनु को धक्का दे कर गिरा दिया। फिर उसका सिर जमीन पर पटक हत्या कर दी।

अनु की हत्या के बाद मुजीब ने उसके सारे गहने उतार लिए। इसके बाद उसका अर्धनग्न शरीर नाले में फेंक फरार हो गया। घटना के अगले दिन 12 फरवरी को अनु का शव मिलने पर पुलिस ने जाँच पड़ताल शुरू की। जाँच के दौरान पुलिस को घटनास्थल पर CCTV फुटेज में एक लाल रंग की संदिग्ध बाइक दिखी। पुलिस ने इसी बाइक के आधार पर जाँच शुरू की और आखिरकार मुजीब रहमान को दबोच लिया। पूछताछ में उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया है।

जब मुजीब का आपराधिक इतिहास खँगाला गया तो उस पर 50 से अधिक क्रिमिनल केस पाए गए। इन अपराधों में बलात्कार और लूट जैसे केस भी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि मुजीब ने महज 20 साल की उम्र में पहली हत्या की थी। तब उसने एक ज्वैलरी शॉप के मालिक को मार डाला था। साल 2020 में मुजीब ने केरल के ही मुक्काम के पास एक बुजुर्ग महिला से रेप किया था। कोंडोट्टी में जन्मे मुजीब रहमान के खिलाफ अकेले इसी जगह पर 13 केस दर्ज हैं। मुजीब के यौन उत्पीड़न की शिकार बुजुर्ग महिला ने इतने केस होने के बावजूद उसके जेल से आजाद होने पर हैरानी जताई है। महिला का कहना है कि अगर मुजीब को उसके किए की सजा मिली होती तो आज अनु जिन्दा होती।

‘प्रियंका गाँधी ने मेरे पति से कहा- अदिति सिंह के चरित्र को बदनाम करो, तब दूँगी टिकट’: रायबरेली की विधायक का खुलासा, सुनाई राहुल गाँधी से मुलाकात की कहानी

रायबरेली से BJP विधायक अदिति सिंह ने कॉन्ग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गाँधी को लेकर बड़ा दावा किया है। असल में अदिति सिंह और भाजपा के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने ANI की स्मिता प्रकाश के साथ एक पॉडकास्ट शूट किया। इस पॉडकास्ट में अदिति सिंह ने ये भी बताया कि कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं में गाँधी परिवार भी ज़्यादा अकड़ है। अदिति सिंह ने ये भी बताया कि जब वो 2017 में पहली बार विधायक बनी थीं तो संयोग से राहुल गाँधी से भी उनकी मुलाकात हुई थी।

अदिति सिंह ने बताया कि उस दौरान राहुल गाँधी ऐसे दिख रहे थे जैसे उन्हें किसी चीज की खबर न हो और कोई जानकारी न हो। बकौल अदिति सिंह, राहुल गाँधी उस दौरान उनसे पूछा कि उत्तर प्रदेश में हमारे पास कितने विधायक हैं? अदिति सिंह ने जवाब दिया – सात। बकौल महिला विधायक, इसके बाद राहुल गाँधी ने अपना सिर ऊपर की तरफ उठाया और जोर से हँसने लगे। अदिति सिंह उस समय चौंक उठी थीं। अदिति सिंह ने इस दौरान ये खुलासा भी किया कि अंगद सिंह से उनका तलाक हो चुका है।

बता दें कि अंगद सिंह पंजाब के नवाँशहर (शहीद भगत सिंह नगर) से विधायक थे। वो भी 2017 में ही पहली बार MLA चुने गए थे। वो तब कॉन्ग्रेस में हुआ करते थे। अदिति सिंह ने बताया कि टिकट बँटवारे के दौरान प्रियंका गाँधी ने उनके तत्कालीन पति के सामने शर्त रखी थी कि वो अपनी पत्नी अदिति सिंह के चरित्र पर लाँछन लगाएँ, तभी उन्हें टिकट दिया जाएगा। बता दें कि 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में वो निर्दलीय उतरे थे और उनकी हार हुई थी। अदिति सिंह का परिवार कॉन्ग्रेसी रहा है, लेकिन उन्होंने 2021 में बगावत के बाद भाजपा का दामन थामा था।

अदिति सिंह का कहना है कि उनके पूर्व पति को उनके खिलाफ अपमानजनक बयान देने के लिए कहा गया। अदिति और अंगद, दोनों ही बड़े राजनीतिक घरानों से आते हैं। उनके पिता अखिलेश कुमार सिंह 24 वर्षों तक विधायक बने, वो लगातार 5 बार चुने गए। उनकी बेटी दूसरी बार विधायक हैं। वहीं अंगद सिंह के दादा दिलबाग सिंह 6 बार नवाँशहर के विधायक रहे। अंगद के पिता प्रकाश सिंह और माँ गरिकबाल कौर भी एक-एक बार विधायक रह चुकी हैं।

2022 में अंगद सिंह ने भी बताया था कि उन पर उनकी पत्नी के खिलाफ जाने का दबाव है। निर्दलीय नामांकन दर्ज कराते समय उन्होंने बताया था कि अदिति सिंह के साथ उनकी शादी को एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया गया, ताकि उन्हें टिकट से वंचित किया जा सके। अंगद ने बताया कि उन्हें उन्हें ऐसा महसूस कराया गया जैसे उन्होंने कोई अपराध कर दिया हो। उन्होंने बताया था कि उन पर अदिति सिंह के खिलाफ सोशल मीडिया में पोस्ट लिखने का दबाव बनाया गया, जबकि तब वो 15 महीने से अलग रह रहे थे।

दलित की हत्या, कहीं धारदार हथियार से हमला, किसी की दुकान फूँकी… लोकसभा चुनाव से पहले बंगाल में फिर TMC गुंडों के टारगेट पर BJP वर्कर

पश्चिम बंगाल में पिछले कुछ दिनों में बीजेपी कार्यकर्ताओं पर हमलों की संख्या बढ़ गई है। लोकसभा चुनाव 2024 की घोषणा होते ही राजनीतिक हिंसा की नई लहर चल पड़ी है, जिसमें टीएमसी के कार्यकर्ता बीजेपी कार्यकर्ताओं, नेताओं पर जानलेवा हमले कर रहे हैं। बीजेपी कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने की प्रवृत्ति साल 2021 के विधानसभा चुनावों के दौरान हुई भीषण राजनीतिक हिंसा के दौर को याद दिला रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में बीजेपी कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने वाली खबरें चौंकाने वाली हैं।

दिनाजपुर में बीजेपी कार्यकर्ता पर धारदार हथियारों से हमला

बीते शनिवार (16 मार्च 2024) को दिनाजपुर में जॉयदेब दास के बीजेपी कार्यकर्ता पर टीएमसी कार्यकर्ताओं ने हमला किया। टीएमसी कार्यकर्ताओं ने न सिर्फ दास की बेरहमी से पिटाई की, बल्कि धारदार हथियारों से बुरी तरह घायल कर दिया गया। ये वारदात दक्षिण दिनाजपुर जिले के गंगारामपुर उपखंड के कुशमंडी की है।

ईटीवी भारत की रिपोर्ट के मुताबिक, यह हमला स्थानीय टीएमसी नेता तरुण पाल और उनके साथियों ने किया था।

जॉयदेब दास तभी से टीएमसी के गुंडों के निशाने पर थे, जब साल 2023 में पंचायत चुनाव के लिए उनकी भाभी मिताली चुनावी मैदान में उतरी। जॉयदेब दास को गंभीर हालत में गंगारामपुर सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस हमले में दास के पिता भी घायल हो गए। बीजेपी के पश्चिम बंगाल के अध्यक्ष सुकांत मजूमदार पीड़ित भाजपा कार्यकर्ता से मिलने अस्पताल पहुँचे। मजूमदार ने दावा किया कि टीएमसी के नेता तरुण पाल और उसके गुंडों ने दास की पत्नी के साथ भी छेड़छाड़ की।

टीएमसी कार्यकर्ताओं ने ये हमला चुनाव आयोग द्वारा लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा के तुरंत बाद की। इस घटना के बाद मजूमदार अस्पताल पहुँचे और घायलों से मुलाकात की। उन्होंने रविवार (17 मार्च) को ट्वीट में इस बात की जानकारी दी। सुकांत मजूमदार ने लिखा, “टीएमसी के गुंडे राजनीतिक विरोधियों पर हमले कर रहे हैं। मैंने कल रात (शनिवार रात) गंगारामपुर सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में कुशमंडी विधानसभा के भाजपा कार्यकर्ता से मुलाकात की, जिसपर टीएमसी के गुंडों ने हमला किया था।”

दक्षिण 24 परगना जिले में दो हमले

टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने कई जगहों पर बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हमले बोले। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अमित मालवीय ने बताया कि पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बसंती ग्राम पंचायत इलाके में टीएमसी के गुंडों ने सुप्रभा मजूमदार नाम की महिला बीजेपी कार्यकर्ता के साथ मारपीट की। मालवीय ने कहा कि 75 वर्षीय महिला और 17 वर्षीय लड़की पर भी उन्हीं गुंडों ने हमला किया।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि बुरखाली ग्राम पंचायत क्षेत्र के बलिखाल में भाजपा बूथ अध्यक्ष और पार्टी कार्यकर्ताओं पर फावड़े और लोहे की छड़ों से हमला किया गया। अमित मालवीय ने एक ट्वीट में कहा, “हम उनके (भाजपा के पीड़ित कार्यकर्ताओं के) साथ खड़े हैं और उन्हें सभी कानूनी और चिकित्सा सहायता दी जा रही है।”

बीजेपी कार्यकर्ता की दुकान को फूँका

टीएमसी के गुंडों ने रविवार (17 मार्च 2024) की रात करीब 2 बजे रीना ठाकुर नाम की एक गरीब बीजेपी कार्यकर्ता की दुकान में आग लगा दी। यह घटना पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्धमान जिले के पडबेश्वर में हुई। आनंदबाजार पत्रिका की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़िता रीना ठाकुर पडबेश्वर में भाजपा के महिला मोर्चा मंडल की महासचिव हैं। वह पहले तृणमूल कांग्रेस की सदस्य थीं लेकिन करीब 6 महीने पहले उन्होंने टीएमसी छोड़ कर बीजेपी का दामन थाम लिया था। तब से उन्हें टीएमसी के गुंडे परेशान कर रहे हैं और डरा-धमका रहे हैं। उनके ऊपर हमला भी किया गया, ताकि वो बीजेपी छोड़कर फिर से टीएमसी में शामिल हो जाएँ।

चुनाव आयोग द्वारा लोकसभा चुनाव की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद उनकी दुकान को आग के हवाले कर दिया गया। आनंद बाजार पत्रिका से बात करते हुए पीड़ित ने बताया, ”रात करीब 2 बजे मेरे पड़ोसी तुलसी बाउरी ने मुझे फोन किया और बताया कि मेरी दुकान में आग लग गई है।” उन्होंने कहा, “मेरी दुकान पूरी तरह से खाक हो चुकी है। मैंने पुलिस को भी सूचना दी, लेकिन अब मेरी दुकान में कुछ नहीं बचा।”

रीना ठाकुर ने बताया कि पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बावजूद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गयी है। उन्होंने एक स्थानीय टीएमसी नेता पर आरोप लगाया है। सीना ठाकुर ने टीएमसी के स्थानीय नेता संतोष पर आरोप लगाते हुए कहा, “जब से मैं बीजेपी में शामिल हुई हूँ, तब से टीएमसी के गुंडे मुझे प्रताड़ित कर रहे हैं। संतोष ने मुझे कई बार जान से मारने की धमकी दी है। एक माह पहले उसके लोगों ने मुझे पीटा था। मैंने तब भी पुलिस में शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। अब उन्होंने मेरी दुकान ही फूँक दी है।”

ये हमले 2021 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान सत्तारूढ़ टीएमसी सरकार द्वारा भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ की गई चुनाव बाद हिंसा और 2023 पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव के दौरान चुनाव पूर्व हिंसा की याद दिलाते हैं।

दलित बीजेपी नेता की हत्या

सोमवार (18 मार्च 2024) को भाजयुमो बोलपुर के उपाध्यक्ष कृष्णु सिन्हा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी दी कि एक दलित भाजपा नेता की कथित तौर पर टीएमसी के गुंडों ने हत्या कर दी है। पीड़ित की पहचान तन्मय दास के रूप में हुई, जो नानूर में भाजपा एससी मोर्चा मंडल का अध्यक्ष था। सिन्हा ने ट्वीट किया, ”लोकसभा चुनाव से पहले टीएमसी के गुंडों द्वारा एक और हत्या। बैठक के बाद घर जाते समय नानूर के भाजपा एससी मोर्चा मंडल अध्यक्ष तन्मय दास की पूरी प्लानिंग के साथ हत्या कर दी गई। “

उन्होंने आगे कहा, “जिला अध्यक्ष सहित हम सभी लोग सही तरह से पोस्टमार्टम की माँग को लेकर शांतिनिकेतन पुलिस स्टेशन भी गए।”

साल 2021 में पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हिंसा

बता दें कि अपने राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए हिंसा का इस्तेमाल टीएमसी की खासियत बन चुकी है। जब से पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी की सरकार आई है, तब से विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न और तेज हो गया है। विधानसभा चुनाव में टीएमसी पार्टी की जीत के बाद हुई चुनाव बाद हिंसा में एक दर्जन से अधिक भाजपा कार्यकर्ताओं की जान चली गई। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल में महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया, उन पर हमला किया गया और कुछ मामलों में तो उनकी हत्या भी कर दी गई, सिर्फ इसलिए क्योंकि वे एक अलग राजनीतिक विचारधारा से जुड़े थे।

साल 2021 में एक लड़की का उसके पिता के सामने ही टीएमसी के गुंडों ने बलात्कार किया था। पीड़ित ने ऑपइंडिया के साथ अपनी दर्दनाक आपबीती भी साझा की थी। उन्होंने बताया कि कैसे टीएमसी पार्टी से जुड़े अपराधियों ने उन पर हमला किया और यौन उत्पीड़न किया। विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद टीएमसी के गुंडों ने जमकर उत्पात मचाया, अपने विरोधियों के घरों पर हमला किया और लूटपाट की। ऐसे ही एक हमले में टीएमसी के गुंडों ने बीजेपी कार्यकर्ता अविजीत सरकार की पीट-पीटकर हत्या कर दी।

सुप्रीम कोर्ट ने शाही ईदगाह कमेटी को दिया झटका, कहा- पहले हाई कोर्ट जाओ: श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़ी याचिकाओं की एकसाथ सुनवाई का कर रहा था विरोध

मथुरा के विवादित शाही ईदगाह और श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले में आज सुप्रीम कोर्ट ने शाही ईदगाह कमिटी की याचिका खारिज कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने कमिटी को कहा है कि पहले वह इलाहाबाद हाई कोर्ट जाए। यह मामला इस विषय की याचिकाओं को एक साथ किए जाने से जुड़ा हुआ था।

सुप्रीम कोर्ट में शाही ईदगाह कमिटी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस निर्णय पर रोक लगाने की माँग की थी जिसमें इस विषय से जुड़ी सभी याचिकाओं के एक साथ सुनवाई का आदेश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में ईदगाह कमिटी की याचिका खारिज कर दी।

शाही ईदगाह कमिटी ने सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया कि जिन याचिकाओं को एक साथ किया गया है, उनमें से कई के दावे एक-दूसरे के विरोधी हैं। इसके अलावा उन्होंने दावा किया कि इस सम्बन्ध में निर्णय जल्दबाजी में किया गया था। हालाँकि, कोर्ट ने उनकी दलीलें नहीं मानी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले पर पुर्नविचार सम्बन्धी याचिका इलाहाबाद हाई कोर्ट में भी दाखिल की गई है, ऐसे में पहले वहाँ निर्णय हो जाना चाहिए। वहाँ निर्णय हो जाने के बाद ही सुप्रीम कोर्ट आया जाए। इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने मामले की आगे सुनवाई से इंकार कर दिया।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले में हिन्दू पक्ष ने इलाहाबाद हाई कोर्ट से माँग की थी कि इस मामले में दायर की गईं 15 अलग-अलग याचिकाओं को एक साथ मिला लिया जाए और तब सुनवाई की जाए। हिन्दू पक्ष का कहना था कि इससे मामले की सुनवाई में तेजी आएगी और साथ ही इसके पक्षकारों को भी आसानी होगी। इसी सम्बन्ध में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 11 जनवरी, 2024 को एक आदेश में सारी याचिकाओं के एक साथ किए जाने को लेकर आदेश दिया था।

इस मामले में हिन्दू पक्ष की तरफ से पेश हुए वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने शाही ईदगाह मस्जिद को कहा कि वह अपनी बात इलाहाबाद हाई कोर्ट के सामने रखें। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 15 मुकदमों को एक साथ सुनने का आदेश दिया था। इसी आदेश के खिलाफ शाही ईदगाह कमिटी सुप्रीम कोर्ट आई थी। मुझे यह नहीं समझ आया कि इस आदेश में क्या गलत था जिसके कारण वह सुप्रीम कोर्ट आए थे।”

उन्होंने आगे बताया, “इससे एक दिन मुकदमे लगते हैं और सभी पक्षकारों को आसानी होती है। जो लोग यह चाहते हैं कि मुकदमे में देरी हो और यह मामला खींचे वह यहाँ यह याचिका लेकर आए थे। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट जाने को कहा है।”

हिन्दू पक्ष का कहना है कि मथुरा में स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर के बराबर में बनी शाही ईदगाह वाला ढाँचा जबरन वही बना दिया गया जहाँ भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। इस जगह पर कब्जा करके ढाँचा बनाया गया है। यहाँ अभी भी कई ऐसे सबूत हैं जो कि यह सिद्ध करते हैं कि यहाँ पहले एक मंदिर हुआ करता था।

हिन्दू पक्ष का दावा है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म राजा कंस के कारागार में हुआ था और यह जन्मस्थान शाही ईदगाह के वर्तमान ढाँचे के ठीक नीचे है। सन् 1670 में मुगल आक्रांता औरंगज़ेब ने मथुरा पर हमला कर दिया था और केशवदेव मंदिर को ध्वस्त करके उसके ऊपर शाही ईदगाह ढाँचा बनवा दिया था और इसे मस्जिद कहने लगे। मथुरा का मुद्दा नया नहीं है।

अदालत में इस मामले में याचिकाएँ दाखिल की गई हैं और उन पर सुनवाई होती रही है। 13.37 एकड़ जमीन पर दावा करते हुए हिन्दू यहाँ से शाही ईदगाह ढाँचे को हटाने की माँग करते रहे हैं। 1935 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वाराणसी के हिन्दू राजा को भूमि के अधिकार सौंपे थे।