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‘भौकाल’ और ‘पैसों’ के लिए रेव पार्टी करते थे एल्विश यादव: रिपोर्ट में दावा, एक्स-GF ने मुश्किल वक्त में यूट्यूबर का किया सपोर्ट

बिग बॉस फेम एल्विश यादव रेव पार्टियाँ पैसों के अलावा अपना भौकाल बनाने के लिए और स्वैग कायम करने के लिए आयोजित करते थे। ऐसी जानकारी इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में पुलिस सत्रों के हवाले से दी गई है। इसी रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से यह भी कहा गया है कि एल्विश यादव ने अपने जुर्म को नहीं कबूला है जबकि कल ही कुछ मीडिया खबरें दावा कर रही थीं कि यूट्यूबर ने अपना गुनाह पुलिस के सामने मान लिया है।

इंडियन एक्सप्रेस पर प्रकाशित, ताजा रिपोर्ट में पुलिस अधिकारी का नाम लिए बिना उन्हें कोट करके कहा गया- “पूछताछ के दौरान यादव ने अपना गुनाह नहीं कबूला… लेकिन हमारे पास बहुत से सबूत हैं कि वो ऐसा अपना स्वैग और भौकाल बनाने के लिए कर रहा था। वह अपने फैंस में यह बताना चाहता था कि उसे कानून का डर नहीं है और वो जो चाहे वो कर सकता है।”

बता दें कि एल्विश यादव के खिलाफ यह मामला 3 नवंबर 2023 को प्रकाश में आया था उसके बाद मामले में एफआईआर हुई और वो लगातार विवादों में घिरे रहे। गुरुग्राम पुलिस भी लगे हाथ उनकी हिरासत माँग रही है। गुरुग्राम पुलिस सागर ठाकुर से जुड़े मामले में उनकी कस्टडी की डिमांड कर रही है जहाँ एल्विश ने मॉल में घुस उन्हें थप्पड़ मारा था। पुलिस ने कहा है कि वो मामले की जाँच कर रहे हैं और जल्द ही एल्विश को हिरासत में लेंगे।

कीर्ति मेहरा का पोस्ट

एल्विश पर एक साथ टूटी मुसीबतों के बीच उनके फैंस और साथी लगातार उनके समर्थन में पोस्ट कर रहे हैं। इस बीच उनकी एक्स गर्लफ्रेंड कीर्ति मेहरा ने भी एक पोस्ट शेयर किया है। ये एक क्रिप्टिक पोस्ट है इसमें कीर्ति ने बिन कोई नाम लिए कहा, “गीता में लिखा है- कमजोर तेरा वक्त है, तू नहीं।” उनके इस वक्त किए गए पोस्ट से यही अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह एल्विश के लिए किया गया है।

रामजन्मभूमि के बाद अब जानकी प्राकट्य स्थल की बारी, ‘भव्य मंदिर’ के लिए 50 एकड़ जमीन का अधिग्रहण करेगी बिहार सरकार: अयोध्या की तरह होगा पुनौरा धाम का विकास

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के बाद अब बिहार के सीतामढ़ी में माता सीता की जन्मभूमि को लेकर भी प्रयास तेज हो गए हैं। सीतामढ़ी में माता सीता की जन्मस्थली पर नया मंदिर बनाने और इस इलाके का विकास किए जाने की योजना पर बिहार सरकार ने काम चालू कर दिया है।

सीतामढ़ी में अब अयोध्या की तरह ही एक नए भव्य मंदिर का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए पुराने मंदिर के आसपास की 50 एकड़ से अधिक जमीन अधिग्रहित की जाएगी। यह निर्णय हाल ही में बिहार कैबिनेट की एक बैठक में लिया गया है।

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए नए मंदिर के लिए प्रयासरत कामेश्वर चौपाल ने बताया, “माता सीता के लिए सीतामढ़ी का वही महत्व है जो भगवान राम के लिए अयोध्या का है। यह हिन्दुओं के लिए पवित्र है। विश्व भर से लोग अयोध्या के राम मंदिर में दर्शन करने आएँगे और माता सीता की जन्मभूमि भी देखना चाहेँगे। हम चाहते हैं कि सीतामढ़ी में माता सीता का उसी तरह का एक भव्य का निर्माण किया जाए।” चौपाल ने बताया कि अभी जो मंदिर सीतामढ़ी में है, वह 100 वर्ष पूर्व बनाया गया था और उसकी स्थिति अब अच्छी नहीं है।

कामेश्वर चौपाल ने कहा कि सीतामढ़ी में अयोध्या के राम मंदिर जैसा ही एक भव्य मंदिर बनना चाहिए। गौरतलब है कि कामेश्वर चौपाल ने ही अयोध्या के राम मंदिर आन्दोलन के समय शिलान्यास में पहली ईंट रखी थी। वह वर्तमान में राम जन्मभूमि ट्रस्ट के सदस्य भी हैं।

बिहार सरकार ने इससे पहले सीतामढ़ी के पुनर्विकास की योजना के लिए 16.63 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था। इसके अंतर्गत नई सुविधाएँ विकसित की जानी थी। इसके लिए हाल ही में ₹72 करोड़ का बजट भी पास किया गया था।

इसके अंतर्गत सीतामढ़ी में पर्यटकों की सुविधा हेतु मुख्य मंदिर के चारों ओर परिक्रमा पथ, जानकी महोत्सव मैदान में वाहनों की पार्किंग, आगंतुकों के लिए कैफेटेरिया, कियोस्क तथा शौचालय की सुविधाओं का निर्माण कराया जाना था। इसके लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने यहाँ मंदिर, जिसे पुनौरा धाम कहा जाता है, का दौरा भी किया था।

अब 50 एकड़ के अधिग्रहण का प्रस्ताव इससे अलग है। इसमें नए मंदिर का निर्माण किया जाएगा। मंदिर का निर्माण अयोध्या धाम के तर्ज पर ही होगा। इसके लिए पैसे की व्यवस्था आम जनता से चंदा लेकर की जाएगी। इसके बाद मंदिर का निर्माण होगा।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रमुख सचिव एस सिद्धार्थ ने बताया है कि 50 एकड़ जमीन अधिग्रहण का प्रस्ताव भव्य मंदिर और उसमे आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बढ़ाने को लेकर ध्यान में रख कर लाया गया है। उन्होंने बताया कि मंदिर की माँग लम्बे समय से है लेकिन जबसे अयोध्या में राम मंदिर बन कर तैयार हुआ है तबसे यह माँग और जोर पकड़ रही है।

बिहार सरकार के मंदिर के पुनर्निर्माण के इस निर्णय को काफी समर्थन मिल रहा है। लोगों का कहना है कि उनका सीतामढ़ी से धार्मिक और भावनात्मक जुड़ाव है। यदि नया मंदिर बनता है तो उनके इलाके में धार्मिक पर्यटन बढ़ने से समृद्धि आएगी। इससे ख्याति भी बढ़ेगी।

केजरीवाल-सिसोदिया के साथ मिलकर K कविता ने रची थी साजिश, AAP को दिए थे ₹100 करोड़: दिल्ली शराब घोटाले पर ED का बड़ा खुलासा

दिल्ली शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED/ईडी) ने जाँच के बाद कुछ और खुलासे किए हैं। जाँच एजेंसी ने बताया है कि बीआरएस नेता के कविता और कुछ अन्य लोगों ने आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ मिलकर शराब नीति कार्यान्वयन मामले में साजिश रची थी। ईडी ने यह भी जानकारी दी है कि आप नेताओं को के कविता ने 100 करोड़ रुपए से ज्यादा का भुगतान किया था ताकि वह उत्पाद शुल्क नीति में खुद भी आगे लाभ पा सकें।

ईडी द्वारा दी गई जानकारी

मामले की जानकारी साझा करते हुए ईडी ने बताया कि उन्होंने तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव की बेटी के कविता को 15 मार्च को इसी केस में अरेस्ट किया था। बाद में दिल्ली की विशेष पीएमएलए कोर्ट ने उन्हें 7 दिन की रिमांड में भेज दिया। अब वह 23 मार्च तक ईडी की हिरासत में रहेंगी। ईडी ने यह भी बताया कि उन्होंने के कविता पर कार्रवाई करते हुए हैदराबाद स्थित उनके घर पर जाँच भी की थी। इस दौरान कविता के परिजनों ने जाँच करते अधिकारियों को रोकने का प्रयास किया।

बता दें कि इस मामले में अब तक प्रवर्तन निदेशालय की टीम दिल्ली, हैदराबाद, चेन्नई, मुंबई और अन्य जगहों की 245 लोकेशनों पर छापे मार चुकी है। वहीं आप नेता मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और विजय नायर समेत कई लोगों को गिरफ्तार भी किया है। ईडी ने इस मामले में 1 अभियोजन शिकायत और 5 पूरक शिकायतें मिलाकर 6 आरोप पत्र दायक किए है। एजेंसी के बयान में यह भी कहा गया है कि उन्होंने अब तक अपनी कार्रवाई करते हुए 24 जनवरी 2023 से 3 सितंबर 2023 के बीच में 128.79 करोड़ की संपत्ति को जब्त किया है। आगे की जाँच जारी है।

गौरतलब है कि बीआरएस नेता कविता की गिरफ्तारी के बाद मीडिया में बताया गया था कि ईडी उनसे तीन बार पहले भी पूछताछ कर चुकी थी, लेकिन पिछली बार के 2 समन में वो ईडी के सामने पेश नहीं हुई। इसके बाद इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया।

क्या CAA पर लगेगी रोक? सुप्रीम कोर्ट में 200+ याचिकाओं पर होगी सुनवाई, बोले CM सरमा- असम में 3-5 लाख प्रताड़ित हिन्दू नागरिकता के लिए करेंगे आवेदन

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत असम के भीतर लगभग 3-5 लाख लोग नागरिकता के लिए आवेदन करेंगे। उन्होंने लोगों के 1-1.5 करोड़ लोगों के असम में नागरिकता लेने के दावों को नकार दिया। उधर CAA सम्बंधित याचिकाओं पर आज (19 मार्च, 2024) सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है।

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने मीडिया से एक बातचीत में बताया अप्रैल माह के अंत तक असम में CAA सम्बन्धित स्पष्ट तस्वीर सामने आ जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि CAA के तहत NRC में जगह ना पाने वाले हिन्दुओं को भी नागरिकता मिल सकेगी।

मुख्यमंत्री सरमा ने कहा, “पिछले सप्ताह CAA के लागू होने की घोषणा की गई थी और 19 अप्रैल तक, इसके 40 दिन हो जाएँगे जिससे हमें राज्य में साफ़ तस्वीर मिलेगी। 13 हिन्दू परिवारों को गुजरात में CAA के तहत नागरिकता दी जा चुकी है लेकिन असम में अभी CAA के अंतर्गत ज्यादा आवेदन नहीं हुए हैं।”

उन्होंने NRC के विषय में बताते हुए कहा कि 1971 के युद्ध के समय बड़ी संख्या में हिन्दू परिवार भारत आए थे लेकिन उनमें से कई वापस भी चले गए थे। उन्होंने कहा, “इनमें से बहुत से परिवारों को तब प्रशासन द्वारा राशन कार्ड देने से मना कर दिया गया था, इसलिए उनके पास केवल शरणार्थी पंजीयन कार्ड था, लेकिन प्रतीक हजेला (NRC के अधिकारी) ने इस कार्ड को NRC में शामिल नहीं किया था इसलिए बड़ी संख्या में परिवार नागरिकता नहीं ले पाए।”

CM सरमा ने बताया कि असम में NRC की अंतिम सूची जारी होने के बाद लगभग 16 लाख लोगों को इसमें जगह नहीं मिली थी। इसमें 7 लाख मुस्लिम हैं जबकि बाकी कोच-राजबंशी और दास जैसे उपनाम वाले असमिया हिन्दू हैं। इनको CAA के तहत नागरिकता पर भी उन्होंने बात की।

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि CAA के अंतर्गत 3 से 6 लाख लोग आवेदन असम में करेंगे, ना कि 18-20 लाख या 1.5 करोड़, जिसका दावा किया जा रहा है। इसमें 10% ऊपर नीचे हो सकता है लेकिन आँकड़ा 6 लाख से ऊपर नहीं जाएगा।” CM सरमा ने बताया कि उन्होंने यह आँकड़ा राज्य पर अपनी पकड़ के चलते अनुमान से दिया है।

उन्होंने बांग्लादेश में हिन्दुओं की जनसंख्या घटने को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा, “लोगों का दावा है कि बांग्लादेश में 1.5 करोड़ हिंदू जनसंख्या में कम हो गई है, यह सभी असम में आ गए हैं। असल सच है कि बांग्लादेश में 2 करोड़ मुस्लिम आबादी बढ़ गई, और हिंदू आबादी इसलिए कम हो गई क्योंकि धर्मांतरण हो गया।”

गौरतलब है कि हाल ही में केंद्र सरकार ने CAA कानून को देश भर में लागू किया है। इसके अंतर्गत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आने वाले गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता का देने का प्रावधान है। इसके नियमों के अंतर्गत 2014 से पहले वैध रूप से भारत आए सभी हिन्दू, सिख, जैन, पारसी, बौद्ध और ईसाई शरणार्थियों को नागरिकता दी जाएगी। इसके लिए केंद्र सरकार ने एक पोर्टल और मोबाइल एप भी लॉन्च किया है।

‘क्या मरे हुए लोग फिर जिन्दा होंगे?’: गाजियाबाद में ईसाई मिशनरियों के कार्यक्रम में अमेरिका और कोरिया के लोग शामिल, गरीबों के धर्मांतरण के खिलाफ शिकायत

उत्तर प्रदेश के गाजियाबद में ईसाई धर्मान्तरण का मामला सामने आया है। यहाँ एक कार्यक्रम के दौरान हिन्दू संगठनों ने पहुँच कर हंगामा किया है। हिन्दू संगठनों का आरोप है कि ईसाई मिशनरियों ने हिन्दुओं को धोखे से बुलाया और उन्हें धर्मान्तरित करने की कोशिश में जुटे थे। पुलिस ने केस दर्ज कर के कुछ लोगों को हिरासत में लिया है। घटनास्थल से ईसाई मत से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए हैं। जमावड़े में कुछ विदेशी लोगों की भी मौजूदगी की जानकारी मिली है। मामले की जाँच की जा रही है। घटना रविवार (17 मार्च, 2024) की है।

यह मामला गाजियाबाद के थाना क्षेत्र कौशाम्बी का है। हिन्दू संगठन के सदस्यों ने मामले की शिकायत थाने में दी है। उन्होंने अपनी शिकायत में बताया है कि रविवार को कुछ बाहरी लोगों ने कौशाम्बी थानाक्षेत्र के निर्धन और मेहनतकश परिवारों के बीच ईसाई मत के प्रचार वाले पर्चे बँटवाए हैं। इन पर्चों में सबको एक जगह जुटने के लिए कहा गया था। इस जमावड़े की सूचना विश्व हिन्दू परिषद को भी मिली। विहिप के कई कार्यकर्ता मौके पर पहुँचे तो वहाँ विदेशी नागरिकों सहित कई नाबालिग बच्चे भी मौजूद मिले।

VHP कार्यकर्ताओं का आरोप है कि कार्यक्रम स्थल पर हिन्दुओं को पैसों का भी लालच दिया जा रहा था। इन पैसों की एवज में उन्हें भ्रम फैलाने वाली तमाम मज़हबी बातें लिखी किताबें पकड़ाई जा रहीं थी। हिन्दू संगठनों के हंगामे के चलते मौके पर पुलिस पहुँच गई। बताया जा रहा है कि पुलिस को इस कार्यक्रम की पूर्व सूचना भी नहीं दी गई। पुलिस ने पहले विरोध कर रहे लोगों को समझा कर शांत करवाया। बाद में कार्य्रकम के आयोजकों को साथ ले कर थाने गई। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

मंच पर मौजूद लोगों में अमेरिका और कोरिया के कुछ लोग भी बताए जा रहे हैं। आयोजकों में महिलाएँ भी शामिल थीं। कुछ लोगों को हिरासत में ले कर पूछताछ की जा रही है। ऑपइंडिया को वो पर्चा मिला जिसे बाँट कर लोगों को बुलावा भेजा गया था। इस पर्चे में हेडलाइन के तौर पर ‘यीशु की क़ुरबानी को याद करें’ लिखा हुआ था। नीचे बाइबिल के लूका 22:19 का हवाला दे कर लिखा था, “मेरी याद में ऐसा ही किया करना।” पर्चे के नीचे 24 मार्च 2024 को पार्क क्राउन बैंक्वेट हॉल कौशाम्बी में सभी को शाम 7:45 पर जुटने का आह्वान किया गया है। आह्वान के साथ इस साल यीशु की मौत का स्मारक मनाने का भी एलान छपा हुआ है।

एक अन्य पर्चे में बाइबिल पर आधारित ख़ास भाषण का भी जिक्र है। इसका टाइटल है, “मरे हुए फिर से जिन्दा होंगे। सपना नहीं, सच।” अधिक जानकारी के लिए jw.org नाम की वेबसाइट और उसका बारकोड भी छपा हुआ है। इन सभी का कॉपीराइट अमेरिका के पेंसिल्वेनिया स्थित वॉच टॉवर बाइबल एंड ट्रैक्ट सोसाइटी के पास बताया गया है। बाँटे जा रहे अन्य पर्चों में ‘शैतान का शासन खत्म होने के बाद दुनिया कैसी होगी’ और ‘क्या मरे हुओं को दोबारा जीवन मिलेगा’ जैसे सवाल छपे हुए हैं। फ़िलहाल इस मामले पर पुलिस ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। पुलिस का बयान जारी होने पर उसे खबर में अपडेट किया जाएगा।

‘च*टे तेरे परिवार को खत्म कर देंगे, तू गाँव छोड़ कर भाग जा’: दलित नेत्रपाल जाटव को परिवार सहित धमकी, पेड़ भी काट कर ले गए नसीम, तपीस, हारिस, मुश्ताक और यासीन

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में एक दलित परिवार पर गाँव छोड़ कर चले जाने का दबाव बनाने का मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार को जातिसूचक शब्द, बोल कर और गालियाँ देते हुए हथियार दिखाए जा रहे हैं। साथ ही उनकी हत्या की धमकियाँ दी जा रही हैं। इस मामले में पीड़ित ने अदालत के माध्यम से नसीम, तपीस, हारिस, मुश्ताक और यासीन के खिलाफ नामजद FIR दर्ज करवाई है। शनिवार (16 मार्च 2024) को दर्ज हुई इस FIR में कुछ अन्य अज्ञात लोगों का भी जिक्र है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

यह मामला बुलंदशहर के थानाक्षेत्र कोतवाली देहात का है। यहाँ के गाँव दरियापुर के रहने वाले नेत्रपाल जाटव ने अदालत के माध्यम से शनिवार को पुलिस में अपनी FIR दर्ज करवाई है। FIR में नेत्रपाल ने खुद को सीधा-साधा व्यक्ति बताते हुए कहा है कि उनके खेत में एक शीशम का पेड़ लगा था जिसे 5 जनवरी 2024 को नसीम, तपीस, हारिस, मुश्ताक और यासीन ने जबरन काट लिया था। यह पेड़ लगभग 50 साल पुराना था जिसे नामजद आरोपितों ने कुछ अज्ञात लोगों के साथ काट कर ट्रॉली में लाद लिया और अपने साथ ले गए।

जब नेत्रपाल की पत्नी ने आरोपितों को ऐसे करने से रोका तो उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। शिकायत में बताया गया है कि आरोपितों ने नेत्रपाल जाटव की पत्नी से कहा, “च*टे तेरे परिवार को खत्म कर देंगे। तूने थाने में शिकायत की तो जान से मार देंगे। पुलिस हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकती।” पीड़ित का दावा है कि उसने तब पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी। हालाँकि इस शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि उलटे पीड़ित को ही मुचलके में पाबन्द कर दिया गया था।

इसके घटना के कुछ दिन बाद 28 जनवरी 2024 को पीड़ित नेत्रपाल जाटव गाँव के ही विजेंद्र और जगवीर के साथ कहीं जा रहा था। तभी रास्ते में उसे नसीम, तपीस, हारिस, मुश्ताक और यासीन ने घेर लिया। इन सभी ने पीड़ित को पहले तो गालियाँ देते हुए जातिसूचक शब्द बोले। बाद में आरोपितों ने कहा, “तू गाँव छोड़ कर भाग जा नहीं तो हम कहीं का नहीं छोड़ेंगे।” पीड़ित ने इस धमकी के बाद खुद को बेहद डरा हुआ बताया है। शिकायत में कहा गया है कि तब जिले के एसएसपी से शिकायत का भी कोई असर नहीं हुआ।

नेत्रपाल जाटव ने अदालत में अर्जी दे कर FIR दर्ज करने की गुहार लगाई थी। अदालत के आदेश पर पुलिस ने नसीम, तपीस, हारिस, मुश्ताक और यासीन के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। इन सभी पर IPC की धारा 379, 504 और 506 के अलावा SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

ग़रीबी का सफाया, आतंक पर प्रहार, भ्रष्टाचार पर कार्रवाई, किसानों की समृद्धि, युवाओं को अवसर… कर्नाटक में PM मोदी ने बताया क्यों 400 पार, बोले – झूठी-लुटेरी है कॉन्ग्रेस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक के शिवमोग्गा में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए समझाया कि आखिर इस लोकसभा चुनाव में NDA का 400 के पार जाना क्यों ज़रूरी है। पीएम मोदी ने कर्नाटक की जनता से सोमवार (18 मार्च, 2024) को कहा कि वो प्रार्थना करने आए हैं कि 4 जून को 400 पार। उन्होंने कहा कि इस मिशन में कर्नाटक के मतदाताओं की बहुत बड़ी भूमिका है। इसके बाद उन्होंने जवाब दिया कि वो 400 सीटों की बात क्यों कर रहे हैं।

पीएम मोदी ने समझाया कि विकसित भारत और विकसित कर्नाटक के 400 पार का नारा लगाया। उन्होंने कहा कि ग़रीबी कम करने के लिए, आतंकवाद पर प्रहार के लिए, भ्रष्टाचार पर कार्रवाई के लिए, किसानों की समृद्धि के लिए, युवाओं को नए अवसर देने के लिए 400 पार सीटों का नारा दिया। पीएम मोदी ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में देश ने भाजपा का काम देखा है, पार्टी की सबसे बड़ी प्राथमिकताएँ हैं – विकास, ग़रीब कल्याण और सामर्थ्यवान भारत।

पीएम मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस के पास विकास का एजेंडा नहीं है, इसलिए वह तरह-तरह के हथकंडे अपनाती है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस का पहला हथकंडा है – झूठ बोलो! बड़े-बड़े झूठ बोलो! कॉन्ग्रेस का दूसरा हथकंडा है – अपने झूठ को ढकने के लिए, नए झूठ बोलो। उन्होंने समझाया कि कॉन्ग्रेस का तीसरा हथकंडा है – जब पकड़े जाओ, तो अपनी करतूतों का ठीकरा दूसरों के सर फोड़ दो। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि कॉन्ग्रेस की मंशा कभी काम की नहीं होती। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस का केवल एक ही इरादा होता है- लोगों को लूटना, अपनी जेबें भरना।

पीएम मोदी ने कर्नाटक में कहा, “मुंबई में इंडी अलायंस की तरफ से एक खुला ऐलान किया गया है। वे लोग हिंदू धर्म में समाहित शक्ति को समाप्त करना चाहते हैं। हिंदू समाज जिन्हें शक्ति मानता है, उस शक्ति के विनाश का ऐलान कर दिया है। अगर शक्ति विनाश का उनका ऐलान है, तो शक्ति उपासना का मेरा भी ऐलान है। मैं जब सार्वजनिक जीवन में आया, जब मैंने अपने समय का पल-पल और शरीर का कण-कण लोगों की सेवा के लिए समर्पित करने का संकल्प लिया तो मुझे इसी शक्ति ने ऊर्जा दी। आज भी मैं शक्ति की उपासना करता हूं, देश के कोटि-कोटि लोग हिंदू धर्म की इस शक्ति के उपासक हैं।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उनके लिए देश की नारी शक्ति, इसी शक्ति का प्रतिबिंब है। पीएम मोदी ने बताया कि कैसे कई राजनीतिक जानकार कहते रहे हैं कि नारी शक्ति मोदी की साइलेंट वोटर है। उन्होंने कहा कि मेरे देश की नारी शक्ति वोटर नहीं, बल्कि माँ शक्ति स्वरूपा है। पीएम मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने सबसे पहले देश को जाति में बांटा, समुदाय में बाँटा, धर्म, क्षेत्र और भाषा के आधार पर लोगों को बाँटा और सत्ता हासिल करने के लिए कांग्रेस ने देश का बँटवारा भी किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब कॉन्ग्रेस फिर से देश को बाँटने वाले खतरनाक खेल खेलने लगी है।

क्लास में गैर-मुस्लिम बच्चों के पानी पीने पर बैन, क्योंकि चल रहा है रमजान का रोजा: जर्मनी के उसी शहर की घटना, जहाँ ‘भाईचारे’ के लिए लगाई गई थीं लाइटें

जर्मनी के एक स्कूल में 2 टीचरों द्वारा कक्षा 5 में पढ़ने वाले सभी गैर-मुस्लिम छात्रों के पानी पीने पर रोक लगा दी गई है। बताया जा रहा है कि यह फरमान दोनों टीचरों में क्लास में पढ़ने वाले उन मुस्लिम छात्रों की सुविधा को देख कर दिया है जिनके रमजान माह में रोज़े चल रहे हैं। कुल 27 छात्रों की इस कक्षा में मुस्लिम बच्चों की तादाद महज 3 है। इस मामले में अभी तक स्कूल की तरफ से कोई सफाई नहीं आई है।

यह मामला जर्मनी के फ्रैंकफर्ट शहर का है। यह घटना सबसे पहले बुधवार (13 मार्च 2024) को NIUS नाम के जर्मन न्यूज़ संस्था में प्रकाशित हुई है। इस न्यूज़ में हेडलाइन के तौर पर लिखा गया, “फ्रैंकफर्ट के पास एक बड़ा स्कूल जहाँ पाँचवी क्लास के छात्रों को पानी नहीं पीना चाहिए क्योंकि रमजान है।” इसी रिपोर्ट में क्लास में पढ़ने वाले 27 छात्रों में 3 मुस्लिम छात्र बताए गए हैं। सभी छात्रों की उम्र 10 से 11 साल के बीच है। इन छात्रों ने घर जा कर अपने अभिभावकों को बताया कि उन्हें सहपाठी मुस्लिम छात्रों के रोज़े होने की वजह से पानी नहीं पीने दिया गया।

न्यूज़ संस्था NIUS ने एक गैर मुस्लिम छात्रा के पिता से भी बात करने का दावा किया है। उस पिता ने बताया कि वो स्कूल से आने के बाद अपनी बेटी से दिन भर के बारे में बातचीत करते हैं। इस बातचीत में स्कूल का माहौल और बेटी की दिनचर्या आदि मुद्दे शामिल होते हैं। रात में खाने के समय उस छात्रा ने अपने पिता को बताया कि 2 टीचरों ने उसे क्लास में पानी इसलिए नहीं पीने दिया क्योंकि 27 में से 3 छात्रों के रोजे चल रहे थे। बच्ची से मिली जानकारी हैरान पिता ने इसे एक बेहद अजीब फरमान बताया।

बच्ची के पिता ने आगे कहा कि एक आम मुस्लिम के लिए भी रोज़े आदि रखने की आदर्श उम्र 14 साल मानी जाती है लेकिन क्लास में अधिकतर बच्चे महज 10-11 साल के ही हैं। छात्रा की माँ ने अपनी बेटी से कहा कि अब आगे सेउन्हें स्कूल में जब भी प्यास लगे तो उसे पानी पी लेना चाहिए। हालाँकि अब तक सामने आए तथ्यों के मुताबिक यह निर्णय पूरे स्कूल के बजाय महज 2 टीचरों का ही लग रहा है। अन्य क्लास के छात्रों के साथ ऐसी किसी पाबंदी की जानकारी फ़िलहाल अभी तक सामने नहीं आई है।

हालाँकि NIUS द्वारा कई बार सम्पर्क की कोशिश के बावजूद स्कूल प्रशासन ने इस फरमान पर अभी तक अपना कोई आधिकरिक बयान जारी नहीं किया है। यह घटना जर्मनी के उसी फ्रैंकफर्ट की हैं जिसने मार्च 2024 में शहर में रमजान के मौके पर लाइटें लगवाई थीं। यह लाइटें फ्रैंकफर्ट के सिटी सेंटर क्षेत्र में लगीं थीं। तब जर्मनी की ग्रीन पार्टी ने इसे भाईचारे का प्रतीक बता कर मुस्लिमों को दोस्ती का पैगाम देने वाला कदम बताया था। इसी ग्रीन पार्टी से फ्रैंकफर्ट के मेयर नर्गेस एस्कंदारी-ग्रुनबर्ग ने भी इसे ‘एकजुटता की रोशनी’ बताया था।

बकाया मजदूरी माँगने पर भड़क गया ठेकेदार मोहम्मद रफीक, एक दर्जन मजदूरों के घर में लगा दी आग: जलने से बचे गंगाराम यादव की शिकायत पर गिरफ्तार

गुजरात के कच्छ जिले में दिहाड़ी मजदूरों की झोपड़ियों में आगजनी का मामला सामने आया है। प्रभावित 12 झोपड़ियों में हुई इस आगजनी का आरोप ठेकेदार मोहम्मद रफीक पर लगा है। आरोप है कि अपनी बकाया मजदूरी माँग रहे मजदूरों को रफीक उनके परिवार सहित जिन्दा जलाना चाहता था। पुलिस ने FIR दर्ज कर के रफीक को गिरफ्तार कर लिया है। घटना रविवार (17 मार्च 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना कच्छ जिले के अंजार इलाके की है। यहाँ के खत्री चौक के पास मोची बाजार है जहाँ कई दिहाड़ी मजदूर झुग्गियों में अपने परिवार के साथ रहते हैं। इन सभी का ठेकेदार मोहम्मद रफीक है। रफीक पर आरोप है कि वो यहाँ से मजदूरों को ऊँचे दामों पर मजदूरी करवाने ले जाता था। हालाँकि वह मजदूरों को महज 100 रुपए प्रतिदिन का दिया करता था और बाकी पैसे अपने पास रख लेता था। इसके अलावा रफीक ने तमाम मजदूरों की लम्बे समय से मजदूरी भी बकाया कर दी थी।

काफी समय बीत जाने पर मजदूरों ने रफीक से अपना तगादा शुरू किया। जब रफीक ने उनके पैसे नहीं दिए तो शनिवार (16 मार्च, 2024) को मजदूरों ने आगे से उसके साथ आगे काम न करने का सीधा जवाब दे दिया। आरोप है कि मजदूरों की न सुन कर रफीक को बेहद गुस्सा आया था। उसने तब ही लेबरों को जिन्दा जलाने की धमकी दी थी। रविवार की सुबह अचानक मजदूरों की झुग्गियों में आग लग गई। कुछ ही देर में 12 झुग्गियाँ इस आग की चपेट में आ गई। घटना के समय अधिकतर मजदूर झोपड़ियों में सो रहे थे।

आग लगने से मोची बाजार में अफरातफरी मच गई। पुलिस के साथ फायर ब्रिगेड भी मौके पर पहुँची। काफी प्रयासों के बाद आग पर काबू पाया गया। गनीमत की बात यह रही कि इस अगिनकांड में किसी की जान नहीं गई। हालाँकि मजदूरों की गृहस्थी जल कर राख हो गई। आग बुझने के बाद गंगाराम यादव सहित कुछ अन्य पीड़ितों ने ठेकेदार रफीक के खिलाफ पुलिस को शिकायत दी। शिकायत में बताया गया है कि मोहम्मद रफीक ने पहले मजदूरों की झोपड़ियों पर ज्वलनशील पदार्थ फेंका और बाद में आग लगा कर भाग गया।

इस आगजनी की वजह से आसपास से गुजर रहे बिजली के तारों में भी स्पार्किंग हो रही थी। आखिरकार पुलिस ने पीड़ित मजदूरों की शिकायत पर ठेकेदार रफीक पर FIR दर्ज कर ली है। यह FIR हत्या के प्रयास और आगजनी सहित अन्य धाराओं में हुई घटना के बाद रफीक फरार हो गया था। पुलिस ने दबिश दे कर उसे रेलवे स्टेशन के पास से गिरफ्तार कर लिया। अंजार के पुलिस इंस्पेक्टर एसडी सिसौदिया ने मीडिया से बात करते हुए इस कार्रवाई की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि मामले में आगे की जाँच जारी है।

बिहार में NDA के सीट शेयरिंग फॉर्मूले की घोषणा, चाचा पर भारी पड़ा भतीजा: माँझी-कुशवाहा को एक-एक सीट, जानिए किस पार्टी के हिस्से में गई कौन सी सीटें

बिहार में NDA के घटक दलों के बीच लोकसभा चुनाव 2024 के लिए सीटों के बँटवारे पर मुहर लग गई है। राज्य में भाजपा सबसे अधिक 17 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि जदयू के कोटे में 16 सीटें गई हैं। चिराग पासवान की LJP (रामविलास) को 5 सीटें दी गई हैं। उनके चाचा पशुपति कुमार पारस खाली हाथ रहे। वहीं उपेंद्र कुशवाहा की RLJP व जीतन राम माँझी की HAM (सेक्युलर) को एक-एक सीटों से संतोष करना पड़ेगा। आइए, अब जानते हैं कि किसके हिस्से में कौन-कौन सी सीटें गईं।

BJP इन सीटों पर चुनाव लड़ेगी – पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, औरंगाबाद, मधुबनी, अररिया, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, महराजगंज, सारण, उजियारपुर, बेगूसराय, नवादा, पटना साहिब, पाटलिपुत्र, आरा, बक्सर, सासाराम। जदयू के हिस्से में जो सीटें गई हैं, वो हैं – वाल्मीकिनगर, सीतामढ़ी, झंझारपुर, सुपौल, किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया, मधेपुरा, गोपालगंज, सिवान, भागलपुर, बांका, मुंगेर, नालंदा, जहानाबाद, शिवहर। गया से HAM तो करकट से RLJP ताल ठोकेगी।

वहीं लोजपा (रामविलास) के हिस्से में जो सीटें गई हैं, वो हैं – हाजीपुर, वैशाली, समस्तीपुर, जमुई और खगड़िया। जिस नवादा से पशुपति कुमार पारस कैम्प के चन्दन सिंह सांसद हैं, वहाँ से भाजपा उम्मीदवार उतारेगी। बिहार भाजपा के प्रभारी विनोद तावड़े ने पटना स्थित भाजपा प्रदेश मुख्यालय में सीट शेयरिंग फॉर्मूले को सार्वजनिक किया। इस दौरान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी और जदयू नेता संजय झा समेत अन्य दलों के नेता भी मौजूद रहे।

हालाँकि, प्रेस कॉन्फ्रेंस में पशुपति कुमार पारस की पार्टी का कोई नेता मौजूद नहीं था। अब कहा जा रहा है कि भतीजे ने चाचा को पटखनी दे दी। लोजपा (R) के प्रदेश अध्यक्ष राजू तिवारी इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद रहे। 7 ऐसी लोकसभा सीटें हैं, जहाँ नए उम्मीदवार आएँगे। यह सीटें हैं– शिवहर से रामा देवी, हाजीपुर से पशुपति पारस, गया से हरि मांझी, काराकाट से महाबली सिंह, समस्तीपुर से प्रिंस राज, नवादा से चंदन सिंह और सीतामढ़ी से सुनील कुमार पिंटू।