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मोहम्मद जुबैर ने 3 बार ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारों पर करवाया अपना ‘मुँह काला’: हर बार करता है डिफेंड, हर बार सच आ जाता है सामने

कर्नाटक में 27 फरवरी 2024 को राज्यसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस प्रत्याशी नासिर हुसैन की जीत हुई थी। इसी जश्न का एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें कुछ लोग ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ जैसा नारा लगाते सुनाई दिए। पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी। इसी जाँच के दौरान अचानक मोहम्मद जुबैर की एंट्री होती है जो फैक्ट चेक की आड़ में अपना ख़ास मजहबी एजेंडा बड़े स्तर पर चला रहा है। आनन-फानन में जुबैर ने संदिग्धों को क्लीन चिट दे डाली और अपनी स्वघोषित रिपोर्ट में यह बता दिया कि नारे में ‘नासिर साहब जिंदाबाद’ बोला गया था।

जुबैर की यह साजिश तब फ़ौरन ही कामयाब होती दिखी जब कर्नाटक कॉन्ग्रेस सरकार में मंत्री प्रियांक खड़गे ने भी उसकी हाँ में हाँ मिला दी। हालाँकि बाद में FSL रिपोर्ट आई जिसमें संदिग्धों द्वारा लगाए गए नारों में पाकिस्तान जिंदाबाद बोले जानी की पुष्टि हो गई। पुलिस ने इल्ताज, मुनव्वर और मोहम्मद नाशीपुडी को गिरफ्तार भी कर लिया। इसके बावजूद भी मोहम्मद जुबैर अपनी करतूत पर अड़ा रहा और उसने अपने ट्वीट को डिलीट नहीं किया।

सनातन को खत्म करने की कसम खाने वाले एक मुख्यमंत्री से सम्मानित होने के बाद अपनी हरकतों के चरम पर पहुँच चुके मोहम्मद जुबैर द्वारा ऐसी हरकत पहली बार नहीं की गई। ऐसे मामले में जुबैर के कलंकित इतिहास की फेहरिस्त काफी लम्बी है। मोहम्मद जुबैर के इसी एजेंडे वाले इतिहास में सबसे अहम बात ये है कि जहाँ सच्ची घटना होती है वहाँ वो भ्रम फैलाने लगता है लेकिन जहाँ भ्रामक घटनाएँ होती हैं उसे वह सच साबित करने में जुट जाता है।

मजहबी क्लीन चिट पर भारी FSL रिपोर्ट

कर्नाटक में 27 फरवरी 2024 को लगे ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारों के बाद जुबैर उसी दिन रात 8:44 पर अपनी थ्योरी लेकर आ जाता है। फैक्ट चेकिंग के लिए उसने Inshot ऐप का प्रयोग किया। ऐप से वीडियो को स्लो मोशन कर के उसने इसे उच्च तकनीकि वाला साबित करने की भरसक कोशिश की। अपनी मजहबी अदालत में उसने कन्नड़ चैनलों के तमाम स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए उन्हें और भाजपा समर्थको को दोषी भी करार दे दिया। भ्रम की दीवार बेहद मजबूत हो जाए इसके लिए उसने आदतन/साजिशन नीचे कई थ्रेड भी डाल दिए।

हालाँकि मोहम्मद जुबैर की मुस्लिम ब्रदरहुड वाली मजहबी क्लीन चिट पर कर्नाटक पुलिस की कार्रवाई भारी पड़ी। 4 मार्च 2024 को FSL रिपोर्ट में आरोपितों द्वारा लगाए गए पाकिस्तान जिंदाबाद के नारों की पुष्टि हुई। पुलिस ने मोहम्मद नशीपुडी, मुनव्वर और इल्ताज को गिरफ्तार कर लिया। इस मामले की रिपोर्ट कर्नाटक के गृहमंत्री को भी प्रेषित की जा रही है। इतने के बावजूद मजहबी जुबैर को अपनी करतूत पर अब इतनी भी शर्म नहीं कि वह अपने उस ट्वीट को डिलीट कर ले जिसमें AIMIM पार्टी के कई कट्टरपंथी उसकी शह पर बेहद आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं।

ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक प्रतीक सिन्हा तो उनसे भी 2 कदम आगे निकल गए। उन्होंने अपनी एजेंडे वाली वेबसाइट ALT News पर तो बाकायदा आर्टिकल पब्लिश कर डाला। आर्टिकल में उन्होंने नासिर साहब जिंदाबाद बोले जाने का एलान FSL रिपोर्ट आने से पहले ही कर डाला। इस से भी बड़ी बात ये है कि यह आर्टिकल अभी तक ज्यों की त्यों मौजूद है। इस आर्टिकल को ओशिनी भट्टाचार्य द्वारा लिखा गया है।

बेलगावी मामले पर भी डाला था पर्दा

जैसा हम पहले ही बता चुके हैं कि पाकिस्तान परस्तों की पैरवी मोहम्मद जुबैर ने पहली बार कर्नाटक के बेंगलुरु में नहीं की है। इससे पहले उसने यही हरकत कर्नाटक के ही बेलगावी में की थी। तब राज्यसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस पार्टी की जीत हुई थी। इसी क्रम में बेलगावी विधानसभा से कॉन्ग्रेस प्रत्याशी आसिफ जीत कर विधानसभा पहुँचे थे। उस समय उनके विजय जुलूस में नारेबाजी हुई थी जिसमें ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ कहे जाने का आरोप लगा था।

27 सेकेंड लम्बे इस वीडियो में कुछ इस्लामी टोपी पहने लोग पुलिस की मौजूदगी में आपत्तिजनक नारेबाजी करते दिखे थे। इसी वीडियो के बैकग्राउंड में कुछ लोगों को यह कहते सुना गया था कि ‘वीडियो बनाओ, कुछ लोग पाकिस्तान जिंदाबाद बोल रहे हैं’।

इस मामले में भी फ़ौरन ही मोहम्मद जुबैर ने एंट्री की थी। पहले उसने @total_woke_ के ट्वीट को कोट कर के मामले को भटकाने के लिए बताया कि पुलिस ने कहा कि दूसरे प्रत्याशी की जीत पर कुछ मत बोलो। इसके बाद 13 मई 2024 को एक अन्य ट्वीट में उसने बेलगावी इंस्पेक्टर दयानन्द से बातचीत का दावा करते हुए कहा कि पुलिस के मुताबिक अभी तक पाकिस्तान जिंदाबाद बोले जाने को ले कर कुछ भी साफ़ नहीं कहा जा सकता। इसी ट्वीट की अंतिम लाइन में जुबैर ने बताया कि पुलिस ने उन्हें आगे की जाँच के लिए वीडियो के FSL में भेजे जाने की बात कही है।

बाद में प्रदेश के ADG लॉ एंड ऑर्डर ने 14 मई 2023 को अपने ट्वीट में बताया था कि FIR दर्ज करके आरोपितों के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। ADG L/O के बयान के बावजूद मोहम्मद जुबैर के रुख और ट्वीट में ज़रा सी भी तब्दीली नहीं आई। जुबैर का वह भ्रामक ट्वीट अभी भी ज्यों का त्यों कायम रह कर भ्रम फैला रहा है।

भीलवाड़ा में भी किया जाँच को प्रभावित

मोहम्मद जुबैर खुद को और अपनी वेबसाइट ALT News को एक अदालत के तौर पर बनाने का प्रयास कर रहा है जहाँ से कोई भी पाकिस्तान समर्थक प्रथम दृष्टया क्लीन चिट ले सकता है। वह न सिर्फ संदिग्धों को क्लीन चिट देता है बल्कि उनकी हरकतों को दिखाने वाले मीडिया संस्थानों पर भी ऐसा दबाव बनाने की कोशिश करता है जिससे वो भविष्य में पाकिस्तान परस्तों की हरकतों को नजरअंदाज कर दें।

इसी क्रम में एक अन्य घटना राजस्थान के भीलवाड़ा की है। मई 2022 में जुबैर ने राजस्थान के भीलवाड़ा जिले की घटना का जिक्र करते हुए एक बार फिर से पाकिस्तान परस्तों को कवर किया था। यह घटना फरवरी 2021 की थी जब प्रतिबंधित आतंकी समूह PFI की राजनैतिक शाखा SDPI के नेता अब्दुल सलाम अंसारी ने एक रैली निकली थी। इस रैली में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगे थे। इस वीडियो को ABP और दैनिक भास्कर सहित कई अन्य मीडिया संस्थानों ने खबर के तौर पर चलाया।

घटना के लगभग सवा साल बाद 19 मई 2022 को आदतन जुबैर इस मामले में भी पकिस्तन परस्तों के साथ सीना तान कर खड़ा हो गया था। उसने दैनिक भास्कर और ABP को ही गलत ठहराते हुए घोषित कर दिया कि नारे के तौर पर ‘SDPI जिंदाबाद’ बोला गया था।

हालाँकि, 22 नवंबर 2022 को इस वीडियो की फॉरेंसिक रिपोर्ट सामने आ गई। फॉरेंसिक जाँच में पाकिस्तान जिंदाबाद नारे की पुष्टि हुई थी। तब भीलवाड़ा पुलिस ने PFI के जिलाध्यक्ष अब्दुल सलाम अंसारी को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बावजूद मोहम्मद जुबैर, उसकी वेबसाइट ALT News और सहयोगी अर्चित अपने झूठ पर अड़े रहे। वो खबर, ट्वीट इत्यादि अभी भी ज्यों की त्यों अपनी जगह मौजूद है।

इसके अलावा कई अन्य मौकों पर जुबैर और उसके गिरोह ने पुलिस या अन्य प्रशासनिक अधिकारियों की जाँच से पहले ही अपनी कथित अदालत से फैसला सुना दिया था। दबाव बनाने की यह साजिश न सिर्फ प्रशसनिक अधिकारियों बल्कि मीडियाकर्मियों के खिलाफ भी लक्षित होती है। हालाँकि इस बात की संभावना न के बराबर है कि बार-बार अपनी पोल खुलने के बावजूद जुबैर और उसके गिरोह की हरकतों में जरा सा भी सुधार होगा। फ़िलहाल पाकिस्तान परस्तों में जुबैर की पोल बार-बार खुलने और भ्रामक दबाव काम न करने की वजह से थोड़ी मायूसी जरूर है।

भारत एक देश नहीं, राम को भगवान मानना बेवकूफी: DMK नेता ए राजा ने एक बार फिर उगला जहर, हिंदू विरोध में पार की सीमा

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के जन्मदिन रविवार (3 मार्च 2024) पर जश्न मनाने के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस आयोजन में ए राजा के नाम से पहचाने जाने वाले डीएमके नेता अंदिमुथु राजा ने हिंदू विरोधी और बेहद आपत्तिजनक बातें कहीं। ए राजा ने ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाने के लिए हिंदुओं को ‘बेवकूफ’ कहा। इतना ही नहीं, उन्होंने दावा किया कि भारत एक देश नहीं है। उन्होंने पीएम मोदी पर भी निशाना साधा।

भाजपा के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने ए राजा के अपमानजनक बयानों को लेकर उन पर निशाना साधा। मालवीय ने कहा, “द्रमुक गुट से नफरत भरे भाषण लगातार जारी हैं। उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म को नष्ट करने के आह्वान के बाद अब ए राजा भगवान राम का उपहास और एक राष्ट्र के रूप में भारत के विचार पर सवाल उठाते हैं। कॉन्ग्रेस और INDI गठबंधन के अन्य साथी और राहुल गाँधी भी चुप हैं।”

The The Commune Magazine (द कम्यून मैगजीन) की रिपोर्ट में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के 71वें जन्मदिन के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम के दौरान ए राजा के बयानों का विवरण दिया गया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ‘द्रविड़ियम मॉडल सरकार: सभी के लिए सब कुछ’ थीम के साथ द्रमुक सरकार की उपलब्धियों को बढ़ावा देना था।

ए राजा का पीएम मोदी पर हमला

अपने भाषण के दौरान अंदिमुथु राजा ने कहा कि व्यवसायी अडानी की वृद्धि सीधे पीएम मोदी के राजनीतिक करियर पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा, “अडानी नाम का एक आदमी है। उनके (पीएम मोदी) मंत्री बनने से पहले वह 110वें स्थान पर था। कहाँ? गुजरात में जब मोदी प्रधानमंत्री बने तो वो 66वें स्थान पर आ गए और 10 साल में वे दुनिया के सबसे अमीर आदमी बन गए।”

अंदिमुथु राजा ने आगे कहा, “यह कैसे हुआ? कोई नहीं जानता। हर कोई सोचता था कि उसने उतना ही कमाया जितना वह कमा सकता था। किसने उसे सभी स्थानों पर आमंत्रित किया और ठेका खरीदा? यह वास्तव में मोदी है।” उन्होंने अपने बयान के समर्थन में हिंडनबर्ग की रिपोर्ट का हवाला दिया। हालाँकि, राजा ने यह भी कहा कि हिंडरबर्ग रिपोर्ट में लगाए गए आरोप सार्वजनिक जीवन में आम हैं।

पीएम मोदी पर अपने हमले जारी रखते हुए ए राजा ने गुजरात दंगों पर बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री पर प्रतिबंध लगाने के लिए उन पर निशाना साधा। गोधरा में मुस्लिम भीड़ द्वारा अयोध्या से लौट रहे हिंदू तीर्थयात्रियों से भरी ट्रेन को जलाने के बाद गुजरात में हुए दंगों के लिए उन्होंने पीएम मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के गुजरात में सीएम रहने के दौरान मुस्लिमों को जानवरों की तरह काटा गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौरान मुस्लिम महिलाओं का बलात्कार किया गया। ए राजा ने कहा, “[बीबीसी] ने हर चीज़ को फिल्म में शामिल किया था। यह 5 घंटे का है। उन्होंने इस पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके प्रसारण पर प्रतिबंध लगा दिया। हमने संसद में पूछा कि हमें बताएँ कि यह सच है या झूठ, लेकिन मोदी ने अंत तक अपना मुँह नहीं खोला।”

‘हम राम के दुश्मन हैं’: ए राजा

अंदिमुथु राजा ने अपना प्रलाप जारी रखा और हिंदुओं को निशाना बनाया। उन्होंने कहा, “कहो कि प्रेम ही ईश्वर है। कहो कि ईश्वर व्यक्तियों के बीच दिखाई गई मानवता में है। कहो कि ईश्वर का निवास उस हृदय में है, जिसमें बुरे इरादे नहीं हैं। कहो कि आप एक गरीब व्यक्ति की मुस्कान में भगवान को देख सकते हैं। ऐसे भगवान के लिए ना तो हमें, न कलैग्नार को, न अन्ना को और न ही पेरियार को गुस्सा है!”

भगवान राम पर सवाल उठाते हुए ए राजा ने आगे कहा, “अगर आप कहें कि ये आपकी जय श्रीराम है, अगर ये आपकी भारत माता की जय है तो हम उस जय श्रीराम और भारत माता की जय को कभी स्वीकार नहीं करेंगे। तमिलनाडु स्वीकार नहीं करेगा। तुम जाकर बताओ, हम राम के शत्रु हैं।” कम्बा रामायण का एक अंश सुनाने के बाद उन्होंने कहा, “मुझे रामायण और भगवान राम पर भरोसा नहीं है।”

ए राजा ने आगे कहा, “अगर आप कहते हैं कि रामायण के नाम पर मानव सद्भाव है, जहाँ चार सगे भाई के रूप में पैदा होते हैं, एक कुरावर भाई के रूप में, एक शिकारी भाई के रूप में, दूसरा बंदर दूसरा भाई के रूप में, छठा बंदर एक भाई के रूप में पैदा होता है तो आपका जय श्री राम छी! बेवकूफ़!” ए राजा ने भगवान राम को ही नहीं, भारत को देश के रूप में मान्यता देने से इनकार कर दिया।

‘भारत एक राष्ट्र नहीं है’: ए राजा

अंदिमुथु राजा यही नहीं रूके। उन्होंने कहा, “भारत एक राष्ट्र नहीं है। इस बात को अच्छे से समझ लें। भारत कभी एक राष्ट्र नहीं था। एक राष्ट्र का अर्थ है एक भाषा, एक परंपरा और एक संस्कृति। तभी यह एक राष्ट्र है। भारत एक राष्ट्र नहीं, बल्कि एक उपमहाद्वीप है। यहाँ तमिल एक राष्ट्र है। मलयालम एक भाषा और एक राष्ट्र है। उड़िया एक भाषा और एक देश है। ये सब देश मिलकर भारत बनाते हैं।”

ए राजा ने कहा, “भारत में बहुत सारी परंपराएँ और संस्कृतियाँ हैं। यदि आप तमिलनाडु आते हैं तो वहाँ की एक अलग संस्कृति है। केरल में एक और संस्कृति है। दिल्ली में एक और संस्कृति है। उड़िया में एक और संस्कृति है। जैसा कि आरएस भारती ने कहा कि मणिपुर में लोग कुत्ते का मांस क्यों खाते हैं? हाँ, यह सच है। वे खाते हैं। वह एक संस्कृति है। कुछ गलत नहीं है। यह सब हमारे दिमाग में है।”

बता दें कि अंदिमुथु राजा का हिंदू विरोधी बयानों का एक लंबा इतिहास रहा है। सितंबर 2023 में उन्होंने उदयनिधि स्टालिन के हिंदू विरोधी बयानों का समर्थन किया था और कहा था कि सनातन धर्म पर टिप्पणी करते समय वह नरम थे। उस समय उन्होंने कहा था, “सनातन धर्म की तुलना एचआईवी और कुष्ठ रोग जैसे सामाजिक कलंक वाली बीमारियों से की जानी चाहिए।”

‘मुस्लिमों ने घेर लिया है गाँव, बच्चों से लेकर महिलाएँ सब डर में’ : वडोदरा में जहाँ हुआ हिंदू युवकों पर हमला, वहाँ से ऑपइंडिया की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

गुजरात के वडोदरा के सयाजीपुरा में क्रिकेट खेलने के दौरान उठे विवाद में मुस्लिम युवकों ने हिंदू लड़कों को अंधाधुंध चाकू घोंपे। हमले में घायल लड़कों को अस्पताल इलाज के लिए भेजा गया। वहीं घटना के संबंध में मामला कपूराई थाने में दर्ज हुआ। पुलिस ने एक्शन लेते हुए चारों आरोपितों को जेल भेज दिया है। इनकी पहचान एजाज पठान, मोइन पठान, सोहिल पठान और उर्वेश पठान के तौर पर हुई है।

बताया जा रहा है कि क्रिकेट खेलने के वक्त हिंदू लड़कों की इन चारों से बहस हुई थी, जिसके बाद चारों ने उनके साथ मारपीट की। बाद में सब अपने घर आ गए। लेकिन, रात में आरोपित पक्ष ने सुलह के नाम पर लड़कों को दोबारा बुलाया और जैसे ही वो वहाँ पहुँचे, सबने उनके ऊपर चाकुओं से हमला कर दिया। घटना में हिंदू लड़के बुरी तरह घायल हो गए। अभी सब अस्पताल में हैं, यहाँ उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

सरपंच ने की घटना की पुष्टि, एक पीड़ित के भाई ने बताया गाँव के हालात

गाँव के सरपंच ने इस हमले की पुष्टि की है। वहीं जब हमने भी ग्राउंड की हकीकत जानने के लिए पीड़ितों के परिजनों से संपर्क किया तो एक पीड़ित के भाई ने हमलावरों के डर से नाम न बताने की शर्त पर चौंकाने वाले दावे किए।

उन्होंने जानकारी देते हुए कहा, “इस हमले में मेरा छोटा भाई घायल हो गया है। जब मेरा भाई सुलह करने गया तो उसे चाकू मार दिया गया। उसकी पीठ पर दो से तीन इंच गहरा चाकू घोंपा गया और चेहरे पर भी मारा गया। अभी हमने सीटी स्कैन कराया है, रिपोर्ट आनी बाकी है।”

उन्होंने कहा, “ये लोग पहले से ही उपद्रवी हैं। वे जब चाहें किसी के भी साथ मारपीट करते रहते हैं। सभी बहुत अड़ियल हैं, वे अपने आप को गुंडा बताने के लिए लोगों से लड़ते हैं। बहनों और बेटियों की गाली देते हैं, गिरोह बनाते हैं और लड़ते हैं। इन लोगों पर कई आपराधिक कृत्यों का आरोप है। पहले ऐसा यूपी-बिहार में होता था लेकिन अब इसमें सुधार हुआ है और गुजरात की हालत खराब हो गई है।”

जुमे के दिन डर से बच्चे नहीं जाते स्कूल, मुस्लिम गाँव घेर लेते हैं

गाँव के हिंदुओं की समस्या के बारे में उन्होंने कहा, “हर शुक्रवार को गाँव के लोगों के साथ यहाँ बाहरी लोग भी नमाज पढ़ने आते हैं, जिससे पूरी सड़क अवरुद्ध हो जाती है। ये लोग गाँव को चारों तरफ से घेरने की कोशिश करते हैं। मस्जिद के ठीक सामने आंगनवाड़ी है। प्रताड़ना का आलम यह है कि शुक्रवार को बच्चे वहाँ नहीं जाते। बच्चे उन लोगों के चाकू देखकर डरते हैं। हमारे गाँव में सड़क बनी, पर सड़क तक अवैध रूप से निर्माण खड़ा कर लिया गया है। वे पूरी सड़क पर हमारे साथ जबरदस्ती करते रहते हैं और हमें आने-जाने में भी परेशानी होती है।”

उन्होंने गाँव की बदलती डेमोग्राफी पर बात की। साथ ही गाँव में अवैध रूप से बनाई गई मस्जिद के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि गाँव में अवैध मस्जिद खड़ी कर दी गई। लेकिन दंगा न हो, इस वजह से सब चुप रहे। जब गाव का सरपंच अब्दुल वजीर था, तब उसने झूठे कागज बनवा कर अवैध मस्जिद बनवाई थी।

पीड़ित के भाई ने कहा कि मुसलमान उनके गाँव को चारों ओर से घेरते जा रहे हैं और गाँव में उनका डर बढ़ता जा रहा है। लोग उनके अत्याचार सह रहे हैं। अगर कोई विरोध करता है तो ये लोग मारपीट करते हैं। पीड़ित के भाई ने कहा, “पहले भी ऐसी घटनाएँ हुई हैं, लेकिन फिर बड़ों को बीच में रखकर मामला सुलझा लिया जाता है। ये सब साजिश करते हैं। पहले इनके खुद के बहुत मकान थे। अब बाहर से भी लोगों को लाकर बसाया जा रहा है। गाँव की बहन-बेटियाँ-महिलाएँ भी इन लोगों से पीड़ित हैं। विरोध करने वाला कोई नहीं है, अगर कोई आदमी विरोध करता है तो उसे अगले दिन अकेले ही काम पर जाना पड़ता है। सबको डर है कि कल सुबह हमला कर देंगे? या मार डालेंगे।”

बदल रही डेमोग्राफी

आगे जनसांख्यिकी पर बात करते हुए पीड़िता के भाई बोले- “पहले गाँव में कुछ मुस्लिम घर थे, अब हर साल आठ से दस घर बढ़ रहे हैं। स्थानीय मुस्लिम उन्हें यहाँ बसने में मदद कर रहे हैं। बाहरी लोगों द्वारा उत्पीड़न बहुत अधिक है। गाँव के मुसलमान उनका पूरा समर्थन करते हैं। गाँव के छोटे लड़के, लड़कियों, विधवा बहनों, सभी को डर है कि ये लोग कभी भी कुछ भी कर बैठेंगे।”

आगे वह कहते हैं कि उन्होंने जो भी एक-एक शब्द कहा है वो बिलकुल सत्य है। कोई इसे गलत कहता है तो वह साबित कर सकते हैं कि सच यही है। इस बीच, उन्होंने हमें बताया कि उन्हें भी डर है कि अगर उन्होंने विरोध किया तो उनके भाई की तरह उन पर भी हमला किया जाएगा। ऑपइंडिया से बात करते हुए उन्होंने पुलिस प्रशासन और सरकार से माँग की कि आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। भविष्य में उनके गाँव या परिवार के किसी भी सदस्य के साथ ऐसी घटना न हो, इसके लिए कदम उठाए जाने चाहिए।

पुलिस ने चारों आरोपितों को किया गिरफ्तार

सयाजीपुरा में हिंदू युवकों पर हुए जानलेवा हमले के मामले में उर्वेश पठान, सोहिल दीवान, इजाज पठान और मोइन पठान के खिलाफ एट्रोसिटी एक्ट की धारा और आईपीसी की धारा 307, 326 के तहत मामला दर्ज किया गया है। सभी आरोपितों को वडोदरा की कपूराई पुलिस ने पकड़ लिया है। उनसे पूछताछ की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। उधर, गाँव में भी माहौल न बिगड़े इसके लिए कड़ी व्यवस्था की गई है।

मदरसों की वजह से अंधेरे में मुस्लिम, उन्हें PM मोदी के उजाले की जरूरत: बीजेपी उम्मीदवार अब्दुल सलाम बोले- केरल में मुस्लिम अलग ही दौर में जी रहे

बीजेपी ने केरल से अब्दुल सलाम को मल्लपुरम लोकसभा सीट से मैदान में उतारा है। वो कालीकट यूनिवर्सिटी के वीसी (वाइस चांसलर) रहे हैं। साल 2021 के विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी के टिकट पर मैदान में उतरे अब्दुल सलाम खुद को पीएम मोदी का बड़ा प्रशंसक बताते हैं। अब्दुल सलाम ने कहा कि पीएम मोदी ने देश के अल्पसंख्यकों के लिए जितना काम किया है, उतना किसी ने भी नहीं किया। अब्दुल सलाम ने मुस्लिमों को भारत में सऊदी अरब से भी ज्यादा सुरक्षित बताया है। अब्दुल सलाम ने केरल के मुस्लिमों के दिमाग में अँधेरा भरे होने की बात कही और कहा कि उनका लक्ष्य रहेगा कि वो मुस्लिमों के मन में पीएम मोदी के प्रति भरी नकारात्मकता को दूर करें।

न्यूज 18 से बातचीत में मल्लपुरम से बीजेपी उम्मीदवार अब्दुल सलाम ने कहा, “मेरा पहला टास्क है कि मैं मुस्लिम अल्पसंख्यकों के अंधेरे दिमाग में पीएम मोदी की रोशनी की चमक लाऊँ।” अब्दुल सलाम ने कहा कि केरल में मुस्लिम अलग ही दौर में जी रहे हैं। उन्हें मदरसों से दिशा मिलती है, जिनका नेटवर्क बहुत सख्त है। मैं पीएम मोदी के विकास की रोशनी इनकी जिंदगी में भर दूँ। मैं बताउँगा उन्हें कि आप अंधेरे में रह रहे हैं, जो वास्तव में नहीं है। बल्कि, ऐसा माहौल आपके आसपास बनाया गया है, ताकि आप भ्रम में बने रहें। हकीकत ये है कि पीएम मोदी ने काफी समय और पैसा देश के मुस्लिमों और इसाइयों के विकास के लिए दिया है।

अब्दुल सलाम ने कहा कि भारत में अल्पसंख्यक सबसे ज्यादा सुरक्षित हैं। किसी भी देश की तुलना में। उन्होंने कहा, “भारत में मुस्लिमों को दुनिया के किसी भी देश से ज्यादा आजादी है। यहाँ के मुस्लिमों को सऊदी अरब के मुस्लिमों से ज्यादा आजादी है। यहाँ के अल्पसंख्यक अपनी बात रख सकते हैं। अपने धर्म का विस्तार कर सकते हैं। लोकतांत्रिक आजादी को जी सकते हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी इंडी गठबंधन सिर्फ प्रोपेगेंडा फैलाता है।”

अब्दुल सलाम ने कहा कि इंडी एलायंस की ‘पब्लिक मनी की लूट’ रुक गई है, क्योंकि वो 10 साल से सत्ता में नहीं है। ऐसे में वो बीजेपी और मुस्लिमों के बीच कॉन्ग्रेस प्रोपेगेंडा फैला रही है।

बता दें कि अब्दुल सलाम कालीकट यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर रहे हैं। अब्दुल सलाम देश के सबसे ज्यादा पढ़े लिखे नेताओं में एक है, वह केरल एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर भी रहे हैं। अब्दुल सलाम ने अब तक 153 शोध पत्र लिखे हैं, तो 15 समीक्षा लेख के साथ उनकी लिखी 15 किताबें भी प्रकाशित हो चुकी हैं। वो शैक्षणिक दुनिया में बड़ा नाम माने जाते हैं।

अब्दुल सलाम ने कहा, “मैं तो साल 2014 से पीएम मोदी का बड़ा फैन रहा हूँ। मेरा दिल तभी बीजेपी से जुड़ गया था। हालाँकि मैंने 2019 में आधिकारिक तरीके से बीजेपी में एंट्री ली।” अब्दुल सलाम साल 2021 में केरल विधानसभा चुनाव भी लड़ा था। वो मल्लपुरम के तिरूर सीट से बीजेपी उम्मीदवार के तौर पर उतरे थे और 9097 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे थे।

एमके स्टालिन ‘तमिलनाडु की दुल्हन’ हैं: चीनी रॉकेट के बाद DMK की फिर फजीहत, पोस्टर में गलती के बाद लोग ले रहे मजे

तमिलनाडु में सरकार के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश में हो रही गलतियों को लेकर सोशल मीडिया पर लोग खूब मजाक बना रहे हैं। ISRO के विज्ञापन में तमिलनाडु सरकार द्वारा चीन का रॉकेट लगाने के बाद अब राज्य सरकार का एक और पोस्टर वायरल हो रहा है। इस पोस्टर में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को प्राइड ऑफ तमिलनाडु की जगह ब्राइड ऑफ तमिलनाडु यानी तमिलनाडु के गर्व की जगह तमिलनाडु की दुल्हन लिख दिया गया है।

तमिलनाडु सरकार का यह पोस्टर तेजी से वायरल हो रहा है। सोशल मीडिया पर लोग इसको लेकर तरह-तरह के कमेंट कर रहे हैं। इसके साथ ही राज्य सरकार के विभाग में अंग्रेजी को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। बता दें कि बीते कुछ दिनों में तमिलनाडु सरकार की यह दूसरी गलती सामने आई है।

इसके पहले तमिलनाडु सरकार ने एक विज्ञापन में ISRO के रॉकेट पर चीन का झंडा लगा दिया थाी। दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 फरवरी 2024 को तमिलनाडु दौरे पर थे और इस दौरान ‘कुशालशेखरपट्टीनम’ में ISRO के नए लॉन्च कॉम्प्लेक्स की नींव रखी गई। इससे पहले DMK सरकार ने स्थानीय अखबार में जो विज्ञापन दिया था, उसके कारण खूब फजीहत हुई थी।

डीएमके सरकार की ओर से जो विज्ञापन दिया गया था, उसमें मुख्यमंत्री स्टालिन और प्रधानमंत्री मोदी की फोटो के पीछे एक रॉकेट नजर आ रहा था। उस रॉकेट पर चीन का झंडा दिखाई दे रहा था। इस विज्ञापन की तस्वीर आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग स्टालिन सरकार की हरकत का मजाक बनाने लगे।

तब PM मोदी ने तिरुनेलवेली में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा था, “डीएमके एक ऐसी पार्टी है जो काम तो करती नहीं, लेकिन झूठा क्रेडिट लेने के लिए आगे रहती है। ये कौन नहीं जानता कि लोग हमारी स्कीम पर अपने स्टिकर चिपका देते हैं। अब तो इन्होंने हद कर दी। इन्होंने तमिलनाडु में इसरो लॉन्च पैड का क्रेडिट लेने के लिए उस पर चीन का स्टिकल चिपका दिया है।”

पीएम मोदी ने कहा थछा, “डीएमके के नेता भारत की प्रगति देखने को तैयार नहीं है, भारत के स्पेस की प्रगति देखने को तैयार नहीं हैं। जो पैसे आप देते हैं उन पैसों से इन लोगों ने विज्ञापन दिया और उसमें भारत के स्पेस का चित्र नहीं रखा। भारत के स्पेस की सफलता को वो तमिलनाडु के सामने नहीं रखना चाहते थे। उन्होंने हमारे वैज्ञानिकों का अपमान कर दिया। हमारे स्पेस सेक्टर का अपमान किया।”

Dry Ice: क्या है, किससे बनती है, गुरुग्राम में क्यों होने लगी खून की उल्टियाँँ – जो हाथ से छूने लायक नहीं, उसे क्यों दे दिया खाने?

गुरुग्राम के एक रेस्टोरेंट में माउथ फ्रेशनर खाने के चलते पाँच लोगों की हालत बिगड़ गई, उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। इन लोगों को खून की उल्टियाँ होने लगी थी, जिसमें दो की हालत गंभीर है। ये सभी लोग एक साथ रेस्टोरेंट में आए थे, और माउथ फ्रेशनर खाने के बाद उनकी हालत बिगड़ी थी। अब पता चला है कि इन लोगों ने जिसे ‘माउथ फ्रेशनर’ समझ कर खाया था, वो दरअसल ‘ड्राइ आइस’ यानी सूखी बर्फ कहा जाने वाला एक केमिकल था, जिसे ‘जमा हुआ कार्बन डाइ ऑक्साइड’ कहते हैं।

क्या होता है ड्राई आइस?

ड्राई आइस, जिसे सूखी बर्फ भी कहा जाता है, कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) का ठोस रूप है। यह -78.5°C (-109.3°F) के तापमान पर बनता है और सामान्य वायुमंडलीय दबाव पर ठोस से सीधे गैसीय अवस्था में बदल जाता है, तरल अवस्था में नहीं। इसका इस्तेमाल कूलिंग एजेंट के रूप में किया जाता है। मेडिकल से लेकर फूड इंडस्ट्री में इसका इस्तेमाल होता है।

ड्राई आइस का इस्तेमाल

ड्राई आइस का उपयोग आइसक्रीम, माँस, डेयरी उत्पादों और अन्य खाद्य पदार्थों को ठंडा रखने के लिए किया जाता है। यह खराब होने से बचाता है और ताजगी बनाए रखता है। चिकित्सा क्षेत्र में भी इसका इस्तेमाल होता है। इसका उपयोग चिकित्सा क्षेत्र में ऊतकों, रक्त और दवाओं को ठंडा रखने के लिए किया जाता है। भारत की फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI), अमेरिका की यूनाइटेड स्टेट्स फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) और सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रेवेंशन (सीडीसी) इसे बेहद खतरनाक मानती हैं।

बेहद खतरनाक है ड्राई आइस

इन एजेंसियों की गाइडलाइन के मुताबिक, ड्राई आइस को बिना दस्ताने के हाथ से भी नहीं छुआ जा सकता, क्योंकि ये तुरंत रिएक्शन करता है। इसे बंद कमरे में नहीं इस्तेमाल किया जाना चाहिए, क्योंकि इसके क्षरण (पिघलने) से उस कमरे में कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा अचानक बढ़ सकती है, इसके चलते किसी की जान भी जा सकती है। अमेरिका में तरल नाइट्रोजन और ड्राई आइस के खाद्य पदार्थों वाली जगह तक पर इस्तेमाल करने पर रोक है। इसका इस्तेमाल वहीं किया जा सकता है, जहाँ फ्रिज जैसी मशीनें न हों और मजबूरी में इसकी मदद से सामान को ठंडा रखे जाने की जरूरत हो।

इससे बचना बेहद जरूरी

ड्राई आइस का तापमान बहुत कम होता है, इसलिए इसे सीधे त्वचा से संपर्क नहीं करवाना चाहिए। यह ठंड से जलन (frostbite) का कारण बन सकता है। ड्राई आइस CO2 गैस छोड़ता है। यदि एक छोटी सी जगह में बड़ी मात्रा में ड्राई आइस का उपयोग किया जाता है, तो यह हवा में CO2 का स्तर बढ़ा सकता है और दम घुटने का कारण बन सकता है। ऐसे में इस ड्राई आइस को खाने की वजह से गुरुग्राम में खून की उल्टियाँ होनी शुरू हो गई। अगर उन्हें तुरंत मेडिकल सहायता नहीं मिलती, तो लोगों की जान जा सकती थी। हालाँकि इस केस में दो लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है।

मैनेजर ने कही ये बात

ये हादसा जिस लॉ फॉरेस्टा कैफे (La Forestta Cafe) में हुआ, उसके मैनेजर गगन शर्मा ने कहा कि हम रेस्टोरेंट में ड्राई आइस नहीं रखते हैं। ऐसा हादसा पहली बार हुआ है। ऐसे लगता है, जैसे किसी ने हमें फंसाने के लिए ये चाल चली हो। उन्होंने कहा कि पुलिस जाँच कर रही है, लेकिन इससे पीड़ितों को जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई हम करने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि हम पुलिस जाँच में सहयोग कर रहे हैं।

‘तुमको पिंचरवाला कहें तो चलेगा’ : शाहरुख खान के ‘इडली-वड़ा’ कहने पर भड़के राम चरण के फैंस, बोले- ये पूरे दक्षित भारत का अपमान

गुजरात के जामनगर में अनंत अंबानी-राधिका मर्चेंट के प्री-वेडिंग कार्यक्रम में बॉलीवुड के वीआईपी कलाकारों से लेकर विदेशी की जानी-मानी हस्तियाँ आईं थीं। इस कार्यक्रम की कई वीडियोज हर जगह वायरल हैं। इन्हीं में से एक वीडियो शाहरुख खान और राम चरण की है जिसपर अब सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी हुई है।

दरअसल, इस वीडियो में शाहरुख खान जिसमें वह नाटू-नाटू गाना बजने पर साउथ के सुपरस्टार राम चरण को बुलाते दिखाई दे रहे हैं। उनके हिसाब से शायद वो मजाकिया लहजे में राम चरण को बुलाते हैं लेकिन ये तरीका नेटिजन्स को पसंद नहीं आया।

शाहरुख खान साउथ हीरो राम चरण को स्टेज पर बुलाने के लिए कहते है- “इडली वड़ा राम चरण कहाँ है तू।” इस वीडियो तो देखने के बाद राम चरण के फैंस इसे उनके हीरो का अपमान बता रहे हैं।

उनका कहना है कि रामचरण जैसे हीरो के लिए शाहरुख खान ऐसे शब्द का प्रयोग कैसे कर सकते हैं। एक यूजर लिखता है- “मैं शाहरुख का बहुत बड़ा फैन हूँ लेकिन जिस ढंग से उन्होंने राम चरण को बुलाया है वो बहुत ही अपमानजनक है।”

एक यूजर कहता है कि इस वीडियो में क्या दिक्कत है इसके लिए आपको साउथ के हीरो का फैन होना जरूरी नहीं है। ये 2024 है। सबको सब समझ आता है कि क्या चल रहा है।

एक यूजर ने कहा- ये केवल राम चरण का अपमान नहीं बल्कि पूरे दक्षिण भारत का अपमान है। ये बहुत घटिया हरकत है। लोगों को इसे नॉर्मल नहीं कहना चाहिए।

वहीं एक ने कहा कि जो लोग कह रहे हैं कि इस मामले पर विवाद न करो क्या वो तब बर्दाश्त कर पाते जब राम चरण बॉलीवुड के शाहरुख खान को पिंचरवाला या करा बिरयानी कहते।

अब आँख निकाली है, ब्रेस्ट काटी है… तब फाड़ा गया था प्राइवेट पार्ट, चीरी गई थी टांग: बंगाल का कामदूनी गैंगरेप, जिसके 9 दोषियों में से सिर्फ 2 अब जेल में

पश्चिम बंगाल का मुर्शिदाबाद पिछले माह एक दिल दहलाने वाली घटना सामने आने से चर्चा में था। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया था कि वहाँ एक 13 साल की नाबालिग लड़की का अपहरण के बाद रेप करके उसकी हत्या कर दी गई और जब बच्ची का शव बरामद हुआ तो सबके हाथ-पाँव फूल गए।

दरअसल, सामने आई जानकारी से पता चला था कि बलात्कारी ने उस बच्ची को तड़पा-तड़पा कर मारा और जब वो मर गई तब भी उसके शव के साथ वीभत्सता करता रहा। रिपोर्टों में सामने आया था कि उस मासूम को मारने के लिए उसका गला रस्सी से घोंटा गया था, उसकी आँखी नोच ली गई थीं, और उसकी ब्रेस्ट को काटकर अलग कर दिया गया था। इसके बाद उसके शव में छेद बनाए गए थे जिसमें तेजाब डालकर उसे गलाने का प्रयास हुआ था।

घटना इतनी वीभत्स थी कि सोचकर भी कोई भीतर तक झकझोर जाए। लेकिन चूँकि यह मामला बंगाल का है इसलिए वामपंथी और इस्लामवादियों की लॉबी इस पर लंबे समय से चुप रही। एक बार भी उन्होंने बच्ची के लिए न्याय की गुहार नहीं लगाई। न ही उन्होंने जानना चाहा कि आखिर पीड़ित परिवार का क्या हाल है। नतीजतन परिवार ने इंसाफ के लिए खुद अपनी लड़ाई लड़ी। उन्होंने कब्र से 20 दिन बाद बेटी का शव निकलवाकर दोबारा पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया क्योंकि पहले वाली रिपोर्ट में उस वीभत्सता को छिपाया गया था जो बच्ची के साथ घटी।

खैर! ऐसा पहली बार नहीं है कि बंगाल में रेप, हत्या की घटनाओं पर पर्दा डालने का आरोप लगा हो। 2013 में कामदूनी में एक गैंगरेप सामने आया था, वीभत्सता के मामले में उसकी तुलना लोगों ने दिल्ली के निर्भया से की थी। वहीं अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश संचिता सरकार की अदालत ने इस मामले को देख इसे ‘Rarest Of the Rare (दुर्लभतम से भी दुर्लभतम)’ कहा था। पिछले साल 2023 तक उस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। अंत में मामले के 9 आरोपितों में से सिर्फ 2 को आजीवन कारावास की सजा मिली, जबकि बाकी छूट गए।

कामदूनी गैंगरेप से जुड़ी जानकारी

7 जून 2013 को कामदूनी गाँव में एक द्वितीय वर्ष की छात्रा अपने कॉलेज का एग्जाम देकर स्टेशन से अकेले घर लौट रही थी। वहीं सैफुल, अंसार अली समेत 9 की नजर उस पर पड़ी। उन्होंने उसे छेड़ना शुरू किया लेकिन लड़की उन्हें इग्नोर करके आगे बढ़ने लगी। लड़की का यूँ नजरअंदाज करना उन्हें पसंद नहीं आया और फिर वो उसे पकड़कर खेत में ले गए। खेत में उन्होंने लड़की के साथ क्या किया ये सुनकर शायद किसी की भी रूह काँप जाए।

मीडिया में मौजूद जानकारी बताती है कि आरोपितों ने उसके साथ न केवल गैंगरेप किया बल्कि उसे तड़पा-तड़पा कर मारा। उन्होंने लड़की के साथ हैवानियत इतनी दिखाई कि उसके प्राइवेट पार्ट को रेप के दौरान फाड़ दिया गया। इसके अलावा उसकी टांग खींचकर नाभि तक चीर दी गई और उसे फेंकने से पहले वो जिंदा न बचे इसके लिए उसके गले को रेता गया।

लड़की के भाई ने इस मामले में बताया था कि जब वो खुद कामदूनी से लौट रहा था तो उसने आरोपितों को रास्ते में देखा था। अंसार अली और सैफुल बात कर रहे थे- “आज मजा बड़ा आया, अब घर चलना चाहिए।” इनके बाद उसने बाकी 6 लोगों को भी देखा था। लेकिन तब उसे कुछ पता नहीं था।

खबरों के अनुसार, जब लड़की का शव अगले दिन बरामद हुआ तो लड़की अधनंगी थी। उसके साथ हुई वीभत्सता को देख इस मामले का खूब विरोध हुआ था। उसकी सहेलियाँ दिल्ली तक आईं। लोगों का रोष देख फिर ये मामला सीआईडी को सौंपा गया। जाँच में आरोपितों के अपराध का खुलासा हुआ।

बाद में आरोपित गिरफ्तार भी हुए। लेकिन समय के साथ धीरे-धीरे सबको राहत दी जाती रही। 9 में से 2 रफीकुल इस्लाम और नूर अली को सबूतों की कमी के कारण बरी किया गया। गोपाल नस्कर ट्रायल के दौरान ही मर गया। शेख इमानुल इस्लाम, अमीनुर इस्लाम और भोला नस्कर जिनको पहले 10 साल की सजा मिली थी, उन्हें भी 2023 मे 10000 का जमानत बॉन्ड लगाकर छोड़ दिया गया। अमीन अली को बाद में बरी किया गया और जो दो मुख्य दोषी बचे सैफुल अली और अंसार अली। जिन्हें फाँसी की सजा मुकर्रर हुई थी उनकी सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया गया।

जो एहतेशाम 209 लोगों का हत्यारा, उसे जानना है जाँच करने वाले पुलिस/अधिकारियों के नाम… दिल्ली HC ने की याचिका खारिज: ट्रेन में किया था सीरियल ब्लास्ट

मुंबई में 11 जुलाई 2006 को महज 11 मिनटों में एक के बाद एक कुल 7 धमाके हुए थे, जिसमें 209 की मौत हो गई थी, तो 700 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। इस केस में साल 2015 में मकोका कोर्ट ने पाँच आतंकवादियों को फाँसी की सजा और सात आतंकवादियों को उम्रकैद की सजा दी थी। इनमें से एक आतंकवादी एहतेशाम कुतबुद्दीन सिद्दीकी ने दिल्ली हाई कोर्ट में अपील की थी कि उसे उन अधिकारियों की लिस्ट दी जाए, जिन्होंने मुंबई सीरियल ब्लास्ट केस में जाँच की थी और उसके खिलाफ सबूत जुटाए थे। इस मामले को दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है और कहा है कि ऐसा करने से उन अधिकारियों की जिंदगी पर खतरा बढ़ जाएगा, जो देश के लिए काम करते हैं।

मुंबई सीरियल ब्लास्ट केस में मौत की सजा पाए एहतेशाम सिद्दीकी ने गृह मंत्रालय, आईबी और ट्रेनिंग डिपार्टमेंट (DoPT) से उन अधिकारियों के बारे में जानकारी माँगी थी, जिन्होंने उसके केस की जाँच की थी। जब इन विभागों ने आरटीआई के माध्यम से जानकारी देने से इनकार दिया, तो फिर उसने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर ये जानकारियाँ माँगी थी।

उसने दलील दी थी कि जिन अधिकारियों की नियुक्ति के 20 साल पूरे हो चुके हैं, उनकी नियुक्ति से जुड़ी फाइलों के बारे में आरटीआई से सूचना प्राप्त की जा सकती है, लेकिन न ही गृह मंत्रालय जवाब दे रहा है और न ही आईबी या नियुक्ति-ट्रेनिंग विभाग।

दिल्ली हाई कोर्ट में जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने मामले की सुनवाई की। हाई कोर्ट ने सुनवाई में पाया कि एहतेशाम सिद्दीकी उन अधिकारियो की जानकारी चाहता है, जिनकी जाँच में वो दोषी पाया गया। ऐसे में भले ही उनकी नियुक्ति के 20 साल पूरे हो चुके हों या उससे ज्यादा साल, उनकी जानकारियाँ देना खतरे से खाली नहीं है, उसमें भी तब, जब जानकारी माँगने वाला खुद आतंकवादी के तौर पर दोषी पाया गया हो और उसे मौत की सजा मिली हो। ऐसे में आरटीआई एक्ट के सेक्शन 8(1)(i) के तहत उनकी जानकारियाँ नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने ये भी पाया कि सिद्दीकी की तरफ से जो याचिका दाखिल की गई है, उसका पब्लिक से कोई लेना-देना नहीं।

दरअसल, एहतेशाम सिद्दीकी फाँसी की सजा पाए जाने के बाद से काफी एक्टिव रहा है। वो कभी वकालत की पढ़ाई के लिए कोर्ट से अनुमति माँगता है, तो कभी किसी न्यूजपेपर आर्टिकल के नाम पर खुद को बेगुनाह कहता है और सीरियल ब्लास्ट केस की फिर से जाँच की माँग करता है। इस मामले में पहले भी कोर्ट ऐसा आदेश दे चुकी है।

भयावह सीरियल ब्लास्ट से हिल गया था पूरा देश

मुंबई में चर्चगेट से निकली 7 पैसेंजर ट्रेनों में ये धमाके हुए थे। ये ट्रेनें एक ही स्टेशन से अलग-अलग दिशा में निकली थी। सारे धमाके 6 बजकर 24 मिनट से 6 बजकर 35 मिनट के बीच हुए थे। पहला धमाका चर्च गेट से उत्तर दिशा की ओर चली ट्रेन में खार रोड-सांताक्रूज के पास हुआ था, जिसमें 9 लोगों की मौत हुई थी। ये धमाका 6 बजकर 24 मिनट पर हुआ था।

दूसरा धमाका चर्च गेट से पूर्व दिशा की ओर चली लोकल ट्रेन में ठीक उसी समय 6.24 मिनट को बांद्रा-खार रोड पर हुआ था, जिसमें 22 लोगों की मौत हो गई थी। तीसरा धमाका उसके ठीक एक मिनट बाद स्लो लोकल में चर्चगेट-बोरीवली रूट पर जोगेश्वरी में हुआ था। इसमें 28 लोगों की जान गई थी।

इस सीरियल ब्लास्ट में चौथा धमाका चर्चगेट-बोरीबली रूट पर फास्ट लोकल में माहिम जंक्शन पर प्लेटफॉर्म नंबर 3 पर हुआ, ये धमाका 6 बजकर 26 मिनट पर हुआ, जिसमें 42 लोगों की जान गई। पाँचवाँ धमाका चर्चगेट से उत्तर की दिशा में चली लोकल ट्रेन में मीरा रोड-भायंदर में हुआ, जो 6 बजकर 29 मिनट पर हुआ। इसमें 31 लोगों की जानें गई।

छठाँ धमाका चर्चगेट से विरार को जाने वाली फास्ट लोकल में 6.30 मिनट पर माटुंगा रोड-माहिम जंक्शन के बीच हुआ। इसमें 28 लोगों की मौत हो गई। सातवाँ धमाका चर्चगेट से विरार जा रही फास्ट लोकल में बोरीबली में हुआ, ये धमाका 6.35 मिनट पर हुआ। यहाँ 26 लोगों की जान गई। इसी जगह पर एक बम पाया गया, जिसे बाद में डिफ्यूज कर दिया गया। इस धमाके में कुल 209 लोगों की मौत हुई, तो कुल 714 लोग घायल हुए।

केस में 5 को फाँसी, 7 को उम्रकैद की सजा

साल 2006 के सीरियल ब्लास्ट केस में कुल 12 आतंकवादियों को दोषी पाया गया। इनका संबंध प्रतिबंधित संगठन सिमी से था। इस केस में पाँच आतंकियों को मकोका के तहत 30 सितंबर 2015 को मौत की सजा सुनाई गई, जिसमें फैसल शेख, आसिफ खान, कमाल अंसारी, एहतेशाम कुतुबदीन सिद्दीकी और नवीद खान के नाम हैं। वहीं, मोहम्मद साजिद अंसारी, मोहम्मद अली, डॉ तनवीर अंसारी, माजिद शफी, मुजम्मिल शेख, सोहैल शेख और जमीर शेख को उम्रकैद की सजा दी गई। इन आतंकवादियों को देश की अलग-अलग जेलों में रखा गया है।

जिसे कॉन्ग्रेस ने बनाया था विधायक दल का नेता, वही BJP में शामिल: अरुणाचल प्रदेश में कॉन्ग्रेस की हालत खस्ता, पार्टी के साथ बस 1 MLA

गुजरात के बाद अरुणाचल प्रदेश में कॉन्ग्रेस को बड़ा झटका लगा है। खबर है कि नॉर्थ ईस्ट राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस ने जिसे अपने विधायक दल का नेता बनाया था, वही लोम्बो तायेंग पार्टी का हाथ छोड़ भारतीय जनता पार्टी के साथ जुड़ गए हैं। उनके इस फैसले के बाद कॉन्ग्रेस के पास अब केवल एक विधायक ही राज्य में बचा है वो भी प्रदेश के पूर्व सीएम नबाम तुकी हैं। इससे पहले दो और विधायकों ने पार्टी छोड़ी थी।

अरुणाचल प्रदेश की भाजपा की यूनिट ने इस संबंध में जानकारी देते हुए एक्स पर लिखा, “कॉन्ग्रेस को झटका देते हुए मेबो संसदीय क्षेत्र से लोम्बो तायेंग ने प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री पेमा खांडू के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी पर अपना विश्वास जताया है। उनके साथ चकत अबो जी भी पार्टी में जुड़ी हैं जो दुनिया की सबसे बड़ी राजनैतिक पार्टी से जुड़कर अपनी सेवा देना चाहती हैं। “

बता दें कि साल 2019 में 60 सदस्यीय विधानसभा सीट में कॉन्ग्रेस द्वारा 4 सीटें जीती गईं थीं। लेकिन अब साल 2024 के चुनाव से पूर्व इनमें से 3 विधायक पार्टी का हाथ छोड़ चुके हैं। लोम्बो के पार्टी छोड़ने से पहले पिछले ही हफ्ते कॉन्ग्रेस के दो विधायक निनॉन्ग एरिंग और वांगलिन लोवांगडोंग भाजपा में शामिल हुए थे। उनके साथ एनपीपी के 2 विधायकों ने भी बीजेपी की सदस्यता ली थी। अब ऐसी खबर लोम्बो तायेंग को लेकर है जिनके साथ निर्दलीय विधायक भी बीजेपी में जुड़ी हैं।

जानकारी के मुताबिक पूर्वी सियांग जिले के मेबो से तायेंग 6 बार कॉन्ग्रेस विधायक रहे थे। उनके साथ तिरम जिले के खोंसा पश्चिम से निर्दलीय विधायक चकत अबो भी बीजेपी में शामिल हुईं। भाजपा ने प्रदेश अध्यक्ष बियूराम की मौजूदगी में निर्दलीय विधायक और कॉन्ग्रेस विधायक का पार्टी में स्वागत किया।

दोनों विधायकों ने भाजपा के नेतृत्व और मुख्यमंत्री पेमा खांडू के नेतृत्व में पूर्व विश्वास जताते हुए भाजपा में शामिल होने का काम किया। इनके पार्टी में आने से विधानसभा में भाजपा के विधायकों की संख्या बढ़कर 57 हो गई है। वहीं एनपीपी के पास 2 विधायक हैं और कॉन्ग्रेस विधायक के अलावा 2 निर्दलीय विधायक जुड़ गए हैं। विधानसभा चुनाव से पहले यू भाजपा के पाले में दूसरी पार्टी के नेताओं का आना दिखाता है कि इस बार भी प्रदेश में बीजेपी की स्थिति मजबूत है। इससे पहले गुजरात में कॉन्ग्रेस के दो नेताओं ने एक ही दिन में पार्टी का हाथ छोड़ा था। इनमें अंबरीश डेर और अर्जुन मोढवाडिया जैसे दिग्गज नेता शामिल थे।