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18 साल के अकुल धवन को क्लब ने नहीं दी एंट्री, ठंड से ठिठुरकर चली गई जान: इस साल अमेरिका में अब तक 6 भारतीयों की अस्वभाविक मौत

वर्ष 2024 में अब तक कम से कम 8 भारतीय मूल के लोगों की अमेरिका में मौत हो चुकी है। इनमें अधिकांश छात्र थे। इनमें किसी को मार दिया गया तो कुछ की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है। अब अकुल धवन की मौत के मामले में नई जानकारी सामने आई है।

18 साल के अकुल धवन 20 जनवरी को अमेरिका के इलिनॉयस में मृत पाए गए थे। अब पता चला है कि ठंड में ठिठुरने से उनकी मौत हुई थी। रिपोर्ट में बताया गया है कि अकुल अपने दोस्तों के साथ शाम को क्लब गए थे। लेकिन उन्हें क्लब में घुसने नहीं दिया गया। इसके कारण वे बाहर ही रह गए। कुछ देर बाद अकुल को जब फ़ोन किया गया तब कोई जवाब नहीं आया। इस इलाके में बहुत ठण्ड होती है और पारा -30 तक चला जाता है। इसी ठंड में ठिठुरने के कारण अकुल की मौत हो गई। बताया गया है कि उन्हें हाइपोथर्मिया हो गया था।

अमेरिका में भारतवंशी की अस्वभाविक मौत का यह अकेला मामला नहीं है। पिछले दो माह में अमेरिका में 8 भारतीय मूल के युवकों की मौत हो चुकी है। इनमें से कुछ भारतीय नागरिक भी थे। इनमें से 7 अमेरिका के अलग-अलग कॉलेज या यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे थे और 1 मृतक टेक इंजीनियर था। जनवरी माह में अमेरिका में 5 भारतीय मूल के लोगों की मौत हुई, जबकि फरवरी में 3 लोगों की मौत हुई है। इन मामलों पर नजर डाली जाए तो पता चलता है कि इनमें से 2 की हत्या की गई थी।

15 जनवरी: जी दिनेश और निकेश की मौत

अमेरिका के कनेक्टिकट में 15 जनवरी 2024 को घर में दो भारतीय छात्रों की लाश मिली थी। इनका नाम जी दिनेश (22) और निकेश (21) था। दिनेश तेलंगाना, जबकि निकेश आंध्र प्रदेश के रहने वाले थे। दोनों एक माह पहले ही अमेरिका पढ़ने गए थे। उनकी मौत की वजह साफ नहीं है।

16 जनवरी: विवेक सैनी की हत्या

हरियाणा के भगवानपुर गाँव के रहने वाले विवेक सैनी की 16 जनवरी को अमेरिका में हत्या कर दी गई थी। वे यहाँ मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रहे थे। उनपर हमले का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया था। इससे पता चला कि हथौड़े से मार-मारकर उनकी हत्या की गई थी। हत्या करने वाला वही है, जिसकी वे सहायता करते थे।

20 जनवरी: अकुल धवन का शव मिला

भारतीय मूल के अमेरिकी अकुल धवन का शव 20 जनवरी को मिला था। वह अपने माता -पिता की मर्जी के खिलाफ इलिनॉयस यूनिवर्सिटी में पढ़ने आए थे। उनके अभिभावक अमेरिका के ही कैलिफोर्निया में रहते हैं। अब पता चला है कि उनकी मौत यह हाइपोथर्मिया से हुई थी।

29 जनवरी: नील आचार्य की मौत

भारतीय मूल के छात्र नील आचार्य का भी 29 जनवरी को अमेरिका की परड्यू यूनिवर्सिटी में शव मिला। उनकी भी मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। वह पुणे से पढ़े हुए थे और काफी होशियार थे। नील की माँ ने उनके गायब होने को लेकर सोशल मीडिया पर जानकारी दी थी। उनका शव मिलने के बाद चोट आदि के कोई निशान नहीं मिले थे।

2 फरवरी: श्रेयस रेड्डी का शव मिला

भारतीय मूल के श्रेयस रेड्डी का शव अमेरिका के ओहायो राज्य में 2 फरवरी को मिला था। बताया गया कि वह एक बिजेनस स्कूल में पढ़ते थे। उनके माता-पिता हैदराबाद में रहते हैं, लेकिन श्रेयस के पास अमेरिका का पासपोर्ट था। उनकी मौत के कारण के विषय में भी कोई जानकारी नहीं मिल सकी है।

5 फरवरी: समीर कामथ की आत्महत्या

भारतीय-अमेरिकी छात्र समीर कामथ का शव 5 फरवरी को मिला। वह इंडियाना राज्य में रहते थे। वे एक अमेरिकी नागरिक थे। वह अमेरिका की ही परड्यू यूनिवर्सिटी के छात्र थे। बताया गया कि उन्होंने खुद ही गोली मारकर आत्महत्या कर थी। वह मैकेनिकल इंजिनयरिंग के छात्र थे।

7 फरवरी: विवेक तनेजा की मौत

अमेरिका में भारतीय मूल के छात्र ही नहीं, बल्कि काम करने वाले प्रोफेशनल भी निशाने पर हैं। 2 फरवरी को विवेक तनेजा पर वाशिंगटन के एक रेस्टोरेंट में हमला हुआ था। वह इसमें बुरी तरीके से घायल हो गए थे। इसके बाद उनका इलाज चला। लेकिन, उन्हें बचाया नहीं जा सका और 7 फरवरी को उनकी मौत हो गई।

गौरतलब है कि इन सभी भारतवंशियों की मौत उस अमेरिका में हुई है जो लगातार मानवाधिकारों के नाम पर भारत को शिक्षाएँ देता रहता है। अमेरिका में जो मौतें हमलों के कारण हुई हैं, उनमें भी विशेष कार्रवाई की उम्मीद नहीं दिखती। जनवरी 2023 में भारतीय छात्रा जानवी कंडूला को एक पुलिसकर्मी ने मार दिया था। अब एक वर्ष बाद उसे एक अमेरिकी अदालत ने छोड़ दिया है। ऐसे में लोग अमेरिकी न्याय व्यवस्था विश्वास नहीं कर पा रहे हैं। साथ ही में अमेरिका में बढ़ती ड्रग्स आदि की समस्याओं ने सुरक्षा सम्बन्धी दिक्कतें भी पैदा की हैं।

‘मैं कोई मलाला नहीं… अपने भारत में सुरक्षित हूँ’ : ब्रिटेन की संसद में गरजीं कश्मीरी पत्रकार याना मीर, प्रोपेगेंडा फैलाने वालों को लताड़ा

जम्मू कश्मीर की पत्रकार याना मीर ने ब्रिटिश संसद में एक कार्यक्रम के दौरान गर्व से खुद को कश्मीर में सुरक्षित बताया। उन्होंने संसद में जो भाषण दिया वो अब सोशल मीडिया पर वायरल है। इसमें उन्होंने कहा कि वह कोई पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई नहीं है, वह अपने जम्मू-कश्मीर में सुरक्षित महसूस करती हैं।

उन्होंने कहा, “मैं मलाला यूसुफजई नहीं हूँ क्योंकि मैं आजादू हूँ, अपने देश भारत में, अपने घर कश्मीर में, जो भारत का अभिन्न अंग है। मैं यह कह सकती हूँ कि मुझे कभी भी अपने देश से भागकर आपके देश में शरण लेने की नौबत नहीं आएगी। मैं कभी भी मलाला यूसुफजई नहीं बनूँगी। लेकिन मैं मलाला द्वारा मेरे देश और मेरी प्रगतिशील मातृभूमि कश्मीर को उत्पीड़ित कहकर बदनाम करने की साजिश से आपत्ति जताती हूँ। मुझे सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के ऐसे सभी टूलकिट सदस्यों से आपत्ति है जिन्होंने कभी कश्मीर जाने की परवाह नहीं की, लेकिन उत्पीड़न की कहानियाँ गढ़ते रहते हैं।”

मीर ने कहा, “मैं आपसे अनुरोध करती हूँ कि आप मजहब के आधार पर भारतीयों को बाँटने का काम बंद कर दीजिए। हम आपको कभी भी हमें तोड़ने की इजाजत नहीं देंगे। मुझे उम्मीद है कि हमारे देश के अपराधी जो पाकिस्तान और ब्रिटेन में रहते हैं वो अंतरराष्ट्रीय मीडिया या अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मंचों पर भारत को बदनाम करना बंद करेंगे। सेलेक्टिव प्रोपगेंडा फैलाना बंद कर दीजिए। भारतीय समाज का तुष्टिकरण करना बंद कीजिए।”

इस दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मीडिया पर भी निशाना साधा। याना ने कहा- “ब्रिटेन के लिविंग रूम से रिपोर्टिंग करके भारत को बाँटने की कोशिश बंद कीजिए। आतंकवाद के कारण कश्मीर की हजारों माँ पहले ही अपने बच्चे खो चुके हैं। हमारा पीछा करना बंद कर दीजिए। कश्मीरों लोगों को शांति से जीने दीजिए। धन्यवाद। जय हिंद”

जानकारी के मुताबिक, कश्मीरी पत्रकार याना मीर ने यूके पार्लियमेंट में आयोजित ‘संकल्प दिवस’ के कार्यक्रम में अपनी बात कही। यह कार्यक्रम जम्मू कश्मीर स्टडी सेंटर, यूके (जेकेएससी) द्वारा करवाया गया था। इस कार्यक्रम में 100 से अधिक लोग थे। इनमें यूके संसद के सदस्य, स्थानीय पार्षद, सामुदायिक नेता और बहुत लोग शामिल थे। इस कार्यक्रम में याना ने जिस मलाला का नाम लेकर लिया वो एक पाकिस्तानी कार्यकर्ता हैं और उन्हें नोबेल प्राइज भी मिल चुका है। मलाला कभी पाकिस्तान के स्वात में रहती थीं। वहाँ तालिबानियों ने उनके सिर में गोली मार दी थी। ब्रिटेन में उनका लंबे तक इलाज चला और उसके बाद वह वहीं रहने लगीं।

McDonald’s के बर्गर में चीज़ की जगह सस्ता और घटिया तेल… खाते हैं तो हो जाएँ सावधान: महाराष्ट्र में जाँच, लाइसेंस रद्द

इंटरनेशनल फास्ट फूड ब्रांड मैक्डोनाल्ट्स के खिलाफ महाराष्ट्र में बड़ी कार्रवाई हुई है। जाँच में पाया गया है कि ये कंपनी चीज (Cheese) के नाम पर ग्राहकों को धोखा दे रही थी और चीज की जगह ग्राहकों को सस्ते रिफाइंड से बना ‘सब्सिट्यूट’ परोस रही थी, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। महाराष्ट्र में फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने मैक्डोनाल्ड्स के लाइसेंस को रद्द कर दिया।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, बर्गर और नगेट्स में असली चीज की जगह पर नकली चीज का इस्तेमाल करने के मामले में एफडीए ने इंटरनेशनल फास्ट-फूड कंपनी मैक्डोनाल्ड्स को निशाने पर लिया, जिसके बाद कंपनी ने अहमदनगर के अपने आउटलेट में अब मीनू से चीज शब्द ही हटा दिया है। इस मामले में एफडीए ने अहमदनगर के केडगाँव ब्राँच पर छापेमारी की थी। इस छापेमारी में नकली चीज का इस्तेमाल होते हुए मिला, जिसमें चीज की जगह पर उसके विकल्प (सब्सिट्यूट) का इस्तेमाल होता मिला।

एफडीए के कमिश्नर अभिमन्यु काले ने बताया कि मैक्डोनाल्ड्स जो काम कर रहा है, उसका लोगों पर बुरा असर पड़ता है। क्योंकि लोग चीज समझकर जो कुछ भी खा रहे हैं, वो सस्ते रिफाइंड तेल से बनाया जाने वाला सब्सिट्यूट है। इसके इस्तेमाल से एलर्जी, शुगर जैसी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को परेशानी हो सकती है। यही नहीं, मैक्डोनाल्ड्स ने अपने ‘चीज एनॉलॉग’ में भी चीज के सब्सिट्यूट के बारे में कोई जानकारी नहीं दी थी, बल्कि वो ‘चीज नगेट्स’ ‘चीजी डिप’ और ‘चीज बर्गर’ बेच तो रही थी, लेकिन ये नहीं बता रही थी कि इसमें फर्जी चीज का इस्तेमाल किया जा रहा है।

मैक्डोनाल्ड्स के खिलाफ हुई कार्रवाई की टाइमलाइन (साभार: टाइम्स ऑफ इंडिया)

इस जाँच की शुरुआत बीते साल अक्टूबर से हुई थी, जहाँ केडगाँव ब्रांड में कंपनी कम से कम 8 उत्पादों में चीज का इस्तेमाल करती है, लेकिन चीज की जगह वो उसके सब्सिट्यूट का इस्तेमाल करती है।

उन्होंने बताया कि मैक्डोनाल्ड्स चीज़ी नगेट्स, मैकचीज़ वेज बर्गर, मैकचीज़ नॉन-वेज बर्गर, कॉर्न और चीज़बर्गर, चीज़ी इटालियन वेज और ब्लूबेरी चीज़केक में पनीर के इस्तेमाल की बात कहती है, जो कि झूठ है, क्योंकि कंपनी चीज का इस्तेमाल करती ही नहीं। ऐसे में एफडीए ने उस ब्राँच को नोटिस जारी किया था। इस मामले में मैक्डोनाल्ड्स ने जो जवाब दिया, वो संतोषजनक नहीं था। ऐसे में उस ब्राँच का लाइसेंस ही रद्द कर दिया गया।

इस मामले के बाद एफडीए के कमिश्नर ने एक निर्देश जारी किया है, जिसमें सभी रेस्टोरेंट को ये बताना अनिवार्य होगा कि वो किस तरह से चीज की जगह उसका सब्सिट्यूट इस्तेमाल कर रहे हैं। यही नहीं, इस जानकारी में वसा और प्रोटीन से जुड़ी जानकारी भी देनी होगी।

ये समाचार मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में लिखा गया है। मूल समाचार को पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

‘PM पद के लिए मोदी का सपोर्ट करने पर लगाया किनारे, दी गालियाँ’: मधुर भंडारकर ने बॉलीवुड की खोली पोल, बोले- मैं प्राउड हिंदू; पूछा- राम मंदिर कैसे हुआ कम्युनल

फिल्म निर्माता मधुर भंडारकर ने कहा कि साल 2014 में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में नरेंद्र मोदी का समर्थन किया था। इसके बाद उनके दोस्तों और साथियों ने उनसे किनारा कर लिया था। उन्हें सांप्रदायिक कहना जाने लगा था। यहाँ तक कि उन्हें गालियाँ दी गईं। उन्होंने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में हर किसी की किसी ना किसी पार्टी या विचारधारा की ओर झुकाव है। कुछ लोग इसे एक्प्रेस करते हैं और कुछ लोग उसे अपने मन में रखते हैं।

दरअसल, भंडारकर मीडिया संस्थान ABP की कार्यक्रम ‘आइडिया ऑफ इंडिया’ में अपनी बात रख रहे थे। इस कार्यक्रम के एक सेशन में मधुर भंडारकर, विपुल शाह और लीना यादव को आमंत्रित किया गया था। इस दौरान इन लोगों में फिल्म इंडस्ट्री और राजनीति के साथ-साथ राम मंदिर एवं धर्मनिरपेक्षता पर अपनी-अपनी बात रखी।

इसी दौरान एक सवाल के जवाब में मधुर भंडारकर ने कहा कि उन्होंने चाँदनी बार, ट्रैफिक सिग्नल जैसी फिल्में बनाई हैं और गरीबी को करीब से दिखाया है। उन्होंने कहा कि समाज की जिम्मेदारी को उन्होंने भली-भाँति निभाया है। उनकी फिल्मों को लोग पसंद भी करते हैं। उनके हर समुदाय के दोस्त-मित्र इसकी तारीफ भी किया करते थे।

उन्होंने आगे कहा, “मेरी बहुत सैक्युलर पर्सनैलिटी है। हर धर्म के लोगों से मेरी दोस्ती है। साल 2014 में मैंने पीएम पद के लिए मिस्टर नरेंद्र मोदी जी का खुलकर समर्थन किया। अचानक मुझे रातों-रात साइडलाइन कर दिया गया। अचानक मेरी सेक्युलर आवरण झीना हो गया कि अरे ये ऐसे कैसे कर सकता है। इतनी मुझे गालियाँ पड़ीं। इतने लोगों में मुझे साइडलाइन किया।”

भंडारकर ने कहा, “जब मैं जब फिल्में बनाता था तो इन लोगों को अच्छा लगता था। मैं ऐसा व्यक्ति हूँ जो मकदूम शाह बाबा, हाजी अली, अजमेर शरीफ सब जगह जाता हूँ। मैं चर्च भी जाता हूँ। इसके साथ ही मैं प्राउड हिंदू भी हूँ। मुझे गर्व है। मैं अपने हिंदुत्व को प्यार भी करता हूँ। अचानक आपको लगा कि इसने (पीएम मोदी को) सपोर्ट कर दिया तो तो कम्युनल हो गया।”

राम मंदिर को लेकर पूछे गए एक सवाल पर भंडारकर ने कहा, राम मंदिर में क्या कम्युनल है? किसी को बुलाया गया है (प्राण प्रतिष्ठा के दौरान) और कोई वहाँ जा रहा है, तो आप उसे अलग नजरिए से नहीं देख सकते। मैं इफ्तार पार्टी में शामिल हुआ हूँ तो मुझे किसी ने कहा कि अब तुम पक्का मुस्लिम बन गए हो। मैंने क्रिश्चियन पार्टी अटेंड की है। मुझे किसी ने नहीं बोला कि अब तुम क्रिश्चियन बन गए हो।

उन्होंने आगे कहा, “ऐसा बिल्कुल नहीं है कि आप राम मंदिर में जाते हो.. आस्था है इस देश की… देश भर के लोगों का विश्वास है इसमें…. तो ये लोग चले गए राम मंदिर में तो आपको इस नजर से देखना ही नहीं चाहिए। जिनको बुलाया वो गए। उनकी आस्था थी, वो चले गए। मैं दुबई होकर आया हूँ कि BAPS स्वामीनारायण मंदिर के उद्घाटन में शामिल होेने। मुझे बुलाया गया तो मैं चला गया।”

भंडारकर ने कहा कि चीजों को अलग-अलग नजरिए से नहीं देखना चाहिए। उन्होंने कहा, “अब लोग काफी सेलेक्टिव हो गए हैं। आपने ऐसा किया तो आप कम्युनल हो गए, लेकिन उन्होंने किया तो ठीक है उनके लिए। सेक्युलर हैं वो। इंडस्ट्री में जो उनको शूट करता है तब तो ठीक है, लेकिन जो उन्हें शूट नहीं करता है उसे कम्युनल बोल देंगे।” आप इस बयान को 16:00 से 18:35 मिनट के बीच सुन सकते हैं।

वहीं, इस डिस्कशन में मौजूद विपुल शाह ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “अगर मैं अपने धर्म के लिए कहीं जाता हूँ तो मैं कम्यूनल हूँ। ये कितनी वाहियात थ्योरी है। ये एक चेंज है कि एक वातावरण बन गया था कि हिंदू कहना शर्म की बात थी। अब ऐसा माहौल बन गया है कि हिंदू कहना ‘कूल’ हो गया है।”

विपुल शाह ने आगे कहा, “इसे एक दायरे में बाँधने की कोशिश की जा रही है कि ये हाइपर हिंदूइज्म है।” उन्होंने सवाल किया, “किसी और को हक है कि वो किसी पॉलिटिकल पार्टी को सपोर्ट करे तो मुझे क्यों नहीं है।” उन्होंने साफ कहा कि अब माहौल बदल रहा है।

बंगाल में कितने संदेशखाली? खुद को झुपखाली का ‘राजा’ समझता है शेख शाहजहाँ का भाई सिराजुद्दीन, लोग बोले- वो हमें मार डालेंगे, NHRC टीम पीड़िताओं से मिलने पहुँची

पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना स्थित संदेशखाली में महिलाओं के यौन शोषण का मामला सामने आने के बाद शुक्रवार (23 फरवरी 2024) को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की टीम संदेशखाली पहुँची। ये टीम पीड़ित महिलाओं से मुलाकात करने गई है। इस बीच पता चला है कि धमाखाली के पास द्वीप के दूसरी ओ एक गाँव- झुपखाली नाम का गाँव स्थित है। वहाँ भी महिलाओं ने गुरुवार (22 फरवरी 2024) को विरोध प्रदर्शन किया था।

प्रदर्शनकारियों का दावा है कि शेख के भाई सिराजुद्दीन उर्फ राजा ने उनसे उनकी जमीनें हड़प ली हैं और उन्हें प्रताड़ित करता है। इन्हीं अत्यातारों से तंग आकर ग्रामीणों ने गुस्से में उसका विरोध किया और झोपड़ी में आग लगाकर रोष प्रकट किया।

ग्रामीणों के अनुसार, संदेशखाली के विभिन्न कोनों में शेख के ताकतवर लोग हैं। संदेशखाली में यह शिबू प्रसाद हाजरा और उत्तम सरदार हैं, तो झुपखाली में यह सिराजुद्दीन हैं। झुपखाली के स्थानीय लोगों के अनुसार, सिराजुद्दीन गाँव में अपने स्थान पर अपना ‘राज’ चलाता है और किसी की नहीं सुनी जाती।

सड़कों पर उतरी महिला प्रदर्शकारियों ने कहा, “शेख के लोगों ने उनकी जमीनें बीघा की बीघा ले ली हैं। बिना कोई कीमत चुकाए वो जमीनें उनकी हो चुकी हैं। हम कुछ कहते हैं तो वो हमारे पतियों पर हमला कर देते हैं। इलाके में सिराजुद्दीन से लोग इतने प्रताड़ित हैं कि एक आदमी तो डीआईजी के आगे घुटने पर आकर रोने भी लगा कि सिराज और उसके आदमी उन्हें बहुत प्रताड़ित करते हैं। वो हमें मार डालेंगे। प्लीज कुछ करिए।”

न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीयों ने बताया कि सिराज और उसके लोग स्थानीयों को दहशत में रखते हैं। जो उन्हें जमीन नहीं देता उन्हें परेशान किया जाता है। एक आदमी के अनुसार, उसकी दुकान में तीन बार आग लगाने की कोशिश हुई सिर्फ इसलिए क्योंकि उसने अपनी जमीन देने से मना कर दिया था।

हल्द्वानी पुलिस की रडार पर ‘हैदराबाद यूथ करेज’, दंगाइयों के परिवारों को बाँटे थे पैसे: फंडिंग की हो रही जाँच, ‘दान’ देने वालों की भी होगी पहचान

हल्द्वानी के बनभूलपुरा में दंगाइयों के परिवारों को नोटों की गड्डियाँ बाँटने के मामले में पुलिस ने जाँच करने की बात कही है। पुलिस ने कहा है कि पैसे बाँटने वाले NGO ‘हैदराबाद यूथ करेज’ की फंडिंग का पता लगाया जा रहा है। इस संबंध में अन्य एजेंसियों की भी मदद ली जा रही है। गौरतलब है कि दंगाइयों को पैसे बाँटे जाने के मामले में सबसे पहले ऑपइंडिया ने ही खबर प्रकाशित की थी।

नैनीताल पुलिस ने इस संबध में एक्स/ट्विटर पर बताया है, “सोशल मीडिया में एक वीडियो जिसमें एक युवक द्वारा बनभूलपुरा क्षेत्र में लोगों को पैसे बाँटे जाने की वीडियो प्रसारित की जा रही है। उक्त संबंध में पुलिस जाँच कर रही है। NGO के अकाउंट नंबर, रजिस्ट्रेशन नंबर, पैन नंबर से सम्बंधित सूचना आयकर विभाग एवं अन्य एजेंसियों को भी दी गई है, जिनके द्वारा आवश्यक कार्यवाही की जा रही है। हैदराबाद यूथ करेज NGO को दान देने वालों को भी चिन्हित किया जा रहा है।”

पुलिस ने बताया है, “इस NGO के अकाउंट, रजिस्ट्रेशन नंबर सीज करवाने की कार्यवाही की जा रही है। गलत तरीके से पैसा लेकर दंगाइयों का समर्थन करने, सोशल मीडिया में तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पोस्ट करने एवं भ्रामक तथ्य पोस्ट करने वालों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। अतः सभी से अनुरोध है कि इस तरह के NGO को दान ना दें।”

क्या है मामला?

मंगलवार (21 फरवरी, 2024) को हल्द्वानी के दंगाग्रस्त इलाके बनभूलपुरा इलाके की कुछ वीडियो वायरल हुई थी। इन वीडियो में दो युवक मुस्लिम घरों में जाकर पैसा बाँट रहे थे। ये युवक ‘हैदराबाद यूथ करेज’ नामक संगठन से जुड़े हुए थे। इनका नाम सलमान और अयूब है।

दोनों युवक उन मुस्लिम परिवारों को पैसा बाँट रहे थे, जिनके परिवारीजन दंगा करने के कारण पुलिस की गिरफ्त में है या फिर दंगे के दौरान हिंसा में मारे गए थे। वे महिलाओं और युवकों को नोटों की गड्डियाँ देते हुए जेल में बंद दंगाइयों को छुड़ाने की बात कह रहे रहे थे।

ये वीडियो हैदराबाद यूथ करेज नाम के पेज से सोशल मीडिया में प्रसारित किए जा रहे थे। इसको लेकर जब सोशल मीडिया पर लोगों ने प्रश्न उठाए थे तो इन युवकों को नैनीताल पुलिस ने हिरासत में लिया था। हालाँकि, इसके बाद इन्होंने एक वीडियो डाल कर बताया था कि पुलिस ने इनसे कुछ देर के लिए पूछताछ की और फिर छोड़ दिया था।

ऑपइंडिया ने बताया था कि दंगाइयों को पैसा बाँटने वाले युवकों ने हल्द्वानी में पुलिस और प्रशासन पर हुए हमले का जश्न भी मनाया था। इन्होंने इससे पहले कई ऐसे ही वीडियो बनाए थे। इनके 10 फरवरी 2024 को हल्द्वानी पहुँचने की सूचना मिली थी। इन्होंने इस सम्बन्ध में कई पोस्ट सोशल मीडिया पर की थी और नफरत फैलाने का प्रयास किया था। ये युवक मौलाना सलमान अजहरी का भी समर्थन कर चुके हैं।

हल्द्वानी दंगा

बता दें कि 8 फरवरी 2024 को हल्द्वानी के बनभूलपुरा में नगर निगम और पुलिस की अवैध रूप से बनाए गए मस्जिद और मदरसे को गिराने गई थी। इस दौरान मुस्लिम भीड़ ने पुलिस-प्रशासन पर हमला कर दिया था। पुलिस और नगर निगम के कर्मचारियों पर पत्थर बरसाए गए और उन्हें जलाकर मारने की कोशिश की गई थी।

मुस्लिम भीड़ ने कई गाड़ियों में आग लगा दी थी और कई घंटे तक हिंसा की थी। प्रशासन ने इसके बाद कर्फ्यू लगा दिया था। इस मामले में 68 दंगाई अब तक गिरफ्तार किए जा चुके हैं। दंगे का मुख्य आरोपित अब्दुल मलिक अब भी फरार है, जिसे पकड़ने की कोशिश की जा रही है।

वांटेड दंगाइयों की तलाश में पोस्टर भी शहर भर में लगाए गए हैं। इस दंगे के सरगना अब्दुल मलिक और उसके बेटे के घर को पुलिस ने कुर्क कर लिया है। ऑपइंडिया ने इस दंगे के दौरान ग्राउंड पर जाकर बताया था कि यहाँ असल में क्या हुआ था और इस्लामी भीड़ ने कैसे यहाँ हिंसा की थी।

(हल्द्वानी में पैसे बाँटने को लेकर विस्तृत रिपोर्ट यहाँ क्लिक करके पढ़ी जा सकती है।)

अब सिख लड़की ने पाकिस्तान जाकर कबूला इस्लाम, नाम रखा जैनब: जिस मदरसे में किया निकाह, वहाँ 2000 गैर मुस्लिमों का धर्मांतरण

जर्मनी में रहने वाली भारतीय मूल की सिख महिला ने एक पाकिस्तानी व्यक्ति से निकाह कर लिया है। निकाह के लिए महिला ने अपना धर्म और नाम भी बदल लिया है। मस्जिद के इमाम द्वारा इस संंबंध में धर्म परिवर्तन का प्रमाण पत्र भी जारी किया गया है। अब तक जसप्रीत कौर के नाम से पहचाने जाने वाली महिला अब जैनब के नाम से जानी जाएगी।

जसप्रीत कौर पंजाब के लुधियाना की रहने वाली हैं और पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के रहने वाले अली अर्सलान नाम के मुस्लिम व्यक्ति से निकाह किया है। निकाह से पहले उन्होंने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के सियालकोट में स्थित जामिया हनाफिया मस्जिद में इस्लाम अपनाया। यहीं पर उन्हें नया इस्लामी नाम जैनब भी दिया गया।

पाकिस्तानी मीडिया हाउस ट्रिब्यून के अनुसार, जामिया हनाफिया मस्जिद/मदरसा के प्रशासकों ने कहा कि 38 साल की जसप्रीत कौर उन 2,000 से अधिक गैर-मुस्लिम लोगों में शामिल हैं, जिन्होंने उनके संस्थान में इस्लाम अपनाया है। मस्जिद ने जसप्रीत कौर के धर्मांतरण का सर्टिफिकेट जारी किया है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोपीय देश जर्मनी में रहने के दौरान जसप्रीत कौर और अली अर्सलान के बीच जान-पहचान हुई थी। इसके बाद अर्सलान ने जसप्रीत कौर को पाकिस्तान आने का निमंत्रण दिया। इसके बाद जसप्रीत कौर पाकिस्तान पहुँची और इस्लाम की जानकारी हासिल की।

जसप्रीत कौर को तीर्थयात्रा के लिए 16 जनवरी 2024 को पाकिस्तान जाने का वीजा मिला था। जसप्रीत कौर को अप्रैल 2024 तक पाकिस्तान में रहने की अनुमति मिली है। जसप्रीत कौर के पास भरतीय पासपोर्ट है और उसे जर्मनी के म्यूनिख शहर से जारी किया गया है।

बता दें कि भारत और पाकिस्तान के बीच अंतर-धार्मिक शादी या निकाह होने पर यह बात दोनों देशों में सुर्खियाँ बन जाती हैं। कुछ महीने पहले पाकिस्तान की रहने वाली सीमा हैदर अपने प्रेमी से मिलने के बाद नेपाल आई थी और यहाँ से वह भारत आ गई थी। सीमा अपने चार बच्चों को लेकर आई और भारत के सचिन मीणा से शादी करके साथ में रहने लगी।

सीमा हैदर की कहानी पाकिस्तान और भारत में खूब सुर्खियाँ बटोरीं। पाकिस्तान में इसे इस्लाम के अपमान के तौर पर देखा जाने लगा। इसी बीच भारत की रहने वाली अंजू अपने प्रेमी नसरुल्लाह से मिलने के लिए पाकिस्तान जा पहुँची। वहाँ उसने अपने प्रेमी से धर्म बदलकर निकाह कर लिया और कुछ महीने साथ रहने के बाद वापस भारत लौट आई।

संदेशखाली में लोगों ने शेख शाहजहाँ की प्रॉपर्टी में लगाई आग, TMC नेता पर ED ने भी किया केस: फरारी पर बोला भाई आलमगीर- वह बंगाल में ही है

पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता शेख शाहजहाँ के खिलाफ शुक्रवार (23 फरवरी 2024) को लाठी-ंडंडे लेकर एक और प्रदर्शन हुआ। इस दौरान बंगाल के डीजीपी ने वहाँ पहुँच पीड़ितों को कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया, लेकिन तब तक प्रदर्शनकारी टीएमसी नेता से जुड़ी संपत्ति में आग चुके थे। पीड़ितों का कहना था कि अगर पुलिस समय से कार्रवाई करती तो उन्हें ये सब करने की जरूरत ही नहीं होती।

वहीं ईडी ने अपनी ओर से शेख शाहजहाँ के विरुद्ध एक और केस दर्ज कर लिया है। इधर बंगाल पुलिस ने भारतीय जनता पार्टी की महिला सदस्यों आज फिर पीड़िताओं से मिलने से रोक दिया है और भाजपा सांसद लॉकेट चटर्जी को हिरासत में ले लिया है। दूसरी ओर बंगाल के एडीजी सुप्रतिम सरकार और डीआईजी भास्कर मुखर्जी मौके पर पहुँचे हैं।

शेख शाहजहाँ की संपत्ति में आग

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, संदेशखाली में शुक्रवार को भी प्रदर्शन हुआ। इस दौरान लाठियों से लैस होकर प्रदर्शनकारियों ने संदेशखाली के बेलमाजुर इलाके में एक मछली पकड़ने के यार्ड के पास छप्पर वाली संरचनाओं को आग लगा दी। ऐसा करके इन प्रदर्शनकारियों ने टीएमसी नेता शाहजहाँ शेख और उनके भाई सिराजुद्दीन के खिलाफ अपना रोष व्यक्त किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पुलिस इस मामले में सालों से कुछ नहीं कर रही। ऐसे में उन्हें खुद ही अपनी जमीन और सम्मान के लिए लड़ना पड़ रहा है।

ईडी ने दायर किया नया केस

इस बीच ईडी ने महिलाओं के यौन उत्पीड़न, जमीनें कब्जाने के आरोप से घिरे शेख शाहजहाँ को लेकर एक नया केस दर्ज किया है। ये केस जमीन कब्जाने के मामले में है। इससे पहले जो ईडी ने उस पर केस किया था वो राशन घोटाले मामले में था जिसमें छापेमारी के वक्त ईडी पर हमला करवाया गया था और शेख शाहजहाँ फरार हुआ था।

भाई ने बताया-बंगाल में है शाहजहाँ

बता दें कि 5 फरवरी से ही संदेशखाली से शाहजहाँ फरार है। लेकिन उसके भाई आलमगीर का कहना है कि शाहजहाँ शेख कहीं नहीं भागा है। वो यहीं बंगाल में ही है। लोग कह रहे हैं कि वो बांग्लादेश भाग गया, तो फिर उसके लिए वकील कौन कर रहा है। आलमगीर की मानें तो उसका भाई कहाँ है? ये उसे नहीं पता। उसके मुताबिक ED की रेड जिस दिन पड़ी थी, उसी दिन से उसकी शेख शाहजहाँ से बात नहीं हुई। फोन लगातार स्विच ऑफ आ रहा है।

आलमगीर के अनुसार, उसके भाई जो लोग इल्जाम लगा रहे हैं वो बिलकुल झूठ हैं। आरोप लगाने वाली महिलाएँ भी उसके मुताबिक बाहर से बुलाई गई हैं। इसके अलावा वो ये भी कहता है कि पार्टी कार्यालय में उन लोगों ने कभी महिलाओं को नहीं बुलाया। शिबू हाजरा के घर में महिलाएँ आती थीं लेकिन वो भी खाना या दालपीठा (दाल भरी चावल की मोटी रोटी) बनाने के लिए आती थीं।

गौरतलब है कि एक ओर बंगाल के संदेशाखाली में बंगाल डीजीपी राजीव कुमार ने पीड़िताओं से मुलाकात करके उन्हें आश्वासन दिया था कि सख्त से सख्त कार्रवाई मामले में होगी। वहीं एडीजी और डीआईजी भी मौके पर पहुँचे हैं। लेकिन मालूम पड़ता है इससे स्थानीयों का गुस्सा शांत नहीं है।

वो लगातार पुलिस का विरोध कर ही रहे हैं। वहीं पुलिस भी लगातार कोशिश में है मामला शांत हो जाए। इसके लिए वह अब भी भाजपा नेताओं को पीड़िताओं से मिलने के लिए रोक रहे हैं। भाजपा सांसद और राज्य की महासचिव लॉकेट चटर्जी का आज इसी बात पर बंगाल की महिला पुलिसकर्मियों से विवाद हुआ। इसके बाद खबर है कि पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।

हरियाणा में 5.47 लाख किसानों के कर्ज पर ब्याज-पेनल्टी माफ, बजट में CM खट्टर ने किया ऐलान: 14 फसलों की MSP पर खरीद, ₹29876 करोड़ सीधे खाते में भेजे

हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन आज (23 फरवरी 2024) को मुख्यमंत्री सह वित्तमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने राज्य का बजट पेश किया। ये बजट 1 लाख 89 हजार करोड़ रुपए का है। एक तरफ हरियाणा के शंबू बॉर्डर पर पंजाब के किसान कई दिनों से उपद्रव मचा रहे हैं, तो दूसरी तरफ हरियाणा की सरकार ने अपने बजट में किसानों के लिए बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने किसानों के ककर्ज पर व्याज और पेनल्टी की माफी की घोषणा की है, जिसका फायदा राज्य के 5 लाख 47 हजार किसानों को होगा। यही नहीं, पिछले 3 साल में हरियाणा सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 14 फसलों की खरीद की है, जिसका भुगतान सीधे किसानों के खातों में भेजा गया है।

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने विधानसभा में बजट पेश करते हुए कहा कि मैं खुद किसान हूँ। किसान का बेटा हूँ। मैंने खुद हल चलाया है और खेती की है। इसलिए किसानों का दर्द समझता हूँ। विधानसभा में खट्टर ने ऐलान किया है कि जो किसान 30 सितंबर 2023 तक का कर्ज 31 मई 2024 तक जमा कराते हैं, उनका ब्याज और पेनल्टी माफ होगी। बता दें कि इस साल हरियाणा सरकार का बजट 1.89 लाख करोड़ रुपए है, जो पिछले बजट की तुलना में 11 प्रतिशत अधिक है।

विधानसभा में खट्टर ने कही ये अहम बात

हरियाणा विधानसभा में बजट पेश करने के दौरान मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा, “साल 2023-24 में हरियाणा का कृषि उत्पादन 8.1 प्रतिशत की दर से बढ़ा है, जो देश में सर्वाधिक है। किसान हमारे भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। हरियाणा सरकार ने हमारे किसानों के लाभ के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। हरियाणा सरकार ने खरीफ और रबी सीजन 2023 में 29,876 करोड़ रुपये का भुगतान सीधे किसानों के खातों में जमा किया है। इसके अलावा ‘भावांतर सहायता’ के 178 करोड़ रुपये की राशि भी सीधे किसानों के खातों में जमा की गई है।” सीएम खट्टर ने कहा कि ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर हर सीजन में करीब 10 लाख किसान अपनी फसलों का ब्योरा देते हैं, जिससे सरकार बाजार को ध्यान में रखकर रणनीति तैयार करती है। इससे किसानों को ही फायदा होता है।

किसानों के योगदान को समझती है सरकार

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने विधानसभा में कहा, “हरियाणा सरकार हमारे किसानों के योगदान को समझती है और हम अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देने और हर संभव तरीके से उनके साथ खड़े होने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हरियाणा सरकार ने वित्तीय वर्ष 2023-24 में कर्जमाफी ई-पोर्टल के माध्यम से किसानों के खाते में अब तक 297.58 करोड़ रुपए सीधे जमा किए हैं। सरकार ने साल 2023-24 के दौरान 50 हजार एकड़ लवणीय और जल भराव वाले क्षेत्रों में सुधार का लक्ष्य रखा था, जिसकी जगह सरकार अब तक 52,695 एकड़ की जमीन को तकनीकी का इस्तेमाल करके सुधारा है। हरियाणा सरकार ने अब तक इसके लिए 80.40 करोड़ रुपए व्यय किए हैं।

पराली को लेकर मुख्यमंत्री ने की ये घोषणा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने पराली के मुद्दे पर कहा कि साल 2023-24 के दौरान पराली जलाने से रोकने और प्रदूषण कम करने की योजना के तहत 14 लाख एकड़ भूमि के प्रबंधन के लिए 1 लाख 56 हजार किसानों ने पंजीकरण कराया और किसानों को 139 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि दी गई। उन्होंने बताया कि साल 2023-24 में पराली जलाने के मामले पिछले दो साल की तुलना में 67 प्रतिशत कम होकर 2,303 रह गए, जबकि साल 2021-22 में 6,987 दर्ज किए गए थे।

बता दें कि किसान आंदोलन 2.0 में हरियाणा के किसानों की भागीदारी पहले के मुकाबले बेहद कम है। हरियाणा के किसान इस बार पंजाब के किसानों के प्रदर्शन से दूर हैं। हरियाणा के किसानों ने पंजाब के किसानों पर आरोप लगाया है कि किसान आंदोलन 1.0 के दौरान हरियाणा के बच्चों को नशे की लत लगा दी गई। हरियाणा के किसानों का कहना है कि पंजाब के लोगों ने उनका इस्तेमाल किया।

अयोध्या से आ रही ट्रेन को कर्नाटक में जलाने की धमकी, सवार थे रामभक्त: रिपोर्ट में बताया- साथियों संग कोच में घुसा था ‘शेख साब’

27 फरवरी 2002 को गुजरात के गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस को कट्टरपंथी इस्लामी भीड़ ने फूँक दिया था। इस ट्रेन के कोच एस-6 में सवार 59 कारसेवकों की इसमें मृत्यु हो गई थी। इसी तरह अब कर्नाटक में एक ट्रेन को आग लगाने की धमकी दी गई। यह ट्रेन भी अयोध्या से आ रही थी और इसमें भी रामभक्त सवार थे।

घटना कर्नाटक के होसपेट की है। अयोध्या से मैसुरु जा रही स्पेशल ट्रेन होपसेट रेलवे स्टेशन पर रुकी हुई थी। कथित तौर पर इसी दौरान ‘अल्पसंख्यक समुदाय’ के युवकों ने ट्रेन को जलाने की धमकी दी। धमकी देने वाले युवकों पर ट्रेन में सवार श्रद्धालुओं से झगड़ा करने के आरोप भी है। बताया जा रहा है कि एक युवक को गिरफ्तार कर अन्य की तलाश की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गुरुवार (22 फरवरी 2024) की रात स्पेशल ट्रेन अयोध्या से श्रद्धालुओं को लेकर मैसुरु लौट रही थी। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु सवार थे। जब ट्रेन होसपेट रेलवे स्टेशन पर पहुँची तो अल्पसंख्यक समुदाय के 3-4 युवक ने शयनयान वाले एक डब्बे S2 में चढ़ने की कोशिश की।

इसमें मौजूद श्रद्धालुओं ने जब उन्हें रोकने की कोशिश की तो वे लड़ाई-झगड़ा करने लगे और धमकाने लगे। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि ट्रेन किसी के बाप की नहीं है। इसके बाद इन युवकों ने ट्रेन को जलाने की धमकी दी। इसके बाद श्रद्धालु गुस्से में आ गए और वह स्टेशन पर आकर प्रदर्शन करने लगे।

बताया जा रहा है कि ट्रेन को जलाने की धमकी देने के बाद युवकों को श्रद्धालुओं ने पकड़ लिया। उन्होंने इन्हें स्टेशन पर मौजूद पुलिस को सौंप दिया। मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि पुलिस इन्हें थाने ले गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की। कथित तौर पर कुछ देर बाद इन्हें छोड़ दिया गया।

श्रद्धालुओं ने पुलिस के इस रवैए पर नाराजगी जताई और कहा कि युवकों को गिरफ्तार कर FIR दर्ज की जानी चाहिए। विश्व हिन्दू परिषद सहित अन्य हिंदू संगठनों को जब इस घटना की जानकारी मिली तो वे भी विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गए। श्रद्धालुओं को धमकी दिए जाने के कारण ट्रेन एक घंटे स्टेशन पर खड़ी रही।

बताया जा रहा है कि अब इस मामले में पुलिस ने एक युवक को गिरफ्तार किया है। कर्नाटक के पब्लिक टीवी चैनल ने बताया है कि अयोध्या स्पेशल ट्रेन जलाने की धमकी देने में गिरफ्तार किए जाने वाले युवक का नाम ‘शेख साब’ है। वह रेलवे का कर्मचारी भी बताया जा रहा है। वह रेलवे में ग्रुप सी का कर्मचारी बताया गया है।

गौरतलब है कि 27 फरवरी 2002 को अयोध्या से कारसेवकों को वापस लेकर आ रही एक ट्रेन को गुजरात के गोधरा में मुस्लिम भीड़ ने जला दिया था। इस घटना में 59 हिंदू श्रद्धालु जीवित जल गए थे। इसमें 27 महिलाएँ और 10 बच्चे भी थे। इसके बाद गुजरात में दंगे भड़क गए थे।