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कश्मीरी पत्थरबाज का खूनी चेहरा अब किसान आंदोलन में प्रोपेगेंडा के लिए, इस्लामी-वामपंथी गैंग फैला रहे फेक न्यूज: ऐसे अकाउंट पर क्यों नहीं लगे बैन

किसान आंदोलन के बीच कानून व्यवस्था को बनाए रखना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती हो गई है। सुरक्षाकर्मी लगातार कोशिश कर रहे हैं कि अराजक तत्व सीमा से दूर रहें लेकिन वामपंथियों और लिबरलों को उनकी ये कोशिश खास रास नहीं आ रही। फेक न्यूज फैलाकर पुलिस के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है। हाल में यूट्यूबर श्याम मीरा सिंह ने कुछ यही किया, जिसपर उसे आरजे सायमा का भी समर्थन मिल गया।

श्याम मीरा सिंह ने दरअसल ये दिखाने के लिए पुलिस किस तरीके से पैलेट गन का प्रयोग करके प्रदर्शनकारियों पर अत्याचार कर रही है, एक फोटो शेयर की। इस फोटो में एक युवक के चेहरे पर पैलेट गन के निशान थे और आँख पूरी लाल थी। श्याम मीरा सिंह ने इसे शेयर करके लिखा- इस तस्वीर को देखना भी मुश्किल हो रहा है। ये तस्वीर किसान आंदोलन के घायल लड़की है।

श्याम मीरा सिंह का पुराना ट्वीट, जिसे आरजे सायमा ने भी रिपोस्ट किया

इसके बाद इस फोटो को आरजे सायमा ने भी तुरंत रिपोस्ट कर दिया, जैसे वो ऐसे किसी मौके के इंतजार में हों कि ऐसी तस्वीरें उन्हें कब देखने को मिलेंगी।

अपने आपको आरजे और पत्रकार कहने वाले इन दोनों ने लोगों ने एक भी बार इस फोटो को साझा करने से पहले इसकी प्रमाणिकता नहीं जानी। जब हमने इसकी पड़ताल की तो हमें 2016 की न्यू इंडियन एक्सप्रेस रिपोर्ट में इस लड़के की यही तस्वीर मिली।

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट

साफ है कि ये फोटो पुरानी और किसान आंदोलन से इसका कोई लेना-देना नहीं। इस खबर में बताया गया है कि युवक का नाम मोहम्मद इमरान पारे हैं। कश्मीर में पत्थरबाजी के खिलाफ जब सुरक्षाबलों ने अपना बचाव पैलेट गन से किया था, उसमें इसके ये चोट आई थी।

इस फोटो की हकीकत का पता लगाकर श्याम मीरा सिंह और सायमा को भी सचेत किया जिसके बाद दोनों ने अपने सोशल मीडिया से ये पोस्ट हटा लिए। लेकिन तब तक लोग इसका स्क्रीनशॉट ले चुके थे। आरजे सायमा से जब एक जब पूछा गया कि उन्होंने ऐसी हरकत क्यों की तो उन्होंने सफाई में कहा इसमें उनकी मंशा गलत नहीं थी इसलिए हकीकत पता लगने पर उसे हटा लिया।

श्याम मीरा सिंह का नया ट्वीट

वहीं श्याम मीरा सिंह ने तो बड़ी चालाकी से अपने ट्वीट को डिलीट किया। फेक न्यूज फैलाने की गलत जानकारी देने की माफी माँगने के बजाय उसने इस फोटो के साथ खुद को फैक्टचेकर बन दिखाते हुए कहा- ये तस्वीर अभी के किसान आंदोलन की नहीं है। कृपया इसे शेयर ना करें। ये तस्वीर जुलाई 2016 की है। तस्वीर में- Mohammad Imran Parray हैं। जो कश्मीर से हैं। चेहरे पर पैलेट गन के निशान हैं। जैसे अभी किसान आंदोलन के दौरान किसानों के शरीर पर मेडिकल जाँच में भी प्रूव हुए।

बता दें कि किसान आंदोलन के समय पुलिस के पैलेट गन के इस्तेमाल पर जो इतना बवाल मचाया जा रहा है। उसे लेकर मालूम हो कि कोर्ट भी यह कह चुका है कि अगर प्रदर्शन शांतिपूर्वक न हो और पुलिसकर्मियों पर भीड़ हमला करें तो बचाव में इन पैलेट गनों का इस्तेमाल किया जा सकता है। ये कहते हुए जम्मू-कश्मीर की कोर्ट ने पैलेट गन को बैन लगाने वाली याचिका को खारिज किया था। फैसला सुनाने वाले जजों का नाम जस्टिस धीरज सिंह ठाकुर और अली मोहम्मद मागरे था।

‘राहुल गाँधी से मिलना है तो 10 किलो वजन कम करो’: जब ‘मुस्लिम MLA’ को बेइज्जत कर भगाया, CM सरमा बोले केवल ‘किम जोंग’ ही इन जैसा

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने पिछले साल भारत जोड़ो यात्रा की थी। उनकी यात्रा जब महाराष्ट्र के नांदेड पहुँची, तब मुंबई युवा कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष और कॉन्ग्रेस पार्टी के विधायक जीशान सिद्दीकी के साथ राहुल गाँधी के नजदीकी नेताओं ने बदतमीजी की। जीशान सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि उन्हें राहुल गाँधी से नहीं मिलने दिया गया। यही नहीं, उनकी बॉडी शेमिंग करते हुए कॉन्ग्रेसी नेताओं ने कहा कि अगर उन्हें राहुल गाँधी के साथ सड़क पर चलना है और उनसे मिलना है, तो वो पहले अपना वजन 10 किलो घटाए। उन्होंने इस दौरान पार्टी में खुद के साथ धर्म के आधार पर भेदभाव के आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि क्या मुस्लिम होना गुनाह है? जीशान ने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी में मुस्लिमों के साथ सबसे ज्यादा भेदभाव होता है।

जीशान सिद्दीकी ने राहुल गाँधी के आसपास मौजूद नेताओं को भ्रष्ट करार दिया है और कहा कि शायद इन लोगों (राहुल के करीबियों ने) इस बात की सुपारी ले रखी है कि कॉन्ग्रेस पार्टी को जल्द से जल्द खत्म करना है। कॉन्ग्रेस विधायक जीशान सिद्दीकी ने कहा कि मैं नांदेड़ में राहुल गाँधी के साथ उनकी न्याय यात्रा से जुड़ा, लेकिन राहुल गाँधी के करीबियों ने मुझे राहुल गाँधी से ही नहीं मिलने दिया, ये बताने पर भी कि मैं कॉन्ग्रेस का विधायक हूँ। यही नहीं, उन्होंने मेरा शरीर पर घटिया बयानबाजी करते हुए कहा कि अगर राहुल गाँधी से मिलना है, तो ‘पहले जा और अपना वजन 10 किलो घटा’।

जीशान सिद्दीकी ने कहा, “मेरे साथ जो भारत जोड़ो यात्रा में हुआ है, राहुल गाँधी जी चलो अच्छे नेता हैं, अपना काम कर रहे हैं। मल्लिकार्जुन खरगे जी मेरे पिता समान हैं। वो इतने वरिष्ठ नेता हैं फिर भी उनके हाथ बँधे हुए हैं। वो कभी कभी कुछ चीजें नहीं कर पा रहे हैं। राहुल गाँधी जी की जो टीम है उनके आसपास, वो तो जितना पार्टी को खत्म करते जा रहे हैं, ऐसे लगता है कि उन्होंने सामने वाली पार्टी से सुपारी ले रखी है कॉन्ग्रेस को खत्म करने की।”

जीशान ने आगे कहा, “मुझे तो भारत जोड़ो यात्रा के दौरान जब मैं राहुल गाँधी के साथ चलने की कोशिश कर रहा था, तो मुझे हटाया गया है। राहुल गाँधी के करीबी व्यक्ति ने तो यहाँ तक कह दिया कि ‘पहले चल 10 किलो वेट कम कर, फिर राहुल जी से मिलाऊँगा।’ राहुल जी की टीम जो है, वो इतनी करप्ट है कि क्या कहूँ? राहुल जी के करीबी लोग बेहद रूड हैं।”

इस बीच, जीशान सिद्दीकी को मुंबई युवा कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष पद से भी हटा दिया गया है। इसके बाद जीशान ने दावा किया कि कॉन्ग्रेस में मुस्लिम होना एक गुनाह है और उन्हें पार्टी में हाशिए पर डाला गया। जीशान ने कहा, “कॉन्ग्रेस में अल्पसंख्यकों के साथ जो हो रहा है, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। जितनी सांप्रदायिकता कॉन्ग्रेस और मुंबई यूथ कॉन्ग्रेस में है, उतनी कहीं और नहीं है। क्या मुस्लिम होना पाप है?” कॉन्ग्रेस पार्टी को जवाब देना होगा कि क्या मुझे सिर्फ इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि मैं मुस्लिम हूँ?””

इस बीच कभी राहुल गाँधी के करीबी रहे और अब असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा जो बीजेपी के फायरब्रांड नेता माने जाते हैं, उन्होंने राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस को निशाने पर लिया है। हिमंत ने राहुल गाँधी की तुलना उत्तर कोरियाई तानाशाह किम जोंग उन से की है। उन्होंने जीशान सिद्दीकी के वीडियो पर लिखा, “सिर्फ एक आदमी ऐसा सोच सकता है और पार्टी के कार्यकर्ताओं से इस बात की डिमांड कर सकता है कि उसके आसपास अच्छे दिखने वाले और फोटोजेनिक चेहरे ही दिखे। इस तरह का सिर्फ एक ही राज परिवार है, जो उत्तर कोरिया पर राज करता है।” बता दें कि किम जोंग उन के आसपास हमेशा सुंदर चेहरे ही देखे जाते हैं।

बता दें कि जीशान सिद्दीकी मुंबई कॉन्ग्रेस के मशहूर नेता बाबा सिद्दीकी के बेटे हैं। उनका परिवार दशकों से कॉन्ग्रेस के साथ रहा है, लेकिन कुछ समय पहले ही बाबा सिद्दीकी ने कॉन्ग्रेस पार्टी छोड़ दी थी। इसके बाद अब जीशान सिद्दीकी को मुंबई युवा कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष पद से हटा भी दिया गया है।

‘हम केवल निमित्त, सब करने वाले महादेव’, यहाँ 10 साल में बही विकास की गंगा, काशी में बोले PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के दौरे पर पहुँचे हैं। यहाँ वह आज (23 फरवरी, 2024) कई विकास कार्यक्रमों के साथ जनसभाओं में हिस्सा लेंगे। इससे पहले उन्होंने काशी सांसद प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरष्कृत और संबोधित किया। यहाँ वह कल (22 फरवरी, 2024) रात को पहुँचे थे।

प्रधानमंत्री मोदी आज बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के स्वतंत्रता भवन में पहुँचे। यहाँ उन्होंने सांसद संस्कृत प्रतियोगिता, सांसद ज्ञान प्रतियोगिता और सांसद फोटोग्राफी प्रतियोगिता के विजेताओं को संबोधित किया। उन्होंने इस दौरान काशी में हुए विकास कार्यों की बात की।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत भोजपुरी में की। उन्होंने कहा, “जो काशी समय से ही प्राचीन कही जाती है, जिसे हमारी युवा पीढ़ी इतनी जिम्मेदारी से सशक्त कर रही है। यह गौरव और विश्वास दिलाता है कि आप सभी अमृत काल में देश को नई ऊँचाई पर ले जाएँगे। काशी सर्व विद्या की राजधानी है, आज उसका वही रूप फिर से सँवर रहा है।”

आगे उन्होंने सफल प्रतिभागियों को बधाई दी और असफल होने वालों का भी अभिनन्दन किया। उन्होंने कहा कि आप सभी काशी की ज्ञान परम्परा का हिस्सा बने हैं, ये बहुत बड़ा गौरव है। उन्होंने कहा कि कोई भी हारा नहीं और ना ही पीछे रहा है। सभी कई कदम आगे आए हैं।

यहाँ उन्होंने काशी पर लॉन्च की गई कॉफ़ी टेबल बुक के बारे में बताया। उन्होंने कहा, “हम और आप निमित्त मात्र हैं, यहाँ करने वाले तो महादेव हैं। जहाँ महादेव के कृपा हो जाला, उ धरती ऐसे ही समृद्ध हो जाला।” प्रधानमंत्री ने कहा कि यहाँ पिछले 10 साल में विकास का डमरू बजा है।

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “पिछले 10 वर्षों में विकास की गंगा ने काशी को सींचा है, काशी तेजी से बदली है, आप सबने देखा है। जो छोटे बच्चे हैं, उन्होंने पहले की काशी नहीं देखी होगी। यही काशी का सामर्थ्य है।” उन्होंने कहा कि बाबा जो चाह जाते हैं उसको कौन रोक सकता है। इसके बाद उन्होंने हर हर महादेव के जयकारे लगवाए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने जितने नए विचार दिए उनका सबंध काशी से है। उन्होंने कहा कि काशी शिव की भी नगरी है और बुद्ध के उपदेशों की नगरी भी है। यह जैन तीर्थांकारों की नगरी और आदि शंकराचार्य की नगरी है। उन्होंने कहा कि यह ऐसी नगरी है जहाँ हर प्रांत और भाषा के लोग आकर बसे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि काशी सांस्कृतिकता के आसपास कैसे आधुनिकता का प्रसार होता है, दुनिया यह देख रही है। उन्होंने कहा कि अगले पाँच वर्षों ने देश सफलता के नए प्रतिमान का निर्माण करेगा, यह मोदी की गारंटी है।

पीएम मोदी इस कार्यक्रम के बाद रविदास मंदिर जाएँगे। यहाँ वह संतों का आशीर्वाद लेंगे। इसके बाद वह यहाँ कखरियाँव में एक जनसभा को संबोधित करेंगे और फिर अमूल के प्लांट जाएँगे।जहाँ वह कई विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। वह कई योजनाओं के लाभार्थियों से संवाद करेंगे। प्रधानमंत्री इसके बाद शाम को 4 बजे दिल्ली वापस चले जाएँगे।

जिसका बेटा ‘पादरी’ और सुप्रीम कोर्ट का जज भी… उसे हिंदू महंत के CM बनने से थी दिक्कत: फली एस नरीमन का इंटरव्यू, जिसमें खुल कर जाहिर हुआ पाखंड

वामपंथी लिबरल लोग कितने ही बुद्धिजीवी हों लेकिन उनके भीतर का पाखंड हमेशा नहीं छिपता। 2 दिन पहले भारत के प्रख्यात कानूनविद व वरिष्ठ अधिवक्ता फली एस नरीमन का 21 फरवरी 2024 को निधन हुआ था। उन्होंने जीवन में कई उपलब्धियाँ हासिल की थीं (जैसे 1991 से 2010 तक बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष थे और 1972 से जून 1975 तक भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल भी), लेकिन क्या आपको मालूम है कि एक बार फली एस नरीमन भी भरे मंच से अपनी हिपोक्रेसी को उजागर कर बैठे थे।

उन्होंने साल 2017 में प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए एक इंटरव्यू में सवाल किया था कि क्या योगी आदित्यनाथ को राज्य का मुख्यमंत्री बनाना ‘हिंदू राष्ट्र’ की शुरुआत है… उनके इस सवाल की सबसे हास्यास्पद बात ये थी कि फली नरीमन ने ऐसा तब कहा था जब उनका खुद का बेटा पारसी ‘पादरी’ (पारसी समुदाय में पूजा कराने वाले) होते हुए सुप्रीम कोर्ट में जज बना।

दरअसल, फली एस नरीमन ने 2017 में द प्रिंट वाले शेखर गुप्ता को एक इंटरव्यू दिया था। इसी में उन्होंने पीएम मोदी का नाम लेकर सवालिया अंदाज में पूछा था कि क्या एक हिंदू योगी को देश के सबसे आबादी वाले राज्य का मुख्यमंत्री बनाना हिंदू राष्ट्र की शुरुआत है। इंटरव्यू में ये बात उन्होंने तब शुरू की थी जब शेखर गुप्ता ने उनसे पूछा था कि उन्हें क्या लगता है कि कौन सा संवैधानिक अधिकारी सबसे ज्यादा खतरे में है।

इस पर फली एस नरीमन ने कहा था कि पूरा संविधान ही खतरे में है क्योंकि यूपी में भाजपा की प्रचंड बहुमत से जीत हो गई है। उन्होंने कहा था, “देखो, संविधान खतरे में है। बहुत फ्रैंक होकर कहूँ तो यूपी में बीजेपी की प्रचंड जीत के बाद पीएम के कहने पर उत्तर प्रदेश में एक महंत को मुख्यमंत्री बना दिया गया, विक्टरी केक पर चेरी की तरह। ये संदेश है। अगर आप इसे नहीं देख पा रहे तो या तो आप राजनैतिक पार्टी के प्रवक्ता हो सकते हैं या आपको दिमाग और आँख चेक कराने चाहिए।”

इसी इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि आखिर क्यों कोई सांसद और पत्रकार ये नहीं पूछ रहा कि क्या वाकई ये एक हिंदू राष्ट्र बनाने की शुरुआत है? इस इंटरव्यू में फली नरीमन ने यहाँ तक भी कहा था कि संविधान देने वाले भी ज्यादातर रूढ़िवादी हिंदू थे। 299 में से 233 रूढ़िवादी हिंदू थे। सबसे ज्यादा राजेंद्र प्रसाद थे।

आगे फली नरीमन ने यही कहा था – प्रधानमंत्री से पूछा जाना चाहिए चाहिए कि क्या देश हिंदू राष्ट्र होने वाला है। कृपया बताइए, हमें जनना है, क्या संविधान में भी संशोधन होगा।

उनका दुख ये था कि आखिर योगी के सीएम बनने पर संसद में आवाज क्यों नहीं उठी। वहीं जब शेखर गुप्ता ने उन्हें कहा कि जब एक व्यक्ति 5 बार सांसद बन सकता है तो सीएम बनने में क्या समस्या। इस पर फली नरीमन ने कहा था कि मोदी ही इसका जवाब दे सकते हैं, उन्हें कौन रोकेगा, लेकिन एक मंदिर के महंत का सीएम होना थोड़ा अजीब है।

यहाँ गौर करने वाली बात है कि जिन फली नरीमन को एक हिंदू योगी के सीएम बनने से दिक्कत थी उन्हें अपने बेटे रोहिनटन नरीमन के पारसी ‘पादरी’ होने के साथ सुप्रीम कोर्ट के जज होने पर कभी कुछ नहीं कहा। उलटा उन्होंने तो इसे खुशी-खुशी अपनी किताब में बताया कि उनका परिवार पादरियों के परिवार रहा है और उनकी पत्नी ने सुनिश्चित किया था कि बेटा भी ‘पादरी’ होगा। 12 साल की उम्र में रोहिंटन को ‘पादरी’ चुना गया था। बाद में जाकर वह अच्छे वकील भी बने और सुप्रीम कोर्ट में जज भी।

रोहिंटन नरीमन ने 2021 के एक इंटरव्यू में कहा था, “12 साल की उम्र में एक ‘पादरी’ के रूप में मेरे कार्यकाल ने मेरे जीवन को काफी हद तक बदल दिया है।” उन्होंने इंटरव्यू में बताया था कि ‘पादरी’ होने से उनके जीवन में क्या बदलाव आया और कैसे बतौर ‘पादरी’ सीखी चीजों से उनके प्रोफेशनल जीवन काम करने की क्षमता भी बेहतर हुई। यही नहीं इंटरव्यू में ये भी बताया गया था कि फली नरीमन को अपने बेटे के ‘पादरी’ होने पर गर्व था वह इसका जिक्र दूसरों के आगे भी करते थे।

अब खास यही है कि फली नरीमन जो अपने बेटे के ‘पादरी’ होने को इतना समर्थन देते थे और उन्हें पढ़ा लिखाकर एक वरिष्ठ वकील तक बनाया लेकिन फिर भी उन्हें समस्या हुई तो किससे एक योगी के सीएम बनने से। वो कहते थे पीएम ने मुख्यमंत्री का पद योगी आदित्यनाथ को इसलिए दिया क्योंकि वो राज्य को धार्मिक राज्य बनाना चाहते हैं।

नोट- यह रिपोर्ट रुकमा राठौड़ द्वारा मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई है। विस्तार से इसे पढ़ने के लिए आप इस लिंक पर क्लिक कर सकते हैं।

इंदौर के कोर्ट ने पत्नी को दिया आदेश, पति को दीजिए ₹5000/माह गुजारा भत्ता, जाने क्यों आया ऐसा निर्णय?

मध्य प्रदेश के इंदौर में एक पारिवारिक न्यायालय ने एक महिला को आदेश दिया है कि वह अपने पति को ₹5000 प्रतिमाह गुजारा भत्ता दे। महिला और उसके पति का 2022 में विवाह हुआ था। पति ने अपनी पत्नी पर मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। इसी मामले में कोर्ट ने पत्नी, जो कि स्वरोजगार करती है, को आदेश दिया कि वह पति को भरण-पोषण के लिए धनराशि दे। सामान्य चलन के उलट पत्नी के गुजारा भत्ता भुगतान करने के आदेश के कारण यह मामला चर्चा में है।

क्या था पूरा मामला?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उज्जैन के रहने वाले अमन का नंदिनी से वर्ष 2020 में प्रेम सम्बन्ध बन गया था। इसके कुछ माह के बाद नंदिनी ने अमन को शादी का प्रस्ताव दिया। हालाँकि, अमन ने यह प्रस्ताव मानने से इंकार कर दिया और कहा कि वह अभी 12वीं की पढ़ाई कर रहा है इसलिए शादी नहीं कर सकता। उसने कहा कि वह पढ़ाई पूरी होने के बाद ही विवाह कर सकता है। नंदिनी ने इस पर अमन को धमकाना चालू कर दिया और शादी ना करने पर आत्महत्या की धमकी भी दी।

इसके चलते 2021 में आर्य समाज मंदिर में नंदिनी और अमन ने विवाह कर लिया। इन दोनों का विवाह ज्यादा दिन नहीं टिक पाया और महीने भर बाद ही विवाद चालू हो गया। इसके चलते अमन ने आरोप लगाया कि पत्नी नंदिनी उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करती थी। अमन ने नंदिनी के साथ रहना भी बंद कर दिया। अमन, नंदिनी की प्रताड़ना से तंग होकर अपने परिजनों के पास रहने लगा। इसके बाद नंदिनी ने अमन के गायब होने की रिपोर्ट दर्ज करवाई।

नंदिनी ने अमन के खिलाफ दहेज़ माँगने और प्रताड़ित करने का मामला भी दर्ज करवा दिया और गुजारा भत्ता की माँग की। इसके जवाब में अमन ने भी एक मामला दर्ज करवाया जिसमें कहा गया कि नंदिनी उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करती थी। उसीके दबाव में शादी करने की वजह से उसकी पढ़ाई छूट गई जिसके कारण वह बेरोजगार है। दूसरी तरफ नंदिनी ने कोर्ट में पहले बताया कि वह एक ब्यूटी पार्लर चलाती है जबकि बाद में उसने अपने आप को बेरोजगार बताया।

कोर्ट ने गुजारा भत्ता को लेकर क्या कहा?

कोर्ट ने इस मामले दोनों पक्षों को सुना और कहा कि नंदिनी के बयानों में एकरूपता नहीं है। साथ ही कोर्ट ने अमन के आरोपों को मानते हुए उसकी पत्नी नंदिनी को आदेश दिया कि वह ₹5000 प्रतिमाह दे, जिससे अमन का गुजारा हो सके। अमन के वकील मनीष झारोला ने कहा कि शायद यह मध्य प्रदेश में ऐसा पहला मामला है जिसमें पत्नी को यह आदेश हुआ है कि वह गुजारा भत्ता की धनराशि दे। गौरतलब है कि ऐसे अधिकांश मामलों में पति को ही गुजारा की राशि देनी होती है।

कोर्ट ने पत्नी को क्यों दिया आदेश?

दरअसल, कोर्ट के निर्णय के पीछे हिन्दू विवाह अधिनियम है। यह अधिनियम हिन्दू महिला और पुरुष के विवाह, तलाक और भरण पोषण सम्बन्धी मुद्दों के लिए 1955 में बनाया गया था। इसके अंतर्गत गुजारा भत्ता को लेकर नियम लिंगनिरपेक्ष है। यानी पति और पत्नी, दोनों ही एक दूसरे से गुजारा भत्ते की राशि की माँग कर सकते हैं। ऐसे में यह कोर्ट का अधिकार होगा कि वह किसे यह आदेश देता है। पूर्व में भी ऐसे ही मामले सामने आए हैं, जिसमें पत्नी को अपने पति को पैसे देने का आदेश हुआ।

गुजारा भत्ता के मामले अधिनियम

हिन्दू विवाह अधिनियम के तहत कहा गया है कि मुकदमे के दौरान पति या पत्नी, दोनों में से जिसके पास भी अपने खर्चे चलाने और मुकदमे का खर्चा उठाने के लिए कोई स्वतंत्र आय स्रोत ना हो, तो वह अपने साथी से इसकी माँग कोर्ट के जरिए कर सकता है। यही नियम दोनों के तलाक के समय दी जाने वाली धनराशि और बाद में दिए जाने वाले भरण पोषण पर लागू होंगे।

हिन्दू जन्मा, पत्नी भी हिन्दू… लेकिन अवैध मुस्लिम बेटे ने किया केस, इस्लामी तरीके से होगा अंतिम संस्कार, कोर्ट ने दिया आदेश

मद्रास हाई कोर्ट ने एक हिन्दू महिला को उसके पति के अंतिम संस्कार में हिन्दू रीति रिवाज पूरे करने की अनुमति दे दी है। हालाँकि, उसके पति का अंतिम संस्कार इस्लामिक कानूनों के हिसाब से होगा। महिला का पति पहले हिन्दू ही था लेकिन बाद में एक मुस्लिम महिला से निकाह करने के लिए उसने इस्लाम अपना लिया था। इस मामले को सुनते हुए कोर्ट ने कई महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ की हैं।

क्या है पूरा विवाद?

शिवगंगा के रहने वाले बालासुब्रमन्यम उर्फ़ अनवर हुसैन की 17 फरवरी, 2024 को मौत हो गई। वह पूर्व में बस चलाते थे। बालासुब्रमन्यम जन्म से हिन्दू थे और उनका वर्ष 1988 में एक हिन्दू महिला शान्ति से विवाह हुआ था। दोनों पति-पत्नी के इस विवाह से एक पुत्री भवानी पैदा हुई थी।

इसके बाद बालासुब्रमन्यम का अपनी पत्नी से मोहभंग हो गया। बालासुब्रमन्यम का इसके बाद एक मुस्लिम महिला सैयद अली फातिमा से विवाहेत्तर सम्बन्ध बन गया। फातिमा से निकाह करने के लिए उन्होंने इस्लाम अपना लिया। इसके बाद 1999 में निकाह भी कर लिया। इस्लाम कबूलने के बाद उसने अपना नाम बदल कर अनवर हुसैन रख लिया।

निकाह के पश्चात बालसुब्रमन्यम उर्फ़ अनवर हुसैन का एक बेटा उनकी मुस्लिम पत्नी फातिमा से हुआ, जिसका नाम अब्दुल मलिक है। अनवर ने शान्ति से हुए हिन्दू विवाह को समाप्त करने के लिए कोर्ट में अपील भी की थी और उन्हें अपनी पत्नी से तलाक भी दे दिया गया था।

उनकी पत्नी शान्ति ने इस तलाक के खिलाफ ऊँची अदालत में मामला दायर किया था, जिसने अपने फैसले में निचली कोर्ट का निर्णय रद्द कर दिया था। अब इस मामले में मद्रास हाई कोर्ट ने कहा कि चूँकि मामला कोर्ट में चल रहा था, ऐसे में शान्ति को ही बालासुब्रमन्यम उर्फ़ अनवर की वैध पत्नी और भवानी को ही वैध वारिस माना जा सकता है। कोर्ट ने बालासुब्रमन्यम उर्फ़ अनवर हुसैन की मुस्लिम पत्नी फातिमा और बच्चे अब्दुल मलिक को वैध मानने से इनकार कर दिया।

हाई कोर्ट में क्यों पहुँचा अंतिम संस्कार का मामला?

जब 17 फरवरी, 2024 को बालासुब्रमन्यम उर्फ़ अनवर हुसैन की मौत हुई तो उनकी हिन्दू पत्नी के साथ बेटी और मुस्लिम पुत्र के बीच में अंतिम संस्कार को लेकर विवाद हो गया। ऐसे में अस्पताल ने उनके शव को किसी को भी सौंपने से इनकार कर दिया। इसको लेकर उनके अवैध (कोर्ट के अनुसार कानूनन अवैध) मुस्लिम पुत्र अब्दुल मलिक ने मद्रास हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और माँग की कि उसे अपने अब्बा का अंतिम संस्कार इस्लामी तरीके से करने दिया जाए।

कोर्ट ने क्या कहा?

मद्रास हाई कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि सुब्रमन्यम उर्फ़ अनवर हुसैन कोई कबीर तो थे नहीं कि उनकी देह पर हुआ विवाद फूलों के बँटवारे से निपट जाता, ऐसे में इस मामले को देखना जरूरी है। मद्रास हाई कोर्ट ने हिन्दू पत्नी और पुत्री के अधिकार को जरूरी मानते हुए कहा कि उन्हें अपने पिता/पति के अंतिम संस्कार में अपनी हिन्दू धार्मिक मान्यताओं को पूरा करने का अधिकार है।

कोर्ट ने हालाँकि आदेश में कहा कि हिन्दू पत्नी और पुत्री को किसी खुले मैदान में 30 मिनट के भीतर ही अंतिम संस्कार के रीति-रिवाज को निपटाना होगा। इसके बाद कोर्ट ने आदेश दिया कि मरने वाले की मजहबी स्वतंत्रता का सम्मान भी करना होगा, ऐसे में बालासुब्रमन्यम उर्फ़ अनवर हुसैन का अंतिम संस्कार इस्लामी तरीके से ही किया जाए और उसे दफनाया जाए। हाई कोर्ट ने फातिमा और अब्दुल को भी इस अंतिम संस्कार में हिस्सा लेने की अनुमति दी है।

‘किसान उत्पातियों’ पर नहीं लगेगा NSA, अंबाला पुलिस के बाद हरियाणा पुलिस की ‘सफाई’: अब तक 30 पुलिसकर्मी चोटिल, 1 को ब्रेन हैमरेज, 2 की मौत

अपडेट: हरियाणा पुलिस ने घोषणा की है कि विरोध प्रदर्शन कर रहे किसान नेताओं के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) नहीं लगाया जाएगा। यह घोषणा अंबाला पुलिस के उस ट्वीट के बाद की गई, जिसमें आंदोलन कर रहे किसानों पर एनएसए लगाने की बात कही गई थी। अब अंबाला पुलिस का वो ट्वीट भी डिलीट कर दिया गया है।

हरियाणा पुलिस के एनएसए नहीं लगाने की घोषणा से पहले की खबर नीचे है:

किसान आंदोलन के नाम पर जिस तरह उग्र प्रदर्शनकारियों द्वारा सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुँचाने का काम किया जा रहा है उसे देखते हुए हरियाणा की अंबाला पुलिस ने सख्त खदम उठाए हैं। अंबाला पुलिस ने कहा है कि सरकारी संपत्ति के नुकसान की भरपाई इन्हीं आंदोलनकारियों की संपत्तियों से की जाएगी। इसके लिए संपत्ति की कुर्की और बैंक खातों को सीज करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। इसके अलावा किसान संगठन के पदाधिकारियों के खिलाफ NSA लगाने की बात भी पुलिस ने कही है।

22 फरवरी 2024 को जारी प्रेस नोट में अंबाला पुलिस ने कहा कि 13 फरवरी 2024 से किसान संगठनों द्वारा किसानों द्वारा दिल्ली कूच को लेकर शंभू बॉर्डर पर लगे बैरिकेड्स को तोड़ने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं व पुलिस प्रशासन पर पत्थरबहाजी व हुड़दंगबाजी करके कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश भी हो रही है। इन सबसे सरकारी और प्राइवेट संपत्तियों को काफी नुकसान हो रहा है।

पुलिस ने कहा कि वो अब आंदोलनकारियों द्वारा सरकारी और प्राइवेट संपत्ति को पहुँचाए गए नुकसान का आँकलन कर रहे हैं। सबकी भरपाई इन्हीं आंदोलनकारियों की संपत्ति और बैंक खातों को सीज करके की जाएगी। पुलिस की मानें तो उन्होंने इस संबंध में पहले ही सूचित किया था कि अगर सरकारी संपत्ति को नुकसान हुआ तो वह यह कार्रवाई करेंगे। हालाँकि पिछले कुछ दिनों में फिर भी ऐसी घटनाएँ आईं, जिसके बाद पुलिस ने यह नोट जारी किया।

इसके अलावा पुलिस ने एक और ट्वीट में यह जानकारी दी है कि उन्होंने NSA के तहत किसान संगठनों के पदाधिकारियों को नजरबंद करने की तैयारी शुरू कर दी है। अंबाला पुलिस द्वारा दी गई जानकारी में कहा गया है कि आंदोलन में 30 पुलिसकर्मियों को चोटें आई हैं, 1 पुलिसकर्मचारी का ब्रेम हैमरेज हुआ और 2 की मृत्यु हो गई है। ऐसे में आंदोलन के कई किसान नेता जो सक्रिय भूमिका हैं और कानून व्यवस्था बिगाड़ने का काम कर रहे हैं। सोशल मीडिया के जरिए भड़काऊ बयानबाजी कर रहे हैं। सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए पोस्टर कर रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों और सरकार के विरुद्ध गलत शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं और उत्पात मचा रहे हैं। ऐसे में अपराधिक गतिविधियों को रोकने व कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए धारा 2(3) राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980 तहत किसान संगठनों के पदाधिकारियों को नजरबंद करने की कार्यवाही पुलिस प्रशासन द्वारा अमल में लाई जा रही है।

ये भी जानकारी आई है कि अंबाला पुलिस की तरफ से भारतीय किसान यूनियन शहीद भगत सिंह के राष्ट्रीय अध्यक्ष और किसान मजदूर मोर्चा के सदस्य अमरजीत सिंह मोहड़ी के घर पर पुलिस का नोटिस चस्पा किया गया है। इसमें लिखा गया है कि अमरजीत सिंह उस प्रदर्शन में अहम भूमिका में है, जो अब उग्र हो रहा है। अगर प्रदर्शनकारी सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाते हैं तो फिर मोहड़ी की संपत्ति से भी भरपाई की जा सकती है।

हलाल सर्टिफाइड रूह अफ़ज़ा बेचने वाली हमदर्द लैबोरेट्रीज की धोखाधड़ी, स्वास्थ्य खतरों की जानकारी छुपाकर लोगों की जिंदगी से खिलवाड़: रिपोर्ट

जिस हमदर्द लैबोरेट्रीज की ‘रूह अफ़ज़ा’ को लोग बड़े चाव से पीते हैं, और उसके भारत-पाकिस्तान-बांग्लादेश समेत करोड़ों प्रशंसक हैं, वो रूह अफ़ज़ा बनाने वाली कंपनी हमदर्दी मक्कार और झूठी निकली। रिपोर्ट्स का दावा है कि हमदर्द लैबोरेट्रीज ने रूह अफ़ज़ा के नाम पर लोगों को केमिकल पिलाया है। वहीं, हमदर्द दावा करती है कि रूह अफ़ज़ा को बनाने में 36 तरह के फलों का इस्तेमाल होता है और 13 अन्य हर्बल पदार्थ मिलाए जाते हैं। रूह अफ़ज़ा को बनाने वाली हमदर्द लैबोरेट्रीज की चोरी पकड़ी गई है, तो उस पर जुर्माना भी लगाया गया है। उसके खेल को पकड़ने वाले अफसर को ही खरीदने की कोशिश की गई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

ढाका साउथ सिटी कॉरपोरेशन (डीएससीसी) ने अपनी रिपोर्ट में पाया है कि हमदर्द झूठे दावे करके लोगों को बेवकूफ बना रही है और उनका मानसिक-भावनात्मक दोहन कर रही है। चूँकि हमदर्द लैबोरेट्रीज रूह अफ़ज़ा को ‘पौष्टिक पेय’ कहकर प्रचारित करता है और दावा करता है कि इसके सेवन से शरीर में पानी की कमीं नहीं होने पाती, क्योंकि इसमें 13 हर्बल दवाओं का मिश्रण और 36 तरह के फल-फूल का अर्क (जूस) मिला होता है।

ढाका साउथ सिटी कॉरपोरेशन ने कहा है कि कूलिंग ड्रिंक में बताई गई सामग्री मौजूद नहीं है। इसके अलावा रिपोर्ट में स्वास्थ्य विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया है कि रूह अफ़ज़ा बड़ी संख्या में लोगों खासकर शुगर के मरीजों के लिए गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ पैदा कर सकता है। दरअसल डीएससीसी ने बाजार से रूह अफ़ज़ा के सैंपल कलेक्ट किए थे, जिसकी जाँच के बाद ये तथ्य सामने आए हैं।

वीकलीब्लिट्ज की रिपोर्ट में बताया गया है कि बांग्लादेश में हमदर्द के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ हकीम मुहम्मद यूसुफ हारून भुइयाँ ने रूह अफ़ज़ा के फर्जी विज्ञापन के लिए लिखित में माफी माँगी है। हमदर्द की ये माफी उन आरोपों के बीच सामने आई है, जब हमदर्द लैबोरेट्रीज (वक्फ) बांग्लादेश ने इस विवाद से लोगों का ध्यान खींचने के लिए ढाका में अधिकारिकों को रिश्वत देने की कोशिश कीष इसके बाद नगर निगम के अधिकारियों ने 20 फरवरी को बांग्लादेश के भ्रष्टाचार विरोधी आयोग (एंटी करप्शन कमीशन-एसीसी) और खाद्य निदेशालय (फूड डायरेक्टोरेट) में शिकायत दर्ज कराई है।

बांग्लादेशी वेबसाइट कालबेला ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि ढाका के अधिकारियों ने सैंपल की जाँच लैब में कराई। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2028 में ढाका सिटी कॉर्पोरेशन ने फर्जीवाड़ा मिलने के सबूत मिलने के बाद हमदर्द के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इस मामले में हमदर्द के मैनेजिंग डायरेक्टर ने अपनी गलती मानी और 4 लाख का जुर्माना चुकाया।

हालाँकि कंपनी ने इसके खिलाफ अपील दायर की, जिसके बाद अदालत ने जुर्माने की रकम जमा करने से छूट दे दी। इसके बाद नगर निगम ने 19 फरवरी को सेफ फूड अथॉरिटी को पत्र लिखा। हालाँकि हमदर्द ने अधिकारिकों को अपील करने से रोकने की कोशिश की और एक अदिकारी ने निगम के अधिकारियों को रिश्वत देने की कोशिश की।

कालबेला ने दावा किया है कि उसके पास एक वीडियो है, जिसमें हमदर्द के असिस्टेंट डायरेक्टर अली अहमद सिटी कॉर्पोरेशन के सेफ फूड इंस्पेक्टर मोहम्मद कमरूल हसन से उस अपील को आगे न बढ़ाने की अपील करते दिख रहे हैं। इसके लिए वो पैसे देने की बात भी कर रहे हैं। वीडियो में हमदर्द के अधिकारी को यह कहते हुए भी सुना जा सकता है, ‘रूह अफजा में जो है उससे कहीं ज्यादा हम कहते हैं।’

सिविक अधिकारी कमरुल हसन ने बांग्लादेशी अखबार को बताया कि हमदर्द शुरू से ही गलत काम करता रहा है। उन्होंने कहा कि एक अदालत में दोष स्वीकार करना और उस फैसले के खिलाफ दूसरी अदालत में अपील करना भी गलत और अनैतिक है। इस मामले में अब ढाका साउथ सिटी कॉरपोरेशन के सीईओ ने भ्रष्टाचार निरोधक आयोग से कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है।

IPL 2024: शुरू के 21 मैचों के शेड्यूल जारी, चेन्नई में CSK vs RCB का पहला मैच, लोकसभा चुनाव के चलते हो रही देरी!

इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल 2024) के शुरुआती 21 मैचों का शेड्यूल जारी कर दिया गया है। पहला मैच डिफेंडिंग चैंपियन चेन्नई सुपर किंग्स और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू के बीच चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेला जाएगा। आरसीबी और सीएसके के बीच पहला मैच 22 मार्च 2024 को खेला जाएगा। महेंद्र सिंह धोनी इस आईपीएल में आखिरी बार बतौर खिलाड़ी नजर आ सकते हैं। ऐसी चर्चाएँ हैं कि इस आईपीएल के बाद वो सन्यास ले सकते हैं।

22 मार्च से 7 अप्रैल तक का शेड्यूल

आईपीएल 2024 के शुरुआती 21 मैच 22 मार्च से 7 अप्रैल के बीच होंगे। टूर्नामेंट का पहला मैच रात के 8 बजे शुरू होगा। वहीं, जिन दिन दो मुकाबले होंगे, उसमें पहला मैच 3.30 से शुरू होगा। इस दौरान चार दिनों में डबल हेडर मैच होंगे। आईपीएल 2024 का पहला डबल हेडर 23 मार्च को खेला जाएगा, जिसमें पहला मैच मोहाली में पंजाब किंग्स और दिल्ली कैपिटल्स के बीच खेला जाएगा, तो शाम का दूसरा मैच कोलकाता में कोलकाता नाइट राइडर्स और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच खेला जाएगा।

आईपीएल 2024 में 24 मार्च को राजस्थान रॉयल्स का मुकाबला लखनऊ सुपर जायंट्स से होगा, तो शाम के मुकाबले में हार्दिक पांड्या की कप्तानी वाली मुंबई इंडियंस अहमदाबाद में गुजरात टाइटंस से भिड़ेगी। पिछले 6 साल में ये चौथी बार होगा, जब आईपीएल की विजेता और उप विजेता टीमें पहले मैच में नहीं भिड़ रही हैं। क्योंकि पहला मैच सीएसके और आरसीबी के बीच खेला जाएगा, तो पिछले साल की उप-विजेता टीम गुजरात टाइटंस तीसरे दिन मुंबई इंडियंस से भिड़ेगी।

इंडियन प्रीमियर लीग के ऑफिसियल एक्स हैंडल पर शेड्यूल पोस्ट किया गया है।

आईपीएल का फाइनल मुकाबला 26 मई 2024 को हो सकता है। इसके ठीक पाँच दिन बाद ही वेस्टइंडीज और यूएसए में 1 जून से पुरुषों के टी-20 विश्वकप के मुकाबले शुरू हो जाएँगे।

बताया जा रहा है कि लोकसभा चुनाव 2024 की तारीखों की घोषणा न होने के चलते अन्य मैचों का शेड्यूल अभी घोषित नहीं किया गया है। एक बार चुनाव की तारीखें सामने आ जाएँगी, उसके बाद बाकी मैचों के शेड्यूल की घोषणा कर दी जाएगी। माना जा रहा है कि अप्रैल और मई माह में लोकसभा के चुनाव होंगे। इन्हीं चुनावों के बीच ही आईपीएल के मुकाबले भी खेले जाएँगे। साल 2009 में आईपीएल का आयोजन दक्षिण अफ्रीका में किया गया था, क्योंकि उस साल भी लोकसबा चुनाव हुए थे।

नूहं हिंसा मामले में कॉन्ग्रेस विधायक मम्मन खान सहित 63 पर लगा UAPA: दंगों के दौरान दंगाइयों को बाँटे थे पैसे

हरियाणा पुलिस ने जुलाई 2023 के नूहं दंगों से संबंधित चार मामलों में कॉन्ग्रेस नेता एवं विधायक मम्मन खान सहित 63 लोगों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) लगाया है। जनवरी 2024 में UAPA के तहत नई धाराएँ जोड़ी गईं। पुलिस द्वारा अदालत में दाखिल की गई स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, UAPA के प्रावधानों को 8 जनवरी को तीन FIR (संख्या 253, 257 और 401) में लगाया गया था।

इन मामलों में बीस लोगों को आरोपित बनाया गया है और उनमें से अधिकांश मेवात क्षेत्र के स्थानीय लोग हैं। ये घटनाएँ शोभा यात्रा में दो होम गार्ड और एक हिंदू श्रद्धालु की हत्या के साथ-साथ नूहं साइबर पुलिस स्टेशन पर दंगाई भीड़ द्वारा किए गए हमले से जुड़ी हैं। एक हफ्ते बाद पुलिस ने शिकायत संख्या 149 में भी UAPA लगा दिया था। इसमें फिरोजपुर झिरका के विधायक को 43 अपराधियों में से एक के रूप में नामित किया गया है।

जिस दिन नूहं में हिंसा भड़की थी, उस दिन यानी 31 जुलाई को बड़कली चौक पर यात्रा में शामिल लोगों पर हमले का एफआईआर में विस्तार से जिक्र किया गया है। वर्तमान कार्यवाही में उल्लेखित सभी आरोपित जमानत पर रिहा हैं। हालाँकि, यूएपीए लगाने के बाद उन सभी को एक बार फिर सलाखों के पीछे भेजा जा सकता है, क्योंकि इसमें जेल के बाद कम-से-कम एक वर्ष के लिए जमानत का प्रावधान नहीं है।

कई दंगा पीड़ितों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील मनीष शाडिल्य ने 21 फरवरी 2024 को कहा कि पुलिस के पास अपराधियों को पूछताछ के लिए फिर से बुलाने का अधिकार है। उन्होंने कहा, “उनकी जमानत रद्द की जा सकती है और उन्हें फिर से गिरफ्तार किया जा सकता है।” उन्होंने पिछले साल मम्मन खान को जमानत देने के खिलाफ भी दलील दी थी।

दूसरी ओर, विपक्ष के वकील ताहिर हुसैन रुपदिया ने कहा, “पुलिस के पास UAPA (उनके मुवक्किल के खिलाफ) जोड़ने का कोई आधार नहीं है। हम इसे अदालत में चुनौती देंगे।” हालाँकि आरोप मूल एफआईआर का हिस्सा नहीं थे, लेकिन अदालत के रिकॉर्ड से संकेत मिलता है कि इसे उस शिकायत में जोड़ा गया था, जो आरोपी की जमानत के अनुरोध को अस्वीकार करने के लिए न्यायाधीश के सामने लाई गई थी।

नूहं पुलिस की कार्रवाई छह लोगों की मौत के बाद शुरू हुई, जब इस्लामी कट्टरपंथियों ने विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल द्वारा आयोजित एक जुलूस पर हमला किया था। इसके कारण नूहं और आसपास के इलाकों में व्यापक हिंसा और आगजनी हुई। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, दोषियों में से एक ने जाँचकर्ताओं को बताया कि गड़बड़ी से पहले मम्मन खान ने स्थानीय लोगों के माध्यम से उपद्रवियों को पैसे (प्रत्येक 500 रुपए) पहुँचाने की व्यवस्था की थी।

इसके अलावा, दावा किया गया है कि ‘यूथ टीम मम्मन खान’ और ‘आईटी सेल मम्मन खान’ जैसे विधायक के नाम वाले व्हाट्सएप समूहों के माध्यम से भड़काऊ पोस्ट फैलाए गए थे। नूंह के SP नरेंद्र बिजारनिया ने कहा, “उन्होंने नूहं हिंसा के दौरान अफवाह फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पथराव और वाहनों में आग लगाने में शामिल कुछ संदिग्धों के वह संपर्क में थे। उन पर ब्रजमंडल यात्रा पर हमला करने वालों को पैसे देने का भी आरोप है।”