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गुजरात, दिल्ली, UP… कॉन्ग्रेस ने सेट किया सीटों का गणित, AAP को भरूच देने पर अहमद पटेल के बच्चे नाराज: फर्रुखाबाद में सलमान खुर्शीद ने दिखाए तेवर

इंडी गठबंधन में आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस के बीच सीटों का समझौता हो गया है। कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इसकी घोषणा की है। इस समझौते के तहत दिल्ली में आप-कॉन्ग्रेस ने सीटों का बंटवारा कर लिया है, तो पंजाब में सीटों ही पार्टियाँ आमने-सामने की लड़ाई लड़ेंगी। यही नहीं, गोवा और चंडीगढ़ में कॉन्ग्रेस पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी, तो गुजरात में आम आदमी पार्टी को जो सीट दी गई है, उससे कॉन्ग्रेस में ही बगावत होती नजर आ रही है।

गुजरात की भरूच सीट पर अहमद पटेल के परिवार की दावेदारी है, लेकिन ये सीट आम आदमी पार्टी को दे दी गई है, जिसकी वजह से अहमद पटेल की बेटी और बेटे नाराज हैं। कुछ ऐसा ही हाल उत्तर प्रदेश में भी दिख रहा है। उत्तर प्रदेश में फर्रुखाबाद सीट को समझौते के तहत समाजवादी पार्टी को दे दी गई है, ये सीट सलमान खुर्शीद की पारंपरिक सीट मानी जाती है। ऐसे में कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने अपनी नाराजगी खुल कर जाहिर कर दी है।

कॉन्ग्रेस-आम में सीटों का बँटवारा

बता दें कि आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस पार्टी ने लोकसभा चुनाव के लिए सीटों का बंटवारा कर लिया है। दिल्ली में दोनों पार्टियों ने सीट बाँट ली है, लेकिन पंजाब में भगवंत मान के दबाव के आगे किसी की नहीं चली। पंजाब में आम आदमी पार्टी सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगी, वहीं कॉन्ग्रेस ने भी अपनी जिद नहीं छोड़ी। ऐसे मे पंजाब की सभी सीटों पर कॉन्ग्रेस और आप के बीच फ्रेंडली फाइट होगी। वहीं, चंडीगढ़ की सीट आम आदमी पार्टी ने छोड़ दी है। इस सीट पर कॉन्ग्रेस चुनाव लड़ेगी। इन दोनों पार्टियों में गुजरात, गोवा को लेकर भी समझौता हो गया है, तो हरियाणा की सीट भी दोनों पार्टियों ने बाँट ली है।

दिल्ली में दोनों पार्टियों के नेताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सीट-शेयरिंग का ऐलान किया। कॉन्ग्रेस महासचिव और सांसद मुकुल वासनिक ने इसका ऐलान किया। उन्होंने कहा, “आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस ने दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, चंडीगढ़ और गोवा में सीटों का बंटवारा किया है। इसके तहत दिल्ली की 7 लोकसभा सीटों में से 3 पर कॉन्ग्रेस पार्टी चुनाव लड़ेगी, तो आम आदमी पार्टी 4 सीटों पर लड़ेगी। दिल्ली में आप को नई दिल्ली, पश्चिमी दिल्ली, दक्षिणी दिल्ली और पूर्वी दिल्ली की सीट दी गई है, तो कॉन्ग्रेस चाँदनी चौक, उत्तर-पूर्वी दिल्ली और उत्तर पश्चिमी दिल्ली सीट पर चुनाव लड़ेगी।”

वासनिक ने बताया ” गुजरात की 26 लोकसभा सीटों में से 24 पर कॉन्ग्रेस लड़ेगी, तो 2 सीटों पर आम आदमी पार्टी। गुजरात में भरूच और भावनगर सीटें आम आदमी पार्टी को दी गई हैं। वहीं, हरियाणा में कॉन्ग्रेस पार्टी 10 में से 9 सीटों पर लड़ेगी, तो आम आदमी पार्टी एक सीट पर चुनाव लड़ेगी। हरियाणा की कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट आम आदमी पार्टी को दी गई है। इसके अलावा चंडीगढ़ और गोवा में कॉन्ग्रेस अकेले चुनाव लड़ेगी। गोवा में जिस सीट से आम आदमी पार्टी ने उम्मीदवार की घोषणा की है, वो अपनी दावेदारी वापस ले लेगी।” हालाँकि पंजाब में दोनों ही पार्टियाँ अलग-अलग चुनाव लड़ेंगी।

इधर सीट शेयरिंग का ऐलान, उधर दिखने लगी नाराजगी

कॉन्ग्रेस पार्टी और आम आदमी पार्टी ने सीटों का बँटवारा जरूर कर लिया है, लेकिन उनकी मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। गुजरात की भरुच सीट हमेशा से अहमद पटेल के पास रही थी, लेकिन इस बार वो सीट समझौते के तहत आम आदमी पार्टी को दे दी गई है। भरुच सीट पर अहमद पटेल की बेटी मुमताज पटेल और बेटे फैसल पटेल, दोनों ही दावेदारी कर रहे थे। फैसल पटेल ने खुलेआम 22 फरवरी को ही बगावत का ऐलान कर दिया था। उन्होंने एक्स पर लिखा, “अगर अगले लोकसभा चुनाव में गठबंधन के तहत भरुच लोकसभा सीट आम आदमी पार्टी को दी जाती है, तो आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार का न तो मैं ही समर्थन करूँगा और न ही कॉन्ग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता उसका समर्थन करेंगे।”

इस बीच, अपने भाई से अलग तेवर अपना रही अहमद पटेल की बेटी मुमताज पटेल ने भी कई बार भरुच लोकसभा सीट पर अपनी दावेदारी की बात कही है। मुमताज पटेल ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। हालाँकि उन्होंने कहा है कि वो अपने पिता की 45 साल की विरासत को नहीं छोंड़ेगी। उनका आशय ये है कि वो कॉन्ग्रेस पार्टी में तो बनी रहेंगी, लेकिन दुखी मन से।

उत्तर प्रदेश में सलमान खुर्शीद नाराज

आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस के बीच सीट समझौते से पहले उत्तर प्रदेश में इंडी गठबंधन ने सीट समझौते का ऐलान किया था। कॉन्ग्रेस पार्टी और समाजवादी पार्टी ने 17-63 सीटें आपस में बाँटी थी। इसमें से एक सीट फर्रुखाबाद भी है। इस सीट को पारंपरिक तौर पर सलमान खुर्शीद की सीट और कॉन्ग्रेस का गढ़ माना जाता था, लेकिन इस सीट को समाजवादी पार्टी को दे दिया गया है। इसके बाद सलमान खुर्शीद ने अपनी नाराजगी जताई है।

सलमान खुर्शीद ने एक्स पर लिखा, “फ़र्रुख़ाबाद से मेरे रिश्तों के कितने इम्तहान का सामना करना पड़ेगा? सवाल मेरा नहीं, पर हमारे सब के मुस्तक़ाबिल का है, आने वाली नस्लों का है। क़िस्मत के फ़ैसलों के सामने कभी झुका नहीं। टूट सकता हूँ, झुकूँगा नहीं। तुम साथ देने का वादा करो, मैं नगमे सुनाता रहूँ।”

कॉन्ग्रेस ही नहीं, आप-सपा भी झेलेंगी बगावत की गर्मी!

सलमान खुर्शीद ने शायराना अंदाज में बहुत कुछ कह दिया है। अगर कॉन्ग्रेस और सपा ने उन्हें कहीं एडजस्ट नहीं किया, तो बहुत हद तक संभव है कि वो बगावत कर सकते हैं। ऐसा ही हाल भरुच सीट पर देखने को मिल सकता है। भले ही अहमद पटेल की बेटी मुमताज पटेल कॉन्ग्रेस में रहने की बात कर रही हों, लेकिन उनका दर्द और उनकी बेचैनी साफ दिखती है। वहीं, अहमद के बेटे फैसल ने तो खुलेआम कह ही दिया है कि भरुच के कॉन्ग्रेसियों को आम आदमी पार्टी का उम्मीदवार मंजूर नहीं।

यही नहीं, अभी बगावत आम आदमी पार्टी में भी हो सकती है। नॉर्थ-ईस्ट की एक लोकसभा सीट पर आम आदमी पार्टी ने जिस प्रत्याशी का ऐलान किया है, उसकी कोई खबर नहीं आ रही है। वहीं, चंडीगढ़ और गोवा में भी पार्टी में बगावत हो सकती है। रही बात पंजाब की, तो दोनों पार्टियों के आमने-सामने चुनाव लड़ने पर क्या नुकसान हो सकता है, इसका बात का पता तो लोकसभा चुनाव के नतीजों के सामने आते ही चल पाएगा।

आधी रात कोट-पैंट में आया जुबैर, 9 कारों में लगा दी आग: दलित की झुग्गी और दिव्यांग का खोखा भी जलाया, रिपोर्ट में बताया- भगवा झंडे वाले घर थे टारगेट

22 फरवरी 2024 की आधी रात उत्तर प्रदेश के आगरा की एक कॉलोनी में 9 कार धू-धू कर जलने लगी। इस मामले में पुलिस ने जुबैर को गिरफ्तार किया है। मीडिया रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उसने भगवा झंडे लगे घरों के बाहर खड़ी कारों को निशाना बनाया था।

हालाँकि जुबैर का कहना है कि वह रास्ता भटक गया था। किसी से मदद नहीं मिली तो गुस्से में आग लगा दी। पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियाँ मामले की पड़ताल कर रही हैं। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार कोट-पैंट पहनकर आगजनी करते जुबैर की करतूत सीसीटीवी में कैद है।

घटना आगरा के शाहगंज थाना क्षेत्र की है। यहाँ के मुरली विहार मोहल्ले में 22-23 फरवरी की दरम्यानी रात की रात लगभग 2 बजे अचानक लोगों के घरों के सामने खड़े वाहन धू-धू कर जलने लगे। 27 मिनट तक एक के बाद एक वाहनों में आग लगती रही, जिसे बुझाने के लिए स्थानीय लोगों के साथ पुलिस प्रशासन और फायर ब्रिगेड भी मौके पर पहुँचा। जलती कारों के टायरों के धमाके से काफी दूर तक लोगों की नींद खुल गई और अफरातफरी का माहौल बन गया। आगजनी की चपेट में प्रदीप अग्रवाल, अतुल दुबे, योगेश बघेल, बलवीर सिंह, पीसी चतुर्वेदी, चंद्रकांत उप्रेती, गजेंद्र सिंह, सुनील शर्मा और अजीत की कारें आईं।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार प्रदीप, अजीत और अतुल के घर पर भगवा झंडा लगा था। इनकी कारों को जला दिया गया। लेकिन मोहल्ले की जिस घर पर भगवा ध्वज नहीं लगा था उनकी कार सुरक्षित है। आगजनी की चपेट में एक दिव्यांग का चाय-बिस्कुट बेचने वाला खोखा भी आ गया। एक स्थानीय समाचार पोर्टल के मुताबिक जुबैर ने कारों और खोखे के अलावा राजकुमार अग्रवाल की भूसे की टाल, जयवीर सिंह के घर के आगे रखी लकड़ियों और दलित समुदाय के एक व्यक्ति की झुग्गी में भी आगजनी की थी। इस घटना के बाद लोगों ने लाइटर ले कर आगजनी कर रहे जुबैर को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया।

जुबैर मूलतः हरियाणा के पानीपत का निवासी है। वह नशे में धुत था। नशा उतरने के बाद उसने पुलिस को बताया कि वह पानीपत से अपने दोस्त से मिलने निकला था और रास्ता भटक गया। जब उसकी किसी ने मदद नहीं की तो नाराज हो कर उसने गाड़ियों में आग लगानी शुरू कर दी। जुबैर के घर में बीवी के अलावा 2 बच्चे और नाती-पोते हैं। जुबैर की बीवी ने भी बताया कि वह आगरा के खंदारी इलाके में अपने दोस्त अब्दुल रऊफ से मिलने निकला था।

अब्दुल रऊफ ने पूछताछ में बताया है कि ज़ुबैर ने टीपी नगर के ठेके पर दारू पी थी। पुलिस की पड़ताल में आरोपित के ठेके पर शराब पीने की पुष्टि हुई है। आरोप है कि जुबैर बार-बार अपना बयान भी बदल रहा है। फिलहाल लोहामंडी के ACP ने बताया है कि जुबैर पर मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गया है। उससे पूछताछ चल रही है। पुलिस आगजनी की असल वजह की पड़ताल कर रही है। इस पूछताछ में IB, ATS और LIU की टीमें भी शामिल हैं। फिलहाल अभी तक जुबैर का कोई पुराना आपराधिक इतिहास निकल कर सामने नहीं आया है।

आगजनी में जिस गरीब दिव्यांग का खोखा जल गया था, उसकी आर्थिक मदद आगरा पुलिस ने की है। पुलिस ने पीड़ित को फिर से खोखा लगाने के लिए 20 हजार रुपए आपसी सहयोग से जुटा कर दिए हैं।

ईरान ने पाकिस्तान के भीतर घुस आतंकियों को मारा, एक कमांडर को ढेर करने का दावा: एक माह पहले भी भिड़े थे शिया-सुन्नी मुल्क

शिया मुस्लिम राष्ट्र ईरान ने फिर से पाकिस्तान की सीमा में घुस कर आतंकियों का सफाया किया है। ईरान ने पाकिस्तान की सीमा के भीतर हमला करके जैश अल अद्ल के एक कमांडर को उसके साथियों के साथ मार गिराया है। यह दावा एक ईरानी समाचार पोर्टल ने ईरान की सरकारी मीडिया के हवाले से किया है।

ईरान इंटरनेशनल इंग्लिश नाम के एक्स (पहले ट्विटर) अकाउंट ने आज (24 फरवरी, 2024) को बताया, “ईरान की सेना ने पाकिस्तान के भीतर एक सशस्त्र लड़ाई में जैश अल अद्ल के बड़े कमांडर इस्माइल शाहबख्श और उसके साथियों को मार गिराया है। यह जानकारी ईरान की सरकारी मीडिया ने दी है। इससे एक माह पहले दोनों देशों ने एक दूसरे की जमीन पर हवाई हमले किए थे।”

अभी इस विषय में अधिक जानकारी सामने नहीं आ सकी है। ईरान और पाकिस्तान की सरकार ने भी इस विषय पर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। यह भी स्पष्ट नहीं हुआ है कि आतंकियों को किस क्षेत्र में मारा गया और मरने वालों की सँख्या कितनी है। ईरान और पाकिस्तान इससे पहले जनवरी में भी भिड़ चुके हैं। ईरान ने 16 जनवरी, 2024 को पाकिस्तान के भीतर एक मिसाइल हमला करके एक मस्जिद उड़ा दी थी।

इस हमले में दो बच्चों की मौत की बात पाकिस्तान ने कही थी। हालाँकि, ईरान ने कहा था कि उसका यह हमला पाकिस्तान के भीतर बैठे जैश अल अद्ल के आतंकियों को निशाना बनाने के लिए था। हालाँकि, इसके एक दिन बाद पाकिस्तान ने भी ईरान के भीतर एक हवाई हमला करने का दावा किया था। पाकिस्तान ने इसे बलोच विद्रोहियों पर की गई कार्रवाई बताया था। इस हमले में 7 लोगों की मौत हुई थी।

इनमें से 4 महिलाएँ जबकि 3 बच्चे थे। इसके बाद दोनों देशों के रिश्तों में काफी खटास आ गई थी। ईरान और पाकिस्तान ने इसके बाद कूटनीतिक स्तर पर भी लड़ाई चालू कर दी थी। उन्होंने अपने-अपने राजदूतों को एक दूसरे के देश से वापस बुला लिया था। कुछ दिनों तक चली तल्खी के बाद दोनों देश राजदूत वापस भेजने पर सहमत हो गए थे।

जिस आतंकी समूह जैश-अल-अदल को ईरान ने निशाना बनाया है, यह ईरान के सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत की आजादी के लिए लड़ने का दावा करता है। यह सुन्नी इस्लामी आंतकी समूह है जबकि ईरान शिया बहुल राष्ट्र है। 2012 में बनाया गया यह आतंकी समूह जब तब ईरान के भीतर हमला करता है। इसका निशाना ईरान के वह शहर होते हैं जिनकी सीमा पाकिस्तान से लगती है। वह यहाँ सुरक्षा बलों पर हमला करके पाकिस्तान भाग जाते हैं। पाकिस्तान और ईरान के बीच सीमा कई जगह पर हुई है, इससे तस्करी और आतंकियों का प्रसार होता रहता है।

6 दिन में 700+ कंप्लेन… संदेशखाली में TMC नेता के खिलाफ उमड़े लोग, लगी कतार: BJP के संघर्ष से पीड़ितों को मिला हौसला, बैकफुट पर TMC सरकार

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) सरकार ने पहले पश्चिम बंगाल के संदेशखाली से उठी आवाजों को दबाने की कोशिश की। लेकिन अब बीजेपी के संघर्ष से वह बैकफुट है। बीजेपी ने जिस तरीके से इस मामले को उठाया है, उससे पीड़ितों को भी हौसला मिला है। यही कारण है कि अब टीएमसी नेता के खिलाफ शिकायत करने के लिए स्थानीय लोग उमड़ पड़े हैं। 6 दिन में 700 से अधिक शिकायतें दर्ज कराई गई है।

सबसे अधिक शिकायतें जमीन कब्जे की हैं। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, संदेशखाली में TMC नेता शेख शाहजहाँ, उत्तम सरकार और शिबू हाजरा के खिलाफ यौन शोषण और जमीन कब्जाने के आरोपों के बाद अब सरकार बैकफुट पर है। उसने डैमेज कंट्रोल के लिए संदेशखाली में एक अफसर की तैनाती करके सभी शिकायतों को सुनने का निर्णय लिया है।

इसके लिए सरकार ने खंड विकास अधिकारी (BDO) की तैनाती की है। यहाँ संदेशखाली के पीड़ित अपनी जमीन कब्जाए जाने, रंगदारी लिए जाने और मजदूरी ना मिलने जैसी समस्याओं को लेकर आ रहे हैं। इंडियन एक्सप्रेस ने बताया है कि पिछले 6 दिनों में 700 से अधिक शिकायतें आ चुकी हैं। इनमें से 150 शिकायतें जमीन कब्जे और 70 रंगदारी वसूलने से संबधित हैं।

बताया गया है कि ममता सरकार अपनी छवि बचाने के लिए संदेशखाली में कब्जाई गई जमीन को लोगों को लौटाने पर भी विचार कर रही है। हालाँकि, यह काम काफी कठिन होगा, क्योंकि जमीन कब्जाने वालों ने इन जमीनों को गैर उपजाऊ बना दिया है। ऐसे में ग्रामीण इसको लेकर चिंतित हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी जमीन कब्जाई गई और जिनसे पट्टे का वादा किया गया उन्हें कोई भुगतान TMC नेताओं की तरफ से नहीं किया गया।

संदेशखाली के पीड़ितों का कहना है कि वह अपनी जमीन पर पहले खेती करते थे। जब इसे शाहजहाँ और उसके गुडों ने छीना तो इनका उपयोग मछलीपालन में किया। इसके लिए उनकी खेती की जमीन में खारा पानी भरा। इससे जमीन की प्रकृति बदल गई है और वह खेती करने लायक नहीं रह गई। जमीन को उपजाऊ बनाने में कम से कम तीन साल का वक्त लगेगा।

कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि TMC नेताओं ने उनसे काम करवाया, लेकिन कोई भी पैसा नहीं दिया। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उन्हें मारने की धमकी दी गई। ऐसे भी कई लोग हैं जो यहाँ पेशन जैसी समस्याओं को लेकर आ रहे हैं। लोगों का कहना है कि हाल ही में हुए विरोध-प्रदर्शनों से उनकी हिम्मत बढ़ी है।

जमीन कब्जाने के अलावा यौन शोषण के आरोपों को लेकर भी अब महिलाएँ सामने आ रही हैं। अब तक दो FIR ऐसे मामलों में हो चुकी हैं। बंगाल पुलिस ने शिबू हाजरा और उत्तम सरकार को गिरफ्तार कर लिया है। हालाँकि, शेख शाहजहाँ अभी भी फरार है।

संदेशखाली: यौन शोषण, जमीन कब्जा, धमकी

बंगाल में एक जिला है उत्तरी 24 परगना। यहाँ के सुंदरबन डेल्टा में टापू पर बसा हुआ है संदेशखाली। यहाँ 5 जनवरी 2024 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एक टीम CRPF के कुछ जवानों के साथ पहुँची थी। यह टीम बंगाल में हुए राशन घोटाला मामले में स्थानीय तृणमूल कॉन्ग्रेस नेता और पंचायत सदस्य शाहजहाँ शेख से पूछताछ करने आई थी। इस दौरान टीम पर हमला हो गया और कई अधिकारी एवं जवान घायल हुए।

इसके बाद शाहजहाँ शेख फरार हो गया और उसके घर पर ताला लटक रहा है। इस घटना के एक महीने बाद यानी 8 फरवरी 2024 को यहाँ बड़ी संख्या में महिलाएँ सड़क पर उतरीं। इन्होंने जो खुलासे किए वह सन्न करने वाले थे। महिलाओं ने आरोप लगाया कि शाहजहाँ शेख और उसके चेले शिबू हाजरा और उत्तम सरकार ने यहाँ अपना आतंक कायम कर रखा है।

महिलाओं ने कहा कि शाहजहाँ और उसके गुर्गों को जो भी महिला पसंद आती है, उसे वे घर से उठा ले आते हैं। जितने दिन मन होता है, उसे अपने पास रखते हैं और फिर ‘मन भर जाने’ पर महिला को वापस कर देते हैं। यदि कोई महिला इसका विरोध करती तो उसके घरवालों को प्रताड़ित किया जाता और हत्या तक की धमकी दी जाती थी।

राजस्थान के सरकारी स्कूल में जबरन पढ़वाते थे नमाज, हिंदू छात्रा के TC में लिखा ‘इस्लाम’: धर्मांतरण और लव जिहाद की साजिश पर शिक्षा मंत्री सख्त

राजस्थान के कोटा जिले के एक सरकारी स्कूल में धर्मांतरण और लव जिहाद की साजिशों का खुलासा होने के बाद दो शिक्षक सस्पेंड किए गए हैं। यह स्कूल सांगोद कस्बे के पास स्थित खजूरी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय है। स्कूल की एक हिंदू छात्रा के स्थानांतरण पत्र (TC) में ‘इस्लाम’ लिखे जाने और छात्राओं से जबरन नमाज पढ़वाए जाने का मामला सामने आया है।

स्कूल में चल रहे इस्लामी षड्यंत्र का खुलासा राज्य के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के दौरे के दौरान हुआ। 21 फरवरी 2024 को सर्व हिन्दू समाज के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात करने यह मामला उनके संज्ञान में लाया। संगठन ने सरकारी स्कूल में इस्लामिक जिहादी गतिविधियाँ चलने का आरोप लगाया। बताया जा रहा है कि प्रतिबंधित कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और दावत-ए-इस्लामी के इशारे पर लव जिहाद और धर्मान्तरण की यह साजिश चल रही थी।

इसके बाद स्कूल के दो शिक्षक फिरोज खान और मिर्जा मुजाहिदीन को को सस्पेंड कर दिया गया है। महिला शिक्षिका शबाना को मुख्यालय से अटैच (APO) कर दिया गया है। पूरे घटनाक्रम की जाँच करवाई जा रही है। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा है कि हिंदू होने के बावजूद स्कूल की एक छात्रा की टीसी भी इस्लाम लिख दिया गया था।

उन्होंने कहा, “वहाँ धर्मान्तरण का षड्यंत्र हो रहा है। लव जिहाद का षड्यंत्र चल रहा है। हिंदू लड़कियों से जबरन नमाज पढ़ाई जा रही है। यह पता चलने के बाद 2 शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया है। इनमें से एक फिरोज खान अध्यापक लेवल 1 है और दूसरा मिर्जा मुजाहिदीन शारीरिक शिक्षक है। शबाना के खिलाफ भी आगे कार्रवाई हो रही है। तीनों को मैंने बीकानेर भेज दिया है। विस्तृत जाँच करा कर इनके खिलाफ कठोर कार्रवाई करूँगा और बर्खास्त करने जैसी स्थिति बनी तो बर्खास्त भी करूँगा।”

हिंदू संगठन ने अपने ज्ञापन में बताया था कि स्कूल में न सिर्फ हिंदू छात्राओं से नमाज पढ़वाई जाती है, बल्कि उनकी जान-पहचान सोची समझी साजिश के तहत मुस्लिम लड़कों से करवाई जाती है। साल 2019 की एक घटना का भी जिक्र ज्ञापन में था। इसमें एक हिन्दू छात्रा के TC में उसका धर्म इस्लाम लिख दिया गया था। इसी छात्रा का साल 2024 में स्कूल के ही मुस्लिम छात्रों द्वारा अपहरण कर लिया गया था, जिसकी FIR सांगोद थाने में दर्ज है। इस पूरी साजिश के सूत्रधार के तौर पर स्कूल के फिजिकल टीचर मिर्जा मुजाहिदीन, फिरोज खान के अलावा सहायक अध्यापिका शबाना को आरोपित किया गया था।

सर्व हिन्दू समाज ने शिक्षा मंत्री से आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की थी। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने तत्काल इस मामले का संज्ञान लेते हुए कार्रवाई के आदेश जारी किए। 21 फरवरी को ही कोटा के मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी ने मिर्जा मुजाहिदीन और फिरोज खान को सस्पेंड कर दिया। इसके अलावा महिला टीचर शबाना को APO (मुख्यालय अटैच) कर दिया गया। मंत्री मदन दिलावर के मुताबिक मामले की उच्चस्तरीय जाँच करवाई जा रही है।

मंदिरों को मिले दान से कमाई करने के कॉन्ग्रेस सरकार के मंसूबों को झटका, BJP-JDS की एका से बिल विधान परिषद में नहीं हुआ पास: लगे जय श्रीराम के नारे

कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार के मंदिरों की कमाई पर अधिक टैक्स वसूलने के मंसूबों पर पानी फिर गया है। इस सम्बन्ध में लाया गया विधेयक कर्नाटक के विधान परिषद में पारित नहीं हो पाया। भाजपा और जेडीएस के गठबंधन ने इस विधेयक को संयुक्त रूप से विधान परिषद में गिरा दिया।

75 सदस्यों वाली कर्नाटक विधान परिषद में मन्दिरों की कमाई पर टैक्स लगाने वाले इस विधेयक को ध्वनि मत से खारिज कर दिया गया। कर्नाटक विधान परिषद में कॉन्ग्रेस सरकार अल्पमत में है। कर्नाटक के इस उच्च सदन में भाजपा के पास 35 और जेडीएस के पास 8 सदस्य हैं। एक सदस्य निर्दलीय भी है जबकि कॉन्ग्रेस के पास यहाँ मात्र 30 ही सदस्य हैं। एक पद अभी रिक्त है।

ऐसे में कॉन्ग्रेस सरकार का ‘कर्नाटक हिंदू धार्मिक संस्थान और धर्मार्थ बंदोबस्ती विधेयक 2024’ विधान परिषद में पारित नहीं हो सका। कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार इस विधेयक के जरिए वार्षिक ₹1 करोड़ से अधिक दान पाने वाले मंदिरों से उनकी कमाई का 10% जबकि ₹10 लाख से ₹1 करोड़ तक दान पाने वाले मंदिरों से 5% टैक्स वसूलना चाहती थी।

इससे पहले यह विधेयक कर्नाटक विधानसभा में लाया गया था। सत्ता में होने के चलते विधानसभा में कॉन्ग्रेस सरकार को बहुमत है, इसलिए यहाँ यह विधेयक बिना किसी समस्या के पारित हो गया था। 224 सदस्यों वाली इस विधानसभा में इसे 135 कॉन्ग्रेस विधायकों का समर्थन हासिल हुआ था। इसके बाद इसे विधान परिषद के समक्ष रखा गया, जहाँ यह पारित नहीं हुआ।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि विधान परिषद में इस विधेयक के समर्थन में सत्ता पक्ष के 7 सदस्यों ने ‘हाँ’ कहा, जबकि 18 विपक्षी सदस्यों ने ‘ना’ कहा। इसके बाद भाजपा विधान परिषद सदस्यों ने सदन में जय श्री राम के नारे भी लगाए। हालाँकि, इस विधेयक को सरकार दोबारा इस सदन में पेश कर सकती है, लेकिन इसकी संभावना कम मानी जा रही है। यह भी कयास लग रहे हैं कि इसे अब लोकसभा चुनावों के बाद ही लाया जाएगा।

मंदिरों की कमाई से सबंधित इस विधेयक का राज्य की विपक्षी पार्टी भाजपा और जेडीएस लगातार विरोध कर रहे थे। उन्होंने सरकार पर हिन्दू विरोधी होने का आरोप लगाया था। कर्नाटक भाजपा के अध्यक्ष बी वाई विजयेन्द्र ने इस मामले में कहा था कि सरकार हिन्दू मंदिरों के दान से अपना खजाना भरना चाहती है।

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के बड़े नेता बीएस येदियुरप्पा ने भी इस विधेयक को लेकर कहा था कि आखिर हिन्दू मंदिर ही टैक्स के दायरे में क्यों लाए जा रहे हैं और बाकी मजहबों के पाक स्थलों को इस दायरे में क्यों नहीं लाया जा रहा।

खुद 5 कंपनी की डायरेक्टर, शादी से इनकार पर TV एंकर को भाड़े के गुंडों से उठवाया: नजर रखने के लिए कार में लगवा रखी थी ट्रैकिंग डिवाइस

शादी करने के लिए 31 साल की एक महिला ने टीवी म्यूजिक चैनल के एंकर को भाड़े के गुंडों से उठवा लिया। महिला की पहचान भोगिरेड्डी त्रिशा के रूप में हुई है। वह 5 स्टार्टअप कंपनियों में डायरेक्टर है।

घटना हैदराबाद की है। एंकर प्रणव को 11 फरवरी 2024 को अगवा किया गया था। बाद में पिटाई कर उसे छोड़ दिया गया था। पुलिस ने 22 फरवरी को त्रिशा को गिरफ्तार किया। 4 अपहरणकर्ता भी पकड़ लिए गए हैं।

रिपोर्टों के अनुसार करीब दो साल पहले त्रिशा ने प्रणव की प्रोफाइल एक मैट्रिमोनियल वेबसाइट पर देखी थी। इसके बाद उसने चैट करना शुरू कर दिया। दिलचस्प यह है कि यह प्रोफाइल प्रणव की तस्वीर लगाकर किसी अज्ञात व्यक्ति ने बना रखी थी। उसने अच्छे रिटर्न का वादा करते हुए निवेश के लिए कथित तौर पर 40 लाख रुपए भी ले लिए। पैसे मिलने के बाद उसने त्रिशा को इग्नोर करना शुरू कर दिया जिसके बाद उसे इस फर्जीवाड़े का एहसास हुआ।

रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला हैदराबाद के थाना क्षेत्र उप्पल का है। डिजिटल मार्केटिंग का काम करने वाली त्रिशा ने ठगे जाने के बाद एंकर प्रणव की तलाश शुरू की। प्रणव का नंबर मिलने के बाद उसने उससे संपर्क किया। प्रणव ने अपनी फर्जी प्रोफाइल को लेकर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाने की बात कही। लेकिन महिला ने प्रणव को लगातार मैसेज भेजने शुरू कर दिया। थोड़े समय तक इसे अनदेखा करने के बाद प्रणव ने महिला का नंबर ब्लॉक कर दिया। इस से वह नाराज हो गई। वह किसी भी हाल में प्रणव से शादी करना चाहती थी। उस पर नजर रखने के लिए त्रिशा ने उसकी कार में ट्रैकिंग डिवाइस लगवा दी।

इसके बाद 11 फरवरी को महिला ने 4 गुंडों को भेज प्रणव का अपहरण करवा लिए। प्रणव को उठाकर त्रिशा के ऑफिस ले जाया गया। यहाँ उसकी पिटाई की गई। पिटाई के डर से प्रणव ने भविष्य में महिला से बातचीत जारी रखने का भरोसा दिया। उसके बाद उसे छोड़ दिया गया। बाहर निकलने के बाद प्रणव ने उप्पल पुलिस स्टेशन में मुकदमा दर्ज करवाया। पुलिस ने 22 फरवरी को भोगिरेड्डी त्रिशा और अपहरण में शामिल उसके 4 सहयोगियों को गिरफ्तार कर लिया है। इन सभी पर IPC की धारा 363, 341 व 342 के तहत कार्रवाई की गई है। मामले की जाँच जारी है।

UCC की दिशा में बढ़ा असम: मुस्लिम निकाह- तलाक रजिस्ट्रेशन वाला कानून निरस्त, बोले CM सरमा- बाल विवाह पर लगेगी रोक

असम ने वर्ष 1935 में बनाए गए मुस्लिम विवाह और तलाक रजिस्ट्रेशन अधिनियम (Muslim Marriages and Divorces Registration Act 1935) को रद्द कर दिया है। इसकी जानकारी सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया पर दी है। उन्होंने कहा है कि इससे अंतर्गत शादी की कानूनी आयु ना पूरी करने वालों का भी निकाह हो रहा था।

सीएम हिमंता ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “23 फरवरी, 2024 को असम कैबिनेट ने दशकों पुराने असम मुस्लिम विवाह और तलाक पंजीकरण अधिनियम को निरस्त करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। भले ही दूल्हा और दुल्हन की उम्र 18 और 21 ना हुई हो, जैसा कि कानूनन होना चाहिए, के विवाह का पंजीकरण भी इसके अंतर्गत हो रहा था। यह निर्णय असम में बाल विवाह पर रोक लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”

इससे पहले असम सरकार में मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने इस विषय में मीडिया से बात की। उन्होंने मीडिया को बताया, “असम मुस्लिम विवाह और तलाक पंजीकरण अधिनियम 1935, जिसके आधार पर अब तक 94 मुस्लिम रजिस्ट्रार राज्य में मुस्लिम निकाहों का पंजीकरण कर रहे थे और तलाक का निर्णय कर रहे थे, उसे निरस्त कर दिया गया है। आज की कैबिनेट बैठक में इस अधिनियम को हटा दिया है।”

उन्होंने आगे बताया, “इसके परिणामस्वरूप आज के बाद इस अधिनियम के जरिए मुस्लिम विवाह या तलाक का पंजीकरण नहीं हो सकेगा। हमारे राज्य में एक विशेष विवाह अधिनियम है, इसलिए हम चाहते हैं कि सभी विवाह, विशेष विवाह अधिनियम के तहत हों।” बरुआ ने इस कानून को औपनिवेशिक काल का कानून बताया और कहा कि इससे राज्य में बाल विवाह पर रोक लगेगी। गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से असम में बाल विवाह पर एक्शन चल रहा है, इसके अंतर्गत 1000 से अधिक गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं।

क्या था मुस्लिम विवाह अधिनियम?

यह अधिनियम वर्ष 1935 में अंग्रेजों द्वारा लाया गया था। यह अधिनियम वर्ष 1935 में अंग्रेजों द्वारा लाया गया था। यह असम के मुस्लिमों के लिए विवाह पंजीकरण और तलाक के नियम बनाता था। इसके अंतर्गत कोई भी मुस्लिम व्यक्ति, जिसे सरकार अधिकृत कर दे, मुस्लिम निकाह को पंजीकृत कर सकता था। इसी के साथ वह तलाक का पंजीकरण भी कर सकता था। इसके लिए वह एक शुल्क भी ले सकता था। इस अधिनियम के तहत एक इलाके में दो मुस्लिम रजिस्ट्रार नियुक्त किए जाने थे, जिनमें से एक सुन्नी और एक शिया होता।

असम सरकार का मानना है कि इस नियम का लाभ उठा कर ऐसे निकाह भी पंजीकृत हो रहे थे, जो कि कानूनी मान्यता पूरी नहीं करते। चूंकि इस अधिनियम में निकाह की न्यूनतम आयु का जिक्र नहीं था, ऐसे में 18 वर्ष से कम की बच्चियों का निकाह भी हो रहा था।

हालाँकि, अब सरकार ने इस पर रोक लगा दी है। वर्तमान में असम के भीतर 94 ऐसे मुस्लिम रजिस्ट्रार हैं, जो कि निकाह और तलाक का पंजीकरण करते हैं। सरकार अब इनका रजिस्ट्रार का पद खत्म कर देगी। असम सरकार ने कहा है कि इन सभी को एक बार ₹2 लाख का मुआवजा भी दिया जाएगा।

UCC की दिशा में एक बड़ा कदम

असम सरकार का यह निर्णय समान नागरिक संहिता (UCC) की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। गौरतलब है कि हाल ही में उत्तराखंड में UCC को विधानसभा की मंजूरी मिली है। इसके अंतर्गत सभी धर्मों के लोगों के विवाह, तलाक और विरासत जैसे मुद्दों को लेकर नियम बनाए गए हैं। इसमें भी बहुविवाह जैसे मामलों पर रोक लगाई गई है। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पहले ही कहते आए हैं कि वह राज्य में UCC लागू करेंगे।

ऐसे में मुस्लिमों के लिए अलग से बनाया कानून खत्म करना UCC का रास्ता साफ़ करता है। CM सरमा राज्य में बाल विवाह, बहुविवाह और तीन तलाक के धुर विरोधी रहे हैं। इसके खिलाफ वह लगातार बोलते रहे हैं। अब असम में मुस्लिम निकाह का पंजीकरण विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के तहत होगा।

डीडी न्यूज के कार्यक्रम की रिकॉर्डिंग के दौरान NSUI कार्यकर्ताओं का हंगामा, कॉन्ग्रेस नेता उदित राज के ओएसडी की अगुवाई में पत्रकारों पर हमला, शो के प्रोड्यूसर को पीटा

डीडी न्यूज के मशहूर डिबेट शो ‘2 टूक’ की रिकॉर्डिंग के समय दूरदर्शन के स्टूडियो में हंगामे और मारपीट की खबर सामने आ रही है। इस दौरान एनएसयूआई से जुड़े कार्यकर्ताओं और कॉन्ग्रेस नेता उदित राज के समर्थकों ने स्टूडियो में जमकर हंगामा किया। यही नहीं, उदित राज के ओएसडी की अगुवाई में पत्रकारों पर भी हमला किया, जिसमें दो टूक शो के प्रोड्यूसर पर पीछे से हमला किया गया।

जानकारी के मुताबिक, ये मामला शुक्रवार (23 फरवरी 2024) का है, जब वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव के शो ‘दो टूक’ की रिकॉर्डिंग हो रही थी। इस कार्यक्रम के फॉर्मेट के मुताबिक ही सवाल-जवाब का सिलसिला चल ही रहा था कि कार्यक्रम में शामिल होने पहुँचे एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं ने हंगामा खड़ा कर दिया। उन्होंने शो के प्रोड्यूसर पर भी हमला कर दिया। हंगामा कर रहे लोगों को रोकने की कोशिश कर रहे अशोक श्रीवास्तव के साथ भी बदतमीजी की गई।

इस मामले की जानकारी सार्वजनिक हुई पूर्व सांसद और कॉन्ग्रेस नेता उदित राज के दावे से। उदित राज ने दावा किया कि शो की रिकॉर्डिंग के दौरान एंकर से सवाल जवाब पूछने पर लोगों को मारा पीटा गया। उन्होंने एक्स पर लिखा, “दूरदर्शन स्टूडियो में डिबेट की रिकॉर्डिंग के समय मोदीभक्ति के बारे में जब एंकर से सवाल पूछा तो मारा पीटा गया। नया ट्रेंड स्थापित हो रहा है।”

हालाँकि तुरंत ही वहाँ मौजूद रहे लोगों ने उदित राज के दावे की हवा निकाल दी। डीडी न्यूज के वरिष्ठ संवाददाता लाल चंद्र सिंह ने उदित राज को जवाब देते हुए लिखा, “बिल्कुल ग़लत, 4 गुंडे पहले से ही प्लान करके आए थे और उन लोगों ने सब कुछ अपनी योजना के मुताबिक ही किया। ऐंकर उनको कह रहे थे कि हम आपके पास माइक लेकर आ रहे हैं लेकिन उनको लगा कि इससे तो उनका प्लान पूरा नहीं होगा तो उन्होंने हंगामा कर दिया, धक्कामुक्की की और मारपीट भी की। मत कीजिए।”

इस मामले में वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव का भी बयान सामने आया है। उन्होंने कहा, “आज मेरे कार्यक्रम दो टूक की रिकॉर्डिंग के दौरान जेएनयू से एनएसयूआई के कुछ लड़के आए थे और उदित राज के कुछ लोग थे, उन्होंने प्रोग्राम की रिकॉर्डिंग शुरू होते ही हंगामा और बदतमीजी शुरू कर दी। मैने और मेरे प्रोड्यूसर ने उन्हें रोका तो कुछ लड़कों ने मेरे प्रोड्यूसर पर पीछे से हमला कर दिया। बाद में मैं बीच बचाव में आया और एक हमलावर को पकड़ लिया। इससे पहले मैं उसे पकड़ कर सिक्योरिटी को देता कुछ लोगों ने घेर कर मुझे भी गिरा दिया। बाद में पता चला कि इनमें उदित राज का ओएसडी भी शामिल था, जो लड़कों को भड़का रहा था। और अब उदित राज इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है। अभी शक ये भी है कि कुछ लड़के शराब पिए हुए थे। फिलहाल मामले को पुलिस देख रही है।”

वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने कहा कि हमलावरों के निशाने पर वो भी थे। उन्होंने प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से आगे कहा, “कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने जो वहाँ मौजूद थे और जो दूसरे गेस्ट प्रोग्राम में आए थे, उन्होंने यह भी बताया है कि कुछ लड़के हंगामे के दौरान ही ये बात कर रहे थे कि चार-पाँच लोगों को पीटकर यहाँ से निकल लो, इन लोगों के निशाने पर मैं भी था।”

वहीं, वरिष्ठ पत्रकार प्रखर श्रीवास्तव ने उदित राज को करारा जवाब दिया। उन्होंने लिखा, “उदित राज जी, आपको झूठ बोलने और कुतर्क करने की पुरानी बीमारी है। डीडी न्यूज़ की कई टीवी डिबेट्स में आपके झूठे तर्कों को बेनकाब किया गया है और इसीलिए आप दुश्मनी की भावना से भरकर अब इस स्तर पर उतर आये हैं कि मिथ्या आरोप लगाने लगे हैं।” उन्होंने आगे लिखा, “खास बात है कि जो उदित राज अनर्गल आरोप लगा रहे हैं, वो खुद मौके पर मौजूद नहीं थे।”

पत्रकार कीर्ति वढेरा ने डीडी न्यूज के पत्रकारों और टीम पर हमले को लेकर कॉन्ग्रेस पार्टी को निशाने पर लियाष उन्होंने लिखा, “मीडिया लोकतंत्र का सबसे मजबूत स्तंभ है और मीडिया पर हमला कतई बर्दास्त नहीं किया जाना चाहिए। कॉन्ग्रेस के पास कुछ बचा नहीं है, ऐसे में वो वरिष्ठ पत्रकारों पर हमले कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कहा कि एनएसयूआई के गुंडे ऑडियंस के तौर पर घुसे और शो के दौरान हंगामा किया। उन्होंने एंकर और पूरे प्रोडक्शन टीम को नुकसान पहुँचाया, वहीं कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ता उनकी मदद करते दिखे।

बता दें कि उदित राज सोशल मीडिया पर कई बार झूठ फैलाते रहे हैं। उनपर सोशल मीडिया के माध्यम से अनर्गल टिप्पणी के मामले में केस भी दर्ज हो चुका है। चूँकि इस मामले में सीधे-सीधे उनके ओएसडी का नाम सामने आ रहा है, ऐसे में वो विक्टिम कार्ड खेलकर अब सहानुभूति बटोरने में लगे हैं।

वायनाड में चर्च ने जमीन कब्जाया, सरकार ने ₹100 प्रति एकड़ पर दे दिया पट्टा: केरल HC ने रद्द किया आवंटन, कहा- यह जनजाति समाज के सीने में चाकू घोंपने जैसा

केरल उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार द्वारा कल्लोदी सेंट जॉर्ज फोरेन चर्च को सिर्फ 100 रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से 5.5358 हेक्टेयर (लगभग 13.7 एकड़) भूमि के आवंटन को रद्द कर दिया है। केरल सरकार ने यह आवंटन साल 2015 में किया था। चर्च ने उस भूमि पर अतिक्रमण कर लिया था। इसके बाद राज्य सरकार ने उस सरकारी भूमि को चर्च को आवंटित कर दिया था।

जस्टिस पीवी कुन्हिकृष्णन ने कहा कि सरकार का यह निर्णय जनजातीय समुदायों के लोगों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है, क्योंकि जिले में सैकड़ों भूमिहीन जनजातीय समुदाय के लोग कृषि तथा आवासीय भूखंडों की प्रतीक्षा कर रहे थे। कोर्ट ने कहा कि सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करने वाले किसी लाभ के हकदार नहीं हैं। अतिक्रमण वाली संपत्ति आवंटित करने में कोई सार्वजनिक हित नहीं है।

कोर्ट ने कहा, “गरीब भूमिहीन जनजातीय समुदाय को लोग अपनी आजीविका और कृषि के लिए भूमि पाने के लिए आंदोलन कर रहे हैं… ऐसी स्थिति में एक्सटेंशन पी 5 (सरकारी आदेश) के तहत भूमि असाइनमेंट की शक्तियों का उपयोग करते हुए 5वें प्रतिवादी (चर्च) को बड़ी सरकारी भूमि सौंपी जाती है।”

कोर्ट ने आगे कहा, “मेरी राय है कि यह न केवल अवैध है, बल्कि याचिकाकर्ताओं (जनजातीय समुदाय को लोगों) सहित जनजातीय समुदाय के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। यह वायनाड में हमेशा मुस्कुराते रहने वाले मासूम जनजातीय लोगों के दिलों पर चाकू से वार करने के अलावा और कुछ नहीं है।” बता दें कि वायनाड में जनजातीय समुदाय के लोगों की आबादी लगभग 20 प्रतिशत है।

न्यायालय ने कहा, “किसी भी व्यक्ति को सरकारी भूमि की रजिस्ट्री पर असाइनमेंट का दावा करने का कोई अधिकार नहीं है। सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करने और उस पर अवैध निर्माण करने से अतिक्रमणकारियों को कोई अधिकार नहीं मिलेगा। सरकारी भूमि को वंचितों को आवंटित किया जाना चाहिए, न कि अमीर और शक्तिशाली लोगों को।”

कोर्ट ने यह भी कहा कि चर्च को वर्तमान बाजार मूल्य पर संपत्ति खरीदने का अवसर दिया जाना चाहिए। यदि चर्च सहमत नहीं है तो सरकार को भूमि वापस ले लेनी चाहिए और इसे पात्र व्यक्तियों में वितरित करना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि यदि चर्च जमीन खरीदता है तो उसकी बिक्री से प्राप्त पूरी राशि का उपयोग वायनाड में जनजातीय समुदाय के कल्याण के लिए किया जाना चाहिए।

दरअसल, कोर्ट का यह फैसला वायनाड में भूमिहीन जनजातीय समुदाय से आने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं के एक समूह द्वारा दायर याचिका पर दिया गया था। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि जुलाई-अगस्त 2001 में 32 जनजातीय लोगों की भूख से मौत हो गई थी। विरोध प्रदर्शन के बाद राज्य सरकार के साथ सात सूत्री समझौता हुआ था। इसमें उन्हें पाँच एकड़ जमीन देने की बात कही गई थी।

कोर्ट को यह बताया गया कि चर्च ने 1962 के बाद से वायनाड जिले के मननथावडी तालुक में 5.5358 हेक्टेयर भूमि पर अवैध रूप से अतिक्रमण किया था। चर्च ने उस भूमि का पट्टाया (भूमि दस्तावेज) प्राप्त करने के लिए कई जगहों पर आवेदन किया, लेकिन वह खारिज हो गया। इसके बाद राज्य सरकार ने ₹100 प्रति एकड़ की दर से भूमि सौंपने के लिए एक सरकारी आदेश जारी किया गया था।