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पहले तेजस्वी यादव की मंच पर दिखा शॉर्प शूटर मोहम्मद कैफ, फिर बंद कमरे में मिलन की तस्वीरें हुई वायरल: सीवान में पत्रकार की हत्या में भी जा चुका है जेल

बिहार में 1990 के दशक को जंगलराज कहा जाता है। उस दौरान हत्या, बलात्कार, अपहरण, डकैत आदि अपराध ने संगठित रूप ले लिया था और उसे राजनेताओं का संरक्षण भी हासिल था। ये राजद के संस्थापक और उनकी पत्नी राबड़ी देवी का दौैर था। उस दौर को आज उनके बेटे तेजस्वी यादव फिर याद दिलाई, जब शार्प शूटर के साथ उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं।

दरअसल, बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा महागठबंधन का साथ छोड़ने के बाद वहाँ के राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं। इसे साधने के लिए तेजस्वी यादव जन विश्वास यात्रा पर निकले हैं। इसी यात्रा में तेजस्वी यादव जब गुुरुवार (22 फरवरी 2024) को सिवान के टड़वा पहुँचे। वहाँ उनके साथ कुख्यात शूटर मोहम्मद कैफ उर्फ बंटी भी दिखा।

मोहम्मद कैफ सिर्फ रैली के दौरान ही तेजस्वी यादव के साथ नहीं था, बल्कि अतिथि भवन का एक फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस फोटो में तेजस्वी यादव के साथ मोहम्मद कैफ बैठा हुआ दिख रहा है। इसमें तेजस्वी यादव कैफ के साथ हाथ मिलाते हुए दिख रहे हैं। इसके साथ ही एक अन्य तस्वीर में वो कैफ के साथ बैठे हुए दिख रहे हैं।

ये वही मोहम्मद कैफ है, जिसे सिवान के कुख्यात गैंगस्टर मोहम्मद शहाबुद्दीन के बहन के लड़के यूसुफ की हत्या में जेल जा चुका है। इतना ही नहीं, सिवान के भाजपा सांसद रहे ओमप्रकाश यादव के प्रेस प्रतिनिधि श्रीकांत भारतीय की हत्या में भी मोहम्मद कैफ का नाम आया है। वह सिवान के गैंगस्टर शहाबुद्दीन के साथ भी कई बार दिख चुका है और उनका सहयोगी रहा है।।

मोहम्मद कैफ उर्फ बंटी का शहाबुद्दीन की बीवी हिना शहाब और बेटे ओसामा शहाब से भी नजदीकी है। कहा जा रहा है कि गैंगस्टर से सांसद बने मोहम्मद शाहबुद्दीन की मौत के बाद खाली हुए उनके आपराधिक साम्राज्य पर कब्जा करना चाहता है। इसलिए वह अक्सर राजनीतिक गतिविधियों में भी दिखता है। अग्निवीर योजना के विरोध में उसने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था और जेल गया था।

कैफ पत्रकार राजदेव रंजन की हत्या का भी आरोपित बनाया गया था। पत्रकार राजदेव रंजन की हत्याकांड में मोहम्मद कैफ को पुलिस द्वारा प्राथमिक अभियुक्त बनाया गया था। पूछताछ के बाद सीबीआई ने उसे जेल भेज दिया था। बाद में उसे क्लीन चिट मिल गई थी। मोहम्मद कैफ पर दर्जनों मामले में लंबित हैं। वह कई बार जेल भी जा चुका है।

मंच पर और तेजस्वी यादव से व्यक्तिगत तौर पर मिलने के बाद सामने आई तस्वीरों के प्रसारित होने के बाद मोहम्मद कैफ ने बताया कि वह पिछले दो साल से जमानत पर बाहर है। उसने यह भी बताया कि वह सिवान में बच्चों को अपने ‘कैफ क्रिकेट एकेडमी’ में प्रशिक्षण दे रहा है। उस पर रंगदारी, लेबी सहित मारपीट के कई मामले दर्ज हैं।

एक कुख्यात क्रिमिनल के साथ तेजस्वी यादव के मिलने पर राजनीतिक भूचाल आ गया है। भाजपा ने इसको लेकर सवाल उठाया है। बिहार भाजपा ने ट्वीट करके तेजस्वी यादव से पूछा है कि वे जन विश्वास यात्रा निकाल रहे हैं या अपराधी विश्वास यात्रा? भाजपा ने तेजस्वी पर वोटबैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया है। साथ ही राष्ट्रीय जनता दल (राजद) को ‘राष्ट्रीय जहरीला दल’ कहा है।

भाजपा ने अपने ट्वीट ने लिखा है, “तेजस्वी यादव जी ‘जन विश्वास यात्रा’ निकाल रहे या ‘अपराधी विश्वास यात्रा?’ वोटबैंक के लिए अंधे तेजस्वी यादव ने पत्रकार राजदेव रंजन यादव जी के खून के छींटे से रंगे हत्यारे के साथ मंच साझा कर गुंडाराज की झलक फिर से पेश की है। वोट बैंक के लिए ये समाज और सिद्धांत सब कुछ गिरवी रख देंगे!”

बता दें कि मोहम्मद कैफ पहले युवा राजद से जुड़ा था। कुछ दिन राजद में रहने के बाद उसने राजद से नाता तोड़ लिया था। साल 2020 में हुए विधानसभा में वह रघुनाथपुर सीट से विधायकी का चुनाव भी लड़ा था। उसे बिहार के एक क्षेत्रीय दल ने अपना उम्मीदवार बनाया था। हालाँकि, इस चुनाव में उसे हार का सामना करना पड़ा था। अब माना जा रहा है कि वह फिर राजद के साथ जुड़ने की कोशिश कर रहा है।

DDA ने जो ‘अवैध’ मस्जिद ढहाई, वहाँ शब-ए-बारात पर नमाज पढ़ना चाहते थे मुस्लिम: हाई कोर्ट ने नहीं दी इजाजत, दिल्ली वक्फ बोर्ड को झटका

दिल्ली के महरौली इलाके में 30 जनवरी 2024 को अखूंदजी मस्जिद और बहरुल उलूम मदरसे पर बुलडोजर कार्रवाई हुई थी। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने सरंक्षित रिज क्षेत्र में अवैध निर्माण को लेकर यह कार्रवाई की थी। ढहाई गई इस मस्जिद में मुस्लिम शब-ए-बारात पर नमाज पढ़ना चाहते थे। लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट ने इसके लिए इजाजत देने से इनकार कर दिया है।

दिल्ली वक्फ बोर्ड की प्रबंध समिति ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर शब-ए-बारात के दिन मस्जिद की जमीन पर बिना रोक-टोक आवाजाही की अनुमति माँगी थी। आज (23 फरवरी 2024) दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस पुरुषइंद्र कुमार कौरव ने यह कहते हुए याचिका खारिज की दी कि अब यह साइट डीडीए के नियंत्रण में है। इससे जुड़ी मुख्य याचिका पर 07 मार्च को सुनवाई होनी है। उन्होंने मौजूदा स्थिति का हवाला देते हुए नए सिरे ये निर्देश जारी करने से इनकार करते हुए यथास्थिति बहाल रखने को कहा।

वकील शम्स ख्वाजा ने इस दौरान दिल्ली वक्फ बोर्ड की प्रबंध समिति की ओर से दलीलें दी। याचिका में कहा गया था कि शब-ए-बारात (प्रायश्चित की रात) पर मुस्लिम खुद और अपने पूर्वजों के पापों के लिए अल्लाह से माफी माँगते हैं। अखूंदजी मस्जिद 700 साल पुरानी थी। सालों से वहाँ नमाज अदा की जा रही थी। स्थानीय लोगों का एक कब्रिस्तान भी था। लिहाजा उन्हें शब-ए-बारात पर इस जगह पर बेरोकटोक आवाजाही की इजाजत दी जाए। हालाँकि दिल्ली वक्फ बोर्ड के वकील ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह मस्जिद न तो 700 साल पुरानी है और न ही वक्फ की प्रॉपर्टी है।

गौरतलब है कि डीडीए की कार्रवाई के बाद मुस्लिम पक्ष ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। इसके बाद अदालत ने उसे यथास्थिति बहाल रखने को कहा था। अदालत ने कहा था कि यह निर्देश केवल उसी हिस्से को लेकर है जहाँ अखूंदजी मस्जिद थी। उसका निर्देश संरक्षित क्षेत्रों में अन्य अवैध निर्माण पर कार्रवाई से डीडीए को नहीं रोकती। मुस्लिम पक्ष का दावा है कि इस मस्जिद का निर्माण करीब सात सौ साल पहले रजिया सुल्तान के शासनकाल में हुआ था। वहीं डीडीए का कहना है कि संरक्षित क्षेत्र में कब्जा कर जो अवैध निर्माण किए गए थे उनमें यह मस्जिद और मदरसा भी शामिल था।

टिकटॉक पर बैन से भारत ने दुनिया को दिखाया रास्ता: अमेरिका हुआ मुरीद, कहा- चीनी चालों का नाकाम करने का नई दिल्ली का तरीका लाजवाब

अमेरिका के शीर्ष टेक सिक्योरिटी अधिकारी ने कहा कि भारत सरकार ने टिकटॉक पर बैन लगाकर जिस तरह से चीन को चुनौती दी है, वो बेमिसाल है। भारत सरकार ने साल 2020 में टिकटोक को बैन कर दिया था, इसके बाद अमेरिका समेत कई देशों ने चीनी कंपनियों के खिलाफ इस तरह के कदम उठाए। कुछ ऐसा ही कहा भारत की पहली यात्रा पर आए अमेरिका के शीर्ष तकनीकी सुरक्षा अधिकारी ब्रेंडन कैर ने। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने जिस तरह से चीनी खतरे से निपटा, वो शानदार है।

अमेरिकी संघीय संचार आयोग (एफसीसी) के कमिश्नर ब्रेंडन कैर अपनी पहली भारत यात्रा पर हैं। अपनी इस यात्रा के दौरान इकोनॉमिक टाइम्स के साथ खास बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि चीन की तरफ से खड़े किए जा रहे सुरक्षा की चिंताओं का भारत सरकार ने जिस तरह से सामना किया और चीन की चालों को जिस तरह से नाकाम किया, वो काबिले-तारीफ है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रैंडन कैर ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था जिस तेजी से बढ़ रही है और उसके सामने जिस तरह की सुरक्षा चुनौतियाँ बढ़ रही है, उससे भारत सरकार ने जिस कड़ाई से निपटा, वो दुनिया के लिए एक मॉडल की तरह है। उन्होंने कहा कि शॉर्ट-वीडियो प्लेटफॉर्म टिकटॉक और टेलीकॉम उपकरण आपूर्तिकर्ता हुआवेई और जेडटीई पर भारत की कार्रवाई ने “चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) द्वारा उत्पन्न खतरों से निपटने के लिए उचित और मजबूत कार्रवाई के मामले में स्वर्ण मानक स्थापित किया है।” कैर ने कहा कि अमेरिका इस मामले में भारत से ‘सीख’ ले सकता है। साथ ही उन्होंने अमेरिका और भारत को मिल कर काम करने की सलाह दी।

कैर ने कहा कि चीन और उसके सहयोगी देशों द्वारा सेंसरशिप और इंटरनेट पर जिस तरह से पकड़ बनाकर रखते हैं और उस पर तमाम पाबंदियाँ लगाते हैं, वो गलत है। यही नहीं, चीनी कंपनियाँ दूसरे देशों में काम करने के दौरान जो डाटा इकट्ठा करती हैं, उसका गलत इस्तेमाल भी हो सकता है। ऐसे में तमाम देशों को डाटा के लोकलाइजेशन पर ध्यान रखने की जरूरत है। ताकी इंटरनेट पर किसी एक देश का आधिपत्य न रके। उन्होंने चीन और उसके सहयोगी देशों की ओर से इंटरनेट पर राजनीतिक, धार्मिक वजहों से पाबंदियाँ लगाने की भी निंदा की।

भारत ने साल 2020 में लगाया था टिकटोक पर बैन

बता दें कि भारत सरकार ने साल 2020 टिकटॉक के साथ ही सैकड़ों चीनी ऐप्स पर बैन लगा दिया था। भारत सरकार ने डाटा की सुरक्षा को लेकर ये कदम उठाया था और राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन ऐप्स को बैन करने का आदेश जारी किया था। ऐसे अधिकतर ऐप्स का मालिकाना हक बाइटडांस नाम की चीनी कंपनी के पास है। भारत से काफी देर बार जून 2023 में अमेरिका ने भी ऐसा कदम उठाया और सरकारी अधिकारियों के टिकटॉक के उपयोग पर बैन लगा दिया। यही नहीं, अमेरिका ने हुआवेई और जेडटीई समेत पाँच चीनी कंपनियों से दूरसंचार उपकरणों की बिक्री और आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था। वहीं, भारत ने इन कंपनियों के सामानों की जाँच का स्तर बढ़ा दिया है।

CAA पर मुस्लिमों को किया गुमराह: अजमेर दरगाह के दीवान ने कबूला, कहा- कोर्ट के बाहर हो काशी-मथुरा का समाधान

राजस्थान के अजमेर में स्थित मुस्लिमों के लिए पाक मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के दीवान एवं सजदानशीं सैयद ज़ैनुल आबेदीन ने CAA और मथुरा-काशी को लेकर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि CAA उन लोगों के लिए है, जो दूसरे देशों से प्रताड़ित होकर भारत आते हैं और यहाँ नागरिकता के आवेदन करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि काशी और मथुरा के मंदिर के मामले को कोर्ट के बाहर आपसी बातचीत से हल कर लेना चाहिए।

जब सैयद जैनुल आबेदीन से पूछा गया कि क्या CAA कानून मुस्लिमों को खिलाफ है। इस पर सैयद जैनुल आबेदीन ने कहा, “पार्लियामेंट के अंदर होम मिनिस्टर कह रहा है भाई। मैं थोड़े कह रहा हूँ। पार्लियामेंट के अंदर सबने ये कहा है कि CAA कानून बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, म्यांमार से जो माइग्रेट होकर यहाँ आए हैं और वर्तमान में यहाँ रह रहे हैं उनके लिए है।”

उन्होंने आगे कहा, “इन देशों से आने वाले लोगों दिया गया क्या इंडियन सिटीजनशिप? नहीं दी गई। ये कानून उनके लिए ही है। हिंदुस्तान का मुसलमान डर क्यों रहा है? ये उनके लिए नहीं है। इससे सिटीजनशिप कैंसिल नहीं होती है। बस बात खत्म।” बता दें कि देश के मुस्लिमों में ये प्रोपेगेंडा फैलाई गई थी कि CAA कानून मुस्लिमों की नागरिकता खत्म करने के लिए लाई गई है।

सैयद आबेदीन ने CAA को लेकर ही नहीं, बल्कि वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर ज्ञानवापी ढाँचा विवाद तथा मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि शाही ईदगाह ढाँचे को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि काशी और मथुरा के विवाद को आपसी सहमति से दोनों पक्षों को मिलकर सुलझा लेना चाहिए। आबेदीन ने कहा कि इससे दोनों पक्षों के बीच कटुता नहीं रहेगी।

सैयद आबेदीन ने कहा, “मथुरा और काशी का विवाद अभी कोर्ट के सामने विचाराधीन है। इसलिए उसके ऊपर कोई कमेंट नहीं कर सकते। हमारा जो पुराना एक्सपीरियंस है, उसके हिसाब से हम चाहते हैं कि इस मसले का हल कोर्ट के बाहर बैठकर तय हो सकता है तो सबसे ज्यादा बेहतर है दोनों पक्षों के लिए। उससे दोनों पक्षों के अंदर कटुता भी नहीं रहेगी। अमन और शांति रहेगी।”

उन्होंने कहा, “कोर्ट के फैसले से तो जिसके पक्ष में फैसला आएगा, वह खुश होगा और जिसके हक में नहीं होगा, उसके दिल में कटुता रहेगी। तो ऐसा क्यों करना? ये देश वो पुराना नहीं है। जितने राजे-रजवाड़े, महाराजा थे, उनका एक धर्मगुरु होता था। ये धर्म के मामले में उनसे परामर्श लेकर फैसले लिया करते थे। आज जो एक नई बात पैदा की है इन्होंने कि धर्म और राजनीति….।”

धर्म और राजनीति के मिश्रण पर सैयद आबेदीन ने कहा, “गोरखपुर प्रेस सबसे ज्यादा मशहूर है इंडिया के अंदर। गीता प्रेस। उसका 1957 का एडिशन ‘श्री कल्याण’ है। बहुत मोटी बुक है। उस किताब के पेज नंबर 771 और 772 का श्लोक कहता है कि अगर राजनीति को धर्म से अलग कर दिया जाएगा तो राजनीति विधवा हो जाएगी और धर्म को राजनीति से अलग कर दिया जाएगा तो धर्म विधुर (जिसकी पत्नी की मृत्यु हो गई हो) हो जाएगा।”

18 साल के अकुल धवन को क्लब ने नहीं दी एंट्री, ठंड से ठिठुरकर चली गई जान: इस साल अमेरिका में अब तक 6 भारतीयों की अस्वभाविक मौत

वर्ष 2024 में अब तक कम से कम 8 भारतीय मूल के लोगों की अमेरिका में मौत हो चुकी है। इनमें अधिकांश छात्र थे। इनमें किसी को मार दिया गया तो कुछ की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है। अब अकुल धवन की मौत के मामले में नई जानकारी सामने आई है।

18 साल के अकुल धवन 20 जनवरी को अमेरिका के इलिनॉयस में मृत पाए गए थे। अब पता चला है कि ठंड में ठिठुरने से उनकी मौत हुई थी। रिपोर्ट में बताया गया है कि अकुल अपने दोस्तों के साथ शाम को क्लब गए थे। लेकिन उन्हें क्लब में घुसने नहीं दिया गया। इसके कारण वे बाहर ही रह गए। कुछ देर बाद अकुल को जब फ़ोन किया गया तब कोई जवाब नहीं आया। इस इलाके में बहुत ठण्ड होती है और पारा -30 तक चला जाता है। इसी ठंड में ठिठुरने के कारण अकुल की मौत हो गई। बताया गया है कि उन्हें हाइपोथर्मिया हो गया था।

अमेरिका में भारतवंशी की अस्वभाविक मौत का यह अकेला मामला नहीं है। पिछले दो माह में अमेरिका में 8 भारतीय मूल के युवकों की मौत हो चुकी है। इनमें से कुछ भारतीय नागरिक भी थे। इनमें से 7 अमेरिका के अलग-अलग कॉलेज या यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे थे और 1 मृतक टेक इंजीनियर था। जनवरी माह में अमेरिका में 5 भारतीय मूल के लोगों की मौत हुई, जबकि फरवरी में 3 लोगों की मौत हुई है। इन मामलों पर नजर डाली जाए तो पता चलता है कि इनमें से 2 की हत्या की गई थी।

15 जनवरी: जी दिनेश और निकेश की मौत

अमेरिका के कनेक्टिकट में 15 जनवरी 2024 को घर में दो भारतीय छात्रों की लाश मिली थी। इनका नाम जी दिनेश (22) और निकेश (21) था। दिनेश तेलंगाना, जबकि निकेश आंध्र प्रदेश के रहने वाले थे। दोनों एक माह पहले ही अमेरिका पढ़ने गए थे। उनकी मौत की वजह साफ नहीं है।

16 जनवरी: विवेक सैनी की हत्या

हरियाणा के भगवानपुर गाँव के रहने वाले विवेक सैनी की 16 जनवरी को अमेरिका में हत्या कर दी गई थी। वे यहाँ मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रहे थे। उनपर हमले का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया था। इससे पता चला कि हथौड़े से मार-मारकर उनकी हत्या की गई थी। हत्या करने वाला वही है, जिसकी वे सहायता करते थे।

20 जनवरी: अकुल धवन का शव मिला

भारतीय मूल के अमेरिकी अकुल धवन का शव 20 जनवरी को मिला था। वह अपने माता -पिता की मर्जी के खिलाफ इलिनॉयस यूनिवर्सिटी में पढ़ने आए थे। उनके अभिभावक अमेरिका के ही कैलिफोर्निया में रहते हैं। अब पता चला है कि उनकी मौत यह हाइपोथर्मिया से हुई थी।

29 जनवरी: नील आचार्य की मौत

भारतीय मूल के छात्र नील आचार्य का भी 29 जनवरी को अमेरिका की परड्यू यूनिवर्सिटी में शव मिला। उनकी भी मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। वह पुणे से पढ़े हुए थे और काफी होशियार थे। नील की माँ ने उनके गायब होने को लेकर सोशल मीडिया पर जानकारी दी थी। उनका शव मिलने के बाद चोट आदि के कोई निशान नहीं मिले थे।

2 फरवरी: श्रेयस रेड्डी का शव मिला

भारतीय मूल के श्रेयस रेड्डी का शव अमेरिका के ओहायो राज्य में 2 फरवरी को मिला था। बताया गया कि वह एक बिजेनस स्कूल में पढ़ते थे। उनके माता-पिता हैदराबाद में रहते हैं, लेकिन श्रेयस के पास अमेरिका का पासपोर्ट था। उनकी मौत के कारण के विषय में भी कोई जानकारी नहीं मिल सकी है।

5 फरवरी: समीर कामथ की आत्महत्या

भारतीय-अमेरिकी छात्र समीर कामथ का शव 5 फरवरी को मिला। वह इंडियाना राज्य में रहते थे। वे एक अमेरिकी नागरिक थे। वह अमेरिका की ही परड्यू यूनिवर्सिटी के छात्र थे। बताया गया कि उन्होंने खुद ही गोली मारकर आत्महत्या कर थी। वह मैकेनिकल इंजिनयरिंग के छात्र थे।

7 फरवरी: विवेक तनेजा की मौत

अमेरिका में भारतीय मूल के छात्र ही नहीं, बल्कि काम करने वाले प्रोफेशनल भी निशाने पर हैं। 2 फरवरी को विवेक तनेजा पर वाशिंगटन के एक रेस्टोरेंट में हमला हुआ था। वह इसमें बुरी तरीके से घायल हो गए थे। इसके बाद उनका इलाज चला। लेकिन, उन्हें बचाया नहीं जा सका और 7 फरवरी को उनकी मौत हो गई।

गौरतलब है कि इन सभी भारतवंशियों की मौत उस अमेरिका में हुई है जो लगातार मानवाधिकारों के नाम पर भारत को शिक्षाएँ देता रहता है। अमेरिका में जो मौतें हमलों के कारण हुई हैं, उनमें भी विशेष कार्रवाई की उम्मीद नहीं दिखती। जनवरी 2023 में भारतीय छात्रा जानवी कंडूला को एक पुलिसकर्मी ने मार दिया था। अब एक वर्ष बाद उसे एक अमेरिकी अदालत ने छोड़ दिया है। ऐसे में लोग अमेरिकी न्याय व्यवस्था विश्वास नहीं कर पा रहे हैं। साथ ही में अमेरिका में बढ़ती ड्रग्स आदि की समस्याओं ने सुरक्षा सम्बन्धी दिक्कतें भी पैदा की हैं।

‘मैं कोई मलाला नहीं… अपने भारत में सुरक्षित हूँ’ : ब्रिटेन की संसद में गरजीं कश्मीरी पत्रकार याना मीर, प्रोपेगेंडा फैलाने वालों को लताड़ा

जम्मू कश्मीर की पत्रकार याना मीर ने ब्रिटिश संसद में एक कार्यक्रम के दौरान गर्व से खुद को कश्मीर में सुरक्षित बताया। उन्होंने संसद में जो भाषण दिया वो अब सोशल मीडिया पर वायरल है। इसमें उन्होंने कहा कि वह कोई पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई नहीं है, वह अपने जम्मू-कश्मीर में सुरक्षित महसूस करती हैं।

उन्होंने कहा, “मैं मलाला यूसुफजई नहीं हूँ क्योंकि मैं आजादू हूँ, अपने देश भारत में, अपने घर कश्मीर में, जो भारत का अभिन्न अंग है। मैं यह कह सकती हूँ कि मुझे कभी भी अपने देश से भागकर आपके देश में शरण लेने की नौबत नहीं आएगी। मैं कभी भी मलाला यूसुफजई नहीं बनूँगी। लेकिन मैं मलाला द्वारा मेरे देश और मेरी प्रगतिशील मातृभूमि कश्मीर को उत्पीड़ित कहकर बदनाम करने की साजिश से आपत्ति जताती हूँ। मुझे सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के ऐसे सभी टूलकिट सदस्यों से आपत्ति है जिन्होंने कभी कश्मीर जाने की परवाह नहीं की, लेकिन उत्पीड़न की कहानियाँ गढ़ते रहते हैं।”

मीर ने कहा, “मैं आपसे अनुरोध करती हूँ कि आप मजहब के आधार पर भारतीयों को बाँटने का काम बंद कर दीजिए। हम आपको कभी भी हमें तोड़ने की इजाजत नहीं देंगे। मुझे उम्मीद है कि हमारे देश के अपराधी जो पाकिस्तान और ब्रिटेन में रहते हैं वो अंतरराष्ट्रीय मीडिया या अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मंचों पर भारत को बदनाम करना बंद करेंगे। सेलेक्टिव प्रोपगेंडा फैलाना बंद कर दीजिए। भारतीय समाज का तुष्टिकरण करना बंद कीजिए।”

इस दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मीडिया पर भी निशाना साधा। याना ने कहा- “ब्रिटेन के लिविंग रूम से रिपोर्टिंग करके भारत को बाँटने की कोशिश बंद कीजिए। आतंकवाद के कारण कश्मीर की हजारों माँ पहले ही अपने बच्चे खो चुके हैं। हमारा पीछा करना बंद कर दीजिए। कश्मीरों लोगों को शांति से जीने दीजिए। धन्यवाद। जय हिंद”

जानकारी के मुताबिक, कश्मीरी पत्रकार याना मीर ने यूके पार्लियमेंट में आयोजित ‘संकल्प दिवस’ के कार्यक्रम में अपनी बात कही। यह कार्यक्रम जम्मू कश्मीर स्टडी सेंटर, यूके (जेकेएससी) द्वारा करवाया गया था। इस कार्यक्रम में 100 से अधिक लोग थे। इनमें यूके संसद के सदस्य, स्थानीय पार्षद, सामुदायिक नेता और बहुत लोग शामिल थे। इस कार्यक्रम में याना ने जिस मलाला का नाम लेकर लिया वो एक पाकिस्तानी कार्यकर्ता हैं और उन्हें नोबेल प्राइज भी मिल चुका है। मलाला कभी पाकिस्तान के स्वात में रहती थीं। वहाँ तालिबानियों ने उनके सिर में गोली मार दी थी। ब्रिटेन में उनका लंबे तक इलाज चला और उसके बाद वह वहीं रहने लगीं।

McDonald’s के बर्गर में चीज़ की जगह सस्ता और घटिया तेल… खाते हैं तो हो जाएँ सावधान: महाराष्ट्र में जाँच, लाइसेंस रद्द

इंटरनेशनल फास्ट फूड ब्रांड मैक्डोनाल्ट्स के खिलाफ महाराष्ट्र में बड़ी कार्रवाई हुई है। जाँच में पाया गया है कि ये कंपनी चीज (Cheese) के नाम पर ग्राहकों को धोखा दे रही थी और चीज की जगह ग्राहकों को सस्ते रिफाइंड से बना ‘सब्सिट्यूट’ परोस रही थी, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। महाराष्ट्र में फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने मैक्डोनाल्ड्स के लाइसेंस को रद्द कर दिया।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, बर्गर और नगेट्स में असली चीज की जगह पर नकली चीज का इस्तेमाल करने के मामले में एफडीए ने इंटरनेशनल फास्ट-फूड कंपनी मैक्डोनाल्ड्स को निशाने पर लिया, जिसके बाद कंपनी ने अहमदनगर के अपने आउटलेट में अब मीनू से चीज शब्द ही हटा दिया है। इस मामले में एफडीए ने अहमदनगर के केडगाँव ब्राँच पर छापेमारी की थी। इस छापेमारी में नकली चीज का इस्तेमाल होते हुए मिला, जिसमें चीज की जगह पर उसके विकल्प (सब्सिट्यूट) का इस्तेमाल होता मिला।

एफडीए के कमिश्नर अभिमन्यु काले ने बताया कि मैक्डोनाल्ड्स जो काम कर रहा है, उसका लोगों पर बुरा असर पड़ता है। क्योंकि लोग चीज समझकर जो कुछ भी खा रहे हैं, वो सस्ते रिफाइंड तेल से बनाया जाने वाला सब्सिट्यूट है। इसके इस्तेमाल से एलर्जी, शुगर जैसी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को परेशानी हो सकती है। यही नहीं, मैक्डोनाल्ड्स ने अपने ‘चीज एनॉलॉग’ में भी चीज के सब्सिट्यूट के बारे में कोई जानकारी नहीं दी थी, बल्कि वो ‘चीज नगेट्स’ ‘चीजी डिप’ और ‘चीज बर्गर’ बेच तो रही थी, लेकिन ये नहीं बता रही थी कि इसमें फर्जी चीज का इस्तेमाल किया जा रहा है।

मैक्डोनाल्ड्स के खिलाफ हुई कार्रवाई की टाइमलाइन (साभार: टाइम्स ऑफ इंडिया)

इस जाँच की शुरुआत बीते साल अक्टूबर से हुई थी, जहाँ केडगाँव ब्रांड में कंपनी कम से कम 8 उत्पादों में चीज का इस्तेमाल करती है, लेकिन चीज की जगह वो उसके सब्सिट्यूट का इस्तेमाल करती है।

उन्होंने बताया कि मैक्डोनाल्ड्स चीज़ी नगेट्स, मैकचीज़ वेज बर्गर, मैकचीज़ नॉन-वेज बर्गर, कॉर्न और चीज़बर्गर, चीज़ी इटालियन वेज और ब्लूबेरी चीज़केक में पनीर के इस्तेमाल की बात कहती है, जो कि झूठ है, क्योंकि कंपनी चीज का इस्तेमाल करती ही नहीं। ऐसे में एफडीए ने उस ब्राँच को नोटिस जारी किया था। इस मामले में मैक्डोनाल्ड्स ने जो जवाब दिया, वो संतोषजनक नहीं था। ऐसे में उस ब्राँच का लाइसेंस ही रद्द कर दिया गया।

इस मामले के बाद एफडीए के कमिश्नर ने एक निर्देश जारी किया है, जिसमें सभी रेस्टोरेंट को ये बताना अनिवार्य होगा कि वो किस तरह से चीज की जगह उसका सब्सिट्यूट इस्तेमाल कर रहे हैं। यही नहीं, इस जानकारी में वसा और प्रोटीन से जुड़ी जानकारी भी देनी होगी।

ये समाचार मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में लिखा गया है। मूल समाचार को पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

‘PM पद के लिए मोदी का सपोर्ट करने पर लगाया किनारे, दी गालियाँ’: मधुर भंडारकर ने बॉलीवुड की खोली पोल, बोले- मैं प्राउड हिंदू; पूछा- राम मंदिर कैसे हुआ कम्युनल

फिल्म निर्माता मधुर भंडारकर ने कहा कि साल 2014 में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में नरेंद्र मोदी का समर्थन किया था। इसके बाद उनके दोस्तों और साथियों ने उनसे किनारा कर लिया था। उन्हें सांप्रदायिक कहना जाने लगा था। यहाँ तक कि उन्हें गालियाँ दी गईं। उन्होंने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में हर किसी की किसी ना किसी पार्टी या विचारधारा की ओर झुकाव है। कुछ लोग इसे एक्प्रेस करते हैं और कुछ लोग उसे अपने मन में रखते हैं।

दरअसल, भंडारकर मीडिया संस्थान ABP की कार्यक्रम ‘आइडिया ऑफ इंडिया’ में अपनी बात रख रहे थे। इस कार्यक्रम के एक सेशन में मधुर भंडारकर, विपुल शाह और लीना यादव को आमंत्रित किया गया था। इस दौरान इन लोगों में फिल्म इंडस्ट्री और राजनीति के साथ-साथ राम मंदिर एवं धर्मनिरपेक्षता पर अपनी-अपनी बात रखी।

इसी दौरान एक सवाल के जवाब में मधुर भंडारकर ने कहा कि उन्होंने चाँदनी बार, ट्रैफिक सिग्नल जैसी फिल्में बनाई हैं और गरीबी को करीब से दिखाया है। उन्होंने कहा कि समाज की जिम्मेदारी को उन्होंने भली-भाँति निभाया है। उनकी फिल्मों को लोग पसंद भी करते हैं। उनके हर समुदाय के दोस्त-मित्र इसकी तारीफ भी किया करते थे।

उन्होंने आगे कहा, “मेरी बहुत सैक्युलर पर्सनैलिटी है। हर धर्म के लोगों से मेरी दोस्ती है। साल 2014 में मैंने पीएम पद के लिए मिस्टर नरेंद्र मोदी जी का खुलकर समर्थन किया। अचानक मुझे रातों-रात साइडलाइन कर दिया गया। अचानक मेरी सेक्युलर आवरण झीना हो गया कि अरे ये ऐसे कैसे कर सकता है। इतनी मुझे गालियाँ पड़ीं। इतने लोगों में मुझे साइडलाइन किया।”

भंडारकर ने कहा, “जब मैं जब फिल्में बनाता था तो इन लोगों को अच्छा लगता था। मैं ऐसा व्यक्ति हूँ जो मकदूम शाह बाबा, हाजी अली, अजमेर शरीफ सब जगह जाता हूँ। मैं चर्च भी जाता हूँ। इसके साथ ही मैं प्राउड हिंदू भी हूँ। मुझे गर्व है। मैं अपने हिंदुत्व को प्यार भी करता हूँ। अचानक आपको लगा कि इसने (पीएम मोदी को) सपोर्ट कर दिया तो तो कम्युनल हो गया।”

राम मंदिर को लेकर पूछे गए एक सवाल पर भंडारकर ने कहा, राम मंदिर में क्या कम्युनल है? किसी को बुलाया गया है (प्राण प्रतिष्ठा के दौरान) और कोई वहाँ जा रहा है, तो आप उसे अलग नजरिए से नहीं देख सकते। मैं इफ्तार पार्टी में शामिल हुआ हूँ तो मुझे किसी ने कहा कि अब तुम पक्का मुस्लिम बन गए हो। मैंने क्रिश्चियन पार्टी अटेंड की है। मुझे किसी ने नहीं बोला कि अब तुम क्रिश्चियन बन गए हो।

उन्होंने आगे कहा, “ऐसा बिल्कुल नहीं है कि आप राम मंदिर में जाते हो.. आस्था है इस देश की… देश भर के लोगों का विश्वास है इसमें…. तो ये लोग चले गए राम मंदिर में तो आपको इस नजर से देखना ही नहीं चाहिए। जिनको बुलाया वो गए। उनकी आस्था थी, वो चले गए। मैं दुबई होकर आया हूँ कि BAPS स्वामीनारायण मंदिर के उद्घाटन में शामिल होेने। मुझे बुलाया गया तो मैं चला गया।”

भंडारकर ने कहा कि चीजों को अलग-अलग नजरिए से नहीं देखना चाहिए। उन्होंने कहा, “अब लोग काफी सेलेक्टिव हो गए हैं। आपने ऐसा किया तो आप कम्युनल हो गए, लेकिन उन्होंने किया तो ठीक है उनके लिए। सेक्युलर हैं वो। इंडस्ट्री में जो उनको शूट करता है तब तो ठीक है, लेकिन जो उन्हें शूट नहीं करता है उसे कम्युनल बोल देंगे।” आप इस बयान को 16:00 से 18:35 मिनट के बीच सुन सकते हैं।

वहीं, इस डिस्कशन में मौजूद विपुल शाह ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “अगर मैं अपने धर्म के लिए कहीं जाता हूँ तो मैं कम्यूनल हूँ। ये कितनी वाहियात थ्योरी है। ये एक चेंज है कि एक वातावरण बन गया था कि हिंदू कहना शर्म की बात थी। अब ऐसा माहौल बन गया है कि हिंदू कहना ‘कूल’ हो गया है।”

विपुल शाह ने आगे कहा, “इसे एक दायरे में बाँधने की कोशिश की जा रही है कि ये हाइपर हिंदूइज्म है।” उन्होंने सवाल किया, “किसी और को हक है कि वो किसी पॉलिटिकल पार्टी को सपोर्ट करे तो मुझे क्यों नहीं है।” उन्होंने साफ कहा कि अब माहौल बदल रहा है।

बंगाल में कितने संदेशखाली? खुद को झुपखाली का ‘राजा’ समझता है शेख शाहजहाँ का भाई सिराजुद्दीन, लोग बोले- वो हमें मार डालेंगे, NHRC टीम पीड़िताओं से मिलने पहुँची

पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना स्थित संदेशखाली में महिलाओं के यौन शोषण का मामला सामने आने के बाद शुक्रवार (23 फरवरी 2024) को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की टीम संदेशखाली पहुँची। ये टीम पीड़ित महिलाओं से मुलाकात करने गई है। इस बीच पता चला है कि धमाखाली के पास द्वीप के दूसरी ओ एक गाँव- झुपखाली नाम का गाँव स्थित है। वहाँ भी महिलाओं ने गुरुवार (22 फरवरी 2024) को विरोध प्रदर्शन किया था।

प्रदर्शनकारियों का दावा है कि शेख के भाई सिराजुद्दीन उर्फ राजा ने उनसे उनकी जमीनें हड़प ली हैं और उन्हें प्रताड़ित करता है। इन्हीं अत्यातारों से तंग आकर ग्रामीणों ने गुस्से में उसका विरोध किया और झोपड़ी में आग लगाकर रोष प्रकट किया।

ग्रामीणों के अनुसार, संदेशखाली के विभिन्न कोनों में शेख के ताकतवर लोग हैं। संदेशखाली में यह शिबू प्रसाद हाजरा और उत्तम सरदार हैं, तो झुपखाली में यह सिराजुद्दीन हैं। झुपखाली के स्थानीय लोगों के अनुसार, सिराजुद्दीन गाँव में अपने स्थान पर अपना ‘राज’ चलाता है और किसी की नहीं सुनी जाती।

सड़कों पर उतरी महिला प्रदर्शकारियों ने कहा, “शेख के लोगों ने उनकी जमीनें बीघा की बीघा ले ली हैं। बिना कोई कीमत चुकाए वो जमीनें उनकी हो चुकी हैं। हम कुछ कहते हैं तो वो हमारे पतियों पर हमला कर देते हैं। इलाके में सिराजुद्दीन से लोग इतने प्रताड़ित हैं कि एक आदमी तो डीआईजी के आगे घुटने पर आकर रोने भी लगा कि सिराज और उसके आदमी उन्हें बहुत प्रताड़ित करते हैं। वो हमें मार डालेंगे। प्लीज कुछ करिए।”

न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीयों ने बताया कि सिराज और उसके लोग स्थानीयों को दहशत में रखते हैं। जो उन्हें जमीन नहीं देता उन्हें परेशान किया जाता है। एक आदमी के अनुसार, उसकी दुकान में तीन बार आग लगाने की कोशिश हुई सिर्फ इसलिए क्योंकि उसने अपनी जमीन देने से मना कर दिया था।

हल्द्वानी पुलिस की रडार पर ‘हैदराबाद यूथ करेज’, दंगाइयों के परिवारों को बाँटे थे पैसे: फंडिंग की हो रही जाँच, ‘दान’ देने वालों की भी होगी पहचान

हल्द्वानी के बनभूलपुरा में दंगाइयों के परिवारों को नोटों की गड्डियाँ बाँटने के मामले में पुलिस ने जाँच करने की बात कही है। पुलिस ने कहा है कि पैसे बाँटने वाले NGO ‘हैदराबाद यूथ करेज’ की फंडिंग का पता लगाया जा रहा है। इस संबंध में अन्य एजेंसियों की भी मदद ली जा रही है। गौरतलब है कि दंगाइयों को पैसे बाँटे जाने के मामले में सबसे पहले ऑपइंडिया ने ही खबर प्रकाशित की थी।

नैनीताल पुलिस ने इस संबध में एक्स/ट्विटर पर बताया है, “सोशल मीडिया में एक वीडियो जिसमें एक युवक द्वारा बनभूलपुरा क्षेत्र में लोगों को पैसे बाँटे जाने की वीडियो प्रसारित की जा रही है। उक्त संबंध में पुलिस जाँच कर रही है। NGO के अकाउंट नंबर, रजिस्ट्रेशन नंबर, पैन नंबर से सम्बंधित सूचना आयकर विभाग एवं अन्य एजेंसियों को भी दी गई है, जिनके द्वारा आवश्यक कार्यवाही की जा रही है। हैदराबाद यूथ करेज NGO को दान देने वालों को भी चिन्हित किया जा रहा है।”

पुलिस ने बताया है, “इस NGO के अकाउंट, रजिस्ट्रेशन नंबर सीज करवाने की कार्यवाही की जा रही है। गलत तरीके से पैसा लेकर दंगाइयों का समर्थन करने, सोशल मीडिया में तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पोस्ट करने एवं भ्रामक तथ्य पोस्ट करने वालों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। अतः सभी से अनुरोध है कि इस तरह के NGO को दान ना दें।”

क्या है मामला?

मंगलवार (21 फरवरी, 2024) को हल्द्वानी के दंगाग्रस्त इलाके बनभूलपुरा इलाके की कुछ वीडियो वायरल हुई थी। इन वीडियो में दो युवक मुस्लिम घरों में जाकर पैसा बाँट रहे थे। ये युवक ‘हैदराबाद यूथ करेज’ नामक संगठन से जुड़े हुए थे। इनका नाम सलमान और अयूब है।

दोनों युवक उन मुस्लिम परिवारों को पैसा बाँट रहे थे, जिनके परिवारीजन दंगा करने के कारण पुलिस की गिरफ्त में है या फिर दंगे के दौरान हिंसा में मारे गए थे। वे महिलाओं और युवकों को नोटों की गड्डियाँ देते हुए जेल में बंद दंगाइयों को छुड़ाने की बात कह रहे रहे थे।

ये वीडियो हैदराबाद यूथ करेज नाम के पेज से सोशल मीडिया में प्रसारित किए जा रहे थे। इसको लेकर जब सोशल मीडिया पर लोगों ने प्रश्न उठाए थे तो इन युवकों को नैनीताल पुलिस ने हिरासत में लिया था। हालाँकि, इसके बाद इन्होंने एक वीडियो डाल कर बताया था कि पुलिस ने इनसे कुछ देर के लिए पूछताछ की और फिर छोड़ दिया था।

ऑपइंडिया ने बताया था कि दंगाइयों को पैसा बाँटने वाले युवकों ने हल्द्वानी में पुलिस और प्रशासन पर हुए हमले का जश्न भी मनाया था। इन्होंने इससे पहले कई ऐसे ही वीडियो बनाए थे। इनके 10 फरवरी 2024 को हल्द्वानी पहुँचने की सूचना मिली थी। इन्होंने इस सम्बन्ध में कई पोस्ट सोशल मीडिया पर की थी और नफरत फैलाने का प्रयास किया था। ये युवक मौलाना सलमान अजहरी का भी समर्थन कर चुके हैं।

हल्द्वानी दंगा

बता दें कि 8 फरवरी 2024 को हल्द्वानी के बनभूलपुरा में नगर निगम और पुलिस की अवैध रूप से बनाए गए मस्जिद और मदरसे को गिराने गई थी। इस दौरान मुस्लिम भीड़ ने पुलिस-प्रशासन पर हमला कर दिया था। पुलिस और नगर निगम के कर्मचारियों पर पत्थर बरसाए गए और उन्हें जलाकर मारने की कोशिश की गई थी।

मुस्लिम भीड़ ने कई गाड़ियों में आग लगा दी थी और कई घंटे तक हिंसा की थी। प्रशासन ने इसके बाद कर्फ्यू लगा दिया था। इस मामले में 68 दंगाई अब तक गिरफ्तार किए जा चुके हैं। दंगे का मुख्य आरोपित अब्दुल मलिक अब भी फरार है, जिसे पकड़ने की कोशिश की जा रही है।

वांटेड दंगाइयों की तलाश में पोस्टर भी शहर भर में लगाए गए हैं। इस दंगे के सरगना अब्दुल मलिक और उसके बेटे के घर को पुलिस ने कुर्क कर लिया है। ऑपइंडिया ने इस दंगे के दौरान ग्राउंड पर जाकर बताया था कि यहाँ असल में क्या हुआ था और इस्लामी भीड़ ने कैसे यहाँ हिंसा की थी।

(हल्द्वानी में पैसे बाँटने को लेकर विस्तृत रिपोर्ट यहाँ क्लिक करके पढ़ी जा सकती है।)