Home Blog Page 1151

अमेठी में लड़की के साथ रंगरेलियाँ मना रहा मौलाना गिरफ्तार, घर से मिली शक्तिवर्धक दवाएँ: छत्तीसगढ़ में जादू-टोना करने वाले मौलवी पर FIR

उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के दो अलग-अलग मामलों में एक मौलवी और मौलाना पर पुलिस ने FIR दर्ज की है। अमेठी में एक मस्जिद के मौलाना को तेज आवाज में अश्लील गाने बजाकर एक लड़की के साथ रंगरेलियाँ मनाते पकड़ा गया है। वहीं, दूसरे मामले में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक दरगाह के मौलवी पर झाड़-फूँक के नाम पर अन्धविश्वास फैलाने के आरोप में केस दर्ज हुआ है। यहाँ से लड़कियों के क्रॉस लगे चित्र भी बरामद किए गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहला मामला अमेठी के जायस थाना क्षेत्र का है। यहाँ मोजमगंज गाँव की मस्जिद में लगभग 7 साल से एक मौलाना रहता था। वो अक्सर नकाब में रहता था। उसकी गतिविधियों को देखकर गाँव के लोग उस पर नजर रख रहे थे। बुधवार (21 फरवरी 2024) की रात में एक महिला उसकी झोपड़ी में जाते हुए दिखी तो नजर गड़ाए ग्रामीणों ने उसका पीछा किया।

जब लोग झोपड़ी में पहुँचे तो वहाँ मौलाना और महिला एक बिस्तर पर दोनों आपत्तिजनक हालात में मिले। मौलाना ने मामले को रफा-दफा करने की गुजारिश की, लेकिन ग्रामीण नहीं माने। ग्रामीणों का आरोप है कि मौलाना मस्जिद के बगल वाले छप्पर में गाँव की ही एक लड़की के साथ रंगरेलियाँ मनाता था।

इसके बाद ग्रामीणों को इसकी सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही गश्त करती पुलिस टीम मस्जिद के पास पहुँची और मौलाना को गिरफ्तार कर लिया। इस दौरान लगभग 18 वर्षीया लड़की के परिजनों को भी बुलाया गया और उन्हें उनकी बेटी सौंप दी गई। ग्रामीणों का आरोप है कि मौलाना अपनी शानो-शौकत पर लाखों रुपए खर्च करता था।

इतना ही नहीं, मौलाना शक्तिवर्धक दवाएँ खाता था और वह ब्रांडेड पानी मँगवा कर पीता था। वह बाहर से लड़कियाँ मँगवाता था और उनके संग रंगरेलियाँ मनाता था। वह साल में एक से अधिक बार जलसे आदि का आयोजन करता था, जिसमें लाखों रुपए लुटाए जाते थे। आरोपित मौलाना का नाम और सही पता गाँव वालों को भी नहीं पता है।

झाड़-फूँक के नाम पर अन्धविश्वास फैलाने वाले मौलवी पर FIR

एक अन्य मामले में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में झाड़-फूँक के नाम पर समाज में अन्धविश्वास फैला रहे एक मौलवी पर पुलिस ने FIR दर्ज की है। आरोपित का नाम सादिक खान है। सादिक खान पर आरोप है कि उसने तोरवा थाना क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने एक घर को मज़हबी इबादतगाह के रूप में ढाल दिया था।

इसी जगह को वह चिल्ला मुबारकपुर दरगाह बताने लगा था। वह झाड़-फूँक के नाम पर लोगों की बड़ी-से-बड़ी बीमारियों को ठीक करने का दावा भी करता था। छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने गुरुवार (22 फरवरी 2024) को इस मामले में कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए थे।

बिलासपुर पुलिस ने बताया कि आरोपित मौलवी सादिक खान के खिलाफ टोनही अधिनियम के तहत FIR दर्ज हुई है। वह लोगों पर भूत-प्रेत का साया बताकर उन्हें गुमराह करता था। सादिक खान के ठिकानों से कई लड़कयों की फोटो भी बरामद हुई है, जिस पर क्रॉस लगा हुआ है।

नगर निगम की नोटिस मिलने के बाद फिलहाल घर में बने गुंबद को हटा दिया गया है। इसी जगह पर लगभग 65 ऐसे परिवार चिह्नित हुए हैं, जो अवैध रूप से प्रधानमंत्री योजना आवास से बने मकानों में अवैध तौर पर रह रहे थे। स्थानीय प्रशासन जाँच करके इस मामले में कार्रवाई में जुटा हुआ है।

1947 में स्वतंत्र हुआ भारत, 47 साल में बना केवल एक AIIMS: पहले वाजपेयी फिर मोदी ने PMSSY से इलाज किया सुलभ, 10 साल में 15 को मंजूरी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कल (25 फरवरी, 2024) को गुजरात के राजकोट में देश के पाँच नए AIIMS का उद्घाटन करेंगे। यहाँ से पीएम राजकोट के अलावा मंगलागिरी, बठिंडा, रायबरेली और कल्याणी AIIMS का भी उद्घाटन करेंगे। इनमें से रायबरेली को छोड़ कर बाकी का ऐलान भी पीएम मोदी ने ही किया था और अब उद्घाटन भी वही कर रहे हैं। मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान पिछली सरकारों से दोगुनी सँख्या में AIIMS बनाए हैं।

मोदी सरकार मात्र AIIMS ही नहीं बल्कि अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं को दुरुस्त करने में भी काफी सफल रही है। बीते 10 वर्षों में देश मेडिकल कॉलेज की सँख्या जहाँ दोगुनी हो चुकी है, वहीं देश का स्वास्थ्य बजट भी इस दौरान लगभग तीन गुना हो चुका है। देश में MBBS सीट की सँख्या भी इस बीच दोगुनी हुई है। इसके अलावा प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र और आयुष्मान भारत जैसी योजनाएँ भी लाई गई हैं। इन सबसे देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में बदलाव आए हैं।

पीएम मोदी ने दिए देश को 15 AIIMS

पीएम मोदी वर्ष 2014 में सत्ता में आए थे। तब देश में कुल 8 AIIMS थे। उनके कार्यकाल के लगभग 10 वर्ष बाद देश में कुल AIIMS की सँख्या 23 हो चुकी है। इनमें से अधिकांश चालू हो चुके हैं जबकि कुछ का निर्माण चल रहा है। पीएम मोदी के कार्यकाल में 2015 से ही युद्धस्तर पर AIIMS बनाने का काम चालू हो गया था।

प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (PMSSY) को दोबारा पीएम मोदी ने जीवित किया। उन्होंने अक्टूबर 2015 में एक साथ 3 AIIMS को मंजूरी दी। यह तीनों AIIMS मंगलागिरी (आंध्र प्रदेश), नागपुर और कल्याणी (पश्चिम बंगाल) में बनाए जाने थे। वर्तमान में मंगलागिरी में MBBS कक्षाएँ चल रही हैं। यह 2018 में ही चालू हो गईं थी। 25 फरवरी को प्रधानमंत्री इसमें और भी सुविधाओं के साथ इसका उद्घाटन करेंगे।

इसी तरह AIIMS नागपुर का निर्माण कार्य 2017 में चालू हुआ था। यहाँ भी वर्तमान में MBBS कक्षाएँ चल रही हैं और साथ OPD भी चालू है। पश्चिम बंगाल के कल्याणी में बनाए जाने वाले AIIMS ने भी 2019 में कक्षाएँ चालू कर दी थीं और साथ ही इसमें भी OPD एवं IPD सेवाएँ चालू हैं। राजकोट में जिन AIIMS का लोकार्पण होना है, उनमें यह कल्याणी भी शामिल है।

मोदी सरकार मात्र इतने पर ही नहीं रुकी। उसने जुलाई 2016 में AIIMS गोरखपुर और AIIMS बठिंडा को मंजूरी दी। वर्तमान में गोरखपुर और बठिंडा AIIMS कार्यरत हैं। यहाँ भी MBBS कक्षाएँ चल रही हैं और OPD सुविधाएँ मौजूद हैं। इसके बाद मई 2017 में AIIMS गुवाहाटी को मंजूरी दी गई। AIIMS गुवाहाटी उत्तरपूर्व के लोगों के लिए एक वरदान साबित हो रहा है। मणिपुर में भी एक AIIMS बनाए जाने का प्रस्ताव है।

दिसम्बर 2018 और जनवरी 2019 में मदुरई, बीबीनगर (तेलंगाना) और हिमाचल प्रदेश को AIIMS की मंजूरी सरकार ने दी। इनमें से बिलासपुर AIIMS का बीते वर्ष पीएम मोदी ने उद्घाटन किया था, AIIMS मदुरई में MBBS कक्षाएँ एक अस्थायी कैम्पस में चल रही हैं और मुख्य बिल्डिंग पर काम जारी है। बीबीनगर में MBBS और OPD सुविधाएँ मौजूद हैं।

इसके अलावा AIIMS देवघर में भी OPD, IPD और MBBS कक्षाएँ भी चालू हो चुकी हैं। चुनावी साल 2019 में 4 AIIMS (जम्मू, रेवाड़ी, अवन्तिपुराऔर राजकोट) का ऐलान किया गया। इनमें से हाल ही में पीएम मोदी ने जम्मू AIIMS का उद्घाटन किया।

उन्होंने हालिया हरियाणा दौरे में रेवाड़ी AIIMS की आधारशिला रखी और थी और 25 फरवरी को वह राजकोट AIIMS का उद्घाटन करेंगे। अवन्तिपुरा (श्रीनगर) AIIMS का काम चल रहा है और इसका निर्माण 50% पूरा हो चुका है। सितम्बर 2020 में बिहार दरभंगा में AIIMS बनाए जाने के लिए भी कैबिनेट की मंजूरी मिल गई थी।

हालाँकि, राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच इस सम्बन्ध में जमीन को लेकर सहमति नहीं बनी है। ऐसे में इसका काम अभी लटका हुआ है। हालिया राजनीतिक बदलावों से यह उम्मीद जगी है कि जल्द ही काम चालू होगा और यह धरातल पर उतरेगा। यहाँ की जनता भी इस बात को लेकर आशान्वित है।

नेहरु-इंदिरा-राजीव के दौर में एक AIIMS, वाजपेयी काल में 6

देश का पहला AIIMS दिल्ली में बनाया गया था। यह वर्ष 1956 में स्थापित हुआ था। इसकी स्थापना में बड़ा योगदान स्वास्थ्य मंत्री अमृत कौर का था, जिनकी इसमें निजी रूचि थी। इसके बाद देश के दूसरे हिस्सों में AIIMS या इनके जैसे ही बड़े अस्पताल बनाने के नाम पर कॉन्ग्रेस चुप बैठ गई। इस दौरान गाँधी-नेहरु परिवार से पीएम बनने वाले लोगों की सँख्या 3 हो गई लेकिन AIIMS की सँख्या 1 ही रही। हालाँकि, जब देश में सत्ता परिवर्तन हुआ और अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने इस पर ध्यान दिया।

2003 के 15 अगस्त को लाल किले से देश को संबोधित करते हुए वाजपेयी ने कहा था, “मैं जानता हूँ कि पिछड़े राज्यों के लोगों को अच्छे अस्पताल की कमी के कारण क्या नुकसान उठाना पड़ता है। इसलिए प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत अगले तीन वर्षों में पिछड़े राज्यों में दिल्ली के एम्स जैसी आधुनिक सुविधाओं से युक्त छह नए अस्पताल स्थापित किए जाएँगे।”

जैसा कि हम जानते हैं कि इसके बाद वाजपेयी सरकार करीब 9 महीने ही सत्ता में रही और 2004 में कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार आई। उस सरकार के दौरान उन छह एम्स का कार्य आगे बढ़ा जिनकी नींव वाजपेयी सरकार में डल गई थी। यह AIIMS जोधपुर, भोपाल, भुबनेश्वर, रायपुर, ऋषिकेश और पटना में बनाए गए।

इन पर काम कॉन्ग्रेस सरकार के दौरान चलता रहा। हालाँकि कॉन्ग्रेस सरकार ने 10 साल देश की सत्ता सँभालने के दौरान मात्र एक नया AIIMS की स्थापना करने का ऐलान किया, वह भी सोनिया गाँधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली में। इसका ऐलान भी फरवरी, 2024 में किया गया जब देश आम चुनावों की तरफ बढ़ रहा था।

AIIMS ही नहीं स्वास्थ्य के क्षेत्र में हुए और भी काम

ऐसा नहीं है कि मोदी सरकार का ध्यान मात्र AIIMS जैसे ही संस्थानों पर है। हाल ही में सरकार द्वारा जारी किया गया श्वेतपत्र बताता है कि आजादी के 67 सालों में जितने डॉक्टर तैयार करने की क्षमता देश बना पाया, उससे अधिक मोदी सरकार ने लगभग 10 वर्षों में ही बना दी। वर्ष 2014 में देश में MBBS सीटों की सँख्या 51,438 थी। वर्तमान में देश में 1.08 लाख मेडिकल सीट हैं। यानी यह बीते 10 वर्षों में दोगुनी हो गई हैं। इस दौरान देश में मेडिकल कॉलेज की सँख्या 387 से बढ़ कर 706 हो चुकी है।

बीते 10 वर्षों में देश का स्वास्थ्य बजट भी बढ़ चुका है। वर्ष 2013-14 में केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए लगभग ₹37,000 करोड़ का आवंटन किया था। 2024-25 के अंतरिम बजट में इस क्षेत्र के लिए आवंटन बढ़ा कर लगभग ₹90,000 करोड़ हो चुका है। इसके अलावा आयुष्मान कार्ड और प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र जैसी योजनाएँ भी लाई गई हैं।

UP पुलिस की परीक्षा रद्द, 6 महीने में फिर से होगी बहाली: CM योगी ने कठोर कार्रवाई का किया वादा, आरओ-एआरओ पेपर लीक की भी होगी जाँच

उत्तर प्रदेश में पुलिस परीक्षा का पेपर लीक के दावों के बीच परिक्षार्थियों के लिए राहत की खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने छात्रों की शिकायत के बाद यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा को रद्द करने का एलान किया है। छह महीने के अंदर एक बार फिर से ये परीक्षा आयोजित की जाएगी। इसके साथ ही योगी आदित्यनाथ ने आरओ-एआरओ परीक्षा की भी जाँच के आदेश दिए हैं। उस परीक्षा में भी धाँधली की शिकायतें आ रही हैं। मुख्यमंत्री योगी ने कहा है कि युवाओं की मेहनत और परीक्षा की शुचिता से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई होगी।

यूपी पुलिस की परीक्षा रद्द, 6 माह में फिर से होगी परीक्षा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परीक्षा को रद्द करने का ऐलान करते हुए एक्स पर लिखा, “उत्तर प्रदेश आरक्षी नागरिक पुलिस के पदों पर चयन के लिए आयोजित परीक्षा-2023 को निरस्त करने तथा आगामी 06 माह के भीतर ही पुन: परीक्षा कराने के आदेश दिए हैं। परीक्षाओं की शुचिता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। युवाओं की मेहनत के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दशा में बख्शे नहीं जाएंगे। ऐसे अराजक तत्वों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई होनी तय है।”

सीएम योगी ने एसटीएफ को परीक्षा लीक मामले की सख्ती से जाँच के निर्देश दिए हैं। गौरतलब है कि परीक्षा की गोपनीयता भंग करने वाले एसटीएफ की रडार पर हैं और अब तक एसटीएफ 300 से ज्यादा गिरफ्तारियाँ कर चुकी है।

आरओ-एआरओ परीक्षा की भी होगी जाँच

मुख्ममंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा 11 फरवरी 2024 को कराई गई समीक्षा अधिकारी/ सहायक समीक्षा अधिकारी (प्रारम्भिक) परीक्षा – 2023 से जुड़ी शिकायतों की भी जाँच कराने का निर्णय लिया है। जानकारी के मुताबिक, समीक्षा अधिकारी/ सहायक समीक्षा अधिकारी (प्रारम्भिक) परीक्षा – 2023 की शुचिता व पारदर्शिता के उद्देश्य में निर्णय लिया गया है कि परीक्षा के संबंध में प्राप्त शिकायतों का शासन स्तर पर परीक्षण किया जाए। इस मामले में अभ्यर्थियों से भी सहायता माँगी गई है। इसके लिए कार्मिक तथा नियुक्ति विभाग की ई-मेल आई.डी. – [email protected] पर 27 फरवरी 2024 तक मेल भेजने को कहा गया है।

बता दें कि यूपी पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा 17 और 18 फरवरी को आयोजित की गई थी। 60,244 पदों के लिए आयोजित की गई इस भर्ती परीक्षा में करीब 50 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, जबकि 48 लाख अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी। इस परीक्षा के बाद से ही शिकायतें आ रही थी कि इसके पेपर लीक हो गए थे और इस परीक्षा को रद्द करने की माँग को लेकर अभ्यर्थी प्रदर्शन भी कर रहे थे। हालाँकि अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ कर दिया है कि 17-18 फरवरी को हुई परीक्षा को पूरी तरह से रद्द कर दिया गया है, और अगले 6 माह के अंदर ही ये प्रक्रिया फिर से पूरी कर ली जाएगी।

सुखराम का दोस्त था सद्दाम, पैसे ऐंठे-रेप केस करवाया, इस्लाम कबूलने का दबाव: एयरफोर्स कर्मी के सुसाइड में नया मोड़, पीड़ित पिता ने बताया सब कुछ

एयरफोर्स में कार्यरत सुखराम जाट की आत्महत्या ने नया मोड़ ले लिया है। पीड़ित पिता के अनुसार उनके बेटे पर इस्लाम कबूलने का दबाव बनाया जा रहा था। उन्होंने अपने बेटे को प्रताड़ित करने का आरोप उसके दोस्त सद्दाम हुसैन और उसके परिजनों पर लगाया है। पीड़ित पिता की शिकायत पर पुलिस ने जाँच के लिए SIT गठित करने का फैसला किया है।

हैदराबाद में तैनात सुखराम जाट ने मंगलवार (20 फरवरी 2024) को ड्यूटी के दौरान सुसाइड कर लिया था। मूलतः राजस्थान के डीडवाना कुचामन निवासी सुखराम ने अपने कमरे में फाँसी लगा ली थी। उनके पिता आशाराम जाट ने गुरुवार (22 फरवरी 2024) को इस मामले में पुलिस से शिकायत की।

शिकायत में उन्होंने राजस्थान पुलिस के एक हेड कॉन्स्टेबल मोहम्मद सईद, उसके बेटे सद्दाम हुसैन और उसकी बहू साजिदा पर अपने बेटे को ब्लैकमेल करने और धर्मांतरण का दबाव डालने का आरोप लगाया है। कहा है कि उनके बेटे को झूठे केस में फँसाने की भी धमकी दी गई थी। आशाराम जाट ने गच्छीपुरा थाने में शिकायत दी है।

उन्होंने शिकायत में बताया है कि उनके बेटे की दोस्ती सद्दाम हुसैन से थी। सद्दाम हुसैन का अब्बा मोहमद सईद फिलहाल राजस्थान पुलिस में हेड कॉन्स्टेबल हैं। साल 2017 में सुखराम को एयरफोर्स में नौकरी मिली थी। पीड़ित पिता के अनुसार जब भी सुखराम छुट्टी पर आता तब वह सद्दाम हुसैन के ही साथ घूमता-फिरता था। आशाराम जाट का आरोप है कि सद्दाम हुसैन बेहद शातिर है और वह उनके बेटे को पैसे ऐंठने के लिए अपने घर ले जाया करता था।

नौकरी पाने के बाद सुखराम की शादी पूजा से हुई थी। शिकायत के अनुसार अगस्त 2023 में सुखराम जाट छुट्टी पर अपने गाँव आए थे। तब सद्दाम हुसैन अपनी बीवी साजिदा के साथ सुखराम के घर आया और पूरी रात वहीं रुका। बाद में सद्दाम ने सुखराम को अपने घर मकराना बुलाया। सुखराम भी अपनी पत्नी पूजा के साथ उसके घर गए थे और रात को वहीं रुके थे। आरोप है कि इसके थोड़े समय बाद सद्दाम हुसैन, उसकी बीवी साजिदा और अब्बा मोहम्मद सईद मिल कर सुखराम को हिन्दू धर्म के खिलाफ भड़काने लगे।

शिकायत में बताया गया है कि सुखराम जाट का ब्रेनवाश कर साजिदा, सद्दाम हुसैन और मोहम्मद सईद ने उसकी पूरी सैलरी भी हड़पने लगे थे। उस पर हिन्दू धर्म छोड़ इस्लाम कबूलने का दबाव बनाने लगे थे। जब सुखराम ने धर्मान्तरण से इनकार किया तो उसे झूठे केस में फँसा कर नौकरी से बर्खास्त करवाने की धमकी देने लगे। सुखराम इन धमकियों से काफी तनाव में रहने लगे थे।

पीड़ित पिता के अनुसार उनके परिचित मोतीराम जाट हैदराबाद में बिजनेस करते हैं। लगभग 2 माह पहले सुखराम हैदराबाद में मोतीराम से मिले थे। तब सुखराम ने मोतीराज को बताया था कि सद्दाम साल 2020 से लगातार उनसे पैसे ऐंठ रहा है। सुखराम ने यह भी कहा था कि पैसे न देने पर उनको झूठे केस में फँसाने की भी धमकी दी जाती है। मोतीराम ने इस मामले में बातचीत की पेशकश की तो सुखराम ने अपनी सामाजिक बदनामी का हवाला देकर उन्हें मना कर दिया था। 19 फरवरी 2024 को सद्दाम हुसैन, साजिदा बानो और मोहमद सईद ने मिल कर सुखराम के खिलाफ परबतसर थाने में FIR दर्ज करवा दी।

इस FIR में सुखराम जाट पर साजिदा बानो से बलात्कार करने का आरोप लगाया गया था। खुद पर हुए FIR की जानकारी जब सुखराम जाट को हुई तब वो अत्यधिक तनाव से आ गए। 20 फरवरी 2024 को सुखराम ने हैदराबाद स्थित अपने किराए के मकान में फाँसी लगा कर जान दे दी। अपने बेटे को मरने पर मजबूर करने का आरोप लगाते हुए आशाराम जाट ने सद्दाम हुसैन, साजिदा बानो और मोहम्मद सईद पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। ऑपइंडिया के पास शिकायत की कॉपी मौजूद है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तीनों आरोपितों पर कार्रवाई की माँग को लेकर सुखराम जाट के परिजनों ने 23 फरवरी को धरना भी दिया था। धरना सुखराम के शव के साथ दिया गया था। आरोप है कि सुखराम के परिजनों ने किशन सिंह नाम के कॉन्स्टेबल पर भी दुर्व्यवहार का आरोप लगाया था। पुलिस ने सुखराम के परिजनों को SIT गठित कर जाँच करवाने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया है। इस भरोसे के बाद सुखराम का अंतिम संस्कार हुआ। सुखराम के परिजनों से अभद्रता करने वाले सिपाही किशन सिंह को सस्पेंड कर दिया दिया गया है। वहीं मकराना थाने में तैनात आरोपित हेड कॉन्टेबल मोहम्मद सईद को APO कर दिया गया है। मामले की जाँच जारी है।

जाह्नवी कंडुला की मौत पर बरसा भारत, हिंदू समूह ने अमेरिकी रवैए पर जताई निराशा: टक्कर मारने वाले अधिकारी पर केस चलाने से किया था इनकार

अमेरिका में जाह्नवी कंडुला नाम की एक भारतीय छात्रा की हत्या कर दी गई थी। इस बीच खबर आई कि हत्याकांड को अंजाम देने वाले पुलिस अधिकारी केविन डवे पर अब कोई आपराधिक मुकदमा नहीं चलेगा। सिएटल में स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने कहा कि उसने इस मामले को स्थानीय अधिकारियों के समक्ष जोरदार ढंग से उठाया है। वहीं, अमेरिका में हिंदू एडवोकेसी समूह ने इसे निराशाजनक और चौंकाने वाला बताया।

अमेरिका हिंदू वकालत समूह ने कहा है कि यह चौंकाने वाला और निराशाजनक है कि भारतीय छात्रा जाह्नवी कंडुला की हत्या के शामिल अधिकारी के खिलाफ जाँच बिना किसी कारण के खारिज कर दी गई। साउथ लेक यूनियन में नॉर्थईस्टर्न यूनिवर्सिटी की छात्रा कंडुला की 23 जनवरी 2023 की रात को पैदल यात्री क्रॉसिंग पर अधिकारी केविन डेव ने पुलिस वाहन चढ़ा दिया था। इससे कंडुला की मौत हो गई।

इसके बाद किंग काउंटी प्रॉसिक्यूटर ऑफिस ने बुधवार (21 फरवरी, 2024) को कहा कि पर्याप्त सबूतों के अभाव में इस केस को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता है। अटॉर्नी ने एक बयान जारी कर के बताया कि जाह्नवी कंडुला की मौत दिल दहलाने वाली है और इसने किंग काउंटी और पूरी दुनिया में समुदायों को प्रभावित किया है।

ऑटर्नी का बयान आने के बाद बाद सिएटल में भारत के महावाणिज्य दूतावास ने प्रतिक्रिया दी। महावाणिज्य दूतावास ने कहा कि वह पीड़ित परिवार के साथ नियमित संपर्क में है और जाह्नवी और उसके परिवार के लिए न्याय सुनिश्चित करने में हर संभव सहायता देना जारी रखेगा।

कंसुलेट ने कहा, “हमने उचित समाधान के लिए सिएटल पुलिस सहित स्थानीय अधिकारियों के साथ भी इस मामले को जोरदार ढंग से उठाया है। मामले को अब समीक्षा के लिए सिएटल सिटी अटॉर्नी के कार्यालय में भेजा गया है। हम सिएटल पुलिस की प्रशासनिक जाँच पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं और मामले की प्रगति पर नजर रखना जारी रखेंगे।”

दरअसल, जाह्नवी कंडुला की उम्र मात्र 23 वर्ष ही थी। उनकी मौत 23 जनवरी 2023 को हुई थी, जब वो सड़क पार कर रही थीं। उसी दौरान केविन डेव के पास ड्रग्स ओवरडोज की एक फोन कॉल आ गई। घटना के समय वो 120 किलोमीटर/घंटा की रफ़्तार से गाड़ी चला रहा था। गाड़ी से टक्कर लगने पर जाह्नवी उछलकर 100 फीट दूर जा गिरी थी।

जैसे ही जाह्वनी कंडुला को पुलिस पेट्रोलिंग वाली गाड़ी की ठोकर लगी, वो 100 फ़ीट दूर उछल कर गिर गईं। मौके पर ही उनकी मौत हो गई थी। सिएटल पुलिस डिपार्टमेंट का एक बॉडीकैम वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें एक अन्य पुलिस अधिकारी डेनिएल ऑडरेर को इस मौत का मजाक बनाते हुए देखा गया था। उसने हँसते हुए कहा था कि उस लड़की की जान की कीमत कम थी।

इसके बाद अटॉर्नी ने कहा कि वाशिंगटन स्टेट लॉ के हिसाब से मामला चलाने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं। पुलिस अधिकारी की इस टिप्पणी के बाद उसे पेट्रोलिंग की ड्यूटी से हटा दिया गया था और ‘नॉन ऑपरेशनल’ कार्यों में लगा दिया गया था। जाह्नवी मूल रूप से हैदराबाद की रहने वाली थीं।

बांग्लादेश से भारत में घुसे इदरीश और साजिद, बेंगलुरु में बसा दी घुसपैठियों के लिए टेंट सिटी: NIA ने किया खुलासा, अब तक 14 गिरफ्तार

एनआईए ने बेंगलुरू में 2 बांग्लादेशी घुसपैठियों को गिरफ्तार किया है। इन लोगों ने सिस्टमैटिक तरीके से घुसपैठियों के लिए टेंट सिटी तक बसा दी। इन घुसपैठियों ने बेंगलुरू के दो अलग-अलग इलाकों में कूड़े की प्रोसेसिंग की यूनिट लगाई थी। एनआईए की कार्रवाई कई महीनों से चल रही थी। एनआईए ने बताया है कि इस गिरोह ने बांग्लादेशियों को भारत में अवैध तरीके से घुसाया और उनके लिए आधार कार्ड जैसे तमाम कागजातों को फर्जी तरीके से बनाया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एनआईए ने बांग्लादेशियों की मानव तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में दो बांग्लादेशियों को गिरफ्तार किया गया है। इनके नाम मोहम्मद साजिद हलदर और इदरिस हैं। दोनों को गुरुवार (22 फरवरी 2024) को एनआईए ने पकड़ा। अब तक इस गैंग से जुड़े 14 लोगों को एनआईए गिरफ्तार कर चुकी है।

ऐसा चलता था ये काला खेल

एनआईए ने अपने बयान में बताया, “हलदर और इदरिस दोनों बेनापोस के रास्ते भारत में घुसे थे। इसमें से हलदर ने बेंगलुरू के रामामूर्ति नगर में ‘कबाड़ संग्रहण एवं पृथक्करण’ इकाई लगाई थी और इस जगह पर बांग्लादेश से लाए गए घुसपैठियों को काम पर रखा गया था। वहीं, इदरिस ने बेंगलुरू के आनंदपुरा में ऐसी ही यूनिट लगाई थी, साथ ही लीज पर जमीन लेकर टेंट सिटी बसाई थी। इसमें 20 से अधिक बांग्लादेशी परिवारों को रखा गया था। इन परिवारों को भी तस्करी के जरिए ही भारत में लाए जाने का संदेह है, फिलहाल एनआईए इस पूरे नेटवर्क की परतें खंगाल रही है।”

एनआईए ने अपने बयान में बताया, “कर्नाटक स्थित कुछ व्यक्तियों के असम, त्रिपुरा और सीमा पार के देशों में मददगारों और तस्करों के साथ संबंध होने के बारे में विश्वसनीय जानकारी मिलने के बाद एनआईए ने 7 नवंबर, 2023 को मामला दर्ज किया था। इन संबंधों ने भारत-बांग्लादेश सीमा के माध्यम से भारत में व्यक्तियों की तस्करी में लगे तस्करों के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया था। इन आरोपितों को फर्जी आधार कार्ड बनाने और पीड़ितों को उपलब्ध कराने में भी शामिल पाया गया।”

एनआईए के मुताबिक, जाँच में उन तस्करों के नेटवर्क का खुलासा हुआ जो भारत-बांग्लादेश सीमा के रास्ते लोगों को अवैध रूप से भारत पहुँचाने के धंधे में शामिल था। जाँच में यह भी पता लगा कि गिरफ्त में आए अपराधी बांग्लादेश से आए लोगों को अवैध आधार कार्ड भी उपलब्ध कराते थे। इस मामले में एनआईए चार्जशीट भी दाखिल कर चुकी है और इस चार्जशीट से पहले ही 12 लोगों को एनआईए गिरफ्तार कर चुकी थी। कुल मिलाकर अब तक 14 लोगों को एनआईए ने गिरफ्तार किया है। एनआईए अब भी भारत-बांग्लादेश सीमा पर तस्करों के खिलाफ अपनी कार्रवाई जारी रखे हुए है।

बता दें कि अजमेर से लेकर पुणे तक बांग्लादेशी घुसपैठियों के अलग-अलग नेटवर्कों का खुलासा हुआ है। पुणे में तो बाकायता फर्जी पासपोर्ट बनाकर बांग्लादेशियों को भारतीय पहचान के साथ विदेश भेजा जाता था। यहाँ फर्जी रेंट एग्रीमेंट बनाकर ये खेल चल रहा था। उस केस में अब तक 20 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं।

दलित महिला को बनाया जबरन मुस्लिम, भूरे खान को सुप्रीम कोर्ट ने दे दी जमानत: गुजरात HC ने सबूतों के आधार पर राहत से किया था इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (23 फरवरी) को एससी/एसटी समुदाय की एक हिंदू महिला को इस्लाम में जबरन धर्मांतरित करने के मामले में गुजरात के भूरे खान को जमानत दे दी। इसके पहले गुजरात उच्च न्यायालय ने आरोपित को जमानत देने से इनकार कर दिया था। हाई कोर्ट ने प्रथम दृष्ट्या भूरे खान को इस मामले में संलिप्त पाया था और उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत पाया था। इसके आधार पर उसकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। आरोपित भूरे खान की जमानत पहले भी दो बार खारिज हो चुकी है।

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश अभय एस ओका और जस्टिस उजल्ल भुइयां की बेंच ने कहा कि इस मामले में आरोपियों के खिलाफ कई एफआईआर दर्ज हैं। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि तीसरी एफआईआर में आरोपित की पत्नी होने का दावा करने वाली शिकायतकर्ता महिला ने भूरे खान के परिवार के सदस्यों के खिलाफ भी शिकायत की है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने अपने आदेश में कहा, “प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) उस महिला की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है, जो अपीलकर्ता की पत्नी होने का दावा कर रही है। अपीलकर्ता के खिलाफ लगातार तीन एफआईआर दर्ज हैं। मौजूदा एफआईआर में उनके पूरे परिवार को फँसाया गया है।”

अदालत ने कहा, “मामले के तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अपीलकर्ता को जमानत दी जानी चाहिए। उस उद्देश्य के लिए अपीलकर्ता को आज से एक सप्ताह के भीतर ट्रायल कोर्ट के समक्ष पेश किया जाएगा। ट्रायल कोर्ट अपीलकर्ता को उचित नियमों और शर्तों पर जमानत पर रिहा करेगा।”

सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय 13 सितंबर 2023 को गुजरात उच्च न्यायालय के उस आदेश के जवाब में आया, जिसमें कहा गया था कि आरोपित को जमानत नहीं दी जाएगी। यह फैसला जस्टिस हसमुख डी सुथार ने सुनाया था। गुजरात उच्च न्यायालय के अनुसार, इस मामले की जाँच में भूरे खान को जमानत देने से इनकार करने के लिए उसके खिलाफ ‘पर्याप्त सबूत’ बताया गया था।

गुजरात उच्च न्यायालय ने यह भी कहा था कि कथित अपराध में आरोपित की प्रथम दृष्टया स्पष्ट संलिप्तता है और अगर उसे जमानत पर रिहा किया जाता है तो आरोपित सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है। गुजरात उच्च न्यायालय ने कहा था, “यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि शिकायत दर्ज करने के बाद जाँच के दौरान वर्तमान आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सामग्री है।”

उच्च न्यायालय ने आगे कहा था, “इस न्यायालय की राय है कि यदि वर्तमान अभियुक्त को जमानत पर रिहा कर दिया जाता है तो इस संभावना से इनकार किया जा सकता है कि अभियुक्त अपनी स्वतंत्रता का दुरुपयोग करेगा और अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों के गवाहों के साथ छेड़छाड़ करेगा। अपीलकर्ता का आपराधिक इतिहास है और उसके खिलाफ दो अपराध भी दर्ज हैं।”

इस मामले में अपराध पहली बार 2023 में अहमदाबाद के गोमतीपुर पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 354, 323, 294 (बी), 506 (2), 143, 147 और 114 और धारा 3 (2) के तहत दर्ज किया गया था। इसके अलावा, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 की धाराएँ भी जोड़ी गई थीं। इस आधार पर अहमदाबाद की विशेष अदालत ने भी आरोपित भूरे खान को जमानत देने से भी इनकार कर दिया था।

PM मोदी ने दुनिया की सबसे बड़ी भंडारण योजना की शुरुआत की, 500 PACS की रखी नींव: बोले- खेती-किसानी को मजबूत करने में सहकारिता की बड़ी भूमिका

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार (24 फरवरी 2024) को सहकारी क्षेत्र में दुनिया की सबसे बड़ी अनाज भंडारण परियोजना के पायलट प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया। इन गोदामों को 11 राज्यों की 11 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्सों) द्वारा संचालित किया जा रहा है। इस दौरान सहकारी क्षेत्र की अन्य कई योजनाओं का भी उद्घाटन एवं शिलान्यास किया।

बता दें कि 11 राज्यों की 11 पैक्स में विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना के तहत गोदामों का उद्घाटन एवं 500 पैक्स में गोदामों का शिलान्यास किया गया है। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि भारत मंडपम ‘विकसित भारत’ की अमृत यात्रा में एक और बड़ी उपलब्धि का साक्षी बन रहा है। सहकारिता से समृद्धि का जो संकल्प देश ने लिया है, उसे साकार करने की दिशा में आज देश आगे बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा, “आज हमने अपने किसानों के लिए दुनिया की सबसे बड़ी भंडारण योजना शुरू की है। इसके तहत देश के कोने-कोने में हजारों गोदाम और भंडारण स्थान बनाए जाएँगे। आज 18000 PACS भी कंप्यूटरीकृत हैं। इससे देश में कृषि बुनियादी ढाँचे का नया विस्तार होगा और कृषि को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जाएगा।”

सहकारिता पर प्रकाश डालते हुए पीएम मोदी ने कहा कि खेती और किसानी की नींव को मजबूत करने में सहकारिता की बहुत बड़ी भूमिका है। इसी सोच के साथ केंद्र की भाजपा ने अलग सह​कारिता मंत्रालय का गठन किया है। सहकारिता केवल व्यवस्था नहीं है, बल्कि यह एक भावना है। सहकारिता की ये भावना कई बार व्यवसायों और संसाधनों की सीमाओं से परे और आश्चर्यजनक परिणाम देती है।

कृषि क्षेत्र में बदलाव में सहकारिता की भूमिका के बारे में बताते हुए पीएम मोदी ने कहा, “सहकारिता जीवन-यापन से जुड़ी एक सामान्य व्यवस्था को बड़ी औद्योगिक क्षमता में बदल सकता है। ये देश की अर्थव्यवस्था, खासकर ग्रामीण और कृषि से जुड़ी अर्थव्यवस्था के कायाकल्प का एक प्रमाणिक तरीका है। देश में डेयरी और कृषि में सहकारिता से किसान जुड़े हैं और उनमें करोड़ों की संख्या में महिलाएँ भी हैं।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाओं की क्षमता को देखते हुए सहकारिता क्षेत्र से जुड़ी नीतियों में उन्हें प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लिए भारत की कृषि व्यवस्था का आधुनिकीकरण बेहद जरूरी है। पीएम ने कहा, “हम कृषि क्षेत्र में नई व्यवस्थाएँ बनाने के साथ ही PACS जैसी सहकारी संस्थाओं को नई भूमिकाओं के लिए तैयार कर रहे हैं।”

प्रधानमंत्री ने कृषि क्षेत्र में आवश्यक बदलावों को लेकर कहा, “हमारा देश में 10,000 किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) स्थापित करने का लक्ष्य था और मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि आज 8,000 एफपीओ पहले ही स्थापित हो चुके हैं। आज हमारे एफपीओ की सफलता की कहानियों की चर्चा देश की सीमाओं से परे भी हो रही है।”

वहीं, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि सहकारिता क्षेत्र को समय के साथ बदलना जरूरी है। इसे प्रासंगिक भी रखना होगा, इसे आधुनिक भी बनाना होगा और इसमें पारदर्शिता भी लानी होगी। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से अलग सहकारिता मंत्रालय की माँग होती रही थी, लेकिन इस माँग को किसी सरकार ने पूरा नहीं किया गया। जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने तब 70 साल पुरानी माँग को पूरा किया गया और सहकारिता मंत्रालय की स्थापना हुई।

गुजरात, दिल्ली, UP… कॉन्ग्रेस ने सेट किया सीटों का गणित, AAP को भरूच देने पर अहमद पटेल के बच्चे नाराज: फर्रुखाबाद में सलमान खुर्शीद ने दिखाए तेवर

इंडी गठबंधन में आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस के बीच सीटों का समझौता हो गया है। कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इसकी घोषणा की है। इस समझौते के तहत दिल्ली में आप-कॉन्ग्रेस ने सीटों का बंटवारा कर लिया है, तो पंजाब में सीटों ही पार्टियाँ आमने-सामने की लड़ाई लड़ेंगी। यही नहीं, गोवा और चंडीगढ़ में कॉन्ग्रेस पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी, तो गुजरात में आम आदमी पार्टी को जो सीट दी गई है, उससे कॉन्ग्रेस में ही बगावत होती नजर आ रही है।

गुजरात की भरूच सीट पर अहमद पटेल के परिवार की दावेदारी है, लेकिन ये सीट आम आदमी पार्टी को दे दी गई है, जिसकी वजह से अहमद पटेल की बेटी और बेटे नाराज हैं। कुछ ऐसा ही हाल उत्तर प्रदेश में भी दिख रहा है। उत्तर प्रदेश में फर्रुखाबाद सीट को समझौते के तहत समाजवादी पार्टी को दे दी गई है, ये सीट सलमान खुर्शीद की पारंपरिक सीट मानी जाती है। ऐसे में कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने अपनी नाराजगी खुल कर जाहिर कर दी है।

कॉन्ग्रेस-आम में सीटों का बँटवारा

बता दें कि आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस पार्टी ने लोकसभा चुनाव के लिए सीटों का बंटवारा कर लिया है। दिल्ली में दोनों पार्टियों ने सीट बाँट ली है, लेकिन पंजाब में भगवंत मान के दबाव के आगे किसी की नहीं चली। पंजाब में आम आदमी पार्टी सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगी, वहीं कॉन्ग्रेस ने भी अपनी जिद नहीं छोड़ी। ऐसे मे पंजाब की सभी सीटों पर कॉन्ग्रेस और आप के बीच फ्रेंडली फाइट होगी। वहीं, चंडीगढ़ की सीट आम आदमी पार्टी ने छोड़ दी है। इस सीट पर कॉन्ग्रेस चुनाव लड़ेगी। इन दोनों पार्टियों में गुजरात, गोवा को लेकर भी समझौता हो गया है, तो हरियाणा की सीट भी दोनों पार्टियों ने बाँट ली है।

दिल्ली में दोनों पार्टियों के नेताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सीट-शेयरिंग का ऐलान किया। कॉन्ग्रेस महासचिव और सांसद मुकुल वासनिक ने इसका ऐलान किया। उन्होंने कहा, “आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस ने दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, चंडीगढ़ और गोवा में सीटों का बंटवारा किया है। इसके तहत दिल्ली की 7 लोकसभा सीटों में से 3 पर कॉन्ग्रेस पार्टी चुनाव लड़ेगी, तो आम आदमी पार्टी 4 सीटों पर लड़ेगी। दिल्ली में आप को नई दिल्ली, पश्चिमी दिल्ली, दक्षिणी दिल्ली और पूर्वी दिल्ली की सीट दी गई है, तो कॉन्ग्रेस चाँदनी चौक, उत्तर-पूर्वी दिल्ली और उत्तर पश्चिमी दिल्ली सीट पर चुनाव लड़ेगी।”

वासनिक ने बताया ” गुजरात की 26 लोकसभा सीटों में से 24 पर कॉन्ग्रेस लड़ेगी, तो 2 सीटों पर आम आदमी पार्टी। गुजरात में भरूच और भावनगर सीटें आम आदमी पार्टी को दी गई हैं। वहीं, हरियाणा में कॉन्ग्रेस पार्टी 10 में से 9 सीटों पर लड़ेगी, तो आम आदमी पार्टी एक सीट पर चुनाव लड़ेगी। हरियाणा की कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट आम आदमी पार्टी को दी गई है। इसके अलावा चंडीगढ़ और गोवा में कॉन्ग्रेस अकेले चुनाव लड़ेगी। गोवा में जिस सीट से आम आदमी पार्टी ने उम्मीदवार की घोषणा की है, वो अपनी दावेदारी वापस ले लेगी।” हालाँकि पंजाब में दोनों ही पार्टियाँ अलग-अलग चुनाव लड़ेंगी।

इधर सीट शेयरिंग का ऐलान, उधर दिखने लगी नाराजगी

कॉन्ग्रेस पार्टी और आम आदमी पार्टी ने सीटों का बँटवारा जरूर कर लिया है, लेकिन उनकी मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। गुजरात की भरुच सीट हमेशा से अहमद पटेल के पास रही थी, लेकिन इस बार वो सीट समझौते के तहत आम आदमी पार्टी को दे दी गई है। भरुच सीट पर अहमद पटेल की बेटी मुमताज पटेल और बेटे फैसल पटेल, दोनों ही दावेदारी कर रहे थे। फैसल पटेल ने खुलेआम 22 फरवरी को ही बगावत का ऐलान कर दिया था। उन्होंने एक्स पर लिखा, “अगर अगले लोकसभा चुनाव में गठबंधन के तहत भरुच लोकसभा सीट आम आदमी पार्टी को दी जाती है, तो आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार का न तो मैं ही समर्थन करूँगा और न ही कॉन्ग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता उसका समर्थन करेंगे।”

इस बीच, अपने भाई से अलग तेवर अपना रही अहमद पटेल की बेटी मुमताज पटेल ने भी कई बार भरुच लोकसभा सीट पर अपनी दावेदारी की बात कही है। मुमताज पटेल ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। हालाँकि उन्होंने कहा है कि वो अपने पिता की 45 साल की विरासत को नहीं छोंड़ेगी। उनका आशय ये है कि वो कॉन्ग्रेस पार्टी में तो बनी रहेंगी, लेकिन दुखी मन से।

उत्तर प्रदेश में सलमान खुर्शीद नाराज

आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस के बीच सीट समझौते से पहले उत्तर प्रदेश में इंडी गठबंधन ने सीट समझौते का ऐलान किया था। कॉन्ग्रेस पार्टी और समाजवादी पार्टी ने 17-63 सीटें आपस में बाँटी थी। इसमें से एक सीट फर्रुखाबाद भी है। इस सीट को पारंपरिक तौर पर सलमान खुर्शीद की सीट और कॉन्ग्रेस का गढ़ माना जाता था, लेकिन इस सीट को समाजवादी पार्टी को दे दिया गया है। इसके बाद सलमान खुर्शीद ने अपनी नाराजगी जताई है।

सलमान खुर्शीद ने एक्स पर लिखा, “फ़र्रुख़ाबाद से मेरे रिश्तों के कितने इम्तहान का सामना करना पड़ेगा? सवाल मेरा नहीं, पर हमारे सब के मुस्तक़ाबिल का है, आने वाली नस्लों का है। क़िस्मत के फ़ैसलों के सामने कभी झुका नहीं। टूट सकता हूँ, झुकूँगा नहीं। तुम साथ देने का वादा करो, मैं नगमे सुनाता रहूँ।”

कॉन्ग्रेस ही नहीं, आप-सपा भी झेलेंगी बगावत की गर्मी!

सलमान खुर्शीद ने शायराना अंदाज में बहुत कुछ कह दिया है। अगर कॉन्ग्रेस और सपा ने उन्हें कहीं एडजस्ट नहीं किया, तो बहुत हद तक संभव है कि वो बगावत कर सकते हैं। ऐसा ही हाल भरुच सीट पर देखने को मिल सकता है। भले ही अहमद पटेल की बेटी मुमताज पटेल कॉन्ग्रेस में रहने की बात कर रही हों, लेकिन उनका दर्द और उनकी बेचैनी साफ दिखती है। वहीं, अहमद के बेटे फैसल ने तो खुलेआम कह ही दिया है कि भरुच के कॉन्ग्रेसियों को आम आदमी पार्टी का उम्मीदवार मंजूर नहीं।

यही नहीं, अभी बगावत आम आदमी पार्टी में भी हो सकती है। नॉर्थ-ईस्ट की एक लोकसभा सीट पर आम आदमी पार्टी ने जिस प्रत्याशी का ऐलान किया है, उसकी कोई खबर नहीं आ रही है। वहीं, चंडीगढ़ और गोवा में भी पार्टी में बगावत हो सकती है। रही बात पंजाब की, तो दोनों पार्टियों के आमने-सामने चुनाव लड़ने पर क्या नुकसान हो सकता है, इसका बात का पता तो लोकसभा चुनाव के नतीजों के सामने आते ही चल पाएगा।

आधी रात कोट-पैंट में आया जुबैर, 9 कारों में लगा दी आग: दलित की झुग्गी और दिव्यांग का खोखा भी जलाया, रिपोर्ट में बताया- भगवा झंडे वाले घर थे टारगेट

22 फरवरी 2024 की आधी रात उत्तर प्रदेश के आगरा की एक कॉलोनी में 9 कार धू-धू कर जलने लगी। इस मामले में पुलिस ने जुबैर को गिरफ्तार किया है। मीडिया रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उसने भगवा झंडे लगे घरों के बाहर खड़ी कारों को निशाना बनाया था।

हालाँकि जुबैर का कहना है कि वह रास्ता भटक गया था। किसी से मदद नहीं मिली तो गुस्से में आग लगा दी। पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियाँ मामले की पड़ताल कर रही हैं। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार कोट-पैंट पहनकर आगजनी करते जुबैर की करतूत सीसीटीवी में कैद है।

घटना आगरा के शाहगंज थाना क्षेत्र की है। यहाँ के मुरली विहार मोहल्ले में 22-23 फरवरी की दरम्यानी रात की रात लगभग 2 बजे अचानक लोगों के घरों के सामने खड़े वाहन धू-धू कर जलने लगे। 27 मिनट तक एक के बाद एक वाहनों में आग लगती रही, जिसे बुझाने के लिए स्थानीय लोगों के साथ पुलिस प्रशासन और फायर ब्रिगेड भी मौके पर पहुँचा। जलती कारों के टायरों के धमाके से काफी दूर तक लोगों की नींद खुल गई और अफरातफरी का माहौल बन गया। आगजनी की चपेट में प्रदीप अग्रवाल, अतुल दुबे, योगेश बघेल, बलवीर सिंह, पीसी चतुर्वेदी, चंद्रकांत उप्रेती, गजेंद्र सिंह, सुनील शर्मा और अजीत की कारें आईं।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार प्रदीप, अजीत और अतुल के घर पर भगवा झंडा लगा था। इनकी कारों को जला दिया गया। लेकिन मोहल्ले की जिस घर पर भगवा ध्वज नहीं लगा था उनकी कार सुरक्षित है। आगजनी की चपेट में एक दिव्यांग का चाय-बिस्कुट बेचने वाला खोखा भी आ गया। एक स्थानीय समाचार पोर्टल के मुताबिक जुबैर ने कारों और खोखे के अलावा राजकुमार अग्रवाल की भूसे की टाल, जयवीर सिंह के घर के आगे रखी लकड़ियों और दलित समुदाय के एक व्यक्ति की झुग्गी में भी आगजनी की थी। इस घटना के बाद लोगों ने लाइटर ले कर आगजनी कर रहे जुबैर को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया।

जुबैर मूलतः हरियाणा के पानीपत का निवासी है। वह नशे में धुत था। नशा उतरने के बाद उसने पुलिस को बताया कि वह पानीपत से अपने दोस्त से मिलने निकला था और रास्ता भटक गया। जब उसकी किसी ने मदद नहीं की तो नाराज हो कर उसने गाड़ियों में आग लगानी शुरू कर दी। जुबैर के घर में बीवी के अलावा 2 बच्चे और नाती-पोते हैं। जुबैर की बीवी ने भी बताया कि वह आगरा के खंदारी इलाके में अपने दोस्त अब्दुल रऊफ से मिलने निकला था।

अब्दुल रऊफ ने पूछताछ में बताया है कि ज़ुबैर ने टीपी नगर के ठेके पर दारू पी थी। पुलिस की पड़ताल में आरोपित के ठेके पर शराब पीने की पुष्टि हुई है। आरोप है कि जुबैर बार-बार अपना बयान भी बदल रहा है। फिलहाल लोहामंडी के ACP ने बताया है कि जुबैर पर मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गया है। उससे पूछताछ चल रही है। पुलिस आगजनी की असल वजह की पड़ताल कर रही है। इस पूछताछ में IB, ATS और LIU की टीमें भी शामिल हैं। फिलहाल अभी तक जुबैर का कोई पुराना आपराधिक इतिहास निकल कर सामने नहीं आया है।

आगजनी में जिस गरीब दिव्यांग का खोखा जल गया था, उसकी आर्थिक मदद आगरा पुलिस ने की है। पुलिस ने पीड़ित को फिर से खोखा लगाने के लिए 20 हजार रुपए आपसी सहयोग से जुटा कर दिए हैं।