मणिपुर हाई कोर्ट ने बुधवार (21 फरवरी 2024) अपना ही आदेश पलट दिया। हाई कोर्ट ने 27 मार्च 2023 के अपने ही फैसले के उस खास बिंदु को ‘डिलीट’ कर दिया है, जिसकी वजह से पूरा मणिपुर राज्य हिंसा की आग में झुलस गया था। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में सरकार को निर्देश दिए थे कि सरकार को मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने को लेकर कदम उठाने चाहिए। इसके बाद मई माह से शुरू हुई मैतेई और कुकी समुदायों के बीच हिंसा में 200 से ज्यादा लोग मारे गए थे, तो सैकड़ों लोग घायल भी हुए।
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, मणिपुर हाईकोर्ट में जस्टिस गोलमेई की पीठ ने कहा कि वो फैसला महाराष्ट्र सरकार बनाम मिलिंद एवं अन्य के मामले में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विपरीत है। महाराष्ट्र सरकार बनाम मिलिंद एवँ अन्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अदालतें अनुसचित जनजाति की सूची में संशोधन या बदलाव नहीं कर सकती। इस वजह से कोर्ट अपने पुराने फैसले में संशोधन कर रही है। पीठ ने कहा कि पिछले साल के पैराग्राफ 17(3) के तहत दिए गए निर्देशों को डिलीट किया जाना चाहिए इसलिए इसे डिलीट किया जा रहा है।
बता दें कि हाई कोर्ट ने 27 मार्च 2023 को एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) की सूची में शामिल करने के लिए केंद्र सरकार को सिफारिश भेजे। याचिका में कहा गया था कि मैतेई समुदाय ऐतिहासिक रूप से वंचित रहा है और एसटी का दर्जा उन्हें आरक्षण और अन्य लाभों का हकदार बनाएगा।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद, राज्य में मैतेई और कुकी समुदाय के बीच हिंसक झड़पें हुईं। कुकी समुदाय ने आरोप लगाया कि मैतेई समुदाय एसटी का दर्जा प्राप्त करके राज्य के राजनीतिक और सामाजिक ढाँचे को बदलने की कोशिश कर रहा है। झड़पों में 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई, तो सैकड़ों लोग घायल हो गए। इस दौरान बड़े पैमाने पर पलायन हुआ और हजारों लोगों को घर-बार छोड़ना पड़ा।
उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में लव जिहाद का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ दिलशान नाम के एक मुस्लिम लड़के ने दीपक कुमार के नाम से एक नाबालिग हिंदू युवती को झाँसा देकर उससे दोस्ती की। उसके बाद उससे प्रेम के नाम पर शारीरिक संबंध बनाया। दिलशान खुद को हिंदू दिखाने के लिए अपने हाथ में कलावा बाँधता था और माथे पर चंदन भी लगाता था।
हालाँकि, कुछ समय बाद लड़की को सच्चाई पता चली तो उसने विरोध करना शुरू कर दिया। नाबालिग के विरोध के बाद दिलशान उसे धमकाने लगा। इस तरह वह नाबालिग को लगातार प्रताड़ित करता था। आखिरकार उसकी प्रताड़ना से तंग आकर लड़की ने थाना ट्रांस यमुना में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने आरोपित दिलशान को गिरफ्तार कर लिया।
दरअसल, आगरा के ट्रांस यमुना थाना के फाउंड्री नगर की रहने वाली एक नाबालिग ने बताया कि लगभग चार साल पहले उसकी मुलाकात दिलशान से हुई थी। आरोपित टेढ़ी बगिया इस्लाम नगर का रहने वाला है। वह रोज उसका पीछा करता था। इस दौरान वह अपने हाथ में कलावा और माथे पर चंदन का टीका लगाए रहता था। एक दिन आरोपित ने नाबालिग युवती को रास्ते में रोक लिया था।
नाबालिग बालिका से अपनी पहचान छिपाकर शादी का झांसा देकर शोषण करने की सूचना पर #थाना_ट्रांसयमुना पुलिस द्वारा तत्काल अभियोग पंजीकृत कर, आरोपी को गिरफ्तार करते हुए, की जा रही वैधानिक कार्यवाही से सम्बन्धित #ACP_Hariparwat द्वारा दी गयी बाइट।#UPPolicepic.twitter.com/kaAXt512rt
उसने नाबालिग से कहा कि वह उससे प्यार करता है। इस दौरान उसने अपना नाम दीपक बताया। नाबालिग लड़की दिलशान के झाँसे में आ गई और उसके प्रेम प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। इसी तरह प्रेम प्रसंग के नाम पर दिलशान उससे बहाने से एक जगह लेकर गया और वहाँ उसने नाबालिग के साथ शारीरिक संबंध बना लिए। बाद में वह आगे भी उससे शारीरिक संबंध बनाता रहा।
इसी दौरान नाबालिग को जानकारी मिली कि जिसे वह दीपक समझ रही है, उसका असली नाम दिलशान है और वह मुस्लिम है। इसके बाद नाबालिग ने युवक पर धोखे देने का आरोप लगाते हुए उससे संबंध तोड़ लिए। इसके बाद आरोपित ने प्यार का हवाला देते हुए उससे माफी माँगी और शादी करके शहर से दूर रहने का वादा किया। नाबालिग फिर से उसकी बातों में आ गई।
इस तरह दिलशान लगभग चार सालों तक उसका शारीरिक शोषण करता रहा। इस बीच उसने लड़की की अश्लील वीडियो भी बना ली। इस बीच लड़की के घरवालों ने उसकी शादी कहीं और जगह तय कर दी। इसके बाद नाबालिग ने हालात की जानकारी देते हुए दिलशान पर शादी का दबाव बनाना शुरू कर दिया। इस आरोपित दिलशान ने घर से भागने के लिए नाबालिग से रुपए लाने के लिए कहा।
नाबालिग युवती ने आरोपित को रुपए देकर दिल्ली जाने के लिए रेल टिकट लाने को कहा। इस पर दिलशान रुपए लेकर चला गया, लेकिन वह लौटकर नहीं आया। उसके इस रवैये से नाबालिग लड़की एक बार फिर परेशान हो गई और उसने दिलशान से संबंध तोड़ते हुए परिवार की मर्जी से शादी करने की बात मान ली। परिजन उसकी शादी की तैयारी करने लगे।
इसी बीच दिलशान ने एक दिन नाबालिग को फोन किया और उसे धमकाने लगा। आरोपित ने कहा कि अगर उसे छोड़कर कहीं और शादी की तो उसका अश्लील वीडियो वायरल कर उसे बदनाम कर देगा। इसके बाद नाबालिग ने उसके खिलाफ पुलिस ने तहरीर दी। पुलिस ने तहरीर लेकर मुकदमा दर्ज कर लिया है और आरोपित युवक दिलशान को गिरफ्तार कर लिया।
इंडियन प्रीमियर लीग की सनराइजर्स हैदराबाद टीम के हरफनमौला खिलाड़ी अभिषेक शर्मा (SRH Player Abhishek Sharma) की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही है। सूरत पुलिस क्रिकेटर अभिषेक शर्मा से मॉडल तान्या सिंह डेथ केस में पूछताछ कर सकती है। पुलिस ने कहा है कि सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाड़ी अभिषेक शर्मा की मॉडल तान्या सिंह के साथ दोस्ती थी।
सूरत पुलिस के मुताबिक, तान्या सिंह के कमरे से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला था। इसकी वजह से ही यह संदेह पैदा हुआ कि क्या वाकई मॉडल ने खुदकुशी की है। पुलिस अब मॉडल तान्या सिंह की मौत की गुत्थी सुलझाने की कोशिशों में जुटी हुई है। सूरत के असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर वीआर मल्होत्रा ने कहा कि हमें अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक क्रिकेटर अभिषेक शर्मा की मृत मॉडल से दोस्ती थी। जाँच के बाद इसके बारे में और जानकारियाँ सामने आएँगी।
कॉल और डेटा रिकॉर्ड जुटा रही पुलिस
जानकारी के मुताबिक, सूरत पुलिस अब मॉडल तान्या सिंह के फोन के कॉल डिटेल रिकॉर्ड और आईपी डिटेल रिकॉर्ड डेटा जुटाने में जुट गई है। शुरुआती जाँच में पता चला है कि मॉडल ने क्रिकेटर अभिषेक शर्मा को व्हाट्सऐप चैट के जरिए तस्वीरें भेजी थी। हालाँकि, इसका अभिषेक शर्मा ने इसका जवाब नहीं दिया था। एसीपी मल्होत्रा ने कहा कि जाँच के बाद हम ऐसे लोगों को पूछताछ के लिए तलब कर सकते हैं जिनका नाम इस मामले में सामने आएगा।
बता दें कि मॉडल तानिया सिंह ने सूरत के वेसू रोड पर हैप्पी एलिगेंस अपार्टमेंट में 19 फरवरी को आत्महत्या की थी। पुलिस अभिषेक और तानिया के रिश्ते के बारे में जानना चाहती है।
हैदराबाद ने साल 2022 में मोटी रकम देकर अभिषेक को खरीदा
अभिषेक शर्मा की कप्तानी में भारत की अंडर 19 क्रिकेट टीम ने एशिया कप जीता था। इसके बाद उन्हें पृथ्वी शॉ की कप्तानी वाली अंडर 19 विश्वकप टीम में जगह मिली, जिसमें उन्होंने शानदार खेल दिखाया था। उस टीम ने अंडर 19 वर्ल्ड कप जीता था। साल 2018 के आईपीएल में दिल्ली कैपिटल्स (तब डेयरडेविल्स) ने अभिषेक शर्मा को 55 लाख रुपए में अपने साथ जोड़ा था, झिसके बाद वो सनराइजर्स हैदराबाद से जुड़ गए। साल 2022 में सनराइजर्स ने मेगा नीलामी में उन्हें 6.5 करोड़ रुपए में खरीदा।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई करते हुए कहा है कि बंगाल सरकार सिलीगुड़ी चिड़ियाघर में लाए गए शेर और शेरनी के नाम को बदले। कोर्ट ने बंगाल सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि आखिर ऐसे नामकरण क्यों करने चाहिए। दरअसल, इस जोड़े में शेर का नाम अकबर और शेरनी का नाम सीता रखा गया था। इसके खिलाफ विश्व हिन्दू परिषद (VHP) ने याचिका डाली थी।
कलकत्ता हाई कोर्ट के जज सौगत भट्टाचार्य की एक सदस्यीय बेंच ने गुरुवार (22 फरवरी 2024) को मामले की सुनवाई करते हुए बंगाल सरकार को फटकार लगाई। उन्होंने बंगाल सरकार से पूछा कि क्या वह अपने पालतू जानवर का नाम हिन्दू देवी या फिर मुस्लिम पैगम्बर के नाम पर करेंगे। दरअसल, शेरों का यह जोड़ा हाल ही में त्रिपुरा से लाया गया था। इसके बाद इनके नाम को लेकर विवाद हो गया था।
बंगाल सरकार के वकील से जज ने कहा, “वकील साहब, क्या आप स्वयं अपने पालतू जानवर का नाम किसी हिंदू भगवान या मुस्लिम पैगंबर के नाम पर रखेंगे… मुझे लगता है, अगर हम में से कोई भी होता तो उनका नाम अकबर और सीता नहीं रखता। क्या हम में से कोई रवीन्द्रनाथ टैगोर के नाम पर किसी जानवर का नाम रखने के बारे में सोच सकता है?”
कलकत्ता हाई कोर्ट के जज सौगत भट्टाचार्य ने आगे कहा, “इस देश के एक बड़े वर्ग द्वारा सीता की पूजा की जाती है… मैं शेर का नाम अकबर के नाम पर रखने का भी विरोध करता हूँ। वह एक कुशल, सफल और धर्मनिरपेक्ष मुगल सम्राट थे।” हाई कोर्ट ने बंगाल सरकार से कहा कि शेरों का नाम बिजली या फिर ऐसा ही कुछ रखा जा सकता है।
हालाँकि, बंगाल सरकार ने कोर्ट को बताया कि उसने इन शेरों को नाम नहीं दिया है। ये नाम पहले ही दिए गए थे। बंगाल सरकार की ओर से वकील ने यह भी कहा कि शेर और शेरनी के ये नाम साल 2016 और साल 2018 में त्रिपुरा में दिया गया था। इस पर हाई कोर्ट ने बंगाल सरकार के वकील से कहा कि वह इन नामों को बदलने के लिए राज्य सरकार से कहें।
इसके बाद वकील ने कहा कि वह शेर-शेरनी का नाम बदलने के लिए सरकार से कहेंगे। हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि विश्व हिन्दू परिषद की इस याचिका को जनहित याचिका माना जाए और उसके अंतर्गत सूचीबद्ध किया जाए। कोर्ट ने इस दौरान यह भी कहा कि जानवरों का नाम प्रसिद्ध हस्तियों के नाम पर रखना सही नहीं है और इससे विवाद को बढ़ावा मिलेगा।
गौरतलब है कि 16 फरवरी, 2024 को कलकत्ता हाई कोर्ट के समक्ष इस सम्बन्ध में विश्व हिन्दू परिषद याचिका डाली थी। उसने कहा था कि सिलीगुड़ी में लाए गए शेरों के इस जोड़े के नामों से हिन्दू भावनाओं को ठेस पहुँचती है और इसे बदला जाए। उन्होंने कहा था कि यह देवी देवताओं का अपमान है और सीधे तौर पर हिन्दुओं की भावनाओं पर हमला है।
उत्तर प्रदेश के आगरा में जामा मस्जिद मेट्रो स्टेशन का नाम ‘उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (UPMRC)’ ने बदल दिया है। अब आगरा के भूमिगत मेट्रो स्टेशन का नाम मनकामेश्वर मेट्रो स्टेशन हो गया है। इसे लेकर स्टेशन के बाहर बोर्ड भी दिखने लगे हैं।
इंडिया टुडे के अनुसार उनसे बात करते हुए, यूपीएमआरसी के उप महाप्रबंधक पंचानन मिश्रा ने पुष्टि की कि, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुसार, नाम पहले ही बदल दिया गया था। अब नया नाम स्टेशन पर और उसके आसपास सभी साइनेज पर दिखाई देता है।
पुरानी खबरों में बताया गया है कि पहले इस स्टेशन का नाम डॉक्टर भीम राव अंबेडकर के नाम पर रखने की भी चर्चा हुई थी। लेकिन बाद में मेट्रो स्टेशन का नाम बदलकर मनकामेश्वर मेट्रो रखा गया। दरअसल, पिछले पिछले वर्ष में सीएम योगी मेट्रो के निरीक्षण के दौरे पर आए थे। तब जामा मस्जिद मेट्रो स्टेशन का नाम बदलने का जिक्र हुआ था।
सीएम योगी के सामने उस समय कई लोगों ने माँग रखी थी कि मेट्रो स्टेशन का नाम बदलकर मनकामेश्वर मंदिर रखा जाए इसके बाद ही सीएम योगी ने इसपर विचार करके निर्णय लेने को कहा था। बाद में फैसला आया है कि मेट्रो स्टेशन का नाम मनकामेश्वर किया जाए।
Agra
Jama Masjid Metro Station has now officially been renamed as Mankameshwar Metro Station.
Respecting the sentiments of local people, CM Yogi had asked UPMRC to rename the station in July last year. pic.twitter.com/D8g9vsKKy4
आजतक की रिपोर्ट बताती है कि इस फैसले के बाद मनकामेश्वर मंदिर के महंत योगेश पुरी ने कहा इस सरकार में कई जगहों के नाम बदले गए। यहाँ सबसे महत्वपूर्ण मनकामेश्वर मंदिर ही है जिसकी स्थापना द्वापर काल में हुई थी। अकबर-शाहजहाँ तो बाद में आए। ऐसे में सीएम योगी ने मेट्रो स्टेशन का नाम बदलकर मनकामेश्वर किया ये बहुत सराहनीय है।
बता दें कि आगरा में जामा मस्जिद मेट्रो स्टेशन का नाम बदले जाने के बाद ईदगाह स्टेशन का नाम बदलने की बात भी कही जा रही है। इस संबंध में छावनी विधानसभा इलाके के बीजेपी विधायक जीएस धर्मेश ने कहा कि उनकी माँग है कि ईदगाह रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर रावली महादेव रेलवे स्टेशन हो। ईदगाह नाम से उन्हें गुलामी की याद आती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (22 जनवरी, 2024) को मेहसाणा के वालीनाथ महादेव मंदिर में पूजा अर्चना की, मंदिर का उद्घाटन किया, इसके बाद उन्होंने नवसारी में कई विकास परियोजनाओं की शुरुआत की। अमृत सिद्धि योग में पीएम मोदी ने सोमनाथ के बाद गुजरात के सबसे बड़े शिव धाम में प्राण-प्रतिष्ठा की। उँझा-विसनगर रोड पर स्थित तारभ गाँव में ये 110 फ़ीट ऊँचा मंदिर बना है। पीएम मोदी ने यहाँ 13,000 करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया और विशाल जनसभा को ही संबोधित किया।
नवसारी में पीएम मोदी ने कहा कि जब वो गुजरात में थे तो 5F की बात करते थे, जिसका मतलब था – फॉर्म, फॉर्म टू फाइबर, फाइबर टू फैक्ट्री, फैक्ट्री टू फैशन, फैशन टू फॉरेन। पीएम मोदी ने समझाया कि किसान कपास उगाएगा, कपास फैक्ट्री में जाएगा, फैक्ट्री में बने धागे से परिधान बनेंगे, यही परिधान विदेशों के लिए निर्यात होंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘पीएम मित्र पार्क’ भी इसी अभियान का हिस्सा है, नवसारी में जिस ‘पीएम मित्र पार्क’ का काम शुरू हुआ है, वो टेक्स्टाइल सेक्टर के लिए देश का पहला ऐसा पार्क है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे कपड़ा उद्योग को बल मिलेगा। कपड़ा निर्यात में भारत की हिस्सेदारी बढ़ेगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि सूरत सिल्क सिटी का विस्तार नवसारी तक हो रहा है, इस सेक्टर में दुनिया के सबसे बड़े उत्पादकों और निर्यातकों को भारत टक्कर देने लगा है और इसमें गुजरात की टेक्स्टाइल इंडस्ट्री का बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि मोदी की गारंटी वहां से शुरू होती है, जहाँ दूसरों से उम्मीद खत्म होती है। बकौल पीएम मोदी, देश के गरीब को पहली बार ये भरोसा हुआ है कि उसे पक्का घर मिलेगा, क्योंकि मोदी की गारंटी है।
उन्होंने आगे कहा कि देश के गरीब को पहली बार ये भरोसा हुआ है कि उसे कभी भूखा नहीं सोना पड़ेगा, उसे दर्द नहीं सहना पड़ेगा – क्योंकि मोदी की गारंटी है। प्रधानमंत्री ने ध्यान दिलाया कि कैसे कॉन्ग्रेस ने लंबे समय तक देश में और गुजरात में सरकार चलाई, लेकिन कभी जनजातीय क्षेत्रों, समंदर के तट पर बस गाँवों की सुध नहीं ली। पीएम मोदी ने कहा कि भाजपा ने गुजरात में उमरग्राम से लेकर अम्बाजी तक, पूरे आदिवासी पट्टे तक मूल सुविधाएँ पहुँचाने के लिए अविरत काम किया है।
प्रधानमंत्री ने कहा, “मोदी ने देश के गरीब, किसान, युवा और महिला सभी को सशक्त करने की गारंटी दी है और ये गारंटी सिर्फ योजनाएँ बनाने की नहीं है, बल्कि जो हकदार हैं उन तक योजनाओं का पूरा लाभ पहुंचाने की गारंटी है। 21वीं सदी के भारत में बिजली पैदा करने में हमारे परमाणु बिजली घरों की भूमिका और बढ़ने जा रही है। तापी के काकरापार परमाणु ऊर्जा प्लांट में दो नए रिएक्टर राष्ट्र को समर्पित किए गए हैं और ये दोनों रिएक्टर ‘मेड इन इंडिया’ टेक्नोलॉजी से तैयार किए हैं। ये दिखाता है कि आज भारत कैसे हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो रहा है।”
प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि सूरत के लोगों के लिए एक और अहम प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो रहा है, 800 करोड़ रुपए से ज्यादा राशि से बनने वाले तापी रिवर बैराज का आज शिलान्यास हुआ है। उन्होंने बताया कि ये बनने से सूरत में आने वाले कई वर्षों तक वाटर सप्लाई की समस्या का समाधान हो जाएगा। वहीं वालीनाथ मंदिर के उद्घाटन के मौके पर भी पीएम मोदी ने जम कर कॉन्ग्रेस पर निशाना साधा और उसके हिन्दू विरोधी रवैये को उजागर किया।
पीएम मोदी ने कहा, “ये वही लोग हैं, जिन्होंने सोमनाथ जैसे पावन स्थल को भी विवाद का कारण बनाया। ये वही लोग हैं, जिन्होंने पावागढ़ में धर्मध्वजा फहराने की इच्छा तक नहीं दिखाई। ये वही लोग हैं, जिन्होंने दशकों तक मोढ़ेरा के सूर्य मंदिर को भी वोटबैंक की राजनीति से जोड़कर देखा। ये वही लोग हैं, जिन्होंने भगवान राम के अस्तित्व पर भी सवाल उठाए, उनके मंदिर निर्माण को लेकर रोड़े अटकाए। और आज जब जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण हो चुका है, जब पूरा देश इससे खुश है तो भी नकारात्मकता को जीने वाले लोग नफरत का रास्ता छोड़ नहीं रहे हैं।”
अभिनेत्री तृषा कृष्णन ने AIADMK के पूर्व नेता एवी राजू को मानहानि का नोटिस भेजा है। तृषा ने माँग की है कि उन्हें एक निश्चित धनराशि चार दिनों के भीतर एवी राजू दें, वरना वह उन पर मुकदमा करेंगी। एवी राजू ने अभिनेत्री तृषा को लेकर हाल ही अपमानजनक बयान दिया था, जिसके बाद यह नोटिस भेजा गया है। तृषा ने नोटिस को अपने एक्स (पहले ट्विट्टर) हैंडल पर भी साझा किया है।
तृषा के वकीलों द्वारा भेजी गई नोटिस में कहा गया है कि एक धनराशि (जिसका खुलासा नहीं किया गया) चार दिनों के भीतर अभिनेत्री को दी जाए, क्योंकि राजू के बयान से वह लगातार मानसिक तौर से परेशान हैं। इसके अलावा, माँग की गई है कि नोटिस मिलने के बाद वह आगे से तृषा से सम्बंधित किसी भी प्रकार का कोई बयान ना दें।
लीगल नोटिस में यह भी माँग की गई है कि एवी राजू अपने खर्चे पर तृषा के खिलाफ लगाए गए आरोपों को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से हटवाएँ। एवी राजू को आरोप टीवी चैनलों, यूट्यूब तथा ट्विटर से भी हटवाने होंगे। इसके लिए जो भी खर्च आएगा, इसका वहन उन्हें खुद करना होगा। इसके साथ ही नोटिस मिलने के 24 घंटे के भीतर तृषा से माफी माँगने की बात कही गई है।
तृषा के वकीलों ने कहा है कि राजू को माफ़ीनामा एक अंग्रेजी दैनिक समाचार पत्र में भी प्रकाशित करवाना होगा। यह ऐसा समाचार पत्र होना चाहिए, जिसकी रोजाना 5 लाख प्रतियाँ बिकती हों। यही काम उन्हें एक तमिल दैनिक समाचार पत्र में भी करना होगा। यदि एवी राजू ऐसा नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ आपराधिक एवं दीवानी मुकदमा किया जाएगा और इन सबका का खर्च उन्होंने वहन करना पड़ेगा।
तृषा के अलावा AIADMK के पूर्व विधायक जी वेंकटचलम ने भी ऐसा ही एक नोटिस भेजा है। राजू ने वेंकटचलम के लिए ही तृषा को बुलाए जाने से सम्बंधित बयान दिया था। वेंकटचलम ने अपने कानूनी नोटिस में माँग की है कि 24 घंटे के भीतर राजू को माफ़ी माँगनी होगी, वरना उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
एवी राजू ने क्या कहा था?
सालेम के नेता एवी राजू को AIADMK से 17 फरवरी को निकाल दिया गया। इसके बाद पार्टी के खिलाफ उन्होंने मोर्चा खोल दिया। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अभिनेत्री तृषा पर काफी आपत्तिजनक बयान दिया। राजू ने कहा कि जब 2017 में उनकी पार्टी के भीतर विधायकों ने बगावत की थी तो इन विधायकों को कूवाथुर में स्थित गोल्डन बे रिजॉर्ट में ठहराया गया था।
उन्होंने इसी बयान में आगे कहा कि इस रिसॉर्ट में पार्टी के विधायकों के मनोरंजन के लिए कई इंतजाम हुए थे। यहाँ अभिनेत्री तृषा को भी बुलाया गया था। उन्होंने कहा कि अभिनेत्री तृषा को एक विधायक के कहने पर बुलाया गया था और उन्हें इसके लिए ₹25 लाख दिए गए थे। एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि राजू के ये आरोप AIADMK के पूर्व विधायक वेंकटचलम पर हैं।
एवी राजू ने तृषा को रिसॉर्ट में बुलाने के सम्बन्ध में कहा कि वेंकटचलम कोई ‘बेहद युवा लड़की’ चाहते थे। एवी राजू ने यह सब इंतजाम करने के आरोप एक अन्य अभिनेता पर लगाए हैं। उन्होंने कहा था कि उस दौरान 100 से अधिक विधायकों के मनोरंजन के लिए कई और अभिनेत्रियों को भी बुलाया गया थआ। उनके इस बयान पर सोशल मीडिया पर खलबली मच गई और उनकी आलोचना हो रही है।
It's disgusting to repeatedly see low lives and despicable human beings who will stoop down to any level to gain https://t.co/dcxBo5K7vL assured,necessary and severe action will be taken.Anything that needs to be said and done henceforth will be from my legal department.
तृषा ने अपने ऊपर दिए गए बयान पर एक्स पर ट्वीट कर जवाब दिया था, “मुझे यह देख कर बहुत पीड़ा होती है कि निचले और तुच्छ लोग ध्यानाकर्षण के किसी भी स्तर तक गिर सकते हैं। तुम चिंता ना करो, इस पर मैं कड़ी कार्रवाई करूँगी। जो भी कहा जाना था इस मामले में कहा जा चुका है और अब मामला कानूनी रूप से देखा जाएगा।”
कर्नाटक सरकार ने 16 फरवरी को एक आदेश जारी किया था, जिसमें सभी सरकारी स्कूलों, सरकारी दफ्तरों और सरकार द्वारा वित्तपोषित स्कूलों को अपने कामकाज से पहले राज्य के ‘राज गान’ को अनिवार्य कर दिया था। लेकिन इस मामले में बीजेपी ने हंगामा मचाया, तो सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा। अब सरकार ने नया ऑर्डर जारी किया है, जिसमें ‘सभी स्कूलों’ में राज गान को अनिवार्य कर दिया गया है। कर्नाटक सरकार ने पिछले आदेश को ‘प्रिंटिंग की गलती’ कहते हुए पलड़ा झाड़ने की कोशिश की है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कर्नाटक सरकार के कन्नड़ और संस्कृति विभाग ने 16 तारीख के आदेश में निजी स्कूलों को ‘राज गान’ के दायरे से बाहर रखा था। जिसमें कर्नाटक सरकार ने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा था कि केवल सरकारी स्कूलों को स्कूल असेंबली के दौरान कुवेम्पु द्वारा लिखित राज्य गान- ‘जया भारत जननिया थानुजथे’ गाने के नियम का पालन करना अनिवार्य होगा।
कर्नाटक सरकार का 16 फरवरी 2024 का आदेश
हालाँकि अब बुधवार (21 फरवरी) को एक नया सरकारी आदेश आया है। इसके बाद कन्नड़ और संस्कृति मंत्री शिवराज तंगदागी इसे “प्रिंटिंग की गलती” कहा है। उन्होंने कहा कि निजी स्कूलों सहित सभी स्कूलों को स्कूल असेंबली के दौरान अनिवार्य रूप से राज्य गान गाने का निर्देश देने के लिए आदेश में सुधार किया जाएगा।
इस मामले में राज्य के कानून मंत्री एचके पाटिल ने कहा कि जिन लोगों ने आदेश को तैयार करने में गलती की, उन्हें इसकी सजा भुगतनी पड़ेगी। अब सरकार द्वारा जारी किए गए ताजे आदेश में सरकारी, निजी, सहायता प्राप्त और गैर सहायता प्राप्त समेत सभी स्कूलों को शामिल कर लिया गया है।
सरकार ने ये बदलाव तब किया, जब इस मामले को बीजेपी के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक विधानसभा में नेता विपक्ष आर अशोक ने उठाया। उन्होंने सरकार से सवाल पूछा कि 16 फरवरी के पहले सरकारी आदेश में कर्नाटक के राजगान ‘जय भारत जननिया थानुजथे’ जिसे कुवेम्पु ने लिखा है, को निजी स्कूलों में गाने से छूट क्यों दी गई थी? उन्होंने पूछा कि सरकार की इसके पीछे की मंशा क्या थी? क्या ये निजी स्कूल शिक्षा विभाग के दायरे में नहीं आते हैं?” बता दें कि कुवेम्पु को राष्ट्रकवि कहा जाता है और उनका पूरा नाम कुप्पलि वेंकटप्पा पुत्तपा है। साल 2004 में कर्नाचट सरकार ने इस गीत को राजगीत का दर्जा दिया था।
कुवेम्पु के नारे को भी बदलने की कोशिश?
कर्नाटक के सरकारी स्कूलों के द्वार पर लिखा रहता है, “This is a temple of knowledge, come inside with folded hands” लेकिन पिछले कुछ दिनों में इसे बदलकर “This is the temple of knowledge, ask boldly” कर दिया गया है। बीजेपी के कर्नाटक प्रदेश अध्यक्ष और शिकारीपुरा से विधायक बी वाई विजयेंद्र ने सरकार पर इस मामले को लेकर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि कर्नाटक सरकार ‘तुष्टिकरण की राजनीति’ कर रही है। उन्होंने इसे कवि कुवेम्पु का अपमान बताया है।
पश्चिम बंगाल के संदेशखाली के रण में अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एंट्री हो सकती है। बताया जा रहा है कि वो खुद पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना में स्थित इस इलाके में पहुँच कर पीड़िताओं से मुलाकात कर सकते हैं। बता दें कि संदेशखाली में राज्य की सत्ताधारी पार्टी TMC (तृणमूल कॉन्ग्रेस) नेता शाहजहाँ शेख, उसके शागिर्दों शिबू हाजरा व उत्तम सरकार और इनके गुर्गों द्वारा कई महिलाओं के यौन शोषण के आरोप लगे हैं। ‘राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST)’ भी एक्शन में है।
गुरुवार (22 फरवरी, 2024) की सुबह NCST की टीम संदेशखाली पहुँची। जनजाति आयोग के समक्ष 23 महिलाओं ने शिकायत दर्ज कराई है। स्थानीय लोगों से बात कर के आयोग को प्रताड़ना से लेकर जमीन कब्जाने तक की 23 शिकायतें मिलीं। NCST के कार्यवाहक उपाध्यक्ष अनंता नायक ने कहा कि एक नेता के खिलाफ भी शिकायतें मिली हैं। आयोग राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को रिपोर्ट सौंपेगा। इससे पहले ‘राष्ट्रीय महिला आयोग’ (NCW) और ‘राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग’ (NCSC) भी इलाके का दौरा कर चुका है।
हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघन के कई मामलों की जाँच चल रही है। शाहजहाँ शेख पिछले एक महीने से फरार है। राशन घोटाले में उसे पकड़ने गई ED की टीम पर हमला हुआ। बता दें कि 6 मार्च, 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बारासात में महिला रैली प्रस्तावित है। बता दें कि बारासात भी नॉर्थ 24 परगना जिले में ही स्थित है। पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष एवं बालुरघाट से सांसद डॉ सुकांता मजूमदार ने कहा कि वो पीड़िताओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलवाने में पार्टी मदद करेगी।
उन्होंने कहा कि अगर संदेशखाली की माँएँ-बहनें पीएम मोदी से मिलना चाहती हैं तो हम इसमें उनकी मदद करेंगे। BJP ने संदेशखाली में यौन शोषण की घटनाओं को उजागर करते हुए एक डॉक्यूमेंट्री भी जारी की है। 20 मिनट की डॉक्यूमेंट्री में पीड़िताओं ने अपने अनुभव साझा किए हैं। इस मामले की रिपोर्टिंग करने पर ‘रिपब्लिक बांग्ला’ के पत्रकार सन्तु पान को गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन कलकत्ता हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी। भाजपा ने कहा कि सच हिला कर रख देने वाला है।
उधर संदेशखाली में स्थानीय लोगों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है। आक्रोशित लोगों ने रामपुर में मुख्य आरोपित शाहजहाँ शेख के भाई के मछली पालन वाले ठिकाने पर हमला कर के उसे आग के हवाले कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि TMC नेता शाहजहाँ शेख के भाई सिराजुद्दीन ने ये जमीन जनजातीय समाज से हड़पी है, जबरन कब्ज़ा किया है। शिबू हाजरा जहाँ ब्लॉक प्रमुख है, वहीं उत्तम सरकार टीएमसी का क्षेत्रीय अध्यक्ष था। शाहजहाँ शेख को बचाने के आरोप ममता बनर्जी की सरकार पर लग रहे हैं।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) मुखिया अरविंद केजरीवाल को दिल्ली शराब घोटाला मामले में सातवाँ समन भेजा है। ED ने उनसे 26 फरवरी, 2024 को पेश होने को कहा है। CM केजरीवाल से पूछताछ के लिए ED पूर्व में 6 बार समन भेज चुकी है। लेकिन, केजरीवाल ED के सामने पेश होने से बचते आए हैं।
इससे पहले ED ने 14 फरवरी को समन जारी करके केजरीवाल से 19 फरवरी को पेश होने के लिए कहा था। हालाँकि, केजरीवाल ने ईडी के सामने पेश होने के बजाय दिल्ली विधानसभा में खुद ही विश्वास मत लाकर बहुमत सिद्ध कर दिया था और ED की पूछताछ में नहीं गए थे। उससे पहले भी जाँच एजेंसी कई बार AAP प्रमुख को पेश होने के लिए समन भेज चुकी थी लेकिन वह हर बार इससे बचते रहे। उनके पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने तो इस समन को राजनीतिक समन बता दिया है।
दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, “इससे पहले भी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने समन को लेकर अदालत का रुख किया था और कहा कि अब अदालत इस पर गौर करेगी। हम अदालत का सम्मान करते हैं। अरविंद केजरीवाल ने बता दिया है कि बजट सत्र चल रहा है और उन्हें 16 मार्च तक का समय चाहिए। अदालत ने भी इसकी अनुमति दे दी। अब फिर से ईडी ने समन जारी किया। अगर एजेंसी को अपनी शर्तों का पालन करना था तो पहले अदालत में क्यों गए? हम अदालत में नहीं गए, लेकिन ईडी गई।”
अब देखना होगा कि दिल्ली सीएम सातवें समन के बाद जाँच एजेंसी के आगे पेश होते हैं या फिर कोई अन्य कारण देकर पेश होने से मना कर देते हैं। पिछली बार जब अरविंद केजरीवाल पेश नहीं हुए तो ईडी ने दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इसके बाद कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल को 17 फरवरी 2024 को कोर्ट में पेश होने के लिए कहा था।
उससे पहले ED ने 3 फरवरी, 2024 को कोर्ट का रास्ता अरविंद केजरीवाल के कई बार पेश ना होने से आजिज आकर अपनाया था। केंद्रीय एजेंसी ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर आम जनता के समक्ष गलत उदहारण पेश करने का आरोप लगाया था।
बता दें कि अरविंद केजरीवाल अलग-अलग समय पर अलग-अलग बहाना ED से बचने के लिए अपनाते आए हैं। ईडी ने नवम्बर 2023 में जब केजरीवाल को समन भेजा गया था तो उन्होंने कहा था कि वह मध्य प्रदेश चुनाव प्रचार के लिए जा रहे हैं। हालाँकि, उनकी पार्टी मध्य प्रदेश में 90% सीट पर अपनी जमानत नहीं बचा पाई थी। इसके बाद दिसम्बर में जब उन्हें जाँच एजेंसी ने बुलाया तो उन्होंने कहा कि वे विपश्यना के लिए पंजाब जा रहे हैं। इसलिए वे नहीं आ सकते।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ईडी द्वारा भेजे गए समन को राजनीतिक साजिश बताते आए हैं। वह यह भी सवाल करते रहे हैं कि एक मुख्यमंत्री को ईडी किस हैसियत से पूछताछ के लिए बुला रही है। अरविंद केजरीवाल कहते रहे हैं कि उन्हें गिरफ्तार करने की साजिश की जा रही है, ताकि वे लोकसभा चुनावों में अपनी पार्टी AAP के लिए चुनाव प्रचार ना कर सकें।
गौरतलब है कि केजरीवाल से पहले झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी ED से बचते आए थे। ED उन्हें 10 बार पूछताछ के लिए बुला चुकी थी। वह भी इन समन के पीछे राजनीतिक साजिश बता रहे थे। हालाँकि, 31 जनवरी को जब उनसे ED ने पूछताछ की तो उन्होंने इसके बाद इस्तीफ़ा दे दिया। ED ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था।