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‘मर्द पॉलीथिन की तरह’: ट्विंकल खन्ना के ‘फेमिनिज्म’ को कंगना रनौत की लताड़, बोलीं – थाली में मिला करियर फिर भी कुछ नहीं कर पाई

अक्सर अपनी बेबाकी के कारण मीडिया पर चर्चा में रहने वाली बॉलीवुड कंगना रनौत ने इस बार ट्विंकल खन्ना को आड़े हाथों लिया है। कंगना ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरीज पर ट्विंकल के पुराने वीडियो साझा किए हैं जिसमें वह नारीवाद पर बात करते हुए कहती हैं कि उन्हें नहीं लगता कि पुरुषों का कोई इस्तेमाल है। ये बिलकुल ऐसा है जैसे आपके पास हैंडबैग या प्लास्टिक बैग है। आप उसमें अपनी चीजें रख रहे हो।

कंगना ने अब ट्विंकल को उनके इस बयान पर खूब सुनाया है। कंगना ने ट्विंकल खन्ना को नेपो किड बताते हुए उनको इस वीडियो पर जवाब दिया। कंगना ने पुरानी ट्विंकल की पुरानी वीडियो की क्लिप को शेयर करते हुए लिखा,

“आखिर ये विशेषाधिकार प्राप्त लोग क्या हैं, जो अपने पतियों को पॉलीथिन बैग कहते हैं। क्या ये कूल दिखने की कोशिश कर रहे हैं? चांदी की चम्मच के साथ पैदा हुए नेपो किड्स को सोने की थाली में फिल्मी करियर दिया गया, लेकिन वो इसके साथ न्याय नहीं कर सके। कम से कम वो मातृत्व की निस्वार्थता में ही कुछ खुशी और पूर्णता तलाश लेते। लेकिन यह भी उनके लिए एक अभिशाप की तरह है। वो सच में क्या बनना चाहते हैं? सब्जियाँ? क्या यह फेमिनिज्म है?”

फोटो साभार: कंगना का इंस्टा अकॉउंट

बता दें कि ट्विंटल खन्ना की यह वीडियो पुरानी है। उन्होंने एल्जेब्रा कन्वर्सेशन से बात करते हुए कहा था कि उनका शादी को लेकर अलग मानना है। लोगों को लगता है कि शादी में दो लोगों को एक तरह से एक दिशा में साथ-साथ रहना होगा। उनकी कहती हैं कि अगर यही सब है तो महिलाओं को फिर वोट देने का अधिकार ही क्यों है।

इसी बातचीत में उनसे सवाल हुआ कि जब वो कहती हैं कि वो नारीवादी हैं तब इससे उनका क्या मतलब होता है। इस पर ट्विंकल ने कहा था कि उन्होंने ये चीज अपनी माँ से सीखी है कि आपको पुरुषों की जरूरत नहीं है।

ट्विंकल ने कहा था,

“मैंने कभी भी फेमिनिज्म या बराबरी या फिर किसी भी चीज के बारे में कभी नहीं बोला। लेकिन यह बिल्कुल क्लियर था कि किसी पुरुष की कोई आवश्यकता नहीं थी। एक पुरुष का होना बहुत अच्छा होगा, जैसे आपके पास एक अच्छा हैंडबैग है। पर, अगर आपके पास एक प्लास्टिक बैग भी हो तो भी यह चलेगा। ये सिर्फ ऐसा है कि आप अपनी चीजें उसमें डालते रहते हैं। इसलिए मैं उस धारणा के साथ बड़ी हुई और लंबे समय तक मुझे लगा कि पुरुषों का कोई खास उपयोग नहीं है।”

‘मेरी संतुष्टि के लिए अपने शरीर को हवाले कर दो’: नाबालिग छात्राओं का यौन शोषण करता था केरल का कराटे शिक्षक सिद्दीकी अली, होठों पर लेता था चुंबन

केरल में यौन शोषण की शिकार एक नाबालिग छात्रा का शव नदी से बरामद हुआ है। सिद्दीकी अली नाम के एक कराटे शिक्षक पर छात्रा का यौन शोषण करने का आरोप है। सिद्दीकी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। बताया जा रहा है कि सिद्दीकी छात्राओं को उलटी-सीधी बातें बताकर उनका यौन शोषण करता था। इस पर पहले से ही POCSO के दो मामले दर्ज हैं।

जानकारी के अनुसार, मलप्पुरम के वझक्कड़ थाना इलाके में सोमवार (19 फरवरी 2024) को एक 17 साल की एक नाबालिग लड़की का शव चेलियार नदी में मिला था। छात्रा यहीं एक कराटे शिक्षक के पास पिछले तीन वर्षों से कराटे सीखने जाती थी। शिक्षक का नाम वी सिद्दीकी अली है और वह 43 साल का है। नाबालिग का जब शव मिला तो उसके शरीर से कुछ कपड़े भी गायब भी थे।

नाबालिग के परिजनों ने आरोप लगाया कि लड़की ने आत्महत्या नहीं की है, बल्कि उसकी हत्या की गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना वाले दिन कुछ लोगों ने उस जगह के पास दो अजनबी लोगों को देखा था, जहाँ शव मिला था। पीड़ित परिवार द्वारा दर्ज की गई शिकायत के अनुसार, जब पड़ोसियों ने उन दोनों से संपर्क करने की कोशिश की तो दोनों ने अपना चेहरा दिखाए बिना वहाँ से चले गए।

परिवार ने कहना है कि इस आधार पर संदेह होता है। परिजनों का कहना है कि जिस हालत में शव मिला था, उससे ऐसा नहीं लग रहा कि उसने आत्महत्या की है। उनका कहना है कि छात्रा पढ़ने में बहुत अच्छी थी और कराटे भी सीखती थी। उसका लंबे समय से यौन शोषण हो रहा था, लेकिन वह इस मामले में लड़ने को लेकर प्रतिबद्ध थी।

मृतक की बहनों ने बताया कि सिद्दीकी अली और भी बच्चों का शोषण कर चुका है और उस पर पहले ही POCSO के दो मामले दर्ज हैं। उन्होंने कहा कि सिद्दीकी अली ने 15 सितम्बर 2023 को उनकी बहन का यौन शोषण किया था। इसके बाद पता चला कि वह ऐसा तीन वर्ष से कर रहा था। बच्ची ने इसके कारण स्कूल जाना भी छोड़ दिया था, जबकि 10वीं में उसके बहुत अच्छे नम्बर आए थे।

इसके बाद उसने इस मामले में शिकायत भी दर्ज करवाई थी। सिद्दीकी अली और भी लड़कियों के साथ ऐसा करता था। वह कराटे सिखाने के नाम पर लड़कियों के शरीर को गलत तरीके और नीयत से छूता था। वह अपने पास कराटे सीखने आए बच्चों को बताता था कि वह उनका गुरु और भगवान होता है। इसलिए उसकी संतुष्टि के लिए वे सभी अपने आप को उसके हवाले कर दें।

वह कहता था कि वह अपने शिष्यों की छाती छूकर बता सकता है कि वह उसी के जरिए सफल होंगे। वह बड़े बच्चों के ऊपर लेटकर आराम करता था और साथ ही कुछ लड़कियों के होठों पर चुम्बन भी लेता था। उसकी इन हरकतों से ही नाबालिग परेशान थी। बाद में नदी में उसका शव मिला। इस मामले में सिद्दीकी पर POCSO के तहत मामला दर्ज करके उसे गिरफ्तार किया गया है।

ऐतिहासिक ‘बागपत चाट युद्ध’ के 3 साल पूरे: ‘आइंस्टीन चचा’ के व्यापार बदलने से भी दुखी हैं लोग, सोशल मीडिया पर ‘योद्धाओं’ को किया जा रहा नमन

ऐतिहासिक ‘बागपत चाट युद्ध’ के 3 साल पूरे हो गए हैं, जिसके बाद लोग एक बार फिर से उसके वीडियो शेयर कर रहे हैं। खासकर के ‘आइंस्टीन चाचा’ को लोग जम कर याद कर रहे हैं। बता दें कि इस युद्ध में किसी की हार-जीत नहीं हुई थी, बल्कि लोगों का मनोरंजन हुआ था। बाद में सभी ‘योद्धाओं’ को पकड़ कर पुलिस ने लॉकअप में डाला था, जिसके बाद उनकी तस्वीरें सामने आई थीं। 22 फरवरी, 2021 को चाट के ठेलों को लेकर हुई इस मारपीट में दोनों पक्षों के लोग घायल हुए थे।

वायरल वीडियो के साथ लोग करामात भी कर रहे हैं। एक शख्स ने वीडियो में लाठी-डंडों को चमकते हुए दिव्यास्त्रों की तरह दिखा दिया। बड़ौत कोतवाली क्षेत्र के मेन बाजार में ये मारपीट इसीलिए हुई थी, क्योंकि एक चाट दुकानदार के ग्राहक को दूसरे ने अपने पास बुला लिया था। अब आइंस्टीन हेयरस्टाइल वाले चाचा ने अपने बाल कटा लिए हैं और कपड़ों की दुकान भी खोल ली है। लोग न सिर्फ उनकी दुकान से शॉपिंग करते हैं, बल्कि उनके साथ सेल्फी भी लेते हैं।

वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे दोनों पक्ष एक-दूसरे के लोगों को जमीन पर गिरा-गिरा कर पीट रहे हैं। पुलिस ने करीब दर्जन भर लोगों को हिरासत में भी लिया था। आइंस्टीन चाचा की फूली हुई आँख और बिखरे हुए लाल बालों को भला कौन भूल सकता है। उनका असली नाम हरेंद्र सिंह है। लड़के-लड़कियाँ इतनी सेल्फी लेते थे और दुकान में भीड़ जुट जाती थी कि उन्होंने अपने बाल अब छोटे-छोटे बड़ौत कोतवाली क्षेत्र के मेन बाजार में बड़ौत कोतवाली क्षेत्र के मेन बाजार में करा लिए हैं। लोग अब इसे ‘मानव जाति के इतिहास की पौराणिक लड़ाई’ बता कर तीसरी बरसी पर शुभकामनाएँ दे रहे हैं, तो कोई दुःख व्यक्त कर रहा है।

कुछ लोगों ने यहाँ तक लिखा कि आने वाली पीढ़ियाँ भी ‘बागपत के ऐतिहासिक चाट युद्ध’ से प्रेरणा लेगी। ‘आइंस्टीन चाचा’ हरेंद्र सिंह ने चाट के ठेले में नुकसान के बाद अपना व्यापार बदलने का फैसला लिया था। मीडिया वाले हरेंद्र सिंह का इंटरव्यू लेने पहुँचते थे और वो बागपत में किसी सेलेब्रिटी की तरह फेमस हो गए थे। लोगों ने इस पर भी अफ़सोस जताया कि अब ‘आइंस्टीन चाचा’ चाट के बिजनेस में नहीं रहे, इसीलिए अब वहाँ कोई ‘चाट युद्ध’ नहीं होगा।

आंध्र प्रदेश में अजब-गजब चुनाव प्रचार: कंडोम के पैकेट पर पार्टी निशान छापकर बाँट रही TDP-YSRCP, एक-दूसरे से लड़ाई भी कर रहीं

चुनाव प्रचार के दौरान राजनीतिक पार्टियाँ बड़े-बड़े वादे करती हैं। कोई साइकिल देने की बात करती है, तो कोई सिलाई मशीन। कोई मोटरसाइकिल का वादा करता है, तो कोई हर महीने हजारों रुपए का। लेकिन आंध्र प्रदेश में चुनाव प्रचार से जुड़ी एक अनोखी खबर सामने आई है। आंध्र प्रदेश में YSR कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) और तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) दोनों ही कंडोम पैकेट पर अपने पार्टी चिह्न छापकर बाँट रही हैं। खास बात ये है कि दोनों पार्टियाँ ट्विटर पर इस मुद्दे पर लड़ भी रही हैं।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में एक व्यक्ति कंडोम बाँट रहा है। जिस पर वाईएसआरसीपी पार्टी का चुनाव निशान छपा है। यही नहीं, इन कंडोम पैकेट पर मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी की तस्वीर और पार्टी का चुनावी नारा “नवरात्नालु – आपके कल्याण के लिए” छपा है। पार्टी का दावा है कि यह पहल जनसंख्या नियंत्रण और सुरक्षित यौन संबंधों को बढ़ावा देने के लिए है।

खास बात ये है कि जगन मोहन रेड्डी की पार्टी तो खुद कंडोम बाँट रही है, तो दूसरी तरफ वो टीडीपी पर भी आरोप लगा रही है। इस बारे में वाईएसआरसीपी पार्टी ने पोस्ट भी किया है। उसने एक वीडियो शेयर कर टीडीपी पर हमला बोला है। जगन मोहन रेड्डी की पार्टी ने अपने कैप्शन में लिखा है, “क्या ये काम कंडोम बाँटने के साथ बंद हो जाएगा या पार्टी जनता के बीच वियाग्रा भी बाँटना शुरू कर देगी?”

वहीं, इसके पलटवार में टीडीपी ने भी वाईएसआरसीपी पर निशाना साधा है और अपने एक्स हैंडल पर वीडियो भी पोस्ट किया है। टीडीपी ने लिखा, “क्या जगन मोहन रेड्डी इसके बारे में बात कर रही है?” टीडीपी द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो में वाईएसआरसीपी के चुनाव निशान छपा कंडोम बाँटा जाता दिख रहा है।

इन दोनों पार्टियों की इस पहल पर विवाद भी हो रहा है। कुछ लोगों का कहना है कि यह चुनाव प्रचार का एक अनैतिक तरीका है। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि यह महिलाओं को सशक्त बनाने के बजाय उन्हें वस्तु मानने जैसा है। चुनाव आयोग ने अभी तक इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है। यह देखना होगा कि आयोग इस मामले पर क्या कार्रवाई करता है।

वैसे, यह निश्चित रूप से एक अनोखी पहल है, जिसके राजनीतिक और सामाजिक परिणाम देखने लायक होंगे। यह चुनाव प्रचार में एक नया मोड़ ला सकता है और लोगों के बीच जागरूकता फैलाने में भी मदद कर सकता है।

जानिए मोदी सरकार के जिस प्रस्ताव को किसान नेताओं ने ठुकराया, उससे पंजाब के कृषकों को होता कितना फायदा: अभी बिचौलिए ले रहे मजा

दिल्ली सीमाओं पर जुटने के लिए बेचैन किसान प्रदर्शनकारी सरकार की एक सुनने को तैयार नहीं हैं। मोदी सरकार कुछ दिन पहले उनके लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी का प्रस्ताव लाई थी, लेकिन कृषि संघों ने और किसानों के नेता बने बैठे लोगों ने इसे फौरन नामंजूर कर दिया। बिन ये सोचे कि इस प्रस्ताव में क्या-क्या खास चीजें थीं और उससे उन्हें क्या लाभ हो सकता था।

ऐसा करने पीछे उनकी मंशा क्या है इसे समझने के लिए पंजाब में होने वाली खेती, उसमें आने वाली लागत समेत कई चीजों को समझना जरूरी है। इनसे पता चलता है कि विविधता की ओर बढ़कर किस तरीके से किसानों का फायदा हो सकता था लेकिन वो उन कृषि संघों के जंजाल में फँसे हैं जिनका मकसद किसानों के हित में आवाज उठाना नहीं, बल्कि अपने व बिचौलियों के हित को बचाना है।

आइए, आपको सरकार की उन कोशिशों के बारे में संक्षिप्त में बताएँ जिसकी जानकारी सरकारी सूत्रों से हुई:

  • 18 फरवरी 2024 को, केंद्र सरकार और पंजाब के किसान संघों के बीच बातचीत हुई। इस दौरान नरेंद्र मोदी सरकार ने किसानों के हित में एक अनूठा समाधान प्रस्तावित किया और कहा कि वह पंजाब के किसानों के साथ पाँच फसलों पर समझौता करने को तैयार हैं।
  • सरकार द्वारा लाए गए प्रस्ताव का उद्देश्य किसानों को गेहूँ और धान से हटकर विविधता लाने में मदद करना था और इसके लिए समझौता सरकारी एजेंसियों
  • (CCI, NAFED, आदि) के माध्यम से किया जाता। सबसे खास बात यह थी कि सरकार के इस प्रस्ताव में फसलों की मात्रा नहीं सीमित की गई थी।
  • सूत्र कहते हैं कि पारिस्थितिक दृष्टिकोण से, यह प्रस्ताव पंजाब के लिए आदर्श था क्योंकि वहाँ भूजल स्तर चिंताजनक रूप से कम हो गया है।
    डायनेमिक ग्राउंडवाटर रिसोर्सेज असेसमेंट ऑफ इंडिया-2017 रिपोर्ट में कहा गया है कि पंजाब में 138 मूल्यांकन किए गए ब्लॉकों में से 109 अतिशुष्क, दो गंभीर रूप से शुष्क, 5 अर्ध-शुष्क थे। सिर्फ इसमें केवल 22 सुरक्षित हैं।
  • ऐसे हाल में राज्य का कुल वार्षिक भूजल पुनर्भरण 23.93 बीसीएम आँका गया है। वहीं वार्षिक निष्कर्षण योग्य भूजल संसाधन 21.59 बीसीएम। बावजूद इसके, वार्षिक भूजल निकासी 35.78 बीसीएम थी यानी निकासी 166 फीसद थी। निकासी का यह आँकड़ा किसी भी राज्य में से सबसे अधिक है। राजस्थान में ये आँकड़ा 140 प्रतिशत से कम है।
  • ऐसे में छोटे किसान के लिए, पिछले कुछ वर्षों में भूजल निकालने की लागत बढ़ गई है। अब अगर किसान उन फसलों को उगाएँ जिनमें पानी की खपत कम होती है तो इनपुट लागत अपने आप कम हो जाएगी।
  • पंजाब के अधिकांश क्षेत्र में गेहूँ और धान (2020-21 में 85%) की खेती होती है। वहीं सरकार ने जिन फसलों जैसे कपास, दालों और मक्का आदि के लिए एक के लिए ऑफर दिया था, उनमें पारिस्थितिकी तंत्र (बाजार, खरीदार, रसद, इनपुट आपूर्ति, आदि) उतना महत्वपूर्ण नहीं है। बस सिर्फ सरकारी समर्थन की आवश्यकता है वो सरकार देने को तैयार है।
  • फिलहाल, खेती के क्षेत्र के संदर्भ में, पंजाब में मक्का 1.5% है, कपास 3.2% है, और दालें केवल 0.4% हैं। सरकार के प्रस्ताव से किसानों को मौका मिलता कि वह इन फसलों की ओर बढ़ें और नए बाजार व खरीदारों से मिलें। खासकर निजी क्षेत्र में, जिससे उन्हें अपनी उपज बेचने के अधिक विकल्प मिलते।
  • केंद्र के प्रस्ताव को अस्वीकार करके, कृषि संघों ने अपने कुछ समय के हितों के लिए पंजाब के किसानों के दीर्घकालिक हितों को दाँव पर लगा दिया है। वह किसानों को गेहूँ और धान से ऊपर उठकर कुछ नया नहीं करने दे रहे हैं। इन यूनियनों की वजह से न केवल किसानों नए बाजार में संभावनाएँ तलाशने से अछूते हैं बल्कि इनकी इसी जिद्द के कारण भूजल तनाव भी बढ़ रहा है और किसानों को इनपुट लागत भी ज्यादा आ रही है। अंततः, यह कुछ वर्षों में कुछ बेल्टों को धान और गेहूँ की खेती के लिए अनुपयुक्त बना सकता है, जिससे छोटे और सीमांत किसानों को और नुकसान होगा।
  • कृषि संघ, जिनके बारे में स्थानीय रूप से जाना जाता है कि वो मुख्य रूप से आढ़तियों से बने हैं, वे अपने भारी उस कमीशन को भी प्राथमिकता दे रहे हैं जो वे एपीएमसी मंडियों में गेहूँ और धान के व्यापार से कमाते हैं। उनके लिए किसानों के हित से ज्यादा बिचौलियों का कमीशन महत्वपूर्ण है चाहे उसमें पंजाब के किसानों का नुकसान ही क्यों न होता रहे।

ग्रीक से लेकर पोप तक सब हुए अश्वेत, तिलक लगाई लड़की को बीफ खाते दिखाया: गूगल का ‘Gemini’ AI निकला कुछ ज्यादा ही ‘वोक’, CEO को माँगनी पड़ी माफ़ी

गूगल का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सर्च इंजन ‘जेमिनी’ विवादों में फँस गया है। गूगल के जेमिनी पर हिन्दू भावनाओं को आहत करने का आरोप लगा है। इसी के साथ ही इस पर गोरी चमड़ी वाले लोगों की उपलब्धियों को नजरअंदाज करने और हर बात में लिबरल विचारधारा घुसाने का आरोप भी लगा है। इसके कारण AI टीम के मुखिया को माफ़ी माँगनी पड़ी है।

यह सारा मामला AI सर्च इंजन से फोटो जनरेट करने को लेकर जुड़ा हुआ है। एक्स (पहले ट्विटर) पर बुधवार (21 फरवरी 2024) को ‘माइक इन स्पेस’ (@mikeinspace/X) नाम के हैंडल ने एक ट्वीट डाला। इसमें उन्होंने बताया, “मैंने गूगल जेमिनी से ‘बिटकॉइनर की स्टीक खाते हुए’ एक इमेज बनाने के लिए कहा और इसने मुझे एक हिन्दू महिला को बीफ़ खाते हुए दिखाया। मुझे लगता है यह गूगल के सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील होने का प्रयास है।”

उन्होंने आखिरी लाइन में गूगल पर तंज कसा, क्योंकि गूगल सदैव ही सभी संस्कृतियों का सम्मान करने का दावा करता है। ऐसे में एक हिन्दू महिला को बीफ खाते हुए दिखाने को लेकर प्रश्न उठ रहे हैं। उन्होंने जो फोटो ट्विटर पर साझा की है, उसमें माथे पर तिलक लगाई हुई एक महिला बीफ खाते हुए दिखती है। ऐसे में उन्होंने प्रश्न उठाया कि जहाँ एक हिन्दू बिटक्वाइनर (बिटक्वाइन बनाने वाला) हो सकता है, वह बीफ कभी नहीं खाएगा।

लोगों ने भी इस बात पर प्रश्न उठाए कि ऐसा क्यों है, जबकि गूगल का सीईओ एक भारतीय हिन्दू है। इसके बाद और भी कुछ ट्वीट वायरल हुए, जहाँ गूगल जेमिनी इतिहास से छेड़छाड़ करता दिखा। जेमिनी से जब एक व्यक्ति ने ग्रीक लोगों की फोटो जनरेट करने को कहा तो Gemini ने उन्हें अश्वेत दिखाया जबकि असल में वह गोरी चमड़ी वाले थे। इसने पोप को भी अश्वेत दिखाया।

इसके बाद जब इससे अमेरिका के संस्थापकों के बारे में इमेज जनरेट करने को कहा गया, तब भी ऐसा ही हुआ। इसने कुछ लोगों को अश्वेत दिखाया।

इससे जब मध्यकालीन योद्धाओं की तस्वीर दिखाने को कहा गया तो इसने इसमें कोई भी यूरोपियन योद्धा को शामिल नहीं किया, जबकि असल में मध्यकाल में बड़ी संख्या में यूरोप में युद्ध हो रहे थे और इसमें गोरी चमड़ी वाले योद्धा शामिल थे।

इससे जब वाइकिंग योद्धाओं की एक फोटो जनरेट करने को कहा गया तो इसने यहाँ काले लोगों को दिखाया, जबकि असल में वाइकिंग योद्धा नॉर्वे जैसे देशों के थे और गोरी चमड़ी वाले थे। इसका परिणामों को बदलना लोगों को गुस्सा दे गया। हालाँकि, जब जेमिनी से ज़ुलु योद्धाओं की फोटो जारी करने को कहा गया तो इसने एकदम सही फोटो जारी की। दरअसल, ज़ुलु अफ़्रीकी योद्धा थे।

पोप को काला दिखाने, ऐतिहासिक तथ्यों को सही से ना प्रदर्शित करने और सब कहीं अफ़्रीकी मूल के लोगों की प्रधानता प्रस्तुत करने के चक्कर में जेमिनी की खूब लानत मलानत हुई। इसके बाद जेमिनी के मुखिया जैक क्राव्जी ने माफ़ी माँगी। जैक गूगल की AI डिवीजन के प्रमुख हैं।

उन्होंने इस विषय में एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “हमें इस बात की जानकारी है कि जेमिनी कुछ ऐतिहासिक लोगों के विषय में गलत इमेज बना रहा है। हम इस समस्या को तुरंत ठीक करने के लिए काम कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक लोगों के विषय में अधिक सावधानी की जरूरत होती है और इसे ऐसा किया जाएगा। हालाँकि, उनके इस बयान पर लोगों ने पूछा कि जेमिनी आखिर अंग्रेज या यूरोपियन लोगों के साथ ही क्यों कर रहा है।

‘शौहर दोपहर और शाम को बहुत मारता है, हाथ-पाँव बाँध कर…’: बेटी होने पर ससुराल वालों ने ;पिंकी खातून को ज़हर दे दिया, सास-ससुर भी करते थे टॉर्चर

बिहार के कटिहार में पिंकी खातून नामक एक महिला को बेटी को जन्म देने के कारण अपने ही परिवार द्वारा प्रताड़ित किए जाने का मामला सामने आया है। महिला ने बताया कि उसका शौहर उसकी बहुत पिटाई करता है, दिन में बस एक बार खाने के लिए देता है। कभी दोपहर में तो कभी शाम को ही पीटने लगता है। पीड़िता ने बताया कि उसे सोने तक नहीं दिया जाता है, जमीन पर लेटने को कहा जाता है। प्रताड़ना देने में सास, ससुर और शौहर – सब मिले हुए हैं।

महिला ने आरोप लगाया कि उसका हाथ-पाँव बाँध दिया गया और फिर मुँह में जबरदस्ती बैंगन के खेत में डालने वाला ज़हर डाल दिया गया। बकौल पिंकी खातून, उसके ससुराल वालों की साजिश है कि उसकी हत्या कर के उसके शौहर मोहम्मद तस्लीम का निकाह कहीं और करा दिया जाए। ये सब इसीलिए किया जा रहा है क्योंकि उसने बेटा नहीं, बेटी को जन्म दिया है। इतना ही नहीं, आरोप है कि छोटी सी बच्ची को भी मारने के लिए ये लोग गन्ने के खेत में लेकर गए थे, लेकिन पीड़िता ने किसी तरह अपनी बेटी को बचाया।

ससुराल वाले अब बहू को अस्पताल में छोड़ कर फरार हो गए हैं। घटना कटिहार के बरारी प्रखंड की है। आरोप है कि बेटी होने पर ससुराल वालों ने बहू को ज़हरीला पदार्थ खिला दिया और उसकी हत्या करने की कोशिश की। पिंकी खातून का इलाज कटिहार के सदर अस्पताल में चल रहा है। वो अनारकली गाँव की रहने वाली है, जिसका निकाह दुर्गापुर के मोहम्मद तस्लीम से 2021 में धूमधाम से किया गया था। अम्मी-अब्बू ने जम कर दहेज़ भी दिया था।

पिंकी खातून का कहना है कि 2 साल तक ससुराल में उसके साथ अच्छा व्यवहार हुआ, लेकिन बेटी के जन्म के बाद शौहर के साथ-साथ सास साजिमा खातून और ससुर जयदुल हक इन सभी ने मिल कर मारपीट शुरू कर दी। जो सास, ससुर और पति प्यार करते थे वही अब उसकी पिटाई करने लगे। पिंकी खातून के साथ ऐसा किया जा रहा था, ताकि वो खुद घर छोड़ कर चली जाए। ऐसा नहीं हुआ तो ज़हर दे दिया। अस्पताल में इलाज के बाद किसी तरह पीड़िता की जान बच गई है।

इम्तियाज ने अपहरण कर कई बार किया नाबालिग का रेप, अब्बा ने भी किया यौन शोषण: जनजातीय लड़की से ‘लव जिहाद’ के मामले में कोर्ट ने सुनाई सज़ा

गुजरात के नर्मदा जिले की एक अदालत ने लव जिहाद के मामले में बेटे और अब्बा को सजा का एलान किया है। खुद को हिन्दू बताकर जनजातीय समुदाय की एक नाबालिग लड़की से रेप करने वाले इम्तियाज को 10 साल की सजा सुनाई गई है। वहीं, उसके अब्बा शब्बीर को 3 साल की सजा दी गई है। दोनों पर अदालत ने जुर्माना भी लगाया है। इम्तियाज इसके पहले भी एक हिंदू लड़की के साथ घिनौनी हरकत कर चुका है।

इम्तियाज ने पीड़िता का अश्लील वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल भी किया था। इसी पीड़िता से इम्तियाज के साथ-साथ उसके अब्बा शब्बीर ने भी दुष्कर्म का प्रयास किया था। दरअसल, पीड़िता शब्बीर के पास उसके बेटे इम्तियाज के पास शिकायत लेकर गई थी। शब्बीर ने नाबालिग की शिकायत सुनने के बजाय उससे अपनी हवस का शिकार बनाने की कोशिश की।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला नर्मदा जिले के डेडियापाड़ा का है। यहाँ जनजातीय समुदाय की 17 साल की एक नाबालिग लड़की को इम्तियाज पठान हिन्दू बनकर मिला था। उसने अपना नाम भावीन बताया था। इसके बाद इम्तियाज ने लड़की को अपने प्रेमजाल में फँसा लिया। उसने शादी का झाँसा देकर लड़की को झाँसे में ले लिया। उस समय पीड़िता 12वीं की परीक्षा दे रही थी।

एक दिन आरोपित इम्तियाज ने नाबालिग लड़की का अपहरण कर लिया और अलग-अलग जगहों पर ले जाकर उसका रेप करता रहा। जब लड़की इस हरकत का विरोध करती तो इम्तियाज उसे शादी के नाम पर बहला देता था और उसे चुप करा देता था। आरोप है कि इसी दौरान इम्तियाज ने लड़की के अश्लील वीडियो भी बना लिए। उसने यही वीडियो दिखाकर पीड़िता को मुँह बंद रखने की धमकी भी दी।

एक दिन पीड़िता को इम्तियाज के बैग में से उसका पहचान पत्र मिला। तब जाकर लड़की को इम्तियाज के मुस्लिम होने की जानकारी हुई। पीड़िता फ़ौरन ही इम्तियाज़ के अब्बू शब्बीर के पास शिकायत लेकर गई। बकौल पीड़िता, शब्बीर ने उसकी शिकायत पर ध्यान नहीं दिया। वह लड़की के सीने और शरीर के अन्य अंगों को बदनीयती से छूने लगा। लड़की ने इसका विरोध किया और जैसे-तैसे लौटकर घर आई।

घर पहुँचकर नाबालिग लड़की ने अपने पिता को सारी बात बताई। आखिरकार लड़की के पिता ने डेडियापाड़ा पुलिस में FIR दर्ज करवाई। पुलिस ने पॉक्सो एक्ट सहित अन्य धाराओं में मामला कर दर्ज लिया। इसके बाद इम्तियाज और उसके अब्बा शब्बीर को गिरफ्तार कर लिया। नर्मदा जिले की अदालत में चले इस मामले में आखिरकार अब फैसला सुनाया गया।

अदालत ने इम्तियाज़ पठान को 10 साल की कठोर कारावास के साथ 17 हजार रुपए की जुर्माने की सजा सुनाई है। वहीं, इम्तियाज़ के अब्बा शब्बीर को भी 3 साल की सजा सुनाई गई। शब्बीर को जुर्माने के तौर पर 6 हजार रुपए भी भरने होंगे। अदालत ने सरकार को आदेश दिया है कि वह नाबालिग पीड़िता को 50,000 रुपए का मुआवजा दे।

पहले भी कर चुका है हिन्दू लड़की से निकाह

नर्मदा कोर्ट के वकील जीतेंद्र गोहिल ने बताया कि आरोपितों को POCSO एक्ट के तहत सजा मिली है। उन्होंने बताया आरोपित मुस्लिम होने के बावजूद हिंदू नाम से पहचान पत्र बना रखा था और हिंदू लड़कियों को अपना शिकार बनाता था और उन्हें प्रेमजाल में फँसाकर उनके साथ बलात्कार करता था। इसमें उसका अब्बू शब्बीर भी साथ देता था।

आरोपित इम्तियाज ने 10 साल पहले भी नंदोड़ तालुका के एक गाँव की रहने वाली हिंदू लड़की से निकाह किया था। इस निकाह से उसे एक बेटी भी पैदा हुई थी, जो अब सात साल की है। बाद में इम्तियाज अपनी बेटी और बीवी को छोड़ कर भाग निकला था। वह डेडियापाड़ा तालुका इलाके में रहने लगा और यहीं पर भावीन नाम से नाबालिग जनजातीय हिंदू लड़की को अपने जाल में फँसा लिया।

‘रिपब्लिक’ के पत्रकार सन्तु पान को कलकत्ता हाईकोर्ट ने दी जमानत, CM ममता बनर्जी को झटका: संदेशखाली में महिलाओं मामले को दबाने की कोशिश विफल

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने ‘रिपब्लिक बांग्ला’ के पत्रकार सन्तु पान को जमानत दे दी है। इसे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए झटका माना जा रहा है, क्योंकि पश्चिम बंगाल की TMC (तृणमूल कॉन्ग्रेस) सरकार संदेशखाली में महिलाओं के यौन शोषण के मामलों को दबाने में लगी है। इसी मुद्दे पर रिपोर्टिंग करते वक्त सन्तु पान को लाइव कैमरे के सामने बंगाल पुलिस गिरफ्तार कर के ले गई थी। इसके बाद देश भर में कई पत्रकारों ने विरोध प्रदर्शन किया था।

‘रिपब्लिक’ ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि कलकत्ता हाईकोर्ट ने रिपोर्ट करने के अधिकार की सुरक्षा की है। मीडिया संस्थान ने इसे प्रेस फ्रीडम की जीत करार दिया है। साथ ही ये भी कहा कि संदेशखाली के मुद्दे को दबाने की ममता बनर्जी की साजिश औंधे मुँह गिरी है। इस मामले में ‘रिपब्लिक’ की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने पैरवी की। कोलकाता स्थित ‘रिपब्लिक बांग्ला’ के न्यूज़रूम में सन्तु पान को बेल मिलने के बाद जश्न का माहौल रहा।

संदेशखाली का मुद्दा पिछले 1 महीने से गर्म है। TMC नेता शाहजहाँ शेख, उसके शागिर्दों शिबू हाजरा व उत्तम सरदार और इनके गुर्गों पर आरोप है कि ये सुंदर महिलाओं को घर से उठा कर स्थानीय पार्टी दफ्तर में ले जाते थे और उनका यौन शोषण करते थे। महिलाओं को ये अपने हिसाब से जितने दिन मन हो अपने पास रखते थे। ‘राष्ट्रीय महिला आयोग’ (NCW) की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने इलाके का दौरा कर थाने में महिलाओं की शिकायत दर्ज करवाई।

साथ ही ‘राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग’ (NCST) ने भी इन घटनाओं पर आपत्ति जताते हुए पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और DGP (पुलिस महानिदेशक) से जवाब तलब किया है। राज्यपाल CV आनंद बोस पीड़िताओं से मिल चुके हैं। नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी को पुलिस वहाँ नहीं जाने दे रही थी, लेकिन कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के बाद वो पीड़िताओं से मिलने पहुँचे। अब उच्च न्यायालय ने पत्रकारों को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस को फटकार भी लगाई है।

यौन शोषण, सत्ता की हनक, प्रेस की आजादी छीनी, पीड़िताओं को ही किया परेशान: जानें संदेशखाली में अब तक क्या-क्या हुआ, कहाँ है TMC का शाहजहाँ शेख

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के राज वाले पश्चिम बंगाल के संदेशखाली का मुद्दा इस समय सुर्ख़ियों में है। यहाँ बड़ी संख्या में महिलाओं ने सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के नेता शाहजहाँ शेख और उसके गुर्गों पर घर से उठाने और यौन शोषण करने के आरोप लगाए हैं। शाहजहाँ शेख पहले से ही फरार है। वहीं, संदेशखाली की सच्चाई दिखाने वाली मीडिया को बंगाल पुलिस उठा कर ले जा रही है।

इतना ही नहीं, तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता शाहजहाँ शेख की सच्चाई बताने वाली पीड़ित महिलाओं की पहचान उजागर की जा रही है और उन पर दमन चक्र चलाया जा रहा है। इस बीच देश की परंपरागत मीडिया ने इस खबर ना उतनी तवज्जो दी है और ना ही इस मामले में ढिलाई बरतने पर ममता बनर्जी सरकार की आलोचना हुई है।

सुंदरबन के द्वीपीय इलाके संदेशखाली में अब तक क्या हुआ, घर से महिलाओं को उठाकर ले जाने और उनका यौन शोषण करने के आरोप कहाँ से आए, बंगाल पुलिस ने इस मामले में अब तक क्या किया, बंगाल की सरकार प्रेस की आजादी को कैसे छीन रही है और हाईकोर्ट ने ममता बनर्जी की सरकार से क्या कहा….. ये सब जानने की जरूरत है।

मीडिया की आजादी पर हमला, पत्रकारों पर FIR

संदेशखाली पर रिपोर्ट करने से रोकने के लिए ममता सरकार का दमनचक्र जारी है। सरकार के निशाने पर मीडियाकर्मी हैं, जो संदेशखाली का सच देश को दिखाना चाहते हैं। बंगाल की पुलिस ऐसे पत्रकारों को कैमरे के सामने से उठाकर ले जा रही है और उन पर FIR दर्ज कर रही है। इस मामले में सबसे पहले रिपब्लिक बांग्ला के रिपोर्टर संतू पान को 19 फरवरी, 2024 को गिरफ्तार किया गया।

संतू को जिस समय गिरफ्तार किया गया, उस समय वे लाइव थे। उन्हें कैमरे के सामने से ही बंगाल पुलिस उठा ले गई। संतू की पत्नी ने इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से शिकायत की है। संतू पान संदेशखाली का सच अपने दर्शकों को लगातार दिखा रहे थे। उनकी गिरफ्तारी के बाद भी जब सच बाहर आता रहा तो बंगाल पुलिस ने एक और पत्रकार सुमन डे के खिलाफ FIR दर्ज कर ली।

सुमन ABP आनंद (बांग्ला चैनल) से जुड़े हैं। उन पर संदेशखाली से सम्बंधित एक शो करने के लिए FIR दर्ज की गई है। बंगाल की पुलिस ने उनके इस शो को गलत बताया और उन पर मामला दर्ज कर लिया। संदेशखाली में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है और यहाँ की हकीकत को बाहर नहीं आने दिया जा रहा है।

गिरफ्तार किए गए पत्रकार संतू को गुरुवार (22 फरवरी 2024) को जमानत मिल गई है। उनके खिलाफ एक महिला के घर में घुसने का मामला दर्ज कर दिया गया है। उनको कहीं ले भी जाया गया है। यह सब इसलिए हो रहा है, क्योंकि उन्होंने संदेशखाली का सच दिखाने की हिम्मत की थी। संतू की गिरफ्तारी के बाद बंगाल से लेकर दिल्ली तक पत्रकारों ने प्रदर्शन किए हैं।

बंगाल पुलिस ने ही उजागर कर दी पीड़िता की पहचान

एक तरफ बंगाल सरकार पत्रकारों का दमन कर रही है तो दूसरी तरफ संदेशखाली की पीड़िताओं की पहचान भी उजागर कर रही है। इसको लेकर बंगाल की मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा सरकार पर हमलावर हो गई है। भाजपा ने पीड़िताओं से मिलने और इनकी बात सुनने की माँग के साथ-साथ आरोपितों पर कार्रवाई की माँग की है।

इस बीच ममता सरकार ने महिलाओं की पीड़ा सुनने के बजाय इस बात में दिलचस्पी दिखाई कि इस पूरे मामले को कैसे पूरी तरह दबा दिया जाए। बंगाल सरकार ने यहाँ बड़ी संख्या में पुलिस तैनात किया है। ये आरोप भी सामने आए हैं कि बंगाल पुलिस पीड़िताओं को ही परेशान कर रही है। दरअसल, बंगाल पुलिस बलात्कार के मामले को पहले ही खारिज कर चुकी है।

बंगाल पुलिस ने एक महिला का असली बयान सुनाने के नाम पर उसकी पहचान उजागर कर दी। साथ ही उसका फोटो भी सोशल मीडिया पर डाल दिया। इसका विरोध हुआ तो ट्वीट हटा लिया गया। ऐसे भी आरोप हैं कि पुलिस पीड़िताओं को चुप कराने की कोशिश कर रही है। महिलाओं का आरोप है कि उनके घरों में पुलिस की वर्दी में लोग घुसे और धमकाया। महिलाओं ने बताया कि वे डर के साए में जी रही हैं।

क्या है संदेशखाली की वर्तमान स्थिति?

संदेशखाली में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) और विपक्षी नेता भी पहुँचे। महिलाओं ने आपबीती NCW चीफ से सुनाई है। महिलाओं के साथ हुई बर्बरता को सुनकर NCW चीफ ने बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने की माँग की है। देश भर में आलोचना के बाद वहाँ बलात्कार के 2 मामले दर्ज किए गए हैं। एक FIR बलात्कार, जबकि दूसरी सामूहिक बलात्कार की दर्ज हुई है।

एक FIR तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता शिबू हाजरा और उसके दो गुर्गों- उमर अली गाजी और भानू मंडल के विरुद्ध दर्ज की गई है। वहीं, एक मामले में उत्तम सरदार और शिबा हाजरा को आरोपित बनाया गया है।हालाँकि, इन दोनों ही मामलों में मुख्य आरोपित शाहजहाँ शेख का नाम नहीं है। पीड़िताओं ने शाहजहाँ को ही सरगना बताया है। शाहजहाँ को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का करीबी बताया जाता है।

जहाँ उत्तम सरदार और शिबू हाजरा की गिरफ्तारी हो चुकी है, वहीं शेख शाहजहाँ अब भी बंगाल पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ सका है। वह जनवरी से ही गायब है। उसको पकड़ने के लिए राज्य की पुलिस की कोई ख़ास तत्परता भी सामने नहीं आई है। इस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने भी बंगाल पुलिस और सरकार को फटकार लगाई है।

संदेशखाली में विपक्षी नेताओं के जाने पर भी ममता सरकार ने प्रतिबन्ध लगा रखा है। भाजपा के नेता सुवेंदु अधिकारी को इसके लिए कोर्ट तक का सहारा लेना पड़ा। दरअसल, यहाँ की अधिकांश पीड़िताएँ अनुसूचित जाति/जनजाति समाज से हैं। इस कारण इसका संज्ञान राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने लिया है। मानवाधिकार आयोग ने राज्य के डीजीपी और चीफ सेक्रेटरी से जवाब माँगा है।

क्या है पूरा मामला, कहाँ से हुई शुरुआत?

बंगाल में एक जिला है उत्तरी 24 परगना। यहाँ के सुंदरबन डेल्टा में टापू पर बसा हुआ है संदेशखाली। यहाँ 5 जनवरी 2024 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एक टीम CRPF के कुछ जवानों के साथ पहुँची थी। यह टीम बंगाल में हुए राशन घोटाला मामले में स्थानीय तृणमूल कॉन्ग्रेस नेता और पंचायत सदस्य शाहजहाँ शेख से पूछताछ करने आई थी। इस दौरान टीम पर हमला हो गया और कई अधिकारी एवं जवान घायल हुए।

यह मामला मीडिया में कुछ दिन तक चला और दब गया। शाहजहाँ शेख वहाँ से फरार हो चुका था और उसके घर पर ताला लटक रहा था। इस घटना के एक महीने बाद यानी 8 फरवरी 2024 को यहाँ बड़ी संख्या में महिलाएँ सड़क पर उतरीं। इन्होंने जो खुलासे किए वह सन्न करने वाले थे। महिलाओं ने आरोप लगाया कि शाहजहाँ शेख और उसके चेले शिबू हाजरा और उत्तम सरदार ने यहाँ अपना आतंक कायम कर रखा है।

महिलाओं ने कहा कि शाहजहाँ और उसके गुर्गों को जो भी महिला पसंद आती है, उसे वे घर से उठा ले आते हैं। जितने दिन मन होता है, उसे अपने पास रखते हैं और फिर ‘मन भर जाने’ पर महिला को वापस कर देते हैं। यदि कोई महिला इसका विरोध करती है तो उसके घरवालों को प्रताड़ित किया जाता है और हत्या तक की धमकी दी जाती है। इन आरोपों के कई वीडियो भी सामने आए।

महिलाओं ने प्रदर्शन के दौरान झाडुओं और लाठियों के साथ टीएमसी के गुंडों को दौड़ाया भी। आरोप सामने आने के बाद मामले को दबाने के लिए शाहजहाँ के आदमी दबाव बनाने लगे। महिलाओं ने बताया कि उनके घरों पर रात में टॉर्च मारी जाती है और उनके दरवाजों को पीटा जाता है। यौन शोषण के अलावा महिलाओं ने आरोप लगाए कि ये लोग मछली पालन के लिए उनकी जमीनों पर कब्जा कर चुके हैं।