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जो मजबूत और समृद्ध उन्हें SC/ST आरक्षण से क्यों नहीं किया जा रहा बाहरः सुप्रीम कोर्ट ने उठाया सवाल, कहा- जिन्हें जरूरत, उन्हें मिले लाभ

राज्य सरकारें क्या एससी/एसटी आरक्षण में शामिल जातियों का उप-वर्गीकरण कर सकती कर सकती है या नहीं, इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट की 7 सदस्यीय संवैधानिक बेंच मंगलवार (06 फरवरी 2024) से कर रही है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एससी-एसटी आरक्षण का लाभ लेने वाले मजबूत जातियों को उप-समूह के तौर पर चिन्हित करके बाहर निकाला जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट की 7 सदस्यीय संवैधानिक पीठ की अगुवाई CJI डीवाई चंद्रचूड़ कर रहे हैं। इस पीठ में जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस बेला एम त्रिवेदी, जस्टिस पंकज मिथल, जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस सतीशचंद्र शर्मा शामिल हैं। यह पीठ एससी-एसटी आरक्षण के भीतर वर्गीकरण की अनुमति के संदर्भ में सुनवाई कर रही है।

साल 2020 में पंजाब राज्य बनाम दविंदर सिंह मामले में 5 सदस्यीय पीठ ने फैसला दिया था। अब उसे 7 सदस्यीय संवैधानिक पीठ के पास भेजा गया है। उस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने साल 2005 के ईवी चिन्नैया बनाम आंध्र प्रदेश राज्य (2005) 1 एससीसी 394 के फैसले पर पुनर्विचार करने की जरूरत बताई थी। उस दौरान कहा गया था कि एससी-एसटी वर्ग में वर्गीकरण की जरूरत नहीं है।

सुनवाई दे दौरान सुप्रीम कोर्ट ने 6 फरवरी को कहा कि जो जाति समृद्ध हैं, उन्हें सामान्य वर्ग के साथ प्रतिस्पर्धा क्यों नहीं करना चाहिए? जस्टिस नाथ ने कहा, “कुछ उपजातियों ने अच्छा किया है और वो आगे बढ़ी हैं। ऐसे में उन्हें क्यों नहीं बाहर (रिजर्वेशन लिस्ट से) किया जाए? वो जातियाँ आरक्षण से बाहर आएँ और सामान्य वर्ग के साथ प्रतिस्पर्ध करें। अब वो वहाँ क्या कर रही हैं?”

जस्टिस बीआर गवई ने आगे कहा कि मजबूत हो चुकीं उप-जातियों को रिजर्वेशन से बाहर आना चाहिए, ताकि अन्य पिछली उपजातियों या सर्वाधिक पिछड़ी जातियों को भी आरक्षण का मौका मिल सके। उन्होंने कहा, “जिन पिछड़ी उप-जातियों को मौका नहीं मिला है, चलिए उन्हें मौका देते हैं।”

जस्टिस गवई ने आगे कहा, “गाँव में रहने वाला कोई व्यक्ति अगर आईएएस-आईपीएस बन जाता है तो उसके बच्चों को गाँव में रहने वाले अन्य बच्चों की तरह की कठिनाइयाँ नहीं झेलनी पड़ती। इसके बावजूद वो परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी आरक्षण का लाभ पाता रहता है।” उन्होंने यह भी कहा कि ये संसद को तय करने दें कि ‘मजबूत और प्रभावी’ समूहों को आरक्षण की सीमा से बाहर निकालना है या नहीं।

सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली सात सदस्यीय संविधान पीठ पंजाब अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग (सेवाओं में आरक्षण) अधिनियम 2006 की वैधता का भी अध्ययन कर रही है। यह अधिनियम अनुसूचित जातियों (एससी) के लिए तय आरक्षण के तहत सरकारी नौकरियों में ‘मजहबी सिख’ और ‘वाल्मीकि’ समुदायों को 50 प्रतिशत आरक्षण और प्रथम वरीयता देती है।

दरअसल, CJI चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली यह पीठ इससे संबंधित 23 याचिकाओं को एक साथ करके इस पर सुनवाई कर रही है। इसमें सुप्रीम कोर्ट द्वारा साल 2004 में दिए गए फैसले की समीक्षा भी है। इसके अलावा, पंजाब सरकार द्वारा जारी एक प्रमुख याचिका भी शामिल है। उस याचिका में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के साल 2010 के फैसले को चुनौती दी गई है।

हाई कोर्ट ने वाल्मीकि और मजहबी सिखों को एससी वर्ग का 50 प्रतिशत आरक्षण देने के प्रावधान को गलत बताया था। हाई कोर्ट ने ईवी निन्नैया बनाम आंध्र प्रदेश राज्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट के साल 2004 के फैसले को आधार बनाकर यह फैसला दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने साल 2004 में अपने फैसले में एससी-एसटी के भीतर उप-जाति विभाजन को गलत बताया था।

इस मामले को पंजाब सरकार ने साल 2011 में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी और कहा था कि आंध्र प्रदेश का मामला उस पर लागू नहीं होता। चूँकि हरियाणा और पंजाब में अनुसूचित जनजाति की आबादी नहीं है, इसलिए उनके हिस्से का आरक्षण मजहबी सिखों और वाल्मीकि समुदाय को दी गई थी।

Exclude the strong sub-castes taking advantage of SC-ST reservation says Supreme Court

जज श्रीदेवी की हत्या के लिए उकसाने वाला मुहम्मद हादी गिरफ्तार, आतंकियों को मौत की सजा सुनाने के बाद से हैं इस्लामी कट्टरपंथियों के निशाने पर

केरल पुलिस ने जज वीजी श्रीदेवी को हत्या के लिए उकसाने वाले असरिकंडी मुहम्मद हादी को गिरफ्तार किया है। प्रतिबंधित इस्लामी आतंकी संगठन PFI और उसके राजनीतिक संगठन SDPI के आतंकियों को मौत की सजा सुनाने के बाद से महिला जज कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं। इन आतंकियों को बीजेपी नेता रंजीत श्रीनिवास की निर्मम हत्या में सजा सुनाई गई थी।

26 साल के इस्लामी कट्टरपंथी मुहम्मद हादी को पेरुवन्नामुझी पुलिस ने पेरम्परा से गिरफ्तार किया है। उसने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर महिला जज की हत्या की वकालत की थी। पुलिस ने उसे उसके कार्यस्थल से गिरफ्तार किया है। पुलिस ने खुद से संज्ञान लेते हुए उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।

महिला जज की धमकी देने को लेकर पुलिस इससे पहले भी तीन कट्टरपंथियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनके नाम नासिर मोन, नवाज नैना और राफी हैं। ये केरल के अलग-अलग शहरों के रहने वाले हैं। केरल पुलिस ने इस सम्बन्ध में मामले दर्ज करते हुए जज श्रीदेवी की सुरक्षा भी बढ़ाई थी।

गौरतलब है कि केरल की एक अदालत ने भाजपा नेता रंजीत श्रीनिवास की हत्या के मामले में 15 PFI-SDPI के आतंकियों को सजा सुनाई थी। जज श्रीदेवी ने इस अपराध को गंभीरतम बताते हुए दोषियों को मौत की सजा सुनाई थी। रंजीत श्रीनिवास की उनके घर में घुसकर 19 दिसम्बर 2021 को परिजनों के सामने ही हत्या कर दी गई थी। इस मामले में केरल के अलप्पुझा जिले की मवेलिकारा कोर्ट ने नईम, मोहम्मद असलम, अनूप, अजमल, अब्दुल कलाम उर्फ़ सलाम, अब्दुल कलाम, सफरुद्दीन, मनषद, जसीब राजा, नवास, समीर, नज़ीर, जाकिर हुसैन, शाजी और शेरनस अशरफ को हत्या का दोषी पाया था।

हत्या में दोषी पाए गए अभी व्यक्ति अलप्पुझा के ही रहने वाले हैं और प्रतिबंधित इस्लामिक संगठन PFI और इसकी राजनीतिक शाखा SDPI से जुड़े हुए हैं। इन दोषियों में से शुरुआती 8 को रंजीत की हत्या में सीधे तौर पर दोषी माना गया है। इन पर कोर्ट ने धारा 302 समेत चार और धाराएँ लगाई थीं। दोषी नम्बर 9 से 12 को लेकर यह तथ्य सामने आया था कि बाकी 8 आरोपित जब रंजीत की हत्या कर रहे थे, तब ये उनके घर के बाहर खतरनाक हथियारों के साथ पहरा दे रहे थे। इसके अलावा 13वें, 14वें और 15वें दोषी को इस हत्या की साजिश रचने का दोषी करार दिया गया था।

‘हम चार निकाह ही करेंगे’: UCC के विरोध में बोले मुस्लिम- हम शरीयत से ही चलेंगे, देहरादून का शहर काजी बोला- सड़कों पर उतरेंगे

उत्तराखंड विधानसभा में सामान नागरिक संहिता (UCC) बिल पेश की जा चुकी है। इस पर विधानसभा में चर्चा चल रही है। प्रदेश के सभी नागरिकों के लिए समान कानून का आधार बनने वाला यह UCC मुस्लिम तबके के एक बड़े हिस्से को रास नहीं आ रही है। UCC के विरुद्ध अजीब-अजीब तर्क दिए जा रहे हैं। कई मुस्लिम नेता संविधान के ऊपर शरीयत को रखने की बात कर रहे हैं। ऐसी कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

ऐसे ही एक वीडियो में एक पत्रकार मुस्लिम भीड़ से UCC के मुद्दे पर बात करता दिखाई देता है। इस दौरान एक मुस्लिम युवक UCC की कमियाँ गिनाता है। युवक बताता है, “ये कानून सही नहीं है, क्योंकि हम किसके हिसाब से चलेंगे, हम चलेंगे शरीयत के हिसाब से। क्यों चलेंगे? क्योंकि शरीयत में लिखा हुआ कि आप चार निकाह कर सकते हैं। आप इसमें (UCC में) कह रहे हो कि एक निकाह कर सकते हैं। क्यों कर सकते एक निकाह, जब चार करने हैं?”

युवक आगे तर्क देता है, “वैसे तो हम एक ही करते हैं, लेकिन जब शरीयत में लिखा हुआ कि चार कर सकते हैं तो चार ही करेंगे। अब मान लो एक बीवी है, उससे शादी हो गई। अब एक अच्छी नहीं लग रही और दूसरी रेडी है तो हम क्यों ना करेंगे। इसमें दो बच्चे को लेकर लिखा हुआ है। बच्चे दो कैसे? वो तो अल्लाह के हाथ में हैं।”

जब उस मुस्लिम युवक से पत्रकार पूछता है कि वह शरीयत को मानता है या फिर देश के संविधान को। इस पर वह युवक कहता है कि ‘देश चलेगा संविधान से, लेकिन हम (मुस्लिम) चलेंगे शरीयत से’।

वहीं, UCC के विरोध में देहरादून की जामा मस्जिद के शहर काजी मुहम्मद अहमद कासमी ने सड़क पर उतरने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि देश के बुद्धिमान लोग यूनिफार्म सिविल कोड की जरूरत नहीं मानते हैं। उन्होंने मुस्लिमों को लक्षित करके UCC लाने का आरोप लगाते हुए कहा कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने नेताओं को खुश करने के लिए UCC ला रहे हैं।

उधर UCC के विरोध में अजीब तर्कों के और भी वीडियो सामने आए हैं। एक बुजुर्ग मुस्लिम व्यक्ति भी इस पर अपना पक्ष रखता नजर आ रहा है। गौरलतब है कि उत्तराखंड में लाए गए UCC का ड्राफ्ट 2 फरवरी 2024 को सरकार को सौंपा गया था। इसे पाँच सदस्यीय पैनल ने तैयार किया है। इसमें विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और विरासत सम्बन्धी तमाम मुद्दों के विषय में नियम बनाए गए हैं।

‘मुहम्मद का गुलाम आएगा, मस्जिद को पाक करेगा और फिर अजान की आवाज गूँजेगी’: मुफ्ती अजहरी पर एक और FIR, ‘कुत्तों का वक्त’ पर हुआ था गिरफ्तार

गुजरात के जूनागढ़ में भड़काऊ भाषण देने वाले मुफ्ती सलमान अजहरी के खिलाफ एक और FIR दर्ज की गई है। बताया जा रहा है कि मुफ्ती ने कच्छ की एक सभा में भी भड़काऊ बयान दिया था। इसको लेकर ही यह FIR दर्ज की गई है।

जानकारी के अनुसार, कच्छ में मुफ्ती अजहरी की तकरीर के आयोजक मामद खान को भी आरोपित बनाया गया है। वह समखियारी का रहने वाला है और उसने ही ‘धार्मिक तकरीर’ नाम के आयोजन के लिए प्रशासन से अनुमति ली थी। यहीं मुफ्ती सलमान अजहरी ने भड़काऊ भाषण दिया था। पुलिस और गुजरात ATS इस मामले की जाँच कर रही है।

यहाँ से सामने आए वीडियो में सलमान अजहरी कहता है, “हमारा ये यकीन है कि तुमने अगर नापाक किया किसी मस्जिद को तो मुहम्मद-ए-अरबी का कोई गुलाम आएगा। कोई गुलाम आएगा और मस्जिद को पाक करेगा और फिर अजान की आवाज गूँजेगी। कुछ दिनों की खामोशी है, फिर शोर आएगा, आज कुत्तों का वक्त है कल हमारा दौर आएगा।” इसके बाद वहाँ मौजूद भीड़ नारा-ए-तकबीर और अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाती है।

कच्छ (पूर्वी) के एसपी सागर बागमार ने बताया है कि दोनों आरोपितों पर धारा 153(B) और 505(2) लगाई गई है। उन्होंने कहा, “हमने इस भड़काऊ भाषण की वीडियो वायरल होने के बाद मामला दर्ज किया है। वर्तमान में मुफ्ती सलमान अजहरी जूनागढ़ पुलिस की गिरफ्त में हैं। हम उसको यहाँ लाने के लिए वारंट जारी करवाएँगे।”

मुफ्ती अजहरी के भड़काऊ भाषण के विरुद्ध कच्छ के स्थानीय लोगों में काफी गुस्सा है। अखिल भारतीय संत समिति के अध्यक्ष मोहनदास महाराज ने मुफ्ती अजहरी की तकरीर का विरोध किया है और कार्रवाई की माँग की है। गुजरात ATS और जूनागढ़ पुलिस इस मामले में सोशल मीडिया समेत तमाम स्रोत से मुफ्ती के कच्छ वाले बयान के विषय में जानकारी इकट्ठा कर रही है। उससे जुड़े हुए तीन ट्रस्ट – जामिया रियाजुल जन्नाह, अल अमन एजुकेशन एंड वेलफेयर ट्रस्ट और दारुल अमन ट्रस्ट भी जाँच के घेरे में हैं।

मुफ्ती सलमान अजहरी के कुछ कट्टरपंथी संगठनों के साथ लिंक भी सामने आए हैं, जिनकी जाँच हो रही है। गौरतलब है कि मुफ्ती अजहरी को जूनागढ़ में एक भड़काऊ भाषण देने के लिए मुंबई से गिरफ्तार किया गया था। उसे गुजरात ATS ने गिरफ्तार किया था। उसकी गिरफ्तारी के दौरान कट्टरपंथियों ने बवाल भी काटा था।

जूनागढ़ में भी मुफ्ती सलमान अजहरी ने उगला था जहर

ऑपइंडिया ने सबसे पहले इस मामले की रिपोर्ट की थी। 20-22 सेकंड के वायरल वीडियो को सर्च करने पर हमें मुफ्ती सलमान अजहरी का वो भाषण मिला था, जो 53 मिनट का था। वायरल वीडियो इसी भाषण का एक छोटा सा हिस्सा थी। इस भाषण में मुफ्ती ने कई जगह भड़काऊ बातें कही थीं।

वीडियो को इस्लामिक चैनल ने पोस्ट किया था। इसमें वक्ता के तौर पर मुफ्ती सलमान अजहरी मंच पर दिख रहा था। यह कार्यक्रम गुजरात के जूनागढ़ में 31 जनवरी को हुआ था, जबकि वीडियो 1 फरवरी 2024 को अपलोड किया गया था। मुफ्ती सलमान अजहरी ने अपने भाषण में कहा था, “मस्जिद में बुत रखने से मस्जिद बुतखाना नहीं बन जाती। तुमने एक रखा है, काबा में 360 रखे थे, फिर भी काबा तो काबा ही रहा, न तवाफ रुका, न हज रुका।”

अपने भाषण में मुफ्ती ने कहा, “इंकलाब आपके घर से होगा। उनमें मस्जिदों को बुतखाना बनाने की हिम्मत नहीं है। आपने मस्जिदों को वीरान छोड़ दिया है और हमारे यहाँ मुहावरा है कि जब मैदान खुला होता है तो कुत्तों का राज होता है। यदि तुम मैदान में घूमते रहोगे तो कोई कुत्ते नहीं होंगे।”

भाषण के अंत में उसने कहा था, ”मुसलमानों घबराओ मत, अभी खुदा की शान बाकी है। अभी इस्लाम जिंदा है, अभी कुरान बाकी है, ऐ जालिम काफिर क्या समझता है जो रोज हमसे उलझता है, अभी तो कर्बला का आखिरी मैदान बाकी है। कुछ देर की खामोशी है, किनारा आएगा… आज कुत्तों का वक्त है, कल हमारा दौर आएगा।”

जिस मुन्नन खाँ को लोग बताते हैं कारसेवकों का हत्यारा, उसके नाम पर चौक-चौराहा और गाँव: सरकारी रिकॉर्ड में भी उसी का नाम, उसके नाम पर आयोजित होती है प्रतियोगिता

अयोध्या में 22 जनवरी 2024 को भगवान रामलला की विधि-विधान से प्राण प्रतिष्ठा हो चुकी है। पिछले एक माह से अधिक समय से ऑपइंडिया की टीम ने ग्राउंड से लोगों को ऐसे कई गुमनाम रामभक्तों के बारे में बताया, जिन्होंने राम मंदिर के लिए 500 वर्ष तक चले संघर्ष एवं आंदोलन में अपने प्राणों की आहुति तक दे दी। इस बीच कुछ गुमनाम विलेन भी सामने आए, जिनमें से एक मुन्नन खाँ भी है।

सन 1990 में बलरामपुर से सांसद और मुलायम सिंह यादव के करीबी रहे मुन्नन खाँ पर लोगों ने पुलिस की वर्दी पहनकर अयोध्या में कारसेवकों का नरसंहार करने का आरोप लगाया है। मुन्नन खाँ की मौत के बाद उसका बेटा कासिम खाँ अपने अब्बा की आपराधिक विरासत को संभाल रहा है। हमारी पड़ताल में यह भी निकल कर आया है कि मुन्नन के नाम पर न सिर्फ जगहों, बल्कि खेल प्रतियोगिताओं तक का नामकरण हुआ है।

PWD के बोर्ड पर मुन्नन खाँ चौराहा

गोंडा में शहर के बाहरी हिस्से पर मुन्नन खाँ नाम से एक चौराहा है। गौर करने वाली बात ये है कि यह चौराहा उस अयोध्या मार्ग पर है, जहाँ मुन्नन खाँ द्वारा कारसेवकों के नरसंहार का आरोप है। यहाँ PWD के 2 बोर्ड लगे हैं। एक बड़ा बोर्ड सड़क के बीचों बीच लगा है, जबकि दूसरा दिशा सूचक के तौर पर प्रयोग होता है।

PWD द्वारा लगवाए गए इन दोनों बोर्ड पर अयोधा से गोंडा-तिराहे को मुन्नन खाँ चौराहा लिखा गया है। इस तिराहे पर अधिकतर दुकानें मुस्लिम समुदाय के लोगों की हैं। उन सभी दुकानों के बोर्ड पर मुन्नन खाँ चौराहा लिखा हुआ है। गूगल मैप की लोकेशन सर्च करने में भी इस जगह का नाम मुन्नन खाँ चौराहा ही आता है।

मुन्नन खाँ चौराहे पर PWD का बोर्ड गोंडा अयोध्या-रोड

चौराहे पर मुन्नन खाँ का घर और बेटे का ऑफिस

जब ऑपइंडिया की टीम मुन्नन खाँ चौराहे पर पहुँची तो पाया कि वहाँ मुन्नन खाँ का एक घर बना हुआ है। यहाँ पर मुन्नन अपने राजनैतिक चरम के दौरान रहा करता था। घर काफी बड़े हिस्से में बना हुआ है। बाउंड्री से सटकर ही बहराइच जिले को जाने वाला बाईपास बना है। बाहर मुन्नन खाँ और उसके अब्बा का शिलापट लगा हुआ है। घर के चारों तरफ बड़ी सी बाउंड्री है, जिसके बाहर कई गाड़ियाँ खड़ी थीं।

मुन्नन खाँ का घर

वहीं रोडवेज की तरफ जाने वाली सड़क पर मुन्नन खाँ के बेटे मोहम्मद आसिम खाँ ने अपना ऑफिस खोल रखा है। इसके आसपास टायर-पंचर आदि की दुकानें हैं।

मुन्नन के बेटे का ऑफिस

चौराहे के पास सड़क से सटी मज़ार

मुन्नन खाँ चौराहे से बहराइच जाने वाली सड़क के किनारे महज 100 मीटर के आसपास चलने पर एक हरे रंग की मजार दिखाई देती है। मजार पक्की है और इसे देखकर लगता है कि इसका हाल ही में रंगाई-पुताई की गई है। इस पर बाकायदा अगरबत्ती और चादरपोशी भी की हुई है। मजार की वजह से सड़क को दबाना पड़ा है, जिसकी वजह से यहाँ अक्सर जाम आदि की भी समस्या आती रहती है।

मुन्नन खाँ चौराहे के पास सड़क से सटी मजार

मुन्नन खाँ के नाम पर M.K. पेट्रोल पम्प, ग्राहकों से अभद्रता

मुन्नन खाँ चौराहे पर एक MK पेट्रोल पम्प है। यहाँ MK का फुल फॉर्म (मुन्नन खाँ) है। इसका पूरा नाम MK फिलिंग पॉइंट है। इस पेट्रोल पम्प की देखरेख और मालिकाना हक मुन्नन खाँ के एक अन्य बेटे सलाहुद्दीन खाँ के पास है। सलाहुद्दीन को पेट्रोल पम्प की डीलरशिप भारत पेट्रोलियम ने साल 2019 में दी है।

दरअसल, 18 मार्च 2022 को MSSM नाम के एक ग्राहक ने इस पेट्रोल पम्प पर कम मात्रा में तेल देने और ग्राहकों से खराब व्यवहार की शिकायत की थी। यह शिकायत Indiapl.com नाम की वेबसाइट पर रिव्यू सेक्शन में दर्ज करवाई गई है।

ग्राहक होने का दावा करने वाले व्यक्ति का आरोप है कि तेल भरवाने के बाद जब पर्ची माँगी जाती है तो पेट्रोल पम्प के कर्मचारी ग्राहकों से अभद्रता करते हैं। शिकायतकर्ता ने लोगों को किसी और टंकी पर तेल भरवाने की सलाह दी है। इस पेट्रोल पंप के रिव्यू में 5 में से महज एक स्टार दिया गया है।

MK फिलिंग के लिए एक ग्राहक का रिव्यू

पुलिस रिकॉर्ड में भी चौराहा मुन्नन खाँ के नाम पर

PWD (लोक निर्माण विभाग) के अलावा UP पुलिस भी अपने रिकॉर्ड में चौराहे को मुन्नन खाँ के नाम से ही दर्ज करती है। पुलिस के DCRB (डिस्ट्रिक्ट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो) द्वारा इस इस चौराहे को मुन्नन खाँ के नाम से दर्ज किया गया है।

UP पुलिस के रिकॉर्ड में भी चौराहे का नाम मुन्नन खाँ

मुन्नन खाँ के नाम पर एक गाँव का पुरवा भी

गोंडा के कटरा बाजर थाना क्षेत्र में एक गाँव को भी लोग मुन्नन खाँ पुरवा बोलते हैं। इस नाम को बाकायदा onefivenine.com वेबसाइट पर गूगल मैप लोकेशन के साथ दर्ज भी करवाया गया है। इस जगह के मूल गाँव का नाम मोहन टेपरा है। यहाँ का पिनकोड 271126 है।

गोंडा शहर से इस पुरवा की दूरी लगभग 25 किलोमीटर है। यहाँ यह ध्यान देना जरूरी है कि मुन्नन खाँ ने अपने राजनैतिक करियर की शुरुआत इसी कटरा विधानसभा से विधायक के रूप में की थी। आज भी उसके परिवार के तमाम सदस्य कटरा के हरधर मऊ इलाके में रहते हैं।

गोंडा में मौजूद है मुन्नन खाँ का पुरवा भी

मुन्नन खाँ की याद में हर वर्ष क्रिकेट टूर्नामेंट

गोंडा जिले के कटरा बाजार में मुन्नन खाँ के नाम पर खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन होता है। इन आयोजनों में मुन्नन खाँ क्रिकेट टूर्नामेंट भी शामिल है। यह आयोजन मुन्नन खाँ की मेमोरियल के तत्वाधान में होता है। टूर्नामेंट में गोंडा ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों की टीमें हिस्सा लेती हैं। बाकायदा माइक आदि बाँधे जाते हैं और आसपास के ग्रामीण दर्शक के तौर पर जमा होते हैं।

इस दौरान मैदान के चारों तरफ समाजवादी पार्टी के बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगाए जाते हैं। इनमें से कई होर्डिंग्स में तो अखिलेश यादव के उर्दू भाषा में लिखे पोस्टर होते हैं। उर्दू में लिखे इन शब्दों को हिंदी में ‘खैर मक़दम इस्तक़बाल’ कहते हैं। इसका मतलब होता है कि ‘आपका स्वागत है’। बैनरों में सपा के अलावा मुन्नन खाँ के मौजूदा परिवारिक सदस्यों का जिक्र रहता है।

टूर्नामेंट के मैदान पर लगते हैं अखिलेश यादव के उर्दू में लिखे बैनर

इसके अलावा, मुन्नन खाँ का बेटा कासिम खाँ कटरा के हलधर मऊ में एक स्कूल चलाता है। इसका नाम यूनिटी पब्लिक स्कूल है। गोंडा शहर में मुन्नन खाँ और उनके परिजनों के अलावा रिश्तेदारों की भी कई जमीनें हैं। साल 2017 में कासिम खाँ पर गैंगस्टर ऐक्ट लगने के बाद जिला प्रशासन उन तमाम जमीनों की खोजबीन में भी जुटा था। नजूल की जमीन पर पुलिस ने अवैध निर्माण बताकर कार्रवाई भी की थी।

पादरी ने ‘नो कन्वर्जन’ के खिलाफ की शिकायत, FIR में रचित कौशिक का जिक्र तक नहीं; फिर क्यों उठाकर ले गई पंजाब पुलिस

सब लोकतंत्र’ न्यूज पोर्टल के फाउंडर रचित कौशिक को बुधवार (6 फरवरी, 2024) को पंजाब के चार पुलिसकर्मियों ने उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से उठा लिया। कौशिक एक पारिवारिक शादी समारोह में शामिल होने के लिए मुजफ्फरनगर आए थे। घटना शाम के करीब 7 बजे की बताई जा रही है। कौशिक अपनी भांजी को पार्लर से लेकर विवाह स्थल पर जा रहे थे, जिस दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया।

ऑपइंडिया से रचित कौशिक की माँ ने बताया है कि उनका बेटा अपनी भांजी को लेकर शादी वाली जगह पर जा रहा था। अचानक से एक स्कॉर्पियो उनकी गाड़ी के सामने आ गई। इस गाड़ी से एक सिख व्यक्ति सामान्य कपड़ों में बाहर निकला।

कौशिक ने समझा कि उनकी कार स्कॉर्पियो को टच कर गई है, इसलिए उन्होंने इस व्यक्ति से बात करने के लिए गाड़ी का शीशा नीचे किया। लेकिन सिख व्यक्ति ने बिना किसी चेतावनी के उनकी गाड़ी का दरवाजा खोला और कौशिक को बाहर खींच लिया। इससे पहले कि कौशिक के साथ वाले लोग कुछ समझ पाते वह उन्हें खींचकर अपनी गाड़ी में ले गया।

कुछ ही मिनटों में कौशिक के रिश्तेदार और चश्मदीद यहाँ जमा हो गए। कौशिक की माँ ने बताया कि उनलोगों ने स्थानीय पुलिस से सम्पर्क किया। थोड़ी देर बाद पता चला कि इसके बारे में पंजाब पुलिस ने स्थानीय थाने को जानकारी दी थी। इसके बाद पंजाब पुलिस ने कौशिक को हिरासत में ले लिया। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि कौशिक के परिवार को इस सम्बन्ध में कोई वारंट नहीं मिला।

FIR में सब लोकतंत्र या रचित कौशिक का नाम तक नहीं

इस मामले में दर्ज एफआईआर की काॅपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। ध्यान देने वाली बात है कि इस एफआईआर में कहीं भी रचित कौशिक या ‘सब लोकतंत्र’ चैनल का नाम नहीं है। यह एफआईआर लुधियाना के सलेम टाबरी थाना क्षेत्र के अलीशा सुल्तान की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है।

FIR की प्रति (स्रोत: रचित कौशिक का परिवार)
FIR की प्रति (स्रोत: रचित कौशिक का परिवार)

शिकायतकर्ता ने खुद को पादरी बताते हुए कहा कि 17 जनवरी 2024 को उन्होंने ईसाई समुदाय के खिलाफ एक पोस्ट ‘नो कन्वर्जन (@noconversion)’ नाम के एक्स/ट्विटर हैंडल पर देखी। सुल्तान ने इस अकाउंट के खिलाफ ईसाई महिलाओं और ननों का अपमान करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि ऐसे पोस्ट सांप्रदायिक तनाव भड़का सकते हैं, जिससे देश में अशान्ति हो सकती है।

FIR में बताया गया है कि उन पोस्टों की प्रतियाँ शिकायत के साथ संलग्न थी, लेकिन उन पोस्ट के लिंक एफआईआर में नहीं थे। इस FIR को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 295ए, 153ए, 153, 504 और आईटी अधिनियम की धारा 67 के तहत दर्ज किया गया है। लेकिन एफआईआर में कहीं भी यह उल्लेख नहीं किया गया है कि ‘नो कन्वर्जन’ नामक हैंडल के किस पोस्ट से शिकायतकर्ता की धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं।

ऑपइंडिया से बात करते हुए कौशिक की माँ ने बताया है कि हो सकता है कौशिक को इसलिए गिरफ्तार किया गया हो क्योंकि उन्हें दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के बेटे पुलकित के खिलाफ वीडियो बनाए थे। ऐसी ही एक वीडियो ‘नो कन्वर्जन’ नाम के हैंडल से 16 जनवरी 2024 को साझा की गई थी। इसमें रचित कौशिक केजरीवाल के बेटे पुलकित के विषय में बात कर रहे थे। उन्होंने इस वीडियो में पुलकित केजरीवाल पर जिम का सामान किराए पर देकर सरकारी खजाने से पैसा लेने का आरोप लगाया था।

इसके अलावा ऐसा कोई अन्य वीडियो नहीं है जो कि इस अकाउंट पर कौशिक को दिखाता हो। कौशिक की माँ के अनुसार गिरफ्तारी के समय पंजाब पुलिस को यह कहते सुना गया, “तुमको लम्बे समय से ढूँढ रहे थे, आखिर में पकड़ लिया।” ध्यान देने वाली बात है कि ‘नो कन्वर्जन’ हैंडल से कौशिक की जो क्लिप साझा की गई है उसमें कहीं भी ईसाइयों या धर्मांतरण के विषय में बात नहीं है। ऑपइंडिया को ऐसी कोई वीडियो नहीं मिली है जिसे ‘नो कन्वर्जन’ ने पोस्ट किया हो और उसमें कौशिक इस विषय में बात कर रहे हों।

नो कन्वर्जन नाम के अकाउंट द्वारा शेयर की गई रचित कौशिक की वीडियो (चित्र स्रोत: X)
नो कन्वर्जन नाम के अकाउंट द्वारा शेयर की गई रचित कौशिक की वीडियो (चित्र स्रोत: X)

लिहाजा यह स्पष्ट नहीं है कि कौशिक को पुलिस ने इसी वीडियो के आधार पर उठाया है। यह भी साफ़ नहीं कि कौशिक को ‘नो कन्वर्जन’ द्वारा की गई किस पोस्ट के लिए गिरफ्तार किया गया है।

सबसे हैरानी वाली बात ये है कि पीड़ित परिवार को जो FIR दी गई है, उसमें रचित कौशिक का कहीं नाम तक नहीं है। इसमें सिर्फ और सिर्फ ‘नो कन्वर्जन’ ट्विटर हैंडल का ही नाम है। इस वीडियो में अरविन्द केजरीवाल वाले वीडियो का भी जिक्र नहीं है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा रहा है कि कौशिक को इसी बात के लिए उठा लिया गया है क्योंकि उनकी वीडियो को ‘नो कन्वर्जन’ ने साझा किया था। ऑपइंडिया ने पंजाब पुलिस से भी इस विषय में बात करने की कोशिश की लेकिन सम्पर्क नहीं हो सका।

कृष्णा नदी में मिली भगवान विष्णु की मूर्ति, आभा रामलला जैसी: प्राचीन शिवलिंग भी मिला, इस्लामी आक्रांताओं से बचाने के लिए तलहटी में डालने का अनुमान

कर्नाटक के रायचूर जिले में कृष्णा नदी से भगवान विष्णु की मूर्ति और शिवलिंग मिला है। भगवान विष्णु की मूर्ति पर उनके दशावतार उकेरे हुए हैं। इसकी आभा हाल ही में अयोध्या में स्थापित की गई रामलला की प्रतिमा जैसी बताई जा रही है। कहा जा रहा है कि इस्लामी आक्रांताओं से बचाने के लिए मूर्ति नदी की तलहटी में डाल दी गई होगी।

जानकारी के अनुसार, कर्नाटक के रायचूर जिले के शक्ति नगर के पास कृष्णा नदी पर पुल बन रहा है। यहाँ पुल बनाने के दौरान भगवान विष्णु की मूर्ति और शिवलिंग नदी की तलहटी से मिली। नदी की तलहटी से निकली विष्णु प्रतिमा की तुलना रामलला की प्रतिमा से की जा रही है, जिसकी हाल ही में अयोध्या के राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा की गई है। रामलला की प्रतिमा के भी चारों तरफ दशावतार उकेरे गए हैं और उस प्रतिमा से इस मूर्ति का हावभाव मिलता-जुलता है। दोनों प्रतिमाओं में देवता बीच में शोभित हैं और प्रसन्न मुद्रा में हैं।

इस प्रतिमा के विषय में मीडिया को इतिहासकार पद्मजा देसाई ने बताया है कि यह 11वीं शताब्दी की है। यह कल्याण चालुक्य राजवंश के शासन के दौरान निर्मित की गई थी। देसाई ने बताया है कि इसके चारों तरफ विष्णु के दशावतार अंकित हैं। प्रतिमा में विष्णु की चार भुजाएँ हैं, इसमें ऊपर के दो हाथों में शंख और चक्र जबकि नीचे के हाथ वरदान देने की मुद्रा में हैं। उन्होंने बताया है कि मूर्ति वेंकटेश्वर से मिलती-जुलती है, लेकिन इसमें कुछ भिन्नताएँ भी हैं।

कृष्णा नदी की तलहटी से मिला प्राचीन शिवलिंग (फोटो साभारः न्यूज 9)

देसाई ने कहा है कि कभी यह मूर्ति किसी गर्भगृह में प्रतिष्ठित रही होगी। उन्होंने कहा है कि संभवतः इन मूर्तियों को आक्रान्ताओं के हमले से सुरक्षित करने के लिए नदी की तलहटी में डाल दिया गया होगा। बताया गया है कि इन प्रतिमाओं को इस्लामी बहमनी सुल्ताओं और आदिलशाही सुल्तानों से बचाने के लिए नदी की तलहटी में छुपाया गया होगा।

मूर्ति और शिवलिंग को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को सौंप दिया गया है। गौरतलब है कि अयोध्या में स्थापित की गई रामलला की प्रतिमा को मूर्तिकार अरुण योगिराज ने कर्नाटक से लाई गई श्यामल शिला से बनाया है। यह प्रभु श्रीराम के पाँच वर्षीय बालरूप को दर्शाती है।

पादरी की ‘भावना’ हुई आहत, लेकिन केजरीवाल पर वीडियो बनाने वाले को ‘किडनैप’ कर ले गई पंजाब पुलिस: रचित कौशिक की गिरफ्तारी क्यों, जानिए सब कुछ

6 फरवरी 2024 की रात सोशल मीडिया में ‘दिल्ली के एक पत्रकार’ को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से ‘किडनैप’ करने की खबरें आई। फिर पता चला कि जिनलोगों ने पत्रकार को उठाया है, वे आम आदमी पार्टी (AAP) शासित पंजाब पुलिस से थे। पंजाब पुलिस ने जिस जिस पत्रकार को उठाया है, वे यूट्यूबर रचित कौशिक हैं। वे ‘सब लोकतंत्र’ नाम से सोशल मीडिया में चैनल चलाते हैं।

ऑपइंडिया को मिली जानकारी के अनुसार दिल्ली के शाहदरा में रहने वाले रचित कौशिक अपनी भांजी की शादी में शामिल होने के लिए उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर गए थे। एक पादरी की शिकायत के आधार पर पंजाब पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया है। असल में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके बेटे के कथित भ्रष्टाचार को लेकर रचित ने एक वीडियो बनाया था। एक अन्य ट्विटर हैंडल ने यह वीडियो ट्वीट किया। इस ट्वीट देखकर एक पादरी की भावना आहत हुई और उसने पुलिस से शिकायत कर दी। इस शिकायत पर तत्परता दिखाते हुए पंजाब पुलिस ने किडनैपिंग वाले अंदाज में रचित कौशिक को यूपी से उठा लिया।

दिलचस्प यह है कि पादरी की शिकायत पर दर्ज FIR में कहीं भी रचित कौशिक या ‘सब लोकतंत्र’ चैनल का जिक्र नहीं है। न ही इसमें केजरीवाल के उस वीडियो का जिक्र है जिसे सोशल मीडिया में उनकी गिरफ्तारी का आधार बताया जा रहा है। यह एफआईआर ‘नो कन्वर्जन’ नामक ट्विटर हैंडल पर धार्मिक भावना आहत करने का आरोप लगाती है। इसी ट्विटर हैंडल से यह वीडियो साझा किया गया था।

जानकारी के अनुसार, 6 फरवरी 2024 की शाम 7 बजे के आसपास रचित कौशिक को एक सफ़ेद रंग की स्कार्पियो में आए चार सिख पुलिसकर्मी उठा ले गए। पुलिसकर्मियों ने वर्दी नहीं पहन रखी थी और ना ही उनके साथ स्थानीय पुलिस थी। पादरी ने लुधियाना में इसी साल जनवरी में मामला दर्ज कराया था।

रचित कौशिक के इन्स्टाग्राम से की गई पोस्ट के अनुसार, हाल ही में उन्होंने AAP नेताओं के भ्रष्टाचार को लेकर एक वीडियो बनाया था जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी हुई है। उनके परिवार ने आरोप लगाया है कि ऐसा उनसे बदला लेने के लिए किया गया है। रचित के परिवार ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले में दखल देने की अपील की है।

ऑपइंडिया ने रचित कौशिक के परिवार बात की है। उनकी माँ ने बताया है कि रचित कौशिक 6 फरवरी की शाम को मुजफ्फरनगर में अपनी भांजी को एक पार्लर से लेकर शादी वाली जगह पर जा रहे थे। इसी दौरान एकाएक एक सफेद स्कॉर्पियो उनकी गाड़ी के सामने आ गई। जब कौशिक ने गाड़ी रोकी तो स्कार्पियो से उतरे सिख व्यक्ति ने उन्हें उनकी गाड़ी से बाहर खींच लिया। उनके साथ के लोग जब तक कुछ समझ पाते तब तक उन्हें गाड़ी में बिठा लिया गया और सिर्फ इतना बताया गया कि उनके खिलाफ एक वारंट जारी किया गया है।

जब कौशिक के परिवार वालो ने उत्तर प्रदेश पुलिस को सूचना दी तो पता चला कि उनकी गिरफ्तारी के विषय में स्थानीय थाने को बताया गया था। पंजाब पुलिस ने यूपी पुलिस को वह FIR भी भेजी जिसके आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया गया था। हालाँकि, रचित के परिवार को FIR के विषय में नहीं बताया गया है।

बताया गया है कि रचित कौशिक को धार्मिक भावनाएँ भड़काने के मामले में गिरफ्तार किया गया है। उनको गिरफ्तार करने के पीछे लुधियाना में की गई एक FIR का उपयोग किया गया है। इस FIR में पंजाब के लुधियाना के रहने वाले पादरी अलीशा सुलतान ने ट्विटर अकाउंट नो कन्वर्जन (@noconversion) के खिलाफ धार्मिक भावनाएँ आहत करने का आरोप लगाया है।

इस अकाउंट के विरुद्ध खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 295A, 153A, 153, 504 और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया गया है। जिस अकाउंट के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, उसने रचित कौशिक का एक वीडियो ट्वीट किया था। इस वीडियो में रचित ने केजरीवाल के बेटे के भ्रष्टाचार को लेकर खुलासा कर रहे हैं। इस वीडियो में उन्होंने केजरीवाल के बेटे पुलकित पर आरोप लगाया था कि उन्होंने मुख्यमंत्री के बंगले में जिम का सामान किराए पर बाजार भाव से कहीं ज्यादा कीमत पर दिया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि यहाँ लगी चार ट्रेडमिल को उन्होंने किराए पर दिया और इससे ₹10 लाख/माह वसूले। दावा किया जा रहा है कि इसी आधार पर रचित कौशिक को गिरफ्तार किया गया है। पंजाब पुलिस से उन्हें छोड़े जाने के लिए अब सोशल मीडिया पर आवाज उठ रही है।

इस गिरफ्तारी को अवैध बताया जा रहा है। रचित कौशिक के परिवार और उनके सोशल मीडिया हैंडल्स से भी गिरफ्तारी का विरोध किया गया है।

धर्मेंद्र-हेमा मालिनी की बेटी ईशा देओल अपने पति से हुईं अलग: 11 साल पहले हुई थी शादी, दो बेटियों की हैं माँ

तलाक की अफवाहों के बीच धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की बेटी ईशा देओल ने कंन्फर्म कर दिया है कि वह अपने पति भरत तख्तानी से अलग हो गई हैं। ईशा और भरत ने एक जॉइन्ट स्टेटमेंट जारी किया है। स्टेटमेंट में लिखा है, “हम दोनों ने आपसी सहमति से अलग होने का फैसला लिया है। अब हम भले साथ नहीं हैं, लेकिन हमारे लिए हमारे दोनों बच्चों का भविष्य सबसे अहम है और हमेशा रहेगा। उम्मीद करते हैं कि आप लोग हमारी प्राइवेसी की रेस्पेक्ट करेंगे।”

टाइम्स ऑफ इंडिया की सहयोगी दिल्ली टाइम्स के मुताबिक, ईशा देओल और भरत तख्तानी का रिश्ता उस जगह पर पहुँच गया था, जहाँ से आगे बढ़ना संभव नहीं था। ऐसे में दोनों ने आपसी रजामंदी से अपनी-अपनी राहें अलग करने का फैसला ले लिया। उन्होंने अपनी निजता का आदर करने की भी अपील की है। बता दें कि जून 2012 में दोनों की शादी हुई थी। शादी के अभी 12 साल भी पूरे नहीं हुए हैं।

दो बेटियों की माँ हैं ईशा

ईशा और भरत की दो बेटियाँ हैं। दोनों की पहली बेटी राध्या का जन्म शादी के पाँच साल बाद 2017 में हुआ था। वहीं, दूसरी बेटी मिराया का जन्म 2019 में हुआ। ईशा देओल ने पैरेंटिंग पर एक किताब भी लिखी है। ईशा देओल बॉलीवुड की कई फिल्मों में काम किया है। हालाँकि, उनकी पहचान ‘धूम’ फिल्म से ज्यादा होती है।

लंबे समय से लग रही थी अटकलें

बता दें कि ईशा देओल और भरत तख्तानी के बीच तलाक की खबरें काफी समय से मीडिया में आ रही थीं। एक समय अपने पति के साथ तस्वीरें शेयर करने वाली ईशा की सोशल मीडिया पोस्ट से पति भरत तख्तानी गायब हो गए थे। पिछले साल हेमा मालिनी के जन्मदिन पर भरत तख्तानी नहीं दिखे तो रिश्तों को लेकर अफवाहें उड़ने लगीं। ईशा भी अधिकतर कार्यक्रमों में माँ हेमा मालिनी के साथ ही दिखती थीं।

भतीजे से NCP की जंग हारे शरद पवार: EC ने अजित के गुट को ही माना ‘असली’, पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर दावा माना

महाराष्ट्र की सियासत में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। ‘असली’ शिवसेना के बाद अब ‘असली’ राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) भी एनडीए गठबंधन का हिस्सा बन गई। चुनाव आयोग ने NCP को लेकर चल रही लड़ाई पर विराम लगा दिया है। आयोग ने अजित पवार की अगुवाई वाले एनसीपी के धड़े को ही असली माना है। एनसीपी का चुनाव निशान घड़ी अब अजित पवार वाला गुट इस्तेमाल करेगा।

चुनाव आयोग ने शरद पवार गुट को कुछ समय दिया है कि वो अपने नए नाम के चुनाव के लिए तीन नाम दें, ताकि अगले राज्यसभा चुनाव में उसका इस्तेमाल किया जा सके। हालाँकि, इसके लिए 7 फरवरी 2024 के दोपहर तीन बजे तक का ही समय है। इस तरह 7 माह से चल रहा विवाद खत्म हो गया है। 10 से ज्यादा सुनवाई के बाद चुनाव आयोग ने अपना फैसला सुनाया। इस दौरान दोनों पक्षों ने दलीलें दीं।

अजित पवार ने जताई खुली

चुनाव आयोग के फैसले के बाद एनसीपी अध्यक्ष अजित पवार ने खुशी जताई है। अजित पवार के हवाले से एनसीपी के एक्स हैंडल पर लिखा गया, “हमारे वकीलों द्वारा प्रस्तुत पक्ष को सुनने के बाद चुनाव आयोग द्वारा दिए गए निर्णय को विनम्रतापूर्वक स्वीकार करते हैं!”

शरद पवार फीनिक्स पक्षी की तरह, राख से फिर खड़े होंगे : आव्हाड

अजित पवार को NCP का नाम और चुनाव चिह्न मिलने पर शरद पवार गुट के नेता जीतेंद्र आव्हाड का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा, “वो (अजित पवार) जाने वाला था, ये हमें पहले से ही पता था… इन्होंने शरद पवार का राजनीतिक गला घोंट दिया.. शरद पवार फीनिक्स हैं। वह राख से फिर उठ खड़े होंगे। हमारे पास अभी भी शक्ति है, क्योंकि हमारे पास शरद पवार हैं… हम सुप्रीम कोर्ट जाएँगे।”

अजित पवार की NCP ने मनाया जश्न

अजित पवार गुट के प्रदेश अध्यक्ष (महाराष्ट्र) सुनील तटकरे ने कहा, “हमें खुशी है कि फैसला हमारे पक्ष में आया है। हमारे फैसले को आज चुनाव आयोग ने कानूनी रूप से मान्य कर दिया है।”

बता दें कि 2 जुलाई 2023 को अजित पवार 40 विधायकों के साथ बीजेपी और शिवसेना (शिंदे) की अगुवाई वाली सरकार में शामिल हो गए थे। उन्होंने उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उनके साथ-साथ छगन भुजबल और प्रफुल्ल पटेल जैसे पार्टी के वरिष्ठ नेता भी सरकार में शामिल हुए थे। इस बगावत के समय प्रफुल्ल पटेल तो एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष भी थे।

यही नहीं, धनंजय मुंडे और दिलीप वालसे पाटिल जैसे शरद पवार के करीबी नेता भी भतीजे अजित के साथ गए थे। इसके बाद 5 जुलाई 2023 को अजित पवार ने एनसीपी पर दावा ठोक दिया। अजित पवार के गुट ने 31 विधायकों और पाँच विधान पार्षदों के समर्थन का दावा किया था, जो बाद में बढ़ते चले गए। बताते चलें कि यही हाल उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ भी हुआ था।

इस पूरे मामले में चुनाव आयोग ने 10 सुनवाई की और अब जाकर फैसला दिया है। आयोग के फैसले के बाद अजित पवार का गुट ही असली एनसीपी हो गया है। चुनाव आयोग का फैसला ऐसे वक्त पर आया है जब महाराष्ट्र विधानसभा स्पीकर राहुल नार्वेकर को 15 फरवरी तक एनसीपी विधायकों की सदन की सदस्यता पर अयोग्यता को लेकर अपना फैसला सुनाना है।