Wednesday, July 17, 2024
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‘जय श्रीराम’ और ‘वन्दे मातरम्’ की गूँज के बीच उत्तराखंड विधानसभा में आया UCC पर बिल, हलाला-बहुविवाह पर लगेगी रोक

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री धामी के विधानसभा में UCC पेश करते ही यहाँ मौजूद विधायकों ने वन्दे मातरम और जय श्रीराम के नारे लगाए। इस विधेयक पर चर्चा के लिए दोपहर के भोजन के बाद का समय तय किया गया है।

समान नागरिक संहिता (UCC) को उत्तराखंड विधानसभा में पेश कर दिया गया है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने UCC विधेयक को सदन के पटल पर रखा। अब उत्तराखंड विधानसभा इस पर चर्चा करेगी जिसके बाद इसे यहाँ से पारित किया जाएगा।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री धामी के विधानसभा में UCC पेश करते ही यहाँ मौजूद विधायकों ने वन्दे मातरम और जय श्रीराम के नारे लगाए। इस विधेयक पर चर्चा के लिए दोपहर के भोजन के बाद का समय तय किया गया है। विधानसभा में इस पर अब दोपहर 2 बजे से चर्चा होगी। इसे पहले मुख्यमंत्री अपने घर से भारत के संविधान की एक प्रति लेकर निकले थे।

इस विधेयक को उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र में पेश किया गया है। यह सत्र सोमवार (5 फरवरी, 2024) से चालू हुआ है और इसका अवसान बृहस्पतिवार( 8 फरवरी, 2024) को होगा। इस विधेयक को रविवार (4 फरवरी, 2024) को उत्तराखंड की कैबिनेट ने अपनी मंजूरी प्रदान की थी।

विधेयक का ड्राफ्ट एक पाँच सदस्यीय पैनल ने 2 फरवरी को उत्तराखंड सरकार को सौंपा था। यह पाँच सदस्यीय पैनल इस विधेयक की बारीकियों को समझने और उसे मूर्त रूप देने के लिए बनाया गया था। इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज रंजना देसाई कर रहीं थीं।

इस विधेयक को पेश करने के साथ ही उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जहाँ विधानसभा में UCC कानून लाया जा रहा है।

जानिए क्या होगा UCC का उत्तराखंड में प्रभाव?

समान नागरिक संहिता लागू होने से बहुविवाह पर रोक लगेगी। महिलाओं को पैतृक संपत्ति में अधिकार मिलेगा एवं बच्चों को गोद लेने का भी अधिकार मिल सकता है। सभी धर्मों में लड़की की शादी की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होगी। वर्तमान में मुस्लिम समाज शरिया पर आधारित पर्सनल लॉ के तहत संचालित होता है। इसमें मुस्लिम पुरुषों को चार विवाह की इजाजत है। समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद मुस्लिम लड़कियों को भी लड़कों के बराबर अधिकार दिया जाएगा।

यूसीसी लागू होने से मुस्लिम समुदाय में इद्दत और हलाला जैसी प्रथा पर प्रतिबंध लग सकता है। तलाक के मामले में शौहर और बीवी को बराबर अधिकार मिलेगा। समान नागरिक संहिता में सभी धर्म के लोगों को लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के लिए पंजीकरण कराना जरूरी किया जाएगा। इसमें महिला और पुरुष की पूरी जानकारी होगी। ऐसे रिश्तों में रहने वाले लोगों को अपने माता-पिता को भी जानकारी देनी होगी।

समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद विवाह का पंजीकरण कराना भी अनिवार्य किया जा सकता है। बिना रजिस्ट्रेशन विवाह अमान्य माने जाएँगे। समान नागरिक संहिता में नौकरीपेशा बेटे की मृत्यु की स्थिति में पत्नी को मुआवजा दिया जाएगा। इसके साथ ही बेटे के बुजुर्ग माता-पिता के भरण-पोषण की जिम्मेदारी पत्नी पर होगी। अगर पति की मृत्यु के बाद पत्नी दोबारा शादी करती है तो उसे मिला हुआ मुआवजा माता-पिता को दिया जाएगा। पत्नी की मृत्यु होने की स्थिति में उसके माता-पिता की देखरेख की जिम्मेदारी पति पर होगी।

यूसीसी के तहत अनाथ बच्चों के लिए संरक्षण की प्रक्रिया को भी सरल बनाया जा रहा है। पति-पत्नी के बीच विवाद की स्थिति में बच्चों की कस्टडी उसके दादा-दादी को दिए जाने का प्रावधान किया जा सकता है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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