Saturday, July 13, 2024
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जाकिर नाइक का फैन है मुन्नन खाँ का बेटा मोहम्मद कासिम, खौफ बाप जैसा ही: CAA विरोधी हिंसा में था शामिल, SDM की किडनैपिंग में हो चुकी है उम्रकैद; गैंगस्टर ऐक्ट में कई केस

मोहम्मद कासिम ने अपने अब्बू मुन्नन खाँ के साथ ही अपराध की दुनिया में कदम रखा था। उस पर पहला केस आज से 35 साल पहले 1989 में दर्ज हुआ था। यह आपराधिक मुकदमा बलरामपुर जिले के थाना कोतवाली रेहरा बाजार में दर्ज हुआ था। अपराध संख्या 82/89 के तहत दर्ज हुई इस FIR में कासिम पर IPC की धारा 147, 149, 332, 307, 353, 368 और 506 के तहत कार्रवाई हुई थी।

अयोध्या के नवनिर्मित राममंदिर में 22 जनवरी 2024 को भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा हो गई। भगवान राम की जन्मभूमि को लेकर हिंदुओं द्वारा किए गए संघर्षों के कई अनजान पहलुओं से लोगों को ऑपइंडिया लगातार परिचित करवाता आ रहा है। इस क्रम में कारसेवकों के नरसंहार में तत्कालीन सांसद मुन्नन खाँ के नाम से जाना जाने वाला फसीउर रहमान की संदिग्ध भूमिका सामने आई।

इस मामले की तह में जाने पर हमें मुन्नन खाँ के काले कारनामों की जानकारी मिली, जिनमें हत्या की नियत से SDM का अपहरण और दंगों में हिन्दुओं पर अत्याचार शामिल है। मुन्नन खाँ के गृह जनमद गोंडा में हमारी पड़ताल के दौरान पता चला कि कासिम खाँ अपने अब्बू मुन्नन खाँ की आपराधिक विरासत को आगे बढ़ा रहा है। गोंडा पुलिस की लिस्ट में कासिम खाँ का नाम एक गैंगस्टर के तौर पर दर्ज है।

अब्बू के साथ ही शुरू किया था अपराध

मोहम्मद कासिम ने अपने अब्बू मुन्नन खाँ के साथ ही अपराध की दुनिया में कदम रखा था। उस पर पहला केस आज से 35 साल पहले 1989 में दर्ज हुआ था। यह आपराधिक मुकदमा बलरामपुर जिले के थाना कोतवाली रेहरा बाजार में दर्ज हुआ था। अपराध संख्या 82/89 के तहत दर्ज हुई इस FIR में कासिम पर IPC की धारा 147, 149, 332, 307, 353, 368 और 506 के तहत कार्रवाई हुई थी।

इसी साल मोहम्मद कासिम खाँ ने अपना दूसरा अपराध बलरामपुर जिले के ही उतरौला कोतवाली क्षेत्र में किया था। तब उस पर FIR संख्या 225/89 में IPC की धारा 147, 149, 332, 307, 364, 504 और 506 के अलावा 7 सी एल एक्ट के तहत कार्रवाई हुई थी।

SDM अपहरण और पिटाई मामले में हुई थी उम्रकैद

मुन्नन खाँ के बेटे कासिम ने 18 नवंबर 1989 में बलरामपुर जिले के उतरौला SDM के अपहरण में अपने अब्बा की मदद की थी। तब मुन्नन खाँ गोंडा जिले के कटरा विधानसभा क्षेत्र से विधायक था। लगभग 25 लोगों को लेकर मुन्नन और उसका बेटा कासिम SDM ऑफिस पहुँचा। यहाँ उसने उपजिलाधिकारी आरपी सिंह की बेरहमी से पिटाई की थी। फिर उन्हें अपनी जीप में लादकर साथ ले जाने लगा।

पुलिस ने घेराबंदी की तो मुन्नन खाँ और उसके साथी रेहरा थाने के पास मिल गए। SDM को अपने साथ ले जाने के लिए कासिम खाँ ने अपने अब्बू और गुर्गों के साथ मिलकर पुलिस से भी हाथापाई की। आखिरकार SDM को बचा लिया गया। इस मामले पुलिस ने एक और FIR दर्ज कराई, जिसमें मुन्नन खाँ और उसके बेटे कासिम आरोपित बनाए गए। पुलिस से मारपीट का यह केस आज भी अदालत में है।

वहीं, SDM के अपहरण का मामला जिला अदालत में लगभग 26 वर्ष चला। इस बीच मुन्नन खाँ की मौत भी हो गई थी। आखिरकार बलरामपुर की जिला अदालत फैसला सुना दिया। सत्र न्यायाधीश उमेश चंद्र शर्मा ने अगस्त 2016 में फैसला सुना दिया। फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश शर्मा ने मुन्नन खाँ के बेटे कासिम सहित मोहम्मद बशीर, यार मोहम्मद और बशीर अहमद को उम्रकैद सजा सुनाई।

इसके साथ ही कोर्ट ने इन आरोपितों पर 25-25 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। इस केस में एक और आरोपित था, जिसका नाम वलीउर्रहमान है। उसे कोर्ट ने 10 साल की सजा और 10 हजार रुपए जुर्माने का दंड दिया। कोर्ट में सुनवाई के दौरान वलीउर्रहमान खुद को बीमार बताता और बैसाखी लेकर कोर्ट आता था। SDM अपहरण मामले में वह हाई कोर्ट से जमानत पर बाहर है।

सरकारी जमीन पर अवैध कब्ज़ा, रोकने पर गुंडागर्दी

कासिम खाँ सिर्फ मारपीट ही नहीं, बल्कि सरकारी जमीनों पर कब्जे आदि का काम भी करता था। कासिम खाँ ने गोंडा जिले में मौजूद नजूल भूमि (जिस भूमि पर किसी का मालिकाना हक ना हो) पर भी अवैध कब्ज़ा कर लिया था। इसको लेकर कासिम के खिलाफ जनवरी 2017 में FIR दर्ज हुई थी। यह FIR उससे संबंधित सरकारी विभाग के अधिकारी रघुनाथ तिवारी ने दर्ज करवाई थी।

इस सरकारी जमीन पर कब्ज़ा करके कासिम खाँ एक कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स का निर्माण करवा रहा था। संबंधित विभाग के अधिकारियों ने कासिम को ऐसा करने से मना किया, लेकिन वह नहीं माना। इसके बाद नजूल अधिकारी ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई, जिसके आधार पर पुलिस ने कासिम को गिरफ्तार कर लिया था। बाद में उस पर अलग से गैंगस्टर एक्ट भी लगा दिया गया था।

2017 में लगा था गैंगस्टर एक्ट

भले ही मुन्नन खाँ की मौत साल 2009 में हो गई थी, लेकिन उसकी दहशत को बनाए रखने की कोशिश उसके बेटे कासिम खाँ ने पूरी शिद्दत से की। कासिम के खिलाफ 1 फरवरी 2017 को गोंडा पुलिस ने FIR दर्ज की थी। यह FIR गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज हुई थी। इस FIR में मोहम्मद कासिम खाँ और उसके साथी मोहम्मद राशिद को नामजद किया गया है।

FIR में पुलिस ने लिखा था कि ऐसे पेशेवर अपराधी का बेरोकटोक घूमना सुरक्षित समाज के लिए खतरा है। रिपोर्ट में कासिम और उसके साथी राशिद की हरकतें आम आदमी के जीवन को नकारात्मक रूप में प्रभावित करने वाली बताई गईं थीं। कोतवाली नगर पुलिस ने मुन्नन के बेटे कासिम खाँ पर FIR संख्या- 152/2017 के अंतर्गत गैंगस्टर एक्ट की धारा 3(1) के तहत कार्रवाई की थी।

इलाके में खौफ, हत्या के लिए अपहरण

पुलिस ने अपनी FIR में कहा था कि कासिम खाँ अपनी गैंग को लेकर लॉ एन्ड ऑर्डर के लिए खतरा पैदा करता रहता है। कासिम अवैध तौर पर सरकारी जमीनों पर कब्ज़ा और हत्या के लिए अपहरण करने जैसे अपराधों से मिलने वाले पैसों से अपनी गैंग को चलाता है। FIR में पुलिस ने खुद माना था कि कासिम का इतना आतंक है कि लोग उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाने से कतराते हैं।

कासिम के खिलाफ दर्ज मुकदमे का हिस्सा

जुलाई 2019 में कासिम को भू-माफिया भी घोषित कर दिया गया था। उसके बाद उसकी बेनामी सम्पत्तियों की जाँच शुरू की गई। हालाँकि, SDM अपहरण मामले में उम्रकैद की सजा होने और गैंगस्टर एक्ट लगने तथा भू-माफिया घोषित होने के बावजूद मुन्नन खाँ के बेटे कासिम खाँ की आपराधिक हरकतें बदस्तूर जारी रहीं और उस पर दर्ज FIR की संख्या बढ़ती रहीं।

CAA विरोधी हिंसा में पुलिस की गाड़ियाँ जलाने का प्रयास

कासिम पर पुलिस ने 20 दिसंबर 2019 में एक FIR करवाई। तब पुलिस ने कहा था कि शुक्रवार को होने वाली जुमे की नमाज़ के बाद कासिम और उसके कई साथी गोंडा कोतवाली क्षेत्र के फारुखी मस्जिद के आगे CAA विरोधी प्रदर्शन किए और सरकार विरोधी नारे लगाए। मौके पर तैनात सब-इंस्पेक्टर और कॉन्स्टेबलों ने कासिम को धारा 144 लागू होने की बात बताते हुए उसे घर लौटने की हिदायत दी।

पुलिस की हिदायत का मोहम्मद कासिम और उसके साथियों पर कोई फर्क नहीं पड़ा। वो उत्तेजक नारेबाजी करने लगे। इसी दौरान भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने गालियाँ देते हुए पुलिस पर हमला कर दिया। इसी दौरान हमलावरों ने कहा, “सालों की गाड़ियों में आग लगा दो।” भीड़ को पुलिसकर्मियों की हत्या के लिए उकसाया जाने लगा। आखिरकार पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए हल्का बल प्रयोग किया।

इस कार्रवाई से कानून व्यवस्था बिगड़ने से बची और आखिरकार अंत में सामान्य हो पाई थी। इस मामले में पुलिस ने हाजी शोएबुद्दीन, हाजी महमूद, हमज़ा हुसैन, सिराज अहमद, शाहिद हलवा पराठे वाले, मेराज अहमद, मशकूर अहमद, मुन्नू सुपारी, नबी खान, नदीम, फबी, असद गंजेड़ी के बेटे, कासिम, वजी, फसी आदि पर नामजद मामला दर्ज कराया।

इन लोगों के अलावा, मामले में भूर्रे फल वाले का लड़का, हाजी अंडा वाले का बेटा, मुन्ना, तहसीन, जावेद, महमूद, बाबू, चाँद, अब्दुल्ला,आरिफ, हारून और जाफर आदि को भी नामजद आरोपित किया गया था। अज्ञात में 210 आरोपितों को रखा गया था। इन सभी पर IPC की धारा 143, 188, 353, 117, 504 और 506 के तहत कार्रवाई हुई थी। ऑपइंडिया के पास इस FIR की कॉपी मौजूद है।

ओवैसी की पार्टी के नेता संग काटा था बवाल

CAA विरोध में गोंडा में हुए हिंसक प्रदर्शन में कासिम के सहयोगी के तौर पर हाजी महमूद भी नामजद हुआ था। हाजी महमूद ओवैसी ब्रदर्स की पार्टी (AIMIM) का गोंडा से तत्कालीन नगर अध्यक्ष था। बताया जा रहा है कि इस हिंसक प्रदर्शन के लिए हाजी महमूद और कासिम ने मिलपर पैसे भी जुटाए थे।

AMU का छात्र, ज़ाकिर नाइक और अरविन्द केजरीवाल समर्थक

साल 1989 में SDM के अपहरण में नामजद होने के लगभग 6 साल बाद कासिम खान ने पढ़ाई के नाम पर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में दाखिला लिया और यहाँ पोस्ट ग्रेजुएशन किया। कासिम खुद को इंजीनियरिंग डिग्रीधारक बताता है। उसके साथी उसे इंजीनियर कासिम भाई कहते हैं। फ़िलहाल कासिम खाँ ने अपने पैतृक गाँव गोंडा के हलधर मऊ में ‘यूनिटी पब्लिक स्कूल’ खोल रखा है।

कासिम खान का पोस्ट

अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कासिम फ़िलहाल कोई राजनैतिक पोस्ट शेयर नहीं कर रहा है। हालाँकि, 10 वर्ष पहले वह AAP और अरविंद केजरीवाल के समर्थन में पोस्ट डालता था। 27 नवंबर 2013 को कासिम ने भगोड़े ज़ाकिर नाइक की पोस्ट भी शेयर की थी और लोगों से शेयर करने की अपील भी की थी। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ भी अक्सर फोटो आदि शेयर किया था।

मुन्नन खाँ का भतीजा है सपा महासचिव

मुन्नन खाँ भले ही अपनी आपराधिक विरासत अपने बेटे कासिम को दे दिया हो, लेकिन उनकी राजनैतिक विरासत भतीजे महफूज खान ने संभाली है। मुन्नन के भतीजे महफूज खान समाजवादी पार्टी के टिकट पर MLC भी बने। सितंबर 2023 में पूर्व MLC महफूज खान की ताजपोशी समाजवादी पार्टी ने महासचिव के पद पर की है। कहा जाता है कि 1985 में जब मुन्नन पहली बार कटरा विधानसभा से चुनाव लड़े थे तब प्रचार और पोलिंग मैनेजमेंट का पूरा जिम्मा महफूज ने उठाया था।

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राहुल पाण्डेय
राहुल पाण्डेयhttp://www.opindia.com
धर्म और राष्ट्र की रक्षा को जीवन की प्राथमिकता मानते हुए पत्रकारिता के पथ पर अग्रसर एक प्रशिक्षु। सैनिक व किसान परिवार से संबंधित।

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सीधे शब्दों में समझें तो पूरा मामला ये है कि ST निगम के कुछ अधिकारियों ने फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल कर के अवैध रूप से 94,73,08,500 रुपए विभिन्न बैंक खातों में भेज दिए।

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