पूर्वोत्तर के उग्रवादियों और आतंकवादियों की शरणस्थली बन चुकी म्यांमार की सीमा को अब सील कर दिया जाएगा। भारत सरकार ने फैसला लिया है कि बॉर्डर को पूरी तरह से सील करके उसकी पेट्रोलिंग की जाएगी। अभी तक भारत और म्यांमार के बीच खुली सीमा थी, जिसके दोनों तरफ 16 किलोमीटर की आवाजाही पर प्रतिबंध नहीं था। इसका फायदा विद्रोही गुट भी उठाते थे।
कुछ साल पहले भारतीय सेना ने सीमा-पार म्यांमार में स्ट्राइक भी की थी। वहीं, पिछले कुछ समय से मणिपुर समेत पूर्वोत्तर के कई राज्यों में म्यांमार से आ रही भीड़ को देखते हुए सीमा को पूरी तरह से बंद करने का निर्णय लिया गया है। इसकी जानकारी केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने दी है।
केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि मोदी सरकार देश की सीमाओं को अभेद्य बनाने के लिए कटिबद्ध है। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “सरकार ने पूरी 1643 किलोमीटर लंबी भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाने का निर्णय लिया है। बेहतर निगरानी के लिए सीमा के साथ-साथ एक पेट्रोल ट्रैक भी बनाया जाएगा। मणिपुर के मोरेह में 10 किलोमीटर के हिस्से में बाड़ लगाई जा चुकी है।”
अमित शाह ने आगे लिखा, “Hybrid Surveillance System (HSS) के माध्यम से बाड़ लगाने के लिए 2 पायलट प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। इसके तहत अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर में प्रत्येक 1 किलोमीटर सीमा पर बाड़ लगाई जाएगी। मणिपुर में लगभग 20 किलोमीटर लंबी सीमा पर बाड़ लगाने को भी मंजूरी मिल चुकी है और इस पर काम जल्द शुरू हो जाएगा।”
The Modi government is committed to building impenetrable borders.
It has decided to construct a fence along the entire 1643-kilometer-long Indo-Myanmar border. To facilitate better surveillance, a patrol track along the border will also be paved. Out of the total border length,…
बता दें कि म्यांमार में मौजूदा समय में सैन्य शासन है। वहाँ के कई विद्रोही गुटों ने सीमा के आसपास के शहरों पर कब्जा कर लिया है। कई बड़े इलाके म्यांमार की सेना के हाथ से निकल गए हैं। ऐसे में खुली सीमा की वजह से म्यांमार के लोग भारत में घुस रहे हैं। मिजोरम में 40 हजार से अधिक शरणार्थी आ चुके हैं।
वहीं, म्यांमार से भारत में बड़ी संख्या में आने वाले रोहिंग्या मुस्लिमों के कारण देश में कानून-व्यवस्था से जुड़ीं समस्याएँ खड़ी हो गई हैं। ऐसे में भारत सरकार का यह फैसला अहम है। इससे पूर्वोत्तर राज्यों के रास्ते भारत में घुसने वाले लोगों पर लगाम लगेगी।
Modi government has decided to construct a fence along the Indo-Myanmar border, says Amit Shah
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार (6 फरवरी 2024) को उत्तराखंड विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से जुड़ा बिल पेश कर दिया। इसको लेकर तमाम मुस्लिम नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आ रही है। कई मुस्लिम नेताओं और संगठनों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है और UCC को नकार दिया है।
खुद को मुस्लिमों का रहनुमा मानने वाला ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने समान नागरिक संहिता की की जरूरत को ही नकार दिया। कॉन्ग्रेस नेता इमरान प्रतापगढ़ी ने समान नागरिक संहिता को मुद्दे से भटकाने वाला बताया। वहीं, सपा नेता एसटी हसन ने कहा कि यह बिल कुरान के खिलाफ होगा तो उसका विरोध किया जाएगा।
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड बोला- यूसीसी की जरूरत ही नहीं
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा, “जहाँ तक यूसीसी का सवाल है, हमारी राय है कि प्रत्येक कानून में एकरूपता नहीं लाई जा सकती है। यदि आप किसी खास समुदाय को इस यूसीसी से छूट देते हैं तो इसे एक समान कोड कैसे कहा जा सकता है? संविधान का आर्टिकल 25 अभी भी है।”
फिरंगी महली ने आगे कहा, “संविधान में धार्मिक स्वतंत्रता दी गई है। मुस्लिमों में शादी विवाह के लिए के लिए शरिया लॉ 1937 से मौजूद है। हिंदुओं, सिखों के लिए कानून मौजूद है। ऐसे में किसी यूसीसी की जरूरत नहीं ही है। बाकी हमारी टीम इस बिल की कॉपी मिलने के बाद इसे पढ़ेगी, फिर आगे का फैसला लिया जाएगा।”
#WATCH | Lucknow: On the UCC bill tabled in Uttarakhand Assembly, Executive Member, All India Muslim Personal Law Board (AIMPLB) Maulana Khalid Rasheed Farangi Mahali says "As far as UCC is concerned, we are of the opinion that uniformity cannot be brought in each and every law… pic.twitter.com/8RuA5GpejS
उत्तराखंड सरकार फेल, मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश: कॉन्ग्रेस
कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने इस मामले को सियासी बताते हुए कहा, “भारतीय जनता पार्टी की राज्य सरकारों के पास भी गिनाने के लिए काम के तौर पर कुछ नहीं है। उत्तराखंड की सरकार कानून व्यवस्था से लेकर महिला सुरक्षा तक में पूरी तरह विफल हो चुकी है। पुष्कर सिंह धामी के पास और कोई तरीका नहीं बचा है लोकसभा चुनाव में जाने के लिए। यूसीसी का प्रोपेगेंडा खड़ा करना है।”
प्रतापगढ़ी ने कहा, “इस देश में अलग-अलग रंग के फूल हैं। अलग-अलग रंग के फूलों की महत्ता है। आप पूरे देश को एक रंग में रंग देना चाहते हैं। ये कहीं से भी भारत जैसे विविधता वाले देश के लिए अच्छा नहीं है। लेकिन पूरी तरह विफल है। अंकिता भंडारी को आजतक इंसाफ नहीं मिला है। उत्तराखंड में आज भी लोगों के पास रोजगार नहीं है, अग्निवीर योजना को लेकर युवाओं में गुस्सा.. इस सारे मुद्दों पर घिरी हुई उत्तराखंड की सरकार के और कुछ नहीं है।”
#WATCH | On the UCC bill in Uttarakhand Assembly, Congress MP Imran Pratapgarhi says, "The Uttarakhand government has failed on all issues including women's safety and law and order in the state….The state government can try this as well, but BJP will still lose in Uttarakhand… pic.twitter.com/7ILW5g6Bxl
असम के बदरुद्दीन अजमल बोले- कचरे में डाल देना चाहिए ये बिल
एआईयूडीएफ के अध्यक्ष और असम से सांसद बदरुद्दीन अजमल ने कहा, “हमारा हिंदुस्तान एक रंगा-रंग बगीचा है। कोई भी बगीचा कितना भी खूबसूरत क्यों न हो, अगर उसमें सिर्फ एक फूल है तो आप उसे ज्यादा देर तक देख नहीं पाएँगे। भारत में लोग सभी धर्मों की संस्कृति जीवित है। यही हमारी खूबसुरती है। एक जिन्न आकर औरत-मर्द सबको एक कर दे… तो ऊपर वाला चाहता तो वैसा ही बना देता। दुनिया में मर्द बनाते ही नहीं, सारी औरतें बन जातीं। औरत नहीं बनाता तो सारे मर्द बन जाते। प्रकृति के खिलाफ कुछ भी ज्यादा दिन चलने वाला नहीं है।”
अजमल ने आगे कहा, “जब सरकार विफल हो जाती है तो कुछ चमकदार लाना होता है। असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा भी समय-समय पर ऐसा ही करते हैं। लोगों का ध्यान भटकाने के लिए वो कुछ न कुछ बोलते रहते हैं। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पीएम मोदी को खुश करना चाहते हैं। ये चलेगा नहीं, क्योंकि ये नेचर के खिलाफ है। बाकी इस बिल को कूड़ेदान में फेंक देना चाहिए।”
#WATCH | On the UCC bill in Uttarakhand Assembly, AIUDF president and MP says, "India is a colourful garden. However beautiful a garden is, if it has just one flower, you will not be able to look at it for long. In India, people of all faiths, culture live. That is our… pic.twitter.com/ufVBny7VmM
इस बिल पर सपा सांसद एसटी हसन ने कहा कि कुरान के खिलाफ कोई भी कानून मंजूर नहीं है। उन्होंने कहा, “अगर कोई कानून ऐसा बनता है, जो हमें… मुसलमानों को कुरान-ए-पाक ने दी गई हिदायत के खिलाफ बनता है। जैसे कि हम साढ़े 14 सौ साल से पैतृक संपत्ति में बेटी को हिस्सा दे रहे हैं। कितना देते हैं, वो अलग बात है। उसके खिलाफ कोई कानून बनता है तो हम उसे मानने को तैयार नहीं है।”
एसटी हसन ने आगे कहा, “अगर मुसलमानों के हित में है, अगर शरियत के हिसाब से है… हर वो कानून शरियत का जिससे दूसरे को परेशानी नहीं हो रही तो इन्हें (भाजपा को) क्यों परेशानी है? कब तक ये हिंदू-मुसलमान कहकर पोलराइज करते रहेंगे। अब लोग तंग आ चुके हैं इस राजनीति से।”
#WATCH | On Uniform Civil Code Uttarakhand 2024 Bill, Samajwadi Party MP ST Hasan says, "If a law is made which is against the tenets of the Quran, then we will not agree with it…Till when will they keep polarising the votes, people are fed up of this now." pic.twitter.com/OjwkCdonWv
गौरतलब है कि उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) आने के बाद समाज में कई बदलाव होने वाले हैं। नए कानून में विवाह, लिव-इन रिलेशनशिप, उत्तराधिकार से लेकर तमाम सिविल मामलों को लेकर प्रावधान किए गए हैं। ये सारे प्रावधान बिन किसी धार्मिक भेदभाव के सब पर लागू होंगे। मसलन, 18 साल की उम्र में अगर लड़की की शादी होनी है तो यह कानून सारे लोगों पर लागू होगा।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू करने के लिए कानूनी जामा पहनाना शुरू कर दिया है। बिल को उत्तराखंड विधानसभा में रखा गया है। सीएम धामी ने खुद इस बिल को विधानसभा के पटल पर रखा। विधानसभा में UCC पेश करते ही यहाँ मौजूद विधायकों ने वन्दे मातरम और जय श्रीराम के नारे लगाए।
समान नागरिक संहिता बिल में विवाह, तलाक और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े अहम बिंदु भी शामिल किए गए हैं। इसमें उत्तराधिकार के महत्वपूर्ण मामले पर भी जोर दिया गया है। इस बिल में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर जो खास प्रावधान किए गए हैं, उसके बारे में हम यहाँ विस्तार से बता रहे हैं।
उत्तराखंड की धामी सरकार ने लिव-इन रिलेशनशिव को कानून के दायरे में ला दिया है। उत्तराखंड सरकार ने लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया है। इसके लिए दोनों (पुरुष और महिला) को अपना स्टेटमेंट जमा कराना होगा। इसमें दो बिंदु हैं।
I – उत्तराखंड में लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वालों के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी है, भले ही वो बाहर के रहने वाले हों। इसके लिए जिले के रजिस्ट्रार से संपर्क करना होगा।
II – अन्य राज्यों में रहने वाले उत्तराखंड के निवासी उस रजिस्ट्रार के यहाँ संपर्क कर सकता है, जिसके अधिकार क्षेत्र में वह राज्य में आमतौर पर निवास करता है।
बच्चे को कानूनी वैधता: लिव-इन रिलेशनशिप के दौरान यदि बच्चा पैदा होता है तो उस बच्चे को अवैध नहीं कहा जाएगा। उस बच्चे को कानूनी संरक्षण मिलेगा। वो उस कपल का कानूनी बच्चा रहेगा।
किन परिस्थितियों में लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन नहीं होगा?: लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन नहीं किया जा सकता, अगर..
I- जिन रिश्तों को कानूनी रूप से लिव-इन रिलेशिनशिप धारा 3 के उपधारा (1) के खंड डी के तहत प्रतिबंधित किया गया हो। इनमें 74 नजदीकी रिश्तों की सूची है।
हालाँकि जिन लोगों की स्थानीय प्रथाएँ या मान्यताएँ इसका (लिव-इन रिलेशनशिप) का विरोध नहीं करते, वैसे लोगों को अनुमति दी जाएगी। बस, ये लोकनीति और नैतिकता के खिलाफ न हो।
II- ऐसे लोग लिव-इन रिलेशनशिप में नहीं जा सकते, जिनमें से एक-से-कम एक व्यक्ति शादीशुदा है या पहले से किसी के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहा है, लेकिन उससे अलग नहीं हुआ है।
III- लिव-इन रिलेशनशिप के लिए पहुँचे जोड़ों में कोई नाबालिग होगा तो इसका रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाएगा।
IV- जोड़ों में से कोई एक भी व्यक्ति किसी भी तरह से दबाव में हो या उससे झूठ बोला गया हो या किसी तरह के पहचान की समस्या हो (पहचान छिपाने का मामला), वह लिव-इन रिलेशन के योग्य नहीं है।
लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी सुरक्षा- रजिस्ट्रेशन अनिवार्य
लिव-इन रजिस्ट्रेशन को कैसे रजिस्टर्ड कराएँ, इसके लिए चार महत्वपूर्ण बिंदुओं में बताया गया है कि किस तरह से इसका रजिस्ट्रेशन होगा।
1-लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे, या लिव-इन रिलेशनशिप शुरू करना चाहते हैं, तो आपको रजिस्ट्रार ऑफिस में स्टेटमेंट जमा कराना होगा। यानी इसका रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
2- रजिस्ट्रार स्टेटमेंट की जाँच करेगा और उसके सही पाए जाने पर आगे की प्रक्रिया को बढ़ाएगा। इसमें सेक्शन 380 (प्रतिबंधित रिश्तों) के तहत बताए रिश्तों को मान्यता नहीं मिलेगी।
3- रजिस्ट्रार दावों की पुष्टि के लिए आवेदक को बुला सकता है। सभी कागजातों की जाँच करने और संतुष्ट नहीं होने पर अधिकारी अन्य साक्ष्य या कागजात की माँग कर सकता है।
रजिस्ट्रार को मेनटेन करना होगा रजिस्टर : लिव-इन रिलेशनशिप के रजिस्ट्रेशन से लेकर संबंध विच्छेद तक की पूरी जानकारी रजिस्ट्रार को रखनी पड़ेगी। इसके लिए कानूनी व्यावधान किए गए हैं।
लिव-इन रिलेशनशिप का रिश्ता खत्म करने का फैसला: लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे युगल, या उनमें से कोई भी एक रजिस्ट्रा ऑफिस में स्टेटमेंट जमा करके इस रिस्थे को खत्म करने की अपील कर सकता है। अगर एक व्यक्ति ऐसा कर रहा है, तो उसे रजिस्ट्रार के साथ ही दूसरे साथी को भी इसकी एक प्रति देगा, यानी लिखित में उसे लिव-इन रिलेशनशिप से बाहर निकलने की जानकारी देनी होगी।
लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़ी रजिस्ट्रार की जिम्मेदारियाँ
1-इस कानून के लागू हो जाने के बाद रजिस्ट्रार की जिम्मेदारियाँ बढ़ जाएँगी, क्योंकि उसे स्थानीय पुलिस थाने में इसकी सूचना देनी पड़ेगी। अगर युगल की उम्र 21 वर्ष से कम होगी, तो उनके माता-पिता को भी सूचना देनी पड़ेगी।
2- अगर लिव-इन पार्टनर द्वारा रजिस्ट्रार को दी गई जानकारी गलत पाई जाती है या कोई शक होता है तो रजिस्ट्रार तुरंत इसकी सूचना स्थानीय थाना अधिकारी को देंगे।
3-अगर लिव-इन रिलेशनशिप का रिश्ता तोड़ने के लिए एक पक्ष आगे बढ़ता है तो रजिस्ट्रार के सामने अपना स्टेटमेंट दर्ज कराएगा। रजिस्ट्रार इसकी सूचना दूसरे पक्ष को देगा। अगर जोड़े में से एक कोई 21 वर्ष से कम उम्र का/की है तो उनके माता-पिता को भी इस बारे में सूचना दी जाएगी।
लिव-इन रिलेशनशिप की सूचना न देने पर रजिस्ट्रा को इस बारे में जानकारी मिलती है तो वो एक नोटिस जारी करेगा। इस नोटिस के जारी करने के 30 दिन के भीतर जोड़े को अपना स्टेटमेंट जमा कराना होगा और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को पूरा करना होगा। अगर ऐसा नहीं किया तो कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं।
कानूनी कार्रवाई और दंड प्रक्रिया
1- लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़े अगर एक माह के अंदर रजिस्ट्रेशन नहीं कराते हैं और ये दोष साबित हो जाता है तो उन्हें तीन माह की जेल और 10 हजार रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
2- लिव-इन रिलेशनशिप के रजिस्ट्रेशन के दौरान जानकारी छिपाने जैसे मामलों में रजिस्ट्रार उनका रजिस्ट्रेशन भी रद्द कर सकता है। इसके लिए उसे तीन माह तक की जेल और 25 हजार रुपए तक का जुर्माना या दोनों दंड साथ दिए जा सकते हैं।
3-लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़े अगर स्टेटमेंट दर्ज नहीं कराते हैं और नोटिस का भी जवाब नहीं देते हैं तो ऐसे लोगों को 6 माह की सजा और 25 हजार रुपए का जुर्माना या दोनों दंड लगाए जा सकते हैं।
लिव-इन रिलेशनशिप के बाद भरण-पोषण की जिम्मेदारी: अगर एक महिला को उसका लिव-इन पार्टनर छोड़ता है तो वो भरण-पोषण के खर्चे को क्लेम कर सकती है। इसके लिए वो तय नियमों के तहत कोर्ट का सहारा ले सकती है।
बता दें कि समान नागरिक संहिता विधेयक के ड्राफ्ट को पाँच सदस्यीय पैनल ने 2 फरवरी 2024 को उत्तराखंड सरकार को सौंपा था। इस पैनल की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज रंजना देसाई कर रही थीं। इस विधेयक को पेश करने के साथ ही उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जहाँ UCC कानून लाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज (6 फरवरी 2024) समान नागरिक संहिता (UCC) बिल पेश किया। इस बिल पर उत्तराखंड विधानसभा में चर्चा चल रही है। समान नागरिक संहिता के अंतर्गत सभी धर्मों के नागरिकों पर समान कानून लागू होगा। इसमें विवाह से जुड़े प्रावधानाओं को लेकर भी स्पष्ट जानकारी दी गई है।
UCC के अंतर्गत किन रिश्तों में विवाह को कानूनी रूप से निषिद्ध किया गया है, इसे आप नीचे दी गई सूची से समझ सकते हैं। ये सूची बताती है कि UCC लागू होने के बाद पुरुष किन महिलाओं और महिलाएँ किन पुरुषों से विवाह नहीं कर सकेंगी।
कोई भी पुरुष इन महिलाओं से विवाह नहीं कर सकेगा
कोई भी महिला इन पुरुषों से विवाह नहीं कर सकेगी
बहन
भाई
भांजी
भांजा
भतीजी
भतीजा
मौसी
चाचा/ताऊ
बुआ
चचेरा भाई
चचेरी बहन
फुफेरा भाई
फुफेरी बहन
मौसेरा भाई
मौसेरी बहन
ममेरा भाई
ममेरी बहन
नातिन का दामाद
माँ
पिता
सौतेली माँ
सौतेला पिता
नानी
दादा
सौतेली नानी
सौतेला दादा
परनानी
परदादा
सौतेली परनानी
सौतेला परदादा
माता की दादी
परनाना (पिता का नाना)
माता की दादी
सौतेला परनाना
दादी
नाना
सौतेली दादी
सौतेला नाना
पिता की नानी
परनाना
पिता की सौतेली नानी
सौतेला परनाना (माता का सौतेला परनाना)
पिता की परनानी
माता के दादा
पिता की सौतेली परनानी
माता का सौतेला दादा
परदादी
बेटा
सौतेली परदादी
दामाद
बेटी
पोता
बहू (विधवा)
बेटे का दामाद
नातिन
नाती
पोती
बेटी का दामाद
पोते की विधवा बहू
परपोता
परनातिन
पोते का दामाद
परनाती की विधवा
बेटे का नाती
बेटी के पोते की विधवा
पोती का दामाद
बेटे की नातिन
बेटी का पोता
परपोती
नाती का दामाद
परपोते की विधवा
नातिन का बेटा
नाती की विधवा
माता का नाना
इन सभी रिश्तों में किए गए विवाह को UCC के अंतर्गत वैध रिश्ते नहीं माना जाएगा। गौरतलब है कि हिन्दू विवाह अधिनियम के तहत यह बंदिशें पहले से देश की बहुसंख्यक आबादी पर लागू थीं। अब यह उत्तराखंड के भीतर पूरी जनता पर लागू होंगी।
उत्तराखंड पहला ऐसा भारतीय राज्य होगा जहाँ UCC लागू किया जाएगा। अभी तक देश में केवल गोवा में ही UCC लागू था जो कि पुर्तगालियों के दौर से चला आ रहा है। उत्तराखंड के इस UCC कानून का ड्राफ्ट एक 5 सदस्यीय पैनल द्वारा बनाया गया था और इसे 2 फरवरी को उत्तराखंड सरकार को सौंपा गया था। इसके बाद 4 फरवरी, 2024 को इसको कैबिनेट की मंजूरी भी मिल गई थी।
साल 2020 में देश की राजधानी दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा था। इन दंगों के मास्टरमाइंड में एक शरजील इमाम भी था। शरजील पिछले चार सालों से जेल में है। दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में उसका पूरा खेल सामने आ चुका है। चार्जशीट में एक और नाम सामने आया था, जो अब भी आजाद है और अपने काम को बेहद चालाकी से अंजाम भी दे रहा है। वो भी पूरे इस्लामी इकोसिस्टम के साथ समन्वय बनाकर। उसका नाम है आसिफ मुज्तबा।
खास बात ये है कि शरजील इमाम की गिरफ्तारी के बाद लेफ्ट और इस्लामी इकोसिस्टम से जुड़ी मीडिया ने उसे बेगुनाह ठहराने की कोशिश की। उसके भाई मुजम्मिल के बयानों को आधार बनाकर बेगुनाही की कहानियों को बढ़ा-चढ़ाकर छापा। मुजम्मिल भी शरजील इमाम और आसिफ मुज्तवा के सारे कारनामों को जानता था। ये पूरी रिपोर्ट इसी खास मुद्दे पर…
दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगों के 4 साल हो चुके हैं। शरजील इमाम तब से जेल में है। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने 15,000 पन्नों की चार्जशीट में पूरी क्रोनोलॉजी को समझाई है कि कैसे शरजील इमाम, उमर खालिद और अन्य मास्टरमाइंड ने मिलकर 5 दिसंबर 2019 से ही दिल्ली को जलाने की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली थी। इस बीच, शरजील को बेगुनाह बताने में वामपंथी और इस्लामी इकोसिस्टम पूरा जोर लगा रहा है।
इस बीच ‘द वायर’ ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसका शीर्षक था ‘दोषसिद्धि नहीं, एक्टिविस्टों से मदद नहीं, शरजील इमाम ने जेल में बिताए चार साल’। इसमें शरजील के भाई मुजम्मिल का बयान छापा गया है। उसने तमाम भावुक बातें तो कही हैं, साथ ही कहा है कि उसका भाई यानी शरजील इमाम बेगुनाह है। मुजम्मिल लिबरल गिरोह से नाकाफी मदद की भी शिकायत करता है।
इसी समय आसिफ मुज्तबा का एक ट्वीट सामने आया है। आसिफ मुज्तबा माइल्स2स्माइल नाम का एक एनजीओ का चलाता है और अपनी प्रोफाइल पर गर्व से ‘शाहीन बाग मूवमेंट’ लिखता है। वह खुद को शरजील इमाम का छोटा भाई बताता है और उसकी मदद के लिए लोगों को आगे आने के लिए कहता है।
“The elites of political activism, the most renowned names…they refrained from speaking about Sharjeel or extending him any support. Today, whatever solidarity he has is a result of an organic support from the masses,” said Muzammil. (2/n)https://t.co/wsCfC3Dk1F
आसिफ मुज्तबा शरजील इमाम के जेल में बिताए 4 साल पर अपनी बात रखता है और मुजम्मिल के बयान को भी एक्स पर शेयर करता है। वो शरजील इमाम को इनोसेंट यानि ‘मासूम और बेगुनाह’ बताता है।
As his younger brother, I wanted to bring to a wider audience the ideas of Sharjeel Imam, which have been misinterpreted by different people as they wished. (9/n)https://t.co/edG49WVKF3
अगर दिल्ली दंगों के केस नंबर 59 के चार्जशीट को देखें तो इसमें कहा गया है कि शरजील इमाम के मोबाइल से एक ह्वाट्सएप ग्रुप चैट मिला था। इस ग्रुप में आसिफ मुज्तबा और मुज्जमिल के नाम सामने आए हैं। इसमें शरजील इमाम के वॉट्सऐप चैट की एक तस्वीर है, जिसमें वो अपने छोटे भाई मुजम्मिल से बात कर रहा है। ये वही मुजम्मिल है, जो अभी शरजील को बेगुनाह बता रहा है।
इस चैट में मुजम्मिल वैश्विक न्यूज एजेंसी रॉयटर्स का शाहीन बाग प्रदर्शनों से जुड़ा एक आर्टिकल शेयर करता है। मुज्जमिल सवाल करता है कि इस आर्टिकल में सिर्फ आसिफ मुज्तबा का बयान छापा गया है, शरजील इमाम का नहीं। इस पर शरजील कहा कि कोई बात नहीं है, वे दोनों (शरजील इमाम और आसिफ मुज्तबा) ही मास्टरमाइंड हैं।
शरजील और मुजम्मिल की बातचीत
मुजम्मिजल आसिफ के जिस बयान की शिकायत कर रहा है वो है, “The masterminds of the intricately organized operation are two young engineers, trained at the elite Indian Institute of Technology (IIT) – Aasif Mujtaba and Sharjeel, who gave only one name. Mujtaba said he and Sharjeel identify volunteers, delegate tasks, bring in speakers from outside the area, and made sure the protesters avoided any confrontations with police.”
इसका हिंदी अनुवाद इस तरह से है कि ‘इस जटिल लेकिन संगठित ऑपरेशन के मास्टरमाइंड दो युवा इंजीनियर हैं, जो भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) से प्रशिक्षित हैं – आसिफ मुज्तबा और शरजील, जिन्होंने केवल एक नाम बताया। मुज्तबा ने कहा कि वह और शरजील वॉलंटियर्स की पहचान करते हैं, उन्हें उनका काम बताते हैं, वो बाहर से वक्ता बुलाते हैं और ये कोशिश करते हैं कि प्रदर्शन कर रहे लोग पुलिस के साथ कोई झड़प न करें।’
ये तो वो सबूत है, जो ये साफ बता रहा है कि मुज्जमिल को दिल्ली में हिंदुओं के खिलाफ हुई हिंसा से जुड़ी शरजील इमाम की हर बात पता थी। हालाँकि, वो अभी भी छाती पीटते हुए ये साबित करने का प्रयास कर रहा है कि शरजील बेगुनाह है और उसे जानबूझकर फँसाया गया है।
अब हम आपको बताते हैं कि आसिफ मुज्तबा का असली काम क्या है और उसे कब शुरू किया। आसिफ मुज्तबा माइल्स2स्माइल नाम का एक एनजीओ को चलाता है। इस एनजीओ उद्देश्य मुस्लिमों के उत्थान के लिए काम करता है। ट्विटर बायो में भी वो खुद को शाहीन बाग से जुड़ा बताता है। रॉयटर्स जैसे इंटरनेशनल एजेंसियों के आर्टिकल इसकी पुष्टि कर चुके हैं।
आसिफ मुज्तबा का ट्विटर बायो
माइल्स2स्माइल एनजीओ वही संगठन है, जो साल 2020 में हुए दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों के भुक्तभोगी मुस्लिमों और म्यांमार से आए रोहिंग्या घुसपैठियों के नाम पर ‘राहत’ कार्य चलाकर चर्चा में आया था। इस एनजीओ की स्थापना आसिफ मुज्तबा (शरजील इमाम ने सहयोगी मास्टरमाइंड के तौर पर नाम लिया है) ने जून 2020 में की थी। वहीं, ट्विटर आईडी अप्रैल 2020 में ही बना ली गई थी। ये समय दिल्ली में हुए एंटी-हिंदू दंगों के ठीक बाद का समय था।
तब तक दिल्ली दंगों को लेकर शरजील इमाम को गिरफ्तार किया जा चुका था। इस एनजीओ की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, इसका पहला काम हिंदू विरोधी दंगों के दौरान घायल हुए मुस्लिमों की मदद के लिए अल-इस्लाह पब्लिक स्कूल में मेडिकल कैंप चलाने का था। उसी समय स्क्रॉल ने हर्ष मंदर के एनजीओ द्वारा उसी स्कूल में ‘मुस्लिम पीड़ितों की मदद’ के लिए चलाए जा रहे कैंप को लेकर रिपोर्ट लिखी थी।
स्क्रॉल की रिपोर्ट में हर्ष मंदर ने लिखा था, “वॉलंटियर नेटवर्क के माध्यम से स्थानीय लोग भी सामने आ रहे हैं और हर्ष मंदर के ‘कारवाँ-ए-मोहब्बत’ के जरिए अंजाम दिया जा रहा है। उन्होंने बाबू नगर के अल-इस्लाह स्कूल में इमरजेंसी कैंप लगाया है, जहाँ मेडिकल और लीगल मदद दी जा रही है।” यहाँ ये बात ध्यान रखना जरूरी है कि हर्ष मंदर ने भी सीएए विरोधी प्रदर्शनों में भाषण दिए थे।
माइल्स2स्माइल्स फाउंडेशन का रोहिंग्या और नूहं कनेक्शन
माइल्स2स्माइल्स फाउंडेशन के संस्थापक आसिफ मुज्तबा के अनुसार, इस एनजीओ ने हरियाणा के नूहं में रोहिंग्या शिविर में एक एजुकेशन सेंटर बनाया था। आसिफ ने ट्विटर पर दावा किया था कि उसके संगठन ने हरियाणा के नूहं में रोहिंग्या शरणार्थियों (घुसपैठिए पढ़ें) के लिए कंस्ट्रक्शन कराए और रहने के लिए घर बनाए। इसके लिए उसके एनजीओ को फंड भी मिला था।
बता दें कि नूहं हरियाणा के मेवात इलाके में है और ये इलाका ‘मिनी पाकिस्तान‘ के रूप में जाना जाता है। यहाँ हिंदुओं महिलाओं के अपहरण, बलात्कार और जबरन धर्मांतरण की खबरें नियमित रूप से सामने आती रही हैं। बता दें कि ऑपइंडिया ने बताया था कि आसिफ मुज्तबा ने सरकार से अनुमति लिए बिना ही अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्याओं के लिए घर बनाए थे।
दरअसल, जब हरियाणा सरकार अतिक्रमण विरोधी अभियान चला रही थी, तब आसिफ काफी हल्ला मचा रहा था। बता दें कि माइल्स2स्माइल जब से बना है, तब से लेकर अब तब वह रोहिंग्या घुसपैठियों के लिए काम करता रहा है। अपनी वेबसाइट पर भी इस एनजीओ ने रोहिंग्याओं के लिए किए जा रहे कामों को लिस्ट किया है।
यही नहीं, नूहं हिंसा के बाद जब सरकार ने कार्रवाई की, तब भी वो सिर्फ रोहिंग्याओं के खिलाफ कार्रवाई को ही मुद्दा बना रहा था।
आसिफ के ट्वीट का स्क्रीनशॉट
आसिफ और इस्लामी गिरोह के फेक न्यूज पेडलर जुबैर का कनेक्शन
साल 2022 में देश के कई राज्यों में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाए गए। तब आसिफ मुज्तबा के एनजीओ माइल्स2स्माइल ने उनके नाम पर पूरे देश में उगाही की। यही नहीं, जुबैर ने इस काम को आगे बढ़ाया और लोगों से बढ़-चढ़कर मदद देने की अपील की।
Let's start a fund raising campaign to help people whose buildings and shop were demolished. Can local volunteers help in collecting the names of the people who would need help? We can get in touch with @ketto or @milaapdotorg or any other fund raising platforms who can help.
इस काम के लिए कीटो जैसी फंडराइजिंग साइट्स की मदद ली गई। इस तरह से एक करोड़ रुपए से अधिक की धनराशि उगाही गई, उसे इस्लामी इकोसिस्टम ने सिर्फ मुस्लिमों में बाँटे गए। इसके लिए जुबैर ने एनजीओ को बधाई भी दी।
Of 1Cr+, @miles2smile_ received 30L from Ketto yesterday ( Pending funds would be transferred by Ketto tomorrow), They've distributed 19.5L today to 10 people. Remaining would be transferred as an when they receive (at the earliest). Thanks to one and all. ❤️? https://t.co/SwHADhRZEX
अब तक तो ये साफ ही हो चुका है कि आसिफ मुज्तबा वही आदमी है, जिसका जिक्र खुद शरजील इमाम ने मास्टरमाइंड के तौर पर किया है। दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में भी उसका नाम आया है। शरजील के भाई मुजम्मिल को भी दोनों के बारे में पता है। इंटरनेशनल मीडिया रिपोर्ट्स में भी उसके बयान छपे हैं।
न सबके बावजूद आसिफ मुज्तबा न सिर्फ खुलकर अपना एनजीओ चला रहा है, बल्कि उसकी आड़ में वह रोहिंग्याओं की खुलकर मदद कर रहा है। इसमें मोहम्मद जुबैर जैसे फेक न्यूज पेडलर का भी उसे साथ मिल रहा है, जो शुरू से ही दिल्ली के एंटी-हिंदू दंगों के दोषियों को बचाने के लिए काम करता रहा है।
यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में नूपुर जे शर्मा द्वारा लिखा गया है। मूल रिपोर्ट को पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) आने के बाद समाज में कई बदलाव होने वाले हैं। नए कानून में शादी विवाह, लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी कुछ प्रावधान किए गए हैं। ये सारे प्रावधान बिन किसी भेदभाव के सब पर लागू होंगे। मसलन 18 साल की उम्र में अगर लड़की की शादी होनी है तो 18 में ही होगी। चाहे वो हिंदू परिवार की लड़की हो या मुस्लिम परिवार की। इसी तरह डॉयवोर्स भी कानूनी ढंग से ही लिया जाएगा। किसी के मुँह से कह देने भर से ये तलाक नहीं वैध्य होगा। इसी तरह लिव-इन रिलेशन में भी रहने के लिए दोनों पार्टनर के माता-पिता को जानकारी देना जरूरी होगा। वहीं उत्तराधिकारी संबंधी प्रावधान की बात करें तो कानून में सम्मान श्रवण कुमार जैसे बच्चों को दिया गया है, औरंगजेब जैसे बच्चों को नहीं।
अब आइए बिंदुवार ढंग से समझते हैं कि समान नागरिक संहिता से शादी संबंधी मामलों में क्या प्रावधान रहेगा।
समान नागरिक संहिता में विवाह से संबंधित प्रमुख बिंदु
किसी भी वर्ग में शादी करने की उम्र लड़के के लिए न्यूनतम 21 वर्ष और लड़की की 18 वर्ष होगी।
विवाह केवल एक पुरुष और एक महिला के मध्य होगा।
बहुविवाह प्रतिबंधित होगा। पति-पत्नी के जीवित रहते दूसरे से शादी करने का अधिकार नहीं होगा।
तलाक के बाद अगर उसी पुरुष से या अन्य पुरुष से शादी करनी हो तो महिला को किसी शर्त में नहीं बाँधा जाएगा।
विवाह के बाद यदि धर्म परिवर्तन करना है तो पति/पत्नी को बताना जरूर होगा। अगर ऐसा नहीं होता तो दूसरे व्यक्ति को तलाक का और गुजारा भत्ता क्लेम करने का अधिकार होगा।
शादी के बाद पंजीकरण अनिवार्य होगा। प्रक्रिया सरल बनाने के लिए रजिस्ट्रेशन का वेब पोर्टल भी होगा।
सरकारी योजना का लाभ भी केवल उन्हीं दंपतियों को मिलेगा जिनकी शादी रजिस्टर्ड होगी।
विवाह में धार्मिक विधि-विधानों से बिलकुल छेड़छाड़ नहीं हुई है। हर समुदाय अपनी परंपरा अनुसार शादी कर सकता है।
UCC में उत्तराधिकार संबंधी कानून
व्यक्ति की सभी संतानों का, चाहे वो पुत्र को या पुत्री, उनके पिता की संपत्ति में बराबर का अधिकार होगा।
रिश्ता जायज हो या नाजायज… अगर उस रिश्ते से संतान उत्पन्न होती है तो उसे जायज मानकर सम्मान भी दिया जाएगा और संपत्ति में अधिकार भी।
अगर बच्चे के गर्भ में रहने के दौरान पिता का देहांत हो जाता है तो तब भी उसे इस कानून की धारा-55 के तहत अन्य संतानों की तरह संपत्ति में अधिकार मिलेगा।
अगर कोई संतान श्रवण कुमार की तरह अपने माता-पिता की सेवा करता है और दूसरा औरंगजेब की तरह संपत्ति के लिए अपने माता पिता से गल बर्ताव करता है तो इस नए कानून के तहत दोनों तरह के बच्चों का संपत्ति में समान अधिकार नहीं होगा।
नए कानून में धारा-3(1-ड़), 3 (3-झ) के तहत प्रावधान है कि कोई भी व्यक्ति किसी को भी स्वेच्छा अपनी वसीयत में शामिल कर सकता है और चाहे तो उसे हटा भी सकता है।
यूसीसी में अधिकार
विवाह-विच्छेदन या डायवोर्स
– UCC में हर वर्ग के लिए प्रावधान है कि डायवोर्स एक प्रक्रिया (कानूनी) से ही होगा। किसी मजहब को पर्सनल लॉ के नाम पर इसमें रियायत नहीं मिलेगी।
लिव-इन रिलेशनशिप
लिव-इन रिलेशनशिप के दौरान या उसके बाद होने वाले विवादों से बचने के लिए सरकार यूसीसी में प्रावधान लाई है कि:
शादी से पहले एक दूसरे के साथ लिव-इन में रहने के लिए कपल्स के लिए एक रजिस्ट्रेशन करवाना होगा ताकि दोनों के सहवास की जानकारी और उनके पहचान के बारे में प्रशासन पर रहे।
इसके बाद इस रजिस्ट्रेशन के बारे में माता-पिता को भी बताना होगा कि वो घर से अलग कहाँ और किसके साथ रहते हैं। ऐसा लड़के और लड़की दोनों को करना होगा।
लिव में रहने के लिए लड़की की उम्र 18 साल और लड़की की उम्र 21 होनी जरूरी है।
दिल्ली पुलिस ने राजधानी के नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से इस्लामी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी रियाज अहमद को दबोचा है। रियाज अहमद जम्मू-कश्मीर में आतंक फैलाने का काम कर रहा था और कुपवाड़ा मॉड्यूल का हिस्सा है। उसे आज सुबह यानी मंगलवार (6 फरवरी 2024) को गिरफ्तार किया गया रियाज 31 जनवरी 2023 को भारतीय सेना से रिटायर हुआ था।
दरअसल, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने लश्कर के कुछ आतंकियों को गिरफ्तार किया था। उनसे पूछताछ के बाद दिल्ली पुलिस ने रियाज अहमद को दबोचा है। दिल्ली पुलिस ने बताया है कि आतंकी रियाज अहमद दो और आतंकियों- खुर्शीद अहमद राठेर और ग़ुलाम सरवर राठेर के साथ मिलकर ‘लाइन ऑफ़ कण्ट्रोल’ के पार से हथियार और गोला-बारूद कश्मीर में लाने का काम कर रहा था।
दिल्ली पुलिस ने बताया है कि रियाज सीमा पार बैठे हैंडलर्स से सम्पर्क में था और कश्मीर में आतंक को बढ़ावा दे रहा था। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से पकड़ा गया आतंकी रियाज अहमद सेना से सेवानिवृत्त हो चुका है। वह कश्मीर के नया गबरा गाँव का रहने वाला है। यह गाँव कुपवाड़ा में है। उसके बारे में जानकारी कुपवाड़ा में आतंकियों की धर-पकड़ के बाद हुई।
गौरतलब है कि कुपवाड़ा में बीते दिनों पाँच लोगों को बड़ी संख्या में एके-47 राइफल और मैगजीन के साथ पकड़ा गया था। इन लोगों को हथियार पाकिस्तान में बैठे हैंडलर मंज़ूर अहमद शेख और काजी मोहम्मद खुशाल द्वारा भेजे जाते थे। इन हथियारों के जरिए ये घाटी में आतंकवाद को फिर से जीवित करना चाह रहे थे। रियाज कुपवाड़ा आतंकी मॉड्यूल का हिस्सा है, जो हमले की योजना बना रहा था।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि 4 फरवरी 2024 को रियाज को लेकर विशेष सूचना मिली थी, जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया। वह कुपवाड़ा में हुई गिरफ्तारियों के बाद से फरार चल रहा था। उसके पास से पुलिस ने एक मोबाइल फ़ोन बरामद किया है। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा एजेंसियों को भी जानकारी दे दी है।
दिल्ली पुलिस ने बताया कि रियाज अहमद को भीड़ से ढूंढकर गिरफ्तार किया गया। वह स्टेशन के गेट नम्बर 1 से भागने की कोशिश कर रहा था। दिल्ली पुलिस रियाज से कड़ी पूछताछ की है। उसने पूछताछ में खुलासा किया है कि वह 3 फरवरी को जबलपुर से महाकौशल एक्सप्रेस से हजरत निजामुद्दीन स्टेशन पहुँचा था। उसके साथ उसका एक दोस्त अल्ताफ भी था। अल्ताफ भी सेना से सेवानिवृत्त है।
दुनिया में डीपफेक धीरे-धीरे बड़ा खतरा बन रहा है। अभी तक आप जानी-मानी हस्तियों को इसका शिकार होते कई बार देख चुके हैं। लेकिन अब मामला चौंकाने वाला आया है। एक कंपनी इसके कारण वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार हुई है, जो इसी तकनीक के जरिए अंजाम दिया गया।
पूरा मामला हॉन्गकॉन्ग का है। वहाँ एक कंपनी को डीपफेक कॉल की मदद से एक मल्टीनेशनल कंपनी को 212 करोड़ रुपए का चूना लगा दिया गया।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, डीपफेक का इस्तेमाल कर फ्रॉड करने वाले ने कंपनी का चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) का फोटो इस्तेमाल करके ऑफिस कर्मचारी को कॉन्फ्रेंस कॉल की और उसे पैसे भेजने को कहा। कर्मचारी ने भी वीडियो कॉल पर अपने सीएफओ को देख 2 फरवरी को इतना बड़ा अमाउंट ट्रांस्फर कर दिया।
बाद में पता चला कि उनके साथ कितना बड़ा फ्रॉड हुआ है। हॉन्गकॉन्ग का यह पहला मामला है इसलिए किसी ने सोचा भी नहीं था ऐसा हो सकता है। फ्रॉड के बाद कर्मचारियों ने पुलिस को बताया कि पैसों की माँग के लिए एक ईमेल जनवरी में आया था मगर तब उन लोगों ने इस पर ध्यान नहीं दिया।
उन्हें लगा जो सीएफओ की ओर से कॉल आई है उसमें सभी लोग कंपनी के होंगे। कर्मचारी का कहना भी है कि कॉल पर जो लोग दिखाई दे रहे थे वो उनमें से कइयों के चेहरे जानता था इसलिए उसने आसानी से विश्वास कर लिया। उसे नहीं पता था वो सारे लोग डीपफेक की मदद से क्रिएट किए गए थे।
एम्प्लॉय ने बताया कि वीडियो कॉल पर उससे उसका परिचय माँगा गया जैसे आमतौर पर कोई सीनियर माँगता है। इसके बाद डीपफेक करने वाले फ्रॉड से एक हफ्ता ये सोचकर बात चली कि वो कंपनी के सीएफओ हैं। इस दौरान कर्मचारी से 200 मिलियन हॉन्गकॉन्ग डॉलर (25.6 मिलियन डॉलर/ 2 अरब 12 करोड़ 32 लाख 38 हजार रुपए) के 15 ट्रांजैक्शन करवाए गए।
कंपनी से इतना पैसा जाने के बाद जब इसका पता लगाया गया तो हेडक्वार्टर और कर्मचारी दोनों के बीच बात हुई। तब, पता चला कि इस तरीके से उस कर्मचारी पर डीपफेक कॉल आई थी जिसने सीएफओ के चेहरे का प्रयोग करके उससे पैसे माँग लिए।
इस घोटाले का खुलासा करते हुए पुलिस अधिकारी ने बताया है कि तमाम लोगों के चेहरे लगाकर वीडियो कॉन्फ्रेंस हुई थी, लेकिन वो सब डीपफेक थे। उन्होंने कर्मचारी को अपनी बात में फँसाकर कंपनी के पैसे लूट लिए।
अब मामले की जाँच की जानकारी देते हुए पुलिस ने बताया कि उन्होंने ऐसे फ्रॉड केसों में 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपित लोगों का आईडी चुराकर 90 लोन एप्लीकेशन 54 बैंक में दे चुके हैं। वहीं कम से कम 20 मामलों में AI डीपफेक के जरिए बेवकूफ बनाया गया था।
आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के ठाठ को लेकर एक चैंकाने वाला दावा नवीन जिंदल ने किया है। दिल्ली बीजेपी के पूर्व नेता जिंदल ने बताया है कि गुजरात चुनाव प्रचार के दौरान केजरीवाल दिन में ऑटो में घूमने का ड्रामा करते थे, जबकि ठहरते महाराजा सुईट में थे। उनके अनुसार इस सुईट का किराया 8-10 लाख रुपए प्रतिदिन आता है।
नवीन जिंदल ने यह दावा एक्स/ट्विटर पर एक वीडियो पोस्ट कर लगाया है। उन्होंने लिखा है, “भोली-भाली जनता के सामने ढीली सी शर्ट पहनकर अपने आप को ‘आम आदमी’ और ‘कट्टर ईमानदार’ कहने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री की सच्चाई देखिए। गुजरात चुनाव में जनता के सामने ऑटो में घूमने वाले रात को पाँच सितारा होटलों के महाराजा सुईट में रुकते थे, जिसका एक दिन का किराया ₹8 से ₹10 लाख था।”
भोली-भाली जनता के सामने ढीली सी शर्ट पहनकर अपने आप को ‘आम आदमी’ और “कट्टर ईमानदार” कहने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री की सच्चाई देखिए।
गुजरात चुनाव में जनता के सामने ऑटो में घूमने वाले रात को पाँच सितारा होटलों के महाराजा सुईट रूम में रुकते थे.. जिसका एक दिन का किराया 8 से 10 लाख… pic.twitter.com/I12E4drnma
आगे उन्होंने लिखा है, ” शीशमहल में रहने वाले केजरीवाल जी दिल्ली के टैक्सपेयर के पैसों को अपनी मौज-मस्ती और ऐशोआराम पर उड़ाते हो और जनता से झूठ बोलते हो। मेरी अरविंद केजरीवाल जी को खुली चुनौती है अगर वे तनिक भी ईमानदार है तो किसी भी सार्वजनिक मंच आ जाइए या मुझको बुलाइए। मैं सारे दस्तावेज लेकर आऊँगा बहस के लिए।”
नवीन जिंदल ने वीडियो में बताया है कि ‘महाराजा सुईट’ में एक प्राइवेट स्वीमिंग पूल भी है और अरविंद केजरीवाल इसमें अपने ‘दोस्तों’ के साथ नहाना पसंद करते हैं। उन्होंने कहा, “मैं एक आम आदमी हूँ जिसके नाम पर अरविंद केजरीवाल जी टैक्स वसूल कर ₹8-10 लाख अपने और अपने निजी सचिव वैभव कुमार के लिए खर्च करते हैं।” उन्होंने केजरीवाल पर दोहरे चरित्र पर प्रश्न उठाते हुए कहा है, “₹10 लाख रुपए के कमरे में रुके और बाहर निकल कर बैठे ₹80 देकर थ्री व्हीलर में? देश की जनता को क्या समझते हो? अब समझ में आया कि आपने अपने घर में करोड़ों लाखों के परदे कैसे लगा लिए?”
नवीन जिंदल ने कहा कि अरविन्द केजरीवाल ने 40 दिनों तक प्रचार किया और उस दौरान होटल में रुके। उन्होंने कहा कि दिल्ली में लोगों के पास खाने को नहीं है, सरकारी कर्मचारियों को समय पर तनख्वाह नहीं मिल रही और स्कूल खस्ताहालत में है, क्योंकि पैसा नहीं है। नवीन जिंदल ने उनके आरोपों को गलत सिद्ध करने की चुनौती भी अरविन्द केजरीवाल को दी।
सामने आ चुका है केजरीवाल का शीशमहल
इससे पहले केजरीवाल के बंगले के बारे में सनसनीखेज जारी सामने आई थी। टाइम्स नाऊ की एक रिपोर्ट बताती है कि केजरीवाल ने दिल्ली के सिविल लाइन्स एरिया स्थित अपने 13,000 स्क्वायर फीट बड़े बंगले की साज-सज्जा में लगभग ₹45 करोड़ खर्च किए। टाइम्स नाऊ ने इससे सम्बंधित दस्तावेज भी दिखाए थे। इससे पता चला था कि एक-एक परदे तक पर ₹5-8 लाख रुपए खर्च किए गए। बंगले में लगाने के लिए पत्थर वियतनाम से मँगाए गए थे। 6 अलमारियों पर ₹40 लाख खर्चे किए गए थे।
गौरतलब है कि 2013 में दिल्ली में सरकार बनाने के पहले केजरीवाल कहा करते थे कि वह स्वयं और उनके मंत्री सरकारी बंगले नहीं लेंगे और छोटे सरकारी फ्लैट में रहेंगे। दस वर्षों के बाद उनके वादे जमीन पर उतरते नहीं दिख रहे और केवल राजनीतिक बयानबाजी ही सिद्ध हो रहे हैं।
अयोध्या के नवनिर्मित राममंदिर में 22 जनवरी 2024 को भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा हो गई। भगवान राम की जन्मभूमि को लेकर हिंदुओं द्वारा किए गए संघर्षों के कई अनजान पहलुओं से लोगों को ऑपइंडिया लगातार परिचित करवाता आ रहा है। इस क्रम में कारसेवकों के नरसंहार में तत्कालीन सांसद मुन्नन खाँ के नाम से जाना जाने वाला फसीउर रहमान की संदिग्ध भूमिका सामने आई।
इस मामले की तह में जाने पर हमें मुन्नन खाँ के काले कारनामों की जानकारी मिली, जिनमें हत्या की नियत से SDM का अपहरण और दंगों में हिन्दुओं पर अत्याचार शामिल है। मुन्नन खाँ के गृह जनमद गोंडा में हमारी पड़ताल के दौरान पता चला कि कासिम खाँ अपने अब्बू मुन्नन खाँ की आपराधिक विरासत को आगे बढ़ा रहा है। गोंडा पुलिस की लिस्ट में कासिम खाँ का नाम एक गैंगस्टर के तौर पर दर्ज है।
अब्बू के साथ ही शुरू किया था अपराध
मोहम्मद कासिम ने अपने अब्बू मुन्नन खाँ के साथ ही अपराध की दुनिया में कदम रखा था। उस पर पहला केस आज से 35 साल पहले 1989 में दर्ज हुआ था। यह आपराधिक मुकदमा बलरामपुर जिले के थाना कोतवाली रेहरा बाजार में दर्ज हुआ था। अपराध संख्या 82/89 के तहत दर्ज हुई इस FIR में कासिम पर IPC की धारा 147, 149, 332, 307, 353, 368 और 506 के तहत कार्रवाई हुई थी।
इसी साल मोहम्मद कासिम खाँ ने अपना दूसरा अपराध बलरामपुर जिले के ही उतरौला कोतवाली क्षेत्र में किया था। तब उस पर FIR संख्या 225/89 में IPC की धारा 147, 149, 332, 307, 364, 504 और 506 के अलावा 7 सी एल एक्ट के तहत कार्रवाई हुई थी।
SDM अपहरण और पिटाई मामले में हुई थी उम्रकैद
मुन्नन खाँ के बेटे कासिम ने 18 नवंबर 1989 में बलरामपुर जिले के उतरौला SDM के अपहरण में अपने अब्बा की मदद की थी। तब मुन्नन खाँ गोंडा जिले के कटरा विधानसभा क्षेत्र से विधायक था। लगभग 25 लोगों को लेकर मुन्नन और उसका बेटा कासिम SDM ऑफिस पहुँचा। यहाँ उसने उपजिलाधिकारी आरपी सिंह की बेरहमी से पिटाई की थी। फिर उन्हें अपनी जीप में लादकर साथ ले जाने लगा।
पुलिस ने घेराबंदी की तो मुन्नन खाँ और उसके साथी रेहरा थाने के पास मिल गए। SDM को अपने साथ ले जाने के लिए कासिम खाँ ने अपने अब्बू और गुर्गों के साथ मिलकर पुलिस से भी हाथापाई की। आखिरकार SDM को बचा लिया गया। इस मामले पुलिस ने एक और FIR दर्ज कराई, जिसमें मुन्नन खाँ और उसके बेटे कासिम आरोपित बनाए गए। पुलिस से मारपीट का यह केस आज भी अदालत में है।
वहीं, SDM के अपहरण का मामला जिला अदालत में लगभग 26 वर्ष चला। इस बीच मुन्नन खाँ की मौत भी हो गई थी। आखिरकार बलरामपुर की जिला अदालत फैसला सुना दिया। सत्र न्यायाधीश उमेश चंद्र शर्मा ने अगस्त 2016 में फैसला सुना दिया। फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश शर्मा ने मुन्नन खाँ के बेटे कासिम सहित मोहम्मद बशीर, यार मोहम्मद और बशीर अहमद को उम्रकैद सजा सुनाई।
इसके साथ ही कोर्ट ने इन आरोपितों पर 25-25 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। इस केस में एक और आरोपित था, जिसका नाम वलीउर्रहमान है। उसे कोर्ट ने 10 साल की सजा और 10 हजार रुपए जुर्माने का दंड दिया। कोर्ट में सुनवाई के दौरान वलीउर्रहमान खुद को बीमार बताता और बैसाखी लेकर कोर्ट आता था। SDM अपहरण मामले में वह हाई कोर्ट से जमानत पर बाहर है।
सरकारी जमीन पर अवैध कब्ज़ा, रोकने पर गुंडागर्दी
कासिम खाँ सिर्फ मारपीट ही नहीं, बल्कि सरकारी जमीनों पर कब्जे आदि का काम भी करता था। कासिम खाँ ने गोंडा जिले में मौजूद नजूल भूमि (जिस भूमि पर किसी का मालिकाना हक ना हो) पर भी अवैध कब्ज़ा कर लिया था। इसको लेकर कासिम के खिलाफ जनवरी 2017 में FIR दर्ज हुई थी। यह FIR उससे संबंधित सरकारी विभाग के अधिकारी रघुनाथ तिवारी ने दर्ज करवाई थी।
इस सरकारी जमीन पर कब्ज़ा करके कासिम खाँ एक कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स का निर्माण करवा रहा था। संबंधित विभाग के अधिकारियों ने कासिम को ऐसा करने से मना किया, लेकिन वह नहीं माना। इसके बाद नजूल अधिकारी ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई, जिसके आधार पर पुलिस ने कासिम को गिरफ्तार कर लिया था। बाद में उस पर अलग से गैंगस्टर एक्ट भी लगा दिया गया था।
2017 में लगा था गैंगस्टर एक्ट
भले ही मुन्नन खाँ की मौत साल 2009 में हो गई थी, लेकिन उसकी दहशत को बनाए रखने की कोशिश उसके बेटे कासिम खाँ ने पूरी शिद्दत से की। कासिम के खिलाफ 1 फरवरी 2017 को गोंडा पुलिस ने FIR दर्ज की थी। यह FIR गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज हुई थी। इस FIR में मोहम्मद कासिम खाँ और उसके साथी मोहम्मद राशिद को नामजद किया गया है।
FIR में पुलिस ने लिखा था कि ऐसे पेशेवर अपराधी का बेरोकटोक घूमना सुरक्षित समाज के लिए खतरा है। रिपोर्ट में कासिम और उसके साथी राशिद की हरकतें आम आदमी के जीवन को नकारात्मक रूप में प्रभावित करने वाली बताई गईं थीं। कोतवाली नगर पुलिस ने मुन्नन के बेटे कासिम खाँ पर FIR संख्या- 152/2017 के अंतर्गत गैंगस्टर एक्ट की धारा 3(1) के तहत कार्रवाई की थी।
इलाके में खौफ, हत्या के लिए अपहरण
पुलिस ने अपनी FIR में कहा था कि कासिम खाँ अपनी गैंग को लेकर लॉ एन्ड ऑर्डर के लिए खतरा पैदा करता रहता है। कासिम अवैध तौर पर सरकारी जमीनों पर कब्ज़ा और हत्या के लिए अपहरण करने जैसे अपराधों से मिलने वाले पैसों से अपनी गैंग को चलाता है। FIR में पुलिस ने खुद माना था कि कासिम का इतना आतंक है कि लोग उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाने से कतराते हैं।
कासिम के खिलाफ दर्ज मुकदमे का हिस्सा
जुलाई 2019 में कासिम को भू-माफिया भी घोषित कर दिया गया था। उसके बाद उसकी बेनामी सम्पत्तियों की जाँच शुरू की गई। हालाँकि, SDM अपहरण मामले में उम्रकैद की सजा होने और गैंगस्टर एक्ट लगने तथा भू-माफिया घोषित होने के बावजूद मुन्नन खाँ के बेटे कासिम खाँ की आपराधिक हरकतें बदस्तूर जारी रहीं और उस पर दर्ज FIR की संख्या बढ़ती रहीं।
CAA विरोधी हिंसा में पुलिस की गाड़ियाँ जलाने का प्रयास
कासिम पर पुलिस ने 20 दिसंबर 2019 में एक FIR करवाई। तब पुलिस ने कहा था कि शुक्रवार को होने वाली जुमे की नमाज़ के बाद कासिम और उसके कई साथी गोंडा कोतवाली क्षेत्र के फारुखी मस्जिद के आगे CAA विरोधी प्रदर्शन किए और सरकार विरोधी नारे लगाए। मौके पर तैनात सब-इंस्पेक्टर और कॉन्स्टेबलों ने कासिम को धारा 144 लागू होने की बात बताते हुए उसे घर लौटने की हिदायत दी।
पुलिस की हिदायत का मोहम्मद कासिम और उसके साथियों पर कोई फर्क नहीं पड़ा। वो उत्तेजक नारेबाजी करने लगे। इसी दौरान भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने गालियाँ देते हुए पुलिस पर हमला कर दिया। इसी दौरान हमलावरों ने कहा, “सालों की गाड़ियों में आग लगा दो।” भीड़ को पुलिसकर्मियों की हत्या के लिए उकसाया जाने लगा। आखिरकार पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए हल्का बल प्रयोग किया।
इस कार्रवाई से कानून व्यवस्था बिगड़ने से बची और आखिरकार अंत में सामान्य हो पाई थी। इस मामले में पुलिस ने हाजी शोएबुद्दीन, हाजी महमूद, हमज़ा हुसैन, सिराज अहमद, शाहिद हलवा पराठे वाले, मेराज अहमद, मशकूर अहमद, मुन्नू सुपारी, नबी खान, नदीम, फबी, असद गंजेड़ी के बेटे, कासिम, वजी, फसी आदि पर नामजद मामला दर्ज कराया।
इन लोगों के अलावा, मामले में भूर्रे फल वाले का लड़का, हाजी अंडा वाले का बेटा, मुन्ना, तहसीन, जावेद, महमूद, बाबू, चाँद, अब्दुल्ला,आरिफ, हारून और जाफर आदि को भी नामजद आरोपित किया गया था। अज्ञात में 210 आरोपितों को रखा गया था। इन सभी पर IPC की धारा 143, 188, 353, 117, 504 और 506 के तहत कार्रवाई हुई थी। ऑपइंडिया के पास इस FIR की कॉपी मौजूद है।
ओवैसी की पार्टी के नेता संग काटा था बवाल
CAA विरोध में गोंडा में हुए हिंसक प्रदर्शन में कासिम के सहयोगी के तौर पर हाजी महमूद भी नामजद हुआ था। हाजी महमूद ओवैसी ब्रदर्स की पार्टी (AIMIM) का गोंडा से तत्कालीन नगर अध्यक्ष था। बताया जा रहा है कि इस हिंसक प्रदर्शन के लिए हाजी महमूद और कासिम ने मिलपर पैसे भी जुटाए थे।
AMU का छात्र, ज़ाकिर नाइक और अरविन्द केजरीवाल समर्थक
साल 1989 में SDM के अपहरण में नामजद होने के लगभग 6 साल बाद कासिम खान ने पढ़ाई के नाम पर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में दाखिला लिया और यहाँ पोस्ट ग्रेजुएशन किया। कासिम खुद को इंजीनियरिंग डिग्रीधारक बताता है। उसके साथी उसे इंजीनियर कासिम भाई कहते हैं। फ़िलहाल कासिम खाँ ने अपने पैतृक गाँव गोंडा के हलधर मऊ में ‘यूनिटी पब्लिक स्कूल’ खोल रखा है।
कासिम खान का पोस्ट
अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कासिम फ़िलहाल कोई राजनैतिक पोस्ट शेयर नहीं कर रहा है। हालाँकि, 10 वर्ष पहले वह AAP और अरविंद केजरीवाल के समर्थन में पोस्ट डालता था। 27 नवंबर 2013 को कासिम ने भगोड़े ज़ाकिर नाइक की पोस्ट भी शेयर की थी और लोगों से शेयर करने की अपील भी की थी। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ भी अक्सर फोटो आदि शेयर किया था।
मुन्नन खाँ का भतीजा है सपा महासचिव
मुन्नन खाँ भले ही अपनी आपराधिक विरासत अपने बेटे कासिम को दे दिया हो, लेकिन उनकी राजनैतिक विरासत भतीजे महफूज खान ने संभाली है। मुन्नन के भतीजे महफूज खान समाजवादी पार्टी के टिकट पर MLC भी बने। सितंबर 2023 में पूर्व MLC महफूज खान की ताजपोशी समाजवादी पार्टी ने महासचिव के पद पर की है। कहा जाता है कि 1985 में जब मुन्नन पहली बार कटरा विधानसभा से चुनाव लड़े थे तब प्रचार और पोलिंग मैनेजमेंट का पूरा जिम्मा महफूज ने उठाया था।