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राहुल गाँधी ने पहले बिस्किट कुत्ते के मुँह में लगाया, फिर काॅन्ग्रेस कार्यकर्ता को खिलाया: असम के CM बोले इसी कारण छोड़ी थी पार्टी

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी की एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इसमें वह अपनी रैली के दौरान एक कुत्ते को बिस्किट खिलाते दिख रहे हैं। वहीं, जब कुत्ता वो बिस्किट खाने से मना कर देता है तो वो उसी कुत्ते का मुँह लगा बिस्किट अपने कार्यकर्ता को थमा देते हैं, फिर उससे प्यार से बात करने लगते हैं।

राहुल गाँधी की यह वीडियो कैमरे में कैद होने के बाद अब सोशल मीडिया पर बड़े-बड़े नेता इस पर अपनी टिप्पणी कर रहे हैं। भाजपा नेता अमित मालवीय ने इस वीडियो को शेयर कर कहा, “अभी कुछ दिन पहले कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पार्टी के बूथ एजेंटों की तुलना कुत्तों से की और यहाँ राहुल गाँधी अपनी यात्रा में एक कुत्ते को बिस्किट खिला रहे हैं और जब कुत्ते ने नहीं खाया तो वही बिस्किट उन्होंने अपने कार्यकर्ता को दे दिया।”

भाजपा नेता ने कहा, “जिस पार्टी का अध्यक्ष और युवराज अपने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ कुत्ते की तरह बर्ताव करे तो ऐसी पार्टी का लुप्त हो जाना स्वाभाविक है।”

इसी तरह पल्लवी सीटी ने लिखा, “कितना शर्मनाक है। पहले राहुल गाँधी ने हिमंता बिस्वा सरमा को अपने कुत्ते की प्लेट से बिस्किट खिलाने की कोशिश की। फिर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने पार्टी कार्यकर्ताओं की तुलना कुत्ते से की और अब शहजादे वही बिस्किट पार्टी कार्यकर्ता को दे रहे हैं। ये सम्मान करते हैं ये लोग अपने पार्टी कार्यकर्ताओं, समर्थकों और मतदाताओं का?”

पल्लवी के इस ट्वीट पर हिमंत बिस्वा सरमा ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “सिर्फ राहुल गाँधी ही नहीं बल्कि उनका पूरा परिवार मुझे वो बिस्किट नहीं खिला पाया था। मैं एक गौरवान्वित असमिया और भारतीय हूँ। मैंने उसे खाने से मना कर दिया था और कॉन्ग्रेस से इस्तीफा दे दिया था।”

हिमंता बिस्वा सरमा वाला मामला

बता दें कि इंटरव्यू में एक बार हिमंता बिस्वा सरमा ने अपने साथ हुई घटना बताई थी। उन्होंने कहा था कि वो एक जरूरी बैठक के लिए राहुल गाँधी से मिलने गए थे लेकिन राहुल गाँधी वहाँ सिर्फ अपने कुत्ते पिद्दी के साथ खेलने में व्यस्त थे। वो जैसे ही किसी मुद्दे पर बात कहते तो राहुल जवाब देते- तो क्या हुआ।

हिमंता ने कहा था कि उन्हें ऐसा बर्ताव देख हैरानी भी थी। उसी दौरान चाय बिस्किट आया। तभी, उनका कुत्ता गया और उसी प्लेट से बिस्किट उठाकर खाने लगा। उन्हें लगा कि अब शायद राहुल गाँधी अपने प्लेट बदलेंगे। हालाँकि ऐसा हुआ नहीं। बाकी नेता उसी प्लेट से उठाकर खाने लगे और हिमंता बिस्वा सरमा ने उसी क्षण निर्णय लिया कि वो कॉन्ग्रेस को छोड़ देंगे।

खड़गे ने क्या कहा

इसी तरह मल्लिकार्जुन खड़गे ने हाल में बूथ एजेंटों की तुलना कुत्तों से कर दी थी। उन्होंने कहा था, “हमारे यहाँ एक कहावत है, जब आप बाजार में जाते हो और आपको कुत्ता या कोई जानवर लेना होता है तो आप उसके बारे में पूछताछ करते हो, अगर ईमानदार जानवर को भी लेना हो तो उसका कान पकड़कर ऊपर उठाते हैं, उसे ऊपर उठाने के बाद अगर वो भौंकता है तो ठीक है। अगर थोड़ी सी आवाज करता तो वह ठीक नहीं होता और उसे कोई लेता नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा था, “इसीलिए आप भी सेलेक्शन करते वक्त जो भौंकता है, जो लड़ता है और जो आपके साथ रहता है तो उसे ले लो। उसे ही बूथ लेवल कमेटी का अध्यक्ष बनाओ। बूथ में ऐसे व्यक्ति को बैठाओ जो सुबह 7 बजे जाए तो जब वहाँ पर पेटी बंद होती है, उसी वक्त उसे साइन करके बाहर आना चाहिए। नहीं तो जाना-आना ठीक नहीं है।”

UCC की तैयारी पूरी, अब विधानसभा में पेश होगा बिल: जानें उत्तराखंड की समान नागरिक संहिता की खास बातें, किन पर नहीं लागू होगा कानून

उत्तराखंड सरकार मंगलवार (6 फरवरी, 2024) को विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) बिल पेश करेगी। उत्तराखंड कैबिनेट ने रविवार (4 फरवरी, 2024) को मुख्यमंत्री आवास पर हुई कैबिनेट की बैठक में इस बिल को मंजूरी दी थी। उत्तराखंड विधानसभा का चार दिवसीय विशेष सत्र UCC को पास करने के लिए ही बुलाया गया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “यूसीसी एक लंबे समय से प्रतीक्षित बिल है। इंतजार जल्द ही खत्म होने वाला है। हम बिल को कल (6 फरवरी 2024) विधानसभा में पेश करेंगे और सभी प्रक्रियाएँ और बहसें होंगी। पूरा देश उत्तराखंड की ओर देख रहा है। मेरा अनुरोध है कि हर किसी को आशावादी रूप से बहस में भाग लेना चाहिए।”

उत्तराखंड विधानसभा का चार दिवसीय विशेष सत्र पहले ही 5-8 फरवरी तक बुलाया जा चुका है। इसके लागू होते ही उत्तराखंड आजादी के बाद यूसीसी अपनाने वाला पहला भारतीय राज्य बन जाएगा। यह पुर्तगाली शासन के दिनों से ही गोवा में चालू है। आइए बताते हैं, उत्तराखंड यूसीसी बिल की खास बातें...

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद विभिन्न धर्मों के सिविल कानूनों में एकरूपता आ जाएगी। महिलाओं, खास करके मुस्लिम समाज की महिलाओं को हिंदू महिलाओं की तरह अधिकार मिल जाएँगे।

समान नागरिक संहिता लागू होने से बहुविवाह पर रोक लगेगी। महिलाओं को पैतृक संपत्ति में अधिकार मिलेगा एवं बच्चों को गोद लेने का भी अधिकार मिल सकता है। सभी धर्मों में लड़की की शादी की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होगी।

वर्तमान में मुस्लिम समाज शरिया पर आधारित पर्सनल लॉ के तहत संचालित होता है। इसमें मुस्लिम पुरुषों को चार विवाह की इजाजत है। समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद मुस्लिम लड़कियों को भी लड़कों के बराबर अधिकार दिया जाएगा।

यूसीसी लागू होने से मुस्लिम समुदाय में इद्दत और हलाला जैसी प्रथा पर प्रतिबंध लग सकता है। तलाक के मामले में शौहर और बीवी को बराबर अधिकार मिलेगा।

समान नागरिक संहिता में सभी धर्म के लोगों को लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के लिए पंजीकरण कराना जरूरी किया जाएगा। इसमें महिला और पुरुष की पूरी जानकारी होगी। ऐसे रिश्तों में रहने वाले लोगों को अपने माता-पिता को भी जानकारी देनी होगी।

समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद विवाह का पंजीकरण कराना भी अनिवार्य किया जा सकता है। बिना रजिस्ट्रेशन विवाह अमान्य माने जाएँगे।

समान नागरिक संहिता में नौकरीपेशा बेटे की मृत्यु की स्थिति में पत्नी को मुआवजा दिया जाएगा। इसके साथ ही बेटे के बुजुर्ग माता-पिता के भरण-पोषण की जिम्मेदारी पत्नी पर होगी।

अगर पति की मृत्यु के बाद पत्नी दोबारा शादी करती है तो उसे मिला हुआ मुआवजा माता-पिता को दिया जाएगा। पत्नी की मृत्यु होने की स्थिति में उसके माता-पिता की देखरेख की जिम्मेदारी पति पर होगी।

यूसीसी के तहत अनाथ बच्चों के लिए संरक्षण की प्रक्रिया को भी सरल बनाया जा रहा है। पति-पत्नी के बीच विवाद की स्थिति में बच्चों की कस्टडी उसके दादा-दादी को दिए जाने का प्रावधान किया जा सकता है।

बच्चों की संख्या निर्धारित करने जैसी व्यवस्था भी UCC में की जा सकती है। समान नागरिक संहिता में इन प्रावधानों से जनजातीय समुदाय के लोगों को छूट मिल सकती है।

गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव 2022 में जीत मिलने के बाद मुख्यमंत्री धामी ने समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में एक समिति बनाई थी। इसका ड्राफ्ट बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने समिति का कार्यकाल तीन बार बढ़ाया था। इस दौरान समिति ने समान नागरिक संहिता पर लोगों से ऑनलाइन और ऑफलाइन सुझाव भी माँगे थे। इसके अलावा, कमिटी ने उपसमिति बनाकर हर समाज के विशिष्ट लोगों, समाजसेवियों, धार्मिक नेताओं और जागरूक नागरिकों के साथ चर्चा की और सुझाव लिए। कमिटी ने राज्य के विभिन्न क्षेत्रों का भी दौरान किया था। यूसीसी पर कमिटी को ढाई लाख से अधिक सुझाव मिले थे। इसके बाद समिति ने केंद्रीय विधि आयोग के साथ भी समान नागरिक संहिता को लेकर चर्चा की थी

कोर्ट ने महाभारत कालीन लाक्षागृह हिंदुओं को सौंपा, कहा- ये मजार और कब्रिस्तान नहीं: 100 बीघा जमीन पर मुस्लिम कर रहे थे दावा, बता रहे थे बदरुद्दीन की दरगाह

महाभारत में जिस लाक्षागृह की चर्चा है, वो लाक्षागृह वर्तमान में उत्तर प्रदेश के बागपत में स्थित है। ये वही लाक्षागृह है, जिसे दुर्योधन ने पाण्डवों को मारने के लिए एक साजिश के तहत बनवाया था। अब मुस्लिम पक्ष साल 1970 से ये दावा कर रहा है कि जिस टीले पर लाक्षागृह का होना बताया जाता है, वहाँ बदरुद्दीन की मजार है। कोर्ट ने इस दावे को खारिज कर पूरी जमीन और मजार हिंदुओं को सौंप दी।

मुस्लिम पक्ष का कहना है कि बदरुद्दीन के कथित मजार के आसपास मुस्लिमों का कब्रिस्तान भी है। उनका दावा है कि ये जमीन मुस्लिम वक्फ बोर्ड की है। ये मामला पिछले 53 साल तक कोर्ट में चला। अब इस मामले में फैसला आ गया है। कोर्ट ने माना कि यह लाक्षागृह ही है, मजार नहीं। कोर्ट ने 100 बीघे की पूरी जमीन और मजार को हिंदुओं को सौंपने का आदेश दिया है।

हिंदू पक्ष के वकील रणवीर सिंह ने बताया कि मुस्लिम पक्ष 100 बीघा भूमि को कब्रिस्तान और मजार बताकर उस पर कब्जा करना चाह रहा था। उसको लेकर उन्होंने कोर्ट के समाने सारे सबूत पेश किए थे। उन्होंने कोर्ट बताया था कि लाक्षागृह का इतिहास महाभारत कालीन है। इस टीले पर संस्कृत विद्यालय और महाभारत कालीन सुराग भी मौजूद हैं।

यह मामला बागपत के एडीजे की कोर्ट में चल रहा था। बागपत के बरनावा में लाक्षागृह टीले की पहचान हुई है। साल 1953 में खुदाई के दौरान यहाँ पर लगभग 4500 साल पुराने पुरातात्विक महत्व के सामान भी मिले थे। अब इस जगह की पहचान दुर्योधन द्वारा बनाए गए लाक्षागृह से होती है। यह जगह अब भारतीय पुरात्व सर्वेक्षण (ASI) के कब्जे में है।

हालाँकि, साल 1970 में उत्तर प्रदेश वक्फ बोर्ड ने इस जगह पर अपना दावा ठोक दिया। वक्फ बोर्ड की तरफ से मुकीम खान ने लाक्षागृह टीले को बदरुद्दीन शाह की मजार और आसपास कब्रिस्तान बताया और इस पर मालिकाना हक जताते हुए एक मुकदमा दायर कर दिया। इस मामले में मुकीम खान ने ब्रह्मचारी कृष्णदत्त को प्रतिवादी बनाया था।

मुकीम खान ने कहा था कि ये जमीन वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड में है, जिसमें शेख बदरुद्दीन की मजार और एक बड़ा कब्रिस्तान मौजूद है। वहीं, प्रतिवादी पक्ष की तरफ से यह कहा जा रहा था कि ये पांडवों का लाक्षागृह है। यहाँ महाभारत कालीन सुरंग है, पौराणिक दीवारे हैं और प्राचीन टीला मौजूद है। पुरातत्व विभाग यहाँ से महत्वपूर्ण पुरावशेष भी प्राप्त कर चुका है।

अब इस मामले में कोर्ट का फैसला आ गया है, लेकिन कोर्ट का फैसला देखने के लिए अब इस दुनिया में ना ही मुकीम खान हैं और न ही ब्रह्मचारी कृष्णदत्त। यह मुकदमा 53 साल से चलता रहा। साल 1970 में यह मुकदमा तत्कालीन मेरठ (बागपत तब जिला नहीं था, बागपत को 1997 में जिला बनाया गया) जिला एवं सत्र न्यायालय में सिविल जज जूनियर डिवीजन प्रथम के यहाँ चल रही थी।

बताया जाता है कि यह टीला वही लाक्षागृह है, जहाँ पांडवों को जलाने का प्रयास किया गया था। कौरवों ने पांडवों को मरवाने के लिए यह लाक्षागृह बनवाया था और इसमें आग लगवा दी थी, लेकिन पांडव एक सुरंग से बाहर आ गए थे। ये सुरंग बरनावा में आज भी मौजूद है। यहाँ ASI दिल्ली द्वारा सन 2018 में ट्रेंच लगाकर टीले का उत्खनन किया जा चुका है, जिसमें राजपूत काल की पॉटरी और साक्ष्य भी मिले हैं।

जिस जमीन को लेकर दरभंगा के एक गाँव में हिंदू और मुस्लिम परिवार में रार वह ‘सरकारी’, पुलिस ने धार्मिक और दबंगई के दावों को किया खारिज

बिहार के दरभंगा में एक मामला सामने आया था, जहाँ एक परिवार ने हिन्दू बहुल गाँव में इस्लामी धर्मांतरण का दबाव बनाए जाने और इसके लिए प्रताड़ित किए जाने का आरोप लगाया था। हालाँकि, स्थानीय पुलिस-प्रशासन ने इन आरोपों को सिरे से नकार दिया है। मामला भालपट्टी थाना क्षेत्र के मुरिया गाँव का है। दरभंगा पुलिस ने इस खबर को महज एक अफवाह करार देते हुए कहा है कि घटना धर्म-परिवर्तन नहीं, बल्कि जमीनी विवाद से जुड़ी हुई है।

दरभंगा स्थित वरीय पुलिस अधीक्षक द्वारा इस संबंध में एक प्रेस-विज्ञप्ति जारी की गई है। इसमें कहा गया है कि रविवार (4 फरवरी, 2024) को राजधन देवी एवं उनके बेटे विक्की कुमार के आवेदन पर जिलाधिकारी ने अनुमंडल पदाधिकारी और अनुमंडल पुलिस पुलिस पदाधिकारी (सदर) को प्रकरण की जाँच का आदेश दिया था। जाँच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई, जिसमें अनुमंडल पदाधिकारी ने बताया कि ये मामला धर्मांतरण या धार्मिक विवाद से बिलकुल भी जुड़ा हुआ नहीं है।

पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि ये मामला जमीनी विवाद से जुड़ा हुआ है। अधिकारियों की मानें तो शिकायतकर्ता अपने अपने घर का दरवाजा और खिड़कियाँ उत्तर दिशा की ओर खोलना चाहता है। वहाँ सरकारी जमीन है। पुलिस-प्रशासन का कहना है कि आवेदक का पड़ोसी उसे ऐसे करने से रोक रहा था। जाँच के क्रम में सामने आया कि दोनों पड़ोसियों के बीच में एक लंबी सरकारी जमीन है, जो खाली पड़ी रहती है। इसी को लेकर विवाद पैदा हो रहा है।

अब अंचल अमीन एवं अंचल अधिकारी द्वारा उस जमीन की पैमाइश भी कराई गई है। उक्त जमीन का इस्तेमाल सड़क बनाने के लिए किया जाना है। दोनों पक्षों को निर्देश दिया गया है कि नियमों का उल्लंघन न किया जाए। इस प्रेस-विज्ञप्ति में बताया गया है कि जाँच के दौरान वहाँ महिलाएँ भी उपस्थित थीं और कई ग्रामीण भी मौजूद थे, लेकिन किसी भी प्रकार का धार्मिक विवाद या फिर दबंगई का कोई भी मामला प्रकाश में नहीं आया है।

बता दें कि इससे पहले पीड़ित परिवार ने मोहम्मद गुड्डू और मोहम्मद लड्डू समेत उनके पाँच भाइयों पर प्रताड़ित करने के आरोप लगाए थे। पीड़िता महिला ने अपने बेटे के माध्यम से जिलाधिकारी को दिए गए आवेदन में कहा था कि उसका परिवार जिस गाँव में रहता है, वह पूरा इलाका मुस्लिमों का है और गाँव में उसका अकेला हिन्दू परिवार है और उसे प्रताड़ित किया जा रहा है। हालाँकि, अब पुलिस-प्रशासन ने इस मामले को नकार दिया है। इसे अफवाह करार दिया है।

केरल में बिल्ली का कच्चा मांस खाते युवक को देख सहमे लोग, कई सालों से था लापता: असम निवासी युवक को मानसिक अस्पताल में कराया गया भर्ती

केरल के मलप्पुरम से चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहाँ के कुट्टीपुरम बस स्टैंड पर एक युवक बिल्ली का कच्चा मांस खाते हुए मिला। असम के धुबरी जिले के रहने वाले इस व्यक्ति को तालुक अस्पताल में शुरुआती जाँच के बाद कोझिकोड के सरकारी मानसिक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहाँ उसके मानसिक समस्याओं का संकेत मिला है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, कुट्टीपुरम बस स्टैंड पर खड़े लोगों ने जब युवक को बिल्ली का कच्चा मांस खाते हुए देखा तो वे डर गए। इसके बाद लोगों ने इसकी सूचना तुरंत मलप्पुरम पुलिस को दी। मौके पर पहुँचकर पुलिस ने युवक को ऐसा करने से रोका तो उसने बताया कि वो पिछले 4-5 दिनों से भूखा है। उसने कुछ खाया नहीं है।

इसके बाद पुलिस वालों ने युवक को खाना खिलाया। युवक की पहचान देबोजीत रॉय के रूप में हुई है। कुट्टीपुरम के पुलिस निरीक्षक पीके पद्मराजन ने बताया कि युवक शनिवार (03 फरवरी 2024) की शाम को घटनास्थल से लापता हो गया था, लेकिन रविवार (04 फरवरी 2024) की सुबह वो कुट्टीपुरम रेलवे स्टेशन के पास पाया गया।

पूछताछ के दौरान पता चला कि देबोजीत रॉय तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई से केरल के कोझिकोड आया था। चेन्नई में उसका भाई रहता है। उसके भाई ने पुलिस को बताया कि देबोजीत रॉय चेन्नई से लापता हो गया था। एक वरिष्ठ पुलिसकर्मी ने कहा कि वह व्यक्ति कुछ साल पहले अपना गृह राज्य छोड़कर केरल पहुँच गया था।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि युवक काफी समय से लापता था। उसके भाई ने बताया कि देबोजीत रॉय उसका ही भाई है, जो कुछ साल से लापता था। उसके भाई ने उसे मानसिक रूप से बीमार भी बताया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद उसके भाई को पुलिस ने मलप्पुरम बुलाया है और युवक को आगे की जाँच के लिए कोझिकोड मानसिक अस्पताल में भर्ती कराया है।

370 खत्म हुआ, भगवान राम घर लौटे… PM मोदी ने संसद में गिनाई 10 साल की उपलब्धियाँ: 2024 का नतीजा (BJP 370+, NDA 400+) भी बताया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (5 फरवरी, 2024) को संसद के बजट सेशन में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर जवाब दिया। इस दौरान उन्होंने विपक्षी नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि कइयों ने चुनाव लड़ने का हौसला भी छोड़ दिया है और कई लोकसभा की जगह राज्यसभा में जाना चाहता हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने 4 मजबूत स्तंभों की तरफ हमारा ध्यान आकृष्ट किया है जो जितने ज़्यादा मजबूत, संरक्षित और समृद्ध होंगे – हमारा देश भी उतनी ही तेज़ी से आगे बढ़ेगा।

देश की नारी शक्ति, युवा शक्ति, गरीब भाई-बहनों और किसानों/मछुआरों/पशुपालकों को उन्होंने ये 4 स्तंभ करार दिया। उन्होंने विपक्ष से कहा कि कब तक टुकड़ों में बाँटते रहोगे, देश को बहुत तोड़ा गया। पीएम मोदी ने कहा कि सकारात्मक सुझावों की जगह इस बार संसद में विपक्षी दलों ने से देश को निराश किया, नेता तो बदल गए हैं लेकिन टेप रिकॉर्डर वही बज रही है। उन्होंने कहा कि आज विपक्ष की जो हालत है, इसकी सबसे बड़ी दोषी कॉन्ग्रेस पार्टी है।

उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस को एक अच्छा विपक्ष बनने का अवसर 10 वर्षों तक मिला, लेकिन वो विफल रहे। उन्होंने कॉन्ग्रेस पर विपक्ष के जो होनहार लोग हैं उन्हें भी न उभरने देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि युवा सांसदों को मौका नहीं दिया जाता है, ताकि किसी की छवि बिगड़ न जाए। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस ने खुद के अलावा विपक्ष, संसद और देश का नुकसान किया है। उन्होंने कहा कि स्थिति ये है कि मल्लिकार्जुन खड़गे इस सदन से उस सदन शिफ्ट हो गए और गुलाम नबी आज़ाद पार्टी से ही शिफ्ट हो गए – ये सब परिवारवाद की भेंट चढ़ गए।

उन्होंने कहा कि एक ही प्रोडक्ट बार-बार लॉन्च करने के चक्कर में कॉन्ग्रेस की दुकान पर ताला लग गया। उन्होंने कहा कि अगर किसी पार्टी को परिवार ही चलाता है तो वो परिवारवाद है, किसी परिवार के 10 लोग अपने बूते राजनीति में सफल हों तो कोई दिक्कत नहीं है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस में एक ‘कैंसल कल्चर’ विकसित हो गया है, इसमें वो फँस गई है। उन्होंने कहा कि हम ‘मेक इन इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘वोकल फॉर लोकल’, वन्दे भारत’ और ‘संसद की नई इमारत’, कॉन्ग्रेस सब पर कहती है – ‘कैंसल’।

उन्होंने पूछा कि इतनी नफरत कब तक पाले रखोगे? उन्होंने कॉन्ग्रेस पर देश की सफलताओं को भी कैंसल करने का आरोप मढ़ा। उन्होंने कहा कि उनके तीसरे कार्यकाल में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक ताकत बनेगा। उन्होंने कहा कि ये मोदी की गारंटी है। उन्होंने कहा कि इसके खिलाफ कुतर्क दिया जाता है कि इसमें क्या है, ये तो अपने-आप हो जाएगा। पीएम मोदी ने कहा कि 10 साल पहले 2014 के फरवरी में आए अंतरिम बजट को पेश करते समय उस समय के वित्त मंत्री ने कहा था – “GDP के मामले में भारत दुनिया में 11वें नंबर पर है।”

उन्होंने कहा कि तब गौरव-गान हुआ था, अब भारत नंबर-5 पर पहुँच गया है तो कुतर्क दिए जाते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि तत्कालीन वित्त मंत्री ने ये भी कहा था कि अगले 3 दशकों में भारत की GDP अमेरिका और चीन के बाद तीसरे नंबर पर पहुँच जाएगी। पीएम मोदी ने कहा कि ‘ब्रह्माण्ड के सबसे बड़े अर्थशास्त्री’ उस समय ऐसा कह रहे थे। उन्होंने कहा कि 2044 तक जो लक्ष्य रखा गया था, वो अगले 5 साल के भीतर होगा। उन्होंने कहा कि संकल्प तो दूर की बात थी, ये लोग सपना तक देखने का सामर्थ्य खो चुके थे।

प्रधानमंत्री ने इस दौरान ‘9 दिन चले, ढाई कोस’ कहावत का जिक्र करते हुए कहा कि ये कॉन्ग्रेस की सुस्त रफ़्तार को परिभाषित करती है जिसका कोई मुकाबला नहीं है। पीएम मोदी ने जिक्र किया कि कैसे उनकी सरकार ने गरीबों के लिए 4 करोड़ घर बनाए, शहरी गरीबों के लिए 80 लाख पक्के मकान बने। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस की रफ्तार से ये घर बने होते तो इतना काम करने में 100 साल लगते, 5 पीढ़ियाँ गुजर जातीं। उन्होंने बताया कि 10 वर्ष में 40,000 किलोमीटर रेलवे ट्रैक का इलेक्ट्रिफिकेशन हुआ, कॉन्ग्रेस की रफ़्तार से इसमें 80 साल लग जाते।

उन्होंने बताया कि 10 वर्षों में 17 करोड़ गैस कनेक्शन दिए, कॉन्ग्रेस की रफ़्तार से जिसमें 60 साल और लग जाते। उन्होंने आँकड़े गिनाए कि सैनिटेशन कवरेज उनकी सरकार में 40 से 100 प्रतिशत तक पहुँची, अगर कॉन्ग्रेस की रफ़्तार होती तो इसमें 60-70 साल और लगते लेकिन गारंटी नहीं होता। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस ने देश के सामर्थ्य पर कभी विश्वास नहीं किया, जनता को हमेशा कमतर आँका। उन्होंने इस दौरान जवाहरलाल नेहरू के एक भाषण का भी जिक्र किया, जब उन्होंने लाल किले से कहा था कि भारतवासी जापान-यूरोप-अमेरिका वालों की तरह काम नहीं करते।

पीएम मोदी ने कहा कि नेहरू ने भारत के लोगों को नीचा दिखाते हुए कहा कि विदेशी लोग अक्ल और मेहनत से सफल हुए हैं, यानी वो भारतीयों को आलसी और कम अक्ल के समझते हैं। उन्होंने इंदिरा गाँधी की सोच का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने भी लाल किले से 15 अगस्त को कहा था कि दुर्भाग्यवश हमारी आदत ये है कि जब कोई शुभ कार्य पूरा होने को होता है तो हम आत्मतुष्टि की भावना से ग्रसित हो जाते हैं और असफलता से नाउम्मीद हो जाते हैं, लगता है पूरे राष्ट्र ने ही पराजय भावना को अपना लिया है।

उन्होंने कहा कि इंदिरा गाँधी भले देश के लोगों का सही आकलन न कर पाई, कॉन्ग्रेस का उन्होंने सटीक आकलन किया था। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस के शाही परिवार के लोगों की देशवासियों को लेकर वही सोच है। पीएम मोदी ने इस दौरान I.N.D.I. गठबंधन को ‘भानुमति का कुनबा’ बताते हुए कहा कि जब इन्हें एक-दूसरे पर ही विश्वास नहीं है तो ये देश पर विश्वास कैसे करेंगे? उन्होंने कहा कि हमें देश के लोगों की शक्ति पर भरोसा है।

स्वच्छ भारत, उज्ज्वला, आयुष्मान भारत, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, सुगम्य भारत और डिजिटल इंडिया जैसे जनहित के कामों का जिक्र किया, जिन्हें उनके पहले कार्यकाल में शुरू कर के अभियान का रूप दिया गया। उन्होंने GST का भी जिक्र किया, जिससे टैक्स व्यवस्था आसान बनी। उन्होंने बताया कि इसी कारण जन-आशीर्वाद से दूसरा कार्यकाल शुरू हुआ, जो संकल्पों की पूर्ति का कार्यकाल बना। लंबे समय से जिन चीजों का देश को इंतज़ार था, वो पूरे हुए।

पीएम मोदी ने कहा कि हम सबने अनुच्छेद-370 को खत्म होते हुए देखा। उन्होंने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का जिक्र किया, जिससे संसद में महिलाओं को आरक्षण मिला। उन्होंने कहा कि दशकों से अटकी-भटकी-लटकी परियोजनाएँ समयबद्ध तरीके से पूरी हुई। अंग्रेजी शासन के पुराने दंड-प्रधान कानूनों की जगह सरकार न्याय संहिता लेकर आई। पीएम मोदी ने कहा कि भगवान राम न सिर्फ अपने घर लौटे, बल्कि एक ऐसे मंदिर का निर्माण हुआ जो भारत की महान सांस्कृतिक परंपरा को नई ऊर्जा देता रहेगा।

पीएम मोदी ने कहा कि अब हमारी सरकार का तीसरा कार्यकाल भी बहुत दूर नहीं है, ज्यादा से ज्यादा सौ-सवा सौ दिन बाकी हैं। उन्होंने कहा कि पूरा देश कह रहा है ‘अबकी बार, 400 पार, खड़गे भी कह रहे हैं। उन्होंने कहा कि NDA 400 पार जाएगी, लेकिन भाजपा 370 से अधिक सीटें जीतेगी। उन्होंने कहा कि हमारा तीसरा कार्यकाल बहुत बड़े फैसलों का होगा। उन्होंने कहा कि देश को अगले 1000 वर्षों में समृद्धि और सिद्धि के शिखर पर रहेगा, जिसकी नींव रखी जाएगी।

पीएम मोदी ने कहा कि गरीब को अगर साधन व संसाधन मिले, तो वो गरीबी को परास्त कर देगा और उनकी सरकार ने वो रास्ता चुना तो गरीबों ने गरीबी को हरा कर दिखाया है। उन्होंने कहा कि 50 करोड़ गरीबों के पास आज बैंक खाता है, 4 करोड़ गरीबों के पास पक्का घर है जो उसके स्वाभिमान को सामर्थ्य देता है, 11 करोड़ गरीबों को नल से पीने का शुद्ध जल मिलता है, 55 करोड़ गरीबों को आयुष्मान कार्ड मिला है जिससे उसे भरोसा है कि घर में कितनी भी बीमारी आ जाए मोदी बैठा है।

उन्होंने जिक्र किया कि 80 करोड़ गरीबों को मुफ्त अनाज मिलता है। उन्होंने मिलेटस की खेती करने वाले 3 करोड़ किसानों का जिक्र करते हुए कहा कि इसी कारण वो गर्व से G20 के मेहमानों के सामने मोटे अनाज परोसते हैं। उन्होंने कहा कि खादी को कॉन्ग्रेस ने भुला दिया, लेकिन आज इसे ताकत दी जा रही है क्योंकि बुनकरों की ज़िंदगी इससे जुड़ी है। उन्होंने कॉन्ग्रेस पर OBC समाज के साथ अन्याय का आरोप लगते हुए कहा कि इनलोगों ने ओबीसी नेताओं का अपमान किया।

उन्होंने बिहार के पूर्व CM कर्पूरी ठाकुर को ‘भारत रत्न’ दिए जाने का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कर्पूरी ठाकुर जब मुख्यमंत्री बने तो उन्हें पद से हटाने के लिए क्या कुछ नहीं किया गया था, कॉन्ग्रेस को अति-पिछड़ा व्यक्ति बर्दाश्त नहीं हुआ था। पीएम मोदी ने याद दिलाया कि कॉन्ग्रेस ने कर्पूरी ठाकुर को नेता प्रतिपक्ष तक के रूप में स्वीकार करने से मना कर दिया था। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस के लोग सरकार में ओबीसी को लेकर सवाल उठाते हैं, फिर खुद के बारे में कहा कि इनलोगों को OBC नज़र नहीं आता है।

उन्होंने पूछा कि UPA के काल में सोनिया गाँधी की अध्यक्षता में बनी ‘राष्ट्रीय सलाहकार समिति’ में कोई ओबीसी था क्या? उन्होंने कहा कि आने वाले उनके कार्यकाल में 3 करोड़ ‘लखपति दीदी’ होंगी जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आएगा। उन्होंने कहा कि आज बेटी पैदा होती है तो पूछा जाता है कि ‘सुकन्या समृद्धि’ अकाउंट खुला या नहीं। पहले गर्भवती होने पर न कर पाने की बात होती थी, अब 36 हफ्ते की पेड लीव और उसके बाद भी छुट्टियाँ मिलती हैं। उन्होंने कहा कि पहले महिलाओं से पूछे जाते थे कि नौकरी क्यों करनी है, पति का वेतन कम पड़ रहा है, अब महिलाओं से पूछते हैं – आपका स्टार्टअप अच्छा चल रहा है, नौकरी मिलेगी?

उन्होंने कहा कि पहले कहा जाता था कि घर के मुखिया को बुलाइए, लेकिन आज घर से लेकर बिजली का बिल और पानी-गैस सब महिलाओं के नाम पर आता है, परिवार की मुखिया महिलाएँ हैं। उन्होंने कॉन्ग्रेस पर किसानों से विश्वासघात का आरोप लगाया और कहा कि कॉन्ग्रेस के समय कृषि के लिए 25,000 करोड़ रुपए का बजट होता था, हमारी सरकार ने सवा लाख करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान किया। उन्होंने बताया कि हमने 18 लाख करोड़ रुपए का धान-गेहूँ किसानों से खरीदा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमने सवा लाख करोड़ रुपए से भी अधिक रकम का दलहन-तिलहन की खरीद की है। उन्होंने बताया कि पहली बार मछुआरों को ‘किसान क्रेडिट कार्ड’ मिला। पीएम मोदी ने बताया कि पशुओं को रोगों से बचाने के लिए 50 करोड़ टीके लगाए गए। प्रधानमंत्री ने बताया कि डिजिटल सेक्टर युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बना रहा है। उन्होंने सस्ता मोबाइल फोन और सस्ता डेटा की बात करते हुए कहा कि ये दुनिया में सबसे कम कीमत है जिससे रिकॉर्ड मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट देश देख रहा है।

पीएम मोदी ने कहा कि देश में 1000 नए एयरक्राफ्ट्स ऑर्डर किए गए हैं, जिससे पायलट्स, क्रू मेंबर्स और इंजीनियर्स की ज़रूरत होगी, यानि एविएशन सेक्टर भारत के लिए एक बहुत बड़ा नया अवसर बन कर आया है। बीते 10 वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण के अंदर बजट 44 लाख करोड़ रुपए हो गया।

अमेरिका से टूरिस्ट बनकर आए, असम में धर्मांतरण से जुड़े कार्यक्रम में कर रहे थे शिरकत: गिरफ्तार, जुर्माना लगाकर वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू

असम पुलिस ने वीजा नियमों का उल्लंघन करने के मामले में दो अमेरिकी नागरिकों को सोनितपुर से गिरफ्तार किया है। ये टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे, लेकिन असम में एक ईसाई धर्मांतरण सभा में शामिल हो रहे थे। इनकी पहचान 64 साल के जॉन मैथ्यू बून और 77 साल के माइकल जेम्स फ्लंचम के रूप में हुई है।

सोनितपुर की ASP मधुरिमा दास ने बताया है कि इसके बारे में फॉरेनर रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (FRRO) कोलकाता को सूचित कर दिया गया है। माना जा रहा है कि अमेरिकी नागरिकों को भारत छोड़ने का नोटिस दिया जाएगा। इन दोनों नागरिकों पर गिरफ्तारी के बाद 500 डॉलर (लगभग ₹41.5 हजार) का जुर्माना भी लगाया गया है। इसके बाद उन्हें छोड़ दिया गया।

इन दोनों अमेरिका नागरिकों ने 31 जनवरी 2024 को असम में एक बाप्टिस्ट चर्च के उद्घाटन के मौके पर इसमें हिस्सा लिया था। असम ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, ये दोनों अमेरिकी नागरिक- जॉन मैथ्यू और माइकल जेम्स असम में कुछ दिन पहले ही घुसे थे। इससे पहले ये दोनों भारत के अन्य हिस्सों में घूम रहे थे।

ASP ने इस मामले में कहा, “एक बाप्टिस्ट चर्च असोसिएशन ने तेजपुर में एक चर्च का उद्घाटन समारोह आयोजित किया था। इसमें असम के अलग-अलग हिस्सों से आए हुए लोग भी इकट्ठा हुए थे। यहाँ दोनों अमेरिकी नागरिक भी आए। चर्च की इमारत अभी पूरी बनी नहीं है। ऐसे में हम कह सकते हैं कि वे यहाँ धर्मांतरण के लिए आए थे। ये लोग टूरिस्ट वीजा पर आए हैं, इसलिए धार्मिक कामों में भाग नहीं ले सकते।”

दरअसल, टूरिस्ट वीजा के नियमों के तहत कोई भी व्यक्ति, जो टूरिस्ट वीजा लेकर भारत में आता है तो वह धर्म के प्रचार प्रसार और धर्मांतरण में भाग नहीं ले सकता है। इससे पहले अक्टूबर 2022 में असम की सरकार ने सभी जिलों के एसपी को निर्देश दिया था, टूरिस्ट वीजा पर आकर धर्मांतरण गतिविधियों में शामिल होने वाले लोगों पर विशेष नजर रखी जाए।

इसके बाद असम पुलिस हरक़त में आई और 27 बांग्लादेशियों और स्वीडिश एवं जर्मन नागरिकों नागरिकों को हिरासत में लिया और फिर उन्हें उनके देश भेज दिया। असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने असम के मूलनिवासियों की संस्कृति को बचाने को लेकर बात की थी। उन्होंने कहा था, “दुर्भाग्यवश, भारत में मूलनिवासी समुदाय अक्सर धर्मांतरण का निशाना बनते हैं। इससे इनकी जनसंख्या में कमी आ सकती है।”

झारखंड में लगेगा बागेश्वर धाम का दरबार, हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए दी अनुमति, कहा-कानून व्यवस्था का बहाना नहीं बना सकते

झारखंड में बागेश्वर धाम के महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की ओर से हनुमान कथा का आयोजन किया जाएगा। हालाँकि, प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं दी है। इसके बाद झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई, जिसके बाद हाई कोर्ट ने हनुमान कथा के आयोजन के लिए हरी झंडी दे दी है। यह कार्यक्रम 10 से 15 फरवरी 2024 के बीच पलामू में आयोजित किया जाएगा।

दरअसल, हनुमंत कथा आयोजन समिति ने कार्यक्रम के लिए अनुमति माँगी थी। जिला प्रशासन ने कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए इससे इनकार कर दिया था।। इसके बाद आयोजन समिति (समिति) ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हाई कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है और इसके लिए कार्यक्रम को रद्द नहीं किया जा सकता।

हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि कार्यक्रम आयोजकों को सभी आवश्यक सुरक्षा और कानूनी व्यवस्था का पालन करना होगा। हाई कोर्ट कोर्ट ने कथा आयोजन समिति को अनुमति देते हुए कहा, “इसमें कोई संदेह नहीं है कि प्रशासन प्रतिबंध लगा सकती है, लेकिन ऐसे प्रतिबंधों का आधार संविधान के अनुच्छेद 19(3) में उल्लेखित आधार के अनुरूप ही होना चाहिए।”

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस आनंद सेन ने कहा, “इस मामले में प्रशासन ने अपने जवाब में बिना किसी डेटा (लोग क्यों जुट रहे हैं और उनकी कितनी संख्या हो सकती है) के सिर्फ कानून और व्यवस्था की समस्या बताते हुए अनुमति नहीं दी। प्रशासन ने इस कथा के आयोजन के दौरान बैठने की व्यवस्था, पार्किंग की जगह की कमी और भीड़ को मैनेज करने के लिए स्वयंसेवकों की कमी के बारे में दलील दी।”

जस्टिस आनंद सेन ने आगे कहा, “अगर कोर्ट इन बातों को मान भी ले तो ये ‘कानून और व्यवस्था की समस्या (Law and Order)’ नहीं है। आपने जिन बातों को गिनवाया, वैसी समस्याएँ सार्वजनिक कार्यक्रमों में आ सकती हैं। इसे कार्यक्रम स्थल पर सुविधाओं की कमीं कह सकते हैं, लेकिन ये कानून व्यवस्था का मामला बिल्कुल भी नहीं है। ऐसे में इस कथा पर रोक लगाने का आधार बिल्कुल गलत है।”

कोर्ट ने जोर दिया कि अनुच्छेद 19(1)(बी) भारत में नागरिकों के बिना हथियारों के शांतिपूर्वक इकट्ठा होने का मौलिक अधिकार देता है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि वो कार्यक्रम के बारे में पूरी योजना बनाकर कोर्ट में पेश करें। इसमें हर दिन पहुँचने वाले लोगों की संख्या, उनके लिए की जाने वाली व्यवस्थाओं की जानकारी हो ताकि कथा में शामिल होने वाले लोगों के बैठने, ठहरने, पार्किंग इत्यादि की व्यवस्था की जा सके।

क्या फिर माफी माँगेंगे केजरीवाल… दिल्ली HC ने मानहानि केस में राहत देने से किया मना, कहा- अपमानजनक कंटेंट को रीट्वीट करना भी मानहानि

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को एक आपराधिक मानहानि केस में राहत नहीं मिली। दिल्ली हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ दायर केस को खारिज करने से मना कर दिया। केजरीवाल ने यूट्यूबर ध्रुव राठी द्वारा बनाई गई ‘भाजपा आईटी सेल पार्ट 2’ शीर्षक की वीडियो रीट्वीट की थी। इसके बाद उनपर मानहानि का केस दर्ज हुआ। अब उन्हें इस मामले में निचली अदालत को तलब करना ही होगा।

जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा ने कहा, “अपमानजनक सामग्री को रीट्वीट करना मानहानि के समान ही है।” उन्होंने कहा, “जब राज्य का मुख्यमंत्री, बिना पुष्टि किए किसी बात को रीट्वीट करता है, तो इससे मानहानिकारक सामग्री को बढ़ावा मिलने की संभावना होती है।”

कोर्ट ने कहा कि अगर इस तरह किसी अपमानजनक सामग्री को रीट्वीट और रिपोस्ट की आजादी दी गई तो इससे लोगों को ऐसा कंटेंट शेयर करने की हिम्मत मिलेगी। रीट्वीट करते समय भी जिम्मेदारी का ख्याल रहना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि केजरीवाल के लाखों फॉलोवर्स हैं और अगर वो इस तरह कोई मानहानि वाली सामग्री शेयर करेंगे तो इससे पब्लिक में गलत असर जाएगा।

बता दें कि केजरीवाल के खिलाफ विकास सांकृत्यन ने केस किया था। वह सोशल मीडिया पेज ‘आई सपोर्ट नरेंद्र मोदी’ के संस्थापक हैं। केजरीवाल ने आपत्तिजनक वीडियो को 7 मई 2018 को शेयर किया था। इसके बाद विकास ने शिकायत देते हुए यही कहा था कि केजरीवाल को करोड़ों लोग फॉलो करते हैं, कम से कम ऐसा कुछ शेयर करने से पहले प्रमाणिकता तो देख लेनी चाहिए। उन्होंने बिन उसे जाँचे वीडियो को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचा दिया। इसके बाद ट्रॉयल कोर्ट ने उन्हें इस मामले में 17 जुलाई 2019 को समन किया था।

आज दिल्ली हाईकोर्ट में सीएम केजरीवाल की माँग खारिज होने के बाद विकास पांडे ने कहा, “हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल के खिलाफ दायर मानहानि केस को खारिज कर दिया है। उन्होंने मेरे खिलाफ ध्रुव राठी द्वारा बनाई वीडियो को शेयर किया था।”

अपने ट्वीट में उन्होंने अपने दो वकीलों- राघव अवस्थी और मुकेश शर्मा को धन्यवाद दिया और कहा कि इन दोनों ने देश के सबसे महंगे पत्रकारों से लड़ाई लड़के हराया। मालूम हो कि अरविंद केजरीवाल की ओर से इस केस को वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष वशिष्ठ के साछ करण शर्मा, ऋषभ शर्मा, वेदांत वशिष्ठ, मोहम्मद इरशाद और हर्षिता नाथरानी पेश हुए थे।

केजरीवाल माफी माँगकर छुड़ाते रहे हैं पल्ला

गौरतलब है कि इस मानहानि केस में भी केजरीवाल के पास अंतिम उपाय माफी माँगना दिखाई पड़ रहा है। इससे पहले भी केजरीवाल कई मानहानि के मामलों में माफी माँगकर अपना पल्ला छुड़ा चुके हैं। साल 2018 में उन्होंने, संजय सिंह, राघव चड्ढा और आशुतोष ने संयुक्त रूप से पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली से लिखित में माफी माँगी थी।

इसके अलावा उन्होंने नितिन गडकरी से भी माफी माँगी थी और कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल से भी वो माफी माँग चुके हैं। साल 2017 में उन्होंने हरियाणा से बाजपा नेता अवतार सिंह भड़ाना से पटियाला कोर्ट में माफी माँगी थी। केजरीवाल ने उनको सबसे भ्रष्ट नेता कहा था तब भड़ाना ने उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज करके 1 करोड़ क्षतिपूर्ति की माँग भी की थी। इतना ही नहीं उन्होंने शिरोमणि अकाली दल के बिक्रम मजीठिया पर भी टिप्पणी करके वापस माफी माँगी थी।

भड़काऊ भाषण वाले मौलाना अज़हरी को पुलिस ने किया गिरफ्तार तो बसों पर दनादन चले पत्थर, 4000 की भीड़ ने सड़क पर रोक दी ट्रैफिक

मुंबई पुलिस ने पाँच कट्टरपंथियों को बसों पर पत्थरबाजी करने और सड़क पर अराजकता फैलाने के मामले में गिरफ्तार किया है। यह कट्टरपंथी मुफ़्ती सलमान अज़हरी की गिरफ्तार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। मुफ़्ती सलमान अज़हरी ने गुजरात के जूनागढ़ में भड़काऊ बयान दिया था। मुफ़्ती अजहरी को कल (4 फरवरी, 2024) को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उसको गिरफ्तार करके मुंबई के घाटकोपर थाने ले जाया गया था। यहाँ उसके समर्थक बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए थे। यह समर्थक मुफ़्ती को छोड़ने की माँग को लेकर हो-हल्ला कर रहे थे।

मुफ़्ती की गिरफ्तारी के बाद यह समर्थक हिंसक हो गए और थाने के बाहर BEST बसों पर पत्थर बरसा दिए। एक रिपोर्ट में बताया गया कि मुफ़्ती को छुड़वाने के लिए तीन से चार हजार की भीड़ घाटकोपर थाने के बाहर इकट्ठा हुई थी। इस दौरान पुलिस ने मुफ़्ती से भीड़ को शांत करने को भी कहा। मुफ़्ती की अपील पर कुछ भीड़ छँट गई लेकिन बड़ी संख्या में लोग रोड पर गाड़ियों को रोकने लगे।

इसी दौरान पथराव भी हुआ। पुलिस ने इसके बाद स्थिति को नियन्त्रण में लाने के लिए लाठी चार्ज किया और पहचान करके पाँच पत्थरबाजों को गिरफ्तार किया। इनके खिलाफ सरकारी कामकाज में बाधा डालने का मामला दर्ज किया गया है। मुफ़्ती को अब गुजरात ATS ने गिरफ्तार किया है। उसे पहले घाटकोपर थाने और फिर सायन अस्पताल ले जाया गया जहाँ उसकी मेडिकल जाँच करवाई गई। इसके बाद रात में ही गुजरात ATS को कोर्ट से 2 दिन की ट्रांजिट रिमांड मिल गई। गुजरात ATS तुरंत मुफ़्ती सलमान अजहरी को लेकर जूनागढ़ चली गई।

पुलिस का कहना है कि अजहरी भड़काऊ बयान देता है जो कि युवाओं में काफी पॉपुलर है। उसके ऊपर पहले भी कई बार FIR दर्ज हो चुकी है, इनमें से एक FIR मुंबई में ही दर्ज है। उसका हाल ही में यह वीडियो वायरल हुआ था जिसके बाद उसे गिरफ्तार करने की माँग उठी। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि मुफ़्ती के खिलाफ मुंबई में मामला दर्ज कर लिया गया है। मुंबई में उसके साथ ही दो और लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया है। मुंबई में मुफ़्ती के खिलाफ धारा 153(C), 505(2), 188 और 114 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है।

इससे पहले उसके खिलाफ जूनागढ़ में पहले ही मामला दर्ज हुआ था और साथ ही जिस कार्यक्रम में उसने यह भड़काऊ भाषण दिया था उसके आयोजकों को भी गिरफ्तार कर लिया गया था। अब उसे भी पुलिस गुजरात लेकर पहुँच रही है। यह पूरा मामला 31 जनवरी, 2024 को जूनागढ़ में एक इस्लामिक कार्यक्रम के दौरान दिए गए भड़काऊ भाषण से जुड़ा है। इस भाषण का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसके बाद मुफ़्ती अजहरी की गिरफ्तारी की माँग हुई थी।

मुफ़्ती सलमान अज़हरी के वीडियो में क्या-क्या

ऑपइंडिया ने सबसे पहले इस मामले की रिपोर्ट की थी। 20-22 सेकंड के वायरल वीडियो को सर्च करने पर हमें मुफ्ती सलमान अज़हरी का वो भाषण मिला था, जो 53 मिनट का था। वायरल वीडियो इसी भाषण का एक छोटा सा हिस्सा थी। इस भाषण में मुफ्ती ने कई जगह भड़काऊ बातें कही थीं।

वीडियो को इस्लामिक चैनल ने पोस्ट किया था। इसमें वक्ता के तौर पर मुफ्ती सलमान अजहरी मंच पर दिख रहा था। यह कार्यक्रम गुजरात के जूनागढ़ में 31 जनवरी को हुआ था जबकि वीडियो 1 फरवरी 2024 को अपलोड किया गया था। मुफ्ती सलमान अज़हरी ने अपने भाषण में कहा था – “मस्जिद में बुत रखने से मस्जिद बुतखाना नहीं बन जाती। तुमने एक रखा है, काबा में 360 रखे थे, फिर भी काबा तो काबा ही रहा, न तवाफ रुका, न हज रुका।”

अपने भाषण में मुफ्ती ने कहा, “इंकलाब आपके घर से होगा। उनमें मस्जिदों को बुतखाना बनाने की हिम्मत नहीं है। आपने मस्जिदों को वीरान छोड़ दिया है और हमारे यहाँ मुहावरा है कि जब मैदान खुला होता है तो कुत्तों का राज होता है। यदि तुम मैदान में घूमते रहोगे तो कोई कुत्ते नहीं होंगे।”

भाषण के अंत में उसने कहा था, ”मुसलमानों घबराओ मत, अभी खुदा की शान बाकी है। अभी इस्लाम जिंदा है, अभी कुरान बाकी है, ऐ जालिम काफिर क्या समझता है जो रोज हमसे उलझता है, अभी तो कर्बला का आखिरी मैदान बाकी है। कुछ देर की खामोशी है, किनारा आएगा… आज कुत्तों का वक्त है, कल हमारा दौर आएगा।”