Home Blog Page 1204

₹15,000 की बचत हर साल, मोदी सरकार लगाएगी आपके घर में सोलर प्लांट: बजट 2024 से हर घर को फायदा, जानिए क्या है प्रोसेस

मोदी सरकार का अंतिम और अंतरिम बजट 2024-25 पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश के एक करोड़ घरों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली का ऐलान किया है। यह मुफ्त बिजली सोलर माध्यम से दी जाएगी। इसके लिए देश में घरों पर रूफटॉप सोलर लगाने का अभियान चलाया जाएगा। इससे देश के मध्यमवर्ग को बड़ा फायदा होगा।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने ऐलान किया है कि घरों की छतों पर सोलर ऊर्जा पैदा करने के लिए प्लांट लगाए जाएँगे। यह प्लांट सरकार लगाएगी। बिजली पैदा करने वाले इन प्लांट से मकान का मालिक 300 यूनिट बिजली मुफ्त हर माह ले सकेगा।

जिन लोगों के घरों पर यह सोलर ऊर्जा पैदा करने वाले प्लांट लगेंगे, उन्हें इसके बाद कोई बिल नहीं देना होगा। इससे प्रत्येक परिवार को बड़ी बचत होगी। एक रिपोर्ट बताती है कि देश में एक औसत घर महीने में लगभग 250 यूनिट बिजली खर्च करता है। भारत में एक यूनिट बिजली का औसत भाव 5 रुपए है। ऐसे में ₹15,000 की बचत एक परिवार एक वर्ष में कर सकेगा। यदि किसी परिवार का बिजली खर्च इससे ज्यादा भी होता है तो भी उसे बड़ा फायदा होगा।

जो योजना बजट 2024-25 में मोदी सरकार लेकर आई है, इसके अंतर्गत वही व्यक्ति मुफ्त बिजली पाएगा जो खुद की छत पर सोलर प्लांट लगाएगा। इसके अलावा जो बिजली उसे मिलेगी, उसको पैदा करने की लागत भी नहीं लगेगी। सरकार को इस स्थिति में सिर्फ सोलर प्लांट लगाने होंगे। ऐसे में सब्सिडी का भी पैसा बचेगा और साथ ही लोगों को मुफ्त बिजली भी मिल जाएगी। इसके अलावा कोयले से पैदा होने वाली बिजली में भी कमी की जा सकेगी, जिससे पर्यावरण पर काम आगे बढ़ सकेगा।

लोगों को मुफ्त बिजली देने के लिए घरों की छतों पर यह सोलर प्लांट केंद्र सरकार की एक योजना के तहत लगाए जाएँगे। गौरतलब है कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए एक योजना का ऐलान किया था। इसका नाम ‘सूर्योदय योजना‘ रखा गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस योजना का ऐलान 22 जनवरी, 2024 को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से लौटने के बाद किया था। प्रधानमंत्री ने इसकी जानकारी एक्स (पहले ट्विटर) पर दी थी।

गौरतलब है कि कई विपक्षी दल देश में चुनावों के समय मुफ्त बिजली का वादा करते आए हैं। पंजाब और दिल्ली जैसे राज्य मुफ्त बिजली दे भी रहे हैं। हालाँकि, यह वादा जमीन पर उतारने के बाद बड़े नुकसान होते हैं। भारत में अधिकांश बिजली कोयले से बनती है। इस बिजली की उत्पादन लागत भी सौर ऊर्जा के मुकाबले अधिक है। ऐसे में कोयले से पैदा की गई बिजली को मुफ्त देने पर सरकार को बड़ी सब्सिडी देनी पड़ती है। अकेले पंजाब में ही इस समय इस सब्सिडी का भार लगभग ₹20,000 करोड़ है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में 25 करोड़ घरों पर ऐसे रूफटॉप सोलर लगाए जा सकते हैं। इनके ऊपर 637 गीगावॉट तक की ऊर्जा पैदा कर सकती है। हालाँकि, यही रिपोर्ट दिखाती है कि देश में मात्र 11 गीगावॉट क्षमता के ही रूफटॉप सोलर लगाए गए हैं अभी।

भले ही भारत ने घरों पर सोलर क्षमता लगाने में अभी आशातीत सफलता नहीं पाई हो, लेकिन उसने बीते कुछ वर्षों में अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में काफी प्रगति हासिल की है। रिपोर्ट बताती है देश में अभी लगभग 75 गीगावॉट की सोलर क्षमता है। यह 2014 में लगभग 2 गीगावॉट ही थी। ऐसे में 2014 से अब तक इसमें लगभग 35 गुने की वृद्धि हुई है।

नारी शक्ति का बजट 2024: लड़कियों को मुफ्त टीका, आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए आयुष्मान भारत वाला इंश्योरेंस

साल 2024 के अंतरिम बजट में देश के विकास को ध्यान में रखते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कई घोषणाएँ कीं। इस दौरान उन्होंने नारी शक्ति पर भी बात की। उन्होंने बताया कि कैसे समाज में महिलाओं की भूमिका मजबूत हो रही है और सरकार भी उनके स्वास्थ्य, शिक्षा स्तर में परिवर्तन के लिए कदम उठा रही है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पढ़ते हुए जानकारी दी कि पिछले सालों में महिलाओं को मुद्रा योजना के तहत 30 करोड़ रुपए का लोन दिया गया है। उन्होंने कहा, उद्यमिता के माध्यम से महिलाओं के सशक्तिकरण, जीवनयापन में आसानी और उनके लिए सम्मान ने इन 10 वर्षों में गति पकड़ी है। महिला उद्यमियों को 30 करोड़ मुद्रा योजना ऋण दिए गए हैं।

इसके अलावा वित्त मंत्री ने ये भी बताया कि उनकी सरकार माताओं एवं उनके शिशुओं की स्वास्थ्य के देखभाल को व्यापक कार्यक्रम के तहत लेकर आएगी। उनके बेहतर पोषण वितरण, प्रारंभित बचपन की देखभाल और विकास के लिए सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के तहत आंगनवाड़ी केंद्रों के उन्नयन में तेजी लाई जाएगी। टीकाकरण के प्रबंधन और गहनता के लिए नए डिजाइन किए गए यू-विन प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाएगा। मिशन इंद्रधनुष के प्रयासों को आगे बढ़ाया जाएगा।

इसी तरह महिलाओं को स्वास्थ्य सुविधा देने के क्रम में कहा गया है कि आयुष्मान भारत में आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता कवर होंगी। इसके लिए उन्हें सब सुविधा दी जाएगी। सर्वाइकल कैंसल से भी लड़कियों को मुक्त रखने के लिए मुफ्त टीकाकरण सरकार ने शुरू किया है।

बता दें कि मोदी सरकार की योजनाओं के चलते पिछले 10 सालों में उच्च शिक्षा में महिलाओं का नामांकन 28 फीसद बढ़ा है। उनकी उद्यमशीलता में भी विकास हुआ है। करीबन 9 करोड़ महिलाओं की जिंदगी इन योजनाओं से बदली है। इसी प्रकार ग्रामीण इलाकों में भी महिलाओं को सशक्त करने पर ध्यान दिया जा रहा है। सरकार ने अब तक 1 करोड़ महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनया हैं, अब लक्ष्य 2 करोड़ का नहीं, बल्कि 3 करोड़ का रखा गया है।

पीएम मोदी की महत्वाकांक्षी ‘लखपति दीदी योजना’: अंतरिम बजट में 2 करोड़ का लक्ष्य अब बढ़कर 3 करोड़, 1 करोड़ महिलाएँ बन चुकी हैं लखपति

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुुरुवार (1 फरवरी 2023) को संसद में अंतरिम बजट पेश किया। इस बजट में महिलाओं के लिए कई घोषणाओं की गईं। सीतारमण ने इस दौरान ‘लखपति दीदी योजना’ का भी जिक्र किया। यह महत्वाकांक्षी योजना महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा लाई गई है।

इस अंतरिम बजट में नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने ‘लखपति दीदी योजना’ का लक्ष्य 2 करोड़ से बढ़ाकर 3 करोड़ करने का फैसला किया है। सीतारमण ने कहा कि अब तक एक करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाया गया है। अब इसे बढ़ावा दिया जाएगा और इसे 2 करोड़ से बढ़ाकर 3 करोड़ करने का निर्णय लिया है।

निर्मला सीतारमण ने कहा कि महिला केंद्रित योजनाओं से अब तक करीब 9 करोड़ महिलाओं को महिलाओं के जीवन में बदलाव आया है। बजट भाषण के तुरंत पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी लखपति दीदी योजना का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि मोदी सरकार 2 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का अभियान चला रही है। अब सरकार ने इसके लक्ष्य को बढ़ा दिया है।

क्या है लखपति दीदी योजना?

देश की महिलाओं को आर्थिक रुप से सशक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार ने पिछले साल एक महत्वपूर्ण पहल की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र ने 15 अगस्त 2023 को लाल किले से देशवासियों को संबोधित करते हुए ‘लखपति दीदी योजना’ की घोषणा की थी। उस दौरान देश भर की 2 करोड़ महिलाओं को प्रशिक्षण एवं ऋण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य रखा गया था।

इस योजना के लागू होने से स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी करोड़ों महिलाओं को लाभ मिल रहा है। इन स्वयं सहायता समूहों से आर्थिक रूप से पिछड़ी हुई महिलाएँ जुड़ी हुई हैं। जैसे कि बैंक वाली दीदी, आंगनबाड़ी दीदी आदि। इस योजना में इन महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए कई तरह के पहल किए गए हैं।

लखपति दीदी योजना इन महिलाओं के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण का कार्यक्रम है। इसमें उन्हें स्किल ट्रेनिंग दी जाती है, ताकि वे पैसा कमाने योग्य बनाकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। इस ट्रेनिंग में बिजनेस शुरू करने के तरीके बताए जाते हैं। इस योजना के तहत बिजनेस शुरू कर ने वाली महिलाओं को बिजनेस प्लान, मार्केटिंग और बाजार तक पहुँच के बारे में जानकारी देने के साथ-साथ उन्हें सहायता की जाती है।

समय-समय पर उन्हें तकनीक एवं वित्त से संबंधी जानकारी देने के लिए वर्कशॉप का आयोजन किया जाता है। इससे महिलाएँ बिजनेस के लिए बजट, बचत और निवेश के बारे में जानकारी हासिल करती हैं। इसके साथ ही अत्याधुनिक तकनीक के उपयोग के बारे में सिखाया जाता है। इसके अलावा उन्हें डिजिटल बैंकिंग सेवाओं, मोबाइल वॉलेट एवं अन्य डिजिटल प्लेटफार्मों का उपयोग करना सीखा जाता है।

महिलाओं को प्लंबिंग, एलईडी बल्ब बनाने व ड्रोन के संचालन और मरम्मत जैसे कौशल में प्रशिक्षित किया जाता है। लखपति दीदी योजना के तहत महिलाओं को बिजनेस शुरू करने, शिक्षा या अन्य जरूरतों के लिए छोटे स्तर पर लोन भी उपलब्ध कराया जाता है। महिलाओं की सहायता के लिए इसमें उन्हें कम खर्च में बीमा भी उपलब्ध कराई जाती है।

इस स्कीम का फायदा उठाने के लिए महिला को संबंधित राज्य का स्थायी निवासी और महिला का स्वयं सहायता समूहों से जुड़ा होना अनिवार्य है। इस योजना के तहत उन महिलाओं को शामिल किया जाता है, जिनकी प्रति परिवार सालाना इनकम कम-से-कम 1 लाख रुपए होती है।

मोदी सरकार गरीबों को देगी 2 करोड़ आवास, 300 यूनिट बिजली भी मुफ्त… बजट 2024 में जानें और क्या है खास, ₹1 लाख करोड़ युवाओं के नाम

देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए बजट प्रस्तुत किया है। यह मोदी सरकार 2.0 का अंतिम बजट है। यह प्रधानमंत्री मोदी की सरकार का 12वाँ बजट है। इसकी शुरुआत वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश की दशा में 2014 के बाद आए बदलाव के उल्लेख से की है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि आगामी चुनावों में वर्तमान सरकार को भारी बहुमत मिलेगा। उन्होंने मोदी सरकार की मुफ्त राशन, आवास योजनाओं और जन-धन योजना को गिनाया है।

वित्त मंत्री ने बताया है कि मोदी सरकार की योजनाओं के कारण देश में 25 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर आ सके हैं। उन्होंने किसान सम्मान निधि और स्वनिधि जैसी योजनाओं से पहुँचे लाभ को भी बताया है। उन्होंने खेल के सम्बन्ध में हुई प्रगति को भी उल्लेखित किया है।

2 करोड़ और नए घर, 300 यूनिट मुफ्त बिजली

वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार आने वाले समय में अधिक विकास के लिए आसानी से वित्त सहायता उपलब्ध करवाने के लिए योजना बनाएगी। वित्त मंत्री ने ऐलान किया है कि अब तक प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत 2 करोड़ घर अगले 5 वर्षों में बनाए जाएँगे। अब तक 3 करोड़ घर बन चुके हैं।

वित्त मंत्री ने बताया है कि सरकार 1 करोड़ लोगों के घरों पर सूर्योदय योजना के तहत सोलर पैनल लगाकर 300 यूनिट की मुफ्त बिजली उपलब्ध करवाएगी। वित्त मंत्री ने स्लम और किराए के घरों में रहने वालों के लिए भी घरों का ऐलान किया है।

बच्चियों को कैंसर से बचाने के लिए मुफ्त वैक्सीन

वित्त मंत्री ने ऐलान किया है कि 9-14 वर्ष की बच्चियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लिए मुफ्त वैक्सीन लगाई जाएगी। उन्होंने आयुष्मान योजना को सभी आशा बहनों तक बढ़ाने का ऐलान किया है। मेडिकल सम्बन्धी समस्याओं को सुलझाने के लिए एक कमिटी बनाई जाएगी।

नैनो यूरिया के बाद नैनो डीएपी

वित्त मंत्री ने कहा है कि नैनो यूरिया के सफल प्रयोग के बाद अब नैनो डीएपी पर काम होगा। उन्होंने स्थानीय फसल बीजों पर भी काम करने का ऐलान किया है जो अधिक फसल पैदा करेंगे।

उन्होंने पशुपालकों के लिए भी नए प्रयास करने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि यह नया प्रयास पहले से चल रही योजनाओं के आधार पर किया जाएगा। वित्त मंत्री ने मछलीपालकों के लिए भी नए प्रयास करने का ऐलान किया है।

₹1 लाख करोड़ का नया फंड युवाओं के लिए

वित्त मंत्री ने ऐलान किया है कि सरकार ₹1 लाख करोड़ का एक नया फंड रिसर्च एंड डेवलपमेंट के लिए बनाएगी। डीप टेक टेक्नोलॉजी और रक्षा मामलों में अनुसन्धान के लिए नई योजना लाई जाएगी।

इन्फ्रा और रेलवे पर फंड की बरसात, दिए गए 11 लाख करोड़ रुपए

देश में नया इन्फ्रा बनाने के लिए ₹11.1 लाख करोड़ का कैपिटल आउटले इस बार के बजट में रखा गया है। वित्त मंत्री ने तीन नए रेलवे इकॉनोमिक कॉरिडोर बनाने का ऐलान किया है। इससे माल के आवाजाही की लागत घटेगी। वित्त मंत्री ने बताया है कि पहले से 40,000 डिब्बों को वन्दे भारत में बदला जाएगा।

वित्त मंत्री ने बताया है कि उड़ान योजना के तहत अब 1.3 करोड़ यात्री उड़ान भर रहे हैं। नए एयरपोर्ट का निर्माण जारी रहेगा। वित्त मंत्री ने ऊर्जा क्षेत्र के लिए ऐलान किया है कि पवन ऊर्जा के लिए 1 गीगावाट की क्षमता स्थापित की जाएगी। वित्त मंत्री ने कहा है कि देश में ई बसों का उपयोग बढ़ाया जाएगा।

राज्यों को टूरिस्ट केन्द्रों के विकास करने के लिए कहा जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाएगी। वित्त मंत्री ने बताया है कि लक्षद्वीप समेत अन्य द्वीपों में टूरिस्ट गतिविधि बढ़ाने के लिए विशेष विकास किया जाएगा।

श्रीलंका में मनाएँ छुट्टियाँ…पता चलेगा भारत का सम्मान: विदेश मंत्री जयशंकर के बयान से श्रीलंकाई खुश, क्रिकेट खिलाड़ियों ने भी ‘थैंक यू’ बोला

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक बातचीत के दौरान भारतीयों को श्रीलंका में जाकर छुट्टियाँ बिताने की सलाह दी, जिसके बाद उनका ये वीडियो वायरल हो गया और उनकी सलाह श्रीलंका के अखबारों की सुर्खियाँ बन गई। ये खबर देखने के बाद श्रीलंकाई खिलाड़ियों ने भी भारत के विदेश मंत्री जयशंकर को धन्यवाद दिया।

विदेश मंत्री जयशंकर ने भारतीय प्रबंध संस्थान मुंबई (IIM-B) में एक बातचीत के एक सवाल का उत्तर देते हुए कहा, “मैं सबसे पहले आपको सलाह देना चाहूँगा कि अगर आप अगली बार छुट्टियाँ बिताना चाहते हैं तो श्रीलंका जाएँ। मैं आपसे गंभीरता से कह रहा हूँ कि श्रीलंका जाकर छुट्टियाँ बताएँ और वहाँ के लोगों में घुल-मिलकर पूछें कि वह भारत के बारे में क्या सोचते हैं। मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि आप अपने आप को सातवें आसमान पर पाएँगे।”

इसके पश्चात विदेश मंत्री जयशंकर ने भारत द्वारा श्रीलंका के आर्थिक संकट के दौरान पहुँचाई गई सहायता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “एक औसत श्रीलंकाई के लिए जब पूरी दुनिया ने पीठ दिखा दी थी, मैं खुद कोलम्बो में था, लोग गाड़ियों को धक्का लगा रहे थे। पूरा देश समस्याओं से घिरा था। ऐसे समय में भारत अकेला देश था जो आगे आया। हमने 4.5 बिलियन डॉलर (लगभग ₹37,000 करोड़) श्रीलंका को दिए। और आपको उदाहरण के लिए बता दूँ, श्रीलंका ने लम्बे समय तक अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से बातचीत मात्र 3 बिलियन डॉलर(लगभग ₹25,000 करोड़) के लिए की।”

उन्होंने बताया, “यह हमारे द्वारा दी गई सहायता से आधा है। आदर्श रूप से उन्हें IMF से पहले सबसे सहायता मिलनी चाहिए थी। कोई भी देश आगे नहीं आया। ऐसे में मुझे लगता है कि कुछ पड़ोसी देश हमारे खिलाफ हो रहे हैं यह हमारी विफलता है, हमें अपने में अधिक आत्मविश्वास रखना होगा। हमें यह सच्चाई स्वीकार करना होगा कि चीन भी पड़ोसी देश है और वह भी इन पर प्रभाव डालेगा ही।”

गौरतलब है कि श्रीलंका 2022 में भारी आर्थिक संकट में फँस गया था और भारत ने उसे तेल और दवाइयों समेत तमाम मदद पहुँचाई थी।

विदेश मंत्री जयशंकर का यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल है। यह श्रीलंका के अखबारों में भी सुर्खी बना है। श्रीलंका की सबसे बड़ी समाचार एजेंसी न्यूज वायर ने इसे श्रीलंका में प्रमुखता से दिखाया है। उसके द्वारा एक्स (पहले ट्विटर) पर डाला गया यह वीडियो अब तक लगभग 9 लाख लोगों द्वारा देखा जा चुका है। इसके अलावा श्रीलंका ट्वीट और डेली मिरर जैसी वेबसाइट ने भी इसे प्रचारित किया है। भारत के श्रीलंका के टूरिज्म को बढ़ावा देने और संकट सहायता देने को श्रीलंकाई खिलाड़ियों ने भी सराहा।

पूर्व श्रीलंकाई क्रिकेटर सनत जयसूर्या ने एक्स पर लिखा, “भारतीय विदेश मंत्री माननीय एस जयशंकर को हमारे सबसे बुरे समय में सहायता करने के लिए धन्यवाद। आपके द्वारा श्रीलंका टूरिज्म का समर्थन भी हमारे लिए अमूल्य है।” उनके अलावा अमेरिका की बड़ी सॉफ्टवेयर कम्पनी WSO2 के संस्थापक संजीवा वीरवर्णा ने भी भारत को धन्यवाद कहा।

उन्होंने एक्स पर लिखा, “भारत द्वारा श्रीलंका की उसके बुरे समय में सहायता कभी भुलाई नहीं जाएगी। धन्यवाद विदेश मंत्री एस जयशंकर और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी। हमने IMF से मिली 3 बिलियन की सहायता पर खूब शोर मचाया था और मचा रहे हैं जबकि भारत ने 2022 में हमें बिना समय गँवाए 4.5 बिलियन डॉलर दिए ताकि हमारा देश चलता रहे। मुश्किल के दौर में सहायता करने वाला ही एक सच्चा मित्र होता है।”

मोहम्मद अली के प्यार में थी इंजीनियर अदिति भारद्वाज… प्रेगनेंट करके छोड़ा: कर ली आत्महत्या, धर्मांतरण की भी बात आई सामने

हैदरबाद में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर महिला ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। महिला का नाम अदिति भारद्वाज था। वह कुछ समय पहले से मोहम्मद अली नाम के अपने बॉयफ्रेंड के साथ लिव-इन रिलेशन में रह रही थी। बताया जा रहा है अली ने महिला का धर्मांतरण करवाकर उसका नाम आजिया फातिमा कर दिया था और उसे प्रेगनेंट करने के बाद अपने मजहब की महिला से निकाह कर लिया था।

सुसाइड की घटना 28 जनवरी 2024 की है। मूलत: बिहार की रहने वाली अदिति भारद्वाज हैदराबाद में सालों से सॉफ्ट इंजीनियरिंग का काम करती थी। एक रिपोर्ट दावा कर रही है कि अदिति की पहले शादी हो चुकी थी, लेकिन उसने अपने पति से तलाक ले लिया था और हैदराबाद में वह मोहम्मद अली से 12 फरवरी को निकाह करने वाली थी। मगर अली ने उसे आखिर समय में निकाह से पहले ही धोखा दे दिया। ये धोखा अदिति से बर्दाश्त नहीं हुआ और वह धीरे-धीरे वह डिप्रेशन में चली गई

डिप्रेशन का एक कारण जहाँ मोहम्मद अली से धोखा मिलना था, तो वहीं दूसरा इसी बीच अदिति का प्रेगनेंट होना भी था। कुछ रिपोर्ट बता रही हैं कि थोड़े समय पहले अदिति की तबीयत बिगड़ी थी, जिसके कारण उसे अस्पताल जाना पड़ा। अस्पताल में जब अदिति का चेक अप हुआ तो उसमें निकल कर आया कि वो गर्भवती है।

अदिति यह रिपोर्ट देख काफी घबरा गईं। उसने इस संबंध में फोन करके मोहम्मद अली को जानकारी दी। जब हल नहीं निकला तो 28 जनवरी को खबर आई कि उसने फाँसी लगाकर अपनी जान दे दी है। आत्महत्या का यह केस सामने आने के बाद पुलिस इस संबंध में अपनी पड़ताल कर रही है। उन्होंने मामला दर्ज करके जाँच भी शुरू कर दी है।

सरयू नदी में स्नान, फिर हनुमान गढ़ी और कनक भवन में पूजा… इसके बाद सिर्फ 20 मिनट में बन गई रामलला की आँखें: अरुण योगीराज ने बताया कहाँ से मिली प्रेरणा

अयोध्या में रामलला अपने जन्मस्थान पर विराजमान हो गए हैं। रामलला की मूर्ति को बनाया है मशहूर मूर्तिकार अरुण योगीराज ने। अरुण योगीराज ने बताया है कि रामलला की मूर्ति को बनाने की प्रेरणा उन्हें अयोध्या में ही मिली। उन्होंने पूरी दुनिया को मंत्रमुग्ध कर देने वाली रामलला की आँखों को बनाने में उन्हें सिर्फ 20 मिनट का समय लगा। दरअसल, उन्होंने एक खास मुहूर्त में रामलला की आँखों को बनाया था।

मीडिया चैनल विओन के साथ बातचीत में अरुण योगीराज ने मूर्ति के निर्माण की पूरी कहानी बयान की। अरुण योगीराज ने बताया, “शुरू के दो माह मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि मैं रामलला का चेहरा किस तरह बनाऊँ। ये दीपावली का दिन था, और मैं अयोध्या में था। मैंने यहाँ त्यौहार मनाते हुए बच्चों को देखा, उनके चेहरों को देखकर ही मुझे रामलला का चेहरा बनाने की प्रेरणा मिली।”

अरुण योगीराज ने आगे कहा, “रामलला की आँखों के लिए मेरे पास सिर्फ 20 मिनट का समय था। ये समय मुहूर्त के हिसाब से था।” उन्होंने बताया कि आँखों को बनाने के लिए उन्होंने पवित्र अनुष्ठान भी किए। उन्होंने कहा, “आँखों को गढ़ने का काम शुरू करने से पहले मुझे सरयू नदी में स्नान करना पड़ा और हनुमान गढ़ी और कनक भवन में पूजा के लिए जाना पड़ा। इसके अलावा, मुझे काम के लिए एक सोने की चिनाई वाली कैंची और एक चाँदी का हथौड़ा दिया गया। मैं बहुत उलझन में था क्योंकि मुझे पता था कि 10 तरह की आँखें कैसे बनाई जाती हैं। फिर मैंने उनकी आँखों को बनाया, जिसमें चमक दिखती है।”

एक बंदर हर रोज रामलला को देखने आता

अरुण योगीराज ने बताया कि जब मैं मूर्ति बना रहा था, तब एक माह तक एक बंदर हर दिन एक ही समय पर स्टूडियो आता था। वो मूर्ति को बनाने का काम देखता था और फिर चुपचाप वहाँ से चला जाता था। वो हर शाम 4 से 5 बजे के बीच आता था।

अरुण योगीराज ने दावा किया, “मुझे श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि प्राण-प्रतिष्ठा के बाद एक बंदर गर्भगृह में आया और कुछ मिनट तक वहाँ बैठा और फिर चला गया।” उन्होंने कहा, “मैं प्राण-प्रतिष्ठा के बाद मूर्ति के साथ बैठा था और इसे देख रहा था और मुझे लगा कि यह बहुत अलग दिखाई दे रही है और ऐसा नहीं लग रहा है कि मैंने ही इसे बनाया है।”

योगीराज ने कहा कि पहले दिन से उनका लक्ष्य एक ऐसी मूर्ति बनाने का था, जो भारत के लोगों से जुड़ सके और उन्हें मंदिर की समिति द्वारा चुने जाने की चिंता नहीं थी। अरुण योगीराज ने कहा कि वे चाहते थे कि मूर्ति बहुत ही सुंदर और भव्य हो।

“मैं चाहता था कि मूर्ति देखकर लोगों को भगवान राम की याद आ जाए।”

उन्होंने बताया कि भगवान राम की मूर्ति का चेहरा बनाने के लिए उन्होंने अयोध्या में बच्चों के चेहरे से प्रेरणा पाई थी। योगीराज की मेहनत का नतीजा यह हुआ कि रामलला की मूर्ति बहुत ही सुंदर और भव्य बनी है। मूर्ति की आँखें बहुत ही आकर्षक हैं। लोगों ने मूर्ति की आँखों की तारीफ की है।

उस देश में, जहाँ प्रभु श्री राम सर्वत्र पूजनीय हैं, उनकी मूर्ति बनाने के लिए चुने गए मूर्तिकारों में से एक होना अपने आप में एक उपलब्धि है। मूर्तिकार अरुण योगीराज ने निश्चित तौर पर इतिहास में अपना नाम दर्ज कर लिया है।

ज्ञानवापी में फिर गूँजे घंटे-घड़ियाल, जली अखंड ज्योति, रात 2 बजे तक श्रृंगार-गौरी की पूजा: देखती रह गई मस्जिद कमिटी

वाराणसी के जिला न्यायालय द्वारा हिन्दू श्रद्धालुओं को पूजा की अनुमति दिए जाने के बाद ज्ञानवापी परिसर घंटे-घड़ियाल की ध्वनि से गुंजायमान हो गया। ज्ञानवापी के विवादित ढाँचे में कल (31 जनवरी, 2024) से हिन्दू श्रद्धालुओं ने पूजा चालू कर दी। कल रात 10 बजे के बाद चालू हुई पूजा 1 फरवरी की सुबह 2 बजे तक चली।

वाराणसी के जिला न्यायालय ने कल हिन्दू पक्ष की माँग पर व्यास तहखाने में पूजा की इजाजत दी थी। हिन्दू पक्ष ने तर्क दिया था कि यहाँ वर्ष 1993 तक नियमित रूप से पूजा होती थी और इस पर तत्कालीन मुलायम सिंह यादव की सरकार ने बिना किसी वैधानिक आधार के रोक लगा दी थी। जिला न्यायालय ने यहाँ पश्चिमी दीवाल का इलाका हिन्दुओं को पूजा के लिए सौंपने का आदेश जिला प्रशासन को दिया था। साथ ही इसके लिए सभी इंतजाम करवाने का आदेश दिया था।

कोर्ट के कल के आदेश के बाद रात 10 बजे यहाँ वाराणसी के डीआईजी और डीएम पहुँचे तथा यहाँ लगे हुए बैरिकेड हटाए गए। इसके बाद काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के पुजारी ने यहाँ मूर्तियाँ स्थापित की और भगवान की शयन आरती की। यहाँ भगवान के सामने अखंड ज्योति भी जलाई गई। इस दौरान यहाँ व्यास परिवार भी मौजूद रहा और पूजा में शामिल हुआ जो कि 1993 तक इस तहखाने में पूजा किया करता था। हालाँकि, यह तहखाना अभी सामान्य श्रद्धालुओं के लिए नहीं खोला गया है।

वाराणसी के जिला प्रशासन ने बताया है कि यहाँ न्यायालय के आदेशानुसार सभी प्रबंध कर दिए गए हैं। यहाँ बैरिकेड हटाने, रास्ते तैयार करने और सुरक्षा सम्बन्धी कामों को पूरा कर लिया गया है। वाराणसी के जिलाधिकारी एस राजलिंगम ने कहा है कि आदेश का पालन किया गया है।

ज्ञानवापी में पूजा शुरू किए जाने को लेकर हिन्दू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने बताया, “राज्य सरकार ने न्यायालय के निर्देश का पालन किया है। काशी विश्वनाथ ट्रस्ट के एक पुजारी द्वारा मूर्तियाँ स्थापित करने के बाद शयन आरती की गई है। अखंड ज्योति भी उनके सामने जला दी गई है। अब इन देवी-देवताओं के लिए रोज सभी आरतियाँ और भोग प्रसाद होगा।”

इस सम्बन्ध में कल न्यायालय ने हिन्दू पक्ष के शैलेन्द्र पाठक की याचिका पर यह निर्णय सुनाया था। याचिका में कहा गया था कि उक्त तहखाने में मूर्तिपूजा की जाती थी। न्यायालय ने माना कि दिसंबर 1993 में पुजारी सोमनाथ व्यास को तहखाने में घुसने से रोक दिया गया था और इसकी बैरिकेडिंग कर दी गई थी। ब्रिटिश काल से ही वो वहाँ पूजा करते आ रहे थे। उन्हें रोके जाने के बाद राग-भोग आदि संस्कार भी रुक गए। बाद में तहखाने का दरवाजा रोक दिया गया।

न्यायालय ने ये भी माना कि हिन्दू धर्म से संबंधित कई सामग्रियाँ एवं प्रतिमाएँ आज भी उक्त तहखाने में मौजूद हैं। मूर्तियों की नियमित रूप से पूजा की जानी आवश्यक है। न्यायालय ने बड़ी बात कही कि राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने बिना किसी विधिक अधिकार के दिसंबर 1993 में पूजा बंद करवा दी थी। उसी महीने में मुलायम सिंह यादव ने बसपा सुप्रीमो कांशीराम के समर्थन से सरकार बनाई थी और मुख्यमंत्री बने थे। ‘मिले मुलायम-कांशीराम, हवा में उड़ गए जय श्री राम’ का नारा लगाया गया था।

मुस्लिम पक्ष का दावा है कि व्यास द्वारा उक्त तहखाने में कभी पूजा की ही नहीं गई। साथ ही वहाँ कोई मूर्ति होने की बात भी नकार दी गई। न्यायालय ने आदेश दिया कि 7 दिनों के भीतर वहाँ लोहे के बाड़ में पूजा-पाठ की व्यवस्था की जाए। कोर्ट को ये भी बताया गया था कि परिक्रमा वाले मार्ग पर मस्जिद कमिटी वालों ने लोहे की बैरिकेडिंग कर रखी है। साथ ही कोर्ट ने व्यास परिवार की वंशावली और वसीयत का भी जिक्र किया। इस फैसले के बाद काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में महादेव का दर्शन करने जाने वाले भक्त ज्ञानवापी में भी पूजा-पाठ कर सकेंगे।

ऑफिस में हर दिन 12 घंटे करना होगा काम, बैंक खाते में सैलरी आएगी कम… लेकिन 3 दिन मिलेगा आराम: जानें नए बजट के दावे की सच्चाई

केंद्र सरकार द्वारा 1 फरवरी 2024 को पेश किए जाने वाले बजट से पहले सोशल मीडिया पर एक खबर फैली है जिसमें कहा गया है कि इस बार सरकार 2 वीक ऑफ का ट्रेंड खत्म करके, हफ्ते में 3 दिन ऑफ देने का नियम लेकर आने वाली है।

इस पोस्ट के साथ दावा है कि केंद्रीय वित्तीय मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट में कई बदलाव कर सकती हैं। इन्हीं बदलावों में एक बदलाव ये भी होगा कि जॉब पर जाने वाले लोगों को जहाँ अब तक सिर्फ 2 दिन का वीक ऑफ मिलता था, उन्हें 1 जुलाई के बाद से हफ्ते में 3 दिन का ऑफ मिलेगा।

तस्वीर साभार: TOI

इसके साथ इसमें दावा है कि कर्मचारियों को इस पॉलिसी के तहत छुट्टी के लिए 10-12 घंटे प्रतिदिन काम करना होगा। इसके अलावा हो सकता पैसा जो हाथ में मिलेगा वो शायद कम हो लेकिन पीएफ बढ़ा दिया जाएगा। इस पोस्ट के साथ दावा है कि मोदी सरकार लेबर लॉ रेगुलेशन के तहत इसे लागू करने की सोच रही है।

क्या है 3 दिन छुट्टी मिलने का सच

अब बता दें कि ये पूरा दावा सोशल मीडिया पर जो फैलाया जा रहा पूर्णत: गलत है। प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो के फैक्ट चेक अकॉउंट ने इस दावे का फैक्ट चेक किया है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही इस तरह की जानकारी बिलकुल झूठी है। सरकार बिलकुल हफ्ते में 3 दिन छुट्टी देने की प्लानिंग नहीं कर रही है।

पीआईबी ने स्पष्ट तौर पर लिखा है कि एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। केंद्रीय वित्तीय मंत्रीय निर्मला सीतामण ने अगले बजट में 3 दिन छुट्टी की पॉलिसी पर कोई विचार नहीं किया। मतलब वायरल दावा सरासर गलत है। ऐसा कोई प्रस्ताव वित्तीय मंत्री द्वारा नहीं लाया गया है।

बता दें कि यह पहली बार नहीं है। इससे पहले भी इस तरह की अफवाहें फैलाई जाती रही हैं। दिसंबर में भी इस तरह की खबर आई थी और अब बजट से पहले भी इसे प्रासंगिक बनाकर फैलाने का प्रयास हुआ है, लेकिन इस पर सरकार ने इस पर खुद संज्ञान ले लिया और झूठ की पोल खोल दी।

‘ये एक ऐसा इलाज जो बीमारी से भी बदतर’: फेसबुक पर सेंसरशिप लगाने के लिए पहुँचे रोहिंग्या तो बोला हाईकोर्ट, किया था दावा – हमारे खिलाफ हिंसा को मिल रहा बढ़ावा

दिल्ली हाईकोर्ट में 2 रोहिंग्या मुस्लिमों ने याचिका दायर की थी कि फेसबुक पर रोहिंग्याओं से नफरत दिखाने वाले वीडियो और कंटेंट के प्रचार-प्रसार पर रोक लगाया जाए, क्योंकि फेसबुक इसको बढ़ावा देकर पैसे कमाता है। इसके लिए कोर्ट आदेश दे कि ऐसे कंटेंट को प्रसारित करने की अनुमति न दी जाए। याचिका में उन्होंने आरोप लगाया है कि फेसबुक पर रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ नफरत भरे भाषण को बढ़ावा दिया जा रहा है। याचिकाकर्ताओं ने माँग की है कि फेसबुक को इस नफरत भरे भाषण को हटाने और रोहिंग्या समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया जाए।

याचिका में कहा गया था कि फेसबुक पर रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ नफरत भरे भाषण के कई उदाहरण हैं। इनमें रोहिंग्याओं को ‘आतंकवादी’, ‘घुसपैठिए’ और ‘भारतीयों के लिए खतरा’ कहा गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस तरह के भाषण रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा दे सकते हैं। इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने गंभीर टिप्पणी की।

‘लाइव लॉ’ की खबर के मुताबिक, दिल्ली हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की बेंच ने कहा कि यह सुझाव कि फेसबुक पर रोहिंग्याओं पर किसी भी कंटेंट के पब्लिश होने से पहले सेंसरशिप होनी चाहिए, ये ‘एक ऐसे उपचार का उदाहरण है जो बीमारी से भी बदतर है।’ इसके साथ ही हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को फेसबुक इंडिया को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ ‘घृणित और हानिकारक सामग्री’ को बढ़ावा देने से रोकने का निर्देश देने से इनकार कर दिया है।

हाई कोर्ट ने कहा, ‘आईटी नियम, 2021 के अनुसार सभी लोगों के पास किसी भी शिकायत की अनुमति है, इसके अनुसार सरकार कार्रवाई करती है। लेकिन याचिकाकर्ताओं ने कंटेंट के प्रकाशित होने से पहले ही रोक लगाने की माँग की है, जो नियमों के अनुसार गलत है। ये तो किसी बीमारी से भी बदतर उसके इलाज जैसी बात है।” कोर्ट ने कहा कि सरकार को ऐसी शक्ति मिल जाने से समस्याएँ ही बढ़ेंगी।

इसी के साथ हाईकोर्ट ने फेसबुक के खिलाफ 2 रोहिंग्या शरणार्थियों मोहम्मद हमीम और कौसर मोहम्मद की याचिका का निपटान कर दिया। इसमें फेसबुक के एल्गोरिदम की शिकायत करते हुए कहा गया था कि फेसबुक पैसा बनाने के लिए रोहिंग्या लोगों के खिलाफ कंटेंट को बढ़ावा देता है। लेकिन, कोर्ट ने कहा कि फेसबुक के खिलाफ माँगी गई राहतें बरकरार रखने योग्य नहीं हैं, क्योंकि रिट याचिका में ऐसा कोई आरोप नहीं है कि अधिकारी आईटी नियम 2021 के तहत अपने वैधानिक दायित्वों का पालन करने में विफल रहे हैं।

याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि फेसबुक एक बड़ी सोशल मीडिया कंपनी है। इसकी पहुँच दुनिया भर में है। ऐसे में, फेसबुक पर नफरत फैलाने वाले भाषण का असर भी बहुत बड़ा होता है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि फेसबुक को नफरत फैलाने वाले भाषण को रोकने के लिए कदम उठाने चाहिए।

वहीं, फेसबुक का कहना है कि उनकी कंपनी नफरत फैलाने वाले भाषण को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है। कंपनी के पास नफरत फैलाने वाले भाषण को पहचानने और हटाने के लिए तकनीक है। हालाँकि, कंपनी का कहना है कि यह पूरी तरह से नफरत फैलाने वाले भाषण को रोकना संभव नहीं है। फेसबुक ने यह कहते हुए याचिका खारिज करने की माँग की थि कि इसमें इस बात का कोई संदर्भ नहीं दिया गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म द्वारा लगाए गए दिशानिर्देश कैसे अप्रभावी हैं, क्योंकि याचिकाकर्ता ने एक भी ऐसा उदाहरण नहीं दिया।