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हेमंत सोरेन को सुप्रीम कोर्ट से भी झटका, ED गिरफ्तारी को दी थी चुनौती: शीर्ष अदालत ने कहा- सीधे यहाँ क्यों आए, हाई कोर्ट जाएँ

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली है। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार (2 फरवरी 2024) को उनकी याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। उन्हें पहले हाई कोर्ट जाने को कहा है। सोरेन ने याचिका में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा खुद की गिरफ्तारी को चुनौती दी थी।

जाँच एजेंसी ने 31 जनवरी 2024 की रात सोरेन को लैंड स्कैम में गिरफ्तार किया था। उससे पहले उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। शुक्रवार को ही उनकी जगह चंपई सोरेन राज्य के नए मुख्यमंत्री के तौर पर पर शपथ लेने जा रहे हैं।

नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण से ठीक पहले सुप्रीम कोर्ट ने हेमंत सोरेन की याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए पूछा कि हाई कोर्ट जाने की बजाए वे सीधे शीर्ष अदालत में क्यों आ गए? जस्टिस संजीव खन्ना, एमएम सुंद्रेश और बेला एम त्रिवेदी की बेंच ने कहा कि इस तरह यदि एक व्यक्ति को अनुमति दी गई तो सभी लोगों को देनी पड़ेगी।

हेमंत सोरेन के वकील कपिल सिब्बल ने बेंच के सामने उनके मुख्यमंत्री रहने की दलील दी। इस पर जस्टिस खन्ना ने कहा कि अदालत हर किसी के लिए है। यदि इस तरह एक व्यक्ति को रियायत दी गई तो वही रियायत सभी को देनी होगी। इसके बाद बेंच ने याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए उन्हें हाई कोर्ट जाने को कहा।

हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी करीब सात घंटे की लंबी पूछताछ के बाद बुधवार देर रात को हुई थी। इसके अगले दिन ईडी ने उन्हें कोर्ट में पेश कर 10 दिनों की रिमांड माँगी थी। एजेंसी ने पीएमएलए कोर्ट में बताया था कि सोरेन से अभी कई जानकारियाँ नहीं मिल पाई है। लिहाजा पूछताछ के लिए उन्हें रिमांड पर लेना जरूरी है। कोर्ट ने सुनवाई के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया था।

दूसरी ओर हाई कोर्ट ने भी तकनीकी आधार पर सोरेन को राहत देने से इनकार किया था। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल करने की बात करते हुए हाई कोर्ट से याचिका वापस ले ली थी। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है।

उल्लेखनीय है कि यह मामला सेना की जमीन पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे अवैध कब्जे से जुड़ा हुआ है। इस संबंध में 2022 में रांची नगर निगम के टैक्स कलेक्टर दिलीप शर्मा ने एफआईआर दर्ज कराई थी। इसके बाद जब मामले की जाँच शुरू हुई तो इसकी आँच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तक पहुँची। इस मामले में ईडी छापेमारी की कई कार्रवाई कर चुकी है। साथ ही सोरेन से पहले कई अन्य लोगों की भी गिरफ्तारी हो चुकी है।

पूनम पांडे का निधन, सर्वाइकल कैंसर से हुई मौत, ऑफिशिअल इंस्टाग्राम पर दी जानकारी: फैंस को नहीं हो रहा विश्वास

पूनम पांडे जीवित हैं, उनकी मृत्यु नहीं हुई है। वह और उनकी टीम ने अपनी मौत का नाटक रचा था। इससे संबंधित रिपोर्ट यहाँ पढ़ें। पुरानी रिपोर्ट (उनकी टीम द्वारा झूठ पर आधारित) नीचे है।

बॉलीवुड हिरोइन और मॉडल पूनम पांडे का निधन हो गया है। उन्हें सर्वाइकल कैंसर था। उनके ऑफिशिअल इंस्टाग्राम अकाउंट पर इसकी जानकारी दी गई है। पूनम पांडे की उम्र सिर्फ 32 साल थी। इतनी कम उम्र में मौत से उनके फैंस सदमे में हैं।

पूनम पांडे की मौत की खबर को लेकर इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा गया: “यह सुबह हमारे लिए दुखदायी है। आपको यह बताते हुए बहुत दुख हो रहा है कि हमने अपनी प्यारी पूनम को सर्वाइकल कैंसर के कारण खो दिया है। हर व्यक्ति जो कभी भी उनसे मिला, उसे उनका प्रेम मिला। दुख के इस समय में, हम अपनी गोपनीयता का अनुरोध करते हैं। हम उनके द्वारा शेयर की गई हर बात के लिए उन्हें प्यार से याद करेंगे।”

न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार पूनम पांडे के मैनेजर ने उनकी मौत की जानकारी दी है। मैनेजेर ने बताया कि 1 फरवरी की रात को सर्वाइकल कैंसर के कारण पूनम पांडे की मौत हो गई। इसी रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पूनम पांडे का निधन उनके पैतृक शहर कानपुर में हुआ है।

पूनम पांडे के निधन वाले पोस्ट पर उनके फैंस को भरोसा नहीं हो रहा है। कोई लिख रहा कि काश यह खबर झूठ हो, कोई कह रहा कि पूनम शायद किसी और का नाम होगा।

अश्लील वीडियो देखता था बेटा, लड़कियों को छेड़ता था… पिता विजय बट्टू ने कोल्डड्रिंक में जहर देकर मार डाला, महाराष्ट्र पुलिस ने पकड़ा

महाराष्ट्र में एक शख्स ने अपने ही 14 साल के बेटे को जहर देकर मार दिया क्योंकि बेटे को अश्लील वीडियोज देखने की लत लगी हुई थी। पिता का यह भी कहना है कि बेटा, स्कूल में बच्चियों को परेशान करता था, उन्हें छेड़ता था और इसकी वजह से प्रिंसिपल उन्हें कई बार तलब कर चुकी थी।

विजय बट्टू नाम के इस शख्स का कहना है कि वो अपने बेटे की गंदी आदतों से परेशान था। इसलिए उसने बेटे को कोल्डड्रिंक में जहर पिलाकर मार डाला। घटना महाराष्ट्र के सोलापुर की है।

पुलिस ने बताया कि उन्हें जनवरी माह में एक लड़के के लापता होने की सूचना मिली थी। उसके बाद उन्हें लड़के का शव सोलापुर में मिला। जब उन्होंने अपनी जाँच की तो पता चला कि लड़के को जहर देकर मारा गया है।

पुलिस ने लापता लड़के की रिपोर्ट की जगह इस केस को हत्या का मामला करके दर्ज किया। धीरे-धीरे पुलिस ने परिवार से पूछताछ की और उन्हें शक होना शुरू हुआ। पुलिस ने पिता को अपने कॉन्फिडेंस में लेकर जब पूछना शुरू किया तो पता चला कि उसी ने बेटे को जहर दिया था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पिता ने बताया कि बेटा पढ़ाई नहीं करता था, लड़कियों को छेड़ता था, अश्लील वीडियोज देखता था। परिवार ने कई बार उसे समझाया था कि वो अपने आप में सुधार कर ले लेकिन वो घरवालों की एक नहीं सुनता था। उसके बर्ताव के कारण स्कूल में कई बार परिवार को बुलाया भी जाता था।

इन्हीं सबकी वजह से पिता को अपने बेटे से परेशानी होनी शुरू हुई। 13 जनवरी को विजय अपने बेटे विशाल को अपने साथ बाइक पर बैठाकर ले गए। वहाँ उसे थम्स अप में सोडियम नाइट्रेट और जहरीला पाउडर मिलाकर पिला दिया, फिर घर आ गए। बाद में शाम को विजय ने बेटे की तलाश करने का नाटक किया। पत्नी के साथ जाकर उसके गायब होने की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने विजय द्वारा जुर्म कबूले जाने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया है। वहीं मीडिया में ये खबर आने के बाद लोग हैरान हैं कि आखिर एक पिता ऐसा कैसे कर सकता है।

₹280955 करोड़ का डिफेंस डील, पर ‘द वायर’ ने लिखा- भारत को ड्रोन्स देने से मना किया: अमेरिका ने 24 घंटे में खोल दी वामपंथी पोर्टल के ‘झूठ’ की पोल

वामपंथी प्रोपेगेंडा पोर्टल और फेक न्यूज फैलाने वाले ‘द वायर’ ने 31 जनवरी 2024 को दावा किया कि अमेरिका ने भारत को बेचे जाने वाले ड्रोन्स की बिक्री पर रोक लगा दी है। आर्टिकल लिखने वाला और कोई नहीं बल्कि अजय शुक्ला है, जिसे रक्षा मामलों से जुड़े कई प्रोपगेंडे फैलाने के लिए जाना जाता है। इस बार भी उसने कुछ ऐसा ही किया जिसके कारण फिर उसकी और द वायर की अमेरिका तक में फजीहत हुई है।

लेख में दावा किया गया कि अमेरिकी सरकार ने भारत को 31 प्रीडेटर ड्रोन की बिक्री रोक दी। लेख के अनुसार अमेरिकी सरकार ने “MQ-9A सी गार्जियन और स्काई गार्जियन ड्रोन की डिलीवरी को तब तक रोक दिया है जब तक कि भारत सरकार खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नून की हत्या के मामले में जाँच में सहयोग नहीं करती।”

अजय शुक्ला ने 31 जनवरी को जहाँ अपने लेख में वाशिंगटन में बड़े पद पर बैठे सूत्र के हवाले से इस खबर में यह भी दावा किया कि अमेरिका ने भारतीय नौसेना को छह और बोइंग पी-8आई पोसीडॉन विमान बेचने के प्रस्ताव को भी रोक दिया है। वहीं एक दिन बाद हिंदुस्तान टाइम्स ने भी इस संबंध में एक रिपोर्ट प्रकाशित की और बताया कि अमेरिकी कॉन्ग्रेस ने भारत को ड्रोन बेचने की मंजूरी दे दी है।

एचटी की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी विदेश विभाग ने प्रीडेटर ड्रोन निर्माता जनरल एटॉमिक्स को सूचित किया कि अमेरिकी कॉन्ग्रेस ने भारत को 31 एमक्यू9बी ड्रोन बिक्री की ‘स्तरीय समीक्षा’ को मंजूरी दे दी है। आगे रिपोर्ट आधिकारिक कॉन्ग्रेस को प्रस्तुत की जाएगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि जनरल एटॉमिक्स ने इसकी जानकारी भारत सरकार को दी।

अब हिंदुस्तान की रिपोर्ट को देखें तो द वायर की पूरी खबर फेक है क्योंकि हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार तो अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट ने तो इस डील की मंजूरी दे दी है। एचटी के अलावा पत्रकार शिव अरूर ने भी एक डिफेंस सिक्योरिटी कॉर्पोरेशन एजेंसी की न्यूज रिलीज को शेयर किया है। इस रिलीज ने द वायर के फर्जी पोल खोल दी। इसमें साफ साफ लिखा गया कि अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट ने बिक्री को अप्रूव कर दिया है। ये डील 3.99 बिलियन डॉलर यानी 280955 करोड़ रुपए के लगभग की है।

अब चूँकि इस मामले को लेकर दो-दो तरह की रिपोर्ट्स सामने आ रही थी। ऐसे में अमेरिकी विदेश विभाग की नियमित प्रेस ब्रीफिंग के दौरान यह मामला उठाया गया। इस दौरान प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने स्पष्ट किया कि उन रिपोर्टों में कोई सच्चाई नहीं है कि इस सौदे को अमेरिकी सरकार ने रोक दिया है। जब एक रिपोर्टर ने उनसे पूछा कि द वायर की रिपोर्ट सच है या नकली, तो प्रवक्ता ने हँसते हुए कहा – “I love, nice try.”

इस दौरान पत्रकार ने पूछा, “एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पन्नू की हत्या से जुड़े मामले की जाँच होने तक संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा भारत को 3 बिलियन डॉलर की ड्रोन बिक्री से जुड़ा नुकसान हुआ? क्या यह सच है या सिर्फ एक फर्जी खबर है?” इस पर मैथ्यू मिलर ने कहा कि सौदे के संबंध में ऑफिसियल सूचना कब जारी होगी, इस पर उन्हें कोई टिप्पणी नहीं करनी है। उन्होंने कहा कि हथियारों सौदों से जुड़े फैसले अमेरिकी कॉन्ग्रेस लेती है।

बता दें कि इस फर्जी खबर के फैलने की शुरुआत जिस अजय शुक्ला के लेख से हुई, उसपर पहले भी फेक न्यूज फैलाने के न सिर्फ आरोप लगे हैं, बल्कि कई मामलों में वो फेक न्यूज फैलाता भी पकड़ा जा चुका है। उसने भारत-चीन के सैनिकों के बीच झड़प को लेकर भी फेक न्यूज फैलाने की कोशिश की थी, जिसका ऑपइंडिया ने पर्दाफाश किया था। उस पर इटली की महिला पत्रकार ने भी गंभीर आरोप लगाए थे।

ये खबर मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में लिखी गई है, उसे पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

ED ने हेमंत सोरेन को किया गिरफ्तार, विधायकों को टूट से बचाने के लिए JMM नेता चंपई सोरेन चले हैदराबाद: राँची में भाजपा नेताओं की बैठक

झारखंड में 1 फरवरी 2024 का दिन राजनीतिक रूप से काफी उथल-पुथल भरा रहा। हेमंत सोरेन को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जमीन घोटाले में गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश किया, जहाँ उन्हें ईडी की हिरासत में भेज दिया गया। दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री पद से हेमंत सोरेन के इस्तीफे के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) विधायक दल के नेता चंपई सोरेन ने सरकार बनाने का दावा पेश को लेकर राज्यपाल से मुलाकात की।

इस मुलाकात के बाद हेमंत के उत्तराधिकारी के रूप में चुने गए चंपई सोरेन समर्थक विधायकों के साथ हैदराबाद रवाना होने के लिए एयरपोर्ट पहुँचे, लेकिन कोहरे के कारण उनकी चार्टर्ड फ्लाइट उड़ान नहीं भर सकी और यात्रा बीच में ही रुक गई। खबर लिखे जाने तक उनकी उड़ान के रवाना होने की खबर नहीं थी।

एयरपोर्ट पर अटके चंपई और साथी विधायक

कहा जा रहा है कि विधायकों को टूट से बचाने के लिए चंपई सोरेन अपने साथी विधायकों को लेकर हैदराबाद रवाना होने के लिए राँची एयरपोर्ट पर गए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, खराब मौसम की वजह से उनकी चार्टर्ड प्लेन उड़ान नहीं भर पाई। बताया जा रहा है कि राँची एयरपोर्ट पर दो प्राइवेट प्लेन हैं। वहीं, हैदराबाद में दो बसें इन विधायकों का इंतजार कर रही हैं। इन विधायकों में जेएमएम और कॉन्ग्रेस पार्टी के विधायक शामिल हैं।

चंपई सोरेन ने की राज्यपाल से मुलाकात

इससे पहले, जेएमएम और गठबंधन के विधायक दल के नए चुने गए नेता चंपई सोरेन ने राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात की। इस दौरान आलमगीर आलम, प्रदीप यादव, सत्यानंद भोक्ता और विनोद सिंह मौजूद रहे। राज्यपाल ने ही इन पाँच नेताओं को मिलने का वक्त दिया था। झारखंड के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात के बाद झामुमो विधायक दल के नेता चंपई सोरेन ने कहा, “हमने राज्यपाल से माँग की है कि सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए। उन्होंने (राज्यपाल) कहा कि प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी…।”

इससे पहले, झारखंड मुक्ति मोर्चा ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें सभी 43 विधायक दिख रहे हैं। ये वही 43 विधायक हैं जिन्होंने चंपई सोरेन को समर्थन दिया है।

हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी झारखंड की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकती है। झारखंड में राजनीतिक उथल-पुथल का माहौल है। बता दें कि राज्य की प्रमुख विपक्षी दल भाजपा ने शुक्रवार (2 फरवरी 2024) को लगभग डेढ़ बजे अपने विधायकों की बैठक बुलाई है।

3000 नारी सेना संग रानी जयराज कुमारी ने मुगलों को चटाई धूल, शुरू करवाई थी रामजन्मभूमि पर पूजा: जहाँ पति और भाई ने पाई वीरगति, वहीं हुईं बलिदान

अयोध्या में 500 साल तक चले रक्तरंजित संघर्ष के बाद आखिरकार 22 जनवरी 2024 को भगवान राम के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा उनके जन्मभूमि पर विधि-विधान से हो गई। इस अवसर पर देश और दुनिया भर के हिन्दुओं ने ना सिर्फ दीपावली मनाई, बल्कि उन तमाम रामभक्तों को भी याद किया जिन्होंने मुगल से लेकर मुलायम सिंह यादव के काल के बीच खुद को राम के नाम पर बलिदान कर दिया।

उन अनगिनत ज्ञात-अज्ञात बलिदानियों में तमाम नारी शक्तियाँ भी हैं, जिन्हें वामपंथी कलमकारों ने साजिशन इतिहास के पन्नों से विस्मृत कर दिया। उन्हीं नारी शक्तियों में एक थीं रानी जयराज कँवर (जयराज कुमारी) और उनके साथ लड़कर वीरगति पाईं 3 हजार से अधिक महिलाओं की सेना। ऑपइंडिया ने रानी जयराज कुमारी के हंसवर स्थित महल पहुँचकर इतिहास और वर्तमान की जानकारी जुटाई।

राम मंदिर के लिए पति, भाई, देवर ने दिया था बलिदान

उत्तर प्रदेश के जिला अम्बेडकरनगर के हंसवर राजघराने की रानी जयराज कँवर के पति राजा रणविजय सिंह मुगल आक्रांता बाबर की फ़ौज से लड़कर रामजन्मभूमि पर वीरगति पा गए थे। इसी युद्ध में रानी के भाई एवं गोरखपुर के पास स्थित जयराज नगर के राजकुमार वीरभानु प्रताप सिंह भी बलिदान हुए थे। इसके साथ ही रानी जयराज कँवर के देवर और उनके के युवा भी राम मंदिर की रक्षा के लिए सन 1526-27 में वीरगति को प्राप्त हो गए थे।

अपने पति राजा रणविजय सिंह और प्रजा के बलिदानियों के अंतिम संस्कार के बाद रानी जयराज कुमारी ने अपने साथ 3,000 नारियों की सेना लेकर रणक्षेत्र में कूद पड़ीं और रामजन्मभूमि को मुक्त कराने के लिए आक्रमण कर दिया था। हमने अपनी पिछली रिपोर्ट में इस युद्ध के बारे में विस्तार से बताया था। साथ ही यह भी बताया था कि किस प्रकार से अभी हंसवर का ऐतिहासिक राजमहल जर्जर हालत में है।

बचपन से ही थीं युद्ध कौशल में पारंगत

अम्बेडकरनगर के इतिहासकार और हंसवर राजघराने से जुड़े बलराम मिश्र ऑपइंडिया को बताते हैं कि रानी जयराज कुमारी बचपन से ही युद्ध कला में निपुण थीं। उन्होंने अपने मायके जयराज नगर में घुड़सवारी और तलवारबाजी जैसी युद्ध कलाएँ सीखी थीं। हंसवर के राजा रणविजय सिंह से शादी होने के बाद भी रानी जयराज कँवर ने अपने युद्ध कौशल की प्रैक्टिस नहीं छोड़ी थी।

रानी जयराज कुमारी के बारे में बलराम मिश्रा बताते हैं कि उन्होंने अपनी एक खास सेना बनाई थी, जो राजा की नियमित फ़ौज से अलग थी। लगभग 3 हजार की संख्या वाली इस सेना में सिर्फ महिलाएँ थीं। हंसवर राज्य की ये महिलाएँ सभी जातियों से थीं। इन्हें बराबर का सम्मान मिलता था।

महल के बाहर इसी हिस्से में दी जाती थी महिला सैनिकों को युद्ध की ट्रेनिंग

महिला सैनिकों की ट्रेनिंग आदि की जिम्मेदारी खुद रानी जयराज कुमारी सँभालती थीं। कुछ ही समय में ये सभी महिलाएँ युद्ध कला में प्रवीण हो गईं। इन महिलाओं के परिवार में बच्चों की शिक्षा-दीक्षा आदि भार राजपरिवार स्वयं उठाता था और इस पर विशेष ध्यान देता था।

डाकुओं के गिरोह को बाँधकर नगर में लाईं

इतिहास की एक घटना का जिक्र करते हुए बलराम मिश्र बताते हैं कि एक समय हंसवर राज्य के बाहरी हिस्से में कई डाकू सक्रिय थे। वो न सिर्फ घरों में लूटपाट करते, बल्कि लोगों की हत्या भी कर देते थे। राज्य की नियमित सेना काफी कोशिशों के बाद भी उनको पकड़ नहीं पा रही थी, क्योंकि डकैती डालने के बाद सभी डाकू नदी पार करके दूसरे राज्य की सीमा में घुस जाते थे।

ऐसे में इन डाकुओं को पकड़ने का जिम्मा खुद रानी ने अपनी सेना के साथ उठाया था। डाकुओं की तलाश में रानी जयराज कुमारी कई दिनों तक अपनी नारी सेना की चुनिंदा सैनिकों के साथ वेश बदलकर सीमाओं पर घूमती रहीं। वो नदी के तट पर ही छिपकर रूकती थीं। आखिरकार एक दिन उनकी तलाश पूरी हुई।

एक दिन डाकुओं के गिरोह ने वेश बदली हुई रानी जयराज और उनकी सैनिकों को देखा तो उन्हें महिला समझकर उन पर हमला कर दिया। आमने-सामने के इस युद्ध में रानी जयराज कुमारी और उनकी सैनिक भारी पड़ीं और कई डाकुओं को मौत के घाट उतार दिया। जो डाकू बच गए थे, उन्हें बाँधकर नगर में लाया गया और राज्य के कानून के हिसाब से दंडित किया गया था।

आज भी गूँजता है रानी का गुणगान

रानी जयराज कुमारी की वीरता का गुणगान आज भी हंसवर के कुछ विद्वान गाकर बताते हैं। उनकी वीरता को लेकर संस्कृत में लिखे तमाम किताबों में एक किताब में एक पंक्ति है, “जयराज कुमारी राख्या भार्या युद्ध विशारद:, पतिव्रताः तपोमूर्तिः सौंदर्यो देवताः नताः”। इस श्लोकों का हिंदी में अर्थ है कि राजा रणविजय की धर्मपत्नी रानी जयराज कुमारी युद्ध विशारद, तपस्वी, पतिव्रता और सुंदरता में देवांगनाओं को भी लज्जित करने वाली थीं। हालाँकि समय के साथ ये सभी श्रुतियाँ लोग भूलते जा रहे हैं।

महल के इसी हिस्से में रहती थीं रानी जयराज कुमारी

पति के बलिदान के बाद बुलाई थी राजसभा

रानी जयराज कुमारी के बारे में बलराम मिश्रा आगे बताते हैं कि जन्मभूमि पर बलिदान हुए अपने पति के अंतिम संस्कार के बाद उन्होंने राज्य के सभी मंत्रियों की एक सभा बुलवाई थी। इस सभा में उन्होंने मंत्रियों को राज्य चलाने और बचे पुरुष सैनिकों को वहाँ की सुरक्षा की जिम्मेदारी दे दी। इसी सभा में उन्होंने अपनी 3000 नारी सेना के साथ रामजन्मभूमि कब्जाए मुगलों पर हमले का एलान कर दिया।

बलराम मिश्र बताते हैं कि इस सभा में कई राज्यों के व्यापारी भी थे। उन्होंने धन देकर सहयोग किया। महाजनों द्वारा मिले दान को रानी ने मीर बाकी से युद्ध में बलिदान हुए परिवारों को आर्थिक मदद देने के लिए बाँट दिया। राजकोष में बचे धन का एक हिस्सा लेकर रानी जयराज कुमारी अपनी सेना के साथ अयोध्या कूच कर गईं। वो बलिदानी हुए अपने पति द्वारा छेड़े गए अभियान को पूरा करना चाहती थीं।

छापामार युद्ध करके मार डाले कई मुगल फौजी

बलराम मिश्र ने हमसे यह बातचीत रानी जयराज कुमारी के हंसवर स्थित महल के प्रांगण में की। उन्होंने हमें आगे बताया कि रानी के मुकाबले मुगलों के पास सैन्य बल और संसाधन कहीं अधिक थे। इसलिए रानी ने छापामार युद्ध का सहारा लिया। उन्होंने साल 1528 से 1530 तक अयोध्या की सीमा पर मौजूद आसपास के गाँवों में छिपकर कई मुगल फौजियों का वध किया था।

उनकी नारी सेना भी अलग-अलग टुकड़ियों में रहती थी। उन्हें अलग-अलग कामों में लगाया गया था। इन कामों में दुश्मन के रसद भंडार को जलाना, उनकी सैन्य स्थिति की जासूसी करना तथा मुगल सेना की मूवमेंट पर नजर रखने सहित कई काम शामिल थे। ये सभी महिला सैनिक दिन भर गाँव की कामकाजी महिलाओं के रूप में रहती थीं।

ये सैनिक महिलाएँ लकड़ियाँ बीनने और खेतों में काम करने के बहाने गाँवों में समय बिताती थीं और मौका देखकर मुगल सैनिकों पर हमला कर देती थीं। कई बार तो उन्हें भूखे भी रहना पड़ता था। हालाँकि, भूख पर भी विजय पाना उन सैनिकों को ट्रेनिंग में सिखाया गया था। इन 3 वर्षों में रानी जयराज ने अपने राज का हाल-चाल भले लेती रहीं पर वो लौटकर हंसवर नहीं गईं।

बाबर की मौत के बाद मुगल फ़ौज पर किया आक्रमण

इतिहासकार बलराम मिश्रा द्वारा रानी जयराज कुँवर के बारे में दी गई तमाम बातों की तश्दीक अयोध्या में रामजन्मभूमि पत्थर निर्माण कार्यशाला में विहिप द्वारा लगाया गया बोर्ड भी करता है। इसमें रानी जयराज कुमारी के बारे में संक्षेप में जानकारी दी गई है। इसमें बताया गया है कि रानी ने एक बार रामजन्मभूमि को मुगल सेना से छुड़ा भी लिया था।

अयोध्या में VHP द्वारा संचालित मंदिर निर्माण कार्यशाला पर लगा रानी जयराज कुमारी  का चित्र व उनका इतिहास

बलराम मिश्रा ने हमें आगे बताया कि 26 दिसंबर 1530 को आगरा में बाबर की मौत होने की घटना के बाद रानी जयराज कुमारी ने मुगल फ़ौज को थोड़ा कमजोर महसूस किया। हालाँकि बाबर के मरते ही हुमायूँ की ताजपोशी नए बादशाह के तौर पर हो गई थी। इस बदलाव को रानी ने रामजन्मभूमि पर कब्जा किए मुगलों पर हमले के लिए उचित समझा।

गर्भगृह को लिया कब्ज़े में और शुरू करवाई पूजा

आखिरकार रानी जयराज कुमारी ने जनवरी 1531 में रामजन्मभूमि पर अपनी नारी शक्ति और आसपास के कुछ रामभक्त ग्रामीणों के साथ हमला कर दिया। इस हमले के लिए मुगल फ़ौज तैयार नहीं थी और उसके कई फौजी मारे गए। रानी जयराज कुमारी का हमला इतना भीषण था कि मुगल फ़ौज को भारी नुकसान उठाते हुए रामजन्मभूमि से पीछे हटना पड़ा।

रानी ने अपने पति की तरह ही रामजन्मभूमि को फिर से अपने कब्ज़े में लिया। उन्होंने अयोध्या के संतों को बुलवाकर वहाँ फिर से पूजा-पाठ भी शुरू करवा दिया। पूजा-पाठ के लिए गर्भगृह पर एक अस्थाई छोटा-सा मंदिर भी बनवा दिया। बड़े मंदिर का निर्माण करने लायक समय रानी जयराज कुमारी के पास नहीं था, क्योंकि उन्हें पता था कि मुगल फ़ौज पलट कर जरूर आएगी।

नाराज हुमायूँ ने दिया कत्लेआम का फरमान

रानी जयराज कुमारी की वीरगाथा प्राचीन समय के इतिहासकार रामगोपाल शारद द्वारा लिखी पुस्तक ‘रामजन्मभूमि का रोमांचकारी इतिहास’ नामक पुस्तक में भी मिलती है। बलराम मिश्रा ने हमें आगे बताया कि अपनी फौजों की हार सुनकर अपने अब्बा की राह चल रहा हुमायूँ नाराज हो गया। उसने अप्रैल 1531 के अंत में एक बड़ी फ़ौज फिर से अयोध्या के लिए भेजी।

लुप्तप्राय प्रचीन ऐतिहासिक पुस्तकों में भी मिलता है रानी जयराज कुमारी की वीरता का उल्लेख

इस बीच रानी चाहतीं तो वो भाग भी सकती थीं, लेकिन उन्होंने क्षत्रिय धर्म का पालन करते हुए अपने पति की तरह अंतिम साँस तक रामजन्मभूमि की रक्षा का संकल्प लिया था। दरबरे अकबरी ने भी इस लड़ाई का जिक्र अपनी भाषा में किया है। तब उसने लिखा कि रानी जयराज ने 3 हजार महिलाओं की फ़ौज लेकर 10 हमले किए और सबसे अंतिम वाले में उन्हें कामयाबी हासिल हुई थी।

जहाँ वीरगति पाए थे राजा वहीं बलिदान हुईं रानी भी

बलराम मिश्र ने हमें आगे बताया कि अप्रैल 1531 में हुमायूँ ने तोपों और बंदूकों के साथ अयोध्या में भारी-भरकम मुगल फ़ौज भेजी। अयोध्या रामजन्मभूमि पर तब लगभग 3 महीने तक लगातार पूजा-पाठ हुई थी और वहाँ कब्ज़ा हिन्दुओं का था। खुद रानी और उनकी नारी सेना मंदिर परिसर की रखवाली करती थीं। उनका साथ स्वामी महेश्वरानंद दे रहे थे। उन्होंने आसपास के गाँवों से योद्धाओं को जमा किया था।

मुगल फ़ौज ने हमला करके पहले पहली पंक्ति में मौजूद हिन्दू योद्धाओं की हत्या की। इसी संघर्ष में स्वामी महेश्वरानंद भी बलिदान हो गए। फिर जन्मभूमि परिसर में नारी सैनिकों के साथ घनघोर युद्ध हुआ। युद्ध में बारी-बारी से सभी सैनिक वीरगति को प्राप्त होती रहीं। जवाबी हमले में कई मुगल सैनिक और उनके कमांडर भी ढेर कर दिए गए थे। अंत में मुगल फ़ौज गर्भगृह पहुँची। यहाँ रानी जयराज कुमारी ने कई घाव खाने के बाद भी अंतिम साँस तक युद्ध किया।

अंत में मंदिर के गर्भगृह में ही रानी जयराज कुमारी भी अपने पति की भाँति वीरगति को प्राप्त हो गईं। बताया जाता है कि उनका भी पार्थिव शव उसी जगह मिला था, जहाँ पर उनके पति राजा रणविजय सिंह बलिदान हुए थे। रानी जयराज कुमारी के बलिदान के साथ ही एक बार फिर से अप्रैल 1531 में मुगल फ़ौज रामजन्मभूमि पर काबिज़ हो गई। वहाँ बने अस्थाई मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया और पूजा-पाठ बंद करवा दी गई।

एक भी महिला सैनिक को जिन्दा नहीं पकड़ पाए मुगल

इतिहासकार बलराम मिश्र के साथ हंसवर राजमहल में हिन्दू संगठन से जुड़े कई अन्य लोग भी जमा हो गए थे। उन्होंने बताया कि उनकी जानकारी में रानी जयराज कुमारी दुनिया की एकलौती ऐसी नारी शक्ति थीं, जिन्होंने 3 हजार महिलाओं की सेना बनाकर लाखों मुगलों से लगभग 4 वर्ष तक युद्ध किया।

विश्व हिंदू परिषद के अशोक कुमार ने हमें बताया कि उन्हें पता चला था कि उन सभी नारी सैनिकों को ऐसी ट्रेनिंग दी गई थी कि वो किसी विधर्मी के हाथ पड़ने से पहले खुद को समाप्त कर लें। रानी जयराज कुमारी के साथ बलिदान हुईं सभी महिला सैनिकों में से कोई एक महिला मुगल सैनिकों के हाथ जिन्दा नहीं लगी थी।

हंसवर राजमहल के प्रवेश द्वारा पर आज भी मौजूद है भगवान गणेश की मूर्ति

बलिदान होने के समय रानी के 2 बच्चे थे, जिन्हें राजपरिवार के बचे हुए सदस्यों ने पाले थे। आज भी हंसवर क्षेत्र के सभी सदस्य रानी जयराज कुमारी द्वारा रामजन्मभूमि के लिए किए गए बलिदान को याद करते हैं। स्थानीय हिन्दू संगठनों की इच्छा है कि हंसवर के महल को एक धरोहर के रूप में विकसित किया जाए, ताकि नई पीढ़ी को धर्म की रक्षा के लिए लड़ने और त्याग की प्रेरणा मिले।

‘अपराध नफरत से प्रेरित, हिंदुओं को नुकसान पहुँचाना उद्देश्य’: साल 2020 के दिल्ली दंगों में नूरा और नबी मोहम्मद को सजा, लूटपाट और आगजनी में शामिल

साल 2020 के हिंदू विरोधी दंगों में दिल्ली की अदालत ने 31 जनवरी 2024 को नूर मोहम्मद उर्फ नूरा और नबी मोहम्मद नाम के दो आरोपितों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। दोनों को सजा सुनाते हुए अदालत ने कहा कि जो अपराध किए गए थे, वे नफरत और लालच से प्रेरित थे। कोर्ट ने नूरा को चार साल की जेल (विभिन्न अपराधों के लिए एक साथ चलने वाली सजा) की सजा सुनाई, जबकि नबी मोहम्मद को इस मामले में पहले ही काट चुके सजा को पर्याप्त माना।

कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुलस्त्य प्रमाचला ने नूरा को सजा सुनाते हुए कहा, “दंगों की कार्रवाई नफरत से प्रेरित थी, जबकि डकैती और नकद राशि की लूट लालच से प्रेरित थी।” नूरा और नबी मोहम्मद को खजूरी खास पुलिस स्टेशन में दर्ज 2020 में किए गए एफआईआर में पिछले महीने दोषी ठहराया था। नूरा को एक दंगाई भीड़ का सदस्य होने के लिए दोषी ठहराया गया था, जिसने विभिन्न दुकानों में तोड़फोड़ की और आग लगा दी थी। उसने कुछ व्यक्तियों को लूट लिया था और धारा-144 का भी उल्लंघन किया था। नबी मोहम्मद को डकैती का भी दोषी ठहराया गया था।

कोर्ट ने दोषी नूर मोहम्मद उर्फ ​​नूरा को IPC की धारा 148/427/435/436 के तहत दंडनीय अपराधों के लिए दोषी ठहराया है। दोषी नूर मोहम्मद उर्फ ​​नूरा को आईपीसी की धारा 392 और 188 के तहत दंडनीय अपराधों के लिए भी दोषी ठहराया गया है। वहीं, दोषी नबी मोहम्मद को आईपीसी की धारा 411 के तहत दंडनीय अपराध के लिए दोषी ठहराया गया है।

ऑपइंडिया के पास मौजूद कोर्ट के फैसले की कॉपी के मुताबिक, “नूर मोहम्मद ने 24 फरवरी 2020 को दोपहर 2:30 बजे से 3:00 बजे के बीच चाँद बाग पुलिया के पास एक मीटिंग की। इसका उद्देश्य हिंदू समुदाय के लोगों को नुकसान पहुँचाना था।” कोर्ट ने कहा, “इस मीटिंग का उद्देश्य क्षेत्र की संपत्ति, वाहनों और व्यक्तियों के साथ-साथ हिंदू समुदाय से संबंधित व्यक्तियों को अधिकतम नुकसान पहुँचाना, उनकी दुकानों, घरों और संपत्तियों में आपराधिक अतिक्रमण, बर्बरता, चोरी और आगजनी करना था।”

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, “नूर मोहम्मद ने दंगा किया और दिलीप की ऑटो मोबाइल दुकान में तोड़फोड़ की और फिर आग लगा दी। उसका और शिव कुमार का मोबाइल फोन लूट लिया। साथ ही उपरोक्त दुकान में पड़े सामान को भी नुकसान पहुँचाया। अशोक फोम एंड फर्नीचर नाम के दुकान में तोड़फोड़ और आगजनी करते हुए रामदत्त पांडे, मनोज नेगी, सोनू शर्मा, पप्पू और अशोक कुमार की मोटरसाइकिलों में आग लगा दी। दोषी नूरा समेत यह भीड़ दिल्ली पुलिस द्वारा पारित निषेधाज्ञा (धारा 144) का उल्लंघन करते हुए एकत्र हुई थी।”

दिलचस्प बात यह है कि नूर मोहम्मद को 4 साल की सजा सुनाते हुए अदालत ने कहा कि उसकी पृष्ठभूमि से पता चलता है कि वह धार्मिक उन्माद में बह जाने वाला था। लोकमान शाह बनाम स्टेट ऑफ डब्ल्यूबी, (2001) 5 एससीसी 235 के मामले की एक टिप्पणी का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि उन्होंने पाया कि नूरा मोहम्मद भी उसी श्रेणी में आता है। फैसले के जिस हिस्से का हवाला दिया गया है, उसमें कहा गया है कि सांप्रदायिक दंगे में, जो लोग शिकार की तलाश में सड़कों पर निकलते हैं, वे लोगों को नहीं जानते। वे बस धार्मिक उन्माद से ग्रस्त हो जाते हैं। ऐसा करने वाले लोग अधिकतर अशिक्षित होते हैं और पढ़े-लिखे नेताओं के भड़काऊँ भाषणों से प्रभावित हो जाते हैं।

इस आधार पर नूरा मोहम्मद को अदालत ने 4 वर्ष के कठोर कारावास की सज़ा सुनाई। यह सजा सुनाते हुए अदालत ने कहा, “यहाँ ऊपर की गई चर्चा को ध्यान में रखते हुए, मैंने पाया कि इस मामले में किया गया अपराध कोई हल्का अपराध नहीं है, लेकिन शिक्षा की कमी, भीड़ की भावनाओं का प्रभाव, अशांत जीवन और दिया गया अपराध है तथा दोषी नूरा की पारिवारिक पृष्ठभूमि को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।”

नबी मोहम्मद को पहले ही जेल में बिताई गई सज़ा सुनाई गई थी। नबी को चोरी का मोबाइल रखने का दोषी ठहराया गया था। अदालत ने कहा, “जहाँ तक ​​दोषी नबी मोहम्मद का सवाल है, मुझे लगता है कि इस मामले में मुकदमे का सामना करने और दोषी ठहराए जाने के बाद जेल में समय बिताने से उसे पर्याप्त सबक मिल गया होगा।”

इस्लामी कट्टरपंथियों के निशाने पर आईं PFI के 15 आतंकियों को मौत की सजा सुनाने वाली जज श्रीदेवी, बढ़ाई गई सुरक्षा: धमकी देने वाले असलम-नजीर सहित 6 पर FIR

भाजपा नेता रंजीत श्रीनिवास की क्रूर हत्या के मामले में प्रतिबंधित इस्लामी आतंकी संगठन PFI और उसके राजनीतिक संगठन SDPI के आतंकियों को मौत की सजा सुनाने वाली महिला जज अब इस्लामी कट्टरपंथियों के निशाने पर आ गई हैं। उन्हें सोशल मीडिया के माध्यम से धमकियाँ दी रही हैं। इसको देखते हुए उनकी सुरक्षा बढ़ा दी गई है। साथ ही दो लोगों को हिरासत में लिया गया है।

केरल के अलप्पुझा में तैनात जज वीजी श्रीदेवी ने भाजपा नेता और प्रदेश ओबीसी मोर्चा के सचिव रंजीत श्रीनिवास की वर्ष 2021 में हुई हत्या के मामले में फैसला सुनाया था। इस साल 30 जनवरी को सुनाए गए फैसले में उन्होंने 15 इस्लामी आतंकियों को मौत की सजा सुनाई थी। यह सभी दोषी प्रतिबंधित इस्लामी संगठन PFI और SDPI से जुड़े हैं।

इस फैसले के बाद से ही केरल के इस्लामी कट्टरपंथी उन्हें धमकियाँ दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ PFI से जुड़े इस्लामी कट्टरपंथी घृणा अभियान चला रहे हैं। उनकी फोटो को सोशल मीडिया पर साझा किया जा रहा है। इन धमकियों के कारण केरल पुलिस ने उनकी सुरक्षा बढ़ा दी है। वीजी श्रीदेवी केरल के अलप्पुझा के मवेलिक्कारा कोर्ट में जज हैं।

जानकारी के मुताबिक, जज श्रीदेवी को धमकाने के मामले में केरल पुलिस ने कम-से-कम 6 मामले दर्ज किए हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपितों के खिलाफ हिंसा के उकसाने के लिए मामला दर्ज किया गया है। जज श्रीदेवी को धमकाने के आरोप में जिनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज हुआ है, उनके नाम बीवी केयू, असलम वालाप्पुपचा, नजीर मोन खलील, आजाद अमीर, रफ़ी तिरुवनंतपुरम और शफीक हैं।

इस मामले में पुलिस ने दो आरोपितों को हिरासत में लिया है। इन आरोपितों को पुलिस ने तिरुवनंतपुरम और अल्लपुझा से पकड़ा है। इससे पहले 30 जनवरी को जज श्रीदेवी की सुरक्षा को बढ़ा दिया गया था। बता दें कि भाजपा नेता रंजीत की हत्या के मामले में आरोपपत्र का दूसरा सेट दाखिल किए जाने की उम्मीद है। इसमें PFI के उन 15 कैडरों के नाम हैं, जिन्होंने हत्या के लिए उकसाने और सबूत नष्ट करने में मदद की थी।

दरअसल, रंजीत श्रीनिवास को उनके घर में घुसकर 19 दिसम्बर 2021 को उनके परिजनों के सामने हत्या कर दी गई थी। इस मामले में केरल के अलप्पुझा जिले की मवेलिकारा कोर्ट ने नईम, मोहम्मद असलम, अनूप, अजमल, अब्दुल कलाम उर्फ़ सलाम, अब्दुल कलाम, सफरुद्दीन, मनषद, जसीब राजा, नवास, समीर, नज़ीर, जाकिर हुसैन, शाजी और शेरनस अशरफ को हत्या का दोषी पाया था।

ये सभी दोषी अलप्पुझा के निवासी हैं और प्रतिबंधित इस्लामिक संगठन PFI और इसकी राजनीतिक शाखा SDPI से जुड़े हुए हैं। इन दोषियों में शुरुआती 8 को रंजीत की हत्या में सीधे तौर पर दोषी माना गया है। इन पर कोर्ट ने धारा 302 समेत चार और धाराएँ लगाई हैं। जब 8 आरोपित रंजीत हत्या कर रहे थे, तब दोषी नम्बर 9 से 12 उनके घर के बाहर खतरनाक हथियारों के साथ पहरा दे रहे थे।

इसके अलावा कोर्ट ने दोषी नंबर 13, 14 और 15 दोषी को इस हत्या की साजिश रचने के मामले में दोषी करार दिया था। कोर्ट के सामने इस मामले में पुलिस ने आरोपित अनूप के फ़ोन से बरामद एक हिटलिस्ट रखी थी। इस केस में यह बहुत बड़ा सबूत बना। इस हिटलिस्ट में रंजीत श्रीनिवास समेत 150 से अधिक लोगों के नाम थे। इनमें भाजपा और हिंदू संगठनों के कई नेताओं के नाम भी शामिल थे।

मध्य प्रदेश के पीपलेश्वर महादेव मंदिर में तोड़फोड़: शिवलिंग और नंदी को उखाड़कर सड़क पर फेंका, लोगों ने शाहरुख, रिहान, अनवर सहित 7 के खिलाफ दर्ज कराई FIR

मध्य प्रदेश के गुना जिले में स्थित पीपलेश्वर महादेव मंदिर में तोड़फोड़ की वारदात हुई है। इस घटना में अज्ञात लोगों ने मंदिर के दरवाजे को तोड़ दिया और फिर अंदर घुसकर शिवलिंग को उखाड़कर सड़क पर फेंक दिया। इस घटना से स्थानीय लोगों में आक्रोश है और उन्होंने पुलिस से आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और उनके घरों को गिराए जाने की माँग की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह वारदात बमोरी कस्बे में हुई है। यहाँ अज्ञात बदमाशों ने मुक्तिधाम के समीप स्थित प्राचीन पीपलेश्वर महादेव मंदिर में तोड़फोड़ की और शिवलिंग को खंडित कर दिया। ये वारदात बुधवार (31 जनवरी 2024) की रात हुई। बदमाशों ने शिवलिंग के साथ-साथ नंदी की मूर्ति को भी उखाड़ दिया। इस घटना के बाद पूरे कस्बे में तनाव फैल गया है।

बमोरी के सौरभ किरार ने पुलिस में रिपोर्ट कराई है। उन्होंने पुलिस को बताया कि नई टंकी के सामने शिव मंदिर बना है। सुबह 5 बजे वह मंदिर के पास से गुजर रहे थे तो देखा कि शिवजी की पिंडी और नंदी भगवान की मूर्ति टूटी पड़ी थी। सौरभ ने कहा कि उन्हें शक है कि शाहरुख, रिहान, वफाती, अनवर, जीशान, बिट्टू, रहीश ने मंदिर की मूर्तियों को क्षतिग्रस्त किया है। ये लोग गाँव में रात के 1 बजे तक घूमते रहते हैं।

बता दें कि बमोरी कस्बा गुना जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। स्थानीय लोगों ने ही इस वारदात की जानकारी पुलिस को दी है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी साल 2013 में इस मंदिर में तोड़फोड़ हो चुकी है। इसके बाद ग्रामीणों ने मंदिर का फिर से जीर्णोद्धार करके भगवान के विग्रह की पुन: प्राण प्रतिष्ठा कराई थी।

ग्रामीण सभी आरोपितों की गिरफ्तारी की माँग कर रहे हैं। हंगामे को देखते हुए भारी पुलिस बल को तैनात किया गया है। इस मामले में पुलिस ने संदेह के आधार पर धर्म विशेष के सात लोगों के विरुद्ध धारा 295 के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस ने शक के आधार पर 4 लोगों को हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ कर रही है। इसके साथ ही इलाके की सीसीटीवी फुटेज की भी जाँच की जा रही है।

बमोरी पुलिस थाने के इन्चार्ज अरविंद गौड़ ने बताया कि 5-6 लोगों ने मंदिर को अपवित्र करने का काम किया है। जिला प्रशासन का कहना है कि स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं और जल्द ही सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। आक्रोशित लोग आरोपितों का पता लगाकर उनके घर गिराने की माँग की है।

बजट 2024: बुनियादी ढाँचे पर अब तक का सबसे बड़ा निवेश, वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने रखा हर तबके का ध्यान, चुनावी वादों से बाहर निकला देश

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने छठी बार संसद में बजट पेश किया। ये मोदी सरकार 2.0 का आखिरी बजट है। चूँकि ये सिर्फ 4 माह के लिए है, ऐसे में इसे अंतरिम बजट कहा जाएगा। इस बजट में सरकार ने सभी तबकों का ध्यान रखा है। खास बात ये है कि इस बजट पर चुनावी छाप और बड़े-बड़े वादों की जगह ठोस कामों को जगह मिली है, जो मोदी सरकार के लगातार तीसरी बार सत्ता में आने के आत्मविश्वास को दर्शाता है।

संसद के संयुक्त सत्र में निर्मला सीतारमण ने ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्‍वास’ के मंत्र और ‘सबका प्रयास’ के संपूर्ण राष्‍ट्र के दृष्टिकोण के साथ अंतरिम बजट 2024-25 पेश किया। इस बजट में चार प्रमुख वर्गों यानी गरीब, महिलाएँ, युवा एवं अन्‍नदाता (किसान) को ऊपर उठाने पर फोकस रहा।

गरीब कल्‍याण, देश का कल्‍याण

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि पिछले 10 वर्षों के दौरान सरकार ने 25 करोड़ लोगों को बहुआयामी गरीबी से बाहर आने में मदद की है, जो अभूतपूर्व है। उन्होंने बताया कि पीएम-जनधन खातों के उपयोग से बैंक खातों में 34 लाख करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए, इससे सरकार को 2.7 लाख करोड़ रुपए की बचत हुई। मोदी सरकार ने पीएम-स्‍वनिधि के तहत 78 लाख फेरी वालों को लोन उपलब्ध कराया। इसमें से 2.3 लाख फेरी वालों को तीसरी बार लोन दिया गया।

बजट में ‘अन्‍नदाता’ का कल्‍याण

मोदी सरकार 2.0 के आखिरी बजट में भी अन्नदाता के कल्याण की भावना दिखी। वित्तमंत्री ने बताया कि पीएम-किसान सम्‍मान योजना के तहत 11.8 करोड़ किसानों को वित्‍तीय सहायता प्रदान की जा रही है। इस दौरान पीएम-फसल बीमा योजना के तहत चार करोड़ किसानों को फसल बीमा उपलब्‍ध कराई गई। इलेक्‍ट्रॉनिक नेशनल एग्रीकल्‍चर मार्केट (ई-नाम) के तहत 1,361 मंडियों को एकीकृत किया गया है। इससे 3 लाख करोड़ रुपए की खरीद-फरोख्‍त के साथ 1.8 करोड़ किसानों को फायदा मिला।

प्रधानमंत्री किसान सम्‍पदा योजना से 38 लाख किसान लाभान्वित हुए हैं और रोजगार के 10 लाख अवसरों का सृजन हुआ है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री सूक्ष्‍म खाद्य प्रसंस्‍करण उद्यम के औपचारिकीकरण योजना से 2.4 लाख स्‍व-सहायता समूहों (एसएचजी) और 60,000 लोगों को लोन सुविधा प्राप्‍त करने में मदद मिली है।

वित्तमंत्री ने कहा कि अनेक दूसरे कार्यक्रमों के अलावा इन उपायों से ‘अन्नदाता’ को देश और पूरी दुनिया के लिए अन्न पैदा करने में सहायता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि 80 करोड़ लोगों के लिए नि:शुल्क राशन के माध्यम से भोजन से जुड़ी चिंताओं को समाप्त कर दिया गया है।

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरसों, मूंगफली, तिल, सोयाबीन और सूरजमुखी जैसे तिलहनों के संबंध में ‘आत्मनिर्भरता’ प्राप्त करने के लिए कार्यनीति तैयार की जाएगी। वित्तमंत्री ने कहा कि इसमें अधिक उपज देने वाली किस्मों के लिए अनुसंधान, आधुनिक कृषि तकनीकों को व्यापक पैमाने पर अपनाने, बाजार संपर्कों, खरीद, मूल्य-वर्धन और फसल बीमा को शामिल किया जाएगा।

नारी शक्ति पर जोर

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि सरकार का जोर नारी शक्ति के सशक्तिकरण पर है। वित्तमंत्री ने बताया कि 30 करोड़ मुद्रा योजना लोन महिला उद्यमियों को दिए गए। उन्होंने बताया कि उच्‍च शिक्षा में महिलाओं का नामांकन 28 प्रतिशत तक बढ़ गया है। वहीं, स्‍टेम पाठ्यक्रमों में छात्राओं एवं महिलाओं का 43 प्रतिशत नामांकन है, जो दुनिया में सबसे अधिक है।

वित्तमंत्री ने बताया कि पीएम-आवास योजना के तहत 70 प्रतिशत मकान ग्रामीण महिलाओं को दिए गए। आयुष्‍मान भारत योजना के तहत स्‍वास्‍थ्‍य सेवा सुरक्षा में सभी आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को भी शामिल किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि ‘तीन तलाक’ को गैर-कानूनी बनाने और लोक सभा एवं राज्य विधान सभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने तथा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के नाम पर या उन्हें संयुक्त मालिकों के रूप में 70 प्रतिशत से अधिक मकान उपलब्ध कराने के फलस्वरूप उनका आत्मसम्मान बढ़ा है।

इस दौरान उन्होंने कहा कि लखपति दीदी के लक्ष्‍य को 2 करोड़ से बढ़ाकर 3 करोड़ करने का फैसला किया गया है। केन्‍द्रीय वित्‍त मंत्री ने कहा कि नौ करोड़ महिलाओं के साथ 83 लाख स्‍वयं-सहायता समूह (एसएचजी) सशक्तिकरण और आत्‍मनिर्भर बनने के साथ ग्रामीण सामाजिक-आ‍र्थिक परिवेश में बदलाव ला रहे हैं। इनकी सफलता से पहले ही करीब एक करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने में मदद मिल चुकी है। वे दूसरों के लिए एक प्रेरणा हैं। उन्‍हें सम्‍मान देकर उनकी उपलब्धियों को मान्‍यता दी जाएगी। वित्‍त मंत्री ने कहा कि कार्यक्रम की सफलता को देखते हुए लखपति दीदी बनाने का लक्ष्‍य बढ़ाया गया है।

इस दौरान उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्‍य तक पहुँचने और नारी शक्ति पर ध्‍यान केन्द्रित करते हुए सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए टीकाकरण का प्रस्‍ताव दिया। उन्‍होंने कहा कि सरकार माताओं और बच्चों के स्वास्‍थ्‍य की देखभाल के लिए विभिन्न योजनाओं में तालमेल स्थापित करेगी। सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए 9 से 14 वर्ष की आयु की बालिकाओं के लिए टीकाकरण कार्यक्रम चलाया जाएगा। उन्‍होंने कहा कि सरकार सभी पात्र श्रेणियों के बीच इस टीकाकरण को बढ़ावा देगी।

निर्मला सीतारमण ने सरकार की डिजिटल इंडिया पहल को आगे बढ़ाने के लिए प्रस्‍ताव दिया कि एक नया यू-विन प्‍लेटफॉर्म देशभर में तेजी से आरंभ किया जाएगा। उन्‍होंने कहा कि इस प्‍लेटफॉर्म का उपयोग टीकाकरण के प्रबंधन और मिशन इंद्रधनुष के तहत प्रयासों को आगे बढ़ाने में किया जाएगा।

आवास योजना शुरू करेगी मोदी सरकार

केंद्र की मोदी सरकार में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मध्यम वर्ग के लोगों के लिए आवास उपलब्ध कराने की घोषणा की। सीतारमण ने कहा कि सरकार मध्यम वर्ग के लिए आवास योजना, झुग्गी-झोपड़ी में रहने वालों के साथ-साथ किराए पर रहने वालों की मदद के लिए योजनाएँ शुरू करेगी। वित्त मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार ‘प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण’ के तहत 2 करोड़ और घर देगी।

सरकार के लक्ष्य को बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, “कोविड के बावजूद हमने पीएम आवास योजना (ग्रामीण) के तहत 3 करोड़ घर बनाने का काम पूरा किया है। परिवारों की संख्या में वृद्धि से उत्पन्न आवास की माँग को पूरा करने के लिए अगले पाँच वर्षों में 2 करोड़ और घर बनाए जाएँगे।” इस बार घर बनाने के लिए आवंटित बजट में 1.35 प्रतिशत वृद्धि करके 80,671 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है।

एक करोड़ परिवारों के लिए सोलर सिस्टम

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में हरित विकास और अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कई उपायों की घोषणा की। वित्‍त मंत्री ने कहा कि छत पर सौर प्रणाली लगाने से एक करोड़ परिवार प्रत्येक महीने 300 यूनिट तक निःशुल्क बिजली प्राप्त कर सकेंगे।

यह योजना अयोध्या में राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के ऐतिहासिक दिन प्रधानमंत्री के लिए गए संकल्प के अनुसरण में लाई गई है। निःशुल्क सौर बिजली और बिजली वितरण कंपनियों को अधिशेष बिजली बेचने से परिवारों को हर वर्ष पंद्रह हजार से अठारह हजार रुपये की बचत होगी।

राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति-2020 परिवर्तनकारी सुधार ला रही : निर्मला सीतारमण

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार अमृत पीढ़ी-युवा वर्ग को सशक्‍त करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि हमारी समृद्धि युवाओं को पर्याप्त रूप से साधन संपन्न करने और उन्‍हें सशक्त बनाने पर निर्भर करती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 से परिवर्तनकारी सुधार लाए जा रहे हैं। उन्‍होंने बताया कि उदीयमान भारत के लिए पीएम स्कूल (पीएम श्री) में गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई हो रही है और बच्चों का समग्र तथा चहुँमुखी विकास किया जा रहा है।

निर्मला सीतारमण ने स्किल इंडिया मिशन की उपलब्धियों को उजागर करते हुए कहा कि इस मिशन के अंतर्गत 1.4 करोड़ युवाओं को प्रशिक्षित किया गया है, 54 लाख युवाओं का कौशल सुधारा गया है तथा उन्हें दूसरे हुनर में कुशल बनाया गया है और 3000 नई आईटीआई स्थापित की गई हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में शुरू की गई पीएम विश्वकर्मा योजना 18 व्यापारों में शामिल कारीगरों और शिल्पकारों को शुरू से अंत तक मदद प्रदान कर रही है। वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि उच्चतर शिक्षा के लिए बड़ी संख्या में नए संस्थानों के अंतर्गत 7 आईआईटी, 16 आईआईआईटी, 7 आईआईएम, 15 एम्स और 390 विश्वविद्यालय स्थापित किए गए हैं।

बजट 2024 रेलवे के लिए खास

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि रेलवे वाले तीन नए रेल कॉरिडोर शुरू किए जाएँगे। इसके तहत ऊर्जा-खनिज-सीमेंट कॉरिडोर, पोर्ट कनेक्टिविटी कॉरिडोर और अधिक पैसेंजर घनत्व वाले कॉरिडोर बनाए जाएँगे। इसके साथ ही पूरे देश में यात्री ट्रेनों के परिचालन में सुधार किया जाएगा।

मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को सक्षम करने के लिए पीएम गतिशक्ति के तहत परियोजनाओं की पहचान की गई है। माला-भाड़ा परियोजना को भी विकसित किया जाएगा।

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया है कि भारतीय रेलवे के 40000 सामान्य डिब्बों को वंदे भारत में बदल दिया जाएगा। इससे आम ट्रेनों में यात्रा करने वाले करोड़ों भारतीयों को फायदा होगा। ये नए डिब्बे देश के हर रूट और हर ट्रेन में लगाए जाएँगे।

बुनियादी ढाँचा पर अब तक का सबसे बड़ा निवेश

केन्‍द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में अंतरिम बजट 2024-25 पेश करते हुए पूँजीगत व्‍यय, 2023-24 के संशोधित अनुमान और 2024-25 के बजट अनुमानों की रूपरेखा पेश की। केन्‍द्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि वर्ष 2024-25 के लिए पूँजीगत व्‍यय को 11.1 प्रतिशत बढ़ाकर 11,11,111 करोड़ रुपए किया जा रहा है। यह सकल घरेलू उत्‍पाद (जीडीपी) का 3.4 प्रतिशत है। उन्‍होंने कहा कि इसके अलावा पिछले चार वर्षों में पूँजीगत व्‍यय (कैपेक्‍स) को तीन गुना बढ़ा देने से देश में आर्थिक विकास और रोजगार सृजन पर व्‍यापक प्रभाव पड़ रहा है।

संशोधित अनुमान 2023-24

केन्‍द्रीय वित्त मंत्री ने कहा, “उधारियों के अलावा कुल प्राप्तियों का संशोधित अनुमान 27.56 लाख करोड़ रुपए है, जिनमें 23.24 लाख करोड़ रुपए की कर प्राप्तियाँ हैं। कुल व्‍यय का संशोधित अनुमान 44.90 लाख करोड़ रुपए है।”

उन्होंने राजस्‍व प्राप्तियों की चर्चा करते हुए कहा कि 30.03 लाख करोड़ रुपए की राजस्‍व प्राप्तियों के बजट अनुमान से अधिक रहने की आशा है, जो आर्थिक विकास की तेज गति और अर्थव्‍यवस्‍था में औपचारि‍करण को दर्शाता है।

उन्‍होंने यह भी कहा कि सांकेतिक जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान में कुछ कमी होने के बावजूद राजकोषीय घाटा का संशोधित अनुमान जीडीपी का 5.8 प्रतिशत रहा है, जो कि बजट अनुमान से बेहतर है।

बजट अनुमान 2024-25

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि वर्ष 2024-25 में उधारियों के अलावा कुल प्राप्तियाँ 30.80 लाख करोड़ रुपए रहने का अनुमान है और कुल व्‍यय 47.66 लाख करोड़ रुपए रहने का अनुमान है। इसी तरह कर प्राप्तियाँ 26.02 लाख करोड़ रुपए रहने का अनुमान लगाया गया है।

इसके अलावा, केन्‍द्रीय वित्त मंत्री ने कहा, “पूँजीगत व्‍यय के लिए राज्‍यों को 50 वर्षीय ब्‍याज मुक्‍त ऋण की योजना इस वर्ष जारी रखी जाएगी और कुल परिव्‍यय 1.3 लाख करोड़ रुपए का होगा।” राजकोषीय घाटे पर उन्होंने कहा, “राजकोषीय घाटा वर्ष 2024-25 में जीडीपी का 5.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है।”

राजकोषीय सुदृढी़करण के मार्ग पर अडिग रहने, जैसा कि वर्ष 2021-22 के उनके केन्‍द्रीय बजट भाषण में कहा गया था, की बात कहते हुए उन्‍होंने इसे वर्ष 2025-26 तक घटाकर जीडीपी के 4.5 प्रतिशत से नीचे लाने का उल्‍लेख किया।

इस दौरान केन्‍द्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि वर्ष 2024-25 के दौरान दिनांकित प्रतिभूतियों के जरिए सकल और शुद्ध बाजार उधारियाँ क्रमश: 14.13 लाख करोड़ रुपए और 11.75 लाख करोड़ रुपए रहने का अनुमान लगाया गया है। निजी निवेश में वृद्धि का उल्‍लेख करते हुए उन्‍होंने कहा, “केन्‍द्र सरकार की उधारियाँ कम रहने से निजी क्षेत्र के लिए कर्ज की उपलब्‍धता बढ़ जाएगी।”

भारत की जीडीपी 7.3 की दर से बढ़ेगी

वित्त वर्ष 2023-24 के लिए राष्‍ट्रीय आय के प्रथम अग्रिम अनुमान, जिसे वित्त मंत्री के भाषण के साथ पेश किया गया, के अनुसार भारत में वास्‍तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसके साथ ही यह आरबीआई (दिसंबर 2023 में आयोजित इसकी मौद्रिक नीति समिति की बैठक में) द्वारा वित्त वर्ष 2023-24 के लिए विकास अनुमान को 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर देने के अनुरूप भी है। यह वित्त वर्ष 2023-24 की दूसरी तिमाही में दर्ज की गई दमदार विकास पर आधारित है।

संसद में वित्तमंत्री ने बताया कि देश में एफडीआई प्रवाह वर्ष 2014-2023 के दौरान 596 अरब अमेरिकी डॉलर का हुआ, जो वर्ष 2005-2014 के दौरान हुए एफडीआई प्रवाह का दोगुना है। वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि देश में विदेशी निवेश को निरंतर प्रोत्‍साहित करने के लिए हम ‘पहले भारत को विकसित करो’ की भावना के तहत अपने विदेशी साझेदारों के साथ द्विपक्षीय निवेश समझौतों पर बात कर रहे हैं।

संसद में बजट पेश करते हुए वित्तमंत्री सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी पूरी दृढ़ता के साथ चार प्रमुख जातियों पर भरोसा करते हैं और इसके साथ ही इन पर फोकस करते हैं। चार प्रमुख जातियाँ ये हैं- गरीब, महिलाएँ, युवा और अन्‍नदाता। उन्‍होंने कहा कि इन सभी की जरूरतें, उनकी आकांक्षाएँ, उनका कल्‍याण करना सरकार की सर्वोच्‍च प्राथमिकता है क्‍योंकि जब वे तरक्‍की करते हैं, तो देश तरक्‍की करता है।

निर्मला सीतारमण ने पिछले 10 वर्षों में चलाए गए विकास संबंधी कार्यक्रमों ‘सभी के लिए आवास’, ‘हर घर जल’, ‘सभी के लिए बिजली’, ‘सभी के लिए रसोई गैस’, ‘सभी के लिए बैंक खाते एवं वित्तीय सेवाओं’ की बात करते हुए बताया कि इनके जरिए रिकॉर्ड समय में हर परिवार एवं व्‍यक्ति को लक्षित किया गया है।

प्रत्‍यक्ष और अप्रत्‍यक्ष कर में कोई बदलाव नहीं

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि करों (टैक्स) में बदलाव की कोई योजना नहीं है। कराधान में निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए वित्‍त मंत्री ने स्‍टार्टअप और सॉवरेन वेल्‍थ या पेंशन फंड द्वारा किए गए निवेश के लिए कुछ कर लाभ तथा कुछ आईएफएससी इकाईयों की आय पर कर छूट की समय सीमा 31.03.2025 तक बढ़ाने का प्रस्‍ताव किया है। सरकार के दृष्टिकोण के अनुरूप जीवन की सुगमता और व्‍यापार करने में आसानी के लिए कर सेवा सुविधा में सुधारों की घोषणा की गई है।

वित्‍त मंत्री ने प्रस्‍ताव किया है कि वित्‍तीय वर्ष 2009-10 तक की अवधि से संबंधित 25,000 रुपए तक और वर्ष 2010-11 से 2014-15 से संबंधित 10,000 तक की ऐसी बकाया प्रत्‍यक्ष कर माँगों को वापस लेने का प्रस्‍ताव किया है, इससे लगभग एक करोड़ करदाता लाभांवित होंगे। वित्तमंत्री ने बताया कि बीते 10 साल के दौरान प्रत्‍यक्ष कर संग्रह तिगुना हो गया है। वहीं, आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्‍या 2.4 गुना बढ़ चुकी है।

श्‍वेत पत्र जारी करेगी मोदी सरकार

वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि वर्ष 2014 में जब उनकी सरकार ने बागडोर संभाली थी, त‍ब अर्थव्‍यवस्‍था को चरण-दर-चरण दुरुस्‍त करने और शासन प्रणाली को सही रास्‍ते पर लाने की जिम्‍मेदारी बहुत बड़ी थी। उन्‍होंने कहा कि उस वक्‍त की माँग थी कि लोगों की उम्‍मीदें जगें, निवेश आकर्षित किया जाए और अति आवश्‍यक सुधार के लिए समर्थन जुटाया जाए। सरकार ने ‘राष्‍ट्र प्रथम’ के मजबूत विश्‍वास के साथ इसे सफलतापूर्वक हासिल किया।

उन्‍होंने आश्‍वासन दिया कि उन वर्षों का संकट दूर कर दिया गया है और अर्थव्‍यवस्‍था सर्वांगीण विकास के साथ एक उच्‍च सतत विकास मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ रही है। उन्‍होंने घोषणा की कि सरकार ‘वर्ष 2014 तक हम कहाँ थे और अब कहाँ हैं’ विषय पर श्‍वेत पत्र के साथ आगे आएगी, जिसका केवल एक ही उद्देश्‍य है कि उन वर्षों के कुप्रबंधन से सबक सीखा जा सके।