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‘नुकसान की जिम्मेदार सरकार होगी’: उत्तराखंड में UCC पर देहरादून के शहर काजी ने दी धमकी, कॉन्ग्रेस भी तुष्टिकरण में जुटी

समान नागरिक संहिता (UCC) पर उत्तराखंड सरकार विधानसभा में बिल लाने वाली है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जल्द ही इस संबंध में कानून लागू करने की बात कही है। शुक्रवार (2 फरवरी 2024) को जस्टिस रंजना देसाई की कमेटी ने इसका ड्राफ्ट मुख्यमंत्री को सौंपा। इसके बाद राज्य में सियासी पारा चढ़ गया है। देहरादून के शहर काजी ने धमकी देते हुए इस पर आपत्ति जताई है। वहीं कॉन्ग्रेस भी तुष्टिकरण की राजनीति में जुट गई है।

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार देहरादून के शहर काजी मोहम्मद अहमद कासमी ने यूसीसी लागू किए जाने पर नुकसान की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि सरकार जो चाहे वह फैसला ले सकती है। उनके हाथ में प्रदेश की बागडोर है। लेकिन, इस फैसले को लागू किए जाने के बाद आगे जो भी नुकसान होगा, उसकी भी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

वहीं इस्लामी तुष्टिकरण की अपनी लाइन पर चलते हुए कॉन्ग्रेस भी इस फैसले पर सवाल उठा रही है। राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए पार्टी ने कहा है कि इस तरह की नीति से उत्तराखंड को कोई फायदा नहीं होने वाला। भाजपा सिर्फ लोकसभा चुनाव में फायदा उठाने की कोशिश के लिए ऐसे काम कर रही है।

कॉन्ग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना ने बीजेपी पर ध्रुवीकरण के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने यूसीसी पर किन लोगों की राय ली है, वो बताए। सिविल लॉ के किन प्रावधानों को बदले जाने की जरूरत महसूस हुई, सरकार वो भी सामने रखे। धस्माना ने कहा कि हमें यूसीसी से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन इससे उत्तराखंड में किसी भी तबके को कोई लाभ नहीं होने वाला है।

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सारा ठीकरा तो केंद्र सरकार पर फोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने यूसीसी के मुद्दे पर राज्य सरकार को मोहरा बनाया है। हरीश रावत ने कहा कि पहले तो केंद्र सरकार को ही यूसीसी लाने की जरूरत है, इसके बाद ये काम राज्य सरकारों पर छोड़ा जाए।

बता दें कि उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत जस्टिस जस्टिस रंजना देसाई की अगुवाई में बनाई गई कमिटी ने ड्राफ्ट मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंप दिया है। माना जा रहा है कि धामी सरकार 6 फरवरी 2024 को समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक विधानसभा में पेश कर सकती है। सरकार ने 5 से 8 फरवरी तक विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है।  

इस विधेयक को विधानसभा में पेश करने से पहले शनिवार (3 फरवरी 2024) को होने वाली पुष्कर सिंह धामी कैबिनेट की बैठक में इसे मंजूरी दी जाएगी। विधानसभा से मंजूरी दिए जाने के बाद इस विधेयक को राज्यपाल के पास भेजा जाएगा। राज्यपाल की मंजूरी के बाद उत्तराखंड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन जाएगा।

कमिटी द्वारा ड्राफ्ट सौंपे जाने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “हम सभी लंबे समय से ड्राफ्ट का इंतजार कर रहे थे। आज हमें ड्राफ्ट मिल गया है। UCC कमिटी ने अपनी रिपोर्ट हमें सौंप दी है। अब हम इस मामले में आगे बढ़ेंगे। मसौदे का परीक्षण करेंगे और सभी औपचारिकताएँ पूरी करने के बाद इसे विधानसभा के दौरान रखेंगे। इस पर आगे चर्चा की जाएगी।”

घर में पिता के साथ सो रहा था एक साल का बच्चा, रात में आवारा कुत्ते आए और उठाकर ले गए: नोंच-नोंच कर खा गए

तेलंगाना से एक दहलाने वाला मामला सामने आया है। हैदराबाद से सटे शमशाबाद में अपने पिता के साथ एक झोपड़ी में सो रहे साल भर के एक बच्चे को आवारा कुत्ते उठा ले गए और नोंचकर उसका मांस खा गए। बच्चे की मौत हो गई है। घटना बुधवार-गुरुवार (31 जनवरी – 1 फरवरी 2024) की रात की है। कुत्ते जब बच्चे को उठा ले गए तो पिता को पता नहीं चल पाया।

स्थानीय लोगों ने देखा कि कुत्तों का एक झुंड एक छोटे बच्चे को नोंच-नोंच कर खा रहा है। इसके बाद लोगों ने इसकी सूचना बच्चे के पिता को दी। इसके साथ ही फोन करके घटना की जानकारी पुलिस को भी दी गई। RGI एयरपोर्ट के इंस्पेक्टर बाला राजू ने कहा है कि बच्चे के पिता सूर्य कुमार की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है और जाँच शुरू कर दी गई है।

बच्चे के पिता सूर्य कुमार एक दिहाड़ी मजदूर हैं। वह शमशाबाद शहर के राजीव गृहकल्प परिसर के पास एक अस्थायी झोपड़ी में रहते हैं। बुधवार की रात वह अपने एक साल के बेटे नागराजू और 20 दिन के एक नवजात के साथ झोपड़ी में सोये हुए थे। इसी दौरान दबे पाँव एक कुत्ता झोपड़ी में घुस आया और उनके बड़े बेटे नागराजू को उठाकर ले गया। इसके बाद आवारा कुत्तों ने मिलकर उसके मार दिया।

बुधवार-गुरुवार की रात लगभग 1.30 बजे कुछ लोग सूर्य कुमार की झोपड़ी के पास आए और उन्हें जगाया। लोगों ने बताया कि आवारा कुत्तों का एक झुंड बच्चे को खा रहा है। सूर्य कुमार जब जगे तो देखा कि उनका बेटा उनके पास नहीं है। उन्होंने बाहर निकलकर देखा तो बच्चा मृत पड़ा हुआ था। वहीं आसपास कुत्तों का एक झुंड घुम रहा था।

सूर्य कुमार ने पुलिस ने बताया कि बच्चा रात में दूध पीकर सो गया था। रात करीब 12 बजे के आसपास वे भी सो गए थे। उन्होंने पुलिस को बताया कि उन्हें पता ही नहीं चला कि कब कुत्ते आए और उनके बच्चे को उठाकर ले गए। घटना के वक्त बच्चे की माँ वहाँ मौजूद नहीं थी। इस घटना से स्थानीय लोगों में डर का माहौल है।

बता दें कि हैदराबाद में कुत्तों का आतंक चरम पर है। पिछले मार्च से कुत्तों द्वारा आक्रमण का यह नौवाँ मामला है। इससे पहले फरवरी 2023 में अंबरपेट में चार साल के एक बच्चे को आवारा कुत्तों ने नोंच-नोंच कर मार डाला था। जून 2023 में कामारेड्डी में आवारा कुत्तों ने 3 साल के मासूम बच्चे को अपना शिकार बनाया लिया। इस बच्चे को गंभीर चोटें आई थीं।

मई 2023 में हनामकोंडा जिले में काजीपेट रेलवे क्वार्टर के पास एक बच्चे को नोंच-नोंच कर मार डाला था। बच्चा पेड़ के नीचे अकेले सो रहा था और उसके परिजन शौच के लिए गए हुए थे। इसी दौरान आवारा कुत्तों के एक झुंड ने बच्चे पर हमला कर दिया। मासूम बच नहीं सका और मौके पर ही उसकी मौत हो गई।

5 दिन के लिए ED के ​हवाले हेमंत, झारखंड के नए CM बने चंपई सोरेन: शपथ के बाद हैदराबाद के लिए उड़े JMM-कॉन्ग्रेस के MLA

चंपई सोरेन झारखंड के नए मुख्यमंत्री बन गए हैं। उन्हें शुक्रवार (2 फरवरी 2024) को राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण के बाद सत्ताधारी गठबंधन में शामिल झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और कॉन्ग्रेस के विधायक हैदराबाद चले गए हैं। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पीएमएलए कोर्ट ने 5 दिनों की रिमांड पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) को सौंप दिया है।

चंपई सोरेन ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ

चंपई सोरेन ने गुरुवार (01 फरवरी 2024) को राज्यपाल से मुलाकात की थी। राज्यपाल ने शुक्रवार को उन्हें शपथ दिलाई। बहुमत साबित करने के लिए उन्हें 10 दिन का समय दिया गया है। चंपई सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी हैं। वे जेएमएम संस्थापक शिबू सोरेन और उनके बेटे हेमंत सोरेन के करीबी माने जाते हैं।

चंपई ने की पहली कैबिनेट बैठक

कॉन्ग्रेस कोटे से आलमगीर आलम और राजद कोटे से सत्यानंद भोक्ता ने भी मंत्री पद की शपथ ली है। मुख्यमंत्री बनने के बाद चंपई सोरेन ने पहली कैबिनेट बैठक बुलाई। इसमें कैबिनेट मंत्रियों के साथ महत्वपूर्ण अधिकारी शामिल हुए। चंपई सोरेन ने बैठक के बाद कहा कि वे हेमंत सोरेन द्वारा किए गए कार्यों को जारी रखेंगे। मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने बताया कि वे कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के भारत जोड़ो न्याय यात्रा में शामिल होंगे। इसके अलावा जेएमएम स्थापना दिवस में भी शामिल होंगे।

हैदराबाद गए सत्ताधारी गठबंधन के विधायक

इस बीच झारखंड के सत्ताधारी गठबंधन के 35 विधायक हैदराबाद चले गए हैं। नई सरकार के गठन को लेकर चंपई सोरेन ने राज्यपाल को 43 विधायकों का समर्थन पत्र सौंपा था। इसमें चंपई सोरेन, कैबिनेट मंत्री आलमगीर आलम और सत्यानंद भोक्ता का नाम भी शामिल था। ये तीनों नेता राँची में ही रुके हैं। बता दें कि सत्तारूढ़ गठबंधन में जेएमएम के 29 विधायक हैं। कॉन्ग्रेस के 17, आरजेडी और लेफ्ट से एक-एक विधायक हैं। बताया जा रहा है कि इन विधायकों को किसी तरह की टूट से बचाने के लिए हैदराबाद भेजने का फैसला लिया गया है।

ED को मिली हेमंत सोरेन की कस्टडी

हेमंत सोरेन को ईडी ने 31 जनवरी की रात गिरफ्तार किया था। अगले दिन कोर्ट ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज कर ईडी रिमांड पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। 2 फरवरी को कोर्ट ने उन्हें 5 दिन के लिए ईडी की कस्टडी में भेज दिया। झारखंड के महाधिवक्ता राजीव रंजन ने बताया है, “ईडी ने 10 दिनों की रिमांड की प्रार्थना की थी। हमने इस पर आपत्ति जताई। इसके बाद कोर्ट ने ईडी को केवल 5 दिनों की रिमांड की अनुमति दी। इस मामले में अभी कोर्ट का आदेश अपलोड होना बाकी है। हमारी मुख्य चिंता सुरक्षा (हेमंत सोरेन की) है। ये मामला फर्जी है और गिरफ्तारी अवैध है।”

गौरतलब है कि 31 जनवरी को करीब सात घंटे की पूछताछ के बाद हेमंत सोरेन गिरफ्तार किए गए थे। उससे पहले उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इसके बाद गठबंधन ने चंपई सोरेन को नेता चुनते हुए सरकार बनाने का दावा पेश किया था। अब उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है।

बॉलीवुड में आ रहा फिर से पाकिस्तानी सिंगर आतिफ असलम, 7 साल बाद कमबैक से भारतीय नाराज: अनुच्छेद 370 पर उगला था जहर

पाकिस्तानी गायक आतिफ असलम 7 साल बाद फिर से बॉलीवुड में कमबैक करने जा रहे हैं। वह लव स्टोरी ऑफ 90’s फिल्म के साथ बॉलीवुड में वापसी करेंगे। उनके लौटने को लेकर फिल्म से जुड़े निर्देशक, प्रोड्यूसर सब लोग बेहद खुश हैं। उन्होंने इस वापसी को बहुत बड़ी बात कहा है और दावा कर रहे हैं कि पाकिस्तानी गायक के गाने से फिर झूम मचेगी।

दिलचस्प बात ये है कि एक तरफ जहाँ भारतीय निर्देशक, प्रोड्यूसर सब पाकिस्तानी सिंगर के ट्रैक को लेकर इतने उत्साहित हैं उनके अपने मुल्क में बॉलीवुड फिल्मों और विज्ञापनों पर बैन लगा दिया जाता है। शाहिद अफ्रीदी जैसे पाकिस्तान के नामी लोग खुले में कहते हैं कि टीवी पर हिंदुस्तानी सीरियल देख लड़की आरती की तरह हाथ घुमाने लगी थी, इसलिए गुस्से में उन्होंने टीवी तोड़ दी थी।

अब ऐसे मुल्क के सिंगर के नए गाने को लेकर बॉलीवुड में उत्साह बढ़ रहा है। इसे देख भारतीय नाराज हैं। बॉलीवुड की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा जा रहा है एक तरफ भारतीय सैनिक इन्हीं लोगों से लड़कर अपनी जान दे रहे हैं और दूसरी ओर कला के नाम पर बॉलीवुड को स्वागत मिलेगा।

बॉलीवुड के लोगों का कहना ये भी है कि बॉलीवुड आतिफ इस्लाम की वापसी को लेकर खुश है। वो यहाँ आकर कॉन्सर्ट करेगा, फिर भारत की ऑडियंस उसकी टिकट लेगी और वो पैसे से पाकिस्तान सरकार को टैक्स भरेगा। बाद में वही टैक्स भारत के खिलाफ हथियार खरीदने में प्रयोग किया जाएगा। आदि-आदि।

मालूम हो कि साल 2016 में उरी आतंकी हमले के बाद भारत में पाकिस्तानी कलाकारों को बैन करने की माँग उठी थी। सुप्रीम कोर्ट ने तब बैन की याचिका को खारिज कर दिया था लेकिन उसके बाद से पाकिस्तानी कलाकारों ने भारत में काम नहीं किया। कई मौके आए जब पाकिस्तानी सितारों को भारत के मुद्दों पर बोलते देखा गया।

6 अगस्त 2019 को किया गया पोस्ट

जैसे आतिफ असलम ने आर्टिकल 370 खत्म होने पर कहा था कि वह कश्मीर के मुद्दे पर कहा था, कश्मीरियों के खिलाफ की जा रही हिंसा और अत्याचार की कड़ी निंदा करते हैं और अल्लाह से कश्मीर और पूरी दुनिया में निर्दोष लोगों के जीवन देने की दुआ माँगते हैं। उनके इस ट्वीट के बाद वो बहुत ट्रोल हुए थे। लोगों ने उनसे कहा था कि वो कभी बलूचिस्तान में हो रहे अत्याचारों पर मुँह क्यों नहीं खोलते।

ज्ञानवापी ढाँचे के ‘व्यास जी तहखाना’ में होती रहेगी पूजा, हाई कोर्ट का रोक लगाने से इनकार: जुमे पर बंद का आह्वान, चप्पे-चप्पे पर पुलिस

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शुक्रवार (2 फरवरी 2024) को वाराणसी के ज्ञानवापी ढाँचे में हिंदू पक्ष को दिए गए पूजा के अधिकार पर रोक लगाने से मना करते हुए मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज कर दी। दरअसल, वाराणसी की जिला अदालत ने 31 जनवरी को 2024 पर हिंदू पक्ष की अपील पर सुनवाई करते हुए यह अधिकार दिया था। इसके बाद से वहाँ पूजा शुरू हो गई है। वहीं, इसके विरोध में मुस्लिम पक्ष ने वाराणसी बंद का आह्वान किया है।

दरअसल, वाराणसी की अदालत ने 31 जनवरी 2024 ढाँचे के नीचे हिंदुओं को पूजा करने का आदेश दिया था। जिला अदालत के इस आदेश को अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी है। अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ही ज्ञानवापी ढाँचे का प्रबंधन करती है।

मामले पर सुनवाई करते हुए जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल ने कहा कि मुस्लिम पक्षों ने 17 जनवरी को पारित आदेश को अभी तक चुनौती नहीं दी है, जिसके तहत एक जिला मजिस्ट्रेट को रिसीवर के रूप में नियुक्त किया गया था। बाद में इस रिसीवर को 31 जनवरी 2024 को मस्जिद के तहखाने में हिंदुओं को प्रार्थना करने का आदेश दिया गया था।

कोर्ट ने कहा कि जब तक 17 जनवरी के आदेश को चुनौती नहीं दी जाती, तब तक मस्जिद कमिटी की चुनौती पर सुनवाई करना संभव नहीं होगा। कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को जिला अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका में संशोधन करने के लिए 6 फरवरी 2024 तक का समय दिया है। वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार को ज्ञानवापी क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कहा गया है।

मस्जिद समिति की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एसएफए नकवी ने कहा, “मामले में अतिशीघ्रता है। उन्होंने (हिंदू पक्ष) पहले ही व्यास तहखाना (दक्षिणी तहखाने) में पूजा शुरू कर दी है।” नकवी ने कहा कि जिला मजिस्ट्रेट को तहखाने में पूजा शुरू कराने के लिए सात दिन का समय दिया गया था, लेकिन उन्होंने 7 घंटे में पूजा शुरू करवा दी।

नकवी के तर्क का विरोध हिंदू पक्ष के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने किया। उन्होंने कहा कि जब तक मुस्लिम पक्ष 17 जनवरी के आदेश को चुनौती नहीं देता, तब तक 31 जनवरी के आदेश को चुनौती नहीं दी जा सकती है। इसके बाद हाई कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को राहत देने से इनकार कर दिया।

मुस्लिम पक्ष को हाई कोर्ट से झटका लगने से दो पहले सुप्रीम कोर्ट ने झटका दिया था। तब सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद के दक्षिणी तहखाने में स्थित व्यास जी का तहखाना में हिंदुओं को पूजा की अनुमति देने के आदेश के खिलाफ मस्जिद समिति की याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया था।

बता दें कि ढाँचे के तहखाने में हिंदू पक्ष को मिले पूजा के अधिकार से मुस्लिम समाज नाराज है। मुस्लिम पक्ष ने शुक्रवार को वाराणसी बंद रखने का आह्वान किया है। मुस्लिम व्यापारियों से अपने दुकान-व्यवसाय बंद रखने के लिए कहा गया है। मुस्लिमों ने जुमे की नमाज के दौरान मस्जिदों मे दुआ पढ़ने की बात कही है। इसको देखते हुए चप्पे-चप्पे पर पुलिस को तैनात किया गया है।

मोहम्मद जुबैर ने फर्जी लेटर शेयर किया, लिखा- प्रमोद कृष्णम को कॉन्ग्रेस से निकाला: झूठ पकड़ाते ही ट्वीट डिलीट कर भागा, फैक्टचेकर होने का करता है दावा

फैक्टचेक के नाम पर फेक न्यूज फैलाने वाले मोहम्मद जुबैर की बदमाशी फिर से सामने आई है। उसने एक फर्जी लेटर एक्स/ट्विटर पर शेयर कर दावा किया कि आचार्य प्रमोद कृष्णम को कॉन्ग्रेस ने पार्टी से निकाल दिया है। अपने झूठ का पर्दाफाश होते ही उसने बिना किसी स्पष्टीकरण के ट्वीट डिलीट कर दिया।

शुक्रवार (2 फरवरी 2024) को ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने कॉन्ग्रेस से आचार्य प्रमोद कृष्णम को निकाले जाने का दावा एक्स पर किया। मोहम्मद जुबैर ने एक्स पर पोस्ट करते हुए दावा किया, “आखिरकार कॉन्ग्रेस ने आचार्य प्रमोद कृष्णम को निलंबित कर दिया। कम से कम 2 साल की देर कर दी। ये एएनआई के लिए भी दुख की बात है जो नियमित रूप से कॉन्ग्रेस विरोधी कोट के लिए उनके पास जाता है।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से से कल्कि धाम पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम की मुलाकात के बाद यह दावा किया गया।

जुबैर का फैलाया फेक न्यूज (फोटो साभार X/Zoo_bear)

खुद के फैक्टचेकर होने का दावा करने वाले जुबैर ने इस पोस्ट के साथ जो लेटर शेयर किया है, उसमें बहुत निचले स्तर की गलतियाँ हैं। ऐसी गलतियाँ जिसे कोई आम इंसान भी पहली नजर में पकड़ ले। लेकिन जुबैर ने उन्हें देखना जरूरी नहीं समझा, क्योंकि उसे फेक न्यूज फैलाने की जल्दी थी। यह लेटर ‘राव साहब’ के नाम से जारी किया गया था। ‘राव साहब’कोई व्यक्ति नहीं, बल्कि हरियाणा में सामान्य संबोधन का एक शब्द है।

फैक्ट चेक के धंधे के नाम पर मोहम्मद जुबैर आम लोगों से पैसे माँगता है, लेकिन उसने इस बात को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया कि यह लेटर 10 डाउनिंग स्ट्रीट लिखे पते से जारी हुआ है। यह लंदन में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री का आधिकारिक पता है। फैक्ट चेक के सामान्य दिशा-निर्देशों को पूरी तरह से दरकिनार कर मोहम्मद जुबैर ने फर्जी लेटर के दम पर दावा कर दिया कि अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस स्वयंसेवक समिति के CWC मेंबर कथित ‘राव साहब’ ने आचार्य प्रमोद कृष्णम को कॉन्ग्रेस पार्टी से निलंबित कर दिया है। लेकिन ऐसा न तो कोई पद है और न ही ऐसा कोई व्यक्ति।

दिलचस्प बात यह है कि कॉन्ग्रेस पार्टी के नाम से वायरल लेटर के फर्जी होने का खुलासा एक दिन पहले गुरुवार (1 फरवरी) को पत्रकार सचिन गुप्ता ने किया था। उन्होंने बताया था कि आचार्य प्रमोद कृष्णम के जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) ने इस दावे को खारिज किया है।

बहरहाल, इस बात ने मोहम्मद जुबैर को दुष्प्रचार को फैलाने और आगे बढ़ाने से नहीं रोका। बाद में झूठ पकड़े जाने पर उसने बिना किसी माफी या स्पष्टीकरण के बेशर्मी से ट्वीट डिलीट कर दिया।

सनातन विरोधी तमिलनाडु की डीएमके सरकार ने किया था सम्मानित

बता दें कि अभी कुछ दिन पहले ही गणतंत्र दिवस के मौके पर 26 जनवरी 2024 को तमिलनाडु सरकार ने मोहम्मद जुबैर को कोट्टई अमीर सांप्रदायिक सद्भाव पुरस्कार से सम्मानित किया था। ये सम्मान उसे फैक्ट चेकिंग के नाम पर दिया गया था, जबकि हकीकत सामने है।

4 निकाह पर रोक, 18 साल से कम उम्र की मुस्लिम लड़कियों की भी नहीं होगी शादी: उत्तराखंड में आ गया UCC ड्राफ्ट, बोले CM धामी- विधानसभा में लाएँगे बिल

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत जस्टिस जस्टिस रंजना देसाई की अगुवाई में बनाई गई कमिटी ने ड्राफ्ट मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंप दिया है। माना जा रहा है कि धामी की सरकार 6 फरवरी 2024 को समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक विधानसभा में पेश कर सकती है। इसके लिए सरकार ने 5 से 8 फरवरी तक विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है।  

इस विधेयक को विधानसभा में पेश करने से पहले शनिवार (3 फरवरी 2024) को होने वाली पुष्कर सिंह धामी कैबिनेट की बैठक में इसे मंजूरी दी जाएगी। विधानसभा से मंजूरी दिए जाने के बाद इस विधेयक को राज्यपाल के पास भेजा जाएगा। राज्यपाल की मंजूरी के बाद उत्तराखंड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन जाएगा।

कमिटी द्वारा ड्राफ्ट सौंपे जाने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “हम सभी लंबे समय से ड्राफ्ट का इंतजार कर रहे थे। आज हमें ड्राफ्ट मिल गया है। UCC कमिटी ने अपनी रिपोर्ट हमें सौंप दी है। अब हम इस मामले में आगे बढ़ेंगे। मसौदे का परीक्षण करेंगे और सभी औपचारिकताएँ पूरी करने के बाद इसे विधानसभा के दौरान रखेंगे। इस पर आगे चर्चा की जाएगी।”

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद विभिन्न धर्मों के सिविल कानूनोें में एकरूपता आ जाएगी। महिलाओं, खास करके मुस्लिम समाज की महिलाओं को हिंदू महिलाओं की तरह अधिकार मिल जाएँगे। वहीं, राज्य में बहुविवाह पर रोक लगेगी। महिलाओं को पैतृक संपत्ति में अधिकार मिलेगा एवं बच्चों को गोद लेने का भी अधिकार मिल सकता है। सभी धर्मों में लड़की की शादी की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होगी।

वर्तमान में मुस्लिम समाज शरिया पर आधारित पर्सनल लॉ के तहत संचालित होता है। इसमें मुस्लिम पुरुषों को चार विवाह की इजाजत है। समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद मुस्लिम लड़कियों को भी लड़कों के बराबर अधिकार दिया जाएगा। इसके अलावा, मुस्लिम समुदाय में इद्दत और हलाला जैसी प्रथा पर प्रतिबंध लग सकता है। तलाक के मामले में शौहर और बीवी को बराबर अधिकार मिलेगा।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, समान नागरिक संहिता में सभी धर्म के लोगों को लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के लिए पंजीकरण कराना जरूरी किया जाएगा। इसमें महिला और पुरुष की पूरी जानकारी होगी। ऐसे रिश्तों में रहने वाले लोगों को अपने माता-पिता को भी जानकारी देनी होगी। समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद विवाह का पंजीकरण कराना भी अनिवार्य किया जा सकता है। बिना रजिस्ट्रेशन विवाह अमान्य माने जाएँगे।

समान नागरिक संहिता में नौकरीपेशा बेटे की मृत्यु की स्थिति में पत्नी को मुआवजा दिया जाएगा। इसके साथ ही बेटे के बुजुर्ग माता-पिता के भरण-पोषण की जिम्मेदारी पत्नी पर होगी। अगर पति की मृत्यु के बाद पत्नी दोबारा शादी करती है तो उसे मिला हुआ मुआवजा माता-पिता को दिया जाएगा। पत्नी की मृत्यु होने की स्थिति में उसके माता-पिता की देखरेख की जिम्मेदारी पति पर होगी।

इसमें अनाथ बच्चों के लिए संरक्षण की प्रक्रिया को भी सरल बनाया जाएगा। पति-पत्नी के बीच विवाद की स्थिति में बच्चों की कस्टडी उसके दादा-दादी को दिए जाने का प्रावधान किया जा सकता है। बच्चों की संख्या निर्धारित करने जैसी व्यवस्था भी UCC में की जा सकती है। समान नागरिक संहिता में इन प्रावधानों से जनजातीय समुदाय के लोगों को छूट मिल सकती है।

बता दें कि विधानसभा चुनाव 2022 में जीत मिलने के बाद मुख्यमंत्री धामी ने समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में एक समिति बनाई थी। इसका ड्राफ्ट बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने समिति का कार्यकाल तीन बार बढ़ाया था। इस दौरान समिति ने समान नागरिक संहिता पर लोगों से ऑनलाइन और ऑफलाइन सुझाव भी माँगे थे।

इसके अलावा, कमिटी ने उपसमिति बनाकर हर समाज के विशिष्ट लोगों, समाजसेवियों, धार्मिक नेताओं और जागरूक नागरिकों के साथ चर्चा की और सुझाव लिए। कमिटी ने राज्य के विभिन्न क्षेत्रों का भी दौरान किया था। UCC पर कमिटी को ढाई लाख से अधिक सुझाव मिले थे। इसके बाद समिति ने केंद्रीय विधि आयोग के साथ भी समान नागरिक संहिता को लेकर चर्चा की थी।

पूनम पांडे का शौहर था सैम अहमद, शराब पीकर दिन-रात मारता था… अस्पताल में होना पड़ा था एडमिट: सर्वाइकल कैंसर से मौत के बाद चर्चा में प्रताड़ना

पूनम पांडे जीवित हैं, उनकी मृत्यु नहीं हुई है। वह और उनकी टीम ने अपनी मौत का नाटक रचा था। इससे संबंधित रिपोर्ट यहाँ पढ़ें। पुरानी रिपोर्ट (उनकी टीम द्वारा झूठ पर आधारित) नीचे है।

फिल्म अभिनेत्री पूनम पांडे का आज 2 फरवरी 2024 को सर्वाइकल कैंसर निधन हो गया। मात्र 32 साल की उम्र में दुनिया छोड़ने वाली पूनम पांडे पिछले कुछ सालों से काफी विवादों से घिरी थीं। उनका शादी-शुदा जीवन में तो दिक्कत शादी के 11 दिन बाद से ही आने लगी थी। बाद में उन्होंने लॉक अप में जाकर खुलासा भी किया था कि उनका शौहर उन्हें सुबह से शाम तक मारता था। जानने वाली बात ये है कि एक एब्यूसिव रिलेशन (जहाँ महिला परेशान होकर गर्भनिरोधक पिल्स लेने लगे) भी इस बीमारी का एक कारण बनता है। यह शोध में भी साबित हुआ है।

सैम अहमद और पूनम पांडे

सैम अहमद से पूनम पांडे ने गुपचुप ढंग से सितंबर 2020 में शादी की थी और 22 सितंबर को खबर आई कि घरेलू हिंसा मामले में गोवा पुलिस ने सैम अहमद को गिरफ्तार किया है। पूनम ने आरोप लगाया था कि सैम ने उन्हें मारा और फिर अंजाम भुगतने की भी दी। साल 2022 में खबर आई कि उन्होंने सैम से तलाक ले लिया है और 5 साल तक किसी के साथ रिश्ते में नहीं रहना चाहतीं थीं। उन्होंने लॉक अप में आने के वक्त यह खुलासा किया था कि उनका शौहर उन्हें सुबह से शाम तक मारता था, उन्हें कंट्रोल करता था, अकेले रहने की इजाजत नहीं देता था, फोन भी इस्तेमाल करने पर गुस्सा होता था।

इस घरेलू हिंसा के कारण वो ब्रेन हैमरेज का भी शिकार हुईं थीं। उन्होंने लॉक अप में करणवीर से बात करते हुए कहा था, “सैम ने मेरे साथ बस 1 बार मारपीट नहीं की, मेरी ब्रेन इंजरी (अपने सिर के बाएँ तरफ इशारा करते हुए) अभी तक ठीक नहीं हुई है, क्योंकि वो मुझे उसी जगह पर बार-बार पीटते थे। मैं लोगों के सामने मेकअप, ग्लॉस लगाती थी और हँसती थी। मैं उनके सामने काफी कूल बनती थी।”

पायरल रोहतगी को उन्होंने बताया था कि उन्हें कभी नहीं पता चला कि सैम उनको क्यों मारता था। इस दौरान उन्होंने सैम अहमद की शराब पीने की गंदी लत का भी जिक्र किया था। उन्होंने कहा था, “अगर कोई इंसान सुबह 10 बजे से शराब पीना शुरू कर देता है और देर रात तक पीता रहता है और रात में आपको बचाने के लिए कोई नहीं है तो आप क्या कर सकते हैं। स्टाफ तक डर कर भाग जाता था।”

पूनम पांडे, सर्वाइकल कैंसर और कारण

पूनम पांडे को कुछ समय पहले ही पता चला था कि वो सर्वाइकल कैंसर से पीड़ित हैं। लेकिन उनके अपने एक्स-हस्बैंड सैम अहमद से बुरे रिश्ते पहले से चर्चा में थे। ऐसे में उनके निधन के बाद उन्हें शादीशुदा जीवन में दी गई प्रताड़ना चर्चा में हैं। दरअसल, खराब और प्रताड़ित वैवाहिक जीवन के कारण महिलाओं को बहुत कुछ झेलना पड़ता है। इस कारण उनका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों पर असर पड़ता है।

वैवाहिक जीवन जब सामान्य के बजाय प्रताड़ित हो तो महिलाएँ जबरन गर्भपात, गर्भनिरोधक गोलियाँ या मॉर्निंग आफ्टर पिल्स (सामान्य गर्भनिरोधक गोलियों से अलग, ज्यादा हानिकारक) का शिकार होती हैं, आदत पड़ जाती है। इससे उनके शरीर पर असर पड़ता है। यह सर्वाइकल कैंसर का कारण भी बनता है।

इंग्लैंड की कैंसर रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार गर्भनिरोधक गोलियों के सेवन से सर्वाइकल कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। अमेरिकी रिसर्च संस्था गटमाशेर का शोध भी सर्वाइकल कैंसर को बढ़ाने की एक वजह गर्भनिरोधक गोलियों को मानता है। इन शोधों से पता चलता है कि अगर किसी ने लंबे समय तक गर्भनिरोधक गोलियाँ खाई हैं, तो उसे सर्वाइकल कैंसर होने के चांस ज्यादा हैं।

पूर्व IAS अधिकारी हर्ष मंदर के घर और ऑफिस पर CBI की रेड, एनजीओ में विदेशी फंडिंग से जुड़ा है मामला: यूपीए सरकार में NAC के थे सदस्य

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने शुक्रवार (2 फरवरी 2024) को FCRA उल्लंघन के मामले में IAS से कथित सामाजिक कार्यकर्ता बने हर्ष मंदर के आवास और कार्यालय पर छापेमारी की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्रीय जाँच एजेंसी ने इस मामले में कई लोगों से पूछताछ भी की है। हर्ष मंदर यूपीए सरकार के दौरान सोनिया गाँधी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के सदस्य भी थे।

दरअसल, सितंबर 2021 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हर्ष मंदर के एनजीओ ‘अमन बिरादरी’ से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जाँच शुरू की थी। उस दौरान भी हर्ष मंदर के आवास पर छापा मारा गया था। दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्रालय की शिकायत के बाद विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) के विभिन्न प्रावधानों के उल्लंघन के लिए अमन बिरादरी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।

नियम के मुताबिक, विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाले सभी एनजीओ को गृह मंत्रालय के एफसीआरए के तहत पंजीकरण कराना अनिवार्य होता है। एनजीओ की वेबसाइट के अनुसार, अमन बिरादरी एक ‘जमीनी स्तर का आंदोलन’ है जो एक धर्मनिरपेक्ष, शांतिपूर्ण, न्यायपूर्ण और दयालु दुनिया बनाने के लिए समर्पित है।

वेबसाइट का कहना है कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए गाँव और जिला स्तर पर समुदाय-आधारित संगठनों की स्थापना करना था, जिसमें विभिन्न पृष्ठभूमि और धर्मों के युवा एवं महिलाएँ शामिल हों। इसमें आगे कहा गया है कि इन संगठनों का लक्ष्य विभिन्न धर्मों, जातियों और भाषाई समूहों के व्यक्तियों के बीच सहिष्णुता, भाईचारा, सम्मान और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बढ़ावा देना है।

गृह मंत्रालय ने साल 2023 में एफसीआरए उल्लंघन को लेकर हर्ष मंदर की एनजीओ के खिलाफ सीबीआई जाँच की सिफारिश की थी। हर्ष मंदर खुद को वामपंथी ‘कार्यकर्ता’ बताते हैं। भारत की न्यायपालिका को बदनाम करने और देश के खिलाफ मुस्लिम भीड़ को उकसाने का उनका इतिहास रहा है।

हर्ष मंदर का मार्च 2020 में भारत और देश की न्यायपालिका के खिलाफ मुस्लिम भीड़ को उकसाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसके बाद वे विवादों में आ गए थे। इस वीडियो में मंदर ने कहा था कि भारत के मामलों से संबंधित निर्णय सुप्रीम कोर्ट या संसद द्वारा नहीं, बल्कि सड़कों पर दिए जाएँगे।

इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने हर्ष मंदर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया था। इस हलफनामे में हर्ष मंदर पर न केवल हिंसा भड़काने, बल्कि न्यायपालिका को बदनाम करने का आरोप लगाया था। हर्ष मंदर के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की भी माँग की गई थी।

कौन हैं हर्ष मंदर

हर्ष मंदर ने लगभग दो दशकों तक भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में काम किया था। साल 2002 में गुजरात में उन्होंने ‘राज्य प्रायोजित दंगों’ का आरोप लगाकर सेवा छोड़ दी थी। आईएएस छोड़ने के बाद से हर्ष मंदर ने ‘सिविल सोसायटी’ संगठनों में काफी रंगीन जीवन बिताया। उन्होंने अपने कई योगदानों में से एक, उन्होंने एक्शनएड इंडिया के कंट्री डायरेक्टर के रूप में काम किया है।

आगे चलकर हर्ष मंदिर कॉन्ग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए शासन में महत्वपूर्ण भूमिका में आ गए। यूपीए शासन के दौरान तत्कालीन पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी के नेतृत्व में राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (NAC) की स्थापना की गई थी। हर्ष मंदर इसके सदस्य थे। इस दौरान अपनी सेवा के लिए सबसे प्रसिद्ध हुए। NAC ने ही हिंदू विरोधी सांप्रदायिक हिंसा विधेयक का मसौदा तैयार किया था।

दिलचस्प बात यह है कि इससे पहले अक्टूबर 2022 में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने FCRA कानूनों के उल्लंघन के लिए कॉन्ग्रेस नेता सोनिया गाँधी की अध्यक्षता वाले दो गैर-सरकारी संगठनों- राजीव गाँधी फाउंडेशन (RGF) और राजीव गाँधी चैरिटेबल ट्रस्ट (RGCT) का एफसीआरए पंजीकरण रद्द कर दिया था।

हर्ष मंदर द्वारा न्यायिक हस्तक्षेप

हर्ष मंदर लश्कर-ए-तैयबा की आतंकी इशरत जहाँ के समर्थक थे। इशरत को गुजरात में अपराध शाखा के अधिकारियों ने तीन अन्य लोगों के साथ एक मुठभेड़ में मार गिराया था। हर्ष मंदर उन व्यक्तियों में से एक थे, जिन्होंने मुंबई हमले के आतंकवादी याकूब मेमन के लिए दया याचिका पर हस्ताक्षर किए थे। वह उन 203 व्यक्तियों में से थे जिन्होंने पाकिस्तानी आतंकवादी अजमल कसाब के लिए दया याचिका पर हस्ताक्षर किए थे।

इतना ही नहीं, हर्ष मंदर ने संसद पर आतंकी हमले के दोषी अफजल गुरु के लिए भी दया याचिका पर हस्ताक्षर किए थे। बाद में अजफल को फाँसी दे दी गई थी। मंदर ने कई मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप भी किए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई को डिटेंशन की स्थिति और असम से अवैध प्रवासियों के निर्वासन से संबंधित मामले की सुनवाई से अलग करने की माँग की थी।

हर्ष मंदर उन 40 ‘कार्यकर्ताओं’ में से एक थे, जिन्होंने अयोध्या फैसले के खिलाफ अदालत में समीक्षा याचिका दायर की थी। सुप्रीम के इस फैसले से ही अयोध्या में भव्य राम मंदिर का मार्ग प्रशस्त हुआ था। वह उस मंडली का भी हिस्सा थे, जिसने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के खिलाफ याचिका दायर की थी। हर्ष मंदर ने यह सब कुछ विदेशी वित्त पोषित एनजीओ से जुड़े रहते हुए किया।

CAA को लेकर हुए बवाल में हर्ष मंदर की भूमिका

हर्ष मंदर ने अपने संगठन ‘कारवां-ए-मोहब्बत’ के साथ अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में हुई हिंसा पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें वहाँ के छात्रों को सभी दोषों से मुक्त कर दिया गया था और उत्तर प्रदेश पुलिस के खिलाफ कई झूठ फैलाए गए थे। बाद में यह पूरी रिपोर्ट ही झूठी निकली।

हर्ष मंदर ने CAB पारित होने पर खुद को मुस्लिम के रूप में पंजीकृत करने का वादा किया था, लेकिन ऑपइंडिया अभी तक इसकी पुष्टि नहीं कर पाया है कि CAB के CAA बनने के बाद उन्होंने अपना वादा पूरा किया है या नहीं। उन्होंने अतीत में एनआरसी और असम में विदेशी न्यायाधिकरण के बारे में भी बड़ा झूठ फैलाया है।

इससे पहले हर्ष मंदर उस मंडली का हिस्सा थे, जिसने CAB के खिलाफ पत्र लिखा था। हर्ष मंदर और उनका एनजीओ ‘कारवां-ए-मोहब्बत’ शाहीन बाग में विरोध प्रदर्शन में सक्रिय थे। CAA विरोधी प्रदर्शन का मास्टरमाइंड कुख्यात कट्टरपंथी शरजील इमाम था। दिलचस्प बात यह है कि हर्ष मंदर के कारवां-ए-मोहब्बत ने लोगों से कुख्यात शाहीन बाग विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का भी आग्रह किया था।

‘आज कुत्तों का वक्त है, कल हमारा आएगा’: मुफ्ती सलमान ने उगला जहर, कहा- बुत रखने से मस्जिद नहीं बनेगा बुतखाना…

ज्ञानवापी में पूजा पाठ शुरू होने के बाद इस्लामी कट्टरपंथियों ने जहर उगलना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में सलमान अजहरी नाम के एक मुफ्ती का भाषण वायरल हुआ है। ये भाषण जूनागढ़ के एक कार्यक्रम का है। वीडियो में अजहरी कहता है, “अभी तो कर्बला का आखिरी मैदान बाकी है…कुछ देर की खामोशी है, फिर किनारा आएगा…आज कुत्तों का वक्त है, कल हमारा दौर आएगा।”

22 सेकेंड का ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। लोग इसे शेयर करके कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। ऑपइंडिया ने जब इस वीडियो की पड़ताल की तो हमें भाषण का 53 मिनट का असली वीडियो मिला।

इसमें मुफ्ती ने कई जगह भड़काऊ बातें कही हुई हैं। इस वीडियो को इस्लामिक चैनल ने पोस्ट किया है। इसमें वक्ता के तौर पर मुफ्ती सलमान अजहरी मंच पर है, जबकि जगह जूनागढ़, गुजरात है। कार्यक्रम 31 जनवरी को हुआ था और वीडियो 1 फरवरी 2024 को अपलोड किया गया।

भाषण की शुरुआत में अजहरी जूनागढ़ के इतिहास का जिक्र कर कहता है, “जूनागढ़ के लोग जल्दी किसी के हाथ नहीं लगे। उन्हें अंदर लाने के लिए कई प्रयास करने पड़े। जैसे तब आप जल्दी ही किसी के हाथ नहीं आए, मैं चाहता हूँ कि आज आप किसी और की पट्टा अपने गले में न पहनें, हमारे में तो सिर्फ ताजदार-ए-मदीना की ही गुलामी करना कहा गया है।”

इसके बाद कार्यक्रम में “गुलाम हैं गुलाम हैं, रसूल के गुलाम हैं” के नारे भी सुनाई दिए। वीडियो में उसने कहा, “मस्जिद में बुत रखने से मस्जिद बुतखाना नहीं बन जाती। तुमने एक रखा है, काबा में 360 रखे थे, फिर भी काबा तो काबा ही रहा, न तवाफ रुका, न हज रुका।”

आगे उसने मुसलमानों को भड़काने के लिए यहूदी व्यक्ति का हवाला दिया। उसने कहा कि समय-समय पर मुसलमानों पर अत्याचार हुए लेकिन फिर वह हरियाली की तरह खड़े हो गए। उसने कहा कि मुसलमानों को कोई नेता एकजुट नहीं करता बल्कि ये सिर्फ मुहम्मद के नाम पर इकट्ठा होते हैं। इन्हें सिर्फ ताजदार-ए-मदीना ही इकट्ठा कर सकता है।

आगे वह यह भी बताता है कि फिलिस्तीन, ईरान, बर्मा में हर जगह मुस्लिमों को मारा जा रहा है। लेकिन मुसलमानों के मरने से इस्लाम नहीं खत्म होगा।

अपने भाषण में उसने कहा मुसलमानों को खुद उठना होगा कोई नेता-विपक्षी दल उनके लिए नहीं आएगा। उसने कहा, “इंकलाब आपके घर से होगा। उनमें मस्जिदों को बुतखाना बनाने की हिम्मत नहीं है। आपने मस्जिदों को वीरान छोड़ दिया है और हमारे यहाँ मुहावरा है कि जब मैदान खुला होता है तो कुत्तों का राज होता है। यदि तुम मैदान में घूमते रहोगे तो कोई कुत्ते नहीं होंगे।”

भाषण के अंत में उसने कहा, ”मुसलमानों घबराओ मत, अभी खुदा की शान बाकी है। अभी इस्लाम जिंदा है, अभी कुरान बाकी है, ऐ जालिम काफिर क्या समझता है जो रोज हमसे उलझता है, अभी तो कर्बला का आखिरी मैदान बाकी है। कुछ देर की खामोशी है, किनारा आएगा…आज कुत्तों का वक्त है, कल हमारा दौर आएगा।”

इसके बाद फिर लब्बैक या रसूल अल्लाह के नारे लगवाए जाते हैं।

पुलिस ने लिया संज्ञान

बता दें कि इस मामले को लेकर ऑपइंडिया ने जूनागढ़ पुलिस से संपर्क किया तो पता चला कि पुलिस ने वीडियो पर संज्ञान ले लिया है और बयान भी जारी करेगी। हालाँकि, बाद में पुनः प्रयास करने पर कनेक्शन स्थापित नहीं हो सका। लेकिन, जूनागढ़ के शीर्ष पुलिस अधिकारी डीएसपी हितेश ढांडालिया ने दिव्य भास्कर से खास बातचीत में कहा, “हमने पूरा भाषण प्राप्त कर लिया है और इसे कानूनी विशेषज्ञों की राय के लिए भेज दिया है। उग्रता दिखाने पर कार्रवाई की जाएगी।”