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‘यहाँ से हिंदुओं को निपटा देंगे’: भगवान रामलला के आगमन की खुशियाँ मना रहा था परिवार, कट्टरपंथी भीड़ ने किया हमला; घर में घुस महिलाओं को भी पीटा

उत्तर प्रदेश के बरेली में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का उत्सव मना रहे हिन्दुओं पर कट्टरपंथी मुस्लिमों ने हमला कर दिया। जिस समय हिंदुओं पर हमला किया गया, उस समय अयोध्या में भगवान रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के उपलक्ष्य में स्थानीय हिंदू आतिशबाजी कर रहे थे। इस हमले में महिलाओं की भी पिटाई की गई है।

जानकारी के अनुसार, बरेली के सिरौली में 24 जनवरी 2024 को वरुण रस्तोगी अपने परिवार के साथ घर के बाहर गली में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का उत्सव मना रहे थे। इस दौरान वे आतिशबाजी कर रहे थे। इसी दौरान सिरौली के ही रहने वाले शावेज, वसीम, सुहैल, कय्यूम, दानिश और सहाना ने वरुण और उनके बच्चों पर लाठी डंडों से हमला बोल दिया।

कट्टरपंथी मुस्लिम हमलावरों ने उन पर हमला करते हुए कहा कि ‘बहुत रामभक्त बनते हो, आज तुम्हें जान से मार देंगे’। इस दौरान उन्हें बचाने आई उनकी पत्नी पर भी मुस्लिम हमलावरों ने हमला कर दिया और उनके साथ भी मारपीट की। जब उन्हें मोहल्ले के बाकी लोग बचाने आए तो हमलावरों ने उन पर भी हमला कर दिया।

कट्टरपंथियों के हमले के बाद वरुण रस्तोगी की पत्नी बच्चों को लेकर अपने घर के अंदर भाग गई, लेकिन कट्टरपंथियों ने पीछा नहीं छोड़ा और घर के अंदर घुस गए और मारना-पीटना जारी रखा। कट्टरपंथी मुस्लिम हमलावर इस दौरान एक हिन्दू युवक की सोने की चेन खींच ले गए। इसके बाद जब और लोग यहाँ आ गए तो यह धमकी देते हुए भाग गए।

इनके हमले में वरुण और उनके बच्चों समेत अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हैं। इनका इलाज जारी है। पीड़ित वरुण रस्तोगी ने थाना सिरौली में हमलावरों के खिलाफ FIR दर्ज करवाई है। इसकी कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। पुलिस ने हत्या के प्रयास और बलवा समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी के प्रयास शुरू कर दिए हैं। फिलहाल सभी आरोपित फरार हैं।

बरेली से ही हिंदुओं पर हमले की एक और खबर आई है। यहाँ भगवान श्रीराम की पूजा कर रहे लोगों पर कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ ने हमला कर दिया। भोजीपुरा थाना क्षेत्र के गाँव लक्ष्मियापुर हरवंशपुर में कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ ने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के उपलक्ष्य में भगवान की पूजा कर रहे हिन्दुओं पर पथराव कर दिया।

जानकारी के अनुसार, यहाँ 22 जनवरी की रात को पूजा कर रहे हिन्दुओं पर अनवर, नन्हे, रफीक और कादिर ने पथराव कर दिया। एकाएक पथराव से यहाँ भगदड़ की स्थिति बन गई। इन लोगों ने धमकी भी दी कि वे हिन्दुओं को यहाँ से निपटा देंगे। पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।

घर में ही घिरे मुइज्जू, विपक्षी दल बोले- भारत पुराना साथी, उसके खिलाफ जाना खतरनाक: चीन के जासूसी जहाज को पनाह दे रहा मालदीव

मोहम्मद मुइज्जू सरकार की भारत विरोधी नीति के खिलाफ अब मालदीव में ही आवाज उठने लगे हैं। हिंद महासागर में स्थित द्वीपीय देश मालदीव की दो प्रमुख विपक्षी पार्टियों ने मुइज्जू सरकार की आलोचना की है और कहा कि सरकार की भारत विरोधी रूख मालदीव के लिए बेहद नुकसानदायक है। विपक्षी पार्टियों ने भारत को सबसे पुराना सहयोगी बताया है।

मालदीव की मालदीवीयन डेमोक्रेटिक पार्टी और द डेमोक्रेट्स ने एक बयान जारी करके मोहम्मद मुइज्जू वाली सरकार की विदेश नीति की आलोचना की है। दोनों पार्टियों ने भारत को मालदीव का सबसे पुराना एवं भरोसेमंद सहयोगी बताते हुए कहा कि भारत विरोधी स्टैंड मालदीव के विकास में रुकावट डालने वाला साबित होगा। उन्होंने यह भी कहा कि हिन्द महासागर में स्थिरता और सुरक्षा मालदीव की स्थिरता और सुरक्षा के लिए जरूरी है।

अपने संयुक्त बयान में विपक्षी पार्टियों ने कहा, “वर्तमान प्रशासन (मुइज्जू सरकार) भारत विरोधी स्टैंड लगातार लेती जा रही है। MDP और डेमोक्रेट्स का मानना है कि किसी भी सहयोगी से दूर होना और विशेषकर अपने सबसे पुराने सहयोगी से, मालदीव के विकास के लिए लम्बे समय में रुकावटें पैदा करेगा। मालदीव की सभी सरकारों को अपने नागरिकों की भलाई के काम करती रहनी चाहिए, जैसा पहले से होता आया है।”

गौरतलब है कि मालदीव में भारत विरोधी भावनाएँ भड़काकर सत्ता में आई मुइज्जू सरकार अब इस रवैये को आगे बढ़ा रही है। वह चीन के इशारों पर काम कर रही है। मुइज्जू की सरकार ने हाल ही में एक चीनी जासूसी जहाज को मालदीव आने की अनुमति दी है। चीन का यह जासूसी जहाज जियांग यांग योंग 3 राजधानी माले के तट पर पहुँचेगा।

चीन हिन्द महासागर में अपने जासूसी जहाज भेजता रहता है। ये जहाज भारतीय तट के पास से निकलते हुए भारत के मिसाइल प्रोग्राम और परमाणु संयंत्रों के विषय में जासूसी करते हैं। साल 2023 में भी चीन ने श्रीलंका में भी ऐसा ही एक जहाज भेजा था। तब भारत ने इस पर भी कड़ी आपत्ति जताई थी।

चीन के इस जहाज के मालदीव में आने पर उसके विदेश मंत्रालय ने कहा है कि यह जहाज माले में अपनी आपूर्तियाँ लेने और स्टाफ बदलने के लिए आएगा। इसके लिए चीन के विदेश मंत्रालय ने माले से अनुमति माँगी थी। ये यहाँ कोई भी रिसर्च नहीं करेगा। मालदीव ने कहा है कि वह हमेशा से मित्र राष्ट्रों को ऐसी अनुमतियाँ देता आया है।

गौरतलब है कि इस चीनी जहाज को अनुमति ऐसे समय में दी गई है, जब मालदीव के राष्ट्रपति मुइज्जू हाल ही में चीन का एक दौरा करके आए हैं। यह उनका पहला आधिकारिक विदेश दौरा था। इस प्रकार उन्होंने उस परम्परा को भी तोड़ा जिसके अंतर्गत मालदीव का राष्ट्रपति सबसे पहले भारत के दौरे पर आता था।

मुइज्जू सरकार की आलोचना करने वाली मालदीवीयन डेमोक्रेटिक पार्टी यहाँ के पूर्व राष्ट्रपति इब्राहीम मोहम्मद सोलिह की पार्टी है। वह नवम्बर 2023 तक मालदीव के राष्ट्रपति थे। वह भारत समर्थक माने जाते थे। उनके कार्यकाल में मालदीव के भारत के साथ संबंधों में काफी बढ़ोत्तरी हुई थी।

चीन के जासूजी जहाज को अनुमति देने के साथ ही मालदीव की मुइज्जू सरकार ने हाल ही में मालदीव में राहत बचाव में लगे भारतीय सैनिकों को यहाँ से निकालने को कहा था। मालदीव ने कहा था कि भारत 15 मार्च तक अपने सैनिक हटा ले। हाल ही में मुइज्जू सरकार में मंत्रियों ने भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विरुद्ध अपमानजनक टिप्पणियाँ की थी। इसके खिलाफ भारत में गुस्सा देखा गया था और भारतीयों ने मालदीव का बायकाट करने को लेकर अभियान चलाया था।

मीरा रोड के बाद मोहम्मद अली रोड पर भी चला बुलडोजर, BMC ने 40 दुकानों पर की कार्रवाई: जानें क्यों लिया गया एक्शन

मुंबई के मोहम्मद अली रोड पर बुधवार (25 जनवरी 2024) को बृहन्मुंबई नगर निगम ने अतिक्रमण हटाने के लिए कार्रवाई की। इस दौरान 40 दुकानों द्वारा किए गए कब्जे को हटाया गया। इनमें कुछ दुकानें 1930 की बनीं हुईं थीं। इससे पहले मंगलवार (24 जनवरी 2024) को ठाणे के मीरा रोड पर मीरा भायंदर नगर निगम ने 15 इमारतों पर कार्रवाई की थी। ये जगह 21 जनवरी 2024 को चर्चा में आई थी जब शोभा यात्रा निकालते समय हिंदुओं पर हमला हुआ था।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार बीएमसी अधिकारियों ने बताया कि मोहम्मद अली रोड पर लोग दुकान सड़कों तक बढ़ाकर बैठे थे। अतिक्रमण हटाने के लिए, रोड चौड़ा करने के लिए ये कार्रवाई की गई है। खबर में एक वीडियो भी लगाई गई है जिसमें दुकान पर बुलडोजर चलता दिख रहा है। इन दुकानों में नूरानी मिल्क सेंटर और सुलेमान उस्मान मिठाईवाला की भी दुकान है।

बीएमसी के अतिक्रमण हटाओ विभाग के एक अधिकारी ने कहा, “वर्तमान में सीएम के ‘गहन सफाई’ अभियान के हिस्से के रूप में सभी नगरपालिका वार्डों में स्थानीय अभियान चलाए जा रहे हैं। जिसके लिए, हम फुटपाथ साफ-सुथरा रहे यह सुनिश्चित करने के लिए सड़क के किनारे छोटे भोजनालयों और विक्रेताओं को हटा रहे हैं। यह अभियान दिसंबर के पहले सप्ताह से चालू है।”

वहीं विपक्ष ने कहा कि ये कार्रवाई सिर्फ एक समुदाय के खिलाफ हो रही है। वह लोग बुलडोजर कल्चर को घातक और असंवैधानिक बता रहे हैं। समाजवादी पार्टी के विधायक भिवंडी रईस शेक ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि ये सब केवल एक कम्युनिटी के विरोध में हो रहा है और ये सब केवल इसलिए है क्योंकि चुनाव आ रहे हैं।

बता दें कि मंगलवार को MBMC ने हैदरी चौक पर बुलडोजर की कार्रवाई की थी। ये जगह उस जगह के करीब है जहाँ 21 जनवरी 2024 को विवाद हुआ।

बिखरता जा रहा है INDI गठबंधन का कुनबा: ममता के बाद केजरीवाल ने दिया कॉन्ग्रेस को झटका, AAP ने पंजाब में अकेले लोकसभा चुनाव लड़ने का किया ऐलान

लोकसभा चुनाव 2024 में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को हराने के लिए बनी I.N.D.I गठबंधन का कुनबा बिखरता नजर आ रहा है। पश्चिम बंगाल में TMC के बाद गठबंधन की एक और सहयोगी आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी पंजाब में अपने दम पर लोकसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया है।

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 24 जनवरी 2024 को राज्य में आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस, दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन की संभावना से इनकार कर दिया। बता दें कि ये दोनों ही पार्टियाँ विपक्षी इंडी गुट में सहयोगी हैं। हालाँकि, दोनों ही अपने-अपने राज्यों में अकेले चलने का निर्णय लिया है।

इससे पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री एवं टीएमसी की सुप्रीमो ममता बनर्जी ने 24 जनवरी 2024 को ऐलान किया कि तृणमूल कॉन्ग्रेस पार्टी आगामी लोकसभा चुनाव अपने दम पर लड़ेगी। अब सीएम भगवंत मान के ऐलान के बाद कॉन्ग्रेस और I.N.D.I गठबंधन को दूसरा करारा झटका लगा है।

जब सीएम भगवंत मान से ये सवाल किया गया कि ‘क्या आप भी सीएम ममता बनर्जी के अकेले ही लोकसभा चुनाव लड़ने वाले फैसले की राह अपनाने जा रहे हैं’ तो भगवंत मान ने कहा, “पंजाब में हम ऐसा कुछ भी (कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन) नहीं करेंगे। कॉन्ग्रेस के साथ हमारा कोई संबंध नहीं है।”

यही नहीं, सीएम मान ने विश्वास जताया है कि उनकी पार्टी अकेले ही राज्य की सभी 13 लोकसभा सीटों पर जीत हासिल करेगी। बता दें कि सीएम मान के ऐलान से पहले ही पंजाब में AAP के सभी 13 लोकसभा सीटों पर अपने दम पर लोकसभा चुनाव लड़ने की संभावनाएँ जताई जा रही थीं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, AAP के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने राज्य में अकेले आम चुनाव लड़ने के पंजाब यूनिट के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। माना जा रहा है कि पंजाब में अकेले लोकसभा चुनाव में उतरने का फैसला AAP ने कॉन्ग्रेस के सीट बँटवारे में अड़ियल रवैया अपनाने के बाद लिया है।

बता दें दिल्ली में आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल और कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच सीट शेयरिंग को लेकर कई दौर की बातचीत हुई है। हालाँकि, हर बार सीएम भगवंत मान ने पंजाब में अपने दम पर चुनाव में उतरने की बात कही। भगवंत मान ने कहा, “हम सरकारें बनाना और चलाना जानते हैं।”

सीएम मान ने कुछ दिन पहले भी कहा था कि साल 2022 में भी पंजाब विधानसभा चुनाव में AAP ने अकेले दम पर 117 में से 92 सीट जीती थीं। उनका कहना था कि दिल्ली में भी AAP तीन बार जीती है। वहीं, गुजरात में भी कॉन्ग्रेस को पीछे छोड़कर AAP ने अकेले 13 फीसदी वोट हासिल किए।

टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने अकेले लोकसभा चुनाव लड़ने के अपने फैसले के लिए गठबंधन के अहम सदस्य कॉन्ग्रेस के साथ सीट शेयरिंग पर बातचीत नाकाम होने का हवाला दिया था। सीएम बनर्जी ने कहा था, “मैंने उन्हें जो भी प्रस्ताव दिया, उन्होंने सभी को अस्वीकार कर दिया। तभी से हमने पश्चिम बंगाल में अकेले जाने का फैसला किया है।”

बता दें कि सीएम बनर्जी की ऐलान कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी के साथ तीखी नोकझोंक के एक दिन बाद आया था। कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की आलोचना की थी। उन्हें अवसरवादी कहा था और कहा था कि पार्टी उनकी मदद के बगैर लोकसभा चुनाव 2024 लड़ेगी।

ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में साल 2019 के लोकसभा चुनावों के प्रदर्शन के आधार पर कॉन्ग्रेस को दो सीटों की पेशकश की थी। हालाँकि, कॉन्ग्रेस ने 10-12 सीटों की माँग की थी, लेकिन ममता इस पर राजी नहीं हुईं। वहीं, BSP सुप्रीमो मायावती भी I.N.D.I गठबंधन की आशाओं पर पानी फेर चुकी हैं। उन्होंने साफ कर दिया है कि कि बीएसपी अकेले चुनाव लड़ेगी।

सपने नहीं हकीकत बुनते हैं, तभी तो सब मोदी को चुनते हैं: भाजपा ने 2024 के लोकसभा रण का फूँका बिगुल, गाने के साथ मारी एंट्री

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयप्रकाश नड्डा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मौजूदगी में पार्टी (भाजपा) के 2024 के लोकसभा चुनाव अभियान की आधिकारिक शुरुआत की है। भाजपा 2024 के लोकसभा चुनावों में ‘सपने नहीं हकीकत बुनते हैं, तभी तो सब मोदी को चुनते हैं’ नारे के साथ उतरेगी।

भाजपा का यह अभियान पार्टी के नवमतदाता सम्मेलन में शुरू किया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस दौरान पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं को संबोधित किया। इसी के साथ ही भाजपा के चुनावी अभियान के लिए आधिकारिक गाना भी रिलीज किया गया। यह गाना भी भाजपा के नारे पर ही आधारित है।

भाजपा द्वारा जारी किए गए लगभग 2 मिनट के इस गाने में पिछले 10 वर्षों में सरकार की उपलब्धियों और भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई के बारे में बताया गया है। इसमें अयोध्या में हुई राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का भी जिक्र है। इस गाने में भाजपा के सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में हुए कामों को हाइलाइट किया गया है।

गाने में वन्दे भारत ट्रेन, डिजिटल पेमेंट, नए हाइवे और अन्य विकास परियोजनाओं के भी दृश्य दिखाए गए हैं। इसके अलावा, गाने में भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत को प्रदर्शित किया है। इसके साथ ही नारी सशक्तिकरण, चंद्रयान-3 आदि का भी जिक्र किया गया है।

भाजपा का कहना है कि 2024 के चुनावी अभियान के लिए जो नारा चुना गया है, वह लोगों की भावनाओं को दर्शाता है। इसके साथ ही यह अभियान ‘मोदी की गारंटी’ वाले भाव के साथ फिट बैठता है। भाजपा का कहना है कि 2024 के लोकसभा चुनाव अभियान के लिए अपनाया गया यह नारा जनता के बीच से आया है।

गौरतलब है कि ‘सपने नहीं हकीकत बुनते हैं…’ का नारा भाजपा ने हाल ही में संपन्न हुए पाँच राज्यों के विधानसभा चुनावों में भी उपयोग किया था। भाजपा को छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में बहुमत भी हासिल हुआ था। नारे की सफलता को देखते हुए इसे अब आधिकारिक रूप से लोकसभा के अभियान के लिए चुन लिया गया है।

भाजपा का कहना है कि इस गाने के कुछ दिनों बाद वह एक नया गाना भी लॉन्च करेगी, जिसे जनता के बड़े वर्ग तक पहुँचाया जाएगा। इसका उद्देश्य जनता को यह बताना होगा कि प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में कितने क्षेत्रों में लक्ष्य की प्राप्ति हुई है और वादे पूरे किए गए हैं।

भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस अभियान को शुरू करने के दौरान कहा, “मोदी सरकार के प्रयासों ने करोड़ों सपनों को सच्चाई में बदला है। युवाओं को स्टार्टअप और सस्ते कर्ज से रोजगार मिले हैं तथा वो आत्मनिर्भर हुए हैं। किसान अब अपनी फसल अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेच सकते हैं।”

नड्डा ने आगे कहा, “किसानों को बीज से लेकर बाजार तक का सहारा मिला है…. बड़ी संख्या में गरीबों को गरीबी की रेखा से ऊपर उठाया गया है और वे अब सम्मान की जिन्दगी जी रहे हैं। अब लोगों में एक समृद्ध भारत की आशा है और उन्हें विश्वास है कि प्रधानमंत्री उनकी आशाओं के बारे में ना सिर्फ सुनते हैं बल्कि उन्हें पूरा भी करते हैं।”

प्रधानमंत्री मोदी आज गुरुवार (25 जनवरी 2024) को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में एक रैली को संबोधित करेंगे। यह भाजपा के चुनावी अभियान की पहली रैली होगी। यहाँ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत भाजपा के तमाम बड़े नेता मौजूद रहेंगे।

राहुल गाँधी पर दिल्ली पुलिस ने की है FIR, रेप पीड़िता की पहचान उजागर करने में नहीं मिली है कोई राहत: मीडिया को भ्रम फैलाने पर NCPCR अध्यक्ष ने लताड़ा

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी द्वारा एक रेप पीड़िता की पहचान उजागर करने के मामले में एफआईआर करने की माँग को लेकर एक याचिका दायर हुई थी। दिल्ली हाईकोर्ट में इस याचिका पर सुनवाई हुई और याचिका रद्द कर दी गई। हाईकोर्ट ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि दिल्ली पुलिस इस मामले पर पहले एफआईआर दर्ज कर चुकी है। हालाँकि मीडिया ने इस याचिका रद्द की खबर को ऐसे चलाया जैसे राहुल गाँधी को कितनी बड़ी राहत मिली हो। इस तरह की सेलेक्टिव रिपोर्टिंग पर एनसीपीसीआर अध्यक्ष ने मीडिया संस्थानों को भी लताड़ा।

दरअसल, हुआ ये कि एक्टिंग चीफ जस्टिस मनमोहन और जस्टिस मनमीत पीएस अरोड़ा 2021 की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसे सोशल एक्टिविस्ट सुरेश महादलेकर ने डाला था। इसमें 3 माँग की गई थी। पहली एनसीपीसीआर मामले पर एक्शन ले, दूसरी राहुल गाँधी अपना वो ट्वीट डिलीट करें, तीसरी राहुल गाँधी पर एफआईआर हो। अब चूँकि तीनों माँग पहले ही पूरी हो चुकी थी तो कोर्ट ने याचिका रद्द करना ही ठीक समझा।

गौर हो कि इस याचिका के रद्द होने से मामले में राहुल गाँधी पर कार्रवाई नहीं होगी… ऐसा कहीं नहीं कहा गया। एनसीपीसीआर माँग कर रहा है कि राहुल की इस मामले में गिरफ्तारी हो। इससे पहले आयोग की शिकायत पर राहुल गाँधी के खिलाफ 2021 में ही आईपीसी की धारा 228 एक के तहत एफआईआर हो गई थी। उन्होंने पीड़िता बच्ची के माता की वीडियो बनाकर अपने अकॉउंट पर डाला था जिसे बाद में डिलीट करने को कहा गया और वो मना करते रहे। जब मामला कोर्ट पहुँचा तो उन्होंने दबाव में उसे हटाया।

कोर्ट ने इन्हीं तीनों शर्तों को पूरा देख याचिका को रद्द किया। लेकिन मीडिया में छापा गया कि कोर्ट ने राहुल गाँधी को राहत दे दी है, उनके खिलाफ दर्ज याचिका खारिज हो गई है आदि- आदि। ऐसी खबरों पर जब राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो की नजर पड़ी तो उन्होंने इसके स्क्रीनशॉट लेकर अपने अकॉउंट पर साझा किए और तथ्यों के साथ इन मीडिया संस्थानों को खूब लताड़ा।

उन्होंने कहा सेलेक्टिव रिपोर्टिंग कर के नैरेटिव सेट करने के उदाहरण के रूप में टाइम्स ऑफ इंडिया और द हिंदू की यह खबरें पत्रकारिता के छात्रों को कोर्स में शामिल की जानी चाहिए। इसके बाद उन्होंने बिंदुवार तरीके से बताया कि कैसे राहुल गाँधी के खिलाफ हुई सुनवाई का मामला क्या है और मीडिया ने उसे क्या बताया है।

अपने ट्वीट में उन्होंने ये भी बताया कि नाबालिग की रेप और हत्या के मामले में राहुल गाँधी ने जहाँ उसकी पहचान उजागर की, वहीं अरविंद केजरीवाल ने राहुल को पॉक्सो से बचाने के लिए ये कह दिया कि बच्ची की मौत करंट लगने से हुई थी जबकि हकीकत में पुलिस एफआईआर में साफतौर पर लिखा है कि उसके साथ सामूहिक बलात्कार हुआ और फिर उसकी हत्या की गई।

स्कूटी पर आई तेलंगाना पुलिस, ABVP की महिला कार्यकर्ता को बाल पकड़कर सड़क पर घसीटा: BJP ने पूछा- क्या यही है राहुल गाँधी की मोहब्बत की दुकान

आगे-आगे एक लड़की भाग रही है। पीछे से स्कूटी पर बैठकर दो महिला पुलिसकर्मी आती हैं। लड़की का बाल पकड़कर सड़क पर घसीटने लगती है। वायरल वीडियो तेलंगाना का है। चलती स्कूटी से जिस लड़की को बाल पकड़कर घसीटा गया, वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की कार्यकर्ता है।

वीडियो वायरल होने के बाद राज्य की काॅन्ग्रेस सरकार सवालों में घिर गई है। बीजेपी ने कड़ी कार्रवाई की माँग करते हुए पूछा है कि क्या यही राहुल गाँधी की मोहब्बत की दुकान है? विपक्षी दल भारत राष्ट्र समिति की नेता के कविता ने भी इस घटना में शामिल पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की माँग की है।

पीड़ित एबीवीपी कार्यकर्ता हैदराबाद में बुधवार (24 जनवरी 2024) को हुए प्रदर्शन में शामिल थी। यह प्रदर्शन हाई कोर्ट निर्माण के लिए प्रोफेसर जयशंकर तेलंगाना स्टेट एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी की 100 एकड़ जमीन का आवंटन किए जाने के विरोध में था। पीड़िता भी इसी यूनिवर्सिटी की छात्र है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने 20 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी ले लिया था।

ABVP की महिला कार्यकर्ता का बाल खींचे जाने का वीडियो एक्स/ट्विटर पर शेयर करे हुए आंध्र प्रदेश बीजेपी के उपाध्यक्ष विष्णु वर्धन रेड्डी ने लिखा है, “तेलंगाना की कॉन्ग्रेस सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रही एबीवीपी की एक महिला कार्यकर्ता को पुलिस ने बाल पकड़कर घसीटा। क्या यह आपकी मोहब्बत की दुकान है? मिस्टर राहुल गाँधी। मैं दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग और WCD से इसमें दखल देने का अनुरोध करता हूँ।”

पोस्ट में उन्होंने केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और बीजेपी नेता और राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य खुशबू सुंदर को भी टैग किया है। वहीं विपक्षी पार्टी BRS की नेता के कविता ने तेलंगाना पुलिस से बगैर शर्त माफी की माँग की है। इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) से इस घटना में शामिल लोगों के खिलाफ तुरंत और सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया है।

वहीं राजेंद्र नगर पुलिस इंस्पेक्टर के मुताबिक महिला पुलिसकर्मियों का कहना है कि यह गलती से हुई थी। कथित तौर पर पीड़ित ने इस मामले में महिला पुलिसकर्मी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने से इनकार किया है।

निर्धन-वंचित वर्ग का आर्थिक समावेशन, स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभता, महिला सशक्तिकरण… रामराज्य का समसामयिक संस्करण है PM मोदी का ‘नव-कल्याणवाद’

22 जनवरी 2024 को हुए राम मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह को भारतीय इतिहास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और अद्वितीय घटना के रूप में देखा जाएगा। आगामी समारोह भारतीय जनमानस के वर्षों पुराने उद्घोष-“राम लला हम आएँगे, मंदिर वहीं बनाएँगे” को साकार करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जिन्होंने एक युवा स्वयंसेवक के रूप में अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का सपना देखा था; एक लोकप्रिय विश्वनेता के रूप में उसे साकार कर दिए। उनका यह कार्य अविचलित आस्था और परम् समर्पण का अनुपम उदाहरण है। यह उनके अडिग संकल्प के साथ-साथ असंख्य भारतीयों की दृढ़ प्रतिज्ञा, अनवरत संघर्ष और असीम समर्पण का भी प्रमाण है।

राम मंदिर के पुनर्निर्माण के संघर्ष का इतिहास सुदीर्घ है। अंततः 2019 में इसका न्यायपूर्ण पटाक्षेप हुआ। भारत के उच्चतम न्यायालय ने इस बहुचर्चित और अत्यंत विवादित बना दिए गए विषय पर एक सुचिंतित और संतुलित निर्णय देते हुए तथाकथित विवादित स्थल पर राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। उच्चतम न्यायालय के इस निर्णय ने आस्था और न्याय की उसकी गहरी समझ को प्रतिबिंबित किया।

यह मुद्दा लंबे समय से भारतीय समाज में वैमनस्य और विभाजन का कारक बना दिया गया था। सदियों से भारतवासियों के लिए आस्था और भावना का विषय रहे मर्यादा पुरुषोत्तम राम और उनकी जन्मभूमि अयोध्या में स्थित उनके मंदिर को अकारण ही पांथिक ध्रुवीकरण और राजनीति का विषय बना दिया गया था। अंततः करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों की आस्था, त्याग और बलिदान की विजय हुई। राम मंदिर निर्माण की सर्व-सम्मति भारतीय समाज के एकीकरण, पारस्परिक समझ और सौहार्द की पूर्वपीठिका है। यह जटिल समस्या के समाधान से निर्मित समरस साहचर्य के समतल मार्ग का प्रशस्तिकरण है।

निश्चय ही, 22 जनवरी 2024 को उद्घाटित हुआ राम मंदिर पाँच सौ वर्ष की संघर्ष यात्रा की परमसिद्धि और परमप्राप्य है। यह मंदिर सिर्फ हिंदुओं की उपासना/आराधना का केंद्र नहीं, अपितु अखिल भारत की सामूहिक आकांक्षाओं और आध्यात्मिक चेतना का साकार रूप है। यह भारत की नवोन्मेषी आत्मा का विराट स्वरूप है। इसका पुनर्निर्माण विरासत और विकास के अद्भुत संगम को दर्शाता है। यह राष्ट्र की आध्यात्मिक उन्नति और भौतिक प्रगति का प्रतीक-स्थल और प्रेरणा-स्तम्भ है। भारत की स्पृहणीय सनातन संस्कृति का संरक्षण-केंद्र यह परम प्राचीन स्मारक सामाजिक संगठन और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की उत्प्रेरणा है। यह मंदिर सनातन संस्कृति के अविच्छिन्न सिद्धांतों और मानव मूल्यों की अभिव्यक्ति है।

यह विश्व की प्राचीनतम और सर्वाधिक प्रगत मानवीय संस्कृति; सनातन संस्कृति का सामूहिक और सार्वजनिक उद्घोष है। यह मंदिर भारतीयता और भारत बोध का प्रतिनिधित्व करता है। गौरवशाली और वैभवपूर्ण अतीत का प्रतिनिधित्व करने वाला यह राम मंदिर विदेशी आक्रांताओं और विदेशी पराधीनता से मुक्ति का स्वास्तिक-चिह्न है।

‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ और ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः…’ की उदात्त भावना को समाहित और संपोषित करने वाला यह मंदिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए सांस्कृतिक पर्यटन के अद्वितीय केंद्र के रूप में विकसित होगा। बहु-विध दुःख-तापों से हाँफते-काँपते विश्व-समुदाय के लिए राम और रामराज्य एक अनुकरणीय आदर्श प्रस्तुत करते हैं।

पृथ्वी को ‘निसिचर हीन’ करना लोकनायक राम की केंद्रीय प्रतिज्ञा है। इस ध्येय-प्राप्ति के लिए उन्होंने दीन-दुखी, निर्बल और निर्धन का साथ लिया/दिया, उन्हें संगठित किया। उनके सोए/खोए हुए आत्मगौरव और आत्मविश्वास को जागृत किया।

वे मौलिक शक्ति-संधान करके आततायी और उत्पीड़कों का संहार करते हैं। वे शोषित-उत्पीड़ित और उपेक्षित-वंचित समाज के सखा, सहयोगी और सुखदाता हैं। लोकमर्यादा, लोककल्याण और लोकतांत्रिक मूल्यों के परम आगार राम का जीवन और चरित्र कोटि-कोटि भारतवासियों को नैतिक सम्बल देता रहा है। उनकी नैतिक आभा भारतीयों के जीवन को निरन्तर प्रकाशित करती रही है। राम जैसी चारित्रिक उज्ज्वलता विश्व इतिहास में दुर्लभ है। इसी प्रकार रामराज्य समता, समरसता, बंधुता के साथ-साथ सतत और संतुलित विकास का अनुकरणीय उदाहरण है।

“दैहिक, दैविक, भौतिक तापा, रामराज काहुहि नहिं व्यापा…” और “नहिं दरिद्र, कोई दुखी न दीना, नहिं कोई अबुध न लक्षणहीना…” रामराज्य की केंद्रीय विशेषता है। ‘राम राज्य’ एक यूटोपिया नहीं, बल्कि ऐतिहासिक अनुभव है। यह आदर्श राज्य का एक ऐसा अनोखा उदाहरण है जो आधुनिक कल्याणकारी और लोकतांत्रिक राज्य के लिए प्रेरणा और प्रतिस्पर्धा का विषय है।

संतकवि तुलसीदास द्वारा विरचित ‘रामचरितमानस’ महाकाव्य में रामराज्य का विशद वर्णन/चित्रण है। तुलसी द्वारा खींचे गए इस मानचित्र में उपस्थित समाज पीड़ामुक्त और प्रेमयुक्त है। दीन-हीन को संरक्षण और सहायता प्राप्त होती है। नैतिकता और परदुःखकातरता पर आधारित इस राज्य में ‘काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार’ के लिए सार्वजनिक जीवन में कोई स्थान नहीं है। सामाजिक जीवन सुख, शांति और समृद्धि से ओतप्रोत और आप्लावित है।

रामराज्य की इन विशेषताओं के कारण ही महात्मा गाँधी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जैसे महापुरुष उसे स्वातंत्र्योत्तर भारत के शासन-तंत्र के अनुकरणीय आदर्श के रूप में पहचानते और प्रस्तावित करते हैं। संभवतः इसी से प्रेरित और प्रभावित होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सनातन सांस्कृतिक मूल्यों और आधुनिक लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनूठे संगम पर आधारित शासन की स्थापना की है।

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा आविष्कृत शासन-सूत्र को “नव-कल्याणवाद” का नाम दिया जा सकता है। यह रामराज्य का समसामयिक संस्करण है। आध्यात्मिक अभिप्रेरणा से संचालित समावेशी विकास केंद्रित सुशासन इसकी आत्मा है। जन-जन की भागीदारी और सर्वजनहिताय पर आधारित उनके शासन का ध्येय-मंत्र ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, और सबका प्रयास’ है।

भारत में विदेह जनक, मर्यादा पुरुषोत्तम राम, उनके प्रिय अनुज भरत और छत्रपति शिवाजी जैसे निर्लिप्त और निस्पृह तपस्वी राजाओं की सुदीर्घ परम्परा रही है। ऐसे राजाओं को ‘राजर्षि’ की महनीय उपाधि से विभूषित किया जाता है। निष्काम कर्मयोगी मोदी भी भारत की उसी गौरवशाली परंपरा के ध्वजवाहक हैं।

उनकी प्रमुख पहलों में से एक, प्रधानमंत्री जन धन योजना है, जो एक महत्वपूर्ण वित्तीय समावेशन कार्यक्रम है। यह निर्धन-वर्ग के आर्थिक समावेशन और सशक्तिकरण की भावना का प्रकटीकरण है। इस योजना के तहत अभियान चलाकर बैंक सेवाओं से वंचित बहुत बड़ी आबादी की बैंकिंग तक पहुँच सुनिश्चित की गई है। इसी प्रकार आयुष्मान भारत योजना आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को स्वास्थ्य सुविधा सुनिश्चित करती है। ‘राम राज्य’ के सिद्धांत के अनुरूप इसका ध्येय सभी के लिए उत्तम स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभता है। स्वच्छ भारत अभियान, जिसका मुख्य उद्देश्य बहुआयामी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण है।

इनके अतिरिक्त, वंचित वर्गों के लिए घर उपलब्ध कराने वाली प्रधानमंत्री आवास योजना, ग्रामीण विद्युतीकरण पर केंद्रित सौभाग्य योजना, कृषकों के सहयोग और संरक्षण पर आधारित पीएम किसान योजना, घर-घर मीठा और स्वच्छ पेयजल पहुँचाने वाली हर घर जल योजना आदि उल्लेखनीय हैं। इन सभी योजनाओं के लाभार्थी समाज के चिर-उपेक्षित और चिर-वंचित वर्ग हैं। इनमें दलित, वनवासी, पिछड़े, अल्पसंख्यक, महिलाएँ, किसान और ग्रामीण आदि सर्वप्रमुख हैं।

उज्ज्वला योजना, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान और नारी शक्ति वंदन अधिनियम आदि महिला सशक्तिकरण की दिशा में उठाए गए युगान्तकारी कदम हैं। ‘मेक इन इंडिया’, ‘स्किल इंडिया’, और ‘स्टार्टअप इंडिया’ जैसी पहलें आत्मनिर्भरता और उद्यमशीलता को प्रोत्साहित करती हैं। कौशल विकास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा आत्मनिर्भरता की कुंजी है। डिजिटल भारत अभियान सुगमता, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के उन्मूलन पर केंद्रित है। ये सभी योजनाएँ राम राज्य की भावना का ही सगुण साकार रूप हैं।

पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में पनपी मुफ्त रेवड़ियाँ बाँटने की राजनीतिक संस्कृति नागरिकों को पराश्रित और परजीवी बना रही हैं। उसके बरक्स मोदी सरकार द्वारा संचालित इन तमाम योजनाओं ने आम भारतीय के जीवन में सुख, सुविधा और सहूलियत पैदा की है। ये आखिरी पायदान पर खड़े नागरिकों की चिंता/कल्याणकामना से प्रेरित हैं। ये उनकी आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की कारक हैं।

समग्रतः ये प्रयास एक ऐसे समाज के निर्माण के संकल्प को दर्शाते हैं, जहाँ न्याय, कल्याण और समृद्धि सिर्फ सिद्धांत नहीं, बल्कि यथार्थ हैं और उनकी पहुँच और प्राप्ति सबके लिए समान रूप से है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ये नव-कल्याणकारी नीतियाँ समकालीन भारत में ‘रामराज्य’ के स्वप्न को साकार करने का प्रयत्न हैं। ये नीतियाँ समाज में प्रत्येक स्तर पर समता, समरसता, एकता, एकात्मता, सतत विकास और आर्थिक समावेशन को संभव कर रही हैं। राम मंदिर का पुनर्निर्माण एक धार्मिक अनुष्ठान मात्र नहीं, अपितु यह आयोजन सांस्कृतिक स्वाधीनता और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण के नए युग का सूत्रपात और शंखनाद है।

यह भारत का अमृत काल है। देशभर में विकसित भारत संकल्प यात्राएँ निकालकर 2047 तक भारत को विश्वशक्ति और विश्वगुरु बनाने के ध्येय के साथ संगठित और समर्पित होने के लिए देशवासियों का आह्वान किया जा रहा है। जन-जन के आह्वान के साथ खड़ा किया गया यह आंदोलन रामराज्य के स्वप्न को साकार करने की सार्थक पहल है।

6 बार की वर्ल्ड चैंपियन मैरी कॉम को मीडिया ने कर दिया ‘रिटायर’, बोलीं महिला मुक्केबाज- मैंने अभी संन्यास नहीं लिया, बयान को गलत तरीके से पेश किया

भारत की सबसे लोकप्रिय मुक्केबाज मैरी कॉम की संन्यास की खबरें गलत थीं। उन्होंने खबरों का खंडन करते हुए कहा है कि मीडिया ने उनके बयान को गलत तरीक से पेश किया। उन्होंने अभी संन्यास नहीं लिया है। अगर वह ऐसा करेंगी तो खुद मीडिया में आकर इस बारे में बता देंगी।

दरअसल, बुधवार (24 जनवरी, 2023) को मैरी कॉम ने एक इवेंट में खेल जगत में तय की गई उम्र सीमा का जिक्र करते हुए कहा था, “मुझमें अभी भी भूख है, लेकिन दुर्भाग्य से उम्र सीमा तय होने के कारण मैं किसी भी टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले सकती। मैं ज्यादा से ज्यादा मैच खेलना चाहती हूँ, लेकिन मुझे (आयु सीमा के कारण) खेल छोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है। मुझे रिटायर होना है। मैंने अपने जीवन में सब कुछ हासिल किया है।”

इसी के बाद मीडिया ने उनके संन्यास की खबर चलाईं। हर जगह उनके रिटायरमेंट की बात शुरू हो गई, जिन्हें सुनने के बाद मैरी ने कहा, “मैं 24 जनवरी को डिब्रूगढ़ में एक स्कूल के कार्यक्रम में हिस्सा लेने गई थी। तब मैं बच्चों को प्रेरित कर रही थी। तब मैंने कहा था- मुझ में अभी भी खेलों में उपलब्धि हासिल करने की भूख है, लेकिन ओलंपिक में उम्र सीमा की वजह से भाग नहीं ले सकती। हालाँकि, मैं खेलना जारी रख सकती हूँ। मैं अभी भी फिटनेस पर ध्यान दे रही हूँ और जब भी संन्यास लूँगी तो सभी को इसकी जानकारी दे दूँगी।”

बता दें कि मैरी कॉम पहली महिला मुक्केबाज हैं जिन्होंने विश्व कप में छह बार स्वर्ण पदक जीते हैं। वह 2005, 2006, 2008 और 2010 के संस्करणों में विश्व चैंपियन बनीं। इसके बाद वो दो जुड़वाँ बच्चों की माँ बनीं। फिर 2012 में उन्होंने वापसी की और ओलंपिक में फिर पदक जीता। इसके बाद 2018 में विश्व चैंपियनशिप जीत अपने नाम नया रिकॉर्ड बनाया। उनके पास विश्वचैंपियनशिप के 8 पदक हैं, जितने किसी भी पुरुष या महिला मुक्केबाज के पास नहीं है।

मुस्लिम युवक ने ओम लिखे भगवा ध्वज को पैंट के अंदर डाला, रील बनाकर भावनाओं को भड़काया: ग्रामीणों ने नंगा कर जुलूस निकाला, पीटा

तेलंगाना के संगारेड्डी में एक मुस्लिम युवक ने ओम लिखे भगवा झंडे को अपमानित करने वाली रील बनाई। रील वायरल होने के बाद ग्रामीणों ने उसकी धुनाई कर दी और नग्न कर परेड निकाली। ग्रामीणों ने युवक के खिलाफ भावनाओं को ठेस पहुँचाने की शिकायत भी दर्ज कराई।

पुलिस ने IPC की धारा 153(ए), 295-ए, 505(2) के तहत मुस्लिम युवक के खिलाफ केस दर्ज किया है। वहीं पिटाई के बाद रील बनाने वाले मुस्लिम युवक ने भी ग्रामीणों के खिलाफ मारपीट की शिकायत पुलिस को दी है। इस पर पुलिस ने IPC धारा 341, 323, 505(2) और 506 के तहत केस दर्ज किया। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

वायरल रील में मुस्लिम युवक अपमानजनक तरीके से अपनी पैंट के अंदर ‘ओम’ लिखा भगवा झंडा डालता हुआ दिखाई दे रहा है। वह मुस्लिम होने की धौंस भी दिखा रहा है।

वीडियो में ओम लिखा झंडा अपने हाथ में लिए हुए युवक कहता है, “तुम्हारी औकात हमारे पैरों की धूल और हम मुसलमान है।” इसके बाद भगवा झंडे को अपनी पैंट के अंदर डालते हुए वह कहता है, “ये मत भूल की मुसलमान एक महान हस्ती, सामान घुसेड़ देते हैं जबरदस्ती।” मुस्लिम युवक की रील में आगे समझ आ गया जानी, चल हो जा पानी कहता है। रील के बैकग्राउंड में ‘हम बाप है तु्म्हारे, तुम बेटे हो हमारे, हमसे डरा करो’ गाना बज रहा है।

रील वायरल होने के बाद नाराज ग्रामीणों ने आरोपित मुस्लिम युवक को खोज कर उसकी पिटाई कर दी। कथित तौर पर उसे नंगा घुमाया गया और उसकी पिटाई की गई। उसके निजी अंगों को आग लगाने की कोशिश भी हुई। यह रील कब बनाया गया यह स्पष्ट नहीं है।

बताते चलें कि ये पहली बार नहीं है जब मुस्लिमों ने हिंदू भावनाओं को आहत करते हुए हिंदू धर्म के प्रतीकों का अपमान किया है। इससे पहले भी हिंदू मूर्तियों को तोड़ने, देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणी करने के कई मामले सामने आ चुके हैं।