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स्कूटी पर आई तेलंगाना पुलिस, ABVP की महिला कार्यकर्ता को बाल पकड़कर सड़क पर घसीटा: BJP ने पूछा- क्या यही है राहुल गाँधी की मोहब्बत की दुकान

आगे-आगे एक लड़की भाग रही है। पीछे से स्कूटी पर बैठकर दो महिला पुलिसकर्मी आती हैं। लड़की का बाल पकड़कर सड़क पर घसीटने लगती है। वायरल वीडियो तेलंगाना का है। चलती स्कूटी से जिस लड़की को बाल पकड़कर घसीटा गया, वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की कार्यकर्ता है।

वीडियो वायरल होने के बाद राज्य की काॅन्ग्रेस सरकार सवालों में घिर गई है। बीजेपी ने कड़ी कार्रवाई की माँग करते हुए पूछा है कि क्या यही राहुल गाँधी की मोहब्बत की दुकान है? विपक्षी दल भारत राष्ट्र समिति की नेता के कविता ने भी इस घटना में शामिल पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की माँग की है।

पीड़ित एबीवीपी कार्यकर्ता हैदराबाद में बुधवार (24 जनवरी 2024) को हुए प्रदर्शन में शामिल थी। यह प्रदर्शन हाई कोर्ट निर्माण के लिए प्रोफेसर जयशंकर तेलंगाना स्टेट एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी की 100 एकड़ जमीन का आवंटन किए जाने के विरोध में था। पीड़िता भी इसी यूनिवर्सिटी की छात्र है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने 20 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी ले लिया था।

ABVP की महिला कार्यकर्ता का बाल खींचे जाने का वीडियो एक्स/ट्विटर पर शेयर करे हुए आंध्र प्रदेश बीजेपी के उपाध्यक्ष विष्णु वर्धन रेड्डी ने लिखा है, “तेलंगाना की कॉन्ग्रेस सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रही एबीवीपी की एक महिला कार्यकर्ता को पुलिस ने बाल पकड़कर घसीटा। क्या यह आपकी मोहब्बत की दुकान है? मिस्टर राहुल गाँधी। मैं दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग और WCD से इसमें दखल देने का अनुरोध करता हूँ।”

पोस्ट में उन्होंने केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और बीजेपी नेता और राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य खुशबू सुंदर को भी टैग किया है। वहीं विपक्षी पार्टी BRS की नेता के कविता ने तेलंगाना पुलिस से बगैर शर्त माफी की माँग की है। इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) से इस घटना में शामिल लोगों के खिलाफ तुरंत और सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया है।

वहीं राजेंद्र नगर पुलिस इंस्पेक्टर के मुताबिक महिला पुलिसकर्मियों का कहना है कि यह गलती से हुई थी। कथित तौर पर पीड़ित ने इस मामले में महिला पुलिसकर्मी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने से इनकार किया है।

निर्धन-वंचित वर्ग का आर्थिक समावेशन, स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभता, महिला सशक्तिकरण… रामराज्य का समसामयिक संस्करण है PM मोदी का ‘नव-कल्याणवाद’

22 जनवरी 2024 को हुए राम मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह को भारतीय इतिहास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और अद्वितीय घटना के रूप में देखा जाएगा। आगामी समारोह भारतीय जनमानस के वर्षों पुराने उद्घोष-“राम लला हम आएँगे, मंदिर वहीं बनाएँगे” को साकार करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जिन्होंने एक युवा स्वयंसेवक के रूप में अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का सपना देखा था; एक लोकप्रिय विश्वनेता के रूप में उसे साकार कर दिए। उनका यह कार्य अविचलित आस्था और परम् समर्पण का अनुपम उदाहरण है। यह उनके अडिग संकल्प के साथ-साथ असंख्य भारतीयों की दृढ़ प्रतिज्ञा, अनवरत संघर्ष और असीम समर्पण का भी प्रमाण है।

राम मंदिर के पुनर्निर्माण के संघर्ष का इतिहास सुदीर्घ है। अंततः 2019 में इसका न्यायपूर्ण पटाक्षेप हुआ। भारत के उच्चतम न्यायालय ने इस बहुचर्चित और अत्यंत विवादित बना दिए गए विषय पर एक सुचिंतित और संतुलित निर्णय देते हुए तथाकथित विवादित स्थल पर राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। उच्चतम न्यायालय के इस निर्णय ने आस्था और न्याय की उसकी गहरी समझ को प्रतिबिंबित किया।

यह मुद्दा लंबे समय से भारतीय समाज में वैमनस्य और विभाजन का कारक बना दिया गया था। सदियों से भारतवासियों के लिए आस्था और भावना का विषय रहे मर्यादा पुरुषोत्तम राम और उनकी जन्मभूमि अयोध्या में स्थित उनके मंदिर को अकारण ही पांथिक ध्रुवीकरण और राजनीति का विषय बना दिया गया था। अंततः करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों की आस्था, त्याग और बलिदान की विजय हुई। राम मंदिर निर्माण की सर्व-सम्मति भारतीय समाज के एकीकरण, पारस्परिक समझ और सौहार्द की पूर्वपीठिका है। यह जटिल समस्या के समाधान से निर्मित समरस साहचर्य के समतल मार्ग का प्रशस्तिकरण है।

निश्चय ही, 22 जनवरी 2024 को उद्घाटित हुआ राम मंदिर पाँच सौ वर्ष की संघर्ष यात्रा की परमसिद्धि और परमप्राप्य है। यह मंदिर सिर्फ हिंदुओं की उपासना/आराधना का केंद्र नहीं, अपितु अखिल भारत की सामूहिक आकांक्षाओं और आध्यात्मिक चेतना का साकार रूप है। यह भारत की नवोन्मेषी आत्मा का विराट स्वरूप है। इसका पुनर्निर्माण विरासत और विकास के अद्भुत संगम को दर्शाता है। यह राष्ट्र की आध्यात्मिक उन्नति और भौतिक प्रगति का प्रतीक-स्थल और प्रेरणा-स्तम्भ है। भारत की स्पृहणीय सनातन संस्कृति का संरक्षण-केंद्र यह परम प्राचीन स्मारक सामाजिक संगठन और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की उत्प्रेरणा है। यह मंदिर सनातन संस्कृति के अविच्छिन्न सिद्धांतों और मानव मूल्यों की अभिव्यक्ति है।

यह विश्व की प्राचीनतम और सर्वाधिक प्रगत मानवीय संस्कृति; सनातन संस्कृति का सामूहिक और सार्वजनिक उद्घोष है। यह मंदिर भारतीयता और भारत बोध का प्रतिनिधित्व करता है। गौरवशाली और वैभवपूर्ण अतीत का प्रतिनिधित्व करने वाला यह राम मंदिर विदेशी आक्रांताओं और विदेशी पराधीनता से मुक्ति का स्वास्तिक-चिह्न है।

‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ और ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः…’ की उदात्त भावना को समाहित और संपोषित करने वाला यह मंदिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए सांस्कृतिक पर्यटन के अद्वितीय केंद्र के रूप में विकसित होगा। बहु-विध दुःख-तापों से हाँफते-काँपते विश्व-समुदाय के लिए राम और रामराज्य एक अनुकरणीय आदर्श प्रस्तुत करते हैं।

पृथ्वी को ‘निसिचर हीन’ करना लोकनायक राम की केंद्रीय प्रतिज्ञा है। इस ध्येय-प्राप्ति के लिए उन्होंने दीन-दुखी, निर्बल और निर्धन का साथ लिया/दिया, उन्हें संगठित किया। उनके सोए/खोए हुए आत्मगौरव और आत्मविश्वास को जागृत किया।

वे मौलिक शक्ति-संधान करके आततायी और उत्पीड़कों का संहार करते हैं। वे शोषित-उत्पीड़ित और उपेक्षित-वंचित समाज के सखा, सहयोगी और सुखदाता हैं। लोकमर्यादा, लोककल्याण और लोकतांत्रिक मूल्यों के परम आगार राम का जीवन और चरित्र कोटि-कोटि भारतवासियों को नैतिक सम्बल देता रहा है। उनकी नैतिक आभा भारतीयों के जीवन को निरन्तर प्रकाशित करती रही है। राम जैसी चारित्रिक उज्ज्वलता विश्व इतिहास में दुर्लभ है। इसी प्रकार रामराज्य समता, समरसता, बंधुता के साथ-साथ सतत और संतुलित विकास का अनुकरणीय उदाहरण है।

“दैहिक, दैविक, भौतिक तापा, रामराज काहुहि नहिं व्यापा…” और “नहिं दरिद्र, कोई दुखी न दीना, नहिं कोई अबुध न लक्षणहीना…” रामराज्य की केंद्रीय विशेषता है। ‘राम राज्य’ एक यूटोपिया नहीं, बल्कि ऐतिहासिक अनुभव है। यह आदर्श राज्य का एक ऐसा अनोखा उदाहरण है जो आधुनिक कल्याणकारी और लोकतांत्रिक राज्य के लिए प्रेरणा और प्रतिस्पर्धा का विषय है।

संतकवि तुलसीदास द्वारा विरचित ‘रामचरितमानस’ महाकाव्य में रामराज्य का विशद वर्णन/चित्रण है। तुलसी द्वारा खींचे गए इस मानचित्र में उपस्थित समाज पीड़ामुक्त और प्रेमयुक्त है। दीन-हीन को संरक्षण और सहायता प्राप्त होती है। नैतिकता और परदुःखकातरता पर आधारित इस राज्य में ‘काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार’ के लिए सार्वजनिक जीवन में कोई स्थान नहीं है। सामाजिक जीवन सुख, शांति और समृद्धि से ओतप्रोत और आप्लावित है।

रामराज्य की इन विशेषताओं के कारण ही महात्मा गाँधी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जैसे महापुरुष उसे स्वातंत्र्योत्तर भारत के शासन-तंत्र के अनुकरणीय आदर्श के रूप में पहचानते और प्रस्तावित करते हैं। संभवतः इसी से प्रेरित और प्रभावित होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सनातन सांस्कृतिक मूल्यों और आधुनिक लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनूठे संगम पर आधारित शासन की स्थापना की है।

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा आविष्कृत शासन-सूत्र को “नव-कल्याणवाद” का नाम दिया जा सकता है। यह रामराज्य का समसामयिक संस्करण है। आध्यात्मिक अभिप्रेरणा से संचालित समावेशी विकास केंद्रित सुशासन इसकी आत्मा है। जन-जन की भागीदारी और सर्वजनहिताय पर आधारित उनके शासन का ध्येय-मंत्र ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, और सबका प्रयास’ है।

भारत में विदेह जनक, मर्यादा पुरुषोत्तम राम, उनके प्रिय अनुज भरत और छत्रपति शिवाजी जैसे निर्लिप्त और निस्पृह तपस्वी राजाओं की सुदीर्घ परम्परा रही है। ऐसे राजाओं को ‘राजर्षि’ की महनीय उपाधि से विभूषित किया जाता है। निष्काम कर्मयोगी मोदी भी भारत की उसी गौरवशाली परंपरा के ध्वजवाहक हैं।

उनकी प्रमुख पहलों में से एक, प्रधानमंत्री जन धन योजना है, जो एक महत्वपूर्ण वित्तीय समावेशन कार्यक्रम है। यह निर्धन-वर्ग के आर्थिक समावेशन और सशक्तिकरण की भावना का प्रकटीकरण है। इस योजना के तहत अभियान चलाकर बैंक सेवाओं से वंचित बहुत बड़ी आबादी की बैंकिंग तक पहुँच सुनिश्चित की गई है। इसी प्रकार आयुष्मान भारत योजना आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को स्वास्थ्य सुविधा सुनिश्चित करती है। ‘राम राज्य’ के सिद्धांत के अनुरूप इसका ध्येय सभी के लिए उत्तम स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभता है। स्वच्छ भारत अभियान, जिसका मुख्य उद्देश्य बहुआयामी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण है।

इनके अतिरिक्त, वंचित वर्गों के लिए घर उपलब्ध कराने वाली प्रधानमंत्री आवास योजना, ग्रामीण विद्युतीकरण पर केंद्रित सौभाग्य योजना, कृषकों के सहयोग और संरक्षण पर आधारित पीएम किसान योजना, घर-घर मीठा और स्वच्छ पेयजल पहुँचाने वाली हर घर जल योजना आदि उल्लेखनीय हैं। इन सभी योजनाओं के लाभार्थी समाज के चिर-उपेक्षित और चिर-वंचित वर्ग हैं। इनमें दलित, वनवासी, पिछड़े, अल्पसंख्यक, महिलाएँ, किसान और ग्रामीण आदि सर्वप्रमुख हैं।

उज्ज्वला योजना, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान और नारी शक्ति वंदन अधिनियम आदि महिला सशक्तिकरण की दिशा में उठाए गए युगान्तकारी कदम हैं। ‘मेक इन इंडिया’, ‘स्किल इंडिया’, और ‘स्टार्टअप इंडिया’ जैसी पहलें आत्मनिर्भरता और उद्यमशीलता को प्रोत्साहित करती हैं। कौशल विकास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा आत्मनिर्भरता की कुंजी है। डिजिटल भारत अभियान सुगमता, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के उन्मूलन पर केंद्रित है। ये सभी योजनाएँ राम राज्य की भावना का ही सगुण साकार रूप हैं।

पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में पनपी मुफ्त रेवड़ियाँ बाँटने की राजनीतिक संस्कृति नागरिकों को पराश्रित और परजीवी बना रही हैं। उसके बरक्स मोदी सरकार द्वारा संचालित इन तमाम योजनाओं ने आम भारतीय के जीवन में सुख, सुविधा और सहूलियत पैदा की है। ये आखिरी पायदान पर खड़े नागरिकों की चिंता/कल्याणकामना से प्रेरित हैं। ये उनकी आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की कारक हैं।

समग्रतः ये प्रयास एक ऐसे समाज के निर्माण के संकल्प को दर्शाते हैं, जहाँ न्याय, कल्याण और समृद्धि सिर्फ सिद्धांत नहीं, बल्कि यथार्थ हैं और उनकी पहुँच और प्राप्ति सबके लिए समान रूप से है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ये नव-कल्याणकारी नीतियाँ समकालीन भारत में ‘रामराज्य’ के स्वप्न को साकार करने का प्रयत्न हैं। ये नीतियाँ समाज में प्रत्येक स्तर पर समता, समरसता, एकता, एकात्मता, सतत विकास और आर्थिक समावेशन को संभव कर रही हैं। राम मंदिर का पुनर्निर्माण एक धार्मिक अनुष्ठान मात्र नहीं, अपितु यह आयोजन सांस्कृतिक स्वाधीनता और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण के नए युग का सूत्रपात और शंखनाद है।

यह भारत का अमृत काल है। देशभर में विकसित भारत संकल्प यात्राएँ निकालकर 2047 तक भारत को विश्वशक्ति और विश्वगुरु बनाने के ध्येय के साथ संगठित और समर्पित होने के लिए देशवासियों का आह्वान किया जा रहा है। जन-जन के आह्वान के साथ खड़ा किया गया यह आंदोलन रामराज्य के स्वप्न को साकार करने की सार्थक पहल है।

6 बार की वर्ल्ड चैंपियन मैरी कॉम को मीडिया ने कर दिया ‘रिटायर’, बोलीं महिला मुक्केबाज- मैंने अभी संन्यास नहीं लिया, बयान को गलत तरीके से पेश किया

भारत की सबसे लोकप्रिय मुक्केबाज मैरी कॉम की संन्यास की खबरें गलत थीं। उन्होंने खबरों का खंडन करते हुए कहा है कि मीडिया ने उनके बयान को गलत तरीक से पेश किया। उन्होंने अभी संन्यास नहीं लिया है। अगर वह ऐसा करेंगी तो खुद मीडिया में आकर इस बारे में बता देंगी।

दरअसल, बुधवार (24 जनवरी, 2023) को मैरी कॉम ने एक इवेंट में खेल जगत में तय की गई उम्र सीमा का जिक्र करते हुए कहा था, “मुझमें अभी भी भूख है, लेकिन दुर्भाग्य से उम्र सीमा तय होने के कारण मैं किसी भी टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले सकती। मैं ज्यादा से ज्यादा मैच खेलना चाहती हूँ, लेकिन मुझे (आयु सीमा के कारण) खेल छोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है। मुझे रिटायर होना है। मैंने अपने जीवन में सब कुछ हासिल किया है।”

इसी के बाद मीडिया ने उनके संन्यास की खबर चलाईं। हर जगह उनके रिटायरमेंट की बात शुरू हो गई, जिन्हें सुनने के बाद मैरी ने कहा, “मैं 24 जनवरी को डिब्रूगढ़ में एक स्कूल के कार्यक्रम में हिस्सा लेने गई थी। तब मैं बच्चों को प्रेरित कर रही थी। तब मैंने कहा था- मुझ में अभी भी खेलों में उपलब्धि हासिल करने की भूख है, लेकिन ओलंपिक में उम्र सीमा की वजह से भाग नहीं ले सकती। हालाँकि, मैं खेलना जारी रख सकती हूँ। मैं अभी भी फिटनेस पर ध्यान दे रही हूँ और जब भी संन्यास लूँगी तो सभी को इसकी जानकारी दे दूँगी।”

बता दें कि मैरी कॉम पहली महिला मुक्केबाज हैं जिन्होंने विश्व कप में छह बार स्वर्ण पदक जीते हैं। वह 2005, 2006, 2008 और 2010 के संस्करणों में विश्व चैंपियन बनीं। इसके बाद वो दो जुड़वाँ बच्चों की माँ बनीं। फिर 2012 में उन्होंने वापसी की और ओलंपिक में फिर पदक जीता। इसके बाद 2018 में विश्व चैंपियनशिप जीत अपने नाम नया रिकॉर्ड बनाया। उनके पास विश्वचैंपियनशिप के 8 पदक हैं, जितने किसी भी पुरुष या महिला मुक्केबाज के पास नहीं है।

मुस्लिम युवक ने ओम लिखे भगवा ध्वज को पैंट के अंदर डाला, रील बनाकर भावनाओं को भड़काया: ग्रामीणों ने नंगा कर जुलूस निकाला, पीटा

तेलंगाना के संगारेड्डी में एक मुस्लिम युवक ने ओम लिखे भगवा झंडे को अपमानित करने वाली रील बनाई। रील वायरल होने के बाद ग्रामीणों ने उसकी धुनाई कर दी और नग्न कर परेड निकाली। ग्रामीणों ने युवक के खिलाफ भावनाओं को ठेस पहुँचाने की शिकायत भी दर्ज कराई।

पुलिस ने IPC की धारा 153(ए), 295-ए, 505(2) के तहत मुस्लिम युवक के खिलाफ केस दर्ज किया है। वहीं पिटाई के बाद रील बनाने वाले मुस्लिम युवक ने भी ग्रामीणों के खिलाफ मारपीट की शिकायत पुलिस को दी है। इस पर पुलिस ने IPC धारा 341, 323, 505(2) और 506 के तहत केस दर्ज किया। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

वायरल रील में मुस्लिम युवक अपमानजनक तरीके से अपनी पैंट के अंदर ‘ओम’ लिखा भगवा झंडा डालता हुआ दिखाई दे रहा है। वह मुस्लिम होने की धौंस भी दिखा रहा है।

वीडियो में ओम लिखा झंडा अपने हाथ में लिए हुए युवक कहता है, “तुम्हारी औकात हमारे पैरों की धूल और हम मुसलमान है।” इसके बाद भगवा झंडे को अपनी पैंट के अंदर डालते हुए वह कहता है, “ये मत भूल की मुसलमान एक महान हस्ती, सामान घुसेड़ देते हैं जबरदस्ती।” मुस्लिम युवक की रील में आगे समझ आ गया जानी, चल हो जा पानी कहता है। रील के बैकग्राउंड में ‘हम बाप है तु्म्हारे, तुम बेटे हो हमारे, हमसे डरा करो’ गाना बज रहा है।

रील वायरल होने के बाद नाराज ग्रामीणों ने आरोपित मुस्लिम युवक को खोज कर उसकी पिटाई कर दी। कथित तौर पर उसे नंगा घुमाया गया और उसकी पिटाई की गई। उसके निजी अंगों को आग लगाने की कोशिश भी हुई। यह रील कब बनाया गया यह स्पष्ट नहीं है।

बताते चलें कि ये पहली बार नहीं है जब मुस्लिमों ने हिंदू भावनाओं को आहत करते हुए हिंदू धर्म के प्रतीकों का अपमान किया है। इससे पहले भी हिंदू मूर्तियों को तोड़ने, देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणी करने के कई मामले सामने आ चुके हैं।

गर्भगृह में प्रवेश करते ही मूर्ति की बदल गई आभा, रामलला को बनते देखने रोज आते थे ‘हनुमान जी’, रोका तो बंदर पीटने लगे दरवाजे: अरुण योगीराज ने बताए अचंभित करने वाले अनुभव

अयोध्या में विराजमान रामलला की मूर्ति देश के मशहूर मूर्तिकार अरुण योगीराज द्वारा बनाई गई है। वही पहले शख्स हैं जिन्होंने रामलला के विग्रह को तैयार होने के बाद सबसे पहले देखा। ऐसे में प्राण-प्रतिष्ठा के बाद उनसे कई तरह के सवाल हो रहे हैं। उनसे उनका अनुभव पूछा जा रहा है। इन प्रश्नों के उत्तर देते हुए उन्होंने अपने इंटरव्यूज में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।

अरुण योगीराज ने इंडिया टुडे से बात करते हुए कहा कि ये कार्य उन्होंने खुद नहीं किया भगवान ने उनसे करवाया है। वह कहते हैं कि जब वो रामलला की मूर्ति को गढ़ रहे थे तो रोज उस मूर्ति से बात करते थे। वह कहा करते थे, “प्रभु बाकी लोगों से पहले मुझे दर्शन दे दो।” योगीराज की मानें तो जब मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा हुई तो उन्हें लगा ही नहीं कि वो मूर्ति उनके द्वारा बनाई गई है। उसके हाव-भाव बदल चुके थे। इस बारे में उन्होंने लोगों से कहा भी कि उन्हें नहीं विश्वास हो रहा मूर्ति उनके द्वारा बनाई गई है। उन्होंने माना कि अगर वो कोशिश भी करें तो दोबारा इस तरह का विग्रह कभी नहीं बना सकते।

उन्होंने कहा, “जब मैंने मूर्ति बनाई तब वो अलग थी। गर्भगृह में जाने के बाद और प्राण-प्रतिष्ठा के बाद वो अलग हो गई। मैंने 10 दिन गर्भगृह में बिताए। एक दिन जब मैं बैठा था मुझे अंदर से लगा ये तो मेरा काम है ही नहीं। मैं उन्हें पहचान नहीं पाया। अंदर जाते ही उनकी आभा बदल गई। मैं उसे अब दोबारा नहीं बना सकता। जहाँ तक छोटे-छोटे विग्रह बनाने की बात है वो बाद में सोचूँगा।”

रामलला की मूर्ति पर इंटरव्यू देते समय अरुण योगीराज नंगे पाँव बैठे दिखे। उन्होंने कहा कि राम को दुनिया को दिखाने से पहले खुद मानना था कि मूरत में राम हैं। वह बोले, “मैं दुनिया को दिखाने से पहले उनके दर्शन करना चाहता था। मैं उन्हें कहता था-दर्शन दे दीजिए प्रभु। तो, भगवान मेरी जानकारी जुटाने में खुद मदद कर रहे थे। कभी दीपावली के वक्त कोई जानकारी मिल गई। कुछ तस्वीरें मुझे वो मिल गईं जो 400 साल पुरानी थीं। हनुमान जी भी हमारे दरवाजे पर आते थे गेट खटखटाते थे, सब देखते थे, फिर चले जाते थे।”

अपने अद्भुत अनुभवों को बताते हुए उन्होंने कहा, “मूर्ति बनाने के दौरान हर रोज एक बंदर शाम में 4 से 5 बजे के बीच उस जगह आता था, वो सब देखकर चला जाता था। ठंड में हम दरवाजे बंद करने लगे। जब उसने ऐसा देखा तो वो तेज की दरवाजा खोलता अंदर आता, देखता और चला जाता। शायद उनका भी देखने का मन होता होगा।”

योगीराज से जब पूछा गया कि क्या उन्हें सपने भी आते थे कुछ, तो उन्होंने कहा कि वो पिछले 7 महीनों से ढंग से सो ही नहीं पाए हैं। इसलिए वो इस पर कुछ नहीं कह सकते। उनके जहन में हमेशा था कि जो वो कर रहे हैं वो देश को पसंद आना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी विश्वकर्मा समुदाय सदियों से यही काम करता आया है। उनके स्थानीय क्षेत्र में कहावत भी चलती है- ‘भगवान के स्पर्श से पत्थर फूल बन गए और शिल्प के स्पर्श से पत्थर भगवान बन गए।’

इतना सराहनीय कार्य करने के बाद भी अरुण इस रामलला के विग्रह के लिए सारा श्रेय खुद नहीं लेते। वो कहते हैं कि भगवान ने उनसे ये करवाया है। वरना वो मूर्ति कैसे गढ़ पाते।

उन्होंने एक अन्य इंटरव्यू में कहा कि उन लोगों ने रामलला को पत्थर से मूरत में देखने के लिए 6 माह तक इंतजार किया। उन्होंने बताया कि उनकी बनाई राम मूर्ति 51 इंच की है। ऐसा इसलिए क्योंकि वैज्ञानिकों की गणित थी इतनी इंच की मूर्ति हुई तो राम नवमी वाले दिन सूर्य की किरण भगवान राम के मस्तक पर सीधे पड़ेंगी। इस इंटरव्यू में भी उन्होंने यही बताया कि वो अपने असिस्टेंट्स के जाने के बाद भगवान के विग्रह के पास अकेले बैठते थे और यही प्रार्थना करते थे कि प्रभु दूसरों से पहले उन्हें दरश देना।

‘मार्च से पहले ना जाएँ अयोध्या, आम लोगों को न हो परेशानी’: PM नरेंद्र मोदी ने अपने कैबिनेट मंत्रियों को दी सलाह

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने कैबिनेट मंत्रियों ने मार्च महीने तक अयोध्या में रामलला के दर्शन के लिए ना जाने की सलाह दी है। प्रधानमंत्री ने कहा है कि केन्द्रीय मंत्रियों और बड़े नेताओं के आवागमन से आम लोगों को समस्या होती है इसलिए वह मार्च तक अयोध्या जाने से बचें।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने कैबिनेट के साथियों से यह अपील बुधवार को कैबिनेट बैठक के दौरान दिल्ली में कही। उनका कहना था कि केन्द्रीय मंत्रियों के जाने से अयोध्या VIP और VVIP प्रोटोकॉल लागू होता है जिससे सामान्य श्रद्धालु परेशान होते हैं। उन्होंने इन मंत्रियों से मार्च में यहाँ जाने को कहा है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी एक ट्वीट करके अपील की है कि विशिष्ट लोग जब दर्शन करने आएँ तो प्रशासन को एक सप्ताह पहले सूचित कर दें। उन्होंने लिखा, “श्री अयोध्या धाम में हर रामभक्त को सुगमतापूर्वक प्रभु श्री रामलला के दर्शन कराना हमारा कर्तव्य है। अपने आराध्य प्रभु श्री रामलला के दर्शन की आकांक्षा लिए पूरे देश से भारी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन के दृष्टिगत अति विशिष्ट/विशिष्ट/गणमान्य जन द्वारा अयोध्या धाम आगमन का कार्यक्रम बनाने से एक सप्ताह पूर्व स्थानीय प्रशासन/श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास अथवा राज्य सरकार को सूचित करना हितकर होगा।”

गौरतलब है कि 22 जनवरी, 2024 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर में रामलला की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की है। इस मंदिर को 23 जनवरी, 2024 से आम श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिया गया है। यहाँ अब उम्मीद से कहीं ज्यादा भीड़ दर्शन के लिए उमड़ रही है।

अयोध्या में 23 जनवरी के बाद से भारी भीड़ उमड़ रही है। मात्र पहले ही दिन भीड़ इतनी ज्यादा हो गई कि उसने बैरिकेड तोड़ दिए। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लखनऊ से प्रमुख सचिव संजय प्रसाद और DG (कानून व्यवस्था) प्रशांत कुमार को यहाँ भेजा। मुख्यमंत्री योगी खुद भी अयोध्या का निरीक्षण करने आए।

जानकारी के अनुसार, पहले ही दिन अयोध्या में लगभग 5 लाख श्रद्धालुओं ने रामलला के दर्शन किए। इसके बाद भी भीड़ कम नहीं हो रही है। लगातार लोग बढ़ते जा रहे हैं। अयोध्या जाने वाली गाड़ियों को पुलिस अंदर नहीं जाने दे रही है। अब पुलिस ने नई व्यवस्था बनाकर बाहर लाइनें लगवाई हैं और 200 लोगों के जत्थों में दर्शन करने के लिए भेज रहे हैं।

मंदिर ट्रस्ट ने अब रामलला के दर्शन के समय में भी बदलाव किया गया है। सुबह 7 बजे से अब रात 10 बजे तक दर्शन किए जा सकेंगे। यहाँ श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया है। बताया जा रहा है कि अयोध्या में दो दिनों में राम मंदिर में लगभग 3.5 करोड़ रुपए का दान आया है।

‘जय श्री राम’ से चिढ़ी कॉन्ग्रेसी हीरोइन, इस्लामी मुल्क क़तर से लगा रही एक्शन की गुहार: कह रही – ये लोकतंत्र की मौत है, सेक्युलर देश की मौत है

कॉन्ग्रेस की नेता एंड्रिया डिसूजा, जो कि ट्विटर पर खुद को ‘रिया रिवील्ड‘ बताती हैं, एक व्यक्ति के ‘जय श्री राम’ लिखने से भड़क गई। उसके एक ट्वीट के जवाब में एक व्यक्ति ने ‘जय श्री राम’ लिखा तो वह इसे इस्लामोफोबिया बता कर उसे गिरफ्तार करने के लिए क़तर के विदेश मंत्रालय के पास दौड़ गई।

खुद को महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस में मानवाधिकार मामलों की सचिव और AICWA की पदाधिकारी बताने वाली डिसूजा ने राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को शक्ति प्रदर्शन बता डाला। उन्होंने दावा किया कि राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में कुछ भी धार्मिक नहीं था भले ही यह वैदिक रीति रिवाज से हुई हो।

डिसूजा ने ट्विटर पर लिखा, “राम का जन्म किसके लिए ख़ुशी की बात नहीं होगा? लेकिन दुख की बात है और मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि यह राम मंदिर की आड़ में शक्ति का खुला प्रदर्शन है। राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा धार्मिक नहीं है। जिस विषय की नींव में किसी कमजोर व्यक्ति को अपमानित करने की बात हो, वह धार्मिक नहीं है।

आगे उन्होंने लिखा, “भले ही इस भीड़ में मेरा धर्म, गाँव, परिवार और पूरे देश की जनता शामिल हो। मेरी शिक्षा मुझे मानवता और धार्मिकता के साथ खड़े रहने के लिए कहती है। यह लोकतंत्र की मौत है, धर्मनिरपेक्ष देश और भारत के विचार की मौत है।” उनके इस ट्वीट के जवाब में एक व्यक्ति ने कई बार ‘जय श्री राम’ लिख दिया।

राम का नाम देखने से डिसूजा भड़क गईं। वह इतना क्रुद्ध हुईं कि उन्होंने कतरी विदेश मंत्रालय को ट्विटर पर टैग कर दिया और इस व्यक्ति के खिलाफ एक्शन लेने की बात की। डिसूजा का दावा था कि यह व्यक्ति कतर में रहता है और इसका ‘जय श्री राम’ लिखना इस्लामोफोबिया के अंतर्गत आता है। हालाँकि, उन्होंने यह नहीं स्पष्ट किया कि किसी हिन्दू का अपने भगवान का नाम लेना किस प्रकार से इस्लामोफोबिया है। इसके बाद डिसूजा ने इस व्यक्ति को एक लंबा चौड़ा पैराग्राफ लिख कर जवाब भी दे डाला।

डिसूजा ने लिखा, “जय सिया राम। जय माँ दुर्गा, जय श्री कृष्ण, हर-हर महादेव! एक हिंदू हूँ और मैं अपने देवताओं से प्रेम करती हूँ। मेरा धर्म मेरा निजी विषय है, इससे किसी को कोई मतलब नहीं। मैं कमजोरों को दबाने के लिए अपने भगवान का अपमान नहीं करती। मैं लोगों पर अत्याचार करने या लोगों की हत्या करने में अपने भगवान के नाम का उपयोग नहीं करती. केवल नकली हिंदू ही ऐसा करते हैं। और आप निश्चित रूप से एक नकली हिन्दू हैं।” हालाँकि, वह यह लिखते समय भूल गई कि हिन्दू कारसेवकों पर ही इस देश में अत्याचार हुए हैं चाहे वह गोधरा हो या 1990 में मुलायम सिंह का अयोध्या में गोली चलवाना।

डिसूजा का क़तर के आगे मदद के लिए हाथ फैलाना कई लोगों को नागवार गुजरा और उन्होंने इसे देशद्रोह बताया। उन्होंने कहा कि इससे वह एक भारतीय की सुरक्षा को क़तर में खतरे में डाल रही हैं। अक्षत देवड़ा नाम के एक व्यक्ति ने लिखा, “@RiaRevealed ने कतर में एक भारतीय कामगार के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कतर के मंत्रालय को टैग करके देशद्रोह किया है। मुंबई पुलिस कृपया उनकी सुरक्षा के साथ कुछ होने से पहले उचित कार्रवाई करे।” अन्य लोगों ने भी यही बात कही।

एक यूजर ने उनके जवाब में लिखा, “केवल ‘जय श्री राम’ बोलने के लिए? कहाँ गयी तुम्हारी तथाकथित धर्मनिरपेक्षता? और क्या तुम करोड़ों हिंदुओं को “इस्लामोफोबिक” कहोगी क्योंकि वह “जय श्री राम” का नारा लगाते हैं। मुझे लगता है कि तुम उस व्यक्ति को पसंद करोगी और प्यार करोगी जो “अल्लाह हू अकबर” कहेगा, भले ही वह हिंदू हो।”

गौरतलब है कि वामपंथी और लिबल पत्रकार, कथित एक्टिविस्ट और प्रोपगैंडा फैलाने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा करने के बाद से बिलबिलाए हुए हैं। डिसूजा ने भी उसी सूची में अपनी जगह बनाई है जिसमें आरफा खानम शेरवानी जैसे लोग पहले ही शामिल हो चुके हैं।

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‘आज हम 2-4 हिन्दुओं को काटेंगे, जितने भी हिन्दू सामने पड़े मार दो’: वडोदरा में राम यात्रा पर हमला करने वाली भीड़ के मंसूबे FIR से आए सामने

22 जनवरी 2024 को अयोध्या में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा पर पूरा देश हर्षोल्लास में डूबा हुआ था। हालाँकि, यह दिन भी इस्लामी कट्टरपंथियों की हिंसा से नहीं बच सका। गुजरात में दो जगह पर हिन्दुओं की शोभा यात्रा पर पत्थरबाजी हुई। 21 जनवरी 2024 को मेहसाणा के खेड़ालू में हिन्दुओं पर हमला हुआ तो वहीं वडोदरा के भोज गाँव में 22 जनवरी के दिन मुस्लिम भीड़ ने हिन्दुओं पर तब हमला किया जब वह प्रभु श्रीराम की शोभा यात्रा निकाल रहे थे।

वडोदरा के भोज गाँव में हिन्दुओं पर हुए इस हमले के बाद पुलिस ने 16 लोगों के विरुद्ध FIR दर्ज की है। इस FIR की कॉपी ऑपइंडिया के पास है। FIR में सामने आया है कि कैसे मुस्लिम भीड़ ने हिन्दुओं पर हमला किया और उन्हें मारने की कोशिश की।

इस मामले में 22 जनवरी 2024 को FIR दर्ज हुई थी। FIR में बताया गया है कि शोभायात्रा भोज गाँव में दोपहर 2 बजे रामजी मंदिर से चालू हुई। इसमें 500 से 700 हिन्दू शामिल थे। इस यात्रा में वह गाते-बजाते हुए चल रहे थे। उनके साथ 3 डीजे भी थे। यह यात्रा लगभग डेढ़ घंटे के बाद नगीना मस्जिद पहुँची। आयोजकों ने बताया है कि इस दौरान डीजे बंद कर दिया गया था।

घटना को लेकर दर्ज एफआईआर के अंश

इसी समय कुछ मुस्लिम इस यात्रा के सामने नगीना मस्जिद वाली गली में आ गए और धमकियाँ देने लगे। उन्होंने कहा, “दोबारा ऐसा करने की कोशिश मत करना, क्योंकि आज हम 2-4 हिन्दुओं को काटेंगे। जितने भी हिन्दू सामने पड़े मार दो।” इसके बाद कट्टरपंथी यात्रा पर हमला करने के लिए आगे बढ़ गए और चिल्लाने लगे कि किसी को जिन्दा नहीं छोड़ना है।

मुस्लिमों के हमले के बाद यात्रा में शामिल लोग वहाँ से हट गए। इस दौरान उन पर पत्थरों की बारिश होने लगी। मुस्लिम भीड़ ने उन्हें मारने की नीयत से हमला जारी रखा। यहाँ मौजूद पुलिसकर्मियों ने भी दंगाइयों को रोकने की कोशिश की लेकिन दंगाई पत्थर बरसाते रहे। इसके बाद पुलिस ने लोगों को बचाने के लिए मुस्लिम भीड़ पर लाठीचार्ज किया और उन्हें वहाँ से खदेड़ दिया। इस हमले में 8 लोग घायल हैं, जिनमें 6 महिलाएँ हैं। हमले में पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। इन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।

FIR में यह भी बताया गया है कि इससे पहले हिन्दुओं ने जो भगवा ध्वज रास्ते में लगाए थे, उन्हें भी 18 जनवरी को उखाड़ कर फेंक दिया गया था। इस विषय में यात्रा के आयोजकों ने पुलिस को सूचना भी दी थी। इस हिंसा के मामले में पुलिस ने धारा 120बी, 143, 144, 147 148, 149, 152, 153A, 295A, 323, 332, 324, 307 के तहत मामला दर्ज किया है। बताया गया है कि अभी तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया है।

‘सेक्स डॉल’ वाले अश्लील ड्रेस लाते थे इस्लामी आतंकी, बंधक बनाई गई लड़कियों को पहना कर करते थे बलात्कार: इतना हुआ यौन शोषण कि पीड़िताओं को नहीं आ रहे पीरियड्स

“हमास की कैद में कई महिलाएँ थीं। उनके साथ कई बार बलात्कार किया गया। ऐसी कई औरतें थीं जिन्हें लंबे वक्त से पीरियड्स नहीं आए। ये संकेत है कि वे गर्भवती हो सकती हैं।” – ये कहना है हमास आंतकियों की कैद से छुड़ाई गई 48 साल की सामाजिक कार्यकर्ता शेन गोल्डस्टाइन एल्मॉग का।

बताते चलें कि शेन ने ये खुलासा इजरायली संसद यानी नेसेट में मंगलवार (23 जनवरी, 2024) को युद्ध में यौन और लिंग आधारित हिंसा विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान किया। इजरायली अखबार YnetNews की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस कार्यक्रम के दौरान हमास की बंधक रही महिलाओं ने ऐसे खौफ में ला देने और सिहरन पैदा करने वाले वाकए बताए हैं, जो उन्होंने वहाँ रहते देखे। इन औरतों ने हमास के बंधक होने की तुलना धरती पर नरक से की है।

इसके साथ ही हमास आंतकियों के चंगुल से बच कर निकल आई इन महिलाओं ने उन लोगों के लिए फ़िक्र जताई है जो अब भी 7 अक्टूबर, 2023 के इजरायल पर हमले के बाद से अभी भी दरिंदे आतंकवादियों की कैद में हैं।

YnetNews ने एल्मॉग के हवाले से लिखा, “कैद में कई ऐसी महिलाएँ हैं जिन्हें लंबे वक्त से मासिक धर्म नहीं हुआ है और शायद यही वह है जिसके लिए हमें प्रार्थना करनी चाहिए कि उनका शरीर उनकी रक्षा करेगा और वो ऐसी प्रेग्नेंसी से बच पाएँ। उन्हें वापस लाने के लिए हमें सब कुछ करने की ज़रूरत है।”

उन्होंने आगे बताया कि वहाँ खाने से लेकर सफाई तक हालात मुश्किल हैं। उन पर बड़ा खतरा भी मँडरा रहा है। उन्होंने बताया, “हम नहीं जानते कि कब इन बंधकों को नुकसान पहुँचाने के आदेश हो जाएँ। मैं उनके बारे में बहुत फिक्रमंद हूँ।” शेन गोल्डस्टाइन एल्मॉग ने आगे कहा, “आतंकवादी लड़कियों के लिए बेकार अश्लील तरह के कपड़े लाते हैं। वो उनके लिए गुड़ियों को पहनाने वाले उत्तेजक कपड़े लाते हैं। उन्होंने लड़कियों को अपनी गुड़िया में बदल दिया, ताकि वे जो चाहें कर सकें और ये यकीन लायक़ नहीं कि वे (लड़कियाँ) अभी भी वहीं हैं।”

उन्होंने कहा, “मैं साँस नहीं ले सकती। मैं इस सबका सामना नहीं कर सकती और यह बहुत मुश्किल है। हम छोड़े गए 4 महीने होने वाले हैं और वे अभी भी वहीं हैं।” शेन गोल्डस्टाइन एल्मॉग ये भी बताया कि कैद में उनकी एक ऐसी लड़की से बात हुई थी जिसे बंधक बनाने के बाद से हमास आतंकवादी लगातार उसका बलात्कार कर रहे थे।

बताते चलें कि शेन गोल्डस्टाइन एल्मॉग को उनके तीन बच्चों सहित 7 अक्टूबर, 2023 को गाजा की सीमा के पास केफ़र अज़ा किबुत्ज़ से हमास के आतंकियों ने अगुवा कर लिया था। ये इलाका हमास के आतंकवादी हमलों के दौरान सबसे अधिक प्रभावित हुआ था। वहाँ उनके पति और बड़ी बेटी को मार डाला गया। वो उन किस्मत वाले बंधकों में से एक है जिन्हें 26 नवंबर, 2023 को हमास आतंकियों ने छोड़ा था।

उनके साथ बंधक बनाई गई उनकी बेटी अगम एल्मॉग ने आर्मी रेडियो से गाजा पट्टी में कैद अपने वक्त के बारे में बताते हुए कहा था, “मुझे शहर में हमारे जाने की याद है। मैंने बस अपनी माँ से कहा था कि वे मुझे प्रताड़ित करने वाले हैं, वे मेरा बलात्कार करने वाले हैं।”

उस दौर को याद कर उसने आगे कहा, “शरीर जो महसूस करता है उसकी मुकाबले में शब्द बहुत छोटे हैं। तो यह ऐसा ही था।” इसी तरह 34 साल की शेरोल एलोनी क्यूनिओ इज़राइल-हमास अदला-बदली समझौते में रिहा होने वाली एक बंधक हैं।

वो अपनी दो छोटी लड़कियों के साथ गाजा में बंधक के तौर तक 52 दिनों तक रहीं थी। लेकिन उन्हें अपने पति की जान का डर है जो अभी भी बमबारी वाले फिलिस्तीनी इलाके में बंदी हैं। अब वह अपने तीन साल के जुड़वाँ बेटियों जूली और एम्मा के साथ इजरायल घर वापस आ गई है।

वो अन्य 137 बंधकों को रिहा कराने की गुहार लगा रही है। उन्होंने अपने इंटरव्यू में समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, “हर मिनट अहम हैं। वहाँ हालात अच्छे नहीं हैं और उनकी रिहाई का वक्त लंबा खींचता जा रहा हैं।” शेरोल एलोनी के मुताबिक, “यह एक रूसी रूलेट जैसा जानलेवा खेल है।”

आतंकवादियों ने गाजा से एक मील से कुछ अधिक दूरी पर किबुत्ज़ में उनके घर पर कब्ज़ा कर उसमें आग लगा दी थी और बंदूक की नोक पर उन पति डेविड और दो बेटियों सहित बंधक बना अपने साथ ले गए थे।

उसने बताया कि उनकी दूसरी बेटी को 10 दिनों के लिए गाजा में उनसे अलग रखा गया था। वो बताती हैं, “आप नहीं जानते कि शाम को पीटा (रोटी) मिलेगा या नहीं, इसलिए सुबह आप शाम के लिए कुछ बचाकर रख लेते थे। उन्होंने आगे कहा, “टॉयलेट जाने की मंजूरी का इंतजार करना पड़ता था। लड़कियों के लिए एक परेशानी थी, इसलिए उन्हें सिंक और कूड़ेदान का यूज करना पड़ता था।

वो आगे कहती हैं, “कभी-कभी जब बिजली गुल हो जाती थी, तो वे हमें दरवाज़ा खोलने देते थे। वे पर्दा डालते थे और फिर हम फुसफुसाते थे। आप केवल फुसफुसाहट के साथ एक बच्चे को 12 घंटे तक कैसे साथ रख सकते हैं?” वह कहती हैं कि हर दिन रोना, हताशा और फिक्र होती है। हम कब तक यहाँ रहेंगे? क्या वे हमारे बारे में भूल गए हैं? क्या उन्होंने हमें छोड़ दिया है?

सार्वजनिक होगी ज्ञानवापी ढाँचे की ASI सर्वे रिपोर्ट, वाराणसी कोर्ट का आदेश: मुस्लिम पक्ष कर रहा था विरोध, वकील हरिशंकर जैन बोले – अब सबको पता चलेगा

वाराणसी कोर्ट ने बुधवार (24 जनवरी,2024) को एक अहम फैसला दिया है। इसमें ज्ञानवापी ढाँचे में ‘भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण’ (ASI) द्वारा किए गए वैज्ञानिक सर्वेक्षण को सार्वजनिक करने का आदेश दिया है। इस आदेश के साथ जिला न्यायाधीश एके विश्वेशा ने संबंधित पक्षों के ASI सर्वेक्षण रिपोर्ट की एक प्रति माँगने के लिए दायर आवेदनों का निपटारा कर दिया। इससे साफ है कि अब ये रिपोर्ट हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्ष के लोग देख पाएँगे।

ज्ञानवापी मामले पर हिंदू पक्ष की पैरवी कर रहे वकील हरि शंकर जैन ने कहा, “बहुत सारी आपत्तियाँ उठाई गईं कि ASI की रिपोर्ट को सार्वजनिक न किया जाए। आज कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुना और रिपोर्ट दोनों पक्षों को उपलब्ध कराने का फैसला किया। रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी जाएगी और सभी को पता चल जाएगा कि रिपोर्ट में क्या है।”

दरअसल ASI ने 18 दिसंबर, 2023 को सील बंद लिफाफे में ज्ञानवापी सर्वे की रिपोर्ट अदालत को सौंपी थीं। इसके बाद हिंदू पक्ष ने कोर्ट से रिपोर्ट सार्वजनिक करने की माँग की थी। हालाँकि, इस रिपोर्ट को सार्वजनिक न करने को लेकर मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था।

इसे लेकर हिंदू पक्ष के एक वकील अनुपम द्विवेदी ने कहा था कि ASI टीम ने 100 दिनों तक ज्ञानवापी परिसर का सर्वे किया था। ASI की रिपोर्ट वजनी होने की वजह से सीलबंद लिफाफे में अदालत को सौंपी गई थी। वहीं दूसरी तरफ मस्जिद का प्रबंधन देखने वाली ‘अंजुमन इंतजामिया’ की तरफ से रिपोर्ट को गुप्त रखने और जनता के सामने आने से रोकने के लिए आवेदन दायर किया गया था। इस पर वकील अनुपम द्विवेदी ने कहा था कि इसे रोकना सुप्रीम कोर्ट के फैसले के सार और सूचना के अधिकार के खिलाफ है।

बताते चलें कि वाराणसी जिला न्यायाधीश के 21 जुलाई के आदेश के मुताबिक, ASI ने वाराणसी में ज्ञानवापी परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया था। ये सर्वे इसलिए किया गया था ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि मस्जिद का निर्माण हिंदू मंदिर की पहले से मौजूद संरचना पर किया गया था या नहीं। इसके बाद 4 अगस्त, 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने ASI को ‘वजूखाना’ क्षेत्र को छोड़कर वाराणसी में ज्ञानवापी ढाँचे का सर्वेक्षण करने से रोक लगाने से इनकार कर दिया था। बताते चले की बीते साल इसी ‘वजूखाना’ क्षेत्र में ‘शिवलिंग’ मिला था।

इसके बाद ASI ने सुप्रीम कोर्ट को अंडरटेकिंग दी थी कि उसके द्वारा उस क्षेत्र में साइट पर कोई खुदाई नहीं की जाएगी और न ही ढाँचे को कोई नुकसान पहुँचाया जाएगा। इसके बाद कोर्ट ने वहाँ सर्वे करने की इजाजत दे दी थी। कोर्ट ने ये आदेश ‘अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी’ की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया था। ये कमेटी वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद का प्रबंधन करती है। कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट में इलाहाबाद हाइकोर्ट के आदेश (3 अगस्त, 2023) को चुनौती देते हुए ये याचिका दायर की थी।

इस आदेश में इलाहबाद हाई कोर्ट ने ASI सर्वेक्षण की मंजूरी दी थी। बताते चलें कि 21 जुलाई, 2023 को वाराणसी जिला न्यायाधीश ने ASI के निदेशक को पहले ही सील कर दिए गए वजूखाना को छोड़कर ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का वैज्ञानिक सर्वे करने का निर्देश दिया, ताकि ये पता लगाया जा सके कि ये मस्जिद एक हिंदू मंदिर की पहले से मौजूद संरचना के ऊपर बनाई गई है या नहीं।

इसके बाद 3 अगस्त, 2023 को इलाहाबाद HC ने वाराणसी कोर्ट के इस फैसले को बरकरार रखा था। बताते दें कि हाल ही में 20 जनवरी, 2024 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ज्ञानवापी मस्जिद के सील वजूखाने की सफाई कलेक्टर एस राजलिंगम की देखरेख में हुई थी। वहाँ नमाजी अक्सर अपने हाथ-पाँव धोते थे। वर्षों से शिवलिंग को अपमानित किया जा रहा है। ज्ञानवापी का मामला अदालत में चल रहा है। अब कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आला अधिकारियों की उपस्थिति में उस स्थल की साफ़-सफाई की जा रही है।

असल में इसके लिए हिन्दू महिलाएँ सुप्रीम कोर्ट पहुँची थीं। उन्होंने शिवलिंग मिलने वाली जगह पर स्वच्छता बनाए रखने की माँग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस आवेदन को स्वीकार कर लिया था। हिन्दू पक्ष के वकील सुधीर त्रिपाठी ने बताया कि कथित वजूखाना काफी गंदा हो गया था। वजह से ये माँग की गई। 16 जनवरी, 2024 को ही सुप्रीम कोर्ट ने इसकी साफ़-सफाई का आदेश दे दिया था। इस केस में वकील विष्णु जियान ने वजूखाने में बने शिवलिंग की सफाई को लेकर 2 जनवरी, 2024 सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दायर की थी।