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गर्भगृह में प्रवेश करते ही मूर्ति की बदल गई आभा, रामलला को बनते देखने रोज आते थे ‘हनुमान जी’, रोका तो बंदर पीटने लगे दरवाजे: अरुण योगीराज ने बताए अचंभित करने वाले अनुभव

अयोध्या में विराजमान रामलला की मूर्ति देश के मशहूर मूर्तिकार अरुण योगीराज द्वारा बनाई गई है। वही पहले शख्स हैं जिन्होंने रामलला के विग्रह को तैयार होने के बाद सबसे पहले देखा। ऐसे में प्राण-प्रतिष्ठा के बाद उनसे कई तरह के सवाल हो रहे हैं। उनसे उनका अनुभव पूछा जा रहा है। इन प्रश्नों के उत्तर देते हुए उन्होंने अपने इंटरव्यूज में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।

अरुण योगीराज ने इंडिया टुडे से बात करते हुए कहा कि ये कार्य उन्होंने खुद नहीं किया भगवान ने उनसे करवाया है। वह कहते हैं कि जब वो रामलला की मूर्ति को गढ़ रहे थे तो रोज उस मूर्ति से बात करते थे। वह कहा करते थे, “प्रभु बाकी लोगों से पहले मुझे दर्शन दे दो।” योगीराज की मानें तो जब मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा हुई तो उन्हें लगा ही नहीं कि वो मूर्ति उनके द्वारा बनाई गई है। उसके हाव-भाव बदल चुके थे। इस बारे में उन्होंने लोगों से कहा भी कि उन्हें नहीं विश्वास हो रहा मूर्ति उनके द्वारा बनाई गई है। उन्होंने माना कि अगर वो कोशिश भी करें तो दोबारा इस तरह का विग्रह कभी नहीं बना सकते।

उन्होंने कहा, “जब मैंने मूर्ति बनाई तब वो अलग थी। गर्भगृह में जाने के बाद और प्राण-प्रतिष्ठा के बाद वो अलग हो गई। मैंने 10 दिन गर्भगृह में बिताए। एक दिन जब मैं बैठा था मुझे अंदर से लगा ये तो मेरा काम है ही नहीं। मैं उन्हें पहचान नहीं पाया। अंदर जाते ही उनकी आभा बदल गई। मैं उसे अब दोबारा नहीं बना सकता। जहाँ तक छोटे-छोटे विग्रह बनाने की बात है वो बाद में सोचूँगा।”

रामलला की मूर्ति पर इंटरव्यू देते समय अरुण योगीराज नंगे पाँव बैठे दिखे। उन्होंने कहा कि राम को दुनिया को दिखाने से पहले खुद मानना था कि मूरत में राम हैं। वह बोले, “मैं दुनिया को दिखाने से पहले उनके दर्शन करना चाहता था। मैं उन्हें कहता था-दर्शन दे दीजिए प्रभु। तो, भगवान मेरी जानकारी जुटाने में खुद मदद कर रहे थे। कभी दीपावली के वक्त कोई जानकारी मिल गई। कुछ तस्वीरें मुझे वो मिल गईं जो 400 साल पुरानी थीं। हनुमान जी भी हमारे दरवाजे पर आते थे गेट खटखटाते थे, सब देखते थे, फिर चले जाते थे।”

अपने अद्भुत अनुभवों को बताते हुए उन्होंने कहा, “मूर्ति बनाने के दौरान हर रोज एक बंदर शाम में 4 से 5 बजे के बीच उस जगह आता था, वो सब देखकर चला जाता था। ठंड में हम दरवाजे बंद करने लगे। जब उसने ऐसा देखा तो वो तेज की दरवाजा खोलता अंदर आता, देखता और चला जाता। शायद उनका भी देखने का मन होता होगा।”

योगीराज से जब पूछा गया कि क्या उन्हें सपने भी आते थे कुछ, तो उन्होंने कहा कि वो पिछले 7 महीनों से ढंग से सो ही नहीं पाए हैं। इसलिए वो इस पर कुछ नहीं कह सकते। उनके जहन में हमेशा था कि जो वो कर रहे हैं वो देश को पसंद आना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी विश्वकर्मा समुदाय सदियों से यही काम करता आया है। उनके स्थानीय क्षेत्र में कहावत भी चलती है- ‘भगवान के स्पर्श से पत्थर फूल बन गए और शिल्प के स्पर्श से पत्थर भगवान बन गए।’

इतना सराहनीय कार्य करने के बाद भी अरुण इस रामलला के विग्रह के लिए सारा श्रेय खुद नहीं लेते। वो कहते हैं कि भगवान ने उनसे ये करवाया है। वरना वो मूर्ति कैसे गढ़ पाते।

उन्होंने एक अन्य इंटरव्यू में कहा कि उन लोगों ने रामलला को पत्थर से मूरत में देखने के लिए 6 माह तक इंतजार किया। उन्होंने बताया कि उनकी बनाई राम मूर्ति 51 इंच की है। ऐसा इसलिए क्योंकि वैज्ञानिकों की गणित थी इतनी इंच की मूर्ति हुई तो राम नवमी वाले दिन सूर्य की किरण भगवान राम के मस्तक पर सीधे पड़ेंगी। इस इंटरव्यू में भी उन्होंने यही बताया कि वो अपने असिस्टेंट्स के जाने के बाद भगवान के विग्रह के पास अकेले बैठते थे और यही प्रार्थना करते थे कि प्रभु दूसरों से पहले उन्हें दरश देना।

‘मार्च से पहले ना जाएँ अयोध्या, आम लोगों को न हो परेशानी’: PM नरेंद्र मोदी ने अपने कैबिनेट मंत्रियों को दी सलाह

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने कैबिनेट मंत्रियों ने मार्च महीने तक अयोध्या में रामलला के दर्शन के लिए ना जाने की सलाह दी है। प्रधानमंत्री ने कहा है कि केन्द्रीय मंत्रियों और बड़े नेताओं के आवागमन से आम लोगों को समस्या होती है इसलिए वह मार्च तक अयोध्या जाने से बचें।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने कैबिनेट के साथियों से यह अपील बुधवार को कैबिनेट बैठक के दौरान दिल्ली में कही। उनका कहना था कि केन्द्रीय मंत्रियों के जाने से अयोध्या VIP और VVIP प्रोटोकॉल लागू होता है जिससे सामान्य श्रद्धालु परेशान होते हैं। उन्होंने इन मंत्रियों से मार्च में यहाँ जाने को कहा है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी एक ट्वीट करके अपील की है कि विशिष्ट लोग जब दर्शन करने आएँ तो प्रशासन को एक सप्ताह पहले सूचित कर दें। उन्होंने लिखा, “श्री अयोध्या धाम में हर रामभक्त को सुगमतापूर्वक प्रभु श्री रामलला के दर्शन कराना हमारा कर्तव्य है। अपने आराध्य प्रभु श्री रामलला के दर्शन की आकांक्षा लिए पूरे देश से भारी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन के दृष्टिगत अति विशिष्ट/विशिष्ट/गणमान्य जन द्वारा अयोध्या धाम आगमन का कार्यक्रम बनाने से एक सप्ताह पूर्व स्थानीय प्रशासन/श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास अथवा राज्य सरकार को सूचित करना हितकर होगा।”

गौरतलब है कि 22 जनवरी, 2024 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर में रामलला की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की है। इस मंदिर को 23 जनवरी, 2024 से आम श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिया गया है। यहाँ अब उम्मीद से कहीं ज्यादा भीड़ दर्शन के लिए उमड़ रही है।

अयोध्या में 23 जनवरी के बाद से भारी भीड़ उमड़ रही है। मात्र पहले ही दिन भीड़ इतनी ज्यादा हो गई कि उसने बैरिकेड तोड़ दिए। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लखनऊ से प्रमुख सचिव संजय प्रसाद और DG (कानून व्यवस्था) प्रशांत कुमार को यहाँ भेजा। मुख्यमंत्री योगी खुद भी अयोध्या का निरीक्षण करने आए।

जानकारी के अनुसार, पहले ही दिन अयोध्या में लगभग 5 लाख श्रद्धालुओं ने रामलला के दर्शन किए। इसके बाद भी भीड़ कम नहीं हो रही है। लगातार लोग बढ़ते जा रहे हैं। अयोध्या जाने वाली गाड़ियों को पुलिस अंदर नहीं जाने दे रही है। अब पुलिस ने नई व्यवस्था बनाकर बाहर लाइनें लगवाई हैं और 200 लोगों के जत्थों में दर्शन करने के लिए भेज रहे हैं।

मंदिर ट्रस्ट ने अब रामलला के दर्शन के समय में भी बदलाव किया गया है। सुबह 7 बजे से अब रात 10 बजे तक दर्शन किए जा सकेंगे। यहाँ श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया है। बताया जा रहा है कि अयोध्या में दो दिनों में राम मंदिर में लगभग 3.5 करोड़ रुपए का दान आया है।

‘जय श्री राम’ से चिढ़ी कॉन्ग्रेसी हीरोइन, इस्लामी मुल्क क़तर से लगा रही एक्शन की गुहार: कह रही – ये लोकतंत्र की मौत है, सेक्युलर देश की मौत है

कॉन्ग्रेस की नेता एंड्रिया डिसूजा, जो कि ट्विटर पर खुद को ‘रिया रिवील्ड‘ बताती हैं, एक व्यक्ति के ‘जय श्री राम’ लिखने से भड़क गई। उसके एक ट्वीट के जवाब में एक व्यक्ति ने ‘जय श्री राम’ लिखा तो वह इसे इस्लामोफोबिया बता कर उसे गिरफ्तार करने के लिए क़तर के विदेश मंत्रालय के पास दौड़ गई।

खुद को महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस में मानवाधिकार मामलों की सचिव और AICWA की पदाधिकारी बताने वाली डिसूजा ने राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को शक्ति प्रदर्शन बता डाला। उन्होंने दावा किया कि राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में कुछ भी धार्मिक नहीं था भले ही यह वैदिक रीति रिवाज से हुई हो।

डिसूजा ने ट्विटर पर लिखा, “राम का जन्म किसके लिए ख़ुशी की बात नहीं होगा? लेकिन दुख की बात है और मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि यह राम मंदिर की आड़ में शक्ति का खुला प्रदर्शन है। राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा धार्मिक नहीं है। जिस विषय की नींव में किसी कमजोर व्यक्ति को अपमानित करने की बात हो, वह धार्मिक नहीं है।

आगे उन्होंने लिखा, “भले ही इस भीड़ में मेरा धर्म, गाँव, परिवार और पूरे देश की जनता शामिल हो। मेरी शिक्षा मुझे मानवता और धार्मिकता के साथ खड़े रहने के लिए कहती है। यह लोकतंत्र की मौत है, धर्मनिरपेक्ष देश और भारत के विचार की मौत है।” उनके इस ट्वीट के जवाब में एक व्यक्ति ने कई बार ‘जय श्री राम’ लिख दिया।

राम का नाम देखने से डिसूजा भड़क गईं। वह इतना क्रुद्ध हुईं कि उन्होंने कतरी विदेश मंत्रालय को ट्विटर पर टैग कर दिया और इस व्यक्ति के खिलाफ एक्शन लेने की बात की। डिसूजा का दावा था कि यह व्यक्ति कतर में रहता है और इसका ‘जय श्री राम’ लिखना इस्लामोफोबिया के अंतर्गत आता है। हालाँकि, उन्होंने यह नहीं स्पष्ट किया कि किसी हिन्दू का अपने भगवान का नाम लेना किस प्रकार से इस्लामोफोबिया है। इसके बाद डिसूजा ने इस व्यक्ति को एक लंबा चौड़ा पैराग्राफ लिख कर जवाब भी दे डाला।

डिसूजा ने लिखा, “जय सिया राम। जय माँ दुर्गा, जय श्री कृष्ण, हर-हर महादेव! एक हिंदू हूँ और मैं अपने देवताओं से प्रेम करती हूँ। मेरा धर्म मेरा निजी विषय है, इससे किसी को कोई मतलब नहीं। मैं कमजोरों को दबाने के लिए अपने भगवान का अपमान नहीं करती। मैं लोगों पर अत्याचार करने या लोगों की हत्या करने में अपने भगवान के नाम का उपयोग नहीं करती. केवल नकली हिंदू ही ऐसा करते हैं। और आप निश्चित रूप से एक नकली हिन्दू हैं।” हालाँकि, वह यह लिखते समय भूल गई कि हिन्दू कारसेवकों पर ही इस देश में अत्याचार हुए हैं चाहे वह गोधरा हो या 1990 में मुलायम सिंह का अयोध्या में गोली चलवाना।

डिसूजा का क़तर के आगे मदद के लिए हाथ फैलाना कई लोगों को नागवार गुजरा और उन्होंने इसे देशद्रोह बताया। उन्होंने कहा कि इससे वह एक भारतीय की सुरक्षा को क़तर में खतरे में डाल रही हैं। अक्षत देवड़ा नाम के एक व्यक्ति ने लिखा, “@RiaRevealed ने कतर में एक भारतीय कामगार के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कतर के मंत्रालय को टैग करके देशद्रोह किया है। मुंबई पुलिस कृपया उनकी सुरक्षा के साथ कुछ होने से पहले उचित कार्रवाई करे।” अन्य लोगों ने भी यही बात कही।

एक यूजर ने उनके जवाब में लिखा, “केवल ‘जय श्री राम’ बोलने के लिए? कहाँ गयी तुम्हारी तथाकथित धर्मनिरपेक्षता? और क्या तुम करोड़ों हिंदुओं को “इस्लामोफोबिक” कहोगी क्योंकि वह “जय श्री राम” का नारा लगाते हैं। मुझे लगता है कि तुम उस व्यक्ति को पसंद करोगी और प्यार करोगी जो “अल्लाह हू अकबर” कहेगा, भले ही वह हिंदू हो।”

गौरतलब है कि वामपंथी और लिबल पत्रकार, कथित एक्टिविस्ट और प्रोपगैंडा फैलाने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा करने के बाद से बिलबिलाए हुए हैं। डिसूजा ने भी उसी सूची में अपनी जगह बनाई है जिसमें आरफा खानम शेरवानी जैसे लोग पहले ही शामिल हो चुके हैं।

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‘आज हम 2-4 हिन्दुओं को काटेंगे, जितने भी हिन्दू सामने पड़े मार दो’: वडोदरा में राम यात्रा पर हमला करने वाली भीड़ के मंसूबे FIR से आए सामने

22 जनवरी 2024 को अयोध्या में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा पर पूरा देश हर्षोल्लास में डूबा हुआ था। हालाँकि, यह दिन भी इस्लामी कट्टरपंथियों की हिंसा से नहीं बच सका। गुजरात में दो जगह पर हिन्दुओं की शोभा यात्रा पर पत्थरबाजी हुई। 21 जनवरी 2024 को मेहसाणा के खेड़ालू में हिन्दुओं पर हमला हुआ तो वहीं वडोदरा के भोज गाँव में 22 जनवरी के दिन मुस्लिम भीड़ ने हिन्दुओं पर तब हमला किया जब वह प्रभु श्रीराम की शोभा यात्रा निकाल रहे थे।

वडोदरा के भोज गाँव में हिन्दुओं पर हुए इस हमले के बाद पुलिस ने 16 लोगों के विरुद्ध FIR दर्ज की है। इस FIR की कॉपी ऑपइंडिया के पास है। FIR में सामने आया है कि कैसे मुस्लिम भीड़ ने हिन्दुओं पर हमला किया और उन्हें मारने की कोशिश की।

इस मामले में 22 जनवरी 2024 को FIR दर्ज हुई थी। FIR में बताया गया है कि शोभायात्रा भोज गाँव में दोपहर 2 बजे रामजी मंदिर से चालू हुई। इसमें 500 से 700 हिन्दू शामिल थे। इस यात्रा में वह गाते-बजाते हुए चल रहे थे। उनके साथ 3 डीजे भी थे। यह यात्रा लगभग डेढ़ घंटे के बाद नगीना मस्जिद पहुँची। आयोजकों ने बताया है कि इस दौरान डीजे बंद कर दिया गया था।

घटना को लेकर दर्ज एफआईआर के अंश

इसी समय कुछ मुस्लिम इस यात्रा के सामने नगीना मस्जिद वाली गली में आ गए और धमकियाँ देने लगे। उन्होंने कहा, “दोबारा ऐसा करने की कोशिश मत करना, क्योंकि आज हम 2-4 हिन्दुओं को काटेंगे। जितने भी हिन्दू सामने पड़े मार दो।” इसके बाद कट्टरपंथी यात्रा पर हमला करने के लिए आगे बढ़ गए और चिल्लाने लगे कि किसी को जिन्दा नहीं छोड़ना है।

मुस्लिमों के हमले के बाद यात्रा में शामिल लोग वहाँ से हट गए। इस दौरान उन पर पत्थरों की बारिश होने लगी। मुस्लिम भीड़ ने उन्हें मारने की नीयत से हमला जारी रखा। यहाँ मौजूद पुलिसकर्मियों ने भी दंगाइयों को रोकने की कोशिश की लेकिन दंगाई पत्थर बरसाते रहे। इसके बाद पुलिस ने लोगों को बचाने के लिए मुस्लिम भीड़ पर लाठीचार्ज किया और उन्हें वहाँ से खदेड़ दिया। इस हमले में 8 लोग घायल हैं, जिनमें 6 महिलाएँ हैं। हमले में पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। इन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।

FIR में यह भी बताया गया है कि इससे पहले हिन्दुओं ने जो भगवा ध्वज रास्ते में लगाए थे, उन्हें भी 18 जनवरी को उखाड़ कर फेंक दिया गया था। इस विषय में यात्रा के आयोजकों ने पुलिस को सूचना भी दी थी। इस हिंसा के मामले में पुलिस ने धारा 120बी, 143, 144, 147 148, 149, 152, 153A, 295A, 323, 332, 324, 307 के तहत मामला दर्ज किया है। बताया गया है कि अभी तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया है।

‘सेक्स डॉल’ वाले अश्लील ड्रेस लाते थे इस्लामी आतंकी, बंधक बनाई गई लड़कियों को पहना कर करते थे बलात्कार: इतना हुआ यौन शोषण कि पीड़िताओं को नहीं आ रहे पीरियड्स

“हमास की कैद में कई महिलाएँ थीं। उनके साथ कई बार बलात्कार किया गया। ऐसी कई औरतें थीं जिन्हें लंबे वक्त से पीरियड्स नहीं आए। ये संकेत है कि वे गर्भवती हो सकती हैं।” – ये कहना है हमास आंतकियों की कैद से छुड़ाई गई 48 साल की सामाजिक कार्यकर्ता शेन गोल्डस्टाइन एल्मॉग का।

बताते चलें कि शेन ने ये खुलासा इजरायली संसद यानी नेसेट में मंगलवार (23 जनवरी, 2024) को युद्ध में यौन और लिंग आधारित हिंसा विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान किया। इजरायली अखबार YnetNews की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस कार्यक्रम के दौरान हमास की बंधक रही महिलाओं ने ऐसे खौफ में ला देने और सिहरन पैदा करने वाले वाकए बताए हैं, जो उन्होंने वहाँ रहते देखे। इन औरतों ने हमास के बंधक होने की तुलना धरती पर नरक से की है।

इसके साथ ही हमास आंतकियों के चंगुल से बच कर निकल आई इन महिलाओं ने उन लोगों के लिए फ़िक्र जताई है जो अब भी 7 अक्टूबर, 2023 के इजरायल पर हमले के बाद से अभी भी दरिंदे आतंकवादियों की कैद में हैं।

YnetNews ने एल्मॉग के हवाले से लिखा, “कैद में कई ऐसी महिलाएँ हैं जिन्हें लंबे वक्त से मासिक धर्म नहीं हुआ है और शायद यही वह है जिसके लिए हमें प्रार्थना करनी चाहिए कि उनका शरीर उनकी रक्षा करेगा और वो ऐसी प्रेग्नेंसी से बच पाएँ। उन्हें वापस लाने के लिए हमें सब कुछ करने की ज़रूरत है।”

उन्होंने आगे बताया कि वहाँ खाने से लेकर सफाई तक हालात मुश्किल हैं। उन पर बड़ा खतरा भी मँडरा रहा है। उन्होंने बताया, “हम नहीं जानते कि कब इन बंधकों को नुकसान पहुँचाने के आदेश हो जाएँ। मैं उनके बारे में बहुत फिक्रमंद हूँ।” शेन गोल्डस्टाइन एल्मॉग ने आगे कहा, “आतंकवादी लड़कियों के लिए बेकार अश्लील तरह के कपड़े लाते हैं। वो उनके लिए गुड़ियों को पहनाने वाले उत्तेजक कपड़े लाते हैं। उन्होंने लड़कियों को अपनी गुड़िया में बदल दिया, ताकि वे जो चाहें कर सकें और ये यकीन लायक़ नहीं कि वे (लड़कियाँ) अभी भी वहीं हैं।”

उन्होंने कहा, “मैं साँस नहीं ले सकती। मैं इस सबका सामना नहीं कर सकती और यह बहुत मुश्किल है। हम छोड़े गए 4 महीने होने वाले हैं और वे अभी भी वहीं हैं।” शेन गोल्डस्टाइन एल्मॉग ये भी बताया कि कैद में उनकी एक ऐसी लड़की से बात हुई थी जिसे बंधक बनाने के बाद से हमास आतंकवादी लगातार उसका बलात्कार कर रहे थे।

बताते चलें कि शेन गोल्डस्टाइन एल्मॉग को उनके तीन बच्चों सहित 7 अक्टूबर, 2023 को गाजा की सीमा के पास केफ़र अज़ा किबुत्ज़ से हमास के आतंकियों ने अगुवा कर लिया था। ये इलाका हमास के आतंकवादी हमलों के दौरान सबसे अधिक प्रभावित हुआ था। वहाँ उनके पति और बड़ी बेटी को मार डाला गया। वो उन किस्मत वाले बंधकों में से एक है जिन्हें 26 नवंबर, 2023 को हमास आतंकियों ने छोड़ा था।

उनके साथ बंधक बनाई गई उनकी बेटी अगम एल्मॉग ने आर्मी रेडियो से गाजा पट्टी में कैद अपने वक्त के बारे में बताते हुए कहा था, “मुझे शहर में हमारे जाने की याद है। मैंने बस अपनी माँ से कहा था कि वे मुझे प्रताड़ित करने वाले हैं, वे मेरा बलात्कार करने वाले हैं।”

उस दौर को याद कर उसने आगे कहा, “शरीर जो महसूस करता है उसकी मुकाबले में शब्द बहुत छोटे हैं। तो यह ऐसा ही था।” इसी तरह 34 साल की शेरोल एलोनी क्यूनिओ इज़राइल-हमास अदला-बदली समझौते में रिहा होने वाली एक बंधक हैं।

वो अपनी दो छोटी लड़कियों के साथ गाजा में बंधक के तौर तक 52 दिनों तक रहीं थी। लेकिन उन्हें अपने पति की जान का डर है जो अभी भी बमबारी वाले फिलिस्तीनी इलाके में बंदी हैं। अब वह अपने तीन साल के जुड़वाँ बेटियों जूली और एम्मा के साथ इजरायल घर वापस आ गई है।

वो अन्य 137 बंधकों को रिहा कराने की गुहार लगा रही है। उन्होंने अपने इंटरव्यू में समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, “हर मिनट अहम हैं। वहाँ हालात अच्छे नहीं हैं और उनकी रिहाई का वक्त लंबा खींचता जा रहा हैं।” शेरोल एलोनी के मुताबिक, “यह एक रूसी रूलेट जैसा जानलेवा खेल है।”

आतंकवादियों ने गाजा से एक मील से कुछ अधिक दूरी पर किबुत्ज़ में उनके घर पर कब्ज़ा कर उसमें आग लगा दी थी और बंदूक की नोक पर उन पति डेविड और दो बेटियों सहित बंधक बना अपने साथ ले गए थे।

उसने बताया कि उनकी दूसरी बेटी को 10 दिनों के लिए गाजा में उनसे अलग रखा गया था। वो बताती हैं, “आप नहीं जानते कि शाम को पीटा (रोटी) मिलेगा या नहीं, इसलिए सुबह आप शाम के लिए कुछ बचाकर रख लेते थे। उन्होंने आगे कहा, “टॉयलेट जाने की मंजूरी का इंतजार करना पड़ता था। लड़कियों के लिए एक परेशानी थी, इसलिए उन्हें सिंक और कूड़ेदान का यूज करना पड़ता था।

वो आगे कहती हैं, “कभी-कभी जब बिजली गुल हो जाती थी, तो वे हमें दरवाज़ा खोलने देते थे। वे पर्दा डालते थे और फिर हम फुसफुसाते थे। आप केवल फुसफुसाहट के साथ एक बच्चे को 12 घंटे तक कैसे साथ रख सकते हैं?” वह कहती हैं कि हर दिन रोना, हताशा और फिक्र होती है। हम कब तक यहाँ रहेंगे? क्या वे हमारे बारे में भूल गए हैं? क्या उन्होंने हमें छोड़ दिया है?

सार्वजनिक होगी ज्ञानवापी ढाँचे की ASI सर्वे रिपोर्ट, वाराणसी कोर्ट का आदेश: मुस्लिम पक्ष कर रहा था विरोध, वकील हरिशंकर जैन बोले – अब सबको पता चलेगा

वाराणसी कोर्ट ने बुधवार (24 जनवरी,2024) को एक अहम फैसला दिया है। इसमें ज्ञानवापी ढाँचे में ‘भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण’ (ASI) द्वारा किए गए वैज्ञानिक सर्वेक्षण को सार्वजनिक करने का आदेश दिया है। इस आदेश के साथ जिला न्यायाधीश एके विश्वेशा ने संबंधित पक्षों के ASI सर्वेक्षण रिपोर्ट की एक प्रति माँगने के लिए दायर आवेदनों का निपटारा कर दिया। इससे साफ है कि अब ये रिपोर्ट हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्ष के लोग देख पाएँगे।

ज्ञानवापी मामले पर हिंदू पक्ष की पैरवी कर रहे वकील हरि शंकर जैन ने कहा, “बहुत सारी आपत्तियाँ उठाई गईं कि ASI की रिपोर्ट को सार्वजनिक न किया जाए। आज कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुना और रिपोर्ट दोनों पक्षों को उपलब्ध कराने का फैसला किया। रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी जाएगी और सभी को पता चल जाएगा कि रिपोर्ट में क्या है।”

दरअसल ASI ने 18 दिसंबर, 2023 को सील बंद लिफाफे में ज्ञानवापी सर्वे की रिपोर्ट अदालत को सौंपी थीं। इसके बाद हिंदू पक्ष ने कोर्ट से रिपोर्ट सार्वजनिक करने की माँग की थी। हालाँकि, इस रिपोर्ट को सार्वजनिक न करने को लेकर मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था।

इसे लेकर हिंदू पक्ष के एक वकील अनुपम द्विवेदी ने कहा था कि ASI टीम ने 100 दिनों तक ज्ञानवापी परिसर का सर्वे किया था। ASI की रिपोर्ट वजनी होने की वजह से सीलबंद लिफाफे में अदालत को सौंपी गई थी। वहीं दूसरी तरफ मस्जिद का प्रबंधन देखने वाली ‘अंजुमन इंतजामिया’ की तरफ से रिपोर्ट को गुप्त रखने और जनता के सामने आने से रोकने के लिए आवेदन दायर किया गया था। इस पर वकील अनुपम द्विवेदी ने कहा था कि इसे रोकना सुप्रीम कोर्ट के फैसले के सार और सूचना के अधिकार के खिलाफ है।

बताते चलें कि वाराणसी जिला न्यायाधीश के 21 जुलाई के आदेश के मुताबिक, ASI ने वाराणसी में ज्ञानवापी परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया था। ये सर्वे इसलिए किया गया था ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि मस्जिद का निर्माण हिंदू मंदिर की पहले से मौजूद संरचना पर किया गया था या नहीं। इसके बाद 4 अगस्त, 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने ASI को ‘वजूखाना’ क्षेत्र को छोड़कर वाराणसी में ज्ञानवापी ढाँचे का सर्वेक्षण करने से रोक लगाने से इनकार कर दिया था। बताते चले की बीते साल इसी ‘वजूखाना’ क्षेत्र में ‘शिवलिंग’ मिला था।

इसके बाद ASI ने सुप्रीम कोर्ट को अंडरटेकिंग दी थी कि उसके द्वारा उस क्षेत्र में साइट पर कोई खुदाई नहीं की जाएगी और न ही ढाँचे को कोई नुकसान पहुँचाया जाएगा। इसके बाद कोर्ट ने वहाँ सर्वे करने की इजाजत दे दी थी। कोर्ट ने ये आदेश ‘अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी’ की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया था। ये कमेटी वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद का प्रबंधन करती है। कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट में इलाहाबाद हाइकोर्ट के आदेश (3 अगस्त, 2023) को चुनौती देते हुए ये याचिका दायर की थी।

इस आदेश में इलाहबाद हाई कोर्ट ने ASI सर्वेक्षण की मंजूरी दी थी। बताते चलें कि 21 जुलाई, 2023 को वाराणसी जिला न्यायाधीश ने ASI के निदेशक को पहले ही सील कर दिए गए वजूखाना को छोड़कर ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का वैज्ञानिक सर्वे करने का निर्देश दिया, ताकि ये पता लगाया जा सके कि ये मस्जिद एक हिंदू मंदिर की पहले से मौजूद संरचना के ऊपर बनाई गई है या नहीं।

इसके बाद 3 अगस्त, 2023 को इलाहाबाद HC ने वाराणसी कोर्ट के इस फैसले को बरकरार रखा था। बताते दें कि हाल ही में 20 जनवरी, 2024 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ज्ञानवापी मस्जिद के सील वजूखाने की सफाई कलेक्टर एस राजलिंगम की देखरेख में हुई थी। वहाँ नमाजी अक्सर अपने हाथ-पाँव धोते थे। वर्षों से शिवलिंग को अपमानित किया जा रहा है। ज्ञानवापी का मामला अदालत में चल रहा है। अब कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आला अधिकारियों की उपस्थिति में उस स्थल की साफ़-सफाई की जा रही है।

असल में इसके लिए हिन्दू महिलाएँ सुप्रीम कोर्ट पहुँची थीं। उन्होंने शिवलिंग मिलने वाली जगह पर स्वच्छता बनाए रखने की माँग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस आवेदन को स्वीकार कर लिया था। हिन्दू पक्ष के वकील सुधीर त्रिपाठी ने बताया कि कथित वजूखाना काफी गंदा हो गया था। वजह से ये माँग की गई। 16 जनवरी, 2024 को ही सुप्रीम कोर्ट ने इसकी साफ़-सफाई का आदेश दे दिया था। इस केस में वकील विष्णु जियान ने वजूखाने में बने शिवलिंग की सफाई को लेकर 2 जनवरी, 2024 सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दायर की थी।

इंग्लैंड के क्रिकेटर शोएब बशीर को नहीं मिला वीजा तो रोने-धोने पर उतरा ब्रिटिश मीडिया, रोहित शर्मा बोले – मैं वीजा ऑफिस में नहीं बैठता

इंग्लैंड के पाकिस्तानी मूल के गेंदबाज शोएब बशीर को भारत में टेस्ट खेलने के लिए वीजा मिलने में हुई देरी पर ब्रिटिश मीडिया रो रहा है। कुछ ब्रिटिश संस्थान भारत के साथ टेस्ट ना खेलने की अपील भी कर रहे हैं। वहीं भारतीय टीम के कप्तान रोहित शर्मा ने इस मुद्दे पर करारा जवाब दिया है।

इंग्लैंड की टीम भारत में 5 टेस्ट मैच खेलने के लिए आई है। यह टीम बेन स्टोक्स की कप्तानी में आई है। इसका भारत से पहला टेस्ट मैच कल (24 जनवरी, 2024) से हैदराबाद में होना है। इंग्लैंड के दौरे के लिए स्पिनर शोएब बशीर को टीम में शामिल किया गया था। यह उन डेब्यू मैच होता। अभी तक वह जूनियर लेवल का क्रिकेट खेलते थे।

20 वर्षीय शोएब बशीर को बाकी टीम के साथ भारत आना था। हालाँकि, उनको भारत में वीजा मिलने में कुछ दिक्कतें आईं। उनका वीजा अभी तक जारी नहीं हो पाया है। शोएब का वीजा जारी ना हो पाने के पीछे बताया जा रहा है कि वह लंदन में नहीं थे इसलिए उनका वीजा रुका है। बताया जा रहा है कि शोएब बशीर के वीजा पर लंदन स्थित भारतीय दूतावास में मोहर लगनी थी लेकिन उन्हें इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ने दुबई भेज दिया इसलिए उनके वीजा में देरी हुई।

शोएब बशीर स्वयं तो ब्रिटिश नागरिक हैं लेकिन उनके माता-पिता पाकिस्तान से इंग्लैंड आए थे। शोएब अभी तक अबूधाबी में थे लेकिन वीजा में आ रही दिक्कतों के कारण अब वह वापस इंग्लैंड चले गए हैं। उन्हें पहले मैच के लिए इंग्लैंड की टीम से बाहर कर दिया गया है।

शोएब बशीर के वीजा ना मिलने पर इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स ने कहा, “मैं नहीं चाहूँगा कि उसका (शोएब बशीर) का इंग्लैंड टीम में होने का पहला अनुभव इस प्रकार का हो, यह एक नए लड़के के लिए अच्छा नहीं है।” बेन स्टोक्स ने वीजा ना मिलने पर हैरानी भी जताई। वहीं भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने इस मामले में सवाल पूछे जाने पर कहा, “मैं शोएब का दर्द समझता हूँ लेकिन मैं वीजा ऑफिस में तो नहीं बैठता ना। मुझे उम्मीद है कि उसे वीजा मिल जाएगा और वह भारत खेलने आएगा।”

ब्रिटिश मीडिया ने भी इस मुद्दे में टिप्पणियाँ की हैं। ब्रिटिश मीडिया ने अपील की है कि इंग्लैंड भारत में अपना पहला मैच ना खेले क्योंकि उसके एक खिलाड़ी को वीजा ना मिले। यह अपील औपनिवेशिक मानसिकता रखने वाले ‘द टेलीग्राफ’ ने की है। अन्य ब्रिटिश मीडिया संस्थानों ने भी इसी तरह का प्रलाप किया है।

वहीं पूर्व भारतीय क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद ने असली कारण को उजागर करते हुए ब्रिटेन के रोने-धोने पर हमला बोला है। वेंकटेश प्रसाद ने लिखा, “ब्रिटेन में उनके (शोएब बशीर के) वीज़ा पर मोहर लगनी ज़रूरी थी। ECB ने यह सोचकर शोएब बशीर को UAE भेजा कि किसी तीसरे देश में इस पर मुहर लग जाएगी। बुनियादी प्रक्रियाओं का पालन न करना, चीजो को अपने हिसाब से मान लेना और फिर रोना-धोना अंग्रेजों की पुरानी आदत है। यदि यहाँ को दोषी है तो ECB है।”

न शादी की चिंता न शिक्षा की… राष्ट्रीय बालिका दिवस पर जानें मोदी सरकार की वो योजनाएँ जिनसे बेटियों को मिला मान

1ं.खेल की दुनिया में भारत की बेटियों ने रचा इतिहास…
2.बोर्ड परीक्षा में लड़कियों ने मारी बाजी…
3.भारत को चाँद तक ले गईं महिला वैज्ञानिक…
4.वीरांगना को मिली सेना की कमान…

ये चंद शीर्षक हैं जो आजकल समाचार में हर दूसरे दिन पढ़ने को मिलते हैं। कहीं से पता चलता है कि लड़कियाँ अपने शारीरिक बल से देश का गौरव खेल जगत में बढ़ा रही हैं तो कहीं मानसिक बल से अकादमिक क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। उनका अस्तित्व, उनकी उपलब्धियाँ देश से लेकर विदेश में चर्चा का कारण है। आज लोग गौरवान्वित हैं क्योंकि भारत का नाम रौशन हो रहा है। यही वजह है कि 24 जनवरी को दिन राष्ट्र बालिका दिवस को खुशहाली से जगह-जगह मनाया जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसकी शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “हम बालिकाओं की अदम्य भावना और उपलब्धियों को सलाम करते हैं। हम सभी क्षेत्रों में प्रत्येक बालिका की समृद्ध क्षमता को भी पहचानते हैं। वे परिवर्तन-निर्माता हैं, जो हमारे देश और समाज को बेहतर बनाती हैं। हमारी सरकार एक ऐसे राष्ट्र के निर्माण के लिए कई प्रयास कर रही है, जहाँ प्रत्येक बालिका को सीखने, बढ़ने और फलने-फूलने का अवसर मिले।”

इसके अलावा, अन्य बड़ी हस्तियाँ और राजनेता भी इस दिवस की शुभकामनाएँ देकर इसकी महत्ता बता रही हैं। स्कूल हो या कॉलेज, लड़कियों को उनकी पढ़ाई, उनके पोषण, उनके कानूनी अधिकार, चिकित्सा सेवा, उनकी सुरक्षा जैसे मुद्दों पर जागरूक किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर रील्स बेटियों को लेकर ऐसी डल रही हैं जो कभी सोची भी नहीं जा सकती थी कि बेटियों का इस प्रकार स्वागत होगा।

कन्या भ्रूण हत्या

ज्यादा वक्त नहीं बीता जब भारत को लेकर मीडिया खबरें छापता था कि भारत में कन्या भ्रूण हत्या सामान्य हो गई है। 24 मई 2011 को लैंसेट में प्रकाशित एक शोध की बात करें तो उसमें निकलकर आया था कि भारत के कई परिवार अपने दूसरे बच्चे का लिंग पता चलने पर उसे अबॉर्ट करवा देते थे। टोरंटो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया था कि भारत में एक दशक में (2011 के हिसाब से) 3.1 से 6 मिलियन गर्भपात हुए, जिनमें अधिकाँश शिक्षित और धनी परिवारों ने कराए।

ऐसा नहीं था कि भारत कन्या भ्रूण हत्या के कारण सिर्फ विदेशी मीडिया में बदनाम हो रहा था। भारत की महिला नेता मेनका गाँधी ने खुद इस बात को 2015 में मीडिया में कहा था कि भारत में 2000 लड़कियाँ प्रतिदिन मारी जाती हैं। गार्जियन की रिपोर्ट में तो यहाँ तक अनुमान थे कि अगर इसी तरह चयनात्मक गर्भपात चलता रहा 2030 तक तो भारत में 6.8 मिलियन कम लड़कियों का जन्म दर्ज किया जाएगा।

मोदी सरकार ने स्थिति सुधारने के लिए चलाई कई योजनाएँ

2008 में इस दिन को राष्ट्रीय बालिका दिवस को मनाए जाने के ऐलान के बावजूद भी देश में लड़कियों की स्थिति नहीं सुधरी थी। समाज का कुंठित वर्ग अपनी कुंठा में उनके विकास को रोक रहा था, उनके जीने के अधिकार को छीन रहा था। तर्क दिए जाते थे कि उनके बड़े होने पर उन्हें पढ़ाना पड़ेगा और उनकी शादी करवानी पड़ेगी, जिसमें खर्चा आएगा।

2014 में जब मोदी सरकार आई तो उन्होंने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया और शुरुआत से ही लड़कियों को लेकर नई नई योजनाओं की घोषणा की ताकि समाज की यह सोच बदली जा सके कि लड़कियाँ उनपर शिक्षा, शादी जैसे कारणों की वजह से भार बिलकुल नहीं हैं।

इनमें कुछ का जिक्र हम यहाँ कर रहे हैं

बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ: साल 2015 में प्रधानमंत्री मोदी ने हरियाणा के पानीपत में इस योजना का शुभारंभ किया था। इसका उद्देश्य ही था कि लिंग अनुपात को सुधारा जा सके और समाजिक कुरीतियों से बेटियों को बचाया जा सके। इस योजना में था कि माता-पिता द्वारा बेटी का खाता खुलवाना होगा। फिर 14 वर्ष की आयु पूरी होने तक इसमें निरंतर निर्धारित राशि जमा की शर्त है। ये राशि 168000 रूपए तक होगी। इसके बाद बेटी के 18 वर्ष पूरे होने पर वह जमा राशि का 50% निकाल सकेंगे और 21 वर्ष पूरे होने पर कुल राशि निकाली सकेगी। 21 साल की उम्र तक ये राशि 607128 रूपए हो जाएगी।

सुकन्या समृद्धि योजना: सुकन्या समृद्धि योजना की शुरुआत भी 2015 में हुई थी। इस स्कीम में था कि 10 वर्ष से कम उम्र की लड़की का खाता खोलकर इसमें 1000 की धनराशि 15 वर्ष तक जमा की जाती है। यह पैरसा बिना टैक्स कटे 7.6 प्रतिशत के दर पर बेटी के शादी के वक्त मिलेगा जिससे आराम से उसका विवाह किया जा सके।

बालिका समृद्धि योजना: यह योजना एक स्कॉलरशिप स्कीम है जो गरीबी रेखा से नीचे वाली युवा लड़कियों और उनकी माताओं को आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए बनाई गई है। इसका लाभ शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में मिलता है। इसमें बालिका के जन्म के बाद बालिका की माँ को 500 रुपए दिए जाते हैं। इसके अलावा स्कूल जाते समय, उस बालिका को 300 रुपए से 1000 रू तक की वार्षिक छात्रवृत्ति मिलने की बात है जिसे बालिका 18 वर्ष की आयु के बाद निकाल सकती है।

CBSE उड़ान स्कीम: लड़कियों के लिए CBSE उड़ान योजना केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा चलाई जाती है। इस योजना का उद्देश्य भारत में प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग और तकनीकी कॉलेजों में लड़कियों के एडमिशन को बढ़ाना है।

इसमें 11 वीं और 12 वीं कक्षा में छात्राओं के लिए मुफ्त पढ़ाई के सामान / ऑनलाइन जैसे वीडियो अध्ययन सामग्री आदि उपलब्ध कराई जाती है। वीकेंड पर ऑनलाइन क्लास की सुविधा उपलब्द होती है। करियर को लेकर सलाह दी जाती है। उनकी प्रगति की निरंतर निगरानी और ट्रैकिंग की जाती है।

राष्ट्रीय बालिका दिवस क्यों जरूरी

बता दें कि ‘राष्ट्रीय बालिका दिवस’ के मौके पर आज इस तरह बालिकाओं के लिए शुरू की गई स्कीमों को जानना और ये समझना कि लोगों की सोच लड़कियों के प्रति क्या रही है, ये बेहद जरूरी है। कोई भी समाज बेहतर तभी होता जब उसे पता हो कि इतिहास में शोषण क्या कहकर और कैसे किया गया…।

एक समय तक लड़कियों का अनुपात लड़कों के मुकाबले घटना देश के कई राज्यों के लिए काफी चिंता का विषय था। हालाँकि सरकार के प्रयासों का असर ये देखा गया कि धीरे-धीरे भारत का कुल लिंगानुपात बढ़कर 1020 कन्या हो गया।

सरकार आज बेटियों के लिए बाकी योजनाओं को मजबूत करने पर भी काम कर रही है। कोशिश है कि एक बालिका के जीवन में आने वाले संघर्षों को हर स्तर पर कम किया जा सके। उसे समाज के शोषण से बचाने के लिए कानून लाए जा रहे हैं। उसे उसके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। उसे उसकी महत्वता से अवगत कराया जा रहा है। उसे बताया जा रहा है कि केवल उसकी सीमा घर तक नहीं है। वो इसरो की वो महिला साइंटिस्ट भी बन सकती हैं जिन्होंने चंद्रयान को चाँद तक पहुँचाया और देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी।

देहरादून-शाहजहाँपुर में फेंके भगवा ध्वज, पुणे FTII में ‘बाबरी को याद रखो’ वाले पोस्टर: राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा पर जगह-जगह दिखी घृणा, कर्नाटक में पुलिस ने ही रोकी शोभा यात्रा

अयोध्या में सोमवार (22 जनवरी, 2024) को राम मंदिर में हुई प्राण प्रतिष्ठा के बाद कई जगह पर असामाजिक तत्वों ने विवाद की स्थिति पैदा की। कहीं हिन्दुओं के उत्सव पर पत्थर बरसाए गए तो कहीं विवादित पोस्ट डाली गईं। इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी राम मंदिर को लेकर घृणा देखने को मिली। कहीं कहीं से हिन्दू ध्वजों को फाड़ने की घटनाएँ सामने आई हैं। यह घटनाएँ कर्नाटक से लेकर उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र से लेकर छत्तीसगढ़ में हुई हैं।

कर्नाटक में माहौल गर्म, लगा दी धारा 144

कर्नाटक में कई जगह से गड़बड़ी की खबरें आई हैं। जानकारी के अनुसार, कर्नाटक के कलबुर्गी में राम उत्सव समिति द्वारा निकाली जा रहे भगवान श्रीराम की शोभा यात्रा को पुलिस ने रोका। इसके बाद यहाँ मुस्लिम युवक भी बड़ी संख्या में इकट्ठा हो गए और हंगामा करने लगे। यात्रा को रोके के बाद सोमवार (22 जनवरी, 2024) को यहाँ के तहसीलदार सैय्यद शाश्वाली ने धारा 144 लगा दी, जिससे लोग एकत्र ना हों।

इसके अलावा कर्नाटक के बेलगावी में भी प्राण प्रतिष्ठा का उत्सव मना रहे हिन्दुओं पर पथराव किया गया। यहाँ मुस्लिम इलाके में यात्रा निकाल रहे हिन्दुओं के ऊपर पत्थरबाजी हुई। यह घटना भी सोमवार (22 जनवरी, 2024) की ही है। बताया गया कि जहाँ पथराव हुआ वह मुस्लिम जनसंख्या वाले इलाके हैं और यहाँ उत्सव मना रहे हिन्दू ‘जय श्री राम’ के नारे लगा रहे थे जो उन्हें पसंद नहीं आया।

पुणे में सामने आए पोस्टर, लिखा – बाबरी को याद रखो

राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के कार्यक्रम के साथ ही पुणे के ‘भारतीय फिल्म और टेलीविजन संस्थान’ (FTII) में कुछ पोस्टर सामने आए। इन पोस्टर में ‘बाबरी को याद रखो’ लिखा हुआ था। इसके अलावा इन पोस्टर में अन्य कई भड़काऊ बातें भी लिखी हुई थी। पोस्टर की जानकारी मिलने पर पुलिस ने कार्रवाई चालू कर दी है। पुलिस ने पोस्टर भी हटवाए हैं।

छतीसगढ़ में विवादित ढाँचे को लेकर आपत्तिजनक पोस्ट, हिन्दू संगठन गुस्सा

छतीसगढ़ के राजनांदगाँव में मुस्लिम युवक युवतियों ने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को लेकर विवादित बातें की। उन्होंने सोशल मीडिया पर विवादित ढाँचे बाबरी की तस्वीर को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया और उसको लेकर आपत्तिजनक बातें लिखीं। इन विवादित पोस्ट करने वालों के नाम चिंटू खान, चमन खान और सालिका खान (युवती) हैं। यह घटना भी 22 जनवरी की बताई जा रही है। इनमें से दोनों युवकों को गिरफ्तार कर लिया गया है। युवती अभी फरार है। हिन्दू संगठन इस पोस्ट के कारण आहत हैं और उन्होंने स्थानीय थाने खैरागढ़ पर प्रदर्शन भी किया है।

देहरादून और शाहजहाँपुर में धर्म ध्वजाओं का अपमान

उत्तराखंड के देहरादून और उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर से हिन्दू धर्म ध्वजाओं के अपमान की भी खबर सामने आई है। जानकारी के अनुसार, 22 जनवरी को देहरादून के कुंजाग्रांट में बड़ी स्क्रीन लगाकर प्राण प्रतिष्ठा देखने का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस दौरान यहाँ सजावट की गई थी जिसमें भगवा झंडे भी लगाए गए थे।

जब कार्यक्रम खत्म हो गया और लोग अपने घरों को चले गए तो तीन मुस्लिम युवकों फिरोज, शाबत और शोएब ने झंडों को यहाँ से उठा लिया और अमर्यादित कृत्य किया। इस मामले की जानकारी होने पर हिन्दू संगठनों ने पुलिस से कार्रवाई की मांग की और प्रदर्शन किया। पुलिस ने अब इन तीनों को गिरफ्तार कर लिया है।

वहीँ उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर में भी भगवा ध्वज का अपमान किया गया। जानकारी के अनुसार, शाहजहाँपुर के बतलैया गाँव में 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा के उपलक्ष्य में यात्रा निकाली गई थी। इसमें गाँव को सजाया गया था और जगह जगह पर भगवा झंडे लगाए गए थे। गाँव के कुछ मुस्लिम व्यक्तियों ने यह झंडे उतार कर फेंक दिए और इन पर गंदगी भी डाली। हिन्दू कार्यकर्ताओं ने इस मामले में ताज्जु, शाहनवाज, इकबाल, अजमल समेत 17 लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करवाया।

मीरा रोड के जिस इलाके में हिंदुओं पर हुआ हमला, वहाँ लगा रखे हैं बैरिकेड, आधार कार्ड चेक कर देते हैं एंट्री: बीजेपी MLA का खुलासा

मुंबई से सटे ठाणे के मीरा रोड-भायंदर इलाके में अब भी तनाव है। 21 जनवरी 2024 को यहाँ राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा को लेकर निकाली गई हिंदुओं की रैली पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने हमला किया था। भायंदर की बीजेपी विधायक गीता भरत जैन ने पुलिस कमिश्नर से मिलकर घटना की शिकायत की है।

जैन का कहना है कि पुलिसिया कार्रवाई के बाद भी मीरा रोड इलाके में हिंदुओं को लेकर नफरत देखी जा रही है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने जो दावे किए उसके अनुसार इस्लामी कट्टरपंथियों ने इस इलाके में बैरिकेड लगा रखे हैं और आधार कार्ड चेक कर एंट्री देते हैं।

गीता भरत जैन ने कहा, “कमिश्नर साहब को हमने कहा कि उस दिन महिलाओं के साथ अभद्रता हुई। एक सामान्य फैमिली अगर अपने धर्म की ध्वजा लेकर जा रही है तो ये उसका अधिकार है। अगर कोई एक इलाका ये कहता है कि यहाँ ये पताका नहीं चलेगी। उस परिवार को गिरा दिया जाता है। उस पर थूका जाता है। उस पर उल्टी की जाती है। महिलाओं को खींचा जाता है और कहा जाता है कि अब तुम्हारा राम बचाने आएगा क्या। अब आप ‘अल्लाह हू अकबर बोलो’ तभी हम छोड़ेंगे। ये स्वतंत्रता छीनने की बात है। लोकशाही के खिलाफ जाने की बात है। यह हम सहन नहीं करेंगे।”

विधायक जैन ने कहा, “दूसरा एक बैरिकेड लगाया है। उस इलाके से हमें जाना है तो हमारा आधार कार्ड बताकर जाना है। ये कौन सी लोकशाही है? ऐसा कौन सा इलाका है? ऐसे कोई इलाके नहीं होते। ये हमारा इलाका, ये आपका इलाका। यहाँ से मत जाइए तो ये जो चल रहा है, उससे हमने कमिश्नर साहब को अवगत कराया है और उन्होंने बैरीकेड हटाने के लिए कहा है।”

जैन के अनुसार उनकी ही पार्टी के एक अन्य विधायक नीतेश राणे भी इससे अवगत हैं। उन्होंने 24 घंटे में बैरिकेड नहीं हटाने पर खुद से कार्रवाई की बात कही है।

उन्होंने कहा, “नीतेश राणे ने कहा है कि अगर 24 घंटे में बैरिकेड नहीं हटा तो सब फिर आएँगे। बैरिकेड अपने आप हटाएँगे और वहाँ से ही निकलेंगे। तब देखते हैं कि किसका इलाका है। आज पहला बुलडोजर चला है। आगे देखते हैं कि ये कार्रवाई कंटीन्यू होती है कि नहीं। हम चाहते हैं कि जितना अवैध कब्जा है, वे तोड़े जाएँ और जल्द से जल्द ये कार्रवाई पूरी हो।”

विधायक गीता जैन ने शांतिनगर का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रशासन ने उनसे हटने को कहा है। लेकिन उनकी दादागिरी देखिए कि वो वहीं बैठे हैं। प्रशासन के अधिकारियों को मारना, पुलिस वालों पर हाथ उठान ये सब नहीं सहा जाएगा। लोकशाही है। हम सहिष्णु हैं। कायर नहीं हैं।

बताते चलें कि मीरा रोड में इस्लामी दंगाइयों ने हिन्दू भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए बजरंग बली की छवि वाले पोस्टर भी फाड़े। इन झंडों पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने उल्टी तक की। इस केस में पुलिस ने अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया।

पुलिस ने ये कार्रवाई हिंसा पीड़ित विनोद जायसवाल की शिकायत पर दर्ज FIR के तहत की है। FIR में कहा गया है कि 21 जनवरी की रात को 10:30 बजे जायसवाल की कार को मीरा रोड पर 50-60 लोगों ने घेरकर हमला किया। उनकी गाड़ी पर लाठी-डंडों से हमला किया और उस पर लगा रामलला झंडा भी उखाड़ दिया। बताते चलें कि जिन इस्लामी कट्टरपंथियों ने हिन्दुओं पर हमला बोला था उनके अवैध निर्माणों पर बुलडोजर कार्रवाई भी की गई है।