Home Blog Page 1221

IAS-IPS, डाॅक्टर… कुछ भी बने मुस्लिम औरत पर रहे हिजाब में ही: सांसद बदरुद्दीन अजमल ने खुले बाल को बताया ‘शैतान की रस्सी’, मेकअप लगाने से भी मना किया

असम के मुस्लिम नेता और सांसद बदरुद्दीन अजमल ने मुस्लिम महिलाओं के पहनावे को लेकर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि अच्छे पेशों वाली महिलाओं को हिजाब पहनना चाहिए वरना उन्हें कोई मुस्लिम के तौर पर नहीं पहचानेगा। उनके इस बयान पर विवाद हो गया है।

AIUDF सुप्रीमो बदरुद्दीन ने यह बयान असम के करीमगंज में एक जनसभा में दिया। उन्होंने कहा कि अच्छे पेशे में लगी महिलाएँ जैसे कि IAS, IPS और डॉक्टरों के लिए हिजाब पहनना अनिवार्य किया जाना चाहिए। इससे उनकी मुस्लिम पहचान का पता लगेगा।

उन्होंने कहा, “अगर मुस्लिम महिलाएँ अपने बाल नहीं ढकेंगी या हिजाब नहीं पहनेंगी तो उन्हें मुस्लिम के तौर पर कैसे पहचाना जाएगा?”

उन्होंने बताया कि हिजाब मुस्लिम महिलाओं के लिए एक विकल्प नहीं बल्कि अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि खुले बाल शैतान की रस्सी होते हैं और महिलाओं का मेकअप लगाना शैतानों वाला काम है।

बदरुद्दीन अजमल ने कहा, “मैं जब बाहर जाता हूँ तो देखता हूँ कि मुस्लिम लडकियाँ हिजाब पहने हुए होती हैं और सर नीचे की तरफ करके आँखे झुका कर चलती हैं। असम में मुस्लिम लड़कियाँ ऐसा नहीं करती, सर के बाल छुपा के रखना इस्लाम में है।”

बता दें कि अजमल ने करीमगंज में एक मस्जिद और कब्रिस्तान का शिलान्यास करने के दौरान यह विवादित बयान दिया। इससे पहले उन्होंने एक बयान में कहा था, “ज्यादातर मुसलमान आपराधिक प्रवृति के पृष्ठभूमि के क्यों हैं? डकैती, बलात्कार, लूट जैसे अपराधों में मुसलमान नंबर वन क्यों हैं? हम जेल जाने में नंबर वन क्यों हैं? क्योंकि ज्यादातर मुस्लिम पढ़ाई नहीं करना चाहते हैं।”

इस मामले में इंडिया टुडे से बातचीत में बदरुद्दीन अजमल ने बाद में अपनी सफाई पेश की थी। उन्होंने कहा था, “मैंने दुनिया भर के मुसलमानों में शिक्षा की कमी देखी है। मुझे बहुत दुख है कि मुस्लिम पढ़ाई नहीं करते, उच्च शिक्षा के लिए नहीं जाते। यहाँ तक कि मैट्रिक की परीक्षा तक पास नहीं कर पाते। इसीलिए वो अपराध की दुनिया में निकल जाते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “मैं चाहता हूँ कि मुस्लिम बच्चे ज्यादा से ज्यादा पढ़ाई करें और अच्छे रास्ते पर चलें।”

‘प्राण प्रतिष्ठा से मुर्दा क्यों नहीं चल सकता है?’: सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामलला को बताया ‘पत्थर’, बोले – ये ढोंग है, पाखंड है, आडम्बर है

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने शायद अयोध्या में राम मंदिर बनने से बौरा गए हैं। अक्सर ही हिंदू देवी-देवताओं और सनातन पर विवादास्पद बयान देकर सुर्खियों बटोरने वाले मौर्य ने रामलला प्राण प्रतिष्ठा को ढोंग और आडंबर कहा है।

दरअसल मंगलवार (23 जनवरी, 2024) को सपा नेता ‘कर्पूरी ठाकुर सेना’ के गाजीपुर लंका मैदान में जननायक कर्पूरी ठाकुर जी के जन शताब्दी वर्ष समारोह में मौजूद थे। इस दौरान कभी बीजेपी में रहे मौर्य ने रामलला प्राण प्रतिष्ठा को लेकर अभद्र और आपत्तिजनक बात कही।

स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा, “देखो-सुनो, पूरी दुनिया में भारत एक ऐसा देश है जहाँ पत्थरों में प्राण प्रतिष्ठा किया जाता है। हमारे समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता हैं भाटी जी, जिन्होंने कहा कि संत जी वो तो अच्छा है, अपने परिवार में मरने वाले लोगों की जनवासे होती हैं। उसमें भी प्राण प्रतिष्ठा कर दो। हमेशा जिंदा रहा करेंगे, फिर मरेंगे ही नहीं अमर हो जाएँगे।”

सपा नेता ने आगे कहा, “अगर प्राण प्रतिष्ठा करने से पत्थर सजीव हो जाता है तो प्राण प्रतिष्ठा करने से मुर्दा क्यों नहीं चल सकता है। यहाँ पर पाखंड है, ढोंग है, आडंबर है। और वैसे भी जो खुद भगवान है, जो सबका कल्याण करता है। हम इंसान की क्या हैसियत की हम उसको प्राण प्रतिष्ठा करें।”

बताते चलें कि ये पहली बार नहीं है जब स्वामी प्रसाद मौर्य के मुँह से सनातन और हिंदू देवी-देवताओं के लिए अपशब्द निकले हैं। इसके पहले सपा नेता मौर्य ने 22 जनवरी, 2023 को कहा था कि अब करोड़ों लोग रामचरितमानस को नहीं पढ़ते, इसमें सब बकवास है। स्वामी प्रसाद ने सरकार से रामचरितमानस में कुछ अंश को आपत्तिजनक बताते हुए उसे हटाने की माँग तक कर डाली थी।

उन्होंने कहा था कि अगर वो अंश न हट पाए तो पूरी किताब को ही प्रतिबंधित कर देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि वो रामचरितमानस को धर्म ग्रंथ नहीं मानते क्योंकि इस किताब को तुलसीदास ने अपनी खुद की खुशी के लिए लिखा था।

स्वामी प्रसाद ने 25 जनवरी, 2023 को भी साधु-संतों का अपमान किया था। तब सपा नेता ने कहा था कि उनके कहने पर जनजाति, दलित, पिछड़े, और महिलाएँ मंदिर में आना बंद कर दें तो चढ़ावा बंद हो जाएगा। इससे उनकी (संत) पेट पूजा बंद हो जाएगी। इसलिए, वे (संत) पागलों की तरह भौंक रहे हैं।

इससे पहले स्वामी प्रसाद मौर्य ने 27 जनवरी, 2023 को ट्वीट किया था, “हाल ही में मेरे द्वारा दिए गए बयान पर कुछ धर्म के ठेकेदारों ने मेरी जीभ काटने एवं सिर काटने वालों को इनाम घोषित किया है। अगर यही बात कोई और कहता तो यही ठेकेदार उसे आतंकवादी कहते। किंतु अब इन संतों, महंतों, धर्माचार्यों व जाति विशेष लोगों को क्या कहा जाए – आतंकवादी, महाशैतान या जल्लाद?”

सपा नेता मौर्य बयान का ही दुष्प्रभाव था कि 29 जनवरी, 2023 में उनके समर्थन में देवेंद्र यादव और सुरेश यादव ने रामचरितमानस की फोटो कॉपी किए पेज जलाए गए थे। इन दोनों पर ही हिंदू महाकाव्य रामचरितमानस की प्रतियों का अनादर करने और उन्हें जलाने के आरोप हैं।

इलाहबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने जनवरी 2024 को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में रखे जाने के खिलाफ दोनों आरोपितों द्वारा दायर याचिकाओं को भी खारिज कर दिया है।

शिवभक्ति में लीन सारा अली खान पहुँचीं घृष्णेश्वर मंदिर, हाथ जोड़ की प्रार्थना: इस्लामी कट्टरपंथी बिलबिलाकर बोले- मुस्लिम होने के नाम पर धब्बा हो तुम

बॉलीवुड अभिनेत्री सारा अली खान समय-समय पर अपनी शिवभक्ति प्रदर्शित करती रहती हैं। इस क्रम में कभी उनकी तस्वीरें केदारनाथ से देखने को मिलती हैं तो कभी उज्जैन के महाकाल से। हाल में वह एक और घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में दर्शन करने गईं थीं। इसकी तस्वीर भी उन्होंने शेयर की। फोटो में उन्हें माथे पर चंदन लगाकर शिवलिंग के आगे बैठे देखा जा सकता है। वह आँख बंद करके भक्ति में लीन हैं और सिर झुकाकर उन्हें प्रणाम भी करती हैं।

उनकी तस्वीर देख सोशल मीडिया यूजर्स हर बार की तरह उनकी तारीफ करते नहीं रुक रहे हैं। यूजर्स उन्हें कह रहे हैं कि मुस्लिम पिता होने के बावजूद सना ये नहीं भूलीं हैं कि उनकी माँ हिंदू हैं। लोग उनका ये रूप देख ये भी कह रहे हैं कि सना एक ही तो दिल है कितनी बार जीतोगी।

तस्वीर साभार:सारा अली खान का इंस्टा अकॉउंट

उनकी तस्वीर जहाँ ज्यादातर यूजर्स को पसंद आ रही है वहीं सारा अली खान से इस्लामी कट्टरपंथी हर बार की तरह नाराज भी हैं। हुसैन नाम का लड़का पूछता है उनसे- क्या तुम्हें कब्र में नहीं जाना? एक यूजर कहता है- अस्तागफिरउल्लाह कयामत करीब है।

शानू खान कहता है, “दिल से नफरत करता हूँ। पहले आपकी इज्जत करता था।” गुलजार हसन उन्हें अनफॉलो करने की बात कहता है। वहीं कंवल राजा कहता है, “सजदा सिर्फ अल्लाह के आगे झुकते हैं शिर्क। क्या आपने इस उम्र में हज करा। इतनी दौलत होने क बाद भी अल्लाह के घर न जाओ तो सब बर्बाद है।”

तस्वीर साभार:सारा अली खान का इंस्टा अकॉउंट

अकील कहता है- ये मुसलमान नहीं कर सकता कभी भी लेकिन भारतीय एक्टर और एक्ट्रेस फेम और पैसे के लिए ये सब कर लेते हैं। शर्मनाक।

अजनूर कहता है- कुछ भी कर लो फ्लॉप मूवीज ही बनाओगी। फारवा कहती है- मुस्लिम के नाम पर धब्बा हो तुम।

तस्वीर साभार: सारा अली खान का इंस्टा अकॉउंट

बता दें कि सारा अली खान को इस्लामी कट्टरपंथी आए दिन निशाना बनाते रहते हैं। गणेश पूजा पर गणपति के साथ फोटो डालने पर उन्हें जाहिल, गवार कहा जाता है। मंदिर जाने पर उन्हें लानतें भेजी जाती हैं। केदारनाथ जाती हैं तो उन्हें कहा जाता है कि अल्लाह से बड़ा कोई नहीं है। शिवरात्रि की पूजा करने पर उन्हें कहा जाता है कि मूर्ति पूजा हमेशा से हराम थी और रहेगी।

‘मानो हनुमान जी रामलला के दर्शन करने आए हों’: राम मंदिर के बाहर जब कतार में खड़े थे लाखों भक्त, गूढ़ मंडप से गर्भगृह में बंदर ने किया प्रवेश

22 जनवरी 2024 को अयोध्या के भव्य राम मंदिर में भगवान रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा हुई। इसके अगले ही दिन लाखों लोग अपने अराध्य के दर्शन को उमड़ पड़े। इसी दौरान एक बंदर भी गर्भगृह में प्रवेश कर गया। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एक्स/ट्विटर पर इसके बारे में जानकारी साझा करते हुए कहा है कि वहाँ तैनात सुरक्षाकर्मियों का कहना है, “ये हमारे लिए ऐसा ही है, मानो स्वयं हनुमान जी रामलला के दर्शन करने आए हों।”

यह घटना 23 जनवरी को शाम के करीब 5 बजकर 50 मिनट की है। उस समय तक करीब 3 लाख भक्त रामलला का दर्शन कर चुके थे और करीब दो लाख भक्त बाहर कतार में थे। पहले दिन 5 लाख से अधिक भक्तों ने राम मंदिर में दर्शन किया।

ट्रस्ट की ओर से किए गए पोस्ट में बताया गया है, “एक बंदर दक्षिणी द्वार से गूढ़ मंडप से होते हुए गर्भगृह में प्रवेश करके उत्सव मूर्ति के पास तक पहुंचा। बाहर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने उसे देखा। वे बंदर की ओर यह सोच कर भागे कि कहीं वह उत्सव मूर्ति को जमीन पर न गिरा दे। परंतु जैसे ही पुलिसकर्मी बंदर की ओर दौड़े, वैसे ही बंदर शांतभाव से भागते हुए उत्तरी द्वार की ओर गया। द्वार बंद होने के कारण पूर्व दिशा की ओर बढ़ा और दर्शनार्थियों के बीच में से होता हुआ, बिना किसी को कष्ट पहुँचाए पूर्वी द्वार से बाहर निकल गया।”

वैसे अयोध्या में वानर की इस तरह उपस्थिति की यह कोई पहली घटना नहीं है। राम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के दौरान कई प्रमुख मोड़ो पर इसी तरह वानर की उपस्थिति देखी गई है।

इसका एक प्रमाण पत्रकार हेमंत शर्मा की किताब ‘युद्ध में अयोध्या’ में मिलता है। फैजाबाद जिला अदालत ने 1 फरवरी 1986 को विवादित स्थल का ताला खोलने का आदेश दिया था। जिला जज कृष्णमोहन पांडेय के इस आदेश के पीछे एक काले बंदर की दैवीय प्रेरणा को माना जाता है। दरअसल उस दिन एक काला बंदर सारा दिन फैजाबाद की जिला अदालत की छत पर बैठा रहा था।

जज कृष्णमोहन पांडेय 1991 में प्रकाशित अपनी आत्मकथा में लिखा है, “जिस रोज मैं ताला खोलने का आदेश लिख रहा था, मेरी अदालत की छत पर एक काला बंदर पूरे दिन फ्लैग पोस्ट को पकड़कर बैठा रहा। वे लोग जो फैसला सुनने के लिए अदालत आए थे, उस बंदर को फल और मूँगफली देते रहे, पर बंदर ने कुछ नहीं खाया। चुपचाप बैठा रहा। फैसले के बाद जब डीएम और एसएसपी मुझे मेरे घर पहुँचाने गए, तो मैंने उस बंदर को अपने घर के बरामदे में बैठा पाया। मुझे आश्चर्य हुआ। मैंने उसे प्रणाम किया। वह कोई दैवीय ताकत थी।”

मुंबई की 96 साल की कारसेवक शालिनी रामकृष्ण दबीर ने विवादित ढाँचा विध्वंस की साक्षी रही हैं। उन्होंने 6 दिसंबर 1992 के दिन भी वानर की उपस्थिति के बारे में बताया था। उन्होंने कहा था, “वो पल याद आता है जब वो एक दीवार टूटती ही नहीं थी। हम सुबह से मारुति स्त्रोत बोलते थे, लेकिन कुछ हो नहीं रहा था। क्या करें क्या न करें की स्थिति थी, क्योंकि 5 बजे सूर्यास्त हो जाता तो हम कुछ नहीं कर पाते। फिर वहाँ पास के पेड़ से एक वानर आया वो दीवार पर बैठा। हम सब देखने लगे कि क्या बात है ये। वानर ने इधर-उधर सिर घुमाकर देखा और वहाँ से चला गया और फिर धड़ से दीवार गिरी। इसके बाद दो घंटे तक धूल के गुबार से हमें वहाँ कुछ दिखाई नहीं दिया था।”

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की इस पोस्ट पर यूजर ने भी ऐसे कॉमेंट किए हैं जो इस कलयुग में भी राम भक्त हनुमान के होने का प्रमाण देते नजर आ रहे हैं। यूजर समीरा ने दुनिया की सबसे खूबसूरत तस्वीर,’श्री राम और बजरंग बली एक साथ’ लिख रामजी जी की तस्वीर वाले भगवा झंडे को निहारते एक बंदर वाली तस्वीर पोस्ट की है।

उधर दूसरी तरफ Secular Chad नाम के एक यूजर ने ‘हम इतने खुश हैं तो हमारे बजरंग बली कितने होंगे जय श्री राम’ लिखकर एक वीडियो पोस्ट किया है। इस वीडियो में एक बंदर तूफान और हवा के बीच एक लकड़ी के पोल पर लगे रामजी की तस्वीर वाले भगवा झंडे की तरफ बढ़ते देखा जा सकता है।

बंगाल में इस बार दल-बल के साथ ED ने मारा छापा, फरार TMC नेता शाहजहाँ शेख के घर में ताला तोड़ घुसी: पिछली बार भीड़ ने किया था हमला

पश्चिम बंगाल के राशन घोटाला मामले में बुधवार (24 जनवरी 2024) की सुबह ईडी ने एक बार फिर तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता शाहजहाँ के घर जाकर छापेमारी की। पिछली बार रेड के दौरान हुए हमले के कारण इस दफा जाँच एजेंसी अपने साथ भारी सुरक्षा का इंतजाम करके टीएमसी नेता के घर पहुँची। उनके साथ 24 गाड़ियाँ थीं जिसमें जाँच टीम के अलावा सुरक्षाकर्मी भी थे।

जब टीम जाँच के लिए शाहजहाँ के घर पर गई तो वहाँ ताला था। उन्होंने उस ताले को तुड़वाया और घर के बाहर 100 जवानों को तैनात रखा। इस दौरान कहा जा रहा है कि लोकल पुलिस भी आई और उन्होंने ईडी टीम से कहा कि छापेमारी की वीडियोग्राफी वो करेंगे। हालाँकि ईडी टीम ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया।

बता दें कि इससे पहले 5 जनवरी 2024 को तृणमूल कॉन्ग्रेस नेता शाहजहाँ शेख के घर रेड मारने गई प्रवर्तन निदेशालय की टीम पर और सीआरपीएफ के जवानों पर 250-300 लोगों की भीड़ ने जानलेवा हमला किया था। उस दौरान पत्रकारों पर भी अटैक हुआ था और कई गाड़ियों में तोड़फोड़ भी हुई थी।

हमले में ईंट-पत्थर का इस्तेमाल हुआ था। सामने आई तस्वीर में एक आदमी का सिर खून से लथपथ नजर आ आया था। वो कपड़ा बाँधकर सुरक्षाकर्मियों के साथ खड़ा था। वहीं सुरक्षाकर्मी भी भीड़ के आगे बेबस दिखाई पड़ रहे थे। हमला करने वाली भीड़ में पुरुषों के साथ महिलाएँ भी थीं। सबने ईडी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उन्हें गालियाँ दीं थी, फिर हमला किया था।

बंगाल पुलिस ने इस मामले में 3 एफआईआर दर्ज की थी। इनमें एक शिकायत स्थानीयों द्वारा भी कराई गई थी जिसमें था कि टीम इलाके में अशांति फैला रही थी। हालाँकि, कोर्ट ने पुलिस को ई़डी टीम पर कार्रवाई करने से लिए रोक दिया था।

शाहजहाँ शेख कौन है?

गौरतलब है कि टीएमसी के नेता शाहजहाँ शेख को संदेशखली का बेताज बादशाह बताते हैं। शेख का कोई राजनीतिक बैकग्राउंड नहीं है लेकिन फिर भी वह राजनीति में बड़ी तेजी से आगे बढ़ा। वह जन्मा गरीब घर में ही था, जिसके कारण शुरुआत में उसने ट्रक ड्राइवर का काम किया, तो कभी कंडक्टर का। कभी सब्जी बेची तो कभी कुछ और किया। लेकिन इन सबके साथ वो संदेशखली में बड़े नेताओं से संपर्क भी बनाता रहा।

धीरे-धीरे समय आया कि वो खुद एक रसूखदार आदमी बन गया। 2006 में वामपंथी सरकार के वक्त उसने मोस्लेम शेख के सबसे करीबी सहयोगी के रूप में पैसे उगाही जैसे काम करने की शुरूआत की। धीरे-धीरे वो रियल स्टेट में घुसा और फिर मछली पालन जैसे कामों में लग गया।

सत्ता परिवर्तन के साथ उसका पाला भी बदल गया। 2011 में वामपंथी सरकार गई तो 2013 में वो टीएमसी में आ गया। यहाँ वह खाद्य मंत्री ज्योतिप्रियो मल्लिक का खास बन गया। भाजपा के साथ टीएमसी की झड़पों में भी शेख का नाम आता रहा। 

2020 में उसके ऊपर दो भाजपा नेताओं की हत्या का इल्जाम लगा, लेकिन वह उससे भी बच गया। उसकी नीति यही रही कि वो हमेशा से बड़े लोगों के ग्रुप में उठता-बैठता, जिससे जब उस पर कोई दोष लगे तो वह बच सके। यही वजह है कि उसपर कार्रवाई नहीं हुई। उसपर अपने चुनाव क्षेत्र में चुनाव के दौरान धांधली करने का आरोप भी लगता रहा है।

सादगी की मिसाल, सच्चे जननायक, संघर्ष की आवाज… कर्पूरी ठाकुर पर PM मोदी का विशेष लेख, कहा- हमारी योजनाओं में उनका विजन

हमारे जीवन पर कई लोगों के व्यक्तित्व का प्रभाव रहता है। जिन लोगों से हम मिलते हैं, हम जिनके संपर्क में रहते हैं, उनकी बातों का प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है। लेकिन कुछ ऐसे व्यक्ति भी होते हैं जिनके बारे में सुनकर ही आप उनसे प्रभावित हो जाते हैं। मेरे लिए ऐसे ही रहे हैं जननायक कर्पूरी ठाकुर।

आज कर्पूरी बाबू की 100वीं जन्म-जयंती है। मुझे कर्पूरी जी से कभी मिलने का अवसर तो नहीं मिला, लेकिन उनके साथ बेहद करीब से काम करने वाले कैलाशपति मिश्र जी से मैंने उनके बारे में बहुत कुछ सुना है। सामाजिक न्याय के लिए कर्पूरी बाबू ने जो प्रयास किए, उससे करोड़ों लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव आया। उनका संबंध नाई समाज, यानि समाज के अति पिछड़े वर्ग से था। अनेक चुनौतियों को पार करते हुए उन्होंने कई उपलब्धियों को हासिल किया और जीवनभर समाज के उत्थान के लिए काम करते रहे।

जननायक कर्पूरी ठाकुर जी का पूरा जीवन सादगी और सामाजिक न्याय के लिए समर्पित रहा। वे अपनी अंतिम साँस तक सरल जीवनशैली और विनम्र स्वभाव के चलते आम लोगों से गहराई से जुड़े रहे। उनसे जुड़े ऐसे कई किस्से हैं, जो उनकी सादगी की मिसाल हैं।

उनके साथ काम करने वाले लोग याद करते हैं कि कैसे वे इस बात पर जोर देते थे कि उनके किसी भी व्यक्तिगत कार्य में सरकार का एक पैसा भी इस्तेमाल ना हो। ऐसा ही एक वाकया बिहार में उनके सीएम रहने के दौरान हुआ। तब राज्य के नेताओं के लिए एक कॉलोनी बनाने का निर्णय हुआ था, लेकिन उन्होंने अपने लिए कोई जमीन नहीं ली। जब भी उनसे पूछा जाता कि आप जमीन क्यों नहीं ले रहे हैं, तो वे बस विनम्रता से हाथ जोड़ लेते। 1988 में जब उनका निधन हुआ तो कई नेता श्रद्धांजलि देने उनके गाँव गए। कर्पूरी जी के घर की हालत देखकर उनकी आँखों में आँसू आ गए कि इतने ऊँचे पद पर रहे व्यक्ति का घर इतना साधारण कैसे हो सकता है!

कर्पूरी बाबू की सादगी का एक और लोकप्रिय किस्सा 1977 का है, जब वे बिहार के सीएम बने थे। तब केंद्र और बिहार में जनता सरकार सत्ता में थी। उस समय जनता पार्टी के नेता लोकनायक जयप्रकाश नारायण यानि जेपी के जन्मदिन के लिए कई नेता पटना में इकट्ठा हुए। उसमें शामिल मुख्यमंत्री कर्पूरी बाबू का कुर्ता फटा हुआ था। ऐसे में चंद्रशेखर जी ने अपने अनूठे अंदाज में लोगों से कुछ पैसे दान करने की अपील की, ताकि कर्पूरी जी नया कुर्ता खरीद सकें। लेकिन कर्पूरी जी तो कर्पूरी जी थे। उन्होंने इसमें भी एक मिसाल कायम कर दी। उन्होंने पैसा तो स्वीकार कर लिया, लेकिन उसे मुख्यमंत्री राहत कोष में दान कर दिया।

सामाजिक न्याय तो जननायक कर्पूरी ठाकुर जी के मन में रचा-बसा था। उनके राजनीतिक जीवन को एक ऐसे समाज के निर्माण के प्रयासों के लिए जाना जाता है, जहाँ सभी लोगों तक संसाधनों का समान रूप से वितरण हो और सामाजिक हैसियत की परवाह किए बिना उन्हें अवसरों का लाभ मिले। उनके प्रयासों का उद्देश्य भारतीय समाज में पैठ बना चुकी कई असमानताओं को दूर करना भी था।

अपने आदर्शों के लिए कर्पूरी ठाकुर जी की प्रतिबद्धता ऐसी थी कि उस कालखंड में भी जब सब ओर काॅन्ग्रेस का राज था, उन्होंने काॅन्ग्रेस विरोधी लाइन पर चलने का फैसला किया। क्योंकि उन्हें काफी पहले ही इस बात का अंदाजा हो गया था कि काॅन्ग्रेस अपने बुनियादी सिद्धांतों से भटक गई है।

कर्पूरी ठाकुर जी की चुनावी यात्रा 1950 के दशक के प्रारंभिक वर्षों में शुरू हुई और यहीं से वे राज्य के सदन में एक ताकतवर नेता के रूप में उभरे। वे श्रमिक वर्ग, मजदूर, छोटे किसानों और युवाओं के संघर्ष की सशक्त आवाज बने। शिक्षा एक ऐसा विषय था, जो कर्पूरी जी के हृदय के सबसे करीब था। उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में गरीबों को शिक्षा मुहैया कराने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। वे स्थानीय भाषाओं में शिक्षा देने के बहुत बड़े पैरोकार थे, ताकि गाँवों और छोटे शहरों के लोग भी अच्छी शिक्षा प्राप्त करें और सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ें। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने बुजुर्ग नागरिकों के कल्याण के लिए भी कई अहम कदम उठाए।

Democracy, Debate और Discussion तो कर्पूरी जी के व्यक्तित्व का अभिन्न हिस्सा था। लोकतंत्र के लिए उनका समर्पण भाव, भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान ही दिख गया था, जिसमें उन्होंने अपने-आप को झोंक दिया। उन्होंने देश पर जबरन थोपे गए आपातकाल का भी पुरजोर विरोध किया था। जेपी, डॉ. लोहिया और चरण सिंह जी जैसी विभूतियाँ भी उनसे काफी प्रभावित हुई थीं।

समाज के पिछड़े और वंचित वर्गों को सशक्त बनाने के लिए जननायक कर्पूरी ठाकुर जी ने एक ठोस कार्ययोजना बनाई थी। यह सही तरीके से आगे बढ़े, इसके लिए पूरा एक तंत्र तैयार किया था। यह उनके सबसे प्रमुख योगदानों में से एक है। उन्हें उम्मीद थी कि एक ना एक दिन इन वर्गों को भी वो प्रतिनिधित्व और अवसर जरूर दिए जाएँगे, जिनके वे हकदार थे। हालाँकि उनके इस कदम का काफी विरोध हुआ, लेकिन वे किसी भी दबाव के आगे झुके नहीं। उनके नेतृत्व में ऐसी नीतियों को लागू किया गया, जिनसे एक ऐसे समावेशी समाज की मजबूत नींव पड़ी, जहाँ किसी के जन्म से उसके भाग्य का निर्धारण नहीं होता हो। वे समाज के सबसे पिछड़े वर्ग से थे, लेकिन काम उन्होंने सभी वर्गों के लिए किया। उनमें किसी के प्रति रत्तीभर भी कड़वाहट नहीं थी और यही तो उन्हें महानता की श्रेणी में ले आता है।

हमारी सरकार निरंतर जननायक कर्पूरी ठाकुर जी से प्रेरणा लेते हुए काम कर रही है। यह हमारी नीतियों और योजनाओं में भी दिखाई देता है, जिससे देशभर में सकारात्मक बदलाव आया है। भारतीय राजनीति की सबसे बड़ी त्रासदी यह रही थी कि कर्पूरी जी जैसे कुछ नेताओं को छोड़कर सामाजिक न्याय की बात बस एक राजनीतिक नारा बनकर रह गई थी। कर्पूरी जी के विजन से प्रेरित होकर हमने इसे एक प्रभावी गवर्नेंस मॉडल के रूप में लागू किया। मैं विश्वास और गर्व के साथ कह सकता हूँ कि भारत के 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने की उपलब्धि पर आज जननायक कर्पूरी जी जरूर गौरवान्वित होते। गरीबी से बाहर निकलने वालों में समाज के सबसे पिछड़े तबके के लोग सबसे ज्यादा हैं, जो आजादी के 70 साल बाद भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित थे।

हम आज सैचुरेशन के लिए प्रयास कर रहे हैं, ताकि प्रत्येक योजना का लाभ, शत प्रतिशत लाभार्थियों को मिले। इस दिशा में हमारे प्रयास सामाजिक न्याय के प्रति सरकार के संकल्प को दिखाते हैं। आज जब मुद्रा लोन से OBC, SC और ST समुदाय के लोग उद्यमी बन रहे हैं, तो यह कर्पूरी ठाकुर जी के आर्थिक स्वतंत्रता के सपनों को पूरा कर रहा है। इसी तरह यह हमारी सरकार है, जिसने SC, ST और OBC Reservation का दायरा बढ़ाया है। हमें ओबीसी आयोग (दुख की बात है कि काॅन्ग्रेस ने इसका विरोध किया था) की स्थापना करने का भी अवसर प्राप्त हुआ, जो कि कर्पूरी जी के दिखाए रास्ते पर काम कर रहा है। कुछ समय पहले शुरू की गई पीएम-विश्वकर्मा योजना भी देश में ओबीसी समुदाय के करोड़ों लोगों के लिए समृद्धि के नए रास्ते बनाएगी।

पिछड़े वर्ग से ताल्लुक रखने वाले एक व्यक्ति के रूप में मुझे जननायक कर्पूरी ठाकुर जी के जीवन से बहुत कुछ सीखने को मिला है। मेरे जैसे अनेकों लोगों के जीवन में कर्पूरी बाबू का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष योगदान रहा है। इसके लिए मैं उनका सदैव आभारी रहूँगा। दुर्भाग्यवश, हमने कर्पूरी ठाकुर जी को 64 वर्ष की आयु में ही खो दिया। हमने उन्हें तब खोया, जब देश को उनकी सबसे अधिक जरूरत थी। आज भले ही वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन जन-कल्याण के अपने कार्यों की वजह से करोड़ों देशवासियों के दिल और दिमाग में जीवित हैं। वे एक सच्चे जननायक थे।

(कर्पूरी ठाकुर की 100वीं जयंती पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यह विशेष लेख अपने ब्लाॅग पर लिखा है। बिहार के दो बार मुख्यमंत्री रहे कर्पूरी ठाकुर को भारत सरकार ने मरणोपरांत भारत रत्न देने का निर्णय किया है)

4.5 अरब वर्ष की पृथ्वी, 2.5 अरब साल पुरानी ‘कृष्ण शिला’ से बने हैं रामलला; पानी का भी नहीं होगा असर: पहले दिन 5+ लाख भक्तों ने राम मंदिर में किए दर्शन

अयोध्या में प्रभु श्रीराम के मंदिर में रामलला विराजमान होने के बाद श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। पहले ही दिन 5 लाख लोगों ने प्रभु के बाल स्वरूप के दर्शन किए और आज भी भीड़ लगी ही हुई है। इस उत्साह के बीच राम मंदिर में विराजमान हुए रामलला के नवनिर्मित विग्रह को लेकर कुछ जानकारी सामने आई है।

मीडिया रिपोर्ट्स में विशेषज्ञों के हवाले से बताया गया है कि 51 इंच ऊँची और 200 किलो के वजन वाली रामलला की मूर्ति कोई सामान्य पत्थर से नहीं बनी, बल्कि इसे बनाने के लिए इस्तेमाल हुआ पत्थर 2.5 अरब साल पुराना ग्रेनाइट है। इसपर न पानी का असर पड़ता है और न ही कार्बन का। मौसम के तमाम बदलावों के बाद भी ये पत्थर वैसे का वैसा ही रहता है। इस चट्टान को ‘कृष्ण शिला’ भी कहा जाता है क्योंकि इसका रंग प्रभु कृष्ण के रंग जैसा है।

इस बारे में जानकारी नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ रॉक मेकेनिक्स के डायरेक्टर एच एच वेंकटेश ने दी है। भारत में न्यूक्लियर पावर प्लांट्स और बाँधों के निर्माण के लिए पत्थरों एवं चट्टानों को चेक करने का कार्य यही संस्था करती है।

उन्होंने इस चट्टान के बारे में बात करते हुए कहा कि ये एक ग्रेनाइट पत्थर है। इस पर मौसम का कोई असर नहीं होता है। उन्होंने बताया कि पृथ्वी निर्माण के दौरान बड़े पैमाने पर विस्फोट हुए थे तो उसी लावा के पिघलने से ग्रेनाइट पत्थर बने थे। ये पत्थर बेहद ठोस होते हैं। बदलते मौसम से इसपर कोई असर नहीं पड़ता।

वहीं विशेषज्ञों ने बताया कि ये पत्थर प्री क्रैम्ब्रियन काल का है, जिसकी शुरुआत 4 अरब साल पहले हुई थी यानी वैज्ञानिकों के अनुसार, ये पत्थर तब का है जब जीवन की शुरुआत हुई थी।

केंद्रीय विज्ञान मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी पिछले दिनों राम मंदिर को लेकर कहा था कि प्रभु का मंदिर ऐसे तकनीक से बन रहा है कि 1 हजार साल तक इस पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। इसके निर्माण में श्रेष्ठ तकनीक और उच्चतम क्वॉलिटी के पत्थरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। मूर्ति के लिए पत्थर कर्नाटक के मैसुरु के जयपुरा होबली गाँव से लिया गया। ये जगह शानदार क्वालिटी के काले ग्रेनाइट पत्थरों के लिए जानी जाती है।

रामलला के दर्शन को पहले दिन आए 5 लाख लोग

इसी पत्थर से निर्मित रामलला की मूर्ति को देखने के लिए पहले दिन 5 लाख श्रद्धालु आए। इस दौरान भीड़ भाड़ रोकने के लिए करीबन 8000 पुलिस वाले वहाँ तैनात रहे। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी हेलीकॉप्टर पर बैठकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने अपील की, “दर्शन के लिए न हड़बड़ाएँ। भीड़ नॉर्मल होने के बाद अयोध्या आएँ।”

सीएम ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों से भी मुलाकात करके भीड़ को परिसर में संभालने की कोशिशों के बारे में जाना। स्थिति संभालने के लिए कई जगह श्रद्धालुओं को रोका गया। इससे पहले अयोध्या की सीमा सील करने की खबरें भी मीडिया में आई हैं।

कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न, बिहार में पहली गैर-कॉन्ग्रेसी सरकार के थे मुख्यमंत्री: PM मोदी बोले – वो समाजिक न्याय के पुरोधा, जन्म-शताब्दी पर यह निर्णय गौरवान्वित करने वाला

देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न (मरणोपरांत) से सम्मानित करने का निर्णय लिया है। पिछड़े वर्ग से आने वाले कर्पूरी ठाकुर बिहार के 11वें मुख्यमंत्री थे। वह दो बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे थे। वह बिहार के पहले गैर कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्री थे।

कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न दिए जाने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रसन्नता जताई है। उन्होंने ‘X’ (पहले ट्विटर) पर लिखा, “मुझे इस बात की बहुत प्रसन्नता हो रही है कि भारत सरकार ने समाजिक न्याय के पुरोधा महान जननायक कर्पूरी ठाकुर जी को भारत रत्न से सम्मानित करने का निर्णय लिया है।

उन्होंने आगे लिखा “उनकी जन्म-शताब्दी के अवसर पर यह निर्णय देशवासियों को गौरवान्वित करने वाला है। पिछड़ों और वंचितों के उत्थान के लिए कर्पूरी जी की अटूट प्रतिबद्धता और दूरदर्शी नेतृत्व ने भारत के सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य पर अमिट छाप छोड़ी है। यह भारत रत्न न केवल उनके अतुलनीय योगदान का विनम्र सम्मान है, बल्कि इससे समाज में समरसता को और बढ़ावा मिलेगा।”

कर्पूरी ठाकुर पिछड़ी मानी जाने वाली नाई बिरादरी से आते थे। वह बिहार के पिछड़े वर्ग से आने वाले दूसरे मुख्यमंत्री थे। वह पहले 1970 में बिहार के मुख्यमंत्री बने थे और सोशलिस्ट पार्टी से सम्बन्ध रखते थे। वह वर्ष 1977 में देश से आपातकाल हटने के बाद भी बिहार के मुख्यमंत्री बने।

1924 में जन्मे कर्पूरी ठाकुर स्वतंत्रता सेनानी भी थे। उन्होंने सक्रिय तौर पर महात्मा गाँधी द्वारा चलाए गए ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ में भाग लिया था। उन्हें 26 महीने की जेल अंग्रेजी राज का विरोध करने के कारण काटनी पड़ी थी। वह 1952 से ही बिहार विधानसभा के सदस्य बन गए थे।

कर्पूरी ठाकुर ने मुख्यमंत्री रहते हुए बिहार में आरक्षण लागू किया था जिसमें 12% आरक्षण अति पिछड़ों और 8% आरक्षण पिछड़ों के लिए दिया गया था। इसके बाद बिहार में सत्ता को लेकर मचे बवाल के कारण उनका मुख्यमंत्री पद चला गया था।

बिहार के मुख्यमंत्री रहने से पहले वह शिक्षा मंत्री भी रहे थे। इस दौरान उन्होंने एक अहम निर्णय लेते हुए कक्षा 10 तक अंग्रेजी की शिक्षा की अनिवार्यता हटा दी थी। इसके पीछे उनकी सोच थी कि इससे बच्चों की शिक्षा में बाधा पड़ती है।

‘अपवित्र हो गया है गर्भगृह, 11 दिन उपवास कर के ज़िंदा कैसे हैं PM मोदी?’: कॉन्ग्रेस नेता ने उठाए सवाल, महंत बोले – हमने 3 दिन कहा था, उन्होंने 11 दिन का कठिन व्रत रखा

देश के पूर्व पेट्रोलियम मंत्री और कॉन्ग्रेस नेता वीरप्पा मोइली ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 11 दिवसीय उपवास पर प्रश्न उठाए हैं। उन्होंने इसे असमभव बताया है और राम मंदिर के गर्भगृह की पवित्रता पर भी टिप्पणी की है। उनका यह बयान अब सुर्ख़ियों में है।

वीरप्पा मोइली ने कहा, “मैं एक डॉक्टर के साथ सुबह की सैर कर रहा था। उन्होंने मुझे बताया कि कोई भी मानव 11 दिन उपवास करके जीवित नहीं रह सकता। अगर पीएम मोदी जीवित हैं तो यह चमत्कार है। इसीलिए मुझे इस विषय में शंका है।” उन्होंने राम मंदिर के गर्भ गृह की पवित्रता पर भी प्रश्न उठाए। उन्होंने कहा, “अगर वह (प्रधानमंत्री मोदी) बिना उपवास किए राम मंदिर के गर्भगृह में घुसे हैं तो वह स्थान अपवित्र हो गया है और उस स्थान से शक्ति नहीं प्रवाहित होगी।”

वीरप्पा मोइली का यह बयान प्रधानमंत्री मोदी के राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा करने से पहले 11 दिन के उपवास के विषय में था। प्रधानमंत्री मोदी ने यम नियम के अंतर्गत यह कठिन उपवास रखा था। इस दौरान उन्होंने 11 दिन तक भोजन ना करने और केवल नारियल पानी पीने के नियम का पालन किया था। वह रात में सोते भी मात्र एक कम्बल के साथ ही थे।

प्रधानमंत्री मोदी के कठिन व्रत के विषय में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र के कोषाध्यक्ष गोविन्द गिरी ने प्रधानमंत्री के इस कठिन व्रत और उनके पारण के विषय जानकारी दी थी। प्रधानमंत्री मोदी के कठिन व्रत के विषय में उन्होंने राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के बाद सार्वजनिक संबोधन में बताया था।

स्वामी गोविन्द गिरी ने बताया था कि उस समय उन्हें आश्चर्य हुआ, जब प्राण प्रतिष्ठा के लिए जरूरी नियम एवं व्रत के बारे में प्रधानमंत्री मोदी ने उनसे जानकारी माँगी। उन्होंने कहा कि 20 दिन पहले पीएम ने व्रत के लिए नियमावली माँगी थी। गोविंद गिरी ने कहा, “अपने आप को सिद्ध (व्रत के लिए) करने की भावना कहाँ होती है। यह भावना यहाँ (मोदी जी में) होती है।”

स्वामी गोविंद गिरी ने कहा, “हम लोगों ने महापुरुषों से परामर्श करके प्रधानमंत्री से कहा था कि आपको मात्र 3 दिन का उपवास करना होगा, लेकिन उन्होंने 11 दिन का उपवास किया। हमने 11 दिन एकभुक्त (अनुष्ठान से पहले अन्न खाने का विधान) कहने के लिए कहा था, उन्होंने अन्न का ही त्याग कर दिया।”

प्रधानमंत्री के कठिन व्रत के विषय में बताते हुए कहा कि उन्हें 3 दिन जमीन पर सोने की बात कही गई थी लेकिन वह इस कड़कड़ाती ठण्ड में 11 दिनों तक जमीन पर सोते रहे। वह इस दौरान भावुक भी हो गए। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के तप से तप की कमी हो गई। 

उन्होंने इस व्रत को तोड़ने के विषय में बताया, “पहले यह तय हुआ था प्रधानमंत्री मोदी का व्रत जल में शहद और नींबू की दो बूंदें डालकर व्रत खुलवाने का सोचा गया था। उन्होंने यहाँ आकर मुझे बताया कि राम मंदिर के चरणामृत से उनका व्रत खुलवाया जाए।” उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने उनसे खुद ही यह उनको पिलाने के लिए कहा जिससे उनके मन में माता का वात्सल्य जागृत हो गया। उनके मन में मातृत्व का भाव आ गया क्योंकि वह प्रधानमंत्री की माँ को बहुत अच्छे से जानते थे।

बजरंग बली के पोस्टर फाड़े, झंडों पर उल्टियाँ तक की… हिन्दुओं की शोभा यात्रा पर रॉड लेकर कट्टर इस्लामी भीड़ का हमला, कहा – ‘देखेंगे तुम्हारे राम बचाने आते हैं कि नहीं’

सोमवार (22 जनवरी, 2024) को अयोध्या में राम मंदिर में हुई प्राण प्रतिष्ठा से भारत का प्रत्येक हिन्दू प्रसन्न है और अपने भगवान को उनके घर में वापस देख कर उसकी आँखों में आँसू भी हैं। हालाँकि, इस ख़ुशी के मौके पर इस्लामी कट्टरपंथियों को चैन नहीं आया और उन्होंने इस दिन भी हिंसा का रास्ता चुना। गुजरात के मेहसाना से लेकर महाराष्ट्र के सोलापुर तक से हिन्दुओं पर हमले की खबरें सामने आई हैं। ठाणे के मीरा रोड से भी हिंसा की सूचना सामने आई थी।

इससे जुड़ी और जानकारियाँ अब ऑपइंडिया सामने लाया है। मीरा रोड में इस्लामी कट्टरपंथियों ने यात्रा निकाल रहे हिन्दुओं पर लोहे की रॉड और हथियारों के साथ हमला किया। बताया जा रहा है कि जिन इस्लामी कट्टरपंथियों ने हिन्दुओं पर हमला किया था, उन पर बुलडोजर कार्रवाई हुई है।

मीरा रोड में हुए हमले के विषय में अब यह जानकारी सामने आई है कि इस्लामी दंगाइयों ने हिन्दू भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए बजरंग बली की छवि वाले पोस्टर भी फाड़े थे, यह भी बताया गया कि इन झंडों पर इस्लामी कट्टरपन्थियों ने उलटी तक की। ऑपइंडिया ने अपनी जाँच में पता किया है कि इस मामले में पुलिस ने अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया है। हालाँकि, पुलिस ने गिरफ्तार किए गए आरोपितों के नाम नहीं बताए हैं।

ऑपइंडिया ने मीरा रोड हिंसा मामले में दर्ज की गई FIR की कॉपी भी हासिल की है। यह FIR इस हिंसा के पीड़ित विनोद जायसवाल ने दर्ज करवाई है। FIR से पता चला है कि 21 जनवरी की रात को 10:30 बजे यह घटना हुई। जायसवाल ने बताया है कि उनकी गाड़ी को 50-60 लोगों ने घेर लिया और हमला किया जबकि वह मीरा रोड पर जा रहे थे। उनकी गाड़ी पर लाठी-डंडों से हमला किया गया और इस पर लगा झंडा भी उखाड़ दिया।

FIR में उन्होंने बताया, “मैं अपनी कार चला रहा था जबकि मेरे दोस्त अपनी बाइक से चलते हुए मेरे साथ थे। हम उस दिन पूरे मुंबई में यात्रा निकाल रहे थे। जैसे ही हम मीरा रोड इलाके में पहुँचे, हम ट्रैफिक में फँस गए। इसके बाद हमने यू-टर्न लिया और भायंदर रोड की ओर बढ़ गए।

आगे उन्होंने बताया, “यहाँ सड़क जाम थी इसलिए हमने इसके बाद नयानगर की शिवार गार्डन रोड से जाने का फैसला किया। यहीं पर एक लड़के ने अचानक कार रोकी और धमकी देने लगे। उन्होंने धमकी देते कहा ‘हम तुम्हें दिखाएँगे कि अब हम कौन हैं।’ उसने कहा – देखेंगे तुम्हारे राम तुम्हें बचाने आते हैं या नहीं। इसके तुरंत बाद लगभग 50-60 लोग यहाँ पर आ गए और रॉड व लाठियों से हमला करना शुरू कर दिया।”

आगे उन्होंने लिखा, “इन लोगों ने कार के बोनट पर भगवान हनुमान का पोस्टर देखा और उस पर उल्टी कर दी। उन्होंने अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाए, मेरे सिर पर लोहे की रॉड से हमला कर दिया और मेरी हत्या करने की कोशिश की। इससे हमारी हिंदू भावनाओं को ठेस पहुँची है। उन्होंने मेरे साथ घूमने आई महिलाओं और बच्चों पर तक पत्थर फेंके।”

इस मामले में धारा 307 (हत्या का प्रयास), 341 (किसी को जबरदस्ती रोकना), 295ए (धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर ठेस पहुँचाना), 153ए (दो समूहों के बीच लड़ाई करवाना) के तहत दर्ज की गई है। इस मामले में धारा 141, 143, 147, 149 और 427 धाराएँ जोड़ी गई हैं।

इस इस्लामी हमले के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इनमें देखा जा सकता है कि इस्लामी कट्टरपंथी कारों पर हमला करते हुए ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगा रहे हैं। इसी के साथ हिन्दुओं पर लाठी डंडे से वार करते हुए इस्लामी कट्टरपंथियों को देखा जा सकता है। महिलाओं पर हमले की भी वीडियो सामने आई हैं।

बताया जा रहा है कि राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के एक दिन बाद, हिंदुओं ने भी इस्लामी दंगाइयों के हमले का प्रतिकार किया। मीरा रोड क्षेत्र में हिंदू बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए और दंगाइयों के पथराव का जवाब दिया। यह वीडियो एक्स (पूर्व में ट्विट्टर) पर एक व्यक्ति रौशन सिन्हा द्वारा साझा किया गया था जिसमें हिन्दू दंगाइयों पर कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।

ऑपइंडिया ने इस्लामियों के हमले के विषय में FIR करवाने वाले विनोद जायसवाल से भी बात करने की कोशिश की लेकिन वह चोट के कारण अनुपलब्ध थे। उन्हें भीमसेन जोशी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। यहाँ उनका इलाज हो रहा है।

पुलिस ने ऑपइंडिया को बताया है कि इस मामले में 13 लोगों को अभी तक गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनकी पहचान बताने से इनकार किया, उन्होंने कहा, “यह अति-संवेदनशील मामला है। नाम उजागर करने से मजहबी हिंसा हो सकती है। मैं अन्य कोई जानकारी नहीं दे सकता। अभी माहौल शांत करने के प्रयास किए जा रहे हैं।” यहाँ पर प्रदर्शन करने वाले सकल हिन्दू समाज नाम के संगठन के लोगों ने बताया है कि गिरफ्तार किए गए लोग मुस्लिम ही हैं और कुछ हिन्दू भी गिरफ्तार किए गए थे लेकिन उन्हें छोड़ दिया गया था।

इससे पहले नया नगर, जहाँ यह हिंसा हुई है, वहाँ से हिन्दुओं को भड़काते हुए वायरल हुआ था। इसमें एक शख्स कहता है कि नयानगर इलाके में अगर हिन्दू आते हैं तो इसके भीषण परिणाम होंगे क्योंकि यहाँ मुस्लिम आबादी ज्यादा है।

वीडियो में शख्स कहता है, “भाई लोग, मुस्लिमों को उकसाना बंद करो। क्यों सोते हुए शेर को जगा रहे हो। मुंबई को यूपी समझ रखा है क्या? मुंबई किसी के बाप की जागीर नहीं है। मुंबई खुले साँड़ों का इलाका है। खुले साँड़ बम्बई में घूम रहे हो। किसलिए जो इंसान सोया है उसको जगा रहे हो। नयानगर में आने की क्या जरूरत है? तुमलोग का राम इधर नयानगर में है? यहाँ मुसलमान लोग रहते हैं, यहाँ आकर जय श्रीराम के नारे लगा रहे, उकसाने की कोशिश कर रहे, क्या हासिल हुआ इससे? यह विवादित बयान देने वाला गिरफ्तार कर लिया गया है।

मुंबई में अभी भी स्थिति चिंताजनक है। इस्लामी कट्टरपंथी लगातार हिन्दुओं पर हमला कर रहे हैं। यहाँ हिंसा ना भड़के इसके लिए यहाँ भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। इलाके में RAF भी तैनात की गई है। यहाँ पर हिन्दू समाज विरोध में रैली भी आयोजित कर रहा है।