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‘भारत कोई पश्चिमी देश नहीं जो लिव-इन सामान्य हो’: इलाहाबाद HC की टिप्पणी, जज शमीम अहमद बोले – ‘अपनी संस्कृति व परंपराओं पर गर्व करें’

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि भारत कोई पश्चिमी देश नहीं है जहाँ लिव इन रिलेशनशिप सामान्य बात हों। हाईकोर्ट ने कहा है भारत में लोगों को अपनी संस्कृति और परंपराओं को मानना चाहिए और इस पर गर्व करना चाहिए। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी एक याचिका की सुनवाई करते हुई की।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के सामने एक व्यक्ति आशीष कुमार ने याचिका डाली थी कि एक महिला, जिससे उसका 2011 से प्रेम सम्बन्ध है, उसका परिवार उसे उससे मिलने नहीं दे रहा है। उसने इस संबंध ने याचिकाकर्ता ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका डाली थी। उसका कहना था कि महिला को उसके परिवार वालों ने जबरन कैद कर रखा है।

इस मामले की सुनवाई कर रहे इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस शमीम अहमद ने कहा, “अदालत का मानना है कि हम एक पश्चिमी देश नहीं हैं जहाँ एक लड़की-लड़के का लिव इन रिलेशनशिप में रहना सामान्य बात हो। हम एक ऐसे देश हैं जहाँ लोग अपनी परंपराओं और संस्कृति में विश्वास करते हैं और उस पर गर्वित हैं, ऐसे में हमें भी यही करना चाहिए।”

आशीष कुमार ने कोर्ट के समक्ष याचिका के साथ एक पत्र भी रखा था जो कि उसने दावा किया था कि लड़की ने लिखा है। याचिकाकर्ता आशीष कुमार ने कोर्ट के सामने कुछ तस्वीरें भी रखी थीं और बताया था कि वह इस लड़की के 2011 से प्रेम संबंध में हैं। हालाँकि, कोर्ट ने कहा कि यह याचिका मात्र लड़की और उसके परिवार की छवि खराब करने के उद्देश्य से डाली गई है और इससे याचिकाकर्ता उन पर दबाव डाल कर अपने मन का निर्णय करवाना चाहता है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा, “अदालत के सामने कोई कारण नहीं है कि वह इस तरह की याचिका की सुनवाई करे जो कि किसी लड़की और उसके परिवार वालों की छवि खराब करने के उद्देश्य से डाली गई है। अदालत अगर ऐसी याचिका को सुनता है तो इससे लड़की और उसके परिवार की छवि धूमिल होगी और उन्हें भविष्य में उसके लिए दूल्हा ढूँढने में समस्या होगी।”

कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा कि यदि वह और लड़की जिसके विषय में याचिका डाली गई है, वह 13 साल से एक दूसरे के साथ प्रेम सम्बन्ध में हैं तो विवाह क्यों नहीं किया। कोर्ट ने इसी के साथ ही याचिका को खारिज कर दी और याचिकाकर्ता पर ₹25,000 का जुर्माना भी लगाया।

एक अयोध्या अपने मन में लेकर लौटा हूँ, प्रभु श्रीराम ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ की प्रेरणाः राष्ट्रपति को PM मोदी का पत्र

22 जनवरी 2024 को अयोध्या के भव्य राम मंदिर में भगवान रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा हुई। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मुख्य यजमान की भूमिका में थे। अब प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक पत्र लिखकर अपने इस अनुभव के बारे में उन्हें बताया है।

प्राण-प्रतिष्ठा समारोह से ठीक पहले राष्ट्रपति ने भी प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा का अवसर मिलने पर पीएम को सौभाग्यशाली बताया था। प्रधानमंत्री ने इसके जवाब में लिखी गई अपनी चिट्ठी एक्स/ट्विटर पर साझा करते हुए लिखा है, “दो दिन पूर्व मुझे आदरणीया राष्ट्रपति जी का एक बहुत ही प्रेरणादायी पत्र मिला था। मैंने आज अपनी कृतज्ञता पत्र के माध्यम से प्रकट करने का प्रयास किया है।”

नीचे आप प्रधानमंत्री द्वारा लिखे गए पत्र को हूबहू उनके ही शब्दों में पढ़िए;

आदरणीया राष्ट्रपति महोदया,

अयोध्या धाम में अपने जीवन के सबसे अविस्मरणीय क्षणों का साक्षी बनकर लौटने के बाद, मैं आपको यह पत्र लिख रहा हूँ। मैं, एक अयोध्या अपने मन में भी लेकर लौटा हूँ। एक ऐसी अयोध्या जो कभी मुझसे दूर नहीं हो सकती।

अयोध्या जाने से एक दिन पूर्व मुझे आपका पत्र मिला था। आपकी शुभकामनाओं और स्नेह का मैं बहुत-बहुत आभारी हूँ। आपके पत्र के हर शब्द ने आपके करुणामयी स्वभाव और प्राण-प्रतिष्ठा के आयोजन पर आपकी असीम प्रसन्नता को व्यक्त किया।

जिस समय मुझे आपका पत्र मिला था, मैं एक अलग ही भावयात्रा में था। आपके पत्र ने मुझे, मेरे मन की इन भावनाओं को सँभालने में, उनसे सामंजस्य बिठाने में अपार सहयोग और संबल दिया।

मैंने एक तीर्थयात्री के रूप में अयोध्या धाम की यात्रा की। जिस पवित्र भूमि पर आस्था और इतिहास का ऐसा संगम हुआ हो, वहाँ जाकर मेरा मन अनेक भावनाओं से विह्वल हो गया।

ऐसे ऐतिहासिक अवसर का साक्षी बनना एक सौभाग्य भी है और एक दायित्व भी है। आप ने मेरे 11 दिन के व्रत-अनुष्ठान और उससे जुड़े यम-नियमों के विषय में भी चर्चा की थी। हमारा देश ऐसे अनगिनत लोगों का साक्षी रहा है जिन्होंने शताब्दियों तक अनेक संकल्प व्रत किए जिससे कि रामलला पुनः अपने जन्मस्थान पर विराज सकें।

सदियों तक चले इन व्रतों की पूर्णाहुति का संवाहक बनना, मेरे लिए बहुत भावुक क्षण था और इसे में अपना सौभाग्य मानता हूँ।

140 करोड़ देशवासियों के साथ रामलला के साक्षात दर्शन, उनके रूप से साक्षात्कार और उनके स्वागत का वो क्षण अप्रतिम था। वो क्षण प्रभु श्रीराम और भारत के लोगों के आशीर्वाद से ही संभव हुआ और मैं इसके लिए सदा कृतज्ञ रहूँगा।

जैसा आपने कहा था, हम ना सिर्फ प्रभु श्रीराम को पूजते हैं बल्कि जीवन के हर पहलू में और विशेषकर सामाजिक जीवन में उनसे प्रेरणा लेते हैं।

आपने पत्र में ‘पीएम जनमन’ और जनजातीय समाज में भी अति पिछड़ों के सशक्तिकरण पर इस योजना के प्रभाव की चर्चा की। आदिवासी समाज से जुड़े होने के कारण आपसे ज्यादा बेहतर तरीके से ये कौन समझ सकता है? हमारी संस्कृति ने हमेशा, हमें समाज के सबसे वंचित वर्ग के लिए काम करने की सीख दी है। पीएम जनमन जैसे कई अभियान आज देशवासियों के जीवन में बड़ा बदलाव ला रहे हैं।

गरीब कल्याण के इन कार्यों के लिए, गरीबों के सशक्तिकरण के इन अभियानों के लिए प्रभु श्रीराम के विचार हमें निरंतर ऊर्जा देते हैं।

ये प्रभु श्रीराम ही तो हैं, जिन्होंने अपने जीवन के हर अध्याय में सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास की प्रेरणा दी। इसी मंत्र का आज सर्वत्र परिणाम दिख रहा है। पिछले एक दशक में देश करीब 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में सफल हुआ है।

प्रभु श्रीराम के शाश्वत विचार, भारत के गौरवशाली भविष्य का आधार हैं। इन विचारों की शक्ति ही, हम सभी देशवासियों के लिए वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने का मार्ग प्रशस्त करेगी। श्रीराम का भव्य मंदिर हमें सफलता और विकास के नव प्रतिमान गढ़ने की प्रेरणा देता रहेगा।

आपके प्रेरणादायी शब्दों के लिए पुनः आभार। मुझे विश्वास है कि देश इसी तरह आपके मार्गदर्शन के साथ प्रगति और कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ता रहेगा।

सादर
आपका,
नरेन्द
(नरेन्द्र मोदी)

हर साल राम मंदिर में 5 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान, चल रहे ₹85000 करोड़ के विकास कार्य: अमेरिका से आई रिपोर्ट, बताया – अयोध्या में खड़ी हो रही पूरी की पूरी इंडस्ट्री

अयोध्या में राम जन्मभूमि पर रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही यहाँ का विकास कार्य भी तेज़ी से हो रहे हैं। भक्तों की भारी भीड़ अभी से अयोध्या में दर्शन के लिए पहुँच रही है। अयोध्या भारत के हवाई नक़्शे पर भी आ चुका है। अब एक रिपोर्ट में बताया गया है कि इन बदलावों के बाद अब अयोध्या में हर साल लगभग 5 करोड़ श्रद्धालु आएँगे।

अयोध्या के विकास और आने वाले सुनहरे भविष्य के विषय में अमेरिकी फर्म जेफरीस ने यह रिपोर्ट जारी की है। जेफरीस ने कहा है कि प्राण प्रतिष्ठा के बाद 5 करोड़ श्रद्धालुओं के हर साल यहाँ आने की सम्भावना है। इन श्रद्धालुओं के यहाँ आने के पीछे अयोध्या में किए जा रहे समावेशी विकास कार्य हैं।

रिपोर्ट का कहना है कि अयोध्या में लगभग ₹85,000 करोड़ के विकास प्रोजेक्ट वर्तमान में चल रहे हैं। इसके अंतर्गत अयोध्या को बाकी शहरों से जोड़ने वाली सड़कें, नए एयरपोर्ट और घाटों का विकास लेकर शहर के अंदर का सौंदर्यीकरण शामिल है। रिपोर्ट का कहना है कि इसके प्रभाव से अयोध्या में नए होटलों समेत पूरी एक इंडस्ट्री खड़ी हो रही है।

रिपोर्ट का कहना है कि अयोध्या में इन सब निर्माण गतिविधियों की वजह से वहाँ सीमेंट फैक्ट्रियों की संख्या भी बढ़ेगी। इसके अनुसार धार्मिक पर्यटन अभी भी भारत में पर्यटन का सबसे बड़ा स्रोत है। अयोध्या के ही विकास से भारत की जीडीपी भी में बड़ा फर्क पड़ेगा।

बताया गया है कि अगले 10 वर्षों (2033) तक भारत की GDP में टूरिज्म क्षेत्र का योगदान 443 बिलियन डॉलर (लगभग ₹37 लाख करोड़) होगा। यह कोरोना काल से पहले 193 बिलियन डॉलर (लगभग ₹16 लाख करोड़) था। ऐसे में दस वर्षों में काफी बढ़त की सम्भावना नजर आ रही है।

अयोध्या में आने वाले श्रद्धालु यहाँ आकर रुके और बाकी जगह भी घूमें इसके लिए भी प्रयास जारी हैं। यहाँ अभी 17 होटल हैं और 73 और बनने हैं। इनमें से लगभग 40 का निर्माण कार्य जारी है। भारत की बड़ी होटल चेन पहले ही अयोध्या में आकर अपने होटल स्थापित करने के प्लान बना चुकी हैं।

भारतीय स्टेट बैंक’ (SBI) ने भी इस सम्बन्ध में एक रिपोर्ट दी है। उसने बताया है कि मंदिर के कारण बढ़ी हुई गतिविधियों से उत्तर प्रदेश सरकार को इस वित्त वर्ष में लगभग ₹25,000 करोड़ का अतिरिक्त राजस्व मिलेगा। इससे उत्तर प्रदेश सरकार को एक साल के भीतर ₹4 लाख करोड़ का कर संग्रह के ऊपर का आँकड़ा छूने में सहायता मिलेगा।

‘जो काफिर हैं वो डरते हैं, मरते हैं’: CM ममता बनर्जी ने मुस्लिमों को दे दी ‘अल्लाह की कसम’, कहा – BJP की मदद करोगे तो कभी माफ़ नहीं करेंगे

जिस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर में रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की, उसी दिन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भड़काऊ भाषण देकर एक और विवाद खड़ा कर दिया।

पार्क सर्कस मैदान में सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने उन लोगों को कड़ी चेतावनी दी, जो बीजेपी का समर्थन करते हैं या उसे वोट देते हैं। ममता बनर्जी ने कहा, “एक बात याद रखना, बीजेपी की मदद मत करो, बीजेपी का अगर तुम लोग मदद करोगे कोई, तो अल्लाह की कसम, आप लोगों को कोई माफ नहीं करेगा, हम तो माफ नहीं करेंगे।” ‘सर्व धर्म समभाव’ रैली के दौरान सर्कस मैदान में अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा, “जो काफिर हैं, वो डरते हैं, वो मरते हैं, जो लड़ते हैं वो जिंदा रहते हैं, वो बसते हैं, वो काम करते हैं।

सोशल नेटवर्किग साइट ‘एक्स’ पर अंकुर सिंह नाम के यूजर ने उनके इस विवादास्पद वीडियो को शेयर किया और लोगों से कहा – “जो काफिर हैं, वो डरते हैं, जो लड़ते हैं, वो जीतते हैं’ ममता बनर्जी कैसे मुस्लिमों को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद भड़का रही हैं।”

बता दें कि ‘काफिर’ एक अपमानजनक व्यंग है, जो मुस्लिमों द्वारा ऐसे किसी भी व्यक्ति को संबोधित किया जाता है, जो इस्लाम में विश्वास नहीं करता या बहुदेववादी और मूर्तिपूजक है। काफिर का मतलब ‘मारने योग्य’ भी होता है।

हालाँकि, यह पहली बार नहीं है कि पश्चिम बंगाल की CM ममता बनर्जी ने हिन्दुओं को लेकर अपमानजनक शब्द का इस्तेमाल किया है। मई 2022 में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें वह ईद के मौके पर भीड़ को संबोधित कर रही थीं। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कुछ ऐसा कहा जो सुनने में ‘काफ़िर’ जैसा लगा। उन्होंने कहा, “उन्हें वही करने दीजिए जो वे चाहते हैं। हम डरे हुए नहीं हैं। हम कायर नहीं हैं। हम ‘काफ़िर’ नहीं हैं। हम संघर्ष करते हैं। हम लड़ना जानते हैं। हम उनके खिलाफ लड़ेंगे। हम उन्हें ख़त्म कर देंगे।”

वीडियो वायरल होते ही नेटीजेंस ने आपत्ति जताई। कई लोगों ने एक मौजूदा मुख्यमंत्री द्वारा सार्वजनिक संबोधन में इस शब्द का इस्तेमाल करने पर चिंता व्यक्त की। दिलचस्प बात यह है कि ममता बनर्जी, जो ज्यादातर समय बांग्ला में बोलना पसंद करती हैं, ने हिंदी में बयान दिया, जिससे इन अटकलों को भी बल मिला कि वह कथित तौर पर उन लोगों को संदेश देना चाहती थीं जो बांग्ला नहीं बोलते।

कई नेटिज़न्स ने इस ओर ध्यान दिलाया है। हालाँकि, यह स्पष्ट नहीं है कि पश्चिम बंगाल की सीएम ने अपने संबोधन के दौरान क्या कहा, लेकिन उनका विवादास्पद बयान देने का इतिहास रहा है। यह मत भूलिए कि राज्य चुनावों के दौरान, उन्होंने ‘खेला होबे’ ​​नारे का इस्तेमाल किया था, जिसे ‘डायरेक्ट एक्शन डे’ से जोड़ा जाता है। ऐसे इतिहास को देखते हुए, किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए अगर उन्होंने ‘काफिर‘ शब्द का इस्तेमाल किया और कहा, “हम कायर नहीं हैं और लड़ना जानते हैं।”

मेघालय का अनानास खाती है दुनिया, पर राहुल गाँधी दिल्ली में रहकर भी नहीं ले पाए स्वाद: ‘इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी’ को बताया कसूरवार

मेघालय के अनानास पूरी दुनिया में मशहूर हैं। मिडिल-ईस्ट में इसका खूब एक्सपोर्ट होता है, लेकिन राहुल गाँधी का कहना कुछ और है। उनके मुताबिक उन्होंने कभी भी मेघालय के अनानास नहीं खाए। उन्होंने इस फल को चखते हुए ऐसे दर्शाने का प्रयास किया कि नॉर्थ ईस्ट में इतनी अच्छी खाने की चीज मिलती है लेकिन बुनियादी विकास न होने के कारण दूसरे राज्यों में बैठे लोगों इसका स्वाद नहीं ले पा रहे। हालाँकि, ये कहते हुए शायद उन्हें ये बात नहीं पता कि इन अनानासों की पूछ विदेशों में भी है और ये वहाँ तक पहुँचते भी हैं।।

मेघालय में अनानास खाते-खाते राजनीति करने से बाज न आने वाले राहुल गाँधी ने कहा, “आज यहाँ गाड़ी चलाते समय हम रुके और कुछ अनानास का स्वाद लिया। एक माँ-बेटी सड़क किनारे अनानास बेच रहे थे। मैंने अपने पूरे जीवन में इतना स्वादिष्ट अनानास कभी नहीं खाया। इसे खाने के तुरंत बाद मैंने अपनी माँ (सोनिया गाँधी) को फोन किया और कहा कि मैं आपके लिए दुनिया के कुछ सबसे अच्छे अनानास ला रहा हूँ।”

राहुल गाँधी ने सवालिया लहजे में कहा, “दुनिया में सबसे अच्छा स्वाद वाला अनानास पूरी दुनिया के लिए क्यों उपलब्ध नहीं है? और राज्यों के किसानों को इसे बाकी दुनिया में बेचने से लाभ क्यों नहीं हो रहा है?” उन्होंने दिखाना चाहा कि दुनिया को ये अनानास नहीं मिल सकते क्योंकि बुनियादी ढाँचे का विकास नहीं हुआ है।

कॉन्ग्रेस नेता ने कहा, “हमें भारत के लिए एक नया दृष्टिकोण बनाना चाहिए जो किसानों और छोटे व्यवसायों को दुनिया भर में अपने उत्पादों को निर्यात करने की सुविधाएँ दें।” उन्होंने इशारों में कहा कि मेघालय में अनानास की खेती, उसके एक्सपोर्ट और किसानों की मदद का कोई बुनियादी ढाँचा ही नहीं मौजूद, इसीलिए पूरी दुनिया मेघालय के अनानास नहीं खा पा रही।

हालाँकि, हकीकत ये है कि मेघालय के अनानास विदेशों में ये खासे प्रसिद्ध हैं। मेघालय से खाड़ी देशों को सबसे ज्यादा अनानास का निर्यात किया जाता है। दुबई, अबू धाबी, शारजाह और कुवैत के मॉल्स ये अनानास बेच रहे हैं। खुद राज्य सरकार ने अगस्त 2023 में कहा था कि अब मेघालय का अनानास न सिर्फ देश के भीतर, बल्कि देश के बाहर भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

मेघालय के अनानास

बता दें कि मेघालय में कई किस्मों के अनानास होते हैं। उनमें जीआई टैग वाले खासी मंदारिन, लाकाडोंग टर्मरिक, किउ पाइनएपल शामिल हैं। आमतौर पर इन किस्मों को पारंपरिक जैविक तरीके से उगाया जाता है। मेघालय के अनानास में खास बात होती है कि इसमें सामान्य भारतीय अनानास के मुकाबले कीटनाशक और भारी धातु के अवशेष काफी कम होते हैं। इसके अलावा ये कम खट्टे होते हैं और खाने में मीठे लगते हैं। मेघालय के री-भोई और पूर्वी गारो हिल्स जिलों को अनानास के लिए ओडीओपी के लिए चुना गया है।

खास बात ये है कि मेघालय में एनडीए और सहयोगी दलों की सरकार पिछले कुछ समय पहले ही आई थी, उससे पहले 2010 और 2020 के दशकों में कॉन्ग्रेस की ही सरकार रही। उस समय पहले मेघालय के स्थानीय उत्पादों को आगे बढ़ाने की क्या योजनाएँ चलाई गई, इसका जवाब तो कॉन्ग्रेस पार्टी को देना चाहिए?

खैर, हम आपको बता दें कि अबू धाबी के अल-वहदा मॉल में ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ मनाने के दौरान आयोजित कार्यक्रम में मेघालय के अनानास को सेंटर प्वॉइंट के तौर पर रखा गया था। यही नहीं, लुलु ग्रुप जैसी कंपनियाँ खाड़ी देशों के बाजारों में मेघालय के अनानास की मिठास पहुँचा रही हैं।

अभी सरकार की तरफ से अनानास को इकट्ठा करने, उनकी ग्रेडिंग, छँटनी करने और पैकेजिंग करने की किसानों को ट्रेनिंग दी जा रही है। इन किसानों के ग्रुपों ने असम में रिलायंस आउटलेट्स को 5.2 मीट्रिक टन अनानास तीन सप्ताह में भेजे हैं। यही नहीं, वेस्ट गारो हिल्स की रिंगगी डेमडेमा ऑर्गेनिक फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी ‘डीहाट सीड्स टू मार्केट’ के माध्यम से 12 मीट्रिक टन अनानास वाराणसी भेजती है।

मेघालय भारत के अनानास उत्पादन में 8% से अधिक का योगदान देता है, जो इसे भारत के कृषि मानचित्र में एक प्रमुख खिलाड़ी बनाता है। अनानास पर अपने फोकस के अलावा, मेघालय सरकार ने किसानों के जीवन को बेहतर बनाने और उनके राजस्व को दोगुना करने के लिए कई कार्यक्रम शुरू किए हैं। कृषि उत्पादों को बढ़ाने में सरकार योगदान दे रही है। वन स्टॉप शॉप के रूप में राज्य में 200 सीएमसी की स्थापना की गई है। यही नहीं, मेघालय के गाँवों में कृषि उत्पादों के वितरण के लिए भी बुनियादी सुविधाओं का विकास किया गया है।

अयोध्या में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, अब तक 3 लाख भक्तों ने किए दर्शनः गर्भगृह से हालात सँभाल रहे मुख्य सचिव और DG, CM योगी भी पहुँचे

निर्माणाधीन राम मंदिर के गर्भगृह में सोमवार (22 जनवरी, 2024) को भगवान रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व RSS के सरसंघचालक मोहन भागवत समेत फिल्म, राजनीति, उद्योग और खेल जगत की कई मशहूर हस्तियों की मौजूदगी रही। वहीं इसके अगले ही दिन अयोध्या में भीड़ बेकाबू हो गई। रामलला के दर्शन के लिए लाखों लोग पहुँच गए। शाम तक ही 3 लाख लोगों को दर्शन कराया जा चुका था, जबकि इन ही लोग बाहर दर्शन के इंतज़ार में कतारबद्ध थे।

भारी भीड़ को देखते हुए उत्तर प्रदेश के कई आला अधिकारियों को अयोध्या भेजा गया। निगरानी के लिए खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहुँच गए। प्रमुख सचिव गृह संजय प्रसाद और DG (कानून व्यवस्था) प्रशान्त कुमार खुद गर्भगृह में मौजूद रह कर स्थिति को सँभालते रहे। प्रशासन का कहना है कि सुगम दर्शन के लिए हर कोशिश की जा रही है, पुलिस अलर्ट मोड में है। भक्तों को कोई असुविधा न हो, इसके लिए प्रबंध किए जा रहे हैं।

उधर अयोध्या से 110 किलोमीटर दूर स्थित बाराबंकी में भी भगदड़ की स्थिति है। वहाँ की पुलिस ने बताया है कि श्रद्धालुओं को परिवर्तित मार्ग से अयोध्या भेजा जा रहा है। उधर अयोध्या पुलिस ने इस अफवाह का खंडन किया है कि श्रद्धालुओं की कई किलोमीटर लंबी लाइन की वजह से दर्शन रोक दिया गया है। यूपी पुलिस ने कहा कि वो सभी श्रद्धालुओं को दर्शन कराने के लिए कटिबद्ध है। साथ ही ऐसी किसी भी अफवाह या फोटो/वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर न करने की अपील की गई है।

हालाँकि, अयोध्या पुलिस ने ये अपील भी की है कि लोग हड़बड़ी में अयोध्या न आएँ, आराम से अगले 10-15 दिनों बाद दर्शन करें। अभी ‘यात्री सुविधा केंद्र’ के तहत चेकिंग पॉइंट्स नहीं बने हैं, ऐसे में पुलिस ही बैग चेक कर रही है। लोग फोन लेकर अंदर जा रहे हैं और सेल्फी ले रहे हैं, जिससे भीड़ बढ़ रही है। 12,000 में से 6000 लॉकर बन चुके हैं, लेकिन ये संख्या भक्तों की संख्या के सामने काफी कम है। CM योगी ने खुद हेलीकॉप्टर से स्थिति का जायजा लिया।

आगजनी, पत्थरबाजी, RSS कर्यकर्ता पर जानलेवा हमला, अनुष्ठान को डंडाधारी भीड़ ने घेरा, शोभा यात्रा को बनाया निशाना: इधर राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा, उधर झारखंड में हिंसा

अयोध्या में रामलला के भव्य मंदिर में एक तरफ उनकी प्राण प्रतिष्ठा हो रही थी, तो दूसरी तरफ पूरी दुनिया में भगवान राम के लिए शोभायात्रा निकाली जा रही थी। इस बीच, झारखंड में हिंदुओं से नफरत का अलग ही स्तर देखने को मिला, जिसमें कई जगहों पर शोभा यात्राओं पर हमलों की खबर है। झारखंड के कई जिलों से ऐसी खबरें सामने आई, जिसमें जिहादी भीड़ ने हिंदुओं की शोभायात्राओं पर पत्थरबाजी की, हमले किए।

गिरिडीह में तनाव की कई घटनाएँ

झारखंड के गिरिडीह में तनाव की 3 घटनाएँ सामने आई। इसमें कई लोग घायल हो गए। पहली घटना शहर के लाइन मस्जिद के पास हुई और दूसरी घटना पूर्णानगर में हुई जो मुफस्सिल थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है। यहाँ दो समुदाय के बीच पत्थरबाजी हुई, जिसमें कई लोगों को मामूली चोटें आई। उन्हें इलाज के लिए सदर अस्पताल गिरिडीह में भर्ती कराया गया। गिरिडीह के एसपी दीपक कुमार शर्मा ने दोनों घटनाओं की पुष्टि की और बताया कि दोनों जगह पर भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया गया है। पुलिस ने गिरिडीह में घटी घटना के मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए मोहम्मद जाबिर नामक एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है।

गिरिडीह में तनाव के कई मामले दर्ज किए गए। ऐसे ही एक मामले में आजाद नगर के पास RSS कार्यकर्ता बिरनी के रोहित महतो पर जानलेवा हमला किया गया। इससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। वहीं, मुफस्सिल थाना क्षेत्र के चुंजका के पास जमकर पथराव हुआ। बताया गया कि पूर्णानगर राम मंदिर के पास से लोग जुलूस निकालकर चुंजका ‘बजरंग बली’ मंदिर जा रहे थे। मंदिर के पास पहुँचने के बाद दूसरे समुदाय के लोगों ने घरों की छत से पथराव शुरू कर दिया, जिसमें कई लोग घायल हो गए। इस मामले में मौके पर पहुँची पुलिस के कई जवान भी घायल हो गए।

लोहरदगा के कैरो में तनाव

झारखंड के लोहरदगा में भी तनाव की खबरें सामने आई है। यहाँ कैरो थाना क्षेत्र के हनहट गाँव में सोमवार (22 जनवरी, 2024) की देर रात अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान को लेकर उत्सव मनाया जा रहा था। इसी बीच मंदिर में गाना बजाने के दौरान दोनों पक्ष के लोग आमने-सामने हो गए और लाठी डंडे के साथ भीड़ ने मंदिर को घेर लिया। एसपी हारिस बिन जमा ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए पुलिस बल की तैनाती की गई है। दोनों पक्ष के लोगों के साथ बैठक कर स्थिति को सामान्य करने का प्रयास किया गया है।

धनबाद के टुंडी समेत दो जगहों पर बवाल

धनबाद के टुंडी थाना इलाके में कदैयाँ में रविवार को तनाव फैला था, इसके बाद सोमवार (22 जनवरी, 2024) की शाम को छाताबाद में जुलूस निकालने के दौरान दूसरे पक्ष के कई घरों से लोग बाहर निकल आए। फिर दोनों पक्षों के बीच बहस होते-होते मारपीट शुरू हो गई। डीएसपी अमर कुमार पांडेय समेत टुंडी थाना की पुलिस की ओर से समझाने के बाद दोनों पक्ष शांत हो गए। वहीं, रविवार (21 जनवरी, 2024) को कदैयाँ में धार्मिक झंडा लगाने को लेकर दो पक्षों के बीच भिड़ंत हुई, जिसमें कई लोग जख्मी हो गए थे। इस मामले में दोनों पक्षों की ओर से टुंडी थाना में लिखित शिकायत की गई है।

रामलला ने धारण किए दिव्य आभूषण, सोना-हीरा-माणिक्य से हैं निर्मित: चाँदी के खिलौने भी, PM मोदी ने शेयर किया अयोध्या का Video

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 जनवरी 2024 को अयोध्या के राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा की एक वीडियो साझा की है। उन्होंने इस कार्यक्रम की कुछ झलकियाँ और भक्तों के भाव को इस वीडियो के माध्यम से दिखाया है। वहीं श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने रामलला को पहनाए गए आभूषणों के विषय में भी जानकारी साझा की है।

प्रधानमंत्री द्वारा साझा की गई वीडियो में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के समय भाव-विभोर श्रद्धालुओं को दिखाया गया है। इनमें रामजन्मभूमि आन्दोलन के प्रमुख चेहरों से एक रहीं साध्वी ऋतम्भरा भी शामिल हैं। प्रधानमंत्री के प्राण-प्रतिष्ठा के लिए गर्भ गृह जाते समय की झलकियाँ और उनका श्रमवीरों पर फूल बरसाना भी वीडियो में दिखाया गया है।

वहीं श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने रामलला को प्राण-प्रतिष्ठा के दिन पहनाए गए आभूषणों, वस्त्रों और खिलौनों के विषय में जानकारी दी है। ट्रस्ट ने इनके निर्माण समेत इनमें उपयोग की हुई धातुओं और रत्नों के विषय में भी बताया है। ट्रस्ट ने एक्स/ट्वीट पर साझा किए गए पोस्ट में कहा है, “अपने महा प्रासाद में भगवान श्री रामलला जी दिव्य आभूषणों और वस्त्रों से सज्ज होकर विराजमान हैं। इन दिव्य आभूषणों का निर्माण अध्यात्म रामायण, श्रीमद्वाल्मीकि रामायण, श्रीरामचरितमानस तथा आलवन्दार स्तोत्र के अध्ययन और उनमें वर्णित श्रीराम की शास्त्रसम्मत शोभा के अनुरूप शोध और अध्ययन के उपरान्त किया गया है।”

ट्रस्ट ने बताया है, “भगवान बनारसी वस्त्र की पीताम्बर धोती तथा लाल रंग के पटुके/ अंगवस्त्रम में सुशोभित हैं। इन वस्त्रों पर शुद्ध सोने की ज़री और तारों से काम किया गया है, जिनमें वैष्णव मंगल चिन्ह- शंख, पद्म, चक्र और मयूर अंकित हैं।”

प्राण प्रतिष्ठा के दिन क्या-क्या धारण किया रामलला ने?

ट्रस्ट ने बताया है, “भगवान को पहनाया गया मुकुट या किरीट उत्तर भारतीय परम्परा में सोने से बनाया गया है। इसमें माणिक्य, पन्ना और हीरे भी लगाए गए हैं। मुकुट के ठीक मध्य में भगवान सूर्य अंकित हैं। मुकुट के दाईं ओर मोतियों की लड़ियाँ पिरोई गई हैं।” वहीं रामलला को पहनाए गए कुण्डल भी मुकुट या किरीट के अनुरूप ही और उसी डिजाइन के क्रम में बनाए गए हैं। इसमें मयूर आकृतियाँ बनी हैं और यह भी सोने, हीरे, माणिक्य और पन्ने से सुशोभित है।

भगवान के गले में अर्द्धचन्द्राकार रत्नों से जड़ित कण्ठा सुशोभित है, जिसमें मंगल का विधान रचते पुष्प अर्पित हैं और मध्य में सूर्य देव बने हैं। सोने से बना हुआ यह कण्ठा हीरे, माणिक्य और पन्नों से जड़ा है। कण्ठे के नीचे पन्ने की लड़ियाँ लगाई गई हैं। भगवान के हृदय में कौस्तुभमणि धारण कराया गया है, जिसे एक बड़े माणिक्य और हीरों के अलंकरण से सजाया गया है। इसका सम्बन्ध कौस्तुभमणि से है जो भगवान विष्णु के हृदय में सुशोभित है।

रामलला के नाभिकमल से ऊपर पहनाया गया हार है, जिसका देवता अलंकरण में विशेष महत्त्व है। यह पदिक पाँच लड़ियों वाला हीरे और पन्ने का ऐसा पंचलड़ा है, जिसके नीचे एक बड़ा सा अलंकृत पेण्डेंट लगाया गया है। भगवान पर सुशोभित तीसरा हार सोने से निर्मित है।

ट्रस्ट ने बताया है कि इसमें कहीं-कहीं माणिक्य लगाए गए हैं, जिसे विजय के प्रतीक के रूप में पहनाया जाता है, जिसमें वैष्णव परम्परा के समस्त मंगल-चिन्ह सुदर्शन चक्र, पद्मपुष्प, शंख और मंगल-कलश दर्शाया गया है। इसमें पाँच प्रकार के देवता को प्रिय पुष्पों का भी अलंकरण किया गया है, जो क्रमशः कमल, चम्पा, पारिजात, कुन्द और तुलसी हैं।

भगवान के कमर में करधनी धारण कराई गई है, जिसे रत्नजड़ित बनाया गया है। गौरतलब है कि भारत में छोटे बच्चों को करधनी पहनाई जाती है। सोने से निर्मित इसमें प्राकृतिक सुषमा का अंकन है और हीरे, माणिक्य, मोतियों और पन्ने से यह अलंकृत है।

इसके अतिरिक्त, पवित्रता का बोध कराने वाली छोटी-छोटी पाँच घण्टियों भी इसमें लगाई गई है। भगवान की भुजाओं में सोने और रत्नों से जड़ित मुजबन्ध पहनाए गए हैं। दोनों ही हाथों में रत्नजड़ित सुन्दर कंगन पहनाए गए हैं। बाएँ और दाएँ दोनों हाथों की मुद्रिकाओं में रत्नजड़ित मुद्रिकाएँ सुशोभित हैं, जिनमें से मोतियाँ लटक रही हैं।

भगवान के पैरों में छड़ा और पैजनियाँ पहनाई गई हैं। यह सोने से निर्मित हैं। भगवान के बाएँ हाथ में सोने का धनुष है, जिनमें मोती, माणिक्य और पन्ने की लटकने लगी हैं। इसी तरह दाहिने हाथ में सोने का बाण धारण कराया गया है। यह मूर्ति में ना उकेर कर अलग से लगाई गई है।

भगवान रामलला के गले में रंग-बिरंगे फूलों की आकृतियों वाली वनमाला धारण कराई गई है। इसका निर्माण हस्तशिल्प के लिए समर्पित शिल्पमंजरी संस्था ने किया है। भगवान के माथे पर मंगल तिलक को हीरे और माणिक्य से रचा गया है। भगवान के चरणों के नीचे जो कमल सुसज्जित है, उसके नीचे एक सोने की माला सजाई गई है। भगवान को यहाँ बालरूप में सुशोभित किया गया है, इसलिए उनके आसपास खिलौने भी रखे गए हैं। भगवान के खेलने के लिए चाँदी से निर्मित ऊँट, हाथी, घोड़े और अन्य खिलौने रखे गए हैं।

राहुल गाँधी पर करो ‘भीड़ को भड़काने’ का केस, असम CM ने DGP को दिए निर्देश: कहा- ‘नक्सलाइट टैक्टिस’ नहीं चलेगी, यात्रा के दौरान पुलिस से भिड़े थे काॅन्ग्रेसी

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के खिलाफ भीड़ भड़काने के मामले में असम में FIR दर्ज होगी। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने खुद इस संबंध में असम के डीजीपी को निर्देश दिया है। उन्होंने कॉन्ग्रेस की न्याय यात्रा में शामिल कॉन्ग्रेस समर्थकों को उग्र होता देखने के बाद ये निर्देश दिए हैं।

दरअसल, मुख्यमंत्री सरमा ने श्रीनिवास बीवी द्वारा साझा वीडियो को अपनी टाइमलाइन पर शेयर किया था। इस वीडियो के साथ उन्होंने लिखा, “राहुल गाँधी जी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा को एक बार फिर से बैरिकेडिंग लगाकर रोकने की साजिश हुई है, लेकिन हम ये अब होने नही देंगे…जितनी लाठियाँ चलानी है चलाओ… ये जंग अब जारी रहेगी।”

उनकी इस वीडियो में दिखाई पड़ रहा था कि कॉन्ग्रेसी समर्थकों ने पुलिस द्वारा लगाई बैरिकेडिंग को तोड़ा गया। उन बैरिकेड्स को पुलिसकर्मियों पर पलटा और तेज-तेज राहुल गाँधी जिंदाबाद के नारे लगाए।

इस वीडियो को देखने के बाद सीएम सरमा ने अपने ट्वीट में लिखा, “ये असमिया संस्कृति का हिस्सा नहीं हैं। हम एक शांतिपूर्ण राज्य हैं। ऐसी ‘नक्सली रणनीति’ हमारी संस्कृति से पूरी तरह अलग हैं। मैंने असम पुलिस के डीजीपी को भीड़ को उकसाने के लिए कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के खिलाफ मामला दर्ज करने और अपने हैंडल पर पोस्ट किए गए फुटेज को सबूत के रूप में उपयोग करने का निर्देश दिया है। राहुल गाँधी के अनियंत्रित व्यवहार और सहमत दिशानिर्देशों के उल्लंघन के परिणामस्वरूप अब गुवाहाटी में बड़े पैमाने पर ट्रैफिक जाम हो गया है।”

बता दें कि कॉन्ग्रेसियों द्वारा गुवाहटी में ऐसी हरकत किए जाने के बाद राहुल गाँधी ने इस संबंध में अपने समर्थकों की वाह वाही की थी। उन्होंने अपने उग्र समर्थकों को बब्बर शेर कहा था और कहा था कि हम लोगों ने बैरिकेड तोड़ा है, कोई कानून नहीं है।

हालाँकि हिमंता बिस्वा सरमा ने ऐसी हरकत को बर्दाश्त किए बगैर, डीजीपी को निर्देश दे दिया कि ऐसे बर्ताव बिलकुल सहे नहीं जाएँगे।

इससे पहले उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी को शहर में एंट्री देने से मना किया था। उन्होंने कहा था कि ट्रैफिक जाम की स्थिति से बचने के लिए कॉन्ग्रेस पार्टी को एंट्री नहीं दी गई है। राहुल गाँधी को नागाँव जिले के शंकरदेव मंदिर में भी एंट्री देने से मना कर दिया गया था। इसके बाद कॉन्ग्रेस ने कहा था कि असम सरकार बेवजगह उनके रास्ते में अड़ंगे लगा रही है।

तेल लगाई हुई टाँगें, ‘लोग मुड़-मुड़ कर देखें’ वाली बातें… H&M ने हटाया बच्चियों को यौन वस्तु की तरह दिखाने वाला विज्ञापन, स्कूली फैशन के नाम पर डाली थी फोटो

स्वीडन के फैशन ब्रांड H&M ने यौन प्रदर्शन के लिए बच्चियों का गलत इस्तेमाल करने को लेकर माफ़ी माँग ली है। H&M की जींस जैकेट्स व अन्य कपड़े युवाओं में खासे लोक्रपिय हैं। कंपनी ने एक विज्ञापन में छोटी-छोटी बच्चियों को यौन वस्तु की तरह दिखाया था, जिसके बाद उसकी खासी आलोचना हो रही थी। स्कूल क्लॉथिंग को लेकर जारी किए गए इस विज्ञापन को अब वापस ले लिया गया है। इस विज्ञापन अभियान को ऑस्ट्रेलिया में लॉन्च किया गया था।

इस विज्ञापन में 2 नाबालिग लड़कियों को दिखाया गया था। साथ ही कैप्शन में लिखा गया था, “H&M के ‘स्कूल फैशन की वापसी’ के जरिए लोगों को मुड़ कर देखने के लिए विवश कर दें।” अब सोमवार (22 जनवरी, 2024) को कंपनी के प्रवक्ता ने अपने बयान में कहा कि हमने इस एडवर्टाइजमेंट को हटा दिया है। प्रवक्ता ने कहा कि हम इस गलती के लिए गहराई से क्षमाप्रर्थी हैं, और हम आगे देख रहे हैं कि मौजूदा विज्ञापन अभियान किस तरह से आगे बढ़ रहे हैं।

लोगों ने H&M की आलोचना करते हुए कहा था कि बच्चियों के अभिभावक कभी ऐसा नहीं चाहेंगे कि उनकी बेटियाँ ऐसे कपड़े पहनें जिसे लोग बार-बार मुड़-मुड़ कर देखें। लोगों ने कहा कि बस में, क्लास में या सड़क पर बच्चियों को कोई मुड़-मुड़ कर देखे, ये ठीक नहीं है। इसी तरह पिछले साल पेरिस के लक्जरी फैशन ब्रांड Balenciaga ने निशाना बनी थी। उसने टेडी ऐसे बेयर जारी किए थे, जो बंधकों वाले ड्रेस पहने हुए थे। साथ ही वहाँ की सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का प्रिंटआउट लगाया गया था, जिसमें चाइल्ड पॉर्नोग्राफी के खिलाफ कानूनों को जायज ठहराया गया था।

लेखिका मेलिना टनकार्डरेस्ट ने भी H&M की आलोचना करते हुए कहा था कि स्कूली बच्चों को अकेले छोड़ देना चाहिए, उन्हें लोगों के अनचाहे आकर्षण का केंद्र नहीं बनाना चाहिए। कंपनी ने इस विज्ञापन को फेसबुक पर जारी किया था, जिसका स्क्रीनशॉट अब भी वायरल हो रहा है। इसमें लड़कियों को स्कूल स्कर्ट पहने हुए दिखाया गया था। लोगों ने पूछा था कि जानबूझकर बच्चियों की टाँगों में तेल क्यों लगा दिया गया है, क्या उन्हें यौन वस्तु की तरह पेश किया जा सके इसीलिए?