Monday, July 22, 2024
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‘भारत कोई पश्चिमी देश नहीं जो लिव-इन सामान्य हो’: इलाहाबाद HC की टिप्पणी, जज शमीम अहमद बोले – ‘अपनी संस्कृति व परंपराओं पर गर्व करें’

आशीष कुमार ने कोर्ट के समक्ष याचिका के साथ एक पत्र भी रखा था जो कि उसने दावा किया था कि लड़की ने लिखा है। याचिकाकर्ता आशीष कुमार ने कोर्ट के सामने कुछ तस्वीरें भी रखीं

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि भारत कोई पश्चिमी देश नहीं है जहाँ लिव इन रिलेशनशिप सामान्य बात हों। हाईकोर्ट ने कहा है भारत में लोगों को अपनी संस्कृति और परंपराओं को मानना चाहिए और इस पर गर्व करना चाहिए। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी एक याचिका की सुनवाई करते हुई की।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के सामने एक व्यक्ति आशीष कुमार ने याचिका डाली थी कि एक महिला, जिससे उसका 2011 से प्रेम सम्बन्ध है, उसका परिवार उसे उससे मिलने नहीं दे रहा है। उसने इस संबंध ने याचिकाकर्ता ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका डाली थी। उसका कहना था कि महिला को उसके परिवार वालों ने जबरन कैद कर रखा है।

इस मामले की सुनवाई कर रहे इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस शमीम अहमद ने कहा, “अदालत का मानना है कि हम एक पश्चिमी देश नहीं हैं जहाँ एक लड़की-लड़के का लिव इन रिलेशनशिप में रहना सामान्य बात हो। हम एक ऐसे देश हैं जहाँ लोग अपनी परंपराओं और संस्कृति में विश्वास करते हैं और उस पर गर्वित हैं, ऐसे में हमें भी यही करना चाहिए।”

आशीष कुमार ने कोर्ट के समक्ष याचिका के साथ एक पत्र भी रखा था जो कि उसने दावा किया था कि लड़की ने लिखा है। याचिकाकर्ता आशीष कुमार ने कोर्ट के सामने कुछ तस्वीरें भी रखी थीं और बताया था कि वह इस लड़की के 2011 से प्रेम संबंध में हैं। हालाँकि, कोर्ट ने कहा कि यह याचिका मात्र लड़की और उसके परिवार की छवि खराब करने के उद्देश्य से डाली गई है और इससे याचिकाकर्ता उन पर दबाव डाल कर अपने मन का निर्णय करवाना चाहता है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा, “अदालत के सामने कोई कारण नहीं है कि वह इस तरह की याचिका की सुनवाई करे जो कि किसी लड़की और उसके परिवार वालों की छवि खराब करने के उद्देश्य से डाली गई है। अदालत अगर ऐसी याचिका को सुनता है तो इससे लड़की और उसके परिवार की छवि धूमिल होगी और उन्हें भविष्य में उसके लिए दूल्हा ढूँढने में समस्या होगी।”

कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा कि यदि वह और लड़की जिसके विषय में याचिका डाली गई है, वह 13 साल से एक दूसरे के साथ प्रेम सम्बन्ध में हैं तो विवाह क्यों नहीं किया। कोर्ट ने इसी के साथ ही याचिका को खारिज कर दी और याचिकाकर्ता पर ₹25,000 का जुर्माना भी लगाया।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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