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महिला नेता ने उत्पीड़न पर उठाई आवाज, कॉन्ग्रेस ने पार्टी से निकाल दियाः असम आए राहुल गाँधी से पूछा- मुझे कब मिलेगा न्याय

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ असम में प्रवेश कर गई है। कभी असम यूथ कॉन्ग्रेस की अध्यक्ष रहीं अंगकिता दत्ता ने उनसे न्याय माँगा है। यूथ कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीवी श्रीनिवास के उत्पीड़न और प्रताड़ना के खिलाफ आवाज उठाने पर पार्टी ने अंगकिता को निष्कासित कर दिया था।

अंगकिता दत्ता के नेतृत्व में शिवसागर में राहुल गाँधी की यात्रा के विरोध में धरना दिया गया। इस दौरान अंगकिता दत्ता ने कहा, “मुझे पार्टी से निकाले हुए 10 महीने होने को आए हैं। बगैर मेरा पक्ष सुने मुझे निष्कासित कर दिया गया, क्योंकि मैंने एक उत्पीड़क के खिलाफ, एक ऐसे शख्स के खिलाफ न्याय की माँग की थी जो पावर में था।”

उन्होंने कहा, “बीते 10 महीने में मैंने किसी भी राजनीतिक पार्टी का हाथ नहीं थामा। मैं अपने लोगों के साथ बैठी हूँ जो मुझे अपने परिवार का सदस्य मानते हैं जो न्याय चाहते हैं। राहुल गाँधी असम आए हैं। मुझे पक्का विश्वास है कि वह मुझे और असम की महिलाओं को न्याय देंगे। जो लोग दमनकारी है और अपनी ताकत का बेजा इस्तेमाल कर रहे हैं उन पर एक्शन लेंगे। ये मेरा घर है, मेरा परिवार है, मेरे पिता कई बार इस निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। अपने आखिरी दम तक वो कॉन्ग्रेस का झंडा उठाए रहे।”

बताते चलें कि काॅन्ग्रेस ने अप्रैल 2023 में डॉ अंगकिता दत्ता (Angkita Dutta) को 6 साल के लिए पार्टी से निकाल दिया था। उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगा उन पर ये एक्शन लिया गया।

असम युवा काॅन्ग्रेस की अध्यक्ष रहीं अंगकिता ने यूथ काॅन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीवी श्रीनिवास (Srinivas BV) और यूथ कॉन्ग्रेस के सेक्रेटरी इंचार्ज वर्धन यादव पर लैंगिक भेदभाव तथा बदजुबानी का आरोप लगाया था। कहा था कि राहुल गाँधी ने भी उनकी शिकायतों पर गौर नहीं किया और प्रताड़ना का सिलसिला चलता रहा। उन्होंने कहा था, “श्रीनिवास पिछले छह महीनों से उन्हें परेशान और प्रताड़ित कर रहे हैं। लैंगिक टिप्पणी करते हैं। अपशब्दों का इस्तेमाल करते हैं। पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों से इसकी शिकायत करने पर उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दे रहे हैं।”

अंगकिता दत्ता ने बताया था कि उन्हें करीब छह महीने से प्रताड़ित किया जा रहा था। ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान राहुल गाँधी को भी उन्होंने इसकी जानकारी दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप था कि स्त्री होने के कारण उनके साथ भेदभाव हुआ। इसके बाद अंगकिता ने 19 अप्रैल को गुवाहाटी के दिसपुर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी।

‘न्यूजलौंडी’ वालो, जन्नत की टपरी पर 72 हूरों के साथ शराब कब बहाओगे?

जन्नत का दृश्य है, 130 फ़ीट की 72 हूरों के साथ वो लोग बैठे हुए हैं जिनकी इस्लाम में सबसे ज़्यादा इज्जत है, वो जन्नत में बहने वाली दारू की नदी में से दारू निकाल कर ‘दारू पर चर्चा’ कर रहे हैं। सबका मजाक बनाया जा रहा है। आतंकवाद पर चर्चा हो रही है, ‘सर तन से जुदा’ पर चर्चा हो रही है। क्या आपने कभी किसी यूट्यूब चैनल पर ऐसा ‘व्यंग्य’ वाला वीडियो देखा? नहीं देखा ना? हम पूरी बात समझेंगे, लेकिन पहले शुरू से शुरू करते हैं।

‘झबड़ा’ कहे जाने वाले अभिनंदन शेखरी कप्रोपगैंडा प्लेटफॉर्म Newslaundry एक वीडियो बनाता है। वीडियो में व्यंग्य के नाम पर हिन्दू देवी-देवताओं और पौराणिक किरदारों का मज़ाक बनाया जाता है। महान स्वतंत्रता सेनानी वीर विनायक दामोदर सावरकर का अपमान किया जाता है। शुरू में एक फालतू डिस्क्लेमर लगा दिया जाता है, जिसे व्यंग्य की शैली में रखने के चक्कर में उसकी ऐसी की तैसी कर दी गई है। जिस वीडियो की हम बात कर रहे, उसमें पत्रकार अतुल चौरसिया ने राम मंदिर पर प्रलाप किया है।

उस वीडियो में पत्रकार अमीश देवगन को ब्रह्मर्षि नारद की भूमिका में दिखाया गया है। साथ ही अंजना ओम कश्यप को एक साध्वी की वेशभूषा में और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी प्राचीन शासक की वेशभूषा में दिखाया गया है। इस वीडियो में वीर सावरकर और अटल बिहारी वाजपेयी को भी दिखाया गया है। दिखाया गया है कि स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद भारत के मौजूदा घटनाक्रम से दुःखी हैं।

संक्षेप में बताएँ तो इस वीडियो के जरिए जहाँ इस बात पर चिंता जताई गई है कि 500 वर्षों के संघर्ष और बलिदानों के बाद अवैध कब्जे से मुक्त हुई रामजन्मभूमि पर बन रहे मंदिर को मीडिया कवरेज क्यों मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दल और कॉन्ग्रेस का बचाव किया गया है और उन्हें सीख दी गई है कि आगे क्या करना चाहिए। वीडियो में आज के भारत पर चिंता जताते हुए वीर सावरकर पर दोष मढ़ दिया गया है। यहाँ तक कि सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन को लेकर नेहरू ने डॉ प्रसाद को वहाँ न जाने की सलाह दी थी, उसका भी बचाव किया गया है।

अब वापस आते हैं डिस्क्लेमर पर। इसमें लिखा है, “यह बात समझ से परे है कि किसी मृत व्यक्ति की भावना को कैसे ठेस पहुँच सकती है, लेकिन अगर आत्मा ज़िंदा रहती है और आत्मा में भावनाएँ हैं तो हम नहीं चाहते कि उस आत्मा की भावनाओं को भी ठेस नहीं पहुँचाना सकते।” यहाँ बड़ी चालाकी से हिन्दू देवी-देवताओं, साधु-संतों और पौराणिक पात्रों पर टिप्पणियों को लेकर खुद को ही NOC सर्टिफिकेट दे दिया गया है। यानी, उनका कहना है कि वो हिन्दुओं की भावनाएँ आहत करेंगे और किसी को विरोध करने का अधिकार नहीं है।

‘न्यूजलॉन्ड्री’ के डिस्क्लेमर में व्यंग्य के चक्कर में व्यंग्य की कर दी ऐसी ही तैसी

ठीक है, चलिए मान लेते हैं। किसी को आहत होने का अधिकार नहीं है। Newslaundry को पत्रकारिता का सबसे बड़ा झंडाबरदार भी मान लेते हैं। अतुल चौरसिया को श्रीलाल शुक्ल से भी अव्वल दर्जा का व्यंग्यकार का दर्जा दे देते हैं। तो क्या अब ‘न्यूजलॉन्ड्री’ के यूट्यूब चैनल पर स्वर्ग की जगह जन्नत का वीडियो आएगा, जिसमें हिन्दू धर्म नहीं बल्कि इस्लाम मजहब वाले जिनकी इबादत करते हैं, जिन्हें महापुरुष मानते हैं – उन्हें लेकर व्यंग्य किया जाएगा? क्या ये संभव है?

मान लीजिए, जन्नत का दृश्य है। वहाँ मुल्ले-मौलवी जमा हैं। कन्हैया लाल तेली और उमेश कोल्हे का ‘सर तन से जुदा’ किए जाने पर बहस हो रही है। जिस तरह अतुल चौरसिया ने इस वीडियो में धर्मराज युधिष्ठिर को लेकर व्यंग्य किया है, क्या वो इस्लाम के ____ को लेकर व्यंग्य कर सकता है? नूपुर शर्मा ने जब हदीथ से लेकर एक तथ्य का जिक्र कर दिया तो क्या हुआ ये बताने की ज़रूरत नहीं है। वो डेढ़ वर्षों से घर में कैद हैं, बाहर निकलती भी हैं तो काफी सुरक्षा व्यवस्था की ज़रूरत पड़ती है।

उसके बाद ‘सर तन से जुदा’ का सिलसिला चला, देश भर में भीड़ जुटा कर नारेबाजी हुई, इस बयान का समर्थन करने वालों पर हमले हुए, क़तर से लेकर अन्य इस्लामी मुल्कों से बयान दिलवाए गए और पूरे देश में डर का माहौल बना दिया गया। जब तथ्य कहने पर इतना सब कुछ हो गया, व्यंग्य पर क्या कुछ होगा ये सोच से भी परे है। ऐसा नहीं है कि हमारे पास इसका उदाहरण मौजूद नहीं है। फ्रांस में एक ऐसे ही व्यंग्य के कारण कुछ ऐसा हो गया था जिसने पूरे यूरोप को हिला दिया था।

जनवरी 2015 में फ्रांस में ‘शार्ली हेब्दो’ पत्रिका के दफ्तर पर हमला बोल दिया गया। कारण – उसने पैगंबर मुहम्मद का कार्टून प्रकाशित किया था। पत्रिका के दफ्तर और एक सुपरमार्केट पर हुए हमलों में 17 लोग मारे गए। मृतकों में 5 कार्टूनिस्ट थे, इमारत के बाहर तैनात एक पुलिस अधिकारी थी। अगले दिन एक सुपरमार्ट पर हमला कर के एक कर्मचारी और 3 ग्राहकों को इन्हीं हमलावरों में मार डाला। अक्टूबर 2020 में फ्रांस में ही एक शिक्षक सैमुअल पैंटी को उनके ही छात्र ने मार डाला, क्योंकि उन्होंने क्लासरूम में ये कार्टून दिखाया था।

नूपुर शर्मा और ‘शार्ली हेब्दो’ वाली घटनाएँ सिर्फ एक उदाहरण हैं उस चीज का, जो सदियों से होता आ रहा है। अगर ‘न्यूजलॉन्ड्री’ की हिम्मत है तो वो इसी तरह का वीडियो बनाए। इस्लाम छोड़िए, ईसाई मजहब या जीसस क्राइस्ट को लेकर ही कोई व्यंग्य बना कर दिखाए। फरिश्तों, 72 हूरों और जन्नत में शराब की नदी पर क्या कभी ‘न्यूजलॉन्ड्री’ व्यंग्य बनाएगा? नहीं बनाएगा, क्योंकि इसका सारा डिस्क्लेमर सिर्फ हिन्दुओं के लिए है, अगर कहीं एक मुस्लिम भी नाराज़ हो गया तो ये मीडिया संस्थान बिना किसी व्यंग्य के माफीनामा जारी कर देगा।

‘न्यूजलॉन्ड्री’ ‘जन्नत में दारू की टपरी’ पर 72 हूरों के साथ चर्चा करते हुए मुल्ले-मौलवियों का भी वीडियो आएगा? अलकाय, ISIS, बोको हराम, तालिबान और जैश-ए-मुहम्मद द्वारा की जा रही हत्याओं पर चर्चा सुनने को मिलेगी? बिना किसी बात के ‘संविधान की हत्या’ का रट्टा मारने वाला अतुल चौरसिया सचमुच में हो रही हत्याओं पर कुछ बोलेगा? सचमुच की हत्याएँ, यानी जहाँ हथियार का इस्तेमाल किया जाता है, खून निकलता है, अस्पताल में पोस्टमॉर्टम होता है, परिवार वाले रोते हैं।

ये ‘संविधान की हत्या’ क्या होती है? ‘न्यूजलॉन्ड्री’ कहता है कि मीडिया मर गया है। क्या भारत भूमि के आराध्य श्रीराम से जुड़ी खबरें दिखाने की मनाही है संविधान में? कहाँ लिखा है, किसने लिखा है? संविधान में तो राम, सीता और लक्ष्मण के वन-गमन की तस्वीर अंकित है। राम-राज्य की अवधारणा तो महात्मा गाँधी की थी, जिनका इस वीडियो में इस्तेमाल वीर सावरकर को नीचा दिखाने के लिए किया गया है। वो वीर सावरकर, जिन्हें अंग्रेजी ने दो-दो आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई, कालापानी की कैद में कोल्हू में बैल की जगह जोता।

वहीं वीर सावरकर, जिनके बिना 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम को हम अंग्रेजों के नज़रिए से साधारण ‘सिपाही विद्रोह’ ही समझ कर पढ़ रहे होंगे, रानी लक्ष्मीबाई और वीर कुँवर सिंह जैसे कई शूरवीर इतिहास के पन्नों में गुम रहते। इसीलिए, ‘न्यूजलॉन्ड्री’ ज़रा अपने डिस्क्लेमर के हिसाब से चलते हुए कभी जन्नत की टपरी पर दारू पर चर्चा वाला भी वीडियो बनाए, उसमें इस्लाम मजहब में जिन लोगों का नाम तक लेने पर ‘सर तन से जुदा’ हो जाता है उन्हें लेकर व्यंग्य कर के दिखाए। क्या लगता है, होगा?

प्रशासन के हवाले करो ज्ञानवापी ढाँचे के तहखाने की चाबियाँ: वाराणसी कोर्ट का आदेश, मुस्लिम पक्ष कर रहा था इनकार

वाराणसी के स्थानीय न्यायालय ने ज्ञानवापी विवादित ढाँचा मामले में सुनवाई करते हुए इस परिसर में बने तहखाने की चाबियाँ वाराणसी के जिलाधिकारी को सौंपने का आदेश दिया है। मुस्लिम पक्ष इसकी चाबियाँ देने से इनकार कर रहा था। वाराणसी के जिला न्यायालय ने 18 जनवरी 2024 को यह निर्णय दिया। जिला जज एके विश्वेश इस मामले की सुनवाई कर रहे थे। न्यायालय के सामने इस तहखाने को प्रशासन को सौंप कर इसकी सही देखरेख किए जाने के लिए याचिका लगाई गई थी।

याचिकाकर्ता के वकील मदन मोहन यादव ने कहा कि 1993 तक यहाँ सोमनाथ व्यास नाम के पुजारी पूजा करते थे। इसे 1993 में प्रशासन ने बंद कर दिया था और यहाँ बाड़ लगा दी थी। हिन्दू पक्ष ने पहले यह भी कहा था कि यहाँ प्रांगण में मुस्लिम पक्ष छेड़छाड़ कर सकता है, इसलिए चाबियाँ प्रशासन के कब्जे में ली जाए।

यह तहखाना ज्ञानवापी ढाँचे के दक्षिणी हिस्से में स्थित है। इसको ‘व्यास जी का तहखाना’ कहा जाता है। अगस्त 2023 में जब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ज्ञानवापी के सर्वे के लिए पहुँचा था तो मुस्लिम पक्ष ने तहखाने की चाबी देने से इनकार कर दिया था। आजतक की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि मुस्लिम पक्ष के वकील ने ज्ञानवापी से बाहर निकल मीडिया से कहा था कि हम तहखाने की चाबी क्यों दे, उन्हें जहाँ खोलना है खोल लें।

इस तहखाने की सही से देखभाल हो सके, इसलिए न्यायालय ने अब वाराणसी के डीएम को ज्ञानवापी में बने तहखाने का रिसीवर बनाया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि जिलाधिकारी इसकी स्थिति में कोई परिवर्तन ना होने दें और इसे अपनी अभिरक्षा में रखें।

गौरतलब है कि 16 जनवरी 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानवापी परिसर में स्थित उस पानी के टैंक को साफ़ करने की अनुमति दी थी, जहाँ से मई 2022 में सर्वे के दौरान शिवलिंग मिला था। हिन्दू पक्ष ने कहा था कि इस टैंक में यहाँ की अंजुमन इस्लामिया कमिटी की वजह से मछलियाँ मर गईं जिससे यहाँ दुर्गन्ध फ़ैल रही है। इसमें शिवलिंग मिला है जो कि हिन्दुओं के लिए आस्था का विषय है, इसलिए इसको साफ़ करवाया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने यह कार्रवाई वाराणसी के जिलाधिकारी के देखरेख में किए आने का आदेश दिया था।

सूखते कच्छों और बाथरूम-टॉयलेट से जामा मस्जिद को नुकसान, बंद करो इसके भीतर चल रहा मदरसा: हाईकोर्ट में याचिका, कर्नाटक सरकार को नोटिस

कर्नाटक हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री सिद्दारमैया सरकार को मांड्या के श्रीरंगपट्टण जामा मस्जिद में बने मदरसे के खिलाफ नोटिस जारी किया है। राज्य केंद्र सरकार सहित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को बुधवार (17 जनवरी, 2024) को एक जनहित याचिका के तहत ये नोटिस जारी किया गया।

इसके साथ ही मुख्य न्यायाधीश प्रसन्ना V वराले और न्यायमूर्ति कृष्ण एस दीक्षित की खंडपीठ ने मांड्या के उपायुक्त को भी नोटिस देने का आदेश दिया। ये याचिका रामनगर जिले के कनकपुरा तालुक के होसा कब्बालू गाँव के निवासी अभिषेक गौड़ा ने दायर की है।

याचिकाकर्ता ने ऐतिहासिक जामा मस्जिद के परिसर में बने मदरसे के अवैध संचालन पर सवाल उठाया है। इसमें दावा किया गया है कि ये मस्जिद टीपू सुल्तान के दौर में बनी है और इसे एक संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है। याचिकाकर्ता ने कहा कि यहाँ आवासीय मदरसा चलाना इसे नुकसान पहुँचाना है।

याचिका में ये भी कहा कहा गया है कि ये प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 की धारा 16 के साथ-साथ प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल और अवशेष नियम, 1959 के नियम 7 और 8 का साफ उल्लंघन है।

याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि इस मदरसे में करीब 50 से 60 बच्चे तालीम ले रहे हैं। याचिकाकर्ता के मुताबिक, टॉयलेट, बाथरूम, रेस्ट रूम, किचन, कपड़े धोने और सुखाने, रोजाना खाना पकाने और भोजन की खपत के साथ ही मदरसे को मस्जिद से अलग करने के निर्माण से प्राचीन स्मारक की जटिल नक्काशी को नुकसान पहुँच रहा है।

याचिकाकर्ता ने ये भी कहा कि उसने केंद्र सहित राज्य सरकार और ASI को इस मदरसे की जानकारी दी थी। यही नहीं, 20 मई, 2020 को उसने मांड्या जिला कमिश्नर को भी शिकायत की थी।

याचिकाकर्ता का दावा है कि उसने ASI से RTI दायर कर मदरसा चलाने के लिए दी गई मंज़ूरी की कॉपी माँगी। इसके जवाब में एएसआई ने कहा है कि मंजूरी देने का कोई रिकॉर्ड उसके दफ्तर में मौजूद नहीं है। याचिकाकर्ता ने ये भी कहा कि श्रीरंगपट्टण के कुछ लोगों और विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के पदाधिकारियों ने जामा मस्जिद के अंदर मदरसा चलाने के खिलाफ विरोध किया है।

बताते चलें कि ‘विश्व हिंदू परिषद‘ (VHP) के कार्यकर्ताओं ने 4 जून, 2022 को श्रीरंगपट्टण शहर में प्रदर्शन कर जामिया मस्जिद को हिंदुओं को लौटाने की माँग की थी। उन्होंने दावा किया था कि यह एक हनुमान मंदिर है, जिसे 18वीं सदी के शासक टीपू सुल्तान ने तोड़ा था।

अब पाकिस्तान ने ईरान पर दागी मिसाइलें, चीन बोला- दोनों मियाँ मुल्क हो, मत लड़ो: 7 की मौत, तेहरान के राजदूत की एंट्री बंद

ईरान ने जब से पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-अल-अदल के ठिकानों पर बम बरसाए हैं तब से पाकिस्तान बिलबिलाया हुआ है। उसने ईरान को जवाब देने के लिए उनके इलाके में मिसाइल-ड्रोन से हमला किया है। वहीं मीडिया में कहा है कि ये बलूच विद्रोहियों पर की गई कार्रवाई है। घटना में 7 लोग खत्म हो गए। इनमें 3 महिलाएँ और 4 बच्चे शामिल हैं। ये अटैक सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत के एक सीमावर्ती गाँव पर हुआ।

हमले को लेकर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि आज सुबह पाकिस्तान ने ‘मार्ग बार सर्माचार’ नाम का अभियान चलाकर ईरान में शरण लेकर रह रहे आतंकवादियों को निशाना बनाया है।

बयान में कहा गया, “गुरुवार सुबह पाकिस्तान ने ईरान के सिस्तान-ओ-बलूचिस्तान प्रांत में आतंकवादियों के चिह्नित ठिकानों पर सुनियोजित हमले किए है। ख़ुफ़िया जानकारी के आधार पर चलाए गए ‘मार्ग बार सर्माचार’ नाम के अभियान में कई आतंकवादी मारे गए हैं।”

बता दें कि इस हमले से पहले मंगलवार को ईरान ने पाकिस्तान में बेस बनाकर बैठे आतंकी संगठन के ठिकानों को मिसाइल हमलों से तबाह किया था। ईरान ने साफ किया था कि उन्होंने अपने दोस्त और भाई जैसे शहर के नागरिकों पर हमला नहीं किया। लेकिन, पाकिस्तान ने भी बलूच विद्रोहियों के नाम पर अपनी कार्रवाई कर डाली। इससे पहले उन्होंने ईरान को एयरस्ट्राइक के गंभीर परिणाम भुगतने को कहे थे।

राजदूत को पाकिस्तान ने वापस बुलाया

पाकिस्तान की खुंदस का इस बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि उन्होंने ईरान से अपना राजदूत वापस बुलवा लिया है और तेहरान के राजदूत को इस्लामाबाद आने से मना कर दिया है। पाकिस्तान विदेश कार्यालय की प्रवक्ता मुमताज ज़हरा बलूच ने टेलीविजन पर प्रसारित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बयान दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने बताया है कि पाकिस्तान में ईरानी राजदूत, जो वर्तमान में ईरान का दौरा कर रहे हैं, वो फिलहाल यहाँ वापस नहीं आ सकते हैं।

प्रवक्ता ने कहा, “हमने अपना संदेश ईरानी सरकार को दे दिया है। हमने उन्हें सूचित किया है कि पाकिस्तान ने ईरान से अपने राजदूत को वापस बुलाने का फैसला किया है और पाकिस्तान में ईरानी राजदूत, जो वर्तमान में ईरान का दौरा कर रहे हैं, फिलहाल वापस नहीं आ सकते हैं।”

ईरान के अधिकारियों की हत्या

इतना ही नहीं पाकिस्तान-ईरान सीमा से सटे आतंकवादी समूह जैश उल-अदल भी अपने ऊपर हुए हमले से तिलमिलाया है। उसके आतंकियों ने ईरान के एक सैन्य अधिकारी और उनके दो सुरक्षाकर्मियों की गोली मार कर हत्या कर दी।

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर (IRGC) के सैन्य अधिकारी और उनके सुरक्षाकर्मियों पर ये जानलेवा हमला पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा से लगे अशांत दक्षिणपूर्वी प्रांत में किया गया। ईरानी समाचार एजेंसी आईआरएनए ने बुधवार (17 जनवरी 2024) को ये जानकारी दी। हमलावारों की पहचान करने और उनका पीछा करने की कोशिशें जारी हैं।

आतंकवादी समूह जैश उल-अदल (Jaish al-Adl) ने 17 जनवरी 2024 को ही इस हमले की जिम्मेदारी भी ले ली। यह वही आतंकी समूह है, जिसके ठिकानों को बर्बाद करने के लिए ईरान की वायुसेना ने पाकिस्तान में घुस कर बमबारी की।

भारत और चीन बोले पाकिस्तान-ईरान के विवाद पर

वहीं भारत ने इस मामले पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वो ईरान की कार्रवाई का कारण समझ सकते हैं। ऐसा सेल्फ डिफेंस में किया गया है। भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा, “यह ईरान और पाकिस्तान के बीच का मामला है। जहाँ तक ​​भारत का सवाल है, आतंकवाद के प्रति हमारा रुख बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करने का है। हम उन कार्रवाइयों को समझते हैं जो देश अपनी आत्मरक्षा में करते हैं।”

वहीं चीन के विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे पर कहा कि दोनों देशों को संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों का पालन करना चाहिए। हर देश को दूसरे देशों की संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता का ईमानदारी से सम्मान करना चाहिए। ईरान और पाकिस्तान पड़ोसी और इस्लामिक मुल्क हैं। इसलिए दोनों को संयम बरतना चाहिए। हम दोनों देशों से तनाव बढ़ाने वाली कार्रवाइयों से बचने का आह्वान करते हैं।

बंगाल में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा की स्क्रीनिंग के लिए जाना पड़ा हाईकोर्ट, पुलिस ने नहीं दी थी अनुमति: अब CM ममता के घर के पास होगा भजन-कीर्तन, बँटेगा प्रसाद भी

कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता बनर्जी सरकार की पुलिस का निर्णय पलट दिया है। हाईकोर्ट ने 22 जनवरी को दक्षिण कोलकाता में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को बड़ी स्क्रीन पर दिखाने और भजन-कीर्तन की अनुमति दे दी है। इससे पहले बंगाल पुलिस ने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम दिखाने की अनुमति नहीं दी थी। यह आयोजन बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के घर से कुछ ही दूर पर होना था। कलकत्ता हाईकोर्ट ने यह निर्णय 17 जनवरी, 2024 को ‘कालीघाट बहुमुखी सेवा समिति’ की याचिका को सुनते हुए दिया।

कोर्ट ने कहा कि समिति दक्षिण कोलकाता के देशप्राण सशमल पार्क में ब्रॉडकास्ट, भजन-कीर्तन और भोग वितरण सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक कर सकती है। गौरतलब है कि समिति पहले 22 जनवरी, 2024 को दक्षिण कोलकाता के नेपाल भट्टाचार्जी पार्क में यह आयोजन करना चाहती थी। इसे लेकर संगठन ने काफी दिन पहले कोलकाता पुलिस से अनुमति माँगी थी। हालाँकि, कोलकाता पुलिस ने इसकी अनुमति उन्हें नहीं दी थी। साथ ही में कोलकाता के नगर निगम ने भी इस पर आपत्ति दर्ज कराई थी।

इसको लेकर ‘कालीघाट बहुमुखी सेवा समिति’ ने कलकत्ता हाईकोर्ट के सामने याचिका दाखिल की थी। समिति ने कहा था कि पुलिस से काफी पहले अनुमति माँगी गई थी लेकिन फिर भी मना किया जा रहा है। इस मामले पर कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस जय सेनगुप्ता की पीठ ने सुनवाई की। सुनवाई के दौरान उन्होंने इस आयोजन की अनुमति दे दी। हालाँकि, पहले से प्रस्तावित आयोजन स्थल को बदल दिया गया। पहले जहाँ यह नेपाल भट्टाचार्जी पार्क में होना था जबकि अब यह आयोजन देशप्राण सश्मल पार्क में होगा।

कोर्ट के सामने कलकत्ता नगर निगम ने कहा कि जहाँ यह समिति राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के सम्बन्ध में आयोजन करना चाहती है, वहाँ शाम को बच्चे खेलने आते हैं। ऐसे में उन्हें समस्या होगी। हालाँकि, कोर्ट ने कहा कि समिति पूरे पार्क में नहीं बल्कि उसके आधे हिस्से में अपना आयोजन सुचारु रूप से कर ले।

गौरतलब है कि जहाँ राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम दिखाया जाएगा और भजन-कीर्तन होगा, वह बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास से मात्र 1 किलोमीटर दूर है। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस आयोजन में 60 से अधिक लोग शामिल ना हों और आयोजन के बाद पार्क को साफ़ कर दिया जाए।

‘मैं लालू यादव का पोता हूँ’: अधिकारी को रोड पर इतना पीटा कि दिल्ली करना पड़ा रेफर, क्या बिहार में लौट आया लालू के नाम पर गुंडागर्दी का दौर?

क्या बिहार में वह दौर फिर से लौट आया है जब लालू प्रसाद यादव के नाम पर गुंडागर्दी होती थी? लालू यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी के मुख्यमंत्री रहते करीब डेढ़ दशक तक चले इस दौर को ‘जंगलराज’ कहते हैं जो आज भी बिहार के लोगों को डराते हैं। अब राजधानी पटना में एक अधिकारी की इस कदर पिटाई की गई है कि उन्हें इलाज के लिए दिल्ली रेफर करना पड़ा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार आरोपितों ने यह गुंडई लालू प्रसाद यादव का नाम लेकर अंजाम दी है।

रिपोर्टों के अनुसार पटना के बोरिंग रोड इलाके में खुद को लालू प्रसाद यादव का ‘पोता’ बताने वाले आरोपितों ने राज्य सरकार के एक अधिकारी को मार-मार कर अधमरा कर दिया है। अधिकारी वेंटिलेटर पर है और पटना से दिल्ली रेफर किया जा चुका है। आरोपितों के नाम तनुज और नयन यादव हैं। दोनों लालू यादव के भतीजे नागेंद्र यादव के बेटे हैं। नागेंद्र यादव पर खुद आधा दर्जन से अधिक गंभीर अपराध के मामले दर्ज हैं।

घटना मंगलवार (16 जनवरी 2024) की है। पीड़ित अधिकारी उप नगर आयुक्त अरविंद कुमार सिंह हैं। सिंह अपने चचेरे भाई और ड्राइवर के साथ जा रहे थे। बोरिंग रोड पर उनकी गाड़ी को कई लोगों ने रोक लिया। एक ने गाड़ी की चाबी लेने की कोशिश की। अरविंद कुमार सिंह ने जैसे ही गाड़ी से उतरकर उनसे सवाल-जवाब की कोशिश की, उन लोगों ने रॉड से हमला कर दिया। काफी देर तक सिंह को बुरी तरह से पीटा और फरार हो गए।

इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी और पीड़ित अधिकारी के भाई विजय कुमार ने बताया है कि अरविंद कुमार सिंह गोपालगंज में तैनात हैं। वे निजी काम से पटना आए थे। बोरिंग रोड पर कुछ लोगों ने कार की चाबियाँ छीनने की कोशिश की। बीच-बचाव की कोशिश में उन्होंने अरविंद पर हमला कर दिया। उनमें से एक ने कहा, ”मेरा नाम तनुज यादव है और मैं नागेंद्र यादव का बेटा हूँ। जो उखाड़ना हो, उखाड़ लेना।” इंडिया टीवी की रिपोर्ट में विजय सिंह के हवाले से बताया गया है, “मारपीट के दौरान वे (आरोपित) चिल्लाकर बोल रहे थे कि मुझे नहीं पहचानते हो, मैं लालू प्रसाद यादव का पोता हूँ…तनुज यादव।”

लाइव हिंदुस्तान के मुताबिक, नागेंद्र यादव उर्फ नागेंद्र राय लालू प्रसाद यादव के भाई के बेटे यानी भतीजे हैं। नागेंद्र यादव पर आधा दर्जन मामले दर्ज हैं। उन पर उगाही, हत्या की कोशिश जैसे गंभीर मामले चल रहे हैं। पिछले साल मार्च में दानापुर के एक बिल्डर ने नागेंद्र पर 2 करोड़ की रंगदारी माँगने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया था। ये एफआईआर 11 मार्च 2023 को दर्ज हुई थी।

अरविंद कुमार सिंह की हालत गंभीर

इस मामले में पीड़ित को पारस अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनकी गंभीर हालत को देखते हुए दिल्ली के लिए रेफर कर दिया गया। अरविंद कुमार सिंह को एयर एंबुलेस उपलब्ध न होने की वजह की वजह से राजधानी एक्सप्रेस के साथ अटैच एंबुलेस से दिल्ली ले जाया गया है। अरविंद कुमार सिंह के चेहरे की अधिकांश हड्डियाँ टूट गई हैं। उनके दिमाग में खून का थक्का जम गया है। उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है।

पुलिस बोली कार्रवाई हो रही, बीजेपी बोली-जंगलराज की वापसी

अरविंद कुमार सिंह के भाई विजय कुमार सिंह ने इस मामले में रूपसपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। वहीं, पटना एसएसपी का प्रभार सँभाल रहे डीआईजी राजीव मिश्रा ने कहा कि तनुज यादव और नयन यादव मुख्य आरोपित हैं। पुलिस उनकी तलाश में छापेमारी कर रही है। कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई है।

इस मामले में बीजेपी ने बिहार में जंगल राज के लौटने की बात कही। बिहार बीजेपी के प्रवक्ता कुंतल कृष्ण ने आरोप लगाया कि हमलावर लालू यादव के परिवार से हैं, इसलिए उनके खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। ये जंगलराज नहीं तो और क्या है?

दुनिया के सबसे मजबूत ब्रांड्स में शामिल हुआ Jio, ‘बैंक ऑफ चाइना’ को भी पछाड़ा: टॉप-25 में भारत सरकार की LIC और SBI भी

मुकेश अम्बानी के स्वामित्व वाला रिलायंस Jio देश का सबसे मजबूत ब्रांड बन गया है। भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) जियो के बाद देश के सबसे मजबूत ब्रांड हैं। यह तीनों देश के ही नहीं बल्कि दुनिया के सबसे 25 मजबूत ब्रांड में शामिल हैं। यह रैंकिंग ब्रांड फाइनेंस ग्लोबल 500 की 2024 की वैश्विक ब्रांड वैल्यू रिपोर्ट में दी गई है।

रिलायंस जियो वैश्विक रूप से 17वाँ सबसे मजबूत ब्रांड है, भारत में यह नंबर एक पर है। LIC और SBI ने भी टॉप 25 में जगह बनाई है। यह क्रमशः 23वें और 24वें नम्बर पर रहे हैं। इसके अलावा इस 500 ब्रांड की लिस्ट में टाटा, इनफ़ोसिस, महिंद्रा समूह, रिलायंस समूह, एचडीएफसी, इंडियन ऑयल और बजाज समूह भी जगह बनाने में कामयाब रहे हैं।

जियो इस ब्रांड स्ट्रेंथ सूची में 17वें स्थान पर है।
जियो इस ब्रांड स्ट्रेंथ सूची में 17वें स्थान पर है

जियो पिछले वर्ष भी इस सूची में भारत की तरफ से सबसे उच्च स्थान पर था। टेलीकॉम सेक्टर में भारत की सबसे बड़ी कम्पनी जियो, देश के सबसे नए ब्रांड में से एक है जिसने इस सूची में स्थान बनाया है। जियो कम्पनी 2007 में बनी थी लेकिन इसने अपना प्रसार 2016 में चालू किया था।

जियो को दुनिया के सबसे मजबूत ब्रांड में रखे जाने के साथ इसे AAA की ब्रांड रेटिंग दी गई है। इसका ब्रांड वैल्युएशन 6.1 बिलियन डॉलर (लगभग ₹50,000 करोड़) है। यह वह मूल्य है जो जियो अपनी साख के दम पर कमा सकता है।

जियो के पास 46 करोड़ से अधिक ग्राहक भारत के भीतर हैं। यह भारत का सबसे बड़ा टेलिकॉम नेटवर्क होने के साथ ही विश्व का तीसरा सबसे बड़ा टेलिकॉम नेटवर्क है। जियो के अलावा LIC और SBI ने इसमें जगह बनाई है। LIC देश की सबसे बड़ी सरकारी कम्पनी बनी है। इसने हाल ही में SBI को पीछे छोड़ा है। LIC ₹5.60 लाख करोड़ की कम्पनी है जबकि SBI ₹5.50 लाख करोड़ वाली। LIC का इस सूची में टॉप 25 में स्थान होना दिखाता है कि LIC में देश के ग्राहकों का बड़ा विश्वास है।

जियो ने इस सूची में जगह बनाते हुए इन्स्टाग्राम, प्रोफेशनल सर्विस ब्रांड EY, फैशन ब्रांड शनेल (CHANEL) और बैंक ऑफ़ चाइना जैसे ब्रांड को पछाड़ा है। इस सूची में सबसे पहला स्थान चीन की वीचैट को मिला है। यूट्यूब और गूगल तीसरे स्थान पर हैं।

HDFC बैंक को इस सूची में 104वाँ स्थान मिला है। IT कम्पनी इनफ़ोसिस को इसमें 98वाँ स्थान मिला है। इस रिपोर्ट में वह ब्रांड अपना स्थान बनाते हैं जिनके नाम पर जनता का बड़ा हिस्सा विश्वास करता है और कम्पनी इसका मौद्रिक रूप से लाभ उठा सकती है।

कारसेवकों की मदद करने पर जिन्दा या मुर्दा पकड़ने का आदेश, महिआओं के टॉर्चर के लिए मर्द पुलिस: मुलायम के ‘सरकारी आतंक’ से गाँव में नहीं बचे थे चिराग जलाने वाले

धर्मनगरी अयोध्या भगवान राम की जन्मभूमि पर बन रहे भव्य मंदिर में मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के लिए पूरी तरह से तैयार है। 22 जनवरी 2024 (सोमवार) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों गर्भगृह में रामलला की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा होगी। आक्रांता बाबर से लेकर अब तक 500 से अधिक समय तक चले इस संघर्ष में अनगिनत बलिदान हुए हैं। इस संघर्ष के कुछ जीवित गवाह भी मौजूद हैं, जिन्होंने राम के नाम पर स्वतंत्र भारत में भी मुगल काल से अधिक प्रताड़ना झेली है। उन्हीं में से हैं उत्तर प्रदेश के बस्ती निवासी रामकरन सिंह, हरिलाल सिंह व सांडपुर गाँव के कई अन्य ग्रामीण। ऑपइंडिया ने रामकरन सिंह के गाँव जाकर उन पर मुलायम सरकार के दौरान साल 1990 में किए गए अत्याचारों की जानकारी जुटाई।

रामकरन सिंह मूलतः बस्ती जिले के गाँव सांडपुर के निवासी हैं। 22 अक्टूबर 1990 को कारसेवकों के होने की सूचना पर स्थानीय दुबौलिया थाना पुलिस ने उनके गाँव में दबिश दी थी। इसी दबिश में पुलिस ने गोलियाँ बरसाईं थीं। इसमें राम चन्दर यादव, सत्यवान सिंह उसी समय और बाद में जयराज यादव बलिदान हो गए थे। तब पुलिस ने FIR दर्ज करके बचे ग्रामीणों को बेरहमी से टॉर्चर किया था।

उस FIR में मुख्य अभियुक्त रामकरन सिंह को बनाया गया था। आज भी बस्ती जिले की अदालत में अपराध संख्या 132/90 सरकार बनाम रामकरन सिंह चल रहा है। जब हम रामकरन सिंह से मिलने उनके गाँव गए, तब वो घर पर ही थे। उनकी अवस्था लगभग 70 वर्ष हो चुकी है लेकिन उन्हें सन 1990 की वो घटना ऐसे याद है, जैसे उसे बीते 34 साल नहीं बल्कि 34 मिनट हुए हों।

कारसेवकों की सेवा ही बना अपराध

रामकरन सिंह से बताया कि सांडपुर गाँव के ग्रामीणों का अपराध केवल इतना था कि वो देश के अलग-अलग हिस्सों से आए कारसेवकों की सेवा कर रहे थे। वैदिक सिद्धांत ‘अतिथि देवो भवः’ का पालन करने वाले गाँव सांडपुर में रामभक्तों के आराम करने, खाना-पीना के साथ उन्हें सुरक्षित अयोध्या पहुँचाने की कोशिशों में तमाम ग्रामीण एकजुट होकर लगे थे। रामकरन का दावा है कि तब मुलायम सिंह द्वारा कारसेवकों को पनाह देने वालों को भी अपराधी समझ कर एक्शन लेने के निर्देश दिए गए थे। यहाँ स्कूल बंद करके दुबौलिया इंटर कॉलेज में एक अस्थाई जेल भी बना दी गई थी।

ऑपइंडिया को 1990 का हाल बताते भुक्तभोगी रामकरन सिंह

बनियान पहने ग्रामीण को घसीट कर ले जा रहे थे थाने

रामकरन सिंह ने हमें आगे बताया कि 21 अक्टूबर 1990 को तत्कालीन थाना प्रभारी दुबौलिया उनके गाँव में आए और एक स्कूल के प्रबंधक राघवेंद्र सिंह को तब घसीट कर ले जाने लगे, जब वो सिर्फ लुंगी और बनियान में अपने घर बैठे थे। थानेदार ने राघवेंद्र सिंह पर कारसेवकों को पनाह देने का आरोप लगाया था।

रास्ते में पुलिस को रामकरन सिंह मिले। उन्होंने टोका और कपड़े पहन लेने की अपील की तो थाना प्रभारी ने वर्दी के तैश में उनको भी गालियाँ देनी शुरू कर दी और कहा, “हम नंगे ले जाना चाहेंगे तो वैसे ही चलना पड़ेगा।” माना जा रहा है कि तब राघवेंद्र सिंह को टॉर्चर करके कारसेवकों के ठिकानों और उनके अयोध्या जाने के गुप्त रास्तों के बारे में जानकारी उगलवाने की तैयारी थी।

रामभक्तों को जिन्दा या मुर्दा पकड़ने के थे आदेश

रामकरन का दावा है कि ग्रामीणों का विरोध देख कर तब थाना प्रभारी ने राघवेंद्र सिंह को छोड़ दिया और सीधे बस्ती जिले के पुलिस अधीक्षक के पास गए। वहाँ SP द्वारा उन्हें गाँव में मौजूद रामभक्त और कारसेवकों को पनाह देने वाले ग्रामीणों को जिन्दा या मुर्दा गिरफ्तार करने के निर्देश दिए गए। इस काम के लिए पुलिस अधीक्षक ने ऊपर से मिले आदेश के बाद थानेदार को अतिरिक्त फ़ोर्स भी दी।

पुलिस टीम ने 22 अक्टूबर 1990 को सुबह 4 बजे भोर में दबिश दिया। तब महिलाओं, वृद्ध और बच्चों में जो भी मिला, उनको बेरहमी से पीटा गया। हालाँकि ग्रामीणों को पुलिस की दबिश की भनक पहले लग गई थी, इसलिए उन्होंने बाहर से आए कारसेवकों को गाँव से सुरक्षित निकाल दिया था।

अति हुई तो जुटे ग्रामीण

महिआओं को भी टॉर्चर करने के लिए पुरुष पुलिसकर्मी लगाए गए थे। इस काम में PAC, पैरामिलिट्री और 4 थानों की फ़ोर्स जुटी थी। रामकरन सिंह ने बताया कि भोर में ही गाँव सांडपुर से औरतों और बच्चों की चीख-पुकार उठने लगी। इससे आसपास के गाँवों के लोग भी जमा होने लगे।

ग्रामीणों का विरोध पुलिस को रास नहीं आया और उन पर गोलियाँ बरसा दी गईं। इन गोलियों से राम चन्दर यादव और सत्यवान सिंह मौके पर भी बलिदान हो गए। जयराज यादव और महेंद्र प्रताप सिंह को गोलियाँ लगीं और वो घायल हो गए।

गाँव से भागते ग्रामीणों को इसी जगह गोलियों से भून दिया था पुलिस ने

औरतों के गहने लूट ले गई पुलिस

रामकरन के अनुसार पहली पंक्ति में मौजूद पुलिस के जवानों ने गोलियाँ बरसा कर निहत्थे लोगों को मार डाला और कुछ को घायल कर दिया। तभी दूसरी पंक्ति के जवान आए। उन्होंने लाशों को परिजनों को देने के बजाय अपने कब्ज़े में ले लिया। साथ में वो घायलों को भी अपने साथ समेट ले गए, जिन्हें बिना बेहतर उपचार के जेल भेज दिया गया। 32 साल बाद जयराज यादव की मौत की वजह भी यही हरकत बनी।

इसके बाद तीसरी पंक्ति के पुलिस के जवान गाँव में घुसे। इन्होनें घरों में मौजूद बेगुनाहों को गिरफ्तार करना शुरू कर दिया। साथ ही तलाशी के नाम पर छिपा कर रखे गए औरतों के गहने तक लूट लिए। विरोध करने पर बीमार बुजुर्गों की चारपाई तक तोड़ डाली गई।

ग्रामीणों की कहीं नहीं हुई सुनवाई

थोड़ा रुक कर रामकरन सिंह ने बताया कि मुलायम सिंह की सरकार में हुए सांडपुर नरसंहार में ग्रामीणों को एकतरफा कार्रवाई का शिकार होना पड़ा। तब ग्रामीणों की हत्या के बावजूद पुलिस पर कोई भी एक्शन नहीं लिया गया।

रामकरन सिंह और अन्य ग्रामीणों ने मिल कर जिला प्रशासन पर कार्रवाई के लिए लखनऊ तक हर सक्षम अधिकारी और नेता को तहरीर दी। हालाँकि ये तमाम शिकायतें डस्टबिन में डाल दी गईं। उलटे अपने लोगों को गँवा चुके और गोली खाकर घायल 40 नामजद ग्रामीणों को कई अन्य अज्ञात के साथ मुल्जिम बना दिया गया।

इंसान तो दूर गाँव के जानवर भी हुए थे प्रताड़ित

सांडपुर के पड़ोसी गाँव रामनगर के स्थानीय जनप्रतिनिधि सुरेश कुमार पांडेय ने ऑपइंडिया को बताया कि वो 22 अक्टूबर 1990 की घटना से अच्छी तरह से वाकिफ हैं। तब वो इंटरमीडिएट के छात्र थे। उन्होंने कहा कि तब सड़क के मुख्य मार्ग तो दूर छोटी-मोटी पगडंडियों को भी सील कर दिया गया था।

सुरेश ने दावा किया कि तब पुलिस ने सांडपुर में घुस कर जो बर्बरता दिखाई थी, वो शायद गुलाम भारत में नहीं देखने को मिली होगी। बकौल सुरेश सिर्फ इंसान ही नहीं बल्कि पुलिसिया बर्बरता से गाँव में पाले गए जानवर भी कई दिनों तक भूखे रहे गए थे। उन्हें चारा खिलाने वाला भी कोई नहीं बचा था।

पड़ोसी गाँव के सुरेश कुमार पांडेय

चौपट हो गए युवाओं के करियर

सुरेश कुमार पांडेय का यह भी दावा है कि 22 अक्टूबर 1990 की घटना में पुलिस ने कई ऐसे युवा ग्रामीणों को भी नामजद कर दिया था, जो घटना के दिन गाँव में थे ही नहीं। केस में नामजद होने और जेल जाने की वजह से उन सभी नौजवानों का करियर भी चौपट हो गया।

सुरेश के अनुसार यह सारी निर्ममता तत्कालीन मुलायम शासन के आदेश पर हुई थी। तब नामजद ग्रामीणों की पैरवी करने जो भी थाने पर जाता था, उसे पीट कर कारसेवक बता दिया जाता था। लोगों को झूठे केस में जेल भेज दिया जाता था।

SC/ST, OBC, सामान्य वर्ग – सभी को टॉर्चर

इस पुलिसिया बर्बरता के शिकार कइयों की जमानतें इलाहबाद हाईकोर्ट से हुई। कुछ ने पुलिस के डर से लम्बे समय तक फरार रहने के बाद कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। इस केस में पुलिस द्वारा मुख्य अभियुक्त रामकरन सिंह को बनाया गया था। अभियुक्त बना कर टॉर्चर किए गए ग्रामीणों में हिन्दू समाज के SC/ST, OBC और सामान्य वर्ग के लोग शामिल हैं।

रामकरन के अनुसार पुलिस द्वारा पीटे गए सुक्खू, राम सुमेर, दधिबल सिंह 6 महीने बिस्तर से भी नहीं उठ पाए थे। यह केस अभी भी बस्ती जिले की अदालत में चल रहा है। इसके सभी आरोपित अपनी जमीन-जायदाद बेच कर या गाढ़ी कमाई खर्च करके केस लड़ रहे हैं।

40 नामजद आरोपितों में से लगभग 20 ग्रामीणों की मौत अलग-अलग समय में भिन्न-भिन्न कारणों से हो चुकी है। ऑपइंडिया से बात करते हुए एक अन्य ग्रामीण हरिलाल सिंह ने बताया कि वो भी इसी केस में नामजद अभियुक्त बना दिए गए थे।

हरिलाल का दावा है कि उनका विवाद से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं था लेकिन घर के आगे से उन्हें पुलिस ने उठा लिया और जेल भेज दिया था। तब 16 दिन तक जेल काटने के बाद हरिलाल सिंह जमानत पर बाहर आ पाए थे। बकौल हरिलाल पुरुषों के जेल जाने के बाद महिलाओं को उनके रिश्तेदार अपने घर लेकर चले गए थे और हालात ऐसे बन गए थे कि काफी समय तक तो गाँव में चिराग जलाने वाला भी कोई नहीं बचा था।

मुकदमे में नामजद हरिलाल सिंह ने खुद को बेगुनाह बताया

अच्छा हुआ पुलिस को कारसेवक नहीं मिले

रामकरन सिंह ने बताया कि 1990 में वो एक स्कूल में प्रिंसिपल थे। पुलिस की इस कार्रवाई से वो और उनका परिवार तबाह हो गया था। बहुत मेहनत और मुश्किल से पिछले 34 वर्षों में मेहनत करके रामकरन का परिवार को फिर से पटरी पर आने की जद्दोजहद कर रहा है। हालाँकि रामकरन सिंह को इस बात का संतोष है कि अच्छा हुआ तब पुलिस के हाथ बाहरी कारसेवक नहीं लगे वरना उनके साथ क्या अनहोनी होती, इसका कोई अनुमान ही नहीं लगा सकता।

आज भी राम के नाम पर बलिदान देने को तैयार

अपने गाँव में हुए पुलिसिया उपद्रव के बारे में रामकरन ने आगे कहा:

“जो मर गए, वो स्वर्ग सिधार गए। हम जैसे जो भी लोग जिन्दा हैं, वो जरूरत पड़ने पर राम के नाम पर अभी भी बलिदान होने को तैयार हैं।”

रामकरन सिंह को जरा सा भी अफ़सोस नहीं है कि कारसेवकों का गुस्सा अपने सिर पर लेने की वजह से उन्होंने और उनके परिवार न क्या-क्या झेला। रामजन्मभूमि पर भगवान राम का भव्य मंदिर बनने से रामकरन और उनका परिवार बेहद खुश है। वो इस बात को लेकर भी गौरवान्वित हैं कि इस काम में उनके परिवार का भी त्याग और बलिदान शामिल है।

न्यूजलॉन्ड्री के लिए ‘राम तेरी मीडिया मैली’, कवरेज से भी दिक्कत, हिंदू-घृणा में कर डाला ब्रह्मर्षि नारद का अपमान: शिकायत दर्ज कराएगा ‘हिन्दू IT सेल’

जहाँ एक तरफ निर्माणाधीन राम मंदिर के गर्भगृह में रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होनी है और इस कारण पूरा देश राममय है, वहीं दूसरी तरफ मीडिया का एक धड़ा हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान करने में लगा हुआ है। NewsLaundry ने अपने शो ‘NL टिप्पणी’ के अंतर्गत ‘रामनामी पत्रकारिता, कारसेवक पत्रकार और संविधान की मय्यत’ के शीर्षक से एक वीडियो YouTube पर डाला है, जिसमें ब्रह्मर्षि नारद जी का अपमान किया गया है। वीडियो में ‘न्यूज़ 18’ के पत्रकार अमीश देवगन को नारद के रूप में दिखाया गया है।

इस वीडियो में न्यूजलॉन्ड्री के पत्रकार अतुल चौरसिया ने ‘स्वर्ग की टपड़ी पर चाय पर चर्चा’ के नाम पर दिखाया गया कि जवाहरलाल नेहरू, राजेंद्र प्रसाद, वीर सावरकर और अटल बिहारी वाजपेयी खबर सुन रहे हैं। साथ ही रेडियो पर खबर सुनाई गई कि भारत के प्रधानमंत्री मंदिर-मंदिर घूम रहे हैं और सांसदों को संसद से फेंका जा रहा है। इसके बाद विभिन्न न्यूज़ चैनलों पर राम भजन चलते हुए दिखाया गया। साथ ही कहा गया कि नेहरू कह रहे हैं कि मीडिया की सामूहिक हत्या कर दी गई है। ‘राम तेरी मीडिया मैली’ कह कर न्यूजलॉन्ड्री हिन्दू विरोधी प्रोपेगंडा चला रहा है।

अतुल चौरसिया ने इस वीडियो में भारतीय मीडिया को ‘हिन्दू मीडिया’ करार दिया और उनके वैन की फुटेज दिखाई जिसमें मंदिर की तस्वीर बनाई गई थी। अतुल चौरसिया ने इसमें रोना रोया कि भारत के प्रधानमंत्री को संविधान की कोई फ़िक्र नहीं है। कारण – वो स्वदेशी ब्रीड के गायों को चारा खिला रहे हैं, मंदिर जा रहे हैं। इसके बाद शंकराचार्यों के नाम पर भी प्रोपेगंडा फैलाया गया। 2 शंकराचार्यों ने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह का स्वागत किया है, लेकिन दावा किया गया कि चारों शंकराचार्य इसके खिलाफ है।

इसके बाद महात्मा गाँधी के हवाले से सब कुछ वीर मढ़ दिया गया और उनका अपमान किया गया। साथ ही महात्मा गाँधी की हत्या का आरोप भी उन्हीं पर लगा दिया गया। इसके बाद एक विदेशी संस्था के हवाले से भारत में फेक न्यूज़ को लेकर रोना रोया गया। न्यूजलॉन्ड्री की पूरी की पूरी चिंता इस बात को लेकर है कि राम मंदिर को, राम को कवरेज क्यों मिल रहा है। इसके बाद बाबरी ढाँचे के विध्वंस को लेकर प्रलाप किया गया। इसके बाद कॉन्ग्रेस द्वारा समारोह के बहिष्कार का बचाव किया गया।

न्यूजलॉन्ड्री ने घोषणा कर दी कि राम मंदिर वाला कार्यक्रम संपूर्ण भारतीय समाज का नहीं है। साथ ही इसे ‘मोदी का शो’ करार दिया गया, जहाँ अन्य भाजपा नेताओं के लिए भी कोई जगह नहीं है। हालाँकि, इस वीडियो का जो थंबनेल बनाया गया, उसमें हिन्दू देवी-देवताओं के अपमान से लोगों को समस्या है। इसमें ‘आज तक’ की अंजना ओम कश्यप को एक साध्वी की वेशभूषा में दिखाया गया है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी एक साधु के रूप में चित्रित किया गया है।

वहीं ‘हिन्दू आईटी सेल’ के संस्थापक रमेश सोलंकी ने Newslaundry के खिलाफ शिकायत दायर करने की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि उनकी टीम शिकायत दाखिल करने के लिए ड्राफ्ट तैयार कर रही है और अन्य अन्य दस्तावेज भी तैयार कर रही है। वहीं मालदीव मामले को लेकर चर्चा में आए ‘मिस्टर सिन्हा’ ने कहा कि मजाक ठीक है, लेकिन हिन्दू देवी-देवताओं का मजाक बनाए जाने को सही साबित नहीं किया जा सकता। उन्होंने पूछा कि क्या न्यूजलॉन्ड्री अन्य मजहबों को लेकर ये सब कर सकता है?