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‘PM मोदी के लिए जान देने के लिए तैयार हूँ, पूरा किया 500 साल पुराना सपना’: बोलते-बोलते रो पड़ीं बुजुर्ग अम्मा, कहा – हमारा पूरा जीवन उन्हें लग जाए

भगवान राम की अयोध्या नगरी में रामलला विराजमान अपने भव्य मंदिर में विराज रहे हैं। पूरे देश में राम भक्ति की भावना उफान पर है। इस बीच, एक बुजुर्ग महिला का वीडियो इंटरनेट पर तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसमें वो पीएम मोदी के लिए जान देने तक की बात कह रही हैं। उनका कहना है कि मोदी ने मंदिर बनवा दिया, 500 सालों का इंतजार खत्म करा दिया, उन्हें अब कुछ नहीं चाहिए।

इस वीडियो में बुजुर्ग बता रही हैं कि वो जालौन जिले की रहने वाली हैं, लेकिन यहीं अयोध्या में काफी समय से हैं। वो कनक भवन के पीछे धर्मशाला में रहती हैं। एबीपी न्यूज के वायरल वीडियो में वो कहती हैं, “मोदी के लिए हम जान दे दें। मोदी के लिए जान देने को तैयार हैं। 500 साल की मन्नत पूरी हुई। जय हो प्रभु की। हमारा पूरा जीवन मोदी को जाए। मोदी को मिले सब कुछ।” इस वीडियो में बात करते हुए दादी अम्मा काफी इमोशनल हो जाती हैं और रो पड़ती हैं। उनकी बातों में राम मंदिर बनने का संतोष झलकता है।

वरिष्ठ पत्रकार विकास भदौरिया ने ट्विटर पर लिखा, “दादी अम्मा के इस वीडियो ने दुनिया भर में धूम मचा दी है, पीएम नरेंद्र मोदी के लिए ये दादी अम्मा प्राण देने को तैयार हैं, मोदी को अपनी उम्र लग जाए, ये दुआ दे रही है, वजह है मोदी ने अयोध्या धाम में प्रभु श्री राम का मंदिर निर्माण करवाया है, 500 वर्षों की प्रतीक्षा का अंत हुआ है। अम्मा को सुनिए। भावनाओं के ज्वार को सुनिए, समझिए और महसूस कीजिए।” वहीं, कुँवर अजय प्रताप सिंह लिखते हैं, “ये आस्था है राम मंदिर से देश के लोगों की। हम धन्य पीढ़ी हैं, जो अपनी आँखों से मंदिर बनते देख रहे हैं।”

बता दें कि अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हो रही है। 16 जनवरी से शुरू हुए धार्मिक अनुष्ठान 22 जनवरी तक चलेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में 22 जनवरी को रामलला अपने स्थान पर विराजमान होंगे। पूरे देश में लोग अपने घरों में दिवाली मनाएंगे। हर तरफ मंगलगीत अभी से गाए जा रहे हैं। सोशल मीडिया भी भगवान राम की भक्ति में मशगूल है। ऐसे में इन बुजुर्ग का वीडियो वायरल होना, इस बात की गवाही है कि लोग राम मंदिर के बनने से कितने खुश हैं। वैसे, आम भक्त भी 23 जनवरी से रामलला के दर्शन कर सकेंगे।

पद्मनाभस्वामी मंदिर से रामलला के लिए आ रहा विशेष भेंट ‘ओणाविल्लू’, जीवंत होगी सदियों पुरानी परंपरा: वामन अवतार और महाबली से जुड़ा है इतिहास

अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम चल रहा है। भगवान राम के 5 वर्षीय बालक स्वरूप की मूर्ति अब मंदिर में पहुँच चुकी है। उनसे जुड़े प्रतिष्ठान अयोध्या में चल रहे हैं। इस बीच, केरल के श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर की तरफ से रामलला के लिए ‘विशेष भेंट’ भेजी जा रही है। ये विशेष भेंट धनुष ‘ओणाविल्लू’ है, जिसमें चित्रों के माध्यम से पूरी रामायण गाथा दिखाई जाती है।

गुरुवार (18 जनवरी, 2024) को पद्मनाभ मंदिर के पूर्वी द्वार पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में ‘ओणाविल्लू’ को ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट के पदाधिकारी को सौंपा दिया गया। इसके बाद इसे प्लेन के माध्यम से कोच्चि से अयोध्या लाना है।

ओणाविल्लू क्या है?

‘ओणाविल्लू’ तीन सदी पुरानी परंपरा के तहत भगवान श्री पद्मनाभ को समर्पित एक औपचारिक भेंट है। स्थानीय लोग हर साल ‘तिरुओणम’ के पवित्र मौके पर भगवान पद्मनाभ मंदिर में यह भेंट चढ़ाते हैं। भक्तों द्वारा पवित्र माना जाने वाला ‘विल्लू’ धनुष के आकार में लकड़ी से बना होता है जिसके दोनों तरफ भगवान विष्णु के अवतारों को दर्शाया जाता है। यही विल्लू ओणम के पर्व के अवसर पर भगवान को समर्पित किया जाता है, इसलिए इसे ‘ओणाविल्लू’ कहा जाता है।

माना जाता है कि ओणाविल्लू केरल के सबसे पुराने मंदिर अनुष्ठानों में से एक है। ये उतना पुराना है, जितना कि पद्मनाभस्वामी मंदिर। ओणाविल्लू का समर्पण कुछ समय के लिए रुक गया, लेकिन वीरा इरावी वर्मा के शासनकाल के दौरान 1424 ईस्वी में इसे फिर से शुरू किया गया। साल 1731 में जब त्रावणकोर के राजा मार्तंड वर्मा ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया, तो विलायिल वीदु के आनंद मुथसारी पद्मनाभम मंदिर के ‘स्थापती’ थे। मंदिर के पूर्वी प्रवेश द्वार पर मुथसारी की एक छोटी मूर्ति भी है।

इसे बनाने का अधिकार करमना मेलारनूर विलायिल विदु परिवार को दिया गया है। ये परिवार पारंपरिक रूप से मंदिर में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इस परिवार के अलावा किसी अन्य के पास ‘ओणाविल्लू’ बनाने का अधिकार नहीं है।

ओणाविल्लू से जुड़ी किवदंती

ओणाविल्लू की कथा महाबली से जुड़ी हुई है। जब वामन ने विश्वरूप के माध्यम से अपनी असली पहचान दिखाई, तो महाबली ने भगवान विष्णु से अपने सभी 10 अवतार और संबंधित कहानियाँ दिखाने का अनुरोध किया। इस पर भगवान विष्णु ने विश्वकर्मा को बुलाया। ऐसा माना जाता है कि यह विश्वकर्मा ही थे जिन्होंने सबसे पहले ओणाविल्लू का निर्माण किया था। भगवान विष्णु ने महाबली को हर वर्ष समय-समय पर अवतार चित्र बनाकर दिखाने का भी वचन दिया।

तब से ही हर साल ओणम के मौके पर पद्मनाभस्वामी के मंदिर में ‘ओणाविल्लू’ का समर्पण किया जाता है। ओणाविल्लू के निर्माण के दौरान इसे बनाने वाला परिवार 41 दिनों तक संयम का पालन करता है। ओणाविल्लू का समर्पण सुबह लगभग 5 बजे होता है। मंदिर के सामने इसका भव्य तरीके से स्वागत किया जाता है। फिर प्रत्येक जोड़ी को मंदिर में अलग-अलग मूर्तियों को समर्पित किया जाता है।

ओणाविल्लू से जुड़ी खास जानकारियाँ

ओणाविल्लू कदम्ब और महगनी की लकड़ी से बनाया जाता है। ओणाविल्लू की लंबाई में भी अंतर होता है, जो साढ़े तीन फीट, चार फीट और साढ़े चार फीट के होते हैं। इसका डिज़ाइन उस नाव पर आधारित है जिस पर मंदिर का ‘थजिकाकुदम’ रखा गया है। इनमें दशावतारम विल्लू, अनंतशयनम विल्लू, श्रीराम पट्टाभिषेकम विलु, कृष्णलीला विलु, सस्था विल्लू और विनायक विलु शामिल हैं। इन्हें रंगने के लिए प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया जाता है।

ओणाविल्लू के निर्माण के दौरान परिवार 41 दिनों तक संयम का पालन करता है। ओणाविल्लू का समर्पण सुबह लगभग 5 बजे होता है। मंदिर के सामने इसका भव्य तरीके से स्वागत किया जाता है। फिर प्रत्येक जोड़ी को मंदिर में अलग-अलग मूर्तियों को समर्पित किया जाता है।

‘ओणाविल्लू’ की लंबाई में मुख्य अंतर

मुख्य देवता अनंतपद्मनाभन (भगवान विष्णु) के लिए अनंतशयनम विल्लू को 4.5 फीट आकार की लकड़ी पर बनाया जाता है। इसके बाद नरसिम्हामूर्ति (दशावतारम विल्लू), श्री राम (श्री राम पट्टाभिषेकम विल्लू) और शास्ता को 4 फीट लंबी लकड़ी पर बनाया जाता है। लंबाई में तीसरे नंबर पर श्री कृष्ण (श्री कृष्णलीला विल्लू) और विनायक (गणेश विल्लू) को 3.5 फीट आकार की लकड़ी पर बनाया जाता है। सभी की चौड़ाई समान .75 इंच होती है।

मूल रूप से ‘अनंतशयनम विल्लू’, दशावतारम विलु’, और ‘श्रीकृष्णलीला विलु’ को पद्मनाभस्वामी मंदिर में पेश किया जाता था, लेकिन समय-समय पर अन्य देवताओं के लिए ओणाविल्लू का निर्माण किया जाता है।

बता दें कि पद्मनाभस्वामी मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है और भगवान राम को भी भगवान विष्णु का ही अवतार माना जाता है। पद्मनाभ स्वामी मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है और पुराणों में भी इसका जिक्र है। पद्मनाभस्वामी मंदिर को दुनिया के सबसे अमीर मंदिरों में से एक माना जाता है।

‘ये मियाँ यात्रा है, जहाँ-जहाँ मुस्लिम वहीं जा रहे राहुल गाँधी’: CM सरमा ने देश के ‘सबसे भ्रष्ट परिवार’ पर साधा निशाना, बोले – डुप्लीकेट नाम लेकर घूम रहे

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कॉन्ग्रेस नेता और सांसद राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा‘ पर हमला बोला है। उन्होंने इसे ‘मियाँ यात्रा’ करार दिया है। उन्होंने साथ ही गाँधी परिवार को देश में सबसे भ्रष्ट परिवार बताया है। उनके यह आरोप तब सामने आए हैं जब कॉन्ग्रेस की यह यात्रा असम में प्रवेश कर चुकी है।

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, “मेरे हिसाब से देश का सबसे भ्रष्ट परिवार गाँधी परिवार है। इस देश में बोफोर्स से लेकर भोपाल गैस कांड के एंडरसन को भगाने तक देश का सबसे भ्रष्ट परिवार गाँधी परिवार है। वह भ्रष्ट ही नहीं डुप्लीकेट भी हैं, उनका पारिवारिक नाम गाँधी है ही नहीं, डुप्लीकेट नाम लेकर घूम रहे हैं। डुप्लीकेट लाइसेंस में पकड़ लेता था लेकिन डुप्लीकेट नाम लेने से क्या होता है।”

आगे उन्होंने कहा, “इनकी यह यात्रा न्याय यात्रा नहीं बल्कि मिया यात्रा है। जहाँ-जहाँ मियाँ (मुस्लिम) लोग रहेंगे वहीं यह यात्रा जाएगी।” असम में मियाँ उन मुस्लिमों को उन्हें हैं जो बांग्लादेश से अवैध रूप से सीमा पार करके असम में आए हैं। मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि हम किसी को जाने से रोक नहीं रहे लेकिन एक समुदाय को छोड़ कर और कोई लोग उनकी यात्रा में नहीं जाना चाहते। उन्होंने यह भी कहा कि मुझे उस समुदाय का नाम लेने में भी कोई समस्या नहीं है और अब तो वह भी नहीं जाना चाहते।

इससे पहले राहुल गाँधी ने भी हिमंता बिस्वा सरमा की सरकार पर हमला बोला। उनकी भारत जोड़ो न्याय यात्रा 18 जनवरी, 2024 को नागालैंड से असम में पहुँची है। यहाँ राहुल गाँधी ने सिवासनगर में एक रैली में कहा कि देश में सबसे भ्रष्ट सरकार असम की सरकार है, हम यह मुद्दा इस यात्रा में उठाएँगे। कॉन्ग्रेस नेता और सांसद जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि असम सरकार उनकी यात्रा में बाधाएँ डाल रही है और यह प्रयास कर रही है कि उनकी यात्रा असम में सफल नहीं हो।

गौरतलब है कि राहुल गाँधी कि यह भारत जोड़ो न्याय यात्रा 14 जनवरी को मणिपुर से चालू हुई है। यह यात्रा असम में 25 जनवरी तक रहेगी। इस दौरान राहुल गाँधी की यह यात्रा 14 जिलों से गुजरेगी। इसके बाद यात्रा पश्चिम बंगाल में प्रवेश कर जाएगी। राहुल की यह यात्रा देश के 15 राज्यों से होते हुए 20 मार्च, 2024 को मुंबई में समाप्त होगी।

इंडिगो पर ठोका गया ₹1.20 करोड़ का जुर्माना, मुंबई एयरपोर्ट को भी देना होगा ₹90 लाख का फाइन: रनवे पर खाना खाते यात्रियों का वीडियो हुआ था वायरल

ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सेफ्टी (BCAS) ने बुधवार (17 जनवरी, 2024) को इंडिगो पर 1.2 करोड़ रुपए और छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट (CSMI एयरपोर्ट) पर 60 लाख रुपए का जुर्माना लगाया। हवाई अड्डे पर यात्रियों द्वारा सड़क पर खाना खाते हुए एक वीडियो वायरल हुआ था। साथ ही नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने भी मुंबई एयरपोर्ट पर 30 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है।

बता दें कि 15 जनवरी को इंडिगो की उड़ान में 12 घंटे से अधिक की देरी का सामना करने के बाद यात्रियों को हवाई अड्डे के रनवे पर बैठकर खाना खाते देखा गया था। नियमों का उल्लंघन करने पर एयर इंडिया और स्पाइसजेट पर भी जुर्माना लगाया गया।

एयरपोर्ट पर जुर्माना क्यों लगाया गया?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीसीएएस ने इंडिगो पर 1.2 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। DGCA ने मुंबई एयरपोर्ट पर 30 लाख रुपए का जुर्माना लगाया, जबकि बीसीएएस ने एयरपोर्ट पर 60 लाख रुपए का जुर्माना लगाया, जिससे जुर्माना राशि बढ़कर 90 लाख रुपए हो गई। बुधवार को यात्रियों को सड़क पर बैठकर भोजन करते हुए दिखाने वाले एक वीडियो के वायरल होने के बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा इंडिगो और मुंबई हवाई अड्डे दोनों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे।

इस नोटिस में मंत्रालय ने कहा था कि ‘अगर तय समय में जवाब नहीं मिला तो वित्तीय दंड समेत प्रवर्तन कार्रवाई शुरू की जाएगी।’ इस नोटिस पर मिले जवाब असंतोषजनक होने पर अधिकारियों ने जुर्माना लगाया।

इंडिगो ने पहले घटना की आंतरिक जाँच कराने की घोषणा की थी। पर्याप्त जुर्माना लगाए जाने के बाद एयरलाइंस ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। इंडिगो ने एक बयान में कहा, “मुंबई के हवाई अड्डा सुरक्षा समूह (ASG) को भी स्थिति के बारे में पहले से सचेत नहीं किया गया था।” इस घटना का वीडियो उस क्लिप के कुछ घंटों बाद आया है जिसमें एक यात्री द्वारा केबिन क्रू के साथ उड़ान भरने में देरी को लेकर मारपीट किए जाने की क्लिप इंटरनेट पर वायरल हो गई थी।

अब DGCA और BCAS ने इस घटना में शामिल मुंबई एयरपोर्ट और इंडिगो एयरलाइंस पर जुर्माना लगाया है।

स्पाइसजेट और एयर इंडिया पर भी जुर्माना लगाया गया

डीजीसीए ने स्पाइसजेट और एयर इंडिया पर जुर्माना भी लगाया है। दोनों को 30-30 लाख रुपए देने को कहा गया है। दिल्ली में कोहरे के कारण उनकी उड़ानों में देरी हुई। वे कोहरे के लिए तैयार नहीं थे, जिसके चलते डीजीसीए ने उन पर जुर्माना लगाया है। इन एयरलाइंस पर आरोप है कि उन्होंने कोहरे के दिनों में कैट III ट्रेनिंग पाए पायलटों को ड्यूटी पर तैनात नहीं किया। CAT III ट्रेनिंग प्राप्त पायलटों को कम रोशनी में भी उड़ान भरने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है।

जो आतंकी रवीश कुमार के लिए ‘सर’, इंडिया टुडे के लिए ‘यूथ आइकॉन’, कॉन्ग्रेस सरकार के लिए ‘मेहमान’… उसको कोर्ट में गवाह ने पहचाना

1990 में जम्मू-कश्मीर में भारतीय वायुसेना के अधिकारियों की हत्या की गई थी। इस मामले में जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के सरगना इस्लामी आतंकी यासीन मलिक की पहचान एक गवाह ने कोर्ट में की है। कहा है कि मलिक ने ही फायरिंग कर अधिकारियों की हत्या की थी।

रिपोर्ट के अनुसार जम्मू की विशेष अदालत में 18 जनवरी 2024 को हुई सुनवाई के दौरान गवाह राजवार उमेश्वर सिंह ने कहा कि उस दिन यासीन मलिक ने अपना ‘फिरन’ उठाया और हम पर गोलीबारी चालू कर दी। मैं भारतीय वायुसेना के उन कर्मचारियों में शामिल था जो उस दिन दफ्तर जाने के लिए बस का इंतजार कर रहे थे। उल्लेखनीय है कि इस हमले में सिंह बाल-बाल बच गए थे। हमले में वायुसेना के चार अधिकारियों की मौत हो गई थी।

इस समय यासीन मलिक टेरर फंडिंग के मामले में दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है। ये वही यासीन मलिक है, जिसकी कॉन्ग्रेस की मनमोहन सरकार के दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय में आवभगत की गई थी। इसी आतंकी को 2008 में इंडिया टुडे ने अपने कॉन्क्लेव में ‘यूथ आइकन’ बताकर मंच दिया और उसके संगठन को सेकुलर बताया था। इस आतंकी को रवीश कुमार ने भी साल 2013 में तब मंच दिया था जब वह भूख हड़ताल के नाम पर हाफिज सईद के साथ बैठा दिखा था। रवीश कुमार इस दौरान कश्मीरी पंडितों की हत्या की बात कबूल चुके यासीन को यासीन साहब और सर-सर कहकर बुला रहे थे।

जिस मामले में गवाह ने यासीन मलिक की कोर्ट में पहचान की है वह 25 जनवरी 1990 का है। श्रीनगर के बाहरी इलाके रावलपोरा में वायु सेना अधिकारियों पर हमला किया गया था। यासीन मलिक इन हत्याओं के बाद कई सालों तक खुला घूमता रहा। उससे मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री रहते हुए मिलते थे और उसे शान्ति का पुरोधा बताया जाता था। बड़े बड़े मंचों पर उसे जगह दी जाती थी।

हालाँकि, मोदी सरकार ने बीते कुछ वर्षों में इस मामले में तेजी लाकर वायुसेना के अधिकारियों के परिवारों को न्याय दिलाने की कोशिश तेज की है। इस मामले को जहाँ 1990 में ठन्डे बस्ते में डाल दिया गया था, वहीं मोदी सरकार ने इसे 2017 में दोबारा खोलने का निर्णय लिया। 2019 में उस पर आरोप तय किए गए थे और मामला चालू किया गया था। उसने कुछ सुनवाइयों के दौरान इससे बचने की कोशिश की लेकिन लगातार उसके खिलाफ सुनवाई करवा कर और साथ ही गवाहों को ढूँढ कर मामला चलाया गया।

क्या था मामला?

वायुसेना जवानों की हत्या तब की गई जब उनके पास कोई भी हथियार नहीं था और वे एयरपोर्ट जाने के लिए बस का इन्तजार कर रहे थे। वहाँ भारतीय वायुसेना के 14 जवान थे। तभी अचानक से एक मारुति जिप्सी और एक बाइक से 5 आतंकी पहुँचे और इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता एके-47 से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। जवानों के अलावा 2 कश्मीरी महिलाओं की भी हत्या कर दी गई थी। वे भी बस का इंतजार कर रही थीं। आतंकियों ने ख़ून से लथपथ जवानों के सामने डांस करते हुए जिहादी नारे भी लगाए थे।

जैसे कालनेमि करता था राम का गुणगान, वैसे ही राम भजन गुनगुना रहे फारूक अब्दुल्ला: राम की महिमा बाँच रहे कपिल सिब्बल, ज़ुबैर कह रहा – मंदिर वहीं बना

हाल ही में कुछ लोगों ने अफवाह उड़ाई कि राम मंदिर वहाँ नहीं बन रहा है जहाँ बाबरी ढाँचे को ध्वस्त किया गया है। इस पर फैक्ट-चेक कर के मोहम्मद ज़ुबैर ने ट्वीट किया कि मंदिर वहीं बन रहा है जहाँ ढाँचा गिरा था। सोचिए, ALTNews वाले मोहम्मद ज़ुबैर ने दिल पर कितना भारी पत्थर रख कर लिखा होगा – “मंदिर वहीं बन रहा है।” ठीक उसी तरह, अब जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला भी राम भजन गा रहे हैं। वहीं फारुख अब्दुल्ला, जो पाकिस्तान के हिमायती रहे हैं।

वैसे ही कपिल सिब्बल यूपीए काल में केंद्रीय मंत्री थे, जब अदालत में एफिडेविट डाल कर भगवान श्रीराम को काल्पनिक बताया था। राम मंदिर का फैसला अटकाने के लिए कपिल सिब्बल सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचे थे। आज वही कपिल सिब्बल रामभक्त बने पड़े हैं। ‘The Wire’ जैसे वामपंथी मीडिया संस्थान जोशीमठ स्थित ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के इंटरव्यू ले रहे हैं, ताकि वो पीएम मोदी को गलत साबित कर सकें। क्या यही वो ‘अच्छे दिन’ हैं, जिनकी हिन्दू बात करते थे?

अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह से पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने राम भजन गाया है। उन्होंने राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल के ‘दिल से विद कपिल सिब्बल’ एपिसोड में उनके कहने पर ये भजन सुनाया।

फारूक अब्दुल्ला के गाए भजन ‘किस गली गयो मेरो राम, आँगन मेरो सूना-सूना’ का वीडियो सोशल मीडिया पर खासा वायरल हो रहा है। इस दौरान कपिल सिब्बल के साथ फारूक अब्दुल्ला ने देश के कई मुद्दों पर अपनी राय रखी तो भगवान राम के बारे में भी बात की।

‘राम बादशाह थे उसकी मेहरबानी से’

कपिल सिब्बल ने जब उनसे पूछा कि आप ये कहते रहे हैं कि भगवान राम हमारे भी भगवान है। इस पर फारूक अब्दुल्ला जवाब देते हैं, “मैं ये बात बार-बार कहता हूँ। मैं आपसे कहूँ अभी पाकिस्तान में मौलाना असरार गुजर गए हैं। उनकी किताबों के सात वॉल्यूम्स हैं कुरान के तर्जुमे (अनुवाद) के और उसमें उन्होंने 2 के बारे में लिखा है, एक भगवान राम के बारे में और एक गौतम बुद्ध। दोनों के लिए कहा कि ये बादशाह थे और उसकी (अल्लाह) मेहरबानी से।”

उन्होंने आगे कहा, “गौतम बुद्ध ने बादशाहत ठुकरा दी और कहा कि मैंने लोगों को सच्चाई का रास्ता दिखाना है वो उस रास्ते पर चले बादशाहत छोड़ दी। राम ने बादशाह होकर सबके साथ इंसाफ किया। याद है आपको महात्मा गाँधी क्या कहते थे। रामराज का मतलब क्या था। सबके लिए बराबरी, कोई फर्क नहीं होगा।”

जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम ने कहा, “भारत बहुत बड़ा है। कितने लोग रहते हैं, कितनी भाषाएँ कितने धर्म हैं ये ऐसा बाग है जैसे हमारे यहाँ शालीमार है, चश्मा शाही, ट्यूलिप गार्डन हैं। लोग क्यों देखने आते हैं अलग किस्म के फूलों के रंग हैं।” इसके बाद कपिल सिब्बल कहते हैं कि इनको तो एक ही रंग दिखता है तो फारूक कहते हैं कि क्या करें।

वो आगे कहते हैं कि जब हम सड़क पर चलते हैं तो आप हमारे यहाँ सरदारों की पकड़ के रंग दिखते हैं। खुशी होती है उन्हें देखकर कि ये देखो, ये रंग हैं। यहीं हमारे धर्मों के रंग हैं। हमें धर्मों को पहचानने की कोशिश करनी चाहिए।”

‘ये था राम, हमारा कल्चर’

इस पर सिब्बल कहते हैं कि ये राम की बात करते हैं, लेकिन राम के जो आदर्श हैं उनका पालन नहीं करते हैं। इनकी (बीजेपी) राजनीति राम राज से बिल्कुल अलग है। खुद को रामभक्त कहते हैं। बकौल कपिल सिब्बल, असली रामभक्त तो आम आदमी हैं, जो सच्चाई के आधार पर अपनी जिंदगी को आगे बढ़ाते हैं।

इस पर फारूक कहते हैं, “हुजूर कमाल देखिए, श्रीराम के बारे में आपसे कहता हूँ जो मैं जानता हूँ उनके बाप ने अपनी दूसरी बीवी को वचन दिया था जो भी तुम जो माँगोगी मैं देने को तैयार हूँ। उसने माँगा। उन्होंने अपना वचन निभाया। राम ने नहीं कहा था (14 साल के वनवास के लिए)।”

फिर सिब्बल बीजेपी पर तंज करते हुए कहते हैं कि यहाँ तो लोग कुर्सी छोड़ने के लिए भी तैयार नहीं हैं। इस पर फारूक जवाब देते हैं, “जैसे कुर्सी ही सब कुछ है. ये देखिए, जब वो (राम) उस दरिया (सरयू नदी) को पार करने के लिए गए तो वो कश्ती (नाव) वाला क्या कहता है? इन्होंने (राम) कहा कि मेरे पास कुछ नहीं है।”

फारूक आगे बताते हैं, “तब सीता मैया ने अपने हाथ का कंगन निकाला और कहा कि ये ले लीजिए और हमें पार करवा दीजिए। उसने (केवट) हाथ जोड़कर कहा कि भगवान, जब मेरा वक्त आएगा न, स्वर्ग जाने के लिए तब मेरा हाथ पकड़कर ले जाइए।” फारूक अब्दुल्ला और कपिल सिब्बल इसके बाद दोहराते हैं, “ये था राम, ये था हमारा कल्चर।”

‘भगवान हर जगह, हर दिल में हैं’

वो आगे कहते हैं, “कभी राम ने फर्क किया? कौन धर्म है, ये किस धर्म को मानता है। क्या इसकी पहचान है? नहीं। मैं तो यही कहता हूँ कि अल्लाह करे कि जहाँ हम लोग खुशी से रह सकें। इंसान मंदिर जाना चाहे तो जाए। मस्जिद जाना चाहे तो जाए। भगवान हर जगह, हर दिल में हैं। मगर हम उन्हें पहचानते नहीं हैं इसलिए मैं भारतवासियों से कहूँगा कि पहले अपने धर्म को समझने की कोशिश करो। जिस दिन तुम अपने धर्म को समझ जाओगे, उस दिन से किसी दूसरे धर्म से नफरत नहीं करोगे।”

बताते चलें कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर को लेकर बीते महीने दिसंबर में जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने भी मुबारकबाद दी थी। हालाँकि, वो इस शुभकामना के साथ पाकिस्तान का राग अलापना नहीं भूले थे।

‘मजहब से ज्यादा जरूरी वतन है’

इस दौरान उन्होंने पीएम मोदी और बीजेपी पर भी निशाना साधा। फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि हम हुकूमत गिरा नहीं सकते, लेकिन जहाँ वो गलत हो वहाँ कह तो सकते हैं। उन्होंने कहा, “जनाब जो ये रास्ता है थोड़ा बदला दीजिए। इसमें आपका फायदा है। किसान कानूनों को लेकर कहा तो एक नहीं सुनी, लेकिन यूपी में इलेक्शन आता देख वापस ले लिए कानून।”

उन्होंने आगे कहा, “बताइए हम इन्हें कहा गलत कहते हैं हम विपक्ष में रहते हुए भी भारत को मजबूत करना चाहते हैं। कमजोर नहीं करना चाहते हम इसके वासी है।अगर हम इसको डूबते देखेंगे क्या हम बच जाएँगे वतन रहेगा तो हम सब बचेंगे कोई पार्टी हो कोई जमात हो, कोई भी मजहब हो सबसे ज्यादा जरूरी वतन है।”

22 जनवरी को कार्यालयों में आधे दिन की छुट्टी, प्राण-प्रतिष्ठा से पहले मोदी सरकार की घोषणा: PM ने राम मंदिर का डाक टिकट जारी किया

अयोध्या में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा का कार्यक्रम 22 जनवरी 2024 को है। प्राण-प्रतिष्ठा का कार्यक्रम दिन में 12:20 बजे से शुरू होगा। इस दौरान रामलला की प्रतिमा को गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा। इस अवसर पर केंद्र सरकार ने सभी सरकारी कार्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में आधे दिन की छुट्टी की घोषणा की है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गोवा और हरियाणा सरकारों ने भी इस दिन छुट्टियों की घोषणा की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर पर विशेष डाक टिकट भी जारी किया है।

केंद्र सरकार ने घोषित की आधे दिन की छुट्टी

राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम के मद्देनजर 22 जनवरी को केंद्र सरकार ने अपने सारे दफ्तरों में आधे दिन की छुट्टी घोषित की है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि सभी कार्यालय आधे दिन के लिए बंद रहेंगे। सिंह ने कहा कि यह निर्णय लोगों के उत्साह को देखते हुए लिया गया है। इससे पहले कई राज्य सरकारें भी 22 जनवरी को छुट्टी की घोषणा कर चुकी हैं।

केंद्र सरकार ने पत्र जारी कर कहा है कि देश में सभी केंद्रीय सरकारी कार्यालय, केंद्रीय संस्थान और केंद्रीय औद्योगिक प्रतिष्ठान 22 जनवरी को दोपहर 2:30 बजे तक आधे दिन के लिए बंद रहेंगे। सरकार ने ये फैसला इसलिए लिया, ताकि लोग रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा का सीधा प्रसारण देख सकें।

5 राज्यों में भी छुट्टियों की घोषणा

राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा के दिन उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और गोवा में सरकारी छुट्टियाँ घोषित की गई हैं। इन राज्यों में शैक्षणिक संस्थानों के साथ ही शराब की दुकानें भी बंद रहेंगी। सबसे पहले उत्तर प्रदेश सरकार ने छुट्टियों की घोषणा की थी। सरकार ने स्कूलों, कॉलेजों को बंद रखने का आदेश जारी किया है। साथ ही शराब और माँस की दुकानों के भी खुलने पर पाबंदी लगाई है।

प्रधानमंत्री मोदी ने जारी किया डाक टिकट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्री राम जन्मभूमि मंदिर पर स्मारक डाक टिकट और दुनिया भर में भगवान राम पर जारी टिकटों की एक पुस्तिका जारी की है। पीएम मोदी ने कुल 6 डाक टिकट जारी किए हैं। इनमें राम मंदिर, भगवान गणेश, भगवान हनुमान, जटायु, केवटराज और माँ शबरी के टिकट शामिल हैं। इन टिकटों पर राम मंदिर, चौपाई ‘मंगल भवन अमंगल हारी’, सूर्य, सरयू नदी और मूर्तियों की आकृति बनाई गई है। वहीं, 48 पन्नों की पुस्तिका में अमेरिका, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, कनाडा, कंबोडिया और संयुक्त राष्ट्र जैसे संगठनों सहित 20 से अधिक देशों द्वारा जारी किए गए डाक टिकट शामिल हैं।

पीएम मोदी ने कहा, “पोस्टल स्टैंप विचारों, इतिहास और ऐतिहासिक अवसरों को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का माध्यम भी होते हैं। जब कोई डाक टिकट जारी होता है, जब इसे कोई भेजता है, तो वह सिर्फ पत्र नहीं भेजता बल्कि पत्र के माध्यम से इतिहास के अंश को दूसरे तक पहुँचा देता है। ये सिर्फ कागज का टुकड़ा नहीं है। ये इतिहास की किताबों के रूपों और ऐतिहासिक क्षणों का छोटा रूप भी होता है। इनसे युवा पीढ़ी को भी बहुत कुछ जानने और सीखने को मिलता है। इन टिकट में राम मंदिर का भव्य चित्र है।”

नाबालिग पत्नी के साथ नहीं रह पाएँगे नीतीश कुमार, पटना हाईकोर्ट ने नहीं दी इजाजत: माँ-बाप के साथ रहने से भी इनकार कर चुकी है लड़की

पटना हाईकोर्ट ने 23 वर्ष के एक युवक की याचिका को ठुकराते हुए कहा कि यदि पत्नी नाबालिग है तो उसे साथ रखने का अधिकार युवक को नहीं मिल सकता। पटना हाईकोर्ट ने यह निर्णय ऐसे मामले में दिया जहाँ उसकी शादी नाबालिग के साथ हुई है।

जानकारी के अनुसार, नीतीश कुमार नाम के एक शख्स ने 14 वर्ष की नाबालिग के साथ विवाह किया था। इसके बाद नाबालिग ने एक बच्चे को जन्म दिया। हालाँकि, नाबालिग के माता-पिता ने इसके बाद इस युवक के खिल मामला दर्ज करवा दिया। इसके बाद नाबालिग को एक बालिका संरक्षण गृह में भेज दिया गया। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि नाबालिग ने अपने माता-पिता के साथ रहने से मना कर दिया था। उसने कहा था कि उसे अपने पति के साथ रहने दिया जाए।

इस मामले में नाबालिग से शादी करने वाले युवक नीतीश कुमार ने पटना हाईकोर्ट के सामने याचिका लगाई थी कि नाबालिग ने उससे अपनी मर्जी से शादी की है और खुद भी साथ रहना चाहती है इसलिए उसे उसके साथ रहने की अनुमति दी जाए।

इस मामले की सुनवाई के दौरान बिहार सरकार के वकील ने कहा कि नाबालिग 17 वर्ष से कम की है इसलिए उसे युवक के साथ नहीं भेजा जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि भले ही युवक यह दावा कर रहा हो कि बालिका ने शादी के लिए अपनी सहमति दी थी लेकिन वह उस दौरान नाबालिग थी इसलिए इसे एक बाल विवाह ही माना जाएगा।

कोर्ट ने सुनवाई के बाद यह याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने यह याचिका खारिज करते हुए कहा, “कोर्ट का यह मानना है कि पति के पास याचिका दाखिल करके पत्नी को साथ रखने का कोई अधिकार नहीं बनता अगर पत्नी नाबालिग है।” कोर्ट ने इस दौरान कहा कि भले ही यहाँ नाबालिग की मंज़ूरी की बात की जा रही हो लेकिन यह हिन्दू मैरिज एक्ट और बाल विवाह संबंधी कानूनों में अपराध है और इसमें सजा भी हो सकती है।

कोर्ट ने बाल विवाह से लड़कियों पर पड़ने वाले प्रभावों पर भी बात की। कोर्ट ने कहा, “बाल विवाह के नतीजे बहुत हानिकारक हैं। यह बच्चे को अधिक स्वास्थ्य समस्याओं और हिंसा की तरफ धकेलती है। उन्हें समाज से दूर कर देती है और उसे गरीब और सामाजिक गैर बराबरी के चक्र में धकेल देती है। नाबालिग के शादी के लिए तैयार होने का बालिका के स्वस्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।”

महिला मरीज के पेट में छोड़ी 2 कैंची, 5 साल बाद ऑपरेशन से निकली: केरल कोर्ट ने किया डॉक्टर शहाना समेत 4 को तलब, 750 पन्नों की चार्जशीट

केरल के कोझिकोड में एक महिला के पेट में कैंचियाँ छोड़ने वाले चार स्वास्थ्यकर्मियों को कोर्ट ने समन किया है। इन पर आरोप है कि वर्ष 2017 में एक महिला के ऑपरेशन के समय इन्होंने उसके पेट में कैंची छोड़ दी, इसकी वजह से महिला बार-बार बीमार पड़ी और 2022 में जाकर उसके पेट से वो दो कैंची निकाली जा सकीं।

महिला के पेट में दो कैंची छोड़ने के आरोपित डॉक्टर सीके रमेशन, डॉक्टर एम शहाना, नर्स एम रिहाना और नर्स केजी मंजू को कोझिकोड के कोर्ट ने 19 अप्रैल 2024 को पेश होने का आदेश दिया है। इनके ऊपर मेडिकल लापरवाही का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने इनके खिलाफ 750 पन्नों की एक चार्जशीट दाखिल की है। केरल सरकार ने दिसम्बर, 2023 में ही इनके खिलाफ मामला चलाने की अनुमति दे दी थी।

क्या है महिला के पेट में कैंची छूटने का पूरा मामला?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वर्ष 2017 में कोझिकोड की रहने वाली हर्शिना ने यहीं के एक सरकारी अस्पताल में सी सेक्शन ऑपरेशन करवाया। इसके दो महीने के बाद ही हर्शिना के पेट में तेज दर्द चालू हो गया। वह लगातार इन्फेक्शन का शिकार होने लगीं और इसकी वजह से उन्हें दो और ऑपरेशन करवाने पड़े। हर्शिना की इस गंभीर स्थिति के कारण उनके पति को भी अपना काम बंद करना पड़ा और ₹35 लाख का नुकसान भी उठाना पड़ा।

हर्शिना को बाद में पता चला कि उनके पेट में दो कैंची मौजूद हैं, इसके बाद सितम्बर 2022 में उनकी सर्जरी करके यह दो कैंची निकाली गई। 12 सेंटीमीटर लम्बी यह दो कैंची उनके पेट से निकलीं। इसके बाद हर्शिना ने राज्य की तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज के दफ्तर में शिकायत दर्ज करवाई।

उनको केरल की सरकार ने ₹2 लाख का मुआवजा भी देने का ऐलान किया था और गृह विभाग से इसकी जाँच करवाने का ऐलान किया था। हालाँकि, बाद में केरल के स्वास्थय विभाग ने कहा कि कैंचियाँ उनके (महिला के) पेट में कैसे आई इसकी जानकारी नहीं मिली। लेकिन पुलिस ने बाद में इसमें अपनी जाँच में कहा कि कैंचियाँ 2017 में ही छूटी थी। इसने 750 पेज की एक चार्जशीट भी कोर्ट के सामने रखी है और इन चारों को आरोपित बनाया है।

क्लास में बैठे-बैठे सीने में उठा दर्द, गिर पड़ा छात्र और हो गई मौत… 18 साल के लड़के की साइलेंट हार्ट अटैक से चली गई जान, सामने आया डराने वाला CCTV फुटेज

मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में एक 18 वर्षीय छात्र की साइलेंट हार्ट अटैक से मौत हो गई। छात्र का नाम राजा लोधी था और वह सागर जिले का रहने वाला था। वह इंदौर में ‘मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग’ (MPPSC) की तैयारी कर रहा था। इस घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है, जिसमें छात्र बाकी साथियों के साथ कोचिंग सेंटर में पढ़ाई कर रहा होता है, और वो अचानक अपनी मेज पर ही गिर जाता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये घटना बुधवार (17 जनवरी, 2024) की है। राजा लोधी को कोचिंग क्लास में बैठे-बैठे अचानक सीने में दर्द उठा और वह बेसुध होकर गिर पड़ा। उसे सहपाठी ने तुरंत सँभाला और वो दोबारा बैठने लगा, लेकिन बेसुध होकर जमीन पर ही गिर पड़ा। इस घटना से तुरंत भगदड़ मच गई। हालाँकि, उसके दोस्तों ने उसे तुरंत अस्पताल पहुँचा लिया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। राजा के गिरने और अस्पताल पहुँचने में महज 7 मिनट का समय लगा, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। ये घटना इंदौर के ‘माधव कोचिंग इंस्टीट्यूट’ में हुई।

घटना का सीसीटीवी फुटेज वायरल

जानकारी के मुताबिक, राजा लोधी इंदौर के सर्वानंद नगर में रहता था। वो स्नातक तृतीय वर्ष का छात्र था और माधव कोचिंग इंस्टीट्यूट के माध्यम से MPPCS की तैयारी भी कर रहा था। ये घटना बुधवार को दोपहर 12.49 बजे घटी। इस पूरी घटना का CCTV फुटेज वायरल हो रहा है।

पुलिस ने बताया कि राजा के शव का पोस्टमार्टम कराया गया है। राजा की मौत की वजह साइलेंट हार्ट अटैक बताया जा रहा है। साइलेंट हार्ट अटैक एक ऐसी स्थिति है जिसमें हृदय अचानक बंद हो जाता है, लेकिन व्यक्ति को कोई दर्द या अन्य लक्षण महसूस नहीं होते हैं। यह हृदय के उन हिस्सों को प्रभावित कर सकता है जो रक्त को शरीर के अन्य हिस्सों तक पहुँचाते हैं। राजा की मौत की खबर से उसके परिवार और दोस्तों में शोक की लहर है। वह एक मेधावी छात्र था और अपने भविष्य को लेकर बहुत आशान्वित था।