ऑस्ट्रेलिया में रहने वाली एक भारतीय महिला को वीडियो क्रॉन्फ्रेसिंग (VC) के दौरान जज और कोर्ट के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना भारी पड़ गया। आनन-फानन में दिल्ली हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए अदालत की आपराधिक अवमानना का केस शुरू कर दिया है।
ऑस्ट्रेलिया से अनिता कुमारी गुप्ता ने 10 जनवरी को VC के जरिए कोर्ट की सुनवाई के लिए लॉगइन किया था। जब जस्टिस नीना बंसल कृष्णा अनिता के केस के लिए अगली तारीख देते हुए सुनवाई के लिए अगला केस उठाया तो उसने कोर्ट जस्टिस कृष्णा के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया।
जस्टिस नीना के कोर्ट के आदेश को लेकर अनीता तुरंत बोली, “आइटम नंबर 11 को आइटम नंबर 10 से पहले कैसे लिया जा सकता है ये साली क्या कर रही है? कोर्ट में ये क्या चु$# चल रहा है।”
इस पर जस्टिस कृष्णा की कोर्ट ने अनीता गुप्ता को ‘कारण बताओ नोटिस‘ जारी कर दिया। अदालत ने यह कहते हुए ये आदेश दिया है कि वादी अनीता ने ये अभद्र टिप्पणी तब की थी, जब दोनों पक्षों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील अंतिम बहस के लिए दी गई तारीख पर राजी हो गए थे।
फोटो साभार: बार एंड बेंच
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “न्यायालय की गरिमा को कम करने वाली ऐसी अपमानजनक टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए स्वत: संज्ञान लेते हुए अवमानना का केस किया गया है। तदनुसार वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में रहने वाली वादी/अनीता कुमारी गुप्ता को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया जाता है कि क्यों न उन्हें अदालत की अवमानना अधिनियम, 1971 के तहत दंडित किया जाए।”
इसके साथ ही अनीता को 16 अप्रैल, 2024 को अदालत के सामने खुद खुद उपस्थित होने का आदेश दे डाला। इसके साथ ही कोर्ट ने विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) को ये आदेश भी दिया कि अगर गुप्ता सुनवाई के लिए तय तारीख से पहले भारत आती हैं तो उनके पहुँचते ही उनका पासपोर्ट/वीजा जब्त कर लिया जाए। कोर्ट ने आगे कहा कि गुप्ता को इस कोर्ट के निर्देश के बगैर देश छोड़ने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए।
कोर्ट ने ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा में भारतीय उच्चायोग को भारत के महावाणिज्य दूतावास, सिडनी, ऑस्ट्रेलिया के जरिए अपने आदेश के बारे में वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में रह रही है अनीता कुमारी गुप्ता को सूचित करने का भी निर्देश दिया। अनीता गुप्ता की तरफ से वकील सुनील मेहता और इशान रॉय चौधरी पेश हुए। कोर्ट उत्तरदाताओं का प्रतिनिधित्व अधिवक्ता संजीव महाजन ने किया था।
अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर में रामलला की जिस मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की जा रही है, उनकी पहली तस्वीर सामने आ चुकी है। रामलला की इस भव्य, मनमोहक और सुंदर छवि का आप भी दर्शन कीजिए। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर अनुष्ठान 16 जनवरी से शुरू हो चुका है और 22 जनवरी को रामलला की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी।
प्राण प्रतिष्ठा के मुख्य कार्यक्रम से पहले रामलला की पहली भव्य तस्वीर सामने आ गई है। तस्वीर में श्रीराम के चेहरे पर मधुर मुस्कान है और माथे पर तिलक है। मौजूदा समय की बात करें तो अभी रामलला की मूर्ति गर्भगृह में है और आचार्यों के मार्गदर्शन में तमाम अनुष्ठान चल रहे हैं। रामलला की ये तस्वीर किसी भी कार्यक्रम के शुरू होने से मूल रूप में है। अब सबको इंतजार है 22 जनवरी है, जब ये प्रतिमा प्राण-प्रतिष्ठित होगी।
गुन सागर नागर बर बीरा। सुंदर स्यामल गौर सरीरा।। राज समाज बिराजत रूरे। उडगन महुँ जनु जुग बिधु पूरे।।
बता दें कि रामलला की मूर्ति का निर्माण मूर्तिकार अरुण योगीराज ने किया है। कृष्णशिला पर बनाई गई इस मूर्ति का वजन करीब 150 से 200 किलो है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में 22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हो जाएगी, अगले दिन 23 जनवरी से सभी भक्त रामलला के दर्शन कर सकेंगे।
अयोध्या में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
अयोध्या में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर अयोध्या धाम, उत्तर प्रदेश और पूरे देश में जश्न का माहौल है। मैं यहाँ तैयारियों का निरीक्षण करने आया हूँ।” सीएम योगी ने कहा कि 22 जनवरी के ऐतिहासिक कार्यक्रम के लिए अधिकारियों और राज्य सरकार के मंत्रियों ने अपनी योजना पहले ही पूरी कर ली है।
#WATCH | Ayodhya: Uttar Pradesh CM Yogi Adityanath says, "…There is an atmosphere of celebration in entire Ayodhya Dham, Uttar Pradesh and the country for Ram Temple's 'pranpratishtha' ceremony. I have come here to conduct an inspection of the arrangements given the… pic.twitter.com/216uGBENXx
इससे पहले, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या पहुँचे। उन्होंने हनुमानगढ़ी में पूजा अर्चना की, इसके बाद वो प्राण प्रतिष्ठा समारोह स्थल पर भी गए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा समारोह की अन्य तैयारियों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने भगवान राम के भव्य मंदिर के सामने तस्वीर खिंचवाई और उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट भी किया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या में सुबह 11.10 बजे राम कथा पार्क पहुँचे। यहाँ से वो सीधे हनुमानगढ़ी गए और दर्शन-पूजन के उपरांत जन्मभूमि परिसर गए। वो 12 बजे रामलला की आरती में शामिल हुए, फिर हनुमान गुफा पर टेंट सिटी का अवलोकन किया। इसके बाद सीएम योगी ने साकेत पेट्रोल पंप के पास नगर निगम द्वारा बनाए गए टेंट सिटी का भी निरीक्षण किया। फिर वो सरयू तट पहुँचे, जहाँ उन्होंने सोलर बोट का शुभारंभ किया। अयोध्या में अपनी 5 घंटे की मौजूदगी में सीएम योगी ने संतों से भी मुलाकात की और प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को लेकर समीक्षा बैठक भी की।
एक तरफ पूरी दुनिया के हिन्दू सोमवार (22 जनवरी, 2024) को धर्मनगरी अयोध्या में रामजन्मभूमि पर होने वाली प्राण प्रतिष्ठा का बेसब्री से इंतजार कर रही है। दूसरी तरफ I.N.D.I. गठबंधन के दल आए दिन ऐसी हरकतें और बयानबाजी कर रहे हैं जिससे रामभक्तों की आस्था को चोट पहुँच रही है। ताजा बयान समाजवादी पार्टी के नेता शिवपाल यादव का है जिन्होंने 30 अक्टूबर व 2 नवंबर, 1990 में अपनी सरकार के दौरान अयोध्या में हुए कारसेवकों के नरसंहार को सही ठहराया है।
उस दौरान शिवपाल यादव के बड़े भाई मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। सफाई के तौर पर शिवपाल यादव ने ‘विवादित ढाँचे की रक्षा’ का बहाना बनाया है। हालाँकि, शिवपाल यादव या किसी अन्य समाजवादी पार्टी के नेता की रामजन्मभूमि से लगभग 26 किलोमीटर दूर बस्ती जिले में आने वाले गाँव सांडपुर में पुलिस द्वारा किए गए कत्लेआम पर अभी तक कोई सफाई नहीं आई।
तब गाँव सांडपुर में 30 अक्टूबर से लगभग हफ्ते भर पहले रामभक्तों की तलाश में घुसी पुलिस ने 4 ग्रामीणों को गोली मार दी थी। इसमें से राम चन्दर यादव व सत्यवान सिंह ने मौके पर ही और जयराज यादव ने बाद में प्राण त्याग दिए थे। घायल महेंद्र सिंह के हाथों में आज भी गोली के घाव दिखते हैं। गोलियाँ बरसाने के बाद सामान्य, SC/ST व OBC वर्ग की महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को निर्ममता से पीटा गया था। घरों में लूटपाट हुई थी।
इतने में भी मन नहीं भरा तो 40 ग्रामीणों पर गंभीर धाराओं में FIR दर्ज कर के उन्हें जेल में ठूस दिया गया था। इनमें वो ग्रामीण भी शामिल थे जिन्हें पुलिस की गोली से बलिदान हुए अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करना था। तब लाशों को भी गाँव नहीं आने दिया गया था।
न्याय के लिए हर चौखट पर गुहार, लेकिन कहीं नहीं हुई सुनवाई
आज दुर्दांत गैंगस्टरों और आतंकियों की मौत पर भी मानवाधिकार की दुहाई देते हुए पुलिस पर कार्रवाई की माँग की जाती है। खास बात ये है कि तब संविधान के तथाकथित रक्षकों की चौखट पर ग्रामीणों ने महीनों तक न्याय की गुहार लगाई पर उनके शिकायत पत्र भी नहीं रिसीव किए गए थे। सांडपुर गाँव के वो तमाम पीड़ित आज शिवपाल यादव से सवाल कर रहे हैं कि न तो वहाँ विवादित ढाँचा था और न ही किसी कोर्ट का स्टे। फिर उनके परिजनों की पुलिस ने हत्या क्यों की? ऑपइंडिया ने 23 अक्टूबर, 1990 को दर्ज वो FIR खोज निकाली है। आइए नजर डालते हैं नरसंहार के एक दिन बाद दर्ज उस FIR पर।
पुलिस थी शिकायतकर्ता, सभी वर्गों के 40 आरोपित
इस FIR में दुबौलिया के तत्कालीन थाना प्रभारी राम चन्दर राय शिकायतकर्ता हैं। 22 अक्टूबर, 1990 को दी गई तहरीर में उन्होंने सांडपुर, हेंगापुर, टेढ़वा आदि गाँवों के 40 ग्रामीणों को नामजद किया है। इन सभी पर FIR संख्या- 132/1990 में IPC की धारा 147, 149, 307, 332, 333, 353, 224, 225 और 336 के अलावा 7 क्रिमिनल एक्ट के तहत कार्रवाई की गई थी। यह मुकदमा सरकार बनाम राजकरन सिंह के नाम से आज भी बस्ती की जिला अदालत अदालत में विचाराधीन है।
23 अक्टूबर 1990 में दर्ज FIR
इन नामजदों में रामकरन सिंह, राघवेंद्र प्रताप सिंह, सत्य प्रकाश सिंह, राज बहादुर सिंह, अर्जुन सिंह, श्रवण कुमार सिंह, सुरेंद्र कुमार सिंह, सुभाष सिंह, माता प्रसाद सिंह, तीरथ सिंह, राम नरेश सिंह, गंगाराम, दोढी, भुक्कुर, चंद्रभान सिंह, राम शंकर श्रीवास्तव, भुनाई, गिजू, राधेश्याम यादव, राजित, नंदू, कृष्ण चन्दर सिंह, काशीनाथ तिवारी, हरिवंश सिंह, हरिभान, सूरत सिंह, राम सँवारे, राम सूरत सिंह, कोले सिंह, शत्रुघ्न सिंह और जयराज यादव आदि हैं। इनमे से गंगाराज, दोढी, भुक्कुर, भुनाई, गिजू, राजित, नंदू और राम सँवारे अनुसूचित जाति (SC) समुदाय से हैं।
‘राम मंदिर बन कर रहेगा’ सुन कर भड़क गया था थानेदार
जो FIR थाना प्रभारी राम चन्दर राय ने दर्ज करवाई थी, उसमें सारा दोष ग्रामीणों पर ही मढ़ दिया गया है। इस FIR में थानाध्यक्ष ने बताया कि उन्हें मुखबिर से सूचना मिली थी कि सांडपुर गाँव में ‘विश्व हिन्दू परिषद’ (VHP) के कार्यकर्ता रामकरन सिंह के घर पर कुछ लोग जमा हैं। रामकरन सिंह पर नदी के किनारे लगी नावों को ज़बरदस्ती छीन पर कारसेवकों को अयोध्या में पहुँचाने का भी आरोप लगाया गया है। इसी सूचना पर पुलिस ने गाँव में सुबह 5 बजे दबिश दी। बकौल थाना प्रभारी, रामकरन सिंह ने कहा, “सबको इकठ्ठा कर लो। ऐसा ही उत्साह हर गाँव के हिन्दुओं में रहेगा तो राम मंदिर बन कर रहेगा।”
थानेदार की तहरीर
FIR में पुलिस ने दावा किया है कि नाव से ग्रामीणों के अयोध्या जाने की तैयारी थी। जब उन्हें रोका गया तब रामकरन सिंह ने सबका नेतृत्व करते हुए कहा कि वो हर हाल में अयोध्या जाएँगे चाहे जो हो जाए। पुलिस ने इस स्थिति को शांतिभंग की आशंका करार दिया है। पुलिस ने स्वीकार किया है कि उन्होंने तब रामकरन सिंह सहित उनके कुछ अन्य साथियों को 151/107/116 धारा के तहत गिरफ्तार कर लिया गया। इनकी तलाशी में एक रजिस्टर मिला जिस पर रामजन्मभूमि की मुहर लगी हुई थी। पुलिस ने उस रजिस्टर को भी जब्त कर लिया।
थानेदार की तहरीर 2
पुलिस का दावा है कि जब वो गिरफ्तार हुए आरोपितों को पकड़ कर ले जा रहे थे तभी कुछ लोग पकड़ से फरार हो गए। आरोप है कि गाँव से ले जाते हुए रामकरन सिंह ने ललकारते हुए कहा, “गाँव वालों को बुलाओ। रामजन्मभूमि पर बलिदान होने का समय आ गया है।” पुलिस का दावा है कि इतना सुन कर गाँव के लगभग 2 हजार लोग हाथों में हथियार ले कर जमा हो गए थे। शिकायत में आगे थाना प्रभारी राम चन्दर राय ने ग्रामीणों पर लाठी-डंडों और पत्थरों से पुलिस पर हमला करने और अपने हथियार छीनने की कोशिश का आरोप लगाया है।
थानेदार की तहरीर 3
थाना प्रभारी राम चंदर राय ने आगे बताया कि इस आपाधापी के बीच अतिरिक्त फ़ोर्स पहुंची। इसके बाद पुलिस ने ग्रामीणों पर गोलियाँ चला दीं। गोली लगने से सत्यवान सिंह और राम चन्दर यादव नाम के 2 ग्रामीणों की मौत मौके पर ही हो गई। जयराज यादव को घायल अवस्था में ही गिरफ्तार किए जाने का भी जिक्र FIR में है। पुलिस ने यह भी दावा किया है कि मृतक सत्यवान सिंह के पास से उन्होंने कट्टा और कारतूस बरामद किया था। थानेदार ने ग्रामीणों के हमले में अपने 3 सिपाहियों को भी गंभीर चोटें लगने का आरोप लगाया है।
पुलिस ने अपने बचाव में लगाए फर्जी आरोप
23 अक्टूबर, 2018 को मुख्य आरोपित रामकरन सिंह ने उत्तर प्रदेश सरकार के तत्कालीन कानून मंत्री से इस केस को वापस लेने की माँग की थी। तब उन्होंने अपने पत्र में यह केस पुलिस द्वारा कारसेवकों के नरसंहार के बाद अपने बचाव में दर्ज करवाने का आरोप लगाया था। इसी पत्र में रामकरन सिंह ने बताया था कि सभी आरोपितों में महज 23 लोग जीवित बचे हैं। शेष की अलग-अलग दिनों में मृत्यु हो चुकी है। तब कानून मंत्री से यह भी बताया गया था कि जीवित बचे आरोपित न सिर्फ आर्थिक रूप से टूट चुके हैं बल्कि वो चलने-फिरने में भी अक्षम हैं। आरोपितों ने खुद को गलत फँसाए जाने की दलील देते हुए इस केस को राजनैतिक द्वेष भावना से दर्ज बताया है।
ग्रामीणों की कानून मंत्री से गुहार
भाजपा सांसद द्वारा केस वापस लेने की माँग
भारतीय जनता पार्टी के बस्ती से सांसद हरीश द्विवेदी ने भी इस मुकदमे को पूरी तरह से राजनैतिक द्वेष भावना से प्रेरित बताया है। 23 अक्टूबर, 2018 को सांसद हरीश द्विवेदी उत्तर प्रदेश सरकार के कानून मंत्री को पत्र लिख कर इस मुकदमे को वापस लेने की माँग कर चुके हैं। उन्होंने केस में नामजद आरोपितों को भाजपा का सक्रिय कार्यकर्ता बताया है और कानून मंत्री से मुकदमा वापस लेने की अपील की है। पत्र के विषय में सांसद ने लिखा, “निहत्थे कारसेवकों के ऊपर पुलिस द्वारा रामजन्मभूमि आंदोलन के तहत दिनांक 22/10/1990 को गोलीबारी के तहत 2 लोगों की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद भी सरकार द्वारा कारसेवकों पर दर्ज फर्जी मुकदमे को वापस लेने के संदर्भ में।”
भाजपा सांसद द्वारा शासन से केस वापसी की अपील
गोलियाँ बरसाने वालों पर कोई एक्शन नहीं
22 अक्टूबर, 1990 को हुई इस पुलिसिया बर्बरता की शिकायत तत्कालीन सेना के एक मेजर ने बस्ती के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक IPS सुभाष चंद्र गुप्ता से की थी। मुसाफिर सिंह नाम के सैन्य अधिकारी ने खुद को गाँव सांडपुर का निवासी बताया था। उन्होंने आरोपित पुलिस वालों पर हत्या की धाराओं में केस दर्ज करने की माँग की थी। हालाँकि, बकौल रामकरन सिंह, इस माँग पर कोई भी कार्रवाई आरोपित पुलिस वालों पर नहीं हुई। मृतकों की तरफ से भी SP बस्ती से कई बार गुहार लगाई गई। हालाँकि, यह गुहार बेअसर रही। मृतकों के परिजनों के पास आज भी अपनी उन गुहार के सबूत मौजूद हैं।
1990 में आरोपित पुलिसकर्मियों के खिलाफ सेना मेजर द्वारा लिखा गया शिकायती पत्र
SP से ले कर सिपाही तक पर एक्शन की माँग
जिन पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज करवाने की माँग उठी थी उनकी लिस्ट आज भी गाँव वालों के पास है। इनके नाम राम चंदर राय (तत्कालीन थाना प्रभारी दुबौलिया), दयाशंकर सिंह (तत्कालीन थाना प्रभारी छावनी), सब इंस्पेक्टर श्रीराम अरुण उर्फ़ सियाराम अरुण, सब इंस्पेक्टर सुरेंदर राय, सिपाही राधेश्याम, सिपाही रामनाथ ओझा, सिपाही मुरलीधर दुबे, सिपाही ओम प्रकाश गौड़, सिपाही रामनयन यादव, सिपाही बृजनंदन सिंह, सिपाही अशोक कुमार, सिपाही हरिश्चंद्र और 12 अन्य सिपाही अज्ञात जिनके हाथों में रायफलें मौजूद बताई गईं।
तत्कालीन विधायक राणा कृष्ण किंकर सिंह (अब दिवंगत) ने भी एक गवाह के तौर पर इन पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की माँग उठाई थी।
इन पुलिसकर्मियों के खिलाफ मांगी गई है कार्रवाई
हालाँकि, इन माँगों का कोई असर किसी भी स्तर पर नहीं हुआ। ऑपइंडिया से बात करते हुए राजकरन सिंह ने बताया कि यह नरसंहार तत्कालीन पुलिस अधीक्षक बस्ती IPS सुभाष चंद्र गुप्ता के आदेश पर हुआ था। ग्रामीणों को उम्मीद है कि योगी सरकार में उन सभी पुलिसकर्मियों को किए की सजा मिलेगी जिन्होंने निरपराध लोगों की हत्या कर के उन्हें ही मुल्जिम भी बना दिया है। आज नहीं तो कल न्याय की उम्मीद में सत्यप्रकाश सिंह ने अपने भाई सत्यवान सिंह की पोस्टमार्टम रिपोर्ट तक सुरक्षित रखी है।
हालाँकि, राम चन्दर यादव के परिजन पुलिस की बर्बरता के चलते अंतिम बार मृतक का चेहरा भी नहीं देख पाए। इसी वजह से आज राम चंदर यादव की कोई तस्वीर मौजूद नहीं है।
न्याय की धुंधली आस में आज भी सहेज कर रखी हुई है सत्यवान की पोस्टमार्टम रिपोर्ट
जब्त लाइसेंसी अस्त्र आज तक नहीं लौटाए गए
राजकरन सिंह का कहना है कि 22 अक्टूबर की घटना के बाद पुलिस उनके गाँव में कई बार आई। इस दौरान पुलिस ने न सिर्फ महिलाओं के गहने और पैसे लूटे थे बल्कि उन ग्रामीणों के लाइसेंसी अस्त्र भी जब्त कर लिए जिनका कोई भी दोष नहीं था। 9 नवंबर, 1990 को गाँव सांडपुर के 69 वर्षीय बुजुर्ग जगदीश सिंह का प्रार्थना पत्र आज भी ग्रामीणों के पास मौजूद है जिसमें वो बस्ती जिले के तत्कालीन जिलाधिकारी से पुलिस द्वारा ले जाए गए अपना लाइसेंसी हथियार वापस देने की गुहार लगा रहे हैं।
1990 में गुहार लगाने के दौरान खुद को बेहद बीमार बताने वाले जगदीश सिंह अब दुनिया में नहीं हैं। उनका लाइसेंसी हथियार उन्हें वापस नहीं दिया गया था। वो अस्त्र अब कहाँ है ये किसी को भी नहीं पता।
गुहार लगाते हुए चल बसे जगदीश पर वापस नहीं मिला हथियार
घर, खेत और जेवर बेच कर आज भी लड़ रहे हैं मुकदमा
बताते चलें कि FIR संख्या – 132/90 पर दर्ज मुकदमा ग्रामीणों की तमाम मिन्नतों, पूर्व विधायक राणा कृष्ण किंकर और वर्तमान सांसद हरीश द्विवेदी की वापसी की अपील के बावजूद आज भी अदालत में चल रहा है। 33 साल से चल रहे इसी मुकदमे को लड़ते हुए जयराज यादव दवाओं तक के मोहताज हो गए और आखिरकार उनके प्राण निकल गए। रामकरन सिंह का यह भी दावा है कि आज भी लगभग 23 से अधिक आरोपित लगातार अदालतों पर जा रहे हैं। उनमें से कई लोग बीमार हैं और आर्थिक हालत खराब होने के चलते कईयों के खेत और गहने तक बिक गए।
बस्ती की जिला अदालत में आज भी चल रहा मुकदमा
ग्रामीणों को आशा है कि वर्तमान सरकार न सिर्फ उन्हें 33 साल से चल रहे अन्याय से मुक्ति दिलाएगी बल्कि 22 अक्टूबर, 1990 की घटना में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से शामिल पुलिस अधीक्षक से ले कर सिपाही पर कठोर कार्रवाई करेगी। मुकदमे में नामजद आरोपितों को यह भी उम्मीद है कि राम के नाम पर अगर उन्हें दंडित किया गया था तो यह भी इतिहास निर्माणाधीन रामजन्मभूमि के किसी कोने में दर्ज होगा।
गुजरात के वडोदरा के हरनी झील में 18 जनवरी 2024 को नाव डूबने से 14 लोगों की मौत हो गई। इनमें 12 स्कूली बच्चे और दो शिक्षक हैं। इस घटना की जाँच के लिए गुजरात पुलिस ने एसआईटी का गठन किया है। रिपोर्ट के अनुसार बच्चों को पिकनिक मनाने के लिए वाटर पार्क ले जाने के नाम पर स्कूल ने 750 रुपए लिए थे, लेकिन उनको झील में ले जाया गया था।
इस मामले में प्रशासन ने 18 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इनमें नौका सुविधा देने वाली कंपनी के कर्मचारी और नाव चलाने वाले व्यक्ति का भी नाम शामिल है। वडोदरा नगर निगम (वीएमसी) के कार्यकारी अभियंता ने हरनी पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई है। इसमें कहा गया है कि बच्चे ‘बिना लाइफ जैकेट के थे’ और ‘सामने से पानी रिसने’ के बाद नाव पलट गई। आरोपितों ने ‘उतावलेपन और लापरवाही से काम किया’, जिससे पिकनिक पर आए 12 बच्चों और दो शिक्षकों की मौत हो गई।
जानकारी के मुताबिक, “आरोपित ने नाव में सवार यात्रियों को जीवन जैकेट प्रदान करने की सुरक्षा सावधानियों का पालन नहीं किया। साथ ही नाव ओवरलोड थी। नाव की हालत भी खराब थी। यही नहीं इस नाव से बँधी रहने वाली रस्सियाँ भी नदारद थीं और सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं किया गया था।”
#WATCH | Vadodara boat capsize incident | Gujarat Home Minister Harsh Sanghavi says, "…12 children and two teachers died in the incident. Soon after the incident, the Collector, Police Commissioner, Municipal Commissioner & more than 60 jawans of NDRF and Fire Brigade reached… pic.twitter.com/8uzPMp4JOu
जानकारी के मुताबिक, वडोदरा नगर निगम ने हरनी झील में नौकायन वाले इलाके को लेन जोन का नाम दिया है। इस पूरे इलाके को कोटिया प्रोजेक्ट नाम की कंपनी मैनेज करती है। वडोदरा नगर निगम के अधिकारी राजेश चौहान ने बताया कि कोटिया प्रोजेक्ट्स नाम की कंपनी के पास साल 2017 से लेन जोन को संचालित करने का अनुबंध है।
गौरतलब है कि वडोदरा के हरनी झील में गुरुवार शाम करीब 4.30 बजे यह दुर्घटना हुई थी। दुर्घटना के समय नाव पर करीब 30 लोग सवार थे। किसी को भी सुरक्षा के लिए जरूरी लाइफ जैकेट नहीं पहनाए गए थे। दुर्घटना में पीड़ित सभी बच्चे और शिक्षक वडोदरा के न्यू सनराइज स्कूल के हैं। इस मामले में मृतकों के परिजनों को 2 लाख और घायलों को 50 हजार रुपए देने की घोषणा सरकार ने की है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में बताया गया है कि न्यू सनराइज स्कूल के करीब 80 छात्र-शिक्षक पिकनिक के लिए गए थे। इनमें से 27 छात्र नाव पर सवाल थे। अन्य बच्चे दूसरी मनोरंजक गतिविधियों में लगे हुए थे। हादसे में जान गँवाने वाले एक छात्र की बहन नौशिन गाँधी ने हादसे के लिए स्कूल प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने बताया है कि स्कूल ने पिकनिक के नाम पर 750 रुपए लिए थे। कहा था कि बच्चों को वाटर पार्क ले जाया जाएगा। लेकिन इसकी जगह उन्हें झील पर ले जाया गया।
केरल के तिरुवनंतपुरम में एक पादरी ने नाबालिग बच्चे का यौन शोषण कर इंसानियत को शर्मसार कर दिया। केरल पुलिस ने शुक्रवार (19 जनवरी,2024) को कट्टक्कडा के पेंटेकोस्टल चर्च के इस पादरी को कोर्ट में पेश किया। यहाँ से आरोपित को न्यायायिक हिरासत में भेज दिया।
इस पादरी के खिलाफ POCSO (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस के मुताबिक, 59 साल के इस पादरी की पहचान रविन्द्रनाथ के तौर पर की गई। रविन्द्रनाथ ने 13 साल के बच्चे को पहले अपनी बातों से फुसलाया। इसके बाद उसका यौन शोषण किया।
ये घटना आरोपित को हिरासत में लेने से दो दिन पहले 17 जनवरी 2024 की है। बताते चलें कि इस लड़के को इसकी माँ छोड़ कर चली गई है। वो अपनी अपनी दादी के साथ रहता है।
घटना के दिन बच्चे की दादी अस्पताल गई थीं। इसी का फायदा उठाकर पादरी ने बच्चे को बहकाया- फुसलाया और अपने घर ले गया। घर ले जाकर पादरी ने उसे केक खिलाया। उसने कथित तौर पर उसे टैबलेट पर अश्लील फोटो दिखाईं और फिर उसका यौन उत्पीड़न किया।
मालूम हो कि दक्षिण भारत में पादरियों के बच्चों और औरतों के यौन शोषण करने का ये पहला मामला नहीं है। इससे पहले बीते साल तमिलनाडु के तिरुनेलवेली में एक महिला ने नींद की 40 गोलियाँ निगल आत्महत्या की कोशिश की थी। महिला ने पादरी के यौन शोषण से तंग थी।
आरोपित पादरी 39 साल जगन था। उसका महिला से पहचाना चर्च में प्रार्थना के लिए आने-जाने के दौरान हुआ था। इससे पहले मार्च 2023 में तमिलनाडु के कन्याकुमारी में एक पादरी नर्सिंग छात्रा के यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
किसी व्यक्ति के पिछवाड़े से निकली गैस सारी दुनिया जला सकती है, लेकिन इसके लिए उसे इकट्ठा करना पड़ेगा। ठीक वैसे ही, जैसे गोबर-गैस से गैस बनती है और उसका इस्तेमाल खाना बनाने में किया जाता है। लेकिन क्या हो? अगर सब लोग एक साथ गैस छोड़ें (पादें), और कोई माचिस की तिल्ली लगा दे? तो भैया, ऐसा करने की बिल्कुल भी मत सोचना। एक प्रैंकस्टर ने ऐसा करने की हिमाकत की है, अब वो सामान्य तौर पर बैठ नहीं पा रहा है, क्योंकि अपनी गैस (पाद) जलाकर लोगों को हँसाने के चक्कर में उसका पिछवाड़ा जल चुका है। जो पूरी दुनिया में उसके जले पिछवाड़े की दुहाई दे रहा है।
NY पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, ये मामला चीन के जिलिन प्रान्त का है। यहाँ के बिन तोऊजी नामक युवक ने एक प्रैंक वीडियो बनाने के चक्कर में अपना पिछवाड़ा जला लिया। दरअसल, युवक ने जैसे ही गैस छोड़ी, उसी समय लाइटर जलाते ही उसमें आग लग गई। तुरंत ही युवक छटपटाने लगा और किसी तरह से आग पर काबू पाया। इसके बाद वो दर्द से कराहने लगा।
भले ही ये मामला को हँसी-मजाक का लग रहा हो, लेकिन ये मामला है बेहद गंभीर। दरअसल, हम जो गैस छोड़ते हैं, उसमें हाइड्रोजन, मीथेन और कार्बन डाई ऑक्साइड गैस की बहुलता होती है। ये सारे गैस कुल मिलाकर 75 प्रतिशत हिस्सा होती है। इन गैसों के संपर्क में ऑक्सीजन के आते ही ये जलने लायक हो जाती है।
हालाँकि, इसमें एक बात ये भी है कि इंसान जो गैस छोड़ता है, उसमें भी इन गैसों की भिन्न-भिन्न मात्रा होती है, जो आपके भोजन पर निर्भर करती है। अगर इसमें अकेले 65 प्रतिशत मात्रा हाइड्रोजन की है, तो ये बेहद ज्वलनशील हो सकता है।
ये अकेला मामला नहीं है, जिसमें इंसान से निकले गैस की वजह से आग लगी हो। साल 2016 में एक ऐसा ही मामला सामने आया था, जिसमें एक अस्पताल में ऑपरेशन के समय मरीज ने गैस छोड़ दिया, तो ऑपरेशन में इस्तेमाल किए जा रहे लेजर ने आग पकड़ लिया था। उस घटना में मरीज को गंभीर रूप से नुकसान पहुँचा था।
राम मंदिर में नई मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा और पुरानी मूर्ति को लेकर ज्योतिर्मठ शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कुछ सवाल उठाए हैं। हालाँकि, उन्होंने जो प्रश्न पूछे हैं उस पर चूँकि श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र पहले ही सब स्पष्ट कर चुका है इसलिए शंकराचार्य की बातें लोगों को पसंद नहीं आ रहीं।
अपने पत्र में उन्होंने चिंता जताई कि हर जगह नई मूर्ति की प्रतिष्ठा की बात है जबकि गर्भगृह में तो पहले ही रामलला की मूर्ति विराजमान है, जिन्होंने इतने वर्ष का संघर्ष देखा। उन्होंने पत्र में कहा है रामलला की नई मूर्ति आने से ऐसा न हो कि पुरानी वाली की उपेक्षा हो जाए। उनके मुताबिक वेदी पर पुराने रामलला ही विराजमान होने अनिवार्य हैं। नई मूर्ति हुई तो बहुत बड़ा अन्याय होगा।
श्रीराम जय राम जय जय राम
*शंकराचार्य जी ने ट्रस्ट को पत्र लिखा*
ज्योतिष्पीठ के शङ्कराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानंदः सरस्वती '१००८' महाराज ने *श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महोदय को पत्र लिखा*
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बताया पुरानी मूर्ति का क्या होगा
उनके इस पत्र के बाद फिर सवाल उठ रहे हैं कि नई मूर्ति आ गई है तो उस मूर्ति का क्या होगा जिसे इतने वर्षों से पूजा जा रहा था। तो बता दें, कि इन सवालों पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने हाल में जवाब देते हुए कहा था कि नए राम मंदिर के गर्भगृह में रामलला की वर्तमान मूर्ति भी रखी जाएगी।
इसके अलावा ऑपइंडिया ने भी अपनी रिपोर्ट में आपको इस संबंध में एक साल पहले ही जवाब दिया था। नई प्रतिमा के बारे में जब खबर आई थी तो हमने इस संबंध में कामेश्वर चौपाल से बातचीत की थी, जो ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के सदस्य हैं। उन्होंने पिछले साल ही यह जानकारी दी थी कि गर्भगृह में दोनों मूर्तियों को रखा जाएगा।
उन्होंने कहा था कि अधिकतर मंदिरों में 2 प्रतिमाएँ होती हैं। इनमें से एक को ‘उत्सव मूर्ति’ के रूप में जाना जाता है तो दूसरी ‘प्राण प्रतिष्ठित मूर्ति’ कहलाती है। प्राण प्रतिष्ठित मूर्ति को कहीं खिसकाया नहीं जा सकता, वो वहीं पर विराजमान रहती हैं जहाँ उन्हें स्थापित किया जाता है। वहीं झाँकी या शोभा यात्रा जैसे आयोजनों में ‘उत्सव मूर्ति’ को निकाला जाता है।
क्यों होगीं मंदिर में 2 मूर्तियाँ
‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के सदस्य कामेश्वर चौपाल ने इसकी पुष्टि की थी कि अयोध्या में बन रहे भव्य एवं दिव्य राम मंदिर में भी एक मूर्ति प्राण प्रतिष्ठित होगी और एक उत्सव के लिए।
अब ये तो साफ है कि जो बड़ी मूर्ति है उसकी गर्भगृह में प्राण-प्रतिष्ठा होगी जबकि जो दूसरी मूर्ति होगी उसे उत्सव मूर्ति के रूप में गर्भगृह में रखा जाएगा। इसके अलावा ये जो सवाल उठ रहे हैं कि राजनीति के कारण पहले राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा पहले हो रही है। इस पर भी कामेश्वर चौपाल बता चुके थे कि कितना भी बड़ा घर बन कर तैयार हो जाए, पंडित द्वारा शुभ मुहूर्त बताने जाने के पश्चात ही घरवास का कार्यक्रम होता है।
पहली बात तो आप इतना तनाव न लें क्योंकि आप शंकराचार्य नहीं हैं न्यायालय ने रोक लगा रखी है
और दूसरी बात अयोध्या में जो भी कुछ हो रहा है शास्त्र सम्मत हो रहा है प्रभु राम जी की कृपा से हो रहा है
तीसरी बात फिर से आप शंकराचार्य नहीं है न्यायालय ने रोक लगा रखी है
बता दें कि श्रीराम की नई मूर्ति की गर्भगृह में ही प्राण-प्रतिष्ठा होगी। यहाँ पुराने श्री रामलला विराजमान होंगे अपने भाई लक्ष्मण, भरत, और शत्रुघ्न के साथ। उनके पास हनुमान जी की भी एक छोटी मूर्ति होगी।
इस शुभ अवसर पर जब हर कोई प्राण-प्रतिष्ठा को लेकर उत्साहित है तो शंकराचार्य द्वारा इस कार्यक्रम पर सवाल खड़ा करना किसी को नहीं भा रहा। लोग उन्हें सलाह दे रहे हैं कि वो अपने काम से काम रखे। इस विषय पर न बोलें। कुछ ज्योतिशों ने विश्वास दिया है कि राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा का कार्यक्रम शास्त्रसम्मत हो रहा है। कुछ ने चुनौती भी दी है कि फिर भी कोई संदेह है तो उनके साथ इस विषय पर शास्त्रार्थ कर लिया जाए।
आप कांग्रेसी गुरु हो, इसीलिए ऐसी बाते कर रहे हो। आदर सहित आपसे निवेदन हे की भारत को और सनातन को ऊपर उठाने में अगर कोई मदद नहीं कर सकते हो तो कृपया शांत रहे। जो हो रहा हे सब अच्छा हो रहा हे। भगवान राम आपको सद्बुद्धि दे, ज्यादा ज्ञान खरतनाक होता हे।
राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ असम में कानूनी पचड़े में फँस गई है। जोरहाट जिला पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए गुरुवार (18 जनवरी 2024) को इस यात्रा और इसके मुख्य आयोजक केबी बायजू (KB Byju) पर FIR दर्ज की है।
असम पुलिस ने ये FIR यात्रा के लिए चयनित रास्तों पर सरकारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने पर दर्ज की। पुलिस के मुताबिक, जोरहाट से गुजरते वक्त कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के नेतृत्व में इस यात्रा ने पुलिस-प्रशासन के नियमों का उल्लंघन करते हुए निर्धारित रास्तों से हटकर दूसरा रास्ता पकड़ लिया।
पुलिस के अनुसार रैली के रास्ते में अचानक बदलाव की वजह से बाधा पैदा हुई। इस कारण से भीड़ अनियंत्रित हो गई। यातायात नियंत्रण के लिए लगे बैरिकेड तोड़ने लगी। ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ में शामिल कॉन्ग्रेसियों ने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर हमला भी कर दिया।
इस FIR में यह भी कहा गया है कि रैली की वजह से क्षेत्र में भगदड़ और दंगा जैसे हालात पैदा हो गए थे। पुलिस ने रैली आयोजक केबी बायजू के नेतृत्व वाली रैली पर आपराधिक साजिश के तहत भीड़ को उकसाने का भी आरोप लगाया है।
असम पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि यात्रा को केबी रोड की ओर से जाने की इजाजत नहीं थी। इस रोड पर यात्रा के पहुँचने के कारण हालात काबू से बाहर हो गए। अचानक भारी भीड़ की वजह से कुछ लोग गिर गए और भगदड़ जैसे हालात पैदा हो गए।
एक्शन मोड में सीएम हिमंत बिस्वा सरमा
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 18 जनवरी 2024 को कहा कि अगर राहुल गाँधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करती है तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सीएम बिस्वा ने मीडिया से कहा, “असम में भारत जोड़ो न्याय यात्रा की योजना बनाने वाली टीम में दो लोगों ने जानबूझकर दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया। वे रैली को गुवाहाटी से गुजारने की योजना बना रहे हैं। यहाँ तक कि बीजेपी भी राजधानी शहर से होकर अपनी रैलियाँ नहीं करती है, क्योंकि इससे परेशानी पैदा होगी। अगर कॉन्ग्रेस गुवाहाटी के रास्ते रैली निकालने के लिए मजबूर करेगी तो हम उन्हें नहीं रोकेंगे; इसके बजाय, हम केस दर्ज करेंगे।”
सीएम बिस्वा ने ये भी कहा कि असम के लोग भारत जोड़ो न्याय यात्रा में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने कहा, “केवल एक खास समुदाय (मियाँ या बाँग्लादेशियों की तरफ इशारा) इस यात्रा में दिलचस्पी रखता है।”
विवादों में ‘न्याय यात्रा’
बताते चलें कि 14 जनवरी को मणिपुर से शुरू हुई राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ नागालैंड से होते हुए 18 जनवरी को असम में प्रवेश किया। असम में आते ही कॉन्ग्रेस को पहला झटका इसी पार्टी में रही नेता की ओर से लगी। असम यूथ कॉन्ग्रेस की अध्यक्ष रहीं अंगकिता दत्ता ने सवाल किया कि उन्हें कब न्याय मिलेगा। ये वही अंगकिता हैं, जिन्हें यूथ कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीवी श्रीनिवास के उत्पीड़न और प्रताड़ना के खिलाफ आवाज उठाने पर पार्टी ने निष्कासित कर दिया था।
अपनी ही पार्टी की निष्कासित महिला नेता को न्याय दिलाने के बजाय राहुल गाँधी असम पहुँच कर राजनीति करने लगे। उन्होंने असम सरकार को ‘नफ़रत की खाद’ से उपजी ‘भ्रष्टाचार की फसल’ बताया। उन्होंने कहा कि असम के मुख्यमंत्री हिंदुस्तान के सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री हैं, जिनका काम है नफ़रत की आड़ में जनता का पैसा लूटना।
संसद में सवाल पूछने के लिए घूसखोरी की दोषी पाई गईं TMC की पूर्व लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा को झटके पर झटके लग रहे हैं। कुछ समय पहले तक ‘शेरनी’ बनकर घूम रही महुआ मोइत्रा की बोलती बंद है। संसद में सवाल पूछने के बदले घूस लेकर उन्होंने जिस सरकारी बँगले को सजाया-सँवारा था, उससे भी महुआ को हाथ धोना पड़ा है। वैसे, तो महुआ मोइत्रा इस बंगले को खाली करने के लिए कई नोटिस मिल चुके थे, इसके बावजूद वो बँगला खाली नहीं कर रही थी।
लेकिन जब संपदा निदेशालय के अधिकारी बँगला खाली करवाने पहुँच ही गए, तो उन्हें बेमन से ऐसा करना ही पड़ा। हालाँकि, एक दिन पहले वो दिल्ली हाईकोर्ट तक में लड़ाई लड़ रही थी, लेकिन उच्च न्यायालय ने उन्हें कोई राहत देने से इनकार कर दिया था।
लोकसभा से निष्कासित सांसद महुआ मोइत्रा को 2 दिन पहले आखिरी बार नोटिस दिया गया था कि वो अपना बँगला खाली कर दें, वर्ना एजेंसियाँ अपने तरीके से जबरन बंगला खाली करवाएँगी। इसके बाद महुआ मोइत्रा ने हाईकोर्ट का रुख किया था, लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी दलीलों को मानने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद उनके पास कोई रास्ता नहीं बचा था। हालाँकि, इसके बावजूद वो बँगला नहीं खाली करने की जिद पर अड़ी थी, लेकिन जब अधिकारी मौके पर पहुँच गए, तो महुआ मोइत्रा बँगला खाली कर चुपचाप चलती बनीं। संपदा निदेशालय के अधिकारियों ने उनके बंगले पर ताला लगा दिया है।
दरअसल, महुआ मोइत्रा ने हाईकोर्ट में तर्क दिया था कि वो फिर से चुनावी मैदान में हैं, इसलिए उन्हें बंगले में रहने की अनुमति दी जानी चाहिए। चूँकि अभी चुनावों की घोषणा नहीं हुई है, ऐसे में हाईकोर्ट ने उनकी दलील को खारिज कर दिया।
#WATCH | Expelled parliamentarian Mahua Moitra (TMC) vacates her Government allotted accommodation in New Delhi pic.twitter.com/1S0qFC6qoQ
दिल्ली हाईकोर्ट ने महुआ की याचिका को ख़ारिज करते हुए कहा था कि, “याचिकाकर्ता को सरकारी बँगला इसलिए मिला था क्योंकि वह सांसद थीं। उनके संसद से निकाले जाने के बाद उनका यह पद चला गया है। कोर्ट के पास ऐसा कोई नियम नहीं है, जो किसी सांसद के संसद से निकाले जाने के बाद उसके सरकारी घर में रहने सम्बन्धी मसलों से निपटता हो।”
दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि उनके संसद से निकाले जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने अभी रोक नहीं लगाई है, इसलिए बँगले से उनको बाहर किए जाने के मामले में उन्हें वह कोई भी राहत संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत नहीं दे सकता। उनकी सुप्रीम कोर्ट में लगाई गई याचिका की सुनवाई 24 जनवरी, 2024 को होगी।
बताते चलें कि उन्हें 8 दिसंबर, 2023 को लोकसभा से निष्कासित कर दिया गया था। इसके बाद संसद की हाउसिंग कमिटी ने महुआ को एक महीने के अंदर 7 जनवरी, 2024 तक बंगला खाली करने को कहा था। बाकायदा महुआ को 11 दिसंबर, 2023 को केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय ने पत्र भेजकर इस आदेश से अवगत कराया था। इसके बाद 12 दिसंबर को उन्हें तीसरा नोटिस दिया गया, लेकिन इस आदेश को चुनौती देने के लिए वो 18 दिसंबर 2023 को दिल्ली हाई कोर्ट जा पहुँची थीं। हालाँकि अब वो बँगला खाली कर चुकी हैं।
दो युवक साइकल के सहारे गुजरात से अयोध्या यात्रा पर निकले हैं। इन दोनों युवकों को मुस्लिम पिता-पुत्र ने बम से उड़ाने की धमकी दी है। इस मामले में दोनों युवकों ने बताया कि वो मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के सारंगपुर के आसपास पहुँचे थे, तभी कई लोगों ने पूछा कि वो कहाँ जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि वो अयोध्या जा रहे हैं। इस बीच, असगर खान नाम के अधेड़ व्यक्ति ने उन्हें धमकाया कि वो अयोध्या नहीं पहुँच पाएँगे, क्योंकि वो बम से उड़ा दिए जाएँगे।
भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात से चले दोनों युवक सारंगपुर से गुजर रहे थे, जब ये घटना हुई। इस दौरान एक युवक ने धमकी देने वाले असगर खान का वीडियो बना लिया। असगर के साथ ही उसके बेटे ने भी दोनों के साथ गाली-गलौच की।
धमकी मिलने के बाद दोनों युवकों ने इसकी शिकायत वहाँ से थोड़ी दूर पर उनके स्वागत के लिए खड़े हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं से की। इसके बाद पुलिस तक ये मामला पहुँचाया गया। इस मामले में सारंगपुर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।
ये मामला बुधवार (17 जनवरी 2024) का है। दोनों युवकों के नाम नील पटेल और देव पटेल हैं। वो अयोध्या में रामलला मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा देखने के लिए गुजरात से साइकल के माध्यम से अयोध्या की यात्रा पर निकले हैं। उनके साथ जब ये घटना घटी, तो देव पटेल ने असगर खान का वीडियो बना लिया।
युवकों का आरोप है कि असगर ही बार-बार पूछ रहा था कि वो कहाँ जा रहे हैं। उनके बताने पर असगर ने कहा, “जाओ, तुमको बताते हैं। वहाँ तक पहुँच नहीं पाओगे। राम भक्तों को बम से उड़ा देंगे।” इस घटना को स्थानीय मीडिया ने भी कवर किया है।
इस घटना के समय हिंदू जागरण मंच के जिला सह-संयोजक मुकेश दुबे हाईवे पर दोनों युवकों के आने का इंतजार कर रहे थे। ताकि वो रास्ते में होने वाली परेशानियों को ध्यान में रख उनकी मदद कर सकें। जब दोनों युवकों ने रास्ते में हुई घटना की बात बताई, तो सभी लोग थाने पर गए और एफआईआर दर्ज कराई। बहरहाल, आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है।