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जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में महबूबा मुफ्ती की गाड़ी का भीषण टक्कर, बाल-बाल बचीं पूर्व सीएम: ड्राइवर और PSO घायल

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और PDP सुप्रीमो महबूबा मुफ्ती की गाड़ी का गुुरुवार (11 जनवरी 2023) को कश्मीर के अनंतनाग में एक्सीडेंट हो गया। इस हादसे में महबूबा मुफ्ती सुरक्षित हैं। गाड़ी की टक्कर ड्राइवर वाली साइड की तरफ से हुई थी। इस कारण ड्राइवर को चोटें आई हैं। दरअसल, महबूबा अग्निकांड के पीड़ितों से मिलने जा रही थीं।

दरअसल, महबूबा मुफ्ती गुरुवार (11 जनवरी 2023) को श्रीनगर से अनंतनाग के खानबल की तरफ जा जा रही थीं। उनकी गाड़ी का संगम बिजबेहड़ा के पास एक्सीडेंट हो गया। इस हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुँच गई और जाँच शुरू कर दी। इस हादसे की सूचना उनकी बेटी इल्तिजा ने दी और कहा कि महबूबा और उनका पीएसओ सुरक्षित हैं।

बाद में महबूबा मुफ्ती ने भी दुर्घटना की जानकारी साझा की। उन्होंने एक्स पर लिखा, “आप सबकी दुआओं से मैं सुरक्षित हूँ। मेरे ड्राइवर और पीएसओ को चोटें आई हैं। मैं आशा करती हूँ कि वो जल्द ही इससे उबर जाएँगे।”

हालाँकि, पीडीपी मीडिया सेल के हवाले से समाचार एजेंसी एएनआई ने बताया था कि इस हादसे में पीएसओ और महबूबा मुफ्ती बच गए हैं, पर महबूबा मुफ्ती ने साफ किया कि उनके सुरक्षा अधिकारी भी इस हादसे में घायल हुए हैं। महबूबा मुफ्ती ने अनंतनाग में अग्निकांड पीड़ितों से मुलाकात की और जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल और प्रशासन ने पीड़ितों की मदद का आग्रह किया।

राम मंदिर ‘राजनीति’, पर सोनिया गाँधी के लिए मदर टेरेसा का संत होना भारत के लिए ‘गौरव’: पोप को लिखा लेटर वायरल, वेटिकन भेजे थे दूत

कॉन्ग्रेस ने 11 जनवरी 2024 को एक पत्र जारी करके अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में जाने से मना कर दिया। इस समारोह का आयोजन 22 जनवरी 2024 को होना है, जिसमें देश-दुनिया भर से लोग शामिल होंगे। इस समारोह के लिए कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कॉन्ग्रेस नेता सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी को निमंत्रण पत्र भेजा गया था।

कॉन्ग्रेस ने इस निमंत्रण को ठुकरा दिया है और एक पत्र जारी करके प्राण प्रतिष्ठा में ना जाने की वजह बताई है। पत्र में लिखा गया है, “भगवान राम की पूजा-अर्चना करोड़ों भारतीय करते हैं। धर्म मनुष्य का व्यक्तिगत विषय होता आया है, लेकिन बीजेपी और आरएसएस ने वर्षों से अयोध्या में राम मंदिर को एक राजनीतिक परियोजना बना दिया है।”

जहाँ कॉन्ग्रेस ने इस पत्र में धर्म को निजी विषय बताया है, वहीं सोशल मीडिया पर साल 2016 में लिखा गया सोनिया गाँधी का एक अन्य पत्र वायरल हो रहा है। यह पत्र सोनिया गाँधी ने वेटिकन के पोप फ्रांसिस को लिखा था, जिसमें भारत में दशकों तक रहीं ईसाई नन मदर टेरेसा के संत घोषित करने की प्रक्रिया से संबंधित था। इस पत्र को कॉन्ग्रेस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से साझा किया गया था।

इस पत्र में सोनिया गाँधी ने लिखा था कि मदर टेरेसा के संतीकरण से भारत में रहने वाले 2 करोड़ ईसाइयों सहित सभी नागरिक इस बात से बहुत गर्वित और प्रसन्न हैं कि पोप और कैथोलिक चर्च द्वारा मदर टेरेसा की आत्मा की पवित्रता, उद्देश्य की पवित्रता और मानवता की सेवा के माध्यम से ईश्वर की सेवा की।

उन्होंने आगे लिखा कि मदर टेरेसा का संत घोषित किया जाने वाला समारोह सभी भारतीयों के लिए उन्हें धन्यवाद देने का अवसर है, क्योंकि उन्होंने भारत में बिताए गए अपने समय में ‘देश के सबसे गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा’ की। उन्होंने आगे लिखा है कि टेरेसा ने अपना जीवन निस्वार्थ सेवा में बिताया और हर किसी को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए और सीखना चाहिए कि ‘हमारे रोजमर्रा के जीवन में करुणा और प्रेमपूर्वक रहने और दयालुता कैसे दिखाई जाए’।

सोनिया गाँधी ने भी टेरेसा के संतीकरण के इस पवित्र आयोजन के लिए वेटिकन जाने की इच्छा जताई थी। हालाँकि, उन्होंने कहा था वह बीमारी के कारण इस पवित्र आयोजन में नहीं शामिल हो पाएँगी। अपनी जगह उन्होंने कॉन्ग्रेस के दो नेताओं- मारग्रेट अल्वा और लुइज़िन्हो फलेइरो को वेटिकन सिटी में आयोजित समारोह में भेजा था।

जो सोनिया गाँधी कल तक पूरे देशवासियों की तरफ से मदर टेरेसा को संत की उपाधि दिए जाने पर ख़ुशी जता रही थीं और ईसाइयों के सबसे बड़े पद पोप को पत्र लिख रहीं थीं, वहीं अब उनकी पार्टी हिन्दुओं के आराध्य के मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को निजी मामला बताकर जाने से मना कर रही हैं।

कॉन्ग्रेस ने इस पूरे आयोजन को भाजपा और आरएसएस का कार्यक्रम बताया है। अब यह भी प्रश्न उठ रहा है कि यदि सोनिया गाँधी को धार्मिक मामले में राजनीतिक संगठनों का जुड़ा होना पसंद नहीं है तो वह एक ईसाई नन के संतीकरण के आयोजन पर इतना ख़ुशी क्यों थीं और अपनी पार्टी की तरफ से पत्र क्यों लिख रही थीं?

मदर टेरेसा को लेकर भी भारतीय जनमानस में कई प्रश्न उठते रहे हैं। मदर टेरेसा पर आरोप है कि वह गरीबों को ईसाइयत में धर्मान्तरित करने का चक्र चलाती थीं। इसके साथ ही वह इलाज के ऐसे तरीकों को बढ़ावा देती थीं, जो कि सही नहीं थे। दरअसल, मदर टेरेसा एक धार्मिक मिशन पर भारत में थीं और उनके काम को कैथोलिक ईसाइयों द्वारा समर्थन मिलता था।

खाद पर अखिलेश यादव के ‘झूठ’ की मोदी के मंत्री ने खोली पोल, बताया- नीम कोटेड यूरिया की नहीं बढ़ी है कीमत, किसानों को न करें गुमराह

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने यूरिया की कीमतों को लेकर सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी दी है। इस पर केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने अखिलेश यादव के दावे की धज्जियाँ उड़ा दीं। दरअसल, सरकार ने नीम कोटेड यूरिया की कीमतों के बराबर वाली कीमत पर ही यूरिया गोल्ड भी लॉन्च किया है, जिसका वजन 45 किलोग्राम है। ऐसे में अखिलेश यादव दावा किया सरकार ने यूरिया की कीमतों को बढ़ा दिया।

सपा सुप्रीमो के इस दावे पर केंद्रीय कृषि मंत्री मनसुख मांडविया ने लिखा, “प्रिय अखिलेश जी, पहले तो मैं आपको यह बात स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि नीम कोटेड यूरिया की 45 किलोग्राम वाली बैग ₹266.5 में मिलती थी, मिलती है और मिलती रहेगी। हमने PM @NarendraModi जी के ‘जय अनुसंधान’ के नारे साथ किसानों के हित में नया सल्फर कोटेड ‘गोल्ड यूरिया’ बनाया है।”

अखिलेश यादव ने एक्स पर दावा किया, “भाजपा सरकार किसानों के शोषण का पर्याय बन गयी है। यूरिया की बोरी वज़न में घटकर अब 40 किलो की हो गयी है। किसान ये साधारण गणित अच्छे से समझता है कि पहले ₹266.50 में 45 किलो यानी एक किलो यूरिया का दाम लगभग ₹5.92 पड़ता था, लेकिन अब ₹266.50 में 40 किलो यानी लगभग ₹6.66 किलो प्रति किलोग्राम पड़ेगा। मतलब एक झटके में यूरिया 12% से भी ज़्यादा महँगी हो गयी है। भाजपा राज में अगर इसी तरह ‘बोरी की चोरी’ जारी रही तो एक दिन किसानों को खाली बोरी ही मिलेगी। आगामी चुनाव में किसान भाजपा की कृषि-कृषक विरोधी राजनीति का खेत खोद देंगे।”

बता दें कि अखिलेश यादव ने यूरिया के दामों को लेकर जनता में भ्रम फैलाने की कोशिश की। उन्होंने सल्फर यूरिया गोल्ड को नीम कोटेड यूरिया के दामों जैसा दिखाया और लोगों में ये भ्रम फैलाने की कोशिश की कि यूरिया की कीमतें 12 प्रतिशत बढ़ा दी गई हैं। जबकि हकीकत ये है कि नीम कोटेड की 45 किलो की बोरी की कीमत अब भी 266.50 रुपए ही है।

वहीं, इसी कीमत यानी 266.50 रुपए में ही 40 किलो वजन वाला सल्फर यूरिया गोल्ड भी लॉन्च किया गया है। ऐसे में साफ है कि ये दोनों ही उत्पाद अलग-अलग हैं, लेकिन अखिलेश यादव ने सल्फर यूरिया गोल्ड की कीमत को नीम कोटेड यूरिया बताकर भ्रम फैलाने की कोशिश की। इसका कृषि मंत्री ने खंडन किया है।

कॉन्ग्रेस ने राम मंदिर से किया किनारा, पर अयोध्या जाएँगे हिमाचल के मंत्री विक्रमादित्य सिंह: कहा- मैं हिंदू, प्राण-प्रतिष्ठा में उपस्थित रहना मेरी जिम्मेदारी

कॉन्ग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में शामिल नहीं होने का फैसला किया है। लेकिन हिमाचल प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार के मंत्री विक्रमादित्य सिंह इस अवसर पर अयोध्या में उपस्थित रहेंगे। उन्होंने कहा है कि एक हिंदू होने के नाते यह उनकी जिम्मेदारी बनती है।

विक्रमादित्य सिंह हिमाचल के लोक निर्माण विभाग के मंत्री हैं। वे पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और कॉन्ग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह के पुत्र हैं। उन्होंने बताया है कि वे प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने के लिए 17 जनवरी को अयोध्या रवाना होंगे।

विक्रमादित्य सिंह ने प्राण-प्रतिष्ठा समारोह का न्योता देने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) का आभार भी जताया है। उन्होंने कहा है, “यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है। मैं हिमाचल प्रदेश से आमंत्रित किए गए कुछ लोगों में शामिल होने पर स्वयं को भाग्यशाली मानता हूँ। मुझे और मेरे परिवार को यह सम्मान देने के लिए आरएसएस और विहिप को धन्यवाद देता हूँ।”

सिंह ने कहा, “इस ऐतिहासिक दिन का हिस्सा बनने का जीवन में एक बार मिलने वाला अवसर है। ‘देव समाज’ में विश्वास रखने वाले एक हिंदू के रूप में यह मेरी जिम्मेदारी है कि मैं इस अवसर पर मौजूद रहूँ और भगवान राम की ‘प्राण प्रतिष्ठा’ का साक्षी बनूँ।”

पीडब्ल्यूडी मंत्री सिंह ने न्योता मिलने से पहले 4 जनवरी को कहा था कि वे अपनी ‘सुविधा’ के मुताबिक राम मंदिर का दौरा करेंगे। उन्होंने था, “मैं एक हिंदू धर्मनिष्ठ परिवार से आता हूँ और मंदिर की मेरी यात्रा का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। मैंने रिकॉर्ड पर कहा है कि हमारी मान्यताओं का राजनीतिक विचारधारा से कोई लेना-देना नहीं है। ये मेरे और मेरे परिवार के लिए गहरी आस्था का विषय है। मैं निश्चित रूप से राम मंदिर जाऊँगा।”

गौरतलब है कि राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के लिए कॉन्ग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी और लोकसभा में पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी को आमंत्रित किया गया था। लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया है। पार्टी के जनरल सेक्रेटरी (कम्युनिकेशंस) जयराम रमेश ने RSS और बीजेपी पर राम मंदिर को राजनीतिक प्रोजेक्ट बनाने आरोप जड़ते हुए कहा था कि निर्माण पूरा हुए बिना राम मंदिर का उद्घाटन चुनावी फायदे के लिए किया जा रहा है।

हालाँकि इस स्टैंड को लेकर पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने विरोध जताया है। संभल के कल्किधाम पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने इस फैसले का विरोध करते हुए कहा था कि श्री राम मंदिर के निमंत्रण को ठुकराना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और आत्मघाती फ़ैसला है। वहीं गुजरात की पोरबंदर सीट से पार्टी विधायक अर्जुन मोढवाडिया ने भी इस फैसले का विरोध किया है। उन्होंने कहा था, “भगवान श्री राम आराध्य देव हैं। यह देशवासियों की आस्था और विश्वास का विषय है। कॉन्ग्रेस को ऐसे राजनीतिक निर्णय लेने से दूर रहना चाहिए था।’

होटल में हिजाब वाली महिला के साथ था हिंदू, कमरे में घुसकर पीटा-गालियाँ दी; Video किया वायरल: कर्नाटक की घटना, 2 गिरफ्तार

कर्नाटक के हवेरी जिले के हनागल इलाके में कुछ मुस्लिम युवकों ने एक होटल के कमरे में घुसकर एक मुस्लिम महिला और हिन्दू व्यक्ति पर हमला कर दिया। उनके साथ मारपीट के अलावा काफी अभद्रता की गई। उनका वीडियो बनाया गया और उन्हें होटल से बाहर खींचा गया। मुस्लिम युवकों ने यह वीडियो बाद में वायरल कर दिया।

जानकारी के अनुसार, यह घटना 7 जनवरी 2024 की है। उत्तर कन्नड़ जिले के रहने वाले हिन्दू युवक और मुस्लिम महिला इस होटल में ठहरे थे। इसकी जानकारी मिलने पर अक्कीलुर के कुछ मुस्लिम युवक होटल पहुँच गए। वायरल वीडियो में दिख रहा है कि ये हमलावर होटल जाते हैं और जिस कमरे में ये दोनों ठहरे हुए थे, उसका नम्बर रिकॉर्ड करते हैं। इसके बाद ये लोग दोनों को कमरा खोलने को कहते हुए धमकियाँ देते हैं।

कमरा खुलने पर ये कट्टरपंथी महिला और पुरुष, दोनों पर हमला कर देते हैं। महिला को एक मुस्लिम युवक इतनी बुरी तरीके से पीटता है कि वह जमीन पर गिर जाती है। इसके अलावा, हमलावर युवक मुस्लिम महिला और हिन्दू युवक को काफी भद्दी गालियाँ भी देते हैं।

इस दौरान हमलावर अपना चेहरा भी शान से दिखाते हैं। वीडियो में दिखता है कि मुस्लिम महिला पीटे जाने के बाद काफी समय तक जमीन पर बेसुध पड़ी रहती है। इसके बाद मुस्लिम युवक हिन्दू पुरुष की तरफ बढ़ते हैं और उसे मारने पीटने लगते हैं। इस दौरान हिन्दू पुरुष इनसे विनती करता है कि उसे ना मारें पीटे।

इस मामले में मुस्लिम युवक इसी बात पर हमला करते हैं कि मुस्लिम महिला एक हिन्दू पुरुष के साथ क्यों थी। इन मुस्लिम युवकों के मारपीट करने का यह वीडियो भी वायरल हो गया है। हिन्दू-मुस्लिम दम्पति पर हमला करने वाले इन मुस्लिम युवकों का नाम आफताब मकबूल अहमद चन्दनकट्टी, मदरसब मोहम्मद इसाक मन्दक्की और समीउल्लाह ललनावर है।

हमले के पीड़ितों ने पुलिस में 6 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया है। पुलिस ने इनमें से दो मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार किया है। वहीं, बाकी लोगों की गिरफ्तारी की कोशिश की जा रही है। पुलिस ने इन लोगों के खिलाफ हत्या के प्रयास, अपहरण और महिला का शीलभंग करने के प्रयास जैसी धाराओं में मामला दर्ज किया है।

इससे पहले भी मुस्लिम युवकों ने हिन्दू युवक को मारा पीटा था

यह एक सप्ताह के भीतर ऐसी दूसरी घटना है, जहाँ मुस्लिम युवकों ने बवाल काटा है। इससे पहले 7 जनवरी 2024 को कर्नाटक के बेलगावी से ऐसी ही घटना सामने आई थी। बेलगावी में लगभग 20 मुस्लिम युवकों ने एक भाई-बहन को कई घंटों तक बंधक बनाए रखा और उन्हें परेशान किया।

जानकारी के अनुसार, बेलगावी में हिजाब पहनी एक लड़की और तिलक लगाए एक लड़के पर कुछ मुस्लिम युवकों ने हमला कर दिया और उन्हें सुनसान जगह पर ले गए। इसके बाद इनके साथ मारपीट की गई। जिन भाई बहन को परेशान किया गया, उनमें से लड़की मुस्लिम और लड़का हिन्दू है। दोनों की माताएँ आपस में सगी बहनें हैं और लड़की की माँ हिन्दू, जबकि उसका पिता मुस्लिम है।

उनको साथ देखकर कट्टरपंथी मुस्लिमों ने हमला कर दिया। इस दौरान दोनों ने कई बार बताया कि वे भाई बहन हैं, फिर भी उन्हें नहीं बख्शा गया। इस हमले में लगभग 15 मुस्लिम युवक शामिल थे। पीड़िता ने बताया कि वह हमलावारों से गुहार लगाती रही, लेकिन लोगों ने उसके साथ मारपीट की और उसके फोन छीन लिए।

मुस्लिम युवकों ने मारपीट करते हुए लड़की से कहा था कि वह मुस्लिम होकर हिन्दू लड़के के साथ क्यों घूम रही है। इस मामले में अब तक 7 मुस्लिम युवक गिरफ्तार किए गए हैं। इनके नाम अयमान, हुसैन, अतीफ, सैफ अली, उमर, रेहान और अजान अली हैं। इनके ऊपर पुलिस ने हत्या के प्रयास, लूट, नुकसान पहुँचाने समेत अन्य कई धाराओं में मामला दर्ज किया है।

गौरतलब है कि पहले भी ऐसी घटनाएँ सामने आती रही हैं, जहाँ मुस्लिम युवकों ने हिन्दू लड़कों के साथ होने की वजह से मुस्लिम युवतियों पर हमला किया। इसको लेकर एक ख़ास पैटर्न भी सामने आया था।

1008 नर्मदेश्वर शिवलिंग, 21000 पुजारी… अयोध्या में सरयू किनारे ‘राम नाम महायज्ञ’, 100 कुंडों में 1100 जोड़े राम मंत्रों के साथ करेंगे हवन

अयोध्या के भव्य राम मंदिर में 22 जनवरी 2024 को भगवान रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा होगी। उससे पहले सरयू तट पर ‘राम नाम महायज्ञ’ शुरू होगा। इसमें हिस्सा लेने के लिए नेपाल से 21 हजार पुजारी आ रहे हैं।

आत्मानंद दास महात्यागी उर्फ नेपाली बाबा के नेतृत्व में होने वाले इस यज्ञ के दौरान सरयू तट पर 1008 नर्मदेश्वर शिवलिंगों की स्थापना की जाएगी। इसके लिए सरयू के किनारे 100 एकड़ में टेंट सिटी बसाया गया है। इसमें 1008 टेंट लगाए गए हैं। महायज्ञ के लिए यज्ञ मंडप भी बनाया गया है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, राम मंदिर से 2 किलोमीटर दूर सरयू नदी के रेत घाट पर टेंट सिटी बसाई गई है। इसी टेंट सिटी में महायज्ञ का आयोजन आत्मानंद दास महात्यागी उर्फ नेपाली बाबा द्वारा किया जाएगा। नेपाली बाबा अयोध्या के ही मूल निवासी हैं, लेकिन बाद में नेपाल में बस गए। वे हर साल इस महायज्ञ का आयोजन करते हैं। इसमें देश-विदेश के लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं।

नेपाली बाबा ने बताया, “मैं यह यज्ञ हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर करता हूँ। लेकिन इस साल हमने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के मद्देनजर इसे बढ़ा दिया है।” बता दें कि इस महायज्ञ का आयोजन करने वाले आत्मानंद दास महात्यागी का जन्म अयोध्या के फटिक शिला इलाके में हुआ था। वे तपस्वी नारायण दास के शिष्य हैं। आत्मानंद दास महात्यागी का दावा है कि नेपाल नरेश ने ही उनका नाम नेपाली बाबा रखा था।

जानकारी के मुताबिक, महायज्ञ समाप्त होने के बाद 1008 शिवलिंगों को पवित्र सरयू नदी में विसर्जित किया जाएगा। महायज्ञ रामायण के 24 हजार श्लोकों के जाप के साथ 17 जनवरी से हवन शुरू होगा जो 25 जनवरी तक चलेगा। हर दिन 1008 शिवलिंगों का पंचामृत से अभिषेक किया जाएगा। यज्ञशाला में बने 100 कुंडों में 1100 जोड़े राम मंत्रों के उच्चारण के साथ हवन करेंगे।

मध्य प्रदेश से आए पत्थर, नक्काशी का काम अंतिम चरण में

नर्मदेश्वर शिवलिंगों को बनाने के लिए पत्थर मध्य प्रदेश से लाए गए हैं, जो नर्मदा नदी से ही एकत्रित किए गए हैं। इन पत्थरों पर नक्काशी का काम आखिरी चरण में है। 17 जनवरी से होने वाले इस महायज्ञ कार्यक्रम के लिए तैयारियाँ अंतिम चरण में है। इस दौरान हर रोज 50 हजार से एक लाख भक्तों के लिए भोजन भी बनता रहेगा।

CIA की नकल कर साथियों से बातें करता था ISIS का आतंकी शाहनवाज, मालदीव की महिला हैंडलर के भी था संपर्क में

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने आईएसआईएस के जिन खूँखार आतंकियों- शाहनवाज आलम, अरशद वारसी और मोहम्मद रिजवान अरशद को गिरफ्तार किया है, वो आतंकी बेहद हाईप्रोफाइल तकनीकी का इस्तेमाल करके आपस में जुड़े रहते थे। यही नहीं, माइनिंग इंजीनियर की पढ़ाई करने वाले आतंकी शाहनवाज ने सीक्रेट ट्रिक्स का इस्तेमाल कर बाकी आतंकियों से संपर्क भी रखा था।

सभी आतंकी इसके लिए एक शेयर्ड आईडी और पासवर्ड के माध्यम से अपने मैसेज लिखते थे और उसे बिना भेजे (सेंड किए) सुरक्षित रख देते थे। ऐसे में दूसरा आतंकी उस आईडी-पासवर्ड का इस्तेमाल करके अपना मैसेज पा जाता था और उस मैसेज को हटाकर उसका जवाब लिख देता था। इसके कारण ये आतंकी बिना मैसेज भेजे संवाद स्थापित कर सुरक्षा एजेंसियों को चकमा दे रहे थे।

हालाँकि, अब दिल्ली पुलिस ने उनके मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को एक्सेस कर लिया है और एक पत्र को भी फिर से (रिट्राइव) प्राप्त कर लिया है। टाइम्स ग्रुप की रिपोर्ट के मुताबिक, ये आतंकी बेहद चालाकी से उन तकनीकों का इस्तेमाल करते थे, जिनका इस्तेमाल अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए और कनाडाई जासूस अपने रुसी साथियों से जानकारी प्राप्त करने के लिए करते थे।

रिपोर्ट में बताया गया है कि आईएसआईएस के ये ऑपरेटिव न्यूजीलैंड बेस्ड क्लाउड सर्विस मेगा.एनजे का इस्तेमाल इस काम के लिए करते थे। यह डेस्कटॉप और मोबाइल दोनों ही माध्यम से एक्सेस हो जाता था। इसके कारण बिना इंटरनेट प्रोटोकॉल का इस्तेमाल किए अपनी बात आगे बढ़ा देते थे। दरअसल, इंटरनेट पर कोई मैसेज भेजे बिना उसे इंटरसेप्ट नहीं किया जा सकता है।

शाहनवाज आलम ने यह भी बताया कि वह मालदीव की एक महिला हैंडलर के भी संपर्क में था। इसके अलावा उसने सीरिया और इराक के बॉर्डर पर ISIS के डिटेंशन सेंटर अल-हाउल कैंप के लिए चंदा भी भेजा था। बताते चलें कि हिंद महासागर में भारत का पड़ोसी देश मालदीव ISIS के लिए प्रमुख पनाहगाह साबित हो रहा है।

ऑपइंडिया ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि किस तरह से शाहनवाज आलम पाकिस्तान के आतंकियों के संपर्क में रहता था और भारत में आईएसआईएस के मॉड्यूल खड़े करने की कोशिश कर रहा था। इनमें आईएसआईएस का पुणे मॉड्यूल, अलीगढ़ मॉड्यूल, हैदराबाद मॉड्यूल, दिल्ली मॉड्यूल और महाराष्ट्र मॉड्यूल शामिल थे। पाकिस्तान का फरहतुल्ला इनका हैंडलर था और वो हर मॉड्यूल में अलग-अलग नाम से पहचाना जाता था।

महाराष्ट्र के पुणे भागने के बाद शानवाज को फरहतुल्ला ने ही दिल्ली और अलीगढ़ मॉड्यूल से जोड़ा था। शाहनवाज और उसके साथियों ने गुजरात के कई शहरों में रेकी की थी। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच और एनआईए की पूछताछ में आईएसआईएस के पुणे, दिल्ली और अलीगढ़ मॉड्यूल से जुड़े आतंकी शाहनवाज ने माना था कि साल 2023 में उसने गुजरात में कई जगहों का दौरा किया था। शाहनवाज बोहरा मस्जिद, दरगाह, अहमदाबाद की मजार, दरगाह और साबरमती आश्रम की तस्वीरें भी खींची थी और हमले का ब्लू प्रिंट बनाया था।

शाहनवाज ने ट्रेनिंग के लिए जगह भी देखी थी और कुछ ट्रेनिंग भी पूरी कर ली थी। यही नहीं, उसे पाकिस्तानी हैंडलर से हथियारों को जमा करने में मदद भी मिल रही थी और वो भारत में कई धमाकों को अंजाम देने के लिए आखिरी दौर में पहुँच चुके थे। संभव है कि अगर कुछ समय ये आतंकवादी भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के हाथ नहीं लगते तो वो अब तक कई धमाके भी कर चुके होते।

गौरतलब है कि पुणे पुलिस ने जुलाई 2023 में चोरी की बाइक के साथ 2 लोगों को पकड़ा था। इसमें शाहनवाज भी था। शुरुआत में पुलिस ने दोनों को वाहन चोर समझा, पर जाँच में उनके ISIS नेटवर्क से जुड़े होने की बात सामने आई। इस बीच शाहनवाज पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया था। इसके बाद इस साल अगस्त माह में पुणे के कोंढवा स्थित एक घर में दबिश डाली। 

दबिश के दौरान बम बनाने और ब्लास्ट करने की ट्रेनिंग लेते हुए 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इस दौरान 3 अन्य संदिग्ध फरार हो गए थे। फरार होने वालों के नाम रिज़वान अब्दुल हाजी, अब्दुल्लाह फ़ैयाज़ शेख और तलहा लियाकत खान है। इन तीनों के साथ शाहनवाज पर भी 3-3 लाख रुपए का इनाम रखा गया था। इसके बाद शाहनवाज को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एनआईए के साथ मिलकर गिरफ्तार किया था।

महुआ मोइत्रा के ‘कैश फॉर क्वेरी’ केस में CBI ने लोकसभा सचिवालय से साधा संपर्क, TMC सांसद पर FIR के लिए माँगी रिपोर्ट

‘कैश-फॉर-क्वेरी’ मामले में तृणमूल कॉन्ग्रेस की नेता महुआ मोइत्रा की परेशानी बढ़ सकती है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की तैयारी कर रही है। इस कड़ी में सीबीआई ने मोइत्रा के खिलाफ आचार समिति (Ethics Committee) की रिपोर्ट हासिल करने के लिए लोकसभा सचिवालय से संपर्क साधा है।

बताते चलें कि आचार समिति ने ही ‘कैश-फॉर-क्वेरी’ मामले में टीएमसी सांसद रहीं मोहुआ को निष्कासित करने की सिफारिश की थी। वहीं, सीबीआई लोकपाल की भेजी गई एक शिकायत के आधार पर महुआ के खिलाफ केस की जाँच कर रही है। आचार समिति की सिफारिश में शिकायतकर्ता वकील जयअनंत देहाद्राई और मोइत्रा सहित अन्य के बयान शामिल हैं।

आचार समिति की सिफारिशों के बाद ही महुआ को अपनी सांसदी गँवानी पड़ी थी। कहा जा रहा है कि इस मामले में संभावित मनी ट्रेल पर अलग से नजर रखने के लिए सीबीआई इस रिपोर्ट की स्टडी कर सकती है। रिपोर्ट में कारोबारी दर्शन हीरानंदानी से टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा को मिले महँगे उपहारों और अन्य वस्तुओं का जिक्र है। इस ही कई लोगों के बयान भी हैं।

वहीं, लोकसभा सचिवालय के अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने अभी तक सीबीआई को रिपोर्ट मुहैया नहीं कराई है। एक अधिकारी ने कहा, “सीबीआई ने सचिवालय को पत्र लिखकर एथिक्स कमेटी की रिपोर्ट की एक प्रति माँगी है। हम इस पर गौर करेंगे। हमने अनुरोध के संबंध में अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है।”

बताते चलें कि आचार समिति पहले ही महुआ के खिलाफ आरोपों की जाँच की सिफारिश कर चुकी है। इस हालात में जब लोकसभा सचिवालय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17 ए के तहत जरूरी मंजूरी हासिल कर एथिक्स कमिटी की रिपोर्ट सीबीआई को देती है तो CBI लोकपाल की मंजूरी के बगैर सीधे मोइत्रा पर FIR दर्ज कर सकती है।

सीबीआई भी अपनी जाँच रिपोर्ट लोकपाल को सौंपेगी और अगर लोकपाल एजेंसी को आपराधिक केस दर्ज करने का निर्देश देती है तो वह एफआईआर दर्ज कर सकती है। बताते चलें कि मोइत्रा के खिलाफ आचार समिति की रिपोर्ट 8 दिसंबर 2023 को लोकसभा में पेश की गई थी। स्पीकर ओम बिड़ला ने इस पर बहस के बाद जानकारी दी कि समिति ने मोइत्रा को कैश फॉर क्वेरी मामले में दोषी पाया है।

हालाँकि, टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा अपने खिलाफ लगे आरोपों को सिरे से नकारती आ रही हैं। दरअसल, आचार समिति ने बीजेपी के सांसद निशिकांत दुबे और सुप्रीम कोर्ट के वकील एवं मोइत्रा के पूर्व पार्टनर जय अनंत देहाद्राई की शिकायत के बाद महुआ को निष्कासित करने की सिफारिश की थी।

टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने संसद में सवाल पूछने के बदले में कारोबारी दर्शन हीरानंदानी से पैसे और महँगे गिफ्ट सहित कई तरह के फायदे लिए थे। हीरानंदानी अडानी समूह के प्रतिद्वंद्वी कारोबारी हैं और उनके इशारे पर महुआ ने संसद में कई सवाल पूछे थे। महुआ ने लोकसभा के अपने लॉग-इन क्रेडेंशियल भी हीरानंदानी से शेयर किए थे।

जय अनंत देहाद्राई ने महुआ पर यह भी आरोप लगाया था कि वो उन पर और पूर्व प्रेमी सुहान मुखर्जी के खिलाफ निगरानी कर रही थीं। इसकी शिकायत उन्होंने CBI में दर्ज कराई। देहाद्राई ने 2 जनवरी 2023 को आरोप लगाया था कि TMC नेता महुआ मोइत्रा पश्चिम बंगाल पुलिस में अपने संपर्कों की वजह से वो उनकी अवैध निगरानी कर रही थीं।

‘मुस्लिम बन गए इसका मतलब ये नहीं हमारे मामले में बोलो’ : स्मृति ईरानी के मदीना जाने पर कट्टरपंथी बक रहे थे गाली, सऊदी वालों ने करारा जवाब दिया

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी मदीना गईं थीं। उनके साथ गैर-मुस्लिमों का प्रतिनिधिमंडल था जिसमें कश्मीरी हिंदू IRS अधिकारी निरुपमा कोतरू भी शामिल थे। इस प्रतिनिधिमंडल ने वहाँ हज तैयारियों का जायजा लिया। सऊदी के नेताओं से बात की। जेद्दाह में उमराह कॉन्फ्रेंस को अटेंड किया।

इस दौरान उनकी एक फोटो वायरल हुई जिसमें वह अल-मस्जिद अल-नबावी के सामने सामान्य परिधान साड़ी में खड़ीं थीं। उनकी फोटोज देख पाकिस्तान, बांग्लादेश, और भारत के इस्लामी कट्टरपंथी बिगड़ गए और अपशब्द कहने लगे। लेकिन, उन्हें सऊदी वालों से ही करारा जवाब मिल गया।

पाकिस्तानी मीडिया चिढ़ा

भारतीय प्रतिनिधिमंडल की फोटो देख पाकिस्तानी न्यूज पोर्टल ‘द न्यूज’ ने तो इसे हिंदू प्रतिनिधिमंडल बताया। वह लोग इस बात से भी नाराज दिखे कि आखिर भारतीय मंत्री मुरलीधरण ने मस्जिद के सामने धोती और भगवा कुर्ता क्यों पहना था और ईरानी ने अपना सिर क्यों नहीं ढका था।

कुछ लोगों ने स्मृति ईरानी को ‘काफिर खातून और काफिर औरत’ कहा। इसी क्रम में उजैर नाम के इस्लामी कट्टरपंथी ने सऊदी वालों को बेवकूफ बताया और कहा कि आखिर किस बिनाह पर मदीना में गैर मुस्लिमों को एंट्री दी गई।

यूजर ने कहा स्मृति ईरानी मदीना में इसलिए आईं ताकि वो और महिलाओं के सिर से स्कॉर्फ को हटवा सकें। यूजर ने एक पोस्ट में ये भी बद्दुआ की थी कि जो बुद्धिजीवी सऊदी के इस निर्णय का समर्थन कर रहे हैं उनपर भी अल्लाह का कहर बरसे।

इस पर इससे पहले कोई भारतीय जवाब देता, सऊदी यूजर ने उन्हें लताड़ दिया। देख सकते हैं पोस्ट में लिखा है- “हमारी जमीन हमारी मर्जी। सिर्फ इसलिए कि तुम्हारे पूर्वज इस्लाम में परिवर्तित हो गए थे और तुम्हें अरबी नाम मिल गया इसका मतलब ये नहीं कि तुम इसमें अपनी ज्ञान दो। तुम अप्रांसगिक हो और हम लोग एक जैसे नहीं हैं।”

दिलचस्प बात ये है कि सिर्फ सऊदी के मुसलमान ही इन कट्टरपंथियों को नहीं गाली देते, हाल में ईरानी मुस्लिम भी इनपर पारसी धर्म का मखौल उड़ाने के लिए बरसे थे। एक यूजर ने पाकिस्तान में डॉल्फिन की रेप वाली खबर दिखाकर उन्हें कहा गया था- “तुम चुप रहो, तुम पाकिस्तानी हो। तुम्हारी राय अप्रासंगिक है।”

कॉन्ग्रेस की चंदाखोरी में फिर निकला झोल: पार्टी के पोस्टर में शेयर किया ‘डोनेट फॉर देश’ का फर्जी लिंक, पैसा गया दूसरों के खातों में

कॉन्ग्रेस ने एक बार फिर अपने चंदा माँगने के अभियान ‘डोनेट फॉर देश’ के जरिए खुद की फजीहत करवा ली है। इस बार मूर्खता का स्तर कुछ ज्यादा बड़ा है। कॉन्ग्रेस ने चंदा माँगने के अभियान के लिए एक फर्जी वेबसाइट का जोर-शोर से प्रचार किया, जो कि चंदा माँगने के लिए बनाई गई इसकी आधिकारिक वेबसाइट की तरह ही दिखती है। हालाँकि, इस पर भेजा गया पैसा पार्टी को ना मिलकर किसी और के पास गया।

कॉन्ग्रेस ने बुधवार (10 जनवरी 2024) को राहुल गाँधी की आगामी ‘भारत न्याय यात्रा’ के लिए एक स्पेशल पैम्फलेट जारी किया। इस पैम्फलेट में कॉन्ग्रेस के चंदा एकत्रीकरण अभियान ‘डोनेट फॉर देश’ की वेबसाइट और चंदा देने के लिए QR कोड भी दिया गया था। वह बात अलग है कि वेबसाइट और QR कोड, दोनों ही गलत थे।

कॉन्ग्रेस के आधिकारिक पोस्टर में दिया गया फर्जी लिंक
कॉन्ग्रेस के आधिकारिक पोस्टर में दिया गया फर्जी लिंक

डोनेट फॉर देश अभियान की आधिकारिक वेबसाइट Donateinc.in है, लेकिन यात्रा को लेकर जारी पैम्फलेट में Donateinc.co.in प्रिंट किया गया था। यही हाल QR कोड का भी था। इसे संयोग ही कहा जाएगा कि गलत वेबसाइट Donateinc.co.in खोलने पर एक वेबसाइट खुलती है जहाँ कॉन्ग्रेस के इस चंदा लेने के अभियान की आधिकारिक वेबसाइट की तरह ही सभी जानकारी और तस्वीरें उसी स्टाइल में लिखी हुई हैं।

कॉन्ग्रेस चंदा फर्जी वेबसाइट
ऐसी दिखती है फर्जी वेबसाइट

यह साफ है कि यह फर्जी वेबसाइट कॉन्ग्रेस को चन्दा देने वाले लोगों को चूना लगाने के उद्देश्य से बनाई गई है। अगर कोई व्यक्ति सतर्क नहीं है और इस पर पैसा डालता है तो उसे लगेगा कि यह पैसा कॉन्ग्रेस को जा रहा है, लेकिन असल में यह पैसा अनजान लोगों को जाएगा। यह फर्जी वेबसाइट अभी भी (रिपोर्ट के प्रकाशित होने तक) UPI (फ़ोनपे, गूगल पे, भीम, पेटीएम) के जरिए चंदा ले रही है।

चूँकि यह QR कोड और url कॉन्ग्रेस की आधिकारिक पैम्फलेट में है, इसलिए लोगों को इसके फर्जी होने का शक नहीं होगा। ऊपर से इस वेबसाइट ने चंदा इकट्ठा करने के लिए बनाई गई वेबसाइट से सब कुछ कॉपी कर लिया है। जो भी व्यक्ति इसके जरिए कॉन्ग्रेस को पैसा देना चाह रहा है उसे अधिक सतर्क रहना होगा, ताकि वह जान सके कि पैसा कॉन्ग्रेस को नहीं बल्कि कहीं और ही जा रहा है।

कॉन्ग्रेस को पैसा देने के लिए इस लिंक को खोलने के बाद गूगल पे पर भुगतान वाले पेज पर ऊपर की तरफ इंडियन नेशनल कॉन्ग्रेस नाम लिखा दिखेगा। हालाँकि, नीचे की तरफ इस पेज में बैंकिंग नाम की जगह पर ‘रोज कैश’ नाम लिखा दिखता है। इससे स्पष्ट होता है कि यह एक घोटाला है।

फर्जी लिंक खोलने पर यह जानकारी आती है
फर्जी लिंक खोलने पर यह जानकारी आती है

भले ही गहन जाँच के बाद यह पकड़ में आ जाता हो, लेकिन हर व्यक्ति इस मामले में सतर्कता नहीं बरत सकता और ना ही इस गड़बड़ी को पकड़ सकता है। इसके पीछे वजह यह है कि वह कॉन्ग्रेस पार्टी द्वारा दिए गए एक आधिकारिक दस्तावेज़ के क्यूआर कोड को स्कैन करने के बाद ही वह वेबसाइट पर पहुँचा है। रिपोर्ट के अनुसार, इसके कारण कॉन्ग्रेस को अब तक लाखों रुपए का चूना लग चुका है।

गूगल में खोजने पर पता चलता है कि रोज कैश नाम के कुछ एप हैं, जो वादा करते हैं कि जो भी इन एप को डाउनलोड करके साइनअप करेगा और कुछ एक्टिविटी करेगा तो उन्हें पैसा मिलेगा। हालाँकि, स्पष्ट तौर पर यह नहीं कहा जा सकता कि कॉन्ग्रेस को चूना लगाने के लिए बनाई गई है। हालाँकि, यह जरूर कहा जा सकता है कि यह एक घोटाला है और कॉन्ग्रेस को चूना लग चुका है।

इस पूरे मामले में यह बात गौर करने वाली है कि कॉन्ग्रेस ने इस पूरे गड़बड़झाले पर कोई विशेष आपत्ति नहीं दर्ज करवाई है, जबकि इसमें बड़ी संख्या में लोग कॉन्ग्रेस को पैसा देने के नाम पर मूर्ख बन रहे हैं। कॉन्ग्रेस ने जब यह अभियान चालू किया था तो इसके लिए Donatefordesh.com और Doantefordesh.org वेबसाइट डोमेन को नहीं खरीदा था। इसको लेकर कॉन्ग्रेस ने खूब हो-हल्ला किया था।

यह बात अलग है कि पिछली बार कॉन्ग्रेस के किसी कार्यकर्ता के साथ धोखाधड़ी नहीं हो रही थी। ऐसा इसलिए था, क्योंकि यह लिंक खोलने पर यूजर दूसरी वेबसाइट पर पहुँचा जाता था, जहाँ कॉन्ग्रेस से सम्बंधित कुछ भी नहीं लिखा होता था। हालाँकि, इस बार के घोटाले में जो वेबसाइट खुलती है, वह कॉन्ग्रेस की हू-ब-हू वेबसाइट जैसी ही है।

इस फर्जी वेबसाइट के बारे में सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध जानकारी बताती है कि यह वेबसाइट राजस्थान के किसी व्यक्ति द्वारा 19 दिसम्बर 2023 को बुक की गई थी। इसके सिर्फ एक दिन पहले यानी 18 दिसम्बर 2023 को डोनेट फॉर देश को कॉन्ग्रेस ने आधिकारिक रूप से शुरू किया था।

कॉन्ग्रेस के नाम पर लोगों के साथ धोखाधड़ी हो रही है, इसके बावजूद कॉन्ग्रेस ने कभी भी यह नहीं कहा कि वह इसके खिलाफ पुलिस में मुकदमा दर्ज करवाएगी। यह भी पता नहीं चल सका है कि कॉन्ग्रेस के आधिकारिक पोस्टर में यह फर्जी वेबसाइट कैसे आई।

यह रिपोर्ट अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।