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‘मालदीव में मत करो फिल्म शूटिंग, भारत में स्थान खोजो’: FWICE ने दिखाई देश के साथ एकजुटता, पर्यटन को बढ़ावा देने की अपील

मालदीव के मंत्रियों द्वारा भारत पर आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने के कारण उपजा बवाल अब मालदीव पर भारी पड़ गया। बड़ी-बड़ी हस्तियों और कंपनियों ने तो पहले ही उसे बॉयकॉट करने का निर्णय ले लिया था। लेकिन अब फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एंप्लॉयज (FWICE) ने भी एक प्रेस रिलीज जारी करके मालदीव में शूटिंग करने का विरोध किया है और अपील की है कि भारत में ही स्थान देखकर वहाँ शूट कर लिया जाए।

10 जनवरी 2024 को FWICE ने प्रेस रिलीज जारी कर सभी फिल्म प्रोड्यूसर से मालदीव में अपनी शूटिंग बुकिंग रद्द करने की अपील की। उन्होंने इस रिलीज में निर्माताओं से फिल्म शूटिंग के लिए भारत में समान स्थानों को चुनने और भारत में पर्यटन को बढ़ावा देने का आग्रह किया।

FWICE ने अपनी रिलीज में बताया कि वो ये फैसला मालदीव के तीन मंत्रियों द्वारा भारत के खिलाफ जारी की गई अपमानजनक टिप्पणी के कारण ले रहे हैं। FWICE ने विश्व स्तर पर सम्मानित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गई ‘गैरजिम्मेदाराना’ और ‘घटिया’ टिप्पणियों की भी निंदा की है।

फ्वाइस ने सभी फिल्म निर्माताओं से शूटिंग के लिए वैकल्पिक स्थान चुनने की अपील करते हुए कहा, “देश और इसकी व्यापक संस्कृति के साथ एकजुटता दिखाते हुए, FWICE के सदस्यों ने अपने शूटिंग स्थानों के लिए मालदीव का बहिष्कार करने का फैसला किया है। इसके बजाय, FWICE अपने सदस्यों से अपने शूटिंग उद्देश्य के लिए भारत में समान स्थानों को चुनने और भारत में पर्यटन के विकास में योगदान देने की अपील करता है।

रिलीज में आगे लिखा गया, “भारत और दुनियाभर के सभी निर्माताओं को सलाह दी जाती है कि वे मालदीव में किसी भी शूटिंग या प्रोडक्शन से जुडी योजनाएँ न बनाएँ। हम सभी अपने प्रधानमंत्री और अपने राष्ट्र के प्रति पुरजोर समर्थन में खड़े हैं।” इस रिलीज पर फ्वाइस के मुख्य सलाकार अशोक पंडित, अध्यक्ष बीएन तिवारी, जनरल सेक्रेट्री अशोक दुबे और कोषाध्यक्ष गंगेश्वर श्रीवास्तव का भी नाम है।

बता दें कि मालदीव विवाद के बाद से अब तक तमाम लोग मालदीव का बॉयकॉट कर चुके हैं। भारत की बड़ी-बड़ी हस्तियाँ जो वहाँ छुट्टियाँ मनाने जाती थीं, वो भी खुलकर भारतीय द्वीपों का प्रचार कर रही हैं। यहाँ तक इजरायल ने भी खुले में भारत को सपोर्ट किया है। दूसरी ओर लगातार मालदीव की फ्लाइट बुकिंग, होटल बुकिंग कैंसिल होने की खबरें हैं।

‘ये आत्मघाती फैसला’: कॉन्ग्रेस ने ठुकराया राम मंदिर का न्योता तो बोले प्रमोद कृष्णम, गुजरात के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने कहा – राम हम सबके आराध्य देव

कॉन्ग्रेस पार्टी ने अयोध्या में निर्माणाधीन भव्य राम मंदिर के गर्भगृह में 22 जनवरी, 2024 को होने वाली भगवान रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम के लिए मिला न्योता ठुकरा दिया है। INC के जनरल सेक्रेटरी (कम्युनिकेशंस) जयराम रमेश ने एक बयान जारी कर के आरोप लगाया कि RSS और भाजपा ने राम मंदिर को राजनीतिक परियोजना बना दिया है, साथ ही निर्माण पूरा हुए बिना राम मंदिर का उद्घाटन चुनावी फायदे के लिए किया जा रहा है।

उन्होंने लिखा कि कॉन्ग्रेस की संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गाँधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष अधीर रंजन चौधरी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा का न्योता मिला था, लेकिन ये सभी नेता इस कार्यक्रम में उपस्थिति नहीं दर्ज कराएँगे। अब कॉन्ग्रेस के ही वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी के इस कदम का विरोध करना शुरू कर दिया है। संभल स्थित कल्किधाम पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने इस फैसले का विरोध किया है।

उन्होंने कहा कि श्री राम मंदिर के निमंत्रण को ठुकराना बेहद दुर्भाग्य पूर्ण और आत्मघाती फ़ैसला है। उन्होंने कहा कि आज उनका दिल टूट गया। वहीं गुजरात विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष, राज्य में कॉन्ग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, पार्टी के मीडिया पैनलिस्ट एवं पोरबंदर से विधायक अर्जुन मोधवाडिया ने भी इस फैसले का विरोध किया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भगवान श्री राम आराध्य देव हैं, यह देशवासियों की आस्था और विश्वास का विषय है।

अर्जुन मोधवाडिया ने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी को ऐसे राजनीतिक निर्णय लेने से दूर रहना चाहिए था। जहाँ भारत ही नहीं बल्कि 160 देशों में राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा को लेकर तैयारी चल रही है, ऐसे समय में भारत में यहाँ की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी द्वारा इस तरह का व्यवहार किए जाने से लोग हतप्रभ हैं। अमेरिका में कार रैलियाँ निकल रही है, पेरिस में ‘राम रथ यात्रा’ निकल रही है और इस्लामी मुल्कों में भी आयोजन के लाइव प्रसारण की तैयारी है।

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा है कि कॉन्ग्रेस पार्टी का प्रभु श्री राम विरोधी चेहरा राष्ट्र के सम्मुख प्रस्तुत हो चुका है। इंडी एलायंस ने कॉन्ग्रेस के नेतृत्व में बार-बार सनातन धर्म का अनादर किया है। अब उनके नेताओं द्वारा प्राण-प्रतिष्ठा के पुण्य आमंत्रण को ठुकराना उनके सनातन विरोधी सोच को दर्शाता है। 10,000 से भी अधिक VIP अतिथि राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में पहुँच रहे हैं, जिनमें देश भर के नेता, सेलेब्स और साधु-संत शामिल हैं।

बिट्टू बजरंगी के घर पहुँचे मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, गोरक्षक के भाई को जला दिया गया था जिंदा: एक माह इलाज के बाद हुई थी महेश पांचाल की मौत

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर बुधवार (10 जनवरी 2024) को गौसेवक बिट्टू बजरंगी के घर फरीदाबाद पहुँचे। उन्होंने बिट्टू बजरंगी के भाई महेश पांचाल को कुछ हमलावरों ने ज्वलनशील पदार्थ डालकर जिंदा जला दिया था। करीब एक माह तक जिंदगी के लिए जूझने के बाद पांचाल की दिल्ली के AIIMS में मौत हो गई थी। सीएम खट्टर ने बिट्टू बजरंगी को ढाँढस बंधाया और महेश के हत्यारों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का आश्वासन दिया।

सीएम खट्टर ने कहा- हत्यारे बचेंगे नहीं

बिट्टू बजरंगी के घर पहुँचे मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने उनके भाई महेश की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित करके श्रद्धांजलि दी। उन्होंने एक्स पर लिखा, “श्री बिट्टू बजरंगी जी के फरीदाबाद स्थित निवास पर जाकर उनके भाई स्वर्गीय श्री महेश जी के निधन पर आत्मीय संवेदनाएँ प्रकट की। इस दुःख की घड़ी में शोकाकुल परिवारजनों का ढाढ़स बँधाया और ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। ॐ शांति!!”

बताते चलें कि 13 दिसम्बर 2023 को बिट्टू बजरंगी के भाई महेश को जान से मारने का प्रयास किया गया था। हमलावरों ने महेश के ऊपर फरीदाबाद की दाबुआ कॉलोनी में थिनर डाल कर आग लगा दी थी। महेश को अस्पताल ले जाया गया था, जहाँ से उन्हें दिल्ली रेफर कर दिया गया था। उनका दिल्ली के AIIMS में इलाज चल रहा था। करीब एक माह तक जिंदगी के लिए जूझते रहे महेश की 8 दिसंबर को मौत हो गई थी।

महेश का शव जब फरीदाबाद पहुँचा तो लोग आक्रोशित हो गए थे। आक्रोशित लोगों ने बल्लभगढ़-सोहना रोड को जाम कर दिया और आरोपितों की तुरंत गिरफ्तारी की माँग की थी। इस दौरान लोगों ने ‘जय श्रीराम’, ‘महेश के हत्यारों को फाँसी दो’, ‘महेश हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं’ और ‘मुस्लिम मरे तो लिंचिंग हिंदू मरे तो मौन है, पूछ सको तो पूछ लो ये प्रशासन कौन है’ के नारे लगाए थे।

इस मामले में फेक न्यूज फैला रहा था जुबैर

इसको लेकर फरीदाबाद पुलिस के पास मामला दर्ज करवाया गया था, जिसकी जाँच हरियाणा पुलिस की SIT कर रही है। इसको लेकर 22 दिसम्बर को ‘हिन्दुतान टाइम्स’ में लीना धनखड़ नाम की एक पत्रकार ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की। खबर में लिखा था कि फरीदाबाद पुलिस ने कहा है कि बिट्टू बजरंगी के भाई अलाव में गिरकर जले थे। उनकी हत्या के प्रयास के कोई सबूत नहीं हैं।

हालाँकि, ऑपइंडिया से बातचीत में पुलिस ने ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की इस खबर को नकार दिया था। फरीदाबाद के ACP ने इस खबर के बारे में बताए जाने पर पूछा कि आखिर पुलिस में किसने इस केस को फेक बता दिया? उन्होंने कहा कि ये बात ठीक है कि अभी इस मामले में आरोपित के खिलाफ सबूत नहीं मिले हैं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि केस फर्जी होने की बात कही गई है। उन्होंने इसकी पुष्टि की थी कि बिट्टू बजरंगी के भाई जल गए हैं।

इसके बाद बिट्टू बजरंगी अपने भाई की हत्या के प्रयास को झूठा बताकर फेक न्यूज फैलाने के आऱोप में ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी थी। बिट्टू बजरंगी ने कहा था कि जुबैर ने उनके और उनके भाई के बारे में पहले भी अफवाहें फैलाई थी। इस बार उनके झूठी मीडिया रिपोर्ट के आधार पर इस घिनौनी कार्रवाई को अंजाम दिया, जबकि उनका भाई जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा था।

रावण ने ठुकराया हश्र हम जानते हैं, कॉन्ग्रेस ने ठुकराया हश्र हम देखेंगे

कॉन्ग्रेस पार्टी का प्रभु श्री राम विरोधी चेहरा राष्ट्र के सम्मुख प्रस्तुत हो चुका है। इंडी एलायंस ने कॉन्ग्रेस के नेतृत्व में बार-बार सनातन धर्म का अनादर किया है। अब उनके नेताओं द्वारा प्राण-प्रतिष्ठा के पुण्य आमंत्रण को ठुकराना उनके सनातन विरोधी सोच को दर्शाता है।

यह कहना है कि मोदी सरकार की मंत्री स्मृति ईरानी का। उनका यह बयान 22 जनवरी 2024 की प्राण-प्रतिष्ठा समारोह का निमंत्रण कॉन्ग्रेस की ओर से ठुकराने के बाद आया है।

बौद्धिक जुगाली करने वाले चाहें तो इसे एक कॉन्ग्रेस विरोधी नेता की कुंठा बताकर खारिज कर सकते हैं। लेकिन उन सवालों का क्या जो कॉन्ग्रेस के भीतर से उठ रहे हैं। कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम कॉन्ग्रेस के ही हैं। उन्होंने पार्टी के इस फैसले पर अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा है- श्री राम मंदिर के ‘निमंत्रण’ को ठुकराना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और आत्मघाती फैसला है। आज दिल टूट गया।

जुगालीबाजों की पत्तलचाटुकार औलादें पार्टी नेतृत्व के साथ आचार्य प्रमोद कृष्णम के हालिया संबंधों का उल्लेख कर उन्हें ‘नाराज फूफा’ बताकर उनकी चिंताओं को भी खारिज कर सकते हैं। अर्जुन मोढवाडिया गुजरात में कॉन्ग्रेस के विधायक हैं। राज्य के पार्टी अध्यक्ष रह चुके हैं। विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता रहे हैं। पार्टी के प्रवक्ता हैं। उन्होंने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा है, “भगवान श्री राम आराध्य देव हैं। यह देशवासियों की आस्था और विश्वास का विषय है। कॉन्ग्रेस को ऐसे राजनीतिक निर्णय लेने से दूर रहना चाहिए था।’

असल में कॉन्ग्रेस का यह फैसला आरोप-प्रत्यारोप वाली सामान्य राजनीतिक शब्दावली तक ही सीमित नहीं है। अपने ही कुछ नेताओं की नाराजगी का जोखिम ही इसमें सिमटा हुआ नहीं है। यह उस पार्टी के लिए खुद की ही कब्र खोदने जैसा है जो पहले ‘भारत जोड़ो यात्रा’ और अब ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के जरिए भारत की राजनीति में अपने लिए फिर से जमीन बनाने की कोशिश में है। जो पिछले कई सालों से वजूद बचाने के लिए संघर्ष कर रही है। जिसके सामने दो ही विकल्प हैं। पहला, इस संकट से निजात पाने का कोई तरीका तत्काल ढूँढ़ना। दूसरा, इतिहास के पन्नों में समा जाना। ऐसा लगता है कि देश की सबसे पुरानी पार्टी ने अपने लिए दूसरा विकल्प ही चुनकर रखा है।

मोदी सरकार में यह दूसरा मौका है जिसने कॉन्ग्रेस को पुराने पापों से मुक्ति पाने का अवसर प्रदान किया है। लेकिन कॉन्ग्रेस ने दोनों ही मौकों को बढ़-चढ़कर गँवाया है। कॉन्ग्रेस चाहती तो 370 हटाए जाने के बाद कश्मीर पर जवाहर लाल नेहरू के किए भूलों का पिंडदान कर सकती थी। पर उसने तुष्टिकरण की राजनीति के लिए उस समय भी राष्ट्रहित को दरकिनार कर अपना पिंडदान करने का विकल्प चुना था।

अब रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के निमंत्रण ने कॉन्ग्रेस को अयोध्या पर नेहरू से लेकर सोनिया गाँधी तक किए गए पापों से मुक्ति का एक झटके में अवसर उपलब्ध कराया था। लेकिन उसने राम मंदिर को ‘हिंदुओं का नहीं, RSS/BJP का इवेंट, उनका राजनीतिक प्रोजेक्ट’ बताकर अपने लिए उन्हीं पापों के साथ दफन होने का विकल्प चुना है।

कॉन्ग्रेस ने इस मामले में वैसा ही रवैया दिखाया है, जैसा त्रेता में रावण ने दिखाया था। समुद्र पार कर जब भगवान श्रीराम ने अपनी सेना के साथ लंका के बाहर पड़ाव डाला था, तब उन्होंने भी अंगद को भेजकर रावण को पाप से मुक्ति का अवसर प्रदान किया था। इसी तरह यह जानते हुए भी कि नेहरू अयोध्या से रामलला की मूर्ति को हटवाना चाहते थे, कॉन्ग्रेस की शह पर वामपंथी इतिहासकारों ने अयोध्या को लेकर प्रपंच रचे, जिस सरकार को सोनिया गाँधी पर्दे के पीछे से हाँक रही थी उसने कोर्ट में हलफनामा देकर राम के अस्तित्व को नकार दिया था, कॉन्ग्रेस के एक ही नेता ने वकील का चोगा पहनकर रामजन्मभूमि पर फैसले को यह कहकर लटकाने की कोशिश की चुनाव होने हैं, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने फिर भी निमंत्रण भेजकर कॉन्ग्रेस को इस पुण्य क्षण का साक्षी बनने और पाप से मुक्ति का अवसर दिया था।

कॉन्ग्रेस नेताओं को निमंत्रण भेजना राम की मर्यादा का पालन करना है। हिंदुओं ने अपनी ओर से हिंदू घृणा से सनी पार्टी के साथ भी इस मर्यादा का पालन किया। लेकिन कॉन्ग्रेस का अहंकार देखिए, उसने इसमें भी राजनीति दे​खी, ठीक वैसे ही जैसे रावण ने प्रभु श्रीराम में सामान्य वनवासी देखा था।

इस भूल की कीमत रावण ने केवल अपने नाश से ही नहीं चुकाई। अपने बंधु-बांधवों के नाश से ही नहीं चुकाई। इसकी कीमत आज भी रावण हर साल दहन होकर चुकाता है। कॉन्ग्रेस ने भी अपने लिए वही रास्ता चुना है।

गोस्वामी तुलसीदास जानते थे कि अहंकार और सनातन से घृणा करने वाले हर समय में होंगे। इसलिए वे लिखकर गए हैं- सुनहु भरत भावी प्रबल बिलखि कहहु मुनिनाथ, हानि लाभ जीवन मरन जस अपजस विधि हाथ। विधाता ने रावण को अवसर दिया। कौरवों को भी। आज कॉन्ग्रेस को भी। लेकिन कॉन्ग्रेस ने अपने लिए वही चुना है जो विधाता ने उसके लिए लिख रखा है। हमारी पीढ़ियाँ इनका भी हश्र देखेंगी। फैज के शब्दों में कहें तो लाजिम है कि हम भी देखेंगे।

मणिपुर में कुकी समूह की अनुसूचित जनजाति स्टेटस पर सवाल: सीएम बीरेन सिंह समीक्षा के लिए बनाएँगे कमिटी, मैतेई बोले- ये शरणार्थी हैं

मणिपुर में मैतेई समूह को अनुसूचित जनजाति (ST) में शामिल करने के निर्णय का कुकी समुदाय ने विरोध किया था और राज्य में हिंसा भड़क उठी थी। अब राज्य सरकार ने कुकी को दी गई अनुसूचित जनजाति की स्टेटस पर विचार करना शुरू कर दिया है और इसके लिए एक कमिटी बनाई है। मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने मंगलवार (9 जनवरी 2024) को कहा कि राज्य के अनुसूचित जनजाति की सूची से कुकी समुदाय को हटाने के प्रस्ताव पर सर्व-जनजाति समिति निर्णय लेगी।

मुख्यमंत्री का यह बयान केंद्र सरकार द्वारा राज्य सरकार से कुकी समुदाय को अनुसूचित जनजाति की सूची से हटाने के प्रस्ताव पर विचार करने के अनुरोध के बाद आया है। इससे पहले रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) के राष्ट्रीय सचिव महेश्वर थौनाओजाम ने माँग की थी कि केंद्र सरकार सही ढंग से निर्धारित करे कि मणिपुर की अनुसूचित जनजातियों की सूची में किसे होना चाहिए। उन्होंने मैतेई लोगों को सूची में शामिल करने का मामला भी उठाया।

थौनाओजम के प्रतिनिधित्व में 13 दिसंबर 2023 को इस बाबत माँग पत्र भेजा गया था। इसके बाद जनजातीय मामलों के मंत्रालय ने 26 दिसंबर 2023 को मणिपुर सरकार के जनजातीय एवं पहाड़ी मामलों के विभाग को इस बारे में पत्र भेजा और कहा कि सूची में से किसी को हटाने या शामिल करने के लिए राज्य सरकार की सिफारिश की जरूरत होगी। इसको देखते हुए अब राज्य सरकार ने कमेटी बनाने का फैसला लिया है। यह कमिटी निर्णय करेगी कि कुकी को ST वर्ग में रखना चाहिए या नहीं।

महेश्वर थौनाओजाम ने कहा कि यह एक विषम स्थिति है कि कुकियों को मणिपुर में एसटी का दर्जा प्राप्त है, जबकि मैतेइयों को नहीं। थौनाओजम ने कहा कि भारत की पूर्ववर्ती ब्रिटिश सरकार के रिकॉर्ड, ऐतिहासिक आँकड़े और चेथारोन खुम्पाबा राजपरिवार के रिकॉर्ड उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा, “रॉयल क्रॉनिकल ऑफ द किंग्स ऑफ मणिपुर के हिसाब से मणिपुर में रहने वाले कुकी सभी शरणार्थी/प्रवासी हैं। दूसरी ओर मैतेई लोग मणिपुर की मूल जनजातियों के वंशज हैं।”

इस मामले में मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने मंगलवार को कहा कि राज्य सरकार समिति की सिफारिश मिलने के बाद इस मामले पर अपना रूख स्पष्ट करेगी। उन्होंने कहा, “वे (कुकी समुदाय) मणिपुर की (अनुसूचित जनजाति) सूची में शामिल हैं, लेकिन उन्हें कैसे शामिल किया गया था, इसकी समीक्षा की आवश्यकता है। इसके लिए हमें सभी जनजातियों (सभी समूह) से मिलाकर एक समिति बनानी होगी।”

यदि समिति कुकी समुदाय को अनुसूचित जनजाति सूची से हटाने की सिफारिश करती है तो केंद्र सरकार को इस सिफारिश पर विचार करना होगा। केंद्र सरकार मंजूरी देगी कुकी समुदाय का अनुसूचित जनजाति खत्म हो किया जाएगा। यदि समिति उन्हें ST में रहने की सिफारिश करती है तो केंद्र इस पर विचार करेगा और उसकी मंजूरी के बाद इसे ST वर्ग में बनाए रखा जाएगा।

बता दें कि मणिपुर पिछले साल मई से जातीय हिंसा से दहल रहा है और 180 से अधिक लोग मारे गए हैं। मैतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) दर्जे की माँग के विरोध में पहाड़ी जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ आयोजित किए जाने के बाद 3 मई को हिंसा भड़क उठी थी।

गौरतलब है कि मणिपुर की आबादी में मैतेई लोगों की संख्या लगभग 53 प्रतिशत है और वे ज्यादातर इम्फाल घाटी में रहते हैं। वहीं, नागा और कुकी की कुल आबादी करीब 40 प्रतिशत है और वो मुख्यत: पहाड़ी जिलों में रहते हैं।

अमेरिका में कार रैली, फ्रांस में ‘राम रथ यात्रा’, इस्लामी मुल्कों में लाइव प्रसारण: वैश्विक होगा प्राण-प्रतिष्ठा समारोह, एफिल टॉवर से लेकर टाइम्स स्क्वायर तक होगा राममय

राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा को लेकर सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि अमेरिका और यूरोप तक के श्रद्धालु उत्साहित हैं। फ्रांस का एफिल टॉवर हो या न्यूयॉर्क का टाइम्स स्क्वायर, हर जगह विशाल पर्दों पर राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के प्रसारण की तैयारी है। इतना ही नहीं, संयुक्त राज्य अमेरिका के विभिन्न इलाकों में कार रैली भी निकाली जाएगी। यहाँ तक कि इस्लामी मुल्कों में भी रामलला के प्राण-प्रतिष्ठा अनुष्ठान का लाइव प्रसारण होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद कार्यक्रम की तैयारियों की निगरानी कर रहे हैं।

लोगों के उत्साह का आलम देखिए कि अयोध्या में होने वाले इस कार्यक्रम को लेकर विदेश तक में लोग इंतज़ार कर रहे हैं। इस तरह से अब ये एक वैश्विक कार्यक्रम बन रहा है, जिस पर पूरी दुनिया की नज़रें बनी हुई हैं। फ्रांस की राजधानी पेरिस में 21 जनवरी, 2023 को ‘राम रथ यात्रा’ भी प्रस्तावित है, जिसमें पूरे यूरोप से श्रद्धालु जुट रहे हैं। साथ ही एफिल टॉवर के पास भी कार्यक्रम का आयोजन होगा। अमेरिका के टाइम्स स्क्वायर पर तो राम मंदिर के शिलान्यास के कार्यक्रम का भी लाइव प्रसारण हुआ था, अब प्राण-प्रतिष्ठा के कार्यक्रम का होगा।

नॉर्थ अमेरिका के कई इलाकों, कनाडा में भी मंदिरों में 22 जनवरी को धार्मिक आयोजन होंगे, विशेष पूजा-अर्चना होगी। कैलिफोर्निया, वाशिंगटन और शिकागो सहित USA के कई शहरों में कार रैलियाँ होंगी। भारतीय समय के अनुसार 12:30 बजे कार्यक्रम होना है। उस दौरान जहाँ पेरिस में सुबह होगी, वहीं अमेरिका में रात होगी। चूँकि 500 वर्षों के संघर्ष के बाद रामलला अपने मंदिर में विराजने जा रहे हैं, इसीलिए श्रद्धालुओं ने तैयारियाँ भी ख़ास कर के रखी हैं।

पेरिस में रहने वाले अविनाश मिश्रा ने बताया कि इस ऐतिहासिक क्षण का हिस्सा बनते हुए यूरोप के लोग पेरिस में ‘राम रथ यात्रा’ में भाग लेंगे और एफिल टॉवर के पास प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम का लाइव प्रसारण देखेंगे। उन्होंने इस यात्रा का नक्शा शेयर करते हुए श्रद्धालुओं से इसका हिस्सा बनने की अपील की। ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट ने भी इस कार्यक्रम से जुड़ी सूचना को रीट्वीट किया है। अविनाश ने कहा कि इस प्राण-प्रतिष्ठा आयोजन का लाइव प्रसारण देखना श्रद्धालुओं के लिए सौभाग्य की बात है।

नॉर्थ अमेरिका और कनाडा में ‘द मांडू मंदिर एम्पावरमेंट काउंसिल’ ने कई देवस्थानों में कार्यक्रम की योजना बनाई है। वाशिंगटन और शिकागो के बाद अब कैलिफोर्निया में कार रैली होनी है। श्रद्धालुओं ने कहा कि भले ही वो सदेह अयोध्या में उपस्थित रहने में अक्षम हैं, लेकिन भगवान राम उनके हृदय में रहते हैं और वो उनकी वापसी से हर्षित हैं। न्यूयॉर्क सिटी के मेयर एरिक एडम्स ने कहा कि ये एक हिन्दुओं की जनसंख्या को देखते हुए ये एक बहुत महत्वपूर्ण घटना है, ये आध्यात्मिकता के पथ पर बढ़ने और त्योहार मनाने का एक अच्छा अवसर है।

इतना ही नहीं, 160 अलग-अलग देशों में कई कार्यक्रमों का आयोजन होना है। VHP (विश्व हिन्दू परिषद) ने इसकी रूपरेखा तैयार की है। 50 देशों में बड़े आयोजन होने हैं। अमेरिका में 300, मॉरीशस में 100, UK में 25, ऑस्ट्रेलिया में 30 और कनाडा में 30 लोकेशनों से अयोध्या में राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम का लाइव प्रसारण होगा। आयरलैंड, फिजी, इंडोनेशिया और जर्मनी में भी बड़े-बड़े कार्यक्रम होंगे, जहाँ लाइव प्रसारण दिखाया जाएगा।

अमेरिका, कनाडा, जर्मनी और फिजी समेत 50 देशों के प्रतिनिधियों को अयोध्या इस समारोह में उपस्थित रहने के लिए बुलाया गया है। इंडोनेशिया और सऊदी अरब जैसी इस्लामी मुल्कों में भी लाइव स्ट्रीमिंग की योजना है। हवन पूजा और हनुमान चालीसा पाठ जैसे कार्यक्रम 160 देशों में होने हैं। एक तरह से यूपी भी इस कार्यक्रम के जरिए विश्व पटल पर अपनी एक अलग पहचान बना रहा है। दुनिया भर में हिन्दू पुनरुत्थान की एक इस नई गाथा के लोग साक्षी बनेंगे।

सोने-चाँदी से बना 8 KG का चरणपादुका लेकर नंगे पाँव अयोध्या चले श्रीनिवास शास्त्री: रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से पहले CM योगी को करेंगे भेंट

रामलला अद्वितीय हैं तो उनके भक्त भी अनोखे हैं। उनके ऐसे ही एक भक्त 64 साल के चल्ला श्रीनिवास शास्त्री हैं। प्रभु की शक्ति और प्रेरणा से वे उम्र को बौना साबित करते हुए अपने सिर पर 8 किलोग्राम की चरण पादुका लेकर वे नंगे पाँव हैदराबाद से अयोध्या आ रहे हैं। वे जिस रास्ते पर भगवान चले थे, उस रास्ते पर पैदल चलते हुए 15 जनवरी 2024 को अयोध्या पहुँचेंगे।

चाँदी से बनी और सोने से मढ़ी ये चरण पादुका वो 16 जनवरी 2024 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपेंगे। श्रीनिवास शास्त्री कहते हैं कि वो उस रास्ते से अयोध्या आ रहे हैं, जिस रास्ते पर चलकर भगवान श्रीराम रामेश्वरम से अयोध्या से पहुँचे थे। शास्त्री के मुताबिक, वे जिन रास्तों से आ रहे हैं, उन रास्तों का नक्शा डॉक्टर राम अवतार ने बहुत शोध के बाद बनाया।

एएनआई ने चल्ला श्रीनिवास शास्त्री के हवाले से मंगलवार (9 जनवरी 2024) को लिखा कि वह भगवान राम की ‘वनवास’ यात्रा को प्रतिबिंबित करते हुए अयोध्या-रामेश्वरम मार्ग पर चल रहे हैं। शास्त्री ने उल्टे क्रम का पालन करते हुए यानी रामेश्वरम से अयोध्या के लिए 20 जुलाई 2023 को अपनी यात्रा शुरू की थी। वे रास्ते में भगवान राम द्वारा स्थापित शिवलिंगों के पास रुके।

उन्होंने ये भी बताया कि वे अब तक ओडिशा, महाराष्ट्र, गुजरात से होते हुए चित्रकूट पहुँचे हैं। यहाँ से अयोध्या की दूरी 272 किलोमीटर है। उनका लक्ष्य अगले 5 दिनों में अयोध्या पहुँचना है। उनका कहना है कि भगवान राम के लिए तैयार की गई चरण पादुका में 1 किलोग्राम सोना और 7 किलोग्राम चाँदी का इस्तेमाल किया गया है। इस खड़ाऊँ की कीमत करीब 65 लाख रुपए है।

श्रीनिवास शास्त्री ने कहा कि उनकी योजना है कि वे अयोध्या में अपना घर बनाएँ और यहीं आकर बस जाएँ। उन्होंने कहा कि उनके पिता ने कारसेवा की थी। पिता अब नहीं रहे तो वे उनकी इच्छा पूरी कर रहे हैं। बता दें कि 64 वर्षीय शास्त्री साउथ फिल्म इंडस्ट्री में काम कर चुके हैं। वो अयोध्या भाग्यनगर सीताराम फाउंडेशन के संस्थापक भी हैं। वो इससे पहले राम मंदिर के लिए चाँदी की 5 ईंटें दान कर चुके हैं।

उनका कहना है कि राम मंदिर को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आते ही उन्होंने अपना आगे का जीवन भगवान राम को समर्पित करने का फैसला कर लिया। वो राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह से पहले अयोध्या पहुँचने और रामलला की चरण पादुका को सौंपने को लेकर खासे उत्साहित हैं। बता दें कि ‘प्राण प्रतिष्ठा’ समारोह 16 जनवरी 2024 से शुरू होकर सात दिनों तक चलेगा।

पीएम मोदी 22 जनवरी 2024 को भव्य राम मंदिर का उद्घाटन करेंगे। इस समारोह के लिए कई अहम शख्सियतों को निमंत्रण भेजा गया है। भगवान राम की जन्मस्थली अयोध्या महान आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व रखती है। श्री राम जन्मभूमि तीरथ क्षेत्र ट्रस्ट ने समारोह के लिए 4,000 संतों को आमंत्रित किया है।

अ से अनपढ़ से लेकर ज्ञ से ज्ञानी तक, वैज्ञानिक है हिन्दी: आर्थिक महाशक्ति बनेगा भारत तो यही होगी वैश्विक भाषा, अब अंग्रेजी की दासता से मुक्त होने की बारी

भाषा का लेकर चंदन, आओ कर लें अभिनंदन
कि गर्व से हिन्दी बोलें, चलो हिन्दी के हो लें

संपूर्ण विश्व में एकमात्र भारत ही ऐसा देश है जो न केवल भौगोलिक क्षेत्रफल और जनसंख्या की दृष्टि से विशाल है अपितु हमें तो इस बात का भी गर्व है कि हमारे देश में लगभग 1652 विकसित एवं समृद्ध बोलियाँ प्रचलित हैं। इन बोलियों का प्रयोग करने वाले विभिन्न समुदाय अपनी-अपनी बोली को महत्वपूर्ण मानने के साथ-साथ उसे बोली के स्थान पर भाषा कह कर पुकारते हैं और उनमें से कुछ बोलियाँ ऐसी हैं भी जिनमें वे सभी गुण विद्यमान हैं जो किसी भी समर्थ भाषा में होने चाहिए।

ऐसे विराट और समृद्धशाली राष्ट्र में स्वाधीनता आंदोलन के काल में सम्पूर्ण देश के लिए संपर्क भाषा का चयन करना अत्यंत ही चुनौतीपूर्ण कार्य था। यह देश अपनी दासता की जंजीरों को तोड़ फेंकने के लिए तो संगठित था परन्तु एक संपर्क भाषा की अनिवार्यता अनुभव करते हुए भी इस प्रश्न पर सहमति नहीं हो पा रही थी कि विभिन्न प्रादेशिक भाषाओं में से किसे सम्पूर्ण देश के लिए संपर्क भाषा के रूप में प्रयुक्त किया जाए।

गहन विचार-विमर्श करने के उपरान्त स्वतन्त्रता संग्राम में जुटे हुए लगभग सभी प्रमुख नेता, राजनीतिज्ञ, क्रांतिकारी, साधु-संत और विद्वतजन इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि हिन्दी ही वह भाषा है जो सभी को एक सूत्र में पिरोने का सामर्थ्य रखती है, यही भाषा सेतु बनकर भावनात्मक स्तर पर सम्पूर्ण देश को एक करेगी। सबसे महत्त्वपूर्ण बात जो उन्हें लगी वह यह थी कि हिन्दी की अपनी स्वतंत्र लिपि है – देवनागरी लिपि – जो श्रेष्ठ वैज्ञानिक लिपि है और अपनी विशेषताओं के कारण सर्वगुण नागरी है।

विश्व पटल पर हिन्दी

यह सर्वविदित है की विश्व की समस्त भाषाओं की जननी संस्कृत ही है परन्तु इस देवभाषा का यदि कोई उत्तराधिकारी है तो वह हिन्दी ही है। अपनों के ही द्वारा दीन-हीन कहलाते हुए, अपमान का दंश झेलते हुए भी हिन्दी पूर्ण विश्वास से आगे बढ़ती चली गई और आज स्थिति यह है की यह भाषा वैश्विक स्तर पर प्रसिद्धि प्राप्त कर चुकी है। विश्वभर में हिन्दी का वर्चस्व तेज़ी से बढ़ता जा रहा है। आज वह विश्व के सभी महाद्वीपों तथा महत्वपूर्ण राष्ट्रों- जिनकी संख्या लगभग एक सौ चालीस है- में किसी न किसी रूप में प्रयुक्त होती है।

वर्तमान में वह बोलने वालों की संख्या के आधार पर चीनी के बाद विश्व की दूसरी सबसे बड़ी भाषा बन गई है। इस बात को सर्वप्रथम सन 1999 में ‘मशीन ट्रांसलेशन समिट’ अर्थात् यांत्रिक अनुवाद नामक संगोष्ठी में टोकियो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर होजुमि तनाका ने भाषाई आँकड़े पेश करके सिद्ध किया है। उनके द्वारा प्रस्तुत आँकड़ों के अनुसार, विश्वभर में चीनी भाषा बोलने वालों का स्थान प्रथम और हिन्दी का द्वितीय है। अंग्रेजी तो तीसरे क्रमांक पर पहुँच गई है।

इसी क्रम में कुछ ऐसे विद्वान अनुसंधित्सु भी सक्रिय हैं जो हिन्दी को चीनी के ऊपर अर्थात् प्रथम क्रमांक पर दिखाने के लिए प्रयत्नशील हैं। डॉ जयन्ती प्रसाद नौटियाल ने भाषा शोध अध्ययन 2005 के हवाले से लिखा है कि, विश्व में हिंदी जानने वालों की संख्या एक अरब दो करोड़ पच्चीस लाख दस हजार तीन सौ बावन (1,02,25,10,352) है जबकि चीनी बोलने वालों की संख्या केवल नब्बे करोड़ चार लाख छह हजार छह सौ चौदह (90,04,06,614) है।

यदि यह मान भी लिया जाए कि आँकड़े झूठ बोलते हैं और उन पर आँख मूँदकर विश्वास नहीं किया जा सकता तो भी इतनी सच्चाई निर्विवाद है कि हिंदी बोलने वालों की संख्या के आधार पर विश्व की दो सबसे बड़ी भाषाओं में से है।

इक्कीसवीं सदी की भाषा

इस उत्तर आधुनिक काल में एक ओर जापान जैसे महान राष्ट्र की 60% प्रतिशत से अधिक आबादी लगभग 60 वर्ष को छूते हुए बुढ़ापे की ओर बढ़ गई है वहीं आज से लगभग 15 सालों के अंतर्गत अमेरिका और यूरोप का भी कुछ यही हाल होने वाला है। ऐसे में, विशाल जनसंख्या वाला भारत एक युवा राष्ट्र है, जिसे हम अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मान सकते हैं। हमारे अलावा चीन भी अभी युवा और भारी जनसंख्या वाला देश है और यह बात आने वाले समय में दोनों ही देशों को लाभान्वित करेगी, जिसका कुछ हद तक परिणाम भी अब देखने को मिल रहा है। यह दौर विश्व भर में भारत के साथ-साथ हिन्दी के भी भाग्योदय का दौर है।

हमारे देश में 1980 के बाद 64 करोड़ से ज्यादा बच्चे पैदा हुए हैं, जो विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों तथा अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षित हो रहे हैं। वे सन् 2025 तक पूर्ण विकसित और विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षित होकर अपनी सेवाएँ देने के लिए विश्व के समक्ष उपलब्ध होंगे। वे विश्व के सबसे तरुण मानव संसाधन होंगे जिस कारण दुनियाभर में उनकी पूछ होगी। यही तरुण भारत जब विश्व के विभिन्न देशों की व्यवस्था और विकास परिचालन का सशक्त हस्ताक्षर बनेगा तब उसके साथ हिन्दी भी जाएगी।

जब भारत विश्व की आर्थिक महाशक्ति बनेगा, व्यापार और उत्पादन दोनों ही भारत पर अधिक निर्भर होगा तब वैश्विक मंच पर स्वतः ही हिन्दी महत्वपूर्ण भूमिका का वहन करेगी। इतिहास में इसने भारत को जोड़ा था भविष्य में यह वैश्विक एकता का प्रतीक बनेगी और विश्वभाषा कहलाएगी।

वैज्ञानिक और पूर्णतः समर्थ भाषा

वह दिन बीत गए जब हिन्दी को असमर्थ बोलकर उसकी अवमानना की जाती थी, अब वह समर्थ भाषा के रूप में ख्याति प्राप्त है। विश्व की श्रेष्ठ भाषाओं में स्थान पाने वाली अन्य भाषाओं में भी हिन्दी जैसा गुण और तत्व नहीं है। यह एक ऐसी भाषा है जिसका सफर अ अनपढ़ से लेकर ज्ञ ज्ञानी तक परिलक्षित होता है। हमारी देवनागरी लिपि की वैज्ञानिकता तो सर्वमान्य है। देवनागरी में लिखी जाने वाली भाषाएँ उच्चारण पर आधारित हैं।

हिन्दी की शाब्दी और आर्थी संरचना प्रयुक्तियों के आधार पर सरल व जटिल दोनों है। हिंदी भाषा का अन्यतम वैशिष्ट्य यह है कि उसमें संस्कृत के उपसर्ग तथा प्रत्ययों के आधार पर शब्द बनाने की अभूतपूर्व क्षमता है। वर्तमान में हिन्दी के पास पच्चीस लाख से ज्यादा शब्दों की सेना है। संसार की अन्यान्य भाषाओं के बहुप्रयुक्त शब्दों को उदारतापूर्वक ग्रहण करने का सामर्थ्य केवल हिन्दी में है।

इस भाषा की वैज्ञानिकता और सुव्यवस्था की छोटी सी झलक प्रस्तुत पंक्तियों से स्पष्ट होती है,

“सुनो क, ख, ग, घ, कंठ से उच्चरा, वहीं त, थ, द, ध दंत के हैं स्वरा,

ट, ठ, ड, ढ़ मूर्धन्य हुआ, य, र, ल, व अंतव्य हुआ, प, फ, ब, भ हैं ओष्ठे…”

संसार की बदलती चिंतनात्मकता तथा नवीन जीवन स्थितियों को व्यंजित करने की भरपूर क्षमता हिंदी भाषा में है, हमें इस दिशा में अब केवल अधिक बौद्धिक तैयारी तथा सुनियोजित विशेषज्ञता के साथ अपने कदम को बढ़ाने की आवश्यकता है।

साहित्य के क्षेत्र में

भारत माँ की गोद में जिसका, भोला बचपन बीता है

तुलसी ने मानस को रचकर, जनमानस को जीता है

सूर, कबीर, मीरा जिसके, थे सब रस के दीवाने

और बिहारी, घनानंद की ये ही मात पुनीता है

साहित्य जगत में हिन्दी की सृजन धारा लगभग बारह सौ सालों (आठवीं शताब्दी से लेकर वर्तमान में इक्कीसवीं शताब्दी) से प्रवाहित हो रही है। उसका काव्य साहित्य तो संस्कृत के बाद विश्व के श्रेष्ठतम साहित्य की क्षमता रखता है। उसमें लिखित उपन्यास एवं समालोचना भी विश्वस्तरीय है। आज हिंदी में विश्व का महत्त्वपूर्ण साहित्य अनुसृजनात्मक लेखन के रूप में उपलब्ध है और उसके साहित्य का उत्तमांश भी विश्व की दूसरी भाषाओं में अनुवाद के माध्यम से जा रहा है।

‘पद्मावत’, ‘रामचरित मानस’ तथा ‘कामायनी’ जैसे महाकाव्य विश्व की किसी भी भाषा में नहीं हैं। कबीर, तुलसी, सुर, जायसी, बिहारी, देव, घनानंद, गुरु गोबिंद सिंह, भारतेन्दु हरिश्चंद्र, जयशंकर प्रासद, पन्त, निराला, दिनकर, महादेवी वर्मा, धर्मवीर भारती, अज्ञेय आदि कवियों की रचनाओं ने यह सिद्ध कर दिया है हिंदी में अपने भावों और विचारों को अभिव्यक्त करने की अद्भुत और अलौकिक शक्ति है। हमारे साहित्य का आंगन तो मुंशी प्रेमचंद जी की अद्वितीय कृतियों से भरा-पुरा है।

वर्तमान समय में हिन्दी का कथा साहित्य भी फ्रेंच, रूसी तथा अंग्रेजी के लगभग समकक्ष है। आज हिंदी साहित्य की विविध विधाओं में जितने रचनाकार सृजन कर रहे हैं उतने तो बहुत सारी भाषाओं के बोलने वाले भी नहीं हैं। केवल संयुक्त राज्य अमेरिका में ही दो सौ से अधिक हिंदी साहित्यकार सक्रिय हैं जिनकी पुस्तकें छप चुकी हैं। समृद्धशाली हिन्दी साहित्य पूरे संसार में सम्मानित हो रहा है। हिन्दी केवल विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की ही राष्ट्र भाषा नहीं है बल्कि पाकिस्तान, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, फिजी, मॉरीशस, गुयाना, त्रिनिदाद तथा सुरीनाम जैसे देशों की सम्पर्क भाषा भी है।

वह भारतीय उपमहाद्वीप के लोगों के बीच खाड़ी देशों, मध्य एशियाई देशों, रूस, समूचे यूरोप, कनाडा, अमेरिका तथा मैक्सिको जैसे प्रभावशाली देशों में रागात्मक जुड़ाव तथा विचार-विनिमय का सबल माध्यम है। हिन्दी के विकास रथ में हमें विधि, विज्ञान, वाणिज्य तथा नवीनतम प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में पाठ-सामग्री का तेज़ी से निर्माण करना होगा। आज आवश्यकता है भारतीय जनमानस को अपनी हिन्दी के प्रति जागरूक होने की, उसे गर्व से व्यवहृत करने की।

हम अंग्रेजों की दासता से तो मुक्त हो गए अब अंग्रेजी की बारी है। हमारा अँग्रेजी तथा विश्व कि किसी अन्य भाषा से कोई द्वेष नहीं है, हमें उन्हें अवश्य सीखना चाहिए, उनके समृद्ध साहित्य का आस्वादन करना चाहिए, उनमें उपलब्ध तकनीकी ज्ञान के भण्डार को आत्मसात करना चाहिए परन्तु इन सबके बीच अपनी हिन्दी का यथोचित सम्मान भी करना चाहिए।

(लेखिका शुभांगी उपाध्याय, कलकत्ता विश्वविद्यालय में Ph.D शोधार्थी हैं।)

जिन्होंने दिया ‘रामलला हम आएँगे, मंदिर वहीं बनाएँगे’ का नारा, उनको भी मिला प्राण-प्रतिष्ठा का न्योता: मिलिए कारसेवक बाबा सत्यनारायण से

राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान कई ऐसे नारे आए जिन्होंने हिंदुओं में उत्साह का संचार किया। ऐसा ही एक नारा है- रामलला हम आएँगे, मंदिर वहीं बनाएँगे। इस नारे के प्रणेता बाबा सत्यनारायण मौर्य हैं। इस कारसेवक को भी 22 जनवरी 2024 को अयोध्या के भव्य राम मंदिर में भगवान रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने का न्योता मिला है।

प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान विभिन्न क्षेत्रों के करीब सात हजार लोग उपस्थित रहेंगे। अपने स्वप्न को यथार्थ बनते देखने के लिए बाबा मौर्य भी इस दिन अयोध्या में रहेंगे। वे कहते हैं कि ये​ उस समय का संघर्ष ही है जिसके कारण आज यह क्षण आया है।

बाबा सत्यनारायण मौर्य वह नाम है, जो कारसेवा के दौरान ऊर्जा का संचार करते थे। एक चित्रकार के तौर पर वे दीवारों पर भगवान राम की चित्र उकेरते तो मंच से अपने संबोधन के जरिए कारसेवकों में जोश भर देते थे। 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की नींव रखी थी। उसके बाद दैनिक भास्कर करते हुए बाबा सत्यनारायण मौर्य ने कहा था कि मंदिर बनना कई जीवन के सपनों के सच होने जैसा है।

घुमक्कड़ बाबा के तौर पर मशहूर सत्यनारायण मौर्य ने इंदौर, उज्जैन और मुंबई को अपना ठिकाना बना रखा है। पढ़ाई पूरी करने के तुरंत बाद ही उन्होंने खुद को पूरी तरह राम मंदिर आंदोलन के लिए समर्पित कर दिया था। पढ़ाई के दौरान ही वे उज्जैन की दीवारों को नारों से रंगने लगे थे।

मूल रूप से बाबा माैर्य राजगढ़ के रहने वाले हैं। उनके पिता शिक्षक थे। उनके भाई-बहन भी शिक्षक बने। पोस्टग्रेजुएट बाबा गोल्ड मेडलिस्ट रहे हैं। लेकिन शिक्षक बनने की जगह उन्होंने कारसेवक बन राम की सेवा को अपना लक्ष्य बनाया। रामधुन ऐसी लगी कि 1990 में दोस्तों के संग अयोध्या चले आए और अयोध्या की गली-गली में राम मंदिर की अलख जगाने निकल पड़े। पेंटिंग के शौकीन बाबा के हाथ गेरु पड़े या पेंट वो वहाँ हर दीवार पर रामलला की छवि उकेरने लगे।

विवादित ढाँचा विध्वंस के बाद अयोध्या में उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर बैनर के कपड़े से अस्थायी मंदिर बनाया था। विश्व हिन्दू परिषद के तत्कालीन प्रमुख अशोक सिंघल भी उनके नारों के कायल थे। उनके कहने पर बाबा ने दिल्ली भेजकर गाने और नारों की कैसेट रिकाॅर्ड करवाई थी। ये नारे बाद में हर मंच की जान बन गए। उज्जैन के एक कार्यक्रम में मंच से बाबा ने ‘रामलला हम आएँगे मंदिर वहीं बनाएँगे’ का नारा दिया था।

(फोटो साभार: दैनिक भास्कर)

सत्यनारायण मौर्य के अनुसार ‘सौगंध राम की खाते हैं, हम मंदिर वहीं बनाएँगे’ नारे के साथ उस समय कई लाइनें जुड़ीं। ऐसी ही एक पंक्ति थी ‘रामलला हम आएँगे, मंदिर वहीं बनाएँगे’। यह खूब लोकप्रिय हुई। उन्होंने ‘रक्त देंगे, प्राण देंगे मंदिर का निर्माण करेंगे’ जैसे कई और नारे भी दिए थे।

दशरथ महल में जीवंत होगा रामलला का बचपन, योगी सरकार ने सँवारा: अखिलेश राज में धूल फाँकती रह गई थी फाइल

अयोध्या के नवनिर्मित राम मंदिर में 22 जनवरी 2024 को होने वाली रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं। इसी के साथ प्रभु श्रीराम से जुड़े ऐतिहासिक चिह्नों को उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार संरक्षित करने का प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में जल्द ही अयोध्या में स्थित दशरथ महल नए रूप में नजर आएगा।

यूपी की योगी सरकार ने दशरथ महल की वह आभा लौटाई है, जो कभी त्रेता युग में हुआ करती थी। कहा जाता है कि महाराज दशरथ ने त्रेता युग में इस महल की स्थापना की थी। इस दशरथ महल में आने वाले लोगों को प्रभु श्रीराम के बाल्यकाल के चरणों की अनुभूति होगी। योगी सरकार ने दशरथ महल को सँवारने का कार्य फरवरी 2021 में शुरू किया था।

दशरथ महल में योगी सरकार ने सत्संग भवन, नया प्रवेश द्वार, रात्रि विश्राम गृह और श्रद्धालु सहायता केंद्र बनाया है। इन सब पर ₹3 करोड़ का खर्चा किया है। इसमें बाकी कामों को 22 जनवरी 2024 तक पूरा कर लिया जाएगा। दरअसल, दशरथ महल को संवारने की योजना अखिलेश सरकार के दौरान वर्ष 2013 में भी आई थी लेकिन वह मात्र कागजों पर ही सिमट कर रह गई।

साल 2013 में ₹2.4 करोड़ से इसके विकास को लेकर प्रस्ताव आया था, लेकिन यह एक मेज से दूसरे मेज तक घूमता रहा। लालफीताशाही और इसको विकसित करने की इच्छा ना होने के चलते कभी भी महल का विकास संभव नहीं हो सका। हालाँकि, योगी सरकार ने इसका अधिकांश काम पूरा करा लिया है।

दशरथ महल में बनाए गए यात्री रात्रि निवास और श्रद्धालु सहायता केंद्र का काम पूरा हो चुका है। प्रवेश द्वार का काम भी लगभग पूरा है। अब सत्संग भाव को लेकर काम चल रहा है। सत्संग भवन को लेकर अब कई स्तर पर काम किया जा रहा है। सत्संग भवन में स्टेज को पहले ही बना लिया गया है।

यहाँ पर नए तरीके से टाइल, खिड़की और दरवाजों का काम चल रहा है। कहा जा रहा है कि इस सत्संग भवन में एक बार में 300 से 350 श्रद्धालु एक साथ बैठकर कीर्तन कर सकेंगे। सत्संग भवन को लेकर काम 1 दिसम्बर 2023 को चालू हुआ था, जिसे 22 जनवरी 2024 तक पूरा किया जाना है।

यहाँ नई तरीके की लाइटिंग का भी कम किया गया है। दीवालों पर नई पेंटिंग बनाई गई हैं। इन पेंटिंग में प्रभु राम के जीवन से जुड़ी हुई कथाएँ उकेरी गई हैं। प्रवेश द्वार को भी इसी हिसाब से बनाया गया है। अयोध्या आने वाले श्रद्धालु यहाँ आकर रात्रि में रुक सकेंगे और सहायता भी पा सकेंगे।