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अयोध्या में राम मंदिर के आसपास 8 मस्जिदें और 4 कब्रिस्तान, मुस्लिम बहुल मोहल्ला भी… शान से निकलती है ताजिया: वो सच जिसे कॉन्ग्रेसी-वामपंथी छिपाते हैं अभी भी

अयोध्या में 22 जनवरी 2024 (सोमवार) को राम जन्मभूमि पर निर्माणाधीन मंदिर में मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा प्रस्तावित है। दुनिया भर का हिन्दू समाज 5 सदी के बाद आ रहे इस दिन को अपने लिए शुभ बता कर अभी से तैयारियों में जुटा है। वहीं समाजवादी पार्टी और कॉन्ग्रेस के कुछ नेताओं सहित कई कट्टरपंथी और वामपंथी तत्व इस कार्यक्रम का विरोध कर रहे हैं। हालाँकि राम के नाम में हर किसी का समावेश है लेकिन जानबूझ कर इस मामले को साम्प्रदायिक रंग देने के प्रयास किए जा रहे हैं। अयोध्या नाम से हिन्दुओं के खिलाफ कट्टरता का आभासी दृश्य बनाने की साजिश रचने वालों ने इन तथ्यों को छिपाया है कि राम मंदिर के आसपास अयोध्या धर्मक्षेत्र में अभी भी 8 मस्जिदें मौजूद हैं। यहाँ एक मुस्लिम बाहुल्य मोहल्ला भी है, जो खुल कर अपनी मजहबी मान्यताओं का पालन करते हैं।

विभिन्न सम्प्रदायों के 3400 से अधिक मंदिर, राम सबके आराध्य

ऑपइंडिया ने अयोध्या धर्मनगरी क्षेत्र के आँकड़े जुटाए। आधिकारिक तौर पर यह धर्मनगरी 10.24 वर्ग किलोमीटर में फैली है। अयोध्या में लगभग 3400 मंदिर हैं। ये स्थल सनातन धर्म के सभी अंगों व अलग-अलग पूजा पद्धतियों के मंदिर हैं। सभी मंदिर आसपास बने हुए हैं, जहाँ से ये संदेश जाता है कि विविधता के बावजूद हिन्दू धर्म का मूल एक है।

साथ ही हिन्दू धर्म के सभी सम्प्रदायों के ये मंदिर इस बात का भी प्रतीक हैं कि राम सनातन के हर अंग में पूज्यनीय रूप से स्वीकार्य हैं। 3400 से अधिक मंदिरों की यह अनेकता में एकता राम के समावेशी होने की गवाही देती है।

4 गुरुद्वारे और 2 जैन मंदिर भी धर्मक्षेत्र में

इसके अलावा अयोध्या धर्मक्षेत्र में 4 गुरुद्वारे भी मौजूद हैं। प्राचीन समय से मौजूद ये गुरुद्वारे हिन्दू और सिख धर्म के उस अपनेपन के प्रतीक हैं, जिसे वर्तमान समय के नए नवेले खालिस्तानी विचारधारा वाले कुछ लोग नकारने की साजिश रच रहे हैं।

इनके अलावा अयोध्या में 2 जैन मंदिर भी हैं। दुनिया भर से आने वाले हिन्दू श्रद्धालु गुरुद्वारे और जैन मंदिर में भी समान श्रद्धाभाव से जाते हैं। जैन और सिख मतों के धर्मस्थल भी इसकी तस्दीक करते हैं कि राम नाम से उनका पुराना संबंध है।

10 वर्ग KM में 8 मस्जिदें, 4 कब्रिस्तान

भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या की सबसे बड़ी खासियत ये है कि यहाँ हिन्दू धर्म को कुफ्र और शिर्क बताने वाली और स्वयं को सर्वश्रेठ व सर्वोत्तम घोषित करने वाली इस्लामी मत की भी इबादतगाहें मौजूद हैं। इसी धर्मनगरी क्षेत्र में 8 मस्जिदें और 4 कब्रिस्तान मौजूद हैं।

अयोध्या में कुछ मस्जिदें ऐसी भी हैं, जो रामजन्मभूमि अधिग्रहीत परिसर से महज 100 मीटर की दूरी पर हैं। इन पर बाकायदा लाउडस्पीकर बँधे हुए हैं, जिससे पाँचों टाइम अजान दी जाती है। इनके रंग-रोशन भी नियमित तौर पर हो रहे हैं। यहाँ तमाम मुस्लिम पूरी छूट के साथ अपनी मजहबी अक़ीदों का पालन करते हैं।

रामजन्मभूमि अधिग्रहीत परिसर के पास बनी मस्जिद में लगी माइक

इसके अलावा अयोध्या धाम जंक्शन से निकलते ही 100 मीटर से भी कम दूरी पर मस्जिद मौजूद है। इसके विशाल गुंबद दूर से हरे रंग में चमकता दिखाई पड़ेगा। यहाँ भी अक्सर अकीदतमंदों की भीड़ दिखाई देती है।

ऑपइंडिया की टीम ने धर्मक्षेत्र में विद्याकुंड के आसपास मौजूद 2 कब्रिस्तानों का दौरा किया। यहाँ हमें सैकड़ों की तादाद में पक्की कब्रें दिखीं। पक्की कब्रों पर बाकायदा अरबी भाषा में पत्थर भी लगे हुए हैं। यहाँ अभी भी आसपास के मुस्लिम इंतकाल हुए अपने परिजनों को दफनाने आते हैं। अयोध्या धर्मक्षेत्र में ऐसे कब्रिस्तानों की संख्या 4 से अधिक बताई जा रही है। राम नाम के सर्व समावेशी होने के इस प्रमाण को अभी तक वामपंथी या चरमपंथी विचारधारा रखने वालों ने स्वीकार नहीं किया।

अयोध्या धाम जंक्शन के बाहर 2 इबादतगाहें

मंदिर से सटा मुस्लिम बहुल मोहल्ला

अयोध्या में अधिग्रहीत परिसर से सटा एक मुस्लिम बहुल मोहल्ला है। इसका नाम कजियाना है। बाबरी मस्जिद का पक्षकार रहा इक़बाल अंसारी भी इसी मोहल्ले का निवासी है।

यहाँ आसपास हर समय लाखों श्रद्धालु रामभक्तों और हजारों संत-महंतों की मौजूदगी रहती है लेकिन इसके बावजूद यहाँ अकेली मुस्लिम महिला को अपने बच्चे के साथ खरीदारी करते और किसी भी समय निश्चिन्त हो कर अपना काम करते देखा जा सकता है। इसी के साथ मोहल्ले में रहने वाले पुरुष पूरे इस्लामी परिधान में अपनी नौकरी व कारोबार आदि करते हैं। संतों के समावेशी व्यवहार ने इन्हें कभी भी पराया नहीं समझा।

विद्याकुंड क्षेत्र में बना कब्रिस्तान

अरुंधति कॉम्प्लेक्स में मुस्लिमों की भी दुकानें

ऑपइंडिया से बात करते हुए महंत महेश दास ने बताया कि भगवान राम ने सबको आत्मसात किया था। उनके नाम को साम्प्रदायिकता से जोड़ने वालों को स्वयं अयोध्या आकर जमीनी जानकारी जुटानी चाहिए। एक अन्य महंत अजय दास ने भी ऑपइंडिया को बताया कि वो वामपंथी और चरमपंथी ताकतें राम के नाम को बदनाम करने में जुटी हैं, जो अपनी नफरती सोच के चलते कभी अयोध्या आईं ही नहीं।

स्थानीय निवासी विमलेंद्र श्रीवास्तव ने हमें बताया कि धर्मक्षेत्र टेढ़ी बाजार में बने नए बहुमंजिला शॉपिंग काम्प्लेक्स अरुंधति में मुस्लिमों को भी दुकानें आवंटित हुई हैं। इनमें जूते का कारोबार करने वाले बाबू भाई उर्फ़ मोईन अहमद शामिल हैं। ये कॉम्प्लेक्स खासतौर पर उन कारोबारियों के लिए बनाया गया है, जिनके प्रतिष्ठान नगर के नवनिर्माण के दायरे में आ गए थे।

अरुंधति शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में मुस्लिमों को भी आवंटित हुई हैं दुकानें

पिछले साल निकाली गई थी कई ताजिया

अयोध्या में तैनात रहे एक पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया साल 2023 में राम मंदिर से सटे कजियाना मोहल्ले में धूमधाम से ताजिया जुलूस निकले गए थे। तब अधिग्रहीत परिसर की बॉउंड्री से सटा कर लगभग आधे दर्जन ताजिया ढोल और ताशे बजा कर निकाली गई थी। इस दौरान मुस्लिमों ने पूरी शिद्द्त से अपने मजहबी नारे लगाए थे। तब अयोध्या में मौजूद हजारों श्रद्धालुओं ने अल्प समय के लिए सड़क आदि पर लगे जाम आदि पर कोई भी आपत्ति नहीं जताई थी। स्थानीय साधु-संतों ने इस आयोजन में प्रशासन का पूरा सहयोग किया था।

अयोध्या के धर्मक्षेत्र में रहने वाले अधिकतर मुस्लिम कारपेंटिंग, सैलून, जूते-चप्पल और सिलाई जैसे कारोबार से जुड़े हैं। अयोध्या के विकास के साथ इनके कारोबार में भी चार चाँद लगे हैं। कजियाना मोहल्ले के पास वशिष्ठ कुंड पर मौजूद कुछ लोगों ने भी बताया कि यहाँ हर साल मुस्लिम समुदाय के लोग अपने सभी त्यौहार धूमधाम से मनाते हैं।

उच्चशिक्षा के लिए कजियाना मोहल्ले से लगभग सटा ही साकेत डिग्री कॉलेज है। यहाँ भी इतिहास में मुस्लिम वर्ग से ताल्लुक रखने वाले कई छात्रनेता छात्रसंघ के पदाधिकारी बने हैं। कॉलेज में छात्रों की तादाद हिन्दू बहुल होने के बावजूद यहाँ कभी किसी मुस्लिम छात्र या छात्रा से मजहबी आधार पर भेदभाव जैसी घटना सामने नहीं आई। पूर्व छात्रसंघ पदाधिकारी ध्रुवराज इसे भगवान राम द्वारा मिले समावेशी संस्कार बताते हैं।

AirIndia की फ्लाइट, जैन महिला के शाकाहारी खाने में परोसा चिकन: बवाल होने पर एयरलाइन ने पैसेंजर से कहा – ट्वीट डिलीट करो

एयर इंडिया की फ्लाइट में एक शाकाहारी पैसेंजर के वेज खाने में चिकेन के टुकड़े परोस दिए गए। नॉन वेज देख पैसेंजर खासी नाराज हुईं। उन्होंने इसकी शिकायत केबिन क्रू से की, लेकिन मामले पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अंत में पैसेंजर ने इस घटना को सोशल मीडिया पर शेयर किया।

वीरा जैन नाम की इस पैसेजर ने अपने एक्स हैंडल पर एयर इंडिया के शाकाहारी बिरयानी के साथ चिकन के टुकड़ों की फोटो शेयर कर अपनी परेशानी बयाँ की। उन्होंने लिखा, “मुझे एयर इंडिया फ्लाइट AI582 में चिकन के टुकड़ों के साथ शाकाहारी भोजन परोसा गया! मैं कालीकट एयरपोर्ट से फ्लाइट में सवार हुई थी। ये फ्लाइट शाम 6:40 बजे की थी, लेकिन 7:40 बजे रवाना हुई।”

वीरा ने इसके साथ ही अपना पी.एन.आर. – 6NZK9R और सीट संख्या 10E, 10F भी शेयर की है। उन्होंने अपनी इस पोस्ट में नागरिक उड्डयन मंत्रालय, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय, केंद्रीय नागरिक उड्डयन एवं इस्पात मंत्री ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया सहित प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो को टैग किया है।

उन्होंने आगे लिखा, “पहले देरी, फिर मेरे शाकाहारी भोजन में मांसाहार। यह बेहद निराशाजनक है और इससे मेरी भावनाएँ आहत हुई हैं। मैं एयर इंडिया से अपनी खानपान सेवाओं और देरी के लिए सख्त कार्रवाई करने को कहती हूँ।”

इसके साथ ही उन्होंने अन्य यात्रियों को सुझाव दिया। उन्होंने कहा “मैं हर किसी को सुझाव दूँगी कि कृपया पूरी तरह जाँच लें कि आप फ्लाइट में क्या खा रहे हैं। दो बहुत देरी से उड़ानों (4 जनवरी को मुंबई-कोझिकोड और 8 जनवरी को वापसी) और नॉनवेज परोसे जाने के बाद अब मेरा एयरलाइन के सभी खाने से भरोसा उठ गया है।”

वीरा ने लिखा है कि जब उन्होंने केबिन सुपरवाइजर को अपने खाने में मिले चिकेन के टुकड़ों के बारे में बताया तो उन्होंने माफी माँगी। वहीं केबिन क्रू ने उन्हें बताया कि उनके अलावा अन्य पैसेंजर्स की भी ऐसी शिकायतें आ चुकी हैं। वह कहती हैं कि जब शिकायतें आ गईं थीं फिर भी क्रू मेम्बर की तरफ से ऐसा शाकाहारी भोजन परोसा गया। दूसरे पैसेंजर्स को इस बारे में किसी तरह की कोई सूचना नहीं दी गई।

वीरा जैन की X पोस्ट पर एयर इंडिया ने उन्हें जवाब दिया, और साथ ही उनसे ट्वीट डिलीट करने का अनुरोध भी किया। एयर इंडिया ने लिखा, “प्रिय सुश्री जैन, हम आपसे अनुरोध करते हैं कि ओपन ट्वीट में दी गई जानकारी हटा दें, ताकि कोई दुरुपयोग न कर सके और अपनी शिकायत को PNR के साथ डायरेक्ट मैसेज करें।”

हालाँकि वीरा ने इसके बाद लिखा, “उन्होंने मुझसे केवल मैसेज के जरिए माफी माँगी है। मुझे समझ नहीं आता कि उन्हें इस बात का अहसास कैसे नहीं है कि यह भावनाओं को ठेस पहुँचाने का मसला है।”

बता दें कि इससे पहले साल 2022 में भी एयर इंडिया फ्लाइट में एक जैन दंपत्ति को शाकाहारी बताकर मछली खिलाने का मामला प्रकाश में आया था। दंपत्ति का आरोप था कि एयर इंडिया के दो मुस्लिम स्टाफ ने उनसे कहा कि उन्हें जो दिया गया है वो वेज खाना है और वो बिन चिंता के इसका आनंद लें। हालाँकि, बाद में किसी अन्य स्टाफ से फिर कन्फर्म पर सामने आया कि उन्हें मछली परोसी गई। जैन व्यक्ति ने इस घटना का वीडियो यूट्यूब, फेसबुक, ट्विटर समेत कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर डाला था। इसके बाद इस मुद्दे पर काफी बवाल हुआ था।

सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्या को जेल भेजो: बलिदानी कारसेवक के बेटे की माँग, बोले- ‘नकली फोर्स’ घुसवाकर की गई थी रामभक्तों की हत्या

1990 में अयोध्या में हुए गोलीकांड में मारे गए एक कारसेवक के पुत्र ने उत्तर प्रदेश सरकार से सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्या के खिलाफ कार्रवाई करने की माँग की है। बलिदानी कारसेवक राम अचल गुप्त के बेटे संजय कुमार ने कारसेवकों के नरसंहार को जायज बताने पर स्वामी प्रसाद मौर्या की गिरफ्तार करने की माँग की है। साथ में उन्होंने कुछ सोशल मीडिया हैंडल्स पर भी कारसेवकों को ‘अराजक तत्व’ बताने पर एक्शन लेने को कहा है।

संजय कुमार ने जिलाधिकारी अयोध्या को दिए गए एक पत्र में कहा है, “दिनाँक 10.01.2024 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर के हैंडल सूर्या समाजवादी ने एक घोर निंदनीय व आपत्तिजनक पोस्ट डाली है जिसमें 1990 में राम काज करते हुए बलिदानी कारसेवकों को अराजक तत्व कह कर संबोधित किया गया है। इसके अलावा समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्या का एक अन्य वीडियो शेयर किया गया है जिसमें सन 1990 में राम भक्तो के नरसंहार को जायज बताते हुए साफ सुना जा सकता है।”

स्वामी प्रसाद कारसेवक
संजय द्वारा दी गई शिकायत की कॉपी

गौरतलब है कि स्वामी प्रसाद मौर्या ने 10 जनवरी, 2024 को उत्तर प्रदेश के कासगंज में तत्कालीन समाजवादी पार्टी सरकार द्वारा कारसेवकों पर गोली चलाने के आदेश को क्लीन चिट देते हुए कहा था, “जिस समय अयोध्या में राम मंदिर पर घटना घटी थी। वहाँ पर बिना किसी न्यायपालिका के निर्देश के, बिना किसी प्रशासनिक आदेश के बड़े पैमाने पर अराजत तत्वों ने तोड़फोड़ की थी। तत्कालीन सरकार ने संविधान की रक्षा के लिए, कानून की रक्षा के लिए, अमन चैन कायम करने के लिए उस समय जो गोली चलवाई थी वो सरकार का अपना कर्तव्य था। सरकार ने अपना कर्तव्य निभाया था।”

संजय कुमार ने अपने पत्र में आगे लिखा है, “मेरे पिता श्री राम अचल गुप्त 2 नवंबर 1990 को अयोध्या गोलीकांड में बलिदान हुए थे। मुझे 22 जनवरी राम मंदिर अयोध्या प्राण प्रतिष्ठा में निमंत्रित किया गया है। एक बलिदानी कारसेवक का पुत्र होने के नाते मैं स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान व सूर्या समाजवादी के शब्दों से बुरी तरह आहत हूँ। साथ ही इन शब्दों से मेरे पिता श्री के साथ कारसेवा में गए कई जीवित कारसेवक और हिंदू समाज के अन्य लोग आक्रोशित हैं।”

संजय कुमार का कहना है कि स्वामी प्रसाद मौर्या और अन्य ऐसे ही लोग ऐसे बयान 22 जनवरी, 2024 को अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के पहले सामाजिक सद्भाव बिगाड़ना चाहते हैं। संजय कुमार ने इसके अलावा कुछ और आरोप भी अयोध्या गोलीकांड के विषय में लगाए हैं।

संजय कुमार ने कहा है कि इस गोलीकांड के दौरान सांसद मुन्नन खान और उसके गुंडे नकली फ़ोर्स बना कर कारसेवकों की हत्या कर रहे थे। उन्होंने इस आरोप की जाँच की माँग की है। उनका कहना है कि 1987 में हाशिमपुरा कांड की जाँच करवाई जा सकती है तो फिर इसकी जाँच क्यों नहीं हो सकती। संजय कुमार ने यह कार्रवाई करने की माँग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तर प्रदेश के डीजीपी विजय कुमार से की है।

संजय कुमार के पिता बलिदानी कारसेवक राम अचल गुप्त के विषय में में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

शिकायत नहीं, FIR के बाद ‘भगवान राम खाते थे मांस’ वाली फिल्म नेटफ्लिक्स से हटी: Zee स्टूडियोज ने माँगी माफी

तमिल फिल्म अभिनेत्री नयनतारा अभिनीत फिल्म ‘अन्नपूर्णानी (Annapoorani)’ को नेटफ्लिक्स से हटा दिया गया है। फिल्म को धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोपों के बाद हटाया गया। ये फिल्म 1 दिसंबर, 2023 को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई थी और 29 दिसंबर, 2023 को नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ हुई थी। फिल्म को समीक्षकों द्वारा मिश्रित समीक्षा मिली थी। इस फिल्म में हालाँकि हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत किया गया था, सोशल मीडिया पर लोग इसको लेकर आलोचना कर रहे थे।

इस फिल्म में नयनतारा (Nayanthara) एक ऐसी महिला की भूमिका निभाती है, जो एक मंदिर में पुजारी की बेटी होती है। फिल्म के कुछ दृश्यों में नयनतारा को मंदिर के कपड़ों में दिखाया गया है। साथ ही भगवान राम को मांसाहारी बताया गया है। इस फिल्म के खिलाफ शिकायत करने वाले लोगों ने कहा कि यह हिंदू धर्म के अनुष्ठानों और परंपराओं का अपमान करता है। उन्होंने फिल्म के खिलाफ पुलिस में भी शिकायत दर्ज कराई थी। फिल्म के निर्माताओं ने आलोचनाओं के बाद माफी माँगी है और कहा है कि वे फिल्म को संपादित करेंगे और इसे फिर से रिलीज करेंगे।

ज़ी स्टूडियोज ने विश्व हिंदू परिषद से माफी माँगी और कहा, “आपत्तिजनक सामग्री को हटाने के लिए एडिट होने तक फिल्म को प्लेटफॉर्म से हटा दिया जाएगा। फिल्म के सह-निर्माता के रूप में हमारा हिंदुओं और ब्राह्मण समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का कोई इरादा नहीं है और हम संबंधित समुदायों की भावनाओं को हुई असुविधा और ठेस के लिए माफी माँगना चाहते हैं।”

इस फिल्म में दिखाया गया है कि एक हिंदू ब्राह्मण लड़की बिरयानी बनाने के लिए नमाज पढ़ने लगती है। फिल्म का हीरो उसे समझाता है कि श्रीराम भी मांस खाते थे। इस फिल्म के खिलाफ और इसे प्रमोट करने वाले नेटफ्लिक्स, ZEE के खिलाफ मुंबई में शिकायत दर्ज कराई गई। ये शिकायत नयनतारा, जय, नीलेश कृष्णा, निर्माता जतिन सेठी, आर रवींद्रन, पुनित गोयनका, ज़ी स्टूडियो के मुख्य व्यवसाय अधिकारी शारिक पटेल और नेटफ्लिक्स इंडिया की प्रमुख मोनिका शेरगिल के खिलाफ दर्ज की गई। इसके बाद फिल्म के निर्माताओं ने इसे प्रदर्शित किए जाने वाले OTT प्लेटफॉर्म से हटाने का फैसला किया।

यह खबर भारत में धार्मिक भावनाओं के बारे में एक महत्वपूर्ण बहस को जन्म दे रही है। कुछ लोगों का मानना है कि फिल्म के निर्माताओं को धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए माफ नहीं किया जाना चाहिए।

देश के सबसे लंबे पुल ‘अटल सेतु’ का उद्घाटन आज, अब 2 घंटे का सफर 20 मिनट में होगा पूरा: PM मोदी महाराष्ट्र को देंगे ₹30 हजार करोड़ का तोहफा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 12 जनवरी 2024 को महाराष्ट्र में होंगे। प्रधानमंत्री महाराष्ट्र में 30,500 करोड़ रुपए से अधिक लागत की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करके इन्हें राष्ट्र को समर्पित करेंगे और आधारशिला रखेंगे। ‘ईज ऑफ मोबिलिटी’ बढ़ाने के एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी सेवारी-न्हावा शेवा अटल सेतु का उद्घाटन करेंगे। लगभग 17,840 करोड़ रुपए की लागत से बना अटल सेतु भारत का सबसे लंबा पुल है, जो देश का सबसे लंबा समुद्री पुल भी है। दावा किया जा रहा है कि इस 22 किमी लंबे पुल से नवी मुंबई की दूरी तय करने में महज 20 मिनट लगेंगे।

अटल बिहारी वाजपेयी सेवारी – न्हावा शेवा अटल सेतु

प्रधानमंत्री का विज़न शहरी परिवहन बुनियादी ढाँचे और कनेक्टिविटी को मजबूत करके नागरिकों की ‘ईज़ ऑफ मोबिलिटी’ को बेहतर बनाना है। इस विज़न के अनुरूप, मुंबई ट्रांसहार्बर लिंक (एमटीएचएल) का नाम अब ‘अटल बिहारी वाजपेयी सेवारी-न्हावा शेवा अटल सेतु’ रखा गया है, जो अब तैयार हो गया है। इस पुल का शिलान्यास भी दिसंबर 2016 में प्रधानमंत्री मोदी ने किया था। आइए, जानते हैं इस पुल की खास बातें

  • अटल सेतु को बनाने में आई 17,840 करोड़ रुपए से अधिक की लागत।
  • अटल सेतु की लंबाई लगभग 21.8 किलोमीटर है।
  • 6-लेन वाला ये पुल 16.5 किमी लंबा समुद्र के ऊपर और लगभग 5.5 किमी जमीन पर बना है।
  • यह भारत का सबसे लंबा पुल है, जो देश का सबसे लंबा समुद्री पुल भी है।
  • मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे और नवी मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को जोड़ेगा।
  • मुंबई से पुणे, गोवा और दक्षिण भारत की यात्रा में लगने वाला समय बचेगा।
  • मुंबई बंदरगाह और जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगा।

कई परियोजनाओं को शुरू करेंगे पीएम मोदी

प्रधानमंत्री ईस्टर्न फ्री-वे के ऑरेंज गेट को मरीन ड्राइव से जोड़ने वाली भूमिगत सड़क सुरंग की आधारशिला भी रखेंगे। प्रधानमंत्री रत्न और आभूषण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम में, एसईईपीजेड एसईजेड में ‘भारत रत्नम’ और न्यू एंटरप्राइजेज एंड सर्विसेज टॉवर (एनईएसटी) 01 का उद्घाटन करेंगे। रेल और पेयजल से संबंधित कई परियोजनाएँ राष्ट्र को समर्पित की जाएँगी। महिला सशक्तिकरण की दिशा के एक अन्य प्रयास में, प्रधानमंत्री महाराष्ट्र में नमो महिला सशक्तिकरण अभियान भी शुरू करेंगे।

राष्ट्रीय युवा महोत्सव का उद्घाटन भी करेंगे पीएम मोदी

प्रधानमंत्री 27वें राष्ट्रीय युवा महोत्सव का उद्घाटन भी करेंगे। राष्ट्रीय युवा महोत्सव प्रत्येक वर्ष 12 से 16 जनवरी तक आयोजित किया जाता है। 12 जनवरी को स्वामी विवेकानन्द की जयंती है। इस वर्ष इस महोत्सव की मेजबानी महाराष्ट्र कर रहा है। इस महोत्सव की थीम – विकसित भारत@2047 : ‘युवा के लिए, युवा के द्वारा’ है।

राष्ट्रीय युवा महोत्सव एक ऐसा मंच बनाना चाहता है जहाँ भारत के विभिन्न क्षेत्रों के युवा एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना में अपने अनुभव साझा कर सकें और एकजुट होकर राष्ट्र की नींव मजबूत कर सकें। पूरे देश से लगभग 7500 युवा प्रतिनिधि नासिक में आयोजित इस महोत्सव में भाग लेंगे। सांस्कृतिक प्रदर्शन, स्वदेशी खेल, भाषण और विषयगत आधारित प्रस्तुति, युवा कलाकार शिविर, पोस्टर मेकिंग, कहानी लेखन, युवा सम्मेलन, खाद्य महोत्सव आदि सहित विभिन्न कार्यक्रम इस महोत्सव के दौरान आयोजित किए जाएँगे।

विदेशी रहने और बसने का नहीं कर सकते दावा, कभी भी निकाल सकता है भारत: दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- नागरिकों के बराबर उनके अधिकार नहीं

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि विदेशी नागरिकों को भारत में रहने और बसने का अधिकार नहीं है। यह फैसला एक याचिका पर सुनवाई के बाद आया है, जिसमें एक विदेशी नागरिक ने भारत में रहने और बसने के अधिकार का दावा किया था। न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि भारत एक संप्रभु राज्य है और वह अपने नागरिकों और अन्य लोगों को देश में रहने और बसने के अधिकार देने के लिए स्वतंत्र है। न्यायालय ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19 में निहित अधिकार विदेशी नागरिकों पर लागू नहीं होता है।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत और न्यायमूर्ति मनोज जैन की खंडपीठ ने कहा कि विदेशियों या संदिग्ध विदेशी के मौलिक अधिकार केवल भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत घोषित जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार तक ही सीमित हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने बांग्लादेशी नागरिक अज़ल चकमा के परिवार द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को खारिज कर दिया।

अजल को अक्टूबर 2022 में दिल्ली के इंदिरा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से पकड़ा गया था। उस पर यह आरोप लगाया गया था कि उसने पहले बांग्लादेशी पासपोर्ट पर भारत की यात्रा की थी, लेकिन बाद में धोखाधड़ी से भारतीय दस्तावेज (पासपोर्ट सहित) प्राप्त कर लिए। हालाँकि, बाद में भारतीय अधिकारियों ने उसके पासपोर्ट को रद्द कर दिया।

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि संविधान के अनुच्छेद 21 में जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार सभी नागरिकों को दिया गया है, जिसमें विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। हालाँकि, दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के तर्क को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि अनुच्छेद 21 में शामिल “सभी” शब्द का अर्थ केवल भारतीय नागरिक हैं। अदालत ने कहा कि विदेशी नागरिक भारत में केवल वीजा के आधार पर रह सकते हैं और उनका वीजा किसी भी समय रद्द किया जा सकता है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ई) में निहित स्वतंत्रता का अधिकार केवल भारतीय नागरिकों को लागू होता है। विदेशी नागरिकों को इस अधिकार का लाभ नहीं मिलता है। दिल्ली हाईकोर्ट ने हंस मुलर ऑफ नूरेनबर्ग बनाम सुप्रीटेंडेंट, प्रेसीडेंसी जेल, कलकत्ता मामले में सुप्रीम कोर्ट के 1955 के फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें शीर्ष अदालत ने कहा था कि ‘विदेशियों को निष्कासित करने की भारत सरकार की शक्ति पूर्ण और असीमित है और इसमें कोई कमी नहीं है’।

न्यायालय ने कहा कि विदेशी नागरिक भारत में आने और रहने के लिए सरकार से अनुमति लेते हैं। यह अनुमति केवल एक निश्चित अवधि के लिए दी जाती है और इसे बाद में बढ़ाया जा सकता है या रद्द किया जा सकता है। इस फैसले का भारत में रहने वाले विदेशी नागरिकों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की संभावना है। यह फैसला यह स्पष्ट करता है कि विदेशी नागरिकों को भारत में रहने और बसने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है।

होटल से उठाकर जंगल ले गए और तीन अलग-अलग जगहों पर किया गैंगरेप: कर्नाटक केस में हिजाब वाली लड़की के दावे से नया मोड़, हिंदू पुरुष के साथ दिखने पर हुई थी पिटाई

कर्नाटक में एक होटल में घुसकर मुस्लिम युवकों द्वारा वहाँ ठहरे एक मुस्लिम महिला एवं एक हिंदू पुरुष की जोड़ी के साथ मारपीट करने का वीडियो वायरल हुआ था। इस मामले में अब एक नया खुलासा हुआ है। इस घटना की पीड़ित महिला ने आरोप लगाया है कि होटल से निकालने के बाद मुस्लिम युवक एक सुनसान जगह पर लेकर गए और वहाँ पर उसके साथ गैंगरेप किया।

सामने आए वीडियो में महिला का कहना है कि उसे होटल से अपह्रत करने के बाद ये मुस्लिम युवक उसे एक बाइक पर बैठाकर जंगल में ले गए। वहाँ तीन अलग-अलग जगह पर उसके साथ बलात्कार किया गया। महिला का कहना है कि इसके बाद इन 7 आरोपितों में से तीन युवकों ने उसे एक कार से बस स्टैंड पर छोड़ दिया। हमलावरों ने इस मुस्लिम महिला से सिरसी की बस में बैठने को कहा था। महिला वहीं की रहने वाली है।

वहीं, हावेरी के एसपी अंशू कुमार ने कहा, “हमें पहले बलात्कार के बारे में नहीं बताया गया था। हमें इस बात की जानकारी महिला के वीडियो के बारे में मीडिया रिपोर्ट से ही पता चली। हमने उचित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। जाँच जारी है।” पुलिस का कहना है कि इस मामले के आरोपित किसी संगठन से नहीं जुड़े हैं, लेकिन इन पर पहले भी ऐसा ही मुकदमा दर्ज किया जा चुका है।

क्या था पूरा मामला?

दरअसल, मामला कर्नाटक के हावेरी जिले का है और 7 जनवरी 2024 की है। उत्तर कन्नड़ जिले के रहने वाले एक हिन्दू युवक और एक मुस्लिम महिला होटल के एक कमरे में ठहरे थे। इसकी जानकारी मिलने पर अक्कीलुर के कुछ मुस्लिम युवक होटल पहुँच गए। वहाँ वीडियो बनाते हुए कमरे क उसका नम्बर रिकॉर्ड करते हैं। इसके बाद ये लोग दोनों को कमरा खोलने को कहते हुए धमकियाँ देते हैं।

कमरा खुलने पर ये कट्टरपंथी महिला और पुरुष, दोनों पर हमला कर देते हैं। महिला को एक मुस्लिम युवक इतनी बुरी तरीके से पीटता है कि वह जमीन पर गिर जाती है। इसके अलावा, हमलावर युवक मुस्लिम महिला और हिन्दू युवक को काफी भद्दी गालियाँ भी देते हैं।

इस दौरान हमलावर अपना चेहरा भी शान से दिखाते हैं। वीडियो में दिखता है कि मुस्लिम महिला पीटे जाने के बाद काफी समय तक जमीन पर बेसुध पड़ी रहती है। इसके बाद मुस्लिम युवक हिन्दू पुरुष की तरफ बढ़ते हैं और उसे मारने पीटने लगते हैं। इस दौरान हिन्दू पुरुष इनसे विनती करता है कि उसे ना मारें पीटे।

इस मामले में मुस्लिम युवक इसी बात पर हमला करते हैं कि मुस्लिम महिला एक हिन्दू पुरुष के साथ क्यों थी। मुस्लिम युवकों के मारपीट करने का यह वीडियो भी वायरल हो गया है। हिन्दू-मुस्लिम दम्पति पर हमला करने वाले इन मुस्लिम युवकों का नाम आफताब मकबूल अहमद चन्दनकट्टी(24), मदरसब मोहम्मद इसाक मन्दक्की (23) और समीउल्लाह ललनावर(23) है।इन मुस्लिम युवकों के खिलाफ महिला के शीलभंग करने, डराने धमकाने, दंगा करने, किसी के निजी क्षेत्र में जबरदस्ती घुसने और नुकसान पहुँचाने को लेकर मामला दर्ज किया है।

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बसावराज बोम्मई ने भी इस मामले की आलोचना की है। उन्होंने कहा है, “मुख्यमंत्री सिद्धारमैया जो मॉरल पुलिसिंग के बारे में बहुत बात करते हैं, वे इस विशेष घटना पर चुप क्यों हैं? क्या इसलिए कि उपद्रवी अल्पसंख्यक समुदाय से थे? सिद्धारमैया इस घटना पर अपना रुख स्पष्ट करें।”

घर से निकली 7 और 12 साल की महादलित बच्ची, अगली सुबह एक मरी मिली-दूसरी थी खून से लथपथ: रेप की घटना के बाद बिहार में भड़के लोग

बिहार में दो महादलित बच्चियों से रेप के मामले में अब तक अपराधी पकड़ से बाहर हैं। इस मामले में एक बच्ची की मौत हो गई थी, वहीं दूसरी की हालत नाजुक है। घटना पटना से सटे फुलवारीशरीफ के हिंदुनी बधार इलाके की है। बच्चियाँ जलावन के लिए लकड़ी लेने गई थी तभी दरिंदों ने इनको अगवा कर गैंगरेप को अंजाम दिया।

इस दरिंदगी से 7 साल की बच्ची की मौत हो गई। वहीं 12 साल की दूसरी बच्ची पटना के एम्स में जिंदगी की जंग लड़ रही है। इस मामले में अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं होने के कारण बुधवार (10 जनवरी 2024) को लोगों का गुस्सा भड़क उठा।

स्थानीय लोगों ने छह घंटे से अधिक वक्त तक राष्ट्रीय राजमार्ग के पटना-आरा हिस्से में जाम रखा। सहायक पुलिस अधीक्षक (एएसपी) विक्रम सिहाग ने कहा, “घटना की सटीक जानकारी के लिए हम दूसरी लड़की के ठीक होने का इंतजार कर रहे हैं। फोरेंसिंक टीम ने घटनास्थल से सुबूत जुटाए हैं। आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए डॉग स्कावॉड की मदद ली जा रही है।”

पुलिस ने मृतक बच्ची की माँ के बयान पर अज्ञात आरोपितों के खिलाफ IPC की धारा 302 (हत्या), 376 एबी (12 साल से कम उम्र की महिला संग बलात्कार के लिए सजा),120 बी (साजिश), धारा 307 (हत्या का प्रयास) और POCSO (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) एक्ट के तहत FIR दर्ज की है।

पुलिस और स्थानीय लोगों के मुताबिक, महादलित परिवारों की दो लड़कियाँ सोमवार (8 जनवरी 2024) को जलावन के लिए लकड़ी इकट्ठा करने गई थीं, लेकिन देर रात तक घर वापस नहीं लौटीं। 9 जनवरी की सुबह फुलवारी शरीफ में हिंदुनी गांव के आधे बने मकान के बाउंड्री वॉल के पीछे खेत में 7 साल की बच्ची की लाश मिली। वहीं 12 साल की दूसरी बच्ची खून से लहूलुहान बेहोश थी।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस ने बच्चियों के लापता होने का केस दर्ज नहीं किया। आरोपितों की गिरफ्तारी की माँग को लेकर पीड़ित महादलित परिवार संग सैकड़ों लोगों ने फुलवारी शरीफ गोलंबर जाम कर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की। लाेगाें ने दुष्कर्मियों को गिरफ्तार कर फाँसी की सजा और पीड़ित परिवार काे 20 लाख का मुआवजा देने की माँग की है।

पति जैसा दिखता था 4 साल का बेटा, इसलिए सूचना सेठ ने मार डाला? जिस कैब ड्राइवर के कारण पकड़ी गई उसने किए कई चौंकाने वाले खुलासे

गोवा के एक होटल में अपने 4 वर्षीय बच्चे की हत्या करने की आरोपित एक टेक कंपनी की CEO सूचना सेठ के बारे में नए खुलासे हुए हैं। पूछताछ में यह सामने आया है कि सूचना सेठ ने अपने पति से ₹2.5 लाख गुजारा भत्ता के तौर पर माँगे थे। वहीं, एक रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है कि बच्चे में उसके पिता का चेहरा नजर आता था, जो उसके बिगड़े रिश्ते की याद दिलाता था।

घटना के 48 घंटे बाद कर्नाटक से गिरफ्तार सूचना सेठ के चेहरे पर उसकी करतूत का कोई पछतावा नहीं दिखा। पुलिस को आशंका है कि सूचना ने आत्महत्या की भी कोशिश की थी। उसकी कलाई पर चोट के निशान और कमरे से कफ सिरफ के दो खाली बोतल मिले हैं। हालाँकि, वो बता नहीं पाई कि ये चोट कैसे लगे। पुलिस कड़ियों को जोड़ने के लिए मनोचिकित्सकों की भी सहायता लेगी।

पति पर कराया था घरेलू हिंसा का मुकदमा

सूचना सेठ की वेंकट रमन से नवम्बर 2010 में कोलकाता में शादी हुई थी। सूचना ने अपने जिस बेटे चिन्मय की हत्या की, उसका जन्म 14 अगस्त 2019 को हुआ था। कोरोना के दौरान पति-पत्नी के रिश्ते बिगड़ गए थे। इसके बाद दोनों ने तलाक के लिए कोर्ट में अर्जी डाला था। सूचना ने अगस्त 2022 में वेंकट रमण के खिलाफ घरेलू हिंसा का भी मुकदमा दायर किया था।

सूचना ने आरोप लगाया था कि वेंकट उसके साथ और उसके बेटे के साथ मारपीट करता है। उसने यह भी बताया कि उसके पति की महीने की कमाई ₹9 लाख से अधिक है, इसलिए उसे गुजारा भत्ता के रूप में महीने के ₹2.5 लाख चाहिए। यह बात अलग है कि सूचना खुद एक कम्पनी की सीईओ है और काफी अच्छा पैसा कमाती है।

सूचना और वेंकट के मुकदमे की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने आदेश दिया था कि बेटा सूचना सेठ के साथ रहेगा। साथ ही कोर्ट ने वेंकट को बच्चे से फ़ोन पर बात करने या सूचना के घर जाने पर भी रोक लगा दी थी। कोर्ट ने वेंकट को हर रविवार को बच्चे से मिलने की इजाजत दी थी। इससे सूचना काफी नाखुश थी। सूचना नहीं चाहती थी कि एक भी दिन वेंकट अपने बेटे से मिल पाए।

बच्चे में दिखता था पिता का चेहरा, पुलिस को कर रही गुमराह

एक रिपोर्ट में बताया गया है कि सूचना ने अपने सम्बन्धियों और करीबियों से बताया था कि उसे अपने बेटे में वेंकट का चेहरा दिखता है और दोनों के कड़वाहट भरे रिश्ते की याद आती है। यह भी सामने आया है कि बच्चे की हत्या से पहले उसके पिता ने सूचना को फ़ोन करके उससे मिलने की गुहार लगाई थी। तब सूचना ने कहा था कि वह किसी सार्वजनिक स्थान पर मिलवाने के लिए बच्चे को लाएगी।

हालाँकि, जिस जगह बच्चे से वेंकट को मिलना था, उस दिन वेंकट वहाँ पहुँचा भी था, लेकिन सूचना बच्चे को लेकर नहीं आई और वह गोवा चली गई। वहीं, वेंकट इंडोनेशिया चला गया। इसके बाद सूचना बच्चे को लेकर गोवा के एक होटल में गई और वहाँ बच्चे की हत्या करने के बाद उसकी लाश लेकर कर्नाटक की तरफ चली गई।

पुलिस का मानना है कि सूचना जाँच में सहयोग नहीं कर रही है और गुमराह करने की कोशिश कर रही है। पुलिस को सूचना ने बताया है कि जब वह सोई थी, तब उसका बेटा जीवित था, लेकिन जब वह सुबह उठी तो वह मृत मिला। हालाँकि, पुलिस को इस थ्योरी पर विश्वास नहीं है। पुलिस ने उसकी मानसिक स्थिति का पता लगाने के लिए जाँच करवाने का भी निर्णय लिया है।

ड्राईवर ने दिखाई होशियारी, नहीं होने दी पुलिस तक पहुँचने की भनक

इस पूरे कांड में सूचना के पकड़े जाने में उस टैक्सी ड्राईवर का अहमद रोल है, जिसकी गाड़ी में बैठकर वह गोवा से बेंगलुरु जा रही थी। इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए उस टैक्सी के ड्राइवर रॉयजॉन डिसूजा ने बताया है कि वह 8 जनवरी 2024 की रात साढ़े 12 बजे सूचना को गोवा से बेंगलुरु के लिए लेकर निकला था। सूचना होटल में उससे जल्दी की रट लगा रही थी।

हालाँकि, गोवा और कर्नाटक बॉर्डर पर पहुँचने पर ड्राइवर को जाम मिला। इस पर ड्राइवर ने सूचना को एयरपोर्ट छोड़ने की सलाह दी। सूचना इसके लिए राजी नहीं हुई। ड्राइवर को पुलिस ने होटल के कमरे में खून के धब्बे देख कर फ़ोन किया था। ड्राइवर ने बताया इसके बाद पुलिस ने कहा कि वह सूचना से बात करवाए। सूचना ने पुलिस को अपने बेटे के बारे में गलत जानकारी दी थी।

इसके बाद पुलिस ने ड्राइवर डिसूजा को कहीं आसपास के थाने में जाने को कहा। इसके बाद ड्राइवर डिसूजा एक रेस्टोरेंट पर बहाना बनाकर उतरा और वहाँ के गार्ड से आसपास के पुलिस थाने के बारे में पूछा। गार्ड ने डिसूजा को बताया कि 500 मीटर दूर ही एक पुलिस थाना है। इसके बाद वह ऐमन्गला पुलिस थाने पहुँचा। वहाँ सूचना के बैग की तलाशी ली गई तो उसमें उसके बेटे की लाश बरामद हुई।

इस मामले में यह बात भी सामने आई है कि सूचना सेठ होटल के जिस कमरे में रुकी थी, वहाँ कफ सिरप मिली है। माना जा रहा है कि उसने बेटे की हत्या काफ सिरप पिलाने के बाद किए से नाक-मुँह दबाकर किया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी यह बात सामने आई है कि बच्चे की हत्या किसी चीज से दबाकर की गई है।

क्या था पूरा मामला?

बता दें कि 39 वर्षीय सूचना सेठ एक टेक स्टार्टअप फाउंडर और माइंडफुल नाम की कम्पनी की CEO है। वह 6 जनवरी 2024 की शाम को अपने 4 साल के बेटे को साथ लेकर गोवा गई थी और वहाँ के एक होटल में ठहरी थी। उसने 7 जनवरी 2024 को जल्दी-जल्दी में अपना होटल छोड़ दिया। जब वह वापस निकली तो उसके साथ उसका बेटा नहीं था।

उसने होटल की रिसेप्शनिस्ट से कहा था कि उसे बेंगलुरु के लिए एक निजी टैक्सी चाहिए। होटल के कर्मचारियों ने कहा कि सूचना को फ्लाइट लेना चाहिए, लेकिन वह टैक्सी लेने पर अड़ी रही। इसके बाद जब उसे टैक्सी मिली तो वह वहाँ से एक बैग के साथ निकल गई। इस दौरान उसका बेटा नहीं दिखा। इस पर होटल के कर्मचारियों ने पूछा तो सूचना बोली कि उसे पहले ही घर भेज चुकी है।

सूचना सेठ के कमरा छोड़ने के बाद होटल के सफाई कर्मचारी उस कमरे की साफ-सफाई के लिए गए, जिसमें वह ठहरी हुई थी। सफाईकर्मियों ने कमरे में इधर-उधर खून बिखरा हुआ देखा। इसके बाद सफाई कर्मी ने होटल के प्रबन्धन को सूचित किया। होटल प्रबंधन ने इसके बारे में पुलिस को जानकारी दी। उन्होंने पुलिस को बताया कि महिला के उसका बेटा साथ में वापस जाता नहीं दिखा था।

पुलिस ने जब सूचना को फ़ोन किया तो उसने बताया कि उसका बेटा गोवा के फट्रोडा में है। वहाँ उसके दोस्त हैं। पुलिस ने जब इसकी जाँच की तो उसे शक हुआ। पुलिस ने सूचना को लेकर जा रही टैक्सी के ड्राइवर का नंबर निकाला और उसे फोन करके नजदीकी पुलिस थाने मेें जाने को कहा। ड्राइवर उस समय कर्नाटक के चित्रदुर्ग में था। थाने में बैग की जाँच में उसके 4 वर्षीय बेटे की लाश मिली।

नाबालिग को ले भागा आरिफ, कर दिया प्रेग्नेंट: दिल्ली हाई कोर्ट ने खत्म किया अपहरण-रेप का केस, कहा- सच्चा प्यार को कठोरता से कंट्रोल नहीं कर सकते

दिल्ली हाई कोर्ट ने नाबालिग लड़की के अपहरण और रेप के आरोप से आरिफ खान को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा है कि ‘सच्चा प्रेम’ को कार्रवाई की कठोरता से नियंत्रित नहीं किया जा सकता है। जिस लड़की को भगाकर ले जाने का आरिफ पर आरोप था, वह अब उसकी बीवी और दो बच्चों की अम्मा भी है।

बार ऐंड बेच की रिपोर्ट के अनुसार आरिफ के खिलाफ केस को रद्द करते हुए जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा ने कहा, “यह दो व्यक्तियों के बीच सच्चा प्यार है। इनमें एक या दोनों नाबालिग हो सकते हैं। इसको कानूनी कार्रवाई के जरिए नियंत्रित नहीं किया जा सकता है।”

यह मामला साल 2015 का है। आरिफ खान के खिलाफ नाबालिग लड़की के घरवालों ने शिकायत दर्ज करवाई थी। उस पर बेटी को अगवा करने और बलात्कार का आरोप लगाया था। इस मामले में आरिफ को 2015 से 2018 तक जेल भी काटनी पड़ी थी।

जब आरिफ को गिरफ्तार किया गया था तो उसके साथ बरामद हुई नाबालिग लड़की पाँच महीने की गर्भवती थी। नाबालिग ने बच्चे का गर्भपात करवाने से मना कर दिया था। उसने इसके पीछे आरिफ से अपने प्रेम को कारण बताया था। इस मामले की सुनवाई के दौरान लड़की के वकील ने दावा किया कि जब आरिफ उसे भगाकर ले गया था, तब वह 18 वर्ष की हो चुकी थी। हालाँकि, दिल्ली पुलिस ने इसका विरोध करते हुए कहा कि स्कूल के रिकॉर्ड के अनुसार वह 18 वर्ष से कम की थी।

दिल्ली हाई कोर्ट के सामने आरिफ खान ने अपने विरुद्ध दर्ज किए गए मामलों को खत्म करने की माँग की थी। कोर्ट ने इसी याचिका की सुनवाई करते हुए उसके खिलाफ दायर मुकदमे को रद्द कर दिया। इस दौरान कोर्ट ने कहा, “न्याय के तराजू पर चीजों को का संतुलन बनाने के लिए हमेशा आप गणितीय नम्बरों का सहारा नहीं ले सकते।” अदालत का कहना था कि इस मामले में कानूनी कठोरता से आरिफ, लड़की जो अब उसकी पत्नी है और उनकी दो बेटियों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।