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उस्मान ख्वाजा की अपील को ICC ने रद्दी की टोकरी में डाला, गाजा के समर्थन में बाँधी थी काली पट्टी: डाँट के बाद की थी अपील

पाकिस्तानी मूल के ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर उस्मान ख्वाजा को आईसीसी ने आईना दिखाते हुए उसकी अपील को खारिज कर दिया। आईसीसी ने कहा कि उसकी अपील सुनने लायक भी नहीं है। दिसंबर माह में पाकिस्तान के खिलाफ हुए टेस्ट मैच में बिना अनुमति बाँह पर काली पट्टी लगाने के मामले में ख्वाजा को रेफरी ने आधिकारिक तौर पर ‘डाँट’ लगाई थी। ऐसे मामले में अधिकतम सजा यही होती है। उस्मान ख्वाजा ने कहा था कि वो आईसीसी से इस ‘सज़ा’ के विरोध में अपील करेंगे, लेकिन ICC ने उनकी अपील पाते ही खारिज कर दी।

‘सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल ने उस्मान ख्वाजा की अपील को सुनवाई लायक ही नहीं माना कि इस पर आगे कोई बातचीत की जा सके। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया पर्थ में पाकिस्तान के खिलाफ पहले टेस्ट के दौरान मैदान पर काली पट्टी पहनने के लिए उस्मान ख्वाजा को आईसीसी ने फटकार लगाई थी। आईसीसी ने उनके खिलाफ प्रतिबंध हटाने की अपील को खारिज कर दी है। आईसीसी ने कहा कि नियमों को मानना ही पड़ेगा।

बता दें कि पर्थ टेस्ट के बाद पहले मुस्लिम ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर उस्मान ख्वाजा को आईसीसी ने कपड़े और उपकरण विनियमों के खंड एफ का उल्लंघन करने के लिए फटकारा था। उस्मान ख्वाजा ने कहा था कि वो आगे से ऐसा नहीं करेंगे, लेकिन इस ‘डाँट’ वाली सजा को हटाने के लिए अपील करेंगे। बता दें कि आईसीसी के नियमों के अनुसार, खिलाड़ी अपने कपड़ों या उपकरणों पर किसी भी व्यक्तिगत संदेश को प्रदर्शित करने से पहले क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया और आईसीसी से अनुमति लेना आवश्यक है। ख्वाजा ने ऐसा नहीं किया, इसलिए आईसीसी ने उन्हें फटकार लगाई है।

गौरतलब है कि उस्मान ख्वाजा का जन्म पाकिस्तान में हुआ था और वह ऑस्ट्रेलिया के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले पहले मुस्लिम हैं। उन्होंने बिना हमास की हरकत को देखे उस इजरायल का विरोध कर दिया, जिसने आतंकी संगठन हमास के खात्मे को अपना मकसद और इस युद्ध को अपने वजूद का सवाल बताया है।

इससे पहले, पाकिस्तान के खिलाफ पर्थ में हुए टेस्ट मैच से पहले की प्रैक्टिस में उन्होंने अपने जूते के निचले हिस्से पर कई रंगों से लिखा था, “सभी जिंदगियाँ बराबर हैं। (All Lives Are Equal) और आजादी लोगों का अधिकार है (Freedom is Human Right)।” इस पर भी काफी विवाद हुआ था। तब, आईसीसी ने उन्हें चेतावनी दी कि वो ऐसे जूता नहीं पहन सकते। इसके विरोध में उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट लिखी और कहा कि वो आईसीसी से इस बारे में बात करेंगे।

हालाँकि, पर्थ टेस्ट में वो विवादित जूते तो पहनकर मैदान में नहीं उतरे, लेकिन उन्होंने बिना अनुमति के ही बाँह पर काली पट्टी बाँधी। इसके बाद पड़ी फटकार के मामले में फिर से उन्हें झटका ही मिला है।

आँकड़ों के इस महाजाल से होकर जाता है मालदीव की बर्बादी का रास्ता, जो वहाँ की चीनपरस्त सरकार ने खुद चुना: यूँ ही नहीं PM मोदी के लक्षद्वीप दौरे से बेचैन हुआ इस्लामी मुल्क

भारतीय उपमहाद्वीप में हिंद महासागर में एक बेहद खूबसूरत द्वीपसमूह देश है, जिसका नाम है मालदीव (Maldives)। करीब 1200 द्वीपों में फैले सुन्नी मुस्लिम बहुल देश मालदीव एशियाई महाद्वीप की मुख्य भूमि से लगभग 750 किलोमीटर की दूरी पर श्रीलंका और भारत के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। नैसर्गिक छँटा बिखेरने वाला देश मालदीव भारत और यहाँ के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी के कारण चर्चा में है।

मालदीव भारत का पड़ोसी देश है, जिसके भारत के साथ ऐतिहासिक रूप से मधुर संबंध रहे हैं। हालाँकि, बदले भू-राजनीतिक परिदृश्य में मालदीव अपनी पारंपरिक नीतियों से अलग हटकर विपरीत दिशा में राह पकड़ लिया है, जिसके कारण भारत के साथ उसके रिश्तों में खटास पिछले कुछ दिनों से स्पष्ट रूप से दिख रही है।

बात शुरू होती है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारतीय केंद्रशासित राज्य लक्षद्वीप की यात्रा से। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 जनवरी 2024 को लक्षद्वीप की यात्रा की वहाँ पर स्थानीय लोगों से मुलाकात की। इसके बाद वहाँ की प्राकृतिक सुंदरता का लुत्फ उठाते हुए फोटो एवं वीडियो साझा किए। इसके बाद सोशल मीडिया पर यूजर इसे मालदीव से सुंदर बताते हुए इसे यहाँ आने की लोगों से आह्वान करने लगे।

सोशल मीडिया के यूजर, खासकर X (पूर्व में ट्विटर) पर लोग कहने लगे कि जो भारतीय अपनी छुट्टियाँ मनाने के लिए मालदीव जाते हैं, उन्हें मालदीव के बजाय लक्षद्वीप जाना चाहिए। इसके बाद वहाँ की सरकार की मानसिकता दिखने लगी। मालदीव की सरकार में मंत्री इसको लेकर भारत एवं प्रधानमंत्री मोदी पर कई ओछी टिप्पणी कर दी। सोशल मीडिया पर आलोचना झेलने के बाद आखिरकार उन्होंने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया।

इसके बाद मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद का एक बयान आया। उन्होंने रविवार (7 जनवरी 2024) को पोस्ट करके अपने देश की मंत्री मरियम शिनुआ द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को लेकर की गई टिप्पणी को भद्दा बताया है। इसके साथ ही उन्होंने मुइज्जू सरकार को सलाह दी कि वे अपनी मंत्री के बयानों से सरकार को अलग करें।

उन्होंने एक्स पर लिखा, “मालदीव की सरकार की एक मंत्री ने एक प्रमुख सहयोगी देश, जो कि हमारी सुरक्षा और समृद्धि के लिए जरूरी है, के प्रमुख के लिए किस तरह की भद्दी भाषा का इस्तेमाल किया है। मोहम्मद मुइज़्ज़ू की सरकार को इस बयान से अपने आप को अलग कर लेना चाहिए और भारत को यह बताना चाहिए कि यह हमारी सरकारी नीति नहीं है।”

मामले को बढ़ता हुआ देखकर आखिरकार मालदीव की सरकार ने अपने मंत्री के बयान से खुद को अलग कर लिया। मालदीव सरकार ने बयान जारी कर कहा, “मालदीव सरकार विदेशी नेताओं और उच्च पदस्थ व्यक्तियों के खिलाफ सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर अपमानजनक टिप्पणियों से अवगत है। ये राय व्यक्तिगत हैं और मालदीव सरकार के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करती हैं… इसके अलावा, सरकार के संबंधित अधिकारी ऐसी अपमानजनक टिप्पणी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने में संकोच नहीं करेंगे।”

दरअसल, मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू हैं। पिछले अक्टूबर में उनकी पार्टी पीपुल्स नेशनल कॉन्ग्रेस पार्टी को जीत मिली थी। पीपुलिस नेशनल कॉन्ग्रेस को चीन का समर्थक और भारत का विरोधी माना जाता है। आमतौर पर मालदीव में कोई भी सरकार बनती है तो वहाँ के राष्ट्रपति सबसे पहले पड़ोसी देश भारत की यात्रा करते हैं, लेकिन इस बार कुछ अलग हुआ।

राष्ट्रपति बनने के बाद मोहम्मद मुइज्जू ने सबसे पहले चीन जाने का निर्णय लिया। वे 8-12 जनवरी तक चीन की सरकारी यात्रा पर रहेंगे। इस दौरान चीन हिंद महासागर में अपनी ताकत बढ़ाने के तहत मालदीव को डोरे डालने की कोशिश करेगा। इसके पहले श्रीलंका में चीन ऐसा कर चुका है। चीन अपनी ऋण की जाल में फँसाकर श्रीलंका का हंबनटोटा बंदरगाह ले चुका है, जो भारत को चिंतित करने वाली बात है।

चूँकी मुइज्जू की सरकार भारत विरोधी है और वहाँ से भारतीय सेना की टुकड़ी को हटाने की माँग वो पहले भी करते रहे हैं, ऐसे में माना जा रहा है कि चीन के साथ मिलकर वो ऐसे फैसले ले सकते हैं, जो भारत के हित के खिलाफ हो। इसके लिए चीन लगातार प्रयास कर रहा है, लेकिन मुइज्जू से पहले वाली इब्राहिम मोहम्मद सोलिह के शासन में चीन कामयाब नहीं हो पाया था, क्योंकि सालिह भारत समर्थक माने जाते हैं।

ऐसे में भारत को जब इसकी भनक लगी तो भारत सतर्क हो गया। इसके पहले भारत मालदीव को 100 मिलियन डॉलर की सहायता दे चुका है। मोहम्मद मुइ्ज्जू की भारत विरोधी नीतियों एवं चीन की यात्रा की जानकारी भारत को परेशान करने का कारण बन गया, क्योंकि सबसे पहले चीन की राजकीय यात्रा करने का अर्थ है, भारत के मुकाबले चीन को ज्यादा तरजीह देना। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी लोकप्रियता का इस्तेमाल लक्षद्वीप में देकर मालदीव को एक संदेश देने की कोशिश की।

दरअसल, मालदीव की पूरी अर्थव्यवस्था पर्यटन पर आधारित है। यहाँ सबसे अधिक जाने वाले लोगों में भारतीय शीर्ष पर हैं। इसके बाद दूसरे स्थान पर आते हैं रूसी। साल 2023 में मालदीव सरकार ने जितनी उम्मीद की थी, उससे अधिक लोग मालदीव पहुँचे। मालदीव सरकार को 18 लाख लोगों को आने की उम्मीद थी, लेकिन पहुँचे 1,878,537 लोग। वहीं, साल 2022 में यह संख्या 16 लाख थी।

पिछले साल यानी 2023 में 2,09,100 भारतीय मालदीव गए थे। इतने ही रूसी भी वहाँ भ्रमण के लिए गए। इस तरह इन पर्यटकों के लिए 176 रिसॉर्ट, 809 गेस्टहाउस, 146 सफारी और 14 होटल का कारोबार चला। इन पर्यटकों की बदौलत मालदीव के 5,50,000 लोगों का जीवन-यापन चलता है। विश्व बैंक के अनुसार, मालदीव की अर्थव्यवस्था में पर्यटन क्षेत्र का एक-तिहाई योगदान है।

पर्यटन आय में वृद्धि के बावजूद महंगे तेल आयात और बड़ी निवेश परियोजनाओं के लिए पूँजी आयात के कारण मालदीव का साल 2022 में चालू खाता घाटा दोगुना होकर सकल घरेलू उत्पाद का 16.5 प्रतिशत हो गया। उच्च आयात लागत और विदेशी ऋण पुनर्भुगतान ने सकल विदेशी भंडार पर जबरदस्त दबाव डाला है। इस तरह जनवरी में 790 मिलियन अमेरिकी डॉलर से गिरकर जुलाई 2023 में यह 594.1 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया।

इतना ही नहीं, चीन के जाल में फँसे मालदीव को निकालने के लिए भारत ने पिछले साल नवंबर में 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 816 करोड़ रुपए) की आर्थिक मदद भी दी। IMF की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, मालदीव को सबसे अधिक कर्ज देने वाला देश चीन है, जिसने मालदीव को 1.5 बिलियन डॉलर (10,510 करोड़ रुपए) का कर्ज दे रखा है। मालदीव के कु विदेशी कर्ज का 20 प्रतिशत अकेला चीन ने दिया है।

ऐसे में अगर मालदीव की जगह भारतीय लक्षद्वीप जाना शुरू कर दें तो इससे ना सिर्फ पहले से खस्ताहाल और चीन के कर्ज में फँसा मालदीव बर्बादी के कगार पर आ जाएगा, बल्कि भारत में लक्षद्वीप एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में भी विकसित होगा। इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री की लोकप्रियता के कारण दूसरे देश को लोग भी मालदीव के बजाय लक्षद्वीप की ओर आने लगेंगे। मालदीव ने इसे एक संकेत के रूप में लिया है।

पूजा-जैकलीन से लेकर पंड्या-धवन तक, अर्जुन कपूर से लेकर रणदीप हुड्डा तक, लंबी हुई मालदीव के खिलाफ उतरे सेलेब्स की फेहरिस्त: कहा – लक्षद्वीप प्रकृति का स्वर्ग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लक्षद्वीप दौरे पर मालदीव की मंत्री मरियम शिउना और दूसरे नेताओं के बेतुके बयान को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर यानी एक्स पर #BycottMaldives ट्रेंड करने लगा। मालदीव सरकार ने इस पर सफाई देने के बाद इन दोनों मंत्रियों को रविवार (7 जनवरी,2024) को निलंबित कर दिया।

वहीं बॉलीवुड और क्रिकेट की हस्तियों ने पीएम मोदी का समर्थन करते हुए और उनकी बेइज्जती की बात उठाते हुए पीएम का जोरदार समर्थन किया। इससे एक्स पर #ExploreIndianIsland ट्रेंड कर रहा है। इस हैशटैग पर लगातार सेलेब्स पोस्ट कर रहे हैं। पीएम मोदी के लक्षद्वीप दौरे के बाद भारत के टूरिस्ट द्वीपों को बढ़ावा देने की माँग को सेलेब्स का खास समर्थन मिला है।

इस कड़ी में क्रिकेटर हार्दिक पांड्या, शिखर धवन, बॉलीवुड एक्टर अर्जुन कपूर, रणदीप हुड्डा सहित एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडिस और पूजा हेगड़े भी शामिल हो गए हैं। बताते चलें कि उनसे पहले बॉलीवुड स्टार अक्षय कुमार, जॉन अब्राहम, सलमान खान, कंगना रनौत, श्रद्धा कपूर सहित क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर सुरेश रैना भारतीय बीच को बढ़ावा देने के लिए फोटो सहित ट्वीट कर चुके हैं।

अभिनेत्री पूजा हेगड़े ने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट किया, “छुट्टियाँ बिताने और लक्षद्वीप की जीवंत संस्कृति में गोता लगाने का इंतज़ार नहीं कर सकती!एक ऐसी मंजिल जो न महज आँखो को ही नहीं बल्कि दिल को भी लुभा लेती है।#ExploreIndianIslands”

अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस ने एक्स हैंडल पर पोस्ट किया, “2024 को यात्रा और घर के पास सुंदर और दर्शनीय स्थलों की खोज में बिताना चाहती हूँ। मेरी लिस्ट में सबसे ऊपर प्रकृति का स्वर्ग लक्ष्वादीप द्वीप है। इस वंडरलैंड के बारे में इतना सुना है कि मैं वहाँ जाने के लिए अब और इंतजार नहीं कर सकती!!!”

रणदीप हुड्डा ने पोस्ट किया, “भारत बहुत सुंदर है। वीर सावरकर के जीवन के कालापानी चैप्टर की शूटिंग के दौरान अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की मौलिक सुंदरता और समृद्ध इतिहास से अभिभूत हो गया था.. जरूर जाएँ।”

वही एक्टर अर्जुन कपूर ने ट्वीट किया, “खूबसूरत लक्षद्वीप द्वीपों को अपनी बकेट लिस्ट में जोड़ रहा हूँ। हमारे देश के ये स्थल सिर्फ मानचित्र के निशान नहीं हैं; ये आतिथ्य, विविध संस्कृतियों और लैंडस्केप का अनुभव करने के लिए निमंत्रण हैं, जो भारत को घूमने के लिए एक अविश्वसनीय जगह बनाते हैं।”

वहीं क्रिकेटर हार्दिक पांड्या ने ट्वीट किया, “भारत के बारे में जो कहा जा रहा है उसे देखकर बेहद दुख हुआ। अपने भव्य समुद्री जीवन, सुंदर समुद्र तटों के साथ, लक्षद्वीप एक आदर्श जगह है और पक्के तौर से ये मुझे अपनी अगली छुट्टियों में वहाँ जरूर जाना चाहिए।”

क्रिकेटर शिखर धवन भी पीछे नहीं रहे। उन्होंने पोस्ट किया, “भारत के लिए एक सरकारी मंत्री (मालदीव) के नकारात्मक रुख को ‘निजी राय’ करार दिया जाना निराशाजनक है। मैं इस तरह के बर्ताव की निंदा करते हुए और मालदीव और भारत के बीच सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए एक राजनयिक समाधान की माँग करता हूँ।”

विरेंद्र सहवाग भी पीएम मोदी के समर्थन में उतरते हुए पोस्ट किया,”चाहे वह उडुपी के खूबसूरत समुद्र तट हों, पोंडी में पैराडाइज बीच, अंडमान में नील और हैवलॉक और हमारे देश भर में कई अन्य खूबसूरत समुद्र तट हों, भारत में ऐसी कई अज्ञात जगह हैं जिनमें कुछ बुनियादी ढाँचे के सहारे के साथ बहुत अधिक संभावनाएं हैं।”

सहवाग ने आगे लिखा, “भारत सभी आपदाओं को अवसर में बदलना जानता है और मालदीव के मंत्रियों के हमारे देश और हमारे प्रधानमंत्री पर यह कटाक्ष भारत के लिए पर्यटकों के लिए आकर्षक बनाने और हमारी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए जरूरी बुनियादी ढाँचे के निर्माण करने का एक बड़ा अवसर है। कृपया अपने पसंदीदा अज्ञात खूबसूरत जगहों के नाम बताएँ।”

social media ExploreIndianIslands trends after maldives ministers comment over pm modi Lakshadweep visit

कप्तान रोहित शर्मा, विराट कोहली की भी वापसी: वर्ल्ड कप से पहले T20 टीम में लौटे दोनों दिग्गज, पंड्या-सूर्या बाहर

अफगानिस्तान के खिलाफ खेली जाने वाली 3 मैचों की सीरीज के लिए रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे धुरंधरों की टी-20 टीम में वापसी हुई है। जून महीने में वेस्टइंडीज में खेले जाने वाले वाले टी-20 विश्वकप से पहले दोनों का भारतीय टीम में वापस आना सुखद संकेत हैं। दोनों ही खिलाड़ी 2022 से T20 टीम से बाहर चल रहे थे। रोहित शर्मा और विराट कोहली एक बार फिर से भारतीय टीम के लिए विश्वकप जीत का सपना देखने लगे होंगे। वैसे, रोहित शर्मा ने टीम में लौटने के साथ ही कप्तानी भी सँभाल ही है।

भारतीय टीम से सूर्य कुमार यादव और हार्दिक पांड्या दोनों ही चोट की वजह से बाहर हैं। दोनों को ही कुछ मैचों से कप्तानी की जिम्मेदारी दी जा रही थी। वहीं, रोहित शर्मा की जगह हार्दिक पांड्या को मुंबई इंडियंस का भी कप्तान बना दिया गया था, जिसके बाद से माना जा रहा था कि रोहित शर्मा शायद ही इस फॉर्मेंट में दोबारा खेलें। लेकिन रोहित शर्मा ने कप्तान के तौर पर इस फॉर्मेट में वापसी की है।

रोहित शर्मा और विराट कोहली की अगुवाई में मजबूत भारतीय टीम को अफगानिस्तान के खिलाफ उतारा जा रहा है, जिसमें जोशीले युवाओं को भी जगह मिली है। संजू सैमसन एक बार फिर से टीम में शामिल हुए हैं, तो ऑलराउंडर के दौर पर शिवम दुबे को भी मौका मिला है। वहीं, रिंकू सिंक और मुकेश कुमार को भी टीम में जगह मिली है।

बता दें कि भारतीय टीम के मुख्य चयनकर्ता अजित अगरकर हाल ही में दक्षिण अफ्रीका गए थे, जहाँ भारतीय टीम टेस्ट सीरीज खेल रही थी। उन्होंने विराट कोहली और रोहित शर्मा को टीम में वापसी के लिए मनाया।

अफगानिस्तान के खिलाफ घोषित की गई भारतीय टीम इस प्रकार है-

रोहित शर्मा (कप्तान), शुभमन गिल, यशस्वी जायसवाल, विराट कोहली, जितेश शर्मा (विकेट कीपर), संजू सैम्सन (विकेट कीपर), तिलक वर्मा, रिंकू सिंह, शिवम दुबे, वाशिंगटन सुंदर, अक्षर पटेल, रवि बिश्नोई, कुलदीप यादव, अर्शदीप सिंह, आवेश खान और मुकेश कुमार।

बता दें कि विराट कोहली और रोहित शर्मा ने साल 2022 में टी-20 विश्वकप के सेमीफाइनल में हार के बाद से एक भी अंतर्राष्ट्रीय मुकाबला नहीं खेला। अब अफगानिस्तान के खिलाफ टी-20 टीम वापसी से रोहित शर्मा और विराट कोहली के लिए आगामी विश्वकप में भाग लेने की उम्मीदें बढ़ गई हैं। ये टी-20 विश्वकप वेस्टइंडीज और अमेरिका में संयुक्त रूप से आयोजित किए जाएँगे, जिसका शेड्यूल जारी कर दिया गया है। भारतीय टीम अपने सारे मुकाबले अमेरिका में खेलेगी।

मालदीव के 3 मंत्री बर्खास्त: PM मोदी पर अपमानजनक टिप्पणी से आया राजनीतिक भूचाल, 2 पूर्व राष्ट्रपतियों ने भी की निंदा

रविवार का दिन मालदीव की राजनीति के लिए अच्छा नहीं रहा। भारत विरोध के दम पर सत्ता में आए राष्ट्रपति मोहम्मद मोइज्जू को इस कदर बैकफुट पर आना पड़ा कि उनके अपने ही तीन खास मंत्रियों को बर्खास्त करना पड़ा। खास बात ये है कि अब तक मोइज्जू की चुनावी जीत में इन चेहरों ने अहम भूमिका निभाई थी, जिन्हें पीएम मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के बाद बढ़े दबाव के बीच हटाना पड़ा। भारत सरकार नहीं, बल्कि भारतीयों से मिल रही तीखी प्रतिक्रिया को देखते हुए मालदीव की सरकार ने ये कदम उठाया।

भारत ने मालदीव की सरकार के सामने तीन मंत्रियों के विवादित बयानों को लेकर अपनी बात रखी थी। इसके बाद मालदीव की सरकार ने मंत्री मालशा शरीफ, मरियम शिउना और अब्दुल्ला महज़ूम माजिद को उनके पदों से हटा दिया है। मालदीव के एटोल टाइम्स की रिपोर्ट में बताया गया है कि इस विवाद को बढ़ाने वाले मंत्रियों को हटा दिया गया है।

मरियम शिउना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लक्ष्यदीप यात्रा के बाद उनका अपमान किया था। उन्होंने पीएम मोदी को जोकर कहा था और उनका वीडियो शेयर किया था। हालाँकि विरोध बढ़ने पर उन्होंने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया। लेकिन भारत में विरोध तेजी से बढ़ने लगा। सरकार ने आधिकारिक तौर पर नाराजगी जताई।

भारत के नाराजगी जताने के बाद मालदीव के विदेश मंत्रालय ने अपमानजनक टिप्पणी करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी जारी की थी। फिर एक घंटे बाद ही मरियम शिउना और मालशा शरीफ के साथ-साथ युवा मंत्रालय के एक अन्य उप मंत्री महज़ूम माजिद को निलंबित कर दिया गया। राष्ट्रपति कार्यालय के एक अधिकारी ने निलंबन की पुष्टि की।

इस मामले में मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह की प्रतिक्रिया भी सामने आई थी। उन्होंने कहा था कि मैं सोशल मीडिया पर मालदीव सरकार के मंत्रियों द्वारा भारत के खिलाफ इस्तेमाल की जा रही घृणास्पद भाषा की निंदा करता हूँ। भारत हमेशा मालदीव का एक अच्छा दोस्त रहा है और हमें इस तरह की कठोर टिप्पणियों को हमारे दोनों देशों के बीच सदियों पुरानी दोस्ती पर नकारात्मक प्रभाव डालने की अनुमति नहीं देनी चाहिए।

मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद और पूर्व विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद ने भी पीएम मोदी के खिलाफ मरियम शिउना की अपमानजनक टिप्पणी की निंदा की और इसे ‘भयानक भाषा’ बताया। वहीं, पूर्व विदेश मंत्री अहमद अदीब ने लंबा पोस्ट करके मंत्रियों के बयानों की निंदा की।

दरअसल, चीन के समर्थन से भारत विरोधी माहौल बनाकर सत्ता में आए मोहम्मद मोइज्जू को इस बात का जरा भी अंदेशा नहीं था कि वो जिन भावनाओं को अपने सहयोगियों के नाम पर भड़का रहे हैं, उसमें उनका हाथ खुद ही जल जाएगा। अब तक भारत विरोधी भावनाओं को भड़काने में लगभग सफल रहे और इंडिया आउट का नारा देकर सत्ता में आए मोइज्जू भारत को आँख ही दिखा रहे थे। उनकी सरकार ने भारत द्वारा दिए गए नौसैनिक डॉर्नियर विमान और उसे मैनेज करने वाली टीम को वापस करने के लिए कहा था।

यही नहीं, मोइज्जू ने भारत से एक सर्वे काम भी छीन लिया था और उसे चीन के हाथों में सौंपने की तैयारी कर ली थी। लेकिन इस विवाद के बाद अब मोइज्जू बैकफुट पर हैं। इस बार सिर्फ भारत की सरकार ही नहीं, आम लोग भी मोइज्जू के खिलाफ खड़े नजर आ रहे हैं। मालदीव की पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था में अधिकांश हिस्सा भारतीयों का है, ऐसे में भारतीयों ने मालदीव का बहिष्कार शुरू कर दिया, तो देश पर आने वाली तंगहाली को देखते हुए मोइज्जू को अपने मंत्रियों को सस्पेंड करना पड़ा है।

जिसने राम के अस्तित्व पर उठाए सवाल, पत्रकार ने उसके हाथों अवॉर्ड लेने से कर दिया इनकार: ‘जय श्री राम’ से गूँज उठा दर्शक दीर्घा

‘मुंबई तरुण भारत’ के संपादक तरुण शेलार को पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए दर्पणकार बालशास्त्री जांभेकर साहित्य पुरस्कार दिया जा रहा था। शुक्रवार (5 जनवरी, 2024) को आयोजित दर्पणकर बालशास्त्री जांभेकर मेमोरियल पुरस्कार कार्यक्रम में मंच से कार्यक्रम के अध्यक्ष, मराठी दैनिक समाचार पत्र ‘देशोन्नति’ के संपादक – प्रकाश पोहारे द्वारा उन्हें सम्मानित किया जाना था। इस दौरान मंच से सभी लोगों ने अपनी राय रखी, जिसमें प्रकाश पोहारे ने तमाम मुद्दों के साथ ही भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठा दिया।

इस बात से नाराज तरुण शेलार ने मंच से ही नाराज़गी जताई और उनके (प्रकाश पोहारे) हाथों पुरस्कार लेने से ही मना कर दिया। इसके बाद मराठी दैनिक समाचार पत्र ‘दैनिक प्रहार’ के संपादक सुकृत खांडेकर ने दर्पणकार बालशास्त्री जांभेकर साहित्य पुरस्कार से सम्मानित किया।

महाराष्ट्र में 6 जनवरी को बालशास्त्री जांभेकर द्वारा शुरू की गई अंग्रेजी और मराठी पत्रिका ‘दर्पण’ के पहले प्रकाशन की स्मृति में पत्रकार दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिन्हें नई मराठी पत्रकारिता का अग्रदूत भी कहा जाता है। उन्होंने 6 जनवरी 1832 को ‘दर्पण’ शुरू किया। मुंबई मराठी पत्रकारिता लेखक संघ (2001 में स्थापित) अपना स्थापना दिवस मनाता है और 5 जनवरी को बालशास्त्री जांभेकर की स्मृति में हर साल एक पत्रकार को पुरस्कार देता है। इस वर्ष यह पुरस्कार किरण शेलार को प्रदान किया जा रहा है।

बालशास्त्री जांभेकर को मराठी पत्रकारिता का पुरोधा माना जाता है (फोटो साभार: नेशन नाउ)

महा एमटीबी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कार्यक्रम का आयोजन मुंबई मराठी ग्रंथ संग्रहालय के सुरेंद्र गावस्कर मेमोरियल हॉल में किया गया था। इस अवसर पर पत्रकारों और लेखकों का एक लिटरेचर-फेस्टिवल भी आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुंबई विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ भालचंद्र मुनगेकर थे। मंच पर अन्य गणमान्य व्यक्तियों में सिसिलिया कार्वाल्हो और सुकृत खांडेकर शामिल थे। इस कार्यक्रम का अध्यक्ष प्रकाश पोहरे को बनाया गया था। मुंबई के दादर इलाके में इस कार्यक्रम के लिए मुंबई मराठी पत्रकारिता लेखक संघ के अध्यक्ष एकनाथ बिरवाडकर और संघ के अन्य पदाधिकारी और कई पत्रकार, लेखक और अन्य लोग उपस्थित थे।

पुरस्कार समारोह से पहले सभी अतिथियों ने अपने विचार रखे। प्रकाश पोहरे ने भी अपने विचार व्यक्त किये। अपने भाषण के दौरान, उन्होंने भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाया और राम मंदिर के साथ-साथ अयोध्या में मंदिर के आगामी अभिषेक समारोह के लिए चल रही भव्य तैयारियों की भी आलोचना की। इसके बाद प्रकाश पोहरे ने दलितों, जनजातीय समाज, वंचितों आदि की समस्याओं पर बात रखी।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए किरण शेलार खड़े हुए और कहा, ”इस देश की जो समस्याएँ पहले के वक्ताओं ने उठाई हैं, वे वास्तविक हैं और भगवान श्री राम का अस्तित्व भी वास्तविक है। इसलिए मुझे उन लोगों से पुरस्कार नहीं चाहिए जो मानते हैं कि श्री राम एक कल्पना हैं, मैं इसे स्वीकार नहीं करूँगा। हालाँकि, मैं मराठी पत्रकारिता के पुरोधा बालशास्त्री जाम्भेकर का अपमान नहीं करना चाहता। इसलिए मुंबई मराठी पत्रकारिता लेखक संघ को यह निर्णय लेना चाहिए कि पुरस्कार देना है या नहीं।”

पुरस्कार समारोह में बोलते हुए किरण शेलार (फोटो साभार: महा एमटीबी)

पुरस्कार स्वीकार न करने के किरण शेलार के रुख का सभागार में मौजूद लोगों ने ‘जय श्री राम’ के नारे के साथ भव्य स्वागत किया। दर्शकों ने भी उन्हें अवॉर्ड से ज्यादा इस स्टैंड के लिए बधाई दी। इसके बाद आयोजकों ने किरण शेलार को ‘प्रहार’ के संपादक सुकृत खांडेकर के हाथों पुरस्कार प्रदान किया। बाद में किरण शेलार ने इस घटना के बारे में अपने सोशल मीडिया पेज पर विस्तार से जानकारी दी।

ये समाचार मूल रूप से गोपाल तिवारी द्वारा अंग्रेजी में लिखा गया है। मूल लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

पाकिस्तान के खैबर-पख्तूनख्वा में अज्ञात बंदूकधारियों ने 4 को उतारा मौत के घाट, इनमें 2 सुरक्षाकर्मी: गाड़ियों पर ताबड़तोड़ गोलीबारी

पाकिस्तान के उत्तर पश्चिम खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में रविवार (7 जनवरी, 2024) को दो यात्री वाहनों पर गोलीबारी की गई। कुर्रम जिले सद्दा बाजार इलाके में हुए इस हमले में दो सुरक्षाकर्मियों सहित कम से कम चार लोगों की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गए।

पुलिस और सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। अभी तक किसी भी समूह ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। जिला पुलिस अधिकारी (DPO) मुहम्मद इमरान के मुताबिक बंदूकधारियों ने स्वचालित हथियारों से एक कार और एक यात्री कोच को निशाना बनाया।

हादसे के तुरंत बाद पुलिस, सुरक्षा बल और बचाव दल घटनास्थल पर पहुँचे। उन्होंने लाशों और घायलों को नजदीकी अस्पताल में पहुँचाया गया। पाराचिनार जिला मुख्यालय अस्पताल के उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ कैसर अब्बास ने पुष्टि की कि घायल लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा है।

स्वास्थ्य अधिकारी के मुताबिक, घायलों की हालत गंभीर है और उनका अस्पताल की इंटेंसिव केयर यूनिट इलाज किया जा रहा है। बताते चलें कि ये इलाका सुन्नियों और शियाओं के बीच सांप्रदायिक हिंसा के लिए जाना जाता है।

इस हादसे के बाद तूरी बंगश की स्थानीय जनजातियों ने हमलों के बारे में रणनीति पर फैसला करने के लिए आपातकालीन बैठक बुलाई है। बताते चलें कि बीते महीने, गिलगित-बाल्टिस्तान के चिलास में एक यात्री बस पर आतंकवादी हमले में नौ लोग मारे गए थे और 25 घायल हो गए थे।

साल 2023 में सामान्य तौर पर पाकिस्तान में और खास तौर से खैबर पख्तूनख्वा में आतंकी वारदातों में खासा इजाफा हुआ है। इस प्रांत में 419 आतंकवादी हमले हुए। इनमें 620 लोग मारे गए थे। मरने वालों में 306 सुरक्षा बल के जवान, 222 नागरिक और 92 आतंकवादी शामिल थे।

‘बाथरूम में जाकर रोता था, आते थे आत्महत्या के ख्याल’: व्लॉगर ने बताया ‘बिग बॉस’ में कैसे किया जाता हैं टॉर्चर, कहा – सलमान खान ने…

यूट्यूबर अनुराग डोभाल ने बिग बॉस के 17वें सीजन से बाहर आने के बाद बड़े खुलासे किए हैं। ‘बाबू भैया’ के नाम से मशहूर यूट्यूबर अनुराग डोभाल ने बिग बॉस के निर्माताओं और सलमान खान पर कई आरोप जड़े हैं और आत्महत्या की तरफ धकेलने का आरोप भी लगाया है। उन्होंने यह सारी दास्तान अपने यूट्यूब चैनल पर डाली है।

उत्तराखंड के देहरादून के रहने वाले अनुराग डोभाल एक लाइफस्टाइल व्लॉगर हैं। उनके यूट्यूब चैनल पर 70 लाख से अधिक सब्सक्राइबर हैं। अनुराग डोभाल ने कहा है कि बिग बॉस में घर के अंदर उनके साथ बदसलूकी हो रही थी। उनके साथ बाकी कंटेस्टेंट ने भी बदसलूकी की।

अनुराग का कहना है कि बिग बॉस में उन्हीं लोगों को अधिक दिखाया गया जो कि आगे उनके काम आने वाले थे, बाकी लोगों को कोई जगह नहीं दी गई। उन्होंने कहा है कि सब कुछ पहले से ही फिक्स है। उन्होंने बिग बॉस के विजेता को लेकर भी सवाल खड़े किए।

उन्होंने कहा है कि वहाँ वही जीतेगा जो कि पहले से तय है। साथ अनुराग का कहना है बिग बॉस में जाने वाले साधारण लोग नहीं जीत सकते। अनुराग का कहना है कि अंदर घर में बिग बॉस कपल्स को सपोर्ट कर रहा था ना कि बाकी लोग। अनुराग का कहना है कि उनके फैनबेस का मजाक उड़ाया गया।

अनुराग ने सलमान खान पर भी आरोप लगाए हैं। अनुराग ने बताया है कि सलमान खान ने उनसे बात करना ही बंद कर दिया था। अनुराग का कहना है कि वह अंदर अपना सम्मान बचाने की कोशिश कर रहे थे। अंदर उनसे कोई बात नहीं कर रहा था। अनुराग ने कहा है कि बिग बॉस में उनसे ये बताया गया कि उनके मम्मी पापा को बुलाया गया लेकिन वह आए नहीं जबकि असल में उन्हें बुलाया ही नहीं गया था। उन्होंने कहा- “मैं वहाँ बाथरूम में जाकर रोता था।”

बिग बॉस में मुझसे वॉक ऑफ़ शेम करवाई: अनुराग

अनुराग डोभाल ने एक और बड़ा खुलासा बिग बॉस के बारे में किया है। अनुराग ने कहा कि वहाँ उनको वॉक ऑफ़ शेम करवाई गई। उनको ऐसा दिखाया गया कि जैसे उन्होंने शो की इज्जत खराब की। उन्होंने कहा है कि यहाँ उन्हें शर्म लिखी गई तख्ती पकड़ाई गई और उनसे चलवाया गया। उन्होंने कहा कि पूरे सीजन भर उनको ताने मारे गए।

डोभाल ने बताया है कि दीवाली वाले दिन भी उनको बहुत परेशान किया गया। उनके घरवालों की वीडियो उनको नहीं दिखाई गई। इसके लिए उनको बहुत परेशान किया गया। उनसे उलटे सीधे काम करवाए गए। अनुराग ने कहा है, “मुझे पहले ही पता था बिग बॉस से मुझे निकालने का पहले ही निर्णय हो चुका था। एक बार जब उनका प्लान फेल हो गया तब दोबारा उन्होंने यही किया।” अनुराग ने कहा, “दो दिनों तक होटल में मुझे बंद करके रखा और मेरे घरवालों से बात नहीं करने दिया जिसके कारण मुझे आत्महत्या के विचार आए।”

हाथ जोड़ता रहा पुलिसवाला, भीड़ छुड़ा ले गई मोस्ट वांटेड करीम को: बिहार के जहानाबाद की घटना, टीम पर भी हमला

बिहार से एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। जहानाबाद में पुलिस वाला भीड़ के आगे हाथ जोड़ता दिखा कि उसे एक मोस्ट वांटेड अपराधी को पकड़ लेने दिया जाए। लेकिन, भीड़ ने एक नहीं सुनी और अपराधी मौका देख वहाँ से फरार हो गया।

यह घटना शहर के फिदा हुसैन रोड पर शनिवार (6 जनवरी, 2024) की शाम हुई। यहाँ डीआईयू पुलिसवालों की टीम एक मोस्ट वॉन्टेड आरोपित श्याम करीम को गिरफ्तार करने पहुँची थी। करीम के खिलाफ डकैती और लूट सहित कई अन्य केस दर्ज हैं।

हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, वो बीते कई साल से फरार चल रहा था। टीम ने सादे लिबास में पहुँच वांछित यानी वॉन्टेड आरोपित को गिरफ्तार कर लिया था। इस दौरान वहाँ भीड़ उसके बचाव में उतर आई। भीड़ ने पुलिसवालों के साथ धक्का-मुक्की ही नहीं बल्कि हाथापाई कर उस वॉन्टेड को छुड़ा ले गई।

शहर थाना इंचार्ज इंस्पेक्टर निखिल कुमार के मुताबिक, सिविल लाइन थाना के नगमतिया रोड के रहने वाले श्याम करीम की आपराधिक केस में डीआईयू को तलाश थी। उसके सिर पर 50 हजार का इनाम रखा गया था।

उन्होंने आगे बताया कि मोबाइल टावर लोकेशन में उसकी मौजूदगी जहानाबाद शहर के फिदा हुसैन रोड पर मिली थी। सूचना मिली थी कि वो वहाँ अपने रिश्तेदार के यहाँ कार्यक्रम में शामिल होने आया था।

इंस्पेक्टर निखिल कुमार के मुताबिक, उसे पकड़ने के लिए डीआईयू पुलिस वहाँ सादे लिबास में पहुँची थी। सूचना पाकर शहर थाना पुलिस भी इस टीम के पीछे गई थी, लेकिन इससे पहले ही भीड़ ने वहाँ डीआईयू टीम पर हमला बोल दिया। उनके हथियारों को झिड़क दिया। हाथापाई हुई और सारे हंगामे का फायदा उठा वांटेड वहाँ से फरार हो गया।

उन्होंने आगे बताया कि इतने में वहाँ शहर थाना पुलिस पहुँची और हालात पर काबू पा लिया। इस केस में तहकीकात कर एक शख्स को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ की जा रही है।

राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले मुंबई में बड़ी आतंकी साजिश का पर्दाफाश: ATS ने गेस्ट हाउस पर छापा मार 6 को दबोचा, हथियार भी जब्त

एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड की मुंबई यूनिट ने एक गेस्ट हाउस पर छापेमारी की और 6 बदमाशों को धर दबोचा। उनके पास से ATS ने 3 पिस्टल और 36 राउंड गोलियाँ बरामद की हैं। गिरफ्तार किए गए बदमाश दिल्ली और यूपी से ताल्लुक रखते हैं और मुंबई में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने पहुँचे थे। लेकिन एटीएस ने उनके मंसूबों को ध्वस्त करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

गणतंत्र दिवस को देखते हुए मुंबई पुलिस और आतंकवाद निरोधी दस्ता लगातार अपराधियों के खिलाफ अभियान छेड़े हुए हैं। इसी क्रम में एटीएस को सूचना मिली थी कि कुछ हथियारबंद लोग एक बोरीबली के एक गेस्ट हाउस में हैं। ये लोग किसी वारदात को अंजाम देने की योजना पर काम कर रहे हैं। सूचना पाते ही एटीएस सक्रिय हो गई और छापेमारी कर सभी बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया। इस दौरान किसी तरह की गोलीबारी की खबर नहीं आई है।

मुंबई में एटीएस ने बताया कि मुखबिर की सूचना पर बोरीबली स्थित एक गेस्ट हाउस में ये छापेमारी की गई। इस दौरान एटीएस ने 6 बदमाशों को गिरफ्तार किया है। इन बदमाशों के पास से 3 पिस्टल और 36 राउंड गोलियाँ बरामद हुई हैं। ये बदमाश किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए पहुँचे थे। शुरुआती छानबीन में पता चला है कि ये लोग दिल्ली के रहने वाले हैं। कुछ का ताल्लुक यूपी से भी है।

जाँच में जुटी एटीएस

एक साथ इतने अपराधियों के गिरफ्त में आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं। सुरक्षा एजेंसियों का ये भी कहना है कि अभी इन लोगों का कोई बाहरी लिंक नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि जल्द ही इस अपराधियों से पूछताछ पूरी हो जाएगी। सूत्रों ने बताया है कि 22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा से पहले आतंकी भी किसी बड़ी वारदात को अंजाम दे सकते हैं। इसी लिए सुरक्षा बल पहले से ही तैयार हैं।