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डेटिंग ऐप पर मिले, 4 दिन तक बार-बार बनाए यौन संबंध… लड़की भेजती थी ‘डर्टी’ मैसेज: रेप आरोपित को दिल्ली HC ने दी जमानत

दिल्ली हाईकोर्ट ने डेटिंग ऐप के जरिए दोस्ती और फिर महिला-पुरुष के बीच बने शारीरिक संबंधों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है। कोर्ट ने झाँसी का देकर महिला से रेप करने के आरोपित को जमानत देते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि दोनों वैवाहिक ऐप पर नहीं, बल्कि डेटिंग ऐप पर मिले थे।

दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश विकास महाजन ने यह भी कहा कि रेप का आरोप लगाने वाली महिला और आरोपित पुरुष के बीच आदान-प्रदान किए गए टेक्स्ट मैसेज से पता नहीं चलता है कि आरोपित ने शादी का कोई प्रस्ताव दिया था। इतना ही नहीं, महिला ने भी शादी का कोई प्रस्ताव नहीं रखा। पीड़िता ने यह माना कि दोनों के बीच शारीरिक संबंध सहमति से बने थे।

अदालत ने कहा, “इसमें कोई विवाद नहीं है कि शिकायतकर्ता (महिला) और याचिकाकर्ता (आरोपित पुरुष) एक डेटिंग ऐप Hinge पर मिले थे, न कि किसी वैवाहिक ऐप पर। उनके बीच कई व्हाट्सएप मैसेजेज का आदान-प्रदान हुआ है। किसी भी मैसेज में याचिकाकर्ता द्वारा शादी का कोई वादा प्रस्ताव नहीं रखा गया है।”

अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता महिला ने जिरह के दौरान कहा कि याचिकाकर्ता आरोपित ने अपनी शैक्षणिक योग्यता के बारे में झूठ बोला। इसके बावजूद चार दिनों तक उसने उसके साथ बार-बार यौन संबंध बनाए। इतना ही नहीं, याचिकाकर्ता के मोबाइल फोन में मिलीं पीड़िता की अश्लील तस्वीरों और वीडियो के संबंध में पीड़िता ने स्वयं स्वीकार किया है कि यह उसकी सहमति से ली गई थी।

महिला ने यह भी कहा था कि आरोपित ने उससे अपनी उच्च शिक्षा को लेकर झूठ बोला था। इसको लेकर कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता आरोपित ने अपनी शैक्षणिक योग्यता के बारे में झूठ बोला था, तब भी शिकायतकर्ता महिला चार दिनों तक एयरबीएनबी में उसके साथ रही और बार-बार उसके साथ यौन संबंध बनाए।

कोर्ट ने कहा कि दोनों बार-बार मिले और शारीरिक संबंध बने। इसमें शादी का झूठा वादा कहाँ से आ गया। वहीं, झूठी डिग्री को लेकर कोर्ट ने कहा कि शारीरिक संबंध बनाते समय उच्च शिक्षित होने का रूतबा मायने नहीं रखती है। कोर्ट ने कहा कि दोनों के बीच जब ह्वाट्सऐप चैट हो रहा था, तब शिकायतकर्ता महिला शिकायतकर्ता को कामुक कहानियाँ और बातें भेजा करती थी।

दरअसल, अदालत एक व्यक्ति द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उसने जमानत माँगी थी। इस व्यक्ति के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 (रेप) और 420 (धोखाधड़ी) के तहत मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में याचिकाकर्ता आरोपित और शिकायतकर्ता महिला हिंज ऐप पर मिले थे और फिर प्यार में पड़ गए।

महिला का आरोप है कि उस दौरान आरोपित ने कहा था कि उसने आईआईटी खड़गपुर से इंजीनियरिंग, यूके एवं न्यूजीलैंड से डबल मास्टर्स और लंदन के किंग्स कॉलेज से पीएचडी किया है। बाद में पता चला कि लड़के ने सिर्फ बीएससी किया है। शिकायतकर्ता महिला ने यह भी दावा किया कि उसने आरोपित को उसके इलाज के लिए लगभग 1.20 करोड़ रुपए दिए थे।

हालाँकि, बेंच ने माना कि पीड़िता ने ये पैसे आरोपित से प्यार और लगाव की वजह से दिए थे। इस आधार पर कोर्ट ने आरोपित को 25 हजार रुपए के निजी मुचलके पर आरोपित को नियमित जमानत दे दी। आरोपित 13 मई 2022 से ही जेल में बंद है।

नेहरू वाला अनाथालय, बच्चियों के साथ राहुल गाँधी की तस्वीर! लड़कियों के लिए बाथरूम में दरवाजे तक नहीं, कॉन्ग्रेस के प्रोपेगंडा की NCPCR अध्यक्ष ने खोल दी पोल

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा द्वारा फैलाए जा रहे प्रोपेगंडा का तगड़ा जवाब दिया है। विवेक तन्खा ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) का इस्तेमाल करते हुए लिखा कि अगर भारत को वैश्विक शक्ति और 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना है तो केंद्र सरकार को एक्शन में आना होगा NCPCR जैसे संगठनों को नियंत्रित करना होगा। उन्होंने NCPCR पर सासनीख़ेज होने का आरोप लगाते हुए कहा कि ये भारत की छवि को खराब कर रहा है।

बता दें कि NCPCR आजकल मिशनरियों द्वारा चलाए जा रहे अवैध छात्रावासों और मदरसों में बच्चों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार को लेकर सक्रिय रहता है। साथ ही हिन्दू छात्र-छात्राओं को ईसाई मिशनरियों और इस्लामी मौलवियों द्वारा अपने मजहब के तौर-तरीके सिखाए जाने के खिलाफ भी बाल आयोग एक्शन में है। इससे मिशनरी-मौलवी गिरोह को खासी मिर्ची लगी हुई है। प्रियंक कानूनगो ने विवेक तन्खा को जवाब देते हुए कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी का एक ट्वीट शेयर किया।

इस ट्वीट में राहुल गाँधी ने 2 तस्वीरें डाली हैं, जिनमें वो बच्चों के साथ दिख रहे हैं। राहुल गाँधी इस दौरान ‘स्वराज भवन’ के ‘चिल्ड्रेन्स नेशनल इंस्टिट्यूट’ पहुँचे हुए थे। साथ ही उन्होंने कैप्शन में लिखा कि उनके चुनावी प्रचार अभियान की शानदार शुरुआत हुई है, कई मुस्कुराहटों और काफी मात्रा में ऊर्जा के साथ दिन की शुरुआत हुई है। प्रियंक कानूनगो ने इस ट्वीट का स्क्रीनशॉट शेयर करते समय नाबालिग बच्चों के चेहरों को ढँक दिया। साथ ही उन्होंने ‘पत्रिका’ की एक खबर शेयर की।

उन्होंने जवाब दिया, “प्रयागराज में आनंद भवन परिसर में जहाँ आपके नेता राहुल गाँधी प्रयागराज प्रवास के दौरान रेस्ट करते थे और चुनाव अभियान के दौरान ऊर्जा ग्रहण करते थे, वहीं गाँधी परिवार द्वारा चलाए जा रहे बग़ैर लायसेंस के अनाथ आश्रम में किशोर वय अनाथ लड़कियों के बाथरूम में दरवाज़े नहीं लगाए गए थे, अनाथ बच्चियों को परिवारों में गोद नहीं दिया जाता था, विदेशी फ़ंडिंग भी आती थी। यह सब मेरे द्वारा किए गए NCPCR के निरीक्षण में उजागर हुआ।”

साथ ही उन्होंने बताया कि कैसे निरीक्षण के बाद FIR दर्ज की गई। प्रियंक कानूनगो ने कहा कि इस से देश की बदनामी नहीं हुई बल्कि विवेक तन्खा की पार्टी और गाँधी ख़ानदान का सच उजागर हुआ। उन्होंने राज्यसभा सांसद को जवाब देते हुए लिखा, “आप सम्मानित सांसद हैं कृपया गांधी परिवार को ‘देश’ मानना बंद करिए, भारत बहुत महान देश है।” बता दें कि इसी ‘स्वराज भवन’ में चल रहे अनाथालय में भारी अनियमितताएँ सामने आई थीं।

‘चिल्ड्रेन्स नेशनल इंस्टिट्यूट’ का गठन भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भारत के खंडित होने के बाद किया था। वहाँ अनाथ बच्चियों को रखा जाता था। 17 से 29 साल तक की लड़कियाँ यहाँ रखी गई थीं। प्रियंक कानूनगो ने अपने निरीक्षण के बाद आदेश दिया था कि बाथरूम में दरवाजे लगाए जाएँ। वहाँ रह रहीं बच्चियों की असुरक्षा का मामला भी सामने आया था। डीएम के सामने भी ये मामला आया था। फिर लड़कियों को दूसरे सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया गया था।

बच्चे/बच्चियों का रेप करने वालों को मिले मानसिक उपचार… समाज में शामिल हो सकें: केरल HC, नाबालिग छोटी बहन का रेप करने वाले को दी जमानत

केरल हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा है कि POCSO (बच्चों के साथ यौन अपराध) मामलों में बंद अपराधियों के लिए मनोरोग के उपचार वाली व्यवस्थाएँ की जाए। यह बात कोर्ट ने एक नाबालिग के बलात्कार के मामले को सुनते हुए कही। कोर्ट ने नाबालिग के बलात्कारी, जो कि उसका बड़ा भाई है, उसे जमानत भी दे दी।

केरल हाई कोर्ट ने कहा कि राज्य की जेलों और बाल सुधार गृहों में बंद POCSO जैसे मामलों के आरोपितों/दोषियों को मनोरोग उपचार या मनोचिकित्सा देने के लिए एक स्कीम बनाई जानी चाहिए। इसके लिए केरल हाई कोर्ट ने केरल के स्वास्थ्य विभाग और केरल राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को मिलकर ऐसी स्कीम लाने के लिए कहा है। ताकि POCSO के अपराधी वापस समाज में सामान्य जीवन जी पाएँ और समाज की मुख्यधारा में शामिल हो सकें। केरल हाई कोर्ट ने इसके अंतर्गत अलग-अलग उपायों की बात की है।

केरल हाई कोर्ट ने साथ ही में राज्य के शिक्षा विभाग को कहा है कि वह उनके स्कूलों में ऐसी व्यवस्था करें ताकि यौन हिंसा की पीड़िताओं की विशेष देखभाल की जाए और उनके प्रति संवेदनशीलता दर्शाएँ। कोर्ट ने कहा है कि राज्य के शिक्षा संस्थानों में पढ़ने वाली यौन पीड़िताओं को किसी भी प्रकार से अलग पहचान नहीं दी जानी चाहिए।

कोर्ट ने यह सारी बातें एक ऐसे मामले को सुनते हुए कहीं, जिसमें केरल के मलप्पुरम जिले में एक 19 वर्षीय युवक ने अपनी 13 वर्षीय नाबालिग बहन का बलात्कार किया था। केस के अनुसार आरोपित ने ऐसा ड्रग्स के नशे में किया था। पीड़िता का इस मामले में कहना है कि उसके द्वारा इसकी शिकायत करने के कारण उसका परिवार बिखर गया है, इसलिए वह दुखी है। हालाँकि, पीड़िता अपने आरोपों पर डटी हुई है। पीड़िता और उसकी माँ ने बताया है कि इससे पहले भी आरोपित हिंसक प्रवृत्ति दिखाता था।

अपनी बहन के आरोपों से उलट आरोपित ने अपनी याचिका में कहा था कि वह निर्दोष है, उसे जमानत दी जानी चाहिए। हालाँकि, सरकारी वकील ने इस युवक को जमानत दिए जाने का विरोध किया। कोर्ट ने ऐसे मामलों में विशेषज्ञता रखने वाले एक संगठन VRC की मदद भी ली थी। VRC से जुड़ी वकील मेनन ने पीड़िता और आरोपित दोनों से बात की।

वकील मेनन ने कहा है कि आरोपित नशा जरूर करता था लेकिन आदतन नशेड़ी नहीं है। हालाँकि, उसके साथ गुस्से सम्बन्धी समस्याएँ जरूर हैं। वकील मेनन ने कहा कि परिवार का एकीकरण अभी नहीं होना चाहिए क्योंकि अपराधी और पीड़िता भाई बहन हैं। वकील मेनन की ही सलाह पर पीड़िता के लिए निर्देश जारी किए गए।

वहीं कोर्ट ने कहा कि आरोपित युवक को मई में हिरासत में लिया गया था, अब उसे और अधिक दिन हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं है, इसलिए जमानत दी जानी चाहिए। कोर्ट ने आरोपित को जमानत देते हुए उसके गृह जिले में ना जाने का आदेश दिया है।

कुछ दिन पहले एक अन्य मामले में केरल हाई कोर्ट ने 12 वर्षीय एक नाबालिग लड़की को गर्भपात की इजाजत देने से मना कर दिया था। वह अपने ही नाबालिग भाई से सम्बन्ध बनाने के कारण गर्भवती हो गई थी।

ISRO में नहीं होता लैंगिक भेदभाव, सीनियर्स ने हमेशा सपोर्ट किया : Aditya L-1 मिशन को जिस महिला ने किया कामयाब, जानें उनकी कहानी

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने आदित्य एल-1 (Aditya L-1) मिशन को पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर ‘लैग्रेंज प्वाइंट 1’ पर सफलतापूर्वक पहुँचाकर नया इतिहास रचा। इस अभियान के कामयाब होते ही एक बार फिर एक महिला साइंटिस्ट चर्चा में आ गईं।

इस बार इसरो को गौरवान्वित करने वाली महिला का नाम है- निगार शाजी। उन्होंने ही इस पूरे प्रोजेक्ट को लीड किया और 8 साल तक इस पर काम करके इसकी सफलता सुनिश्चित की। अब उनके मुस्कुराते चेहरे से इस कामयाबी की खुशी का अंदाजा लगाया जा सकता है।

आइए आज इन्हीं निगार शाजी के बारे में जानें

तमिलनाडु के तेनकासी जिले के सेनगोट्टई में निगार का जन्म हुआ था। स्कूली शिक्षा उन्होंने सेनगोट्टई से ली। बाद में मदुरै कामराज विश्वविद्यालय के तहत तिरुनेलवेली के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन लिया। यहाँ से उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन में इंजीनियरिंग की डिग्री ली। और फिर, बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मेसरा से इलेक्ट्रॉनिक्स में मास्टर डिग्री हासिल की।

आज उनकी उम्र करीबन 59 वर्ष है। साल 1987 में उन्होंने इसरो ज्वाइन किया था। शुरू में वह आंध्र प्रदेश के पास श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष बंदरगाह पर काम कर रही थीं। बाद में उन्हें बेंगलुरु के यू आर राव सैटेलाइट सेंटर भेजा गया। इसरो में रहते हुए वह कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स से जुड़ीं। जानकारी के मुताबिक आदित्य एल-1 से पहले वह रिसोर्ससैट-2 ए के सहयोगी परियोजना निदेशक थीं। इसके अलावा निचली कक्षा और ग्रहीय मिशनों के कार्यक्रम की निदेशक भी हैं।

पारिवारिक बैकग्राउंड की बात करें तो शाजी एक किसान परिवार से आती हैं। उनके पिता शेख मीरान भी किसान हैं। हाल में उन्होंने कहा था- “मेरे माता-पिता दोनों ने मेरे पूरे बचपन में मेरा बहुत सहयोग किया। उनके निरंतर समर्थन के कारण ही मैं इतनी ऊँचाई तक पहुँचीं।”

उन्होंने इसरो में होने वाले किसी भी प्रकार के लैंगिक भेदभाव को नकारा और कहा कि इतने सालों में उन्हें कभी भेदभाव नहीं झेलना पड़ा। उलटा वो तो अपने सीनियर्स को उनकी कामयाबी का श्रेय देती हैं। उन्होंने हाल में कहा था, “टीम लीडर होने के नाते मेरे अंडर में कई लोग काम करते हैं। मैं भी उन्हें उसी तरह से तैयार करती हूँ जैसे मेरे वरिष्ठों ने मुझे तैयार किया था।”

बंगाल में जिन ED अधिकारियों पर हमला, उन्हीं के खिलाफ ‘महिला का शीलभंग’ की FIR: भगोड़े शाहजहाँ शेख ने कहा – ‘ममता बनर्जी हमारे लिए काम कर रही’

पश्चिम बंगाल के उत्तरी 24 परगना में प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। यह FIR ED की टीम पर संदेशखाली में हुए हमले के एक दिन बाद दर्ज की गई। इस हमले में ED के कई अधिकारी घायल हुए थे। यह हमला TMC नेता शाहजहाँ शेख के घर तलाशी लेने पहुँची ED की टीम पर हुआ था।

जानकारी के अनुसार, ED के अधिकारियों के खिलाफ यह FIR तृणमूल कॉन्ग्रेस के भगोड़े नेता शाहजहाँ शेख के घर की देखभाल करने वाले एक व्यक्ति करवाई है। FIR एक महिला का शीलभंग करने की कोशिश और घर में जबरदस्ती घुसने को लेकर करवाई गई है।

गौरतलब है कि 5 जनवरी, 2024 को पश्चिम बंगाल के उत्तरी 24 परगना जिले के संदेशखाली में राशन घोटाले में संलिप्त TMC नेता और जिला परिषद सदस्य शाहजहाँ शेख के घर तलाशी लेने गई थी। यहाँ पर ED की टीम और उनके साथ गए CRPF के सुरक्षाकर्मियों पर शाहजहाँ शेख के गुंडों ने हमला कर दिया।

इस हमले में कुछ ED अधिकारियों को गंभीर चोटें आईं। ED के अधिकारियों की गाड़ियाँ भी तोड़ दी गईं और उनके फ़ोन, पर्स और लैपटॉप आदि भी छीन लिए गए। ED का कहना है कि यह हमला शाहजहाँ शेख के भड़कावे पर हुआ था। इस हमले के बाद राज्य के विपक्ष ने बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने की माँग की थी। ED पर हमले के बाद उसी के अधिकारियों के खिलाफ FIR भी करवा दी गई। राज्य में बीते दिनों में केन्द्रीय एजेंसियों का काम करना काफी मुश्किल हो रहा है।

ED पर बंगाल में हुए हमले के बाद तीन FIR दर्ज हुई हैं। एक FIR ईडी के खिलाफ जबकि बाकी दो हमला करने वालों के खिलाफ दर्ज हुई हैं। ED पर हमला करवाने वाला शाहजहाँ शेख अभी भी फरार है। शक है कि वह बांग्लादेश भाग सकता है। उसका एक कथित ऑडियो टेप भी सामने आया है। इसमें उसने कहा है कि ED और CBI से डरना नहीं है। उसका कहना है कि ममता बनर्जी ने उन सबके लिए संदेशखाली में काम किया है।

शाहजहाँ शेख द्वारा करवाए गए हमले में घायल ED के दो अधिकारियों को अस्पताल से छुट्टी मिल गई है जबकि एक अभी स्थिर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं। इस हमले के एक दिन बाद शनिवार को भी ED पर बंगाल में राशन घोटाले की जाँच के दौरान हमला हुआ। TMC नेता शंकर आद्या की गिरफ्तारी के दौरान भी ED की टीम को निशाना बनाया गया।

कुछ दिन पहले ही ईडी ने पश्चिम बंगाल में राशन घोटाले का खुलासा किया था। इसके तहत सार्वजनिक वितरण प्रणाली का लगभग 30% राशन खुले बाज़ार में बेचा गया था। राशन की इस कथित चोरी से हुए फायदे को मालिकों और PDS वितरकों ने मिलकर आपस में बाँट लिया था।

शादी का वादा करके सेक्स करना रेप नहीं अगर प्रेमी-प्रेमिका शादी कर ले: सुप्रीम कोर्ट का फैसला, बलात्कार आरोपित को राहत

शादी का वादा करके रेप करने के आरोपों वाले बढ़ते मामलों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है। एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि शादी का वादा करके शारीरिक बनाना झूठा है, क्योंकि बाद में दोनों ने शादी कर ली थी। इसके बाद शीर्ष न्यायालय ने आरोपित के खिलाफ दर्ज रेप की एफआईआर को रद्द करने का आदेश दे दिया।

कोर्ट ने माना कि मामला सहमति वाले संबंध का है और आखिरकार दोनों की शादी भी हो गई। इसलिए झूठे वादे का आरोप में आधार नहीं है। न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और न्यायमूर्ति पंकज मिथल की खंडपीठ ने कहा, “आरोप है कि झूठे वादे के कारण शारीरिक संबंध बने। ये आरोप निराधार है क्योंकि उनका रिश्ता बाद में विवाह में बदल गया।”

अदालत ने यह भी कहा, “यह ऐसा मामला है, जहाँ एफआईआर में लगाए गए आरोप ऐसे हैं कि बयानों के आधार पर कोई भी विवेकशील व्यक्ति कभी भी इस निष्कर्ष पर नहीं पहुँच सकता है कि अपीलकर्ता के खिलाफ आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त आधार है।”

दरअसल, यह पूरा मामला तीसरे पक्ष यानी लड़की के पिता द्वारा दायर शिकायत पर आधारित है। दरअसल, लड़की के पिता ने आरोप लगाया कि आरोपित दिल्ली में आईआईटी कोचिंग क्लासेस चला रहा है। उसकी बेटी और आरोपित मिले और एक-दूसरे से प्रेम करने लगे। इसके बाद आरोपित ने पीड़िता को शादी का आश्वासन दिया और बाद में आर्य समाज मंदिर से विवाह का प्रमाण पत्र तैयार करा लिया।

लड़की के पिता ने अपने आरोप में आगे कहा कि आरोपित लड़के ने धोखाधड़ी करके उसकी पीड़िता बेटी के साथ शारीरिक संबंध बनाकर रखा। इसके बाद आरोपित ने पीड़िता को उसके पिता के घर पर छोड़ दिया। इसके बाद आरोपित के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई। इसको लेकर आरोपित लड़के ने हाईकोर्ट में एफआईआर रद्द करने की अर्जी दी, लेकिन हाईकोर्ट ने इससे इनकार कर दिया।

हाईकोर्ट में याचिका खारिज होने के बाद आरोपित ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। सुप्रीम कोर्ट में जिरह के दौरान अपीलकर्ता के वकील ने 25 साल की पीड़िता द्वारा जारी की गई एक नोटिस का हवाला दिया। इस नोटिस में पीड़िता ने स्वीकार किया है कि उसके और अपीलकर्ता आरोपित के बीच विवाह संपन्न हुआ था।

अदालत ने कहा कि नोटिस के अनुसार, पीड़िता को अपीलकर्ता की पत्नी बताया गया है। नोटिस में यह भी स्वीकार किया गया कि अपीलकर्ता और पीड़िता के बीच विवाह संपन्न हुआ था। नोटिस में ये आरोप लगाया गया कि अपीलकर्ता ने पीड़िता को अपने घर से इस आधार पर भगा दिया कि उसके पिता ने 50 लाख रुपए चाहते थी। इस प्रकार, उस नोटिस द्वारा पीड़िता ने अपीलकर्ता से ‘तलाक’ की व्यवस्था करने के लिए कहा था।

छत्रपति शिवाजी महाराज के किले में बना लिया था अवैध मदरसा, कर दिया गया समतल: ऑपइंडिया की खबर का असर

5 जनवरी 2024 को महाराष्ट्र के कोल्हापुर के पावनगड़ में स्थित एक अवैध मदरसा राज्य सरकार ने जमींदोज कर दिया। मौके पर पुलिस प्रशासन की भारी मौजूदगी रही। मदरसे को गिराए जाने के वक्त किसी को भी उसके आसपास जाने की इजाजत नहीं दी गई। इस मदरसे पर ऑपइंडिया ने जुलाई 2023 में एक ग्राउंड रिपोर्ट प्रकाशित की थी और यहाँ अवैध कब्जे के बारे में बताया था।

हिन्दू संगठनों ने भी इस मामले में प्रशासन से शिकायत की थी, जिसके बाद यह मदरसा गिराया गया। मदरसे को चुपचाप 5-6 जनवरी 2024 को गिरा दिया गया। मदरसा गिराने की कार्रवाई रात 2 बजे चालू हुई और सुबह 9 बजे तक चलती रही। इस अवैध कब्जे को खाली करवाने के लिए कोल्हापुर के एसपी समेत अन्य बड़े अधिकारी पावनगड़ किले में एक दिन पहले से ही रुके हुए थे। यह इलाका राजस्व विभाग के अंतर्गत आता है।

पावनगड़ के जिस किले में यह मदरसा बनाया गया है, उसे छत्रपति शिवाजी महाराज ने वर्ष 1673 में बनाया था, यहाँ अब काफी बड़ी मुस्लिम आबादी रहती है। इस मदरसे को 1979 में मुस्लिम आबादी के सहारे इस्मा सैयद ने बनवाया था। वर्तमान में यहाँ बिहार और पश्चिम बंगाल के 45 बच्चे दीनी तालीम ले रहे थे। इन्हें शिरोली में स्थित एक मदरसे में 5 जनवरी की शाम को भेज दिया गया।

इस इलाके की सुरक्षा के लिए 400 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। इस मदरसे को गिराने को लेकर प्रशासन ने चुपचाप काम किया। मदरसे को 6 जनवरी 2024 की दोपहर तक पूरी तरह जमींदोज कर दिया गया। इस दौरान इलाके के तहसीलदार समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

स्थानीय हिन्दू समुदाय इस मदरसे के बारे लगातार शिकायतें कर रहा था। उनका कहना था कि ‘मदरसा जामिया अरबिया जीनतुल कुरान’ यहाँ सरकारी जमीन पर बनाया गया था और इसमें पढ़ने वाले सभी छात्र दिल्ली, बंगाल और बिहार जैसे राज्यों से आते हैं।

बजरंग दल ने भी इस मामले में आवाज उठाई थी। उसने अपने पत्र में लिखा था, “पावनगढ़ के ऐतिहासिक किले पर बना मदरसा अवैध है और यहाँ पढ़ने वाले छात्र महाराष्ट्र के नहीं हैं। इस तरह के अवैध अतिक्रमण से किले का ऐतिहासिक महत्व प्रभावित हो रहा है। किले पर मुस्लिमों ने भी घर बना लिए हैं। हम अवैध कब्जे के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग करते हैं और किले की पवित्रता बनाए रखने के लिए इस कब्जे को हटाने की भी माँग करते हैं।”

महाराष्ट्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि मदरसा सरकारी जमीन पर ही बना है और इस मामले में जाँच जारी है। जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

‘मुस्लिम नहीं देगा हर बार कुर्बानी’ : राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा से पहले ‘सेकुलर’ नेता लगा रहे कट्टरपंथ की आग, 22 जनवरी को लेकर फैला रहे डर

अयोध्या में होने वाले राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा को लेकर जहाँ देश भर में खुशी का माहौल है। हर समुदाय उल्लास में डूबा है। मुस्लिम महिलाएँ तक भगवा वस्त्र पहन पहनकर अयोध्या के लिए रवाना हो रही हैं। ऐसे समय में खुद को सेकुलर बताने वाले कट्टरपंथी नेताओं ने भड़काऊ बयानबाजी की है। किसी ने मुस्लिमों को बाबरी के नाम पर भड़काया है तो किसी ने उन्हें राम मंदिर के नाम पर डराया है।

इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल के प्रमुख मौलाना तौकीर रजा ने राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि हर बार मुसलमान कुर्बानी नहीं देगा। उन्होंने कहा, “हमसे हमारी मस्जिद छीनी जा रही है। इस बात को हम बर्दाश्त नहीं कर सकते। ये बात किसी से छिपी नहीं है कि भाजपा को हमारी अजान से भी दिक्कत है।”

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा, “सुप्रीम कोर्ट का फैसला पहले से तय था, जिसने ये निर्णय दिया उसे राज्यसभा भेज दिया गया।”

इसी तरह असम के बारपेटा के ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट अध्यक्ष बदरुद्दीन अजमल ने भी मुस्लिम युवाओं में डर फैलाते हुए कहा कि 20 से 25 जनवरी तक सारे मुसलमानों को अपने घर में रहना होगा।

उन्होंने कहा, “हमें सतर्क रहना होगा। मुसलमानों को 20 से 25 जनवरी तक यात्रा करने से बचना चाहिए। पूरी दुनिया राम जन्मभूमि में रामलला की मूर्ति स्थापित होते देखेगी। लाखों लोग बसों, ट्रेनों, हवाई जहाज आदि से यात्रा करेंगे। शांति बनाए रखनी होगी।” अजमल ने कहा, “इस दौरान हमें यात्रा करने से बचना होगा और घर ही रहना होगा। भाजपा मुसलमानों की सबसे बड़ी दुश्मन है। यह हमारे जीवन, आस्था, मस्जिदों, इस्लामी कानूनों और अजान की दुश्मन है।”

गौरतलब है कि जहाँ ये नेता राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा पर माहौल बिगाड़ने के प्रयास में लगे हैं। वहीं काशी की मुस्लिम महिलाएँ अयोध्या पहुँच रही हैं। कल ही खबर आई थी कि नाजनीन अंसारी नाम की महिला ने कहा कि धर्म परिवर्तन कर लेने से पुरखे नहीं बदल जाते। भगवान श्रीराम ही मुस्लिमों के पूर्वज हैं। नाजनीन ने कहा है कि वो मुस्लिमों से अपील करेंगी कि वो लोग भी राम ज्योति प्रजवलित करें।

भारत के खिलाफ उगला जहर तो मालदीव के राष्ट्रपति, विदेश मंत्रालय की वेबसाइट हुई डाउन, PM मोदी के ट्वीट के बाद बिलबिलाए चीन के चमचे

मालदीव के राष्ट्रपति और विदेश मंत्रालय समेत तमाम सरकारी विभागों की वेबसाइट 6 जनवरी, 2024 की रात को चलना बंद हो गईं। इनके एकाएक रुकने के पीछे हैकिंग का शक जताया गया। गौरतलब है कि इससे पहले मालदीव के कई अकाउंट्स ने प्रधानमंत्री मोदी के लक्षद्वीप दौरे और भारत को लेकर अपमानजनक ट्वीट किए थे।

6 जनवरी की रात को इन सभी वेबसाइट ने काम करना बंद कर दिया। हालाँकि, मालदीव की सरकार ने इसके पीछे तकनीकी खराबी का कारण दिया। बड़ी संख्या पर सोशल मीडिया में इसे मालदीव के लोगों द्वारा किए गए अपमानजनक ट्वीट का बदला कहा गया। जानकारी के अनुसार, अब यह सभी वेबसाइट दोबारा चालू हो चुकी हैं।

गौरतलब है कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लक्षद्वीप का दौरा किया था और विदेशों में जाने से पहले यहाँ लोगों को घूमने की सलाह दी थी। मालदीव का हाल के दिनों में भारत के प्रति रवैया भी काफी बदला है और इसके नए राष्ट्रपति मुहम्मद मुइज़्ज़ू चीन के पिछलग्गू माने जाते हैं।

भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स के लक्षद्वीप को बढ़ावा देने पर मालदीव के कई बड़े नामवर अकाउंट्स चिढ़ गए और भारत, प्रधानमंत्री मोदी समेत भारतीय संस्कृति पर कई अपमानजनक बातें कहीं। यह सब कहने वालों में मुइज़्ज़ू की सरकार में शामिल कुछ मंत्री भी थे।

इसके बाद भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स ने मालदीव को करारा जवाब दिया और याद दिलाया कि वर्ष 1988 में मात्र 100 लड़ाकों ने मालदीव पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद भारतीय सेना ने ऑपरेशन कैक्टस चला कर उनकी जान बचाई थी और उनके देश पर कब्ज़ा नहीं होने दिया था।

मालदीव की मुईज़्ज़ू सरकार में युवा मामलों की राज्य मंत्री मरियम शिउना ने प्रधानमंत्री के लक्षद्वीप की तस्वीरें डालने पर उन्हें इजरायल की कठपुतली और अन्य अपमानजनक शब्द कहे। इसके बाद उसने ट्वीट डिलीट कर दिया।

इसके अलावा मुइज़्ज़ू की पार्टी के एक सदस्य जाहिद रमीज ने भारतीयों पर टूरिज्म में मालदीव से प्रतिस्पर्धा ना कर पाने का दावा करते हुए नस्लीय टिप्पणी की। बाद में सामने आया कि यही जाहिद पहले भारत की नागरिकता माँग चुका है। भारतीयों के खिलाफ मालदीव में इस समय चीन की सहायता से घृणा अभियान चलाया जा रहा है।

रामकाज के लिए छोड़ी SBI की सरकारी नौकरी, कारसेवा में पहुँचे अयोध्या: राँची के वीरेंद्र विमल की कहानी, जब ट्रेन रोककर लोगों ने किया था स्वागत

अयोध्या में राममंदिर देखने की प्रतीक्षा करते हुए हिंदुओँ की कितनी ही पीढ़ियाँ निकल गईं, लेकिन देर से ही सही यह स्वप्न अब पूरा होेने जा रहा है। हिंदुओं की मोक्षदायिनी सप्तपुरियों में से एक अयोध्या पुरी के नवनिर्मित राम मंदिर में 22 जनवरी 2024 को भगवान राम बाल रूप में पधारेंगे। इसको लेकर पूरा देश जोश एवं उमंग से भरा हुआ है। हालाँकि, इस दिन को देखने के लिए कई लोगों ने कई तरह के बलिदान दिए।

ऐसे ही एक व्यक्ति हैं, जिनका नाम है वीरेंद्र विमल। विमल को रामकाज की ऐसी लगन लगी कि उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक की सरकारी नौकरी छोड़ दी। बैंक में वरीय सहायक की नौकरी करने वाले विमल ने शुरुआत में झारखंड की राजधानी राँची (उस समय बिहार का हिस्सा था झारखंड) बाहर की पोस्टिंग नहीं लगी। उन्हें लगा कि वे राँची से बाहर जाएँगे तो उनका काज प्रभावित होगा। हालाँकि, जब नौकरी बाधा बनने लगी तो उसे छोड़ दी।

अब वे विश्व हिंदू परिषद (VHP) के पूर्णकालिक सदस्य हैं। उन पर क्षेत्र मंत्री का दायित्व है। वर्तमान समय में वीरेंद्र विमल झारखंड और बिहार का प्रवास करते हैं। 22 जनवरी को अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होने वाली है, इसको लेकर वे पूजित अक्षत को घर-घर बाँटने में लगे हुए हैं। इसके बाद अयोध्या में व्यवस्था को सँभालने के लिए 15 जनवरी के बाद वहाँ जाने को तैयार बैठे हैं।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, वीरेंद्र विमल की साल 1980 में स्टेट बैंक में नौकरी लगी थी। हालाँकि, भगवान राम के प्रति अपने जीवन को समर्पित करने वाले विमल अगले ही साल, यानी 1981 में वीएचपी से जुड़ गए। 1987 से इसके सक्रिय कार्यकर्ता बन गए। सरकारी नौकरी में रहते हुए उन्होंने वीएचपी में कई दायित्वों का निर्वहन किया। इसके लिए वे राँची से बाहर पोस्टिंग नहीं लेते थे।

नियमानुसार पोस्टिंग नहीं लेने के कारण वीरेंद्र विमल को प्रोन्नति नहीं मिली। हालाँकि, उन्हें प्रोन्नति की कोई चिंता नहीं हुई। हालाँकि, आगे चलकर साल 2001 में उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया। इस बीच साल 1991 और 1992 में जब मंदिर आंदोलन तेज हुआ तो वे नौकरी में रहते हुए अयोध्या कारसेवा के लिए पहुँचे। इस दौरान उन्होंने कई लोगों का नेतृत्व भी किया।

विमल कहते हैं, “6 दिसंबर 1992 का वो दिन याद है जब कारसेवकों ने विवादित ढाँचे को तीन-चार घंटे में गिरा दिया था। उस कारसेवा में राँची के 100 लोगों की टोली का मुझे प्रमुख बनाया गया था। हम लोग राँची से ट्रेन में गोमो गए। वहाँ से आसपास के स्टेशनों का टिकट लिया, क्योंकि अयोध्या जी का टिकट लिए पैसेंजरों को बिहार के स्टेशनों पर उतार लिया जा रहा था।”

6 दिसंबर को याद करते हुए विमल आगे कहते हैं, “विवादित ढाँचे के चारों तरफ लगाए गए लोहे की पाइप के घेरों को कारसेवकों ने उखाड़ दिया। पाइप से दीवार को लोग गिराने लगे। तीन-चार घंटे में ही वह विवादित ढाँचा ध्वस्त हो गया। फिर उसी रात से वहाँ मंदिर का निर्माण शुरू कर दिया गया। 7 दिसंबर 1992 की सुबह तक अस्थाई मंदिर बनकर तैयार हो गया।”

उन्होंने बताया कि जब वे अयोध्या से राँची पहुँचने वाले थे तो आरा गेट पर राजदेव यादव नामक व्यक्ति ने ट्रेन का सिग्नल डाउन करके उन्हें ट्रेन से उतरने को कहा। यादव ने कहा कि वे लोग उन लोगों का स्वागत करना चाहते हैं। दरअसल, स्वागत की तैयारी राँची स्टेशन पर की गई थी, लेकिन पता चला कि वहाँ पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने की तैयारी कर रही है। इसके बाद लोगों ने राँची स्टेशन से पहले ही कारसेवकों को उतारकर स्वागत कर दिया।