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शॉर्ट्स, कटे-फटे जींस और स्लीवलेस पहनने पर जगन्नाथ मंदिर में एंट्री नहीं, जारी हुआ नया ड्रेस कोड: अश्लील कपड़े पहनने वालों पर पुलिस की भी रहेगी नज़र

ओडिशा में पुरी के प्रतिष्ठित श्री जगन्नाथ मंदिर में आने वाले भक्त अब अपने मनचाहे कपड़ों जैसे शॉर्ट्स, रिप्ड जींस में मंदिर में प्रवेश नहीं कर पाएँगे। दरअसल मंदिर प्रशासन (SJTA) ने सोमवार (1 जनवरी, 2024) से यहाँ आने वाले भक्तों के लिए ड्रेस कोड लागू कर दिया है।

इसके साथ ही 2024 के नए साल के पहले दिन से मंदिर परिसर में गुटखा और पान चबाने के साथ-साथ प्लास्टिक और पॉलिथीन के इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया। मंदिर प्रशासन ने कहा है कि अब से 12वीं सदी के इस मंदिर परिसर में प्रवेश करते समय शॉर्ट्स, रिप्ड जींस और स्कर्ट जैसे कपड़े न पहनें।

इन नियमों की अवहेलना करने वाले भक्तों पर जुर्माना लगाया जाएगा। इसके साथ ही एसजेटीए ने कहा है कि किसी भी तरह के अशोभनीय कपड़े पहनने वाले भक्तों पर मंदिर के सेवकों की ही नहीं बल्कि पुलिस की भी नजर रहेगी। मंदिर प्रशासन के मुख्य प्रशासक रंजन कुमार दास ने कहा कि भक्तों को मंदिर में प्रवेश करते समय पतलून पैंट, चूड़ीदार, सलवार कमीज और धोती जैसे पारंपरिक कपड़े पहनने होंगे। दास ने आगे कहा, “देश भर के कई धार्मिक स्थलों पर इसी तरह के ड्रेस कोड लागू हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “जगन्नाथ मंदिर पुलिस और मंदिर के सेवक अश्लील कपड़े पहनने वाले किसी भी शख्स पर नजर रखेंगे।” मंदिर प्रशासन ने यह कदम अक्टूबर 2021 से मंदिर के सेवकों के लिए ड्रेस कोड लागू करने के दो साल बाद उठाया गया है। यहाँ अब सेवक पूजा करते वक्त धोती, तौलिया और पट्टा पहनते हैं।

बताते चलें कि मंदिर में सेवकों का एक प्रमुख निकाय दैतापति निजोग यहाँ आने वाले भक्तों के लिए लंबे वक्त एक ड्रेस कोड की माँग कर रहा था। उनकी शिकायत थी कि कई लोग शॉर्ट्स पहनकर मंदिर में आते हैं। इस वजह से अन्य भक्तों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचती है।

ड्रेस कोड लागू होने के बाद इस मंदिर में भक्तों को सभ्य कपड़े पहनने होंगे। उन्हें हाफ पैंट, शॉर्ट्स, फटी जींस, स्कर्ट या स्लीवलेस कपड़े पहनने की अनुमति नहीं है। यही वजह रही की ड्रेस कोड लागू होने से 2024 के पहले दिन मंदिर में आने वाले पुरुष भक्तों को धोती और तौलिया पहने देखा गया।

वहीं देवता के दर्शन के लिए आई महिलाएँ साड़ी या सलवार कमीज पहने हुए थीं। इस बीच नए साल के पहले दिन भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े थे। रात 1.40 बजे से ही मंदिर के बाहर भक्तों की कतारें लगनी शुरू हो गई थीं।

पुरी पुलिस समर्थ वर्मा ने एक एक्स पोस्ट में कहा, “दोपहर 12 बजे (सोमवार को) तक 1,80,000 से अधिक भक्तों ने जगन्नाथधाम के दर्शन किए हैं। भक्तों को बगैर परेशानी को भगवान के दर्शन हो इसके लिए पुलिस ने पूरे इंतजाम किए हैं। खास तौर से विकलांग भक्तों की सुविधा को ध्यान में रखा जा रहा है।”

आतंकी घोषित किया गया गोल्डी बराड़, ‘बब्बर खालसा’ से निकला कनेक्शन: सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में आया था नाम, कनाडा से चला रहा भारत विरोधी गतिविधियाँ

भारत सरकार ने कनाडा में छिपे बैठे गैंगस्टर गोल्डी बराड़ को आतंकवादी घोषित किया है। उसका दुर्दांत खालिस्तानी आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल से भी लिंक निकला है। पंजाब के मशहूर सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्या की जिम्मेदारी भी गोल्डी बराड़ ने ली थी। वो भारत में कई मामलों में वांछित है और उस पर कई केस चल रहे हैं। वो कनाडा से ही क्राइम सिंडेकेट चला रहा है और जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का करीबी सहयोगी है।

गोल्डी बराड़ के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास और हथियारों की तस्करी जैसे कई मामले दर्ज हैं। उसके खिलाफ इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी कर चुका है। सिंतबर महीने में गोल्डी बराड़ के ठिकानों पर पुलिस ने छापेमारी की थी। इसके अलावा एनआईए भी बराड़ के जुड़े लोगों के ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी है। वो एनआईए की कार्रवाई में मुख्य निशाना रहा है और उससे जुड़े कई गैंगस्टरों को गिरफ्तार भी किया गया है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गैंगस्टर सतविंदर सिंह उर्फ सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ को गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) 1967 के तहत आतंकवादी घोषित किया है। गृह मंत्रालय ने बताया कि गोल्डी बराड़ प्रतिबंधित खालिस्तानी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल से भी जुड़ा है, जो भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल है।

30 साल से कम उम्र, मोस्ट वांटेड में से एक

गोल्डी बराड़ पंजाब के श्री मुक्तसर साहेब का रहने वाला है। साल 1994 में जन्मा गोल्डी कनाडा के ब्राम्पटन में रहकर भारत में अपना सिंडिकेट चलाता है। वो खालिस्तानी आतंकियों के साथ जुड़कर भारत विरोधी काम भी कर रहा है। यही नहीं, उसी ने कनाडा में रहकर पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्या की साजिश रही और सोशल मीडिया पर खुलकल इसकी जिम्मेदारी भी ली। इंटरपोल के अनुसार, 29 वर्षीय गोल्डी बराड़ हत्या, आपराधिक साजिश और अवैध हथियारों की तस्करी में शामिल है। उसके खिलाफ पहले ही एक रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया जा चुका है। उसे पकड़ने के लिए पंजाब पुलिस कनाडा तक गई थी लेकिन उसे पकड़ा नहीं जा सका है।

बता दें कि कुछ दिन पहले ही गैंगस्टर लखबीर सिंह लांडा को भी गृह मंत्रालय ने आतंकी घोषित किया था। उसका भी लिंक बब्बर खालसा इंटरनेशनल से हैं। गोल्डी बराड़ का भी उससे लिंक है। वो पाकिस्तान में रहने वाले आतंकी हरविंदर सिंह उर्फ रिंदा के साथ काम करता है। लांडा पर तरनतारन जिले के पुलिस स्टेशन पर आरपीजी हमले का मास्टरमाइंड होने का आरोप है।

राम मंदिर आंदोलन में भाग लेने वाले श्रीकांत पुजारी को जेल भेजा, कर्नाटक में हिन्दू कार्यकर्ताओं पर लटक रही गिरफ़्तारी की तलवार: दशकों पुराने मामले खोल रही कॉन्ग्रेस सरकार?

अयोध्या में 22 जनवरी, 2024 को श्री राम मंदिर का उद्घाटन होने जा रहा है। उससे पहले कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार की पुलिस 30 साल पहले राम मंदिर आंदोलन में भाग लेने वाले हिंदुओं के खिलाफ जाँच करने बैठ गई है। ताजा कड़ी में तीन दशक पहले हुए इस आंदोलन वाले 1992 केस में पुलिस ने श्रीकांत पुजारी को गिरफ्तार किया है।

इससे राममंदिर आंदोलन में शामिल अन्य हिंदुओं पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। आईएएनएस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस विभाग ने एक विशेष टीम को इकट्ठा किया है। इस टीम ने 1992 के राम मंदिर आंदोलन से संबंधित मामलों में ‘संदिग्धों’ की एक सूची तैयार की है।

बताते चलें कि इस आंदोलन में कट्टर मुस्लिमों की हिंसा की वजह से हिंदू-मुस्लिम दोनों पक्षों के बीच सांप्रदायिक संघर्ष हुए थे। इसी कड़ी में 5 दिसंबर, 1992 को हुबली में एक मालिक नामक शख्स की दुकान में आग लगाई गई थी। इस कथित आगजनी को लेकर श्रीकांत पुजारी को हुबली पुलिस ने हिरासत में ले लिया और अब वो अदालत की निगरानी में हैं।

पुजारी इस मामले में तीसरे आरोपित हैं। पुलिस इस केस में अन्य 8 आरोपितों की तलाश कर रही है। इसी तरह से हुबली पुलिस ने 300 ‘संदिग्धों’ की एक सूची बनाई है। पुलिस का दावा कि ये लोग 1992 और 1996 के बीच हुए सांप्रदायिक संघर्षों से जुड़े हैं।

फोटो साभार: दैनिक जागरण

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, ये आरोपित 70 के दशक के हैं और इनमें कई शहर छोड़ चुके हैं। यही नहीं कई ‘संदिग्ध’ मौजूदा वक्त में अहम पदों पर हैं।

अब पुलिस उनके खिलाफ मुकदमा दायर करने से पहले संभावित नतीजों पर भी सोच रही है। कहा जा रहा है कि सीएम सिद्दारमैया की सरकार की तरफ से पुलिस विभाग को इन मामलों की विस्तार से जाँच करने के निर्देश दिए गए हैं।

राम जन्म भूमि आंदोलन से जुड़े कई सदस्य बीजेपी के मशहूर राजनेता बन गए हैं। रिपोर्टों का दावा है कि राज्य में बीजेपी के सरकार के वक्त इन सभी मशहूर नेताओं के खिलाफ मामले खारिज कर दिए गए थे।

वहीं हिंदू संगठनों ने कॉन्ग्रेस सरकार की मौजूदा कार्रवाई की सख्त निंदा की है। उनका कहना है कि कॉन्ग्रेस सरकार अयोध्या में श्री राम मंदिर के उद्घाटन के बीजेपी और हिंदू संगठनों के घर-घर अभियान को बर्दाश्त नहीं कर पा रही है। इसलिए ही वो 30 साल पहले के केस की जाँच शुरू करने का पैतरा अपना रही है।

कर्नाटक सरकार की ये रणनीति इस राज्य में बड़ी बहस का मुद्दा बन सकती है। खासकर तब जब बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी के 1990 के दशक में राम जन्मभूमि आंदोलन के मुस्लिमों विरोध की वजद इस राज्य को बड़ी हिंसा का सामना करना पड़ा था

हिज्ब-उत-तहरीर से ISIS आतंकी फरहतुल्ला गोरी के तार, लोन वुल्फ हमलों के लिए युवाओं को खिलाफत की शपथ दिलाता था ‘अमीर’: कई जगह दंगों के लिए रची साजिश

ISIS टेरर मॉड्यूल केस में फरार आतंकी फरहतुल्ला गोरी को लेकर NIA गहन छानबीन कर रही है। वो दिल्ली, महाराष्ट्र से लेकर केरल तक में ISIS ऑपरेशन्स के लिए एक हैंडलर के रूप में काम कर रहा था। खास बात ये है कि वो हरेक मॉड्यूल से अलग-अलग पहचान के साथ मिलता था। वो कभी अबू सुल्तान बन जाता था, तो कभी अबू सुलेमान। कभी वो खुद को ‘मोहम्मद भाई’, तो कभी अबू या फिर अबू सुफियान। इसके अलावा सरदार साहब और फारू नाम से भी जाना जाता है। फरहतुल्ला एक बेहद रहस्यमयी और शातिर आतंकी है, जो कई पहचानों के साथ आतंकी वारदातों में शामिल रहा है।

आईएसआईएस का असली ‘अमीर’!

FPJ ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि NIA की जाँच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि टेरर नेटवर्क में शामिल लोग उसे ‘अमीर’ कहते थे, और वो कट्टरपंथी युवाओं को आतंकी हमलों में शामिल होने के तैयार करता था। ISIS के सभी आतंकियों ने गोरी के माध्यम से ही खिलाफत की शपथ ली थी। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, फरहतुल्ला गोरी ने कभी भी खुद को किसी जिहादी समूह से नहीं जोड़ा। इसके बजाय उसने व्यक्तिगत कनेक्शन और नेटवर्क का लाभ उठाया और अपने शागिर्दों को अल-कायदा और वर्तमान में आईएसआईएस से जोड़ा।

सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान में बैठे फरहतुल्ला गोरी ने अपने दम पर भारत में आतंकी मॉड्यूल खड़ा करने की कोशिश की और ये नेटवर्क पूरी तरह से भारतीय होता। वो इसमें आईएसआई का सहयोग पा रहा था, इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उसने दिल्ली, पुणे और महाराष्ट्र के मॉड्यूल को खड़ा किया। इसके लिए वो माल-ए-गनीमत यानी आपराधिक कामों के माध्यम से पैसे इकट्ठा करता।

इस केस की जाँच कर रहे अधिकारियों के पास पुख्ता जानकारी है कि महाराष्ट्र आतंकी मॉड्यूल का मास्टरमाइंड साकिब नाचन ISIS हैंडलर अबू सुलेमान और अबू सुल्तान से जुड़ा हुआ था। साकिब ने ही आईएसआईएस के लिए शपथ कार्यक्रम को अंजाम दिया था और अपने मोबाइल कैमरे से रिकॉर्ड किया था। इसके बाद उसके वीडियो को VPN नेटवर्क के माध्यम से ईमेल, टेलीग्राम, स्नैपचैट जैसे प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से भेजा। इस बात की पुष्टि के लिए साकिब नाचन के फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों के डाटा की फॉरेंसिक जाँच करा रही है।

पुणे और दिल्ली आतंकी मॉड्यूल मामले

पुणे आतंकी मॉड्यूल मामले में ISIS पुणे मॉड्यूल प्रमुख इमरान खान उर्फ़ मोहम्मद भाई के संपर्क में था। एनआईए की चार्जशीट के मुताबिक, इमरान खान ने मोहम्मद भाई को लगातार उनके आतंकी मिशन, प्रशिक्षण, आईईडी परीक्षण, टोही और अन्य अवैध गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। एजेंसी को शक है कि इस मामले में भी हैंडलर मोहम्मद भाई कोई और नहीं बल्कि गोरी ही है।

पाकिस्तान में बैठा गोरी और उसका दामाद शाहिद फैसल भारत में शाहनवाज आलम, रिजवान अशरफ और अरशद वाली के माध्यम से दिल्ली का टेरर मॉड्यूल बना रहा था। इसके अलावा यूपी, उत्तराखंड, झारखंड और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में फैले आईएसआईएस के मॉड्यूल का भी हैंडलर पाकिस्तानी फतहउल्ला खान ही निकला, इसकी पुष्टि फॉरेंसिक जाँचों में हो चुकी है।

दिल्ली टेरर मॉड्यूल को ध्वस्त करने से पहले दिल्ली के स्पेशल सेल और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों ने गोरी द्वारा कट्टरपंथी ग्रुपों को भेजे गए ऑपरेशन की डिटेल्स को एक्सेस कर लिया था। ये ग्रुप भारत में दिल्ली, मुंबई जैसे कई शहरों में आतंकी हमले करने वाला था। उसने उस संदेश में बताया था कि उसके ऑपरेटिव्स यानी धमाका करने वाले लोग टारगेट वाली जगहों पर पहुँच चुके हैं। ये सारी डिटेल्स शाहनवाज के पास से भी मिली।

वरिष्ठ अधिकारी की मानें तो गोरी भारत में कट्टरपंथ की राह चुन चुके नौजवानों को भड़का लोन वुल्फ अटैक जैसे हमलों की प्लानिंग कर रहा था। इस प्लानिंग को अमलीजामा पहनाने के लिए वो भड़काऊँ भाषणों और साहित्य का वितरण कर रहा था। इसके लिए पूरा स्लीपर सेल एक अलग गेमिंग एप का इस्तेमाल कर रहा था, जिसके जरिए सभी आतंकियों की बातचीत होती थी। एजेंसियों ने उनमें से कुछ बातचीत डार्क वेब के माध्यम से रिकवर भी कर ली है, इसमें ‘लव जिहाद’ के साथ ही हमलों की प्लानिंग भी की गई थी।

केंद्रीय एजेंसियों द्वारा प्राप्त जानकारी के मुताबिक, गोरी कट्टरपंथी युवाओं को हमले के दौरान पुलिस के हाथ लगने की जगह फिदायीन हमलों के लिए तैयार कर रहा था, ताकि वो पुलिस या अन्य जाँच एजेंसियों की टीम को धमाके के साथ उड़ा दें। इसके लिए वो हिंदुस्तानी मुस्लिमों की भावनाओं को भड़काने की कोशिश कर रहा था। इसके लिए वो औरंगजेब और अहमद शाह अब्दाली को उनका हीरो बनाकर पेश करता था। यही नहीं, उसने इन युवाओं को आतंकवाद से जुड़ने के लिए प्रेरित करने के इंडियन मुजाहिद्दीन के वीडियो भी चैटिंग प्लेटफॉर्म पर शेयर किए थे। उसका इरादा साफ था कि वो युवाओं को भड़काकर शहरों में सांप्रदायिक तनाव और दंगों की स्थिति पैदा करे।

सूत्रों के मुताबिक, फरहतुल्ला गोरी लश्कर ए तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद का महत्वपूर्ण सदस्य है। इससे भी आगे बढ़कर वो अंतर्राष्ट्रीय आतंकी संगठन बन चुके हिज्ब-उत-तहरीर का भी सरगना है। वो आईएसआईएस के लिए काम करते हुए भी एचयूटी को आगे बढ़ाने में जुटा हुआ है। बीते सात जुलाई और अगस्त महीने में NIA ने हैदराबाद में एचयूटी से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की थी। इसके अलावा भोपाल, छिंदवाड़ा और हैदराबाद से 16 संदिग्धों को गिरफ्तार किया था। इनमें से 10 की गिरफ्तारी भोपाल से, एक की छिंदवाड़ से और 5 को हैदराबाद से गिरफ्तार किया गया था। ये सभी लोग काफी पढ़े लिखे हैं और कॉरपोरेट कंपनियों में अच्छे पदों पर है। इनमें से कुछ सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, तो कुछ छात्र और कुछ इंटरनेशनल कंसल्टेंसी फर्म्स से जुड़े हुए हैं।

गोरी ही ISIS से लेकर तमाम आतंकी संगठनों का हैंडलर!

हमने अपनी पिछली रिपोर्ट में बताया था कि किस तरह से गोरी के लिंक आईएसआईएस से ही नहीं, आईएसआई तक से भी हैं। उसी ने दिल्ली में एनआईए द्वारा गिरफ्तार आतंकियों शाहनवाज आलम और मोहम्मद रिजवान और अशरफ को तैयार किया था। अब ये बात साफ हो गई है कि आईएसआईएस के दिल्ली मॉड्यूल से लेकर महाराष्ट्र, पुणे और हैदराबाद तक सभी ऑपरेशंस की कमान फरहतुल्ला गोरी ही संभालता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, आईएसआई और गोरी ने शाहनवाज और रिजवान को दिल्ली/एनसीआर में एक आतंकी ऑपरेशन के लिए एक महत्वपूर्ण मिशन सौंपा था। दिल्ली का आतंकी जो इस समय फरार है, उसी ने साजो-सामान संबंधी सहायता, हथियार और गोला-बारूद की खरीद का इंतजाम किया और इस काम के लिए फंडिंग की व्यवस्था की। उन दोनों ने दिल्ली में एक बेस स्थापित किया, इनकी मंशा दिल्ली/एनसीआर में एक बड़े आतंकी ऑपरेशन को अंजाम देने की थी। इस ऑपरेशन के शुरू होने से पहले ही दोनों को दिल्ली की स्पेशल सेल ने गिरफ्तार कर लिया।

माँ-बाप और बहन को कुल्हाड़ी से काटा, बिस्किट खाते पहुँचा थाने: मोबाइल गेम में ‘मर्डर टास्क’ मिलने की आशंका, गूगल पर सुसाइड के तरीके भी किए थे सर्च

आशंका जताई जा रही है कि मोबाइल गेम में मिले टास्क के कारण राजस्थान के नागौर में 20 साल के मोहित ने ट्रिपल मर्डर को अंजाम दिया। उसने नागौर के पादूकलां कस्बे में शनिवार (30 दिसंबर 2023) की रात अपने माता-पिता और दिव्यांग बहन को कुल्हाड़ी से काट दिया। कथित तौर पर उसने सुसाइड की भी कोशिश की।

सुसाइड में नाकाम रहने पर अगले दिन वह बिस्किट खाते हुए थाने पहुँचा और हत्याओं की जानकारी दी। पुलिस के अनुसार उसे अपने किए का पछतावा नहीं है। जाँच से यह बात सामने आई है कि वह दिनभर मोबाइल में लगा रहता था। उसकी मोबाइल हिस्ट्री से पता चला है कि उसने गूगल में कम तकलीफदेह सुसाइड के बारे में भी सर्च किया था। पुलिस के अनुसार वह अस्थिर मानसिक स्थिति का लग रहा है। इसकी जाँच की जा रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक मोहित ने 1 महीने पहले भी पिता को मारने की साजिश रची थी। लेकिन इसमें कामयाब नहीं हो पाया। कहा जा रहा है कि उसे मोबाइल गेम खेलने का चस्का है, खासकर देश में बैन किए ऐसे गेम्स जो खतरनाक टास्क देते हैं। पड़ोसियों का कहना है कि वह 20 से 24 घंटे मोबाइल गेम खेला करता था। ग्रेजुएशन के दूसरे साल में पढ़ाई कर रहे मोहित के साइको प्रवृत्ति का होने की बात भी सामने आ रही है। उसके दोस्त भी नहीं थे और वो अपने में ही खोया रहता था।

जानकारी के मुताबिक आरोपित के पिता दिलीप सिंह 15 साल पहले बेटी प्रियंका कंवर के पैदा होने के बाद ही चेन्नई चले गए थे। एक साल पहले ही पूरा परिवार पादूकलां लौटा था। दिलीप यहाँ ज्वेलर्स शॉप में करते थे और मोहित भी उनकी दुकान पर बैठा करता था।

शनिवार की रात उसने सबसे पहले कमरे में सो रही माँ राजेश और बहन प्रियंका की कुल्हाड़ी मार कर हत्या की। शोर सुन पर पिता दिलीप दौड़े। लेकिन इससे पहले की वो कुछ समझ पाते मोहित ने उन पर भी कुल्हाड़ी से ताबड़तोड़ वार कर डाले। हत्याएँ करने के बाद वह रात भर शवों के साथ ही रहा। सुबह वह घर में बने पानी के टैंक में कूद गया। लेकिन थोड़ी देर बाद ही वह टैंक से बाहर निकल आया। 31 दिसंबर की सुबह जब दूधवाला आया तो उसने घरवालों के बाहर जाने की बात कही।

इसके बाद वह गीले कपड़ों में ही घर से बिस्किट खाते-खाते पादूकलां पुलिस थाने जा पहुँचा और परिवार के सदस्यों की हत्या करने का खुलासा किया। इसके बाद एसएचओ मानवेन्द्र सिंह ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस इस बात की भी जाँच कर रही है कि कहीं मोबाइल गेम में दिए गए किसी टास्क की वजह से तो उसने ऐसा कदम नहीं उठाया।

क्या सच में मर गया आतंकी मसूद अजहर? सोशल मीडिया पर हो रहे दावे- अज्ञात लोगों ने बम ब्लास्ट में निपटाया, तस्वीरें और वीडियो भी कर रहे हैं शेयर

भारत में सोशल मीडिया पर एक बार फिर से ‘अज्ञात लोग (Unknown Men)’ ट्रेंड हो रहा है। दावा किया जा रहा है कि आतंकवादी मसूद अजहर मारा गया है। दावा है कि ‘अज्ञात’ ने उसी तरह मसूद अजहर को भी निपटाया है जैसे हाल में पाकिस्तान में कई आतंकी मारे गए हैं।

इस खबर की पुष्टि नहीं हुई है। आपको बता दें कि दिसंबर 1999 में भारत के विमान को हाईजैक कर कंधार ले जाया गया है, उस दौरान यात्रियों के बदले जिन 3 आतंकियों को छोड़ा गया था – उनमें मसूद अजहर भी शामिल था।

मसूद अजहर के मरने की खबरें सोशल मीडिया पर तैरने के बाद भले इसको लेकर टिप्पणियों की बाढ़ आ गई है। भले यूजर्स ‘अज्ञात’ को धन्यवाद दे रहे हैं। लेकिन उसकी मौत पर अभी तक पाकिस्तान की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। पाकिस्तान की मीडिया की ओर से भी इस संबंध में कुछ नहीं कहा गया है। सोशल मीडिया पर सक्रिय पाकिस्तान के पत्रकारों ने भी इस संबंध में कोई टिप्पणी नहीं की है।

सोशल मीडिया के दावों पर कुछ भारतीय मीडिया संस्थानों ने रिपोर्ट की है, लेकिन इनमें भी उसकी मौत की पुष्टि नहीं हुई है। दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान में ‘अज्ञातों’ ने एक बम ब्लास्ट को अंजाम दिया है, जिसमें मसूद अजहर की मौत हो गई। सोशल मीडिया में कई वीडियो और तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिस पर लोग मजेदार कमेंट्स भी कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि सोमवार (1 जनवरी, 2024) को तड़के सुबह 5 बजे हुए बम ब्लास्ट में वो मारा गया। बताया गया कि वो उस समय बहावलपुर मस्जिद में जा रहा था। मसूद अज़हर जैश-ए-मुहम्मद का मुखिया था।

‘टाइम्स अलजेब्रा’ नामक ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) हैंडल ने कुछ तस्वीरें भी शेयर की। इनमें से एक तस्वीर में एक कार के परखच्चे उड़े हुए दिखाई दे रहे हैं। वहीं दूसरी तस्वीर में बम ब्लास्ट के बीच लोगों को भागते हुए देखा जा सकता है, साथ ही वहाँ पुलिस भी दिख रही है। एक अन्य हैंडल ने तो वीडियो तक शेयर कर दिया, जिसमें एक व्यस्त ट्रैफिक वाले इलाके में बम ब्लास्ट होता है। साथ ही ऑक्सीजन मास्क पहले एक मरीज की तस्वीर डाली गई, जिसे मसूद अजहर बताया जा रहा है।

सोशल मीडिया पर तो यूजरों ने ‘अज्ञात लोगों’ को धन्यवाद देना भी शुरू कर दिया और कहने लगे कि नए साल पर भी ये ‘Unknown Men’ छुट्टी नहीं ले रहे हैं और अपना काम कर के खुशखबरी दे रहे हैं। वहीं कुछ बॉलीवुड के मीम्स भी शेयर हो रहे हैं। लोग कह रहे हैं कि मोहम्मद ज़ुबैर, राना अय्यूब और अरफ़ा खानम शेरवानी जैसे भारत के कथित ‘पत्रकारों’ को बहुत दुःख हुआ होगा। वहीं कई लोगों ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल की तस्वीर भी शेयर की।

कॉन्ग्रेस नेता ने सिद्धारमैया को बताया ‘राम’, कहा- अयोध्या में ‘भाजपा के राम’ की पूजा क्यों करें: उदित राज बोले- 500 साल बाद मनुवाद लौटा

जब से रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की तिथि निश्चित हुई है कॉन्ग्रेस और उसके सहयोगी दलों की राम मंदिर को लेकर घृणा बार-बार सामने आ रही है। इसी कड़ी में कर्नाटक के पूर्व मंत्री और कॉन्ग्रेस नेता एच आंजनेय ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की तुलना भगवान राम से की है। वहीं कॉन्ग्रेस के एक अन्य नेता उदित राज ने राम मंदिर को मनुवाद की वापसी बताया है।

आंजनेय ने कहा, “सिद्धारमैया स्वयं राम हैं। फिर (अयोध्या) मंदिर में जाकर उस राम की पूजा क्यों करें? वे बीजेपी के राम हैं। बीजेपी प्रचार के लिए ऐसा करती है। उन्हें ऐसा करने दीजिए।” कर्नाटक के चित्रदुर्ग में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने यह बात कही। उनसे प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में सिद्धारमैया को आमंत्रित नहीं करने को लेकर सवाल किया गया था।

इस दौरान कॉन्ग्रेस नेता आंजनेय ने खुद को हनुमान भी बता डाला। उन्होंने कहा, “मेरे राम मेरे ह्रदय में हैं। मेरा खुद का नाम आंजनेय है। आपको पता है उन्होंने क्या किया था?”

एच आंजनेय कर्नाटक की सिद्दारमैया की अगुवाई वाली पूर्ववर्ती कॉन्ग्रेस सरकार में 2015 से 2018 के बीच पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री थे। उनका भगवान राम को लेकर दिया गया यह बयान अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इससे पहले भी कर्नाटक के कॉन्ग्रेस नेता उल्टे-सीधे बयान देते आए हैं।

वहीं कॉन्ग्रेस नेता उदित राज ने भी राम मंदिर को लेकर विवादित बयान दिया है। उदित राज ने राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा को 500 वर्षों के बाद मनुवाद की वापसी बताया है।

इसको लेकर उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर ट्वीट किया है। उदित राज के इस बयान पर भाजपा नेता और विदेश राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी ने हनुमान चालीसा की पंक्तियों का पाठ करते हुए उन्हें जवाब दिया है।

जब से अयोध्या में राममंदिर को लेकर तैयारियाँ तेजी हुई हैं, तब से कई कॉन्ग्रेस नेता राम मंदिर को लेकर विवादित बयान दे चुके हैं। हाल ही में पार्टी सांसद शशि थरूर ने राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा को राजनीतिक कार्यक्रम बताया था। शिवसेना नेता संजय राउत भी प्रभु राम पर विवादित बयान दे चुके हैं।

ISIS आतंकी के ‘मानवाधिकार’ पर कोर्ट मेहरबान, ब्रिटेन की नागरिकता दी: पहचान छिपाकर रहने की आजादी भी

यूनाईटेड किंगडम (ब्रिटेन) में सूडान के एक जेहादी को महज इसलिए यूके की स्थाई नागरिकता दे दी गई क्योंकि उसके वकील ने वहाँ की अदालत में दलील दी कि अगर उसके मुअक्किल को वापस सूडान भेजा गया तो इससे उसके मानवाधिकारों का हनन होगा। इस फैसले के बाद वहाँ विरोध के स्वर भी उठने लगे हैं।

कोर्ट ने ऐसा फैसला सुनाते हुए यूके के गृह मंत्रालय की चेतावनियों को भी दरकिनार किया जो उन्होंने सूडान से आए घुसपैठिए को लेकर दी थी, जिसने पहले 2005 और फिर 2018 में अवैध रूप से यूके में एंट्री ली। सुरक्षा सेवाओं के अनुसार, ये घुसपैठिया लगातार इस्लामी स्टेट का प्रोपगेंडा यूके में फैला रहा था और अब इसे जिंदगी भर की नागरिकता दे दी गई है।

बताते चलें कि जेहादी लिंक के कारण इस घुसपैठिए का दो बार यूके ने पासपोर्ट रद्द किया था। एक बार 2005 में और दूसरी बार 2018 में। उसके बावजूद ये गैरकानूनी तरीके से यूके में दाखिल हुआ। इसके बावजूद इसे कोर्ट ने शरण दे दी।

31 दिसंबर, 2023 की मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि अफ्रीकी देश सूडान के इस नागरिक ‘एस 3’ की अदालत में पैरवी करने वाले वकील न्यायधीशों को ये समझाने में कामयाब हो गए कि इसे सूडान वापस भेजना उसके मानवाधिकारों का हनन होगा।

अजीब बात तो ये है कि ISIS से लिंक होने के बावजूद भी घुसपैठिए की पहचान उजागर नहीं की गई है। अदालत ने उसे ये भी सुविधा दी थी कि केस में उसका नाम न लिया जाए। उसे एल-3 के साम से बुलाया जाए। अब ये अपने नाम के साथ ही आराम से यूके में रह सकता है।

जेहादी ने कोर्ट को बस ये कहा था कि अगर अगर एस-3 को भेजा गया तो सूडान में उसे हिरासत में लेकर यातनाएँ दी जाएँगी। बस फिर क्या था अदालत ने आनन-फानन में ‘एस 3’ को यूके में स्थाई तौर पर रहने के लिए नागरिकता का फरमान सुना डाला। यूके के जज ‘एस 3’ के वकील के तर्क पर बावजूद इसके राजी हो गए कि वो बगैर किसी परेशानी का सामना किए कई दफा सूडान गया और वहाँ ये यूके लौट के आया था।

यूके की सुरक्षा सेवा जो MI5 के नाम से भी जानी जाती है, उसने ‘एस 3’ को लेकर जजों को चेताया था और जानकारी दी थी कि ये शख्स सूडान में रहने के चार महीने के टाइम में ISIS का सोशल मीडिया पर प्रचार करता था। अदालती दस्तावेजों में साफ तौर पर दर्ज था कि इस सूडानी शख्स ने ISIS की आंतकी विचारधारा के लिए प्रतिबद्धता जाहिर थी। MI5 ने फिक्र जताई थी कि इस बात की असल संभावना थी कि ये अन्य लोगों को कट्टरपंथी बनाना चाहता होगा और उन्हें इस्लामी आंतकी गतिविधियों में शामिल होने के लिए बढ़ावा देगा।

इसके निर्वासन यानी वापस भेजने को लेकर अवैध अप्रवासी की कानूनी टीम ने मानवाधिकार पर यूरोपीय कन्वेंशन ऑन ह्यूमन राइट्स (ईसीएचआर) का हवाला दिया। इसके बाद ही जजों ने कहा कि उस शख्स को उसकी ब्रिटिश नागरिकता से वंचित करना मानवाधिकारों पर यूरोपीय कन्वेंशन का उल्लंघन है।

निगेल फ़राज़ और पूर्व गृह सचिव सुएला ब्रेवरमैन जैसे ब्रेक्जिटर्स का मानना है कि पीएम ऋषि सुनक के प्रशासन को यूके की सीमाओं पर अपना नियंत्रण फिर से वापस लेने के वादे को पूरा करना है तो उन्हें मानवाधिकार पर मानवाधिकार के लिए बना ईसीएचआर छोड़ना होगा।

बताते चलें कि रिपोर्टों के मुताबिक, फरवरी 2023 में ऐसी अफवाहें थीं कि सरकार कम से कम 53 आतंकवादियों को निर्वासित होने से बचाने के लिए ईसीएचआर इस्तेमाल उनके बचाव के तौर पर कर रही है।

यूके कोर्ट का सूडानी जेहादी को नागरिकता देने का ये फैसला इस संदिग्ध इस्लामवादी को अनिश्चित वक्त तक वहाँ रहने की मंजूरी देता है। वो भी उसके आस-पास रहने वाले लोगों को यह पता चले बगैर कि वो एक संभावित आतंकवादी के साथ रह रहे हैं।

कंजर्वेटिव पार्टी के पूर्व नेता सर इयान डंकन स्मिथ ने इस फैसले की आलोचना करते हुए इसे बेहूदा कहा है। उन्होंने कहा, “जजों को पता होना चाहिए कि एक ऐसे शख्स को ब्रिटेन में उसके मानवाधिकारों के बचाने के लिए रहने दिया जा रहा है, जब देश की सुरक्षा सेवाएँ उसे ब्रिटेन में जनता के लिए खतरा बताती हैं।”

माइग्रेशन वॉच यूके थिंक टैंक के अध्यक्ष एल्प मेहमत ने भी इस मामले पर कहा, “या तो हमारे आव्रजन जज भोले-भाले हैं या उन्हें गद्दारों, बदमाशों और आतंकवादियों का पक्ष लेने, उनके फायदों को ब्रिटिश लोगों से ऊपर रखने में विकृत आनंद मिलता है। यदि आतंकवादी हमारे बीच खुलेआम घूम रहे हैं, तो हमें यह जानने का हक है कि वे कौन हैं और वे संभावित तौर से क्या नुकसान पहुँचा सकते हैं।”

बताते चलें कि ब्रिटिश न्यायाधीशों का आतंकवादियों और विदेशी अपराधियों के निर्वासन में बाधा डालने का एक लंबा और गंभीर इतिहास रहा है। इसका एक विवादास्पद उदाहरण तब का है जब ब्रिटेन में न्यायाधीशों ने जमैका के एक बलात्कारी और हत्यारे सहित अधिकांश दोषियों के निर्वासन को रोक दिया था। इसकी वजह महज इतनी सी थी कि हिरासत में रहने के दौरान कैदियों को अस्थाई तौर से सेल फोन का इस्तेमाल नहीं करने दिया गया था।

इसके अलावा, 2020 में, स्कॉटलैंड के एक न्यायाधीश ने फैसला सुनाया था कि तालिबान के एक आतंकवादी को अफगानिस्तान वापस नहीं भेजा जाना चाहिए। इसके पीछे की वजह दी गई थी कि उसे ब्रिटिश सैनिकों सहित पश्चिमी सहयोगियों (ये देश शीत युद्ध के दौरान अमेरिका के साथ थे) से लड़ने से PTSD यानी तनाव की बीमारी हुई थी। इस वजह से अदालत ने उसे यूके में मुफ्त इलाज देने को कहा था। अदालत का तर्क था कि उसके अपने देश में उसे ऐसी देखभाल नहीं मिल सकेगी।

जापान में 90 मिनट में 21 बार आया भूकंप, 35000 घरों में अँधेरा: सुनामी का खतरा, उठ सकती हैं 5 मीटर ऊँची लहरें; भारत ने नागरिकों के लिए जारी किए नंबर

2024 की पहली ही तारीख जापान के लिए भारी विपदा लेकर आई है। जोरदार भूकंप के बाद सुनामी का अलर्ट जारी किया गया है। दुनिया के सबसे बड़े परमाणु उर्जा संयंत्र को भी खतरा है। भारतीय दूतावास ने अपने नागरिकों के लिए इमरजेंसी नंबर जारी किए हैं।

नए साल पर जापान के मध्य और तटीय क्षेत्र में 90 मिनट के भीतर 4.0 या उससे अधिक की तीव्रता वाले भूकंप के 21 झटके महसूस किए गए। इनमें से एक की तीव्रता रिएक्टर स्केल पर 7.6 की मापी गई है। इसके कारण समुद्र में 5 मीटर ऊँची लहरें उठने और सुनामी का अलर्ट जारी किया गया है।

जानकारी के अनुसार, मध्य जापान के इशिकावा प्रांत में सोमवार दोपहर तेज भूकंप आया। इसके बाद इस इलाके से लोगों को निकाला जा रहा है। भूकंप के बाद बड़ी सुनामी की भी आशंका है। जापान के मौसम विभाग का कहना है कि सुनामी की लहरें पाँच मीटर तक ऊँची हो सकती है।

जापान की सरकार ने तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से तुरंत ऊँचाई वाली जगहों पर जाने को कहा है। भूकंप के कई वीडियो भी सामने आए हैं। वीडियो में धरती तेजी से हिलती हुई दिखती है और लोग बचने के लिए मेजों के नीचे शरण ले रहे हैं।

भूकम्प के कारण कुछ इलाकों में बिजली सुविधाएँ प्रभावित हुई हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, जापान में 35,000 घरों को इस समय बिना बिजली के गुजारा करना पड़ रहा है। कुछ इलाकों में ट्रेन सुविधाओं को भी बंद कर दिया गया है। कुछ घरों के गिरने की सूचना भी है। कई जगह पर जमीन में बड़ी दरारें भी देखने को मिली है।

भूकंप के बाद बड़ी चिंता जापान के परमाणु संयत्रों को लेकर जताई जा रही है। हालाँकि सरकार का कहना कहा है कि अभी स्थिति सामान्य है और कोई भी गड़बड़ी नहीं पाई गई है।

7.6 तीव्रता वाले भूकंप के बाद लगातार और भी झटके जापान में महसूस किए गए हैं। जापान झटकों से पैदा हुई आपात स्थिति के लिए अमूमन तैयार रहता है, क्योंकि वहाँ साल में कई बार छोटे बड़े भूकंप आते हैं। लेकिन उसे असली खतरा सुनामी से है क्योंकि इससे पानी अनियंत्रित तरीके से शहरों में घुसता है।

भूकंप और सुनामी के खतरे के बीच जापान की सरकार लगातार लोगों को प्रभावित क्षेत्रों से निकाल रही है। जापान में भूकंप आने के बाद से पड़ोसी देश दक्षिण कोरिया और रूस ने भी सुनामी को लेकर चेतावनी जारी की है। यहाँ भी सरकार लोगों से सुरक्षित जगहों पर जाने की अपील कर रही है।

भूकंप के बाद जापान में स्थित भारतीय दूतावास ने भी एक्शन में आ गया है। टोक्यो स्थित भारतीय दूतावास ने एक कंट्रोल सेंटर स्थापित किया है। अपने नागरिकों के लिए आपातकालीन नंबर जारी किए हैं। इसकी जानकारी एक्स (पहले ट्विटर) पर साझा की है।

‘अक्षत निमंत्रण’ लेकर अयोध्या की गलियों में निकले चंपत राय, आम जन ने बरसाए पुष्प: देखिए Video, जानिए क्यों गाँव-गाँव भेजा जा रहा अक्षत

22 जनवरी 2024 को अयोध्या के भव्य राम मंदिर में भगवान रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा होनी है। उससे पहले आम लोगों को ‘अक्षत निमंत्रण’ भेजने का सिलसिला शुरू हो गया है। अयोध्या में 1 जनवरी 2024 को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने खुद इस अभियान की अगुवाई की।

ढोल नगाड़ों की ध्वनि के बीच चंपत राय अयोध्या की गलियों में आम जन को अक्षत निमंत्रण देते देखे गए। इसका एक वीडियो सामने आया है। इसमें लोग पुष्प बरसाकर राय का स्वागत कर रहे हैं। उनकी आरती उतार रहे हैं। इस दौरान कुछ लोगों ने उन्हें पुष्पमाला पहनाने की भी कोशिश की। लेकिन उन्होंने आग्रहपूर्वक इससे इनकार कर दिया।

इस दौरान लोगों को पूजित अक्षत, भगवान राम का चित्र और एक पत्रक दिया गया। इस पत्रक में आम लोगों को बताया गया है कि कैसे 22 जनवरी को अयोध्या आए बिना भी वे प्राण-प्रतिष्ठा समारोह का हिस्सा बन सकते हैं। अक्षत निमंत्रण देश के गाँव-गाँव में भेजने का लक्ष्य रखा गया है। अयोध्या में चंपत राय के साथ चल रहे समूह ने जय श्रीराम के जयकारे के साथ इस अभियान को आगे बढ़ाया।

इस दौरान चंपत राय ने बताया, “संपूर्ण भारत में, गाँव में, घर-घर में, कार्यकर्ता मकर संक्रांति तक मंदिर में पूजित अक्षत लेकर जाएँगे। साथ ही राम मंदिर का फोटो भी ले जाएँगे। लोगों से यह अनुरोध किया जाएगा कि वह पास के मंदिर में एकत्र होकर उत्सव मनाएँ।” उन्होंने लोगों से इस कार्यक्रम को टीवी पर देखने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा है कि प्राण-प्रतिष्ठा वाले दिन लोग दिवाली मनाएँ।

अक्षत के रूप में भेजा जाएगा प्राण-प्रतिष्ठा का निमंत्रण

प्राण-प्रतिष्ठा का निमंत्रण देश के 5 लाख गाँवों तक जाना है। इसके लिए देश के 50 प्रमुख केंद्रों से नवंबर में लोगों को अयोध्या बुलाया गया था। ये लोग अयोध्या से ‘अक्षत’ लेकर इन केंद्रों तक गए हैं। इन्हीं केंद्रों से प्राण-प्रतिष्ठा के लिए निमंत्रण के रूप में अक्षत 5 लाख गाँवों में वितरित किया जाएगा। 22 जनवरी को इन गाँवों में लोगों को अपने देवस्थल में एकत्र होने को कहा जाएगा। वहाँ वे एक साथ प्राण-प्रतिष्ठा का कार्यक्रम लाइव देख सकेंगे।

गौरतलब है कि यह अक्षत कई शहरों में पहुँच चुके हैं जहाँ कार्यकर्ता इन्हें बाँट रहे हैं। घर-घर जाकर प्राण प्रतिष्ठा का निमंत्रण दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी समारोह का निमंत्रण अक्टूबर 2023 में दिया गया था।