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‘दोनों रात भर बात कर रहे, मुझे हो रही घबराहट’: बॉयफ्रेंड और उसकी महिला मित्र की भी जासूसी करवा चुकी हैं महुआ मोइत्रा, CBI को शिकायत

TMC की महुआ मोइत्रा पर घूस लेकर संसद में सवाल पूछने के आरोप लगे, जिसके बाद उन्हें लोकसभा से निलंबित कर दिया गया। उनके पूर्व पार्टनर सुप्रीम कोर्ट के वकील जय अनंत देहाद्राई ने अपना कुत्ता ‘हेनरी’ चोरी करने का आरोप लगाया था। हालाँकि, विवादों के बाद ये कुत्ता लौटा दिया गया। खुलासा हुआ कि महुआ मोइत्रा ने कारोबारी दर्शन हीरानंदानी से कैश और महँगे गिफ्ट लेकर संसद में अडानी को निशाना बनाने वाले सवाल पूछे। महुआ मोइत्रा पर जय को धमकी देने के आरोप भी लगे थे।

अब CBI को सुप्रीम कोर्ट के वकील जय अनंत देहाद्राई द्वारा भेजे गए एक शिकायती पत्र में बड़ा खुलासा हुआ है कि महुआ मोइत्रा ने अपने पूर्व बॉयफ्रेंड सुहान मुखर्जी की जासूसी भी करवाई थी। ‘The Hawk Eye’ नामक ट्विटर हैंडल ने बताया है कि न सिर्फ सुहान मुखर्जी, बल्कि उनकी एक महिला मित्र को भी अवैध सर्विलांस का शिकार बनाया गया। ये अजीब है, क्योंकि खुद महुआ मोइत्रा इजरायली सॉफ्टवेयर ‘पेगासस’ के जरिए विपक्षी नेताओं की जासूसी का आरोप मोदी सरकार पर लगाती रही हैं।

शुक्रवार (29 दिसंबर, 2023) को CBI के भेजे गए पत्र में कहा गया है कि महुआ मोइत्रा ने पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ मिल कर अवैध सर्विलांस की साजिश रची। वो ये भी पता लगाती रहीं कि सुहान मुखर्जी या उनकी महिला मित्र किस वक्त कहाँ पर हैं। इसके लिए उनके फोन नंबरों का इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि उन्होंने एक प्राइवेट सिटीजन का CDR (कॉल रिकॉर्ड) अपने पीछा करने की अपनी व्यक्तिगत इच्छा को पूरा करने के लिए निकलवाया।

बता दें कि पुलिस संदिग्धों और अपराधियों पर नज़र रखने के लिए CDR का इस्तेमाल करती रही है। सुहान मुखर्जी के जिस महिला मित्र की जासूसी करवाई गई, उनका नाम हेलेना लेर्श (Helena Lersch) है और वो जर्मनी की रहने वाली हैं। पत्र के अनुसार, महुआ मोइत्रा को शक था कि सुहान और हेलेना रिलेशनशिप में हैं। पत्र में लिखा है कि महुआ मोइत्रा ने कहा था, “मुखर्जी और लेर्श रात-रात भर बातें कर रहे हैं, इसीलिए भयंकर चिंता और घबराहट के कारण मुझे नींद नहीं आ रही है।”

कथित तौर पर महुआ मोइत्रा ने ऐसा लिख कर भेजा था, जिसका स्क्रीनशॉट इस पत्र के साथ उपलब्ध कराया गया है। बता दें कि सुहान मुखर्जी नामी वकीलों में से एक हैं जो ‘PLR चैंबर्स’ नामक कंपनी चलाते हैं। साथ ही वो 2012-14 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कानूनी सलाहकारों में से एक था। कोयला घोटाले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के भी वो वकील थे। साथ ही वो पश्चिम बंगाल के स्टैंडिंग काउंसल भी रहे हैं।

इतना ही नहीं, महुआ मोइत्रा ने 2019 के लोकसभा चुनाव में सुहान मुखर्जी को अपना ‘इलेक्शन एजेंट’ बनाया था। साथ ही ये दोनों एक कंपनी में साथ में डायरेक्टर भी थे। पत्र में आरोप है कि महुआ मोइत्रा ने हेलेना लेर्श के खिलाफ ByteDance में भी शिकायत की जहाँ वो काम करती थीं। उन पर कंपनी के वकील सुहान के साथ रिलेशनशिप में जाकर ‘हितों के टकराव’ का आरोप लगाया। ByteDance ने ही ‘TikTok’ एप बनाया है।

पत्र के अनुसार, महुआ मोइत्रा का मानना था कि पश्चिम बंगाल के पुलिस अधिकारियों पर उनके एहसान हैं और इसीलिए वो उनका कहा नहीं टाल सकते। पत्र में आरोप है कि एक बार महुआ मोइत्रा को पता चला कि सुहान मुखर्जी किसी होटल में हैं तो वो ‘कारवाँ’ पत्रिका के संपादक अनंत नाथ के साथ बिना बताए वहाँ पहुँच गईं। उन्होंने धमकाने के लिए वहाँ अपने लिए एक कमरा बुक कर लिया। पत्र के अनुसार, महुआ मोइत्रा को अपनी इन हरकतों और अपने रसूख पर बड़ा नाज है। ऑपइंडिया के पास शिकायत की कॉपी मौजूद है।

जय अनंत देहाद्राई ने इस शिकायत में बताया है कि उन्हें पूरा यकीन है कि महुआ मोइत्रा अपने रसूख का इस्तेमाल कर के उनकी भी जासूसी करवा रही हैं। उन्होंने कहा कि वो जिन-जिन के संपर्क में हैं, उन पर भी नज़र रखी जा रही है। उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए कहा है कि महुआ मोइत्रा सुहान मुखर्जी वाला प्रकरण उन्हें सुनाती थी, ताकि वो ये एहसास दिला सकें कि वो जब चाहें तब जय को प्रताड़ित कर सकती हैं। उन्होंने लिखा कि महुआ मोइत्रा कई बार उन्हें कह चुकी हैं कि उनके लोकेशन के बारे में उन्हें सब पता है, वो जिन परिचितों से मिलते हैं उसकी खबर भी निलंबित सांसद को है।

नेहरू नहीं, पटेल के स्टाइल में चीन से निपट रही मोदी सरकार: बोले S जयशंकर, कनाडा और पाकिस्तान के गेम को भी किया बेनकाब

केंद्रीय विदेश मंत्री S जयशंकर ने ANI के साथ एक पॉडकास्ट में कहा है कि पाकिस्तान बातचीत की टेबल पर भारत को लाने के लिए आतंकवाद का सहारा लेता रहा है, लेकिन भारत ने उस खेल को खेलना बंद कर दिया है और पड़ोसी मुल्क की इस नीति को अप्रासंगिक बना दिया है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को वैध बताने वाली नीति जहाँ होगी, बातचीत के लिए भारत इस शर्त पर कभी नहीं तैयार होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान को आतंक और शत्रुता की भावना से बाहर निकल कर एक सहायत वातावरण तैयार करना होगा।

उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि हम पाकिस्तान से बातचीत नहीं करेंगे, क्योंकि पड़ोसी तो पड़ोसी होता है – लेकिन उसकी आतंकवाद का सहारा लेकर बातचीत की टेबल पर लाने वाली उसकी नीति अब नहीं चलेगी। केंद्रीय विदेश मंत्री इस पॉडकास्ट में अपनी पुस्तक ‘Why Bharat Matters’ के विषय में बात करने आए थे। उन्होंने कहा कि भारत सभी पड़ोसी देशों के साथ सामान्य रिश्ते चाहता है। उन्होंने याद किया कि कैसे श्रीलंका आर्थिक संकट में आया तो भारत ने मदद की। पाकिस्तान के संबंध में उन्होंने कहा कि ये उसके कार्यों पर निर्भर करेगा कि वो कैसे आर्थिक बदहाली से बाहर निकलता है, ये अचानक नहीं हुआ।

केंद्रीय विदेश मंत्री S जयशंकर ने इस पॉडकास्ट में चीन और भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की नीति को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि चीन के विषय में नेहरू ने जहाँ आदर्शवाद को तवज्जो देकर नरमी बरती, वहीं मोदी सरकार वास्तविकता को ध्यान में रख कर आगे चल रही है। उन्होंने याद दिलाया कि चीन को लेकर तत्कालीन पीएम नेहरू और गृह मंत्री सरदार पटेल के मतों में भिन्नता थी। उन्होंने कहा कि हम चीन नीति के संबंध में सरदार पटेल से सहमति रखते हैं।

उन्होंने याद दिलाया कि कैसे चीन को सुरक्षा परिषद में नेहरू ने सीट दिला दी थी। विदेश मंत्री ने याद दिलाया कि नेहरू की ‘चीन फर्स्ट’ पॉलिसी ‘Chindia’ पर खत्म हुई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि चीन के साथ हमारा व्यवहार कैसा रहेगा, ये उसकी नीति पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि UNSC की सीट नेहरू ने प्लेट में रख कर चीन को दे दी, लेकिन आज मोदी सरकार में दुनिया भारत का समर्थन कर रही है ताकि हमें सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता मिले।

इस दौरान केंद्रीय विदेश मंत्री ने कनाडा को लेकर भी बात की। उन्होंने बताया कि कैसे कनाडा की राजनीति में खालिस्तानियों को जगह दी गई, और उन्हें ऐसी हरकतों में लिप्त रहने की अनुमति दी गई जो भारत-कनाडा के रिश्तों को ख़राब कर सके। उन्होंने याद दिलाया कि ये न तो भारत के हित में है, न कनाडा के। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से कनाडा की राजनीति अभी इस स्थिति में नहीं है। उन्होंने इस दौरान रूस को एक महत्वपूर्ण और स्थिर दोस्त करार दिया।

पश्चिमी मीडिया द्वारा उनके रूस दौरे की आलोचना पर एस जयशंकर ने कहा कि अगर लोग उन्हें नहीं समझ पा रहे हैं तो इसका अर्थ है कि उनके माइंडगेम्स काम कर रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि रूस के साथ रिश्तों का भारत को फायदा हुआ है। उन्होंने रूस को एक महत्वपूर्ण साझीदार बताते हुए कहा कि कठिन समय में भी वो अच्छा पार्टनर रहा है। बकौल एस जयशंकर, भारत ने रूस-यूक्रेन युद्ध में न्यूट्रल रुख रखा और दोहराया कि बातचीत से ही समस्या का समाधान हो सकता है।

ED के 7 समन, मुस्लिम MLA ने खाली की सीट, JMM विधायक दल की बैठक… क्या झारखंड में सज रहा है ‘राबड़ी मॉडल’ का मंच?

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को जमीन घोटाला के मामले में ED (प्रवर्तन निदेशालय) ने 7वीं बार समन भेजा है। ED ने अपने पत्र में कहा था कि हेमंत सोरेन खुद तय करें कहाँ पूछताछ होगी, अधिकारी वहीं पहुँच जाएँगे। साथ ही जगह बताने के लिए 2 दिन और पूछताछ के लिए 7 दिन का समय दिया गया था। चूँकि पत्र शुक्रवार (29 नवंबर, 2023) को भेजा गया था, ऐसे में जगह बताने की समयसीमा खत्म हो चुकी है। अब हेमंत सोरेन ने ED को जवाब भेजा है।

झारखंड मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अधिकारियों ने ED को बंद लिफ्ट में सीएम का जवाब सौंपा। इससे पहले महाधिवक्ता राजीव रंजन से हेमंत सोरेन ने सलाह ली। वहीं उन्होंने 20 मिनट अपने पिता शिबू सोरेन से भी बात की। JMM (झारखंड मुक्ति मोर्चा) के संस्थापक शिबू सोरेन मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। CM सोरेन को इससे पहले 2023 में 8 अगस्त, 19 अगस्त, 1 सितंबर, 17 सितंबर, 26 सितंबर और 11 दिसंबर को समन भेजा गया था।

मामला भारतीय सेना के नियंत्रण वाली जमीन की खरीद-बेच से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि इसमें फर्जी नाम-पते का इस्तेमाल किया गया। जनजातीय समाज की जमीन कब्जाने का भी आरोप है। दक्षिणी छोटानागपुर के तत्कालीन आयुक्त नितिन मदन कुलकर्णी की शिकायत पर ये जाँच शुरू हुई थी। वहीं अब चर्चा है कि हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। उनकी पत्नी कल्पना सोरेन को नया CM बनाए जाने के कयास लगाए जा रहे हैं।

वहीं बुधवार (3 जनवरी, 2024) को हेमंत सोरेन ने सत्ताधारी गठबंधन के विधायक दल की बैठक भी बुलाई है। राँची स्थित CM आवास पर ये बैठक शाम 4:30 बजे बुलाई गई है। हेमंत सोरेन झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं। चर्चा है कि 7 समन को दरकिनार करने के बाद हेमंत सोरेन जानते हैं कि उनके खिलाफ ED सख्त एक्शन लेगी, इसीलिए उन्होंने अपनी पत्नी को CM बनाने का निर्णय लिया है। बिहार में लालू यादव ने जुलाई 1997 में चारा घोटाले में गिरफ़्तारी के बाद पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बना दिया था।

उधर झारखंड के गांडेय से विधायक सरफराज अहमद ने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका इस्तीफा स्वीकार भी कर लिया है। गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे का कहना है कि इसी तरह हेमंत सोरेन भी इस्तीफा देंगे। हालाँकि, सरफराज अहमद ने इस्तीफे का कारण निजी और पारिवारिक बताया है। उन्होंने कहा कि वो आगे भी झामुमो के सिपाही रहेंगे और I.N.D.I. गठबंधन को मजबूत करते रहेंगे। नए साल पर उनके गिरिडीह स्थित आवास पर भी सन्नाटा रहा और बधाई देने आए समर्थकों को निराशा हाथ लगी।

कहा जा रहा कि गांडेय से कल्पना सोरेन को लड़ा कर विधायक बनाया जा सकता है, क्योंकि मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हें 6 महीने के भीतर विधानसभा पहुँचना होगा। हालाँकि, भाजपा ने महाराष्ट्र उच्च न्यायालय के फैसले की प्रति दिखाते हुए कहा है कि अगर राज्य में 1 वर्ष के भीतर चुनाव हैं तो उपचुनाव नहीं होगा। जेल में बंद शराब कारोबारी योगेंद्र तिवारी के साथ भी हेमंत सोरेन के रिश्ते का आरोप लगा है। वो ट्रांस्पेर-पोस्टिंग जैसी चीजों में पर्दे के पीछे से हस्तक्षेप करता रहा है।

उधर झारखंड में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सबको पता है कि, भ्रष्टाचार के मामले में हेमंत सोरेन का बचना नामुमकिन है। उन्होंने कहा कि सीएम जानबूझकर राज्य में संवैधानिक संकट उत्पन्न करना चाहते हैं। अब देखना है कि झारखंड में ‘राबड़ी मॉडल’ चलता है या नहीं। राबड़ी देवी अपने पति लालू यादव के जेल से आने के बाद ही सीएम बनी रही थीं। उन्होंने 8 साल ये पद सँभाला। इसी बीच लालू यादव केंद्रीय रेल मंत्री भी बने।

‘पूरा इकोससिट्म ही यौन अपराधियों को बढ़ावा देता है’ : CM स्टालिन और चिदंबरम पर भड़कीं तमिल सिंगर, बर्बाद होने का दिया श्राप

तमिल गायिका चिन्मयी श्रीपदा ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और पी चिदंबरम को लताड़ा है। दोनों गीतकार वराईमुथु के साथ मंच साझा कर रहे थे। चिन्मयी ने वराईमुथु पर यौन शोषण का आरोप वर्ष 2018 में MeToo कैम्पेन चलने के दौरान लगाया था।

चिन्मई ने लिखा, “तमिलनाडु के कुछ सबसे शक्तिशाली लोगों ने मेरे साथ छेड़छाड़ करने वाले को मंच दिया, जबकि मुझ पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। मेरे करियर के कई साल बर्बाद हो गए। मैं आशा करूँगी कि इनका पूरा इकोसिस्टम जो कि यौन अपराधियों को बढ़ावा देता है और उनको सपोर्ट करता है, जबकि सच बोलने वाले ईमानदार लोगों को जेल में डालता है, बर्बाद होना चालू हो जाए। मैं प्रार्थना करूँगी और तब तक प्रार्थना करती रहूँगी जब तक मेरी इच्छा पूरी न हो जाए – वैसे भी मैं और कुछ नहीं कर सकती।”

39 वर्षीय चिन्मई श्रीपदा मुख्य रूप से दक्षिण भारत की फिल्मों के लिए गाने गाती हैं। उन्होंने 2018 में 70 वर्षीय वराईमुथु पर वर्ष 2005 के दौरान उन्हें स्विट्ज़रलैंड दौरे के दौरान एक कमरे में बुलाने का आरोप लगाया था। उन्होंने इसके अलावा उन्होंने वराईमुथु पर अपना करियर बर्बाद करने की धमकी देने का आरोप लगाया था। वराईमुथु पर इन आरोपों के लगने के बाद कई अन्य महिलाओं ने भी ऐसे ही बुरे अनुभव साझा किए थे। जब वराईमुथु ने इससे बचना चाहा तो चिन्मई ने उन्हें झूठा करार दिया था।

मुख्यमंत्री स्टालिन ने 1 जनवरी, 2024 को वराईमुथु के साथ मंच साझा करने का ट्वीट भी किया था। चिन्मई ने इससे पहले भी कमाल हसन और अन्य बड़े चेहरों पर इन आरोपों पर चुप रहने का आरोप लगाया था। वह इस मामले में कार्रवाई के लिए स्टालिन को पत्र भी लिख चुकी हैं। उन्होंने द्रमुक के कई नेताओं को वराईमुथू को बचाने का आरोप लगाया था।

12 साल की लड़की 34 हफ्ते से गर्भवती, नाबालिग भाई से थे सेक्स-संबंध: केरल हाईकोर्ट ने गर्भ गिराने की याचिका ठुकराई, आदेश – ऑपरेशन से हो बच्चे का जन्म

केरल हाई =कोर्ट ने एक मामले में एक 12 वर्ष की गर्भवती लड़की को गर्भपात की अनुमति देने से मना कर दिया है। बच्ची के अपने ही नाबालिग भाई से सम्बन्ध थे जिसके कारण वह गर्भवती हो गई और अब उसने इस मामले में केरल हाईकोर्ट के सामने गर्भ गिराने की इजाजत माँगी थी। यह निर्णय केरल हाईकोर्ट ने 22 दिसम्बर, 2023 को सुनाया था।

न्यायिक मामलों के बारे में रिपोर्ट करने वाली वेबसाइट ‘लाइव लॉ’ के अनुसार, एक 12 वर्षीय नाबालिग ने कोर्ट के सामने यह याचिका लगाई थी कि उसे चिकित्सीय तौर पर गर्भपात की इजाजत दी जाए। इस मामले में केरल हाईकोर्ट ने बच्ची के गर्भ की जाँच के लिए एक मेडिकल बोर्ड के गठन का आदेश दिया था।

मेडिकल बोर्ड के गठन के बाद यह सामने आया था कि बच्ची 34 सप्ताह की गर्भवती है और ऐसे में उसे गर्भपात की इजाजत उसकी कम आयु के चलते दी जा सकती है और यह उसकी मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित नहीं करेगा। हालाँकि, कोर्ट ने इस पर दुबारा जाँच करने को कहा। कोर्ट को गर्भपात की जगह पर मेडिकल बोर्ड ने सुझाया कि 2-3 सप्ताह के बाद बच्ची के ऑपरेशन के जरिए उसके गर्भ को निकाला जाए क्योंकि वो बच्चे को जन्म देने के लिए पूरी तरह से स्वस्थ है। ऐसे में कोर्ट ने गर्भ के विकसित हो जाने और अन्य कारणों को सामने रखते हुए गर्भपात की इजाजत देने से मना कर दिया।

केरल हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा, “गर्भ अब 34 सप्ताह का हो गया है और अब पूरी तरह से विकसित हो कर बाहर की जिन्दगी की तैयारी कर रहा है। ऐसे में गर्भपात की इजाजत नहीं दी जा सकती और बच्चे को जन्म लेने दिया जाएगा।” उच्च न्यायालय ने इस बात पर हैरानी जताई कि बच्ची के गर्भवती होने के विषय में अब तक माता-पिता को जानकारी ही नहीं थी।

कोर्ट ने यह भी कहा कि बच्ची को उसके माता-पिता के साथ रखा जाए ताकि उसकी देखभाल की जाए। साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया कि नाबालिग के बच्चे के जन्म के लिए ऑपरेशन का सहारा लिया जाए या फिर सामान्य तरीके से जन्म इसका निर्णय लेने की छूट माता-पिता को दी है।

कोर्ट ने बच्ची के नाबालिग भाई, जिसके ऊपर उसे गर्भवती करने के आरोप हैं, उसे उसके आसपास आने देने से रोकने को कहा है। उन्होंने कहा है कि उसका नाबालिग भाई बच्ची से किसी भी तरह का सम्बन्ध ना स्थापित कर पाए। इसकी जिम्मेदारी बच्ची के माता-पिता को दी गई है।

इस्लाम कबूलने का दबाव डाल रही थी मुस्लिम बीवी, फाँसी लगाकर मर गया दलित शुभम: आखिरी वीडियो में बताया – रेप केस लगाया, लाखों वसूले

उत्तर प्रदेश के कानपुर से आत्महत्या का मामला सामने आया है। खबरों की मानें तो एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी द्वारा प्रताड़ित किए जाने के बाद अपना जीवन खत्म कर लिया। उसकी पत्नी उसे इस्लामी धर्मांतरण के लिए मजबूर कर रही थी और जब उसने ऐसा नहीं किया तो वो उसे छोड़ कर चली गई। मृतक DJ बजा कर जीवन-यापन करता था। घटना रविवार (31 दिसंबर, 2023) की है। युवक ने मौत से पहले वीडियो बना आकर उसे सोशल मीडिया पर भी पोस्ट किया।

इस वीडियो में युवक कह रहा है, “मोहब्बत का झूठा दिलासा देकर किसी के जीवन के साथ मत खेलना। तुमने कहा था कि धर्म-परिवर्तन कर लो। किसी से शादी करने की इच्छा भी नहीं रही, अब मरना है बस।” युवक के परिजनों का कहना है कि शुभम का एक मुस्लिम लड़की से पिछले 13 वर्षों से अफेयर चल रहा था और 3 साल पहले दोनों ने शादी भी कर ली थी। वीडियो में शुभम कह रहा है कि हमने तुम्हें कभी हिन्दू बनने के लिए नहीं कहा, लेकिन तुमने मुस्लिम बनने का दबाव बनाया।

पत्नी ने बलात्कार का मामला दर्ज करवा कर अपने पति को जेल भी भिजवा दिया था। जेल से निकलने के बाद शुभम ने आत्महत्या कर ली। शुभम ने मरने से पहले कहा कि ये रेप केस फर्जी है, उनका जीवन बर्बाद हो गया है। शुभम वाल्मीकि 25 साल के थे। वो जूही थाना क्षेत्र के मिलिट्री कैम्प में रहते थे। सोमवार को उनका शव फंदे से लटका हुआ मिला। शुभम और मुस्लिम लड़की ने कोर्ट मैरिज की थी, पिछले एक साल से दोनों के बीच विवाद शुरू हुआ था।

पिता ने बताया कि फर्जी रेप केस ने उनके बेटे को तोड़ कर रख दिया था। अपने घर की पहली मंजिल के कमरे में शुभम ने आत्महत्या की। पिता जब कमरे में गए तो दुपट्टे से लड़ते हुए देखा। उन्हें हैलट अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वो बचे नहीं। एक अन्य वीडियो में शुभम ने आरोप लगाया है कि पत्नी ने उनके 40,000 रुपए नहीं दिए। लड़की के घर वालों ने 80,000 रुपए का लोन कराने के बाद तलाक दिला दिया। उन्होंने रेप का मुकदमा खत्म कराने के नाम पर भी ढाई लाख रुपए की वसूली के आरोप लड़की के परिजनों पर लगाए। उन्होंने कहा कि वो कर्ज में डूबे हुए हैं।

पुलिस को ये वीडियो मृतक के फोन से मिला है। इसमें उन्होंने अपनी पत्नी से कहा है कि उसे साथ नहीं रहना है तो न रहे, लेकिन उनके पैसे वापस कर दे। वीडियो में वो कहते हैं, “तुमने हमें बर्बाद कर के बहुत अच्छा किया। हुनर, नौकरी, ज़िंदगी भर की कमाई – मैंने सब लुटा दी। तुमने सिर्फ मेरा इस्तेमाल किया। मैंने अपने-आप को तुम्हारे प्यार में पूरी तरह बर्बाद कर लिया।” वीडियो में उसने अपनी मौत के लिए पत्नी और ससुराल वालों को जिम्मेदार ठहराया है।

ऑपइंडिया का असर: पुणे के हिंदू इलाके में बनने जा रहा था कब्रिस्तान, विरोध के बाद आदेश कैंसिल

पुणे के कोंधावा मे हिंदू बहुल इलाके में सरकारी प्लॉट को कब्रिस्तान नहीं बनाया जाएगा। पुणे नगर निगम ने कब्रिस्तान बनाने के प्रस्ताव को कैंसिल कर दिया है। ये आदेश ऑपइंडिया द्वारा इस मुद्दे के उठाने के कुछ महीने बाद आया।

रिपोर्ट में हमने इलाके के लोगों का पक्ष रखा था और उनकी चिंता को बताया था कि जहाँ कब्रिस्तान बनाने की बात हो रही है वहाँ पास में उनका मंदिर है। लोगों का कहना था कि अगर ऐसा हुआ तो इससे धार्मिक भावनाएँ आहत हो सकती हैं।

इस संबंध में एनसीपी के पूर्व विधायक चेतन तुपे और बीजेपी नेता योगेश टिलेकर ने मई 2023 में पुणे नगर निगम (पीएमसी) को एक पत्र लिखा था। पत्र में हिंदू सोसायटीज के पास स्थित इस जमीन को कब्रिस्तान के लिए मुफीद बताया था। इसमें कहा गया था कि कोंढवा में मुस्लिमों की अच्छी-खासी आबादी है। करीब में कब्रिस्तान होना उनके लिए सहूलियत भरा होगा।

हालाँकि, बाद में भाजपा योगेश तिलेकर से जब ऑपइंडिया ने बात की और स्थानीयों की चिंता को उठाया, तो उन्होंने बताया कि उन्हें इलाके को लेकर गलत जानकारी दी गई थी कि वो मुस्लिम बहुल है। बाद में पता चला कि उस इलाके में तो 12-15 हजार हिंदू रहते हैं। इसकी वजह से उन्हें गलती का एहसास हुआ।

हिंदू इलाके में नहीं बनेगा कब्रिस्तान, PMC परमिशन कैंसिल

इसके बाद उन्होंने कब्रिस्तान न बनने देने का आश्वासन दिया और अक्टूबर 2023 में पीएमसी से गुहार लगाई कि हिंदू इलाके में कब्रिस्तान के लिए कोई परमिशन न दी जाए। अब इसी मामले में 28 दिसंबर 2023 को बताया गया कि जिस जगह को अभी जॉगिंग ट्रैक की तरह प्रयोग किया जाता है। उसे कब्रिस्तान नहीं बनाया जाएगा। जो परमिशन मिली थी उसे कैंसिल कर दिया गया है।

भाजपा नेता द्वारा पीएमसी को लिखा गया पत्र

बता दें कि ये पूरा मामला आरटीआई एक्टिविस्ट डॉ पारितोष जवारे पाटिल की आरटीआई से खुला था। इसमें उन्होंने रविराज कोलोराडो को-ऑप हाउसिंग सोसायटी की डिटेल्स की जानकारी माँगी थी। इसी दौरान पता चला था कि जमीन को पीएमसी ने वो जमीन प्ले ग्राउंड के लिए दे रखी है जिसमें 43 लाख रुपए खर्च होने के बावजूद वो अब तक ऐसी ही है। इसका निर्माण कार्य सलीम कंस्ट्रक्शन को मिला था, पर जमीन फिर भी खाली रही। बाद में इसे मुस्लिम कब्रिस्तान बनाने का प्रस्ताव रखा गया जिसके बारे में जानकर स्थानीयों ने विरोध किया।

पाटिल ने 2 जनवरी को ऑपइंडिया से बात करते हुए पुष्टि की कि पीएमसी ने अपना निर्णय वापस ले लिया है। पाटिल ने कहा, “हमें खुशी है कि फैसला वापस ले लिया गया है। हम मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नहीं हैं। हम बस इतना चाहते हैं कि हमारा स्वास्थ्य और हमारे बच्चे सुरक्षित रहें। अगर वहाँ हिंदू कब्रिस्तान बनाने का अनुरोध होता तो भी हम इसी तरह विरोध करते।”

नोट: सिद्धि सोमानी की यह मूल रिपोर्ट अंग्रेजी में प्रकाशित है। आप इसे इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

गोवा-मनाली नहीं, अब अयोध्या-काशी है हॉटस्पॉट: होटल बुकिंग में 70% उछाल, नए साल पर वाराणसी पहुँचे 8 लाख श्रद्धालु

अयोध्या में 22 जनवरी, 2024 को राम मंदिर का उद्घाटन होना है। हिन्दुओं का 500 वर्षों का संघर्ष फलीभूत होगा और रामलला टेंट से गर्भगृह में विराजेंगे। अयोध्या पहुँचने के लिए देश भर के लाखों लोग बेकरार हैं। अयोध्या तो अभी चर्चा में है, लेकिन वाराणसी, उज्जैन और मथुरा जैसे धार्मिक स्थलों पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुँच रहे हैं। इसके 2 बड़े कारण हैं – मौजूदा सरकार श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएँ विकसित कर रही हैं और दूसरा, ये भारत के सांस्कृतिक पुनरुत्थान का भी काल है।

सांस्कृतिक पुनरुत्थान इसीलिए, क्योंकि जिस भारत के हर क्षेत्र में राम नाम लिया जाता रहा है वहीं पर राम की जन्मभूमि को आक्रांताओं ने कब्ज़ा लिया था और वो अब जाकर मुक्त हुआ है। हिन्दू समाज ने वर्तमान कानूनी तौर-तरीकों से अपना अधिकार वापस पाया है। कहने का अर्थ ये है कि विशेष मौकों पर अब लोग सिर्फ एन्जॉय करने के लिए मनाली, मसूरी और गोवा ही नहीं जा रहे बल्कि मंदिरों में दर्शन और आध्यात्मिकता के अनुभव को प्राथमिकता दे रहे हैं।

OYO पर भी अयोध्या डिमांड में, 70% की उछाल

अब OYO द्वारा जारी किए गए आँकड़े को देख लीजिए। OYO होटल चैन के संस्थापक रितेश अग्रवाल ने ट्वीट कर के बताया है कि इस बार पहाड़ और समुद्री बीच का नहीं, बल्कि अयोध्या का क्रेज है। 2023 के अंतिम दिन उन्होंने जानकारी दी है कि उस दिन 80% ज़्यादा लोग अयोध्या में रुकने के लिए सर्च कर रहे थे। ये अब तक की सबसे बड़ी उछाल में से एक है। उन्होंने इस बात से भी सहमति जताई कि अयोध्या 2024 का सबसे बड़ा पर्यटन स्थल होने वाला है।

रितेश अग्रवाल ने बताया कि भारत के धार्मिक स्थल अब लोगों के सबसे पसंदीदा डेस्टिनेशन हैं। अपने एप के यूजर्स के आँकड़ों को लेकर उन्होंने बताया कि गोवा और नैनीताल के मुकाबले अयोध्या रुकने वालों में सबसे ज़्यादा उछाल देखी गई है। जहाँ अयोध्या के मामले में ये आँकड़ा 70% रहा, वहीं गोवा में 50% और नैनीताल में 60% की उछाल देखी गई। रितेश अग्रवाल मानते हैं कि अगले 5 वर्षों तक आध्यात्मिक पर्यटन भारत में टूरिज्म इंडस्ट्री का नायक होगा।

ये बताता है कि लोग अपने परिवार के साथ धार्मिक स्थलों पर विशेष मौकों पर जाना चाहते हैं। चाहे अविवाहित जोड़े हों या फिर बड़े-बुजुर्ग, सभी अब मौज-मस्ती की जगह आध्यात्मिकता को प्राथमिकता दे रहे हैं। या फिर, घूमने-फिरने वाले जगहों पर जाने का अलावा धार्मिक स्थलों पर भगवान के दर्शन के लिए भी जा रहे हैं। यानी, अब आधुनिकता के दिखावे में धर्म को गाली देने का ट्रेंड कम हो रहा है। तभी अयोध्या जैसी जगहों पर लोग अधिक से अधिक संख्या में जाना चाहते हैं, वहाँ समय बिताना चाहते हैं।

वाराणसी में नए साल पर पहुँचे 8 लाख दर्शनार्थी

2024 के पहले दिन वाराणसी में 8 लाख दर्शनार्थी बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए पहुँचे। विश्वनाथ कॉरिडोर का उद्घाटन खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था, जो यहाँ से सांसद भी हैं। यहाँ भी मंदिर को कब्ज़ा कर औरंगजेब ने ज्ञानवापी मस्जिद बनवा दी थी। ये मामला कोर्ट में विचाराधीन है, क़ानूनी लड़ाई चल रही है। लेकिन, मोदी सरकार ने यहाँ विकास को प्राथमिकता दी और उसके बाद काशी की तस्वीर बदल गई। बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुँचने लगे।

सोमवार (1 जनवरी, 2024) को तड़के सुबह 4 बजे से ही श्रद्धालुओं के पहुँचने का सिलसिला शुरू हुआ और रात 11 बजे तक अनवरत दर्शन चलता रहा। आरती से शयन तक कतार लगी रही। 4 लाख लोगों ने गंगा के विभिन्न घाटों पर स्नान भी किया। खुद मंदिर प्रशासन ने बताया है कि इस बार दर्शनार्थियों के सारे रिकॉर्ड टूट गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर काशी में रामधुन भी गूँजा। इसी तरह सावन महीने में 1.57 करोड़ श्रद्धालु काशी पहुँचे थे।

इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलता है। सारे होटल बुक रहते हैं। स्थानीय उत्पाद बड़ी संख्या में बिकते हैं, उनका प्रचार-प्रसार होता है। फल-फूल-प्रसाद बेचने वालों से लेकर कपड़ा-खिलौने बेचने वाले तक की चाँदी रहती है। चूँकि लोग देश भर से आते हैं, इसीलिए स्थानीय प्रोडक्ट्स के साथ-साथ संस्कृति में दूर-दूर तक पहुँचती है। जो भी रेस्टॉरेंट्स और ढाबे होते हैं, उनकी भी चाँदी रहती है। बाहर से आए लोग भोजन भी जहाँ रहते हैं वहीं का करते हैं, ऐसे में फ़ूड इंडस्ट्री भी बूम होती है।

सांस्कृतिक-धार्मिक पर्यटन का बढ़ना भारत के लिए अच्छी खबर

इसी तरह मथुरा में भी 3 दिन में 18 लाख लोग दर्शन के लिए पहुँचे। ये तो सिर्फ उत्तर प्रदेश की बात है। लेकिन, शिव, राम और कृष्ण की भूमि इसका उदाहरण है कि 2024 इस मामले में भारत के लिए कितना अच्छा रहने वाला है। इससे न सिर्फ रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं, बल्कि छोटे-मोटे कारोबार करने वालों की कमाई भी बढ़ रही है। सबसे बड़ी बात, मोदी सरकार ऐसे स्थलों का विकास करने और वहाँ सुविधाओं को बढ़ाने को लेकर हरसंभव प्रयास कर रही है।

सुखद ये भी है कि युवा भी अब धार्मिक स्थलों पर पहुँच रहे हैं। आप इस्कॉन के मंदिरों में जाइए या फिर बाँके बिहारी मंदिर, आपको बड़ी संख्या में लड़के और लड़कियाँ वहाँ दिखेंगे। चूँकि ये इंटरनेट और सोशल मीडिया का ज़माना है, इसीलिए तस्वीरें-रील्स बनाने वाली जनरेशन भी धार्मिक स्थलों पर जा रही है। अगर उस स्थल की मर्यादा को ध्यान में रख कर तस्वीरें ली जाएँ तो ये गलत नहीं है। धार्मिक स्थलों का और प्रचार-प्रसार होगा तो इससे और लोग वहाँ पहुँचेंगे जो कि अच्छा ही है।

अयोध्या में राम जन्मभूमि प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम के इर्दगिर्द ही 50,000 करोड़ रुपए का कारोबार होने की उम्मीद है। तो सोचिए, भारत के ये अलग-अलग इलाके जो मुख्यतः ग्रामीण परिवेश वाले हैं, वहाँ देश-विदेश से लोगों के पहुँचने से जो हजारों करोड़ रुपयों का कारोबार हो रहा है उसका कितना फायदा गरीबों को मिलता होगा। भारत के पर्व-त्योहारों के दौरान वैसे भी बड़ा कारोबार होता आया है। खासकर दिवाली के दौरान लाखों करोड़ का कारोबार होता है।

हिन्दू धार्मिक स्थलों का विकसित होता, उसके इर्दगिर्द कारोबार होना, स्थानीय अर्थव्यवस्था का आगे बढ़ना और सरकार द्वारा वहाँ विकास कार्य कराना – ये सभी फैक्टर मिल कर 2024 को भारत के आध्यात्मिक पर्यटन के उद्भव का काल बनाएँगे। जो समाज जितना समृद्ध होता है, उसका प्रभाव उतना ही बढ़ता है। यहूदी समाज से ये हमें सीखने को मिलता है। हिन्दुओं को भी समृद्ध बनना है तो आध्यात्मिक पर्यटन को हमें इसका एक जरिया बनाना ही होगा।

चौथी के छात्र ने हिंदू सहपाठी को ब्लेड मारा, शिकायत पर घरवालों को बुलाया: मुस्लिम अभिभावकों ने कक्षा में घुस बच्चों को गला घोंटा, 2 गिरफ्तार

गुजरात के वडोदरा के स्कूल से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। वहाँ चौथी कक्षा में पढ़ने वाले दो छात्रों के बीच झगड़ा हुआ और इसका हल्ला तब मचा जब एक मुस्लिम छात्र ने हिंदू छात्र पर ब्लेड से वार कर दिया। इतना ही नहीं इस मामले में जब पीड़ित छात्र ने अपने दोस्तों के साथ प्रिंसिपल से शिकायत की तो ब्लेड मारने वाले छात्र के माता-पिता स्कूल आ गए और क्लासरूम में घुसकर शिकायत करने वाले छात्र की भी पिटाई कर दी।

यह घटना वडोदरा के नागरवाड़ा इलाके में स्थित जीवन साधना स्कूल की है। इस स्कूल में पढ़ने वाले चौथी कक्षा के एक मुस्लिम छात्र ने सामान्य विवाद में एक हिंदू छात्र को ब्लेड से घायल कर दिया था। घटना के बाद जब अन्य छात्रों ने स्कूल प्रिंसिपल से शिकायत की तो ब्लेड मारने वाले छात्र के अभिभावकों को बुलाया गया। हालाँकि, अभिभावकों ने आकर अपने बच्चे को समझाने की बजाय, पीड़ित छात्र का पक्ष लेने वाले उसके दोस्तों को सबसे सामने बुरी तरह से पीटा।

इस पूरी घटना को लेकर ऑपइंडिया ने पिटाई का शिकार हुए एक छात्र के परिजनों से संपर्क किया। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, “जब मुस्लिम छात्र (हम नाम का उल्लेख नहीं कर रहे हैं क्योंकि बच्चा नाबालिग है) ने ब्लेड का इस्तेमाल किया, तो मेरे बेटे और उसके तीन अन्य दोस्तों ने प्रिंसिपल से शिकायत की, स्कूल ने उसके अभिभावक को बुलाया। तभी मुस्लिम छात्र के परिवार के दो सदस्य स्कूल पहुँचे और प्रिंसिपल से मिलने के बजाय सीधे कक्षा में घुस गए।”

‘किसने तेरा नाम दिया’ कहकर टूट पड़े हमारे बच्चों पर

पीड़ित छात्र के माता-पिता ने ऑपइंडिया को बताया, “कक्षा में जाकर उन अभिभावकों ने ब्लेड मारने वाले बच्चे से पूछा, ‘बोल तेरा नाम किसने प्रिंसिपल को बताया।’ उसने मेरे बेटे के एक दोस्त को थप्पड़ मारा और दूसरे का गला घोंटने लगा और मेरे बेटे को कक्षा के दौरान प्रिंसिपल के कार्यालय में खींच ले गया।”

बता दें कि इसी घटना के सामने आने के बाद स्थानीय हिंदू संगठनों में गुस्सा फूट पड़ा। ऑपइंडिया ने इस मामले पर जानकारी लेने के लिए वडोदरा शहर बजरंग दल के सह-संयोजक प्रतापराव मोहिते से भी बात की।

उन्होंने कहा, “घटना की जानकारी मिलते ही हम स्कूल पहुँचे। जब हम स्कूल पहुँचे और प्रबंधकों से बात करने की कोशिश की तो गेट बंद कर हमें रोक दिया गया। इस बीच स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों के अभिभावक भी एकत्र हो गए। हमने सभी स्कूलों में प्रवेश किया, संगठन और मीडिया सहित लोगों को इकट्ठा किया और स्कूल ट्रस्टी से घटना पर जवाब माँगा।”

मोहिते के मुताबिक, मीडिया से रूबरू होते हुए जब स्कूल प्रबंधकों से घटना के बारे में पूछा गया तो उन्होंने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और उन्हें बाहर निकालने की धमकी दी। प्रतापराव ने ऑपइंडिया को बताया, “प्रशासक कह रहे थे कि हमें स्कूल आने की अनुमति नहीं है, आखिर इनके ये कानून तब कहाँ चले जाते हैं जब पीड़ित बच्चों को पीटने लोग स्कूल आते हैं और छात्रों की पिटाई करते हैं?”

उन्होंने कहा कि स्कूल में एक छात्र को ब्लेड मारने जैसी गंभीर घटना को संचालक दबाना चाहते थे। इस हंगामा को बढ़ता देख आखिरकार स्कूल को आरोपित अभिभावक के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करने के लिए मजबूर होना पड़ा। शिकायत के बाद पुलिस ने स्कूल में घुसकर मारपीट करने वाले मुस्लिम छात्र के 2 अभिभावकों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया है। फिलहाल वडोदरा पुलिस सीसीटीवी फुटेज और पीड़ित छात्र से पूछताछ के मुताबिक मामले की जाँच कर रही है।

क्या है ‘हिट एंड रन’ कानून, क्यों है इसकी जरूरत, इसके खिलाफ ट्रक ड्राइवर क्यों कर रहे प्रदर्शन: सारे सवालों का जवाब एक साथ

देश के कई हिस्सों से ट्रक और टैंकर ड्राइवरों के प्रदर्शन की खबरें सामने आ रही हैं। छतीसगढ़, बिहार, मध्य प्रदेश और अन्य कई राज्यों में इन्होंने हड़ताल भी की है। ट्रक ड्राइवर अपने प्रदर्शन के पीछे का कारण हाल ही में लागू हुई भारतीय न्याय संहिता में ‘हिट एंड रन’ के कानून को बता रहे हैं।

ड्राइवरों का कहना है कि यह कानून उनके अधिकारों को प्रभावित करता है और इसके लागू रहते हुए वह गाड़ी नहीं चला सकते। यह प्रदर्शन ट्रक और टैंकर जैसी बड़ी गाड़ियों से शुरू होकर अब बस और अन्य कमर्शियल गाड़ियों तक आ गया है।

कानून के खिलाफ नोएडा, इंदौर, मुंबई और जयपुर समेत कई शहरों में ट्रक चालक प्रदर्शन कर रहे हैं। इस प्रदर्शन के कारण कई जगह पेट्रोल पम्पों पर तेल की सप्लाई रुकने की भी खबरें सामने आई है। अन्य कई जगह से भी अन्य सामान की आपूर्ति बाधित होने की सूचनाएँ सामने आ रही हैं।

क्या है प्रदर्शन की वजह?

ट्रक ड्राइवर और ट्रांसपोर्टर इस कानून के पीछे हाल ही में लागू हुई भारतीय न्याय संहिता की धारा 106 (2) का हवाला दे रहे हैं। यह कानून किसी भी प्रकार के वाहन से दुर्घटना करके भागने और लापरवाही से चलाने को लेकर सजा के विषय में बताता है।

इस कानून में लिखा हुआ है कि यदि कोई व्यक्ति लापरवाही से किसी प्रकार का वाहन चलाता है या फिर किसी को ठोंक कर पुलिस या प्रशासन को सूचित किए बिना भागता है और पीड़ित की मौत हो जाती है तो ऐसे मामले में 10 वर्षों की सजा होगी और जुर्माना भी लगाया जाएगा। इस अपराध को नई न्याय संहिता में गैर-जमानती बताया गया है।

जमानत ना देने वाली बात को लेकर ट्रक ड्राइवर प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि हादसे के बाद जब तक ड्राइवर की गलती को लेकर फैसला नहीं आता तब तक वह जेल में रहेगा भले ही वह निर्दोष हो। उनका कहना है कि वह हादसे के बाद भीड़ के गुस्से से बचने के लिए हादसे वाली जगह से भागते हैं ना कि पीड़ित को नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से। यह कानून हादसा करके भागने वालों पर ही विशेष रूप से प्रभाव डालेगा। ऐसे में सुनवाई के दौरान ड्राइवर के जेल में रहने और ट्रक के खड़े रहने से मालिक को भी नुकसान होगा।

इसके अलावा इस अपराध में जुर्माने की राशि को लेकर भी ड्राइवर और ट्रक मालिक नाराज हैं। उनका कहना है कि इसमें जुर्माना 7 लाख रुपए रखा गया है जो कि अधिक है और कम कमाई वाले ड्राइवर इतनी धनराशि नहीं दे सकता। ट्रक ड्राइवर और मालिक पुराने कानून का समर्थन कर रहे हैं।

क्या था पुराना कानून?

लापरवाही से गाड़ी चलाने के और किसी को मार के भागने को लेकर पुराना कानून भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत धारा 304 (A) में प्रावधान है। इसके अंतर्गत कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति गाड़ी लापरवाही से चलाते हुए किसी को मार देता है और वहाँ से भागता है तथा दोषी सिद्ध होता है तो उसे 2 साल की सजा दी जाएगी। साथ ही उस पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है। ऐसे मामलों में पहले जमानत का प्रावधान भी था।

कानून लाने की क्यों पड़ी आवश्यकता?

लापरवाही से गाड़ी चलाने वाले और एक्सीडेंट कर भागने के मामले भारत में लगातार बढ़ रहे हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की तरफ से जारी की ADSI-2022 रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 में भारत की सड़कों पर 4.46 लाख हादसे हुए जिसमें 1.7 लाख लोगों ने जान गँवाई।

इन हादसों में से लगभग 11% हादसे ट्रक और बस जैसे बड़े वाहनों से हुए। वहीं 1.7 लाख मौतों में से 87% मौतें गाड़ी तेज चलाने, लापरवाही से चलाने या फिर नशे में चलाने के कारण हुईं। यानी सड़क हादसों के कारण होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण लापरवाही से गाड़ी चलाना ही रहा।

ऐसे में सरकार ने सड़क पर लोग ध्यान से गाड़ी चलाएँ और साथ ही जो ड्राइवर सड़क पर हादसे करके भाग जाते हैं उनके लिए सजा कड़ी करने को नई भारतीय न्याय संहिता में सजा को बढ़ाया गया और साथ ही इसे गैर जमानती अपराध बनाया गया।

क्या प्रदर्शन करने वालों तक गलत सूचना पहुँची है?

भारतीय न्याय संहिता में लापरवाही से गाड़ी चलाने और हिट एंड रन के चलते कानून सख्त करने को लेकर देश भर में ट्रक ड्राइवर ही अधिकांश प्रदर्शन कर रहे हैं जबकि यह कानून हर तरह के वाहन चालकों पर लागू होता है। यदि कोई दुपहिया वाहन से भी किसी को मार के भाग जाता है तो उस पर भी यही कार्रवाई होगी। ऐसे में कहा जा रहा है कि प्रदर्शन करने वाले तक इस मामले में गलत सूचना पहुँची है।

भारत की एक बड़ी ट्रक यूनियन आल इंडिया ट्रकर्स वेलफेयर असोसिएशन के एक पदाधिकारी ने नाम ना लिखे जाने की शर्त पर यह बात स्वीकार की कि कुछ लोग इस कानून के विरोध के आड़ में अपना एजेंडा भी सेट कर सकते है। उनका कहना है कि वह कानून के खिलाफ नहीं हैं बस इसमें ट्रक ड्राइवरों के लिए कुछ छूट चाहते हैं।