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कब्र खोद निकाले थे 28 शव… तीस्ता सीतलवाड़ को राहत देने से हाई कोर्ट का इनकार, ‘राजनीतिक उत्पीड़न’ के रोना पर कहा- ये आजकल सब बोलते हैं

गुजरात हाईकोर्ट ने सोमवार (2 जनवरी 2024) को इशारा किया कि कथित सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ को पंडरवाड़ा कब्र खुदाई मामले में किसी प्रकार की राहत नहीं दी जाएगी।

बता दें साल 2005 में गोधरा हिंसा के बाद पंचमहल जिले के पंडरवाड़ा के पास एक कब्रिस्तान से कब्र खोदने और 28 शवों को निकालने के मामले में तीस्ता का नाम दर्ज है।

इस संबंध में एफआईआर 2006 में हुई थी। लेकिन तीस्ता सीतलवाड़ का नाम 2011 में जोड़ा गया। इस एफआईआर में गुजरात पुलिस ने झूठे सबूत बनाने, असली सबूत नष्ट करने, कब्रिस्तान पर अतिक्रमण करने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने जैसे आरोप लगाए थे।

इसके बाद 2017 में सीतलवाड़ ने एक याचिका दायर की। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, सोमवार (2 जनवरी 2024) को जब मामला सुनवाई के लिए आया तो सोमवार को जब मामला सुनवाई के लिए आया, तो जस्टिस संदीप भट्ट ने सीतलवाड़ के वकील योगेश रवानी से कहा कि रिकॉर्ड देखने के बाद, “मैं इच्छुक नहीं हूँ। आपको (अदालत को) संतुष्ट करना होगा।”

इस दौरान सीतलवाड़ के वकील ने कहा- “यह आधिपत्य का विशेषाधिकार है। हम अदालत को समझाने की कोशिश करेंगे क्योंकि कोई अपराध नहीं बनता है। यह राजनीतिक उत्पीड़न है।”

इतना सुन जज ने उन्हें कहा कि जो तर्क वो दे रहैं है वो आजकल इस्तेमाल होने वाला व्यापक शब्द है। इसका इस्तेमाल हर जगह हो रहा है। इसके बाद न्यायधीश ने मामले की सुनवाई 9 जनवरी तक के लिए स्थगित कर दिया।

गौरतलब है कि साल 2005 के इस मामले में लूनावाड़ा नगर पालिका ने सीतलवाड़ की एनजीओ ‘सिटीजन फॉर जस्टिस एंड पीस’ के पूर्व कोऑर्डिनेटर रईस खान सहित 7 लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी। हाईकोर्ट ने सीबीआई जाँच का आदेश दिया था। इस मामले में रईस खान ने तीस्ता से अलग होने के बाद उनका नाम अपने बयान में लिया था और उसी के आधार पर उनका नाम एफआईआर में शामिल किया गया।

एयरपोर्ट, रेल लाइनों का बिजलीकरण, 4 लेन रोड, समुद्री टर्मिनल… तमिलनाडु को ₹19800 करोड़ की सौगात देने पहुँचे PM मोदी, लक्षद्वीप से भी निभाएँगे वादा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने 2 दिवसीय दक्षिण भारत दौरे के पहले दिन 2 जनवरी, 2024 को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली पहुँचे हैं। यहाँ उनका स्वागत तमिलनाडु के मुख्यमंत्री MK स्टालिन ने किया। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी भारतीदशन विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए हैं।

प्रधानमंत्री मोदी के साथ इस विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में तमिलनाडु के राज्यपाल RN रवि भी शामिल हुए हैं। यहाँ प्रधानमंत्री ने युवाओं को संबोधित भी किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “यह 2024 में मेरा जनता से पहला संवाद है। मैं यहाँ तमिलनाडु जैसे सुन्दर राज्य में युवाओं के बीच आकर काफी खुश हूँ।”

आगे उन्होंने छात्रों से कहा, “आपने जो विज्ञान पढ़ा है वह आपके गाँव में किसान को मदद कर सकता है, आपने जो तकनीक के बारे में पढ़ा है वह मुश्किल समस्याओं को हल करने में काम आ सकती है, आपने जो व्यापार प्रबन्धन पढ़ा है वह कारोबारियों के काम आ सकता है। आपने जो अर्थशास्त्र पढ़ा है वह ग़रीबी कम करने के काम आ सकता है। ऐसे में हर व्यक्ति जो यहाँ से स्नातक हुआ है, भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने में मदद कर सकता है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 2-3 जनवरी 2023 को तमिलनाडु, लक्षद्वीप और केरल के दौरे पर रहेंगे। यह चुनावी वर्ष 2024 में प्रधानमंत्री का पहला दौरा है। इसकी शुरुआत उन्होंने तमिलनाडु से की है। तमिलनाडु में वह 2 जनवरी को तिरुचिरापल्ली में ₹19,800 करोड़ के कई प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण करेंगे।

इनमें से अधिकांश प्रोजेक्ट रोड, रेल और हवाई सेवाओं से जुड़े हुए हैं। प्रधानमंत्री भारतीदशन विश्वविद्यालय के बाद तिरुचिरापल्ली एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का लोकार्पण करेंगे। इसे 1100 करोड़ रुपए की लागत से बनाया गया है। यह एक वर्ष में 44 लाख यात्रियों को सँभालने की क्षमता रखता है। इसने नई तकनीक से डिजाइन किया गया है और इसमें तमिलनाडु की संस्कृति को भी प्रदर्शित किया गया है। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यहाँ कई रेल लाइनों के दोहरीकरण और उनके बिजलीकरण के प्रोजेक्ट देश को समर्पित करेंगे।

प्रधानमंत्री तिरुचिरापल्ली में त्रिची-कल्लागम के 39 किलोमीटर के चार लेन रोड समेत अन्य कई नई सड़कें भी जनता को समर्पित करेंगे। प्रधानमंत्री तिरुचिरापल्ली में ही मुगैयुर से मरक्क्म के आधारशिला रखेंगे। यहाँ वह एक लगभग 500 किलोमीटर लम्बी गैस पाईपलाइन और एक नए समुद्री तट टर्मिनल का भी उद्घाटन करेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी इसके बाद लक्षद्वीप जाएँगे जहाँ वह अपने पुराने वादे को निभाएँगे। यहाँ वह लक्षद्वीप के सुदूर द्वीपों को केरल के कोच्चि से ऑप्टिकल फाइबर केबल के जरिए इंटरनेट का शुभारम्भ करेंगे। उन्होंने इसका ऐलान वर्ष 2020 में 15 अगस्त के भाषण में किया था। इसके अलावा प्रधानमंत्री लक्षद्वीप से जुड़े अन्य कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट भी जनता को समर्पित करेंगे।

कहीं आग, कहीं जमीन धँसी, कहीं ढहे घर… जापान में तबाही के साथ नए साल की शुरुआत: 155 बार महसूस किए गए झटके, 30 की मौत

2024 की शुरुआत जापान के लिए तबाही लेकर आया है। भूकंप के कारण कई जगहों पर घर ढह गए हैं। मलबों में लोग दबे हैं। कई जगहों पर जमीन धँसी है। आगजनी की भी घटना हुई है। हालाँकि सुनामी को लेकर जो अलर्ट जारी किया गया था, वह अब वापस ले लिया गया है।

जापान में 1 जनवरी 2024 को रिक्टर स्केल पर 7.6 की तीव्रता वाला भूकंप आया था। इसके बाद सुनामी की चेतावनी जारी की गई थी। जापान के मध्य प्रांत में आए इस भूकंप में अब तक 30 लोगों की मौत हो चुकी है। बड़े पैमाने सम्पत्ति की क्षति हुई है। मौतों का आँकड़ा बढ़ने की आशंका जताई गई है।

7.6 तीव्रता वाले भूकंप के बाद से लगातार झटके महसूस किए जा रहे हैं। अब तक अलग-अलग तीव्रता वाले कम से कम 155 भूकंप जापान में महसूस किए गए हैं। अब यहाँ से नुकसान की तस्वीरें भी सामने आ रही हैं।

इन तस्वीरों और वीडियो में कहीं लोग छुपते नजर आ रहे हैं तो कहीं भूकंप के बाद का मंजर दिखाई पड़ रहा है। कहीं रोड में दरारें पड़ चुकी हैं तो कहीं एयरपोर्ट तक को नुकसान हुआ है। घर मलबे के ढेर बन गए हैं। बड़ी संख्या में लोगों ने तटीय इलाकों को छोड़कर ऊँचे स्थानों पर शरण ली है। जापान के वाजिमा शहर में भूकंप के कारण आग लग गई, जिससे 14 इमारतें राख हो गईं। एक अन्य शहर में ऐसी ही घटना में 200 से अधिक इमारतें जल गईं। जमीन धँसने की खबरें भी सामने आई हैं।

जानकारी के अनुसार, जापान में आए इस भूकंप का सबसे अधिक प्रभाव इशिकावा प्रांत में हुआ है। यहाँ भूकंप के बाद सुनामी की भी चेतावनी जारी की गई थी, जिसे अब हटा लिया गया है। अब जापान सरकार राहत बचाव के काम में जुटी हुई है। जापान की आपदा प्रबन्धन एजेंसियों और सुरक्षा बलों के हजारों जवान देश में आए भूकंप के कारण मलबे में बदली इमारतों में से जीवितों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

जापान में इस भूकंप के कारण लगभग 50,000 घरों की बिजली गुल है। इन घरों को बिजली पहुँचाने वाली व्यवस्थाएँ ध्वस्त हो चुकी है। जापान में हर वर्ष लगभग 1500 छोटे-बड़े भूकंप आते हैं।

जिस काम के लिए NASA ने लगाए ₹1565 करोड़, उसे ISRO ने ₹250 करोड़ में कर दिखाया: XPoSAT सैटेलाइट करेगी ब्लैक होल के साथ न्यूट्रॉन तारों का शोध

भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संगठन (ISRO) ने वर्ष 2024 के पहले ही दिन एक नया कीर्तिमान रच दिया। ISRO ने 1 जनवरी, 2024 को XpoSAT नाम का सैटेलाइट ब्लैक होल जैसे विषयों के शोध के लिए सफलतापूर्वक लॉन्च किया। इससे पहले अमेरिका की अन्तरिक्ष एजेंसी NASA ही ऐसा सैटेलाइट लॉन्च कर पाई है। हालाँकि, ISRO ने इसे यहाँ भी अमेरिका की NASA को लागत के मामले में पछाड़ दिया।

ISRO ने यह मिशन ₹250 करोड़ की लागत से पूरा किया है। इसमें सैटेलाइट बनाने से लेकर इसे लॉन्च करने तक की लागत शामिल है। NASA ने भी 2021 में एक ऐसा ही मिशन अन्तरिक्ष में भेजा था। इसका नाम IXPE था। यह मिशन भी अन्तरिक्ष में X-किरणों और ब्लैक होल तथा न्यूट्रॉन तारों के शोध के लिए भेजा गया था।। इस मिशन में नासा ने ₹1565 करोड़ रूपए (188 मिलियन डॉलर) खर्चे थे। ISRO ने वैसा ही मिशन 6 गुना कम लागत पर पूरा कर लिया।

ISRO ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में स्थित सतीश धवन अन्तरिक्ष केंद्र से यह सैटेलाइट लॉन्च किया। इसे PSLV रॉकेट के साथ अन्तरिक्ष में भेजा गया है। इस सैटेलाइट में दो पेलोड लगे हैं। एक का नाम POLIX और दूसरे का नाम XSPECT है। यह मिशन 2017 में शुरू हुआ था।

इस सैटेलाइट को रमन रिसर्च सेंटर और यू आर राव सैटेलाइट सेंटर ने मिलकर डिजाइन किया है। पोलिक्स 8-30 kEV एनर्जी बैंड के बीच की अन्तरिक्षीय ऊर्जा के शोध का काम करेगा। EV का मतलब इलेक्ट्रान वोल्ट होता है। K का मतलब हजार से है। यह किसी इलेक्ट्रान की ऊर्जा मापने का पैमाना है।

पोलिक्स के लगभग पाँच वर्ष काम करने की आशा ISRO ने जताई है। इस दौरान यह 40 चमकीले खगोलीय स्रोतों से आने वाली ऊर्जा की जानकारी भेजेगा। वहीं XSPECT, दूसरे पेलोड POLIX की सहायता करेगा। यह विद्युत्चुम्बकीय किरणें छोड़ने वाले न्यूट्रॉन तारों, जिन्हें पल्सर कहा जाता है, उनके ऊपर शोध करेगा। यह इसके अलावा पोलिक्स से कम ऊर्जा बैंड के अन्य ऊर्जा स्रोतों पर शोध भी करेगा।

ISRO ने यह सैटेलाइट भेजने के लिए PSLV रॉकेट को चुना था। PSLV रॉकेट के DL वेरिएंट ने यह सैटेलाइट कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किए हैं। इस रॉकेट की मुख्य बॉडी पर दो बूस्टर लगे होते हैं जो इसकी रेंज और स्पीड बढाने में मदद करते हैं। इनमें 12 टन ईंधन भरा होता है। यह लगभग 1250 किलो तक के सैटेलाइट ले जाने में सक्षम है। PSLV रॉकेट को सबसे पहले 1993 में सफलतापूर्वक लाँच किया गया था। चंद्रयान भी PSLV के ही जरिए लाँच किया गया था।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी इस सैटेलाइट के सफलता पूर्वक लॉन्च होने पर ख़ुशी जताई है। उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “हमारे वैज्ञानिकों को धन्यवाद, 2024 की शानदार शुरुआत! यह प्रक्षेपण अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए अद्भुत खबर है और इस क्षेत्र में हमारी शक्ति को बढ़ाएगा। हमारे वैज्ञानिकों को शुभकामनाएँ और संपूर्ण अंतरिक्ष समुदाय का को भारत को अभूतपूर्व ऊंचाइयों पर ले जाने में योगदान दे रहा है।”

कौन हैं अरुण योगीराज, जिनके रामलला होंगे अयोध्या राम मंदिर के गर्भगृह में विराजमान: जब दे रहे थे आकार तो माँ को भी नहीं करने दिया दर्शन

अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर में जिस मूर्तिकार की मूर्ति को फाइनल किया गया है वह कर्नाटक के अरुण योगीराज ने बनाई है। योगीराज माँ सरस्वती ने इस क्षण को खुशी का पल बताया है। साथ ही ये भी जानकारी दी है कि वो अपने बेटे की बनाई मूर्ति को खुद देख नहीं पाईं।

उनकी माँ सरस्वती ने बताया, “यह हमारे लिए बहुत खुशी का पल है। मैं उसे मूर्ति बनाते हुए देखना चाहती थी, लेकिन उसने बोला कि वब मुझे आखिरी दिन लेकर जाएगा। अब मैं स्थापना के दिन जाऊँगी।”

उनकी बनाई मूर्ति की तारीफ केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी की है। उन्होंने कहा, “अयोध्या में भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा के लिए मूर्ति का चयन हो गया है। हमारे देश के सुप्रसिद्ध मूर्तिकार, हमारे गौरव अरुण योगीराज के द्वारा बनाई गई भगवान राम की मूर्ति अयोध्या में स्थापित की जाएगी।”

गौरतलब है कि राम मंदिर के लिए बनी तीनों मूर्तियों में योगीराज की मूर्ति पर सहमति हुई। वहीं अन्य दो इसलिए नहीं हुईं क्योंकि एक दक्षिण भारतीय शैली में थी और दूसरी सफेद संगमरमर के पत्थर से निर्मित थी। लेकिन ऐसा नहीं है इन दोनों मूर्तियों को मंदिर में रखा जाएगा। ये दोनों भी मूर्तियाँ भी राम मंदिर में ही स्थापित होंगी। मगर कहाँ? ये निर्णय लिया जाना बाकी है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्यों सभी सदस्यों को नीलवर्ण के रामलला के रूप में योगीराज की मूर्ति पसंद आई। इसकी खास बात यह है कि ये कर्नाटक के नीले पत्थर की है।

यह पहली बार नहीं है जब अरुण योगीराज के कार्य को देश भर में सराहा जा रहा हो। उन्होंने केदारनाथ में आदि शंकराचार्य की 12 फुट ऊँची प्रतिमा को भी तैयार किया था। इसके अलावा वह महान स्वतंत्रता सेनानी और आजाद हिंद फौज के संस्थापक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 30 फुट ऊँची प्रतिमा को तैयार करने का कार्य कर चुके हैं।

कर्नाटक के मैसूर के मूर्तिकार अरुण योगीराज सोशल मीडिया पर फेमस है। उनके एक ट्वीट के मुताबिक उन्होंने 11 साल की उम्र में अपने पिता से मूर्ति बनाने की कला को सीखा था और स्वतंत्र रूप से वो 2006 से मूर्ति बनाने का काम कर रहे हैं। उनकी कला की सराहना उनके चाहने वाले करने से नहीं चूँकते। प्रधानमंत्री भी उनके मुरीद हैं।

वह प्रसिद्ध मूर्तिकार योगीराज शिल्पी के बेटे हैं, जिनके पूर्वजों को मैसूर राजपरिवार का संरक्षण प्राप्त था। यानी वो योगीराज मैसूरु महल के शिल्पकारों के परिवार से आते हैं। उनके पिता योगीराज शिल्पी अपने पिता बी बसवन्ना शिल्पी की 8 संतानों में से एक थे। अरुण के पिता गायत्री और भुवनेश्वरी मंदिर के लिए भी कार्य कर चुके हैं।

वहीं अरुण उनके 17 पोते-पोतियों में से एक हैं और पाँचवीं पीढ़ी के मूर्तिकार हैं। लेकिन उनकी शुरुआती कहानी थोड़ी अलग है। उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में MBA तक पढ़ाई की है। पहले योगीराज का सपना अपने पूर्वजों की तरह मूर्तिकार बनना नहीं था और 2008 में मैसूर विश्वविद्यालय से MBA की डिग्री लेने के बाद वो एक प्राइवेट कंपनी के लिए कार्य कर रहे थे। मगर, उनके दादा ने बचपन में ही भविष्यवाणी की थी कि अरुण बड़े होकर हाथों में औजार उठाएँगे और कलाकारों के इस परिवार का नाम और ऊँचा करेंगे। 37 वर्षों बाद ये सच हो गई है।

अरुण के पिता की हाल ही में एक दुर्घटना में मौत हो गई थी। हालाँकि उससे पहले उन्होंने शंकराचार्य की प्रतिमा को पूरे होते देखा था और आँखों में आँसू भर कर बेटे को आशीर्वाद दिया था। आज उनके द्वारा बनाई गई प्रतिमाएँ हिन्दू धर्म और भारत देश का मस्तक गर्व से ऊँचा करती हैं।

अरुण योगीराज ने अब तक इन कार्यों को अपने हाथों में लिया और पूरा किया है:

  • मैसूर में स्वामी रामकृष्ण परमहंस की आदमकद प्रतिमा
  • एक ही चट्टान से काट कर बनाई गई बृहत नंदी की 6 फुट की प्रतिमा
  • स्वामीजी शिवकुमार की 5 फ़ीट की प्रतिमा
  • माँ बनष्करी की 6 फ़ीट ऊँची प्रतिमा
  • हाथों से डिजाइन किए गए कई मंडपों और पत्थर के स्तंभों का निर्माण
  • मैसूर में बाबासाहब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर की लाइफ साइज प्रतिमा, जिसे सफ़ेद संगमरमर से गढ़ा गया था
  • महाराजा जयचमराजेंद्र वुडेयार की 14.5 फ़ीट की प्रतिमा, जो सफ़ेद संगमरमर से ही बनाई गई थी
  • मैसूर में ही भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ की प्रतिमा
  • मैसूर विश्वविद्यालय में सोपस्टोन से बनी एक कलाकृति
  • केआर नगर में योगनरसिंह स्वामी की 7 फीट लम्बी प्रतिमा
  • आंध्र प्रदेश में माहेश्वरी माता की इतनी ही ऊँची प्रतिमा
  • महान इंजिनियर विश्वेश्वरैया और डॉक्टर आंबेडकर की कई प्रतिमाएँ
  • सोपस्टोन से महाविष्णु की 7 फीट ऊँची प्रतिमा
  • भगवान बुद्ध की प्रतिमा कई अलग-अलग डिजाइनों में
  • पंचमुखी गणपति की प्रतिमा
  • 5 फीट ऊँची स्वामी शिवबाला योगी की प्रतिमा
  • सोपस्टोन से भगवान शिव की 6 फ़ीट ऊँची प्रतिमा

अब तक उन्हें निम्नलिखित सम्मान मिल चुके हैं:

  • 2014 में केंद्र सरकार द्वारा युंग टैलेंट अवॉर्ड
  • मैसूर डिस्ट्रिक्ट अथॉरिटी और कर्नाटक सरकार द्वारा राज्योत्सव अवॉर्ड
  • शिल्पकार संघ द्वारा शिल्प कौस्तुभ अवॉर्ड (पहली बार किसी युवा मूर्तिकार को ये सम्मान मिला)
  • मुख्यमंत्री सिद्दरमैया ने इन्हें सम्मानित किया
  • संयुक्त राष्ट्र के महासचिव कोफ़ी अन्नान ने न सिर्फ उनके काम को वहाँ जाकर देखा, बल्कि उनकी प्रशंसा भी की
  • मैसूर राजपरिवार द्वारा उन्हें सम्मानित किया गया
  • मैसूर डिस्ट्रिक्ट स्पोर्ट्स अकादमी ने उन्हें सम्मानित किया
  • अमर शिल्पी जकनकारी ट्रस्ट द्वारा सम्मान
  • मैसूर विश्वविद्यालय के कुलपति ने भी उन्हें सम्मानित किया।

‘जहाँ 500 वर्षों तक कुरान-ए-करीम का जिक्र, हमने खो दी वो मस्जिद’: ओवैसी ने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले मुस्लिम युवकों को भड़काया, कहा – बरकरार रखिए अपनी ताकत

AIMIM पार्टी के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी फिर से सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। वो मुस्लिम युवकों से कह रहा है कि वो लोग मस्जिदों को बचाएँ। इसके लिए रोज मस्जिद जाएँ। उन्होंने कहा कि 500 साल तक जहाँ कुरान-ए-करीम का जिक्र किया, वही मस्जिद हमने खो दी है। असदुद्दीन ओवैसी ने पूरे वीडियों में कहीं भी अयोध्या और राम मंदिर का जिक्र नहीं किया, लेकिन इशारों-इशारों में उन्होंने 500 सालों का जिक्र कर बाबरी के लिए अपनी पीड़ा उजागर कर दी है।

असदुद्दीन ओवैसी ने खुद ये वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है, जिसमें वो युवकों से कह रहा है, “नौजवानों मैं तुमसे कह रहा हूँ, हमारी मस्जिद हमने गवाँ दी और वहाँ क्या किया जा रहा है आप देख रहे हैं। नौजवानों, क्या तुम्हारे दिलों में तकलीफ नहीं होती? जहाँ 500 साल हमने बैठकर कुरान-ए-करीम का जिक्र किया हो, आज वो जगह हमारे हाथ में नहीं है। नौजवानो, क्या तुमको नहीं दिख रहा कि तीन-चार और मस्जिदों को लेकर साजिश हो रही है, जिसमें दिल्ली की सुनहरी मस्जिद भी शामिल है।”

ओवैसी वीडियो में आगे कहता है, “ये जो ताकतें हैं, तुम्हारे दिलों से इत्तेहाद को निकालना चाहते हैं। ये ऐसा क्यों चाहते हैं? क्योंकि मिल्ली गीरत को खत्म कर दिया जाए, मिल्ली हमीयत को खत्म कर दिया जाए। वर्षों की मेहनत के बाद आज हमारा एक मुकाम हमने पैदा किया है। आपको इन चीजों पर गौर करना है। आप अपनी मिल्ली हमीयत को, अपनी ताकत को बरकरार रखिए। अपनी मस्जिदों को आबाद रखिए। कहीं ऐसा ना हो कि ये मस्जिदें हमसे छीन ली जाएँ। मुझे उम्मीद है, इंशाअल्लाह… आज का ये नौजवान जो कल का बूढ़ा होगा…वो अपनी नजरों को आगे रखकर, अपने दिमाग पर जोर डालकर सोचेगा कि किस तरीके से मुझे अपने आपको, अपने खानदान को, अपने शहर को, अपने मुहल्ले को बचाना है। इत्तेहाद एक ताकत है, इत्तेहाद एक नेमत है।”

अयोध्या में 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा समारोह

गौरतलब है कि अयोध्या के श्रीराम मंदिर में 22 जनवरी, 2024 को रामलला का प्राण प्रतिष्ठा होगा। इसके लिए तैयारियाँ जोरों-शोरों से हो रही हैं। इस अवसर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उपस्थित रहेंगे। इनके अतिरिक्त 3000 वीआईपी समेत 7000 निमंत्रण भेजे गए हैं। इनमें कारसेवकों का परिवार भी हैं जिन्होंने राम मंदिर के लिए अपनी जान गँवा दी। ट्रस्ट का कहना है कि आयोजन में 10 हजार से 15000 लोगों के आने का इंतजाम होगा। भगवान राम के मंदिर के लिए मूर्ति का भी चयन कर लिया गया है। श्याम वर्ण भगवान राम अपने मंदिर में बाल रूप में विराजमान होंगे।

गर्भगृह में विराजमान होंगे नीलवर्ण के रामलला, इस मूर्तिकार की बनाई प्रतिमा पर एकमत हुआ ट्रस्ट: मीडिया में रिपोर्ट – कमल के फूल पर विराज होंगे बाल श्रीराम

अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर में नीलवर्ण के रामलला विराजमान होंगे। तीन मूर्तियों में से एक मूर्ति को फाइनल कर लिया गया है। ये मूर्ति कर्नाटक के योगीराज ने बनाई है, जो नीले पत्थर से बनी है। बाकी की एक मूर्ति भी नीले पत्थर की है, लेकिन वो दक्षिण भारतीय शैली में है। वहीं, एक मूर्ति सफेद संगमरमर की बनी है। ऐसे में योगीराज की बनाई मूर्ति पर सभी की सहमति बन गई है। 22 जनवरी को रामलला के मंदिर में होने वाले प्राण प्रतिष्ठा समारोह में इसी मूर्ति को प्रतिष्ठित किया जाएगा।

बताया जा रहा है कि 29 दिसंबर को हुई बैठक में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सभी सदस्यों ने अपना मत लिखित रूप से चंपत राय को दे दिया था। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया है कि गर्भगृह में रामलला की 51 इंच लंबी प्रतिमा स्थापित की जाएगी, जिसमें रामलला 5 साल के बाल स्वरूप में होंगे। प्रतिमा में रामलला को खड़े हुए दिखाया गया है। प्रतिमा ऐसी है जो राजा का पुत्र और विष्णु का अवतार लगे। गर्भगृह में रामलला कमल के फूल पर विराजमान होंगे। कमल के फूल के साथ उनकी लंबाई करीब 8 फुट होगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रामलला की तीन प्रतिमाओं का निर्माण 3 मूर्तिकारों गणेश भट्ट, योगीराज और सत्यनारायण पांडेय ने तीन पत्थरों से किया है। इनमें सत्यनारायण पांडेय की प्रतिमा श्वेत संगमरमर की है। जबकि शेष दोनों प्रतिमाएँ कर्नाटक के नीले पत्थर की हैं। इनमें गणेश भट्ट की प्रतिमा दक्षिण भारत की शैली में बनी थी। इस कारण अरुण योगीराज की प्रतिमा का चयन किया गया है।

रामलला की तीनों मूर्तियों को नवनिर्मित मंदिर में ही स्‍थापित किया जाएगा। एक मूर्ति गर्भगृह में स्थापित की जाएगी। दूसरी पहले तल पर राम दरबार में लगेगी। तीसरी मूर्ति को द्वितीय तल पर स्थापित किया जाएगा। पहली मूर्ति का चुनाव हो गया है, बाकी की दोनों मूर्तियों को कहाँ स्थापित किया जाएगा, इसका निर्णय बाद में किया जाएगा। तीनों मूर्तियों के लिए वस्‍त्र, जेवर और मुकुट का निर्माण हो रहा है। रामलला को गर्भगृह में जिस आसन पर विराजमान करवाना है, वह भी तैयार है।

गौरतलब है कि अयोध्या के श्रीराम मंदिर में 22 जनवरी, 2024 को रामलला का प्राण-प्रतिष्ठा होगा। इसके लिए तैयारियाँ जोरों-शोरों से हो रही हैं। इस अवसर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उपस्थित रहेंगे। इनके अतिरिक्त 3000 वीआईपी समेत 7000 निमंत्रण भेजे गए हैं। इनमें कारसेवकों का परिवार भी हैं जिन्होंने राम मंदिर के लिए अपनी जान गवा दी। ट्रस्ट का कहना है कि आयोजन में 10 हजार से 15000 लोगों के आने का इंतजाम होगा।

शॉर्ट्स, कटे-फटे जींस और स्लीवलेस पहनने पर जगन्नाथ मंदिर में एंट्री नहीं, जारी हुआ नया ड्रेस कोड: अश्लील कपड़े पहनने वालों पर पुलिस की भी रहेगी नज़र

ओडिशा में पुरी के प्रतिष्ठित श्री जगन्नाथ मंदिर में आने वाले भक्त अब अपने मनचाहे कपड़ों जैसे शॉर्ट्स, रिप्ड जींस में मंदिर में प्रवेश नहीं कर पाएँगे। दरअसल मंदिर प्रशासन (SJTA) ने सोमवार (1 जनवरी, 2024) से यहाँ आने वाले भक्तों के लिए ड्रेस कोड लागू कर दिया है।

इसके साथ ही 2024 के नए साल के पहले दिन से मंदिर परिसर में गुटखा और पान चबाने के साथ-साथ प्लास्टिक और पॉलिथीन के इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया। मंदिर प्रशासन ने कहा है कि अब से 12वीं सदी के इस मंदिर परिसर में प्रवेश करते समय शॉर्ट्स, रिप्ड जींस और स्कर्ट जैसे कपड़े न पहनें।

इन नियमों की अवहेलना करने वाले भक्तों पर जुर्माना लगाया जाएगा। इसके साथ ही एसजेटीए ने कहा है कि किसी भी तरह के अशोभनीय कपड़े पहनने वाले भक्तों पर मंदिर के सेवकों की ही नहीं बल्कि पुलिस की भी नजर रहेगी। मंदिर प्रशासन के मुख्य प्रशासक रंजन कुमार दास ने कहा कि भक्तों को मंदिर में प्रवेश करते समय पतलून पैंट, चूड़ीदार, सलवार कमीज और धोती जैसे पारंपरिक कपड़े पहनने होंगे। दास ने आगे कहा, “देश भर के कई धार्मिक स्थलों पर इसी तरह के ड्रेस कोड लागू हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “जगन्नाथ मंदिर पुलिस और मंदिर के सेवक अश्लील कपड़े पहनने वाले किसी भी शख्स पर नजर रखेंगे।” मंदिर प्रशासन ने यह कदम अक्टूबर 2021 से मंदिर के सेवकों के लिए ड्रेस कोड लागू करने के दो साल बाद उठाया गया है। यहाँ अब सेवक पूजा करते वक्त धोती, तौलिया और पट्टा पहनते हैं।

बताते चलें कि मंदिर में सेवकों का एक प्रमुख निकाय दैतापति निजोग यहाँ आने वाले भक्तों के लिए लंबे वक्त एक ड्रेस कोड की माँग कर रहा था। उनकी शिकायत थी कि कई लोग शॉर्ट्स पहनकर मंदिर में आते हैं। इस वजह से अन्य भक्तों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचती है।

ड्रेस कोड लागू होने के बाद इस मंदिर में भक्तों को सभ्य कपड़े पहनने होंगे। उन्हें हाफ पैंट, शॉर्ट्स, फटी जींस, स्कर्ट या स्लीवलेस कपड़े पहनने की अनुमति नहीं है। यही वजह रही की ड्रेस कोड लागू होने से 2024 के पहले दिन मंदिर में आने वाले पुरुष भक्तों को धोती और तौलिया पहने देखा गया।

वहीं देवता के दर्शन के लिए आई महिलाएँ साड़ी या सलवार कमीज पहने हुए थीं। इस बीच नए साल के पहले दिन भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े थे। रात 1.40 बजे से ही मंदिर के बाहर भक्तों की कतारें लगनी शुरू हो गई थीं।

पुरी पुलिस समर्थ वर्मा ने एक एक्स पोस्ट में कहा, “दोपहर 12 बजे (सोमवार को) तक 1,80,000 से अधिक भक्तों ने जगन्नाथधाम के दर्शन किए हैं। भक्तों को बगैर परेशानी को भगवान के दर्शन हो इसके लिए पुलिस ने पूरे इंतजाम किए हैं। खास तौर से विकलांग भक्तों की सुविधा को ध्यान में रखा जा रहा है।”

आतंकी घोषित किया गया गोल्डी बराड़, ‘बब्बर खालसा’ से निकला कनेक्शन: सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में आया था नाम, कनाडा से चला रहा भारत विरोधी गतिविधियाँ

भारत सरकार ने कनाडा में छिपे बैठे गैंगस्टर गोल्डी बराड़ को आतंकवादी घोषित किया है। उसका दुर्दांत खालिस्तानी आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल से भी लिंक निकला है। पंजाब के मशहूर सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्या की जिम्मेदारी भी गोल्डी बराड़ ने ली थी। वो भारत में कई मामलों में वांछित है और उस पर कई केस चल रहे हैं। वो कनाडा से ही क्राइम सिंडेकेट चला रहा है और जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का करीबी सहयोगी है।

गोल्डी बराड़ के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास और हथियारों की तस्करी जैसे कई मामले दर्ज हैं। उसके खिलाफ इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी कर चुका है। सिंतबर महीने में गोल्डी बराड़ के ठिकानों पर पुलिस ने छापेमारी की थी। इसके अलावा एनआईए भी बराड़ के जुड़े लोगों के ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी है। वो एनआईए की कार्रवाई में मुख्य निशाना रहा है और उससे जुड़े कई गैंगस्टरों को गिरफ्तार भी किया गया है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गैंगस्टर सतविंदर सिंह उर्फ सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ को गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) 1967 के तहत आतंकवादी घोषित किया है। गृह मंत्रालय ने बताया कि गोल्डी बराड़ प्रतिबंधित खालिस्तानी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल से भी जुड़ा है, जो भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल है।

30 साल से कम उम्र, मोस्ट वांटेड में से एक

गोल्डी बराड़ पंजाब के श्री मुक्तसर साहेब का रहने वाला है। साल 1994 में जन्मा गोल्डी कनाडा के ब्राम्पटन में रहकर भारत में अपना सिंडिकेट चलाता है। वो खालिस्तानी आतंकियों के साथ जुड़कर भारत विरोधी काम भी कर रहा है। यही नहीं, उसी ने कनाडा में रहकर पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्या की साजिश रही और सोशल मीडिया पर खुलकल इसकी जिम्मेदारी भी ली। इंटरपोल के अनुसार, 29 वर्षीय गोल्डी बराड़ हत्या, आपराधिक साजिश और अवैध हथियारों की तस्करी में शामिल है। उसके खिलाफ पहले ही एक रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया जा चुका है। उसे पकड़ने के लिए पंजाब पुलिस कनाडा तक गई थी लेकिन उसे पकड़ा नहीं जा सका है।

बता दें कि कुछ दिन पहले ही गैंगस्टर लखबीर सिंह लांडा को भी गृह मंत्रालय ने आतंकी घोषित किया था। उसका भी लिंक बब्बर खालसा इंटरनेशनल से हैं। गोल्डी बराड़ का भी उससे लिंक है। वो पाकिस्तान में रहने वाले आतंकी हरविंदर सिंह उर्फ रिंदा के साथ काम करता है। लांडा पर तरनतारन जिले के पुलिस स्टेशन पर आरपीजी हमले का मास्टरमाइंड होने का आरोप है।

राम मंदिर आंदोलन में भाग लेने वाले श्रीकांत पुजारी को जेल भेजा, कर्नाटक में हिन्दू कार्यकर्ताओं पर लटक रही गिरफ़्तारी की तलवार: दशकों पुराने मामले खोल रही कॉन्ग्रेस सरकार?

अयोध्या में 22 जनवरी, 2024 को श्री राम मंदिर का उद्घाटन होने जा रहा है। उससे पहले कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार की पुलिस 30 साल पहले राम मंदिर आंदोलन में भाग लेने वाले हिंदुओं के खिलाफ जाँच करने बैठ गई है। ताजा कड़ी में तीन दशक पहले हुए इस आंदोलन वाले 1992 केस में पुलिस ने श्रीकांत पुजारी को गिरफ्तार किया है।

इससे राममंदिर आंदोलन में शामिल अन्य हिंदुओं पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। आईएएनएस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस विभाग ने एक विशेष टीम को इकट्ठा किया है। इस टीम ने 1992 के राम मंदिर आंदोलन से संबंधित मामलों में ‘संदिग्धों’ की एक सूची तैयार की है।

बताते चलें कि इस आंदोलन में कट्टर मुस्लिमों की हिंसा की वजह से हिंदू-मुस्लिम दोनों पक्षों के बीच सांप्रदायिक संघर्ष हुए थे। इसी कड़ी में 5 दिसंबर, 1992 को हुबली में एक मालिक नामक शख्स की दुकान में आग लगाई गई थी। इस कथित आगजनी को लेकर श्रीकांत पुजारी को हुबली पुलिस ने हिरासत में ले लिया और अब वो अदालत की निगरानी में हैं।

पुजारी इस मामले में तीसरे आरोपित हैं। पुलिस इस केस में अन्य 8 आरोपितों की तलाश कर रही है। इसी तरह से हुबली पुलिस ने 300 ‘संदिग्धों’ की एक सूची बनाई है। पुलिस का दावा कि ये लोग 1992 और 1996 के बीच हुए सांप्रदायिक संघर्षों से जुड़े हैं।

फोटो साभार: दैनिक जागरण

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, ये आरोपित 70 के दशक के हैं और इनमें कई शहर छोड़ चुके हैं। यही नहीं कई ‘संदिग्ध’ मौजूदा वक्त में अहम पदों पर हैं।

अब पुलिस उनके खिलाफ मुकदमा दायर करने से पहले संभावित नतीजों पर भी सोच रही है। कहा जा रहा है कि सीएम सिद्दारमैया की सरकार की तरफ से पुलिस विभाग को इन मामलों की विस्तार से जाँच करने के निर्देश दिए गए हैं।

राम जन्म भूमि आंदोलन से जुड़े कई सदस्य बीजेपी के मशहूर राजनेता बन गए हैं। रिपोर्टों का दावा है कि राज्य में बीजेपी के सरकार के वक्त इन सभी मशहूर नेताओं के खिलाफ मामले खारिज कर दिए गए थे।

वहीं हिंदू संगठनों ने कॉन्ग्रेस सरकार की मौजूदा कार्रवाई की सख्त निंदा की है। उनका कहना है कि कॉन्ग्रेस सरकार अयोध्या में श्री राम मंदिर के उद्घाटन के बीजेपी और हिंदू संगठनों के घर-घर अभियान को बर्दाश्त नहीं कर पा रही है। इसलिए ही वो 30 साल पहले के केस की जाँच शुरू करने का पैतरा अपना रही है।

कर्नाटक सरकार की ये रणनीति इस राज्य में बड़ी बहस का मुद्दा बन सकती है। खासकर तब जब बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी के 1990 के दशक में राम जन्मभूमि आंदोलन के मुस्लिमों विरोध की वजद इस राज्य को बड़ी हिंसा का सामना करना पड़ा था