गुजरात के वडोदरा के स्कूल से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। वहाँ चौथी कक्षा में पढ़ने वाले दो छात्रों के बीच झगड़ा हुआ और इसका हल्ला तब मचा जब एक मुस्लिम छात्र ने हिंदू छात्र पर ब्लेड से वार कर दिया। इतना ही नहीं इस मामले में जब पीड़ित छात्र ने अपने दोस्तों के साथ प्रिंसिपल से शिकायत की तो ब्लेड मारने वाले छात्र के माता-पिता स्कूल आ गए और क्लासरूम में घुसकर शिकायत करने वाले छात्र की भी पिटाई कर दी।
यह घटना वडोदरा के नागरवाड़ा इलाके में स्थित जीवन साधना स्कूल की है। इस स्कूल में पढ़ने वाले चौथी कक्षा के एक मुस्लिम छात्र ने सामान्य विवाद में एक हिंदू छात्र को ब्लेड से घायल कर दिया था। घटना के बाद जब अन्य छात्रों ने स्कूल प्रिंसिपल से शिकायत की तो ब्लेड मारने वाले छात्र के अभिभावकों को बुलाया गया। हालाँकि, अभिभावकों ने आकर अपने बच्चे को समझाने की बजाय, पीड़ित छात्र का पक्ष लेने वाले उसके दोस्तों को सबसे सामने बुरी तरह से पीटा।
इस पूरी घटना को लेकर ऑपइंडिया ने पिटाई का शिकार हुए एक छात्र के परिजनों से संपर्क किया। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, “जब मुस्लिम छात्र (हम नाम का उल्लेख नहीं कर रहे हैं क्योंकि बच्चा नाबालिग है) ने ब्लेड का इस्तेमाल किया, तो मेरे बेटे और उसके तीन अन्य दोस्तों ने प्रिंसिपल से शिकायत की, स्कूल ने उसके अभिभावक को बुलाया। तभी मुस्लिम छात्र के परिवार के दो सदस्य स्कूल पहुँचे और प्रिंसिपल से मिलने के बजाय सीधे कक्षा में घुस गए।”
‘किसने तेरा नाम दिया’ कहकर टूट पड़े हमारे बच्चों पर
पीड़ित छात्र के माता-पिता ने ऑपइंडिया को बताया, “कक्षा में जाकर उन अभिभावकों ने ब्लेड मारने वाले बच्चे से पूछा, ‘बोल तेरा नाम किसने प्रिंसिपल को बताया।’ उसने मेरे बेटे के एक दोस्त को थप्पड़ मारा और दूसरे का गला घोंटने लगा और मेरे बेटे को कक्षा के दौरान प्रिंसिपल के कार्यालय में खींच ले गया।”
बता दें कि इसी घटना के सामने आने के बाद स्थानीय हिंदू संगठनों में गुस्सा फूट पड़ा। ऑपइंडिया ने इस मामले पर जानकारी लेने के लिए वडोदरा शहर बजरंग दल के सह-संयोजक प्रतापराव मोहिते से भी बात की।
उन्होंने कहा, “घटना की जानकारी मिलते ही हम स्कूल पहुँचे। जब हम स्कूल पहुँचे और प्रबंधकों से बात करने की कोशिश की तो गेट बंद कर हमें रोक दिया गया। इस बीच स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों के अभिभावक भी एकत्र हो गए। हमने सभी स्कूलों में प्रवेश किया, संगठन और मीडिया सहित लोगों को इकट्ठा किया और स्कूल ट्रस्टी से घटना पर जवाब माँगा।”
मोहिते के मुताबिक, मीडिया से रूबरू होते हुए जब स्कूल प्रबंधकों से घटना के बारे में पूछा गया तो उन्होंने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और उन्हें बाहर निकालने की धमकी दी। प्रतापराव ने ऑपइंडिया को बताया, “प्रशासक कह रहे थे कि हमें स्कूल आने की अनुमति नहीं है, आखिर इनके ये कानून तब कहाँ चले जाते हैं जब पीड़ित बच्चों को पीटने लोग स्कूल आते हैं और छात्रों की पिटाई करते हैं?”
उन्होंने कहा कि स्कूल में एक छात्र को ब्लेड मारने जैसी गंभीर घटना को संचालक दबाना चाहते थे। इस हंगामा को बढ़ता देख आखिरकार स्कूल को आरोपित अभिभावक के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करने के लिए मजबूर होना पड़ा। शिकायत के बाद पुलिस ने स्कूल में घुसकर मारपीट करने वाले मुस्लिम छात्र के 2 अभिभावकों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया है। फिलहाल वडोदरा पुलिस सीसीटीवी फुटेज और पीड़ित छात्र से पूछताछ के मुताबिक मामले की जाँच कर रही है।
देश के कई हिस्सों से ट्रक और टैंकर ड्राइवरों के प्रदर्शन की खबरें सामने आ रही हैं। छतीसगढ़, बिहार, मध्य प्रदेश और अन्य कई राज्यों में इन्होंने हड़ताल भी की है। ट्रक ड्राइवर अपने प्रदर्शन के पीछे का कारण हाल ही में लागू हुई भारतीय न्याय संहिता में ‘हिट एंड रन’ के कानून को बता रहे हैं।
ड्राइवरों का कहना है कि यह कानून उनके अधिकारों को प्रभावित करता है और इसके लागू रहते हुए वह गाड़ी नहीं चला सकते। यह प्रदर्शन ट्रक और टैंकर जैसी बड़ी गाड़ियों से शुरू होकर अब बस और अन्य कमर्शियल गाड़ियों तक आ गया है।
कानून के खिलाफ नोएडा, इंदौर, मुंबई और जयपुर समेत कई शहरों में ट्रक चालक प्रदर्शन कर रहे हैं। इस प्रदर्शन के कारण कई जगह पेट्रोल पम्पों पर तेल की सप्लाई रुकने की भी खबरें सामने आई है। अन्य कई जगह से भी अन्य सामान की आपूर्ति बाधित होने की सूचनाएँ सामने आ रही हैं।
क्या है प्रदर्शन की वजह?
ट्रक ड्राइवर और ट्रांसपोर्टर इस कानून के पीछे हाल ही में लागू हुई भारतीय न्याय संहिता की धारा 106 (2) का हवाला दे रहे हैं। यह कानून किसी भी प्रकार के वाहन से दुर्घटना करके भागने और लापरवाही से चलाने को लेकर सजा के विषय में बताता है।
इस कानून में लिखा हुआ है कि यदि कोई व्यक्ति लापरवाही से किसी प्रकार का वाहन चलाता है या फिर किसी को ठोंक कर पुलिस या प्रशासन को सूचित किए बिना भागता है और पीड़ित की मौत हो जाती है तो ऐसे मामले में 10 वर्षों की सजा होगी और जुर्माना भी लगाया जाएगा। इस अपराध को नई न्याय संहिता में गैर-जमानती बताया गया है।
जमानत ना देने वाली बात को लेकर ट्रक ड्राइवर प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि हादसे के बाद जब तक ड्राइवर की गलती को लेकर फैसला नहीं आता तब तक वह जेल में रहेगा भले ही वह निर्दोष हो। उनका कहना है कि वह हादसे के बाद भीड़ के गुस्से से बचने के लिए हादसे वाली जगह से भागते हैं ना कि पीड़ित को नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से। यह कानून हादसा करके भागने वालों पर ही विशेष रूप से प्रभाव डालेगा। ऐसे में सुनवाई के दौरान ड्राइवर के जेल में रहने और ट्रक के खड़े रहने से मालिक को भी नुकसान होगा।
इसके अलावा इस अपराध में जुर्माने की राशि को लेकर भी ड्राइवर और ट्रक मालिक नाराज हैं। उनका कहना है कि इसमें जुर्माना 7 लाख रुपए रखा गया है जो कि अधिक है और कम कमाई वाले ड्राइवर इतनी धनराशि नहीं दे सकता। ट्रक ड्राइवर और मालिक पुराने कानून का समर्थन कर रहे हैं।
क्या था पुराना कानून?
लापरवाही से गाड़ी चलाने के और किसी को मार के भागने को लेकर पुराना कानून भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत धारा 304 (A) में प्रावधान है। इसके अंतर्गत कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति गाड़ी लापरवाही से चलाते हुए किसी को मार देता है और वहाँ से भागता है तथा दोषी सिद्ध होता है तो उसे 2 साल की सजा दी जाएगी। साथ ही उस पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है। ऐसे मामलों में पहले जमानत का प्रावधान भी था।
कानून लाने की क्यों पड़ी आवश्यकता?
लापरवाही से गाड़ी चलाने वाले और एक्सीडेंट कर भागने के मामले भारत में लगातार बढ़ रहे हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की तरफ से जारी की ADSI-2022 रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 में भारत की सड़कों पर 4.46 लाख हादसे हुए जिसमें 1.7 लाख लोगों ने जान गँवाई।
इन हादसों में से लगभग 11% हादसे ट्रक और बस जैसे बड़े वाहनों से हुए। वहीं 1.7 लाख मौतों में से 87% मौतें गाड़ी तेज चलाने, लापरवाही से चलाने या फिर नशे में चलाने के कारण हुईं। यानी सड़क हादसों के कारण होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण लापरवाही से गाड़ी चलाना ही रहा।
ऐसे में सरकार ने सड़क पर लोग ध्यान से गाड़ी चलाएँ और साथ ही जो ड्राइवर सड़क पर हादसे करके भाग जाते हैं उनके लिए सजा कड़ी करने को नई भारतीय न्याय संहिता में सजा को बढ़ाया गया और साथ ही इसे गैर जमानती अपराध बनाया गया।
क्या प्रदर्शन करने वालों तक गलत सूचना पहुँची है?
भारतीय न्याय संहिता में लापरवाही से गाड़ी चलाने और हिट एंड रन के चलते कानून सख्त करने को लेकर देश भर में ट्रक ड्राइवर ही अधिकांश प्रदर्शन कर रहे हैं जबकि यह कानून हर तरह के वाहन चालकों पर लागू होता है। यदि कोई दुपहिया वाहन से भी किसी को मार के भाग जाता है तो उस पर भी यही कार्रवाई होगी। ऐसे में कहा जा रहा है कि प्रदर्शन करने वाले तक इस मामले में गलत सूचना पहुँची है।
भारत की एक बड़ी ट्रक यूनियन आल इंडिया ट्रकर्स वेलफेयर असोसिएशन के एक पदाधिकारी ने नाम ना लिखे जाने की शर्त पर यह बात स्वीकार की कि कुछ लोग इस कानून के विरोध के आड़ में अपना एजेंडा भी सेट कर सकते है। उनका कहना है कि वह कानून के खिलाफ नहीं हैं बस इसमें ट्रक ड्राइवरों के लिए कुछ छूट चाहते हैं।
अयोध्या में 22 जनवरी, 2024 को निर्माणाधीन राम मंदिर के गर्भगृह में रामलला विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा होनी है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित देश और दुनिया की हस्तियाँ रामजन्मभूमि में मौजूद होंगी। ऑपइंडिया की टीम ने दिसंबर 2023 के अंतिम सप्ताह में अयोध्या पहुँच कर वहाँ के तमाम अनछुए पहलुओं से लोगों को परिचित करवाया। इसी क्रम में हम शनिवार (30 दिसंबर 2023) को अयोध्या शहर से 12 किलोमीटर दूर राजा दशरथ समाधि स्थल पर थे।
न सिर्फ राजा दशरथ का समाधि स्थल, बल्कि यहाँ स्थित एक अन्य मंदिर के पास भी मजार बना दी गई है। महंत ने हमें इसकी जानकारी देते हुए दोनों ही धर्मस्थलों पर दरगाह को हिन्दू संस्कृति के खिलाफ एक साजिश करार दिया गया।
‘सांस्कृतिक आक्रमण की साजिश है दरगाह’
राजा दशरथ समाधि स्थल के पुजारी संदीप दास ने ऑपइंडिया को बताया कि जहाँ धर्मस्थल समाजवादी पार्टी जैसे दलों की सरकारों में उपेक्षा का शिकार रहा तो वहीं सोची-समझी साजिश के तहत बगल में एक दरगाह बना दी गई। संदीप ने आगे बताया कि रामजन्मभूमि की तरह राजा दशरथ समाधि स्थल भी अतीत में मजहबी आक्रांताओं के हमलों का शिकार हुआ है लेकिन हिन्दुओं के प्रतिकार से उस पर कब्जा नहीं हो पाया।
उन्होंने आगे कहा, “जब धर्मस्थल पर सीधे कब्जा नहीं हो पाया तो इसके 100 मीटर दूर एक मजार बना दी गई। इस मजार को बेलहरी शरीफ नाम से पुकारा जाने लगा जबकि असल में इस जगह का पौराणिक नाम बिल्वहरि है।” बकौल संदीप दास, मजार पर इस्लाम मत को मानने वाले बहुत लोग आते रहते हैं।
मंदिर और आसपास के हालात बताते राजा दशरथ समाधि स्थल के पुजारी संदीप दास
मंदिर के आगे बाँध देते थे लाउडस्पीकर, होती थी उन्मादी नारेबाजी
दशरथ समाधि स्थल से लगभग डेढ़ किलोमीटर पहले ही हिन्दुओं का एक प्राचीन मंदिर है। इसका नाम संकट मोचन हनुमान मंदिर है जो कि अयोध्या के सुग्रीव किला से संबंधित बताया जाता है। ऑपइंडिया ने यहाँ के पुजारी स्वामी रामदास से बात की। रामदास ने हमें बताया कि उनके मंदिर से दरगाह की दूरी 1 किलोमीटर से भी कम है। दरगाह के सर्वेसर्वा का नाम चाँद मियाँ है। चाँद मियाँ बरेलवी मत का एक मजहबी उलेमा बताया जा रहा है जो देश के तमाम हिस्सों में मजहबी तकरीरें करता है।
समाजवादी पार्टी की सरकार के समय की याद दिलाते हुए रामदास ने कहा कि इस्लामी त्योहारों में दरगाह वालों की तरफ से मंदिर के आगे बड़े-बड़े माइक बाँध दिए जाते थे। इन माइकों पर जोर-जोर से भड़काऊ नारेबाजी होती थी।
दरगाह में नेपाल तक के लोगों का आना-जाना
संकट मोचन मंदिर के महंत स्वामी रामदास का दावा है कि साल के 3 दिन बकरीद के आसपास दरगाह पर भारी भीड़ होती है। उन्होंने कहा कि इस दौरान न सिर्फ आसपास के गाँवों और जिलों के मुस्लिम समुदाय के लोग ही नहीं बल्कि नेपाल तक के नागरिकों की भीड़ होती है। दरगाह का असल नाम ‘हजरत मखदूम सैय्यद कयामुद्दीन भीका मक्की रदि अल्लहुतआला अन्हू’ है लेकिन पिछले कुछ दिनों से इसे बिलहरी बाबा नाम से कहा जाने लगा है। महंत रामदास का दावा है कि यहाँ बाकायदा सड़क पर बिलहरी बाबा नाम से बोर्ड भी लगा दिया गया था।
सड़क पर लगा दरगाह का बोर्ड
टोकने पर विरोध, जमा हो जाती है सैकड़ों की भीड़
महंत रामदास ने हमें बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रशासन के कारण पिछले 1 साल से राहत है, लेकिन 2017 में मंदिर के आगे विवाद हुआ था। आरोप है कि यह झगड़ा मंदिर के पास नवरात्रि के चलते माँ दुर्गा का गेट लगाने पर शुरू हुआ। इस गेट पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने विरोध किया। महंत ने कहा कि ताजिया जुलूस आदि के दौरान मुस्लिम समुदाय के लोग मंदिर के पास ही बड़ा गेट लगाते थे लेकिन उनको कोई नहीं टोकता था।
आरोप है कि जब उन्होंने मुहर्रम और नवरात्रि के लिए अलग-अलग विधान पर सवाल उठाए तब मौके पर मौजूद एक पुलिसकर्मी ने ही ऊपर चढ़ कर माँ दुर्गा का गेट नोच दिया था।
संकट मोचन मंदिर और महंत रामदास
2017 में महंत पर ही दर्ज कर दी गई FIR
महंत रामदास ने आगे बताया कि माँ दुर्गा का गेट नोचे जाने से कई श्रद्धालु नाराज हो गए। दूसरी तरफ से मुस्लिम समुदाय के लोगों की भीड़ थी जिनको एक स्थानीय समाजवादी पार्टी के नेता का संरक्षण मिल रहा था। आरोप है कि इस दौरान पुलिसकर्मी चमड़े के बूट पहन कर मंदिर में गर्भगृह और रसोई तक में घुस गए और महंत रामदास से हाथापाई की। बाहर माहौल तनावग्रस्त होने की वजह से 2 पक्षों में झड़प हुई। तत्कालीन SHO ने इस झड़प का दोषी महंत रामदास को माना और उन पर FIR दर्ज करवा दी।
आज भी महंत रामदास यह मुकदमा अपनी जेब से लड़ रहे हैं। अपनी व्यथा को आगे बताते हुए महंत रामदास ने कहा कि तब उन्होंने भी मुस्लिम पक्ष पर FIR दर्ज करने का प्रयास किया लेकिन मना कर दिया गया।
हरे रंग के झंडों से ढँक जाता था रास्ता
जब हमने साल 2017 में हुई उस घटना के बारे में और पूछा तो महंत रामदास ने बताया कि उस से पहले तमाम इस्लामी त्योहारों में मंदिर के आगे मुस्लिम भीड़ जमा हो जाया करती थी। मंदिर के आसपास का हिस्सा हरे रंग के मजहबी झंडों से ढँक दिया जाता था। जुलूस निकाल कर मंदिर के गेट पर घंटों रोका जाता था। यहाँ पुड़िया-गुटका खा कर थूका जाता था। आरोप है कि इस दौरान ‘किसी के बाप का नहीं है भारत’ जैसी भड़काऊ बयानबाजी की जाती थी। बकौल रामदास, तब पुलिस इन सभी हरकतों की मूक गवाह हुआ करती थी और हिन्दुओं को ही ‘थोड़ा सब्र रखने’ की नसीहत देती थी।
कथित बेलहरी शरीफ दरगाह
‘मुझ पर दर्ज केस वापस ले सरकार’
महंत रामदास ने खुद पर साल 2017 में दर्ज केस को गलत और एकतरफा कार्रवाई बताया। उन्होंने अपील की है कि वर्तमान योगी सरकार उन पर दर्ज FIR वापस ले क्योंकि वह कार्रवाई मुस्लिमों को खुश करने के लिए तत्कालीन थाना प्रभारी और चौकी इंचार्ज ने की थी। साथ ही उन्होंने तब माँ दुर्गा का गेट नोचने और मंदिर परिसर को चमड़े के बूटों से अपवित्र करने वाले पुलिसकर्मियों पर भी एक्शन की आशा जताई। रामदास का यह भी दावा है कि वर्तमान सरकार में भले ही उन्मादी हरकतों पर अंकुश लगा हो लेकिन वो पूरी तरह बंद नहीं हुई हैं।
उन्होंने कहा कि साल 2022 में उनके मंदिर के आगे ही ताजिया ले जा रहे मुस्लिमों के 2 जुलूस आपस में भिड़ गए थे जिस से अफरातफरी मच गई थी।
दरगाह के साथ मदरसा भी
ऑपइंडिया की टीम बेलहरी शरीफ दरगाह नाम से घोषित होने की तैयारी में चल रही दरगाह हजरत मकदूम का दौरा किया। दरगाह के आसपास मुस्लिम समुदाय के कई घर हैं। इन घरों पर हरे रंग के इस्लामी झंडे लहराते दिखे। दरगाह एक अर्धनिर्मित बड़े भवन में है जिसका निर्माण कार्य चल रहा है। ऊपर हरे झंडे और बाहर उर्दू में लिखे पोस्टर चिपकाए गए हैं। इसी दरगाह के सामने एक मदरसा भी दिखा जिसका नाम ‘फैज़ ए सुब्हानी’ है। चाँद मियाँ के मालिकाना हक वाली इस दरगाह और मदरसे का संचालन हाफिज नुरुल हसन करते हैं।
दरगाह के साथ संचालित होता मदरसा भी
दरगाह और मदरसे का गेट बंद देख कर हमने हाफिज नुरुल हसन को खोजना शुरू किया। नुरुल हसन हमें दरगाह से लगभग 100 मीटर दूर मिले जो एक और बड़ी बिल्डिंग का निर्माण कार्य करवा रहे थे। यह नई बिल्डिंग राजा दशरथ समाधि और संकट मोचन मंदिर से 1 किलोमीटर से भी कम दूरी पर है। बिल्डिंग बना रहे मजदूरों को दिशा निर्देश दे कर नुरुल हसन हमसे बातचीत के लिए तैयार हो गए। उन्होंने खुद को मूलतः उत्तर प्रदेश के ही जिला संत कबीर नगर का निवासी बताया। बकौल नुरुल, वो दरगाह की देखरेख के साथ मदरसे में स्थानीय बच्चों को तालीम भी देते हैं।
दशरथ समाधि और संकट मोचन मंदिर के पास हाफिज नुरुल की देखरेख में बन रही नई बिल्डिंग
सरयू नदी को हुक्म देने का दावा
नुरुल हसन ने दावा किया कि मखदूम सैयद की दरगाह 600 साल से भी ज्यादा पुरानी है। उनका दावा था कि सैयद कयामुद्दीन भीका मक्का से सीधे आ कर उसी जगह बस गए थे। मक्का की यात्रा करने की वजह से सैयद कयामुद्दीन के नाम में मक्की लगने की भी जानकारी दी गई। नुरुल हसन ने कयामुद्दीन और सरयू नदी से जुडी एक घटना का जिक्र किया और उसके पूरी तरह से सच होने का दावा भी किया। उनका दावा है कि पौराणिक सरयू नदी कयामुद्दीन मक्की के फरमान पर खुद ही चल कर उनके पास चली गई थी।
हमने हाफिज नुरुल से इस घटना को विस्तार से बताने के लिए कहा। तब नुरुल ने बताया, “सरयू नदी है। पहले ये (कयामुद्दीन मक्की) जाते थे वहाँ वजू करने के लिए। तब वो दूर पड़ जाता था। तब एक दिन उनके दिमाग में आया। उन्होंने नदी से कहा कि ऐ नदी, मैं तेरे पास आऊँ या तू मेरे पास आती है? तो आप आगे-आगे आते गए और पीछे से नदी आती गई। आप यहाँ आ कर रुक गए और बगल से नदी निकल गई।” बताते चलें कि इसी सरयू नदी का जिक्र रामायण सहित तमाम हिन्दू ग्रंथों में किया गया है। खुद भगवान राम और उनके पूर्व व वंशज इसी पवित्र नदी की उपासना करते थे।
दरगाह के कथित करामात गिनाते हाफिज नुरुल
दरगाह में लगे पेड़ से बच्चे पैदा होने का दावा
ऑपइंडिया से बात करते हुए हाफिज नुरुल हसन दरगाह के कथित चमत्कार गिनाते गए। उन्होंने दावा किया कि दरगाह के अंदर एक पेड़ है जिसका फल और पत्ते खाने से वो औरतें माँ बन जाती हैं जिनको बच्चे पैदा होने में कोई समस्या है। नुरुल ने बताया कि बच्चा पैदा करने में मदद करने वाला वह पेड़ 600 साल पहले मखदूम सैयद कयामुद्दीन मक्की ने अपने हाथों से लगाया था। बकौल नुरुल दरगाह में हर दिन लोग आते हैं लेकिन जुम्मे रात (शुक्रवार) को ज्यादा भीड़ होती है। साल में एक बार बकरीद के बाद यहाँ 3 दिनों का उर्स भी होता है।
गुजरात हाईकोर्ट ने सोमवार (2 जनवरी 2024) को इशारा किया कि कथित सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ को पंडरवाड़ा कब्र खुदाई मामले में किसी प्रकार की राहत नहीं दी जाएगी।
बता दें साल 2005 में गोधरा हिंसा के बाद पंचमहल जिले के पंडरवाड़ा के पास एक कब्रिस्तान से कब्र खोदने और 28 शवों को निकालने के मामले में तीस्ता का नाम दर्ज है।
इस संबंध में एफआईआर 2006 में हुई थी। लेकिन तीस्ता सीतलवाड़ का नाम 2011 में जोड़ा गया। इस एफआईआर में गुजरात पुलिस ने झूठे सबूत बनाने, असली सबूत नष्ट करने, कब्रिस्तान पर अतिक्रमण करने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने जैसे आरोप लगाए थे।
In judging a individual’s character Gujarat HC judge Sandeep Bhatt is a better individual then his Sr brother judge ex-CJI Uday Lalit who have @TeestaSetalvad relief in the case of creating fake evidence agnst CM Modi. “ a lady is in custody for months “was CJI’s remark in order pic.twitter.com/wQMA518MJi
इसके बाद 2017 में सीतलवाड़ ने एक याचिका दायर की। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, सोमवार (2 जनवरी 2024) को जब मामला सुनवाई के लिए आया तो सोमवार को जब मामला सुनवाई के लिए आया, तो जस्टिस संदीप भट्ट ने सीतलवाड़ के वकील योगेश रवानी से कहा कि रिकॉर्ड देखने के बाद, “मैं इच्छुक नहीं हूँ। आपको (अदालत को) संतुष्ट करना होगा।”
इस दौरान सीतलवाड़ के वकील ने कहा- “यह आधिपत्य का विशेषाधिकार है। हम अदालत को समझाने की कोशिश करेंगे क्योंकि कोई अपराध नहीं बनता है। यह राजनीतिक उत्पीड़न है।”
इतना सुन जज ने उन्हें कहा कि जो तर्क वो दे रहैं है वो आजकल इस्तेमाल होने वाला व्यापक शब्द है। इसका इस्तेमाल हर जगह हो रहा है। इसके बाद न्यायधीश ने मामले की सुनवाई 9 जनवरी तक के लिए स्थगित कर दिया।
गौरतलब है कि साल 2005 के इस मामले में लूनावाड़ा नगर पालिका ने सीतलवाड़ की एनजीओ ‘सिटीजन फॉर जस्टिस एंड पीस’ के पूर्व कोऑर्डिनेटर रईस खान सहित 7 लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी। हाईकोर्ट ने सीबीआई जाँच का आदेश दिया था। इस मामले में रईस खान ने तीस्ता से अलग होने के बाद उनका नाम अपने बयान में लिया था और उसी के आधार पर उनका नाम एफआईआर में शामिल किया गया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने 2 दिवसीय दक्षिण भारत दौरे के पहले दिन 2 जनवरी, 2024 को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली पहुँचे हैं। यहाँ उनका स्वागत तमिलनाडु के मुख्यमंत्री MK स्टालिन ने किया। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी भारतीदशन विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए हैं।
प्रधानमंत्री मोदी के साथ इस विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में तमिलनाडु के राज्यपाल RN रवि भी शामिल हुए हैं। यहाँ प्रधानमंत्री ने युवाओं को संबोधित भी किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “यह 2024 में मेरा जनता से पहला संवाद है। मैं यहाँ तमिलनाडु जैसे सुन्दर राज्य में युवाओं के बीच आकर काफी खुश हूँ।”
#WATCH | Tamil Nadu: PM Narendra Modi says "Being here at 38th Convocation Ceremony of Bharathidasan University is special for me. This is my first public interaction in 2024. I am happy to be in the beautiful state of Tamil Nadu and among young people. I am the first Prime… pic.twitter.com/6oZtgqV7Dy
आगे उन्होंने छात्रों से कहा, “आपने जो विज्ञान पढ़ा है वह आपके गाँव में किसान को मदद कर सकता है, आपने जो तकनीक के बारे में पढ़ा है वह मुश्किल समस्याओं को हल करने में काम आ सकती है, आपने जो व्यापार प्रबन्धन पढ़ा है वह कारोबारियों के काम आ सकता है। आपने जो अर्थशास्त्र पढ़ा है वह ग़रीबी कम करने के काम आ सकता है। ऐसे में हर व्यक्ति जो यहाँ से स्नातक हुआ है, भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने में मदद कर सकता है।
#WATCH | Tamil Nadu: At the 38th Convocation Ceremony of Bharathidasan University, PM Narendra Modi says, "The science you learn can help a farmer in your village, the technology you learn can help solve complex problems. The business management you learn can help run businesses… pic.twitter.com/CFpeC0iWRR
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 2-3 जनवरी 2023 को तमिलनाडु, लक्षद्वीप और केरल के दौरे पर रहेंगे। यह चुनावी वर्ष 2024 में प्रधानमंत्री का पहला दौरा है। इसकी शुरुआत उन्होंने तमिलनाडु से की है। तमिलनाडु में वह 2 जनवरी को तिरुचिरापल्ली में ₹19,800 करोड़ के कई प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण करेंगे।
इनमें से अधिकांश प्रोजेक्ट रोड, रेल और हवाई सेवाओं से जुड़े हुए हैं। प्रधानमंत्री भारतीदशन विश्वविद्यालय के बाद तिरुचिरापल्ली एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का लोकार्पण करेंगे। इसे 1100 करोड़ रुपए की लागत से बनाया गया है। यह एक वर्ष में 44 लाख यात्रियों को सँभालने की क्षमता रखता है। इसने नई तकनीक से डिजाइन किया गया है और इसमें तमिलनाडु की संस्कृति को भी प्रदर्शित किया गया है। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यहाँ कई रेल लाइनों के दोहरीकरण और उनके बिजलीकरण के प्रोजेक्ट देश को समर्पित करेंगे।
The New Terminal Building at Tiruchirappalli International Airport to be inaugurated by Prime Minister Narendra Modi today. Developed at a cost of more than Rs 1,100 crores, the two-level new international terminal building has the capacity to serve more than 44 lakh passengers… pic.twitter.com/cDVqpBSJ1k
प्रधानमंत्री तिरुचिरापल्ली में त्रिची-कल्लागम के 39 किलोमीटर के चार लेन रोड समेत अन्य कई नई सड़कें भी जनता को समर्पित करेंगे। प्रधानमंत्री तिरुचिरापल्ली में ही मुगैयुर से मरक्क्म के आधारशिला रखेंगे। यहाँ वह एक लगभग 500 किलोमीटर लम्बी गैस पाईपलाइन और एक नए समुद्री तट टर्मिनल का भी उद्घाटन करेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी इसके बाद लक्षद्वीप जाएँगे जहाँ वह अपने पुराने वादे को निभाएँगे। यहाँ वह लक्षद्वीप के सुदूर द्वीपों को केरल के कोच्चि से ऑप्टिकल फाइबर केबल के जरिए इंटरनेट का शुभारम्भ करेंगे। उन्होंने इसका ऐलान वर्ष 2020 में 15 अगस्त के भाषण में किया था। इसके अलावा प्रधानमंत्री लक्षद्वीप से जुड़े अन्य कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट भी जनता को समर्पित करेंगे।
2024 की शुरुआत जापान के लिए तबाही लेकर आया है। भूकंप के कारण कई जगहों पर घर ढह गए हैं। मलबों में लोग दबे हैं। कई जगहों पर जमीन धँसी है। आगजनी की भी घटना हुई है। हालाँकि सुनामी को लेकर जो अलर्ट जारी किया गया था, वह अब वापस ले लिया गया है।
जापान में 1 जनवरी 2024 को रिक्टर स्केल पर 7.6 की तीव्रता वाला भूकंप आया था। इसके बाद सुनामी की चेतावनी जारी की गई थी। जापान के मध्य प्रांत में आए इस भूकंप में अब तक 30 लोगों की मौत हो चुकी है। बड़े पैमाने सम्पत्ति की क्षति हुई है। मौतों का आँकड़ा बढ़ने की आशंका जताई गई है।
7.6 तीव्रता वाले भूकंप के बाद से लगातार झटके महसूस किए जा रहे हैं। अब तक अलग-अलग तीव्रता वाले कम से कम 155 भूकंप जापान में महसूस किए गए हैं। अब यहाँ से नुकसान की तस्वीरें भी सामने आ रही हैं।
An entire bridge detaching from the road.
It happened today at 16:10 local time after an M7.4 earthquake hit the prefectures of Ishikawa, Niigata and Toyama in Central Japan.
इन तस्वीरों और वीडियो में कहीं लोग छुपते नजर आ रहे हैं तो कहीं भूकंप के बाद का मंजर दिखाई पड़ रहा है। कहीं रोड में दरारें पड़ चुकी हैं तो कहीं एयरपोर्ट तक को नुकसान हुआ है। घर मलबे के ढेर बन गए हैं। बड़ी संख्या में लोगों ने तटीय इलाकों को छोड़कर ऊँचे स्थानों पर शरण ली है। जापान के वाजिमा शहर में भूकंप के कारण आग लग गई, जिससे 14 इमारतें राख हो गईं। एक अन्य शहर में ऐसी ही घटना में 200 से अधिक इमारतें जल गईं। जमीन धँसने की खबरें भी सामने आई हैं।
जानकारी के अनुसार, जापान में आए इस भूकंप का सबसे अधिक प्रभाव इशिकावा प्रांत में हुआ है। यहाँ भूकंप के बाद सुनामी की भी चेतावनी जारी की गई थी, जिसे अब हटा लिया गया है। अब जापान सरकार राहत बचाव के काम में जुटी हुई है। जापान की आपदा प्रबन्धन एजेंसियों और सुरक्षा बलों के हजारों जवान देश में आए भूकंप के कारण मलबे में बदली इमारतों में से जीवितों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
जापान में इस भूकंप के कारण लगभग 50,000 घरों की बिजली गुल है। इन घरों को बिजली पहुँचाने वाली व्यवस्थाएँ ध्वस्त हो चुकी है। जापान में हर वर्ष लगभग 1500 छोटे-बड़े भूकंप आते हैं।
भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संगठन (ISRO) ने वर्ष 2024 के पहले ही दिन एक नया कीर्तिमान रच दिया। ISRO ने 1 जनवरी, 2024 को XpoSAT नाम का सैटेलाइट ब्लैक होल जैसे विषयों के शोध के लिए सफलतापूर्वक लॉन्च किया। इससे पहले अमेरिका की अन्तरिक्ष एजेंसी NASA ही ऐसा सैटेलाइट लॉन्च कर पाई है। हालाँकि, ISRO ने इसे यहाँ भी अमेरिका की NASA को लागत के मामले में पछाड़ दिया।
PSLV-C58/XPoSat Mission: Lift-off normal ?
?️XPoSat satellite is launched successfully.
?PSLV-C58 vehicle placed the satellite precisely into the intended orbit of 650 km with 6-degree inclination?.
ISRO ने यह मिशन ₹250 करोड़ की लागत से पूरा किया है। इसमें सैटेलाइट बनाने से लेकर इसे लॉन्च करने तक की लागत शामिल है। NASA ने भी 2021 में एक ऐसा ही मिशन अन्तरिक्ष में भेजा था। इसका नाम IXPE था। यह मिशन भी अन्तरिक्ष में X-किरणों और ब्लैक होल तथा न्यूट्रॉन तारों के शोध के लिए भेजा गया था।। इस मिशन में नासा ने ₹1565 करोड़ रूपए (188 मिलियन डॉलर) खर्चे थे। ISRO ने वैसा ही मिशन 6 गुना कम लागत पर पूरा कर लिया।
ISRO ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में स्थित सतीश धवन अन्तरिक्ष केंद्र से यह सैटेलाइट लॉन्च किया। इसे PSLV रॉकेट के साथ अन्तरिक्ष में भेजा गया है। इस सैटेलाइट में दो पेलोड लगे हैं। एक का नाम POLIX और दूसरे का नाम XSPECT है। यह मिशन 2017 में शुरू हुआ था।
इस सैटेलाइट को रमन रिसर्च सेंटर और यू आर राव सैटेलाइट सेंटर ने मिलकर डिजाइन किया है। पोलिक्स 8-30 kEV एनर्जी बैंड के बीच की अन्तरिक्षीय ऊर्जा के शोध का काम करेगा। EV का मतलब इलेक्ट्रान वोल्ट होता है। K का मतलब हजार से है। यह किसी इलेक्ट्रान की ऊर्जा मापने का पैमाना है।
पोलिक्स के लगभग पाँच वर्ष काम करने की आशा ISRO ने जताई है। इस दौरान यह 40 चमकीले खगोलीय स्रोतों से आने वाली ऊर्जा की जानकारी भेजेगा। वहीं XSPECT, दूसरे पेलोड POLIX की सहायता करेगा। यह विद्युत्चुम्बकीय किरणें छोड़ने वाले न्यूट्रॉन तारों, जिन्हें पल्सर कहा जाता है, उनके ऊपर शोध करेगा। यह इसके अलावा पोलिक्स से कम ऊर्जा बैंड के अन्य ऊर्जा स्रोतों पर शोध भी करेगा।
ISRO ने यह सैटेलाइट भेजने के लिए PSLV रॉकेट को चुना था। PSLV रॉकेट के DL वेरिएंट ने यह सैटेलाइट कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किए हैं। इस रॉकेट की मुख्य बॉडी पर दो बूस्टर लगे होते हैं जो इसकी रेंज और स्पीड बढाने में मदद करते हैं। इनमें 12 टन ईंधन भरा होता है। यह लगभग 1250 किलो तक के सैटेलाइट ले जाने में सक्षम है। PSLV रॉकेट को सबसे पहले 1993 में सफलतापूर्वक लाँच किया गया था। चंद्रयान भी PSLV के ही जरिए लाँच किया गया था।
A great start to 2024 thanks to our scientists! This launch is wonderful news for the space sector and will enhance India's prowess in this field. Best wishes to our scientists at @isro and the entire space fraternity in taking India to unprecedented heights. https://t.co/4O4F6kRpEX
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी इस सैटेलाइट के सफलता पूर्वक लॉन्च होने पर ख़ुशी जताई है। उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “हमारे वैज्ञानिकों को धन्यवाद, 2024 की शानदार शुरुआत! यह प्रक्षेपण अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए अद्भुत खबर है और इस क्षेत्र में हमारी शक्ति को बढ़ाएगा। हमारे वैज्ञानिकों को शुभकामनाएँ और संपूर्ण अंतरिक्ष समुदाय का को भारत को अभूतपूर्व ऊंचाइयों पर ले जाने में योगदान दे रहा है।”
अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर में जिस मूर्तिकार की मूर्ति को फाइनल किया गया है वह कर्नाटक के अरुण योगीराज ने बनाई है। योगीराज माँ सरस्वती ने इस क्षण को खुशी का पल बताया है। साथ ही ये भी जानकारी दी है कि वो अपने बेटे की बनाई मूर्ति को खुद देख नहीं पाईं।
उनकी माँ सरस्वती ने बताया, “यह हमारे लिए बहुत खुशी का पल है। मैं उसे मूर्ति बनाते हुए देखना चाहती थी, लेकिन उसने बोला कि वब मुझे आखिरी दिन लेकर जाएगा। अब मैं स्थापना के दिन जाऊँगी।”
उनकी बनाई मूर्ति की तारीफ केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी की है। उन्होंने कहा, “अयोध्या में भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा के लिए मूर्ति का चयन हो गया है। हमारे देश के सुप्रसिद्ध मूर्तिकार, हमारे गौरव अरुण योगीराज के द्वारा बनाई गई भगवान राम की मूर्ति अयोध्या में स्थापित की जाएगी।”
गौरतलब है कि राम मंदिर के लिए बनी तीनों मूर्तियों में योगीराज की मूर्ति पर सहमति हुई। वहीं अन्य दो इसलिए नहीं हुईं क्योंकि एक दक्षिण भारतीय शैली में थी और दूसरी सफेद संगमरमर के पत्थर से निर्मित थी। लेकिन ऐसा नहीं है इन दोनों मूर्तियों को मंदिर में रखा जाएगा। ये दोनों भी मूर्तियाँ भी राम मंदिर में ही स्थापित होंगी। मगर कहाँ? ये निर्णय लिया जाना बाकी है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्यों सभी सदस्यों को नीलवर्ण के रामलला के रूप में योगीराज की मूर्ति पसंद आई। इसकी खास बात यह है कि ये कर्नाटक के नीले पत्थर की है।
यह पहली बार नहीं है जब अरुण योगीराज के कार्य को देश भर में सराहा जा रहा हो। उन्होंने केदारनाथ में आदि शंकराचार्य की 12 फुट ऊँची प्रतिमा को भी तैयार किया था। इसके अलावा वह महान स्वतंत्रता सेनानी और आजाद हिंद फौज के संस्थापक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 30 फुट ऊँची प्रतिमा को तैयार करने का कार्य कर चुके हैं।
कर्नाटक के मैसूर के मूर्तिकार अरुण योगीराज सोशल मीडिया पर फेमस है। उनके एक ट्वीट के मुताबिक उन्होंने 11 साल की उम्र में अपने पिता से मूर्ति बनाने की कला को सीखा था और स्वतंत्र रूप से वो 2006 से मूर्ति बनाने का काम कर रहे हैं। उनकी कला की सराहना उनके चाहने वाले करने से नहीं चूँकते। प्रधानमंत्री भी उनके मुरीद हैं।
I started sculpting at the age of 11 under the guidance of my father and this was sculpted independently in 2006 …. (17 years ago) pic.twitter.com/fuSpicJuWw
वह प्रसिद्ध मूर्तिकार योगीराज शिल्पी के बेटे हैं, जिनके पूर्वजों को मैसूर राजपरिवार का संरक्षण प्राप्त था। यानी वो योगीराज मैसूरु महल के शिल्पकारों के परिवार से आते हैं। उनके पिता योगीराज शिल्पी अपने पिता बी बसवन्ना शिल्पी की 8 संतानों में से एक थे। अरुण के पिता गायत्री और भुवनेश्वरी मंदिर के लिए भी कार्य कर चुके हैं।
वहीं अरुण उनके 17 पोते-पोतियों में से एक हैं और पाँचवीं पीढ़ी के मूर्तिकार हैं। लेकिन उनकी शुरुआती कहानी थोड़ी अलग है। उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में MBA तक पढ़ाई की है। पहले योगीराज का सपना अपने पूर्वजों की तरह मूर्तिकार बनना नहीं था और 2008 में मैसूर विश्वविद्यालय से MBA की डिग्री लेने के बाद वो एक प्राइवेट कंपनी के लिए कार्य कर रहे थे। मगर, उनके दादा ने बचपन में ही भविष्यवाणी की थी कि अरुण बड़े होकर हाथों में औजार उठाएँगे और कलाकारों के इस परिवार का नाम और ऊँचा करेंगे। 37 वर्षों बाद ये सच हो गई है।
अरुण के पिता की हाल ही में एक दुर्घटना में मौत हो गई थी। हालाँकि उससे पहले उन्होंने शंकराचार्य की प्रतिमा को पूरे होते देखा था और आँखों में आँसू भर कर बेटे को आशीर्वाद दिया था। आज उनके द्वारा बनाई गई प्रतिमाएँ हिन्दू धर्म और भारत देश का मस्तक गर्व से ऊँचा करती हैं।
अरुण योगीराज ने अब तक इन कार्यों को अपने हाथों में लिया और पूरा किया है:
मैसूर में स्वामी रामकृष्ण परमहंस की आदमकद प्रतिमा
एक ही चट्टान से काट कर बनाई गई बृहत नंदी की 6 फुट की प्रतिमा
स्वामीजी शिवकुमार की 5 फ़ीट की प्रतिमा
माँ बनष्करी की 6 फ़ीट ऊँची प्रतिमा
हाथों से डिजाइन किए गए कई मंडपों और पत्थर के स्तंभों का निर्माण
मैसूर में बाबासाहब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर की लाइफ साइज प्रतिमा, जिसे सफ़ेद संगमरमर से गढ़ा गया था
महाराजा जयचमराजेंद्र वुडेयार की 14.5 फ़ीट की प्रतिमा, जो सफ़ेद संगमरमर से ही बनाई गई थी
मैसूर में ही भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ की प्रतिमा
मैसूर विश्वविद्यालय में सोपस्टोन से बनी एक कलाकृति
केआर नगर में योगनरसिंह स्वामी की 7 फीट लम्बी प्रतिमा
आंध्र प्रदेश में माहेश्वरी माता की इतनी ही ऊँची प्रतिमा
महान इंजिनियर विश्वेश्वरैया और डॉक्टर आंबेडकर की कई प्रतिमाएँ
सोपस्टोन से महाविष्णु की 7 फीट ऊँची प्रतिमा
भगवान बुद्ध की प्रतिमा कई अलग-अलग डिजाइनों में
पंचमुखी गणपति की प्रतिमा
5 फीट ऊँची स्वामी शिवबाला योगी की प्रतिमा
सोपस्टोन से भगवान शिव की 6 फ़ीट ऊँची प्रतिमा
अब तक उन्हें निम्नलिखित सम्मान मिल चुके हैं:
2014 में केंद्र सरकार द्वारा युंग टैलेंट अवॉर्ड
मैसूर डिस्ट्रिक्ट अथॉरिटी और कर्नाटक सरकार द्वारा राज्योत्सव अवॉर्ड
शिल्पकार संघ द्वारा शिल्प कौस्तुभ अवॉर्ड (पहली बार किसी युवा मूर्तिकार को ये सम्मान मिला)
मुख्यमंत्री सिद्दरमैया ने इन्हें सम्मानित किया
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव कोफ़ी अन्नान ने न सिर्फ उनके काम को वहाँ जाकर देखा, बल्कि उनकी प्रशंसा भी की
मैसूर राजपरिवार द्वारा उन्हें सम्मानित किया गया
मैसूर डिस्ट्रिक्ट स्पोर्ट्स अकादमी ने उन्हें सम्मानित किया
अमर शिल्पी जकनकारी ट्रस्ट द्वारा सम्मान
मैसूर विश्वविद्यालय के कुलपति ने भी उन्हें सम्मानित किया।
AIMIM पार्टी के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी फिर से सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। वो मुस्लिम युवकों से कह रहा है कि वो लोग मस्जिदों को बचाएँ। इसके लिए रोज मस्जिद जाएँ। उन्होंने कहा कि 500 साल तक जहाँ कुरान-ए-करीम का जिक्र किया, वही मस्जिद हमने खो दी है। असदुद्दीन ओवैसी ने पूरे वीडियों में कहीं भी अयोध्या और राम मंदिर का जिक्र नहीं किया, लेकिन इशारों-इशारों में उन्होंने 500 सालों का जिक्र कर बाबरी के लिए अपनी पीड़ा उजागर कर दी है।
असदुद्दीन ओवैसी ने खुद ये वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है, जिसमें वो युवकों से कह रहा है, “नौजवानों मैं तुमसे कह रहा हूँ, हमारी मस्जिद हमने गवाँ दी और वहाँ क्या किया जा रहा है आप देख रहे हैं। नौजवानों, क्या तुम्हारे दिलों में तकलीफ नहीं होती? जहाँ 500 साल हमने बैठकर कुरान-ए-करीम का जिक्र किया हो, आज वो जगह हमारे हाथ में नहीं है। नौजवानो, क्या तुमको नहीं दिख रहा कि तीन-चार और मस्जिदों को लेकर साजिश हो रही है, जिसमें दिल्ली की सुनहरी मस्जिद भी शामिल है।”
ओवैसी वीडियो में आगे कहता है, “ये जो ताकतें हैं, तुम्हारे दिलों से इत्तेहाद को निकालना चाहते हैं। ये ऐसा क्यों चाहते हैं? क्योंकि मिल्ली गीरत को खत्म कर दिया जाए, मिल्ली हमीयत को खत्म कर दिया जाए। वर्षों की मेहनत के बाद आज हमारा एक मुकाम हमने पैदा किया है। आपको इन चीजों पर गौर करना है। आप अपनी मिल्ली हमीयत को, अपनी ताकत को बरकरार रखिए। अपनी मस्जिदों को आबाद रखिए। कहीं ऐसा ना हो कि ये मस्जिदें हमसे छीन ली जाएँ। मुझे उम्मीद है, इंशाअल्लाह… आज का ये नौजवान जो कल का बूढ़ा होगा…वो अपनी नजरों को आगे रखकर, अपने दिमाग पर जोर डालकर सोचेगा कि किस तरीके से मुझे अपने आपको, अपने खानदान को, अपने शहर को, अपने मुहल्ले को बचाना है। इत्तेहाद एक ताकत है, इत्तेहाद एक नेमत है।”
Naujawano'n!! apni milli hamiyyat aur taqat ko barqaraar aur Masjido'n ko abaad rakho. Kaheen aisa na ho ke hamari Masjidein cheen li jaye.pic.twitter.com/dPGDzI9mHu
गौरतलब है कि अयोध्या के श्रीराम मंदिर में 22 जनवरी, 2024 को रामलला का प्राण प्रतिष्ठा होगा। इसके लिए तैयारियाँ जोरों-शोरों से हो रही हैं। इस अवसर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उपस्थित रहेंगे। इनके अतिरिक्त 3000 वीआईपी समेत 7000 निमंत्रण भेजे गए हैं। इनमें कारसेवकों का परिवार भी हैं जिन्होंने राम मंदिर के लिए अपनी जान गँवा दी। ट्रस्ट का कहना है कि आयोजन में 10 हजार से 15000 लोगों के आने का इंतजाम होगा। भगवान राम के मंदिर के लिए मूर्ति का भी चयन कर लिया गया है। श्याम वर्ण भगवान राम अपने मंदिर में बाल रूप में विराजमान होंगे।
अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर में नीलवर्ण के रामलला विराजमान होंगे। तीन मूर्तियों में से एक मूर्ति को फाइनल कर लिया गया है। ये मूर्ति कर्नाटक के योगीराज ने बनाई है, जो नीले पत्थर से बनी है। बाकी की एक मूर्ति भी नीले पत्थर की है, लेकिन वो दक्षिण भारतीय शैली में है। वहीं, एक मूर्ति सफेद संगमरमर की बनी है। ऐसे में योगीराज की बनाई मूर्ति पर सभी की सहमति बन गई है। 22 जनवरी को रामलला के मंदिर में होने वाले प्राण प्रतिष्ठा समारोह में इसी मूर्ति को प्रतिष्ठित किया जाएगा।
बताया जा रहा है कि 29 दिसंबर को हुई बैठक में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सभी सदस्यों ने अपना मत लिखित रूप से चंपत राय को दे दिया था। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया है कि गर्भगृह में रामलला की 51 इंच लंबी प्रतिमा स्थापित की जाएगी, जिसमें रामलला 5 साल के बाल स्वरूप में होंगे। प्रतिमा में रामलला को खड़े हुए दिखाया गया है। प्रतिमा ऐसी है जो राजा का पुत्र और विष्णु का अवतार लगे। गर्भगृह में रामलला कमल के फूल पर विराजमान होंगे। कमल के फूल के साथ उनकी लंबाई करीब 8 फुट होगी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रामलला की तीन प्रतिमाओं का निर्माण 3 मूर्तिकारों गणेश भट्ट, योगीराज और सत्यनारायण पांडेय ने तीन पत्थरों से किया है। इनमें सत्यनारायण पांडेय की प्रतिमा श्वेत संगमरमर की है। जबकि शेष दोनों प्रतिमाएँ कर्नाटक के नीले पत्थर की हैं। इनमें गणेश भट्ट की प्रतिमा दक्षिण भारत की शैली में बनी थी। इस कारण अरुण योगीराज की प्रतिमा का चयन किया गया है।
रामलला की तीनों मूर्तियों को नवनिर्मित मंदिर में ही स्थापित किया जाएगा। एक मूर्ति गर्भगृह में स्थापित की जाएगी। दूसरी पहले तल पर राम दरबार में लगेगी। तीसरी मूर्ति को द्वितीय तल पर स्थापित किया जाएगा। पहली मूर्ति का चुनाव हो गया है, बाकी की दोनों मूर्तियों को कहाँ स्थापित किया जाएगा, इसका निर्णय बाद में किया जाएगा। तीनों मूर्तियों के लिए वस्त्र, जेवर और मुकुट का निर्माण हो रहा है। रामलला को गर्भगृह में जिस आसन पर विराजमान करवाना है, वह भी तैयार है।
गौरतलब है कि अयोध्या के श्रीराम मंदिर में 22 जनवरी, 2024 को रामलला का प्राण-प्रतिष्ठा होगा। इसके लिए तैयारियाँ जोरों-शोरों से हो रही हैं। इस अवसर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उपस्थित रहेंगे। इनके अतिरिक्त 3000 वीआईपी समेत 7000 निमंत्रण भेजे गए हैं। इनमें कारसेवकों का परिवार भी हैं जिन्होंने राम मंदिर के लिए अपनी जान गवा दी। ट्रस्ट का कहना है कि आयोजन में 10 हजार से 15000 लोगों के आने का इंतजाम होगा।