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‘भारत के कण-कण और जन-जन का मैं पुजारी’: अयोध्या में स्टेशन और एयरपोर्ट के लोकार्पण के बाद बोले PM मोदी, ₹16000 करोड़ की योजनाओं की सौगात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में रेलवे स्टेशन के लोकार्पण और अमृत भारत एवं वंदे भारत ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई। इस दौरान पीएम मोदी ने रामपथ पर 15 किलोमीटर लंबा रोड शो भी किया। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी निषाद समुदाय से जुड़े रविंद्र के घर गए और फिर उज्ज्वला योजना की लाभार्थी महिला के घर जाकर चाय पी। इसके बाद वे स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर चौक पहुँचे।

वहाँ से वापस आकर पीएम मोदी ने अयोध्या के महर्षि वाल्मीकि इंटरनेशनल एयरपोर्ट का लोकार्पण किया। इस दौरान पीएम मोदी ने हजारों करोड़ की परियोजनाओं का भी लोकार्पण किया। पीएम मोदी ने कहा कि ये उनका सौभाग्य है कि वो रामलला के मंदिर निर्माण के साक्षी बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की इन परियोजनाओं से अयोध्या धाम और आसपास के पूरे इलाके की सूरत बदल जाएगी।

पीएम मोदी ने एयरपोर्ट का उद्घाटन करने के बाद लोगों को संबोधित भी किया। पीएम मोदी ने कहा, “आज पूरी दुनिया उत्सुकता के साथ 22 जनवरी के ऐतिहासिक क्षण का इंतजार कर रही है। ऐसे में अयोध्यावासियों में ये उत्साह… ये उमंग बहुत स्वाभाविक है। भारत की मिट्टी के कण-कण और भारत के जन-जन का मैं पुजारी हूँ। मैं भी आपकी तरह उतना ही उत्सुक हूँ।”

हिंदुओं के लिए प्रसिद्ध मोक्षदायिनी सप्तपुरी में से सातवीं अयोध्यापुरी में प्रधानमंत्री ने कहा, “हम सभी का ये उत्साह ये उमंग थोड़ी देर पहले अयोध्या की सड़कों पर भी पूरी तरह नजर आ रहा है। ऐसा लगता था, कि पूरी अयोध्या नगरी ही सड़क पर उतर आई है। इस प्यार, इस आशीर्वाद के लिए मैं आप सभी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।” इसके बाद पीएम मोदी ने लोगों से ‘सियावर रामचंद्र की जय’ के जयकारे भी लगवाए।

पीएम मोदी ने कहा, “देश के इतिहास में 30 दिसंबर की ये तारीख बहुत ही ऐतिहासिक रही है। आज के ही दिन 1943 में नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने अंडमान में झंडा फहराकर भारत की आजादी का जयघोष किया था। आजादी के आंदोलन से जुड़े ऐसे पावन दिवस पर आज हम आजादी के अमृत काल के संकल्प को आगे बढ़ा रहे हैं। विकसित भारत के अभियान को आगे बढ़ाने के लिए अयोध्या धाम से उर्जा मिल रही है।”

अयोध्या और उसके आसपास की परियोजनाओं को लेकर पीएम ने कहा, “आज 15 हजार करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास हुआ है। ये कार्य अयोध्यावासियों के अथक परिश्रम का परिणाम है। दुनिया में कोई भी देश हो, अगर उसे विकास की नई ऊँचाई पर पहुँचना है तो उसे अपने विरासत को सँभालना ही होगा। हमारी विरासत हमें प्रेरणा देती है, हमें सही मार्ग दिखाती है, इसलिए आज का भारत पुरातन और नूतन दोनों को आत्मसात करते हुए आगे बढ़ रहा है।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “एक समय था, जब इसी अयोध्या में रामलला टेंट में विराजमान थे, आज पक्का घर सिर्फ रामलला को ही नहीं, बल्कि पक्का घर देश के 4 करोड़ गरीबों को भी मिला है। आज भारत अपने तीर्थों को भी सँवार रहा है। वहीं, डिजिटल टेक्नोलॉजी की दुनिया में भी हमारा देश छाया हुआ है।” आज भारत काशी विश्वनाथ धाम के पुनर्निर्माण के साथ ही देश में 30 हजार से ज्यादा पंचायत भवन भी बनवा रहा है।”

उन्होंने कहा, “सिर्फ केदारनाथ का ही पुनर्निर्माण नहीं हुआ, 300 से ज्यादा मेडिकल कॉलेज भी बने हैं। सिर्फ महाकाल लोक ही विकसित नहीं हुआ, बल्कि हर घर पानी भी पहुँच रहा है। हम सूरज-चाँद को नाप रहे हैं तो भारत की कलाकृतियों को वापस भी ला रहे हैं। आज यहाँ प्रगति का उत्सव है तो कुछ दिन बाद परंपरा का उत्सव भी होगा। आज तकनीकी दिख रही है तो कुछ दिनों बाद अध्यात्म और विरासत भी दिखेगी। यही मेल भारत को 21वीं सदी में सबसे आगे ले जाएगी।”

पीएम मोदी ने कहा, “प्राचीन काल में अयोध्या नगरी कैसी थी, इसका वर्णन महर्षि वाल्मीकि ने विस्तार से किया है।” उन्होंने श्लोक सुनाकर बताया, “वाल्मीकि जी ने बताया है कि महान अयोध्यापुरी धन-धान्य, समृद्धि और आनंद से भरी थी। अयोध्या में विज्ञान और वैराग्य तो था ही, वैभव भी शिखर पर था। अयोध्या नगरी की उसी पुरातन पहचान को हमें आधुनिकता से जोड़कर वापस लाना है। आने वाले समय में अयोध्या नगरी अवध क्षेत्र ही नहीं, बल्कि पूरे यूपी के विकास को दिशा देने वाली है।”

उन्होंने आगे कहा, “अयोध्या में श्रीराम का भव्य मंदिर बनने के बाद यहाँ आने वाले लोगों की संख्या में भारी बढ़ोतरी होगी। इसको ध्यान में रखते हुए हमारी सरकार अयोध्या में विकास कार्य करा रही है। आज अयोध्या में हाईवे चौड़े हो रहे हैं, नए पुल बन रहे हैं, नई सड़कें बन रही हैं। यातायात के साधनों को सुधारा जा रहा है। अयोध्या में बनने जा रही नई टाउनशिप लोगों के जीवन को आसान बनाएगी। विकास के कार्यों से लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बनेंगे। इससे सभी की आय बढ़ेगी।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “आज मुझे अयोध्या धाम एयरपोर्ट और अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन का लोकार्पण करने का सौभाग्य मिला। मुझे खुशी है कि अयोध्या एयरपोर्ट का नाम महर्षि वाल्मीकि के नाम पर रखा गया है। महर्षि वाल्मीकि ने हमें रामायण के माध्यम से प्रभु राम से परिचित कराया। त्रिकालदर्शी महर्षि वाल्मीकि के नाम पर अयोध्या धाम एयरपोर्ट का नाम रखा गया है, जो हर यात्री को धन्य करेगा। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण वो ज्ञानमार्ग है, जो हमें प्रभु श्रीराम से जोड़ती है।”

उन्होंने कहा, “आधुनिक एयरपोर्ट हमें दिव्य, भव्य, नव्य राममंदिर से जोड़ेगा। ये एयरपोर्ट हर साल 10 लाख यात्रियों की क्षमता वाला है। दूसरा चरण पूरा होने के बाद हर साल 60 लाख यात्रियों की सुविधा इस एयरपोर्ट पर होगी। इसी तरह से अभी रेलवे स्टेशन पर हर रोज 10-15 हजार की क्षमता है। काम पूरा होने पर हर दिन 60 हजार से ज्यादा लोग आ जा सकेंगे। इसी के साथ रामपथ, भक्तिपथ, श्रीराम जन्मभूमि पथ का भी लोकार्पण किया गया है।”

विकास कार्यों में बारे में बताते हुए पीएम ने कहा, “अयोध्या में मेडिकल कॉलेज से लेकर हर सुविधा विकसित की जा रही है। सरयू को प्रदूषण से बचाने के लिए जलशोधन केंद्र बनाया जा रहा है। प्राचीन कुंडों का उद्धार किया जा रहा है। अयोध्या धाम की धरती से अमृत भारत ट्रेन की शुरुआत हुई है। वंदे भारत, नमो भारत और अमृत भारत की ये त्रिशक्ति भारतीय रेलवे का कायाकल्प करने वाली है। इसकी पहली अमृत भारत ट्रेन अयोध्या से गुजर रही है।”

उन्होंने कहा, “दरभंगा से आने वाली ये ट्रेन बिहारवासियों के लिए भगवान रामलला के दर्शन को सुलभ बनाएगी। इससे गरीब परिवारों को भी मदद मिलेगी। ये ट्रेन कम आय वाले वर्गों के लिए भी आरामदायक सफर उपलब्ध कराएगी। गरीब के जीवन की भी गरिमा है, इसी ध्येय के साथ इन ट्रेनों को डिजाइन किया गया है।” पीएम मोदी ने कहा कि विकास और विरासत को जोड़ने में वंदे भारत ट्रेन अहम भूमिका निभा रही है। देश की पहली वंदे भारत ट्रेन काशी से चली थी और आज देश की पहली अमृत भारत ट्रेन अयोध्या से चल रही है।

अयोध्या हवाई अड्डे की खासियत

पीएम मोदी ने जिस अत्याधुनिक हवाई अड्डे का उद्घाटन किया, उसके पहले चरण को 1450 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से विकसित किया गया है। हवाई अड्डे के टर्मिनल भवन का क्षेत्रफल 6500 वर्गमीटर का है, जो सालाना लगभग 10 लाख यात्रियों की सेवा के लिए सुसज्जित है। टर्मिनल भवन का अगला हिस्सा अयोध्या के श्रीराम मंदिर की वास्तुकला को दर्शाता है। टर्मिनल भवन के अंदरूनी हिस्सों को भगवान श्रीराम के जीवन को दर्शाने वाली स्थानीय कला, पेंटिंग और भित्तिचित्रों से सजाया गया है।

अयोध्या हवाई अड्डे का टर्मिनल भवन विभिन्न सुविधाओं से सुसज्जित है, जैसे इन्सुलेशन छत प्रणाली, एलईडी प्रकाश व्यवस्था, वर्षा जल संचयन, फव्वारे के साथ भूनिर्माण, जल उपचार संयंत्र, सीवेज उपचार संयंत्र, सौर ऊर्जा संयंत्र तथा ऐसी कई अन्य सुविधाएँ प्रदान की गई हैं। ये सभी सुविधा गृह 5 स्टार रेटिंग के अनुरूप हैं। इस हवाई अड्डे से क्षेत्र में कनेक्टिविटी में सुधार होगा, जिससे पर्यटन, व्यावसायिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलेगा।

प्रधानमंत्री ने किया इन परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास

पीएम मोदी ने सुबह अयोध्या एयरपोर्ट के गेट नंबर 3 से रामपथ पर 15 किलोमीटर लंबा रोड शो किया। इसके बाद पीएम मोदी ने अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन का लोकार्पण किया। उस उन्होंने नई अमृत भारत ट्रेनों और वंदे भारत ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने अयोध्या से ही पूरे राज्य में फैली 15,700 करोड़ रुपए से अधिक की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया।

इनमें अयोध्या और उसके आसपास के क्षेत्रों के विकास के लिए लगभग 11,100 करोड़ रुपए की परियोजनाएँ और पूरे यूपी में अन्य परियोजनाओं से संबंधित लगभग 4600 करोड़ रुपए की परियोजनाएँ शामिल हैं। पीएम की परिकल्‍पना अयोध्या में आधुनिक विश्वस्तरीय संचरना का विकास, कनेक्टिविटी में सुधार और शहर के समृद्ध इतिहास एवं विरासत के अनुरूप सुविधाओं का कायाकल्‍प करना है।

पीएम की इस परिकल्‍पना को साकार रूप देने के लिए शहर में एक नए हवाई अड्डे, नए पुनर्विकसित रेलवे स्टेशन, नव पुनर्विकसित चौड़ी और सौन्‍दर्यपूर्ण सड़कों तथा अन्य नागरिक अवसंरचना का उद्घाटन किया गया। इसके अलावा, कई नई परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी गई, जो अयोध्या और उसके आसपास नागरिक सुविधाओं के सौंदर्यीकरण और सुधार में योगदान देंगी।

‘श्रीराम का मंदिर भी बनवाया, नई शिक्षा नीति भी लेकर आए’: मॉरीशस के सांसद ने भी दोहराया ‘मोदी है तो मुमकिन है’ का नारा, कहा – हम सब खुश और गर्वित

मॉरीशस के सांसद महेंद गंगा प्रसाद ने अयोध्या में राम मंदिर बनने से भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुरीद हो गए। उन्होंने पीएम मोदी का आभार जताते हुए कहा जोर देकर कहा,”केवल पीएम मोदी ही अयोध्या की प्रसिद्धि वापस दे सकते थे और उन्होंने ये कर दिखाया।”

मॉरीशस की लेबर पार्टी से सांसद महेंद गंगाप्रसाद इन दिनों भारत में हैं। उन्होंने आगे कहा, “आप कल्पना भी नहीं कर सकते कि मैं कितना गर्व महसूस कर रहा हूँ। आपमें से अधिकांश लोगों और मॉरिशस के अधिकतर हिंदू धर्म मानने वाले लोग बहुत खुश है और उन्हें गर्व है कि रामजी के पास आज अपना मंदिर है जहाँ वो पैदा हुए थे।”

मॉरिशस सांसद ने कहा,” मैं ईमानदारी से ऐसा कह सकता हूँ कि केवल पीएम मोदी ही ऐसा कर सकते थे और उन्होंने कर दिखाया है। जिस तरह से मंदिर बन रहा है और बनाया गया है, हमें मोदी जी पर गर्व है जो उन्होंने किया।” इस दौरान सांसद गंगाप्रसाद ने पीएम मोदी के शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कामों को भी सराहना की।

इस दौरान सांसद गंगाप्रसाद ने पीएम मोदी के शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कामों को भी सराहना की। उन्होंने कहा, “पीएम मोदी के कार्यकाल में शिक्षा का क्षेत्र हर तरफ से फला-फूला है। स्कूलों और विश्वविद्यालयों से निकलने वाले छात्र वो नए भारत, नई शिक्षा प्रणाली को प्रतिबिंबित करते हैं। इसके लिए मैं मुझे मोदी जी को उनकी शिक्षा नीतियों और उन्हें लागू करने के लिए धन्यवाद कहने की जरूरत महसूस होती है।”

उन्होंने आगे कहा कि पीएम मोदी एक करिश्माई नेता है। वो अपने आप में ही अनूठे नेता है। उन्होंने भारत की नियति और तस्वीर को बदल दिया है। उन्होंने कहा, “आज, लोग भारत की ओर देखते हैं और मुझे लगता है कि एक शख्स जो हमारे आभार और हमारी तारीफ का हकदार है, वह नरेंद्र मोदी हैं, उन्होंने जो कुछ भी किया है उसके लिए।”

उन्होंने कहा कि यह नया भारत केवल उनके नजरिए की वजह से ही संभव हो पाया है। उन्होंने जोर देकर कहा, “मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि उनके कार्यकाल में, भारत का भविष्य आज की तरह बहुत उज्ज्वल है। मुझे लगता है, लोगों के भारत को देखने के तरीके में बदलाव आया है। और मोदी जी को धन्यवाद, कई देश भारत से दोस्ती करना चाहते हैं। वे भारत के साथ बहुत करीबी संबंध रखना चाहते हैं।”

भारत-मॉरीशस के रिश्तों पर गंगाप्रसाद ने कहा कि रिश्ते को और मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “हम मॉरीशसवासियों का भारत के साथ हमेशा बहुत अच्छा रिश्ता रहा है और मोदी के कार्यकाल में यह रिश्ता और मजबूत हो रहा है और इसके लिए मैं श्री नरेंद्र मोदी का आभारी हूँ।” उन्होंने कहा, “मोदी है तो मुमकिन है।”

‘राम सिर्फ हिन्दुओं के भगवान नहीं, पूरी दुनिया के हैं’: प्राण-प्रतिष्ठा से पहले कश्मीर वाले फारूक अब्दुल्ला ने दी ‘मुबारकबाद’, पाकिस्तान पर भी बोले

अयोध्या में भव्य राम मंदिर का उद्घाटन 22 जनवरी 2024 को होने जा रहा है। इसे लेकर देश -विदेशों से बधाईयाँ आ रही हैं। इसी कड़ी में जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस (NC) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने भी मुबारकबाद दी है, हालाँकि वो इस शुभकामना के साथ वो पाकिस्तान का राग अलापना नहीं भूले।

NC अध्यक्ष अब्दुल्ला ने राम मंदिर के उद्घाटन पर मुबारकबाद देते हुए कहा, “भगवान राम का मंदिर खुलने वाला है, मैं उन सबको मुबारकबाद देता हूँ जिन्होंने इसकी कोशिश की कि राम का मंदिर बने और वो तैयार हो गया है। साथ-साथ उनसे ये भी कहता हूँ, सबसे भारत के निवासियों से भी कि भगवान राम सिर्फ हिंदुओं का राम नहीं है। वो सब दुनिया के लोगों का विश्व का राम है। उनके पुस्तकों में लिखा हुआ है। वो विश्व का राम है।”

जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “उन्होंने (राम) भाईचारे की, मोहब्बत की, एक-दूसरे की सहायता की बात की है जिंदगी में। और हर बार कहा है कि जो नीचे गिरा हुआ है उसको उठाने की कोशिश करो। कभी ये नहीं कहा उसका धर्म क्या है, उसकी शक्ल क्या है, उसकी जबान क्या है, वो कहाँ से आता है, बल्कि एक यूनिवर्सल मैसेज दिया, सबके लिए, सारे विश्व के लिए कि एक-साथ रहें, तरक्की करें और भाईचारे में रहें। आज जब ये मंदिर खुलने वाला है मैं सब भाई-बहनों से कहना चाहता हूँ कि उस भाईचारे को कायम करिए जो आहिस्ता-आहिस्ता हमारे वतन से गायब हो रहा है।”

जम्मू कश्मीर में हाल ही में आतंकी घटनाओं में बलिदान हुए जवानों पर दुःख जताते हुए उम्रदराज एनसी अध्यक्ष अब्दुल्ला भारत को फिर से पाकिस्तान से बातचीत की नसीहत देने से नहीं चूके। उन्होंने कहा कि कि पड़ोसी से दोस्ती और बातचीत होनी ही चाहिए।

साथ ही वो चेताना भी नहीं भूले कि यह याद रखा जाना चाहिए कि दोनों देश परमाणु हथियार लैस मुल्क हैं। आतंकवाद को मजहब से जोड़ने का विरोध करते हुए उन्होंने कहा कि मजहब कभी भी आतंकवाद की इजाजत नहीं देता।

बताते चलें कि अभी तीन दिन पहले ही फारूक अब्दुल्ला ने कहा था कि यदि आतंकवाद पर पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान से बात नहीं की जाएगी तो कश्मीर की हालात गाजा जैसी हो जाएगी। यही नहीं शनिवार (30 दिसंबर, 2023) को एनसी अध्यक्ष ने कहा है कि लोग चुनी हुई सरकार चाहते हैं। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में जल्द चुनाव कराने पर भी जोर दिया।

पुष्पवर्षा से PM मोदी का स्वागत, ‘अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन’ का किया उद्घाटन: ‘रामपथ’ पर मेगा रोड शो, इन 8 ट्रेनों को दिखाई हरी झंडी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या एयरपोर्ट पहुँचे, जहाँ राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका स्वागत किया। एयरपोर्ट के गेट नंबर 3 से अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भव्य रोडशो किया, जिसमें भारी संख्या में लोग शामिल हुए। इस दौरान लोगों ने प्रधानमंत्री का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुनर्विकसित अत्याधुनिक अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन का लोकार्पण किया और फिर उन्होंने 2 अमृत भारत के साथ ही 6 वंदे भारत ट्रेनों को भी हरी झंडी दिखाई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में भव्य स्वागत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार (30 दिसंबर 2023) को अयोध्या पहुँचे। अयोध्या के महर्षि वाल्मीकि इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जिसका लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों ही होना है, वहाँ पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने प्रधानमंत्री का स्वागत किया। एयरपोर्ट के गेट नंबर 3 से अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन तक ‘रामपथ’ पर उन्होंने मेगा रोड शो किया।

इस रोडशो के दौरान भारी संख्या में लोग उपस्थित हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लोगों ने फूल बरसाए। इस दौरान प्रधानमंत्री ने सभी का अभिवादन किया।

अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन का लोकार्पण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन के नवनिर्मित भवन के साथ ही नई सुविधाओं का लोकार्पण किया। इस दौरान केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन 240 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित किया गया है। इसमें तीन मंजिला आधुनिक रेलवे स्टेशन भवन लिफ्ट, एस्केलेटर, फूड प्लाजा जैसी सभी आधुनिक सुविधाएँ हैं। पूजा की ज़रूरतों के लिए दुकानें, क्लॉक रूम, बच्चों की देखभाल के कमरे, प्रतीक्षालय – ये सब बनाए गए हैं। स्टेशन भवन ‘सभी के लिए सुलभ’ और ‘आईजीबीसी प्रमाणित ग्रीन स्टेशन भवन’ है।

वंदे भारत और अमृत भारत ट्रेनों को दिखाई हरी झंडी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन से 2 अमृत भारत ट्रेनों और 6 वंदे भारत ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई। प्रधानमंत्री ने जिन अमृत भारत ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई, उनमें से एक अमृृत भारत ट्रेन दरभंगा से आनंद विहार टर्मिनल वाया अयोध्या और दूसरी मालदा टाउन से एम विश्वेश्वरैया टर्मिनस, बेंगलुरू तक चलेगी। वहीं, छह वंदे भारत ट्रेनों में श्री माता वैष्णो देवीकटरा-नई दिल्ली वंदे भारत एक्सप्रेस, अमृतसर-दिल्ली वंदे भारत एक्सप्रेस, कोयंबटूर-बेंगलुरू कैंट वंदे भारत एक्सप्रेस, मैंगलुरू-मडगांव वंदे भारत एक्सप्रेस, जालना-मुंबई वंदे भारत एक्सप्रेस और अयोध्या-आनंद विहार टर्मिनल वंदे भारत एक्सप्रेस हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह से तीन सप्ताह पहले ही अयोध्या पहुँचे हैं और विकास कार्यों का लोकार्पण कर रहे हैं।

‘ज़्यादा पढ़े लिखे नहीं हैं PM मोदी, BJP को अर्थव्यवस्था की भी समझ नहीं’: कपिल सिब्बल के शो में सुब्रह्मण्यम स्वामी, दोनों को सरकार में न होने का मलाल

कॉन्ग्रेस के पूर्व नेता और सीनियर वकील कपिल सिब्बल अब नए अवतार में हैं। वो अब इंटरव्यू देने नहीं, बल्कि इंटरव्यू लेने वाले बन गए हैं। दरअसल, उन्होंने वामपंथी प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘द वायर’ पर ‘सेंट्रल हॉल विद कपिल सिब्बल’ नामक एक टॉक शो शुरू किया है। इसका पहला एपिसोड 29 दिसंबर 2023 को यूट्यूब पर स्ट्रीम किया गया।

इस शो में कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी के साथ बात करते नजर आ रहे हैं। इस शो में दोनों ‘अर्थव्यवस्था के हालात’ टॉपिक पर बात करते करते हैं। इस शो की खास बात ये है कि इसमें कॉन्ग्रेसी नेता सिब्बल अर्थव्यवस्था को लेकर मोदी सरकार पर हमला करने से नहीं चूकते हैं। हालाँकि शो में उनकी ये कोशिश धरी रह गई, क्योंकि इस मुद्दे पर आँकड़ों ने उन्हें आईना दिखा दिया।

इनमें भारतीय अर्थव्यवस्था का अच्छा प्रदर्शन बगैर कहें ही बहुत कुछ कह रहा था। इस पर जब सिब्बल से कुछ कहते नहीं बना तो उन्होंने ये तो माना कि देश की अर्थव्यवस्था खुद से ही बेहतर कर रही है, लेकिन खिसियानी बिल्ली खंबा नोचे के तरह ये कहने से बाज नहीं आए कि मौजूदा सरकार अर्थव्यवस्था के बारे में कुछ नहीं जानती है।

इस शो में दोनों नेताओं के बीच बात आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रोबोटिक्स से शुरू हुई। सिब्बल ने कहा कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था AI को अपना रही है। उन्होंने सुब्रमण्यम स्वामी से पूछा कि इस क्षेत्र में भारत के लिए क्या चुनौतियाँ होंगी। इस पर स्वामी ने जवाब दिया कि भारत इस चुनौती का अच्छी तरह से सामना कर सकता है।

उन्होंने दावा किया कि नासा (NASA) एआई कार्यक्रमों में संस्कृत का इस्तेमाल करने के लिए शोध कर रहा है। अर्थशास्त्री स्वामी ने ये भी दावा किया कि नासा रोबोटों के लिए अंग्रेजी के बजाय संस्कृत को प्राथमिकता दे रहा है, क्योंकि संस्कृत में एक ही वर्तनी यानी स्पैलिंग के लिए अलग-अलग उच्चारण नहीं हैं, जैसे कि बट (But) और पुट (Put)।

इस मामले में ये बात गौर करने लायक है कि लंबे वक्त से इंटरनेट पर अफवाह है कि नासा AI और रोबोटिक्स के लिए संस्कृत पर शोध कर रहा है और यह काफी हद तक निराधार है। नासा एक अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन है। ये आवाज पहचान प्रणालियों में सक्रिय तौर से शामिल नहीं है और इस बात का कोई सबूत नहीं है कि अमेरिकी सरकारी एजेंसी AI में संस्कृत के इस्तेमाल पर शोध कर रही है।

दरअसल, इस अफवाह की जड़ 1985 में नासा के एक सहायक वैज्ञानिक का छपा एक शोध पत्र है। इसका शीर्षक था ‘संस्कृत में ज्ञान प्रतिनिधित्व और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’। यह वैज्ञानिक का नितांत निजी काम था और इसका कोई सुबूत नहीं है कि नासा ने इस विषय पर कोई और अध्ययन किया हो।

शो में बात को आगे बढ़ाते हुए कॉन्ग्रेसी नेता सिब्बल से बीजेपी नेता स्वामी ने कहा कि भारतीयों ने Y2K परेशानी का समाधान कर लिया है और पश्चिम को भविष्य में भी भारत पर निर्भर रहना होगा। हालाँकि, उन्होंने ये भी कहा कि यह देश के नेतृत्व पर निर्भर करेगा। दरअसल, Y2K साल 2000 के बाद तारीखों के लिए कैलेंडर डेटा की फॉर्मेटिंग और स्टोरेज से जुड़ी संभावित कंप्यूटरीकृत गलतियों से जुड़ा था।

स्वामी ने आगे कहा, “यदि आपके पास बेवकूफ नेतृत्व है…”। इस बीच सिब्बल ने उन्हें टोकते हुए पूछा कि क्या वह ये कह रहे हैं कि मौजूदा नेतृत्व बेवकूफ है। इस पर स्वामी ने जवाब दिया कि आज के नेतृत्व में कोई विद्वान नहीं हैं।

जब कपिल सिब्बल ने कहा कि सरकार में उच्च शिक्षित लोग हैं तो स्वामी ने जवाब दिया, “तो उनमें प्रधानमंत्री को यह बताने का दम होना चाहिए, जो कि उच्च शिक्षित नहीं हैं। मुझे नहीं पता कि वह किस विषय में उच्च शिक्षित हैं…।” दरअसल स्वामी साफ तौर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शिक्षा की ओर इशारा कर रहे थे।

इस दौरान सिब्बल बातचीत का रुख दूसरे टॉपिक्स की तरफ मोड़ते, उससे पहले ही स्वामी को जो बोलना था वो बोल चुके थे। हालाँकि फिर दोनों नेता अर्थव्यवस्था पर बातचीत करने लगे। स्वामी ने कहा कि भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने के करीब भी नहीं है। बता दें कि पीएम मोदी ने भारत को 2024-25 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा है।

इस शो के दौरान स्वामी को सिब्बल को अर्थव्यवस्था के बारे में कुछ बुनियादी बातें सिखानी चाहिए थीं। सिब्बल ने जोर देकर कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था खराब है, क्योंकि देश में प्रति व्यक्ति जीडीपी की संख्या कम है। इसके लिए सिब्बल ने ब्राजील और इंडोनेशिया का उदाहरण देते हुए कहा कि इन देशों में भारत के मुकाबले प्रति व्यक्ति जीडीपी अधिक है।

उन्होंने कहा कि देश में प्रति व्यक्ति जीडीपी संख्या कम होने से निवेश करने के लिए पैसा नहीं है। इस पर स्वामी ने उन्हें समझाते हैं कि अर्थव्यवस्था को प्रति व्यक्ति नहीं, बल्कि कुल सकल घरेलू उत्पाद संख्या में मापा जाना चाहिए। स्वामी ने आगे बताया कि निवेश को मापने के लिए प्रति व्यक्ति नहीं, बल्कि जीडीपी को लेना होगा।

हालाँकि, इसके बाद भी स्वामी ने मोदी सरकार पर हमला जारी रखा और दावा किया कि मौजूदा सरकार में कोई भी अर्थशास्त्र के बारे में कुछ भी नहीं समझता है। उन्होंने दावा किया कि मंत्रियों को कुछ नहीं पता, सब कुछ नौकरशाह ही चलाते हैं और मंत्री सिर्फ फाइलों पर दस्तखत करते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि पीएमओ के पास एक अधिकारी है, जिन्होंने साल 1972 में लंदन से विकासात्मक अर्थशास्त्र की पढ़ाई की है, लेकिन ये अब प्रासंगिक नहीं है। स्वामी ने दावा किया कि सरकार के पास कुछ अच्छे आर्थिक सलाहकार थे, लेकिन उनमें से ज्यादातर चले गए, क्योंकि सरकार ने उनकी बात नहीं सुनी। स्वामी ने सरकार के जारी जीडीपी आँकड़ों पर भी सवाल उठाया।

उन्होंने कहा कि वह इस बारे में ‘द हिंदू’ में लिख रहे हैं, लेकिन कोई उन्हें नहीं पढ़ता है। स्वामी ने कहा कि नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह ने भारतीय अर्थव्यवस्था को बदल दिया और ऐसा परिवर्तन अब नहीं हो रहा है। स्वामी ने यह भी कहा कि मनमोहन सिंह को भारतीय अर्थव्यवस्था पर उनके काम के लिए उचित श्रेय नहीं मिलता है। मौजूदा सरकार को सिर्फ राजनीति की फिक्र है, अर्थव्यवस्था की नहीं।

शो में सिब्बल और स्वामी दोनों के इस निष्कर्ष पर पहुँचने के बाद कि मोदी सरकार अर्थव्यवस्था नहीं चला सकती, दोनों एक-दूसरे को वित्त मंत्री बनाने की सिफारिश करने लगे। स्वामी ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था चीन सहित कई अन्य प्रमुख देशों के मुकाबले में बेहतरीन बनावट में है और हम इसमें बदलाव ला सकते हैं।

इस पर सिब्बल ने कहा, “अगर हमारे पास आप जैसे लोग हों तो हम ये कर सकते हैं।” इस पर स्वामी ने तुरंत जवाब दिया, “या आप भी।” स्वामी ने दावा किया कि सिब्बल कानून जानते हैं, इसलिए वह भारतीय अर्थव्यवस्था को बदलने के काबिल हैं। उन्होंने दावा किया कि राजस्व में राज्यों की हिस्सेदारी कम हो गई है, क्योंकि अब सारा कर केंद्र वसूलता है।

स्वामी और सिब्बल ने ये भी दावा किया कि सरकार राजनीतिक वजहों से कर संग्रह पर एकाधिकार रख रही है। जब सिब्बल ने स्वामी से पूछा कि अगर उन्हें 2024 में सत्ता मिलती है तो वे क्या करेंगे तो स्वामी ने जवाब दिया कि वह आयकर खत्म कर देंगे और फिर ब्याज दरें कम कर देंगे। आखिर में स्वामी ने कहा, “आपको और मुझे सरकार में होना चाहिए।” फिर सिब्बल ने यह कहकर हँसते हैं कि ये असंभव लगता है।

उत्तराखंड सरकार का ‘लैंड जिहाद’ पर प्रहार, खाली कराई 5000 एकड़ जमीन: CM धामी बोले – भगवान राम की कृपा, देवभूमि का मूल स्वरूप बनाए रखेंगे

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार (29 दिसंबर, 2023) को कहा कि प्रदेश में 5000 एकड़ से अधिक की ‘लैंड जिहाद’ के जरिए हड़पी भूमि को उनकी सरकार ने मुक्त कराया है और आगे भी उनकी कोशिशें जारी रहेंगी। दरअसल, दिल्ली के IP एक्सटेंशन में एक ‘राम कथा’ में भाग लेने के दौरान उन्होंने ये खुलासा किया।

सीएम धामी ने कहा, “देवभूमि के अंदर हमने बहुत सारे चुनौतीपूर्ण और कठिन काम उन पर भी भगवान राम की कृपा से हमने निर्णय लिया है कि हम उस पर आगे बढ़ेंगे। कठोर निर्णय लेने से भी हम पीछे नहीं हटेंगे। हमने कठोर निर्णय लिए हैं फिर चाहे वो अतिक्रमण का मामला हो क्यों न हो।”

उन्होंने आगे कहा कि आपने ने देखा होगा राज्य के अंदर आज 5 हजार एकड़ से भी ज्यादा जमीन जो ‘लैंड जिहाद’ के तौर पर अतिक्रमण की गई थी उसे अतिक्रमण से मुक्त कराने का काम हमने किया है। प्रदेश के अंदर जो ‘लैंड जिहाद’ चलता था उस लैंड जिहाद से मुक्ति का काम हमने प्रारंभ किया है।”

इस दौरान सीएम धामी ने ये भी कहा कि इस सबके साथ-साथ देव भूमि का जो मूल स्वरूप है। जिसके लिए देव भूमि जानी जाती है। देवभूमि का वो मूल स्वरूप बना रहे उसके लिए हम यथा संभव हर कोशिश, हर प्रयत्न कर रहे हैं।

बताते चलें कि उत्तराखंड में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण की बार-बार शिकायतों के बाद सीएम धामी ने राज्य पुलिस और वन विभाग को सभी अवैध संरचनाओं की पहचान करने का निर्देश दिया था।

इस दौरान सीएम धामी ने कहा कि धर्म की राह पर चलने जीवन में कोई दुविधा नहीं रहती है। उन्होंने कहा कि राज्य के मुख्यसेवक के तौर पर धर्म के मार्ग पर चलते हुए वो जो भी फैसले लेते हैं वो खुद ही समाज हित में सही हो जाते हैं।

राज्य सरकार के मुहैया कराए गए आँकड़ों के मुताबिक, मई 2023 तक राज्य के अधिकारियों ने लैंड जिहाद के जरिए अतिक्रमण की गई कुल 3,793 ऐसी जगहों की पहचान की थी। इस तरह के अतिक्रमण के सबसे अधिक मामले नैनीताल जिले में पाए गए। इस जिले में 1,433 से अधिक जगहों पर अतिक्रमण पाया गया था।

वहीं उसके बाद 1,149 अतिक्रमण हरिद्वार जिले में पाए गए। चमोली में 423 अवैध ढाँचे पाए गए थे। वहीं राज्य के अन्य जिलों में जिनमे टेहरी (209), अल्मोड़ा (192) और चंपावत (97) शामिल हैं। अधिकांश अतिक्रमण वन भूमि पर थे। इस साल की शुरुआत में अतिक्रमण विरोधी अभियान शुरू होने के बाद से, राज्य में करीब 500 ‘मजारों’ और लगभग 50 मंदिरों को ध्वस्त कर दिया गया है।

कनाडा का एक और खालिस्तानी लखबीर सिंह लांडा को भारत ने किया आतंकी घोषित, 2022 आरपीजी हमले का है मास्टरमाइंड

कनाडा का एक और खालिस्तानी भारत सरकार की तरफ से आतंकवादी करार दिया गया है। सरकार ने बब्बर खालसा इंटरनेशनल (बीकेआई) के सदस्य और गैंगस्टर लखबीर सिंह लांडा को गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत उसे आतंकी घोषित किया है। लांडा पर भारत में हत्या, हत्या के प्रयास सहित दर्जनों मामले दर्ज हैं।

गृह मंत्रालय ने शुक्रवार (29 दिसंबर 2023) को एक अधिसूचना जारी कर इस फैसले के बारे में जानकारी दी है। इसके मुताबिक, 33 साल का लांडा कनाडा में रह रहा है और वह पाकिस्तान से भारत में तस्करी किए जाने वाले हथियारों और इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) की निगरानी करने वाला मुख्य कर्ताधर्ता है।

उसके खिलाफ पहले से ही एनआईए ने कई मामले दर्ज किए हैं। वह मोहाली में पंजाब पुलिस के खुफिया मुख्यालय पर 9 मई 2022 को हुए रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड (आरपीजी) हमले का मास्टरमाइंड है। इस केस में लांडा के खिलाफ पंजाब पुलिस और राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने केस दर्ज किया है।

गृह मंत्रालय के मुताबिक, लांडा के कनाडा के खालिस्तान समर्थक तत्वों (PKEs) के साथ भी नजदीकी रिश्ते हैं। इसके सदस्यों में खालिस्तान टाइगर फोर्स (KTF) का मारा गया आतंकी हरदीप सिंह निज्जर शामिल है। इसके अलावा, सिख फॉर जस्टिस के आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू और कई खालिस्तानियों से भी इसके रिश्ते हैं।

कौन है लांडा

लांडा पंजाब के तरनतारन जिले के हरिके का मूल निवासी है। खुफिया एजेंसी के मुताबिक, फिलहाल वो कनाडा के अल्बर्टा में छिपा है। NIA ने लांडा के खिलाफ साल 2021 रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था। गृह मंत्रालय के मुताबिक, लांडा पंजाब में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए सीमा पार से कई आतंकी मॉड्यूलों को IED, हथियार, विस्फोटकों आदि की आपूर्ति करता है।

साल 2017 में कनाडा फरार हुए लखबीर सिंह लांडा के सिर एनआईए ने ईनाम का ऐलान भी कर रखा है। एनआईए ने इस साल सितंबर महीने में बब्बर खालसा इंटरनेशनल के आतंकी लखबीर सिंह लांडा और पाकिस्तान में छिपकर बैठे हरविंदर सिंह रिंदा समेत पाँच आतंकवादियों के बारे में जानकारी देने वालों को नकद पुरस्कार देने का ऐलान किया था।

एजेंसी ने लांडा और रिंदा के बारे में जानकारी देने के लिए 10 लाख रुपए के ईनाम का ऐलान किया था। इसके अलावा, परमिंदर सिंह कैरा उर्फ पट्टू, सतनाम सिंह उर्फ सतबीर सिंह और यादविंदर सिंह के सिर पर 5-5 लाख रुपए का इनाम रखा गया है। ये सब लांडा के सहयोगी हैं। बताते चलें कि लांडा से पहले गुरपतवंत सिंह पन्नू को भारत सरकार ने साल 2020 में ‘आतंकवादी’ घोषित किया था।

अयोध्या वालों की इज्जत बचाने को वासुदेव गुप्ता ने दिया बलिदान, पति ने त्यागे प्राण तो पत्नी उतर गईं कारसेवा में: बेटा भी दे रहा रामजन्मभूमि ट्रस्ट में सेवा

अयोध्या में भगवान राम की जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का काम जोरों पर है। 22 जनवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में यहाँ मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। इस अवसर को लेकर देश भर में अभी से भक्तिभाव से सराबोर हर्ष और उल्लास का माहौल है। हालाँकि, इसी समय हिन्दू समाज को वो रामभक्त भी याद आ रहे हैं, जिन्होंने मुगलकाल से मुलायम काल तक रामजन्मभूमि के लिए अपने प्राणों का बलिदान कर दिया। इन्हीं में एक थे अयोध्या के रहने वाले वासुदेव गुप्ता, जिन्हें 30 अक्टूबर 1990 को मुलायम सिंह के आदेश पर गोली मार दी गई थी। ऑपइंडिया ने 28 दिसंबर 2023 को दिवंगत वासुदेव गुप्ता के परिवार से उनके वर्तमान हालातों को जाना।

घोर आर्थिक तंगी से जूझ रहा परिवार

वासुदेव गुप्ता अपने परिवार को पालने के लिए अयोध्या के नयाघाट क्षेत्र में मिठाई की दुकान चलाते थे। इसी दुकान से उनकी पत्नी, 3 बेटियों और 2 बेटों का गुजारा चलता था। फिलहाल पड़ोसियों द्वारा किए गए मुकदमों आदि के चलते वह दुकान अब टूट चुकी है और उसका मलबा उनके नए घर में पड़ा है। वासुदेव गुप्ता के आश्रितों का नया घर 2 कमरों का है। जब ऑपइंडिया की टीम उनके परिवार में पहुँची तब घर के आसपास मलबा बिखरा पड़ा था। साथ ही कमरों के अंदर बर्तन आदि बिखरे पड़े थे। वासुदेव की बेटी ने खुल कर कुछ नहीं बताया पर हालत बता रहे थे कि परिवार गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है।

बाद में पत्नी, बेटी और बेटे की भी मौत

घर के अंदर हमें दिवंगत वासुदेव की बेटी सीमा गुप्ता मिलीं। उन्होंने हमें बताया कि पिता जी के स्वर्गवास के बाद उनकी माँ, 1 बहन और 1 भाई की भी एक-एक कर के मौत हो गई। इन सभी की मृत्यु बीमारी से होना बताया गया। सीमा का यह भी कहना था कि उनके परिवार के पास इलाज के लिए अगर पर्याप्त पैसे होते तो शायद इन तीनों सदस्यों को बचाया जा सकता था। फिलहाल वासुदेव के परिवार में 2 विवाहिता बेटियाँ और 1 बेटा बचे हैं। वासुदेव के बेटे संदीप गुप्ता का विवाह हो चुका है और वो 2 बच्चों के पिता हैं।

हालात खराब देख कर रामजन्मभूमि ट्रस्ट ने दी नौकरी

वासुदेव के बेटे संदीप ने ऑपइंडिया को बताया कि पिता, माता, भाई और बहन के देहांत के बाद उनके घर पर गंभीर आर्थिक संकट आ गया था। ऐसे में गुप्ता परिवार की सुध विश्व हिन्दू परिषद और रामजन्मभूमि ट्रस्ट ने ली। संदीप को ट्रस्ट ने रामजन्मभूमि के लॉकर विभाग में नौकरी दे रखी है। यह नौकरी VHP पदाधिकारी चम्पत राय के निर्देश पर मिली। संदीप का वेतन यहाँ बेहद सामान्य है लेकिन परिजनों का कहना है कि जहाँ कुछ भी नहीं था वहाँ इतना ही घर चलाने के लिए छोटे से सहारे के तौर पर है। हालाँकि वासुदेव की बेटी सीमा गुप्ता ने उम्मीद जताई कि आज नहीं तो कल हिन्दू समाज और वर्तमान सरकार उनके परिवार की दशा सुधारने में मददगार होंगे।

गुप्ता परिवार

वासुदेव का अधूरा काम उनकी पत्नी ने पूरा किया

सीमा गुप्ता ने हमें बताया कि उनकी माँ शकुंतला गुप्ता भी अपने पति की तरह भगवान राम की भक्त थीं। पति की मौत के बाद उन्होंने परिवार चलाने के लिए कपड़े की दुकान खोली। इसी की कमाई से उन्होंने 1 बेटे और 2 बेटियों का ब्याह किया। सीमा के मुताबिक, साल 1992 में जब विवादित ढाँचा ध्वस्त हुआ था तब उनकी माँ भी कई महिलाओं को लेकर घटनास्थल पर मौजूद थीं। बकौल सीमा, इस दौरान उनकी माँ ने कई घायल कारसेवकों का अपने स्तर पर इलाज भी किया था।

6 दिसंबर 1992 को कारसेवा करतीं वासुदेव गुप्ता की पत्नी शकुंतला (भगवा साडी में)

लाश भी नहीं दे रहे थे अंतिम संस्कार के लिए

सीमा गुप्ता अपने पिता को याद करके भावुक हो गईं। उन्होंने बताया कि जब 1990 में उनके पिता को गोली लगी तब वो महज 7 साल की थीं, लेकिन उनको तमाम बातें याद हैं। सीमा ने बताया कि उनकी माँ को अपने पति की लाश पाने के लिए भी काफी संघर्ष करना पड़ा था, क्योंकि पोस्टमार्टम के बाद वासुदेव का शव देने में आनाकानी की जा रही थी। हालाँकि, इस दौरान हिन्दू संगठनों ने कड़ा विरोध किया, जिसके चलते मुलायम सरकार के प्रशासन को झुकना पड़ा।

वासुदेव गुप्ता का शव पोस्टमार्टम के बाद

अयोध्या वालों की इज्जत बचाने निकले थे वासुदेव

वासुदेव गुप्ता मूलतः अयोध्या के ही निवासी थे। उनकी बेटी ने हमें आगे बताया कि उनके पिता बजरंग बली के परम भक्त थे। जब राम मंदिर मुक्ति आंदोलन चला तब देश के विभिन्न हिस्सों से रामभक्त अयोध्या पहुँच रहे थे। इसी दौरान वासुदेव गुप्ता ने अपने परिवार से कहा कि अगर वो न निकले तो अयोध्यावासी क्या मुँह दिखाएँगे। सीमा ने बताया कि पापा ने कहा कि अयोध्या में रहने वालों पर भविष्य में हँसा जाएगा कि वो घरों से बाहर नहीं निकले। आखिरकार वासुदेव एक जत्थे के साथ निकले और उनके पेट व कमर में 3 गोलियाँ लगीं। वासुदेव के प्राण मौके पर ही निकल गए थे। वासुदेव का शव रामजन्मभूमि के पास ही रामकोट पर पड़ा मिला था।

इस हालत में मिला था वासुदेव गुप्ता का शव

हिज्बुल मुजाहिदीन के नाम से मिली धमकी

सीमा गुप्ता ने हमें आगे बताया कि उनके पिता के स्वर्गवास के लगभग 1-2 साल बाद उनके घर एक धमकी भरा खत आया था। उर्दू शब्दों में लिखे गए इस 3 पेज के खत में हिजबुल मुजाहिद्दीन की मुहर लगी हुई थी। पत्र में कई धमकियों के साथ लिखा गया था, “‘एक को भेज चुकी हो, दूसरे को संभाल कर रखना। सरयू नदी को ‘शरीफा नदी’ और अयोध्या को ‘अयूबाबाद’ बनाया जाएगा।” तब वासुदेव गुप्ता की पत्नी शकुंतला ने इस धमकी की शिकायत प्रशासन से की थी।

राम मंदिर बना पिता का सपना साकार हुआ

वासुदेव गुप्ता का परिवार भगवान राम का मंदिर बनने से बेहद खुश है। उनके बेटे संदीप और बेटी सीमा ने बताया कि राम मंदिर बनने के बाद उनके स्वर्गवासी पिता का सपना साकार हो गया है। वासुदेव के परिजन यह भी चाहते हैं कि इस मंदिर के साथ उनके पिता और अन्य बलिदान हुए रामभक्तों के इतिहास को याद किया जाए। सीमा गुप्ता को आशा है कि उनके पिता की स्मृति बरकरार रखने के लिए वर्तमान सरकार वासुदेव गुप्ता के नाम का एक स्मारक जरूर बनवाएगी।

सन 1990 के अख़बारों में वासुदेव गुप्ता का जिक्र

ऑपइंडिया की टीम दिसंबर 2023 के अंतिम सप्ताह से अयोध्या में है। यहाँ से हम आपको न सिर्फ रामजन्मभूमि आंदोलन के गुमनाम बलिदानी, विस्मृत घटनाएँ बल्कि अयोध्या के कई अनसुने लेकिन पवित्र स्थानों के बारे में विस्तार से बताएँगे। इस कड़ी की दूसरी खबर जल्द ही प्रकाशित होगी।

असम में बड़ी सफलता, ULFA के साथ त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर, राज्य के 85% हिस्सों से हटी AFSPA: 9000+ कैडरों का आत्मसमर्पण

पूर्वोत्तर के सबसे अहम राज्य असम में स्थाई शांति स्थापित करने में जुटी मोदी सरकार को बड़ी सफलता प्राप्त हुई है। असम में विद्रोह का झंडा उठाए उल्फा (यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम) का केंद्र सरकार और असम की राज्य सरकार के साथ समझौता हो गया है। इसी के साथ उल्फा के 750 कैडर ने हथियार डाल दिए हैं। वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि अब असम के 85 प्रतिशत हिस्से से अफस्पा कानून को हटा दिया गया है।

असम में उल्फा और केंद्र सरकार के बीच समझौता

शुक्रवार (29 दिसंबर 2023) को नई दिल्ली में केंद्र सरकार, असम सरकार और उल्फा के बीच एक त्रिपक्षीय समझौता हुआ। इस समझौते के तहत उल्फा ने अपने सभी हथियार और गोला-बारूद सरकार को सौंप दिए। उल्फा के 750 कैडर ने भी हथियार डाल दिए। अब तक उल्फा के 9000 से अधिक कैडर हथियार डाल चुके हैं। इस समझौते के साथ असम में दशकों पुराने उग्रवाद के खत्म होने की उम्मीद है।

गृहमंत्री अमित शाह ने कही ये बात

इस अवसर पर अमित शाह ने कहा कि आज (29 दिसंबर 2023) असम के लिए एक सुनहरा दिन है, जब लंबे समय से हिंसा का दंश झेल रहे नॉर्थ ईस्ट और असम में शांति स्थापित होने जा रही है। उन्होंने कहा कि 2014 में पीएम मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से दिल्ली और नॉर्थ ईस्ट के बीच की दूरी कम करने के प्रयास हुए और खुले मन से सबके साथ बातचीत की शुरुआत हुई।

उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उग्रवाद, हिंसा और विवाद-मुक्त नॉर्थ ईस्ट की परिकल्पना लेकर गृह मंत्रालय ने काम किया। उन्होंने कहा कि पूरे नॉर्थ ईस्ट में पिछले 5 वर्षों में विभिन्न राज्यों के साथ शांति और सीमा संबंधित 9 समझौते हुए हैं, जिनके कारण आज नॉर्थ ईस्ट के बड़े हिस्से में शांति की स्थापना हुई है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आज तक 9,000 से अधिक कैडर ने सरेंडर किया है और असम के 85 प्रतिशत हिस्से से AFSPA को हटा लिया गया है। उन्होंने कहा कि आज भारत सरकार, असम सरकार और उल्फा के बीच हो रहे त्रिपक्षीय समझौते से पूरे असम के सभी हिंसक गुटों को समाप्त करने में मोदी सरकार को सफलता मिली है। यह समझौता असम और पूरे नॉर्थ ईस्ट में शांति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि इस के समझौते के तहत, उल्फा प्रतिनिधियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ने, सभी हथियार डालने और अपने सशस्त्र संगठन को खत्म करने पर सहमति व्यक्त की है। इसके अलावा उल्फा अपने सशस्त्र कैडरों के कब्जे वाले सभी शिविरों को खाली करने, कानून द्वारा स्थापित शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल होने और देश की अखंडता को बनाए रखने पर भी सहमत हुआ है।

अकेले असम में 8200 से ज्यादा कैडर कर चुके हैं आत्मसमर्पण

अमित शाह ने कहा कि उल्फा संघर्ष में दोनों पक्षों के लगभग 10 हज़ार लोग मारे गए, जो इस देश के ही नागरिक थे, लेकिन आज इस समस्या का संपूर्ण समाधान हो रहा है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने एक बहुत बड़े पैकेज और असम के विकास के प्रोजेक्ट्स को भी सहमति दी है। मोदी सरकार समझौते की हर बात पर पूरी तरह अमल करेगी और इस पर खरी उतरेगी।

शाह ने कहा कि 2014 में मोदी सरकार आने के बाद असम में हिंसक घटनाओं में 87 प्रतिशत, मृत्यु में 90 प्रतिशत, अपहरण में 84 प्रतिशत की कमी आई है। इसके साथ ही सिर्फ असम में अब तक 7500 कैडर ने सरेंडर किया है, जिसमें आज 750 और जुड़ जाएँगे। इस प्रकार अकेले असम में में 8200 से अधिक कैडर द्वारा आत्मसमर्पण किया जाना असम के लिए शांति के नए युग का सूत्रपात है।

पीएम मोदी के विजन की वजह से संभव हुए कई समझौते

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार ने 2019 में एनएलएफटी, 2020 में ब्रू, बोड़ो, 2021 में कार्बी, 2022 में आदिवासी समझौता, असम-मेघालय सीमा समझौता, 2023 में असम-अरूणाचल सीमा समझौता और यूएनएलएफ और अब उल्फा के साथ समझौता किया है। उन्होंने कहा कि आज इस समझौते के साथ ही पूरे नॉर्थ ईस्ट और विशेषकर असम के लिए शांति के नए युग की शुरूआत होने जा रही है।

अमित शाह ने कहा कि भारत सरकार का गृह मंत्रालय उल्फा की माँगों को पूरा करने के लिए एक समयबद्ध कार्यक्रम बनाएगा और इसकी मॉनीटरिंग के लिए एक समिति भी बनाई जाएगी, जो असम सरकार के साथ मिलकर समझौते को पूरा करने का प्रयास करेगी। गृहमंत्री शाह ने कहा कि 2019 के बाद हुए सभी समझौतों में मोदी सरकार समय से आगे है और समय से पहले ही सभी शर्तों को पूरा करने का प्रयास किया गया है। गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के उग्रवाद-मुक्त नॉर्थ ईस्ट के ब्रॉडर विज़न के बिना ये संभव नहीं था।

‘मेरा किया वादा मुझे सोने नहीं देता…’: PM ने ‘मोदी की गारंटी’ का समझाया अर्थ, इंटरव्यू में कहा- सिर्फ हिंदी पट्टी की पार्टी नहीं BJP, अब देश के हर कोने में मौजूद

हाल ही में संपन्न हुए पाँच राज्यों के विधानसभा चुनावों में ‘मोदी की गारंटी’ को लेकर भाजपा चुनावी मैदान में थी। इसके अच्छे नतीजे भी देखने को मिले। भाजपा को तीन राज्यों- राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में जबरदस्त बहुमत मिला और वहाँ सरकार बनी। मोदी की गारंटी क्या है और इन राज्यों में नए चेहरों को क्यों कमान सौंपी गई, लेकर पीएम मोदी ने अपनी बात रखी है।

इंडिया टुडे ग्रुप के एडिटर-इन-चीफ तथा चेयरपर्सन अरुण पुरी, वाइस-चेयरपर्सन कली पुरी और ग्रुप एडिटोरियल डायरेक्टर राज चेंगप्पा से खास बातचीत में पीएम पीएम मोदी ने राजनीति लेकर अर्थनीति तक, विकास से लेकर विश्वास तक, हर मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रखी। प्रधानमंत्री का विस्तृत इंटरव्यू इंडिया टुडे के आगामी अंक में प्रकाशित किया जाएगा। हालाँकि, सामने आए इसके प्रमुख अंश में पीएम मोदी कई मुद्दों पर बातें कीं।

पीएम मोदी ने समझाया ‘मोदी की गारंटी’ का मतलब

‘मोेदी की गारंटी’ को लेकर पूछे गए एक सवाल पर पीएम मोदी ने कहा कि गारंटी का मतलब सिर्फ बोलना नहीं है, बल्कि इसके साथ बँध जाना होता है। उन्होंने कहा, “मेरा किया वादा मुझे सोने नहीं देता, बल्कि कड़ी मेहनत के लिए प्रेरित करता है। मोदी की गारंटी का मतलब गरीबों का विश्वास है। देश का हर गरीब जानता है कि मोदी अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटेगा।”

पीएम मोदी ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों ने गरीबों का विश्वास तोड़ा है, लेकिन उन्हें विश्वास है कि ‘मोदी की गारंटी’ कभी नहीं टूटेगी। उन्होंने कहा, “यही विश्वास मुझे प्रेरणा देती है। इसके लिए मैं जी-जान से काम करता हूँ और गारंटी को पूरा करता हूँ। ये कोई शब्द या चुनावी वादा नहीं है, बल्कि मेरी दशकों की कड़ी मेहनत है। समाज के प्रति संवेदनशीलता की अभिव्यक्ति है।”

राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में नए चेहरों को क्यों सौंपी कमान?

पीएम मोदी से जब राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में तीन नए चेहरों को मुख्यमंत्री बनाने पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने इसे सीधे-सीधे खुद से जोड़ दिया। पीएम मोदी ने कहा, “जब मैं गुजरात का मुख्यमंत्री बना था तो मेरा कोई प्रशासनिक अनुभव नहीं था। मैं तो विधानसभा तक के लिए नहीं चुना गया था। इसे भले ही लोग नया ट्रेंड मान रहे हों, क्योंकि परिवारवादी पार्टियों में लोग परिवार के बाहर कुछ सोच ही नहीं पाते, पर हमारी पार्टी अलग-अलग प्रयोग करने की अभ्यस्त है।”

पीएम मोदी ने कहा कि लोकतंत्र में नई पीढ़ियों और नए खून को अवसर देना बहुत जरूरी है। यही लोकतांत्रिक मंथन ही लोकतंत्र को जीवंत बनाता है, जबकि परिवारवादी पार्टियों को यह लोकतांत्रिक मंथन कठिन लगता है। उन्होंने कहा, “हमारी पार्टी के कार्यकर्ताओं को यह भरोसा है कि वो भी मेहनत के दम पर ऊपर उठ सकते हैं। हमारी पार्टी कैडर बेस्ड पार्टी है और हमारे यहाँ ऐसे ही काम होता है।”

आर्टिकल 370 और जम्मू-कश्मीर में बदलाव

पीएम मोदी से इस इंटरव्यू में आर्टिकल 370 के खात्मे और जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक बदलाव को लेकर भी सवाल पूछे गए। इस पर पीएम मोदी ने कहा, “कभी नेहरू जी ने संसद में कहा था कि आर्टिकल 370 घिसते-घिसते खत्म हो जाएगी, लेकिन 70 दशकों तक इसने जम्मू-कश्मीर को थाम कर रखा। जम्मू-कश्मीर में महिलाओं, गरीबों, अल्पसंख्यकों को वंचित रखा गया। अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोग अपना भविष्य बनाने के लिए स्वतंत्र हो गए हैं।”

उन्होंने कहा कि आर्टिकल 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर पर भारत का संविधान पूरी तरह से लागू हो गया, जो समानता की बात करता है। आज आतंकवाद निचले स्तर पर पहुँच गया है और पर्यटन रिकॉर्ड ऊँचाइयाँ छू रहा है। उन्होंने जी-20 की बैठक का भी उदाहरण दिया, जो जम्मू-कश्मीर में आयोजित की गई थी। उन्होंने कश्मीर में स्थाई शांति लाने के उपायों के बारे में भी बताया।

पीएम मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा, विकास, इंफ्रा में निवेश और सरकारी प्रक्रियाओं का पुनर्गठन कर रही है। संसद में जम्मू-कश्मीर का प्रतिनिधित्व था, लेकिन आर्टिकल 370 हटने के बाद लोकतंत्र को हर कश्मीरी तक पहुँचाया जा रहा है। अब त्रिस्तरीय पंचायतीराज व्यवस्था लागू की गई है। जमीन से जुड़े 35 हजार नेता लोगों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

बीजेपी आज देश के हर कोने में मौजूद

इस इंटरव्यू में पीएम मोदी ने बीजेपी को हिंदी पट्टी की पार्टी बोलने वालों को आईना दिखाया है। उन्होंने कहा, “बीजेपी के बनने के बाद से हम ये बातें सुन रहे हैं। कभी ब्राह्मण-बनिया पार्टी भी कहा गया, तो कभी कहा गया कि हमें सिर्फ शहरों में समर्थन मिलता है। कभी हमें हिंदी पट्टी की पार्टी कहा गया, लेकिन हमने सबको गलत साबित कर दिया है। आज बीजेपी देश के हर कोने में मौजूद है।”

उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, “केरल के स्थानीय निकायों में बीजेपी प्रमुख विपक्षी पार्टी है। बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड में बीजेपी प्रमुख विपक्षी दल है। 6 माह पहले तक कर्नाटक में हमारी सरकार थी। पुदुचेरी में बीजेपी की सरकार है। देश के 16 राज्यों में बीजेपी की सरकारें हैं, तो 8 राज्यों में हम मुख्य विपक्षी दल हैं। पूर्वोत्तर के 6 राज्यों में हमारी सरकार है।”

प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा, “यहाँ तक कि लोकसभा के नजरिए से देखें तो दक्षिण भारत में हम सबसे बड़ी पार्टी हैं। दो लोकसभा सीटों की विनम्र शुरुआत से अब 303 तक की हमारी यात्रा पर विचार कीजिए। बीजेपी कैडर बेस्ड पार्टी है। अकेले उनकी हमारी मेहनत से सफलता नहीं मिली, बल्कि बीजेपी को आगे ले जाने में हर कार्यकर्ता ने अपना योगदान दिया है।”

पीएम मोदी ने समझाई बुनियादी ढांचे में निवेश से रोजगार बढ़ने की बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नौकरियों और रोजगार को लेकर पूछे गए सवाल पर कहा कि भाजपा सरकार का लक्ष्य रोजगार सृजन है। जो कई तरीकों से होता है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने बुनियादी ढाँचे में सबसे ज्यादा 10 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया है। साल 2013-14 में ये आँकड़ा महज 1.9 लाख करोड़ रुपए का था। इस निवेश से मेट्रो लाइन की लंबाई 248 किमी से बढ़कर 905 किमी हो गईं, क्या इससे नौकरियाँ पैदा नहीं हुईं?

पीएम मोदी ने कहा, “इन 10 सालों में एयरपोर्ट की संख्या 74 से बढ़कर 149 हुई, क्या इससे नौकरियाँ नहीं बढ़ीं? मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 706 हुई, क्या इससे नौकरियों का सृजन नहीं हुआ? साल 2014 की तुलना में सड़कों का दोगुना निर्माण हुआ। पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। कृषि पैदावार बड़ी है। क्या इससे रोजगार नहीं बढ़ा?”

उन्होंने बेरोजगारी के सवाल पर भी अपनी बात रखी। प्रधानमंत्री ने कहा, बेरोजगारी दर साल 2018-19 में 5.8 थी, जो अब 3.2 प्रतिशत रह गई है। उन्होंने सवालिया लहजे में पूछा कि ‘आँकड़े क्या बताते हैं’? उन्होंने कहा, “31 मार्च 2014 को ईपीएफओ से 11.78 करोड़ लोग ही जुड़े थे। अब 27.74 करोड़ लोग ईपीएफओ से जुड़े हैं। क्या ये आँकड़े रोजगार से नहीं जुड़े हैं?”

5 ट्रिलियन इकॉनमी का टारगेट एकदम हकीकत, हम हासिल कर के रहेंगे

पीएम मोदी ने इकॉनमी को लेकर कहा कि साल 2014 में जब भाजपा की सरकार आई तो भारत की अर्थव्यवस्था 20 खरब डॉलर यानी कि 167 लाख करोड़ रुपए की थी। अब ये आँकड़ा लगभग दोगुना होकर 37.5 खरब डॉलर यानी 312 लाख करोड़ रुपए का हो गया है। उन्होंने कहा कि अब तक की सबसे बड़ी महामारी के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था सँभली हुई है और आगे बढ़ रही है।

गुजरात का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, “जब 2001 में मैं गुजरात का सीएम बना तो गुजरात की इकॉनमी 26 अरब डॉलर यानी 2.17 लाख करोड़ रुपए की थी। जब मैंने गुजरात छोड़ा, तब तक ये बढ़कर 133.5 अरब डॉलर (11.1 लाख करोड़ रुपए) पहुँच चुकी थी और अब ये लगभग 260 अरब डॉलर की है। 23 सालों का ये रिकॉर्ड ही बताता है कि हम किस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।”

पीएम मोदी ने विपक्ष के महंगाई के आरोपों से जुड़े सवाल पर कहा कि दुनिया भर में महंगाई बढ़ी है। इसके बावजूद 2014-15 और 2023-24 के बीच औसतन महंगाई महज 5.1 प्रतिशत रही, जबकि 2004-2014 के बीच ये दर 8.2 प्रतिशत रही थी। उन्होंने कहा कि कोरोना के समय वैश्विक सप्लाई चेन नष्ट हो गया था। पूरी दुनिया में तनाव फैला हुआ है। मंदी का दबाव है, फिर भी भाजपा सरकार महंगाई पर लगाम लगाए हुए है।