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अभिनेत्री रश्मिका मंदाना से लेकर कई हस्तियाँ हो चुकी हैं DeepFake की शिकार: जानिए ये AI तकनीक कितनी चिंताजनक और इससे बचाव के लिए क्या हैं उपाय

DeepFake तकनीकी ‘डीप लर्निंग’ और ‘नकली’ का एक संयोजन है, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) में एक अत्याधुनिक सीमा का प्रतिनिधित्व करता है। यह अति-यथार्थवादी छवियों, वीडियो या ऑडियो रिकॉर्डिंग में हेरफेर करने या उत्पन्न करने के लिए परिष्कृत एल्गोरिदम और तंत्रिका नेटवर्क का उपयोग करता है। शुरुआत में मनोरंजन उद्योग में रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए एक उपकरण के रूप में उभरते हुए डीपफेक ने एक गहरा मोड़ ले लिया है।

दुर्भावनापूर्ण कुछ शरारती लोग इस तकनीक की शक्ति का उपयोग धोखा देने, हेरफेर करने और गलत सूचना फैलाने के लिए कर रहे हैं। राजनेताओं से लेकर मशहूर हस्तियों तक को इसके जरिए निशाना बनाया जा रहा है। इसके संभावित लक्ष्य बहुत बड़े हैं, जो गोपनीयता, प्रतिष्ठा और यहाँ तक कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं एवं अखंडता तक के लिए खतरा पैदा करते हैं।

डीपफेक के दुरुपयोग से निपटने के प्रयासों में उन्नत पहचान उपकरण, कानूनी ढाँचे का विकास और सार्वजनिक जागरूकता जरूरी है। जैसे-जैसे समाज डीपफेक तकनीक से उत्पन्न नैतिक और सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है, वैसे-वैसे इसे रोकने को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। हालाँकि, इस तकनीकी हथियार की दौड़ में आगे रहने की दौड़ जारी है, जिसका लक्ष्य नवाचार और इसके अनपेक्षित परिणामों के खिलाफ सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना है।

डीपफेक तकनीक से बढ़ते खतरे के जवाब में दुनिया भर की सरकारें एआई-जनित सामग्री के दुरुपयोग को रोकने के लिए निर्णायक कदम उठा रही हैं। विधायी निकाय स्वतंत्र अभिव्यक्ति को संरक्षित करने और व्यक्तियों, व्यवसायों और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को डीपफेक के संभावित हानिकारक प्रभावों से बचाने के लिए काम कर रहे हैं।

1. दुर्भावनापूर्ण डीपफेक निर्माण को अपराध बनाना: हाल की विधायी पहलों का उद्देश्य दुर्भावनापूर्ण इरादे से डीपफेक के निर्माण और प्रसार को अपराध बनाना है। कई देश ऐसे कानून पेश कर रहे हैं, जो प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने, गलत सूचना फैलाने या जनता की राय को प्रभावित करने के लिए डिज़ाइन की गई हेरफेर वाली सामग्री का उत्पादन या साझा करने वाले व्यक्तियों पर जुर्माना अथवा कारावास सहित कई तरह के दंड लगाते हैं। ये उपाय अपराधियों को उनके कार्यों के लिए सामाजिक परिणामों के प्रति जवाबदेह ठहराते हुए एक निवारक के रूप में तय करना है।

2. गोपनीयता संरक्षण कानून: डीपफेक तकनीक द्वारा व्यक्तिगत गोपनीयता पर आक्रमण को पहचानते हुए कानून निर्माता मौजूदा गोपनीयता सुरक्षा कानूनों में बदलाव कर रहे हैं। ये उपाय व्यक्तियों को डिजिटल मीडिया में उनकी समानता पर अधिक नियंत्रण देने पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जिसमें व्यक्तियों से जुड़े डीपफेक के निर्माण और वितरण के लिए स्पष्ट सहमति की आवश्यकता होती है। इसका लक्ष्य कानूनी सुरक्षा उपाय स्थापित करना है, जो स्वतंत्र अभिव्यक्ति के अधिकार का सम्मान करते हुए नुकसान की सँभावना को कम करता है।

3. चुनाव-विशिष्ट कानून: लोकतंत्र में खतरों पर बढ़ती चिंता के जवाब में अधिकांश देश चुनाव-विशिष्ट कानून बना रहे हैं। ये कानूनी ढाँचे राजनीतिक अभियानों के दौरान हेरफेर की गई सामग्री से उत्पन्न चुनौतियों का समाधान करते हैं। इसका उद्देश्य लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की अखंडता को सुनिश्चित करना है। इन कानूनों के प्रावधानों में अक्सर सार्वजनिक धारणा और चुनावी परिणामों पर डीपफेक के प्रभाव का प्रतिकार करने के लिए त्वरित तंत्र शामिल होते हैं।

4. कॉर्पोरेट सुरक्षा उपाय: डीपफेक के खतरों के मद्देनजर व्यापार क्षेत्र को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसने कानून निर्माताओं को कंपनियों और अधिकारियों की सुरक्षा के लिए कानूनी ढाँचे तैयार करने के लिए प्रेरित किया जाता है। ये कानून कॉर्पोरेट जासूसी, प्रतिष्ठा की क्षति और वित्तीय बाजारों पर डीपफेक तकनीक के संभावित दुष्प्रभाव जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। कानूनी उपाय मजबूत साइबर सुरक्षा प्रथाओं को लागू करने के लिए व्यवसायों की जिम्मेदारी पर जोर देते हैं और हेरफेर की गई सामग्री के उपयोग के माध्यम से निगमों का शोषण करने वालों के खिलाफ कानूनी सहारा के महत्व पर जोर देते हैं।

5. नागरिक उपचार: दुर्भावनापूर्ण डीपफेक गतिविधियों को अपराध घोषित करने के अलावा, कानून में हेरफेर के पीड़ितों को सशक्त बनाने के लिए नागरिक उपायों को चिन्हित किया जा रहा है। ये कानूनी तंत्र व्यक्तियों और व्यवसायों को उनकी समानता के दुरुपयोग या झूठी जानकारी के प्रसार से होने वाले नुकसान के लिए मुआवजे की माँग करने के साधन प्रदान करते हैं। इसके अलावा, यह दंडात्मक उपायों और क्षतिपूर्ति के रास्ते दोनों की पेशकश करती हैं।

6. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: इंटरनेट की वैश्विक प्रकृति को देखते हुए कई देश डीपफेक के दुरुपयोग से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता को पहचान रहे हैं। ऐसे समझौते और संधियाँ स्थापित करने के लिए राजनयिक प्रयास चल रहे हैं, जो डीपफेक अपराधों में शामिल व्यक्तियों की जाँच और मुकदमा चलाने में सीमा पार सहयोग की सुविधा प्रदान करते हैं। इस सहयोगात्मक दृष्टिकोण का उद्देश्य एआई-जनित सामग्री के दुरुपयोग से उत्पन्न वैश्विक चुनौतियों के खिलाफ एक एकीकृत मोर्चा बनाना है।

जैसे-जैसे डीपफेक तकनीक का विकास जारी है, वैसे-वैसे समाज की सुरक्षा के लिए कानूनी प्रतिक्रियाएँ भी विकसित होनी चाहिए। कानून नुकसान को रोकने की आवश्यकता के साथ स्वतंत्र अभिव्यक्ति को संतुलित करने की जटिलताओं से निपट रहे हैं। कठोर कानून डीपफेक से उत्पन्न चुनौतियों का समाधान करते हैं।

बताते चलें कि बॉलीवुड अभिनेत्री रश्मिका मंदाना का एक वीडियो सामने आया था। इसमें जारा पटेल नाम की एक ब्रिटिश-इंडियन इन्फ्लुएंसर के वीडियो में छेड़छाड़ करके रश्मिका का चेहरा लगा दिया गया था। जारा अक्सर अंतरंग वस्त्रों में तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड करती रहती हैं। इसके बाद रश्मिका ने दिल्ली पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसी तरह इसका शिकार अभिनेतत्री काजोल, ऐश्वर्या राय, रतन टाटा सहित कई नामचीन हस्तियाँ हो चुकी हैं।

सॉफ्टवेयर कंपनी के ‘खड़ूस बॉस’ को सेक्स चैट में फँसाया, फिर पत्नी से लेकर HR तक को भेज दी नंगी तस्वीरें: ‘टॉर्चर’ का कर्मचारियों ने लिया ‘अजीब इंतकाम’

खड़ूस बॉस से बदला लेने की ऐसी कहानी आपने शायद ही सुनी हो! गुजरात के वडोदरा में एक सॉफ्टवेयर कंपनी के बॉस से बदला लेने के लिए दो कर्मचारियों ने उसे हनीट्रैप में उलझाया। फिर उसकी नंगी तस्वीरें उसकी पत्नी से लेकर कंपनी के एचआर तक को भेज दी। तीन महीने तक टॉर्चर झेलने के बाद जब बॉस ने पुलिस से शिकायत की तो पूरे मामले का खुलासा हुआ।

पुलिस ने आईपी एड्रेस के माध्यम से हनीट्रैप का जाल बिछाने वाले लोगों का पता लगाया तो दोनों उसी कंपनी के पूर्व कर्मचारी निकले। इनमें एक महिला और एक पुरुष हैं। कथित तौर पर बॉस की प्रताड़ना से तंग आकर दोनों ने नौकरी छोड़ी थी। फिर महिला के नाम से इंस्टाग्राम पर फेक अकाउंट बनाकर बॉस को फँसाया।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार फेक अकाउंट से दोनों कर्मचारियों ने करीब चार महीने पहले बॉस के साथ सेक्स चैट शुरू किया। उसे एक वेबसाइट से डाउनलोड की गई कुछ नंगी तस्वीरें भेजी। बॉस उनके जाल में उलझ गया। उसे लगा कि वह किसी महिला के साथ चैट कर रहा है। उसने भी अपनी नंगी तस्वीरें भेज दी। इसके बाद बॉस को फेक अकाउंट से मैसेज आने बंद हो गए।

चैट बंद होने के कुछ दिन बाद बॉस को ही ईमेल पर दोनों ने उसकी नग्न फोटोज और चैट के स्क्रीनशॉट भेजे। इसके बाद कंपनी के एचआर डिपार्टमेंट को इसी तरह का ईमेल भेजा गया। यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। बॉस की पत्नी को भी उसकी नंगी तस्वीरें और चैट पहले मेल किए गए और फिर स्पीडपोस्ट के जरिए तस्वीरों का प्रिंट आउट उस दफ्तर में भेजा गया जहाँ वह काम करती है।

पुलिस के मुताबिक इंतकाम का यह प्लान बॉस की कथित डाँट के कारण नौकरी छोड़ने वाली महिला कर्मचारी ने अपने एक पुरुष सहकर्मी के साथ मिलकर बनाया था। रिपोर्ट में पीड़ित और आरोपितों की पहचान नहीं बताई गई है। पुलिस के अनुसार पीड़ित इस मामले को आगे बढ़ाने को तैयार नहीं है। हालाँकि पुलिस ने दोनों आरोपितों को सीआरपीसी 41 (ए) के तहत बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस भेजा था। वडोदरा के एसीपी (साइबर क्राइम) हार्दिक मकाडिया ने इसे कॉर्पोरेट दुश्मनी का मामला बताया है।

मदरसा की आलिमा संग ‘नेपाली’ मौलाना ने किया दुष्कर्म, बार-बार कराया गर्भपात: कर्नाटक क्राइम ब्रांच ने MP में आकर धरा

मध्य प्रदेश के खंडवा में कर्नाटक पुलिस ने एक मौलाना को गिरफ्तार किया है। उस पर आरोप है कि वो 24 साल की टीचर को नशे की गोलियाँ खिलाकर उसके साथ दुष्कर्म करता था और 2 बार उसका गर्भपात भी करवा चुका था। हाल में पीड़िता ने इस बाबत शिकायत दर्ज करवाई तो कर्नाटक पुलिस मौलाना को ढूँढते हुए खंडवा आ पहुँची। गुरुवार (28 दिसंबर 2023) को ये मौलाना पकड़ा गया।

जानकारी के अनुसार, कर्नाटक से मौलाना ने दो आलिमाओं को अहमदपुर खैगाँव रोड स्थित मदरसे में बच्चों को पढ़ाने के लिए खंडवा बुलाया था। बाद में वह साल 2020-21 में कर्नाटक के हुबली तहरीर देने गया, जहाँ उसे आलिमा मिली। इसके बाद उसने आलिमा के साथ दुष्कर्म किया और उसका दो-दो बार अबॉर्शन करवाया। फिर वापस खंडवा आ गया।

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, मौलाना नेपाली है। उसका नाम गुलाम जिलानी है। उसकी तालीम खंडवा में हुई थी और वो यहीं मदरसे में तालीम देता था। इस पूरे मामले में मौलाना के पक्ष वालों का कहना है कि आलिमा से मौलाना ने निकाह किया हुआ था। दोनों साथ रहते थे। जब झगड़ा हुआ तो वो कर्नाटक से खंडवा आया।

हालाँकि पुलिस ने जब इस संबंध में उससे निकाह के सबूत माँगे तो वो दिखाने में फेल हो गया और आलिमा की शिकायत के मद्देनजर कर्नाटक क्राइम ब्रांच ने आरोपित मौलाना को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस की 7 सदस्यीय टीम ने उसे ढूँढने के लिए खंडवा में दबिश दी थी, जिसके बाद मौलाना देर शाम पकड़ा गया। उसे पकड़कर मोघट रोड थाना पर पूछताछ की जा रही है। फिर इसे खंडवा कोर्ट में पेश किया जाएगा और ट्रांजिट रिमांड लेकर उसे कर्नाटक लेकर जाया जाएगा। इस केस में उसे छोड़कर कुछ आठ आरोपित बनाए गए हैं। वो डॉक्टर भी आरोपित बनाए गए हैं जिन्होंने पीड़िता का अबॉर्शन किया।

JDU में नीतीशे कुमार… ललन सिंह का अध्यक्ष पद से इस्तीफा: तेजस्वी यादव के भविष्य से लेकर NDA में वापसी तक की अटकलों ने पकड़ा जोर

दिल्ली में आयोजित जेडीयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में ललन सिंह ने शुक्रवार (29 दिसंबर 2023) को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपने इस्तीफे के बाद नीतीश कुमार का नाम अध्यक्ष पद के लिए प्रस्तावित किया, जिसे सभी नेताओं ने मान लिया। इसके साथ ही नीतीश कुमार ने एक बार फिर से पार्टी की कमान अपने हाथ में ले ली है।

बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के सुप्रीमो नीतीश कुमार अब तक पार्टी की कमान अपने भरोसेमंद साथियों के हाथों में देते आए हैं और वो स्वयं सत्ता चलाते रहे हैं। हालाँकि, पिछले कुछ समय से पार्टी में चल रही खींचतान को देखते हुए उन्होंने सारी ताकत अपने हाथ में ले ली है। नीतीश कुमार अब बिहार के मुख्यमंत्री के साथ ही जेडीयू का अध्यक्ष पद भी सँभालेंगे।

इस्तीफा देते हुए ललन सिंह ने कहा, “नीतीश कुमार जी के कहने पर ही मैंने राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सँभाली थी। आगे मुझे लोकसभा चुनाव लड़ना है। ऐसे में एक साथ पार्टी की जिम्मेदारी सँभालना चुनौती होगी। इसलिए मैं नीतीश कुमार जी को पार्टी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सँभालने का प्रस्ताव रखना चाहता हूँ।” हालाँकि, खबर लिखे जाने तक इसकी औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। माना जा रहा है कि बैठक खत्म होने के बाद इसकी घोषणा होगी।

जदयू नेता और बिहार सरकार में मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा, “जेडीयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होगी। अगर वे हमारे प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं तो नीतीश कुमार पार्टी अध्यक्ष होंगे। ललन सिंह ने सीएम नीतीश कुमार से कहा कि वह चुनाव में व्यस्त रहेंगे, इसलिए वह चाहते हैं पार्टी अध्यक्ष का पद उन्हें सौंप दें और नीतीश कुमार ने इसे स्वीकार कर लिया…।”

कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी की तरफ से 4 प्रस्ताव भी रखे गए, जिसमें सीट शेयरिंग पर फैसला लेने की पूरी जिम्मेदारी नीतीश कुमार पर ही छोड़ दी गई है। वो ही इंडी गठबंधन से जुड़ा हर काम देखेंगे। इस बैठक के दौरान जातिगत जनगणना और सरकारी नौकरियों पर भी प्रस्ताव रखा गया। पार्टी की बैठक में सांसदों के संसद से निलंबित होने की घटना पर भी प्रस्ताव लाया गया।

बता दें कि पिछले कई दिनों से इस बात की चर्चा हो रही थी कि ललन सिंह उर्फ राजीव रंजन सिंह को जेडीयू अध्यक्ष पद से हटाया जा सकता है। हालाँकि, ललन सिंह ने इससे साफ इनकार किया था। इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी इसे अफवाह बताया था और कहा था कि ऐसा कुछ नहीं होने जा रहा है।

नीतीश कुमार को जेडीयू का अध्यक्ष बनाने से पार्टी को फायदा भी हो सकता है। वो इंडी गठबंधन के साथ मजबूती से बारगेनिंग कर सकते हैं। चूँकि, इंडी गठबंधन को खड़ा करने का आइडिया उन्हीं का था, लेकिन बाद में राजनीतिक महत्वकांक्षा और पार्टियों के बीच खींचतान के कारण उन्हें दरकिनार कर दिया गया। अब हालात ऐसे हो गए हैं कि नीतीश कुमार की NDA में वापसी की भी अटकलें चल रही हैं।

केले का बागान, साड़ी में टीचर, जींस-कुर्ते में छात्र… गोद में उठाकर चुम्मा चाटी: कर्नाटक के स्कूल का ‘एजुकेशनल टूर’ वाला वीडियो वायरल

कर्नाटक के एक सरकारी स्कूल की टीचर का उसके स्टूडेंट के साथ कराया गया रोमांटिक फोटोशूट सोशल मीडिया पर हर जगह वायरल है। फोटोज में स्टूडेंट-टीचर दोनों एक दूसरे को चूमते हुए और गले लगते हुए दिखाई दे रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, ये कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर जिले के मुरुगमल्ला गाँव के स्कूल से जुड़ी खबर है। स्टूडेंट-टीचर दोनों निजी तस्वीरों में किसी फिल्मी सीन की तरह पोज देने की कोशिश कर रहे हैं। फोटो में टीचर ने साड़ी पहनी हुई है और छात्र ने जींस-कुर्ता। देख सकते हैं कि फोटो में स्टूडेंट अपनी टीचर को गुलाब देकर उनको पल्लू पकड़ता है। एक में उन्हें चूमता है। अगले में टीचर उसे चूमती हैं और फिर वो अपनी टीचर को गोद में भी उठाए दिखता है।

हैरान करने वाली बात तो यह है कि फोटोशूट में नजर आ रही टीचर, स्कूल की प्रधानाध्यापिका है। वहीं छात्र कक्षा 10 का छात्र है। इन दोनों की फोटोज देख बवाल मच गया है। छात्र के माता-पिता हैरान परेशान हैं। वहीं अन्य अभिभावकों ने प्रधानाध्यापिका के पर कड़ी कार्रवाई की माँग की।

इस संबंध में एजुकेशन ऑफिसर के पास भी शिकायत पहुँचीं। शिकायत में प्रधानाध्यापिका के व्यवहार की जाँच कराने की माँग की गई। अभिभावक इस टीचर पर कड़ी कार्रवाई चाहते थे, जिसके बाद उन्होंने शिकायत की और फिर बीईओ के स्कूल पहुँचने की बात भी सामने आई। कहा जा रहा है कि बीईओ की जाँच में पता चला कि प्रधानाध्यापिका ने कुछ तस्वीरों को डिलीट कर दिया था। वहीं वायरल तस्वीर तब खींची गई थी जब स्कूल स्टाफ और छात्र एजुकेशनल ट्रिप पर गए थे। ये तस्वीरें अन्य छात्र द्वारा क्लिक करवाई गई थीं।

JNU की दीवारों पर लिखा ‘बाबरी मस्जिद फिर बनेगी’, गाँधी-इंदिरा के फोटो के साथ कॉन्ग्रेस के छात्र संगठन NSUI का नाम भी

जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय (JNU) मेें एक बार फिर से आपत्तिजनक नारे लिखे गए हैं। इस बार जेएनयू के भाषा अध्ययन केंद्र में स्प्रे-पेंट से ‘बाबरी मस्जिद फिर बनेगी’ के स्लोगन लिखे गए हैं। स्लोगन के साथ ही 6 दिसंबर की तारीख भी लिखी हुई है। यही नहीं, इसके साथ ही एनएसयूआई का ठप्पा भी लगा है, जिसमें महात्मा गाँधी, सरदार भगत सिंह और इंदिरा गाँधी की तस्वीरें हैं। हालाँकि, एनएसयूआई ने कहा है कि ये काम शरारती तत्वों का है।

‘बाबरी मस्जिद फिर बनेगी’ और NSUI की सफाई

जानकारी के मुताबिक, जेएनयू के भाषा अध्ययन केंद्र की दीवारों पर ‘Rebuild Babri Masjid’ और ‘6 December’ लिखा मिला है। ये स्लोगन ऐसे समय में लिखा गया है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या जा रहे हैं और 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में भव्य राम मंदिर का लोकार्पण होने जा रहा है। वहीं, 6 दिसंबर की तारीख वह तारीख है, जब कारसेवकों ने विवादित बाबरी ढाँचे को गिरा दिया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले में NSUI के जेएनयू इकाई के अध्यक्ष सुधांशु शेखर की सफाई आई है। सुधांशु शेखर का कहना है कि उनके संगठन का नाम काले मार्कर से पहले ही लिखा गया था। बाद में वहाँ विवादित स्लोगन लाल रंग से लिख दिए गए। ये NSUI को बदनाम करने की कोशिश है। उन्होंने माँग की है कि पूरे इलाके की सीसीटीवी कैमरों की जाँच कराई जाए तो आरोपित पकड़े जा सकते हैं।

स्लोगन लिखे जाने पर जुर्माना

दरअसल, इस साल अक्टूबर में JNU में विवादित नारे लिखे जाने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने नए नियम बनाए थे। उस समय जेएनयू की दीवारों पर ‘फ्री कश्मीर’, ‘तेरी कब्र खुदेगी’ और ‘भगवा जलेगा’ जैसे स्लोगन लिखे गए थे। इसके बाद जेएनयू प्रशासन ने विश्वविद्यालय परिसर में किसी भी तरह के विवादित धार्मिक, सांप्रदायिक, जातिवादी या राष्ट्र-विरोधी टिप्पणियों वाले पोस्टर या पैम्फलेट को छापने, प्रसारित करने या चिपकाने पर रोक लगा दी थी। आदेश को नहीं मानने वालों पर भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया था।

इन नियमों के तहत पोस्टर या पैम्फलेट के अलावा यदि कोई छात्र किसी शैक्षणिक और प्रशासनिक परिसर के 100 मीटर के दायरे में भूख हड़ताल, धरना या किसी अन्य तरह के विरोध-प्रदर्शन में शामिल पाया जाता है या इनमें से किसी भी परिसर के प्रवेश या निकास को बाधित करते हुए पाया जाता है तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा, उसे 2 महीने के लिए छात्रावास या फिर परिसर से बाहर करने का प्रावधान किया गया था। इसमें 10 हजार रुपए से लेकर 30 हजार रुपए तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

नए नियमों के तहत हर तरह की जबरदस्ती जैसे कि घेराव, धरना या परिसर में कोई भी बदलाव (दीवारों को गंदा करना, परिसर की संपत्ति को नुकसान पहुँचाना) अब प्रतिबंधित सूची में हैं। मैनुअल में कहा गया है कि जिस छात्र को यूनिवर्सिटी में अपने अध्ययन के दौरान पाँच या उससे अधिक बार सज़ा मिलेगी, उसे हमेशा के लिए निष्कासित कर दिया जाएगा।

महाराष्ट्र ISIS मॉड्यूल पर NIA ने कसा शिकंजा, 6 आतंकियों के खिलाफ दायर की चार्जशीट, ‘DIY किट’ के जरिए बढ़ा रहे थे नेटवर्क

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (ISIS) मॉड्यूल केस में छह आरोपियों के खिलाफ गुरुवार (28 दिसंबर 2023) को चार्जशीट दायर की। गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत NIA ने ये चार्जशीट NIA स्पेशल कोर्ट के न्यायाधीश एके लाहोटी की अदालत में दायर की है।

चार्जशीट में 16 लोगों को संरक्षित गवाह बनाया गया है। इसमें 6 आरोपितों पर ISIS के इशारे पर भारत में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया है। एनआईए के मुताबिक, आरोपितों के इस्लामिक स्टेट (IS) के साथ रिश्ते थे और वो देश के युवाओं को भारत विरोधी एजेंडे का प्रचार करने के लिए लुभाने की कोशिश कर रहे थे।

दरअसल NIA ने आईएसआईएस मॉड्यूल केस (ISIS Module Case) के दौरान इस साल जुलाई में महाराष्ट्र के कई जगहों पर छापेमारी की थी। छापेमारी के दौरान मुंबई का ताबिश नासिर सिद्दीकी, जुल्फिकार अली बड़ौदावाला उर्फ लालाभाई, शरजील शेख, बोरीवली-पडघा का आकिफ अतीक नाचन, पुणे का जुबैर नूर मोहम्मद शेख उर्फ अबू नुसैबा और अदन अली सरकार पकड़े गए थे।

एनआईए के मुताबिक, सभी आरोपित प्रतिबंधित ISIS के सदस्य हैं। इनमें से दो आरोपियों- जुल्फिकार अली बड़ौदावाला और आकिफ अतीक नाचन के खिलाफ ISIS के पुणे मॉड्यूल केस में धमाके के लिए आईईडी बनाने के आरोप में चार्टशीट दाखिल की जा चुकी है। वहीं, दो आरोपितों- ताबिश और जुल्फिकार ने आईएसआईएस के स्वयंभू खलीफा (नेता) के प्रति निष्ठा की शपथ ली थी।

एनआईए ने खुलासा किया है कि महाराष्ट्र आईएसआईएस आतंकी मॉड्यूल के सदस्य अपने संपर्क में आने वाले लोगों के साथ भारत में आतंकी संगठन की हिंसक विचारधारा को फैलाने के लिए ‘DIY (डू इट योरसेल्फ) किट’ शेयर कर रहे थे। इस किट के जरिए आरोपित अपनी आतंकी योजनाओं को अमलीजामा पहनाने के लिए पैसा भी जुटा रहे थे।

चार्जशीट में ये भी कहा गया है, “महाराष्ट्र आईएसआईएस आतंकी मॉड्यूल मामले (एनआईए आरसी-02/2023/एनआईए/एमयूएम) में अब तक की एनआईए जाँच में आईएसआईएस के विदेशी हैंडलरों की भागीदारी के साथ मिलकर एक बड़ी साजिश रचने का खुलासा हुआ है।” इसके साथ ही एक ऐसे जटिल नेटवर्क का पता चला है, जिसमें कट्टरपंथी भारत में ISIS की हिंसक विचारधारा फैला रहे थे।

जाँच एजेंसी ने बताया कि उसकी मुंबई ब्रॉन्च को आरोपितों के पास से ‘हिजरा’ यानी सीरिया में रहने से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री बरामद की है। इसमें आईएसआईएस के प्रकाशित ‘वॉयस ऑफ हिंद’ और ‘वॉयस ऑफ खुरासान’ जैसी प्रोपेगेंडा पत्रिकाएँ भी मिलीं। एजेंसी ने कहा कि जब्त सामग्री से साफ पता चलता है कि आरोपितों के आईएसआईएस के साथ मजबूत रिश्ते हैं।

बताते चलें कि एनआईए को गृह मंत्रालय से देश की एकता, अखंडता, सुरक्षा और संप्रभुता को प्रभावित करने की साजिश की जानकारी मिली थी। इसके बाद ही एनआईए ने 28 जून 2023 को ताबिश सिद्दीकी और अन्य के खिलाफ ISIS की आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देकर भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने के तहत केस दर्ज किया था। इस केस में आगे की जाँच आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 173(8) के प्रावधानों के तहत जारी है।

कर्नाटक के हुड़दंगियों को 24 घंटे में ही बेल, हीरो जैसा वेलकम: बोले CM सिद्धारमैया- बिजनेस करना है तो साइनबोर्ड पर लिखो 60% कन्नड़

कर्नाटक में कन्नड़ भाषा के लिए हुड़दंग करने वाले प्रदर्शनकारियों की माँग मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मान ली है। उन्होंने कहा है कि राज्य भर में बिजनेस करने वालों को अपने साइनबोर्ड पर 60 परसेंट जगह कन्नड़ भाषा को देनी होगी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में जल्द ही विधेयक लाने वाले हैं।

बता दें कि इससे पहले इस मुद्दे पर बेंगलुरु महानगर पालिके ने आदेश जारी किया था कि जिन बोर्ड्स पर 60 फीसदी कर्नाटक को जगह नहीं दी गई होगी उन्हें कैंसिल कर दिया जाएगा। उन्होंने इस काम के लिए फरवरी 2024 तक का समय दिया। लेकिन, इसी बीच कई कन्नड़ समर्थक अभियान चलाकर उन लोगों के खिलाफ आवाज उठाने लगे जो बिन कन्नड़ भाषा वाला साइन बोर्ड दुकान पर लगाकर बैठे थे। इस दौरान कई जगह तोड़फोड़ भी हुई।

ऐसे में बेंगलुरु पुलिस ने सड़क पर उतरे ‘कर्नाटक रक्षाणा वेदिके’ के 15 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करके जेल में डाला। हालाँकि बाद में वो बेल पर रिहा हो गए और जेल से बाहर आते ही उनका स्वागत किसी हीरो की तरह फूल माला से किया गया। उन्होंने कहा कि चाहे 100 मामले दर्ज करवा दो लेकिन वो पीछे नहीं हटेंगे।

वहीं सीएम सिद्धारमैया ने ये सब देख कहा था कि वो किसी के प्रदर्शन करने से बिलकुल नाराज नहीं हैं। लेकिन अगर किसी ने कानून अपने हाथ में लिया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

https://www.indiatoday.in/india/karnataka/story/karnataka-government-siddaramaiah-directs-shops-signboards-60-percent-kannada-feb-end-after-rampage-2481571-2023-12-28?utm_source=directhp&utm_medium=clicktopstories&utm_campaign=hptopstories

इस पर कर्नाटक रक्षाणा वेदिका के अध्यक्ष टीएन नारायण गौड़ा ने कहा कि वो लोग जेल जाने से नहीं डरते हैं। लाठी-डंडा भी झेल लेंगे। उन्होंने कहा, “पुलिस का इस्तेमाल कन्नड़ कार्यकतर्ताओं को रोकने के लिए किया जा रहा है। यही लोग तुम्हें लोकसभा चुनाव में पाठ पढ़ाएँगे।”

बता दें कि कर्नाटक में साइनबोर्ड पर कन्नड़ भाषा न दिखने के कारण प्रदर्शन हो रहा था। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि अलग अलग राज्य के लोग आकर बेंगलुरु में बिजनेस कर रहे हैं लेकिन अपनी दुकान पर उन्होंने नेमप्लेट पर कन्नड़ भाषा को जगह नहीं दी है। वहाँ बस अंग्रेजी लिखी है। समूह ने कहा था अगर बेंगलुरु में रहना है तो कन्नड़ भाषा को सम्मान देना होगा।

समूह की इस माँग को भाजपा नेताओं ने भी समर्थन दिया। सांसद प्रहलाद जोशी ने प्रदर्शनकारियों का साथ देते हुए कहा कि- हर कोई साइनबोर्ड पढ़ने में समर्थ होना चाहिए और हर किसी को अंग्रेजी पढ़नी आनी चाहिए। आखिर समस्या क्या है साइनबोर्ड में कन्नड़ पर लिखने में… जैसे अंग्रेजी में लिखते हो वैसे ही दूसरी भाषा में लिखना है जैसे हिंदू। ये कोई इंगलैंड तो है नहीं।

अयोध्या से अबू धाबी तक हिंदुओं के लिए आया गौरव का क्षण, 14 फरवरी को पहले हिंदू मंदिर का उद्घाटन करेंगे PM मोदी: 2018 में रखी थी आधारशिला

2024 की 22 जनवरी को अयोध्या के भव्य राम मंदिर में भगवान रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा होगी। उसके बाद 14 फरवरी को अबू धाबी में पहले हिंदू मंदिर का उद्धाटन होगा। इसके लिए बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था का न्योता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वीकार कर लिया है।

बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था ने एक बयान में बताया है कि 27 दिसंबर को स्वामी ईश्वरचरणदास और स्वामी ब्रह्मविहरिदास ने निदेशक मंडल के साथ पीएम मोदी से उनके दिल्ली के 7 लोक कल्याण मार्ग स्थित आधिकारिक आवास पर मुलाकात की। उन्हें संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की राजधानी अबू धाबी में ​बने इस मंदिर के निर्माण को लेकर जानकारी दी। साथ ही इसका उद्घाटन करने का आमंत्रण पत्र सौंपा।

पीएम के साथ बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था के लोगों की यह बैठक करीब एक घंटे तक चली। इस दौरान वैश्विक सद्भाव के लिए अबू धाबी मंदिर के महत्व और वैश्विक मंच पर भारत के आध्यात्मिक नेतृत्व के लिए पीएम मोदी के दृष्टिकोण पर चर्चा हुई।

इस दौरान पीएम ने अबू धाबी में बीएपीएस हिंदू मंदिर परियोजना में शामिल लोगों, स्वयंसेवकों और समर्थकों की कोशिशों को सराहा। उन्होंने कहा, “अबूधाबी का मंदिर वसुधैव कुटुंबकम के आदर्श को प्रतिबिंबित करेगा। यह एक आदर्श आध्यात्मिक स्थान होगा जो न केवल मान्यताओं और परंपराओं में निहित है, बल्कि विविध संस्कृतियों और सभ्यताओं का संगम है। ये आध्यात्मिक सद्भाव का सार और आगे बढ़ने के मार्ग का प्रतीक है।”

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 11 फरवरी 2018 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अबू धाबी में पहले हिंदू मंदिर की आधारशिला रखी थी। पीएम मोदी ने अबू धाबी में बनने वाले भव्य हिंदू मंदिर के लिए 125 करोड़ भारतीयों की ओर से क्रॉउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान को धन्यवाद दिया था। उन्होंने इसे भारत की पहचान का जरिया बताया था।

अबू धाबी का मंदिर 55 हजार वर्गमीटर में फैला हुआ है। मंदिर का निर्माण प्राचीन हिंदू शिल्प शास्त्र के मुताबिक किया गया है। इस मंदिर की उम्र करीब 1000 साल है यानी एक हजार साल तक मंदिर मजबूती से खड़ा रहेगा। 1,000 साल की नींव के डिजाइन के बारे में बात करते हुए, बीएपीएस के प्लानिंग सेल संजय पारिख ने 2021 में बताया था, “यह पूरी तरह से सुदृढ़ संरचना होगी और इसमें हमारे प्राचीन शिल्प शास्त्र के अनुसार किसी भी लौह धातु का उपयोग नहीं किया जाएगा।”

अधनंगी पार्टी से हिला रूस, लिंग पर मोजा चढ़ाकर रैपर ने किया परफॉर्म: फौजियों की शिकायत के बाद गिड़गिड़ाकर माफी माँग रहे हैं सितारे

रूस में नए साल से पहले हुई एक न्यूड पार्टी काफी विवादों में है। बताया जा रहा है कि इस पार्टी में रैपर सिर्फ मोजे पहनकर पर्फॉर्म करने स्टेज पर आ गया था, जिसके बाद उसपर कार्रवाई हुई और 15 दिन के लिए जेल भेज दिया गया। साथ ही रैपर के ऊपर 2 लाख रूबल यानी 1 लाख 80 हजार रुपए का जुर्माना भी लगा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रैपर का नाम निकोलाई वासिलयेव है। उसे वैसियो नाम से भी जाना जाता है। वैसियो पर आरोप लगा कि वो पार्टी पूरा नंगा होकर आया और सिर्फ एक मोजे से सिर्फ अपना लिंग छिपाया था।

इसके अलावा उसने अपने तन पर कुछ नहीं पहना था। ऐसे में उसी फोटो वीडियो जब वायरल हुई तो इस पर कोर्ट ने संज्ञान लिया और 15 दिनों के लिए जेल की सजा सुनाई। साथ ही 1 लाख 80 हजार रुपए से ज्यादा का जुर्माना लगाया।

इस कार्रवाई के बाद पार्टी में शामिल हुई अन्य हस्तियों ने भी माफी माँगी है। पॉप स्टार फिलिप किरकोरोव ने भी इस पार्टी में शामिल होने के लिए माफी माँगी। उन्होंने कहा कि हर किसी के जीवन में ऐसा समय आ जाता है जब वो गलत रास्ते पर चला जाता है। गैरजिम्मेदारी के लिए उन्होंने कहा कि वो शर्मिंदा हैं।

ब्लॉगर अनास्तासिया इविलेवा ने कहा कि उन्हें अपने किए पर पछतावा है। उन्होंने खुद को एक दूसरा मौका दिए जाने की भी अपील की। अनास्तासिया की फोटोज में भी देख सकते हैं कि उन्होंने इस पार्टी में ब्लैक कलर का ट्रांसपेरेंट कपड़ा पहना था।

बताया जा रहा है कि ये पार्टी अनास्तासिया ने ही 20 दिसंबर को आयोजित की थी, जिसकी तस्वीरें बाद में वायरल हो गईं। इन्हें देख ये बहस भी छिड़ गई कि आखिर देश में युद्ध के कारण तनाव का माहौल है उस समय पर ऐसी हाई प्रोफाइल पार्टी क्यों की गई।

इसकी क्लिप देख रूसी सैनिक भी नाराज हुए कि वो किन हालातों से जूझ रहे हैं और ये हस्तियाँ मौज कर रही हैं। इस संबंध में रूसी सैनिकों ने शिकायत भी की थी। जिसके बाद जब बात पुतिन तक पहुँची तो वह भी इसे देख बहुत नाराज हुए।

एक वीडियो क्लिप भी सामने आई है। इसमें देखने को मिल रहा है कि रूस के राष्ट्रपति पुतिन के प्रवक्ता का वीडियो सर्कुलेट हो रहा है। इसमें वो पार्टी में हिस्सा लेने वाले एक सेलेब्रिटी की सफाई सुन रहे हैं।