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अयोध्या वालों की इज्जत बचाने को वासुदेव गुप्ता ने दिया बलिदान, पति ने त्यागे प्राण तो पत्नी उतर गईं कारसेवा में: बेटा भी दे रहा रामजन्मभूमि ट्रस्ट में सेवा

अयोध्या में भगवान राम की जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का काम जोरों पर है। 22 जनवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में यहाँ मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। इस अवसर को लेकर देश भर में अभी से भक्तिभाव से सराबोर हर्ष और उल्लास का माहौल है। हालाँकि, इसी समय हिन्दू समाज को वो रामभक्त भी याद आ रहे हैं, जिन्होंने मुगलकाल से मुलायम काल तक रामजन्मभूमि के लिए अपने प्राणों का बलिदान कर दिया। इन्हीं में एक थे अयोध्या के रहने वाले वासुदेव गुप्ता, जिन्हें 30 अक्टूबर 1990 को मुलायम सिंह के आदेश पर गोली मार दी गई थी। ऑपइंडिया ने 28 दिसंबर 2023 को दिवंगत वासुदेव गुप्ता के परिवार से उनके वर्तमान हालातों को जाना।

घोर आर्थिक तंगी से जूझ रहा परिवार

वासुदेव गुप्ता अपने परिवार को पालने के लिए अयोध्या के नयाघाट क्षेत्र में मिठाई की दुकान चलाते थे। इसी दुकान से उनकी पत्नी, 3 बेटियों और 2 बेटों का गुजारा चलता था। फिलहाल पड़ोसियों द्वारा किए गए मुकदमों आदि के चलते वह दुकान अब टूट चुकी है और उसका मलबा उनके नए घर में पड़ा है। वासुदेव गुप्ता के आश्रितों का नया घर 2 कमरों का है। जब ऑपइंडिया की टीम उनके परिवार में पहुँची तब घर के आसपास मलबा बिखरा पड़ा था। साथ ही कमरों के अंदर बर्तन आदि बिखरे पड़े थे। वासुदेव की बेटी ने खुल कर कुछ नहीं बताया पर हालत बता रहे थे कि परिवार गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है।

बाद में पत्नी, बेटी और बेटे की भी मौत

घर के अंदर हमें दिवंगत वासुदेव की बेटी सीमा गुप्ता मिलीं। उन्होंने हमें बताया कि पिता जी के स्वर्गवास के बाद उनकी माँ, 1 बहन और 1 भाई की भी एक-एक कर के मौत हो गई। इन सभी की मृत्यु बीमारी से होना बताया गया। सीमा का यह भी कहना था कि उनके परिवार के पास इलाज के लिए अगर पर्याप्त पैसे होते तो शायद इन तीनों सदस्यों को बचाया जा सकता था। फिलहाल वासुदेव के परिवार में 2 विवाहिता बेटियाँ और 1 बेटा बचे हैं। वासुदेव के बेटे संदीप गुप्ता का विवाह हो चुका है और वो 2 बच्चों के पिता हैं।

हालात खराब देख कर रामजन्मभूमि ट्रस्ट ने दी नौकरी

वासुदेव के बेटे संदीप ने ऑपइंडिया को बताया कि पिता, माता, भाई और बहन के देहांत के बाद उनके घर पर गंभीर आर्थिक संकट आ गया था। ऐसे में गुप्ता परिवार की सुध विश्व हिन्दू परिषद और रामजन्मभूमि ट्रस्ट ने ली। संदीप को ट्रस्ट ने रामजन्मभूमि के लॉकर विभाग में नौकरी दे रखी है। यह नौकरी VHP पदाधिकारी चम्पत राय के निर्देश पर मिली। संदीप का वेतन यहाँ बेहद सामान्य है लेकिन परिजनों का कहना है कि जहाँ कुछ भी नहीं था वहाँ इतना ही घर चलाने के लिए छोटे से सहारे के तौर पर है। हालाँकि वासुदेव की बेटी सीमा गुप्ता ने उम्मीद जताई कि आज नहीं तो कल हिन्दू समाज और वर्तमान सरकार उनके परिवार की दशा सुधारने में मददगार होंगे।

गुप्ता परिवार

वासुदेव का अधूरा काम उनकी पत्नी ने पूरा किया

सीमा गुप्ता ने हमें बताया कि उनकी माँ शकुंतला गुप्ता भी अपने पति की तरह भगवान राम की भक्त थीं। पति की मौत के बाद उन्होंने परिवार चलाने के लिए कपड़े की दुकान खोली। इसी की कमाई से उन्होंने 1 बेटे और 2 बेटियों का ब्याह किया। सीमा के मुताबिक, साल 1992 में जब विवादित ढाँचा ध्वस्त हुआ था तब उनकी माँ भी कई महिलाओं को लेकर घटनास्थल पर मौजूद थीं। बकौल सीमा, इस दौरान उनकी माँ ने कई घायल कारसेवकों का अपने स्तर पर इलाज भी किया था।

6 दिसंबर 1992 को कारसेवा करतीं वासुदेव गुप्ता की पत्नी शकुंतला (भगवा साडी में)

लाश भी नहीं दे रहे थे अंतिम संस्कार के लिए

सीमा गुप्ता अपने पिता को याद करके भावुक हो गईं। उन्होंने बताया कि जब 1990 में उनके पिता को गोली लगी तब वो महज 7 साल की थीं, लेकिन उनको तमाम बातें याद हैं। सीमा ने बताया कि उनकी माँ को अपने पति की लाश पाने के लिए भी काफी संघर्ष करना पड़ा था, क्योंकि पोस्टमार्टम के बाद वासुदेव का शव देने में आनाकानी की जा रही थी। हालाँकि, इस दौरान हिन्दू संगठनों ने कड़ा विरोध किया, जिसके चलते मुलायम सरकार के प्रशासन को झुकना पड़ा।

वासुदेव गुप्ता का शव पोस्टमार्टम के बाद

अयोध्या वालों की इज्जत बचाने निकले थे वासुदेव

वासुदेव गुप्ता मूलतः अयोध्या के ही निवासी थे। उनकी बेटी ने हमें आगे बताया कि उनके पिता बजरंग बली के परम भक्त थे। जब राम मंदिर मुक्ति आंदोलन चला तब देश के विभिन्न हिस्सों से रामभक्त अयोध्या पहुँच रहे थे। इसी दौरान वासुदेव गुप्ता ने अपने परिवार से कहा कि अगर वो न निकले तो अयोध्यावासी क्या मुँह दिखाएँगे। सीमा ने बताया कि पापा ने कहा कि अयोध्या में रहने वालों पर भविष्य में हँसा जाएगा कि वो घरों से बाहर नहीं निकले। आखिरकार वासुदेव एक जत्थे के साथ निकले और उनके पेट व कमर में 3 गोलियाँ लगीं। वासुदेव के प्राण मौके पर ही निकल गए थे। वासुदेव का शव रामजन्मभूमि के पास ही रामकोट पर पड़ा मिला था।

इस हालत में मिला था वासुदेव गुप्ता का शव

हिज्बुल मुजाहिदीन के नाम से मिली धमकी

सीमा गुप्ता ने हमें आगे बताया कि उनके पिता के स्वर्गवास के लगभग 1-2 साल बाद उनके घर एक धमकी भरा खत आया था। उर्दू शब्दों में लिखे गए इस 3 पेज के खत में हिजबुल मुजाहिद्दीन की मुहर लगी हुई थी। पत्र में कई धमकियों के साथ लिखा गया था, “‘एक को भेज चुकी हो, दूसरे को संभाल कर रखना। सरयू नदी को ‘शरीफा नदी’ और अयोध्या को ‘अयूबाबाद’ बनाया जाएगा।” तब वासुदेव गुप्ता की पत्नी शकुंतला ने इस धमकी की शिकायत प्रशासन से की थी।

राम मंदिर बना पिता का सपना साकार हुआ

वासुदेव गुप्ता का परिवार भगवान राम का मंदिर बनने से बेहद खुश है। उनके बेटे संदीप और बेटी सीमा ने बताया कि राम मंदिर बनने के बाद उनके स्वर्गवासी पिता का सपना साकार हो गया है। वासुदेव के परिजन यह भी चाहते हैं कि इस मंदिर के साथ उनके पिता और अन्य बलिदान हुए रामभक्तों के इतिहास को याद किया जाए। सीमा गुप्ता को आशा है कि उनके पिता की स्मृति बरकरार रखने के लिए वर्तमान सरकार वासुदेव गुप्ता के नाम का एक स्मारक जरूर बनवाएगी।

सन 1990 के अख़बारों में वासुदेव गुप्ता का जिक्र

ऑपइंडिया की टीम दिसंबर 2023 के अंतिम सप्ताह से अयोध्या में है। यहाँ से हम आपको न सिर्फ रामजन्मभूमि आंदोलन के गुमनाम बलिदानी, विस्मृत घटनाएँ बल्कि अयोध्या के कई अनसुने लेकिन पवित्र स्थानों के बारे में विस्तार से बताएँगे। इस कड़ी की दूसरी खबर जल्द ही प्रकाशित होगी।

असम में बड़ी सफलता, ULFA के साथ त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर, राज्य के 85% हिस्सों से हटी AFSPA: 9000+ कैडरों का आत्मसमर्पण

पूर्वोत्तर के सबसे अहम राज्य असम में स्थाई शांति स्थापित करने में जुटी मोदी सरकार को बड़ी सफलता प्राप्त हुई है। असम में विद्रोह का झंडा उठाए उल्फा (यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम) का केंद्र सरकार और असम की राज्य सरकार के साथ समझौता हो गया है। इसी के साथ उल्फा के 750 कैडर ने हथियार डाल दिए हैं। वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि अब असम के 85 प्रतिशत हिस्से से अफस्पा कानून को हटा दिया गया है।

असम में उल्फा और केंद्र सरकार के बीच समझौता

शुक्रवार (29 दिसंबर 2023) को नई दिल्ली में केंद्र सरकार, असम सरकार और उल्फा के बीच एक त्रिपक्षीय समझौता हुआ। इस समझौते के तहत उल्फा ने अपने सभी हथियार और गोला-बारूद सरकार को सौंप दिए। उल्फा के 750 कैडर ने भी हथियार डाल दिए। अब तक उल्फा के 9000 से अधिक कैडर हथियार डाल चुके हैं। इस समझौते के साथ असम में दशकों पुराने उग्रवाद के खत्म होने की उम्मीद है।

गृहमंत्री अमित शाह ने कही ये बात

इस अवसर पर अमित शाह ने कहा कि आज (29 दिसंबर 2023) असम के लिए एक सुनहरा दिन है, जब लंबे समय से हिंसा का दंश झेल रहे नॉर्थ ईस्ट और असम में शांति स्थापित होने जा रही है। उन्होंने कहा कि 2014 में पीएम मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से दिल्ली और नॉर्थ ईस्ट के बीच की दूरी कम करने के प्रयास हुए और खुले मन से सबके साथ बातचीत की शुरुआत हुई।

उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उग्रवाद, हिंसा और विवाद-मुक्त नॉर्थ ईस्ट की परिकल्पना लेकर गृह मंत्रालय ने काम किया। उन्होंने कहा कि पूरे नॉर्थ ईस्ट में पिछले 5 वर्षों में विभिन्न राज्यों के साथ शांति और सीमा संबंधित 9 समझौते हुए हैं, जिनके कारण आज नॉर्थ ईस्ट के बड़े हिस्से में शांति की स्थापना हुई है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आज तक 9,000 से अधिक कैडर ने सरेंडर किया है और असम के 85 प्रतिशत हिस्से से AFSPA को हटा लिया गया है। उन्होंने कहा कि आज भारत सरकार, असम सरकार और उल्फा के बीच हो रहे त्रिपक्षीय समझौते से पूरे असम के सभी हिंसक गुटों को समाप्त करने में मोदी सरकार को सफलता मिली है। यह समझौता असम और पूरे नॉर्थ ईस्ट में शांति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि इस के समझौते के तहत, उल्फा प्रतिनिधियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ने, सभी हथियार डालने और अपने सशस्त्र संगठन को खत्म करने पर सहमति व्यक्त की है। इसके अलावा उल्फा अपने सशस्त्र कैडरों के कब्जे वाले सभी शिविरों को खाली करने, कानून द्वारा स्थापित शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल होने और देश की अखंडता को बनाए रखने पर भी सहमत हुआ है।

अकेले असम में 8200 से ज्यादा कैडर कर चुके हैं आत्मसमर्पण

अमित शाह ने कहा कि उल्फा संघर्ष में दोनों पक्षों के लगभग 10 हज़ार लोग मारे गए, जो इस देश के ही नागरिक थे, लेकिन आज इस समस्या का संपूर्ण समाधान हो रहा है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने एक बहुत बड़े पैकेज और असम के विकास के प्रोजेक्ट्स को भी सहमति दी है। मोदी सरकार समझौते की हर बात पर पूरी तरह अमल करेगी और इस पर खरी उतरेगी।

शाह ने कहा कि 2014 में मोदी सरकार आने के बाद असम में हिंसक घटनाओं में 87 प्रतिशत, मृत्यु में 90 प्रतिशत, अपहरण में 84 प्रतिशत की कमी आई है। इसके साथ ही सिर्फ असम में अब तक 7500 कैडर ने सरेंडर किया है, जिसमें आज 750 और जुड़ जाएँगे। इस प्रकार अकेले असम में में 8200 से अधिक कैडर द्वारा आत्मसमर्पण किया जाना असम के लिए शांति के नए युग का सूत्रपात है।

पीएम मोदी के विजन की वजह से संभव हुए कई समझौते

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार ने 2019 में एनएलएफटी, 2020 में ब्रू, बोड़ो, 2021 में कार्बी, 2022 में आदिवासी समझौता, असम-मेघालय सीमा समझौता, 2023 में असम-अरूणाचल सीमा समझौता और यूएनएलएफ और अब उल्फा के साथ समझौता किया है। उन्होंने कहा कि आज इस समझौते के साथ ही पूरे नॉर्थ ईस्ट और विशेषकर असम के लिए शांति के नए युग की शुरूआत होने जा रही है।

अमित शाह ने कहा कि भारत सरकार का गृह मंत्रालय उल्फा की माँगों को पूरा करने के लिए एक समयबद्ध कार्यक्रम बनाएगा और इसकी मॉनीटरिंग के लिए एक समिति भी बनाई जाएगी, जो असम सरकार के साथ मिलकर समझौते को पूरा करने का प्रयास करेगी। गृहमंत्री शाह ने कहा कि 2019 के बाद हुए सभी समझौतों में मोदी सरकार समय से आगे है और समय से पहले ही सभी शर्तों को पूरा करने का प्रयास किया गया है। गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के उग्रवाद-मुक्त नॉर्थ ईस्ट के ब्रॉडर विज़न के बिना ये संभव नहीं था।

‘मेरा किया वादा मुझे सोने नहीं देता…’: PM ने ‘मोदी की गारंटी’ का समझाया अर्थ, इंटरव्यू में कहा- सिर्फ हिंदी पट्टी की पार्टी नहीं BJP, अब देश के हर कोने में मौजूद

हाल ही में संपन्न हुए पाँच राज्यों के विधानसभा चुनावों में ‘मोदी की गारंटी’ को लेकर भाजपा चुनावी मैदान में थी। इसके अच्छे नतीजे भी देखने को मिले। भाजपा को तीन राज्यों- राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में जबरदस्त बहुमत मिला और वहाँ सरकार बनी। मोदी की गारंटी क्या है और इन राज्यों में नए चेहरों को क्यों कमान सौंपी गई, लेकर पीएम मोदी ने अपनी बात रखी है।

इंडिया टुडे ग्रुप के एडिटर-इन-चीफ तथा चेयरपर्सन अरुण पुरी, वाइस-चेयरपर्सन कली पुरी और ग्रुप एडिटोरियल डायरेक्टर राज चेंगप्पा से खास बातचीत में पीएम पीएम मोदी ने राजनीति लेकर अर्थनीति तक, विकास से लेकर विश्वास तक, हर मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रखी। प्रधानमंत्री का विस्तृत इंटरव्यू इंडिया टुडे के आगामी अंक में प्रकाशित किया जाएगा। हालाँकि, सामने आए इसके प्रमुख अंश में पीएम मोदी कई मुद्दों पर बातें कीं।

पीएम मोदी ने समझाया ‘मोदी की गारंटी’ का मतलब

‘मोेदी की गारंटी’ को लेकर पूछे गए एक सवाल पर पीएम मोदी ने कहा कि गारंटी का मतलब सिर्फ बोलना नहीं है, बल्कि इसके साथ बँध जाना होता है। उन्होंने कहा, “मेरा किया वादा मुझे सोने नहीं देता, बल्कि कड़ी मेहनत के लिए प्रेरित करता है। मोदी की गारंटी का मतलब गरीबों का विश्वास है। देश का हर गरीब जानता है कि मोदी अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटेगा।”

पीएम मोदी ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों ने गरीबों का विश्वास तोड़ा है, लेकिन उन्हें विश्वास है कि ‘मोदी की गारंटी’ कभी नहीं टूटेगी। उन्होंने कहा, “यही विश्वास मुझे प्रेरणा देती है। इसके लिए मैं जी-जान से काम करता हूँ और गारंटी को पूरा करता हूँ। ये कोई शब्द या चुनावी वादा नहीं है, बल्कि मेरी दशकों की कड़ी मेहनत है। समाज के प्रति संवेदनशीलता की अभिव्यक्ति है।”

राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में नए चेहरों को क्यों सौंपी कमान?

पीएम मोदी से जब राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में तीन नए चेहरों को मुख्यमंत्री बनाने पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने इसे सीधे-सीधे खुद से जोड़ दिया। पीएम मोदी ने कहा, “जब मैं गुजरात का मुख्यमंत्री बना था तो मेरा कोई प्रशासनिक अनुभव नहीं था। मैं तो विधानसभा तक के लिए नहीं चुना गया था। इसे भले ही लोग नया ट्रेंड मान रहे हों, क्योंकि परिवारवादी पार्टियों में लोग परिवार के बाहर कुछ सोच ही नहीं पाते, पर हमारी पार्टी अलग-अलग प्रयोग करने की अभ्यस्त है।”

पीएम मोदी ने कहा कि लोकतंत्र में नई पीढ़ियों और नए खून को अवसर देना बहुत जरूरी है। यही लोकतांत्रिक मंथन ही लोकतंत्र को जीवंत बनाता है, जबकि परिवारवादी पार्टियों को यह लोकतांत्रिक मंथन कठिन लगता है। उन्होंने कहा, “हमारी पार्टी के कार्यकर्ताओं को यह भरोसा है कि वो भी मेहनत के दम पर ऊपर उठ सकते हैं। हमारी पार्टी कैडर बेस्ड पार्टी है और हमारे यहाँ ऐसे ही काम होता है।”

आर्टिकल 370 और जम्मू-कश्मीर में बदलाव

पीएम मोदी से इस इंटरव्यू में आर्टिकल 370 के खात्मे और जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक बदलाव को लेकर भी सवाल पूछे गए। इस पर पीएम मोदी ने कहा, “कभी नेहरू जी ने संसद में कहा था कि आर्टिकल 370 घिसते-घिसते खत्म हो जाएगी, लेकिन 70 दशकों तक इसने जम्मू-कश्मीर को थाम कर रखा। जम्मू-कश्मीर में महिलाओं, गरीबों, अल्पसंख्यकों को वंचित रखा गया। अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोग अपना भविष्य बनाने के लिए स्वतंत्र हो गए हैं।”

उन्होंने कहा कि आर्टिकल 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर पर भारत का संविधान पूरी तरह से लागू हो गया, जो समानता की बात करता है। आज आतंकवाद निचले स्तर पर पहुँच गया है और पर्यटन रिकॉर्ड ऊँचाइयाँ छू रहा है। उन्होंने जी-20 की बैठक का भी उदाहरण दिया, जो जम्मू-कश्मीर में आयोजित की गई थी। उन्होंने कश्मीर में स्थाई शांति लाने के उपायों के बारे में भी बताया।

पीएम मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा, विकास, इंफ्रा में निवेश और सरकारी प्रक्रियाओं का पुनर्गठन कर रही है। संसद में जम्मू-कश्मीर का प्रतिनिधित्व था, लेकिन आर्टिकल 370 हटने के बाद लोकतंत्र को हर कश्मीरी तक पहुँचाया जा रहा है। अब त्रिस्तरीय पंचायतीराज व्यवस्था लागू की गई है। जमीन से जुड़े 35 हजार नेता लोगों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

बीजेपी आज देश के हर कोने में मौजूद

इस इंटरव्यू में पीएम मोदी ने बीजेपी को हिंदी पट्टी की पार्टी बोलने वालों को आईना दिखाया है। उन्होंने कहा, “बीजेपी के बनने के बाद से हम ये बातें सुन रहे हैं। कभी ब्राह्मण-बनिया पार्टी भी कहा गया, तो कभी कहा गया कि हमें सिर्फ शहरों में समर्थन मिलता है। कभी हमें हिंदी पट्टी की पार्टी कहा गया, लेकिन हमने सबको गलत साबित कर दिया है। आज बीजेपी देश के हर कोने में मौजूद है।”

उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, “केरल के स्थानीय निकायों में बीजेपी प्रमुख विपक्षी पार्टी है। बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड में बीजेपी प्रमुख विपक्षी दल है। 6 माह पहले तक कर्नाटक में हमारी सरकार थी। पुदुचेरी में बीजेपी की सरकार है। देश के 16 राज्यों में बीजेपी की सरकारें हैं, तो 8 राज्यों में हम मुख्य विपक्षी दल हैं। पूर्वोत्तर के 6 राज्यों में हमारी सरकार है।”

प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा, “यहाँ तक कि लोकसभा के नजरिए से देखें तो दक्षिण भारत में हम सबसे बड़ी पार्टी हैं। दो लोकसभा सीटों की विनम्र शुरुआत से अब 303 तक की हमारी यात्रा पर विचार कीजिए। बीजेपी कैडर बेस्ड पार्टी है। अकेले उनकी हमारी मेहनत से सफलता नहीं मिली, बल्कि बीजेपी को आगे ले जाने में हर कार्यकर्ता ने अपना योगदान दिया है।”

पीएम मोदी ने समझाई बुनियादी ढांचे में निवेश से रोजगार बढ़ने की बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नौकरियों और रोजगार को लेकर पूछे गए सवाल पर कहा कि भाजपा सरकार का लक्ष्य रोजगार सृजन है। जो कई तरीकों से होता है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने बुनियादी ढाँचे में सबसे ज्यादा 10 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया है। साल 2013-14 में ये आँकड़ा महज 1.9 लाख करोड़ रुपए का था। इस निवेश से मेट्रो लाइन की लंबाई 248 किमी से बढ़कर 905 किमी हो गईं, क्या इससे नौकरियाँ पैदा नहीं हुईं?

पीएम मोदी ने कहा, “इन 10 सालों में एयरपोर्ट की संख्या 74 से बढ़कर 149 हुई, क्या इससे नौकरियाँ नहीं बढ़ीं? मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 706 हुई, क्या इससे नौकरियों का सृजन नहीं हुआ? साल 2014 की तुलना में सड़कों का दोगुना निर्माण हुआ। पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। कृषि पैदावार बड़ी है। क्या इससे रोजगार नहीं बढ़ा?”

उन्होंने बेरोजगारी के सवाल पर भी अपनी बात रखी। प्रधानमंत्री ने कहा, बेरोजगारी दर साल 2018-19 में 5.8 थी, जो अब 3.2 प्रतिशत रह गई है। उन्होंने सवालिया लहजे में पूछा कि ‘आँकड़े क्या बताते हैं’? उन्होंने कहा, “31 मार्च 2014 को ईपीएफओ से 11.78 करोड़ लोग ही जुड़े थे। अब 27.74 करोड़ लोग ईपीएफओ से जुड़े हैं। क्या ये आँकड़े रोजगार से नहीं जुड़े हैं?”

5 ट्रिलियन इकॉनमी का टारगेट एकदम हकीकत, हम हासिल कर के रहेंगे

पीएम मोदी ने इकॉनमी को लेकर कहा कि साल 2014 में जब भाजपा की सरकार आई तो भारत की अर्थव्यवस्था 20 खरब डॉलर यानी कि 167 लाख करोड़ रुपए की थी। अब ये आँकड़ा लगभग दोगुना होकर 37.5 खरब डॉलर यानी 312 लाख करोड़ रुपए का हो गया है। उन्होंने कहा कि अब तक की सबसे बड़ी महामारी के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था सँभली हुई है और आगे बढ़ रही है।

गुजरात का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, “जब 2001 में मैं गुजरात का सीएम बना तो गुजरात की इकॉनमी 26 अरब डॉलर यानी 2.17 लाख करोड़ रुपए की थी। जब मैंने गुजरात छोड़ा, तब तक ये बढ़कर 133.5 अरब डॉलर (11.1 लाख करोड़ रुपए) पहुँच चुकी थी और अब ये लगभग 260 अरब डॉलर की है। 23 सालों का ये रिकॉर्ड ही बताता है कि हम किस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।”

पीएम मोदी ने विपक्ष के महंगाई के आरोपों से जुड़े सवाल पर कहा कि दुनिया भर में महंगाई बढ़ी है। इसके बावजूद 2014-15 और 2023-24 के बीच औसतन महंगाई महज 5.1 प्रतिशत रही, जबकि 2004-2014 के बीच ये दर 8.2 प्रतिशत रही थी। उन्होंने कहा कि कोरोना के समय वैश्विक सप्लाई चेन नष्ट हो गया था। पूरी दुनिया में तनाव फैला हुआ है। मंदी का दबाव है, फिर भी भाजपा सरकार महंगाई पर लगाम लगाए हुए है।

संभल में भाई के फाँसी लगाने के बाद दूसरा भी फँदे पर झूला: सूचना मिलने पर पंजाब से घर लौट रहा था बड़ा भाई, रास्ते में उसने भी कर ली सुसाइड, कहा- घर की लाज रखना

उत्तर प्रदेश के संभल में 19 से 22 साल के बीच के तीन भाइयों ने एक के बाद एक फाँसी लगा ली, जिसमें से दो की मौत हो गई। वहीं, एक भाई की हालत गंभीर है। दरअसल, छोटे भाई पान सिंह यादव ने फाँसी लगाकर आत्महत्या ली। इसी सदमे में बीच वाले भाई ने भी फाँसी लगा ली। वहीं, पंजाब में रहने वाले बड़े भाई को जब इसकी जानकारी मिली तो वह घर के लिए ट्रेन पकड़ ली, लेकिन रास्ते में उतर कर रेलवे पुलिया पर फाँसी लगा ली।

ये मामला संभल जिले के धनारी थाना क्षेत्र के औरंगाबाद गाँव की है। रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार (28 दिसंबर 2023) को 19 साल के पान सिंह, उससे बड़े बृजेश सिंह और सबसे बड़े भाई 22 साल के मुनेश सिंह ने फाँसी लगा ली। पिता से विवाद के बाद छोटे भाई पान सिंह ने जंगल में शाम चार बजे के आसपास फाँसी लगाकर जान दे दी। इसकी सूचना जब घर पर पहुँची तो कोहराम मच गया।

सभी लोग छोटे भाई के शव को लाने गए तो बीच वाले भाई बृजेश सिंह ने शाम को करीब 6 बजे घर के कमरे में फाँसी लगा ली। उसे घरवालों ने किसी तरह से बचाया और अस्पताल में भर्ती कराया, जहाँ उसकी हालत गंभीर है। इन सबकी जानकारी बड़े भाई मुनेश सिंह को लगी तो वह पंजाब से गाँव के लिए ट्रेन पकड़ लिया, लेकिन संभल के धनारी रेलवे स्टेशन पर उतरा रेलवे पुल के पास फाँसी लगा ली।

सबसे बड़े भाई मुनीश ने रेलवे पुलिया पर गमछे से फाँसी लगाने से पहले अपने परिजनों को कॉल किया था और आकर शव ले जाने के लिए कहा था। मुनेश के चचेरे भाई अनेकपाल के मुताबिक, “मुनीश ने घर पर कॉल करके कहा कि एक भाई मर गया और दूसरा भी मरने वाला है। दो भाई नहीं रहेंगे तो मैं अकेले जीकर क्या करूँगा। मैं फाँसी लागने जा रहा हूँ। मेरी डेडबॉडी आकर ले जाना।”

घटना पान सिंह और मुनेश सिंह की मौत हो गई है। वहीं, परिजनों ने पुलिस को सूचित किए बिना ही इनका अंतिम संस्कार कर दिया। वहीं, बृजेश सिंह की हालत गंभीर है और एक निजी अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है। एक के बाद एक करके तीनों भाइयों के फाँसी लगाने से विजय सिंह यादव के घर में मातम पसरा हुआ है और पूरे इलाके में दहशत का माहौल बना हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बड़े भाई मुनेश सिंह ने फाँसी लगाने से पहले अपने हाथ पर ही एक सुसाइड नोट लिखा है। सुसाइड नोट में उसने लिखा है, “हम दोनों भाइयों की आत्मा को शांति मिले। हमारे घर की लाज रखना। सब लोगों को राम-राम।” इस घटना के पीछे असली वजह क्या है, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। परिवार भी खुलकर कुछ बता नहीं रहा है।

फाँसी लगाने की इन घटनाओं की जानकारी मिलते ही एसपी, एसडीएम और तहसीलदार मौके पर पहुँचे। इस मामले में पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है। वहीं, मृतक के चचेरे भाई ने बताया कि तीनों भाइयों में सबसे छोटे पान सिंह ने पंजाब जाने की जिद की थी, लेकिन पिता ने मना कर दिया था। इसकी वजह से बुधवार (27 दिसंबर 2023) को उसका पिता के साथ विवाद हुआ और दूसरे दिन उसने फाँसी लगा ली।

‘फिर आएगा मोदी…’: लोकसभा चुनाव के लिए BJP ने जारी किया चुनावी गीत, कॉन्ग्रेस ने ‘स्मृति ईरानी’ जैसी आवाज में जारी किया वीडियो तो यूजर लेने लगे मजे

भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव 2024 के लिए एक गीत जारी किया है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा किए गए कामों को गिनाया गया है। इस गीत में पीएम मोदी को एक व्यक्ति ही नहीं, बल्कि पूरे देश का गौरव बताया गया है। ‘फिर आएगा मोदी’ शीर्षक नाम वाले गीत में विपक्षी दलों पर निशाना भी साधा गया है।

खास बात ये है कि इस गीत में मोदी सरकार के उन कामों को केंद्र में रखा गया है, जो देश की बड़ी आबादी को फायदा पहुँचा रहे हैं। इस गीत की शुरुआत होती है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंदिरों में दर्शन के विजुअल्स से, शैंगोल की स्थापना से और भारत देश का गौरव बढ़ाते पीएम मोदी की तस्वीरों से। करीब 10 मिनट के इस गीत के शुरुआती बोल हैं…

बजे डंका, काम के दम का…
राम जी देंगे सद्बुद्धि, फिर आएगा मोदी…

गीत में आगे राम मंदिर, आर्टिकल 370 से लेकर सर्जिकल स्ट्राइक, सड़कों के जाल, एयरपोर्ट से लेकर वंदे भारत ट्रेन, उज्ज्वला, एम्स, आईआईटी, आईआईएम, हर घर पानी, हर घर बिजली, जनधन योजना, किसान सम्मान निधि, कमजोर वर्ग को मुफ्त अनाज और आयुष्मान भारत से गरीबों का मुफ्त इलाज जैसी योजनाओं का जिक्र है।

यही नहीं, गीत में स्वच्छ भारत से लेकर प्रधानमंत्री आवास, डिजिटल इंडिया, तीन तलाक, स्टार्टअप क्रांति, खेलो इंडिया, चंद्रयान, आदित्य मिशन से लेकर नई शिक्षा नीति, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, स्किल इंडिया, मेक इन इंडिया, जी-20 सम्मेलन को भी जगह दी गई है।

इस गीत के माध्यम से विपक्षी दलों के जुटान, परिवारवाद और भ्रष्टाचार को भी निशाना बनाया गया है, लेकिन फोकस मोदी सरकार के कामों पर है। इस गीत को भारतीय जनता पार्टी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स पर गुरुवार (28 दिसंबर 2023) को साझा किया, जो तेजी से वायरल हो रहा है।

वहीं, दूसरी ओर कॉन्ग्रेस पार्टी ने एक वीडियो अपने सोशल मीडिया पेज हैंडल पर शेयर किया है, जिसका शीर्षक है ‘गूजबम्प्स… कमिंग सून’। ये अलग बात है कि कॉन्ग्रेस के वीडियो पर लोग कॉन्ग्रेस को ही ट्रोल कर रहे हैं, क्योंकि उस वीडियो में जो आवाज है, वो कथित तौर पर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी से मैच कर रही है।

लोग कमेंट्स के माध्यम से बता भी रहे हैं कि कॉन्ग्रेस अपने प्रचार के लिए बीजेपी नेताओं की आवाज उधार ले रही है। हालाँकि, आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से उस वीडियो को डिलीट कर दिया गया है, लेकिन तब तक लोग उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर चुके थे।

बता दें कि अगले साल लोकसभा चुनाव होने वाले हैं, जिसके लिए सभी दलों ने कमर कस ली है। इस चुनाव में मुख्य मुकाबला एनडीए और विपक्षी दलों के बीच है। एनडीए की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगुवाई करेंगे, जबकि विपक्षी दलों का अब तक कोई चेहरा तय नहीं हो पाया है। विपक्षी दलों में सबसे बड़ी कॉन्ग्रेस पार्टी है।

मुुँह में सेब और गुदा में गाजर: 5 स्टार होटल की किचन में कर्मचारी को नंगा कर घंटों कुर्सी से बाँधे रखा, फ्रांस के स्टार शेफ ने इस्तीफा

फ्रांसीसी स्टार शेफ ऑरेलियन लार्ज्यू (Aurelien Largeau) ने फ्रांस के मशहूर 5 स्टार होटल ‘होटल डु पलाइस (Hotel du Palais)’ की नौकरी से अचानक इस्तीफा दे दिया है। इस मिशेलिन स्टार शेफ का यह फैसला जिस घटना का नतीजा है, वो इंसानियत को शर्मसार करने वाली है।

दरअसल, दक्षिण-पश्चिमी फ़्रांस के बियारिट्ज स्थित इस होटल के किचन में एक कर्मचारी के मुँह में सेब और गुदा में गाजर ठूँसकर उसे नंगे बदन घंटों तक कुर्सी पर बाँधकर बैठाया गया था। जब ये सब हो रहा था तो होटल के किचन बिग्रेड के साथ स्टार शेफ लार्ज्यू भी इस मजबूर और अपमानित महसूस कर रहे शख्स को निहार रहे थे।

इस वाकए की वीडियो क्लिप वायरल होने के बाद स्टार शेफ ऑरेलियन लार्ज्यू के नौकरी छोड़ने की खबर आई है। होटल चेन की तरफ से गुरुवार (28 दिसंबर 2023) को लार्ज्यू के नौकरी छोड़ने की जानकारी शेयर की गई। 31 साल के ऑरेलियन लार्ज्यू के नाम पर मिशेलिन स्टार शेफ का तमगा जुड़ा है।

अभियोजक जेरोम बौरियर के मुताबिक, बेयोन सरकारी अभियोजक के दफ्तर ने होटल के इस हेल्पिंग हैंड के यौन उत्पीड़न और हिंसा के आरोपों की प्रारंभिक जाँच शुरू कर दी है। इस होटल के मालिक हयात की प्रवक्ता ने एएफपी को बताया कि प्रबंधन को इस परेशान करने वाली घटना के बारे में बताया गया था। दरअसल इस घटना की फुटेज ऑनलाइन शेयर की गई थी।

हयात की प्रवक्ता ने कहा, “यह घटना उन मूल्यों को प्रतिबिंबित नहीं करती, जिनकी हम रक्षा करते हैं। हमने जाँच की है और सही फैसले लिए हैं। हमारे सहयोगियों, ग्राहकों और भागीदारों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और भलाई हमारे लिए पहली प्राथमिकताएँ हैं।”

हालाँकि, उन्होंने इस वाकए के बारे में विस्तार से कुछ नहीं बताया, लेकिन फ्रांस के रीजनल डेली सूड औएस्ट (Sud Ouest) ने लिखा है कि ये घटना होटल की रसोई के शुरुआत की प्रथा हेजिंग के तहत की गई थी। इसके तहत रसोई में काम करने वाले शख्स के मुँह में सेब और गुदा में गाजर डालकर नंगा करके घंटों तक एक कुर्सी से बाँध दिया गया था। इस दौरान किचन ब्रिगेड के लोग वहाँ खड़े उसे देख रहे थे।

सूद औएस्ट ने लिखा ये अपमानजनक घटना शेफ ऑरेलियन के अधिकार क्षेत्र में और उनकी मौजूदगी में हुई थी। हालाँकि अब इस शर्मनाक वाकए की फुटेज को इंटरनेट से हटा दिया गया है। बताते चलें कि फ्रांसीसी कानून के तहत हेजिंग पर प्रतिबंध है। इसका मतलब सख्त शारीरिक प्रशिक्षण और दीक्षा के हिस्से के तौर पर अक्सर मुश्किल अपमानजनक काम करवाने से है।

रिपोर्टों में कहा गया है कि फ्रांसीसी रेस्तराँ में यह प्रथा अभी भी होती है। इसे कभी-कभी एक टेस्ट के तौर पर प्रयोग किया जाता है, जिसमें ये पता किया जाता है कि जूनियर कर्मचारी नौकरी के दबाव को सँभाल सकते हैं या नहीं। हाल के सालों में फ्रांस में कई खाना पकाने वाले पेशेवरों ने रसोई में हिंसा के खिलाफ अभियान शुरू किया है। इनमें से एक का नाम ‘हैंड्स ऑफ माई किचन हैंड’ और दूसरे का नाम ‘रेस्पेक्ट योर किचन’ है।

बताते चलें कि होटल डू पलाइस बियारिट्ज़ में समुद्र तट पर एक पाँच सितारा होटल है। इसमें एक रात बिताने की औसत कीमत 400 यूरो (445 डॉलर) से अधिक है। फ्रांसीसी स्टार शेफ ऑरेलियन लार्ज्यू इस होटल के किचन का काम सँभालते थे।

‘…तो 400 सीट जीत जाएगी BJP’: 2024 में हार देख कॉन्ग्रेस नेता सैम पित्रौदा EVM पर खिसियाए, छेड़छाड़ का सबूत माँगने पर तिलमिलाए

इंडिया ओवरसीज कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रौदा ने हाल ही में ईवीएम पर सवाल उठाए और कहा कि अगर ईवीएम को फिक्स (सही) नहीं किया जाएगा तो हो सकता है कि भाजपा लोकसभा चुनावों में 400 सीट जीत जाए। ऐसा उन्होंने अजीत अंजुम को दिए इंटरव्यू में कहा।

उन्होंने इस साक्षात्कार के दौरान ईवीएम पर सवाल तो उठा दिए। हालाँकि जब उन्हें याद दिलाया गया कि चुनाव आयोग ने तो कहा ही था कि जो कह रहे हैं कि ईवीएम में गड़बड़ है वो आकर साबित करें या इसे हैक करके दिखाएँ। तो इस पर पित्रौदा ने फौरन जवाब दिया कि इसका वो क्यों सबूत देंगे।

सैम पित्रोदा ने तिलमिलाकर कहा, “वे (चुनाव आयोग) हमसे सबूत क्यों माँग रहे हैं? ये तो उन्हें साबित करना चाहिए कि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ नहीं की गई है। आप मुझे साबित करें कि मेरा वोट डाला हुआ गिना जाता है। आप इसे आज वीवीपैट के साथ साबित नहीं कर सकते। आज की ईवीएम है कोई स्टैंडअलोन मशीन नहीं है।”

कॉन्ग्रेस नेता ने हाल ही में ईवीएम संबंधी अपनी चिंता चुनाव आयोग के आगे भी रखी थी। इस इंटरव्यू में उन्होंने इस संबंध में बात करते हुए कहा, “मैंने चुनाव आयोग के जवाब का इंतजार किया लेकिन जब ऐसा नहीं हुआ तो मैंने बोलने का फैसला किया। इसका इस बात से कोई लेना-देना नहीं है कि पाँच राज्यों में चुनाव खत्म हो चुके हैं और 2024 का चुनाव आ रहा है।…चुनाव आयोग को विश्वास के पुनर्निर्माण के लिए जवाब देना चाहिए।”

उन्होंने कहा, अगर चुनाव आयोग ऐसा करता है तो वो और मजबूत होगा। निर्णय लेना देश पर होना चाहिए। ईवीएम को अगले चुनाव से पहले ही ठीक करना होगा। अगर ईवीएम ठीक नहीं होती हैं तो शायद बीजेपी का 400 का आँकड़ा सही हो जाए। अगर होती है तो शायद 400 सीट न मिले।

अपने इंटरव्यू में सैम पित्रौदा ने बार-बार चुनाव आयोग से ये साबित करने को कहा कि ईवीएम में कोई गड़बड़ी नहीं होती जबकि चुनाव आयोग 2017 में ही ये दावा कर चुका है कि ईवीएम मशीनें गड़बड़ नहीं हो सकतीं।

बता दें कि ईवीएम पर विवाद कोई नया नहीं हैं। जब-जब विपक्षी पार्टी ने चुनाव हारे हैं या भाजपा को ज्यादा मार्जिन से जीतते हुए देखा है तो उन्होंने हमेशा ईवीएम पर सवाल उठाए हैं। यही जब उनकी जीत किसी राज्य में हुई तो ईवीएम का रोना कहीं नहीं रोया गया।

रात को करता रेप, जबरन पढ़वाता था नमाज, माँस खाने को करता था मजबूर: दानिश के कैद में 2 महीने तक रही 14 साल की हिंदू लड़की

कानपुर में लव जिहाद से जुड़ा एक वीभत्स मामला सामने आया है। यहाँ दानिश नाम के युवक ने इंस्टाग्राम के माध्यम से 14 साल की एक नाबालिग लड़की को बड़े-बड़े सपने दिखाकर अपने प्रेमजाल में फँसा लिया। लड़की जब उसके चंगुल में फँस गई, तो उसने लड़की को अगवा कर लिया और उसे बंधक बनाकर लगातार दुष्कर्म करता रहा। इतना ही नहीं, उससे प्रतिबंधित मांस खाने और नमाज पढ़ने के लिए विवश करता था।

दानिश लड़की को इंस्टाग्राम पर बँगले और गाड़ियों की तस्वीरें भेजा करता था। वह अपने आपको बेहद अमीर दिखाता था। हालाँकि, दानिश एक नाले पर बनी एक कमरे की झुग्गी में परिवार के साथ रहता था। लड़की जब उसके झाँसे में आ गई तो उसे अपनी झुग्गी में बंधक बना लिया। एक कमरे की झुग्गी में जब उसके परिवार के लोग सो जाते थे तो वह लड़की का मुँह दबाकर उसके साथ दुष्कर्म करता था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये मामला कानपुर के चकेरी थाना क्षेत्र का है। दानिश पुत्र गुलफाम 14 साल की लड़की को 22 अक्टूबर 2023 को मिलने के लिए बुलाया था। जब लड़की आई तो वह उसे मैकूपुरवा लेकर गया और वहाँ बंधक बना लिया। वह नाबालिग से दो महीने तक दुष्कर्म करता रहा। इस दौरान लड़की ने भागने की कई बार कोशिश की, लेकिन नाकाम रही।

पीड़िता ने बताया है कि दानिश उसे जबरन मांस खिलाता था और नमाज पढ़वाता था। इसमें उसका परिवार भी उसकी मदद करता था। मना करने पर उसे मारा-पीटा जाता था। यही नहीं, दानिश उससे 30 दिसंबर 2023 को उसका धर्मांतरण कराकर उससे जबरन निकाह करने भी करने वाला था। हालाँकि, इस बीच उसके बारे में हिंदू संगठनों को जानकारी तो वे उसे दानिश के चंगुल से मुक्त कराकर लाए।

इतना ही नहीं, मांस खाने, नमाज पढ़ने और निकाह करने से मना करने पर दानिश उसे हत्या की धमकी देता था। लड़की के पिता एक फैक्ट्री में काम करते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी का तीन महीने पहले सोशल मीडिया पर एक मुस्लिम लड़के से जान-पहचान हुई थी। बाद में वह उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर अपने साथ लेकर चला गया। लड़की के पिता की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

हिंदू संगठनों ने किशोरी को बचाया

विहिप के जिला उपाध्यक्ष आनंद सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा, “मैकूपुरवा के पास की रहने वाली दुर्गा वाहिनी की कार्यकर्ता ने उन्हें किशोरी के बंधक होने की सूचना दी थी, जिसके बाद विहिप और बजरंग दल के कार्यकर्ता आरोपित के ठिकाने पर पहुँचे। पहले तो डरी-धमकी लड़की ने आरोपित के पक्ष में बात की, लेकिन बाद में रोने लगी और आपबीती बताई।”

उन्होंने आगे बताया, “आरोपित और उसका परिवार उसे जबरन माँस खिलाते थे। बोलते थे कि इससे तुम हिंदू से मुस्लिम बन जाओगी, फिर तुम्हारा निकाह करा देंगे। वो लोग रोज उसे नमाज पढ़वाते थे। मना करने पर पीटते थे। एक दिन युवक और उसका पत्रकार साथी मौलाना को लेकर ठिकाने पर पहुँचे और 30 दिसंबर 2023 को निकाह की बात कही।”

आनंद सिंह बताया कि इसके बाद उनकी टीम दानिश के ठिकाने पर पहुँची और उसे मुक्त कराकर पुलिस के माध्यम से घर पहुँचा दिया। इस मामले में कानपुर कमिश्नरेट के एडीसीपी-ईस्ट ने बताया कि आरोपित दानिश को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके खिलाफ सुसंगत धाराओं में केस दर्ज किया गया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।

पीड़िता ने हिंदू संगठनों से अपनी आपबीती में बताया कि दानिश ने इंस्टाग्राम पर बंगले और कार की तस्वीरें लगा रखी थी। वो बंगले के आसपास खड़े होकर फोटो खींचता था और भेजता था। जब वो उसे लेकर आया तो एक झोपड़ी में ले गया। इस झोपड़ी में पर्दा टंगा था और उसी में पूरा परिवार रहता था। जब सब लोग सो जाते थे तो वो मुँह दबाकर दुष्कर्म करता था और शोर मचाने पर धमकाता था।

बांग्लादेश में हिंदू परिवार की 8 एकड़ जमीन पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने किया कब्जा, धमकाया: ‘लैंड जिहाद’ पर पुलिस भी नहीं कर रही सुनवाई

भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में सत्तारूढ़ अवामी लीग (एएल) पार्टी से जुड़े इस्लामी कट्टरपंथियों के एक समूह ने एक हिंदू परिवार की जमीन पर कब्जा कर लिया है। यह मामला हितबंध उपजिले के पारुलिया गाँव का है। पीड़ित हिंदू परिवार ने अपनी 8 एकड़ जमीन पर कब्जे की शिकायत पुलिस से भी की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। उलटा आरोपितों ने पीड़ित परिवार को धमकाया और उन पर हमला किया।

पीड़ितों की पहचान रथींद्र नाथ रॉय और उनकी पत्नी सुशीला रानी के तौर पर हुई है। उनका आरोप है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद भी पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, जमीन हड़पने वालों में एएल नेता हफीजुल इस्लाम, अबुल कलाम, हजरत अली और रेदवान अहमद शामिल हैं। हफीजुल और अबुल क्रमशः पतिकपारा यूनियन वार्ड नंबर 4 के पार्टी अध्यक्ष और महासचिव हैं।

पीड़ित परिवार ने उनकी जमीन कब्जाने वाले इन आरोपितों और उनके समर्थकों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हिंदू परिवार का कहना है कि उन्हें अपनी ही जमीन पर जाने पर गंभीर नतीजे भुगतने की धमकी दी गई है। पीड़ित रथींद्र ने बताया कि 40 से 45 साल पहले कटाव के कारण उनकी पैतृक भूमि का बड़ा हिस्सा तीस्ता नदी ने निगल लिया था। लगभग 10 साल पहले उसी जगह पर नदी के तल से एक विशाल भूभाग उभरा और धीरे-धीरे नदी से घिरी भूमि में बदल गया।

उन्होंने बताया कि उसके बाद से इस जमीन पर खेती कर रहे थे। लेकिन 13 नवंबर 2023 को जब वे और उनकी पत्नी सुशीला मक्के की रोपाई के लिए गए तो आरोपित उस जमीन पर अपना दावा करने लगे। उन्होंने बताया कि आरोपितों और उनके समर्थकों ने उन्हें बेरहमी से पीटा और जमीन से भगा दिया। रथींद्र की पत्नी सुशीला का कहना है कि आरोपित अब उनके पति पर एक गैर-न्यायिक स्टांप पर दस्तखत करने का दबाव डाल रहे हैं। इसमें लिखा है कि वह जमीन का मालिकाना हक उन्हें सौंप रहे हैं।

आरोपितों में से एक अबुल कलाम ने दावा किया कि उसने तीन अन्य लोगों के साथ मिलकर हाल ही में रथींद्र नाथ से 80 लाख टका में आठ एकड़ जमीन खरीदी हैं। भारतीय मुद्रा में यह रकम करीब 60.39 लाख रुपए बैठती है। अबुल कलाम का कहना है कि यहाँ पर गैर-न्यायिक स्टांप पर दस्तखत कर जमीनें खरीदी या बेची जाती हैं, क्योंकि चर क्षेत्रों में जमीन की रजिस्ट्री नहीं होती है। एक अन्य आरोपित हजरत अली ने जमीन का सौदा 87 लाख टका में होने की बात कही है।

वहीं हितबंध पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी शाह आलम ने इस बारे में शिकायत मिलने की पुष्टि की है। उनका कहना है कि जमीन से जुड़ा मामला होने के कारण पतिकापरा यूनियन परिषद के चेयरमैन को स्थानीय स्तर पर इस मामले को सुलझाने के लिए कहा गया है। परिषद के चेयरमैन मजीबुल आलम अवामी लीग की उपजिला ईकाई के संगठन सचिव भी हैं। उनका कहना है कि रथींद्र की शिकायत सही पाने जाने पर आरोपितों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

बताते चलें कि बांग्लादेश में चुनाव होने जा रहे हैं। इससे पहले ही हिंदू समुदाय को राजनीतिक हिंसा का शिकार होना पड़ रहा है। धार्मिक उत्पीड़न से बचने के लिए यहाँ के खुलना डिवीजन के शैलकुपा उपजिले में कई हिंदू परिवारों को अपने घर खाली करने और सस्ते दामों पर बेचने के लिए मजबूर होने के मामले सामने आए हैं।

नवंबर 2023 में कालबेला की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि अल्पसंख्यक समुदाय को इस्लामवादियों से खतरे का सामना करना पड़ रहा है। कई हिंदू परिवार देश के अन्य हिस्सों में पलायन कर रहे हैं। सत्येन्द्रनाथ साहा नाम के एक मृत हिंदू के घर पर कब्ज़ा कर 4 मंजिला इमारत बना दी गई थी। ‘जुबो लीग’ के अध्यक्ष (शैलकुपा उपजिला) शमीम हुसैन मोल्ला और उसके पिता सबदर हुसैन मोल्ला पर इस हिंदू परिवार की संपत्ति कब्जाने का आरोप लगाया गया था। बता दें कि ‘जुबो लीग’ सत्तारूढ़ शेख हसीना के नेतृत्व वाली बांग्लादेश अवामी लीग पार्टी की युवा शाखा है।

सत्येन्द्रनाथ साहा की बहू का आरोप है कि ‘जुबो लीग’ नेता ने उनके घर और काली मंदिर पर जबरन कब्जा कर लिया। स्थानीय सांसद मोहम्मद अब्दुल हई से शिकायत के बावजूद आरोपितों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। दिलचस्प बात यह है कि अब्दुल हई झेनाइदाह निर्वाचन क्षेत्र से बांग्लादेश अवामी लीग पार्टी के नेता भी हैं।

चुनाव खत्म होते ही राष्ट्रसेवा के मिशन पर निकल पड़े प्रबल प्रताप जूदेव: 8 परिवारों को सनातन में वापस लेकर लौटे, कहा- आजीवन करवाता रहूँगा घर वापसी

छत्तीसगढ़ के जशपुर का जूदेव परिवार धर्मांतरित लोगों की घर वापसी के लिए अभियान चलाने को लेकर प्रसिद्ध रहा है। छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों के बाद फिर से बीजेपी नेता अखिल भारतीय घर वापसी प्रमुख प्रबल प्रताप सिंह जूदेव इस मिशन में जुट गए हैं। किलकिला धाम में उन्होंने 8 परिवारों की सनातन में वापसी करवाई है। इस दौरान उन्होंने हमेशा की तरह सभी लोगों के चरण पखारकर, उन्हें नमन कर हिंदू धर्म में उनकी वापसी करवाई। इससे ठीक पहले कोरबा में उन्होंने 101 परिवारों की घर वापसी करवाई थी।

ये सभी लोग ईसाई मिशनरियों की लालच में आकर हिंदू धर्म छोड़ चुके थे। लेकिन अब वापस मिशनरियों की चालबाजी समझने के बाद इन्होंने दोबारा सनातन में लौटने का फैसला किया और प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने इन्हें सम्मान देते हुए घर वापसी कराई।

अपने एक्स अकॉउंट पर जारी तस्वीरों के साथ उन्होंने बताया कि राष्ट्रविरोधी ताकतों को मुँहतोड़ जवाब देने के लिए किलकिलेश्वर धाम, पत्थलगाँव (छत्तीसगढ़) की पावन धरा में 8 परिवार के सदस्यों की ‘घर वापसी’ हुई। उन्होंने धर्म जागरण, आर्य समाज ,किलकिलेश्वर धाम न्यास का हृदय से धन्यवाद देते हुए कहा, “मैं संकल्पित हूँ आजीवन सनातन की रक्षा हेतु घर वापसी करवाता रहूँगा।”

बता दें कि इससे पहले उन्होंने छत्तीसगढ़ के कोरबा में धर्मांतरण का शिकार हुए 101 परिवारों की धर्म सेना ने विधि-विधान से हिंदू धर्म में घर वापसी कराई। उस समय भी उन्होंने लोगों के गंगा जल से पैर पखारकर उनका सम्मान किया, हाथ जोड़ नमन किया और उन्हें तिलकर घर वापसी की बधाई दी। इसके अलावा उन्होंने इसी सी वर्ष की शुकुआत में उन्होंने 1100 लोगों की सामूहिक घर वापसी करवाई थी। अप्रैल में उन्होंने 100 परिवार की घर वापसी करवाई थी।