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30 दिसंबर को अयोध्या में रहेंगे PM मोदी, एयरपोर्ट महर्षि वाल्मीकि के नाम: 6 जनवरी से विमान सेवा, 22 जनवरी को रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा

22 जनवरी 2024 को अयोध्या के भव्य राम मंदिर में भगवान रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा होनी है। उससे पहले 30 दिसंबर 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में होंगे। इस दौरान वे अयोध्या के अत्याधुनिक रेलवे स्टेशन और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन करेंगे। इसके अलावा वे जनसभा और रोड शो भी करेंगे।

अयोध्या का नवनिर्मित एयरपोर्ट, महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा अयोध्या धाम कहलाएगा। इससे पहले 27 दिसंबर को रेलवे स्टेशन का नाम अयोध्या जंक्शन से अयोध्या धाम करने का फैसला किया गया था। 30 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस नवनिर्मित एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन का उद्घाटन करने के साथ कई अन्य परियोजना भी राष्ट्र को समर्पित करेंगे।

इस एयरपोर्ट से विमानों का परिचालन 6 जनवरी से शुरू होगा। 6 जनवरी को पहली फ्लाइट सुबह 11:55 बजे दिल्ली से उड़ान भरेगी और दोपहर 1:15 बजे अयोध्या पहुँचेगी। यही फ्लाइट दोपहर 1:45 बजे अयोध्या से रवाना होकर 3 बजे दिल्ली पहुँचेगी। पहले चरण में अयोध्या से दिल्ली और अहमदाबाद के लिए भी उड़ानें शुरू होंगी। 11 जनवरी 2024 से अहमदाबाद और अयोध्या के बीच हफ्ते में तीन दिन फ्लाइट होंगी।

पीएम मोदी 30 दिसंबर को पुनर्विकसित अयोध्या धाम जंक्शन का उद्घाटन करेंगे। यहाँ से नई अमृत भारत और वंदे भारत ट्रेनों को हरी झंडी दिखाएँगे। इसके बाद वे महर्षि वाल्मिकी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा का उद्घाटन करेंगे। पीएमओ के मुताबिक अयोध्या में प्रधानमंत्री का 30 दिसंबर को सुबह करीब 11:15 बजे से शुरू हो जाएगा।

पीएम मोदी एक सार्वजनिक सभा को भी संबोधित करेंगे। इस दौरान वे उत्तर प्रदेश के लिए 15,700 करोड़ रुपए से अधिक की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। इनमें अयोध्या और उसके आसपास के क्षेत्रों के विकास के लिए लगभग 11,100 करोड़ रुपए की परियोजनाएँ तो राज्य के अन्य हिस्सों के लिए लगभग 4600 करोड़ रुपए की परियोजनाएँ शामिल हैं।

राम मंदिर जैसा बना एयरपोर्ट

अयोध्या एयरपोर्ट नागर शैली में राममंदिर की तरह बनाया गया है। यहाँ एयरपोर्ट की दीवारों पर रामायण से जुड़ी अहम घटनाओं को उकेरा गया है। इस एयरपोर्ट का वास्तु और डिजाइन पूरी तरह से भगवान राम के जीवन से प्रेरित है।

इसे आर्किटेक्ट विपुल वार्ष्णेय की निगरानी में बनाया गया है। वार्ष्णेय के मुताबिक, एयरपोर्ट के सात शिखर नागर शैली में बने हैं। मुख्य शिखर बीच में और आगे 3 और पीछे 3 शिखर हैं। इसके अलावा एयरपोर्ट के बाहर तीर-धनुष का बड़ा म्यूरल बनाया गया है। यह एयरपोर्ट रामायण के सात कांड से प्रेरित सात स्तंभों पर से टिका है। अयोध्या एयरपोर्ट का पहला चरण 1,450 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से तैयार हुआ है।

एयरपोर्ट टर्मिनल भवन का क्षेत्रफल 6500 वर्गमीटर है। ये सालाना लगभग 10 लाख यात्रियों की क्षमता के हिसाब से बनाया गया है। इस एयरपोर्ट के टर्मिनल की इमारत में कई तरह की आधुनिक सुविधाएँ दी गई हैं। यहाँ इंसुलेटेड रूफिंग सिस्टम, एलईडी लाइटिंग, वर्षा जल संचयन, वाटर ट्रीटमेंट प्लाँट, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, सौर ऊर्जा संयंत्र इसकी खूबियों को बढ़ातें हैं।

उधर दूसरी तरफ अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन पहला चरण 240 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से तैयार किया गया। इस तीन मंजिला आधुनिक रेलवे स्टेशन में लिफ्ट, एस्केलेटर, फूड प्लाजा, पूजा की जरूरतों के लिए दुकानें, क्लॉक रूम, चाइल्ड केयर रूम, वेटिंग हॉल जैसी आधुनिक सुविधाओं दी गई है।

UP की शाबिया बनी सीता, संजय के साथ मंदिर में लिए सात फेरे: परिवार के विरोध पर बोली- मैं बालिग, अपनी जिंदगी का फैसला लेने का मुझे अधिकार

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में परिजनों के विरोध के बावजूद एक मुस्लिम लड़की ने अपने हिंदू प्रेमी के साथ विवाह किया है। इस युवती का नाम शाबिया है। घर वापसी के बाद उसका नाम सीता रखा गया है। 27 दिसंबर 2023 को हिंदू विधि-विधान के साथ उसने मंदिर में शादी की। इस दौरान बजरंग दल और अन्य हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ता मौजूद थे।

रिपोर्ट के अनुसार 20 साल की साबिया जिले बहुआ ब्लॉक के नरतौली गाँव की रहने वाली है। 22 साल का संजय उसकी पड़ोस के गाँव सोनबरसा का रहने वाला है। दोनों के बीच तीन साल से प्रेम संबंध चल रहा था। लेकिन शाबिया का परिवार दोनों की शादी का विरोध कर रहा था। पहले दोनों ने कोर्ट मैरिज का फैसला किया। लेकिन शाबिया के परिजनों ने वहाँ हंगामा कर दिया। इसके बाद बजरंग दल से जुड़े लोगों ने तांबेश्वर शिव मंदिर में दोनों की शादी करवाई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक संजय का नरतौली गाँव में आना-जाना था। इसी दौरान शाबिया से उसकी मुलाकात हुई थी। बुधवार (27 दिसंबर 2023) को प्रेमी जोड़े ने कोर्ट के माध्यम से राजीनामा लिखा। लेकिन इस दौरान लड़की के परिजनों ने हंगामा कर दिया। इसकी सूचना मिलते ही हिंदू संगठनों से जुड़े लोग मौके पर पहुँच गए। दोनों को तांबेश्वर मंदिर ले गए। यहाँ प्रेमी जोड़े ने मन्त्रोचारण के बीच मंदिर में सात फेरे लिए और हमेशा के लिए एक-दूजे के हो गए।

शादी के बाद शाबिया ने बताया, “मैं जब 17 साल की थी, तब से संजय से मेरा अफेयर चल रहा है। इसमें धर्म की कोई बात नहीं है। अब मैं 20 साल की हो गई हूँ। बालिग हूँ और मुझे मेरी जिंदगी का फैसला लेने का पूरा अधिकार है।” शादी के बाद हिंदू संगठन के लोगों ने नवविवाहित जोड़े को 10 हजार रुपए का चेक भी सौंपा, ताकि उन्हें अपनी जिंदगी को शुरू करने में कोई दिक्कत नहीं आए। शादी के बाद संजय और सीता (शाबिया) दिल्ली के लिए रवाना हो गए।

कनाडा में हिंदू मंदिर के प्रमुख के परिवार को खालिस्तानियों ने बनाया निशाना, बेटे के घर पर फायरिंग: यहीं हुई थी आतंकी निज्जर की हत्या

कनाडा के सरे में लक्ष्मी नारायण मंदिर के अध्यक्ष सतीश कुमार के बड़े बेटे के घर पर खालिस्तानियों ने ताबड़तोड़ गोलियाँ बरसाई। मीडिया खबरों के अनुसार, इस दौरान घर पर 11 से 14 बार फायरिंग हुई। घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है लेकिन बताया जा रहा है कि घर को काफी नुकसान हुआ है। पुलिस सीसीटीवी देख आरोपितों का पता लगाने का प्रयास कर रही है।

जानकारी के मुताबिक यह घटना उसी शहर में घटी है जहाँ खालिस्तानी निज्जर की हत्या हुई थी। 27 दिसंबर 2023 की सुबह सरे में करीबन 8:00 बजे 80 एवेन्यू के 14900 ब्लॉक में गोलियाँ चलाई गईं। फिर सरे रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस के बयान से पता चला कि जिस घर पर गोलीबारी की गई वो हिंदू मंदिर के प्रमुख के बड़े बेटे का घर है।

गोलीबारी की सूचना मिलने के बाद पुलिस कई घंटों तक घटनास्थल पर रही और घटनास्थल का मुआएना करती रही। उन्होंने गवाहों से बात की, सीसीटीवी फुटेज देखे। आस-पड़ोस में छापेमारी लेकिन ज्यादा जानकारी नहीं मिली। अब सरे की आरसीएमपी जनपल इन्वेस्टिगेशन यूनिट ने जाँच को अपने हाथ में ले लिया है और अधिकारी हमले के पीछे के मकसद का पता लगाने के लिए काम कर रहे हैं।

बता दें कि कनाडा में सक्रिय खालिस्तानी तत्वों के कारण हिंदू मंदिर पर हमले की घटनाएँ अब तक कई बार सामने आ चुकी है। जिस मंदिर के अध्ययक्ष के बेटे के घर यह हमला हुआ है, उससे पहले उस मंदिर को भी खालिस्तानी निशाना बना चुके हैं। तब, लक्ष्मी नारायण मंदिर में भारत विरोधी पेंटिंग की गई थी। वहीं बाहर खड़े होकर नारेबाजी भी हुई थी। इसी तरह टोरंटो में भी मंदिर के भीतर तोड़फोड़ की घटना सामने आई थी। इसके अलावा ब्रैम्पटन में भी एक प्रमुख हिंदू मंदिर में काफी तोड़फोड़ हुई थी।

बिट्टू बजरंगी ने फरीदाबाद पुलिस से की मोहम्मद जुबैर की शिकायत, कहा- वह एक शातिर अपराधी, मेरे भाई पर हमला करने वाले सिंडिकेट का हो सकता है हिस्सा

गौरक्षक बिट्टू बजरंगी के भाई की हत्या के प्रयास के मामले को झूठा बताकर फेक न्यूज फैलाने वाले ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी गई है। खुद बिट्टू बजरंगी ने फेक न्यूज फैक्ट्री मोहम्मद जुबैर की शिकायत पुलिस से की है और बताया है कि उसने मेरे बारे में पहले भी अफवाहें फैलाई हैं। इस बार उनके झूठी मीडिया रिपोर्ट के आधार पर इस घिनौनी कार्रवाई को अंजाम दिया, जबकि उनका भाई जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा था।

बता दें कि बिट्टू बजरंगी ने कहा था कि मोहम्मद जुबैर उनके भाई को लेकर झूठी खबरें फैला रहा है और इसको लेकर वह कार्रवाई करेंगे। इसके बाद उन्होंने गुुरुवार (28 दिसंबर 2023) को फरीदाबाद पुलिस को शिकायत की है। बिट्टू बजरंगी द्वारा पुलिस से की गई शिकायत की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। इसमें उन्होंने जुबैर को कट्टरपंथी और घोर सांप्रदायिक बताया है।

शिकायत में बिट्टू ने लिखा है, “फैक्ट चेकर की आड़ में छिपे एक कट्टरपंथी और घोर सांप्रदायिक मोहम्मद जुबैर नाम का व्यक्ति, जो फेक न्यूज फैलाने के लिए पूरे देश ही नहीं बल्कि इजरायल और अरब देशों तक में कुख्यात है, उसने अब मेरे भाई के मामले में भ्रामक खबर वायरल की है। मेरे भाई महेश को 13 दिसंबर 2023 को संदिग्ध हालातों में सारन थानाक्षेत्र एनआईटी फरीदाबाद में जला दिया गया था। इस मामले में अरमान नामजद है। मुझे कानून पर भरोसा है।”

शिकायत में आगे लिखा है, “मेरी चुप्पी का नाजायज फायदा उठाकर बिना पुलिस का वर्जन लिए हिंदुस्तान टाइम्स नाम के न्यूज संस्थान की एक वामपंथी सोच वाली महिला पत्रकार ने दिनांक 13-12-3023 को एक आधारहीन खबर प्रकाशित की। इस खबर को पुलिस सूत्रों पर आधारित बताया गया। खबर में मेरे भाई के केस में नामजद आरोपित अरमान को क्लीन चिट देने जैसी बातें लिखी गई थीं। इसके बाद मोहम्मद जुबैर ने इस खबर पर बिना पुलिस की प्रतिक्रिया सामने आए ही वायरल करना शुरू कर दिया। जुबैर ने अन्य मीडिया संस्थानों को भी अफवाह का हिस्सा बनने के लिए कहा।”

शिकायत में लिखा गया है, “हालाँकि उसके दावे को एसआईटी टीम को लीड कर रहे एसीपी अमन यादव ने 25 दिसंबर 2023 को एक अन्य मीडिया संस्थान से बात करते हुए खंडन किया। एचटी मीडिया के खिलाफ मैं सूचना प्रसारण मंत्रालय में शिकायत दूँगा, लेकिन मोहम्मद जुबैर द्वारा फैलाई गई अफवाह के चलते मेरे परिवार की काफी सामाजिक हानि हुई। यह एक पूरी सोची समझी साजिश है, न सिर्फ आरोपित को बचाने की, बल्कि पीड़ित को मानसिक तनाव देकर मार भी डालने की।”

शिकायत के अनुसार, “आशंका इस बात की भी है कि कहीं जुबैर भी मेरे भाई पर हमला करने वाले सिंडिकेट का हिस्सा न हो, क्योंकि नूहँ हिंसा के दौरान इसने मेरे खिलाफ लगातार भ्रामक खबरें शेयर की थीं। अत: इसकी भी जाँच आवश्यक प्रतीत होती है। मोहम्मद जुबैर एक शातिर अपराधी है, जिसके खिलाफ दिल्ली और उत्तर प्रदेश में पहले कई मामले दर्ज हैं।”

नूपुर शर्मा का जिक्र करते हुए इसमें कहा गया है, “इसी की उड़ाई गई अफवाह पर नूपुर शर्मा के खिलाफ पूरे देश में हिंसा हुई। कमलेश तिवारी हत्याकांड मामले में भी जुबैर की अफवाह ने नकारात्मक भूमिका अदा की थी। इजरायल-हमास युद्ध में भी जुबैर भारत सरकार की नीति के खिलाफ जाकर आतंकियों के समर्थन में खड़ा हुआ था। जुबैर को इजरायली अधिकारियों द्वारा इस हरकत के लिए टोका भी गया था।”

बिट्टू बजरंगी ने आगे लिखा है, “प्रार्थी के परिजनों के खिलाफ पुलिस के नाम पर फर्जी अफवाह उड़ाने और पूरे परिवार को संकट में डालने के साथ पुलिस की कार्रवाई में बाधा डालने के जुर्म में मोहम्मद जुबैर पर कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही यदि भविष्य में मुझ पर या मेरे परिवार के खिलाफ भी कोई प्राणघातक हमला होता है तो उसमें मोहम्मद जुबैर को भी शामिल माना जाए।”

बता दें कि ‘गौरक्षा बजरंग फ़ोर्स’ के मुखिया बिट्टू बजरंगी ने 24 दिसम्बर 2023 को एक वीडियो जारी करके प्रोपेगंडा पोर्टल AltNews के सह-संस्थापक मुहम्मद जुबैर और ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ पर अपने भाई पर हुए हमले के बारे में झूठी खबर प्रसारित करने का आरोप लगाया था।

दरअसल, जुबैर ने ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ (HT) की रिपोर्ट सोशल मीडिया पर सच की तरह प्रकाशित की थी, जिस रिपोर्ट में हरियाणा पुलिस के हवाले से दावा किया था कि बिट्टू बजरंगी के भाई ने खुद पर हमले की झूठ कहानी रची थी, इस हमले में बिट्टू बजरंगी के भाई का शरीर 60% जल गया था। हालाँकि, मामले की जाँच कर कर रहे पुलिस अधिकारियों ने ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ की रिपोर्ट को नकार दिया है और कहा कि मामले की जाँच अभी चल रही है।

गौरतलब है कि 13 दिसम्बर 2023 को बिट्टू बजरंगी के भाई महेश को जान से मारने का प्रयास किया गया था। हमलावरों ने महेश के ऊपर फरीदाबाद की दाबुआ कॉलोनी में थिनर डाल कर आग लगा दी थी। महेश को अस्पताल ले जाया गया था, जहाँ से उन्हें दिल्ली रेफर कर दिया गया था। महेश का शरीर इस हमले में 60% जल चुका है।

इस हमले के विषय में फरीदाबाद पुलिस के पास मामला दर्ज करवाया गया था जिसकी जाँच हरियाणा पुलिस की SIT कर रही है। इसी मामले में 22 दिसम्बर, 2024 को ‘हिन्दुतान टाइम्स’ में लीना धनखड़ नाम की एक पत्रकार ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी।

HT में प्रकाशित इस खबर में लिखा था कि फरीदाबाद पुलिस ने कहा है कि बिट्टू बजरंगी के भाई अलाव में गिर जाने के कारण जल गए थे और उनकी हत्या के प्रयास के कोई सबूत नहीं हैं। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के हवाले से कहा गया था कि बिट्टू बजरंगी के भाई महेश पांचाल के जलने के मामले में पुलिस में फर्जी शिकायत दर्ज कराई गई और एक गौतस्कर को इसमें फँसाया गया।

हालाँकि, ऑपइंडिया से बातचीत में पुलिस ने ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की इस खबर को नकार दिया था। फरीदाबाद के ACP ने इस खबर के बारे में बताए जाने पर पूछा कि आखिर पुलिस में किसने इस केस को फेक बता दिया? उन्होंने कहा कि ये बात ठीक है कि अभी इस मामले में आरोपित के खिलाफ सबूत नहीं मिले हैं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि केस फर्जी होने की बात कही गई है। उन्होंने इसकी पुष्टि की थी कि बिट्टू बजरंगी के भाई जल गए हैं।

पुणे की जो महिला जिंदा भी नहीं, उसकी झुग्गी के फर्जी रेंट एग्रीमेंट से बांग्लादेशियों ने बनवा लिए पासपोर्ट: अब तक 22 गिरफ्तार

सुमन तुजारे जीवित नहीं हैं। लेकिन पुणे की इस महिला की झुग्गी का फर्जी एग्रीमेंट बनवाकर बांग्लादेशियों ने पासपोर्ट तक बनवा लिए। अरब देशों में जाने और रोजगार पाने के लिए इन्होंने भारतीय पासपोर्ट बनाए थे। मुंबई पुलिस की पड़ताल से यह खुलासा हुआ है। अब तक इस मामले में 20 बांग्लादेशी घुसपैठिए और उनके 2 भारतीय मददगार गिरफ्तार किए गए हैं।

मुंबई पुलिस की एक स्पेशल बीते ढाई महीने से इस मामले की पड़ताल कर रही है। इन बांग्लादेशियों की पासपोर्ट की जाँच से इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। मुंबई पुलिस के मुताबिक, 6 बांग्लादेशियों ने सुमन तुजारे नाम की मृत महिला की का पर्जी एग्रीमेंट तैयार कर पासपोर्ट बनवाए है। पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ पासपोर्ट अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

पुणे पुलिस ने पासपोर्ट आवेदन की जाँच के दौरान इस पते को वेरिफाई भी कर दिया था। इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि जब उनकी टीम ने इस पते की जाँच की, तो परिजनों ने कुछ साल पहले ही सुमन तुजारे की मौत हो जाने की पुष्टि की। इन्होंने यह भी बताया कि उनकी झुग्गी कभी किसी के किराए पर नहीं दी गई थी।

रिपोर्ट के अनुसार तुजारे के नाम पर बांग्लादेशियों ने रेंट का फर्जी एग्रीमेंट बनाकर पासपोर्ट कार्यालय में जमा किया। पुलिस ने इसे सत्यापित भी कर दिया। पुणे पुलिस कमिश्नर रेतेश कुमार ने कहा है कि इस मामले में पासपोर्ट वेरिफिकेशन विभाग के 5 कर्मचारियों के खिलाफ जाँच शुरू की गई है। इनके खिलाफ जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।

मुंबई पुलिस चला रही विशेष अभियान

मुंबई पुलिस की एंटी टेररिस्ट सेल (एटीसी) के एसआई प्रमोद निंबालकर और सीनियर इंस्पेक्टर निनाद सावंत की अगुवाई में बोरीबली थाने की टीम इस तरह के केस हैंडल कर रही है। इस टीम ने अब तक 20 बांग्लादेशी घुसपैठियों और उनके दो भारतीय सहयोगियों को गिरफ्तार किया है। ये लोग फर्जी कागजातों के सहारे पैन कार्ड, आधार कार्ड और अन्य डॉक्यूमेंट्स के बहाने पासपोर्ट बनवाते थे और मिडिल ईस्ट के देशों में जाने की कोशिश करते थे।

पुलिस ने बताया कि अकेले पुणे से ही 10 भारतीय पासपोर्ट फर्जी रेंट एग्रीमेंट्स, फर्जी भारतीय जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोट आईडी कार्ड के जरिए बनाए गए थे। मुंबई पुलिस ने मुंबई और पुणे से इन्हें बरामद किया है। साथ ही बांग्लादेशी करेंसी भी बरामद हुई है। एसआई प्रमोद निंबालकर ने बताया, “पुणे से बने 10 फर्जी पासपोर्ट में से 6 पर सुमन तुजारे की येरवडा स्थित झुग्गी के पते का इस्तेमाल किया गया तो 4 पर रामतेकड़ी इलाके का पता दर्ज है।”

इस मामले में राहुल सिंह उर्फ शाहरुख खान और सलमान अयूब खान (दोनों बांग्लादेशी) बांग्लादेशियों को अवैध तरीके से भारत में प्रवेश कराते थे। राहुल पुणे में रहता था। माना जा रहा है कि वो बांग्लादेश भाग गया है। वहीं सलमान को गिरफ्तार कर लिया गया है।

निंबालकर ने बताया, “पश्चिम बंगाल पहुँचने पर बांग्लादेशियों को फर्जी भारतीय जन्म प्रमाण-पत्र दिए जाते थे। इसके बाद उन्हें मुंबई और पुणे भेज दिया जाता। यहाँ उन्हें आधार कार्ड और पैन कार्ड बनाने में मदद की जाती। इसके बाद पुणे के फर्जी पते पर उन्हें पासपोर्ट हासिल करने में मदद की जाती। यहाँ एजेंट्स के जरिए फर्जी रेंट एग्रीमेंट का इस्तेमाल किया जाता। पुणे में कुछ वकील बिना जाँच के ही रेंट एग्रीमेंट को नोटरी में बदल देते थे।”

उन्होंने बताया, “इस खेल के पीछे एक बड़ा रैकेट काम करता दिख रहा है। यह रैकेट बांग्लादेशी घुसपैठियों को भारत लाता है और उन्हें भारतीय पहचान देकर अरब देशों तक जाने में मदद करता है। इसके बदले घुसपैठियों से 7 लाख तक की रकम उगाही जाती थी। इस काम में एक वेबसाइट की भी मदद ली जाती थी।”

निंबालकर ने कहा, “हमारी जाँच में पता चला है कि पिछले कुछ सालों में भारतीय पासपोर्ट का इस्तेमाल कर लगभग 70 बांग्लादेशी अरब देशों में एंट्री कर चुके हैं। इस प्रक्रिया में जो लोग पकड़े भी जाते हैं, उनसे इसी तरह के फर्जीवाड़े का पता चलता है।”

PM मोदी का नेतृत्व, जयशंकर की कूटनीति… पूर्व नौसैनिकों की मौत की सजा से कतर ने यूँ ही नहीं खींचे हाथ: जानिए कैसे बनी बात

कतर की अदालत ने भारत के 8 पूर्व नौसेना अधिकारियों को कथित तौर पर जासूसी के मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी। अब फाँसी की सजा बदल दी गई है। इन्हें अब फाँसी नहीं होगी। हालाँकि, ये नहीं पता चल पाया है कि अभी उन्हें कितनी सजा दी गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की कूटनीति ने अपना असर दिखाया है, जिसके कारण इस मामले में पीड़ित परिवारों को राहत मिली है।

किन्हें सुनाई गई थी फाँसी की सजा और क्यों?

कतर में भारत के 8 पूर्व नौसेना अधिकारियों को 30 अगस्त 2022 को दोहा से गिरफ्तार किया गया था। इन्हें गिरफ्तार करने का कारण कतर की सरकार ने आज तक नहीं बताया। हालाँकि, मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि इन पूर्व सैनिकोें पर इजरायल के लिए जासूसी करने का आरोप लगाया गया है। ये सभी पूर्व अधिकारी कतर की राजधानी दोहा की अल दाहरा नाम की एक प्राइवेट कंपनी में काम कर रहे थे।

जिन अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें शामिल हैं- कमांडर पूर्णेन्द्रु तिवारी, कमांडर नवतेज सिंह गिल, कमांडर वीरेंद्र कुमार वर्मा, कमांडर सुगुनाकर पकाला, कमांडर संजीव गुप्ता, कमांडर अमित नागपाल, कैप्टन सौरभ वशिष्ठ और कैप्टन गोपाकुमार हैं। ये सभी पिछले 5 साल से दाहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजी एंड कंसल्टेंसी में काम कर रहे थे।

यह कंपनी कतर की नौसेना को ट्रेनिंग और कंसल्टेंसी देने का काम करती है। इस कंपनी को ओमानी एयरफोर्स के रिटायर्ड स्क्वाड्रन लीडर खमीस अल अजमी ने स्थापित किया था और वे इस कंपनी के सीईओ थे। इस मामले में खमीस को भी गिरफ्तार किया गया था, लेकिन कतर की सरकार ने उन्हें 18 नवंबर 2022 को ही रिहा कर दिया था।

इन सभी लोगों पर कतर के सबमरीन प्रोजेक्ट की जानकारी इजरायल को देने का आरोप लगाया था। कतर कोर्ट ने इन्हें 26 अक्टूबर 2023 को मौत की सजा सुना दी थी। इन सारी जानकारियों के बीच एक सवाल जो खड़ा होता है कि कतर की कोर्ट ने उन लोगों को कैसे बरी कर दिया, जिन्हें अब तक देश का दुश्मन समझ कर सीधे फाँसी पर लटकाने की कार्रवाई चल रही थी?

पीएम मोदी की एक मुलाकात, और…

भारत पर इन पूर्व अधिकारियों को बचाने का दबाव था। ऐसे में भारत सरकार कानूनी तौर पर इसे चुनौती दे रही थी। इसके साथ ही भारत डिप्लोमैटिक चैनल से भी बातचीत कर रहा था। नवंबर में जब इन लोगों को मौत की सजा सुनाई गई थी, तब तक इस बात की कोई जानकारी नहीं मिल पाई थी कि इन 8 लोगों के साथ क्या कुछ हो रहा है। फाँसी की सजा के बाद मामला दुनिया की नजर में आया।

भारत सरकार ने इन बंधकों के लिए कतर से कान्सुलर एक्सेस की माँग की। जिनेवा कन्वेंशन के मुताबिक, ऐसे मामलों में कांसुलर एक्सेस (राजनयिक पहुँच) देना उस देश के लिए जरूरी हो जाता है, जहाँ दूसरे देश के नागरिक गिरफ्तार किए जाते हैं। भारत ने नवंबर माह में कांसुलर एक्सेस हासिल कर लिया और केस के बारे में पूरी जानकारी हासिल की।

राजनयिक चैनल से भारत सरकार सक्रिय थी ही, कानूनी पहलुओं पर भी विचार हो रहा था। भारत सरकार के सहयोग से इन पूर्व अधिकारियों ने कतर के उच्च न्यायालय में अपील दायर की। अपील स्वीकार होने के बाद सरकार कानूनी प्रक्रिया में लग गई। इधर, भारत कतर पर राजनयिक दबाव भी बढ़ाता जा रहा था।

इस बीच, दिसंबर माह के शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दुबई में कतर के अमीर से मुलाकात हुई। पीएम मोदी COPE28 की बैठक में भाग लेने दुबई गए थे। इस मुलाकात के चार सप्ताह के भीतर ही फाँसी की सजा पलट गई। सुनवाई के समय कोर्ट में में भारत के राजदूत का मौजूद होना बताता है कि पीएम मोदी इस मामले को लेकर कितनी गंभीर थी।

विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया

भारत के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में बताया है कि सभी 8 पूर्व नौसैनिकों की फाँसी की सजा टल गई है। विदेश मंत्रालय ने बताया, “हम दहरा ग्लोबल मामले में अगले कदम पर निर्णय लेने के लिए कानूनी टीम के साथ-साथ परिवार के सदस्यों के साथ निकट संपर्क में हैं। कतर में हमारे राजदूत और अन्य अधिकारी परिवार के सदस्यों के साथ अपीलीय अदालत में उपस्थित थे। हम मामले की शुरुआत से ही उनके साथ खड़े रहे हैं।”

विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में आगे कहा, “हम सभी को (कतर की अदालत में बंद 8 पूर्व नौसैनिकों को) कांसुलर और कानूनी सहायता देना जारी रखेंगे। हम इस मामले को कतर के अधिकारियों के समक्ष भी उठाना जारी रखेंगे। इस मामले की गोपनीय और संवेदनशील प्रकृति के कारण इस समय कोई और टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।”

विशेषज्ञों का क्या कहना है?

विदेश मामलों के विशेषज्ञ रोबिंदर सचदेव ने एएनआई से बातचीत में कहा, “कतर की अदालत का फैसला वास्तव में पीड़ित परिवारों के लिए बड़ी राहत है। हालाँकि कितनी सजा हुई है, इस बात की जानकारी मिलने तक इंतजार करना होगा। लेकिन, हमें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में जो भी सजा होगी, वह सजा शायद कम भी की जा सकती है।”

सचदेव ने आगे कहा, “मुझे कोई संदेह नहीं है कि इसमें कूटनीति ने बड़ा काम किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में कतर के अमीर से मिले थे और उन्होंने जरूर ये मुद्दा कतर के अमीर के सामने उठाया होगा।” बता दें कि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पीएम मोदी के निर्देश के बाद इस मामले में हर कूटनीतिक दाँव-पेंच का इस्तेमाल किया।

वाइस एडमिरल अनिल चावला (सेवानिवृत्त) ने कहा, “यह खबर (फाँसी की सजा रुकने की) पूरे देश के साथ-साथ नौसैनिक समुदाय के लिए एक बड़ी राहत के रूप में आई है। हम मृत्युदंड को कम करने के लिए कतर के अमीर के आभारी हैं और साथ ही भारत सरकार विशेष रूप से प्रधानमंत्री मोदी के व्यक्तिगत हस्तक्षेप के लिए भी आभारी हैं। हमें उम्मीद है कि अधिकारियों को जल्द से जल्द रिहा कर भारत वापस भेजा जाएगा।”

ये आज का भारत है

कतर में आठ पूर्व नौसैनिक अधिकारियों को फाँसी के फंदे से बचाना हो, यूक्रेन युद्ध को रुकवाकर हजारों लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना हो या फिर गाजा-इजरायल से भारतीयों को वापस लाना हो, सूडान से भारतीयों को सुरक्षित भारत लाना हो या फिर मानव तस्करी के आरोप में फ्रांस में रोके गए 303 भारतीयों में से 280 को भारत वापस लाना हो… ये भारत सरकार की बढ़ती ताकत का प्रतीक है।

आज पूरा विश्व भारत की ओर देख रहा है। हर समस्या का समाधान पाने के लिए दुनिया भारत की ओर देखती है। रूस-यूक्रेन युद्ध को रुकवाने की गुहार हो, वैक्सीन पाने की लालसा हो या हमास-इजरायल युद्ध… हर तरफ से भारत से हस्तक्षेप की गुजारिश की जाती है।

ऐसा इसलिए, क्योंकि देश की कमान उस नरेंद्र मोदी के हाथों में है, जो राष्ट्र प्रथम की अवधारणा के दम पर भारत का मस्तक पूरी दुनिया में ऊँचा उठाए हुए हैं। तभी तो रूस हो या अमेरिका, सभी भारत के साथ सहयोग की भावना लेकर चलते हैं। यही तो आज का भारत है, जो दूसरों की दिखाई राह पर चलने की जगह खुद के बनाए रास्ते पर निडरता से आगे बढ़ रहा है।

महाराष्ट्र में INDI गठबंधन में मची मारामारी: उद्धव ठाकरे ने माँगे 23 सीट तो कॉन्ग्रेस ने याद दिलाई ‘औकात’, कहा- इनके पास नेता ही नहीं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रोकने के लिए विपक्षी दलों द्वारा बनाए गए INDI गठबंधन ‘मिट्टी का माधो’ ही साबित हो रहे हैं। विपक्षी दल अपने-अपने फायदे को लेकर अड़े हुए हैं। उनके बीच समन्वय नाम की चीज तक विकसित नहीं हो पाई है। अब यह बिखराव मध्य प्रदेश में देखने के बाद महाराष्ट्र में भी कॉन्ग्रेस और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) के बीच देखने को मिल रही है।

अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों में अब लगभग चार महीने का वक्त बचा है। ऐसे में कॉन्ग्रेस ने अपनी सहयोगी दल शिवसेना (यूबीटी) की माँग को खारिज कर दिया है। ठाकरे की पार्टी ने महाराष्ट्र की कुल लोकसभा सीटों- 48 में से 23 सीटों की माँग की है। कॉन्ग्रेस ने यह माँग ऐसे समय में खारिज की है, तब वह नागपुर में अपनी स्थापना की 138वीं वर्षगाँठ मना रही है।

दरअसल, कॉन्ग्रेस नेता संजय निरुपम ने कहा कि शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट को बेहद कठिन चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि उनकी पार्टी में विभाजन के कारण उनके पास उम्मीदवारों की कमी है। बता दें कि शिवसेना दो गुटों में बँट गई है। एक गुट उद्धव ठाकरे का है तो दूसरा एकनाथ शिंदे का है, जो महाराष्ट्र में भाजपा के साथ सत्ता में है। शिवसेना के अधिकांश नेता शिंदे गुट के साथ हैं।

निरुपम ने कहा कि नेताओं को जीतने वाली सीटों पर विवाद से बचना चाहिए। उन्होंने कहा, “शिवसेना 23 सीटों की माँग कर सकती है, लेकिन वे उनका क्या करेंगे? उनके पास नेता नहीं हैं।” बैठक में कॉन्ग्रेस के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि शिवसेना और शरद पवार की राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) में विभाजन हो गया है। इसके बाद राज्य में स्थिर वोट शेयर वाली एकमात्र पार्टी अभी कॉन्ग्रेस ही है।

वहीं, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक चव्हाण ने कहा कि गठबंधन में शामिल पार्टियों के बीच समायोजन की जरूरत है। चव्हाण ने कहा, “हर पार्टी सीटों में बड़ी हिस्सेदारी चाहती है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए शिवसेना की 23 सीटों की माँग बहुत अधिक है।”

पिछले हफ्ते शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने कहा था कि उन्होंने अपनी पार्टी के नेता उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे के साथ हाल ही में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी के साथ-साथ एआईसीसी महासचिव केसी वेणुगोपाल के साथ INDI अलाएंस की बैठक में बातचीत की थी। हालाँकि, कॉन्ग्रेस और एनसीपी कितने सीटों पर लड़ेगी, इसको लेकर राउत ने कुछ नहीं कहा।

बताते चलें कि साल 2019 से पहले शिवसेना बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन का हिस्सा थी। इसके बाद उद्धव ठाकरे कॉन्ग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर महाविकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन बनाए और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने। इसके बाद जून 2022 में एकनाथ शिंदे ने 40 अन्य विधायकों के साथ मिलकर ठाकरे से विद्रोह कर दिया और अलग शिवसेना बना ली। इसके बाद MVA सरकार गिर गई।

चंद्रयान-3 जैसे 2 मिशन के लिए चाहिए जितने पैसे, उतने मोदी सरकार ने कबाड़ बेचकर जुटाए: सबसे ज्यादा रेलवे से हुई कमाई

मोदी सरकार ने कबाड़ बेचकर जितने पैसे इकट्ठा किए हैं, उससे चंद्रयान-3 जैसे दो मिशन पूरे किए जा सकते हैं। अक्टूबर 2021 से लेकर अब तक कबाड़ से केंद्र सरकार ने 1163 रुपए की कमाई की है। वहीं चंद्रयान-3 मिशन का बजट 600 करोड़ रुपए के करीब था। यह वही मिशन है जिसकी सफलता ने पूरी दुनिया को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का मुरीद बना दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार अक्टूबर 2021 के बाद केंद्र सरकार के कार्यालयों में 96 लाख फाइलों का निपटारा किया गया है। इससे कार्यालयों में करीब 355 लाख वर्ग फुट जगह खाली हुई है। साथ ही दफ्तरों के कॉरिडोर भी खाली हुए हैं। जगह खाली होने के कारण अब दफ्तरों में रिक्रिएशनल एक्टिविटीज की भी गुंजाइश बनी है।

इस साल गाँधी जयंती यानी 2 अक्टूबर को केंद्र सरकार ने कार्यालयों की सफाई के लिए विशेष अभियान शुरू किया था। 31 अक्टूबर 2023 तक चले इस अभियान के दौरान सरकारी दफ्तरों का कबाड़ बेचकर 557 करोड़ रुपए की कमाई हुई है। इसमें से सबसे ज्यादा पैसा रेलवे से आया। रेल मंत्रालय को कबाड़ बेचने से करीब 225 करोड़ रुपये की कमाई हुई है।

इसके बाद कबाड़ बेच सबसे अधिक कमाई करने वाला विभाग रक्षा मंत्रालय रहा। मंत्रालय ने कबाड़ बेच 168 करोड़ रुपए कमाए। कबाड़ बेच 56 करोड़ रुपए कमाई कर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय तीसरे नंबर पर रहा तो 34 करोड़ रुपए का कबाड़ बेच कोयला मंत्रालय चौथे नंबर पर रहा।

इस साल सरकारी दफ्तरों में कबाड़ को ठिकाने लगाने से कुल 164 लाख वर्ग फुट जगह खाली हुई है। जगह खाली होने के मामले में कोयला मंत्रालय अव्वल रहा। यहाँ 66 लाख वर्ग फुट जगह खाली हुई। दूसरे नंबर पर भारी उद्योग मंत्रालय में 21 लाख वर्ग फुट जगह खाली हुई। जगह के मामले में रक्षा मंत्रालय यहाँ सबसे पीछे रहा। कबाड़ बेचने से यहाँ 19 लाख वर्ग फुट जगह खाली हुई।

इस साल लगभग 24 लाख फाइलें सरकारी दफ्तरों से कबाड़ में बेची गई। इस मामले में विदेश मंत्रालय पहले नबंर पर रहा। यहाँ 3.9 लाख फाइलें में छंटनी कर उन्हें कबाड़ में निकाला गया। इसके बाद दूसरे नंबर पर सैन्य मामलों का विभाग रहा। यहाँ 3.15 लाख फाइलें को छाँट कर उनका निपटारा किया गया। इस साल के स्वच्छता अभियान में 2.58 लाख सरकारी दफ्तर शामिल थे।

स्क्रैप की बिक्री से 1163 करोड़ रुपए के राजस्व का आँकड़ा दर्शाता है कि पीएम मोदी का स्वच्छता अभियान सरकारी कार्यक्रम कितना असरदार और अहम रहा है।

‘राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस ने कुश्ती को राजनीति का अखाड़ा बनाया’: ओलंपिक में मेडल जीतने वाले पहलवान बोले- जब अध्यक्ष थे तो सबको पसंद थे बृजभूषण सिंह

भारत के ओलंपिक पदक विजेता पहलवान और अब बीजेपी नेता योगेश्वर दत्त ने राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस पार्टी पर निशाना साधा है। राहुल गाँधी के हरियाणा के झज्जर जिले में पहलवानों के पास अखाड़े में जाने को लेकर उन्होंने राहुल गाँधी को आड़े हाथों लिया है। योगेश्वर दत्त ने कहा कि राहुल गाँधी को पहलवानों की याद तब आई, जब अब कुश्ती फेडरेशन को भंग किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि जो कुछ हो रहा है, उसे कॉन्ग्रेस करवा रही है।

योगेश्वर दत्त ने कहा, “अब आंदोलनकारी पहलवान भी रेसलर्स नहीं रहे, वे नेता हो गए हैं। वे कॉन्ग्रेस के साथ मिलकर सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बदलने के लिए काम कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि भाजपा सांसद ब्रजभूषण शरण सिंह करीब 11 साल तक कुश्ती फेडरेशन के अध्यक्ष रहे। जब तक वो पद पर थे, तब तक सभी उन्हें पसंद करते थे और जब उनका कार्यकाल खत्म हो गया तो उन पर आरोप लगाए जा रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, योगेश्वर दत्त ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने कुश्ती के अखाड़े को राजनीति के अखाड़े में बदल दिया है। उन्होंने कहा कि हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा और उनके बेटे दीपेंदर सिंह हुड्डा इस मामले पर शुरू से ही राजनीतिक रोटियाँ सेक रहे हैं। दत्त ने सवाल लहजे में पूछा है कि भारतीय कुश्ती संघ की नई कार्यकारिणी को कामकाज से रोक दिया गया है और नई कमेटी बना दी गई है, तब भी अवॉर्ड वापस हो रहे हैं। उन्होंने पूछा कि ये क्या हो रहा है?

योगेश्वर दत्त ने जूनियर खिलाड़ियों के भविष्य को लेकर भी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल से विवाद की वजह से कोई प्रतियोगिता नहीं हो रही है। इससे नुकसान सिर्फ कुश्ती का हो रहा है और पहलवानों का हो रहा है। उन्होंने कहा कि जूनियर खिलाड़ियों की उम्र निकल गई और बिना किसी प्रतियोगिता में खेले ही बाहर चले गए। ऐसे में नुकसान सिर्फ पहलवानों का हो रहा है। कुश्ती के अखाड़े को राजनीति का अखाड़ा बना दिया गया।

बता दें कि राहुल गाँधी बुधवार (27 दिसंबर 2023) की सुबह हरियाणा के झज्जर जिले के छारा गाँव पहुँचे थे। उन्होंने अखाड़े में पहलवानों से मुलाकात की थी। इस दौरान राहुल ने पहलवानों के साथ बातचीत भी की थी और उनके साथ कसरत भी किया था। हालाँकि वो जब मैच पर उतरे तो बजरंग पुनिया ने उन्हें चित कर दिया। राहुल गाँधी ने पहलवानों के साथ बाजरे की रोटी और सरसों का साग भी खाया। रिपोर्ट के अनुसार लौटते समय गन्ने और मूली भी साथ ले गए।

‘क्रिकेटर’ बन ताज होटल को तो ‘लग्जरी घड़ियों’ से ऋषभ पन्त को ठगा, कौन है मृणांक सिंह जिसका मोबाइल आपत्तिजनक फोटो का निकला खजाना

दिल्ली पुलिस ने मृणांक सिंह नाम के एक ऐसे ठग को गिरफ्तार किया है जो खुद को कभी मुंबई इंडियंस का पूर्व खिलाड़ी बताता था तो कभी खुद को कर्नाटक पुलिस का अधिकारी। उसने इसी तरीके से क्रिकेटर ऋषभ पन्त समेत ताज होटल और कई लोगों को करोड़ों का चूना लगाया।

दिल्ली पुलिस ने जिस ठग को गिरफ्तार किया वह ठगी के पैसों से महँगी लाइफस्टाइल जी रहा था। वह दुबई समेत कई विदेशी ट्रिप करता था और उसकी वीडियो सोशल मीडिया पर डालता था। इसी तरह वह सबको झाँसा देता था। उसके कई मॉडल्स से भी सम्बन्ध सामने आए हैं। वह दिल्ली एअरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया है।

कौन है ठग मृणांक सिंह?

दिल्ली पुलिस की गिरफ्त में आया ठग मृणांक सिंह हरियाणा की तरफ से अंडर-19 खेल चुका है। वह दावा करता है कि 2014 से 2018 के बीच मुंबई इंडियंस में रहा है। वह इन्स्टाग्राम पर भी फेमस है। उसके यहाँ पर 42 हजार से अधिक फॉलोवर हैं। उसकी आईडी पर कई ऐसी रील्स पड़ी हैं जिसमें वह अपनी आलीशान जिन्दगी दिखाता है। कहीं वह महँगी गाड़ियाँ चलाता है तो कहीं महँगे होटलों में आते जाते दिखता है। उसकी उम्र 25 वर्ष है। वह दिल्ली विश्वविद्यालय और राजस्थान के एक कॉलेज से पढ़ाई कर चुका है।

किस किसको ठगा?

मृणांक सिंह के खिलाफ जुलाई 2022 में दिल्ली के ताज होटल ने शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में कहा गया था कि वह लगभग एक सप्ताह तक होटल में रुका और बिल देने के समय यह कर वहाँ से चम्पत हो गया कि उसका पैसा खेल का सामान बनाने वाली कम्पनी एडिडास देगी। उसने कहा कि एडिडास उसे स्पोंसर कर रही है। हालाँकि, एडिडास ने ऐसी भी साझेदारी से मना किया। उसने होटल को फर्जी लेनदेन का ब्यौरा भी दिया।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, होटल के मैनेजर गगन सिंह ने कई बार मृणांक सिंह से पैसों को लेकर बात की। वह हर बार नया झाँसा देता रहा। एक बार उसने कहा कि उसका ड्राईवर पैसे लेकर आ रहा है। जब उसके खिलाफ शिकायत मिलने पर पुलिस भेजी गई तो उसके माता पिता ने बताया कि उन्होंने उसे बेदखल कर दिया है।

इसी तरह मृणांक सिंह ने क्रिकेटर ऋषभ पन्त को भी करोड़ों का चूना लगाया। उसने पन्त के मैनेजर से बताया कि वह लग्जरी सामान को कम दाम पर उनके लिए खरीद सकता है। उसकी बातों में आकर ऋषभ पन्त ने उससे घड़ियों समेत कई सामानों को मँगाने के लिए बड़ी धनराशि उसे दी।

पन्त ने उसे अपने कई महँगे सामान भी दिए जिसे उसने ऊँचे दाम पर बेचने को कहा। हालाँकि, ना वह सामान खरीद के लाया और ना ही ऋषभ का सामान बेच पाया। जब ऋषभ पन्त ने उसके खिलाफ मामला दर्ज करवाया तो समझौते के लिए उसने ₹1.63 करोड़ का चेक ऋषभ को दिया जो बाउंस हो गया। इस तरह उसने ऋषभ पन्त को भी ठग लिया।

वह कुछ होटल में खुद को कर्नाटक का बड़ा पुलिस अधिकारी बता कर भी फ्री में रुकता रहा। इसी तरह उसने कई मॉडल्स को अपनी लाइफस्टाइल से रिझाया और उनकी आपत्तिजनक फोटोज अपने पास सहेज कर रखी। वह लड़कियों के साथ विदेश भी घूमने जाता था।

हॉन्ग-कॉन्ग जा रहा था, अब जेल पहुँचेगा

ठग मृणांक सिंह को दिल्ली एयरपोर्ट पर तब पकड़ा गया जब वह यहाँ से हॉन्ग-कॉन्ग जाने के लिए फ्लाइट पकड़ने वाला था। इस दौरान उसने आव्रजन अधिकारियों को बेवकूफ बनाने का प्रयास किया। उसने पकड़े जाने के बाद कई पुलिस अधिकारियों को फ़ोन करके खुद को कर्नाटक पुलिस का एडीजीपी अशोक कुमार सिंह बताया और कहा कि उनका (एडीजीपी का) बेटा मृणांक सिंह दिल्ली एअरपोर्ट पर पकड़ लिया गया है।

पड़ताल में सामने आया कि वह फँसने के बाद कभी कह रहा था कि उसके पिता पहले क्रिकेट खेलते थे और कभी ये कह रहा था कि उसके पिता वर्तमान में दिल्ली एअरपोर्ट पर एयर इंडिया में मैनेजर हैं। हालाँकि, एयरपोर्ट पर मौजूद अधिकारियों ने उसका झूठ पकड़ लिया और उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

ठग मृणांक के खिलाफ पहले से कई मामले दर्ज हैं। पुलिस का कहना है कि उसके पकड़े जाने के बाद और भी मामले सामने आ सकते हैं। उसने दिल्ली, महाराष्ट्र और पंजाब जैसे राज्यों में कई लोगों को ठगा है। उसे दो दिनों के लिए पुलिस की रिमांड में भेजा गया है। कुछ वर्ष पहले सुकेश चन्द्रशेखर नाम का भी एक ठग पकड़ा गया था।