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Salaar 10 लाख लोगों की पसंद, 22000 बिके टिकट… Dunki की सिर्फ 14: प्रभास से टकराना शाहरुख खान को पड़ा भारी

बॉलीवुड स्टार शाहरुख खान की फिल्म पठान और जवान के बाद डंकी 21 दिसंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। इस फिल्म के सामने चुनौती है कि जिस दिन डंकी की रिलीज डेट है उसी के एक दिन बाद प्रभास भी अपनी ‘सालार’ लेकर आ रहे हैं। ऐसे में बुक माय शो के आँकड़ों को देखें तो दर्शकों का क्रेज देखकर लग रहा है कि उनका इंटरेस्ट सालार के लिए ज्यादा है।

रिलीज से पहले जहाँ डंकी को बुक माय शो की इंटरेस्ट ऑप्शन पर 2 लाख 48 हजार व्यूज मिले हैं तो वहीं सालार को 1 मिलियन से ज्यादा क्लिक मिल चुके हैं। वहीं पहले दिन की एडवांस बुकिंग की बात करें तो सालार की आज सुबह तक 22 हजार से ज्यादा टिकटे बिक चुकी हैं जबकि डंकी की अभी केवल 14 बुकिंग की हुई है। लोगों का इन आँकड़ों को देख कहना है कि लग रहा है कि डंकी पर सालार भारी पड़ने वाली है। कुछ कह रहे हैं कि अरे तुलना करना छोड़ो बस सालार देखो।

बता दें कि दर्शकों के लिए यह दोनों ही फिल्म खास होने वाली हैं। शाहरुख खान जहाँ बॉलीवुड के स्टार हैं और पिछले दो साल में जवान-पठान जैसी फिल्मों की कामयाबी का स्वाद लेकर बैठे हैं तो वहीं प्रभास का क्रेज साउथ में बहुत ज्यादा है। बजट की बात करें तो डंकी बनी है सिर्फ 120 करोड़ रुपए में, जबकि सालार एक्शन से लबरेज फिल्म है जिसका बजट 400 रुपए है। इसके अलावा एक ये फैक्टर भी है कि सालार हिंदी के अलावा 3 भाषाओं में रिलीज होगी। वहीं डंकी सिर्फ हिंदी में है।

एक्टर्स की फीस की बात करें तो राजकुमार हिरानी के निर्देशन में बनी फिल्म ‘डंकी के लिए शाहरुख खान ने 28 करोड़ लिए हैं। वहीं मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रशांत नील की ‘सालार’ फिल्म करने के लिए प्रभास ने 100 करोड़ लिए हैं। सालार में प्रभास के अलावा श्रुति हासन, पृथ्वीराज सुकुमारन, जगपति बाबू, मधु गुरुस्वामी और ईश्वरी राव भी अहम किरदारों में है।

देश में अराजकता, मोदी सरकार से माँगें पूरी करवाना: संसद हमले के पीछे ललित झा को विदेशी फंडिंग और ब्रेनवॉश, पुलिस जाँच में सब कुछ

संसद में चूक मामले में आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद सामने आया है कि ये आरोपित संसद परिसर में 7 स्मोक कैन लेकर घुसे थे। इन्होंने परिसर में उत्पात मचाने से पहले इंटरनेट से कई चीजें सीखी थीं। बातचीत के लिए यह सिग्नल ऐप का प्रयोग करते थे। ललित झा पर पुलिस को संदेह है कि उसने लोगों का ब्रेनवॉश किया। पुलिस ने कोर्ट को जानकारी दी कि इस कृत्य के जरिए ललित झा अपने सह-आरोपितों के साथ देश में अराजकता पैदा करना चाहता था। इनका मकसद था कि ये कैसे भी करके सरकार से अपनी माँगें पूरी करवा सकें।

पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई के दौरान पुलिस ने बताया, ”ललित झा ने पूछताछ में खुलासा किया कि वे देश में अराजकता पैदा करना चाहते थे ताकि वे सरकार को अपनी माँगें पूरी करने के लिए मजबूर कर सकें। उसने बड़ी साजिश के तहत सबूतों को छिपाने और नष्ट करने के लिए (अन्य आरोपितों के) फोन ले लिए। उसने खुलासा किया कि उसने अपना फोन जयपुर से दिल्ली जाते समय रास्ते में फेंक दिया था।”

पुलिस ने ललित की हिरासत की माँग करते हुए अदालत को बताया, “हमें आरोपितों को एक-दूसरे से सामना कराने, मोबाइल फोन का पता लगाने, उस होटल का पता लगाने जहाँ वह चार दिनों तक रुके थे, और हमले के पीछे के वित्तीय लेनदेन और फंडिंग को जानने के लिए उसकी जरूरत है।”

बता दें कि कोर्ट में पेशी के बाद गुरुवार (14 दिसंबर 2023) को ललित झा को 7 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस ने पटियाला हाउस कोर्ट में दावा किया कि ललित झा ने मान लिया है कि उसने आरोपितों से संसद की सुरक्षा में सेंध लगाने की साजिश रचने के दौरान कई बार मुलाकात की। आगे की जानकारी के लिए उसे राजस्थान ले जाने का प्लान है जहाँ उसने फोन को जलाया था।

पुलिस का कहना है कि इस मामले में सबसे बड़ी जो चुनौती आई है वो यही है कि ललित झा ने फोन को जला दिया है। अगर फोन हाथ लगते तो इनकी साजिशों का और भी खुलासा हो सकता था।

आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद उनसे पूछताछ के अलावा दिल्ली पुलिस हर एंगल से मामले की जाँच में जुटी है। सूत्रों से यह भी पता चला है कि दिल्ली पुलिस संसद से अनुमति माँग सकती है ताकि दिसंबर 13 वाली घटना को एक बार रीक्रिएट करके समझा जा सके। इसके अलावा वो आरोपितों के बैकग्राउंड पर भी पड़ताल कर रहे हैं जिससे साफ हो सके कि इनका संबंध किसी आतंकी संगठन आदि से तो नहीं था।

पुलिस इस केस में विदेशी फंडिंग के एंगल को भी तलाश रही है कि कैसे संसद में घुसपैठ के लिए हर प्लानिंग सटीक ढंग से की गई। उस मोची की भी तलाश है जिसने इन लोगों को वो जूते बनाकर दिए। पुलिस कैलाश और महेश कुमावत को भी अरेस्ट कर सकती है जिनका इस केस में ललित झा की गिरफ्तारी के बाद नाम आया।

10वीं पास लेकिन सैलरी 1 लाख 37 हजार रुपए: 10000 लोगों को मिलेगी नौकरी, हरियाणा कौशल रोजगार निगम ने निकाला विज्ञापन

अगर आप 10वीं पास हैं लेकिन नौकरी 1 लाख से ज्यादा रुपए वाली चाहिए तो अभी बढ़िया मौका है आपके पास। हरियाणा राज्य की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी हरियाणा कौशल रोजगार निगम (Haryana Kaushal Rojgar Nigam, एचकेआरएन) ने इज़रायल के लिए 10,000 कुशल मजदूरों की भर्ती के लिए एक विज्ञापन निकाला है। 20 दिसंबर 2023 तक इसके लिए आवेदन करने की आखिरी तारीख है।

इन भर्तियों के लिए एचकेआरएन के निकाले गए विज्ञापन के मुताबिक इजरायल में नौकरी के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता दसवीं कक्षा पास होना है। इसके साथ ही उम्र में भी अच्छी खासी रियायत देते हुए वहाँ भेजे जाने वाले मजदूरों की उम्र 25 से 54 साल रखी गई है। अनुभव की बात करें तो मजदूर को कम से कम 3 साल का अनुभव मांगा गया है।

हर महीने की तनख्वाह 6100 न्यू इजरायली शेकेल NIS (इजरायली मुद्रा) है। यह भारत के रुपए के हिसाब से 1.37 लाख रुपए बैठती है। इजरायल में नौकरी की चाह रखने वाले मजदूरी के उम्मीदवारों को निर्माण योजनाओं यानी कंस्ट्रक्शन प्लान को पढ़ने की अच्छी जानकारी होना जरूरी है। इसके साथ ही उम्मीदवारों को इसके लिए औद्योगिक भवन फार्मवर्क, लकड़ी फार्मवर्क, सिरेमिक टाइलिंग, पलस्तर के काम और लोहे को मोड़ने का अनुभव भी होना चाहिए।

दरअसल इजरायल में 7 अक्टूबर 2023 को इस्लामिक आतंकवादी संगठन हमास ने हमला कर दिया था। इसके बाद यहूदी मुल्क इजरायल गाजा में इन आंतकियों के खात्मे के लिए जोरदार कार्रवाई कर रहा है। हमास के साथ युद्ध में इजरायल के निर्माण सेक्टर में मजदूरों की भारी कमी हो गई है। इसे देखते हुए ही हरियाणा वहाँ 10,000 मजदूर भेजने जा रहा है।

गौरतलब है कि इजरायल ने भारत से तत्काल 1,00,000 श्रमिकों की माँग की थी। वॉइस ऑफ अमेरिका की रिपोर्ट के मुताबिक इजरायल की कंस्ट्रक्शन से जुड़ी कंपनियों ने सरकार से 1,00,000 भारतीय श्रमिकों की भर्ती करने की मंजूरी मांगी थी।

इजरायल में चल रहे युद्ध के कारण लगभग 90,000 फिलिस्तीनियों के वर्क परमिट रद्द होने से वहाँ श्रमिकों की भारी कमी हो गई है। दिलचस्प बात यह है कि विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन के इस बारे में राज्यसभा को सूचित करने के ठीक एक दिन बाद हरियाणा सरकार ये यह कदम उठाया है।

₹350 करोड़… शर्म आ रही थी सामने आने में: पहली बार कैमरे पर आए कॉन्ग्रेस सांसद धीरज साहू, बोले- वो पैसा न मेरा, न कॉन्ग्रेस का

कॉन्ग्रेस सांसद धीरज प्रसाद साहू के ठिकानों पर पड़ी आयकर विभाग की रेड के बाद वह पहली बार कैमरे पर आए। उन्होंने मीडिया के सामने आकर कहा है कि ये कोई उनका अपना पैसा नहीं है और न ही कॉन्ग्रेस का पैसा है। ये उनके फैमिली बिजनेस से आया पैसा है जिसके बारे में सिर्फ उनका परिवार ही बताएगा।

भारतीय जनता पार्टी द्वारा लगाए जा रहे काला धन के इल्जाम में उन्होंने कहा, “मैंने आपको पहले ही कहा है कि ये जो पैसा है ये परिवार द्वारा चलाई जा रही कंपनियों का है। इनकम टैक्स का जवाब आने दीजिए कि ये काला धन है या सफेद धन। मैं बिजनेस लाइन में नहीं हूँ। परिवार वाले इसका जवाब देंगे। मुझे नहीं पता कि लोग इसको कैसे देख रहे हैं लेकिन मैं बस इतना कह सकता हूँ कि इन सबका कॉन्ग्रेस या अन्य किसी पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है।”

धीरज साहू ने छापेमारी शुरू होने के करीब 10 दिन बाद कैमरे पर आकर कहा कि ये जो पैसा उनका दिखाया जा रहा है ये असल में उनका है नहीं। उनके परिवार से संबंधित फर्मों का है। इनकम टैक्स ने छापा मारा है तो हर चीज का हिसाब दिया जाएगा। उन्होंने अपने ऊपर हुई कार्रवाई को लेकर कहा,

“मैं तकरीबन 30-35 साल से सक्र‍िय राजनीति में हूँ और यह पहली ऐसी वारदात हुई मेरे साथ में… जिससे मेरे दिल में काफी चोट पहुँची है… मैं हमेशा से चाहता था कि मेरे ऊपर कोई विवाद न हो, लेकिन अब विवाद खड़ा हो गया है तो मैं अपने और अपने परिवार के बारे में जानकारी देना चाहता हूँ।”

सांसद कहते हैं, “हम लोगों ने काफी विकास का काम किया है। चाहे वो राँची हो, लोहरदगा हो या अन्‍य जगह हो। ओडिशा हो जगह-जगह हमने काफी कुछ किया है। पिता स्वर्गीय राय साहब बलदेव साहू भी समाज सेवा करते थे। कई स्कूल-कॉलेज खोले। इसके बावजूद जो हम लोगों के साथ हुआ, इससे बहुत बुरा लग रहा है।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने जोर देकर बस यही बात कही, “जो भी पैसा पकड़ा गया, वो फर्म का पैसा है। हम लोगों को शराब के व्‍यवसाय में 100 साल से ऊपर हो चुका है, उसकी सारी जानकारी में आपको दे रहा हूँ। हमने इससे काफी कुछ किया। काफी रेवेन्यू दिया। इसके बावजूद मेरे साथ ऐसा हुआ। मैं काफी आहत हूँ।”

साहू ने यह भी कहा, “मैं दिल्ली में ही था, आप लोगों से मिलना चाहता था, कुछ परिस्थितियाँ ऐसी हो गई थीं। मुझे लोगों के सामने आने में भी शर्म आ रही थी। मैं राजनीति छोड़कर बिजनेस में ज्यादा ध्यान ही नहीं देता। इसे मेरे परिवार के लोग करते हैं। मैं सिर्फ बीच-बीच में उनके पूछता रहता हूँ।”

धीरज साहू के घर छापा

बता दें कि 6 दिसंबर 2023 को आयकर विभाग ने कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद धीरज साहू से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की थी। यह कार्रवाई झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के अलग-अलग जगहों पर एक साथ हुई थी। आखिरकार 6 दिन के बाद यह रेड पूरी हो गई है।

इस छापेमारी के दौरान नोटों का इतना बड़ा जखीरा मिला है कि उसे गिनने में मशीनों के भी सांस फूल गए। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार 350 करोड़ रुपए अधिक नगद मिली है। कुछ रिपोर्टों में करीब 500 करोड़ रुपए मिलने की बात कही गई है। करीब 17 किलो सोने के जेवर और 40 सोने के बिस्कुट भी मिले हैं।

धीरज साहू का कारोबार

जानकारी के लिए बताते चलें कि कॉन्ग्रेस सांसद धीरज प्रसाद साहू और उनके रिश्तेदारों का शराब का बड़ा कारोबार है। बलदेव साहू एंड ग्रुप ऑफ कंपनीज मूल रूप देशी शराब बनाने का काम करती है। इस धंधे में कंपनी करीब चार दशक से है। कंपनी का नाम धीरज साहू के पिता बलदेव साहू के नाम पर है। कॉन्ग्रेस सांसद के अलावा उनके परिवार के अन्य सदस्य भी कंपनी में शामिल हैं।

इनकम टैक्स विभाग की रेड में धीरज साहू के ठिकानों से 354 करोड़ की नकदी मिली थी, जिसे गिनने का काम एसबीआई की तीन शाखाओं में कई दिनों तक चला। जब बैंक लॉकरों को खोला गया तो अधिकारियों की आँखें खुली की खुली रह गई। लॉकरों से दस्तावेजों के साथ ही सोने के बिस्किट, सोने के जेवरात और हीरे भी बरामद हुए हैं।

‘सेना भवन’ को उड़ाना चाहता था जो आतंकी, उसके साथ शिवसेना (UBT) नेता की पार्टी: दाऊद के गुर्गे के साथ दारू-डांस, वीडियो-तस्वीरों के बाद SIT जाँच का ऐलान

महाराष्ट्र में एक बार फिर से दाऊद इब्राहिम का जिन्न निकल कर बाहर आ गया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहब ठाकरे) के नेता सुधाकर बडगुजर की तस्वीरें और वीडियो सामने आई हैं। इन तस्वीरों में वो वॉन्टेड आतंकी दाऊद इब्राहिम के करीबी पार्टनर सलीम कुट्टा के साथ पार्टी करते हुए नज़र आ रहे हैं। महाराष्ट्र विधानसभा में सदन के नेता को भी इस संबंध में साक्ष्य सौंप दिए गए हैं। भाजपा विधायक नितेश राणे ने उनकी गिरफ़्तारी की माँग की है।

नितेश राणे ने स्पष्ट कहा है कि तत्काल प्रभाव से सुधाकर बडगुजर को गिरफ्तार किया जाए। साथ ही सवाल दागा कि दाऊद इब्राहिम के गिरोह से उनके क्या कनेक्शन हैं? उन्होंने कहा कि इसकी जाँच की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनका आका कौन है, इस पर भी जाँच बिठाई जानी चाहिए। नितेश राणे ने जानकारी दी कि उन्होंने अपनी बातें महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के समक्ष रखी है और उन्होंने इस मामले में SIT जाँच का ऐलान किया है।

साथ ही ये भी बताया है कि जाँच जल्द ही शुरू हो जाएगी। असल में आरोप है कि सलीम कुट्टा ने अपने पेरोल के आखिरी दिन एक पार्टी की थी। इस पार्टी में शिवसेना (UBT) गुट के नासिक महानगरपालिका के प्रमुख सुधाकर बडगुजर भी पहुँचे हुए थे। उन्होंने बताया कि इस पार्टी का वीडियो भी उनके पास साक्ष्य के रूप में मौजूद है, जिसमें दारू पार्टी चल रही है और कई लोग नाच-गा रहे हैं। नितेश राणे के साथ-साथ भाजपा नेता आशीष शेलार ने भी मामले की जाँच की माँग की है।

उन्होंने कहा कि अगर ऐसे राजनीतिक दलों के नेताओं ने आतंकियों के साथ पार्टी करनी शुरू कर दी तो हमारा देश और राज्य सुरक्षित नहीं है। उन्होंने ये भी कहा कि इस मामले में SIT जाँच कर रही है। बात दें कि कुट्टा पर 1993 में मुंबई में हुए सीरियल बम ब्लास्ट के मामले में दोषी साबित किया जा चुका है। उन बम धमाकों में 257 लोग मारे गए थे। उन हमलों में 700 से भी अधिक लोग घायल भी हुए थे। स्पीकर राहुल नार्वेकर ने ताज़ा मामले पर PWD मंत्री दादा भूसे से बयान देने को कहा, जिन्होंने बताया कि कुट्टा दाऊद इब्राहिम का शार्प शूटर था और मुंबई में ‘सेना भवन’ को उड़ाने की साजिश में शामिल था।

‘मुझे बीफ और पोर्क खाने को कर रहे मजबूर’: खालिस्तानी पन्नू की हत्या की साजिश रचने वाला बता कर अमेरिका ने जिस निखिल गुप्ता को पकड़ा, उसकी भारत सरकार से गुहार

खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश के मामले में अमेरिका ने जिस निखिल गुप्ता को आरोपित बनाया है, उसी निखिल गुप्ता ने अब भारत की सर्वोच्च न्यायालय यानी सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की है। निखिल गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट से माँग की है कि वो भारत सरकार से इस मामले में दखल देने के लिए कहे, क्योंकि उन्हें गलत तरीके से चेक गणराज्य के प्रॉग में पकड़ा गया है। यही नहीं, उन्हें बीफ और पोर्क तक खाने को मजबूर किया जा रहा है, जो उनकी धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ है।

बता दें कि निखिल गुप्ता को कथित तौर पर अमेरिकी एजेंटों ने कथित तौर पर पकड़ा है और उन्हें अमेरिका भेजे जाने की तैयारी हो रही है। अभी निखिल गुप्ता प्रॉग में ही हैं, या उन्हें अमेरिका को सौंप दिया गया है, इस मामले में कोई जानकारी नहीं मिल पाई है।

निखिल गुप्ता को जून माह में ही हिरासत में लिया गया था, इसके काफी समय बाद अमेरिका ने इस बारे में भारत सरकार को सूचित किया और बताया कि गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या करने के लिए भारत सरकार से जुड़े व्यक्ति ने निखिल गुप्ता को ‘सुपारी’ दी थी। अमेरिका ने इस मामले में कनाडा के निज्जर हत्याकांड से भी जोड़ा है। हालाँकि भारत सरकार ने आरोपों के जाँच की बात कही है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 4 जनवरी को होगी।

अब निखिल गुप्ता की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुई वकील रोहिणी मूसा ने बताया, “चेक गणराज्य में निखिल गुप्ता को अमेरिका भेजे जाने की तैयारी की गई है। इस तरह का आदेश भी जारी किया जा चुका है, लेकिन हमें इस आदेश की कॉपी तक नहीं मिल पाई है। अभी निखिल के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है। ऐसी हालत में परिवार भी पूरी तरह से बेबस है।” उन्होंने कहा, हमने विदेश मंत्रालय से कुछ सहायता की मांग करते हुए याचिका दायर की है जो विदेश में अवैध रूप से हिरासत में लिए गए किसी भी भारतीय नागरिक को उपलब्ध कराई जाती है।

निखिल गुप्ता की तरफ से दावा किया गया है कि उन्हें बिना किसी वॉरंट के ही हिरासत में लिया गया है और उन्हें निष्पक्ष कानूनी मदद भी नहीं दी गई है। यहाँ उन्हें अकेले में रखा गया है। याचिका में ये भी कहा गया है कि उन्हें बीफ और पोर्क खाने को मजबूर किया जा रहा है, जबकि हिंदू होने के नाते ऐसा करना उनके धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ है। निखिल गुप्ता की तरफ से दाखिल की गई याचिका में कहा गया है कि उन्हें राजनीतिक रुप से प्रताड़ित किया जा रहा है। निखिल गुप्ता का दावा है कि वो अमेरिका के किसी ऐसे व्यक्ति को नहीं जानते, जिसकी हत्या की साजिश का ठीकरा उनके सिर पर फोड़ा जा रहा है।

निखिल गुप्ता की याचिका की कॉपी

गुप्ता के परिवार ने भारत सरकार से गुजारिश की है कि वह उनकी रिहाई के लिए इस मामले में दखल दे और उन्हें कानूनी मदद भी दे। इसके साथ ही गुप्ता ने अमेरिका और चेक रिपब्लिक में अपने प्रतिनिधित्व के लिए एक भारतीय वकील की भी माँग की है।

बता दें कि कुछ समय पहले ही अमेरिका ने दावा किया था कि भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता ने न्यूयॉर्क में रहने वाले खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या के लिए 1 लाख डॉलर की सुपारी दी थी। गुप्ता ने जिस व्यक्ति को सुपारी दी थी, तो अमेरिकी सरकार का ही खुफिया एजेंट था। अमेरिकी कोर्ट में इस बात पर जोर डाला गया है कि निखिल ने ये सुपारी ‘भारत सरकार के एक कर्मचारी’ की ओर से दी थी। इस मामले में उन्हें चेक गणराज्य में 30 जून 2023 को गिरफ्तार किया गया था और उन्हें अमेरिका प्रत्यर्पित करने की कार्रवाई चल रही थी।

मुंबई इंडियंस ने चुन लिया अपना ‘भविष्य’: गुजरात टाइटंस से ₹15 करोड़ में खरीद कर हार्दिक पंड्या को बनाया नया कप्तान, रोहित शर्मा को बताया ‘फॉरएवर कैप्टन’

मुंबई इंडियंस ने हार्दिक पांड्या को गुजरात टाइटंस से वापस लेने के एक माह बाद ही बड़ा फैसला लिया है। मुंबई इंडियंस ने रोहित शर्मा की जगह हार्दिक पांड्या को कप्तान बना दिया है। हार्दिक पांड्या पिछले 2 सीजन से गुजरात टाइटंस की सफल कप्तानी कर रहे थे, जिसमें उन्होंने पहले सीजन में अपनी टीम को चैंपियन बनाया, तो दूसरे सीजन में गुजरात टाइटंस ने फाइनल तक का सफल तय किया और चेन्नई सुपर किंग्स से फाइनल मुकाबले में हारने से पहले बेहतरीन प्रदर्शन दिखाया। वहीं, रोहित शर्मा को मुंबई इंडियंस ने कप्तानी के भार से मुक्त कर दिया है।

रोहित शर्मा सबसे सफल खिलाड़ी और कप्तान

रोहित शर्मा आईपीएल इतिहास के सबसे सफल खिलाड़ियों में से एक रहे हैं। उन्होंने बतौर खिलाड़ी और कप्तान अब तक 6 बार आईपीएल जीतने का गौरव पाया है, तो पाँच बार उनकी ही कप्तानी में मुंबई इंडियंस आईपीएल की ट्रॉफियाँ जीती हैं। वो बतौर कप्तान 5 बार चैंपियन होने के मामले में चेन्नई सुपर किंग्स के कप्तान धोनी के साथ पहली पायदान पर हैं। रोहित शर्मा 10 साल तक मुंबई इंडियंस के कप्तान रहे हैं। उन्होंने एक ट्रॉफी बतौर खिलाड़ी डेक्कन चार्जर्स के लिए भी जाता है।

रोहित शर्मा ने आईपीएल करियर में 158 मैचों में कप्तानी की है, जिसमें से टीम को 87 मैचों में जीत मिली है, तो 67 मैचों में हार भी मिली है। रोहित शर्मा की कप्तानी में मुंबई इंडियंस के चार मैच टाई भी रहे हैं। मुंबई इंडियंस को रोहित शर्मा की कप्तानी में 2013, 2015, 2017, 2019 और 2020 में खिताबी जीत हासिल की थी। उनकी कप्तानी में मुंबई इंडियंस 2013 में ही चैंपियंस लीग की भी चैंपियन रही है। हालाँकि आईपीएल में मुंबई इंडियंस पिछले दो सीजन से नॉकआउट दौर में पहुँचने में नाकाम रही है।

हार्दिक पांड्या का जीत का प्रतिशत सबसे ज्यादा

उनकी जीत का प्रतिशत 55.06 रहा है। वहीं उनकी तुलना में महेंद्र सिंह धोनी जो आईपीएल के सबसे सफल कप्तान हैं, उनकी जीत का प्रतिशत 58.84 रहा है। जबकि हार्दिक पांड्या इन दोनों ही पर भारी पड़ते हैं। आईपीएल में हार्दिक पांड्या की कप्तानी में टीमों की जीत का प्रतिशत 70.96 रहा है। हार्दिक पांड्या ने आईपीएल करियर में 31 मैचों में कप्तानी की है, इसमें से उनकी टीम को 22 मैचों में जीत मिली है, तो 9 मैचों में टीम को हार का सामना करना पड़ा है।

मुंबई इंडियन्स ने भविष्य को देखते हुए कप्तानी में बदलाव का निर्णय लिया है। चूँकि रोहित शर्मा ने पिछले साल हुए टी-20 विश्वकप के बाद से ही कोई भी अंतर्राष्ट्रीय मुकाबला इस फॉर्मेट में नहीं खेला है, ऊपर से उनके ऊपर टीम इंडिया की कप्तानी का भी बोझ है। ऐसे में मुंबई इंडियंस ने उनकी कप्तानी का भार हल्का करने के लिए हार्दिक पांड्या को गुजरात टाइटंस से खरीद लिया और उन्हें कप्तान बना दिया है। उन्हें 15 करोड़ में गुजरात टाइटंस से खरीदा गया था।

मुंबई इंडियंस ने कहा – थैंक यू चैंप

इस बदलाव की सूचना देते हुए मुंबई इंडियंस मैनेजमेंट का अहम हिस्सा बन चुके महेला जयवर्धने ने कहा कि मुंबई इंडियन्स की फ्यूचर रेडी फिलॉसफी के चलते ये बदलाव किया गया है। मुंबई इंडियन्स के पास समय समय पर बेहतरीन कप्तानों की लीडरशिप मिली है, जिसमें सचिन तेंदुलकर, हरभजन सिंह और रिकी पोंटिंग जैसे नाम हैं। हमने भविष्य को ध्यान में रखते हुए हार्दिक पांड्या को चुना है। हम रोहित शर्मा को उनके शानदार कप्तानी करियर के लिए धन्यवाद देते हैं।

टीम ने कहा कि उन्होंने साल 2013 के सत्र से ही टीम की फ्रंट पर रहते हुए अगुवाई की है और मुंबई इंडियन्स को आईपीएल इतिहास की सबसे सफल टीमों में से एक बनाया है। साथ ही मुंबई इंडियंस ने रोहित शर्मा को ‘फॉरएवर कैप्टेन’ भी कहा है।

SIT करेगी बिट्टू बजरंगी के भाई को जलाने वाली घटना की जाँच, नूहं हिंसा के बाद से ही परिवार को मिल रही थी धमकियाँ: पुलिस की कई टीमें की गईं गठित

फरीदाबाद में बिट्टू बजरंगी के भाई को थिनर डालकर आग के हवाले करने के मामले में फरीदाबाद पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है। महेश पाँचाल को जलाने वाले अरमान से पूछताछ और उसके साथियों को पकड़ने के साथ ही इस हमले के पीछे की असली वजह तलाशने के लिए जिस स्पेशन इन्वेस्टिगेशन टीम का गठन किया गया है, उसकी जिम्मेदारी एसीपी(क्राइम) अमर यादव के कंधे पर है। उन्होंने इस केस की तह तक जाने के लिए कई टीमों का गठन भी कर दिया है।

इश मामले में मीडिया से बातचीत करते हुए डीसीपी-एनआईटी अमित यशवर्धन ने बताया कि पुलिस ने कई टीमों का गठन किया है। एसीपी क्राइम अमन यादव की अगुवाई में सीसीटीवी कैमरों से लेकर घटनास्थल पर भी पड़ताल की जा रही है। पीड़ित के घर से लेकर घटना स्थल तक के लोकेशन पर पुलिस की नजर है। यही नहीं, उस समय उस इलाके में मौजूद रहीं सभी गाड़ियों की जानकारी निकाली जा रही है। इसके साथ ही उस बिना नंबर की वैगनआर कार की भी तलाश हो रही है, जिसके वारदात को अंजाम देसे समय इस्तेमाल किया गया था।

पुलिस सूत्रों ने बताया है कि हमले में बुरी तरह से झुलग गए बिट्टू बजरंगी के भाई महेश पाँचाल का बयान अस्पताल में ही ले लिया गया था। अब पुलिस उनके बयान और आसपास के सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जाँच का दायरा बढ़ाया जा रहा है।

बता दें कि फरीदाबाद के झाबुआ में रहने वाले बिट्टू बजरंगी के भाई को बुधवार (13 दिसंबर, 2023) रात में पेट्रोल डाल कर ज़िंदा जलाने की कोशिश की। पीड़ित की हालत गंभीर है और अस्पताल में भर्ती है। पीड़ित ने अपने बयान में बताया है कि हमलावरों में एक का नाम अरमान है। उसका पिता झाबुआ सब्जी मंडी में ही जूस की दुकान चलाता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अरमान की अगुवाई में हमलावरों ने बिट्टू बजरंगी के भाई महेश पांचाल की बाकायदा पहचान सुनिश्चित की। उन्होंने महेश पांचाल से पूछा कि ‘क्या तुम बिट्टू बजरंगी के भाई हो?’ इस सवाल के जवाब में महेश ने जैसे ही हाँ कहा, उन लोगों ने उनके ऊपर पेट्रोल डाला और आग के हवाले कर दिया। इसके बाद उसे बिट्टू बजरंगी ने अस्पताल में भर्ती कराया। अस्पताल में महेश पांचाल की हालत गंभीर बनी हुई है। सूचना पाकर मौके पर पुलिस भी पहुँची और मामले की जाँच शुरू कर दी।

कौन है बिट्टू बजरंगी?

बिट्टू बजरंगी हिंदूवादी एक्टिविस्ट हैं। वो हिंदुओं की एकता को लेकर आवाज उठाते रहे हैं। मेवात क्षेत्र के नूहं से शुरू हुई हिंसा के बाद उनका नाम तेजी से उछला था, जिसके बाद पुलिस के साथ झड़प के मामले में उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था। फिलहाल, बिट्टू बजरंगी जमानत पर जेल से बाहर चल रहे हैं। इस मामले में तमाम हिंदूवादी संगठनों ने उनका समर्थन किया था। शुरुआत में इस अफवाह का प्रसार तेजी से हुआ था कि बिट्टू बजरंगी का नाम हिंसा में आया है, लेकिन पुलिस ने साफ कर दिया कि बिट्टू बजरंगी पर हिंसा से जुड़ा नहीं, बल्कि पुलिस के साथ झड़प के मामले में कार्रवाई हुई थी।

संसद के हमलावरों की मदद करेगा राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ वाला वकील, गुजरात दंगों में निर्दोषों को फँसाने वाली तीस्ता सीतलवाड़ से भी कनेक्शन

महाराष्ट्र के पुणे के एक वकील असीम सरोदे संसद की सुरक्षा पर खतरा बनने वाले युवक अमोल शिंदे की कानूनी मदद करना चाहते हैं। दरअसल, शिंदे को दिल्ली पुलिस ने इस मामले में UAPA के तहत गिरफ्तार किया है।

25 साल के अमोल शिंदे सरोदे के ही लातूर जिला स्थित चाकुर तहसील के जरी बुद्रुक गाँव का रहने वाला है। उसकी पैरवी करते हुए सरोदे कहते हैं कि हालाँकि अमोल की हरकतें गलत थीं, लेकिन किन हालात में वो ऐसा करने के लिए मजबूर हुआ – उन्हें सुनने की जरूरत है।

सरोदे ने मीडिया से कहा, “मेरा मानना ​​है कि अमोल शिंदे के संसद में प्रवेश करने और धुएँ के कनस्तरों का इस्तेमाल करने में शामिल अन्य लोगों ने गलत किया है क्योंकि संसद अस्मिता का प्रतीक है और पूरे भारत में निर्वाचित सदस्य वहाँ बैठते हैं। उन्हें इसके लिए सज़ा दी जानी चाहिए, लेकिन जिस तरह के कानूनी प्रावधान उनके ऊपर लगाए जा रहे हैं ऐसा मेरा कहना है कि वो गलत हैं।”

वकील सरोदे ने आगे कहा, “इसलिए हम अमोल शिंदे के साथ रहेंगे। हम उसे कानूनी मदद करेंगे। FIR में जो धाराएँ लगाई जा रही हैं वो सही हैं या नहीं, ये देखेंगे। उनको जमानत मिलनी चाहिए, उसके लिए प्रयास करेंगे। अगर हम केस चलने के दौरान दिल्ली नहीं जा सकेंगे तो हम वहाँ के कुछ वकील दोस्त हैं उनसे संपर्क करके और उनके साथ जुड़कर शिंदे को कानूनी सहायता देंगे।”

सरोदे ने कहा, “अमोल शिंदे और उनके दोस्तों ने जो किया है उससे उन्होंने एक बात सामने लाने की कोशिश की है कि बेरोज़गारी और ग़रीबी का मुद्दा बहुत अहम है। सरकार का जो अहम काम है वो सही नहीं हो रहा है। सरकार को बेरोज़गारी और ग़रीबी के मुद्दे को अहमियत देनी चाहिए।”

हालाँकि, इस बीच अमोल शिंदे की माँ केसरबाई और पिता धनराज शिंदे ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि क्या गलत हुआ है। उसके भाई संतोष और राहुल भी सारे मसले से अनजान हैं। हालाँकि, अमोल के माता-पिता ने आर्थिक परेशानी से गुजरने की बात स्वीकार की। उन्होंने कहा, “अमोल सशस्त्र बलों और पुलिस में भर्ती की तैयारी के लिए आगे की पढ़ाई के लिए लातूर जाना चाहता था। हालाँकि, हम उन्हें आर्थिक तौर पर मदद देने के काबिल नहीं थे।”

इस सबसे अलग एक बात ध्यान देने की है कि 13 दिसंबर को संसद में घुसकर संसद सत्र के दौरान धुएँ के कनस्तर से हमला करने वाले आरोपितों को कानूनी मदद की पेशकश करने वाले वकील असीम सरोदे कॉन्ग्रेस और राहुल गाँधी के जोरदार समर्थक हैं।

यही वजह रही कि उन्होंने ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में बढ़-चढ़ कर भाग लिया था और कॉन्ग्रेसी नेता राहुल गाँधी की तारीफ की थी। उन्होंने राहुल गाँधी के साथ भारत जोड़ो यात्रा में अपनी शिरकत का एक वीडियो साझा करते हुए लिखा था, “लोगों को एकजुट करना बहुत मुश्किल है लेकिन उन्हें बाँटना आसान है। राहुल गाँधी दिलों को जोड़ने की बात करते हैं,वह भारत को एकजुट करने की बात करते हैं। हम भारत से प्यार करते हैं और इसलिए हम राहुल गाँधी के साथ हैं!”

राहुल गाँधी के मोदी उपनाम को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट की राहत के बाद उन्हें वायनाड सांसद के तौर पर संसद में बहाल किया गया था। उस मौके पर भी वकील असीम सरोदे ने राहुल गाँधी का खुलकर समर्थन किया था। सरोदे ने कहा था, “संसद में फिर से वैध सवालों पर हाई वोल्टेज चर्चा देखने को मिलेगी क्योंकि लोकतांत्रिक मूल्यों वाले व्यक्ति राहुल गाँधी फिर से सक्रिय होंगे। अगर वह ‘पप्पू’ हैं तो ‘पप्पा’ संसद में मौजूद रहने और उनके उठाए जा रहे सवालों का जवाब देने का साहस दिखाएँ।”

इसके अलावा, जब सीएम एकनाथ शिंदे और 39 अन्य विधायकों ने तत्कालीन MVA सरकार के खिलाफ ‘विद्रोह’ किया। उस वक्त सात नागरिकों ने शिंदे और अन्य विद्रोही विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की माँग करते हुए एक जनहित याचिका दायर की।

इसमें उन्होंने शिंदे पर आरोप लगाया कि कि उन्होंने राजनीतिक उथल-पुथल पैदा की है और आंतरिक अव्यवस्था को बढ़ावा दिया है। दरअसल, इन 7 नागरिकों का अगुवाई करने वाले वकील असीम सरोदे ही सही थे। तब बॉम्बे हाई कोर्ट ने उन्हें पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित मुकदमा दायर करने के लिए फटकार लगाई थी।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं पर 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया था। अदालत ने कहा था प्रथम दृष्टया हमारा विचार है कि यह राजनीति से प्रेरित मुकदमा है। याचिकाकर्ताओं ने अपेक्षित शोध नहीं किया है। हम याचिकाकर्ताओं को दो हफ्ते के भीतर सुरक्षा के रूप में 1 लाख रुपए जमा करने का निर्देश देते हैं।

इसके अलावा साल 2021 में जब भारत COVID-19 की दूसरी लहर का सामना कर रहा था, तब भी सरोदे ने हरिद्वार में कुंभ मेले के आयोजन को निशाना बनाते हुए हिंदू विरोधी बयान दिए थे। सरोदे ने हिंदू समुदाय पर निशाना साधते हुए बयान देते हुए कहा कि कुंभ मेले से कोरोना वायरस फैलेगा।

उस वक्त कथित तौर पर हिंदुओं ने सरोदे के बयानों का विरोध करते हुए कहा कि कुंभ मेला एक सदियों पुरानी परंपरा और एक पुरानी धार्मिक प्रथा थी। इस पर सरोदे ने यह कहकर विवाद खड़ा कियाा था कि वह अकबर ही थे जिन्होंने कुंभ मेले की शुरुआत की थी और वह धार्मिक स्नान करने वाले पहले व्यक्ति थे इसलिए इसे ‘शाही स्नान’ कहा जाता था।

इस बीच, यह भी सामने आया है कि सरोदे के रिश्ते विवादास्पद ‘एक्टिविस्ट’ तीस्ता सीतलवाड़ से हैं। तीस्ता 2002 के गुजरात दंगों से संबंधित मामलों में सबूत गढ़ने के लिए जानी जाती हैं। बीजेपी प्रवक्ता सुरेश नखुआ ने एक्स पर कहा, “राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में सक्रिय भागीदार रहे जिस एडवोकेट असीम सरोदे ने संसद की सुरक्षा में खतरा बने लोगों का बचाव करने की पेशकश की है, वो भी तीस्ता सीतलवाड़ से जुड़े हुए हैं।”

गौरतलब है कि 13 दिसंबर, 2023 को संसद में सुरक्षा नियमों को तोड़ते हुए लोकसभा की कार्यवाही के दौरान ही दो शख्स आगंतुक गैलरी से लोकसभा में कूद गए। लोकसभा के एक वीडियो में संसद सदस्यों को इन 2 आरोपितों की मार कुटाई करते हुए दिखाया।

सांसदों ने घुसपैठियों के बाल नोचते, उन पर जूते फेंकते और उन्हें घेरने से पहले मुक्के मारते भी देखा गया। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने गुरुवार (14 दिसंबर, 2023) को संसद में धुआँधार हमला करने वाले सभी 4 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस वकीलों के मुताबिक, आरोपितों ने एक पर्चा लिया था और प्रधानमंत्री मोदी को लापता व्यक्ति घोषित किया था। इसमें कहा गया था कि जो व्यक्ति उन्हें ढूँढेगा उसे स्विस बैंक से पैसे दिए जाएँगे।

इस तरह से आरोपितों ने प्रधानमंत्री को घोषित अपराधी की तरह दिखाया था। पुलिस ने अदालत को सूचित किया कि उसने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की थी और यूएपीए अधिनियम की सख्त धारा 16 (आतंकवाद) और 18 (आतंकवाद की साजिश) भी जोड़ी गई। इस बीच पुलिस सूत्रों ने गुरुवार (14 दिसंबर, 2023) को कहा कि संसद में सुरक्षा तोड़ने के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए चार लोगों ने घटना जिम्मेदारी एक साथ ली। आरोपित दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की जाँच टीम को रटे-रटाए जवाब दे रहे थे।

सरकार को गाली, हिंदुओं पर तंज: संसद में घुस उत्पात मचाने वाला सागर शर्मा निकला रवीश कुमार का फैन, आखिरी पोस्ट में लिखा था- फिर मिलेंगे

संसद में सुरक्षा चूक के मामले में गिरफ्तार किए गए सागर शर्मा का वैचारिक और राजनीतिक रुझान सोशल मीडिया से कॉन्ग्रेसी और वामपंथी झलक रहा है। वो इंस्टाग्राम पर रवीश कुमार और राहुल गाँधी का फॉलोवर है। संसद की सुरक्षा को भेदने से पहले उसने पोस्ट भी किया था। उसने अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल पर पोस्ट लिखा, “जीते या हारे पर कोशिश तो जरूरी है। अब देखना ये है कि सफर कितना हसीन होगा। उम्मीद है फिर मिलेंगे।”

उसने ये पोस्ट संसद की सुरक्षा तोड़ने से पहले की थी।

सागर शर्मा का आखिरी इंस्टाग्राम पोस्ट संसद पर 2001 में हुए हमले की 22वीं सालगिरह के मौके पर आया, जब उसने अपने साथियों के साथ संसद की सुरक्षा में सेंध लगाई। उसकी पोस्ट बताती है कि संसद का सुरक्षा घेरा तोड़ने का काम पूरी तैयारी और प्लानिंग से किया गया था। वो इंस्टाग्राम पर कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी और पत्रकार से यूट्यूबर बने रवीश कुमार को भी फॉलो करता है।

सागर की आईडी का स्क्रीनशॉट

इस बीच, सागर शर्मा के फेसबुक पोस्ट के स्क्रीनशॉट भी सोशल मीडिया यूजर्स द्वारा साझा किए जा रहे हैं, जिसमें सागर 2019 पुलवामा हमले के आतंकवादी आदिल अहमद डार की तरह ही ‘गौमूत्र’ पर तंज कस रहा है।

याद दिला दें कि जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के आतंकवादी ने अपने विस्फोटकों से भरे वाहन को सीआरपीएफ जवानों को ले जा रही बस से टकरा दिया था, जिसके परिणामस्वरूप हमारे 40 जवान बलिदानी हो गए थे। उसने हिंदू समुदाय को ‘हिंदुस्तान के नापाक मुशरिकों’ (भारत के अशुद्ध मूर्तिपूजक) और ‘गाय का पेशाब पीने वालों’ (गाय का पेशाब पीने वाले) बताया था।

अंकुर सिंह नाम के यूजर लिखते हैं, “हमले से पहले सागर शर्मा की आखिरी इंस्टाग्राम पोस्ट। उन्होंने इसकी अच्छी योजना बनाई। वह कन्हैया कुमार का वीडियो शेयर करता है और इसीलिए उसके जैसा बनने का फैसला किया। वह इंस्टाग्राम पर राहुल गाँधी और रवीश कुमार को फॉलो करता है।”

सागर शर्मा के फेसबुक बायो में लिखा है, “मेरा सपना ही मेरी दौलत है। मैं इतिहास लिखूँगा, आया हूँ दुनिया में कुछ कर के मरूँगा।”

भगत सिंह का प्रशंसक होने का दावा करने वाला सागर शर्मा सोशल मीडिया देखकर लगता है कि अर्जेंटीना के मार्क्सवादी क्रांतिकारी और नस्लवादी कम्युनिस्ट नेता अर्नेस्टो चे ग्वेरा से काफी प्रेरित था। विडंबना यह है कि शर्मा ने अपने पोस्ट में लिखा है कि चे ग्वेरा ने अपना जीवन गरीबों और पीड़ितों के लिए समर्पित कर दिया, जबकि वास्तव में ग्वेरा ने अभूतपूर्व पैमाने पर सामूहिक हत्याएँ कीं और एक ऐसे शासन की स्थापना में मदद की जिसने अपने नागरिकों पर बहुत अत्याचार किया। इसके अलावा, ग्वेरा पूरी तरह से नस्लवादी और समलैंगिकों के प्रति नफरत रखने वाला था।

सागर शर्मा चे ग्वेरा की तारीफ में करता था पोस्ट, फोटो साभार-सागर की फेसबुक आईडी पोस्ट का स्क्रीनशॉट

सागर शर्मा पूंजीवाद और उद्योगपतियों के प्रति खास कम्युनिष्ट नफरत भी रखता है। उसने अपने एक फेसबुक पोस्ट में बिजनेसमैन मुकेश अंबानी के खिलाफ ‘S&%la H&r$mKh#r’ शब्द तक का इस्तेमाल किया था।

मुकेश अंबानी के लिए नफरत भरी पोस्ट

एक अन्य पोस्ट में सागर शर्मा ने लिखा कि सरकार “ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के नियमों में बदलाव करना चाहती है ताकि जनता एक साथ आकर उनका विरोध न कर सके और उसकी हरकतें (सोशल मीडिया पर) वायरल न हो सकें ताकि यह अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान न खींचे…”

मास्टरमाइंड ललित झा गिरफ्तार

बता दें कि दिल्ली पुलिस ने संसद की सुरक्षा में सेंध लगाने वाले सभी आरोपितों के खिलाफ यूएपीए एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया है। अधिकारियों ने बताया कि आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की धारा 120बी (आपराधिक साजिश), धारा 452, 153, 186 और 353 के साथ ही यूएपीए के सेक्शन 16 और 18 के तहत कर्तव्य पथ पुलिस थाने में मामला दर्ज हुआ है।

संसद में घुसपैठ की लंबी चौड़ी प्लानिंग करने वाला मास्टरमाइंड ललित झा गुरुवार (14 दिसंबर 2023) को गिरफ्तार किया गया। अभी तक सामने आई जानकारी के अनुसार से यही पता चला है कि वह बिहार का रहने वाला है। लेकिन कुछ समय से पहले पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में आदिवासी शिक्षा पर काम करने वाले एक गैर सरकारी संगठन, समयाबादी सुभाष सभा समूह का अध्यक्ष था। वह समूह के विभिन्न आंदोलनों में सक्रिय था।

13 दिसंबर को घटना को अंजाम देने से पहले चारों आरोपितों ने अपने अपने फोन ललित झा को सौंपे थे क्योंकि उन्हें पता था कि ये कारनामा करने के बाद वो लोग पकड़े जाएँगे। ऐसे में पुलिस के हाथ कोई सबूत न लगे इसलिए उन्होंने अपने फोन ललित को दे दिए थे। ललित घटना के वक्त तक संसद के बाहर खड़ा था, अमोल-नीलम की वीडियो बनाकर वो वहाँ से निकल गया।। उसने राजस्थान के कुचामन में जाकर अपने दोस्त महेश के साथ सभी आरोपितों के फोन को जलाया और फिर दिल्ली में आकर सरेंडर किया।

प्लान ए के साथ ही तैयार था प्लान बी

संसद में घुसपैठ मामले के मास्टरमाइंड ललित झा की गिरफ्तारी के बाद कई खुलासे हो रहे हैं। इसी क्रम में एक जानकारी यह भी सामने आई है कि ललित झा ने संसद में हड़कंप मचवाने के 2 प्लान बनाए हुए थे। इसे नाम दिया गया था प्लान-A और प्लान-B का।

प्लान-A में यही था कि संसद के अंदर सागर शर्मा और मनोरंजन डी जाएँगे क्योंकि उनके पास बन गए थे। इसी प्लान के तहत संसद के बाहर अमोल और नीलम ट्रांसपोर्ट भवन की ओर से संसद के करीब जाएँगे और वहाँ कलर बम जलाएँगे।

प्लान-B में था कि किसी वजह से अगर नीलम और अमोल संसद के करीब नहीं पहुँच पाते तो उनकी जगह महेश और कैलाश दूसरी ओर से किसी तरह से संसद के करीब पहुँचते और मीडिया के कैमरों के आगे कलर बम जलाते और नारेबाजी करते।