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धुआँ उड़ाते लोकसभा में कूद गए 2 लोग, सांसदों ने पकड़ कर पुलिस को सौंपा: संसद पर हमले की 22वीं बरसी पर हुई घटना

संसद पर साल 2001 में हुए हमले की 22वीं बरसी पर सुरक्षा चूक का मामला सामने आया है। लोकसभा में कार्यवाही के दौरान दो प्रदर्शनकारी गैलरी से सदन में कूद गए, जिन्हें सांसदों ने ही पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। ये सुरक्षा चूक का बड़ा मामला है, जिसमें सांसद से जारी पास के आधार पर लोकसभा के दर्शक दीर्घा तक पहुँचे दो लोगों ने लोकसभा की कार्यवाही के दौरान ही सदन में छलांग लगा दिया। उन्होंने सुरक्षा घेरे को धता बताकर नारेबाजी की।

हालाँकि, उन्हें सांसदों ने ही पकड़ लिया। इन दो लोगों के अलावा संसद के बाहर भी स्मोक केन से धुआँ निकाल कर प्रदर्शन कर रहे दो लोगों को हिरासत में लिया गया है।

ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, लोकसभा में ये घुसपैठ ठीक 1 बजकर 1 मिनट पर हुई। उस समय सदन में पश्चिम बंगाल के मालदा उत्तर सीट से भाजपा के लोकसभा सांसद खरगेन मुर्मू अपनी बात रख रहे थे। इसी दौरान एक युवक ने लोकसभा में छलांग लगा दी। अगले ही क्षण पीठाधीन राजेंद्र अग्रवाल ने सदन को 2 बजे तक के लिए स्थगित कर लिया। इस बीच लोकसभा में मौजूद सांसदों ने सुरक्षा घेरा तोड़ने वाले दोनों युवकों को पकड़ लिया।

बताया जा रहा है कि लोकसभा में सुरक्षा घेरे को तोड़ने वाले युवकों ने जूते में स्मोक कनस्तर छिपा रखे थे, उन्होंने सदन के भीतर नारेबाजी भी की।

2 अन्य प्रदर्शनकारी संसद के बाहर से गिरफ्तार

इस बीच दिल्ली पुलिस ने ट्रांसपोर्ट भवन के सामने दो प्रदर्शनकारियों, एक पुरुष और एक महिला को हिरासत में लिया है, जो रंग-बिरंगा धुआँ छोड़ने वाली सामग्री के साथ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। घटना संसद के बाहर हुई। उन्हें दिल्ली पुलिस के जवानों ने तुरंत हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए गए व्यक्तियों में एक महिला भी है, जो नारेबाजी करती दिख रही है।

हिरासत में लिए गए आरोपितों को संसद मार्ग पुलिस स्टेशन ले जाया गया है। दिल्ली पुलिस की एंटी टेरर यूनिट स्पेशल सेल पार्लियामेंट के अंदर हंगामा करने वाले लोगों से पूछताछ करने पहुँच गई है।

शिवसेना (UBT) सांसद अरविंद सावंत ने इस बारे में बताया कि इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ। जब वे नीचे कूदे तो पीछे की बेंचें खाली थीं, वे पकड़े गए। सदन में दो मंत्री भी मौजूद थे।

कॉन्ग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने बताया कि अचानक करीब 20 साल के दो युवक दर्शक दीर्घा से सदन में कूद पड़े और उनके हाथ में कनस्तर थे। इन कनस्तरों से पीला धुआँ निकल रहा था। उनमें से एक अध्यक्ष की कुर्सी की ओर भागने की कोशिश कर रहा था। वो लोग नारेबाजी भी कर रहे थे। कार्ति चिदंबरम ने इसे सुरक्षा चूक का गंभीर उल्लंघन बताया है।

बताया जा रहा है कि ये लोग मैसूर के सांसद द्वारा जारी पास के आधार पर लोकसभा की गैलरी तक पहुँचे थे। उन्होंने जूते में रंग-बिरंगा धुआँ फेंकने वाले कनस्तर छिपाए थे। उनके पास किसी तरह का विस्फोटक या घातक हथियार नहीं मिला। सूत्रों के मुताबिक, एक युवक का नाम सागर है और उनका मकसद लोकसभा में हंगामा मचाकर लोकप्रियता हासिल करना था।

सबसे बड़े लड़य्या भी हैं भजनलाल, राम से लेकर कश्मीर पंडितों तक के लिए लड़े: यूँ ही नहीं BJP ने चुना राजस्थान का लाल

राजस्थान के नए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नाम का जब ऐलान हुआ, तो किसी को एक बार यकीन नहीं हुआ कि राजस्थान की कमान 33 साल बाद किसी ब्राह्मण को सौंपी गई है। भजनलाल शर्मा का सियासी जीवन तीन दशक से भी लंबा रहा है। वो सरपंच भी रहे हैं तो अब मुख्यमंत्री भी बने हैं। उनका संगठन से जुड़ा अनुभव उन्हें खास बनाता है, साथ ही वो भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के भी करीबी माने जाते हैं।

भजनलाल शर्मा 20 साल पहले भाजपा से बागी होकर चुनाव लड़े थे, लेकिन हार का सामना करना पड़ा था।

अयोध्या से कश्मीर तक राजनीतिक सक्रियता

भजनलाल शर्मा भरतपुर जिले के अटारी गाँव के हैं। उन्होंने अटारी गाँव और नदबई कस्बे में पढ़ाई की। छात्र जीवन से ही भारतीय जनता पार्टी और उसके छात्र संगठन ABVP से जुड़े रहे हैं। वो युवा मोर्चा में भी अहम जिम्मेदारियाँ संभाल चुके हैं। महज 20 साल की उम्र में कश्मीरी पंडितों के लिए एबीवीपी द्वारा निकाले गए जम्मू मार्च में शामिल हुए थे। कश्मीरी पंडितों पर हमलों के विरोध में ये मार्च जम्मू से उधमपुर पहुँची थी, जहाँ उन्हें कई अन्य कार्यकर्ताओं के साथ गिरफ्तार कर लिया गया था।

इसके 2 साल बाद ही 1992 में वो राम मंदिर आंदोलन के दौरान जेल गए थे। वो 27 साल की उम्र में अटारी गाँव के सरपंच भी चुने गए और दो बार सरपंच रहे।

BJP से बागी भी हुए, लेकिन संगठन पर मजबूत पकड़

भजनलाल शर्मा साल 2003 में चुनाव लड़ना चाहते थे। ऐसे में भाजपा से बागी हुए पूर्व मंत्री देवी सिंह, वरिष्ठ नेता सुरेश मिश्रा और करणी सेना के संस्थापक लोकेंद्र सिंह कल्वी ने सामाजिक न्याय मंच नाम की पार्टी बनाई तो उन्हें चुनाव लड़ने के लिए आमंत्रित किया। भजनलाल अपने भरतपुर जिले के नदबई विधानसभा सीट से मैदान में उतरे। उन्हें 5 हजार से अधिक वोट मिले, और वो पाँचवें स्थान पर रहे। इसके बाद वो वापस बीजेपी में लौट आए। उनकी सांगठनिक क्षमता को देखते हुए बीजेपी ने उन्हें कई जिम्मेदारियाँ सौंपी।

बीजेपी में अहम दायित्वों का निर्वहन

भजन लाल शर्मा ने एवीबीपी और भाजयुमो के साथ अहम सांगठनिक कार्य सफलता पूर्वक संभाले थे। ऐसे में बीजेपी ने उन्हें भरतपुर में भाजयुमो का नेतृत्व सौंपा था। भजन लाल शर्मा भारतीय जनता युवा मोर्चा के तीन बार भरतपुर के जिलाध्यक्ष भी रहे हैं। इसके बाद भाजपा के वो जिला सचिव रहे, फिर उन्हें जयपुर बुला लिया गया। भजन लाल शर्मा को बीजेपी के लिए राजस्थान में उपाध्यक्ष और महासचिव जैसे महत्वपूर्ण पद दिए गए।

इस चुनाव में वो जयपुर से ही मैदान में उतरना चाहते थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें मौजूदा विधायक का टिकट काटकर सुरक्षित सांगनेर विधानसभा सीट से मैदान में उतारा।

अपने चुनाव के साथ ही देखा पार्टी का भी कामकाज

राजस्थान में बीजेपी जब अपना चुनावी ताना-बाना बुन रही थी, उस समय भजनलाल शर्मा अपने राजनीतिक दायित्वों के साथ पार्टी की रणनीति की कमान भी सँभाल रहे थे। राज्य में बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के हर काम को अंजाम दे रहे थे। उन्होंने राजस्थान की 5 सदस्यीय रणनीतिक टीम की अगुवाई की। एक तरफ वो खुद सांगनेर से चुनाव मैदान में थे, तो दूसरी तरफ उनके ऊपर पूरी पार्टी के चुनावी अभियान का भी जिम्मा था।

भजनलाल शर्मा ने इन दोनों ही चुनौतियों को सफलतापूर्वक पार किया। भजनलाल शर्मा के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर गृहमंत्री अमित शाह के भी अच्छे संबंध हैं। अमित शाह उनपर पूरा भरोसा करते हैं। इसीलिए उन्हें राजस्थान में चुनाव को सँभालने का दायित्व दिया गया था।

CM के लिए तमाम दिग्गजों के बीच चुने गए भजनलाल शर्मा

राजस्थान में मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में कई बड़े नाम शामिल थे। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, महंत बालकनाथ, प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी के साथ ही कई नामों की चर्चाएँ चलती रहीं। दीया कुमारी का भी नाम इसमें शामिल था। भाजपा के लिए ये चुनौती थी कि इन दिग्गजों के बीच सीएम किसे बनाया जाए। साथ ही बीजेपी के लिए अपनी सोशल इंजीनियरिंग के फॉर्मूले को भी बरकरार रखना था। ऐसे में पार्टी ने 33 साल बाद राजस्थान को ब्राह्मण मुख्यमंत्री देने का निर्णय लिया, जिसका असर पूरे उत्तर भारत पर पड़ना तय है।

दरअसल, 3 दिसंबर को चुनावी नतीजों की घोषणा जब हुई, तो मुख्यमंत्री पद के दावेदारों की लाइन लग गई। इन दावेदारों ने भी अपनी गोलबंदी शुरू कर ली। सौदेबाजी भी चली, लेकिन इन नेताओं में सक्रियता नहीं देखी गई थी, जब चुनाव हो रहे थे। किसी भी नेता ने पूरे राजस्थान की जिम्मेदारी सँभालने की जरूरत नहीं समझी थी। ऐसे में बीजेपी ने भी उसी भजन लाल शर्मा को मुख्यमंत्री बनाया, जिसने अपने चुनाव के साथ ही पूरे राज्य की चुनावी बागडोर संभाली।

मुस्लिमों ने मुस्लिम पर ही करवाई ईशनिंदा की FIR, जिस पर पैगंबर मुहम्मद के अपमान का आरोप वो 12वीं का छात्र: AMU का मामला

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में मुस्लिमों के पैगंबर मोहम्मद की शान में गुस्ताखी के आरोप में FIR दर्ज की गई है। इस बार आरोप कक्षा 12 में पढ़ने वाले एक मुस्लिम छात्र पर लगा है। आरोपित छात्र ‘अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी’ (AMU) के स्कूल में पढ़ता है जो खुद को नास्तिक बताता है। पुलिस ने आरोपित के खिलाफ FIR दर्ज कर के जाँच कर रही है। घटना मंगलवार (12 दिसंबर, 2023) की है। शिकायतकर्ता ने ऑपइंडिया से बातचीत में बताया है कि आरोपित छात्र आदतन मुस्लिम विरोधी है।

यह मामला अलीगढ़ के थाना क्षेत्र सिविल लाइंस का है। यहाँ 12 दिसंबर, 2023 को AMU में पढ़ने वाले और मूलतः कासगंज निवासी छात्र ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायतकर्ता भी यहीं 12वीं का छात्र है जो मूल रूप से बिजनौर का रहने वाला है। शिकायत में बताया गया है कि मंगलवार को शिकायकर्ता अपने कुछ साथियों के साथ AMU के अल्लामा इकबाल हॉस्टल में मौजूद था। तभी वहाँ आरोपित छात्र पहुँचा और इस्लाम के खिलाफ गलत बातें करना लगा। आरोप यह भी है कि छात्र ने मुहम्मद पैगंबर के खिलाफ भी बेहद गलत बातें बोली हैं।

आरोप है कि जब शिकायतकर्ता ने गलत बातें बोल रहे छात्र को रोका तो आरोपित गंदी-गंदी गालियाँ देने लगा। साथ ही उसने धमकी दी, “तुम लोगों से जो हो कर लेना। मैं ऐसा ही बोलूँगा।” शिकायतकर्ता ने छात्र द्वारा बोले गए इन शब्दों को अपनी महज़बी भावनाओं को चोट पहुँचाने वाला बताया है। आरोपित पर कड़ी कार्रवाई की माँग भी की गई है। पुलिस ने इस शिकायत पर आरोपित छात्र पर 295A, 504 और 506 के तहत FIR दर्ज कर ली है। आरोपित और शिकायतकर्ता दोनों ही AMU के छात्र और मुस्लिम समुदाय से हैं। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

‘हमने नहीं की आरोपित की पिटाई’: शिकायतकर्ता

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में आरोप लगा है कि शिकायतकर्ता छात्र ने अपने साथियों के साथ मिल कर ईशनिंदा के नाम पर आरोपित की पिटाई की है। हालाँकि, शिकायतकर्ता ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा कि ये खबरें आधारहीन हैं और किसी ने भी आरोपित छात्र की पिटाई नहीं की है। शिकायतकर्ता ने इसके सबूत के तौर पर हॉस्टल के सभी CCTV रिकॉर्ड मौजूद होने का दावा किया। जब हमने पूछा कि क्या आरोपित छात्र द्वारा की गई ‘नबी के शान में गुस्ताखी’ के कोई सबूत हैं तो शिकायतकर्ता ने ‘नहीं’ में जवाब दिया।

शिकायतकर्ता ने हमें बताया कि जिस छात्र पर ईशनिंदा का आरोप लगा है वो आदतन मुस्लिम विरोधी है। हमें बताया गया कि आरोपित छात्र इस से पहले भी मुस्लिमों और उनकी आस्थाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ कर चुका है। शिकायतकर्ता ने यह भी बताया कि आरोपित अन्य छात्रों से खुद को नास्तिक बताया करता है। FIR दर्ज कराने वाले का कहना है कि इस बारे में कोई भी अन्य बयान उनके प्रिंसिपल अल्वी जारी करेंगे।

पाकिस्तान में 30 फौजियों को उतार दिया मौत के घाट: 100 किलो विस्फोटक लेकर आए थे 6 हमलावर, Pak ने तालिबान पर मढ़ा दोष

पाकिस्तान में हमलावरों ने वहाँ की फ़ौज के 23 जवानों को मौत के घाट उतार दिया है। इस हमले में 30 फौजी घायल भी हैं जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है। हमलावरों की संख्या 6 बताई जा रही है। ये सभी जवाबी कार्रवाई में मारे गए हैं। मंगलवार (12 दिसंबर, 2023) को हुए इस हमले की जिम्मेदारी तहरीक-ए-जिहाद नाम के संगठन ने ली है। इस घटना से नाराज पाकिस्तान ने अपने देश में मौजूद अफगानिस्तान के तालिबानी राजदूत को तलब कर के हड़काया है।

पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, यह हमला पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा सूबे में आने वाले डेराबन इलाके में हुआ है। यहाँ के डेरा इस्माइल खान में बनी एक स्कूल की बिल्डिंग में पाकिस्तान के फौजियों ने चेकिंग पॉइंट बना रखा है। मंगलवार की सुबह लगभग 4 बजे तड़के 6 हमलावर पाकिस्तानी फ़ौज की जाँच चौकी के पास आए। उन्होंने चौकी पर अपने वाहन में ब्लास्ट कर दिया जिस से इमारत ही धराशायी हो गई। इसके बाद हमलावर ऑटोमैटिक हथियारों से अंधाधुंध गोलियाँ बरसाने लगे।

अचानक हुए इस हमले से चेकिंग पॉइंट पर मौजूद पाकिस्तानी फौजियों को सँभलने का मौका ही नहीं मिला। जब तक वो हालात को समझ पाते तब तक 23 फौजियों की मौत हो चुकी थी। बाद में पाकिस्तान के जवानों में मोर्चा सँभाला और जवाबी कार्रवाई की। इस कार्रवाई में हमला करने आए सभी 6 विद्रोही मारे गए। हमले के दौरान कुल 30 फौजी बुरी तरह से घायल भी हुए है जिनका इलाज चल रहा है। कुछ की हालत गंभीर होने की वजह से अभी हताहतों की तादाद बढ़ भी सकती है।

पाकिस्तानी बम निरोधक दस्ते के मुताबिक, हमले में लगभग 100 किलो (1 क्विंटल) विस्फोटक का प्रयोग किया गया था। चश्मदीदों के मुताबिक मुठभेड़ लगभग 1 घंटे तक चली थी। पाकिस्तान में मौजूद तहरीक-ए-जिहाद पाकिस्तान नाम के संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। संगठन ने हमले का 2 मिनट का वीडियो भी जारी किया है। TJP का दावा है कि हमलावर स्वात और मर्दान जिलों के थे। हालाँकि, पाकिस्तानी अधिकारियों ने TJP द्वारा जारी वीडियो को भ्रामक बताया है।

वहीं एक अन्य घटना में कराची में 2 अन्य पाक फौजियों के मारे जाने की खबर है। पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनवारुल हक ने इस घटना की निंदा की है। उन्होंने पाकिस्तान से आतंकवाद को जड़ से खत्म करने का संकल्प लिया है। वहीं पाकिस्तान सरकार इस घटना के बाद से अफगानिस्तान पर काफी नाराज है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने अफगानिस्तान के तालिबानी राजदूत को तलब किया और खूब खरी-खोटी सुनाई। साथ ही जवाबी कार्रवाई की चेतावनी भी दी।

‘स्वेच्छा से हिंदुओं को सौंप दे विवादित धार्मिक स्थल’: मुस्लिमों और अन्य मजहब के लोगों से RSS नेता इंद्रेश कुमार की अपील

इंद्रेश कुमार ने मुस्लिमों और अन्य मजहब के लोगों से विवादित धार्मिक स्थल हिंदुओं को स्वेच्छा से सौंप देने की अपील की है। इंद्रेश कुमार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य हैं। साथ ही राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के संयोजक भी हैं। उन्होंने अयोध्या में बन रहे रामलला के मंदिर को राष्ट्रीय मंदिर भी बताया है।

इंद्रेश कुमार ने कहा, “मुसलमानों और अन्य धर्मों के लोगों को आगे आना चाहिए और हिंदुओं के विवादित धार्मिक स्थलों को हिंदू समुदाय को सौंप देना चाहिए।” उन्होंने कहा कि विदेशी आक्रान्ताओं ने सनातनी अनुयायियों के इन मंदिरों को ध्वस्त किया गया था। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान का भी समर्थन जिसमें उन्होंने कहा था कि हर मस्जिद में शिवलिंग नहीं देखना चाहिए।

इंद्रेश कुमार ने कहा, “मोहन भागवत ने जो कहा वह बहुत स्पष्ट है। खोजने की जरूरत नहीं है, सच्चाई सबके सामने है। हर किसी को उस सच्चाई को स्वीकार करना चाहिए। मोहन भागवत के बयान का उद्देश्य आपसी संघर्ष को समाप्त करना था ताकि समाज नफरत और हिंसा से मुक्त होकर सोच-विचार कर सके, वह इस बयान में बहुत स्पष्ट थे।”

उन्होंने अयोध्या में बन रहे रामलला के मंदिर को लेकर भी बड़ी बात बोली। उन्होंने कहा, “राम मंदिर सभी के लिए है। यह एक राष्ट्रीय मंदिर है। राम सभी के लिए हैं और सभी में हैं। भारत एक ऐसा राष्ट्र है जो सभी धर्मों को स्वीकार करता है और उनका सम्मान करता है। इसलिए इसे राष्ट्रीय मंदिर कहना है।”

गौरतलब है कि भारत में कई ऐसे मंदिर हैं जिन्हें इस्लामी आक्रान्ताओं ने तोड़ कर उन पर मस्जिदें बनवा दी थी। मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि और काशी में ज्ञानवापी के विवादित ढाँचे पर कोर्ट में में मामले भी चल रहे हैं। इसके अलावा भी अन्य ऐसे कई मामले जहाँ हिन्दुओं और मुस्लिमों में विवाद है।

अयोध्या में रामजन्मभूमि वाले मामले को भी पहले बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश की गई थी, लेकिन मुस्लिम पक्ष के अड़ियल रवैए के कारण सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही मंदिर निर्माण शुरू हो सका था। उस समय भी मुस्लिम पक्ष से स्वेच्छा से रामजन्मभूमि सौंप देने की अपील की गई थी। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।

मध्य प्रदेश में आज से मोहन की सरकार, राजेंद्र शुक्ला और जगदीश देवड़ा ने भी ली शपथ: PM मोदी, CM योगी समेत कई बड़े BJP नेता रहे मौजूद

मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनावों में बीजेपी को प्रचंड बहुमत से मिली जीत के बाद बुधवार (13 दिसंबर, 2023) को नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित हुआ। प्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर मोहन यादव ने शपथ ली। राज्यपाल मंगू भाई छगन भाई पटेल ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के मोतीलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित हुए शपथ ग्रहण समारोह में सीएम पद के साथ ही राजेन्द्र शुक्ला और जगदीश देवड़ा ने भी डिप्टी सीएम पद की शपथ ली।

समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित बीजेपी के कई दिग्गज नेता मौजूद रहे।

बताते चलें कि शिवराज चौहान सरकार में मंत्री रहे मोहन यादव को सोमवार (11 दिसंबर, 2023) को एक बैठक में सर्वसम्मति से बीजेपी विधायक दल का नेता चुना गया था। मोहन यादव को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का करीबी माना जाता है। वो उज्जैन के रहने वाले हैं।

वे अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदाय से आते हैं। इनकी संख्या प्रदेश की आबादी में 48 फीसदी से अधिक है।

इजरायल पर बरसेगा अल्लाह का कहर… भरी सभा में यहूदी देश को बद्दुआ दे रहे तुर्किए के मुस्लिम सांसद, आया हार्ट अटैक

तुर्की से तुर्किए हुए मुस्लिम बहुत मुल्क के सांसद हसन बित्मेज को भरी सभा में उस समय हार्ट अटैक आ गया, जब वे यहूदी देश इजरायल को कोस रहे थे। उन्होंने कहा कि गाजा पर हमला करने के कारण इजरायल पर ‘अल्लाह का कहर’ बरपेगा। इसके बाद ही उन्हें गंभीर हार्ट अटैक आया। इसके पश्चात सांसद को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है और उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।

53 वर्षीय हसन बित्मेज तुर्की इस्लामिक फ़ेलिसिटी पार्टी के सांसद हैं। वह इजरायल के हमास पर हमले के बारे में एक भाषण दे रहे थे। उन्होंने अपने भाषण का अंत ‘इजरायल पर अल्लाह का कहर बरपेगा और वह इससे बच नहीं सकेगा, मैं आप सबको सलाम करता हूँ’ कह कर किया।

इसके तुरंत बाद उन्हें हार्ट अटैक आया और वह जमीन पर गिर गए। हसन के गिरने के बाद वहाँ मौजूद अन्य सांसद उन्हें उठाने के लिए दौड़े। यहीं मौजूद एक अन्य सांसद डॉ. तुहान कोमेज ने उन्हें सीपीआर दी। हालाँकि, बित्मेज की हालत में सुधार नहीं आया और उन्हें स्ट्रेचर पर लादकर बाहर ले जाया गया।

तुर्किए के स्वास्थ्य मंत्री ने एक्स/ट्विटर पर लिखा, “फेलिसिटी पार्टी के डिप्टी मिस्टर हसन बित्मेज, जो कि तुर्की की संसद के सदस्य हैं, उन्हें उनके भाषण के दौरान समस्या हुई। मैं उनके स्वास्थ्य के विषय में लगातार जानकारी ले रहा हूँ। उनका अंकारा के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है।”

रिपोर्ट्स में बताया गया है कि हसन बित्मेज को डायबिटीज की बीमारी भी है। अस्पताल में उनकी एंजियोग्राफी भी हुई। जिस भाषण के दौरान वह गिरे, उसमें वह तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप आर्दोआन की आलोचना कर रहे थे। उनका कहना था कि इजरायल और गाजा के मुद्दे पर आर्दोआन कठोर नहीं हो रहे।

गौरतलब है इस्लामी आतंकी संगठन हमास ने 7 अक्टूबर, 2023 को इजरायल पर हमला किया था। इसके बाद इजरायल गाजा में सैन्य अभियान चला रहा है। गाजा के भीतर छुपे हमास के आतंकियों को इजरायल ढूंढ कर मार रहा है। कई मुस्लिम देश इजरायल के इस एक्शन की आलोचना कर रहे हैं।

दुबई में पकड़ा गया महादेव ऐप वाला रवि उप्पल, भारत लाने की तैयारी: इंटरपोल ने जारी कर रखा था रेड कॉर्नर नोटिस, ED कर रही है जाँच

रवि उप्पल दुबई में 12 दिसंबर 2023 को पकड़ा गया। वह सौरभ चंद्राकर के साथ मिलकर ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप महादेव का संचालन करता था। 43 साल के उप्पल को जल्द भारत को प्रत्यर्पित किए जाने की संभावना है।

उसके खिलाफ इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी कर रखा था। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच कर रही है। वहीं मुंबई और छत्तीसगढ़ पुलिस भी इस केस की जाँच में जुटी है।

महादेव ऐप का सालाना कारोबार करीब 20 हजार करोड़ रुपए का बताया जाता है। दुबई से इसका संचालन होता था। अधिकांश यूजर छत्तीसगढ़ के बताए जाते हैं। लेनदेन के लिए बेनामी खाते का इस्तेमाल किया जाता है। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर भी इस मामले में गंभीर आरोप हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रवि उप्पल के खिलाफ ED के अनुरोध पर इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था। ED ने इंटरपोल को बताया था कि उप्पल ने बिना भारत की नागरिकता छोड़े ही वनुआतु के पासपोर्ट प्रयोग किया है। उप्पल की गिरफ्तारी के बाद उसे भारत लाने के तैयारियाँ शुरू कर दी गई है। उससे पूछताछ में कई अन्य अहम जानकारियाँ सामने आ सकती हैं।

ED ने अपनी चार्जशीट में रवि उप्पल के अलावा सौरभ चंद्राकर को भी आरोपित किया था। सौरभ महादेव ऐप का प्रमोटर और मामले का मास्टरमाइंड बताया जाता है। सौरभ के खिलाफ भी इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी कर रखा है और उसकी लोकेशन UAE में बताई जा रही है। रवि उप्पल के बाद अब सौरभ चंद्राकर की भी गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। ED ने अदालत से रवि उप्पल और सौरभ चंद्राकर के खिलाफ गैर जमानती वारंट भी हासिल कर रखे हैं।

बताते चलें कि महादेव सट्टेबाजी ऐप मामला छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों से पहले एक बड़ा मुद्दा बन गया था। इस केस में गिरफ्तार हुए एक आरोपित ने आरोप लगाया था कि कॉन्ग्रेस नेताओं ने ऐप के प्रमोटर से 500 करोड़ रुपए की रिश्वत भी ली थी। मामले के खुलासे के बाद भाजपा ने छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का इस्तीफा माँगा था।

छत्तीसगढ़ CM पद की शपथ लेने से पहले जिनकी तस्वीर को विष्णुदेव साय ने माथे से लगाया, कौन हैं वे दिलीप सिंह जूदेव

10 दिसंबर 2023। बीजेपी ने विष्णुदेव साय को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के रूप में चुना। उनके नाम की घोषणा के साथ ही सोशल मीडिया में एक तस्वीर वायरल हुई, जिसमें युवा साय के कंधे पर हाथ रखकर एक शख्स खड़ा है और दोनों मुस्कुरा रहे हैं।

13 दिसंबर 2023 को विष्णुदेव साय मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। उससे पहले उनका एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें वह उसी व्यक्ति की तस्वीर अपने माथे से लगाते दिख रहे हैं, जिसने वायरल तस्वीर में उनके कंधों पर हाथ खड़ा कर रखा था।

अपने राजनीतिक जीवन के सबसे महत्वपूर्ण क्षण में साय जिस व्यक्ति की तस्वीर को अपने माथे से लगा रहे हैं, वे कोई और नहीं बल्कि अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री रहे दिलीप सिंह जूदेव हैं। जूदेव को साय का राजनीतिक गुरु कहा जाता है। कहा जाता है कि वे जूदेव ही थे, जिन्होंने 26 साल की उम्र में साय को विधायक बनवा दिया था। यह भी कहा जाता है कि कभी जूदेव ने युवा साय से यह भी कहा था कि वे एक दिन मुख्यमंत्री भी बनेंगे।

यही कारण है कि साय ने CM पद की शपथ लेने से पहले जशपुर राजपरिवार के सदस्यों से से मुलाकात की और इस दौरान स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव की तस्वीर को माथे से लगा लिया। इस दौरान जसपुर राजपरिवार की राजमाता माधवी देवी, स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव के बेटे प्रबल प्रताप सिंह जूदेव और उनके परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद थे।

कौन थे दिलीप सिंह जूदेव?

1949 में जशपुर राजपरिवार में जन्मे दिलीप सिंह जूदेव छत्तीसगढ़ की राजनीति में बड़ा नाम थे। उनकी पहचान जनजातीय समाज के उन लोगों का चरण पखार घर वापसी करवाने के लिए था जो ईसाई मिशनरियों की साजिशों का शिकार होकर धर्मांतरित हो गए थे। 2013 में अपने निधन से पहले तक दिलीप सिंह जूदेव ‘घर वापसी’ का यह अभियान चलाते रहे।

जूदेव का का मानना था कि एक बार जब कोई व्यक्ति ईसाई बन जाता है तो उसके मन में भारत माता के लिए वैसा प्रेम नहीं रह जाता। ऐसे में इन लोगों को तोड़ना बहुत आसान हो जाता है। उनका मानना था कि ईसाई मिशनरियों की धर्मांतरण की साजिशें भारत को विखंडित करने की साजिशों का हिस्सा है।

दिलीप सिंह जूदेव ने 2009 में एक इंटरव्यू में कहा था, “मैं दुनिया घूम चूका हूँ। मुझे पता है ईसाई मिशनरियाँ धर्मांतरण के लिए क्या तरीके अपनाती हैं। ये सिर्फ धर्मांतरण नहीं है, ये देश का चरित्र बदल सकता है। यहाँ मंदिरों के बगल में चर्च के ऊपर क्रॉस लगाया गया है। क्या हम वेटिकन में हनुमान मंदिर बना सकते हैं? मैं ईसाइयों के विरुद्ध नहीं हूँ, लेकिन धर्मान्तरण के विरुद्ध हूँ।”

जूदेव का विष्णु देव साय से कैसा रिश्ता?

छत्तीसगढ़ के नए CM विष्णु देव साय कुनकुरी विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने हैं। यह क्षेत्र जशपुर से सटा है। विष्णु देव साय और दिलीप सिंह जूदेव का साथ 1990 के दशक से चालू हुआ था। दिलीप सिंह जूदेव तब अविभाजित मध्य प्रदेश में भाजपा का बड़ा नाम हुआ करते थे। विष्णु देव साय 1989 में ग्राम पंचायत बगिया से सरपंच चुने गए थे।

यहीं से उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई थी। जूदेव, साय के सरपंच रहते ही उनसे मिले थे और उनके काम से प्रभावित थे। इसके बाद जूदेव ने साय को आगे बढ़ाया। विष्णु देव साय इसके बाद जूदेव के आशीर्वाद से अविभाजित मध्य प्रदेश की तपकरा सीट से विधानसभा का चुनाव लड़े और जीते। इसके बाद 1999 में विष्णु देव साय लोकसभा पहुँचे। वे चार बार लोकसभा का चुनाव जीत चुके हैं। जूदेव और साय साथ मिलकर इस इलाके में ईसाई मिशनरियों के दुष्प्रचार के विरुद्ध काम करते थे।

अब बेटे प्रबल प्रताप बढ़ा रहे दिलीप सिंह जूदेव का अभियान

दिलीप सिंह जूदेव का वर्ष 2013 में निधन हो गया था। उनके तीन बेटे- श्रुतान्जय सिंह जूदेव, युद्धवीर सिंह जूदेव और प्रबल प्रताप सिंह जूदेव हैं। इनमें से श्रुतान्जय और युद्धवीर सिंह की मृत्यु हो चुकी है।

अब उनके बेटे प्रबल प्रताप सिंह जूदेव घर वापसी के अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं। इस बार बीजेपी ने उन्हें मुश्किल माने जाने वाली कोटा सीट से विधानसभा चुनाव में उतारा था। लेकिन प्रबल प्रताप यह सीट नहीं जीत पाए। प्रबल प्रताप सिंह जूदेव अब तक छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा जैसे राज्यों में 10,000 से अधिक हिन्दुओं की घर वापसी करवा चुके हैं। वर्ष 2021 में प्रबल प्रताप सिंह जूदेव का ऑपइंडिया से बातचीत की थी।

उन्होंने तब अपने पिता और घर वापसी के विषय में कहा था, “पिता जी के दिवंगत होने के बाद से मैं इस कार्य को आगे बढ़ा रहा हूँ। छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा जैसे राज्यों में हमलोग 10 हजार से अधिक लोगों की इस तरह के कार्यक्रमों के जरिए घर वापसी करवा चुके हैं। कोरोना महामारी के कारण बीच में करीब दो साल हमारा यह अभियान रुक गया था। अब फिर से हम इसे गति दे रहे हैं। यह पवित्र काम है। देश निर्माण का काम है। इसे मेरे पिता ने शुरू किया और इससे जुड़कर मैं बहुत गौरवान्वित हूँ।”

गायों की लाश वाली तस्वीरें देख गुजरात हाई कोर्ट स्तब्ध, कहा- भगवान भी माफ नहीं करेंगे: खुले में फेंक दिए थे अवशेष

गुजरात के खेड़ा जिले के नाडियाद में गायों की मौत को लेकर हाई कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की है। गायों की लाश वाली तस्वीरें देख हाई कोर्ट स्तब्ध रह गया। उसने कहा कि इस कृत्य के लिए भगवान भी माफ नहीं करेंगे। मौत के बाद गायों के अवशेष खुले में ही फेंक दिए गए थे।

जस्टिस एजे शास्त्री और जस्टिस हेमंत प्रच्छक की बेंच ने सड़क पर खुले में घूमने वाले मवेशियों से होने वाली परेशानियों से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए य​ह टिप्पणी की। नडियाद के रहने वाले मौलिक श्रीमाली ने यह याचिका दायर की थी। उन्होंने इस समस्या की तरफ कोर्ट का ध्यान खींचने के लिए खुले में छोड़ दी गई गायों की लाश की तस्वीरें भी पीठ के सामने रखी।

हाई कोर्ट की बेंच ने इस पर हैरानी जताते हुए अधिकारियों से जाँच कर रिपोर्ट पेश करने को कहा। राज्य सरकार की नीति के तहत आवारा पशुओं की परेशानी से निपटने के लिए गायें बाड़े में रखी गई थी। इनमें 30 गायों की मौत हो गई थी। कोर्ट ने इसे लेकर खेड़ा जिले के कलेक्टर से रिपोर्ट तलब की है।

गायों की लाशों की तस्वीरें देखने के बाद जस्टिस शास्त्री ने कहा, “यह बहुत परेशान करने, चौंकाने वाला और सकते में डालने वाला है। हमें लगता है कि किसी नीति को नियमित करने और लागू करने की आड़ में निर्दोष जानवरों की हत्या नहीं की जा सकती। इंसानी जिंदगी की सहूलियत के लिए हम ऐसी चीज की की मंजूरी नहीं दे सकते।” उन्होंने कहा कि अगर ऐसा हो रहा है तो भगवान भी हमें माफ नहीं करेंगे। निर्दोष जानवरों को इस तरह खत्म नहीं किया जा सकता। लोगों की सुविधा के लिए एक भी निर्दोष जानवर की हत्या नहीं की जानी चाहिए।

गुजराज HC ने इसे लेकर महाधिवक्ता कमल त्रिवेद्वी को रिपोर्ट पेश करने को कहा। महाअधिवक्ता ने इस मसले पर गुजराज HC के सख्त रवैए को देखते हुए कार्रवाई करने का वादा किया है। उन्होंने हाईकोर्ट से ये भी कहा कि इस तरह के काम कुछ शरातती तत्वों के इशारों पर होते है। अधिकारी ये पता लगाएँगे कि ये उपद्रवी और शरारती तत्व आखिर कौन हैं।

इस मामले में अगली सुनवाई बुधवार यानी आज 13 दिसंबर को है। हाई कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे मवेशियों को रखने की जगह की स्थिति और नडियाद की घटना को लेकर कार्रवाई पर विवरण पेश करेंगे। गौरतलब है कि गुजरात में गायों की हत्या पर आजीवन कारावास की सजा है। इसे 2017 में लागू किया गया।