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जिस महिला मैनेजर की मौत के बाद आदित्य ठाकरे पर उठे सवाल, जिससे रेप तक के दावे, उसकी फाइल फिर से खुली, SIT करेगी नए सिरे से जाँच

दिशा सालियान की मौत की फाइल फिर से खुल गई है। मुंबई पुलिस की एसआईटी नए सिरे से मामले की जाँच करेगी। वह अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर थीं। उनकी मौत को लेकर कई तरह के दावे मीडिया में आ चुके हैं। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे से भी इस मौत को लेकर सवाल पूछे जा चुके हैं।

कथित तौर पर साल 2020 में 8 जून की रात मुंबई के मलाड में एक इमारत की 14वीं मंजिल से गिरने की वजह से दिशा की मौत हो गई थी। मुंबई पुलिस ने इसे आत्महत्या करार दिया था। इसके कुछ ही दिन बाद 14 जून को सुशांत सिंह राजपूत बांद्रा स्थित अपने घर में मृत मिले थे।

महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पिछले दिनो दिशा मामले की दोबारा जाँच की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि इस मामले में पुलिस को नए सबूत मिले हैं। अब आधिकारिक तौर पर जाँच के लिए एसआईटी का गठन कर दिया गया है।

कौन थी दिशा सालियान

दिशा सालियान सेलिब्रिटी मैनेजर का काम करती थी। सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर रही थी। कथित तौर पर मलाड के गैलेक्सी रीजेंट बिल्डिंग की 14वीं मंजिल से गिरकर उनकी जान चली गई थी। इस मामले को शुरुआत से ही संदिग्ध बताया जा रहा। दिशा सालियान के साथ गैंगरेप और हत्या के दावे किए गए थे। पोस्टमार्टम में दो दिन की देरी पर भी सवाल उठे थे। अभिनेत्री कंगना रनौत ने तो सुशांत सिंह राजपूत और दिशा सालियान की मौत के मामले में सीधे-सीधे आदित्य ठाकरे से सवाल पूछे थे।

दिशा सालियान मौत की एसआईटी करेगी जाँच

दिशा सालियान की मौत को शुरुआत में मुंबई पुलिस ने खुदकुशी बता केस बंद कर दिया था। अब महाराष्ट्र सरकार के आदेश के बाद मुंबई पुलिस के डिप्टी कमिश्नर अजय बंसल की निगरानी में इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी इस मामले की जाँच करेंगे। इस जाँच का जिम्मा सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर चिमाजी अधम को सौंपा गया है। वो मालवाणी पुलिस स्टेशन में तैनात हैं।

दिशा सालियान की मौत को लेकर कई दावे

दिशा सालियान के मृत शरीर को ले जाने के लिए बुलाई गई एंबुलेंस के ड्राइवर पंकज सैदन ने रिपब्लिक भारत के साथ बातचीत में कहा था, “दिशा सालियान के पूरे शरीर पर घाव थे। उनकी ठुड्डी के बगल में 1.5 इंच का छेद था। उनकी आँख, नाक, दाँत से खून बह रहा था। उनका हाथ भी मुड़ गया था।” वहीं, मीडिया रिपोर्ट में चश्मदीद के हवाले से दावा किया गया था कि 8 जून की रात दिशा से चार लोगों ने रेप किया था। इस रात उन्होंने अपने घर पर पार्टी रखी थी। बाद में 14वीं मंजिल से गिरने से उसकी मौत हो गई थी। चश्मदीद ने बताया था कि उस रात पार्टी में काफी तेज म्यूजिक बज रहा था। इसके कारण दिशा सालियान की चीख-पुकार दब गई थी।

देवेंद्र फडणवीस ने किया था दोबारा जाँच का ऐलान

बता दें कि पिछले साल दिसंबर में देश की संसद में भी दिशा सालियान की मौत का मामला उठा था। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की पार्टी बाला साहेब शिवसेना के सांसद राहुल शेवाले ने 21 दिसंबर 2022 को संसद में बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े कई चौंकाने वाले खुलासे किए थे। इसके बाद शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के विधायक भरत गोगावले और बीजेपी विधायक नितेश राणे ने महाराष्ट्र विधानसभा में भी सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर दिशा सालियान की मौत का मुद्दा उठाया और इस मामले की जाँच की माँग की। इसके बाद डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने ऐलान किया कि इस मामले की जाँच स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम द्वारा करवाई जाएगी।

आदित्य ठाकरे की नार्को टेस्ट की माँग

इस मामले में बीजेपी नेता नितेश राणे ने आदित्य ठाकरे का नार्को टेस्ट कराने की माँग की थी। राणे ने 22 दिसंबर 2022 को मीडियाकर्मियों से कहा, “दिशा सालियान की मौत का सच सामने आने दीजिए। यह मामला अभी भी मुंबई पुलिस के पास है। अभी तक इसकी सीबीआई जाँच नहीं कराई गई है। मैं सीएम से इसकी जाँच कराने का अनुरोध करूँगा। फाइनल पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और पूरी किताब के पन्ने अभी मिलने बाकी हैं। आदित्य ठाकरे का नार्को टेस्ट कराया जाना चाहिए।”

जून 2023 में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि सुशांत सिंह राजपूत और दिशा सालियान की मौतों के मामले में पुलिस अब भी सक्रिय है। इन मामलों पर पुलिस गौर कर रही है और कुछ लोगों से सबूत सौंपने के लिए कहा है। उन्होंने कहा था कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत मामले में लोगों ने कुछ सबूत पुलिस को सौंपें हैं। फिलहाल उनकी विश्वसनीयता की जाँच की जा रही है। फडणवीस ने दिशा सालियान की मौत मामले पर बोलते हुए कहा था कि जाँच चल रही है और अभी सारा ध्यान सबूतों की प्रमाणिकता जाँचने पर है।

BJP की सोशल इंजीनियरिंग से खिले विष्णु, मोहन और भजन, 2024 से पहले हिंदुओं को जाति में बाँटने की राजनीति मुरझाई

हिंदी बेल्ट के तीन राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में विधानसभा चुनाव से पहले बिहार में जातीय जनगणना के आँकड़े जारी किए गए थे। इसके आसपास ही बीजेपी के खिलाफ लामबंद हुई राजनीतिक पार्टियाँ ‘सामान्य वर्सेज ओबीसी-एससी-एसटी’ के नाम पर जातीय राजनीति को हवा दे रही थी। वो भी उस समय, जब अगले साल लोकसभा चुनाव हैं। उससे पहले देश के सभी हिंदुओं को एकजुट करने वाले भगवान राम के जन्मस्थल पर भव्य राम मंदिर का उद्घाटन होना है।

चूँकि ये जातीय कार्ड इसीलिए उछाले जा रहे थे, ताकि हिंदू एकजुट न हो सकें, लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने सभी जातिगत पार्टियों की हवा निकाल दी है। भाजपा ने छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में मुख्यमंत्रियों और उप-मुख्यमंत्रियों के नाम पर उन 9 नामों की घोषणा की है, जिसका अंदाजा किसी को भी नहीं था। इन 9 नामों ने विपक्षी गठबंधन की हिंदुओं की एकता को खंडित करने की साजिश को एक झटके में चकनाचूर कर दिया है।

इन राज्यों में विधानसभा चुनाव से पहले सड़क से लेकर संसद तक कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी खुलेआम ओबीसी-ओबीसी की रट लगाए हुए थे, तो I.N.D.I. गठबंधन की अन्य पार्टियाँ जैसे सपा, आरजेडी, जेडीयू भी ‘जिसकी जितनी संख्या भारी’ के नाम पर जातिगत कार्ड खेल रही थीं। ये सभी राजनीतिक दल पूरे देश के हिंदुओं को जातीय रूप से राजनीतिक तौर पर खंड-खंड करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन 3 दिसंबर, 2023 को जब इन राज्यों में विधानसभा चुनाव के नतीजे आए, तो I.N.D.I. गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी और दो राज्यों में सत्ता संभाल रही कॉन्ग्रेस पार्टी की बुरी तरह से हार हुई।

इसके बाद से एक सप्ताह से अधिक समय तक भाजपा ने तीनों ही राज्यों में मुख्यमंत्रियों के नामों की घोषणा नहीं की और जब 10, 11 और 12 दिसंबर को छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों के नामों की घोषणा हुई, तो विपक्षी गठबंधन के नेताओं के सारे दाँव-पेंच एक झटके में स्वाहा हो गए।

BJP ही सोशल इंजीनियरिंग की असली मास्टर

बीजेपी ही राजनीति में सोशल इंजीनियरिंग लेकर आई थी। गोविंदाचार्य, उमा भारती, राम प्रकाश गुप्ता जैसे नामों को आगे बढ़ाया और अब इस बार तीन राज्यों के चुनावी नतीजों के बाद सभी राज्यों में मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री पदों के लिए ऐसे नाम सामने रख दिए हैं, जिनका विरोध करते विपक्षी पार्टियों को कुछ सूझ ही नहीं रहा है। बीजेपी ने जनजातीय, ओबीसी और ब्राह्मण मुख्यमंत्री दिए, तो दलित, राजपूत, ब्राह्मण, ओबीसी वर्ग के नेताओं को उप-मुख्यमंत्री बनाकर फिर से अपनी सोशल इंजीनियरिंग वाली छाप छोड़ दी है।

इसका असर सोशल मीडिया पर भी दिख रहा है। राजस्थान में दशकों बाद ब्राह्मण मुख्यमंत्री बनाकर, मध्य प्रदेश में यादव मुख्यमंत्री बनाकर और छत्तीसगढ़ जैसे जनजातीय बहुल राज्य में जनजातीय व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाने के बाद सोशल मीडिया तक में बीजेपी का समर्थन बढ़ा है। कई ऐसे सोशल मीडिया हैंडल, जो अब तक ओबीसी हितैषी और I.N.D.I. गठबंधन के हितैषी बने नजर आते थे, वो भी बीजेपी के इन मास्टरस्ट्रोक्स के चलते खामोश हो गए हैं। आइए, बताते हैं कि बीजेपी ने तीनों राज्यों में किन-किन लोगों को कमान सौंपी है।

छत्तीसगढ़ : भारतीय जनता पार्टी ने छत्तीसगढ़ में प्रचंड जीत हासिल की। संख्याबल के हिसाब से जनजातीय राज्यों में सबसे बड़े राज्यों में से एक छत्तीसगढ़ में बीजेपी ने वरिष्ठ जनजातीय नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री विष्णुदेव साय को मुख्यमंत्री बनाया। बीजेपी ने 10 दिसंबर को छत्तीसगढ़ में सोशल इंजीनियरिंग का असली पाठ विपक्षी दलों को पढ़ाया। यहाँ जनजातीय मुख्यमंत्री के बाद ब्राह्मण चेहरे विजय शर्मा को उप मुख्यमंत्री बनाया, तो राज्य के सबसे बड़े वोटर वर्ग ओबीसी से अरुण साव को भी उप-मुख्यमंत्री बनाया। यही नहीं, अरुण साव ही इस समय छत्तीसगढ़ बीजेपी के अध्यक्ष भी हैं। इससे भी आगे बढ़ते हुए बीजेपी ने तीन बार के मुख्यमंत्री रमन सिंह को विधानसभा अध्यक्ष बनाया। वो छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ विधायक भी हैं। इस समय से छत्तीसगढ़ में बीजेपी ने जनजातीय, ओबीसी और सामान्य तीनों ही वर्गों को सम्मान दिया।

मध्य प्रदेश : बीजेपी ने मध्य प्रदेश में सबसे चौंकाने वाला प्रदर्शन किया। इस बार बीजेपी ने दो तिहाई से भी अधिक सीटों पर जीत हासिल की। 11 दिसंबर को बीजेपी ने मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री, उप-मुख्यमंत्री के नामों की घोषणा की। बीजेपी ने ओबीसी चेहरे शिवराज सिंह चौहान को ओबीसी चेहरे डॉ मोहन यादव से रिप्लेश किया। पार्टी ने दलित नेता जगदीश देवड़ा को उप-मुख्यमंत्री बनाया, तो ब्राह्मण चेहरे राजेंद्र शुक्ला को भी उप-मुख्यमंत्री बनाया। यही नहीं, बीजेपी ने केंद्रीय कैबिनेट मंत्री रहे नरेंद्र सिंह तोमर को विधानसभा अध्यक्ष बनाया। इस तरह से एक बार फिर से बीजेपी ने अपने सोशल इंजीनियरिंग के फॉर्मूले से विपक्षियों को चौंका दिया।

खास बात ये है कि डॉ मोहन यादव उस यादव समाज से आते हैं, जो पड़ोस के उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में ओबीसी राजनीति की अगुवाई करती है। इन्हीं राज्यों में विपक्ष ओबीसी-ओबीसी का खेल खेलने की कोशिश में थी, लेकिन डॉ मोहन यादव के नाम की घोषणा कर बीजेपी ने सपा, RJD, JDU जैसी पार्टियों की राजनीतिक जमीन ही खिसका दी। खास बात ये है कि डॉ मोहन यादव की ससुराल यूपी के सुल्तानपुर (अवध क्षेत्र) में है। ऐसे में इटावा से पूरे राज्य के यादव वोटबैंक को साध रही अखिलेश की सपा के लिए डॉ मोहन यादव का नाम ही बड़ी चुनौती बन गया है।

चूँकि ओबीसी और खासकर यादव-मुस्लिम गठजोड़ की राजनीति करने वाली सपा के सामने अब भाजपा का सोशल इंजीनियरिंग वाला हिंदुत्व खड़ा हो गया है, ऐसे में उनकी बोलती बंद हो गई है।

राजस्थान : बीजेपी ने 12 दिसंबर को तीसरे राज्य राजस्थान में मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री पद के लिए नामों की घोषणा की। बीजेपी ने ब्राह्मण चेहरे भजनलाल शर्मा को मुख्यमंत्री बनाया है। वो पहली बार विधानसभा के लिए चुने गए हैं, लेकिन लंबे समय से RSS से जुड़े हुए हैं। भजन लाल के साथ दीया कुमारी और प्रेमचंद बैरवा को उप-मुख्यमंत्री के रूप में चुना गया है। दीया कुमारी जहाँ आमेर राजघराने से आती हैं, वहीं प्रेमचंद बैरवा राजस्थान में भाजपा का दलित चेहरा हैं। इस तरह से राजस्थान में भी बीजेपी ने सोशल इंजीनियरिंग का अच्छा उपयोग किया है।

इन 9 नामों में सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व तो है ही, साथ ही उन ब्राह्मणों के लिए भी संदेश है कि पार्टी उन्हें अनदेखा नहीं कर रही है। छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में ब्राह्मणों को उप-मुख्यमंत्री पद मिला है, तो राजस्थान में मुख्यमंत्री पद। कई सालों पर ऐसा हुआ है, जब हिंदी पट्टी में बीजेपी ने किसी ब्राह्मण को मुख्यमंत्री पद सौंपा हो। खास बात ये है कि अगले साल लोकसभा चुनाव है। ऐसे में राजनीतिक तौर पर सबसे ज्यादा जागरुक ब्राह्मणों की तरफदारी अब बीजेपी को काफी फायदा देने वाली है। वहीं, डॉ मोहन यादव के दम पर वो यूपी और बिहार की जातीय पार्टियों को खुली चुनौती पेश कर पाएगी। जबकि विष्णुदेव साय के होने का फायदा बीजेपी को झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा जैसे जनजातीय राज्यों में मिलने वाला है।

किन बातों के दम पर मजबूत होती जा रही बीजेपी?

हिंदुत्व विचारधारा: बीजेपी की मूल विचारधारा हिंदुत्व एक एकजुट हिंदू पहचान पर जोर देता है, जो जातिगत अंतरों से ऊपर है। यह कथा कई हिंदुओं के साथ प्रतिध्वनित होती है जो अपनी सांस्कृतिक विरासत को वापस पाने और भारत में अपनी बहुसंख्यक स्थिति का दावा करने का प्रयास करते हैं।

विकास का एजेंडा: बीजेपी का आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण पर ध्यान केंद्रित विभिन्न हिंदू समुदायों से समर्थन आकर्षित किया है, चाहे जाति कुछ भी हो। यह समावेशी दृष्टिकोण समाज के विभिन्न स्तरों से समर्थन प्राप्त कर रहा है।

रणनीतिक गठबंधन: बीजेपी ने विभिन्न जातियों का प्रतिनिधित्व करने वाले क्षेत्रीय दलों के साथ रणनीतिक गठबंधन किए हैं, जिससे इसकी अपील बढ़ गई है और इसके चुनावी आधार को मजबूत किया गया है।

जाति-आधारित दलों का कमजोर होना: पारंपरिक जाति-आधारित दलों का पतन एक ऐसी शून्यता पैदा कर चुका है जिसे बीजेपी ने प्रभावी ढंग से भर दिया है, खुद को एक व्यवहार्य विकल्प के रूप में पेश कर रही है। बीजेपी ने जाति आधारित पार्टियों के लिए अपनी सोशल इंजीनियरिंग से ऐसी चुनौती पेश की है, जिसकी काट निकाल पाना इन दलों के लिए आसान नहीं रहने वाला।

बीजेपी का दूरदर्शी और सक्षम नेतृत्व, करिश्माई नरेंद्र मोदी

नरेंद्र मोदी का नेतृत्व बीजेपी के लिए दूरदर्शी और सक्षम रहा है। उन्होंने भारत को दुनिया की एक प्रमुख ताकत के रूप में स्थापित करने में मदद की है। उनके नेतृत्व में भारत ने आर्थिक विकास, बुनियादी ढांचे के निर्माण और सामाजिक कल्याण में महत्वपूर्ण प्रगति की है। मोदी एक करिश्माई नेता हैं जो लोगों को प्रेरित करने में सक्षम हैं। उन्होंने भारत को एक अधिक मजबूत और समृद्ध देश बनाने के लिए एक स्पष्ट दृष्टि प्रदान की है। उनकी नीतियों ने भारत में विकास और परिवर्तन को प्रेरित किया है।

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने भारत में एक नई राजनीतिक युग की शुरुआत की है। उनकी नीतियों ने भारत को एक अधिक मजबूत, समृद्ध और समावेशी देश बनाने में मदद की है। वहीं, दूसरे दलों के पास अब भी नरेंद्र मोदी का कोई तोड़ नहीं दिखता।

इंडी गठबंधन के पास नरेंद्र मोदी के खिलाफ कोई प्लान ही नहीं!

अब लोकसभा चुनाव 2024 में महज कुछ माह का ही समय बचा है। चूँकि अभी तक जातिगत जनगणना और मंडल की राजनीति कर एकजुट होने की कोशिश कर रही राजनीतिक पार्टियों के पास कोई मुद्दा ही नहीं बचा है। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी को रोकने के लिए अब इंडी गठबंधन व अन्य राजनीतिक दलों को नए सिरे से रणनीति बनानी पड़ेगी। फिर इन दलों की रणनीति जो अब तक नरेंद्र मोदी को रोकना तो दूर, उनकी चुनावी जीत की रफ्तार तक को धीमा नहीं कर पाई, वो सिर्फ कुछ माह में किस तरह की नई रणनीति बनाएंगे, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

साफ है, भारतीय जनता पार्टी ने इन तीन राज्यों में मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री पदों पर जिन नामों को बैठाया है, उनका असर लंबे समय तक रहने वाला है। वैसे भी, बीजेपी को पसंद करने वाली जनता हर तरफ से बीजेपी के साथ ही खड़ी दिखाई दे रही है, ऐसे में तीन राज्यों के माध्यम से पूरे देश के हिंदुओं को एकजुट करने वाले बीजेपी के इस कदम से उसके लिए लोकसभा चुनाव 2024 में जीत की हैट्रिक और नरेंद्र मोदी का तीसरा बाद प्रधानमंत्री बनना लगभग तय ही हो गया है।

राजस्थान के ‘लाल’ बने भजनलाल तो परिजन बोले- यह बंसी वाले की कृपा, राजस्थान के नए CM ने गणेश मंदिर में की पूजा-अर्चना

राजस्थान में भाजपा विधायक दल के नेता एवं मुख्यमंत्री चुने जाने के बाद भजनलाल शर्मा ने राजधानी जयपुर स्थित मोती डूंगरी गणेश मंदिर में पूजा-अर्चना की। वहाँ उन्हें पुजारियों की मौजूदगी में पूजा-अर्चना करते हुए देखा गया। इस दौरान वहाँ भगवान गणपति के जयकारे भी लगे। राजस्थान के नए मुख्यमंत्री को इस दौरान गले में भगवा अंगोछा डाले हुए भी देखा गया। भाजपा के प्रदेश महामंत्री रहे भजनलाल शर्मा अब क्षेत्रफल के हिसाब से देश के सबसे बड़े राज्य के CM हैं।

उन्हें मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद परिजन भी खुश हैं और उनके घर पर जश्न का माहौल है। भजनलाल शर्मा की माँ गोमती देवी ने कहा कि उनके बेटे के सीएम बनने के बाद उन्हें बहुत अच्छा लग रहा है, ये भगवान की मर्जी है। बुजुर्ग माँ ने कहा कि बालाजी महाराज की कृपा है। माँ ने बताया कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि ऐसा होगा। उन्होंने बंसी वाले की कृपा को भजनलाल शर्मा के सीएम बनने का कारण बताया। इस दौरान उन्होंने हाथ जोड़ कर ईश्वर को प्रणाम किया।

वहीं भरतपुर में उनके पिता कृष्णलाल शर्मा ने कहा कि ये बहुत बढ़िया है। उन्होंने इस दौरान प्रदेश की जनता को भी धन्यवाद दिया। जयपुर के सांगानेर से पहली बार विधायक बने भजनलाल शर्मा 55 वर्ष के हैं। राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने विधायक दल की बैठक में उनके नाम का प्रस्ताव रखा, जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया। पर्यवेक्षक के रूप में आए केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस दौरान पार्टी अनुशासन की भी बात की।

भजनलाल शर्मा को मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद उनकी पत्नी गीता शर्मा ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस दौरान जनता और सभी नेताओं को धन्यवाद दिया। गीता शर्मा ने जनता का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बंसी वाले की कृपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आशीर्वाद से उनके पति मुख्यमंत्री बने हैं। भजनलाल शर्मा की पत्नी इस दौरान ख़ुशी के कारण हाथ जोड़ कर रोने भी लगीं। सांगानेर से उन्होंने 48,000 से भी अधिक वोटों से जीत दर्ज की है।

राजस्थान के पुष्कर सरोवर में भजनलाल शर्मा के सीएम बनने के बाद दुग्धाभिषेक भी किया गया। राज्य में दीया कुमारी और प्रेमचंद बैरवा को उप-मुख्यमंत्री का दायित्व सौंपा गया है। वहीं वासुदेव देवनानी को विधानसभा अध्यक्ष बनाया गया है। उन्होंने अजमेर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज की है। भजनलाल शर्मा जहाँ ब्राह्मण समाज से आते हैं, दीया कुमार राजपूत और प्रेमचंद बैरवा दलित समुदाय से आते हैं। इससे पहले भाजपा ने छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साई और मध्य प्रदेश में मोहन यादव को मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी दी थी।

40 किलोमीटर की यात्रा, 3 बार बलात्कार, मारपीट… अर्धनग्न स्थिति में प्लेटफॉर्म पर कूद कर महिला ने बचाई जान, स्पेशल ट्रेन में बंद कर लिया था कोच का दरवाजा

मध्य प्रदेश में 30 साल की महिला को ट्रेन से उतरकर रविवार (10 दिसंबर, 2023) शाम को खाली पड़ी स्पेशल ट्रेन के एसी कोच का टॉयलेट इस्तेमाल करना भारी पड़ गया। इस दौरान एक दरिंदा भी उसका पीछा करते हुए उस ट्रेन में पहुँचा और इस चलती ट्रेन में 40 किलोमीटर तक की दूरी में 3 बार उसका बलात्कार किया।

किसी तरह खुद को बचाते हुए ये पीड़ित महिला इस चलती हुई स्पेशल ट्रेन से सतना रेलवे स्टेशन पर उतरने में कामयाब रही। यहाँ उसने तुरंत ऑन-ड्यूटी पुलिस को अपने साथ हुई वारदात की सूचना दी। सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) के एक अधिकारी के मुताबिक, ये घिनौनी वारदात मध्य प्रदेश के कटनी जिले में चलती ट्रेन में हुई।

सतना जीआरपी थाना प्रभारी एलपी कश्यप के मुताबिक, आरोपित की पहचान उत्तर प्रदेश के बांदा के मूल निवासी और मौजूदा वक्त में कटनी में रहने वाले 22 साल के कमलेश कुशवाह के तौर पर हुई है। सतना जीआरपी थाना प्रभारी कश्यप का कहना है कि आरोपित को गिरफ्तार कर सुबह 4 बजे ही सतना लाया गया और इसके बाद उसे कटनी भेजा गया जहाँ उसके खिलाफ केस दर्ज किया गया। वहीं पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) सारिका पांडे ने कहा कि आरोपित के आपराधिक रिकॉर्ड की जाँच की जा रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना तब हुई जब महिला रविवार शाम को सतना और कटनी सेक्शन के बीच पकरिया और मैहर रेलवे स्टेशनों के बीच जबलपुर-रीवा मेमू यानी पैसेंजर ट्रेन में चढ़ी थी। सतना जीआरपी पुलिस स्टेशन के प्रभारी कश्यप ने आगे बताया कि पीड़ित महिला सतना जिले के उचेहरा रेलवे स्टेशन की यात्रा करने के इरादे से कटनी रेलवे स्टेशन पर इस पैसेंजर ट्रेन में चढ़ी थी। हालाँकि, पकरिया रेलवे स्टेशन पर जब ये पैसेंजर ट्रेन रुकी तो इसी के साथ रीवा की तरफ जा रही एक खाली विशेष ट्रेन भी रुकी थी।

उन्होंने बताया कि यहाँ पर पीड़ित महिला अपनी ट्रेन से उतरी और टॉयलेट का इस्तेमाल करने के लिए वहाँ खड़ी इस विशेष ट्रेन के वातानुकूलित कोच में चली गई। आरोपित भी महिला के साथ पैसेंजर ट्रेन में ही था। उसने महिला का पीछा किया और वो भी इस विशेष ट्रेन के अंदर पहुँचा और उसने वहाँ कोच का दरवाज़ा बंद कर लिया।

उसने महिला पर पीछे से वार किया और उसे जोर से धक्का दिया। इससे वो ट्रेन के फर्श पर गिर गई। इससे उसके सिर पर गहरी चोट आई। जब विशेष ट्रेन फिर से आगे चल पड़ी तो आरोपित ने पकरिया और मैहर रेलवे स्टेशनों के बीच महिला के साथ मारपीट की और फिर से उसके साथ बलात्कार किया। पुलिस को दी गई शिकायत में महिला ने कहा कि जब उसने आरोपित का विरोध किया तो उसने उसे जान से मारने की धमकी दी। महिला ने पुलिस को ये भी बताया कि उसने मैहर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से उतरने की भरसक कोशिश की थी, लेकिन इसमें वो कामयाब नहीं हो पाई।

महिला ने पुलिस को बताया कि उसने सतना रेलवे स्टेशन पर आरोपित से कहा कि उसे बहुत प्यास लगी है। जैसे ही आरोपित पानी लेने के लिए इस विशेष ट्रेन से उतरा, पीड़ित महिला अपनी साड़ी, बैग और सैंडल को वहीं छोड़ अर्धनग्न हालत में प्लेटफॉर्म पर कूद पड़ी।

वो जितना तेज भाग सकती थी भागी। किसी तरह रात के 8 बजे पीड़ित महिला आधे कपड़ों और नंगे पाँव सतना रेलवे स्टेशन पर पहुँची। फिर उसने अपने साथ हुई वारदात की सूचना RPF कॉन्सटेबल को दी।

जबलपुर RPF के कमांडेंट अरुण त्रिपाठी के मुताबिक, जब रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (आरपीएफ) के कॉन्सटेबल ने आरोपित को फिर से उसी ट्रेन में चढ़ते देखा तो वो भी उसमें सवार हो गया, लेकिन आरोपित ने एसी कोच का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। वहीं सूचना पाते ही जीआरपी मौके पर पहुँची, लेकिन तब-तक स्पेशल ट्रेन वहाँ से रवाना हो चुकी थी।

इसके बाद स्टेशन मास्टर को इस संबंध में सूचित किया गया और उनकी मदद से इस विशेष ट्रेन को सतना के रेलवे स्टेशन के नज़दीक पड़ने वाले कैमा रेलवे स्टेशन पर रुकवा लिया गया। तब तक जीआरपी भी रोड के रास्ते वहाँ पहुँच गई। हालाँकि, आरोपित ने वातानुकूलित डिब्बे के अंदर खुद को बंद कर अपना बचाव किया।

इस एसी कोच का लॉक नहीं खुल पाया, लेकिन इस दौरान जीआरपी की टीम भी ट्रेन में ही रही। इस दौरान ट्रेन जब रीवा पहुँची तब कहीं जाकर तीन घंटे की मशक्कत के बाद रीवा स्टेशन रेलवे मैकेनिकल सेक्शन के कर्मचारियों की मदद से आखिरकार वातानुकूलित डिब्बे का दरवाजा खोला गया। इसके बाद रात करीब 11:30 बजे रीवा रेलवे स्टेशन पर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया।

गला रेता, प्राइवेट पार्ट पर चाकू से किए वार, हत्या से पहले फेसबुक पोस्ट में लिखा- हमारी बहन को मुस्लिमों के इलाके में छोड़ आया था…

हरियाणा के अंबाला में अपनी बहन की हत्या का आरोपित करन जायसवाल उर्फ कल्लू पकड़ा गया है। रिपोर्टों के अनुसार वह मंगलवार (12 नवंबर 2023) को राज्य के गृह मंत्री अनिल विज के घर सरेंडर करने पहुँचा था। लेकिन पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

करण ने सोमवार (11 दिसंबर 2023) को अपनी बहन भावना की गला रेतकर हत्या कर दी थी। उसके प्राइवेट पार्ट पर भी चाकू से वार किए थे। हत्या से पहले उसने फेसबुक पर एक पोस्ट में बहन की हत्या मजबूरी में करने की बात कही थी। ससुराल वालों पर अपनी बहन को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। साथ ही कहा था कि मेरठ में उसकी बहन को मुस्लिमों के इलाके के पास रात में छोड़ दिया गया था। उसकी किस्मत अच्छी थी जो वह घर वापस आ गई। इस पोस्ट में उसने लॉरेंस बिश्नोई गैंग से भी मदद की गुहार भी लगाई थी।

रिपोर्टों के अनुसार सोमवार देर शाम अंबाला छावनी के कच्चा बाजार में रहने वाले करन की 28 साल की बहन भावना जायसवाल से कहासुनी हुई थी। बहस बढ़ने पर करन ने बहन को चाकुओं से गोद डाला। उसने लगातार 30 वार किए। बहन के प्राइवेट पार्ट पर भी वार किए। इसके बाद वह फरार हो गया। परिवार वाले भावना को लेकर सिविल अस्पताल पहुँचे, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुँची और शव को अपने कब्जे में ले लिया। परिवार के मुताबिक, भावना की 2 साल पहले मेरठ के एक युवक से शादी हुई थी। लेकिन पति से अनबन के चलते वह पिछले 6 महीने से अपने मायके में अंबाला कैंट में रह रही थी, जबकि उसकी बेटी अपने पिता के पास मेरठ में रहती है।

फोटो साभार: फेसबुक अकाउंट करन जायसवाल

करन ने फेसबुक पर लिखा, “हमारी बहन का पति अंकुर जैन है। बहन के मांगलिक होने की वजह से उसके 9 दिनों में ही शादी रचाने का फैसला लिया गया था। हमने बगैर सोचे बहन की शादी कर दी। शादी के एक महीने के बाद ही लड़का हमारी बहन को रात 11 बजे के करीब मुस्लिमों के इलाके के नजदीक छोड़ गया।” करन ने ये भी आरोप लगाया कि बहन के ससुरालियों के रसूखदार लोगों से रिश्ते हैं।

पत्थर फेंका, मंदिर का शीशा तोड़ा, पेशाब किया… CCTV वीडियो में दिखा दाढ़ी-टोपी वाला शख्स, हिन्दुओं में आक्रोश

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में एक मंदिर पर एक शख्स ने रात के समय हमला बोल दिया। बड़ी दाढ़ी वाले इस शख्स का CCTV फुटेज भी सामने आया है। सीसीटीवी के माध्यम से सामने आए इस वीडियो में यह शख्स टोपी लगाए दिखता है।

जानकारी के अनुसार, यह घटना देहरादून में देहरादून-हरिद्वार रोड पर स्थित हर्रावाला में माता काली मंदिर में हुई। यहाँ रात को 11-12 दिसम्बर, 2023 को रात एक बजे एक शख्स ने यह हमला किया। यह हमलावर मंदिर के बाहर आकर पेशाब करता है। इसके बाद वह मंदिर पर पत्थर फेंकता है। उसके पत्थर फेंकने के कारण मंदिर का शीशा क्षतिग्रस्त हो गया है। कुछ देर बाद वह यहाँ से चला जाता है।

इस मामले में डोईवाला मुकदमे में मामला दर्ज किया गया है। सीसीटीवी के आधार पर इस आरोपित को पहचानने का प्रयास हो रहा है। घटना के कारण यहाँ के हिन्दुओं में काफी आक्रोश है। स्थानीय हिन्दुओं ने इस मामले में रोष जताते हुए जल्द से जल्द आरोपित को पकड़ने की माँग की है।

पुलिस का इस मामले में कहना है कि अभी पहचान स्पष्ट नहीं हुई इसलिए यह बता पाना मुश्किल है कि उसने यह काम किस उद्देश्य से किया है। उसकी धर-पकड़ करने के बाद यह स्थापित किया जा सकता है कि उसका क्या उद्देश्य था। गौरतलब है कि इससे पहले नवम्बर माह में झारखंड में एक मंदिर में मूर्तियों को क्षतिग्रस्त किया गया था। यहाँ पुजारी के साथ मारपीट भी की गई थी। यह घटना झारखंड के बोकारो में हुई थी। यहाँ छरछरिया झरने के पास स्थित इस मंदिर में पहुँचे कुछ लोगों ने रविवार (5 नवंबर, 2023) की सुबह यह मूर्तियाँ तोड़ी थीं।

इन लोगों का विरोध करने पर मंदिर के पुजारी राहुल तिवारी के ऊपर तलवारों से हमला कर दिया गया था, उन्होंने पास के दूसरे मंदिर में घुस कर जान बचाई। इसके अलावा नवम्बर माह में ही मुरादाबाद में ही एक मंदिर को क्षतिग्रस्त किया गया था।

महुआ मोइत्रा का सरकारी घर भी छिनेगा, कारोबारी से पैसे लेकर चमकाया था लुटियन दिल्ली वाला बँगला: संसदीय समिति ने मंत्रालय को भेजा पत्र

तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की पूर्व सांसद महुआ मोइत्रा की संसद सदस्यता खत्म होने के बाद अब दिल्ली में उन्हें मिला सरकारी आवास भी उनके कब्जे से जाएगा। पैसे और महँगे गिफ्ट लेकर प्रश्न पूछने की आरोपित महुआ की शनिवार (8 दिसम्बर, 2023) को सदस्यता रद्द कर दी गई थी।

अब संसद की आवासन समिति ने आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय को पत्र लिख कर कहा है कि वह महुआ मोइत्रा को उनका आधिकारिक आवास खाली करने का आदेश दें। महुआ को 30 दिनों के भीतर अपना आधिकारिक आवास खाली करना होगा। नियमानुसार, सांसदों की संसद सदस्यता जाने के बाद वह सरकार द्वारा दिए गए आधिकारिक आवास में नहीं रह सकते।

इससे पहले महुआ मोइत्रा संसद से निष्कासन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुँची थीं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपने निष्कासन के खिलाफ याचिका लगाकर कहा था कि आचार समिति उनके निष्कासन की अनुशंसा नहीं कर सकती इसलिए संसद उन्हें निकाल कर गलत किया है। महुआ मोइत्रा दिल्ली में HC माथुर लेन पर उनको आवंटित बँगले में रह रहीं थी। दिल्ली में सांसदों को उनके पद और वरिष्ठता के आधार पर बँगले दिए जाते हैं। कुछ सांसदों को फ्लैट भी दिए जाते हैं। इन बँगलों के मरम्मत का खर्चा आदि भी सरकार उठाती है।

महुआ मोइत्रा पर दुबई में रहने वाले कारोबारी दर्शन हीरानंदानी से पैसे और महँगे गिफ्ट लेकर कारोबारी गौतम अडानी के विरुद्ध प्रश्न पूछने का आरोप 15 अक्टूबर को भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा स्पीकर को एक पत्र लिख कर लगाया था। यह आरोप महुआ मोइत्रा के पूर्व पार्टनर और सुप्रीम कोर्ट में वकील जय अनंत देहाद्राई के हवाले से लगाए गए थे। बाद में दर्शन हीरानंदानी ने स्वयं यह स्वीकार किया था कि उन्होंने महुआ को महँगे तोहफे और पैसे दिए हैं। महुआ पर यह भी आरोप लगाया गया था कि उन्होंने अपने संसद पोर्टल की लॉगइन आईडी और पासवर्ड दर्शन हीरानंदानी को दिए।

इस बात को महुआ ने खुद भी स्वीकारा था। इस मामले की जाँच के लिए इसे लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने संसद की आचार समिति के पास भेज दिया था। आचार समिति ने दोनों पक्षों को सुन कर अपनी रिपोर्ट संसद को 8 दिसम्बर, 2023 को दी थी। दर्शन हीरानंदानी ने ये भी बताया था कि महुआ मोइत्रा ने अपने सरकारी आवास की मरम्मत के लिए भी उनसे पैसे लिए थे।

इस रिपोर्ट में महुआ मोइत्रा पर लगे आरोपों को सही पाया गया था। महुआ के इस कदाचार के चलते समिति ने उन्हें लोकसभा की सदस्यता से बर्खास्त करने की सिफारिश की थी। इसके पश्चात 8 दिसम्बर, 2023 को ही इस रिपोर्ट के आधार पर महुआ की संसद सदस्यता रद्द कर दी गई थी।

जिस IT रेड में नोट गिनते-गिनते थक गई मशीनें, वह 6 दिन बाद बंद हुई: नेहरू के ‘खास’ थे धीरज साहू के पिता, राहुल तक चली आ रही वही रिश्तेदारी

6 दिसंबर 2023 को आयकर विभाग ने कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद धीरज साहू से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की थी। यह कार्रवाई झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के अलग-अलग जगहों पर एक साथ हुई थी। आखिरकार 6 दिन के बाद यह रेड पूरी हो गई है।

इस छापेमारी के दौरान नोटों का इतना बड़ा जखीरा मिला है कि उसे गिनने में मशीनों के भी सांस फूल गए। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार 350 करोड़ रुपए अधिक नगद मिली है। कुछ रिपोर्टों में करीब 500 करोड़ रुपए मिलने की बात कही गई है। करीब 17 किलो सोने के जेवर और 40 सोने के बिस्कुट भी मिले हैं।

इस बरामदगी के बाद से कॉन्ग्रेस का नेतृत्व धीरज साहू से दूरी दिखाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन साहू परिवार की कॉन्ग्रेस के शीर्ष परिवार से करीबी आज की नहीं है। इनका संबंध जवाहर लाल नेहरू से शुरू हुआ जो इंदिरा, राजीव, सोनिया होते हुए राहुल गाँधी तक जारी है। खास बात यह भी है कि जैसे-जैसे राजनीति में नेहरू-गाँधी परिवार मजबूत होते गया, वैसे-वैसे झारखंड से ओडिशा तक साहू परिवार का व्यवसायिक साम्राज्य भी फैलता गया।

क्या-क्या बरामद हुआ?

इनकम टैक्स विभाग की रेड में धीरज साहू के ठिकानों से 354 करोड़ की नकदी मिली थी, जिसे गिनने का काम एसबीआई की तीन शाखाओं में कई दिनों तक चला। जब बैंक लॉकरों को खोला गया तो अधिकारियों की आँखें खुली की खुली रह गई। लॉकरों से दस्तावेजों के साथ ही सोने के बिस्किट, सोने के जेवरात और हीरे भी बरामद हुए हैं। एक अनुमान के मुताबिक, नकद मिले पैसों के अलावा भी करोड़ों का धन बरामद हुआ है। छापे के दौरान ओडिशा के बलांगीर स्थित ठिकाने से सर्वाधिक बरामदगी की गई। बलांगीर से ही करीब 280 करोड़ रुपए बरामद हुए हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में, धीरज साहू के ठिकानों से 454 करोड़ की बरामदगी की खबर दी गई है।

नेहरू के जमाने से ही कॉन्ग्रेस से रिश्ते

धीरज साहू के पिता का नाम बलदेव साहू था। वो पुराने कॉन्ग्रेसी नेता थे। स्वतंत्रता सेनानी रहे। बिहार के प्रमुख व्यवसायियों में भी उनका नाम रहा। अंग्रेजों ने भी उन्हें ‘राय साहब’ की उपाधि दे रखी थी। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से लेकर उनकी बेटी इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी तक उनके घर पर आ चुके हैं। फिल्मी हस्तियाँ तो अक्सर इस परिवार की पार्टियों और समारोहों का हिस्सा बनती रही हैं।

झारखंड में है साहू परिवार का व्हाइट हाउस

धीरज साहू का परिवार हमेशा से राजनीति में रहा है। वे 5 भाई हैं। इनमें से 4 राजनीति में सक्रिय हैं। उनके बड़े भाई शिव प्रसाद साहू राँची से कॉग्रेस के टिकट पर 1980 और 1984 में सांसद रहे थे। एक भाई गोपाल साहू हजारीबाग से सांसदी का चुनाव लड़ चुके हैं। धीरज साहू भी झारखंड की चतरा सीट से दो बार लोकसभा का चुनाव लड़कर हार चुके हैं. इसके बाद कॉन्ग्रेस उन्हें राज्यसभा भेजने लगी। साहू का यह राज्यसभा में तीसरा कार्यकाल है। पहली बार वे जून 2009 में चुनकर आए। फिर 2010 और उसके बाद 2018 में तीसरी बार संसद के उच्च सदन में पहुँचे। झारखंड के लोहरदगा में साहू परिवार का पैतृक घर है। इसे व्हाइट हाउस ऑफ लोहरदगा कहा जाता है।

शराब का कारोबारी परिवार

कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद और शराब कारोबारी धीरज साहू के ठिकानों पर 6 दिसम्बर 2023 से 12 दिसंबर तक छापेमारी चली। छापेमारी झारखंड के लोहरदगा और राँची, बंगाल के कोलकाता और टीटागढ़ और ओडिशा में बोलांगीर तथा संबलपुर में हुई है। इसके अलावा कुछ अन्य स्थानों पर भी टीम पहुँची थी।

उल्लेखनीय है कॉन्ग्रेस सांसद धीरज प्रसाद साहू और उनके रिश्तेदारों का शराब का बड़ा कारोबार है। बलदेव साहू एंड ग्रुप ऑफ कंपनीज मूल रूप देशी शराब बनाने का काम करती है। इस धंधे में कंपनी करीब चार दशक से है। कंपनी का नाम धीरज साहू के पिता बलदेव साहू के नाम पर है। कॉन्ग्रेस सांसद के अलावा उनके परिवार के अन्य सदस्य भी कंपनी में शामिल हैं।

इतनी बड़ी मात्रा में नकद मिलना इसलिए भी चौंकाता है, क्योंकि 2018 के चुनावी हलफनामे में साहू ने अपने ऊपर 2.36 करोड़ रुपए का कर्ज बताया था। कुल संपत्ति 34 करोड़ बताई थी। 2016-17 में जो इनकम टैक्स रिटर्न भरा था, उसमें अपनी आमदनी एक करोड़ रुपए से कुछ ही अधिक बताई थी।

‘सेक्स’ के लिए नहीं मिली हिना तो नवाब ने उसके भाई समीर का रेत दिया गला, फिर वीडियो बनाकर सबको बताया

बुलंदशहर के खुर्जा में हत्या की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहाँ नवाब नाम के शादीशुदा शख्स ने आशिकी में लुटने के बाद और कई केस दर्ज होने के बाद ऐसा कदम उठा लिया कि लोग हैरान रह गए। उसने अपनी प्रेमिका की शादी कहीं और होती देख उसके भाई समीर की ही गला रेतकर और चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी। नवाब ने खुद एक वीडियो बनाकर बताया है कि उसने समीर को क्यों मारा?

क्या है पूरा मामला?

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि बुलंदशहर के खुर्जा में सोमवार (11 दिसंबर, 2023) की दोपहर 23 साल के समीर को चाकुओं से गोद कर मार डाला गया। ये मामला खुर्जा के तरीनान मोहल्ले का है, जहाँ सोमवार को समीर दोपहर के बाद अपने घर जा रहा था। वहीं रास्ते में उसके पुराने परिचित नवाब ने उसे चाकुओं से गोद डाला। नवाब ने समीर का गला काट डाला, तो उसके पेट में ताबड़तोड़ वार किए। इसमें समीर की आँत तक बाहर आ गई।

इन रिपोर्ट्स में बताया गया है कि नवाब ने समीर को 3000 रुपए के लेन-देन के विवाद में मार डाला। समीर की आँत तक बाहर निकली हुई थी। लोगों ने पुलिस को सूचना दी और उसे अस्पताल पहुँचाया गया, तो अस्पताल पहुँचने से पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी। परिजनों ने जब समीर का शव देखा, तो कई लोग बेहोश हो गए। इतनी वीभत्स्ता से समीर को नवाब ने क्यों मारा, ये खुद नवाब ने वीडियो जारी करके बताया है।

प्रेम-प्रसंग के नाम पर पैसों की उगाही का लगाया आरोप

नवाब ने एक वीडियो जारी करके बताया है कि वो हिना नाम की लड़की से प्रेम करता था। हालाँकि, वो 17 साल से शादीशुदा था, लेकिन उसे बच्चा नहीं हो रहा था। उसने हिना से प्रेम की पींगे एक बच्चे की चाहत में बढ़ाई थी। उसके बारे में हिना के परिवार वालों को पता था, और उसे धमकियाँ दी जा रही थी। नवाब ने बताया कि उससे हिना के परिवार वालों ने थोड़े-थोड़े करके लाखों रुपए ऐंठ लिए। नवाब ने कहा कि उसके पैसे गए तो गए, लेकिन अब हिना का निकाह कहीं और किया जा रहा था, तो ये उसे नागवार गुजरा।

नवाब ने वीडियो में बताया है कि हिना के परिजनों ने उसके खिलाफ कई मामले भी दर्ज करा दिए थे। इसके अलावा वो पैसे भी माँग रहे थे। ऐसे में गुस्से में आकर उसने समीर को मार डाला। नवाब ने कहा कि हिना के साथ उसके कई वीडियो हैं, जिन्हें वो सोशल मीडिया पर भी वायरल कर देगा। इसके बाद से नवाब फरार चल रहा है।

क्या कह रही है बुलंदशहर पुलिस?

बुलंदशहर पुलिस के ASP (ग्रामीण) ने इस मामले में अपना बयान जारी किया है और बताया है कि समीर नाम के युवक की हत्या कर दी गई है। पुलिस अभी आरोपित की तलाश कर रही है। पुलिस का कहना है कि ये हत्या पैसों के लेन-देन में की गई है।

ये मामला चाहे पैसों का हो या प्रेम प्रसंग का, डराने वाली बात है नवाब द्वारा जारी किया गया वीडियो। इस वीडियो में वो बेधड़क दिख रहा है। वो खुलेआम आपत्तिजनक बातें कर रहा है। वो कह रहा है कि चाहे कुछ महीने के लिए ही सही, हिना उसे मिल जाती तो उसे संतुष्टि मिल जाती। उसने इस हत्याकांड को अंजाम देने के बाद वीडियो को रिकॉर्ड किया है, जिसमें उसके अंदर कानून का कोई डर नहीं दिख रहा है। ऐसे में देखना ये है कि बुलंदशहर पुलिस उसे कब गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजती है।

राजस्थान BJP में नए युग का सूत्रपात, पहली बार के MLA भजनलाल शर्मा होंगे CM: दीया कुमारी और प्रेमचंद बैरवा डिप्टी CM

राजस्थान में भजनलाल शर्मा को भाजपा ने नया मुख्यमंत्री चुना है। वो राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्थित सांगानेर से विधायक हैं। वो पहली बार विधानसभा के लिए चुने गए हैं। प्रदेश कार्यालय में हुई बैठक में उन्हें भाजपा विधायक दल का नेता चुना गया, जहाँ पार्टी आलाकमान की तरफ से पर्यवेक्षण के रूप में आए केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी मौजूद रहे। मूलतः भरतपुर के रहने वाले भजनलाल शर्मा ब्राह्मण समाज से हैं, और लंबे समय से RSS से जुड़े हुए हैं।

भजनलाल शर्मा फ़िलहाल भाजपा में प्रदेश महामंत्री के पद पर थे। बैठक से पहले केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जयपुर में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। फोटो सेशन के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को उनके बगल में बैठे हुए देखा गया। 55 वर्षीय भजनलाल शर्मा लगातार 3 प्रदेश अध्यक्षों के कार्यकाल में प्रदेश महामंत्री रह चुके हैं। भरतपुर में वो जिला मोर्चा के अध्यक्ष रहे हैं। इस बार उन्होंने 48,000 वोटों से जीत दर्ज की है।

वहीं दीया कुमारी और प्रेमचंद बैरवा को उप-मुख्यमंत्री के रूप में चुना गया है। दीया कुमारी जहाँ आमेर राजघराने से आती हैं, वहीं प्रेमचंद बैरवा राजस्थान में भाजपा का दलित चेहरा हैं। दीया कुमारी राजसमंद से 2019 में भाजपा के टिकट पर सांसद चुनी गई थीं। उन्हें विद्याधर नगर से विधानसभा चुनाव लड़ाया गया था और वो सफल रहीं। वहीं प्रेमचंद बैरवा अजमेर के दूदू से विधायक हैं। उन्होंने यहाँ से 2013 में भी जीत दर्ज की थी।

दीया कुमारी भी 2013 में सवाई माधोपुर से विधानसभा चुनाव लड़ी थीं और उन्होंने जीत भी दर्ज की थी। राजनाथ सिंह के अलावा विनोद तावड़े और सरोज पांडेय को पर्यवेक्षक के रूप में जयपुर भेजा गया था। वहीं मुख्यमंत्री बनाए गए भजनलाल शर्मा की बात करें तो वो ABVP से जुड़े रहे हैं। इस बार मौजूदा विधायक अशोक लोहाटी का टिकट काट कर लड़ाया गया था। अजमेर नॉर्थ से विधायक वासुदेव देवनानी को विधानसभा अध्यक्ष बनाया गया है। वो यहाँ से लगातार चौथी बार विधायक चुने गए हैं।