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माफिया मुख्तार का करीबी रियाज अंसारी… दादागिरी से करवाया था अवैध कार्यालय का निर्माण: योगी सरकार ने बुलडोजर चलवाया

उत्तर प्रदेश के माफिया मुख़्तार अंसारी के एक और करीबी की अवैध सम्पत्तियों पर बुलडोजर चला है। यह कार्रवाई रियाज अंसारी पर हुई है जो गाजीपुर जिले के बहादुरगंज से नगर पंचायत अध्यक्ष के शौहर हैं। रविवार (12 दिसंबर 2023) को हुआ यह एक्शन कोर्ट के आदेश पर हुआ है जिसका पालन करवाने के लिए भारी पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा। रियाज़ एक मामले में फरार चल रहा है जिस पर प्रशासन ने 25 हजार का इनाम भी घोषित कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ध्वस्तीकरण की यह कार्रवाई गाजीपुर जिले के थानाक्षेत्र कासिमाबाद में हुई है। यहाँ के बहादुरगंज में रियाज़ अंसारी का मुख़्तार से करीबियों के चलते काफी रसूख है। रियाज़ की बीवी निकहत परवीन बहादुरगंज से नगर पालिका की चेयरपर्सन हैं। रियाज अंसारी ने अपनी दादागीरी के दम पर बहादुरगंज में एक अवैध कैम्प कार्यालय बनवा रखा था। यह कार्यालय 760 वर्गफुट भूमि पर था। जमीन निकहत परवीन के नाम से थी। इस निर्माण का नक्शा भी पास नहीं था।

इस अवैध निर्माण पर कार्रवाई के लिए अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत बहादुरगंज ने स्थानीय SDM (उप जिला मजिस्ट्रेट) कासिमाबाद की कोर्ट में आवेदन दिया था। SDM कोर्ट ने निर्माण को अवैध पाया और इसे ध्वस्त करने के आदेश जारी किए थे। इसी आदेश पर अमल करने के लिए रविवार को रियाज़ के कैम्प कार्यालय पर अधिकारियों का जमावड़ा लगा। मौके पर SHO कासिमाबाद भी पुलिस बल के साथ मौजूद है। बुलडोजर चला कर आखिरकार कैम्प कार्यालय के नाम पर हुए अवैध निर्माण को ध्वस्त करवा दिया गया।

बताते चलें कि रियाज़ अंसारी पर मदरसे में फर्जी नियुक्ति के नाम पर धांधली का आरोप है। इन्ही आरोपों के चलते उस पर कासिमाबाद थाने में FIR भी दर्ज है। रियाज़ फिलहाल फरार है जिस पर पुलिस ने अब 25 हजार रुपए का इनाम घोषित किया है। रियाज़ के अलावा इसी केस में उसके 3 अन्य सहयोगी भी फरार हैं। उन पर भी 25 हजार रुपए का इनाम रखा गया है। मदरसे में नियुक्ति के इसी फर्जीवाड़े में खुद मुख़्तार अंसारी भी नामजद है।

इन सभी आरोपितों ने मिल कर रियाज़ अंसारी की बीवी की निकहत परवीन की नियुक्ति अवैध तौर पर मदरसे में करवा दी थी। पुलिस जाँच में दोषी पाए जाने के बाद निकहत परवीन जेल भेज दी गईं थीं। मुख़्तार अंसारी पहले से है जेल है। वहीं रियाज़ और फर्जीवाड़े में शामिल उनके 3 अन्य सहयोगी फिलहाल फरार चल रहे हैं जो अब 25 हजार के इनामी बन चुके हैं। काफी खोजबीन के बाद भी न मिलने पर पुलिस इन चारों के खिलाफ अदालत से कुर्की के आदेश भी ले चुकी है।

मासूम पिल्ले को पकड़कर पटका रोड पर, फिर पैरों से कुचलकर ले ली जान: CCTV में रिकॉर्ड हुई वीभत्सता, CM शिवराज बोले- होगी सख्त कार्रवाई

मध्य प्रदेश के गुना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक युवक ने एक पिल्ले को जमीन पर बेरहमी से पटक दिया, इसके बाद उसे पैरों से कुचलकर मार डाला। वो व्यक्ति सड़क के किराने बैठा हुआ था, तभी कुछ खाना पाने की आस में दो पिल्ले उसके पास पहुँचे थे। इतने में बौखलाए युवक ने पूरी बेहरमी से एक पिल्ले को मार डाला।

इस वायरल वीडियो को शेयर कर लोग कार्रवाई की माँग कर रहे थे, जिसे रोहन दुआ नाम के पत्रकार ने भी शेयर किया और एमपी पुलिस के साथ ही केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को ट्वीट किया।

ये वीडियो सीसीटीवी फुटेज का है, जिसमें युवक एक बंद दुकान के सामने बैठा है, तभी दो पिल्ले उसके पास आते हैं और चंचलता से उसे सूंघते हैं। इसके बाद अचानक युवक एक पिल्ले को पकड़ लेता है, फिर उसे जोर से जमीन पर फेंक देता है और तब तक उसे लात मारता है, जब तक कि वह मर नहीं जाता।

इस वीडियो में पिल्ले के साथ वीभत्सता देख लोग हैरत में और गुस्से में हैं। इसी वीडियो को रोहन दुआ ने शेयर किया, तो केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी परेशान हो उठे। उन्होंने एक्स पर वीडियो को शेयर करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से यह सुनिश्चित करने की अपील की कि अपराधी को कड़ी सजा मिले।

सिंधिया ने लिखा, “यह भयावह और परेशान करने वाला है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि उस व्यक्ति को इस बर्बरता के लिए दंडित किया जाना चाहिए। श‍िवराज जी, कृपया देखें।”

इस वीडियो पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह तौहान ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अपराधी को कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने लिखा, “भयानक घटना से बहुत परेशान हूँ। न्याय सुनिश्चित करने के लिए त्वरित और सख्त कार्रवाई की जाएगी। हम बर्बरता के ऐसे कृत्यों की स्पष्ट रूप से निंदा करते हैं और जिम्मेदार व्यक्ति को परिणाम भुगतना होगा।”

पिल्ले के साथ बर्बरता करने वाले की पहचान मृत्युंजय सिंह के रूप में हुई है, वो गुना जिले के राधा कालोनी का रहने वाला है। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को दी BSP की जिम्मेदारी, 15 साल पहले कहती थीं परिवार से नहीं होगा उत्तराधिकारी

बहुजन समाज पार्टी में मायावती के बाद अब पार्टी का कामकाज आकाश आनंद संभालेंगे, जो मायावती के छोटे भाई आनंद कुमार के बेटे और मायावती के भतीजे हैं। लखनऊ में बीएसपी की बैठक में इस बात का आधिकारिक ऐलान कर दिया गया है। हालाँकि मायावती ने अब से 15 साल पहले प्रकाशित हुई अपनी आत्मकथा में कहा था कि उनके बाद बीएसपी का नेतृत्व कोई दलित करेगा, जो उनके परिवार से नहीं होगा। ये अलग बात है कि आकाश आनंद उनके ही परिवार के हैं।

बहुजन समाज पार्टी (BSP) की प्रमुख मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया है। यह घोषणा 10 दिसंबर 2023 को पार्टी की एक बैठक में की गई थी। मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया है। यह पद पार्टी का सर्वोच्च कार्यकारी पद है। आकाश आनंद मायावती के छोटे भाई आनंद कुमार के बेटे हैं। वह पिछले कई वर्षों से BSP में सक्रिय हैं और पार्टी के युवा नेताओं में से एक हैं।

हाल ही में संपन्न हुए 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी का नेतृत्व करने का जिम्मा दिया था। उसी समय लगभग ये तय हो गया था कि उनके नाम की आधिकारिक घोषणा जल्द की जा सकती है। अब बीएसपी में लंबे समय से नंबर 2 पर रहे सतीष चंद्र मिश्रा के पायदान पर आकाश आनंद को लाया गया है। सतीष चंद्र मिश्रा पहले की तरह पार्टी का कामकाज देख रहे थे, लेकिन अब वह पार्टी में नंबर 2 पर नहीं हैं।

अपने ही वादे से मुकर गईं मायावती

मायावती का जन्म गौतमबुद्ध नगर के बादलपुर गाँव में हुआ था। उनका जीवन काफी संघर्षमय रहा। उन्होंने पढ़ाई करके शिक्षक की नौकरी पार्टी की, लेकिन काँशी राम के प्रभाव से बीएसपी में शामिल हो गईं और 4 बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रही। उन्होंने 15 साल पहले प्रकाशित अपनी आत्मकथा ‘मेरे संघर्षमय जीवन का सफरनामा‘ में लिखा था कि बीएसपी का अगला नेतृत्वकर्ता उन्हीं की तरह दलित और वंचित समाज से होगा। जो उनसे 30-35 साल छोटा होगा। ऐसे में वो पार्टी का लंबे समय तक नेतृत्व कर सकेगा। उन्होंने कहा था कि बीएसपी का अगला नेता उनके परिवार से नहीं होगा।

ये अलग बात है कि 15 जनवरी 2008 को प्रकाशित हुई उनकी आत्मकथा के 15 साल बीत चुके हैं, लेकिन उन्हें कोई दलित नेता ऐसा नहीं मिला, जो बीएसपी का नेतृत्व कर सके। उन्होंने अपने से 39 साल छोटे भतीजे आकाश आनंद को अपनी और अपनी पार्टी बीएसपी का उत्तराधिकारी चुन लिया है। आकाश आनंद ने 2017 में बीएसपी को ज्वॉइन किया था और अब मायावती के बाद पार्टी की जिम्मेदारी वही संभालेंगे।

अभी उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड को छोड़ पूरे देश का जिम्मा संभालेंगे आकाश

बीएसपी नेता उदयवीर सिंह ने बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में कहा, “बहनजी ने कहा कि मेरे न रहने पर आकाश आनंद पार्टी के उत्तराधिकारी होंगे। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड को छोड़ कर पार्टी की निगाह में कमजोर राज्यों में आकाश आनंद काम करेंगे। मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं से लोकसभा चुनाव की तैयारी में लग जाने को कहा।” आकाश आनंद पिछले कुछ सालों से बीएसपी का कामकाज देख ही रहे थे। वो पार्टी की सोशल मीडिया की टीम का भी नेतृत्व कर रहे थे।

बहुजन समाज पार्टी की विशेष राष्ट्रीय बैठक में मायावती ने कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि बड़ी राजनीतिक पार्टियाँ गरीबों से झूठे वादे करती हैं, और उन्हें पूरे नहीं करती। एक अकेली बहुजन समाज पार्टी है, जो समाज के सभी वर्गों के हितों का ध्यान रखती है और सर्वजन सुखाय की कामना करती है। उन्होंने कहा कि ‘वोट हमारा, राज तुम्हारा’ वाली कार्यशैली को खत्म करने का समय आ चुका है।

बता दें कि आकाश आनंद ने विदेश से एमबीए की पढ़ाई की है। वो लोकसभा चुनाव 2019 से ही लगातार पार्टी में सक्रिय हैं। उन्हें कई महत्वपूर्ण अभियानों की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। आकाश आनंद ने राजस्थान विधानसभा चुनाव के मद्देनजर साढ़े तीन हजार किलोमीटर की ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय संकल्प यात्रा’ शुरू थी। इस यात्रा को ‘बहुजन अधिकार यात्रा’ भी नाम दिया गया था।

आकाश आनंद को 2019 में लोकसभा चुनाव के दौरान राजस्थान में बीएसपी ने अपना स्टार प्रचारक भी बनाया था। इसके बाद से वो लगातार सभी चुनावों में पार्टी का नेतृत्व करते दिखते हैं। आकाश आनंद ने हाल ही में हुए चार चुनावों, खासकर मध्य प्रदेश और राजस्थान में प्रमुख जिम्मेदारियां निभाईं। हाल के विधानसभा चुनावों में बसपा ने राजस्थान में दो सीटें जीतीं लेकिन मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में उसे कोई सीट नहीं मिली।

जैसे प्रभु श्रीराम ने दिया हो शबरी को सम्मान… छत्तीसगढ़ को 20 साल बाद मिला जनजातीय CM, समुदाय के लोगों ने BJP का अभार जताया

भारतीय जनता पार्टी ने छत्तीसगढ़ के लिए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा कर दी है। घोषणा के मुताबिक विष्णु देव साय छत्तीसगढ़ के अगले मुख्यमंत्री होंगे। वे 2 बार विधायक, 2 बार केंद्रीय राजयमंत्री, 2 बार प्रदेश अध्यक्ष और 4 बार सांसद रह चुके हैं। विष्णु देव का छत्तीसगढ़ में जनजातीय समाज का एक बड़ा चेहरा माना जाता है। विष्णु देव साय के नाम की घोषणा रविवार (10 दिसंबर 2023) को हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विष्णु देव साय कॉन्ग्रेस के अजीत जोगी (9 नवम्बर 2000 – 6 दिसम्बर 2003) के बाद छत्तीसगढ़ के दूसरे ऐसे मुख्यमंत्री होंगे जो जनजातीय समुदाय से आते हैं। उनके नाम पर अंतिम मुहर लगाने से पहले रायपुर में भाजपा के तमाम पदाधिकरियों की लम्बी मीटिंग चली। इस मीटिंग में सभी विधायक और पर्यवेक्षक मौजूद थे। कई विकल्पों पर मंथन के बाद आखिरकार सभी ने विष्णु देव साय के नाम पर सहमति जताई। विष्णु देव साय मुख्यमंत्री के संभावित चेहरों में भी एक थे।

माना यह भी जा रहा है कि जल्द ही छत्तीसगढ़ में एक उपमुख्यमंत्री की भी घोषणा हो सकती है। छत्तीसगढ़ जनजातीय बहुल प्रदेश है जहाँ इनकी आबादी लगभग 33% है। साल 2023 के चुनावों में छत्तीसगढ़ में जनजातीय समुदाय भारतीय जनता पार्टी के साथ दिखा था। कुल 90 विधानसभा सीटों में से 20 पर भाजपा के टिकट पर जनजातीय प्रत्याशी चुनाव जीते हैं। माना जा रहा है कि विष्णु देव साय की जीत के साथ भाजपा ने 2024 लोकसभा चुनावों के लिए बड़ा दाँव खेला है।

इंडिया TV मुताबिक छत्तीसगढ़ के कई जनजातीय लोगों ने कहा, “जैसे भगवान श्री राम ने शबरी को सम्मान दिया था वही भाजपा ने हमारे समुदाय के व्यक्ति को मुख्यमंत्री बना कर दोहराया है।” बताते चलें कि विधानसभा चुनाव से पहले छत्तीसगढ़ कॉन्ग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी पर जनजातीय विरोधी होने का आरोप लगाया था। तब कॉन्ग्रेस नारा दे रही थी कि जल, जंगल और जमीन जनजातीय लोगों की है जिस पर भाजपा कब्ज़ा करना चाहती है। हालाँकि बावजूद इसके जनजातीय लोगों ने मतदान के दौरान अपना विश्वास भाजपा पर दिखाया।

विष्णु देव साय छत्तीसगढ़ के कुनकुरी विधानसभा से लगातार तीसरी बार भाजपा के विधायक बने हैं। उन्होंने कॉन्ग्रेस कैंडिडेट को 25,541 वोटों से हराया था। अपने नाम की घोषणा के बाद विष्णु देव साय ने पार्टी हाईकमान का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने अपने एक छोटे से कार्यकर्ता पर इतना विश्‍वास जताया और राज्‍य का नेतृत्‍व करने का दायित्‍व दिया है। उन्‍होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, अमित शाह, जेपी नड्डा का भी आभार जताया।

‘तुम्हारा टाइम खत्म’ : बागेश्वर धाम वाले पंडित धीरेंद्र शास्त्री को मिली जान से मारने की धमकी, आरोपित बिहार से गिरफ्तार; खुद को बताया बिश्नोई गैंग का मेंबर

मध्य प्रदेश पुलिस ने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेन्द्र शास्त्री को ई-मेल के जरिए जान से मार डालने की धमकी देने वाले युवक को गिरफ्तार कर लिया है। धमकी देने वाले ने खुद को लॉरेंस विश्नोई गैंग का मेंबर बताया था और 10 लाख रुपए फिरौती माँगी थी। शनिवार (9 दिसंबर 2023) को गिरफ्तार आरोपित का नाम आकाश कुमार है जो बिहार के नालंदा का रहने वाला है। आकाश कुमार की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने इंटरपोल की मदद भी ली। आरोपित से पूछताछ की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आरोपित आकाश मूल रूप से बिहार के नालंदा जिले के शंकरडीह क्षेत्र का रहने वाला है। फिलहाल वो राजधानी पटना के कंकरबाग इलाके में रह रहा था। आकाश की गिरफ्तारी भी पटना से ही हुई है। आरोपित ने एक फर्जी ई-ेमल ID बना कर 19 अक्टूबर 2023 को बागेश्वर धाम की आधिकारिक ID पर मेल किया। ई मेल में आकाश ने खुद को लॉरेंस विश्नोई गैंग का बताते हुए 10 लाख रुपए फिरौती माँगी थी। पैसे देने के लिए 1 दिन का समय देते हुए बाद में जान से मार डालने की धमकी दी गई थी।

बागेश्वर धाम की तरफ से इस मामले की FIR छतरपुर जिले के थाना बमीठा में दर्ज करवाई गई थी। पुलिस ने 20 अक्टूबर 2023 को ही FIR दर्ज कर के फ़ौरन ही कार्रवाई भी शुरू कर दी। बागेश्वर धाम की तरफ से कोई जवाब न मिलने पर आकाश ने 22 अक्टूबर 2023 को एक बार फिर से ई-मेल किया। इस ई-मेल में आरोपित ने टाइम खत्म होने की धमकी दी। आखिरकार छतरपुर पुलिस ने इंटरपोल से सम्पर्क किया। स्विट्जरलैंड तक की जाँच एजेंसियों ने इस मामले में मध्य प्रदेश पुलिस का सहयोग किया। इसी सहयोग की वजह से आखिरकार छतरपुर पुलिस पटना में आरोपित आकाश को पकड़ने में कामयाब रही।

पुलिस ने आरोपित से उसका मोबाइल बरामद कर लिया है जिसे जाँच के लिए फोरेंसिक लैब में भेजा गया है। आरोपित पर IPC की धारा 387 और 507 के तहत कार्रवाई की गई है। आकाश को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

सुविधाओं में बढ़ोतरी, सुलभ यात्रा और सुंदर दृश्य: 2 साल में काशी विश्वनाथ बना सबसे लोकप्रिय तीर्थस्थल, दर्शन करने पहुँचे 12.92 करोड़ श्रद्धालु

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित श्री काशी विश्वनाथ धाम मंदिर में पिछले दो वर्षों में रिकॉर्ड 12.92 करोड़ श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। अकेले सावन महीने में ही 1.6 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु मंदिर पहुँचे। इस साल जनवरी 2023 से दिसंबर तक मंदिर में 5.3 करोड़ श्रद्धालु पहुँचे हैं। आँकड़ों के मुताबिक, विशेष अवसरों और सावन के पवित्र महीने के दौरान मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ देखी गई।

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सुनील कुमार वर्मा ने कहा कि 13 दिसंबर 2021 से 6 दिसंबर 2023 तक 12 करोड़ 92 लाख 24 हजार से अधिक भक्त बाबा के दर्शन कर चुके हैं। दिसंबर के अंत तक यह संख्या 13 करोड़ को पार करने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि काशी विश्वनाथ ट्रस्ट ने पर्यटकों और भक्तों के लिए सुविधाओं में कई गुना बढ़ोतरी की है, जिसकी वजह से भक्तों की यात्रा परेशानी से मुक्त हो गई है।

अधिकारियों ने बताया कि श्रद्धालुओं के लिए की गई सुविधाओं में गर्मी, ठंड और बारिश के दौरान चिलचिलाती धूप से बचाने के लिए जर्मन हैंगर, चटाई, कूलर, पीने का पानी, व्हीलचेयर, चिकित्सा सुविधाएं समेत अन्य व्यवस्थाएं शामिल हैं।

काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण से बदल गया सबकुछ

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिसंबर 2021 में काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर का उद्घाटन किया था, और तब से महादेव के भक्तों की संख्या कई गुना बढ़ गई है। पहले, मंदिर का क्षेत्रफल केवल 3000 वर्ग फुट था। साल 2021 में इसे लगभग 5 लाख वर्ग फुट तक बढ़ा दिया गया, जिसके बाद से मंदिर परिसर में ही एक समय में 50,000 से 75,000 भक्त आ जाते हैं।

काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में इतने भक्तों का पहुँचना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो दर्शाता है कि यह भारत के सबसे लोकप्रिय तीर्थ स्थलों में से एक बन गया है।

जानें कौन हैं कॉन्ग्रेस सांसद धीरज साहू… जिनके ठिकानों पर IT छापे में मिला नोटों का पहाड़, गिनते-गिनते मशीनें भी खराब, ₹300 करोड़ से ज्यादा बरामद

मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में करारी हार के बाद साल 2024 लोकसभा चुनावों से पहले कॉन्ग्रेस पार्टी को उनके ही सांसद धीरज प्रसाद साहू ने और मुसीबत में डाल दिया है। आयकर विभाग ने 9 दिसंबर 2023 को झारखंड कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद धीरज प्रसाद साहू के ठिकानों पर छापेमारी के बाद सैकड़ों करोड़ रुपए कैश और अन्य बेहिसाब सम्पत्तियाँ बरामद की हैं। कॉन्ग्रेस सांसद की संपत्ति की जाँच अभी भी जारी है जिस से बरामदगी की राशि और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

धीरज प्रसाद साहू के ठिकानों से 300 करोड़ रुपए से अधिक बेनामी सम्पत्ति बरामद होने का मामला चर्चा में आते ही कॉन्ग्रेस ने खुद को इस विवाद से अलग करने का प्रयास किया। कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश ने अपने X हैंडल से कहा कि उनकी पार्टी का अपने ही सांसद के इन कारनामों से कोई लेना-देना नहीं है। बकौल जयराम रमेश सांसद साहू ही बता सकते हैं कि उन्होंने इतना पैसा कैसे और कहाँ से जुटाया। उन्होंने अपनी पार्टी के आरोपित सांसद से इस मामले में सफाई देने की भी अपेक्षा की।

अब तक मिली जानकारी के मुताबिक आयकर विभाग की छापेमारी से बरामद हुआ पैसा ओडिशा स्थित बुद्धा डिस्टिलरी प्राइवेट लिमिटेड और उसके जुड़े संगठनों से संबंधित है। कॉन्ग्रेस सांसद धीरज साहू का कोई बंटी नाम का सहयोगी भी प्रकाश में आया है जो ओडिशा के कई हिस्सों में शराब कारोबार को संभालता है। बंटी के घर से कैश भरे उन्नीस बैग मिले हैं। इस कैश को गिनने के लिए तीन दर्जन मशीनें लगाई गईं हैं जिसमें से कुछ गिनती के तौर खराब भी हो गईं थीं। इसी खराबी के चलते बरामदगी गिनने में अतिरिक्त समय लगा।

बोलांगीर में भारतीय स्टेट बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक भगत बेहेरिया ने कथित तौर पर बताया है कि बैंक को नोटों से भरे कुल 176 बैग मिले हैं। इन नोटों को गिनने के लिए 25 काउंटिंग मशीनों के साथ 50 कर्मचारी नियुक्त किए गए हैं।

कौन हैं धीरज प्रसाद साहू

धीरज प्रसाद साहू का परिवार पुराना कॉन्ग्रेसी है। राज्यसभा की वेबसाइट के मुताबिक धीरज साहू अपने परिवार को आजादी के समय से ही कॉन्ग्रेस से जुड़ा बताते हैं। उन्होंने यह भी बताया है कि वो साल 1978 में जेल भरो आंदोलन का हिस्सा भी थे। वो बुद्धा डिसिलरिज ग्रुप की कंपनी की बलदेव साहू इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड में पार्टनर हैं। धीरज प्रसाद ने अपने राजनैतिक कैरियर की शुरुआत साल 1977 में नेशनल लीडर यूनियन ऑफ इंडिया (चीनी कम्युनिस्ट पार्टी) के एक मेंबर के तौर पर शुरू किया था। धीरे-धीरे वो इस क्षेत्र में मंझते चले गए बाद में कॉन्ग्रेस ज्वाइन कर लिया।

धीरज ने झारखंड कॉन्ग्रेस के बड़ी बड़े दायित्व भी संभाले हैं। साल 2009 में धीरज साहू पहली बार उपचुनाव में राज्यसभा सदस्य चुने गए। इसी पद पर साल 2010 में फिर उनका चयन हुआ। मई 2018 में वह तीसरी बार झारखंड से कॉन्ग्रेस पार्टी से राज्यसभा गए। साल 2010 से अब तक सांसद साहू ने राज्यसभा में कुल 630 सवाल किए हैं। ये प्रश्न नवीनतम कवच सुरक्षा प्रणाली, धान की खरीद, राष्ट्रीय राजमार्ग, कोयला खनन, हवाई अड्डों के निजीकरण आदि मामलों से जुड़े हैं।

धीरज प्रसाद साहू ने नवंबर 2022 में राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा में भी हिस्सा लिया था। अपने X हैंडल पर धीरज ने इस यात्रा में अपनी भागीदारी की कुछ तस्वीरें भी शेयर की थीं। इसके बाद फरवरी 2023 में साहू ने इसी यात्रा का एक वीडियो शेयर करते हुए इसे बेहद सफल और इसमें शामिल होना अपने लिए गर्व का विषय बताया था।

नकदी बरामद होने पर कॉन्ग्रेस पर भाजपा हमलावर

कॉन्ग्रेस सांसद के ठिकानों से बरामद हुई अकूत बेनामी सम्पत्ति के बाद भाजपा लगातार कॉन्ग्रेस की आलोचना कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने X हैंडल से दैनिक भास्कर की इस मैटर पर छपी रिपोर्ट का हवाला दिया है। उन्होंने कॉन्ग्रेस की कथनी और करनी में दिखे फर्क पर व्यंग किया और कहा कि वो उन पैसों को लौटाने की गारंटी लेते हैं जो जनता से लूटा गया है।

भाजपा नेता निशिकांत दुबे ने इस मामले की जाँच ED (प्रवर्तन निदेशालय) से करवाने की माँग की है। उन्होंने दावा किया है कि गहराई से जाँच होने पर कॉन्ग्रेस सांसद धीरज के पास अभी और अघोषित सम्पत्ति निकलेगी। निशिकांत ने राहुल गाँधी की यात्रा को ‘भ्रष्टाचारी जोड़ो यात्रा’ बताया। वहीं केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी मीडिया से कहा, ”मोहब्बत की दुकान पर भ्रष्टाचार का कारोबार चल रहा है।” उन्होंने इस मुद्दे पर कॉन्ग्रेस द्वारा सफाई की माँग की। स्मृति ईरानी ने इन नेताओं को गाँधी परिवार का ATM बताया।

पत्नी की उम्र 18+ है तो ‘मैरिटल रेप’ कोई अपराध नहीं: इलाहाबाद HC की टिप्पणी, आरोपित पति के ऊपर से धारा 377 हटाई

देश में मैरिटल रेप पर छिड़ी बहस और सर्वोच्च न्यायालय में दायर कई याचिकाओं के बीच इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक मामले में कहा है कि मैरिटल रेप को रेप नहीं माना गया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में बहस चल रही है, ऐसे में किसी को इस मामले में दोषी नहीं ठहराया जा सकता। हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए ‘मैरिटल रेप’ के आरोपित को धारा 377 के आरोपों बरी कर दिया। हालाँकि इस मामले से जुड़ी दो अन्य धाराओं 498-ए (पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता) और आईपीसी की धारा 323 (चोट पहुँचाने) में आरोपित को दोषी ठहराया है।

इस मामले की सुनवाई जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की पीठ में चल रही थी। लाइव लॉ के मुताबिक, हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी की उम्र अगर 18 वर्ष से अधिक है, तो पति को वैवाहिक बलात्कार (मैरिटल रेप) के मामले में अपराधी नहीं ठहराया जा सकता। इस मामले में पीड़ित ने मारपीट, क्रूरता के साथ ही अप्राकृतिक यौन अत्याचार के आरोप लगाए थे। कोर्ट ने कहा कि अभी तक देश में वैवाहिक बलात्कार को अपराध नहीं माना गया है।

सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएँ लंबित, दोषी नहीं ठहरा सकते

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाईयों का जिक्र भी किया। हाई कोर्ट ने कहा कि अभी कई याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है और सुप्रीम कोर्ट का कोई फैसला नहीं आया है। जब तक सुप्रीम कोर्ट इस मामले में कोई फैसला नहीं करती है, तब तक पत्नी की उम्र 18 वर्ष या अधिक होने की स्थिति में वैवाहिक बलात्कार के लिए कोई दंड नहीं निर्धारित नहीं है।

इसी लिए इस मामले में वो आरोपित को धारा 377 के मामले में दोषी नहीं ठहरा रही। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की पिछली टिप्पणी का समर्थन करते हुए यह भी कहा कि वैवाहिक रिश्ते में किसी भी ‘अप्राकृतिक अपराध’ (धारा 377 के तहत) के लिए कोई जगह नहीं है।

इस मामले में पीड़ित ने आरोप लगाया था कि उसका वैवाहिक रिश्ता अपमानजनक था और पति ने उसके साथ दुर्व्यवहार और जबरदस्ती की। उसने अप्राकृतिक यौनाचार भी किया था। हालाँकि हाईकोर्ट ने अप्राकृतिक यौनाचार को गलत तो बताया, लेकिन कोई सजा देने से इनकार कर दिया है। हाई कोर्ट ने दो अन्य आरोपों को सही पाया है और आरोपित को दोषी ठहराया है।

बता दें कि इस साल की शुरुआत से सुप्रीम कोर्ट में मैरिटल रेप को लेकर कई याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। जिसमें केंद्र सरकार ने वैवाहिक बलात्कार जैसे टर्म का विरोध किया है। सरकार ने कोर्ट से कहा है कि वैवाहिक बलात्कार को अपराध घोषित करने से समाज प्रभावित हो सकता है।

विद्युत जामवाल ने इंस्टा पर शेयर की न्यूड फोटोज, हैरान होकर लोगों ने पूछा- टारजन हो या रणवीर सिंह…

बॉलीवुड अभिनेता विद्युत जामवाल ने अपने इंस्टाग्राम पर कुछ तस्वीरें पोस्ट की हैं। ये तस्वीरें बिलकुल न्यूड हैं इसलिए लोग इस पर चर्चा कर रहे हैं। जामवाल ने अपनी तीन फोटोज डालकर बताया है कि कैसे वो पिछले 14 साल से ऐसा हर वर्ष कर रहे हैं और इसी में उनको सुकून मिलता है। एक फोटो में वो नदी किनारे बैठे हैं, एक में वो नदी में हैं और एक में वो पेड़ के नीचे आग जलाकर कुछ बना रहे हैं।

उन्होंने लिखा- “हिमालय पर्वतमाला में मेरी वापसी – ‘परमात्मा का निवास’ 14 साल पहले शुरू हुई थी। इससे पहले कि मुझे एहसास होता, हर साल 7-10 दिन अकेले बिताना मेरे जीवन का अभिन्न अंग बन गया। जंगल में आकर, मुझे अपना एकांत ढूँढना और ‘मैं कौन नहीं हूँ’ को जानने के महत्व को महसूस करना पसंद है, जो कि ‘मैं कौन हूँ’ को जानने के साथ-साथ शांति में खुद की रक्षा करने का पहला कदम है।”

आगे वह बोले, “मैं अपने कम्फर्ट जोन के बाहर सबसे अधिक आरामदायक हूँ। मैं प्रकृति की प्राकृतिक आवृत्ति के साथ तालमेल बिठाता हूँ और मैं खुद को सैटेलाइट डिश एंटीना के रूप में कल्पना करता हूँ। यहीं पर मैं वह ऊर्जा पैदा करता हूँ, जिसके साथ मैं खुद को घेरना चाहता हूँ और घर वापस आना चाहता हूँ। अपने जीवन में एक नए अध्याय का अनुभव करने के लिए तैयार हूँ – पुनर्जन्म।”

इस पोस्ट के साथ विद्युत जामवाल ने अपनी नई फिल्म का ऐलान किया और बताया अब वो अपने अगले चैप्टर- क्रैक के लिए तैयार और उत्साहित हैं। ये फिल्न 23 फरवरी 2024 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

विद्युत जामवाल की इस फोटो को देखने के बाद लोग अलग अलग प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं। कुछ उनकी तारीफ कर रहे हैं तो कुछ उनका मजाक उड़ा रहे हैं। कोई उन्हें टारजन बोल रहा है तो कोई मोगली बता रहा है। तो कोई कह रहा है – तुम भी रणवीर सिंह की तरह हरकत करने लग गए यार।

रणवीर सिंह का न्यूड फोटोशूट

बता दें कि साल 2022 में रणवीर सिंह भी न्यूड फोटोशूट के कारण चर्चा में आए थे। उन्होंने जुलाई 2022 में एक पेपर मैगज़ीन के लिए रणवीर सिंह ने एक फोटोशूट करवाया था। इसी फोटोशूट की तस्वीरें वायरल होने के बाद जगह-जगह बवाल हुआ था। मीडिया से लेकर सोशल मीडिया पर बहस होने लगी थी।

भारतीय संस्कृति का हवाला देते हुए श्याम मंगाराम फाउंडेशन नामक गैर-सरकारी संस्था ने मुंबई के चेम्बूर पुलिस स्टेशन में अश्लीलता फैलाने की शिकायत दर्ज करवाई थी और कई जगह एक्टर का विरोध हुआ था। जिसके बाद रणवीर सिंह ने पुलिस में सफाई देते हुए 29 अगस्त 2022 को बयान दिया था कि एक्टर ने फोटशूट कराते समय अंडरवियर पहना हुआ था, लेकिन लोगों ने उसके साथ छेड़छाड़ की थी।

स्कूल में राम-राम बोलने पर प्रिंसिपल ने दी बहन की गाली: साईमा मंसूर पब्लिक स्कूल का टीचर मोहम्मद अदनान बर्खास्त, प्रिंसिपल पर कार्रवाई कब?

उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में एक स्कूल के अंदर अपने टीचर को राम-राम बोलने पर एक छात्र को प्रताड़ित करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि प्रिंसिपल ने पहले छात्र और बाद में उनके परिजनों को गालियाँ दीं। हिन्दू संगठनों ने स्कूल के आगे प्रदर्शन किया और मामले में शामिल सभी आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की। फिलहाल मोहम्मद अदनान नाम के एक टीचर को बर्खास्त कर दिया गया है।

स्कूल प्रशासन ने इस मामले में लिखित माफीनामा भी जारी किया है। विवाद साईमा मंसूर पब्लिक स्कूल का है, जो कि अलीगढ़ की नूरुल उलूम एजुकेशन सोसाइटी द्वारा संचालित किया जाता है। घटना शुक्रवार (8 दिसंबर 2023) की बताई जा रही है।

यह मामला हाथरस जिले के चंदपा थानाक्षेत्र का है। 8 दिसंबर 2023 को स्कूल के गेट से एक छात्र के भाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वायरल वीडियो में खुद को गजेंद्र सिंह सिसोदिया बता रहा व्यक्ति साईमा मंसूर पब्लिक स्कूल के गेट पर खड़ा दिखाई दिया। गजेंद्र ने बताया कि उनके भाई ने अपनी क्लास में पढ़ाने आए टीचर से राम-राम कह दी थी। टीचर ने इस पर कोई जवाब नहीं दिया और वो क्लास खत्म होने के बाद चला गया। टीचर का नाम मोहम्म्द अदनान बताया जा रहा। आरोप है कि टीचर ने इस बात को लेकर प्रिंसिपल सलमान किदवई से शिकायत की।

गजेंद्र सिसोदिया का आरोप है कि टीचर मोहम्म्द अदनान की शिकायत के बाद प्रिंसिपल सलमान किदवाई क्लास में आए। इसके बाद क्लास में सलमान किदवाई ने कहा, “ये क्या गंदगी फैला रहे हो। ये क्या टट्टी सा मुँह लेकर राम-राम कर देते हो। बहन#द हम अलीगढ़ से टीचर बुला-बुला कर ला रहे हैं और तुम यहाँ गंदगी फैला रहे हो। कोई भी यहाँ राम-राम वैगरह नहीं कहेगा।”

गजेंद्र का दावा है कि स्कूल में ‘सलाम वाले क़ुम’ और ‘नमस्ते’ ही करने के लिए कहा जाता है। गजेंद्र के अनुसार पीड़ित छात्र कक्षा 11 में पढ़ता है।

गजेंद्र ने बताया कि जब वो इसकी शिकायत करने गए तो उनको धक्के मार कर निकाल दिया गया। इस दौरान सिक्यॉरिटी गार्ड पर भी आरोप है कि उसने पीड़ित अभिभावक को गालियाँ देते हुए कहा कि राम-राम क्या मतलब है?

शुक्रवार को इस मामले का वीडियो वायरल होने के बाद हाथरस के हिन्दू संगठनों में नाराजगी फैल गई। शनिवार (9 दिसंबर) को तमाम हिन्दू संगठन के पदाधिकारी साईमा मंसूर पब्लिक स्कूल के गेट पर जमा हो गए। उन्होंने वहाँ हनुमान चालीसा पढ़ी और जय श्री राम के नारे लगाए। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची और हालात को संभाला।

हिन्दू संगठन के लोग स्कूल प्रिंसिपल और आरोपित टीचर पर कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। वहीं जिला प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक जाँच दल का गठन कर दिया है। इसी दौरान स्कूल प्रिंसिपल सलमान किदवई ने मीडिया को बताया कि राम-राम के अभिवादन पर आपत्ति जताने वाले टीचर मोहम्मद अदनान को नौकरी से निकाल दिया गया है। साथ ही उन्होंने 30 साल से चल रहे साईमा मंसूर पब्लिक स्कूल की तारीफ में कसीदे गढ़ते हुए वहाँ का माहौल धर्म निरपेक्ष बताया।

स्कूल प्रशासन ने अपनी गलती मानते हुए लिखित माफीनामा भी जारी किया है। इस माफीनामे में दोबारा ऐसी हरकत न करने का भरोसा भी दिया गया है।

बताते चलें कि साईमा मंसूर पब्लिक स्कूल मूलतः अलीगढ़ की नूरुल उलूम एजुकेशन सोसाइटी द्वारा संचालित किया जाता है। बच्चों को शिक्षा देने का दावा करने वाली नूरुल उलूम एजुकेशन सोसाइटी के अध्यक्ष नसीम अहमद, उपाध्यक्ष सनाउल्लाह खान और सचिव नफीस अहमद हैं। इस संस्थान का रजिस्ट्रेशन जनवरी 1998 में हुआ था।