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पहले नौकरी से बर्खास्त, फिर जेल, अब घर भी हुआ कुर्क: अतीक अहमद की बहन-बहनोई के ठिकाने पर पहुँची यूपी पुलिस, बमबाज गुड्डू मुस्लिम को दी थी पनाह

उमेश पाल की हत्या के बाद शूटरों को पनाह देने के आरोप में उत्तर प्रदेश पुलिस ने माफिया अतीक अहमद की बहन का घर कुर्क कर लिया है। फरवरी 2023 में हुए इस हत्याकांड में पुलिस ने अतीक की बहन नूरी और उसके शौहर अख़लाक़ को सह-अभियुक्त बनाया है। वायरल हुए एक वीडियो में बमबाज गुड्डू मुस्लिम को अतीक के बहनोई के घर में भी देखा गया था। प्रयागराज पुलिस ने शनिवार (9 दिसंबर, 2023) को मेरठ पहुँच कर कुर्की की यह कार्रवाई की।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार (9 दिसंबर, 2023) को प्रयागराज के थाना धूमनगंज की पुलिस टीम मेरठ पहुँची। यहाँ से वो नौचंदी थाना क्षेत्र में पड़ने वाले भवानी नगर पहुँची। स्थानीय मेरठ पुलिस भी साथ थी। भवानी नगर में अतीक के जीजा अख़लाक़ का 2 मंजिला मकान है। पुलिस ने यहाँ नियमानुसार कार्रवाई शुरू की। बताया जा रहा है कि घर में रहने वालों को पहले ही पुलिस कार्रवाई की भनक लग चुकी थी। तलाशी के दौरान पाया गया कि घर से तमाम महँगे सामान पहले ही हटा दिए गए थे।

कुर्की की इस कार्रवाई में पुराना सोफा सेट, फ्रिज, वाशिंग मशीन और कुछ बर्तन मिले हैं। बरामद हुए सामान की कीमत लगभग 80,000 रुपए बताई जा रही है। पुलिस ने इन सामानों को अपनी GD में दर्ज किया है। कुर्क हुए सभी सामान को एक पड़ोसी को सुपुर्द कर दिया गया है। साथ ही पड़ोसी को हिदायत दी गई है कि वो किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना फौरन पुलिस को दें। कुर्की की यह कार्रवाई अतीक की बहन नूरी की उमेश पाल हत्याकांड से अब तक फरारी के चलते हुई है। पुलिस ने कुर्की की इस कार्रवाई के लिए बाकायदा अदालत से अनुमति ली थी।

19 अगस्त, 2023 को ही पुलिस अख़लाक़ अहमद के घर पर नोटिस चस्पा कर चुकी थी। इस नोटिस में नूरी को 20 दिनों के अंदर पुलिस के आगे सरेंडर करने के लिए कहा गया था। हालाँकि नूरी के शौहर अख़लाक़ को पुलिस ने 2 अप्रैल, 2023 में ही गिरफ्तार कर लिया था। अख़लाक़ सरकारी डॉक्टर था। उमेश पाल हत्याकांड में उसका नाम आते ही उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था। फिलहाल अख़लाक़ अहमद जेल में है।

उमेश पाल की हत्या के बाद पुलिस के हाथ एक वीडियो फुटेज हाथ लगा था। इस वीडियो में गुड्डू मुस्लिम को अख़लाक़ के घर में देखा गया था। नूरी और उनके शौहर अख़लाक़ पर गुड्डू मुस्लिम को न सिर्फ आर्थिक मदद करने बल्कि पनाह देने का भी आरोप है। गुड्डू मुस्लिम भी फिलहाल फरार चल रहा है। पुलिस के साथ UP STF भी उसकी तलाश में जुटी हुई है।

अरुंधति रॉय और प्रकाश राज के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट में PIL, भारत को बताया था ‘हिन्दू फासीवादी’: वकील बोलीं – देश की एकता-अखंडता को पहुँचाया नुकसान

वामपंथी एक्टिविस्ट अरुंधति रॉय और अभिनेता प्रकाश राज के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट में PIL दाखिल की गई है, जिसमें उन पर भारत सरकार को फासीवादी कहने का आरोप है। पश्चिम बंगाल की एक वकील मीता बनर्जी ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में ये जनहित याचिका दायर की है, जिसमें अभिनेता प्रकाश राज और लेखिका अरुंधति रॉय के खिलाफ कार्रवाई की माँग की गई है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि रॉय और राज ने अपने बयानों में भारत को ‘हिंदू फ़ासीवादी उपक्रम’ कहा है। याचिका में कहा गया है कि रॉय और राज के बयान देश की एकता और अखंडता को नुकसान पहुँचाते हैं। याचिका में माँग की गई है कि न्यायालय रॉय और राज के बयानों को सोशल मीडिया से हटाने का निर्देश दे।

‘बार एंड बेंच’ की रिपोर्ट के मुताबिक, याचिका पर सुनवाई कलकत्ता उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश TS शिवगणम और न्यायमूर्ति हिरण्मय भट्टाचार्य की खंडपीठ ने की, जिसके समक्ष वकील मीता बनर्जी ने रॉय द्वारा जून 2023 में एक अंतरराष्ट्रीय समाचार चैनल को दिए गए साक्षात्कार पर प्रकाश डाला।

वकील बनर्जी ने अपनी दलील में कहा, “लेखक रॉय ने इस साल जून में ‘अल जज़ीरा’ को एक साक्षात्कार दिया और कहा कि भारत एक हिंदू फासीवादी गया है। वह ऐसी बातें कैसे कह सकती हैं, वह भी ‘अल जज़ीरा’ जैसे चैनल पर, जो आतंकवादी संगठन अलकायदा के मुखपत्र की तरह है, जिसे (अलकायदा को) ओसामा बिन लादेन चलाया करता था।”

याचिकाकर्ता ने कोर्ट से कहा कि अभिनेता प्रकाश राज ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (अब ‘X’) पर इसी तरह के बयान दिए थे। उन्होंने कहा, “ये हमारे देश के जिम्मेदार नागरिक हैं, फिर भी उन्होंने ऐसी टिप्पणियाँ कीं। इन बयानों से हमारी भावनाएँ आहत हुई हैं। हम हिंदू फासीवादी नहीं हैं। हमें बचपन से सिखाया जाता है कि अगर हम अपने धर्म की रक्षा करेंगे, तो हमारा धर्म भी रक्षा करेगा, जैसे राम, कृष्ण आदि। इस प्रकार हम ट्विटर सहित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से उनके बयानों को हटाने के लिए एक निर्देश चाहते हैं।”

वकील मीता बनर्जी ने कहा कि रॉय और प्रकाश दोनों ही भारत सरकार को हिंदू फासीवादी उपक्रम नहीं कह सकते क्योंकि उसे बहुसंख्यक आबादी का जनादेश प्राप्त है। उनकी दलीलों पर सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा कि वो कुछ बदलावों के साथ नई याचिका दायर करें। खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को कुछ बदलाव करने को कहा है और निर्देश दिया है कि वो अपनी याचिका में ट्विटर को एक्स के तौर पर संबोधित करें। हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी, 2024 को तय की है।

पहले भी रेड में निकले हैं नोटों के पहाड़, पर कॉन्ग्रेस MP धीरज साहू के ₹500 करोड़ सब पर भारी: अब तक की 8 सबसे बड़ी बरामदगी के बारे में जानिए

झारखंड से कॉन्ग्रेस सांसद धीरज साहू के ठिकानों पर पिछले 5 दिनों से चल रही छापेमारी में अब तक लगभग ₹500 करोड़ की बरामदगी की जा चुकी है। यहाँ नोटों के बंडल गिनने में ही कई दिन लग गए हैं। इस छापेमारी में मिली धनराशि को आयकर विभाग की अब तक की सबसे बड़ी रिकवरी माना जा रहा है।

धीरज साहू के 10 ठिकानों पर की गई छापेमारी में अब तक यह धनराशि बरामद हुई है। इसमें ओडिशा के बोलांगीर से सबसे ज्यादा बरामदगी हुई है जबकि टीटागढ़ और संबलपुर से भी बड़ी मात्रा में नकदी बरामद हुई है। बोलांगीर से 60 किलो सोना भी बरामद हुआ है।

हालाँकि, यह कोई पहली बार नहीं है जब आयकर विभाग को नोटों का पहाड़ छापेमारी के दौरान मिला हो। इससे पहले भी अलग-अलग मौकों पर देश के अलग-अलग हिस्सों में बड़ी रिकवरी होती आई है। एक नजर इन घटनाओं पर डाल लेते हैं।

कानपुर, दिसम्बर 2021: पीयूष जैन

कानपुर के इतर कारोबारी पीयूष जैन के यहाँ 40 घंटों तक चली दिसम्बर 2021 की एक छापेमारी में ₹196 करोड़ रुपए नकद और 23 किलो सोने की बरामदगी हुई थी। इस धनराशि को गिनने के लिए 19 मशीनें लगानी पड़ी थीं। यहाँ से 250 किलो चाँदी और यहाँ तक कि चंदन के तेल के ड्रम तक यहाँ से बरामद हुए थे। पीयूष जैन के कन्नौज स्थित घर पर भी इस दौरान छापेमारी हुई थी।

झारखंड, मई 2022: IAS पूजा सिंघल

पूजा सिंघल झारखंड की ही IAS हैं, जिनके ऊपर बीते वर्ष 2022 में छापा पड़ा था। पूजा सिंघल के घर से ED को लगभग ₹20 करोड़ बरामद हुए थे। यहाँ से ₹150 करोड़ की सम्पत्ति के कागज भी बरामद हुए थे। ED ने उनकी 82 करोड़ की सम्पत्ति जब्त की थी। पूजा सिंघल झारखंड सरकार में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी थीं और मनरेगा घोटाले में आरोपित थीं। उनके ऊपर अब भी जाँच चल रही है।

बंगाल, जुलाई 2022: अर्पिता मुखर्जी & पार्थो चैटर्जी

पश्चिम बंगाल के शिक्षक भर्ती घोटाले घोटाले की जाँच कर रही ED ने ममता बनर्जी सरकार में मंत्री पार्थो चैटर्जी और उनकी प्रेमिका अर्पिता मुखर्जी के अलग-अलग ठिकानों से ₹50 करोड़ की बरामदगी की थी। यह 6 किलो सोना और कई महंगी गाड़ियाँ भी बरामद की गई थीं। उनके चार फ्लैट भी सीज किए गए थे।

महाराष्ट्र, जुलाई 2022: रियल स्टेट डेवलपर

अगस्त 2022 में महाराष्ट्र के जालना में हुई छापेमारी में 58 करोड़ रुपए नकद की बरामदगी आयकर विभाग के अधिकारियों को हुई थी। इसके अलावा 32 किलो सोना और साथ ही तमाम बेनामी सम्पत्ति का भी पता अधिकारियों को चला था। यहाँ जब्त की गई कुल सम्पत्ति की वैल्यू ₹390 करोड़ बताई गई थी। यहाँ छापा मारने वाले अधिकारी बारात की गाड़ियों में पहुँचे थे ताकि किसी को शक ना हो।

हैदराबाद, अक्टूबर 2021: हेट्रो फार्मा

अक्टूबर 2021 में हैदराबाद की हेट्रो फार्मा पर हुई छापेमारी आयकर विभाग ने ₹142 करोड़ नकद बरामद किए थे। यह कंपनी भारत से लेकर दुबई, यूरोप और अफ्रीका तक में दवाई का एक्सपोर्ट करती थी। यहाँ आयकर विभाग को इस फार्मा कम्पनी की ₹550 करोड़ की बेनामी सम्पत्ति का ब्योरा मिला था। यह सारी धनराशि कुछ लॉकर में भर कर रखी गई थी।

कोयम्बतूर, अप्रैल 2019: दुरई मुरुगन

अप्रैल 2019 में डीएमके नेता और पार्टी के कोषाध्यक्ष से जुड़े ठिकानों पर आम चुनावों के दौरान आयकर का छापा पड़ा था। इसमें छापा मारने वाले अधिकारियों को ₹21 करोड़ की बरामदगी हुई थी। यह सारा पैसा बोरे में भर कर रखा गया था। 2019 आम चुनावों के दौरान हुई इस बड़ी छापेमारी के कारण यहाँ मतदान को रद्द करना पड़ा था।

तमिलनाडु, जुलाई 2018: सुश्री SPK & कम्पनी

तमिलनाडु में जुलाई 2018 में पूरे प्रदेश में हुई छापेमारी में रोड बनाने वाली इस कम्पनी के ठिकानों से ₹160 करोड़ से अधिक की बरामदगी हुई थी। इसके अलावा 100 किलोग्राम सोना भी इसके ठिकानों से जब्त किया गया था। इसे तब देश की सबसे बड़ी छापेमारी कहा गया था।

गोगामेड़ी के हत्यारों ने मोहाली से लूटी थी कार, गोल्डी बराड़ जैसी जिंदगी का मिला था लालच: जानिए अपने ही साथी शेखावत को भी क्यों मार डाला

सुखदेव सिंह गोगामेड़ी हत्याकांड को अंजाम देने वाले 2 शूटरों रोहित राठौर और नितिन फौजी को उनके तीसरे सहयोगी उधम के साथ राजस्थान पुलिस ने रविवार (10 दिसंबर, 2023) को चंडीगढ़ से गिरफ्तार किया था। इन सभी ने पूछताछ में कई अहम खुलासे किए हैं। इन शूटरों को रोहित गोदारा ने कनाडा में बसाने और गोल्डी बराड़ जैस जिंदगी का लालच दिया था। इन्हीं दोनों शूटरों ने ही सुखदेव सिंह की हत्या में शामिल अपने तीसरे साथी नवीन शेखावत को मार डाला था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नितिन फौजी और रोहित राठौर विदेश भागने की फिराक में थे। इन सभी को रोहित गोदारा गैंग से लॉरेंस विश्नोई का समर्थन, कनाडा का पासपोर्ट वीजा, कैश और हथियारों का लालच दिया गया था। सुखदेव सिंह की हत्या के एवज में दोनों शूटरों को गोल्डी बराड़ जैसी जिंदगी के सपने दिखाए गए थे। फ़िलहाल सुखदेव हत्याकांड के मास्टरमाइंड रोहित गोदारा के यूरोप के किसी देश और उसके साथियों के कनाडा में छिपे होने की आशंका है। इन सभी को पासपोर्ट आदि तैयार होने में 15 से 20 दिन का समय बताया गया था।

दोनों शूटरों के साथ पुलिस ने अब तक उनके 2 सहयोगियों को भी अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया है। इनके नाम रामवीर जाट और उधम हैं। इन दोनों को सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की हत्या से पहले और बाद में शूटरों के रहने-खाने व फरार होने के इंतजाम देखने के लिए कहा गया था। खबर यह भी है कि दोनों सहयोगियों को इसी काम के लिए 50-50 हजार रुपए दिए भी गए थे। पुलिस शूटरों का सहयोग करने वाले रामवीर जाट और उधम से भी सवाल-जवाब में जुटी है।

पूछताछ में यह जानकारी भी निकल कर सामने आई है कि शूटर नितिन फौजी का रोहित गोदारा से परिचय भवानी सिंह नाम के एक व्यक्ति के माध्यम से हुआ। भवानी उर्फ़ रॉनी पहले ही गोदारा और उसके वीरेंद्र चरण जैसे साथियों के सम्पर्क में था। भवानी ने ही नितिन फौजी की बात रोहित गोदारा और उसकी गैंग से करवाई थी। इसी बातचीत के बाद नितिन फौजी सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की हत्या के लिए तैयार हो गया था।

अपने ही साथी को मार डाला दोनों शूटरों ने

अब तक हुई पूछताछ में यह निकल कर सामने आया है कि 5 दिसंबर को रोहित राठौर और नितिन फौजी की मुलाकात हुई थी। दोनों नवीन शेखावत के वाहन से सुखदेव सिंह गोगामेड़ी को मारने के लिए निकले। घटना को अंजाम देने के बाद दोनों ने अपने ही साथी नवीन को भी गोली मार दी। बताया जा रहा है कि नवीन शेखावत को भी मारने का आदेश शूटरों को उनके आकाओं से मिला था। नवीन काफी समय से सम्पत नेहरा और रोहित गोदारा के लिए काम कर रहा था। नवीन ने ही सुखदेव गोगामेड़ी की पूरी रेकी की थी और शूटरों से मीटिंग करवाई थी।

इस बीच नवीन घटनाओं को अंजाम देने की एवज में ज्यादा पैसे माँगने लगा था। पैसे न मिलने पर वह अपने ही आकाओं को गिरफ्तार करवाने की धमकियाँ देता था। शूटरों ने यह भी बताया कि उन्हें लगा कि नवीन शेखावत सुखदेव सिंह को गोलियाँ मारने के दौरान उनको रोकने का प्रयास कर रहा था। हत्यारों ने चंडीगढ़ में एक टैक्सी ड्राइवर जतिंदर सिंह से स्विफ्ट डिजायर कार भी लूटी थी। हरभजन सोसाइटी जाने के लिए इन्होंने टैक्सी बुक की थी। अब तक गाड़ी नहीं मिली है। जतिंदर को शक है कि ये गोगामेड़ी के हत्यारे ही थे, वो चेहरे से पहचान सकता है। पुलिस उसका बयान दर्ज करेगी।

4500 चर्च पर जिसका नियंत्रण उसे अब नहीं मिलेगा विदेशी फंड, ईसाई संगठन का FCRA लाइसेंस रद्द: ₹10000 करोड़ घोटाले में आया था नाम

केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने देश के बड़े ईसाई संगठन ‘चर्च ऑफ़ नॉर्थ इंडिया’ (CNI) एनजीओ का FCRA लाइसेंस रद्द कर दिया है। अब यह संगठन विदेशी चंदा नहीं ले सकेगा। यह ईसाई संगठन पिछले पाँच दशक से भारत में ईसाइयत को फैलाने का काम कर रहा है।

इस ईसाई संगठन को अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा समेत यूरोप और दुनिया के अन्य हिस्सों से भी बड़ी मात्रा में चंदा मिलता है। अब इस ‘चर्च ऑफ नार्थ इंडिया’ का विदेशी चंदा लेने का लाइसेंस केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रद्द कर दिया है, यह खबर अंग्रेजी समाचार वेबसाइट ‘इकॉनोमिक टाइम्स‘ ने दी है। गृह मंत्रालय विदेशी चंदे के नियमों का उल्लंघन करने पर ये कार्रवाई करता है।

‘चर्च ऑफ़ नॉर्थ इंडिया’ को वर्ष 1970 में 6 अलग-अलग संगठनों को मिलाकर बनाया गया था। इसके अंतर्गत चर्च ऑफ़ इंडिया, पाकिस्तान, बर्मा (म्यांमार), सीलोन (श्रीलंका) के तथा कुछ अन्य ईसाई संगठनों को मिलाकर बनाया गया था। यह उत्तर भारत में चर्च का नियन्त्रण करने वाली संस्था है।

इस संस्था का दावा है कि 22 लाख लोग इसके सदस्य हैं। इसके अलावा यह भारत के 28 क्षेत्रों में अपने बिशप रखता है जो कि वहाँ के चर्च पर नियंत्रण रखते हैं। इसके अलावा ‘चर्च ऑफ़ नॉर्थ इंडिया’ का दावा है कि इसके पास 2200 से अधिक पादरी हैं और 4500 से अधिक चर्च इसके नियन्त्रण में हैं।

चर्च ऑफ़ नार्थ इंडिया का एक पोस्टर, जिसके विदेशी चंदा लेने पर रोक लगी है
CNI का एक पोस्टर

‘चर्च ऑफ़ नॉर्थ इंडिया’ के अंतर्गत 564 स्कूल और कॉलेज तथा 60 नर्सिंग एवं मेडिकल कॉलेज चलते हैं। ऐसा इसकी वेबसाइट बताती है। देश में प्रसिद्ध लखनऊ का लॉ मार्टिनियर कॉलेज भी इसी के अंतर्गत है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे प्रदेशों में स्थित कई मिशनरी स्कूल भी इसके अंतर्गत आते हैं।

CNI के कुछ पादरियों पर वर्ष 2019 में ₹10,000 करोड़ के जमीन घोटाले का आरोप लगा था। इस मामले में संगठन के कुछ पादरियों ने अपने ही साथियों पर आरोप लगाया था कि उन्होंने कागजों में गड़बड़ी करके सैकड़ों एकड़ जमीन बेच दी। बीते कुछ समय में ऐसे कई NGO के लाइसेंस रद्द किए गए हैं जो कि विदेशों से फंड लेकर यहाँ गड़बड़ियाँ फैला रहे थे। यह NGO विदेशों से लिए गए पैसों का स्पष्ट हिसाब भी नहीं रख रहे थे। इनमें ऑक्सफैम, सेंटर फॉर पालिसी रिसर्च और राजीव गाँधी फाउंडेशन जैसे कुछ NGO शामिल रहे हैं।

राज्यसभा में दिसम्बर 2022 में दी गई एक जानकारी के अनुसार, वर्ष 2018 से लेकर वर्ष 2022 के बीच में गृह मंत्रालय ने 6677 NGO के विदेशी चंदा लेने के लाइसेंस खत्म किए हैं। यह सभी विदेशी चंदा लेकर गड़बड़ी करने के दोषी पाए गए थे। ऑपइंडिया ने ‘चर्च ऑफ़ नॉर्थ इंडिया’ की वेबसाइट पर दिए गए नम्बर पर सम्पर्क किया तो जवाब आया कि उन्हें अभी इस विषय में कोई जानकारी नहीं है। वह मामले की जानकारी ले कर आगे बताएँगे।

बाबा महाकाल का अशीर्वाद लेकर उज्जैन से गए मोहन यादव, भोपाल में चुन लिए गए CM: परिजन बोले- BJP में मुख्यमंत्री भी कार्यकर्ता

भाजपा ने मोहन यादव को मध्य प्रदेश का नया विधायक चुना है, विधायक दल की बैठक में सोमवार (11 दिसंबर, 2023) को इस पर मुहर भी लग गई। वो उज्जैन दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीसरी बार विधायक बने हैं। उनके CM बनने के बाद उनके घर में भी जश्न का माहौल है। उनके पिता, बहन, पत्नी और परिवार के अन्य लोग खुश हैं। उनकी बहन ने कहा कि महाकाल का आशीर्वाद है, पार्टी का आशीर्वाद है, उन्होंने काफी संघर्ष किया है, वो 1984 से ही ABVP-भाजपा के लिए कार्य करते रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उनके भाई ने ABVP के कार्यकर्ता के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर काम किया है, और सतत काम किया है। उन्होंने मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनाए जाने के पीछे उनकी मेहनत है, बड़ों का आशीर्वाद है, पार्टी का आशीर्वाद है और भगवान महाकाल का आशीर्वाद है। मोहन यादव की बहन ने कहा कि वो जब भी उज्जैन में आते हैं, बाबा महाकाल का आशीर्वाद लेते हैं। मुख्यमंत्री चुने जाने से 1 दिन पहले भी वो महाकाल का आशीर्वाद लेकर गए थे।

उनकी बहन ने कहा कि उन्हें एक जिम्मेदारी दी गई है, भाजपा में बड़ी बात नहीं है बल्कि CM होने का मतलब भी कार्यकर्ता होना ही है। मोहन यादव की पत्नी ने भी अपने पति के मुख्यमंत्री बनने पर कहा कि ख़ुशी का कोई ठिकाना ही नहीं है, उन्हें पूरी तरह नहीं पता था लेकिन उनका नाम चल रहा है। उनकी पत्नी ने कहा कि भगवान ने मेहनत का फल दिया है। मोहन यादव के परिजनों को वीडियो में फोन कॉल पर भी बात करते हुए देखा जा सकता है।

मोहन यादव के बुजुर्ग पिता भी अपने बेटे के सीएम बनने पर खुश नज़र आए। उन्होंने कहा कि उन्हें बहुत अच्छा लग रहा है। वहीं खुद मोहन यादव भी मीडिया के सामने आए और उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष JP नड्डा, अब तक सीएम रहे शिवराज सिंह चौहान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि केवल भाजपा ही है जो सामान्य और छोटे कार्यकर्ता को भी इतनी बड़ी जिम्मेदारी देती है, यही पार्टी का चरित्र है।

मध्य प्रदेश के नव-निर्वाचित मुख्यमंत्री ने कहा कि जो विकास का कारवाँ शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, उसे हम आगे लेकर जाएँगे। इस दौरान उन्होंने चुनाव के दौरान लगा नारा ‘एमपी के मन में मोदी और मोदी के मन में एमपी’ का जिक्र करते हुए कहा कि विकास के सपनों को लेकर हम आगे चलेंगे। वहीं प्रदेश अध्यक्ष VD शर्मा ने कहा कि मोहन यादव के नेतृत्व में हम लगातार राज्य को स्वर्णिम बनाने की दिशा में काम करते रहेंगे।

मोहन यादव ने 1984 में ABVP से छात्र राजनीति की शुरुआत की थी। 1986 में उन्हें विभाग प्रमुख की जिम्मेदारी दी गई। मोहन यादव ABVP के प्रदेश सह-मंत्री और राष्ट्रीय मंत्री भी रहे हैं। RSS के वो सह-खंड कार्यवाह और नगर कार्यवाह भी बने। 1997 में वो BJYM में आए। वो ‘उज्जैन विकास प्राधिकरण’ के अध्यक्ष और ‘मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम’ के अध्यक्ष भी रहे हैं। मध्य प्रदेश में राजेंद्र शुक्ला और जगदीश देवड़ा को डिप्टी CM चुना गया है।

राम मंदिर के जिस मुख्य पुजारी को जाति से जोड़ रहे मूढ़, जानिए उस मोहित पाण्डेय को ही क्यों चुना रामलला का सेवक

अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर के लिए पुजारियों का चयन किया गया है। इसके लिए लोगों से बाकायदा आवेदन माँगे गए थे, जिसमें 3000 लोग शामिल हुए। पुजारियों के लिए कुछ मापदंड भी निर्धारित किए गए थे, साथ ही उन्हें कड़ी चयन प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। इस पूरी प्रक्रिया में 200 आवेदकों का साक्षात्कार हुआ, जिसमें से 50 अभ्यर्थियों को पुजारी पद के लिए चुना गया।

इस बीच, सोशल मीडिया पर खबर तेजी से फैली कि मोहित पाण्डेय को मुख्य पुजारी के तौर पर चुना गया है। वहीं सवाल ये भी उठे कि इस पद के लिए ब्राह्मण का ही चयन क्यों हुआ?

कुछ चर्चित लोगों ने मोहित पाण्डेय का नाम सुनते ही सोशल मीडिया पर एससी और ओबीसी कार्ड खेलना शुरू कर दिया, जिसमें उनके चयन को ब्राह्मणवाद से जोड़ा जाने लगा। मूकनायक जैसे दलित पोर्टल ने पोस्ट किया है कि “राम मंदिर के पुजारी बनेंगे मोहित पांडे!” – क्या दलितों का पुजारी बनना मना है?

दिलीप मंडल नाम के वरिष्ठ पत्रकार ने लिखा, “ये मंदिर भारत सरकार का ट्रस्ट बना रहा है। किसी के बाप की संपत्ति नहीं है। मंदिर मैनेजमेंट में रिज़र्वेशन न दिया गया तो आंदोलन होना चाहिए। दक्षिणा सब देंगे और सिर्फ सारा पैसा एक जाति के लोग निकालेंगे, ये नहीं चलेगा।”

सूरज यादव नाम के एक्स यूजर ने तंज भरे अंदाज में लिखा, “हिन्दू है तो चयनित हुआ। दलित, पिछड़े, आदिवासी हिन्दू नहीं हैं, यह ध्यान रहे। शूद्र, अति शूद्र, जाति प्रथा से बाहर लोगों को न तो ट्रस्ट में स्थान है और न ही पूजा स्थल में। और यह उन यादवों के लिए खास तौर से जो मनुवाद या ब्राह्मणवाद के समर्थक हैं।”

खास बात ये है कि मोहित पाण्डेय के रामलला मंदिर के पुजारी बनने पर जो लोग उंगली उठा रहे हैं, उन्हें न तो प्रक्रिया का पता है और न ही इस बात की जानकारी है कि मोहित पाण्डेय को किस योग्यता के चलते मुख्य पुजारी के पद चयनित किया गया है।

दरअसल, रामलला के मंदिर में पुजारी बनने के लिए आवश्यक शर्त रखी गई थी कि उम्मीदवार को किसी मान्यता प्राप्त गुरुकुल से वेद, शास्त्र और संस्कृत का अध्ययन करना चाहिए। उम्मीदवार को रामानंदीय परंपरा में दीक्षित होना चाहिए। ऐसे में सभी पुजारियों के चयन के दौरान हुए साक्षात्कार में वेद, कर्मकांड और वैदिक मंत्रों के ज्ञान पर ध्यान दिया गया। इसके लिए उम्र सीमा अधिकतम 30 वर्ष तय की गई थी।

भले ही उनका चयन मुख्य पुजारी के तौर पर हुआ है, फिर भी मुख्य पुजारी की भूमिका निभाने से पहले उन्हें लंबे प्रशिक्षण से गुजरना होगा, जिसकी अवधि 6 माह है। अब प्रशिक्षण के दौरान उन्हें वेद, कर्मकांड, वैदिक मंत्रों और रामायण के ज्ञान की गहन शिक्षा दी जाएगी। इस प्रशिक्षण के बाद ही पुजारी रामलला की पूजा-अर्चना का कार्य कर सकेंगे।

किस आधार पर हुआ चयन?

अब चूँकि, रामलला की पूजा अर्चना के लिए नियुक्त किए जा रहे पुजारियों के लिए उक्त मापदंड निर्धारित किए गए थे, जिसमें रामनंदीय परंपरा का विद्वान होना जरूरी था, साथ ही उन्हें वेद, शास्त्र और संस्कृत में विशेषज्ञता रखना जरूरी था… ऐसे में जाहिर है कि सभी अभ्यर्थियों की परीक्षा हुई होगी। अब अगर इस परीक्षा में मोहित पाण्डेय उत्तीर्ण हुए तो इसमें जाति-धर्म का कोई मामला कैसे आया, उनका चयन तो काबिलियत के आधार पर हुआ है न।

जानकारी के लिए बता दें कि मोहित पाण्डेय ने गाजियाबाद के दूधेश्वर वेद विद्यापीठ में सात साल तक अध्ययन किया है। उन्होंने तिरुपति स्थित तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम से संबद्ध श्री वेंकटेश्वर वैदिक विश्वविद्यालय से शास्त्री (स्नातक) की उपाधि हासिल की। इसी साल (2023 में ही) उन्होंने सामवेद का अध्ययन करते हुए मास्टर डिग्री हासिल की है। वह रामानंदीय परंपरा के विद्वान भी हैं और उन्हें वेद, शास्त्र और संस्कृत में विशेषज्ञता भी प्राप्त है।

इसी तरह से अन्य चुने गए पुजारियों में उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के युवा शामिल हैं। सभी पुजारी रामानंदीय परंपरा से संबंधित हैं और उन्हें वेद, शास्त्र और संस्कृत में विशेषज्ञता प्राप्त है।

मोहित पाण्डेय के चुनाव पर सही

श्री वेंकटेश्वर वैदिक विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर रानी सदाशिव मूर्ति ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत की और मोहित पाण्डेय के श्रीराम लाल मंदिर के मुख्य पुजारी के पद पर चयन पर प्रसन्नता जताई। उन्होंने कहा, “विश्वविद्यालय के कई छात्र विभिन्न मंदिरों में पुजारी और आचार्य के रूप में काम करते हैं। एक मृदुभाषी व्यक्ति, पाण्डेय के स्वभाव, ध्यान और पढ़ाई के प्रति समर्पण ने उन्हें प्रतिष्ठित अयोध्या राम मंदिर में भगवान राम की सेवा करने का अवसर दिलाया।”

राम लला के मुख्य पुजारी के पद पर चयनित मोहित पाण्डेय की गाजियाबाद से तिरूपति और अब अयोध्या तक की यात्रा उनके समर्पण और कठोर प्रशिक्षण का प्रमाण है। उनके चयन में आध्यात्मिक क्षमताओं वाले व्यक्तित्व को तैयार करने गाजियाबाद के दूधेश्वर वेद विद्यापीठ और श्री वेंकटेश्वर वैदिक विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों ने भी अहम भूमिका निभाई है। ऐसे में जो लोग उनके चयन पर उंगली उठा रहे हैं, वो न सिर्फ संक्रमित मानसिकता के व्यक्तित्व वाले लोग हैं, बल्कि समाज में गलत विचारों का प्रवाह कर उसमें जहर घोलने का काम कर रहे हैं।

खैर, जब उंगली विवाद हो ही रहा है तो यहाँ ये बताना जरूरी है कि भारत के विभिन्न राज्यों में स्थित मंदिरों में न सिर्फ दलित पुजारी हैं, महिला पुजारी हैं, बल्कि दलित महिला पुजारी भी अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं। ऑपइंडिया ने इस पर विशेष लेख प्रकाशित कर बताया था कि किन मंदिरों में महिलाएँ और दलित महिलाएँ पुजारी का दायित्व निभा रही हैं। इस पूरी रिपोर्ट को पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

(नोट: मोहित पाण्डेय की मुख्य पुजारी के तौर पर नियुक्ति का श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने खण्डन किया है। आप इस लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं)

जब अयोध्या में ध्वस्त हुआ बाबर का निशान तब ABVP के कार्यकर्ता थे MP के मोहन, अब CM बन देखेंगे राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा

मोहन यादव मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री होंगे। सक्रिय राजनीति में आने से पहले उन्होंने सालों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और उसकी छात्र ईकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के लिए काम किया है। विभिन्न स्तरों पर अलग-अलग दायित्वों का निवर्हन कर चुके हैं।

1990 के दौर में जब बिहार और उत्तर प्रदेश में लालू प्रसाद यादव तथा मुलायम सिंह यादव में मुस्लिमों का तुष्टिकरण करने की होड़ लगी थी, तब मध्य प्रदेश के युवा मोहन यादव अभाविप से जुड़कर ज्ञान, शील, एकता की अलख जगा रहे थे। जब राम मंदिर निर्माण के लिए सोमनाथ से अयोध्या तक रथ लेकर निकले लाल कृष्ण आडवाणी को बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के आदेश पर 23 अक्टूबर 1990 को समस्तीपुर में गिरफ्तार किया गया था, तब युवा मोहन अभाविप की मध्य प्रदेश ईकाई के मंत्री थे।

1990 का ही साल था जब उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के आदेश पर अयोध्या में रामभक्तों पर फायरिंग हुई थी। उस साल 2 नवंबर को अयोध्या में रामधुन में रमे भक्तों पर फायरिंग हुई थी। अयोध्या की गलियों में रामभक्तों को दौड़ा-दौड़ा कर निशाना बनाया गया था। 3 नवंबर 1990 को जनसत्ता में छपी एक रिपोर्ट में लिखा गया, “राजस्थान के श्रीगंगानगर का एक कारसेवक, जिसका नाम पता नहीं चल पाया है, गोली लगते ही गिर पड़ा और उसने अपने खून से सड़क पर लिखा सीताराम। पता नहीं यह उसका नाम था या भगवान का स्मरण। मगर सड़क पर गिरने के बाद भी सीआरपीएफ की टुकड़ी ने उसकी खोपड़ी पर सात गोलियाँ मारी।”

2 नवंबर 1990 को ही कोठारी बंधुओं की हत्या हुई थी। 20 साल के शरद कोठारी को घर से बाहर निकाल सड़क पर बिठाया गया और उनके सिर को गोली से उड़ा दिया। छोटे भाई के साथ ऐसा होते देख 22 साल के रामकुमार कोठारी भी कूद पड़े। एक गोली रामकुमार के गले को भी पार कर गई। उस दिन अयोध्या में किसी भी रामभक्त के पैर में गोली नहीं मारी गई थी। सबके सिर और सीने में गोली लगी थी। तुलसी चौराहा खून से रंग गया था। राम अचल गुप्ता का अखंड रामधुन बंद नहीं हो रहा था तो उन्हें पीछे से गोली मारी गई।

रामनंदी दिगंबर अखाड़े में घुसकर साधुओं पर फायरिंग की गई। कोतवाली के सामने वाले मंदिर के पुजारी को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया गया। रामबाग के ऊपर से एक साधु आँसू गैस से परेशान लोगों के लिए बाल्टी से पानी फेंक रहे थे। उन्हें गोली मारी गई और वह छत से नीचे आ गिरे। फायरिंग के बाद सड़कों और गलियों में पड़े रामभक्तों के शव बोरियों में भरकर ले जाए गए।

उस दिन मरने वाले कारसेवकों की संख्या को लेकर अलग-अलग आँकड़े दिए जाते हैं। कारसेवकों द्वारा जारी की गई सूची में 40 कारसेवकों के मारे जाने की बात कही गई थी और उनके नामों की सूची भी प्रकाशित की गई थी। मुलायम ने बताया था कि अटल बिहारी वाजपेयी ने उनसे 56 लोगों के मारे जाने की बात कही थी। वरिष्ठ पत्रकार हेमंत शर्मा अपनी क़िताब ‘युद्ध में अयोध्या‘ में लिखा है कि उन्होंने 25 लाशें देखी थी। केंद्र सरकार ने 15 कारसेवकों के मारे जाने का आँकड़ा दिया था, जबकि विश्व हिन्दू परिषद ने 59 लोगों के मारे जाने की बात कही थी।

लालू राम रथ को रोक देने का दंभ भरते हुए जीवन भर बिहार में मुस्लिमों के वोट बटोरते रहे। उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव ‘मुल्ला मुलायम’ का तमगा हासिल कर इतराते रहे। तब मध्य प्रदेश के उज्जैन का युवा मोहन राष्ट्रसेवा की अपनी धुन में रमा रहा। 1992 में जब अयोध्या में विवादित ढाँचा ध्वस्त हुआ था तब वे अभाविप में राष्ट्रीय मंत्री का दायित्व सँभाल रहे थे।

राम की कृपा देखिए महाकाल का वही भक्त मोहन यादव अब मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। वह भी उस समयकाल में जब अयोध्या के भव्य राम मंदिर में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा होने को है। दूसरी तरफ राजनीति में बेटे से ही मात खाकर मुलायम दिवंगत हो चुके हैं और लालू पूरे कुनबे के साथ बिहार की राजनीति में प्रासंगिक बने रहने के लिए अब ‘जाति’ के भरोसे बैठे हैं।

‘शराब का धंधा कॉन्ग्रेस सांसद का… मगर फंडिंग ओडिशा की BJD को’ : भाजपा ने लगाया आरोप; जेपी नड्डा बोले- जवाब तो देना होगा

झारखंड में कॉन्ग्रेस सांसद धीरज साहू के अलग-अलग ठिकानों पर चल रही आईटी विभाग की तलाशी अभी जारी है। सबसे ज्यादा कैश ओडिशा से बरामद हुआ है। जो कैश से भरी अलमारी की फोटो आपने देखी वो भी बालांगीर में बलदेव साहु एंड सन्स लिमिटेड ऑफिस की है। इसके अलावा जो ज्यादा कैश मिला है वो भी संबलपुर, तितिलागढ़ जैसे क्षेत्रों से बरामद हुआ है।

ऐसे में सुंदरगढ़ से भाजपा की सासंद कुसुम तेते ने इस पूरे भ्रष्टाचार के मामले को राज्य की सत्ताधारी पार्टी बीजेडी से जोड़ा है और स्थानीय मीडिया ने भी आरोप लगाया है कि भले ही इस पूरे भ्रष्टाचार को करने वाले कॉन्ग्रेस सांसद हैं लेकिन इसका फायदा बीजू जनता दल को हो रहा है।

धीरज साहू और BJD कनेक्शन

एक ओर जहाँ खबरें आ रही हैं कि अब तक आईटी रेड में मिला पैसा 400 करोड़ रुपए और 60 किलो सोना तक पहुँच गया है। वहीं भाजपा की कुसुम तेते ने कहा कि उन्होंने धीरज साहू का शराब कारोबार, जो ओडिशा में फैला हुआ है, उसका कनेक्शन ओडिशा की बीजू जनता दल से है।

उन्होंने कहा कि उन्होंने विधानसभा में कई बार मुद्दे को उठाया था लेकिन कभी किसी ने ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि बीजेडी के पूर्व विधायक जोगेश सिंह के धीरज साहू के कारोबार से कनेक्शन है। उनके मुताबिक ओडिशा की ये शराब मैनुफैक्चरिंग यूनिट पहले सिंह की माँ के नाम पर थीं। इस संबंध में उन्होंने कई बार बताया भी मगर कार्रवाई नहीं हुई।

भाजपा ने उठाए सवाल

इसके बाद भाजपा ने भी इस संबंध में भुवनेश्वर में प्रेस कॉन्फ्रेंस की और प्रदेश प्रवक्ता लेखाश्री सामंतीसिंगार ने बीजेडी के कुछ नेताओं और मंत्रियों का नाम लेकर कहा कि भले ही कंपनी धीरज साहू की है, लेकिन उसे मैनेज बीजेडी द्वारा किया जाता है।

उन्होंने कहा, “झारखंड के कॉन्ग्रेस सांसद भले ही कंपनी के मालिक हैं। लेकिन ओडिशा में बीजेडी सरकार इसे मैनेज कर रही थी। जब कंपनी इतनी संपत्ति इकट्ठा कर रही थी तो विजिलेंस, क्राइम ब्रांच, एक्साइज, ईओडब्ल्यू क्या कर रही थी और राज्य सरकार को इसकी जानकारी कैसे नहीं थी? यह शराब का कारोबार चुनाव के दौरान बीजेडी के लिए पैसे का स्रोत है।”

स्थानीय चैनलों पर भी ऐसी खबरें चलाकर दावा किया जा रहा है कि ये शराब का धंधा राज्य में पॉलिटिकल फंडिंग का प्रमुख स्त्रोत था। कुछ लोगों ने आरोप लगाया है कि ओडिशा सरकार ने पिछले 25 वर्षों में शराब की दुकानों के लिए नए टेंडर जारी नहीं किए हैं। कुछ चुनिंदा व्यापारी हर साल लाइसेंस का नवीनीकरण कराते रहे हैं। आरोप लगाए गए हैं कि नवीन पटनायक सरकार की शराब नीति देशी शराब के निर्माताओं को फायदा पहुँचाने के लिए बनाई गई है, क्योंकि इन व्यवसायों के पैसे से सत्ताधारी पार्टी को फंड मिलता है।

जिन बीजेडी नेताओं का नाम साहू परिवार से जुड़ा बताया जा रहा है उसमें तितिलागढ़ से मंत्री तुकुनी साहू, सोनपुर से निरंजन पुजारी, नौपाड़ा से राजेंद्र ढोकिया और बौद्ध से प्रदीप अमात का नाम आ रहा है.. ऐसा कहा जा रहा है शराब के धंधे से इन लोगों को भी फायदा था।

जेपी नड्डा ने धीरज साहू से कहा- जवाब तो देना होगा

भारतीय जनता पार्टी ने जहाँ राज्य स्तर पर प्रदर्शन शुरू करके बीजेडी नेताओं से जवाब माँगना शुरू कर दिया है। वहीं राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा भी खुलेआम मोर्चा खोल दिया है।

नड्डा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, “बंधु जवाब तो देना पड़ेगा, तुमको भी और तुम्हारे नेता राहुल गाँधी को भी। ये नया भारत है, यहाँ पर राजपरिवार के नाम पर जनता का शोषण नहीं करने दिया जाएगा। भागते-भागते थक जाओगे, लेकिन कानून पीछा नहीं छोड़ेगा। अगर कॉन्ग्रेस भ्रष्टाचार की गारंटी है तो मोदी जी भ्रष्टाचार पर कार्यवाही की गारंटी हैं, जनता की लूटी हुई पाई- पाई लौटानी पड़ेगी।”

इसी तरह पीएम मोदी ने नोटो की गड्डियों की फोटो देख कहा था– देशवासी इन नोटों के ढेर को देखें और फिर इनके नेताओं को ईमानदारी के भाषणों को सुनें। पीएम ने लिखा था- जनता से लूटा है उसकी पाई-पाई लौटानी पड़ेगी, यह मोदी की गारंटी है।

जब उज्जैन में होता है सिंहस्थ कुंभ तब मध्य प्रदेश में होता है BJP का CM, इस बार उज्जैन के MLA को ही बीजेपी ने चुन लिया मुख्यमंत्री

डॉक्टर मोहन यादव मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री होंगे। मोहन यादव लगातार तीसरी बार उज्जैन दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए हैं। उनकी उम्र 58 वर्ष है। उन्होंने 2 जुलाई, 2020 को शिवराज सिंह चौहान की कैबिनेट में बतौर मंत्री शपथ ली थी। उन्हें उच्च शिक्षा विभाग सौंपा गया था। मीडिया नए CM के रूप में नरेंद्र सिंह तोमर और प्रह्लाद पटेल जैसे बड़े-बड़े नामों पर विचार कर रही थी, लेकिन भाजपा ने मोहन यादव को चुन कर सबको चौंका दिया।

छत्तीसगढ़ की तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी भाजपा 2 उप-मुख्यमंत्रियों के फॉर्मूले पर चलेगी। यहाँ राजेंद्र शुक्ला और जगदीश देवड़ा को डिप्टी CM चुना गया है। 59 वर्षीय राजेंद्र शुक्ला रीवा से विधायक हैं। उन्होंने लगातार पाँचवीं बार इस पद पर चुना गया है। वहीं जगदीश देवड़ा मल्हारगढ़ से विधायक हैं। वो 8 बार विधानसभा के लिए चुने जा चुके हैं। वो शिवराज सिंह चौहान के मंत्रिमंडल में कमर्शियल टैक्सेज, प्लानिंग, इकोनॉमिक्स एंड स्टेटिस्टिक्स मंत्री थे।

वहीं भारत के पूर्व कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को विधानसभा अध्यक्ष के रूप में चुना गया है। भाजपा विधायक दल की बैठक में मोहन यादव पीछे बैठे रहे, उसके बाद उन्होंने अब तक मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान से आशीर्वाद लिया। जहाँ मुख्यमंत्री OBC समाज से हैं, वहीं उनके डिप्टी के मामले में दलित और ब्राह्मण का समीकरण रखा गया है। मोहन यादव ने 1984 में ABVP से छात्र राजनीति की शुरुआत की थी। 1986 में उन्हें विभाग प्रमुख की जिम्मेदारी दी गई।

गौर करने लायक बात ये भी है कि मध्य प्रदेश में जिस-जिस साल सिंहस्थ कुम्भ लगता है, भाजपा का मुख्यमंत्री बनता रहा है। उदाहरण के तौर 1992 में सुंदरलाल पटवा, 2004 में उमा भारती और 2016 में शिवराज सिंह चौहान को ले लीजिए। वहीं 2028 में अगला सिंहस्थ कुंभ लगने वाला है। मोहन यादव ABVP के प्रदेश सह-मंत्री और राष्ट्रीय मंत्री भी रहे हैं। RSS के वो सह-खंड कार्यवाह और नगर कार्यवाह भी बने। 1997 में वो BJYM में आए।

वो ‘उज्जैन विकास प्राधिकरण’ के अध्यक्ष और ‘मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम’ के अध्यक्ष भी रहे हैं।