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‘शराब पीकर गुरुद्वारे जाते हैं पंजाब के CM, पत्नी को पीटते हैं’: बेटी ने भगवंत मान को ‘पिता’ कहने से किया इनकार, पूछा- 2 बच्चों को छोड़ा, तीसरा क्यों कर रहे

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की बेटी ने अपने पिता के ऊपर गंभीर आरोप लगाए हैं। बेटी ने वीडियो जारी कर रहा है कि उसके पिता भगवंत मान ने अपने राजनैतिक करियर के लिए बीवी-बच्चों को छोड़ दिया और अब वो तीसरे बच्चे के पिता बनने जा रहे हैं। बेटी ने वीडियो में यह भी दावा किया कि मान शराब पीकर संसद, विधानसभा और गुरुद्वारे जाते हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने एक बार अपने बेटे को भी सीएम हाउस से निकाल दिया था। उनकी ऐसी ही हरकत के बाद उनकी पहली पत्नी और बेटी विरोध में उतरे और पंजाब सीएम को बेपर्दा करने की बात कही।

बेटी ने तो 5 मिनट 19 सेकेंड की वीडियो शेयर कर कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान तीसरी बार बाप बनने वाले हैं। ये बात उन लोगों को दूसरों से पता चली है, भगवंत मान ने इस संबंध में उन्हें कुछ नहीं बताया। सीरत पूछती हैं कि भगवंत मान ने अपने पहले दो बच्चों की तो जिम्मेदारी निभाई नहीं, अब वो तीसरे बच्चे को ला रहे हैं, इसके पीछे क्या कारण है।

सीरत ने दावा किया कि उन्हें और उनके भाई को उनके पिता द्वारा नजरअंदाज किया गया है, जिन्होंने अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों के बजाय अपने राजनीतिक करियर को प्राथमिकता दी है। कौर ने आगे आरोप लगाया कि उनके भाई दिलशान को भगवंत मान ने उनके घर से बाहर भी निकाल दिया था, क्योंकि उसने उनसे मिलने की कोशिश की थी। हालाँकि इस मामले में आम आदमी पार्टी ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है और इसे पारिवारिक मामला बताया है।

सीरत मान ने वीडियो में कहा, “मैं सीरत कौर मान हूँ। मैं पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की बेटी हूँ। मैं शुरुआत में ही साफ कर दे रही हूँ कि इस वीडियो में मैं उन्हें मिस्टर मान या सीएम साहब ही कहूँगी, क्योंकि उन्होंने मुझसे पापा शब्द सुनने का अधिकार बहुत पहले ही खो दिया था। मैं साफ कर दूँ कि इस वीडियो के पीछे कोई पॉलिटिकल मोटिव (राजनीतिक मकसद) नहीं छिपा है।”

सीरत कौर मान ने आगे कहा, “इस वीडियो को बनाने के पीछे सिर्फ इतनी सी बात है कि मैं चाहती हूँ कि हमारी कहानी भी दुनिया के सामने आए। अभी तक लोगों ने जो कुछ भी सुना है, वो सबकुछ सीएम साहब की तरफ से ही कहा गया है। उसके चलते हमें बहुत कुछ सुनना और झेलना पड़ा है, जिसे मैं पूरी तरह से बयान भी नहीं कर सकती। आज तक मेरी माँ और हम सभी ने चुप रहकर सबकुछ सहा है, लेकिन ऐसा लगता है कि हमारी चुप्पी को हमारी कमजोरी समझ लिया गया। उन्हें (भगवंत मान को) इस बात का अहसास तक नहीं है कि हमारी चुप्पी की वजह से वो इस गद्दी (मुख्यमंत्री पद) पर बैठे हैं।”

सीरत कौर मान ने आगे कहा, “मान साहब ने मेरी (सीरत कौर मान-उम्र 23 वर्ष) और मेरे छोटे भाई (दिलशान मान-उम्र 19) के प्रति अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाया तक नहीं है। मेरा भाई पिछले साल 2 बार उनसे मिलने सीएम हाउस गया, लेकिन उसे सीएम हाउस में घुसने तक नहीं दिया गया। एक बार उसे अंदर जाने भी दिया गया, तो ये बहाना बनाकर रात में निकाल दिया गया कि वो रात में यहाँ (सीएम हाउस में) नहीं रुक सकता।”

सीरत कौर ने सवालिया लहजे में पूछा, “जो व्यक्ति अपने बच्चों की ज़िम्मेदारी नहीं उठा सकता, वह पंजाब के लोगों की ज़िम्मेदारी कैसे उठा सकता है?” उन्होंने कहा, “भगवंत मान एक अहसान कर दें कि जिन पंजाब के नाम पर उन्होंने हम सभी को छोड़ा, वो उसी पंजाब की माँ-बेटियों का भला कर दें, तो शायद रब उन्हें माफ कर दे।” सीरत कौर मान ने आरोप लगाया है कि भगवंत मान विधानसभा में, संसद में, गुरुद्वारे तक में शराब पीकर जाते हैं। वो हमारे साथ मारपीट तक करते हैं।

इस मामले में सीरत कौर की माँ इंदरप्रीत ने कहा है- “मैं अभी तक चुप थीं, लेकिन अब भगवंत मान के शराबियों वाले वीडियो शेयर करके मैं उसे नंगा कर दूँगी।” इंदरप्रीत ने आरोप लगाया कि सीरत के वीडियो को भगवंत मान की पीआर टीम इंटरनेट से हटाने की कोशिश कर रही है और इसके लिए तमाम तरह से दबाव डाला जा रहा है। उनके फेसबुक कमेंट को अकाली दल के प्रवक्ता परमबंस सिंह ने एक्स पर शेयर किए हैं।

बता दें कि भगवंत मान की पहली पत्नी का नाम इंदरप्रीत कौर है। वो अपने दोनों बच्चों के साथ अमेरिका में रहती है। दोनों ने साल 2015 में तलाक के लिए अर्जी दी थी, जिसे कोर्ट ने मंजूरी दे दी थी। भगवंत मान ने दावा किया था कि वो पंजाब के लिए अपना परिवार छोड़ रहे हैं। हालाँकि उन्होंने साल 2022 में पंजाब का मुख्यमंत्री बनने के कुछ माह के भीतर ही अपनी डॉक्टर गुरप्रीत कौर से ही शादी कर ली थी। शादी के समय भगवंत मान 48 साल के थे, जबकि गुरप्रीत कौर 32 साल की। वहीं, उनकी बेटी सीरत उस समय 22 साल की थी, तो बेटा दिलशान 18 साल का। मान के दोनों बच्चे उनके सीएम बनने के बाद शपथ ग्रहण समारोह में पहुँचे थे।

महिला को पूरे गाँव में नग्न घुमाया, बिजली के खम्भे से बाँध कर पीटा: कर्नाटक में जहाँ हुई हैवानियत, वहाँ से 30 किलोमीटर दूर बैठी है कॉन्ग्रेस सरकार

कर्नाटक के बेलगावी में एक वीभत्स घटना सामने आई है। यहाँ वन्मुतारी गाँव में एक महिला को गाँव भर में नग्न कर घुमाया गया और उसे एक बिजली के खम्भे से बाँधा गया। इस मामले में 7 आरोपित गिरफ्तार हो गए हैं। महिला को इसलिए नंगा घुमाया गया और मारपीट की गई क्योंकि उसका बेटा एक लड़की को लेकर भाग गया था।

जानकारी के अनुसार, बेलगावी के वन्तामुरी गाँव में रहने वाले डुंडप्पा अशोक नाइक गाँव में रहने वाली प्रियंका बसप्पा नाइक के साथ भाग गया था। दोनों के बीच पहले से प्रेम सम्बन्ध था लेकिन प्रियंका के परिवार वालों ने उसकी शादी कहीं और तय कर दी थी। यह घटना 10-11 दिसम्बर की रात की बताई जा रही है। जिस दिन प्रियंका और अशोक ने यह कदम उठाया, उसी दिन प्रियंका की शादी थी। इस बात से गुस्सा होकर प्रियंका के परिजनों ने रात में अशोक की माँ को रात में उसके घर से निकाल लिया और मारा पीटा, इसके बाद उनको नंगा करके पूरे गाँव में घुमाया और फिर एक बिजली के खम्भे में बाँध कर पिटाई की।

बेलगावी में एक महिला के साथ यह वीभत्स घटना तब हुई जब घटना वाले गाँव से लगभग 28 किलोमीटर दूर ही विधानसभा का शीतकालीन सत्र चल रहा है जहाँ मुख्यमंत्री सिद्दारमैया, उप-मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार समेत राज्य के तमाम बड़े नेता और अधिकारी मौजूद है। जानकारी के अनुसार, इस मामले में पुलिस ने सुबह 4 बजे जाकर महिला को छुड़ाया। महिला ने इस मामले में महिला को नग्न घुमाने, उसे पोल में बाँध कर मारने वाले 7 आरोपितों को अभी तक गिरफ्तार किया है। घटना वाले गाँव में वर्तमान में माहौल तनावपूर्ण है।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने इस मामले पर बयान जारी किया है। उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा है, “एक महिला को बेलगाम में नग्न करके घुमाया गया, पोल से बाँध कर मारा गया। यह घटना अमानवीय है। यह घटना समाज पर एक कलंक है। हमारी सरकार ऐसे कृत्यों को सहन नहीं करेगी। इस मामले में कई लोग गिरफ्तार किए गए हैं। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम पीड़ित परिवार को न्याय दिलवाएँ।”

कर्नाटक के गृहमंत्री जी परमेश्वरा ने मीडिया को बताया है कि मामले में पुलिस ने महिला को साड़ी उपलब्ध करवाई और 7 आरोपितों को पकड़ा। पुलिस ने मारपीट के कारण घायल महिला को अस्पताल में भर्ती करवाया है। राज्य के गृह मंत्री ने कहा है कि वह महिला से अस्पताल जाकर मिलेंगे।

‘ये देश रामायण से नहीं चलता, लोग पत्थर को पूजते हैं’: यूपी के कॉलेज में छात्र ने आंबेडकर को बताया ‘सबसे बड़ा भगवान’, कहा – न राम ने कुछ दिया, न कृष्ण ने

उत्तर प्रदेश के बदायूँ जिले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में एक छात्र को एक समूह के सामने हिन्दू देवी-देवताओं के साथ-साथ धर्मग्रंथों पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी करता सुनाई दे रहा है। वीडियो के वायरल होने के बाद छात्र पर कार्रवाई की माँग उठ रही है। हालाँकि, पुलिस के मुताबिक, आरोपित छात्र ने लिखित माफ़ीनामा देकर अपने शब्दों पर खेद जताया है। वायरल वीडियो बुधवार (6 दिसंबर, 2023) को बनाया गया था।

मिली जानकारी के मुताबिक, यह मामला बदायूं जिले के थाना क्षेत्र सहसवान का है। यहाँ कछला रोड स्थित सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज में 6 दिसंबर को डॉ भीमराव अंबेडकर की पुण्यतिथि के अवसर पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में कई छात्र और कॉलेज के प्रोफेसर आदि मौजूद थे। इस मौके पर अलग-अलग छात्रों ने अपनी प्रस्तुतियाँ दीं। थोड़े समय बाद राम सेवक यादव नाम के छात्र की बारी आई। राम सेवक यादव ने अपना भाषण शेरो-शायरी के अंदाज में शुरू किया और भगवान राम के खिलाफ ही बयानबाजी शुरू कर दी।

रामसेवक के भाषण का 59 सेकेण्ड का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। इस वीडियो में उन्होंने कहा, “ये देश किसी रामायण किसी गीता से नहीं चलता, ये देश मेरे बाबा साहेब के बनाए हुए संविधान से चलता है। जय भीम से बड़ा कोई सम्मान नहीं है, जो भीम का नहीं है वो इंसान नहीं है। यूँ तो पूजते हैं लोग पत्थरों को, मगर मेरे बाबा साहेब से बड़ा कोई भगवान नहीं है। न राम ने कुछ किया है न श्री कृष्ण ने कुछ किया है, हमको जो कुछ भी दिया है बाबा साहेब आपके संविधान ने दिया है।”

राम सेवक यादव द्वारा बोली गई इन लाइनों के बाद हॉल की दर्शक दीर्घा में मौजूद बाकी छात्रों ने विरोध शुरू कर दिया। मंच पर मौजूद कुछ लोग भी उठ कर वहाँ से जाने लगे। कार्यक्रम का संचालन कर रहे व्यक्ति ने बाकी छात्रों से शांत रहने की अपील की। कुछ ही देर में यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। लोग पुलिस से राम सेवक पर कार्रवाई की माँग करने लगे। हालाँकि, पुलिस ने 9 दिसंबर को दिए गए अपने जवाब में बताया कि आरोपित छात्र ने माफ़ी लिखित तौर पर माँग ली है और कॉलेज के बाकी छात्रों ने उसे माफ़ भी कर दिया है।

पुलिस का कहना है कि अभी तक किसी भी पक्ष द्वारा मामले में शिकायत कॉपी थाने में नहीं प्रस्तुत की गई है। वहीं विवाद बढ़ता देख कर आरोपित छात्र राम सेवक यादव ने एक वीडियो भी जारी किया है। उन्होंने अपने शब्दों पर दुःख प्रकट करते हुए लोगों से क्षमा याचना की है।

‘मैं सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की तीसरी बीवी, पूरी बिरादरी जानती है’: करणी सेना अध्यक्ष की चिता की राख भी नहीं हुई ठंडी, संपत्ति को लेकर पत्नियों में छिड़ गई लड़ाई

राजस्थान की राजधानी जयपुर में मंगलवार (5 दिसंबर, 2023) को ‘श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना’ के अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की उनके ही घर में गोलियों से भून कर हत्या कर दी गई थी। हत्या के बाद अब सुखदेव सिंह गोगामेड़ी के निजी जीवन के कई राज निकल कर सामने आ रहे हैं। इसमें उनकी 3 पत्नियाँ और करोड़ों की सम्पत्ति का मालिक होना जैसी बातें प्रमुख हैं। अब सुखदेव सिंह की असली पत्नी होने के अधिकार को ले कर उनकी 2 पत्नियों में विवाद शुरू हो गया है। हालाँकि, तीसरी बीवी ने फिलहाल इस झगड़े से दूरी बना कर रखी है।

सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की पहली पत्नी शकुंतला चौधरी और दूसरी का नाम शीला शेखावत है। सपना सोनी ने भी सुखदेव की तीसरी बीवी होने का दावा किया है। हालाँकि, सपना के साथ सुखदेव ने औपचारिक विवाह नहीं किया था और दोनों के बीच ‘लिव इन’ रिलेशशिप था। घटना के समय सपना सोनी घर में मौजूद थीं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब शीला शेखावत और सपना सोनी के बीच तकरार शुरू हो चुकी है।

अलग-अलग बयानों के साथ सपना सोनी और शीला शेखावत मीडिया के सामने भी आ चुकी हैं। हालाँकि, शकुंतला चौधरी ने पत्रकारों से दूरी बना रखी है। वहीं एक इंटरव्यू में सपना सोनी ने कहा कि उन्हें न्याय के अलावा और कुछ नहीं चाहिए। एक इंटरव्यू में सपना सोनी ने कहा कि उन्हें नौकरी और मुआवजा नहीं बल्कि न्याय चाहिए। सपना ने इसी इंटरव्यू में आगे कहा, “सुखदेव जी इतना कुछ तो हमारे लिए छोड़ कर गए हैं।”

सपना ने इसी इंटरव्यू में आगे कहा कि उनको कोई कुछ भी समझे पर उनका रिश्ता उन्हें (सुखदेव सिंह) को पता था। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर वो कमा कर खा सकती है। इसी बयान में सपना ने यह भी कहा कि शीला शेखावत ही अकेले सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की पत्नी होने का दावा कर रहीं हैं जो सही नहीं है। सपना ने शीला शेखवात का जिक्र करते हुए यह भी कहा कि कागजातों में शकुंतला चौधरी बतौर सुखदेव सिंह की पत्नी दर्ज हैं।

NDTV को दिए गए इसी इंटरव्यू में सपना ने आगे दावा किया है कि पूरे राजपूत समाज को ये पता है कि वो सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की तीसरी बीवी हैं। उन्होंने कहा कि समाज के लोग बिरादरी की इज्जत की दुहाई दे कर इस मामले पर खुल कर बात नहीं कर रहे हैं। सपना का यह भी कहना है कि फ़िलहाल शकुंतला चौधरी के पास खाने के लिए रोटी भी नसीब नहीं है। साथ ही उन्होंने बताया कि वो इस मामले में न तो पैसा चाहती हैं और न ही राजनीति। उनका कहना है कि जिसे नाम, पैसे और राजनीति की शौक हो वही झूठ बोले।

सुखदेव से अपना 11 साल पुराना रिश्ता बताते हुए सपना चौधरी ने आगे बताया कि मामले में बाहर वाले ही नहीं बल्कि सुखदेव सिंह गोगामेड़ी के घर वाले भी राजनीति कर रहे हैं। सपना ने बताया कि सुखदेव से शादी के बाद शकुंतला चौधरी के कोई संतान नहीं है। वहीं शीला शेखावत के 2 और खुद सपना के 1 बेटा है। साथ ही शकुंतला की दिमागी हालत भी उन्होंने सही नहीं बताई। सपना ने अपने और शकुंतला के भविष्य को ले कर भी चिंता जताई। सपना ने खुद को एक आम लड़की बताते हुए लोगों से सुखदेव सिंह की 3 बीवियों का मजाक न उड़ाने की भी अपील की।

ये फैसला सिर्फ कानूनी नहीं, आशा की किरण है: 370 पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बोले PM मोदी, दिया नया जम्मू-कश्मीर का स्लोगन

आर्टिकल 370 पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा जम्मू-कश्मीर के लोगों को बेहतर भविष्य का आश्वासन दिया। उन्होंने इस फैसले को आशा की किरण बताया।

पीएम मोदी ने ट्वीट में कहा, “अनुच्छेद 370 को निरस्त करने पर आज का सुप्रीम कोर्ट का फैसला ऐतिहासिक है। ये 5 अगस्त 2019 को भारत की संसद द्वारा लिए गए फैसले को संवैधानिक रूप से बरकरार रखता है। यह जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में हमारी बहनों और भाइयों के लिए आशा, प्रगति और एकता की एक शानदार घोषणा है। कोर्ट ने अपने गहन ज्ञान से, एकता के मूल सार को मजबूत किया है। सुप्रीम कोर्ट को हम भारतीय होने के नाते बाकी सब से ऊपर प्रिय मानते हैं और संजोते हैं।”

उन्होंने लिखा, “मैं जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों को आश्वस्त करना चाहता हूँ कि आपके सपनों को पूरा करने के लिए हमारी प्रतिबद्धता अटूट है। हम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि प्रगति का लाभ न केवल आप तक पहुँचे, बल्कि इसका लाभ हमारे समाज के सबसे कमजोर और हाशिए पर रहने वाले वर्गों तक भी पहुँचे, जो अनुच्छेद 370 के कारण पीड़ित थे।”

प्रधानमंत्री ने अपने ट्वीट में ‘नया जम्मू-कश्मीर’ हैशटैग के साथ लिखा, “आज का फैसला सिर्फ कानूनी फैसला नहीं है; यह आशा की किरण है, उज्जवल भविष्य का वादा है और एक मजबूत, अधिक एकजुट भारत के निर्माण के हमारे सामूहिक संकल्प का प्रमाण है।”

बता दें कि जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर आज (11 दिसंबर 2023) सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। 5 जजों की संविधान पीठ की अध्यक्षता करने वाले मुख्य न्यायाधीश चंद्रजूड़ ने बताया कि 5 जजों की बेंच ने तीन अलग-अलग फैसले लिए हैं, लेकिन उनका निष्कर्ष एक ही है।

फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 370 को हटाने को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं की दलीलें खारिज कर दीं। कहा गया कि जम्मू-कश्मी भारत का अभिन्न अंग है। ऐसे में नियम है कि केंद्र राष्ट्रपति शासन के तहत राज्य सरकार की शक्ति का प्रयोग कर सकता है और संसद/राष्ट्रपति उद्घोषणा के तहत राज्य की विधायी शक्तियों का प्रयोग कर सकता है।

संसद से बर्खास्त होते ही सुप्रीम कोर्ट पहुँचीं महुआ मोइत्रा: कैश-तोहफे लेकर सवाल पूछने का मामला, पूर्व पार्टनर ने कारोबारी संग रिश्तों का किया था खुलासा

तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की पूर्व सांसद महुआ मोइत्रा ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। महुआ मोइत्रा को शुक्रवार (8 दिसम्बर, 2023) को लोकसभा ने उनके भ्रष्टाचारी आचरण के चलते सदस्यता से वंचित कर दिया था। अब उन्होंने इस निर्णय को देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

महुआ मोइत्रा पर दुबई में रहने वाले कारोबारी दर्शन हीरानंदानी से पैसे और महँगे गिफ्ट लेकर कारोबारी गौतम अडानी के विरुद्ध प्रश्न पूछने का आरोप 15 अक्टूबर को भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा स्पीकर को एक पत्र लिख कर लगाया था।

यह आरोप महुआ मोइत्रा के पूर्व पार्टनर और सुप्रीम कोर्ट में वकील जय अनंत देहाद्राई के हवाले से लगाए गए थे। बाद में दर्शन हीरानंदानी ने स्वयं यह स्वीकार किया था कि उन्होंने महुआ को महँगे तोहफे और पैसे दिए हैं। महुआ पर यह भी आरोप लगाया गया था कि उन्होंने अपने संसद पोर्टल की लॉगइन आईडी और पासवर्ड दर्शन हीरानंदानी को दिए।

इस बात को महुआ ने खुद भी स्वीकारा था। इस मामले की जाँच के लिए इसे लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने संसद की आचार समिति के पास भेज दिया था। आचार समिति ने दोनों पक्षों को सुन कर अपनी रिपोर्ट संसद को 8 दिसम्बर, 2023 को दी थी।

इस रिपोर्ट में महुआ पर लगे आरोपों को सही पाया गया था। महुआ के इस कदाचार के चलते समिति ने उन्हें लोकसभा की सदस्यता से बर्खास्त करने की सिफारिश की थी। इसके पश्चात 8 दिसम्बर, 2023 को ही इस रिपोर्ट के आधार पर महुआ की संसद सदस्यता रद्द कर दी गई थी। महुआ का कहना था कि उनका दर्शन हीरानंदानी से गिफ्ट और पैसे लेना भ्रष्टाचार नहीं है। अब महुआ ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के सामने अपील की है।

अभी महुआ की याचिका सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार की है या नहीं, यह सामने नहीं आया है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि महुआ का केस सुप्रीम कोर्ट में कौन लड़ रहा है।

2 धागे श्रीराम के… श्रद्धालुओं के बुने वस्त्र पहनेंगे रामलला: 4 लाख लोगों ने करा दिया है रजिस्ट्रेशन, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने की शुरुआत

अयोध्या में तैयार हो रहे प्रभु श्रीराम के मंदिर में मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा से पहले भगवान के कपड़े बुनने के लिए लाखों लोग आगे आ रहे हैं। इसके लिए ‘दो धागे श्रीराम के लिए’ नाम के एक अभियान की शुरुआत की गई है। इसके तहत 10 लाख लोग प्रभु श्रीराम के कपड़े बुनेंगे।

दरअसल, अयोध्या में बन रहे श्रीराम मंदिर की तैयारियाँ अंतिम चरणों में है। इसी के तहत ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ और पुणे की हथकरघा संस्था ‘हेरिटेज हैंडवीविंग रिवाइवल चैरिटेबल ट्रस्ट’ ने साथ मिल कर ‘दो धागे श्रीराम के लिए’ नाम का एक अभियान चलाया है।

इसके तहत जो भी श्रद्धालु प्रभु श्रीराम के कपड़े बुनना चाहते हैं, उन्हें यह मौक़ा दिया जाएगा। इसके लिए पुणे स्थित इस हथकरघा ट्रस्ट के कारखाने पर लोगों को वस्त्र बुनने के लिए आमंत्रित किया गया है। यह अभियान 10 दिसम्बर, 2023 से चालू होकर 22 दिसम्बर, 2023 तक चलेगा।

इसका शुभारम्भ केन्द्रीय बाल एवं महिला कल्याण तथा अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री स्मृति ईरानी ने पुणे में किया है। इस दौरान मंत्री स्मृति ईरानी ने खुद भी प्रभु श्रीराम के लिए कुछ कपड़े बुने। इस अभियान का लक्ष्य है कि उन लोगों को भी प्रभु की सेवा का अवसर मिले जो कि अभी तक किन्ही कारणों से इससे वंचित रहे हैं।

इस अभियान के प्रारम्भ होने पर हथकरघा ट्रस्ट की मुखिया अनघा घैसास ने कहा, “कोई यह सोच सकता है कि आखिर केवल दो धागों से क्या होगा? लेकिन जब लाखों लोग एक साथ आकर दो धागे बुनेंगे, तो तैयार कपड़ा एकता का प्रतीक होगा। इस पूरे अभियान के पीछे का लक्ष्य है कि हिन्दू एक साथ आएँ।”

उन्होंने आगे बताया, “लगभग 3.5-4 लाख लोगों ने इस अभियान में सहभागिता के लिए ऑनलाइन पंजीकरण करवाया है। सभी के मन में प्रभु श्रीराम के लिए कुछ करने की भावना है। वो यहाँ आकर दो धागे बुन सकते हैं। इस काम के लिए जरी और रेशम के धागों का उपयोग किया जा रहा है। यहाँ तैयार वस्त्रों को प्रभु श्रीराम धारण करेंगे।”

गौरतलब है कि अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर बन रहे मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी, 2024 को की जाएगी जिसके लिए तैयारियाँ अंतिम चरणों में हैं। मंदिर के निर्माण का काम भी लगभग पूरा हो गया है। हाल ही में इसके गर्भगृह की नई तस्वीरें सामने आई हैं। इस पूरे कार्यक्रम के लिए अयोध्या शहर को भी सजाया जा रहा है। इस प्राण प्रतिष्ठा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी शामिल होंगे।

‘अब तक ₹354 करोड़, ₹1000 करोड़ मिलने का चांस’: जहाँ खोद रही IT, वहीं मिल रहा कॉन्ग्रेस MP धीरज साहू के नोटों का पहाड़, 60 किलो सोना भी

11 दिसंबर 2023 आयकर विभाग (IT Raid) की छापेमारी का छठा दिन है। लेकिन कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद धीरज साहू के ठिकानों से मिले अकूत नकद की गिनती पूरी नहीं हो पाई है। अध्यक्ष जेपी नड्डा के नेतृत्व में बीजेपी ने कॉन्ग्रेस नेता के इस करप्शन के खिलाफ प्रदर्शन भी किया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि साहू के यहाँ से अब तक 354 करोड़ रुपए जब्त किए जा चुके हैं। यह बढ़कर 500-1000 करोड़ रुपए हो सकता है।

साहू के ठिकानों से अब तक कितने पैसे मिले हैं, इसको लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। मीडिया रिपोर्टों में इसको लेकर अलग-अलग दावे हैं। कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि अब तक करीब 350 करोड़ रुपए की गिनती हो चुकी है। कनक न्यूज के अनुसार 454 करोड़ नकद और 60 किलो सोना बरामद हुआ है। प्रभात खबर ने बताया है कि अब तक नोटों से भरे 176 बैग गिनती के लिए बैंक में लाए गए हैं। इनमें से 140 की गिनती पूरी कर ली गई है। रिपोर्ट के अनुसार 40 मशीनें नोट गिन रही हैं। पूर्व में नोट गिनते-गिनते मशीनों के खराब होने की रिपोर्टें भी आ चुकी हैं।

छापेमारी में ओडिशा के बोलांगीर के अलावा सम्बलपुर से भी आयकर की टीमों ने बड़ी बरामदगी की है। जानकारी के अनुसार, धीरज साहू से जुड़ी बौध डिस्टलरीज प्राइवेट लिमिटेड की बोलांगीर स्थित शाखा से ही सबसे ज्यादा नकदी बरामद हुई है। रिपोर्ट्स में बताया गया है कि अभी तक की गिनती में ₹400 करोड़ बोलांगीर, ₹37.5 करोड़ संबलपुर और 11 करोड़ की बरामदगी टीटागढ़ से हुई है। यह पैसा 30 अलमारियों में और बैग में रखा हुआ था।

बोलांगीर में जब्त धनराशि 176 बैग में भर कर स्टेट बैंक की शाखा में लाई गई थी। गिनती के लिए कई शाखाओं से कर्मचारी बुलाए गए हैं। यहाँ नोटों की संख्या अधिक होने कारण जिले भर से नोट गिनने वाली मशीनें भी लाई गईं हैं।

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद और शराब कारोबारी धीरज साहू के ठिकानों पर 6 दिसम्बर 2023) से छापेमारी चल रही है। छापेमारी झारखंड के लोहरदगा और राँची, बंगाल के कोलकाता और टीटागढ़ और ओडिशा में बोलांगीर तथा संबलपुर में हुई है। इसके अलावा कुछ अन्य स्थानों पर भी टीम पहुँची थी।

उल्लेखनीय है कॉन्ग्रेस सांसद धीरज प्रसाद साहू और उनके रिश्तेदारों का शराब का बड़ा कारोबार है। बलदेव साहू एंड ग्रुप ऑफ कंपनीज मूल रूप देशी शराब बनाने का काम करती है। इस धंधे में कंपनी करीब चार दशक से है। कंपनी का नाम धीरज साहू के पिता बदलेव साहू के नाम पर है। कॉन्ग्रेस सांसद के अलावा उनके परिवार के अन्य सदस्य भी कंपनी में शामिल हैं।

साहू का यह राज्यसभा में तीसरा कार्यकाल है। पहली बार वे जून 2009 में चुनकर आए। फिर 2010 और उसके बाद 2018 में तीसरी बार संसद के उच्च सदन में पहुँचे। वे झारखंड की चतरा सीट से दो बार लोकसभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं। पर दोनों ही बार उन्हें हार मिली।

इतनी बड़ी मात्रा में नकद मिलना इसलिए भी चौंकाता है, क्योंकि 2018 के चुनावी हलफनामे में साहू ने अपने ऊपर 2.36 करोड़ रुपए का कर्ज बताया था। कुल संपत्ति 34 करोड़ बताई थी। 2016-17 में जो इनकम टैक्स रिटर्न भरा था, उसमें अपनी आमदनी एक करोड़ रुपए से कुछ ही अधिक बताई थी।

सितंबर 2024 तक जम्मू-कश्मीर में हो विधानसभा चुनाव, जल्द बहाल हो राज्य का दर्जा: सुप्रीम कोर्ट ने 370 हटाने पर भी लगाया ठप्पा

सुप्रीम कोर्ट की पाँच सदस्यीय पीठ ने आज (11 दिसंबर 2023) जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 पर मोदी सरकार का फैसला बरकरार रखा। उन्होंने उन याचिकाओं को खारिज कर दिया जो इसके विरोध में डाली गई थीं। कोर्ट ने आर्टिकल 370 को अस्थायी और मोदी सरकार के फैसले को सही बताया।

इसी के साथ सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश जारी करते हुए केंद्र सरकार से कहा कि जम्मू कश्मीर में जल्द से जल्द चुनाव करवाए जाएँ। ज्यादा दिन तक चुनावों को होल्ड नहीं किया जा सकता। 30 सितंबर 2024 से पहले राज्य में चुनाव होने चाहिए ताकि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्ज मिल सके।

कोर्ट ने कहा कि दो केंद्रशासित प्रदेश बनाने की आवश्यकता नहीं थी। जम्मू कश्मीर अस्थाई रूप से केंद्रशासित प्रदेश हैं इसे इसके राज्य होने का दर्जा मिलना चाहिए, रही बात लद्दाख की तो अभी के लिए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र का फैसला बरकरार रखा।

बार एंड बेंच की खबर के अनुसार, कोर्ट ने कहा है कि लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाएगा, लेकिन कब? इसके लिए अभी कोई समय निर्धारित नहीं है।

बता दें कि आर्टिकल 370 पर फैसला आने से पहले जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा को कड़ा कर दिया गया था। चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे। अराजकता फैलाने के लिए तो यहाँ तक फैलाया गया कि महबूबा मुफ्ती को हाउस अरेस्ट कर लिया गया है, लेकिन उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सामने आकर इस झूठ की पोल खोली। उन्होंने कहा कि भ्रामक खबरें न फैलाएँ न महबूबा मुफ्ती को हाउस अरेस्ट किया गया है और न उमर अब्दुल्ला को।

दशकों से वीरान मंदिरों में गूँज सकती है घंटा-घड़ियाल की ध्वनि, ASI संरक्षित स्मारकों में पूजा-पाठ की अनुमति देने की संसदीय समिति ने की पैरवी

देश के हजारों मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों में पूजा-अर्चना दोबारा चालू हो सकती है। इसके लिए संसद की एक समिति ने सरकार से एक्शन लेने को कहा है। समिति ने ऐसे मंदिरों एवं अन्य धार्मिक स्थलों में पूजा-पाठ दोबारा चालू करने के प्रयास करने के सुझाव दिए हैं जो वर्तमान में ‘भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण’ (ASI) की देखरेख में हैं।

समिति का कहना है कि देश भर के अलग-अलग हिस्सों में ASI संरक्षित हजारों ऐसे स्मारक या मंदिर मौजूद हैं जिनमें लोगों की अगाध आस्था है। ऐसे में उन्हें पूजा ना करने देना ठीक नहीं है। समिति का कहना है कि लोगों को पूजा का अधिकार देने से उनकी इच्छाएँ पूरी होंगी। यह सभी सुझाव YSR कॉन्ग्रेस के सांसद वी विजय साई रेड्डी की अध्यक्षता वाली टूरिज्म, ट्रांसपोर्ट और स्मारकों से सम्बंधित संसदीय समिति ने दिए हैं। इस समिति ने 6 दिसम्बर, 2023 को संसद में ‘भारत में संरक्षित स्मारकों और स्मारकों के संरक्षण से संबंधित मुद्दे’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में यह सुझाव दिए हैं।

दरअसल, ASI द्वारा सुरक्षा में लिए गए स्मारकों (मंदिरों/मस्जिदों/दरगाहों) में से बड़ी संख्या ऐसे स्मारकों की है जहाँ अभी पूजा-अर्चना की अनुमति नहीं है। इसके पीछे ASI का एक नियम है, जिसके अनुसार ASI अभी उन्हीं स्मारकों (जिनमें बड़ी संख्या में मंदिर शामिल हैं) में पूजा की अनुमति देता है जहाँ ASI को जिम्मेदारी मिलने के समय तक वहाँ ऐसा हो रहा हो।

उदाहरण के लिए ASI द्वारा संरक्षित लाल किले के भीतर स्थित मोती मस्जिद में नमाज होती है लेकिन गुजरात के सिधपुर में स्थित रूद्र महालय मंदिर में पूजा नहीं हो सकती। इसी तरह महाबलीपुरम, तमिलनाडु में स्थित विजय चोलेश्वरम मंदिर और अन्य कई ऐसे धार्मिक स्थलों में पूजा की अनुमति नहीं है। ASI का कहना है कि जो भी स्मारक उसे पूजा ना किए जाने की स्थिति में दिए गए वह निर्जीव माने जाते हैं और ऐसी स्थिति में पूजा -र्चना की अनुमति यहाँ नहीं दी जा सकती। ASI का कहना है कि वह ऐसा इसलिए करता है कि जर्जर अवस्था के इन स्मारकों की सुरक्षा की जा सके।

ऐसे में वह मंदिर या अन्य धार्मिक स्थल जहाँ ASI के चार्ज लेने पर पूजा-अर्चना ना हो रही हो, वहाँ नए सिरे से इसकी अनुमति नहीं दी जाती। अब समिति ने पर्यटन मंत्रालय से इस बात पर काम करने के लिए कहा है। पर्यटन मंत्रालय ने भी इस सुझाव को गंभीरता से लेने की बात कही है।

एक रिपोर्ट बताती है कि ASI वर्तमान में देश में 3693 स्मारकों की देखरेख करता है। इनमें से 2873 में पूजा/नमाज नहीं होती। हालाँकि, कई जगह पर स्थानीय लोगों की आस्थाएँ इन धार्मिक स्थलों से जुड़ी हैं, ऐसे में बराबर इसकी माँग होती रही है कि यहाँ पूजा की अनुमति दी जाए। जम्मू कश्मीर के अनंतनाग में 8वीं शताब्दी में बना मार्तण्ड सूर्य मंदिर ASI के पूजा की अनुमति ना देने का एक बड़ा उदाहरण है। बीते वर्ष कश्मीर में हालात सामान्य होने के बाद यहाँ पूजा चालू हुई थी। यहाँ जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी पूजा की थी।

इस मंदिर में पूजा होने के चलते ASI ने इस पर आपत्ति जताई थी, उसका कहना था कि यहाँ उसके चार्ज लेते समय पूजा नहीं हो रही थी, ऐसे में नए सिरे से इसे चालू नहीं किया जा सकता। हालाँकि, इस मंदिर में अब नियमित तौर पर पूजा होती है। अब अगर इस समिति के सुझावों पर अमल होता है तो बड़ी संख्या में ऐसे मंदिरों में घंटे-घड़ियालों की आवाज दुबारा सनाई देगी जहाँ दशकों और कहीं-कहीं सदियों से पूजा नहीं हुई है लेकिन उनका धार्मिक महत्व काफी बड़ा है।