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संसद से बर्खास्त होते ही सुप्रीम कोर्ट पहुँचीं महुआ मोइत्रा: कैश-तोहफे लेकर सवाल पूछने का मामला, पूर्व पार्टनर ने कारोबारी संग रिश्तों का किया था खुलासा

तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की पूर्व सांसद महुआ मोइत्रा ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। महुआ मोइत्रा को शुक्रवार (8 दिसम्बर, 2023) को लोकसभा ने उनके भ्रष्टाचारी आचरण के चलते सदस्यता से वंचित कर दिया था। अब उन्होंने इस निर्णय को देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

महुआ मोइत्रा पर दुबई में रहने वाले कारोबारी दर्शन हीरानंदानी से पैसे और महँगे गिफ्ट लेकर कारोबारी गौतम अडानी के विरुद्ध प्रश्न पूछने का आरोप 15 अक्टूबर को भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा स्पीकर को एक पत्र लिख कर लगाया था।

यह आरोप महुआ मोइत्रा के पूर्व पार्टनर और सुप्रीम कोर्ट में वकील जय अनंत देहाद्राई के हवाले से लगाए गए थे। बाद में दर्शन हीरानंदानी ने स्वयं यह स्वीकार किया था कि उन्होंने महुआ को महँगे तोहफे और पैसे दिए हैं। महुआ पर यह भी आरोप लगाया गया था कि उन्होंने अपने संसद पोर्टल की लॉगइन आईडी और पासवर्ड दर्शन हीरानंदानी को दिए।

इस बात को महुआ ने खुद भी स्वीकारा था। इस मामले की जाँच के लिए इसे लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने संसद की आचार समिति के पास भेज दिया था। आचार समिति ने दोनों पक्षों को सुन कर अपनी रिपोर्ट संसद को 8 दिसम्बर, 2023 को दी थी।

इस रिपोर्ट में महुआ पर लगे आरोपों को सही पाया गया था। महुआ के इस कदाचार के चलते समिति ने उन्हें लोकसभा की सदस्यता से बर्खास्त करने की सिफारिश की थी। इसके पश्चात 8 दिसम्बर, 2023 को ही इस रिपोर्ट के आधार पर महुआ की संसद सदस्यता रद्द कर दी गई थी। महुआ का कहना था कि उनका दर्शन हीरानंदानी से गिफ्ट और पैसे लेना भ्रष्टाचार नहीं है। अब महुआ ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के सामने अपील की है।

अभी महुआ की याचिका सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार की है या नहीं, यह सामने नहीं आया है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि महुआ का केस सुप्रीम कोर्ट में कौन लड़ रहा है।

2 धागे श्रीराम के… श्रद्धालुओं के बुने वस्त्र पहनेंगे रामलला: 4 लाख लोगों ने करा दिया है रजिस्ट्रेशन, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने की शुरुआत

अयोध्या में तैयार हो रहे प्रभु श्रीराम के मंदिर में मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा से पहले भगवान के कपड़े बुनने के लिए लाखों लोग आगे आ रहे हैं। इसके लिए ‘दो धागे श्रीराम के लिए’ नाम के एक अभियान की शुरुआत की गई है। इसके तहत 10 लाख लोग प्रभु श्रीराम के कपड़े बुनेंगे।

दरअसल, अयोध्या में बन रहे श्रीराम मंदिर की तैयारियाँ अंतिम चरणों में है। इसी के तहत ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ और पुणे की हथकरघा संस्था ‘हेरिटेज हैंडवीविंग रिवाइवल चैरिटेबल ट्रस्ट’ ने साथ मिल कर ‘दो धागे श्रीराम के लिए’ नाम का एक अभियान चलाया है।

इसके तहत जो भी श्रद्धालु प्रभु श्रीराम के कपड़े बुनना चाहते हैं, उन्हें यह मौक़ा दिया जाएगा। इसके लिए पुणे स्थित इस हथकरघा ट्रस्ट के कारखाने पर लोगों को वस्त्र बुनने के लिए आमंत्रित किया गया है। यह अभियान 10 दिसम्बर, 2023 से चालू होकर 22 दिसम्बर, 2023 तक चलेगा।

इसका शुभारम्भ केन्द्रीय बाल एवं महिला कल्याण तथा अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री स्मृति ईरानी ने पुणे में किया है। इस दौरान मंत्री स्मृति ईरानी ने खुद भी प्रभु श्रीराम के लिए कुछ कपड़े बुने। इस अभियान का लक्ष्य है कि उन लोगों को भी प्रभु की सेवा का अवसर मिले जो कि अभी तक किन्ही कारणों से इससे वंचित रहे हैं।

इस अभियान के प्रारम्भ होने पर हथकरघा ट्रस्ट की मुखिया अनघा घैसास ने कहा, “कोई यह सोच सकता है कि आखिर केवल दो धागों से क्या होगा? लेकिन जब लाखों लोग एक साथ आकर दो धागे बुनेंगे, तो तैयार कपड़ा एकता का प्रतीक होगा। इस पूरे अभियान के पीछे का लक्ष्य है कि हिन्दू एक साथ आएँ।”

उन्होंने आगे बताया, “लगभग 3.5-4 लाख लोगों ने इस अभियान में सहभागिता के लिए ऑनलाइन पंजीकरण करवाया है। सभी के मन में प्रभु श्रीराम के लिए कुछ करने की भावना है। वो यहाँ आकर दो धागे बुन सकते हैं। इस काम के लिए जरी और रेशम के धागों का उपयोग किया जा रहा है। यहाँ तैयार वस्त्रों को प्रभु श्रीराम धारण करेंगे।”

गौरतलब है कि अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर बन रहे मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी, 2024 को की जाएगी जिसके लिए तैयारियाँ अंतिम चरणों में हैं। मंदिर के निर्माण का काम भी लगभग पूरा हो गया है। हाल ही में इसके गर्भगृह की नई तस्वीरें सामने आई हैं। इस पूरे कार्यक्रम के लिए अयोध्या शहर को भी सजाया जा रहा है। इस प्राण प्रतिष्ठा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी शामिल होंगे।

‘अब तक ₹354 करोड़, ₹1000 करोड़ मिलने का चांस’: जहाँ खोद रही IT, वहीं मिल रहा कॉन्ग्रेस MP धीरज साहू के नोटों का पहाड़, 60 किलो सोना भी

11 दिसंबर 2023 आयकर विभाग (IT Raid) की छापेमारी का छठा दिन है। लेकिन कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद धीरज साहू के ठिकानों से मिले अकूत नकद की गिनती पूरी नहीं हो पाई है। अध्यक्ष जेपी नड्डा के नेतृत्व में बीजेपी ने कॉन्ग्रेस नेता के इस करप्शन के खिलाफ प्रदर्शन भी किया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि साहू के यहाँ से अब तक 354 करोड़ रुपए जब्त किए जा चुके हैं। यह बढ़कर 500-1000 करोड़ रुपए हो सकता है।

साहू के ठिकानों से अब तक कितने पैसे मिले हैं, इसको लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। मीडिया रिपोर्टों में इसको लेकर अलग-अलग दावे हैं। कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि अब तक करीब 350 करोड़ रुपए की गिनती हो चुकी है। कनक न्यूज के अनुसार 454 करोड़ नकद और 60 किलो सोना बरामद हुआ है। प्रभात खबर ने बताया है कि अब तक नोटों से भरे 176 बैग गिनती के लिए बैंक में लाए गए हैं। इनमें से 140 की गिनती पूरी कर ली गई है। रिपोर्ट के अनुसार 40 मशीनें नोट गिन रही हैं। पूर्व में नोट गिनते-गिनते मशीनों के खराब होने की रिपोर्टें भी आ चुकी हैं।

छापेमारी में ओडिशा के बोलांगीर के अलावा सम्बलपुर से भी आयकर की टीमों ने बड़ी बरामदगी की है। जानकारी के अनुसार, धीरज साहू से जुड़ी बौध डिस्टलरीज प्राइवेट लिमिटेड की बोलांगीर स्थित शाखा से ही सबसे ज्यादा नकदी बरामद हुई है। रिपोर्ट्स में बताया गया है कि अभी तक की गिनती में ₹400 करोड़ बोलांगीर, ₹37.5 करोड़ संबलपुर और 11 करोड़ की बरामदगी टीटागढ़ से हुई है। यह पैसा 30 अलमारियों में और बैग में रखा हुआ था।

बोलांगीर में जब्त धनराशि 176 बैग में भर कर स्टेट बैंक की शाखा में लाई गई थी। गिनती के लिए कई शाखाओं से कर्मचारी बुलाए गए हैं। यहाँ नोटों की संख्या अधिक होने कारण जिले भर से नोट गिनने वाली मशीनें भी लाई गईं हैं।

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद और शराब कारोबारी धीरज साहू के ठिकानों पर 6 दिसम्बर 2023) से छापेमारी चल रही है। छापेमारी झारखंड के लोहरदगा और राँची, बंगाल के कोलकाता और टीटागढ़ और ओडिशा में बोलांगीर तथा संबलपुर में हुई है। इसके अलावा कुछ अन्य स्थानों पर भी टीम पहुँची थी।

उल्लेखनीय है कॉन्ग्रेस सांसद धीरज प्रसाद साहू और उनके रिश्तेदारों का शराब का बड़ा कारोबार है। बलदेव साहू एंड ग्रुप ऑफ कंपनीज मूल रूप देशी शराब बनाने का काम करती है। इस धंधे में कंपनी करीब चार दशक से है। कंपनी का नाम धीरज साहू के पिता बदलेव साहू के नाम पर है। कॉन्ग्रेस सांसद के अलावा उनके परिवार के अन्य सदस्य भी कंपनी में शामिल हैं।

साहू का यह राज्यसभा में तीसरा कार्यकाल है। पहली बार वे जून 2009 में चुनकर आए। फिर 2010 और उसके बाद 2018 में तीसरी बार संसद के उच्च सदन में पहुँचे। वे झारखंड की चतरा सीट से दो बार लोकसभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं। पर दोनों ही बार उन्हें हार मिली।

इतनी बड़ी मात्रा में नकद मिलना इसलिए भी चौंकाता है, क्योंकि 2018 के चुनावी हलफनामे में साहू ने अपने ऊपर 2.36 करोड़ रुपए का कर्ज बताया था। कुल संपत्ति 34 करोड़ बताई थी। 2016-17 में जो इनकम टैक्स रिटर्न भरा था, उसमें अपनी आमदनी एक करोड़ रुपए से कुछ ही अधिक बताई थी।

सितंबर 2024 तक जम्मू-कश्मीर में हो विधानसभा चुनाव, जल्द बहाल हो राज्य का दर्जा: सुप्रीम कोर्ट ने 370 हटाने पर भी लगाया ठप्पा

सुप्रीम कोर्ट की पाँच सदस्यीय पीठ ने आज (11 दिसंबर 2023) जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 पर मोदी सरकार का फैसला बरकरार रखा। उन्होंने उन याचिकाओं को खारिज कर दिया जो इसके विरोध में डाली गई थीं। कोर्ट ने आर्टिकल 370 को अस्थायी और मोदी सरकार के फैसले को सही बताया।

इसी के साथ सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश जारी करते हुए केंद्र सरकार से कहा कि जम्मू कश्मीर में जल्द से जल्द चुनाव करवाए जाएँ। ज्यादा दिन तक चुनावों को होल्ड नहीं किया जा सकता। 30 सितंबर 2024 से पहले राज्य में चुनाव होने चाहिए ताकि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्ज मिल सके।

कोर्ट ने कहा कि दो केंद्रशासित प्रदेश बनाने की आवश्यकता नहीं थी। जम्मू कश्मीर अस्थाई रूप से केंद्रशासित प्रदेश हैं इसे इसके राज्य होने का दर्जा मिलना चाहिए, रही बात लद्दाख की तो अभी के लिए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र का फैसला बरकरार रखा।

बार एंड बेंच की खबर के अनुसार, कोर्ट ने कहा है कि लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाएगा, लेकिन कब? इसके लिए अभी कोई समय निर्धारित नहीं है।

बता दें कि आर्टिकल 370 पर फैसला आने से पहले जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा को कड़ा कर दिया गया था। चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे। अराजकता फैलाने के लिए तो यहाँ तक फैलाया गया कि महबूबा मुफ्ती को हाउस अरेस्ट कर लिया गया है, लेकिन उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सामने आकर इस झूठ की पोल खोली। उन्होंने कहा कि भ्रामक खबरें न फैलाएँ न महबूबा मुफ्ती को हाउस अरेस्ट किया गया है और न उमर अब्दुल्ला को।

दशकों से वीरान मंदिरों में गूँज सकती है घंटा-घड़ियाल की ध्वनि, ASI संरक्षित स्मारकों में पूजा-पाठ की अनुमति देने की संसदीय समिति ने की पैरवी

देश के हजारों मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों में पूजा-अर्चना दोबारा चालू हो सकती है। इसके लिए संसद की एक समिति ने सरकार से एक्शन लेने को कहा है। समिति ने ऐसे मंदिरों एवं अन्य धार्मिक स्थलों में पूजा-पाठ दोबारा चालू करने के प्रयास करने के सुझाव दिए हैं जो वर्तमान में ‘भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण’ (ASI) की देखरेख में हैं।

समिति का कहना है कि देश भर के अलग-अलग हिस्सों में ASI संरक्षित हजारों ऐसे स्मारक या मंदिर मौजूद हैं जिनमें लोगों की अगाध आस्था है। ऐसे में उन्हें पूजा ना करने देना ठीक नहीं है। समिति का कहना है कि लोगों को पूजा का अधिकार देने से उनकी इच्छाएँ पूरी होंगी। यह सभी सुझाव YSR कॉन्ग्रेस के सांसद वी विजय साई रेड्डी की अध्यक्षता वाली टूरिज्म, ट्रांसपोर्ट और स्मारकों से सम्बंधित संसदीय समिति ने दिए हैं। इस समिति ने 6 दिसम्बर, 2023 को संसद में ‘भारत में संरक्षित स्मारकों और स्मारकों के संरक्षण से संबंधित मुद्दे’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में यह सुझाव दिए हैं।

दरअसल, ASI द्वारा सुरक्षा में लिए गए स्मारकों (मंदिरों/मस्जिदों/दरगाहों) में से बड़ी संख्या ऐसे स्मारकों की है जहाँ अभी पूजा-अर्चना की अनुमति नहीं है। इसके पीछे ASI का एक नियम है, जिसके अनुसार ASI अभी उन्हीं स्मारकों (जिनमें बड़ी संख्या में मंदिर शामिल हैं) में पूजा की अनुमति देता है जहाँ ASI को जिम्मेदारी मिलने के समय तक वहाँ ऐसा हो रहा हो।

उदाहरण के लिए ASI द्वारा संरक्षित लाल किले के भीतर स्थित मोती मस्जिद में नमाज होती है लेकिन गुजरात के सिधपुर में स्थित रूद्र महालय मंदिर में पूजा नहीं हो सकती। इसी तरह महाबलीपुरम, तमिलनाडु में स्थित विजय चोलेश्वरम मंदिर और अन्य कई ऐसे धार्मिक स्थलों में पूजा की अनुमति नहीं है। ASI का कहना है कि जो भी स्मारक उसे पूजा ना किए जाने की स्थिति में दिए गए वह निर्जीव माने जाते हैं और ऐसी स्थिति में पूजा -र्चना की अनुमति यहाँ नहीं दी जा सकती। ASI का कहना है कि वह ऐसा इसलिए करता है कि जर्जर अवस्था के इन स्मारकों की सुरक्षा की जा सके।

ऐसे में वह मंदिर या अन्य धार्मिक स्थल जहाँ ASI के चार्ज लेने पर पूजा-अर्चना ना हो रही हो, वहाँ नए सिरे से इसकी अनुमति नहीं दी जाती। अब समिति ने पर्यटन मंत्रालय से इस बात पर काम करने के लिए कहा है। पर्यटन मंत्रालय ने भी इस सुझाव को गंभीरता से लेने की बात कही है।

एक रिपोर्ट बताती है कि ASI वर्तमान में देश में 3693 स्मारकों की देखरेख करता है। इनमें से 2873 में पूजा/नमाज नहीं होती। हालाँकि, कई जगह पर स्थानीय लोगों की आस्थाएँ इन धार्मिक स्थलों से जुड़ी हैं, ऐसे में बराबर इसकी माँग होती रही है कि यहाँ पूजा की अनुमति दी जाए। जम्मू कश्मीर के अनंतनाग में 8वीं शताब्दी में बना मार्तण्ड सूर्य मंदिर ASI के पूजा की अनुमति ना देने का एक बड़ा उदाहरण है। बीते वर्ष कश्मीर में हालात सामान्य होने के बाद यहाँ पूजा चालू हुई थी। यहाँ जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी पूजा की थी।

इस मंदिर में पूजा होने के चलते ASI ने इस पर आपत्ति जताई थी, उसका कहना था कि यहाँ उसके चार्ज लेते समय पूजा नहीं हो रही थी, ऐसे में नए सिरे से इसे चालू नहीं किया जा सकता। हालाँकि, इस मंदिर में अब नियमित तौर पर पूजा होती है। अब अगर इस समिति के सुझावों पर अमल होता है तो बड़ी संख्या में ऐसे मंदिरों में घंटे-घड़ियालों की आवाज दुबारा सनाई देगी जहाँ दशकों और कहीं-कहीं सदियों से पूजा नहीं हुई है लेकिन उनका धार्मिक महत्व काफी बड़ा है।

जम्मू-कश्मीर में अब नहीं लौटेंगे 370 के दिन: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- अस्थायी था प्रावधान, मोदी सरकार का फैसला सही

जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर आज (11 दिसंबर 2023) सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। 5 जजों की संविधान पीठ की अध्यक्षता करने वाले मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने बताया कि 5 जजों की बेंच ने तीन अलग-अलग फैसले लिए हैं, लेकिन उनका निष्कर्ष एक ही है।

फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 370 को हटाने को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं की दलीलें खारिज कर दीं। कहा गया कि जम्मू-कश्मी भारत का अभिन्न अंग है। ऐसे में नियम है कि केंद्र राष्ट्रपति शासन के तहत राज्य सरकार की शक्ति का प्रयोग कर सकता है और संसद/राष्ट्रपति उद्घोषणा के तहत राज्य की विधायी शक्तियों का प्रयोग कर सकता है।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि आर्टिकल 370 सिर्फ शुरुआती व्यवस्था थी जो युद्ध स्थिति में शुरू की गई थी। लिखित सामग्री भी बताती हैं कि ये अस्थायी व्यवस्था थी। ऐसे में इसे हटाना गलत नहीं।

2019 से चल रही थी सुनवाई

इस मामले पर सुनवाई 2019 से चल रही थी लेकिन 2020 में इसपर कोई फैसला नहीं आया। 3 जुलाई 2023 को फिर नई संविधान पीठ का गठन करके इसपर सुनवाई शुरू हुई। इस बार अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने की। पीठ में जस्टिस एसके कौल, जस्टिस बीआर गवई जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस संजीव खन्ना भी रहे। 2 अगस्त 2023 से 5 सितंबर 2023 तक चली सुनवाई में सु्प्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया और आज इसे सार्वजनिक किया गया

इन याचिकाओं को डालने वालों में वकील शोएब कुरैशी, मुजफ्फर इकबाल खान, रिफत आरा बट, शाकिर शब्बीर, नेशनल कान्फ्रेंस के सांसद मोहम्मद अकबर लोन, हसनैन मसूदी, सीपीआई नेता मोहम्मद यूसुफ तारिगामी, इंद्रजीत टिक्कू, पत्रकार सतीश जैकब, पूर्व एयर वाइस मार्शल कपिल काक, पूर्व आईएएस हिंडाल हैदर तैयबजी, रिटायर्ड मेजर जनरल अशोक मेहता, अमिताभ पांडे, गोपाल पिल्लई के साथ ही पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज, जम्मू कश्मीर बार एसोसिएशन, जम्मू कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस जैसे राजनीतिक और गैर राजनीतिक संगठन भी शामिल हैं।

‘आप बस इन्हें MLA बनाओ, बड़ा पद हम देंगे’ : अमित शाह ने विष्णुदेव साय को लेकर चुनाव से पहले कर दिया था इशारा, छत्तीसगढ़ जीतकर पूरा किया वादा

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की बंपर जीत के बाद भाजपा ने मुख्यमंत्री पद के लिए विष्णुदेव साय के नाम का ऐलान किया। वह जल्द ही बतौर प्रदेश सीएम शपथ लेंगे। उनके नाम की घोषणा होने के बाद उन्होंने बलिदानी वीर नारायण सिंह की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी और फिर कहा कि भाजपा हकीकत में जनजातीय समुदाय की परवाह करती है। कॉन्ग्रेस ने तो बस एक वोट बैंक की तरह उनका इस्तेमाल करती हैं।

बता दें कि छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय जनजातीय समुदाय से आने वाले दूसरे मुख्यमंत्री हैं। भाजपा के इस फैसले से भले ही जनजातीय समुदाय में जितना खुशी का माहौल हो और विपक्ष को झटका लगा हो… लेकिन हकीकत तो यह है कि भाजपा ने पहले ही इशारा कर दिया था कि अगर उनकी सरकार बनी तो इस बार मुख्यमंत्री पद किसे मिलेगा।

छत्तीसगढ़ में एक चुनावी रैली के वक्त उन्होंने विष्णुदेव साय की ओर इशारा करते हुए मतदाताओं से अपील की थी कहा था कि कि वो विष्णुदेव साय को आगामी विधानसभा चुनाव में विजयी बनाएं, बाकी का काम उनका है। अमित शाह ने कहा था, “आप इनको विधायक बना दो, उनको बड़ा आदमी बनाने का काम हम करेंगे।’ अमित शाह ने अपना वादा निभाया। वैसे, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के तौर पर भले ही अब उनके नाम पर मुहर लगी हो, लेकिन भारतीय जनता पार्टी का आलाकमान पहले ही तय कर चुका था कि विष्णुदेव साय को ही वो छत्तीसगढ़ जैसे जनजातीय बहुल राज्य का चेहरा बनाने वाला है।

उल्लेखनीय है कि विष्णुदेव साय 4 बार सांसद रहे हैं। वो नरेंद्र मोदी सरकार की पहली सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रहे थे। साल 2016 में उनका पोर्टफोलियो भी बढ़ाया गया। लेकिन साल 2019 के लोकसभा चुनाव में उनकी जगह रायगढ़ लोकसभा सीट से गोमती साय को उम्मीदवार बना दिया गया। विष्णुदेव साय ने आलाकमान का कोई विरोध नहीं किया, बल्कि वो आलाकमान के हर फैसले के साथ रहे।

नतीजन उन्हें साल 2020 में छत्तीसगढ़ भाजपा की कमान सौंप दी गई। विष्णुदेव साय को लेकन भारतीय जनता पार्टी का आलाकमान (मोदी और शाह की जोड़ी) पहले से ही नपे-तुले फैसले ले रही थी। विष्णुदेव साय अपनी उपयोगिता साबित करते रहे। उन्होंने छत्तीसगढ़ में सबसे वोटर वर्ग के नेता को साल 2022 में प्रदेश अध्यक्ष पद सौंप दिया। और खामोशी से वो सरगुजा संभाग में अपने काम में जुटे रहे। उनके नेतृत्व में भाजपा ने सरगुजा संभाग की सभी 14 में से 14 विधानसभा सीटों पर क्लीन स्वीप किया। अब बारी हाईकमान की थी कि अमित शाह ने छत्तीसगढ़ की जनता से जो वादा किया था, वो पूरा किया जाता। इसे आलाकमान ने अब पूरा किया है।

खास बात ये है कि विधायकों की बैठक के दौरान खुद तीन बार के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा। वो रायपुर से लेकर नई दिल्ली तक भाजपा की हर टीम के गुड बुक में रहे हैं। अब वो छत्तीसगढ़ के चौथे और कुल दूसरे आदिवासी मुख्यमंत्री बन रहे हैं। बता दें कि विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने कॉन्ग्रेस का पूरी तरह से सफाया कर दिया। कॉन्ग्रेस सरकार के कई महत्वपूर्ण मंत्री चुनाव तक हार गए। विधानसभा चुनाव के नतीजे 3 दिसंबर को घोषित किए गए, लेकिन विष्णुदेव साय को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला पूरे एक सप्ताह बाद आया। इस दौरान छत्तीसगढ़ में भाजपा के विधायकों की तरफ से आलाकमान के हर फैसले को माना गया और नतीजा ये है कि छत्तीसगढ़ एक बार फिर से भाजपा का अभेद्य किला बनकर उभरा है।

‘सारी जगह मुस्लिम भाइयों की, खाली करो नहीं तो बम से उड़ा देंगे’: राजस्थान के एक और दर्जी को कन्हैया लाल जैसी धमकी

राजस्थान में हुए कन्हैयालाल हत्याकांड के बाद एक टेलर सोहन लाल जाटव को भी जान से मारने की धमकी दी गई है। उन्हें प्राप्त पत्र में कहा गया है कि उनकी दर्जी की दुकान को अगर उन्होंने खाली नहीं किया तो उन्हें बम से उड़ा दिया जाएगा। ये पत्र पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के नाम से भेजा गया है।

मामला अलवर स्थित सदर थाना क्षेत्र के चिकानी गाँव का है। पीड़ित ने इस संबंध में गुरुवार(7 दिसंबर 2023) को केस दर्ज कराया। शिकायत में उन्होंने कहा कि 13 नवंबर को उन्हें डाक से एक पत्र मिला था जिसमें उन्हें दुकान खाली करने को कहा गया।

सोहन लाल जाटव ने इस संबंध में बताया कि उन्होंने दुकान की जमीन 1971 में खरीदी थी। तब से उनका किसी से कोई विवाद नहीं हुआ। बहुत पहले रती मोहम्मद नाम के शख्स से उनकी अनबन हुई थी लेकिन बाद में मामला सुलझ गया था और उसके बाद से उनका किसी से झगड़ा नहीं हुआ। लेकिन 25 दिन पहले फिर उन्हें एक पत्र मिला…

पत्र में लिखा था, “मेरी बात अच्छी तरह समझ, यह तेरी दुकान है। यह जगह मुसलमान की है, यह जो सरदार की दुकान है और रोहतास कुमार की दुकान है, सरपंच और आस मोहम्मद के लोगों ने बताया है कि यह सारी जगह मुस्लिम भाइयों की है और तुमने कब्जा किया हुआ है। मैं अभी शराफत से बोल रहा हूँ, अभी जगह की सही कीमत लो और खाली करो, मैं कौन हूँ…PFI… 31 दिसंबर तक का समय दे रहा हूँ, नहीं तो PFI को दुनिया जानती है, एक रात में बम से सब नष्ट कर दूँगा।”

सोहन लाल जाटव से जब पूछा गया कि उन्होंने इस पत्र को लेकर इतने समय बाद जानकारी क्यों दी तो इस पर वह बोले कि 25 दिन पहले यह पत्र डाक से मिला था। लेकिन विधानसभा चुनाव में माहौल नहीं बिगड़े, इसलिए वे चुप रहे। नतीजों के बाद 7 दिसंबर को अलवर सदर पुलिस थाने में पहुँचकर उन्होंने अपनी शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस थाना अधिकारी दिनेश मीणा ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर जाँच शुरू कर दी गई है।

याद दिला दें साल 2022 में राजस्थान के उदयपुर में कन्हैयालाल नाम के दर्जी को इस्लामी कट्टरपंथियों ने दुकान में घुस मौत के घाट उतारा था। कन्हैयालाल की गलती बस इतनी थी कि उन्होंने नुपूर शर्मा को समर्थन दिया था। इसी के बाद उन्हें धमकी आई। कई दिन उन्होंने अपनी दुकान बंद भी रखी, जब उन्हें लगा जब सुलझ गया है तभी कट्टरपंथियों ने घटना को अंजाम दिया था।

कर्नाटक में कभी भी गिर सकती है कॉन्ग्रेस सरकार, होगा महाराष्ट्र जैसा हाल: पूर्व मुख्यमंत्री कुमारस्वामी का दावा, बोले- 50 से 60 विधायक होंगे BJP में शामिल

कर्नाटक में कॉन्ग्रेस की सरकार गिर सकती है। ऐसा दावा किया है जनता दल (सेक्युलर) के नेता एच डी कुमारस्वामी ने। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री ने रविवार (दिसंबर 10, 2023) को दावा किया कि कर्नाटक में कॉन्ग्रेस सरकार के एक प्रभावशाली कॉन्ग्रेस मंत्री 50-60 विधायकों के साथ पार्टी छोड़ सकते हैं और भाजपा का दामन थाम सकते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, JDS नेता ने कहा, “कर्नाटक में कॉन्ग्रेस सरकार में सब कुछ ठीक नहीं है। मुझे नहीं पता कि यह सरकार कब गिरेगी। एक प्रभावशाली मंत्री अपने खिलाफ मुकदमों से बचने के लिए बेताब है। केंद्र ने उनके खिलाफ ऐसे मुकदमे दर्ज किए हैं, जिनमें बचने की कोई संभावना नहीं है।”

उन्होंने कहा कि प्रदेश में महाराष्ट्र की तरह कुछ भी हो सकता है। जब उनसे उस प्रभावशाली नेता का नाम पूछा गया तो उन्होंने बस इतना इशारा किया कि छोटे नेताओं से ऐसे कदम की उम्मीद नहीं की जा सकती। केवल प्रभावशाली नेता ही ये कदम उठाएँगे।

बता दें कि इससे पहले भी कुमारस्वामी ने स्थिर सरकार को टिप्पणी की थी। उन्होंने 5 दिसंबर को भी कहा था- “इस देश में अब स्थिति यह है कि हर कोई महसूस करता है कि एक स्थिर सरकार की आवश्यकता है। मुझे लगता है कि 5 राज्यों के चुनाव में लोगों का मन ऐसा ही था… इस समय, हमें स्थिर सरकार और स्थिर नेतृत्व की आवश्यकता है और इसी कारण से हम NDA में शामिल हुए हैं।”

बता दें कि महाराष्ट्र में पिछले साल उद्धव ठाकरे की सरकार गिरी थी और एकनाथ शिंदे के भाजपा के साथ मिलने पर राज्य में एनडीए की सरकार बनी थी।

जुम्मे की नमाज के लिए राज्य सभा से खत्म हुआ 30 मिनट का समय, चल रहा था 60-70 साल से: पूरे संसद में एक जैसा नियम

तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी डीएमके के सांसदों ने 8 दिसंबर 2023 को राज्यसभा में मुस्लिम सांसदों के लिए जुम्मे की नमाज के ब्रेक का मुद्दा उठाया। इस पर उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने बताया कि 60-70 साल से चले आ रहे नियम में बदलाव हो चुका है। लोकसभा की तरह अब राज्यसभा में ये ब्रेक नहीं दिया जाएगा।

ये पूरा मामला 8 दिसंबर 2023 का है। जब राज्यसभा में जीरो ऑवर चल रहा था और सांसद अपने सवालों के जवाब पूछ रहे थे। तभी डीएमके के सांसद तिरुची शिवा ने हस्तक्षेप किया। उप राष्ट्रपति जयदीप धनखड़, जो राज्यसभा के सभापति भी हैं, वो सदन में पीठाधीन थे। तिरुची शिवा को सभापति ने बोलने का अवसर दिया, तो उन्होंने शुक्रवार के दिन राज्यसभा के कामकाज की समयसीमा को लेकर सवाल पूछा।

डीएमके सांसद तिरुची शिवा ने कहा, “सामान्य तौर पर शुक्रवार के दिन सभा का कामकाज लंच ब्रेक के बाद 2.30 बजे शुरू होता है, लेकिन आज के संशोधित कार्यक्रम के अनुसार ये 2 बजे से ही है। इस बारे में निर्णय कब लिया गया? इस बारे में सदन के सदस्य नहीं जानते, ये बदलाव क्यों हुआ?”

इस सवाल के जवाब में सभापति ने कहा, “सम्माननीय सदस्यगण, ये बदलाव आज से नहीं है। ये बदलाव पहले ही मेरे द्वारा किया जा चुका है, इसकी वजह भी बताई जा चुकी है। लोकसभा में कार्यवाही 2 बजे से होती है। लोकसभा और राज्यसभा दोनों ही संसद का हिस्सा हैं। दोनों के ही काम के समय में समानता हो, इसलिए मैंने पहले ही इस बारे में नियम बना दिए थे। ये कोई पहली बार नहीं है।”

इसके बाद सभापति ने आप सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी को अपना मुद्दा सदन के पटल पर रखने को कहा, जैसे ही वो बोलने के लिए खड़े हुए, तभी डीएमके के मुस्लिम राज्यसभा सांसद एम. मोहम्मद अब्दुल्ला ने हंगामा मचाने की कोशिश की। हालाँकि उप राष्ट्रपति ने सभी सदस्यों को शांत कर दिया और मोहम्मद अब्दुल्ला को बोलने के लिए कहा।

मोहम्मद अब्दुल्ला ने कहा, ‘ये पिछले 60-70 सालों का रिवाज (शुक्रवार को 2.30 बजे से सदन की कार्यवाही) है’। इसके बाद हंगामे की स्थिति बनती है, लेकिन उपराष्ट्रपति सबको शांत करा देते हैं, और फिर अब्दुल्ला को बोलने के लिए कहते हैं, जिसके बाद अब्दुल्ला कहते हैं, “सर, 2.30 बजे का समय पहले से निर्धारित है, मुस्लिम सदस्यों के लिए उनके जुम्मा (शुक्रवार) के लिए। यही परंपरा है।” इसके बाद सभापति ने उन्हें रोका और कहा कि वो समझ गए हैं।

सभापति ने कहा, “मैं आपका मतलब समझ गया। आप सभी लोग शांत रहें। माननीय सदस्यगण, लोकसभा और राज्यसभा दोनों ही सदन के सदस्य समाज के सभी वर्गों से आते हैं। लोकसभा 2.00 बजे दोपहर में बैठती है, जिसमें सभी वर्गों के सदस्य हैं। मैंने उसी तर्ज पर पिछले साल ही इस बारे में नियम बना दिए थे, जिसमें लंच ब्रेक के बाद सदन की कार्यवाही 2.00 बजे से शुरू करनी थी। ठीक लोकसभा की तर्ज पर।” इसके बाद उन्होंने विक्रमजीत सिंह साहनी को बोलने के लिए समय दे दिया और डीएमके-इंडी अलायंस के प्रोपेगेंडा की हवा निकालते हुए सदन की कार्यवाही सुचारू रुप से जारी रखी।

देखें सदन की कार्यवाही का वीडियो, जिसमें शुरुआती 20 सेकंड के बाद ही ये मुद्दा उठा है।

उपराष्ट्रपति ने कम ही शब्दों में सभी को समझा दिया कि ये संसद का सदन है। दोनों सदनों की कार्यवाही का समय एक बराबर है। किसी को लोकसभा में समस्या नहीं है, तो यहाँ अब कैसे होने वाली है? ये नियम भी आज का नहीं बना, बल्कि पिछले साल का ही बना है। अभी तक किसी को कोई समस्या नहीं हुई।

खास बात ये है कि राज्यसभा में ये मुद्दा उठा कौन रहा है? डीएमके के ही दोनों सांसद, जिनकी पार्टी खुलेआम सनातन का विरोध करती है और वो इंडी अलायंस का प्रमुख सहयोगी दल भी है। ऐसे में उप राष्ट्रपति ने एक ऐसे मामले की हवा तुरंत ही निकाल दी, जिसे इंडी अलायंस बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही थी।