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‘हो गई गलती… अब क्या मर जाऊँ?’ – श्रृद्धा के 35 टुकड़े करने वाले आफताब को कोई पछतावा नहीं, माँगता है बिसलेरी का पानी और नए कपड़े

पालघर की रहने वाली श्रद्धा वाकर को मार कर 35 टुकड़ों में फेंक देने वाले आफताब अमीन पूनावाला को अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है। वह जेल में आज कल श्रद्धा की हत्या में दाखिल की गई 6 हजार से अधिक पन्नों की चार्जशीट को पढ़ कर अपना समय निकाल रहा है।

जेल अधिकारियों का कहना है कि आफताब को गिरफ्तार हुए लगभग एक वर्ष हो गया है लेकिन उसने कभी भी श्रद्धा की हत्या पर कोई पछतावा नहीं जताया। उससे जेल में उसके परिवार से भी कोई मिलने नहीं आता। इस मामले में जाँच अधिकारी रहे राम सिंह ने भास्कर को बताया कि आफताब मुंबई पुलिस को भी पूछताछ में गुमराह करता रहा था।

जाँच अधिकारी सिंह का कहना है कि आफताब गुस्सैल भी है। उसने आज तक इस बात पर दुख नहीं जताया कि उसने श्रद्धा की हत्या करके जान ले ली। उसने जाँच के दौरान एक दिन कहा था:

“हाँ, मुझसे गलती हुई, हो गई मुझसे गलती। अब क्या मर जाऊँ?”

आफताब ने 18 मई 2022 को श्रद्धा को मार दिया था और उसकी लाश के 35 अलग-अलग टुकड़े करके फ्रिज में स्टोर किया था। बाद में इन्हें उसने दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में फेंके थे। उसने श्रद्धा की हड्डियों तक को पीस दिया था और रोड पर फेंक दिया था। उसे दिल्ली पुलिस ने 14 नवम्बर को श्रद्धा के पिता की शिकायत के आधार पर गिरफ्तार किया था

इतने खौफनाक वारदात को अंजाम देने वाले आफताब को अपने इस घिनौने काम पर कोई पछतावा नहीं है। हिंदी समाचार वेबसाइट दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट बताती है कि वह तिहाड़ की जेल नम्बर 4 की 15 नम्बर सेल में चुपचाप रहता है। वह यहाँ चार्जशीट पढ़ता रहता है। वह कभी-कभार बोतलबंद पानी भी माँगता है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट से सामने आया है कि आफताब को 5 दिसम्बर 2023 को दिल्ली की एक अदालत में पेश किया गया था। कोर्ट वर्तमान में इस मामले की सुनवाई करते हुए 3 गवाहों के बयान दर्ज कर रहा था। इसमें वह डॉक्टर भी शामिल है, जिन्होंने श्रद्धा के शरीर के हिस्सों का पोस्टमॉर्टम किया था।

बताया जा रहा है कि आफ़ताब जब से जेल पहुँचा है, तब से उसका 15 किलोग्राम वजन घट गया है। साकेत कोर्ट में बनाए गए लॉकअप में वह कुछ खाता भी नहीं है। वह केवल अपने साथ ले गए बिस्किट खाकर ही काम चलाता है। उसे डर है कि उसके खाने में जहर मिला दिया जाएगा। यह जानकारी आफताब पर नजर बनाए रखने वाले एक अधिकारी ने दी है।

वह जेल के अंदर बोतलबंद पानी और नए कपड़े माँगता रहता है। हालाँकि, जेल के नियमों के अनुसार उसे इनमें से कोई भी सुविधा उपलब्ध नहीं करवाई जाती है। जेल में उसे वही चीजें उपलब्ध करवाई जाती हैं, जो अन्य कैदियों को दी जाती हैं।

आफताब इसलिए अपने खाने में जहर मिलाए जाने की आशंका जताता है क्योंकि जब उसे पहली बार कोर्ट लाया गया था, तब वकीलों ने उसकी पिटाई कर दी थी। उसे जेल में भी अन्य कैदियों ने मारा था। इसीलिए वह तब से डरा हुआ है।

जेल में आने के बाद आफ़ताब ने एक बार टेलीफोन के माध्यम से केवल अपने पिता से बात की है। इसके अलावा ना ही उसने किसी से फ़ोन पर बात की है, ना उससे कोई मिलने आया है। इस मामले में वकील सीमा कुशवाहा का कहना है कि आफ़ताब सुनवाई को लटकाने का प्रयास भी कर रहा है।

उसने अब तक तीन वकील बदले हैं। वर्तमान में अक्षय भंडारी नाम का एक वकील आफताब का केस लड़ रहा है। जब भी नया वकील आता है तो वह सुनवाई में यह कहता है कि उसे चार्जशीट पढ़ने और केस को समझने के लिए थोड़ा समय चाहिए, इसी कारण से सुनवाई में देर हो रही है।

गाय के गोबर से चला रॉकेट इंजन: आग की लपटें 30 से 50 फीट तक, जापान की कंपनी अन्तरिक्ष कार्यक्रम की दिशा बदलने की तैयारी में

जापान की एक कम्पनी ने गाय के गोबर से बने ईंधन से रॉकेट इंजन को चलाने में सफलता पाई है। गोबर से बने ईंधन से चलाया जा रहा रॉकेट टेस्टिंग के दौरान ना केवल चालू हुआ बल्कि इसने जमीन के समानांतर लगभग 15 मीटर की दूरी तक आग की लपटें भी फेंकी। अब इसे विकसित करने वाली कम्पनी और भी बड़ा रॉकेट बनाने जा रही है।

एक वेबसाईट बैरन के अनुसार, जापान के एक अन्तरिक्ष स्टार्टअप इंटरस्टेलर टेक्नोलॉजीस (Interstellar Technologies) कम्पनी ने यह रॉकेट बनाया है। इसकी प्रायोगिक टेस्टिंग जापान के ताईकी शहर में की गई। इस दौरान रॉकेट के इंजन से तेज नीली-ऑरेंज आग निकली। आग की तीव्रता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जमीन के समानांतर लगभग 10-15 मीटर (30 से 50 फीट) की दूरी तक इसकी लपटें निकलीं।

रॉकेट की प्रायोगिक टेस्टिंग में जो ईंधन इसमें डाला गया था, वह बायोमीथेन था। इसे पूरी तरह से गाय के गोबर से बनाया गया था। इस गोबर को स्थानीय गायपालकों के पास से खरीदा गया था और फिर उस से गैस बनाई गई, जिससे यह ईंधन विकसित किया गया।

इंटरस्टेलर टेक्नोलॉजीस के सीईओ ताकाहिरो इनागावा ने इस मामले पर कहा, “हम यह मात्र इसलिए नहीं कर रहे क्योंकि यह पर्यावरण को फायदा पहुँचाता है बल्कि इसलिए भी कर रहे हैं क्योंकि यह स्थानीय स्तर पर बनाया जा सकता है और सस्ता है तथा शुद्ध और साफ़ है। हम यह तो नहीं कह सकते कि यह विधि पूरी दुनिया में बड़े स्तर पर अपनाई जाएगी लेकिन हम पहली ऐसी निजी कम्पनी हैं, जो इस ईंधन का उपयोग कर रहे हैं।”

इंटरस्टेलर ने एक अन्य कम्पनी एयरवाटर के साथ एक समझौता किया है। एयरवाटर कम्पनी उन किसानों से बायोगैस एकत्रित करती है, जिनके पास डेयरी फ़ार्म हैं और वह इनमें पली हुई गायों के गोबर से बायोगैस बनाती है।

इस प्रयोग से जुड़े एक इंजिनियर तोमोहीरो निशिकावा ने कहा, “संसाधन के मामले में कमजोर जापान को पानी ऊर्जा जरूरतों के लिए स्थानीय स्तर पर उत्पादित कार्बन न्यूट्रल ईंधन अपनाने होंगे। इस क्षेत्र की गायों में काफी पोटेंशियल है। जापान के पास एक ईंधन स्रोत ऐसा होना चाहिए, जिसके लिए वह बाहर के देशों पर निर्भर ना हो।”

रॉकेट तकनीक में गोबर का उपयोग होने से वह किसान भी प्रसन्न हैं, जिनके पशुफ़ार्म से यह गोबरगैस ली गई थी। उनका कहना है कि उनसे ली गई गोबर गैस से रॉकेट को उड़ता देखना सुखद होगा। उन्होंने जापान सरकार से इस विषय में कदम उठाने की अपील की है।

कॉन्ग्रेस सांसद के ठिकाने से अब तक ₹300 करोड़ बरामद: अब 12 मशीनों से हो रही गिनती, 2 दिन और लगेंगे… आखिर क्यों नहीं मिला ₹2000 का नोट?

झारखंड से कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद धीरज साहू के ठिकानों पर बुधवार से चल रही आयकर विभाग की छापेमारी में अब तक ₹300 करोड़ की नकद बरामदगी हो चुकी है। रिपोर्ट्स में बताया गया है कि अभी नोटों की गिनती चल रही है और यह आँकड़ा ₹500 करोड़ के पार भी जा सकता है। नोटों की गिनती पूरी होने में 2 दिन और लग सकते हैं।

बताया जा रहा है कि धीरज साहू के ओडिसा, झारखंड और पश्चिम बंगाल स्थित ठिकानों से इतना नकद पैसा मिला है कि उसकी गिनती करना आयकर विभाग को मुश्किल हो रहा है। इन नोटों की गिनती के लिए आयकर विभाग को हैदराबाद और भुवनेश्वर से अतिरिक्त मशीने मँगानी पड़ी हैं। 6 छोटी और 6 बड़ी मशीनों की मदद से इन नोटों को गिना जा रहा है।

नोटों की मात्रा इतनी ज्यादा है कि इसे गिनते-गिनते अब तक कई मशीनें खराब हो चुकी हैं। बाकी मशीनें भी लगातार गिनती के कारण गर्म हो जा रही हैं। कुछ लोगों ने यह भी दावा किया है कि अब तक की गिनती से मात्र 35% नोट ही गिने जा सके हैं और जब तक यह गिनती 100% होगी, तब तक आँकड़ा कहीं ऊपर पहुँच चुका होगा।

धीरज साहू की ओडिशा के बोलांगीर में स्थित बौध डिस्टलरीज में आयकर विभाग ने यह नकद बरामदगी की है। ओडिशा के संबलपुर, बोकारो और रांची तथा कोलकाता से भी बड़ी मात्रा में पैसा मिला है। हालाँकि इस मामले में अब प्रश्न भी उठने लगे हैं। धीरज साहू के ठिकानों से बरामद यह धनराशि ₹500, ₹200 और इससे छोटे नोटों में है। इस पूरी बरामदगी में एक भी ₹2,000 का नोट नहीं निकला है।

इसी कारण से प्रश्न उठ रहे हैं कि क्या रिजर्व बैंक के ₹2,000 के नोट को चलन से बाहर करने के निर्णय के आते ही यहाँ पहले से मौजूद नकद को बदलना चालू कर दिया गया था या फिर यह सारा नकद पैसा बीते कुछ ही माह में एकत्रित किया गया है, जब बाजार में ₹2,000 के नोट आरबीआई ने भेजने बंद कर दिए थे?

भारतीय रिजर्व बैंक ने 19 मई 2023 को एक आदेश जारी करके कहा था कि वह ₹2,000 के नोट को चलन से बाहर कर रहे हैं। इसके बाद पूरे देश में जिन लोगों के पास ₹2,000 के नोट थे, वह बैंकों में इन्हें जमा करवाते दिखे थे। 30 नवम्बर 2023 तक चलन में शामिल 97% नोट मतलब ₹2,000 के नोट वापस आ चुके थे।

इसके अलावा यदि नोट बदले भी गए तो इतनी बड़ी धनराशि को किस स्रोत से बदला गया और क्या इसमें बैंकिंग क्षेत्र के लोग भी शामिल थे? इसके अलावा जो भी धनराशि बरामद की गई है वह किस स्रोत से अर्जित की गई है? चूंकि यह धनराशि उनकी उनके शराब कारोबार की फैक्ट्री पर मिली है, ऐसे में प्रश्न उठ रहे हैं कि कहीं फैक्ट्री से ही तो अवैध तरीके से शराब बड़ी मात्रा नहीं बेची जा रही थी, जिससे यह अर्जित की गई?

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बोलांगीर से बरामद यह धनराशि 157 बैग में मिली है। इस धनराशि को लोहे की अलमारियों में भर कर रखा गया था। इसे गिनने के लिए ट्रक पर लादकर पहले जिले के स्टेट बैंक ले जाया गया और फिर गिनती चालू हुई। अभी तक बड़ी मात्रा में बैग नहीं गिने जा सके हैं।

धीरज साहू कौन? घोषित सम्पत्ति कितनी उनकी?

शराब समेत कई धंधों में लिप्त कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद धीरज साहू झारखंड के लोहरदगा के मूल निवासी हैं। उन्होंने वर्ष 2018 में राज्यसभा चुनाव के लिए पर्चा भरते समय जो शपथपत्र दिया था, उसमें उन्होंने, अपनी सम्पत्ति ₹34 करोड़ बताई थी। इसके अलावा उन्होंने खुद पर ₹2 करोड़ के कर्ज का दावा किया था।

धीरज साहू लम्बे समय से कॉन्ग्रेस से जुड़े रहे हैं। वह 2009, 2010 और 2018 में कॉन्ग्रेस से राज्यसभा की सदस्यता पा चुके हैं। उन्होंने झारखंड के चतरा से कॉन्ग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव भी लड़ा लेकिन इसमें उन्हें हार का मुँह देखना पड़ा था। धीरज साहू झारखंड के प्रभावशाली परिवार से आते हैं।

उनके भाई शिव प्रसाद साहू झारखंड की राजधानी राँची से दो बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं। धीरज साहू की जिन कम्पनियों पर आयकर विभाग का छापा पड़ा है वह शराब, ईंट, चावल और अन्य धंधों से जुड़ी हुई हैं।

महुआ मोइत्रा बैंक में VP थी, करोड़ रुपए सैलरी वाली? – जानिए क्या होता है यह पोस्ट, झूठ परोस क्यों बटोरी जा रही सहानुभूति

तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा की लोकसभा सदस्यता जाने के बाद अब इमोशनल एंगल देकर उनके लिए सहानुभूति इकट्ठा की जा रही है। सोशल मीडिया पर कई उनके समर्थक ये बताने की कोशिश कर रहे हैं कि महुआ किस तरह से बैंक में वाइस प्रेसिडेंट की पोस्ट पर थीं और सिर्फ सामाजिक कार्यों के लिए सबकुछ छोड़कर राजनीति में आ गईं।

उदाहरण के लिए अपूर्व नाम के पत्रकार का पोस्ट पढ़िए। बताने की कोशिश हुई है कि कैसे महुआ ने करोड़ों रुपए की नौकरी को समाज सेवा के लिए लात मारी और समाज सेवा में लग गई। महुआ की तस्वीर लगाकर अपूर्व ने उन्हें सुंदर, सलोनी और सौम्य महिला बताया और साथ ही लिखा कि चूँकि यह महिला सत्ता के कड़े सवाल पूछती हैं इसलिए साहसी और समझदार है। लेकिन महिला विरोधी लोग उनके चरित्र पर भद्दी फब्तियाँ कस रहे हैं।

अब महुआ मोइत्रा को लेकर किए जा रहे दावों की सच्चाई क्या है। आइए समझाते हैं।

दरअसल, ये जो कहा जा रहा है कि वो बैंकर थीं और उन्होंने करोड़ों की नौकरी छोड़ी…उसके पीछे की सच्चाई ये है कि नो न्यूयॉर्क में जेपी मॉर्गन कंपनी में इंवेस्टमेंट बैंकर की लाइन में थी। उन्हें वह वाइस प्रेसीडेंट के रोल में थीं। ध्यान रहे महुआ बैंकर नहीं थी। वो जेपी मॉर्गन में जिस वाइस प्रेसिडेंट की पोस्ट पर थीं, वैसे वीपी बैंकिंग सेक्टर में कई सारे लोगों को बनाया जाता है।

इन्वेस्टोपीडिया साइट के अनुसार, वरिष्ठ बैंकरों में सबसे कनिष्ठ होता है। वहीं बैंक में ये पद किसी एक पर हो ये बिलकुल जरूरी नहीं। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि गोल्डमैन सैश बैंक में 12000 वीपी थे। इसी तरह बैंकिंग सेक्टर की कई कंपनियाँ जहाँ वीपी की भरमार होती है इसलिए उन्होंने खबर के टाइटल में भी कहा है कि आखिर क्यों बैंक के वीपी का पद देखकर अचंभित नहीं होना चाहिए।

साभार: Investopedia

सोशल मीडिया यूजर्स ने बताया बैंकिंग में VP क्या

बता दें कि बैंक में वीपी पोस्ट का क्या महत्व होता है इसके बारे में सोशल मीडिया यूजर्स ने भी जवाब दिया। जैसे रौशन राय के पोस्ट, जिसमें वो दावा कर रहे हैं कि महुआ मोइत्रा वो बैंकर थीं जो 100 लग्जरी बैग, 100 जूते ले लेती…उसपर साकेत नाम के एक्टिव यूजर ने कहा,

“बेवकूफ वो बैंकर नहीं थीं, वो सैंकड़ों वाइस प्रेसिडेंट्स में से एक वीपी थी जहाँ काम एंट्री लेवल का होता है। वो जेपी मॉर्गन में काम करती थी, खुद महुआ मॉर्गन नहीं थी।”

इसी तरह शुभेंदु ने लिखा- जब महुआ ने जेपी मॉर्गन की नौकरी छोड़ी वो वीपी ही थी, जिनका काम बैंक में एंट्री करने आदि का होता है। उनके पास डबल डिजिट में PQE भी नहीं था। ऐसे कर्मचारियों की सैलरी इतनी भी नहीं होती कि वो लंदन के जोन 1,2,3 में घर रेंट पर ले सकें। बड़े आए करोड़ों रुपए की बैंक की नौकरी करने वाले।

गब्बर नाम के एक्टिव यूजर ने भी तंज कसके हुए कहा, “पाँच एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट्स को ठेले पर पानी पुरी खाते देखा है।”

महुआ मोइत्रा की सदस्या गई

बता दें कि संसद में प्रश्न पूछने के बदले नकदी और महँगे-महँगे तोहफे लेने के आरोप में दोषी पाए जाने के बाद महुआ मोइत्रा की संसद सदस्यता चली गई है। जाँच के बाद एथिक्स कमिटी ने उनके खिलाफ रिपोर्ट लोकसभा की टेबल पर पेश की थी। इसके बाद स्पीकर ओम बिरला ने उन्हें संसद से निकालने का फैसला सुनाया। महुआ मोइत्रा पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर से 2019 में TMC (तृणमूल कॉन्ग्रेस) के टिकट पर सांसद बनी थीं।

भारत में ISIS की तोड़ी जा रही कमर: 13 गिरफ्तार, 44 ठिकानों पर चल रही छापेमारी, बनाते थे काफिरों (गैर-मुस्लिमों) की हत्या का प्लान

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने महाराष्ट्र और कर्नाटक में 44 ठिकानों पर छापेमारी की है। यह छापेमारी इस्लामी आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ऑफ़ इराक एंड सीरिया (ISIS) के आतंकियों की जाँच के सम्बन्ध में चल रही है। यह मामला ISIS के पुणे मॉड्यूल से जुड़ा हुआ है।

NIA ने यह छापेमारी ठाणे ग्रामीण में 31 स्थानों पर, ठाणे शहर में 9 जगह पर और पुणे में 2 जगह तथा मुंबई और कर्नाटक में 1-1 जगह पर की है। अभी तक सामने आई जानकारी के अनुसार, इस छापेमारी में NIA ने ISIS से संबंधित 13 लोगों को गिरफ्तार किया है। यह 13 लोग पुणे से गिरफ्तार किए गए हैं।

गौरतलब है कि बीते दिनों NIA ने ISIS के पुणे मॉड्यूल का खुलासा किया था। NIA द्वारा इस मामले में लगाई गई चार्जशीट में कई अहम खुलासे किए गए थे। इस पुणे मॉड्यूल में सात सदस्यों के होने की जानकारी दी गई थी। यह सभी सदस्य दिन में नामी कम्पनियों में काम करते थे और रात में देश-विरोधी साजिश रचते थे।

आतंक के इस पुणे मॉड्यूल के खिलाफ राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने 4 नवंबर 2023 को कोर्ट में चार्जशीट दायर कर दी थी। इस चार्जशीट से पता चला था कि आतंकियों ने काफिरों (गैर-मुस्लिमों) की हत्या का प्लान बनाया था और वे भारतीय संविधान को ‘हराम’ (गैर-इस्लामी) मानते थे।

चार्जशीट के हवाले से बताया गया था कि आरोपित विस्फोटक बनाने के लिए कोडवर्ड का इस्तेमाल करते थे। हमलों के लिए महाराष्ट्र के कुछ स्थानों की रेकी भी की गई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक नामी कंपनियों में काम करने वाले ये सभी आतंकी IED बनाने और उसका परीक्षण करने के काम पर जुटे थे।

IED बनाने के लिए ये सभी कोडवर्ड में बात किया करते थे। सल्फ्यूरिक एसिड के लिए सिरका, हाइड्रोजन परॉक्साइड के लिए शर्बत और एसीटोन के लिए गुलाब जल जैसे कोडवर्ड का इस्तेमाल किया जा रहा था। बताते चलें कि IED बनाने के लिए सल्फ्यूरिक एसिड, एसीटोन और हाइड्रोजन परॉक्साइड जरूरी घटक हैं।

चार्जशीट में बताया गया था कि आतंकी IED बनाने के लिए आसानी से मिलने वाली चीजों का इस्तेमाल करते थे। इसमें वाशिंग मशीन टाइमर, थर्मामीटर, स्पीकर वायर, 12 वॉट का बल्ब, 9 वॉट की बैटरी, फिल्टर पेपर, माचिस की तीलियाँ और बेकिंग सोडा शामिल हैं।

विस्फोटक बनाने के बाद आरोपितों ने इसे ब्लास्ट करने के लिए महाराष्ट्र, गोवा, केरल और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में रेकी भी की थी। रेकी में फोटो और वीडियो बनाने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया गया था। इस मॉड्यूल का दिल्ली दंगों और शरजील इमाम से भी सम्बन्ध सामने आया था।

इस मामले में पकड़ा गया एक आरोपित जुल्फिकार मल्टीनेशनल आईटी कंपनी में सीनियर प्रोजेक्ट मैनेजर के पद पर 31 लाख के सालाना पैकेज पर काम कर रहा था। दूसरा आरोपित शाहनवाज माइनिंग इंजिनियर था। उसे विस्फोटकों की अच्छी जानकारी थी। तीसरा आरोपित कादिर पठान ग्राफिक्स डिजाइनर था।

जुल्फिकार अली बड़ौदावाला और पुणे निवासी जुबैर शेख ने साल 2015 में युवाओं को कट्टरपंथी बनाना शुरू कर दिया था। इसके लिए व्हाट्सऐप पर ग्रुप बनाकर आईएसआईएस के समर्थन में पोस्ट किए जाते थे।

एनआईए ने एक गवाह के हवाले से विस्तार में इसकी जानकारी दी थी कि कैसे वह 2011-2012 में जुबैर शेख के संपर्क में आया था, जिसे एनआईए ने एक अन्य मामले में गिरफ्तार किया है। एक गवाह ने कहा था कि साल 2014 में शेख ने उसे ‘यूनिटी इन मुस्लिम उम्मा’ और ‘उम्मा न्यूज’ नाम के व्हाट्सऐप ग्रुपों में जोड़ा था।

इसी मामले में उत्तर प्रदेश से UP ATS ने इस पुणे मॉड्यूल और दिल्ली मॉड्यूल के स्वघोषित खलीफा वजीहुद्दीन को गिरफ्तार किया था। वजीहुद्दीन इन दोनों मॉड्यूल का सरगना था। उसके गुर्गों ने उसके आदेश पर गाजियाबाद के यति नरसिम्हा सरस्वती जैसे ‘निशानों’ की पहचान की थी।

इतना ही नहीं, आईएसआईएस के पुणे मॉड्यूल के सदस्य शहनवाज के साथ मिलकर वो धमाकों की ट्रेनिंग भी शुरू कर चुका था। वजीहुद्दीन उत्तर प्रदेश के रामपुर, संभल, अलीगढ़ से लेकर प्रयागराज तक अलग-अलग गुर्गों के माध्यम से भारत के खिलाफ ‘जेहाद’ के लिए ‘इस्लामिक फौज’ तैयार कर रहा था।

इससे पहले इस मामले पर ऑपइंडिया ने अपनी रिपोर्ट में यह बताया था कि कैसे वजीहुद्दीन सामू (SAMU) से लेकर एएमयू (AMU) तक, दिल्ली से लेकर प्रयागराज तक आईएसआईएस से जुड़े लोगों के लिए ‘अमीर’ की तरह था। उसके गुर्गे सोशल मीडिया पर भी उसका गुणगान करते थे और उसे ‘अमीर’ कहकर संबोधित करते थे। मुस्लिम देशों में ‘अमीर’ का मतलब शासक होता है।

वजीहुद्दीन ने शुरुआत में आईएसआईएस के ओजीडब्ल्यू (ओवर ग्राउंड वर्कर) के तौर पर काम शुरू किया और फिर सामू (SAMU- Students of AMU) जैसे संगठनों में खुद को ‘अमीर’ के तौर पर स्थापित कर लिया। वो ‘हया’ कार्यक्रम के जरिए बाकायदा मजलिसों का आयोजन करता था और इस्लामिक भाषण देता था।

वजीहुद्दीन मूल रूप से छत्तीसगढ़ के दुर्ग का रहने वाला है। वो एएमयू में पीएचडी करने के साथ ही जूनियर छात्रों को सामाजिक विज्ञान विषय (इतिहास, भूगोल और नागरिक शास्त्र) पढ़ाता था। उसके छात्रों में हिंदू छात्र भी शामिल हैं।

BJP को क्यों वोट दिया था तूने : MP में मुस्लिम महिला को देवर जावेद ने डंडे से पीटा, हिंदू पड़ोसी ने आकर जान बचाई

मध्य प्रदेश के सीहोर में भाजपा को वोट देने पर एक मुस्लिम महिला को उसके देवर ने बुरी तरह पीट दिया। महिला ने अहमदपुर पुलिस थाने में इस संबंध में शिकायत दी है। मामला बरखेड़ा हसन गाँव में 4 दिसंबर 2023 है। पीड़िता का नाम समीना है जिनके साथ देवर ने बदसलूकी चुनावी नतीजे आने के बाद की।

बताया जा रहा है कि शिवराज सरकार की ‘लाडली बहना योजना’ से खुश होकर समीना ने भाजपा को वोट दिया था और 4 दिसंबर को प्रदेश में दोबारा भाजपा आती देख वह और उनके बच्चे उसी की खुशी मनाने लगे। ऐसे में उनका देवर जावेद खां आया और उनसे गाली-गलौच करने लगा।

जब पीड़िता के परिवार ने जावेद का विरोध किया तो उनके साथ मारपीट भी हुई। समीना के मुताबिक उन्हें थप्पड़ मारे गए, घूँसे मारे गए और डंडों से पीटा गया। पीड़िता का कहना है कि घटना के वक्त जावेद के साथ उसकी बीवी भी थी जो बाँस का डंडा देकर कह रही थी- मारो इनको।

दोनों लोग उनके परिवार से मारपीट कर रहे थे। ऐसे में जब वो चीखने चिल्लाने लगे तो पड़ोसी पंडित विद्या सागर ने आकर उनकी मदद की। बाद में समीना ने इस संबंध में थाने में जाकर शिकायत दी, लेकिन अब तक देवर को गिरफ्तार नहीं किया गया है। उन्होंने अब जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया है। वह जल्द से जल्द इस मामले में कार्रवाई चाहती हैं।

वहीं पुलिस का कहना है कि उन्होंने इस केस में आईपीसी की धारा 294, 323,506 और 32 के तहत एफआईआर कर ली है और इस मामले में जाँच भी चल रही है। जावेद अभी फरार है। जल्द ही उसे पकड़ा जाएगा। मामले की जानकारी होने पर राष्ट्रीय पंससमदा मुस्लिम महासंघ के अध्यक्ष (मध्य प्रदेश इकाई) नौशाद खान ने घटना की निंदा की।

बता दें कि ये पहली घटना नहीं है जहाँ मुस्लिम महिला द्वारा भाजपा को वोट देने पर उसके घरवालों ने उससे मारपीट की। बरेली की एक महिला ने भी शिकायत दी थी कि उसने भाजपा को वोट दिया था जिसके कारण उसके साथ मारपीट हुई, उसे घर से निकाला गया और तीन तलाक की धमकी दी गई।

’15 मिनट के लिए पुलिस हटा दो’ वाले अकबरुद्दीन ओवैसी के सामने नहीं लूँगा शपथ, वो रजाकारों का वंशज: भाजपा विधायक टी राजा सिंह

हाल ही में संपन्न हुए तेलंगाना विधानसभा चुनाव में चुनकर आए विधायकों को शपथ दिलाने के लिए AIMIM के विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी को प्रोटेम स्पीकर बनाने के फैसले पर विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा विधायक टी राजा सिंह ने कहा है कि वह प्रोटेम स्पीकर बनाए गए अकबरुद्दीन ओवैसी के हाथों कभी भी विधायक पद की शपथ नहीं लेंगे।

टी राजा सिंह ने कहा है कि ओवैसी कासिम रिजवी के वंशज हैं, जो हैदराबाद के निजाम की रजाकार सेना के मुखिया थे। इन रजाकारों ने तेलंगाना के लोगों का नरसंहार किया था। ऐसे में वह अकबरुद्दीन के स्पीकर की कुर्सी पर रहते शपथ नहीं ले सकते। गौरतलब है कि नई विधानसभा या नई संसद के चुने जाने पर किसी वरिष्ठ सदस्य को प्रोटेम यानी अस्थाई स्पीकर बनाया जाता है, जो सभी विधायकों या फिर सांसदों को उनके पद की शपथ दिलाता है।

प्रोटेम स्पीकर स्थायी स्पीकर के चुने जाने तक काम करता है। अकबरुद्दीन ओवैसी हैदराबाद की चंद्रायानगुट्टा सीट से विधायक चुनकर आए हैं। जबकि टी राजा सिंह हैदराबाद की ही गोशामहल सीट से पुनः विधायक चुने गए हैं।

टी राजा सिंह ने राज्य के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की अगुवाई वाली नई नवेली कॉन्ग्रेस सरकार पर तुष्टिकरण का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है चुनाव के दौरान कॉन्ग्रेस का कहना था कि भाजपा और भारत राष्ट्र समिति आपस में मिले हुए हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब साफ-साफ दिख रहा है कि कौन किससे मिला हुआ है और कौन नहीं।

टी राजा सिंह तेलंगाना में भाजपा के फायर ब्रांड नेता हैं, जो अक्सर अपने बयानों की वजह से चर्चा में बने रहते हैं। जबकि अकबरुद्दीन ओवैसी सांसद असदुद्दीन ओवैसी के छोटे भाई हैं और उन्हें विवादित बयान देने के चक्कर में जेल की हवा भी खानी पड़ चुकी है।

भाजपा विधायक टी राजा सिंह ने कहा है कि वह इस सामूहिक शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं होंगे और अकबरुद्दीन ओवैसी के सामने कभी भी शपथ नहीं लेंगे। वह अगले दिन स्पीकर के चेंबर में जाकर शपथ ले लेंगे। विधायक टी राजा सिंह का कहना है कि वह ऐसे व्यक्ति के सामने शपथ कैसे ले सकते हैं, जिसने यह कहा था कि यदि 15 मिनट के लिए पुलिस हटा दी जाए तो हिंदुओं का खात्मा कर दिया जाएगा।

गौरतलब है कि वर्ष 2012 में अकबरुद्दीन ओवैसी ने एक विवादित बयान दिया था कि मुसलमान 25 करोड़ हैं और हिंदू 100 करोड़ लेकिन अगर 15 मिनट के लिए देश में पुलिस हटा दी जाए तो बता दिया जाएगा कि कौन कितना ताकतवर है।

राजा सिंह का कहना है कि वह भाजपा के विधायक दल की बैठक में शामिल होंगे और इस पर बात करेंगे कि अन्य नए चुने हुए विधायक उनकी बात से सहमत हैं या नहीं। भाजपा ने हाल ही में संपन्न हुए तेलंगाना विधानसभा चुनाव में आठ सीटें जीती हैं, जो अब तक उसका राज्य में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।

इससे पहले वर्ष 2018 के चुनाव में केवल राजा सिंह ही भाजपा से जीत पाए थे। इससे पहले शुक्रवार (8 दिसम्बर 2023) को तेलंगाना की गवर्नर सौन्दरराजन ने अकबरुद्दीन ओवैसी को प्रोटेम स्पीकर बनाने के लिए नोटिफिकेशन जारी किया था क्योंकि वह तेलंगाना विधानसभा में सबसे वरिष्ठ विधायक हैं।

अकबरुदीन ओवैसी चन्द्रयानगुट्टा से छठी बार विधायक चुने गए हैं। वह शनिवार (09 दिसम्बर 2023) तक के लिए ही स्पीकर रहेंगे और इस दौरान नया स्थायी स्पीकर चुन लिया जाएगा।

असम में 1 करोड़ मुस्लिम… इनमें असमिया सिर्फ 40 लाख: हिमंता सरकार करेगी सामाजिक-आर्थिक मूल्यांकन, कैबिनेट ने दी मंजूरी

असम कैबिनेट ने शुक्रवार (8 जनवरी 2023) को राज्य की मूल मुस्लिम आबादी के सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण को मंजूरी दे दी। इस फैसले के तहत असम के पाँच स्वदेशी मुस्लिम समुदायों- गोरिया, मोरिया, देशी, सैयद, जोल्हा के सामाजिक-आर्थिक मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू होगी।

जानकारी के मुताबिक, इस फैसले से पहले जनता भवन में कैबिनेट बैठक आयोजित हुई, जिसके बाद कैबिनेट मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने बताया कि कैबिनेट ने चार क्षेत्र विकास निदेशालय, असम का नाम बदलकर अल्पसंख्यक मामले और चार क्षेत्र, असम निदेशालय करने का फैसला किया है। इस फैसले के पीछे का कारण है कि मूल जनजातीय अल्पसंख्यकों का व्यापक सामाजिक-राजनीतिक और शैक्षणिक उत्थान किया जाए।

रिपोर्ट्स के अनुसार, 2011 में जो जनगणना हुई थी, उसके मुताबिक, असम की 34% से अधिक आबादी मुसलमानों की है, जो लक्षद्वीप और जम्मू-कश्मीर के बाद सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तीसरी सबसे बड़ी आबादी है।

ये भी बताया जा रहा है कि राज्य की कुल आबादी 3.1 करोड़ में से 1 करोड़ से अधिक मुस्लिम हैं। जिनमें से केवल 40 लाख मूल निवासी, असमिया भाषी मुस्लिम हैं, और बाकी बांग्लादेशी मूल, बंगाली भाषी आप्रवासी हैं। इससे पहले अक्टूबर में, हिमंत सरकार ने स्वदेशी मुस्लिम समुदायों का सामाजिक-आर्थिक मूल्यांकन करने की योजना की घोषणा की थी।

मुख्यमंत्री ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा था, “ये निष्कर्ष सरकार को राज्य के स्वदेशी अल्पसंख्यकों के व्यापक सामाजिक-राजनीतिक और शैक्षिक उत्थान (एसआईसी) के उद्देश्य से उपयुक्त उपाय करने के लिए मार्गदर्शन करेंगे।”

हिमंता सरकार ने गोरिया, मोरिया, जोलाह, देसी और सैयाद समुदायों को मूल असमिया मुसलमानों के रूप में वर्गीकृत किया था, जिनके पास पहले पूर्वी पाकिस्तान और अब से प्रवास का कोई इतिहास नहीं है।

माना जाता है कि ये समुदाय 13वीं से 17वीं शताब्दी के मध्य इस्लाम में परिवर्तित हुए थे, जिनकी मातृभाषा बंगाली नहीं असमिया ही है और इनकी संस्कृति हिंदुओं से मिलती-जुलती है। ऐसे ही गोरिया-मोहिया, जिन्होंने अहोम राजाओं के लिए काम किया था वो हकीकत में कोच राजबोंग्शी लोग थे, जो इस्लाम में परिवर्तित हो गए थे। इसी तरह जिन मुस्लिमों को ब्रिटिश छोटानागपुर से चाय बागानों में काम करने के लिए लाए वो जोल्हा हो गए और सूफी संतों के अनुयायी सैयद हो गए।

अचानक हार्ट अटैक से हो रही युवाओं की रहस्यमयी मौतों के पीछे कोरोना वैक्सीन? संसद में उठा सवाल तो सरकार ने दे दिया जवाब, ICMR के अध्ययन से बड़ा खुलासा

पिछले कुछ महीनों में अचानक से हार्ट अटैक से मौत की कई खबरें सामने आई हैं। कई ऐसे वीडियो आए हैं, जिनमें देखा जा सकता है कि युवाओं को अचानक से हार्ट अटैक आ गए और उनकी मौत हो गई। इससे एक प्रकार के भय का माहौल बना। अब संसद में भी ये मामला उठा है। सोशल मीडिया का एक धड़ा इसके लिए कोरोना वैक्सीन को जिम्मेदार ठहरा रहा था। अब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने संसद के शीतकालीन सत्र के दर्जन खुद ही इसका जवाब दिया है।

बता दें कि ‘भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR)’ ने एक अध्ययन किया है और पाया है कि हार्ट अटैक के कारण हो रही रहस्यमयी मौतों के पीछे कोरोना वैक्सीन नहीं है। भारत सरकार ने शुक्रवार (8 दिसंबर, 2023) को इसे साफ़ कर दिया है। पिछले दिनों सामने आए वीडियो में कहीं शादी में दुल्हन की मृत्यु हो गई, कहीं नाचते-नाचते युवक की, कहीं छींक आते गिर कर मौत हो गई तो कहीं कोई व्यक्ति खेलते-खेलते ही चल बसा। इन सभी वीडियो के बाद तरह-तरह की चर्चाएँ जोर पकड़ने लगीं।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने बताया है कि कोविड-19 महामारी के बाद अचानक से अस्पताल में भर्ती होने के पीछे परिवार का मेडिकल इतिहास और एक खास प्रकार की जीवनशैली है। उनसे सवाल किया गया था कि क्या अचानक हो रही मौतों और कोरोना वैक्सीन के बीच कोई तार है? जिन लोगों को कोरोना हुआ था, उनमें से कुछ की अचानक मौतें हुई हैं। ICMR ने 18-45 वर्ष आयु समूह में अध्ययन कर के निष्कर्ष निकाला है कि इसमें वैक्सीन का कोई रोल नहीं है।

मंत्री द्वारा दी गई जानकारी की मानें तो ये पाया गया कि कोविड​​-19 वैक्सीन की कम से कम एक खुराक प्राप्त करने से रहस्यमयी अचानक मृत्यु की संभावना कम हो गई, जबकि पिछली कोरोना महामारी में अस्पताल में भर्ती, अचानक मृत्यु का पारिवारिक इतिहास, मृत्यु से 48 घंटे पहले अत्यधिक शराब पीना, का उपयोग मनोरंजक दवा/पदार्थ और मृत्यु/हार्ट अटैक से 48 घंटे पहले तीव्र तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि करना इन सबका कारण पाया गया।

आँखों में मिर्ची झोंकी, 35 बार चाकू से वार कर मार डाला: बिहार में दिन-दहाड़े सड़क पर हत्या, बिहार में 1 साल में साढ़े 3 लाख आपराधिक घटनाएँ

बिहार की नीतीश सरकार के राज में कानून-व्यवस्था एकदम से चरमरा गई है। अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि वह दिनदहाड़े बीच सड़क पर लोगों की हत्या कर रहे हैं। ऐसा ही एक मामला बिहार के नवादा से सामने आया है जहाँ एक युवक की चाकुओं से गोद कर हत्या कर दी गई।

जानकारी के अनुसार, नवादा शहर के केएलएस कॉलेज के पास में 21 वर्षीय राहुल कुमार को चाकुओं से 35 बार गोद कर बीच सड़क में मार दिया गया। इस दौरान जनता यह क़त्ल होते देखती रही। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है।

राहुल की हत्या करने से पहले उसकी आँखों में मिर्च झोंकी गई और फिर उसे मार दिया गया। बताया गया है कि राहुल के जानने वाले एक युवक ने उसे फ़ोन करके बुलाया था। इसके पश्चात राहुल यहाँ KLS कॉलेज के पास पहुँचा था। राहुल के हत्यारे अब भी पुलिस की गिरफ्तार से बाहर हैं।

उसके यहाँ पहुँचते ही उसकी आँखों में मिर्च झोंक दी गई। मिर्च के कारण परेशान राहुल पर ताबड़तोड़ चाकू से वार किए गए जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। राहुल की बहन प्रीति ने मीडिया को बताया है कि वह फ़ोन आने के 15 मिनट के बाद घर से निकला था। राहुल की माँ सावित्री देवी नवादा पुलिस में सिपाही है।

नवादा पुलिस के SDPO ने अजय प्रसाद ने इस मामले में बताया है, “आज दिनांक 8 दिसम्बर, 2023 को नगर थाना नवादा में सूचना मिली कि एक 20 वर्षीय युवक राहुल कुमार पुत्र वासुदेव साव की हत्या एक 30-35 वर्षीय युवक द्वारा चाकू मार हत्या कर दी गई है। पुलिस घटनास्थल पर पहुँच कर हमलावरों की पहचान स्थापित करने का प्रयास कर रही है।”

पुलिस ने बताया है कि घटना का सीसीटीवी फुटेज मिल गया है। इसमें दिखा है कि मृतक राहुल पर चाकू से कई वार किए गए। पुलिस का कहना है कि वह आरोपित की पहचान करने का प्रयास कर रहे हैं। पुलिस ने शव का पंचनामा कर उसे पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया है।

बिहार के नवादा में यह एक सप्ताह के भीतर हुई दूसरी जघन्य हत्या है। इससे पहले 4 दिसम्बर को भी एक महिला और उसकी 6 वर्षीय बच्ची की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया था जो कि मृतका का परिजन ही निकला था।

बिहार की नीतीश सरकार कानून व्यवस्था के मामले विफल रही है। हाल ही में आई राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2021 के मुकाबले वर्ष 2022 में बिहार में 23% अधिक आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। वर्ष 2022 में अपराध के 3.47 लाख मामले दर्ज हुए हैं जो कि 2021 के दौरान 2.82 लाख थे। वहीं वर्ष 2021 के दौरान प्रदेश में हत्या के 2799 मामले सामने आए थे जो कि वर्ष 2022 में बढ़कर 2930 हो चुके हैं।