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दशकों से वीरान मंदिरों में गूँज सकती है घंटा-घड़ियाल की ध्वनि, ASI संरक्षित स्मारकों में पूजा-पाठ की अनुमति देने की संसदीय समिति ने की पैरवी

देश के हजारों मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों में पूजा-अर्चना दोबारा चालू हो सकती है। इसके लिए संसद की एक समिति ने सरकार से एक्शन लेने को कहा है। समिति ने ऐसे मंदिरों एवं अन्य धार्मिक स्थलों में पूजा-पाठ दोबारा चालू करने के प्रयास करने के सुझाव दिए हैं जो वर्तमान में ‘भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण’ (ASI) की देखरेख में हैं।

समिति का कहना है कि देश भर के अलग-अलग हिस्सों में ASI संरक्षित हजारों ऐसे स्मारक या मंदिर मौजूद हैं जिनमें लोगों की अगाध आस्था है। ऐसे में उन्हें पूजा ना करने देना ठीक नहीं है। समिति का कहना है कि लोगों को पूजा का अधिकार देने से उनकी इच्छाएँ पूरी होंगी। यह सभी सुझाव YSR कॉन्ग्रेस के सांसद वी विजय साई रेड्डी की अध्यक्षता वाली टूरिज्म, ट्रांसपोर्ट और स्मारकों से सम्बंधित संसदीय समिति ने दिए हैं। इस समिति ने 6 दिसम्बर, 2023 को संसद में ‘भारत में संरक्षित स्मारकों और स्मारकों के संरक्षण से संबंधित मुद्दे’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में यह सुझाव दिए हैं।

दरअसल, ASI द्वारा सुरक्षा में लिए गए स्मारकों (मंदिरों/मस्जिदों/दरगाहों) में से बड़ी संख्या ऐसे स्मारकों की है जहाँ अभी पूजा-अर्चना की अनुमति नहीं है। इसके पीछे ASI का एक नियम है, जिसके अनुसार ASI अभी उन्हीं स्मारकों (जिनमें बड़ी संख्या में मंदिर शामिल हैं) में पूजा की अनुमति देता है जहाँ ASI को जिम्मेदारी मिलने के समय तक वहाँ ऐसा हो रहा हो।

उदाहरण के लिए ASI द्वारा संरक्षित लाल किले के भीतर स्थित मोती मस्जिद में नमाज होती है लेकिन गुजरात के सिधपुर में स्थित रूद्र महालय मंदिर में पूजा नहीं हो सकती। इसी तरह महाबलीपुरम, तमिलनाडु में स्थित विजय चोलेश्वरम मंदिर और अन्य कई ऐसे धार्मिक स्थलों में पूजा की अनुमति नहीं है। ASI का कहना है कि जो भी स्मारक उसे पूजा ना किए जाने की स्थिति में दिए गए वह निर्जीव माने जाते हैं और ऐसी स्थिति में पूजा -र्चना की अनुमति यहाँ नहीं दी जा सकती। ASI का कहना है कि वह ऐसा इसलिए करता है कि जर्जर अवस्था के इन स्मारकों की सुरक्षा की जा सके।

ऐसे में वह मंदिर या अन्य धार्मिक स्थल जहाँ ASI के चार्ज लेने पर पूजा-अर्चना ना हो रही हो, वहाँ नए सिरे से इसकी अनुमति नहीं दी जाती। अब समिति ने पर्यटन मंत्रालय से इस बात पर काम करने के लिए कहा है। पर्यटन मंत्रालय ने भी इस सुझाव को गंभीरता से लेने की बात कही है।

एक रिपोर्ट बताती है कि ASI वर्तमान में देश में 3693 स्मारकों की देखरेख करता है। इनमें से 2873 में पूजा/नमाज नहीं होती। हालाँकि, कई जगह पर स्थानीय लोगों की आस्थाएँ इन धार्मिक स्थलों से जुड़ी हैं, ऐसे में बराबर इसकी माँग होती रही है कि यहाँ पूजा की अनुमति दी जाए। जम्मू कश्मीर के अनंतनाग में 8वीं शताब्दी में बना मार्तण्ड सूर्य मंदिर ASI के पूजा की अनुमति ना देने का एक बड़ा उदाहरण है। बीते वर्ष कश्मीर में हालात सामान्य होने के बाद यहाँ पूजा चालू हुई थी। यहाँ जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी पूजा की थी।

इस मंदिर में पूजा होने के चलते ASI ने इस पर आपत्ति जताई थी, उसका कहना था कि यहाँ उसके चार्ज लेते समय पूजा नहीं हो रही थी, ऐसे में नए सिरे से इसे चालू नहीं किया जा सकता। हालाँकि, इस मंदिर में अब नियमित तौर पर पूजा होती है। अब अगर इस समिति के सुझावों पर अमल होता है तो बड़ी संख्या में ऐसे मंदिरों में घंटे-घड़ियालों की आवाज दुबारा सनाई देगी जहाँ दशकों और कहीं-कहीं सदियों से पूजा नहीं हुई है लेकिन उनका धार्मिक महत्व काफी बड़ा है।

जम्मू-कश्मीर में अब नहीं लौटेंगे 370 के दिन: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- अस्थायी था प्रावधान, मोदी सरकार का फैसला सही

जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर आज (11 दिसंबर 2023) सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। 5 जजों की संविधान पीठ की अध्यक्षता करने वाले मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने बताया कि 5 जजों की बेंच ने तीन अलग-अलग फैसले लिए हैं, लेकिन उनका निष्कर्ष एक ही है।

फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 370 को हटाने को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं की दलीलें खारिज कर दीं। कहा गया कि जम्मू-कश्मी भारत का अभिन्न अंग है। ऐसे में नियम है कि केंद्र राष्ट्रपति शासन के तहत राज्य सरकार की शक्ति का प्रयोग कर सकता है और संसद/राष्ट्रपति उद्घोषणा के तहत राज्य की विधायी शक्तियों का प्रयोग कर सकता है।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि आर्टिकल 370 सिर्फ शुरुआती व्यवस्था थी जो युद्ध स्थिति में शुरू की गई थी। लिखित सामग्री भी बताती हैं कि ये अस्थायी व्यवस्था थी। ऐसे में इसे हटाना गलत नहीं।

2019 से चल रही थी सुनवाई

इस मामले पर सुनवाई 2019 से चल रही थी लेकिन 2020 में इसपर कोई फैसला नहीं आया। 3 जुलाई 2023 को फिर नई संविधान पीठ का गठन करके इसपर सुनवाई शुरू हुई। इस बार अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने की। पीठ में जस्टिस एसके कौल, जस्टिस बीआर गवई जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस संजीव खन्ना भी रहे। 2 अगस्त 2023 से 5 सितंबर 2023 तक चली सुनवाई में सु्प्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया और आज इसे सार्वजनिक किया गया

इन याचिकाओं को डालने वालों में वकील शोएब कुरैशी, मुजफ्फर इकबाल खान, रिफत आरा बट, शाकिर शब्बीर, नेशनल कान्फ्रेंस के सांसद मोहम्मद अकबर लोन, हसनैन मसूदी, सीपीआई नेता मोहम्मद यूसुफ तारिगामी, इंद्रजीत टिक्कू, पत्रकार सतीश जैकब, पूर्व एयर वाइस मार्शल कपिल काक, पूर्व आईएएस हिंडाल हैदर तैयबजी, रिटायर्ड मेजर जनरल अशोक मेहता, अमिताभ पांडे, गोपाल पिल्लई के साथ ही पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज, जम्मू कश्मीर बार एसोसिएशन, जम्मू कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस जैसे राजनीतिक और गैर राजनीतिक संगठन भी शामिल हैं।

‘आप बस इन्हें MLA बनाओ, बड़ा पद हम देंगे’ : अमित शाह ने विष्णुदेव साय को लेकर चुनाव से पहले कर दिया था इशारा, छत्तीसगढ़ जीतकर पूरा किया वादा

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की बंपर जीत के बाद भाजपा ने मुख्यमंत्री पद के लिए विष्णुदेव साय के नाम का ऐलान किया। वह जल्द ही बतौर प्रदेश सीएम शपथ लेंगे। उनके नाम की घोषणा होने के बाद उन्होंने बलिदानी वीर नारायण सिंह की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी और फिर कहा कि भाजपा हकीकत में जनजातीय समुदाय की परवाह करती है। कॉन्ग्रेस ने तो बस एक वोट बैंक की तरह उनका इस्तेमाल करती हैं।

बता दें कि छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय जनजातीय समुदाय से आने वाले दूसरे मुख्यमंत्री हैं। भाजपा के इस फैसले से भले ही जनजातीय समुदाय में जितना खुशी का माहौल हो और विपक्ष को झटका लगा हो… लेकिन हकीकत तो यह है कि भाजपा ने पहले ही इशारा कर दिया था कि अगर उनकी सरकार बनी तो इस बार मुख्यमंत्री पद किसे मिलेगा।

छत्तीसगढ़ में एक चुनावी रैली के वक्त उन्होंने विष्णुदेव साय की ओर इशारा करते हुए मतदाताओं से अपील की थी कहा था कि कि वो विष्णुदेव साय को आगामी विधानसभा चुनाव में विजयी बनाएं, बाकी का काम उनका है। अमित शाह ने कहा था, “आप इनको विधायक बना दो, उनको बड़ा आदमी बनाने का काम हम करेंगे।’ अमित शाह ने अपना वादा निभाया। वैसे, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के तौर पर भले ही अब उनके नाम पर मुहर लगी हो, लेकिन भारतीय जनता पार्टी का आलाकमान पहले ही तय कर चुका था कि विष्णुदेव साय को ही वो छत्तीसगढ़ जैसे जनजातीय बहुल राज्य का चेहरा बनाने वाला है।

उल्लेखनीय है कि विष्णुदेव साय 4 बार सांसद रहे हैं। वो नरेंद्र मोदी सरकार की पहली सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रहे थे। साल 2016 में उनका पोर्टफोलियो भी बढ़ाया गया। लेकिन साल 2019 के लोकसभा चुनाव में उनकी जगह रायगढ़ लोकसभा सीट से गोमती साय को उम्मीदवार बना दिया गया। विष्णुदेव साय ने आलाकमान का कोई विरोध नहीं किया, बल्कि वो आलाकमान के हर फैसले के साथ रहे।

नतीजन उन्हें साल 2020 में छत्तीसगढ़ भाजपा की कमान सौंप दी गई। विष्णुदेव साय को लेकन भारतीय जनता पार्टी का आलाकमान (मोदी और शाह की जोड़ी) पहले से ही नपे-तुले फैसले ले रही थी। विष्णुदेव साय अपनी उपयोगिता साबित करते रहे। उन्होंने छत्तीसगढ़ में सबसे वोटर वर्ग के नेता को साल 2022 में प्रदेश अध्यक्ष पद सौंप दिया। और खामोशी से वो सरगुजा संभाग में अपने काम में जुटे रहे। उनके नेतृत्व में भाजपा ने सरगुजा संभाग की सभी 14 में से 14 विधानसभा सीटों पर क्लीन स्वीप किया। अब बारी हाईकमान की थी कि अमित शाह ने छत्तीसगढ़ की जनता से जो वादा किया था, वो पूरा किया जाता। इसे आलाकमान ने अब पूरा किया है।

खास बात ये है कि विधायकों की बैठक के दौरान खुद तीन बार के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा। वो रायपुर से लेकर नई दिल्ली तक भाजपा की हर टीम के गुड बुक में रहे हैं। अब वो छत्तीसगढ़ के चौथे और कुल दूसरे आदिवासी मुख्यमंत्री बन रहे हैं। बता दें कि विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने कॉन्ग्रेस का पूरी तरह से सफाया कर दिया। कॉन्ग्रेस सरकार के कई महत्वपूर्ण मंत्री चुनाव तक हार गए। विधानसभा चुनाव के नतीजे 3 दिसंबर को घोषित किए गए, लेकिन विष्णुदेव साय को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला पूरे एक सप्ताह बाद आया। इस दौरान छत्तीसगढ़ में भाजपा के विधायकों की तरफ से आलाकमान के हर फैसले को माना गया और नतीजा ये है कि छत्तीसगढ़ एक बार फिर से भाजपा का अभेद्य किला बनकर उभरा है।

‘सारी जगह मुस्लिम भाइयों की, खाली करो नहीं तो बम से उड़ा देंगे’: राजस्थान के एक और दर्जी को कन्हैया लाल जैसी धमकी

राजस्थान में हुए कन्हैयालाल हत्याकांड के बाद एक टेलर सोहन लाल जाटव को भी जान से मारने की धमकी दी गई है। उन्हें प्राप्त पत्र में कहा गया है कि उनकी दर्जी की दुकान को अगर उन्होंने खाली नहीं किया तो उन्हें बम से उड़ा दिया जाएगा। ये पत्र पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के नाम से भेजा गया है।

मामला अलवर स्थित सदर थाना क्षेत्र के चिकानी गाँव का है। पीड़ित ने इस संबंध में गुरुवार(7 दिसंबर 2023) को केस दर्ज कराया। शिकायत में उन्होंने कहा कि 13 नवंबर को उन्हें डाक से एक पत्र मिला था जिसमें उन्हें दुकान खाली करने को कहा गया।

सोहन लाल जाटव ने इस संबंध में बताया कि उन्होंने दुकान की जमीन 1971 में खरीदी थी। तब से उनका किसी से कोई विवाद नहीं हुआ। बहुत पहले रती मोहम्मद नाम के शख्स से उनकी अनबन हुई थी लेकिन बाद में मामला सुलझ गया था और उसके बाद से उनका किसी से झगड़ा नहीं हुआ। लेकिन 25 दिन पहले फिर उन्हें एक पत्र मिला…

पत्र में लिखा था, “मेरी बात अच्छी तरह समझ, यह तेरी दुकान है। यह जगह मुसलमान की है, यह जो सरदार की दुकान है और रोहतास कुमार की दुकान है, सरपंच और आस मोहम्मद के लोगों ने बताया है कि यह सारी जगह मुस्लिम भाइयों की है और तुमने कब्जा किया हुआ है। मैं अभी शराफत से बोल रहा हूँ, अभी जगह की सही कीमत लो और खाली करो, मैं कौन हूँ…PFI… 31 दिसंबर तक का समय दे रहा हूँ, नहीं तो PFI को दुनिया जानती है, एक रात में बम से सब नष्ट कर दूँगा।”

सोहन लाल जाटव से जब पूछा गया कि उन्होंने इस पत्र को लेकर इतने समय बाद जानकारी क्यों दी तो इस पर वह बोले कि 25 दिन पहले यह पत्र डाक से मिला था। लेकिन विधानसभा चुनाव में माहौल नहीं बिगड़े, इसलिए वे चुप रहे। नतीजों के बाद 7 दिसंबर को अलवर सदर पुलिस थाने में पहुँचकर उन्होंने अपनी शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस थाना अधिकारी दिनेश मीणा ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर जाँच शुरू कर दी गई है।

याद दिला दें साल 2022 में राजस्थान के उदयपुर में कन्हैयालाल नाम के दर्जी को इस्लामी कट्टरपंथियों ने दुकान में घुस मौत के घाट उतारा था। कन्हैयालाल की गलती बस इतनी थी कि उन्होंने नुपूर शर्मा को समर्थन दिया था। इसी के बाद उन्हें धमकी आई। कई दिन उन्होंने अपनी दुकान बंद भी रखी, जब उन्हें लगा जब सुलझ गया है तभी कट्टरपंथियों ने घटना को अंजाम दिया था।

कर्नाटक में कभी भी गिर सकती है कॉन्ग्रेस सरकार, होगा महाराष्ट्र जैसा हाल: पूर्व मुख्यमंत्री कुमारस्वामी का दावा, बोले- 50 से 60 विधायक होंगे BJP में शामिल

कर्नाटक में कॉन्ग्रेस की सरकार गिर सकती है। ऐसा दावा किया है जनता दल (सेक्युलर) के नेता एच डी कुमारस्वामी ने। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री ने रविवार (दिसंबर 10, 2023) को दावा किया कि कर्नाटक में कॉन्ग्रेस सरकार के एक प्रभावशाली कॉन्ग्रेस मंत्री 50-60 विधायकों के साथ पार्टी छोड़ सकते हैं और भाजपा का दामन थाम सकते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, JDS नेता ने कहा, “कर्नाटक में कॉन्ग्रेस सरकार में सब कुछ ठीक नहीं है। मुझे नहीं पता कि यह सरकार कब गिरेगी। एक प्रभावशाली मंत्री अपने खिलाफ मुकदमों से बचने के लिए बेताब है। केंद्र ने उनके खिलाफ ऐसे मुकदमे दर्ज किए हैं, जिनमें बचने की कोई संभावना नहीं है।”

उन्होंने कहा कि प्रदेश में महाराष्ट्र की तरह कुछ भी हो सकता है। जब उनसे उस प्रभावशाली नेता का नाम पूछा गया तो उन्होंने बस इतना इशारा किया कि छोटे नेताओं से ऐसे कदम की उम्मीद नहीं की जा सकती। केवल प्रभावशाली नेता ही ये कदम उठाएँगे।

बता दें कि इससे पहले भी कुमारस्वामी ने स्थिर सरकार को टिप्पणी की थी। उन्होंने 5 दिसंबर को भी कहा था- “इस देश में अब स्थिति यह है कि हर कोई महसूस करता है कि एक स्थिर सरकार की आवश्यकता है। मुझे लगता है कि 5 राज्यों के चुनाव में लोगों का मन ऐसा ही था… इस समय, हमें स्थिर सरकार और स्थिर नेतृत्व की आवश्यकता है और इसी कारण से हम NDA में शामिल हुए हैं।”

बता दें कि महाराष्ट्र में पिछले साल उद्धव ठाकरे की सरकार गिरी थी और एकनाथ शिंदे के भाजपा के साथ मिलने पर राज्य में एनडीए की सरकार बनी थी।

जुम्मे की नमाज के लिए राज्य सभा से खत्म हुआ 30 मिनट का समय, चल रहा था 60-70 साल से: पूरे संसद में एक जैसा नियम

तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी डीएमके के सांसदों ने 8 दिसंबर 2023 को राज्यसभा में मुस्लिम सांसदों के लिए जुम्मे की नमाज के ब्रेक का मुद्दा उठाया। इस पर उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने बताया कि 60-70 साल से चले आ रहे नियम में बदलाव हो चुका है। लोकसभा की तरह अब राज्यसभा में ये ब्रेक नहीं दिया जाएगा।

ये पूरा मामला 8 दिसंबर 2023 का है। जब राज्यसभा में जीरो ऑवर चल रहा था और सांसद अपने सवालों के जवाब पूछ रहे थे। तभी डीएमके के सांसद तिरुची शिवा ने हस्तक्षेप किया। उप राष्ट्रपति जयदीप धनखड़, जो राज्यसभा के सभापति भी हैं, वो सदन में पीठाधीन थे। तिरुची शिवा को सभापति ने बोलने का अवसर दिया, तो उन्होंने शुक्रवार के दिन राज्यसभा के कामकाज की समयसीमा को लेकर सवाल पूछा।

डीएमके सांसद तिरुची शिवा ने कहा, “सामान्य तौर पर शुक्रवार के दिन सभा का कामकाज लंच ब्रेक के बाद 2.30 बजे शुरू होता है, लेकिन आज के संशोधित कार्यक्रम के अनुसार ये 2 बजे से ही है। इस बारे में निर्णय कब लिया गया? इस बारे में सदन के सदस्य नहीं जानते, ये बदलाव क्यों हुआ?”

इस सवाल के जवाब में सभापति ने कहा, “सम्माननीय सदस्यगण, ये बदलाव आज से नहीं है। ये बदलाव पहले ही मेरे द्वारा किया जा चुका है, इसकी वजह भी बताई जा चुकी है। लोकसभा में कार्यवाही 2 बजे से होती है। लोकसभा और राज्यसभा दोनों ही संसद का हिस्सा हैं। दोनों के ही काम के समय में समानता हो, इसलिए मैंने पहले ही इस बारे में नियम बना दिए थे। ये कोई पहली बार नहीं है।”

इसके बाद सभापति ने आप सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी को अपना मुद्दा सदन के पटल पर रखने को कहा, जैसे ही वो बोलने के लिए खड़े हुए, तभी डीएमके के मुस्लिम राज्यसभा सांसद एम. मोहम्मद अब्दुल्ला ने हंगामा मचाने की कोशिश की। हालाँकि उप राष्ट्रपति ने सभी सदस्यों को शांत कर दिया और मोहम्मद अब्दुल्ला को बोलने के लिए कहा।

मोहम्मद अब्दुल्ला ने कहा, ‘ये पिछले 60-70 सालों का रिवाज (शुक्रवार को 2.30 बजे से सदन की कार्यवाही) है’। इसके बाद हंगामे की स्थिति बनती है, लेकिन उपराष्ट्रपति सबको शांत करा देते हैं, और फिर अब्दुल्ला को बोलने के लिए कहते हैं, जिसके बाद अब्दुल्ला कहते हैं, “सर, 2.30 बजे का समय पहले से निर्धारित है, मुस्लिम सदस्यों के लिए उनके जुम्मा (शुक्रवार) के लिए। यही परंपरा है।” इसके बाद सभापति ने उन्हें रोका और कहा कि वो समझ गए हैं।

सभापति ने कहा, “मैं आपका मतलब समझ गया। आप सभी लोग शांत रहें। माननीय सदस्यगण, लोकसभा और राज्यसभा दोनों ही सदन के सदस्य समाज के सभी वर्गों से आते हैं। लोकसभा 2.00 बजे दोपहर में बैठती है, जिसमें सभी वर्गों के सदस्य हैं। मैंने उसी तर्ज पर पिछले साल ही इस बारे में नियम बना दिए थे, जिसमें लंच ब्रेक के बाद सदन की कार्यवाही 2.00 बजे से शुरू करनी थी। ठीक लोकसभा की तर्ज पर।” इसके बाद उन्होंने विक्रमजीत सिंह साहनी को बोलने के लिए समय दे दिया और डीएमके-इंडी अलायंस के प्रोपेगेंडा की हवा निकालते हुए सदन की कार्यवाही सुचारू रुप से जारी रखी।

देखें सदन की कार्यवाही का वीडियो, जिसमें शुरुआती 20 सेकंड के बाद ही ये मुद्दा उठा है।

उपराष्ट्रपति ने कम ही शब्दों में सभी को समझा दिया कि ये संसद का सदन है। दोनों सदनों की कार्यवाही का समय एक बराबर है। किसी को लोकसभा में समस्या नहीं है, तो यहाँ अब कैसे होने वाली है? ये नियम भी आज का नहीं बना, बल्कि पिछले साल का ही बना है। अभी तक किसी को कोई समस्या नहीं हुई।

खास बात ये है कि राज्यसभा में ये मुद्दा उठा कौन रहा है? डीएमके के ही दोनों सांसद, जिनकी पार्टी खुलेआम सनातन का विरोध करती है और वो इंडी अलायंस का प्रमुख सहयोगी दल भी है। ऐसे में उप राष्ट्रपति ने एक ऐसे मामले की हवा तुरंत ही निकाल दी, जिसे इंडी अलायंस बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही थी।

माफिया मुख्तार का करीबी रियाज अंसारी… दादागिरी से करवाया था अवैध कार्यालय का निर्माण: योगी सरकार ने बुलडोजर चलवाया

उत्तर प्रदेश के माफिया मुख़्तार अंसारी के एक और करीबी की अवैध सम्पत्तियों पर बुलडोजर चला है। यह कार्रवाई रियाज अंसारी पर हुई है जो गाजीपुर जिले के बहादुरगंज से नगर पंचायत अध्यक्ष के शौहर हैं। रविवार (12 दिसंबर 2023) को हुआ यह एक्शन कोर्ट के आदेश पर हुआ है जिसका पालन करवाने के लिए भारी पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा। रियाज़ एक मामले में फरार चल रहा है जिस पर प्रशासन ने 25 हजार का इनाम भी घोषित कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ध्वस्तीकरण की यह कार्रवाई गाजीपुर जिले के थानाक्षेत्र कासिमाबाद में हुई है। यहाँ के बहादुरगंज में रियाज़ अंसारी का मुख़्तार से करीबियों के चलते काफी रसूख है। रियाज़ की बीवी निकहत परवीन बहादुरगंज से नगर पालिका की चेयरपर्सन हैं। रियाज अंसारी ने अपनी दादागीरी के दम पर बहादुरगंज में एक अवैध कैम्प कार्यालय बनवा रखा था। यह कार्यालय 760 वर्गफुट भूमि पर था। जमीन निकहत परवीन के नाम से थी। इस निर्माण का नक्शा भी पास नहीं था।

इस अवैध निर्माण पर कार्रवाई के लिए अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत बहादुरगंज ने स्थानीय SDM (उप जिला मजिस्ट्रेट) कासिमाबाद की कोर्ट में आवेदन दिया था। SDM कोर्ट ने निर्माण को अवैध पाया और इसे ध्वस्त करने के आदेश जारी किए थे। इसी आदेश पर अमल करने के लिए रविवार को रियाज़ के कैम्प कार्यालय पर अधिकारियों का जमावड़ा लगा। मौके पर SHO कासिमाबाद भी पुलिस बल के साथ मौजूद है। बुलडोजर चला कर आखिरकार कैम्प कार्यालय के नाम पर हुए अवैध निर्माण को ध्वस्त करवा दिया गया।

बताते चलें कि रियाज़ अंसारी पर मदरसे में फर्जी नियुक्ति के नाम पर धांधली का आरोप है। इन्ही आरोपों के चलते उस पर कासिमाबाद थाने में FIR भी दर्ज है। रियाज़ फिलहाल फरार है जिस पर पुलिस ने अब 25 हजार रुपए का इनाम घोषित किया है। रियाज़ के अलावा इसी केस में उसके 3 अन्य सहयोगी भी फरार हैं। उन पर भी 25 हजार रुपए का इनाम रखा गया है। मदरसे में नियुक्ति के इसी फर्जीवाड़े में खुद मुख़्तार अंसारी भी नामजद है।

इन सभी आरोपितों ने मिल कर रियाज़ अंसारी की बीवी की निकहत परवीन की नियुक्ति अवैध तौर पर मदरसे में करवा दी थी। पुलिस जाँच में दोषी पाए जाने के बाद निकहत परवीन जेल भेज दी गईं थीं। मुख़्तार अंसारी पहले से है जेल है। वहीं रियाज़ और फर्जीवाड़े में शामिल उनके 3 अन्य सहयोगी फिलहाल फरार चल रहे हैं जो अब 25 हजार के इनामी बन चुके हैं। काफी खोजबीन के बाद भी न मिलने पर पुलिस इन चारों के खिलाफ अदालत से कुर्की के आदेश भी ले चुकी है।

मासूम पिल्ले को पकड़कर पटका रोड पर, फिर पैरों से कुचलकर ले ली जान: CCTV में रिकॉर्ड हुई वीभत्सता, CM शिवराज बोले- होगी सख्त कार्रवाई

मध्य प्रदेश के गुना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक युवक ने एक पिल्ले को जमीन पर बेरहमी से पटक दिया, इसके बाद उसे पैरों से कुचलकर मार डाला। वो व्यक्ति सड़क के किराने बैठा हुआ था, तभी कुछ खाना पाने की आस में दो पिल्ले उसके पास पहुँचे थे। इतने में बौखलाए युवक ने पूरी बेहरमी से एक पिल्ले को मार डाला।

इस वायरल वीडियो को शेयर कर लोग कार्रवाई की माँग कर रहे थे, जिसे रोहन दुआ नाम के पत्रकार ने भी शेयर किया और एमपी पुलिस के साथ ही केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को ट्वीट किया।

ये वीडियो सीसीटीवी फुटेज का है, जिसमें युवक एक बंद दुकान के सामने बैठा है, तभी दो पिल्ले उसके पास आते हैं और चंचलता से उसे सूंघते हैं। इसके बाद अचानक युवक एक पिल्ले को पकड़ लेता है, फिर उसे जोर से जमीन पर फेंक देता है और तब तक उसे लात मारता है, जब तक कि वह मर नहीं जाता।

इस वीडियो में पिल्ले के साथ वीभत्सता देख लोग हैरत में और गुस्से में हैं। इसी वीडियो को रोहन दुआ ने शेयर किया, तो केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी परेशान हो उठे। उन्होंने एक्स पर वीडियो को शेयर करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से यह सुनिश्चित करने की अपील की कि अपराधी को कड़ी सजा मिले।

सिंधिया ने लिखा, “यह भयावह और परेशान करने वाला है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि उस व्यक्ति को इस बर्बरता के लिए दंडित किया जाना चाहिए। श‍िवराज जी, कृपया देखें।”

इस वीडियो पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह तौहान ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अपराधी को कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने लिखा, “भयानक घटना से बहुत परेशान हूँ। न्याय सुनिश्चित करने के लिए त्वरित और सख्त कार्रवाई की जाएगी। हम बर्बरता के ऐसे कृत्यों की स्पष्ट रूप से निंदा करते हैं और जिम्मेदार व्यक्ति को परिणाम भुगतना होगा।”

पिल्ले के साथ बर्बरता करने वाले की पहचान मृत्युंजय सिंह के रूप में हुई है, वो गुना जिले के राधा कालोनी का रहने वाला है। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को दी BSP की जिम्मेदारी, 15 साल पहले कहती थीं परिवार से नहीं होगा उत्तराधिकारी

बहुजन समाज पार्टी में मायावती के बाद अब पार्टी का कामकाज आकाश आनंद संभालेंगे, जो मायावती के छोटे भाई आनंद कुमार के बेटे और मायावती के भतीजे हैं। लखनऊ में बीएसपी की बैठक में इस बात का आधिकारिक ऐलान कर दिया गया है। हालाँकि मायावती ने अब से 15 साल पहले प्रकाशित हुई अपनी आत्मकथा में कहा था कि उनके बाद बीएसपी का नेतृत्व कोई दलित करेगा, जो उनके परिवार से नहीं होगा। ये अलग बात है कि आकाश आनंद उनके ही परिवार के हैं।

बहुजन समाज पार्टी (BSP) की प्रमुख मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया है। यह घोषणा 10 दिसंबर 2023 को पार्टी की एक बैठक में की गई थी। मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया है। यह पद पार्टी का सर्वोच्च कार्यकारी पद है। आकाश आनंद मायावती के छोटे भाई आनंद कुमार के बेटे हैं। वह पिछले कई वर्षों से BSP में सक्रिय हैं और पार्टी के युवा नेताओं में से एक हैं।

हाल ही में संपन्न हुए 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी का नेतृत्व करने का जिम्मा दिया था। उसी समय लगभग ये तय हो गया था कि उनके नाम की आधिकारिक घोषणा जल्द की जा सकती है। अब बीएसपी में लंबे समय से नंबर 2 पर रहे सतीष चंद्र मिश्रा के पायदान पर आकाश आनंद को लाया गया है। सतीष चंद्र मिश्रा पहले की तरह पार्टी का कामकाज देख रहे थे, लेकिन अब वह पार्टी में नंबर 2 पर नहीं हैं।

अपने ही वादे से मुकर गईं मायावती

मायावती का जन्म गौतमबुद्ध नगर के बादलपुर गाँव में हुआ था। उनका जीवन काफी संघर्षमय रहा। उन्होंने पढ़ाई करके शिक्षक की नौकरी पार्टी की, लेकिन काँशी राम के प्रभाव से बीएसपी में शामिल हो गईं और 4 बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रही। उन्होंने 15 साल पहले प्रकाशित अपनी आत्मकथा ‘मेरे संघर्षमय जीवन का सफरनामा‘ में लिखा था कि बीएसपी का अगला नेतृत्वकर्ता उन्हीं की तरह दलित और वंचित समाज से होगा। जो उनसे 30-35 साल छोटा होगा। ऐसे में वो पार्टी का लंबे समय तक नेतृत्व कर सकेगा। उन्होंने कहा था कि बीएसपी का अगला नेता उनके परिवार से नहीं होगा।

ये अलग बात है कि 15 जनवरी 2008 को प्रकाशित हुई उनकी आत्मकथा के 15 साल बीत चुके हैं, लेकिन उन्हें कोई दलित नेता ऐसा नहीं मिला, जो बीएसपी का नेतृत्व कर सके। उन्होंने अपने से 39 साल छोटे भतीजे आकाश आनंद को अपनी और अपनी पार्टी बीएसपी का उत्तराधिकारी चुन लिया है। आकाश आनंद ने 2017 में बीएसपी को ज्वॉइन किया था और अब मायावती के बाद पार्टी की जिम्मेदारी वही संभालेंगे।

अभी उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड को छोड़ पूरे देश का जिम्मा संभालेंगे आकाश

बीएसपी नेता उदयवीर सिंह ने बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में कहा, “बहनजी ने कहा कि मेरे न रहने पर आकाश आनंद पार्टी के उत्तराधिकारी होंगे। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड को छोड़ कर पार्टी की निगाह में कमजोर राज्यों में आकाश आनंद काम करेंगे। मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं से लोकसभा चुनाव की तैयारी में लग जाने को कहा।” आकाश आनंद पिछले कुछ सालों से बीएसपी का कामकाज देख ही रहे थे। वो पार्टी की सोशल मीडिया की टीम का भी नेतृत्व कर रहे थे।

बहुजन समाज पार्टी की विशेष राष्ट्रीय बैठक में मायावती ने कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि बड़ी राजनीतिक पार्टियाँ गरीबों से झूठे वादे करती हैं, और उन्हें पूरे नहीं करती। एक अकेली बहुजन समाज पार्टी है, जो समाज के सभी वर्गों के हितों का ध्यान रखती है और सर्वजन सुखाय की कामना करती है। उन्होंने कहा कि ‘वोट हमारा, राज तुम्हारा’ वाली कार्यशैली को खत्म करने का समय आ चुका है।

बता दें कि आकाश आनंद ने विदेश से एमबीए की पढ़ाई की है। वो लोकसभा चुनाव 2019 से ही लगातार पार्टी में सक्रिय हैं। उन्हें कई महत्वपूर्ण अभियानों की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। आकाश आनंद ने राजस्थान विधानसभा चुनाव के मद्देनजर साढ़े तीन हजार किलोमीटर की ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय संकल्प यात्रा’ शुरू थी। इस यात्रा को ‘बहुजन अधिकार यात्रा’ भी नाम दिया गया था।

आकाश आनंद को 2019 में लोकसभा चुनाव के दौरान राजस्थान में बीएसपी ने अपना स्टार प्रचारक भी बनाया था। इसके बाद से वो लगातार सभी चुनावों में पार्टी का नेतृत्व करते दिखते हैं। आकाश आनंद ने हाल ही में हुए चार चुनावों, खासकर मध्य प्रदेश और राजस्थान में प्रमुख जिम्मेदारियां निभाईं। हाल के विधानसभा चुनावों में बसपा ने राजस्थान में दो सीटें जीतीं लेकिन मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में उसे कोई सीट नहीं मिली।

जैसे प्रभु श्रीराम ने दिया हो शबरी को सम्मान… छत्तीसगढ़ को 20 साल बाद मिला जनजातीय CM, समुदाय के लोगों ने BJP का अभार जताया

भारतीय जनता पार्टी ने छत्तीसगढ़ के लिए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा कर दी है। घोषणा के मुताबिक विष्णु देव साय छत्तीसगढ़ के अगले मुख्यमंत्री होंगे। वे 2 बार विधायक, 2 बार केंद्रीय राजयमंत्री, 2 बार प्रदेश अध्यक्ष और 4 बार सांसद रह चुके हैं। विष्णु देव का छत्तीसगढ़ में जनजातीय समाज का एक बड़ा चेहरा माना जाता है। विष्णु देव साय के नाम की घोषणा रविवार (10 दिसंबर 2023) को हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विष्णु देव साय कॉन्ग्रेस के अजीत जोगी (9 नवम्बर 2000 – 6 दिसम्बर 2003) के बाद छत्तीसगढ़ के दूसरे ऐसे मुख्यमंत्री होंगे जो जनजातीय समुदाय से आते हैं। उनके नाम पर अंतिम मुहर लगाने से पहले रायपुर में भाजपा के तमाम पदाधिकरियों की लम्बी मीटिंग चली। इस मीटिंग में सभी विधायक और पर्यवेक्षक मौजूद थे। कई विकल्पों पर मंथन के बाद आखिरकार सभी ने विष्णु देव साय के नाम पर सहमति जताई। विष्णु देव साय मुख्यमंत्री के संभावित चेहरों में भी एक थे।

माना यह भी जा रहा है कि जल्द ही छत्तीसगढ़ में एक उपमुख्यमंत्री की भी घोषणा हो सकती है। छत्तीसगढ़ जनजातीय बहुल प्रदेश है जहाँ इनकी आबादी लगभग 33% है। साल 2023 के चुनावों में छत्तीसगढ़ में जनजातीय समुदाय भारतीय जनता पार्टी के साथ दिखा था। कुल 90 विधानसभा सीटों में से 20 पर भाजपा के टिकट पर जनजातीय प्रत्याशी चुनाव जीते हैं। माना जा रहा है कि विष्णु देव साय की जीत के साथ भाजपा ने 2024 लोकसभा चुनावों के लिए बड़ा दाँव खेला है।

इंडिया TV मुताबिक छत्तीसगढ़ के कई जनजातीय लोगों ने कहा, “जैसे भगवान श्री राम ने शबरी को सम्मान दिया था वही भाजपा ने हमारे समुदाय के व्यक्ति को मुख्यमंत्री बना कर दोहराया है।” बताते चलें कि विधानसभा चुनाव से पहले छत्तीसगढ़ कॉन्ग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी पर जनजातीय विरोधी होने का आरोप लगाया था। तब कॉन्ग्रेस नारा दे रही थी कि जल, जंगल और जमीन जनजातीय लोगों की है जिस पर भाजपा कब्ज़ा करना चाहती है। हालाँकि बावजूद इसके जनजातीय लोगों ने मतदान के दौरान अपना विश्वास भाजपा पर दिखाया।

विष्णु देव साय छत्तीसगढ़ के कुनकुरी विधानसभा से लगातार तीसरी बार भाजपा के विधायक बने हैं। उन्होंने कॉन्ग्रेस कैंडिडेट को 25,541 वोटों से हराया था। अपने नाम की घोषणा के बाद विष्णु देव साय ने पार्टी हाईकमान का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने अपने एक छोटे से कार्यकर्ता पर इतना विश्‍वास जताया और राज्‍य का नेतृत्‍व करने का दायित्‍व दिया है। उन्‍होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, अमित शाह, जेपी नड्डा का भी आभार जताया।