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भारत में ISIS की तोड़ी जा रही कमर: 13 गिरफ्तार, 44 ठिकानों पर चल रही छापेमारी, बनाते थे काफिरों (गैर-मुस्लिमों) की हत्या का प्लान

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने महाराष्ट्र और कर्नाटक में 44 ठिकानों पर छापेमारी की है। यह छापेमारी इस्लामी आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ऑफ़ इराक एंड सीरिया (ISIS) के आतंकियों की जाँच के सम्बन्ध में चल रही है। यह मामला ISIS के पुणे मॉड्यूल से जुड़ा हुआ है।

NIA ने यह छापेमारी ठाणे ग्रामीण में 31 स्थानों पर, ठाणे शहर में 9 जगह पर और पुणे में 2 जगह तथा मुंबई और कर्नाटक में 1-1 जगह पर की है। अभी तक सामने आई जानकारी के अनुसार, इस छापेमारी में NIA ने ISIS से संबंधित 13 लोगों को गिरफ्तार किया है। यह 13 लोग पुणे से गिरफ्तार किए गए हैं।

गौरतलब है कि बीते दिनों NIA ने ISIS के पुणे मॉड्यूल का खुलासा किया था। NIA द्वारा इस मामले में लगाई गई चार्जशीट में कई अहम खुलासे किए गए थे। इस पुणे मॉड्यूल में सात सदस्यों के होने की जानकारी दी गई थी। यह सभी सदस्य दिन में नामी कम्पनियों में काम करते थे और रात में देश-विरोधी साजिश रचते थे।

आतंक के इस पुणे मॉड्यूल के खिलाफ राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने 4 नवंबर 2023 को कोर्ट में चार्जशीट दायर कर दी थी। इस चार्जशीट से पता चला था कि आतंकियों ने काफिरों (गैर-मुस्लिमों) की हत्या का प्लान बनाया था और वे भारतीय संविधान को ‘हराम’ (गैर-इस्लामी) मानते थे।

चार्जशीट के हवाले से बताया गया था कि आरोपित विस्फोटक बनाने के लिए कोडवर्ड का इस्तेमाल करते थे। हमलों के लिए महाराष्ट्र के कुछ स्थानों की रेकी भी की गई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक नामी कंपनियों में काम करने वाले ये सभी आतंकी IED बनाने और उसका परीक्षण करने के काम पर जुटे थे।

IED बनाने के लिए ये सभी कोडवर्ड में बात किया करते थे। सल्फ्यूरिक एसिड के लिए सिरका, हाइड्रोजन परॉक्साइड के लिए शर्बत और एसीटोन के लिए गुलाब जल जैसे कोडवर्ड का इस्तेमाल किया जा रहा था। बताते चलें कि IED बनाने के लिए सल्फ्यूरिक एसिड, एसीटोन और हाइड्रोजन परॉक्साइड जरूरी घटक हैं।

चार्जशीट में बताया गया था कि आतंकी IED बनाने के लिए आसानी से मिलने वाली चीजों का इस्तेमाल करते थे। इसमें वाशिंग मशीन टाइमर, थर्मामीटर, स्पीकर वायर, 12 वॉट का बल्ब, 9 वॉट की बैटरी, फिल्टर पेपर, माचिस की तीलियाँ और बेकिंग सोडा शामिल हैं।

विस्फोटक बनाने के बाद आरोपितों ने इसे ब्लास्ट करने के लिए महाराष्ट्र, गोवा, केरल और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में रेकी भी की थी। रेकी में फोटो और वीडियो बनाने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया गया था। इस मॉड्यूल का दिल्ली दंगों और शरजील इमाम से भी सम्बन्ध सामने आया था।

इस मामले में पकड़ा गया एक आरोपित जुल्फिकार मल्टीनेशनल आईटी कंपनी में सीनियर प्रोजेक्ट मैनेजर के पद पर 31 लाख के सालाना पैकेज पर काम कर रहा था। दूसरा आरोपित शाहनवाज माइनिंग इंजिनियर था। उसे विस्फोटकों की अच्छी जानकारी थी। तीसरा आरोपित कादिर पठान ग्राफिक्स डिजाइनर था।

जुल्फिकार अली बड़ौदावाला और पुणे निवासी जुबैर शेख ने साल 2015 में युवाओं को कट्टरपंथी बनाना शुरू कर दिया था। इसके लिए व्हाट्सऐप पर ग्रुप बनाकर आईएसआईएस के समर्थन में पोस्ट किए जाते थे।

एनआईए ने एक गवाह के हवाले से विस्तार में इसकी जानकारी दी थी कि कैसे वह 2011-2012 में जुबैर शेख के संपर्क में आया था, जिसे एनआईए ने एक अन्य मामले में गिरफ्तार किया है। एक गवाह ने कहा था कि साल 2014 में शेख ने उसे ‘यूनिटी इन मुस्लिम उम्मा’ और ‘उम्मा न्यूज’ नाम के व्हाट्सऐप ग्रुपों में जोड़ा था।

इसी मामले में उत्तर प्रदेश से UP ATS ने इस पुणे मॉड्यूल और दिल्ली मॉड्यूल के स्वघोषित खलीफा वजीहुद्दीन को गिरफ्तार किया था। वजीहुद्दीन इन दोनों मॉड्यूल का सरगना था। उसके गुर्गों ने उसके आदेश पर गाजियाबाद के यति नरसिम्हा सरस्वती जैसे ‘निशानों’ की पहचान की थी।

इतना ही नहीं, आईएसआईएस के पुणे मॉड्यूल के सदस्य शहनवाज के साथ मिलकर वो धमाकों की ट्रेनिंग भी शुरू कर चुका था। वजीहुद्दीन उत्तर प्रदेश के रामपुर, संभल, अलीगढ़ से लेकर प्रयागराज तक अलग-अलग गुर्गों के माध्यम से भारत के खिलाफ ‘जेहाद’ के लिए ‘इस्लामिक फौज’ तैयार कर रहा था।

इससे पहले इस मामले पर ऑपइंडिया ने अपनी रिपोर्ट में यह बताया था कि कैसे वजीहुद्दीन सामू (SAMU) से लेकर एएमयू (AMU) तक, दिल्ली से लेकर प्रयागराज तक आईएसआईएस से जुड़े लोगों के लिए ‘अमीर’ की तरह था। उसके गुर्गे सोशल मीडिया पर भी उसका गुणगान करते थे और उसे ‘अमीर’ कहकर संबोधित करते थे। मुस्लिम देशों में ‘अमीर’ का मतलब शासक होता है।

वजीहुद्दीन ने शुरुआत में आईएसआईएस के ओजीडब्ल्यू (ओवर ग्राउंड वर्कर) के तौर पर काम शुरू किया और फिर सामू (SAMU- Students of AMU) जैसे संगठनों में खुद को ‘अमीर’ के तौर पर स्थापित कर लिया। वो ‘हया’ कार्यक्रम के जरिए बाकायदा मजलिसों का आयोजन करता था और इस्लामिक भाषण देता था।

वजीहुद्दीन मूल रूप से छत्तीसगढ़ के दुर्ग का रहने वाला है। वो एएमयू में पीएचडी करने के साथ ही जूनियर छात्रों को सामाजिक विज्ञान विषय (इतिहास, भूगोल और नागरिक शास्त्र) पढ़ाता था। उसके छात्रों में हिंदू छात्र भी शामिल हैं।

BJP को क्यों वोट दिया था तूने : MP में मुस्लिम महिला को देवर जावेद ने डंडे से पीटा, हिंदू पड़ोसी ने आकर जान बचाई

मध्य प्रदेश के सीहोर में भाजपा को वोट देने पर एक मुस्लिम महिला को उसके देवर ने बुरी तरह पीट दिया। महिला ने अहमदपुर पुलिस थाने में इस संबंध में शिकायत दी है। मामला बरखेड़ा हसन गाँव में 4 दिसंबर 2023 है। पीड़िता का नाम समीना है जिनके साथ देवर ने बदसलूकी चुनावी नतीजे आने के बाद की।

बताया जा रहा है कि शिवराज सरकार की ‘लाडली बहना योजना’ से खुश होकर समीना ने भाजपा को वोट दिया था और 4 दिसंबर को प्रदेश में दोबारा भाजपा आती देख वह और उनके बच्चे उसी की खुशी मनाने लगे। ऐसे में उनका देवर जावेद खां आया और उनसे गाली-गलौच करने लगा।

जब पीड़िता के परिवार ने जावेद का विरोध किया तो उनके साथ मारपीट भी हुई। समीना के मुताबिक उन्हें थप्पड़ मारे गए, घूँसे मारे गए और डंडों से पीटा गया। पीड़िता का कहना है कि घटना के वक्त जावेद के साथ उसकी बीवी भी थी जो बाँस का डंडा देकर कह रही थी- मारो इनको।

दोनों लोग उनके परिवार से मारपीट कर रहे थे। ऐसे में जब वो चीखने चिल्लाने लगे तो पड़ोसी पंडित विद्या सागर ने आकर उनकी मदद की। बाद में समीना ने इस संबंध में थाने में जाकर शिकायत दी, लेकिन अब तक देवर को गिरफ्तार नहीं किया गया है। उन्होंने अब जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया है। वह जल्द से जल्द इस मामले में कार्रवाई चाहती हैं।

वहीं पुलिस का कहना है कि उन्होंने इस केस में आईपीसी की धारा 294, 323,506 और 32 के तहत एफआईआर कर ली है और इस मामले में जाँच भी चल रही है। जावेद अभी फरार है। जल्द ही उसे पकड़ा जाएगा। मामले की जानकारी होने पर राष्ट्रीय पंससमदा मुस्लिम महासंघ के अध्यक्ष (मध्य प्रदेश इकाई) नौशाद खान ने घटना की निंदा की।

बता दें कि ये पहली घटना नहीं है जहाँ मुस्लिम महिला द्वारा भाजपा को वोट देने पर उसके घरवालों ने उससे मारपीट की। बरेली की एक महिला ने भी शिकायत दी थी कि उसने भाजपा को वोट दिया था जिसके कारण उसके साथ मारपीट हुई, उसे घर से निकाला गया और तीन तलाक की धमकी दी गई।

’15 मिनट के लिए पुलिस हटा दो’ वाले अकबरुद्दीन ओवैसी के सामने नहीं लूँगा शपथ, वो रजाकारों का वंशज: भाजपा विधायक टी राजा सिंह

हाल ही में संपन्न हुए तेलंगाना विधानसभा चुनाव में चुनकर आए विधायकों को शपथ दिलाने के लिए AIMIM के विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी को प्रोटेम स्पीकर बनाने के फैसले पर विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा विधायक टी राजा सिंह ने कहा है कि वह प्रोटेम स्पीकर बनाए गए अकबरुद्दीन ओवैसी के हाथों कभी भी विधायक पद की शपथ नहीं लेंगे।

टी राजा सिंह ने कहा है कि ओवैसी कासिम रिजवी के वंशज हैं, जो हैदराबाद के निजाम की रजाकार सेना के मुखिया थे। इन रजाकारों ने तेलंगाना के लोगों का नरसंहार किया था। ऐसे में वह अकबरुद्दीन के स्पीकर की कुर्सी पर रहते शपथ नहीं ले सकते। गौरतलब है कि नई विधानसभा या नई संसद के चुने जाने पर किसी वरिष्ठ सदस्य को प्रोटेम यानी अस्थाई स्पीकर बनाया जाता है, जो सभी विधायकों या फिर सांसदों को उनके पद की शपथ दिलाता है।

प्रोटेम स्पीकर स्थायी स्पीकर के चुने जाने तक काम करता है। अकबरुद्दीन ओवैसी हैदराबाद की चंद्रायानगुट्टा सीट से विधायक चुनकर आए हैं। जबकि टी राजा सिंह हैदराबाद की ही गोशामहल सीट से पुनः विधायक चुने गए हैं।

टी राजा सिंह ने राज्य के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की अगुवाई वाली नई नवेली कॉन्ग्रेस सरकार पर तुष्टिकरण का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है चुनाव के दौरान कॉन्ग्रेस का कहना था कि भाजपा और भारत राष्ट्र समिति आपस में मिले हुए हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब साफ-साफ दिख रहा है कि कौन किससे मिला हुआ है और कौन नहीं।

टी राजा सिंह तेलंगाना में भाजपा के फायर ब्रांड नेता हैं, जो अक्सर अपने बयानों की वजह से चर्चा में बने रहते हैं। जबकि अकबरुद्दीन ओवैसी सांसद असदुद्दीन ओवैसी के छोटे भाई हैं और उन्हें विवादित बयान देने के चक्कर में जेल की हवा भी खानी पड़ चुकी है।

भाजपा विधायक टी राजा सिंह ने कहा है कि वह इस सामूहिक शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं होंगे और अकबरुद्दीन ओवैसी के सामने कभी भी शपथ नहीं लेंगे। वह अगले दिन स्पीकर के चेंबर में जाकर शपथ ले लेंगे। विधायक टी राजा सिंह का कहना है कि वह ऐसे व्यक्ति के सामने शपथ कैसे ले सकते हैं, जिसने यह कहा था कि यदि 15 मिनट के लिए पुलिस हटा दी जाए तो हिंदुओं का खात्मा कर दिया जाएगा।

गौरतलब है कि वर्ष 2012 में अकबरुद्दीन ओवैसी ने एक विवादित बयान दिया था कि मुसलमान 25 करोड़ हैं और हिंदू 100 करोड़ लेकिन अगर 15 मिनट के लिए देश में पुलिस हटा दी जाए तो बता दिया जाएगा कि कौन कितना ताकतवर है।

राजा सिंह का कहना है कि वह भाजपा के विधायक दल की बैठक में शामिल होंगे और इस पर बात करेंगे कि अन्य नए चुने हुए विधायक उनकी बात से सहमत हैं या नहीं। भाजपा ने हाल ही में संपन्न हुए तेलंगाना विधानसभा चुनाव में आठ सीटें जीती हैं, जो अब तक उसका राज्य में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।

इससे पहले वर्ष 2018 के चुनाव में केवल राजा सिंह ही भाजपा से जीत पाए थे। इससे पहले शुक्रवार (8 दिसम्बर 2023) को तेलंगाना की गवर्नर सौन्दरराजन ने अकबरुद्दीन ओवैसी को प्रोटेम स्पीकर बनाने के लिए नोटिफिकेशन जारी किया था क्योंकि वह तेलंगाना विधानसभा में सबसे वरिष्ठ विधायक हैं।

अकबरुदीन ओवैसी चन्द्रयानगुट्टा से छठी बार विधायक चुने गए हैं। वह शनिवार (09 दिसम्बर 2023) तक के लिए ही स्पीकर रहेंगे और इस दौरान नया स्थायी स्पीकर चुन लिया जाएगा।

असम में 1 करोड़ मुस्लिम… इनमें असमिया सिर्फ 40 लाख: हिमंता सरकार करेगी सामाजिक-आर्थिक मूल्यांकन, कैबिनेट ने दी मंजूरी

असम कैबिनेट ने शुक्रवार (8 जनवरी 2023) को राज्य की मूल मुस्लिम आबादी के सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण को मंजूरी दे दी। इस फैसले के तहत असम के पाँच स्वदेशी मुस्लिम समुदायों- गोरिया, मोरिया, देशी, सैयद, जोल्हा के सामाजिक-आर्थिक मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू होगी।

जानकारी के मुताबिक, इस फैसले से पहले जनता भवन में कैबिनेट बैठक आयोजित हुई, जिसके बाद कैबिनेट मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने बताया कि कैबिनेट ने चार क्षेत्र विकास निदेशालय, असम का नाम बदलकर अल्पसंख्यक मामले और चार क्षेत्र, असम निदेशालय करने का फैसला किया है। इस फैसले के पीछे का कारण है कि मूल जनजातीय अल्पसंख्यकों का व्यापक सामाजिक-राजनीतिक और शैक्षणिक उत्थान किया जाए।

रिपोर्ट्स के अनुसार, 2011 में जो जनगणना हुई थी, उसके मुताबिक, असम की 34% से अधिक आबादी मुसलमानों की है, जो लक्षद्वीप और जम्मू-कश्मीर के बाद सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तीसरी सबसे बड़ी आबादी है।

ये भी बताया जा रहा है कि राज्य की कुल आबादी 3.1 करोड़ में से 1 करोड़ से अधिक मुस्लिम हैं। जिनमें से केवल 40 लाख मूल निवासी, असमिया भाषी मुस्लिम हैं, और बाकी बांग्लादेशी मूल, बंगाली भाषी आप्रवासी हैं। इससे पहले अक्टूबर में, हिमंत सरकार ने स्वदेशी मुस्लिम समुदायों का सामाजिक-आर्थिक मूल्यांकन करने की योजना की घोषणा की थी।

मुख्यमंत्री ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा था, “ये निष्कर्ष सरकार को राज्य के स्वदेशी अल्पसंख्यकों के व्यापक सामाजिक-राजनीतिक और शैक्षिक उत्थान (एसआईसी) के उद्देश्य से उपयुक्त उपाय करने के लिए मार्गदर्शन करेंगे।”

हिमंता सरकार ने गोरिया, मोरिया, जोलाह, देसी और सैयाद समुदायों को मूल असमिया मुसलमानों के रूप में वर्गीकृत किया था, जिनके पास पहले पूर्वी पाकिस्तान और अब से प्रवास का कोई इतिहास नहीं है।

माना जाता है कि ये समुदाय 13वीं से 17वीं शताब्दी के मध्य इस्लाम में परिवर्तित हुए थे, जिनकी मातृभाषा बंगाली नहीं असमिया ही है और इनकी संस्कृति हिंदुओं से मिलती-जुलती है। ऐसे ही गोरिया-मोहिया, जिन्होंने अहोम राजाओं के लिए काम किया था वो हकीकत में कोच राजबोंग्शी लोग थे, जो इस्लाम में परिवर्तित हो गए थे। इसी तरह जिन मुस्लिमों को ब्रिटिश छोटानागपुर से चाय बागानों में काम करने के लिए लाए वो जोल्हा हो गए और सूफी संतों के अनुयायी सैयद हो गए।

अचानक हार्ट अटैक से हो रही युवाओं की रहस्यमयी मौतों के पीछे कोरोना वैक्सीन? संसद में उठा सवाल तो सरकार ने दे दिया जवाब, ICMR के अध्ययन से बड़ा खुलासा

पिछले कुछ महीनों में अचानक से हार्ट अटैक से मौत की कई खबरें सामने आई हैं। कई ऐसे वीडियो आए हैं, जिनमें देखा जा सकता है कि युवाओं को अचानक से हार्ट अटैक आ गए और उनकी मौत हो गई। इससे एक प्रकार के भय का माहौल बना। अब संसद में भी ये मामला उठा है। सोशल मीडिया का एक धड़ा इसके लिए कोरोना वैक्सीन को जिम्मेदार ठहरा रहा था। अब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने संसद के शीतकालीन सत्र के दर्जन खुद ही इसका जवाब दिया है।

बता दें कि ‘भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR)’ ने एक अध्ययन किया है और पाया है कि हार्ट अटैक के कारण हो रही रहस्यमयी मौतों के पीछे कोरोना वैक्सीन नहीं है। भारत सरकार ने शुक्रवार (8 दिसंबर, 2023) को इसे साफ़ कर दिया है। पिछले दिनों सामने आए वीडियो में कहीं शादी में दुल्हन की मृत्यु हो गई, कहीं नाचते-नाचते युवक की, कहीं छींक आते गिर कर मौत हो गई तो कहीं कोई व्यक्ति खेलते-खेलते ही चल बसा। इन सभी वीडियो के बाद तरह-तरह की चर्चाएँ जोर पकड़ने लगीं।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने बताया है कि कोविड-19 महामारी के बाद अचानक से अस्पताल में भर्ती होने के पीछे परिवार का मेडिकल इतिहास और एक खास प्रकार की जीवनशैली है। उनसे सवाल किया गया था कि क्या अचानक हो रही मौतों और कोरोना वैक्सीन के बीच कोई तार है? जिन लोगों को कोरोना हुआ था, उनमें से कुछ की अचानक मौतें हुई हैं। ICMR ने 18-45 वर्ष आयु समूह में अध्ययन कर के निष्कर्ष निकाला है कि इसमें वैक्सीन का कोई रोल नहीं है।

मंत्री द्वारा दी गई जानकारी की मानें तो ये पाया गया कि कोविड​​-19 वैक्सीन की कम से कम एक खुराक प्राप्त करने से रहस्यमयी अचानक मृत्यु की संभावना कम हो गई, जबकि पिछली कोरोना महामारी में अस्पताल में भर्ती, अचानक मृत्यु का पारिवारिक इतिहास, मृत्यु से 48 घंटे पहले अत्यधिक शराब पीना, का उपयोग मनोरंजक दवा/पदार्थ और मृत्यु/हार्ट अटैक से 48 घंटे पहले तीव्र तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि करना इन सबका कारण पाया गया।

आँखों में मिर्ची झोंकी, 35 बार चाकू से वार कर मार डाला: बिहार में दिन-दहाड़े सड़क पर हत्या, बिहार में 1 साल में साढ़े 3 लाख आपराधिक घटनाएँ

बिहार की नीतीश सरकार के राज में कानून-व्यवस्था एकदम से चरमरा गई है। अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि वह दिनदहाड़े बीच सड़क पर लोगों की हत्या कर रहे हैं। ऐसा ही एक मामला बिहार के नवादा से सामने आया है जहाँ एक युवक की चाकुओं से गोद कर हत्या कर दी गई।

जानकारी के अनुसार, नवादा शहर के केएलएस कॉलेज के पास में 21 वर्षीय राहुल कुमार को चाकुओं से 35 बार गोद कर बीच सड़क में मार दिया गया। इस दौरान जनता यह क़त्ल होते देखती रही। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है।

राहुल की हत्या करने से पहले उसकी आँखों में मिर्च झोंकी गई और फिर उसे मार दिया गया। बताया गया है कि राहुल के जानने वाले एक युवक ने उसे फ़ोन करके बुलाया था। इसके पश्चात राहुल यहाँ KLS कॉलेज के पास पहुँचा था। राहुल के हत्यारे अब भी पुलिस की गिरफ्तार से बाहर हैं।

उसके यहाँ पहुँचते ही उसकी आँखों में मिर्च झोंक दी गई। मिर्च के कारण परेशान राहुल पर ताबड़तोड़ चाकू से वार किए गए जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। राहुल की बहन प्रीति ने मीडिया को बताया है कि वह फ़ोन आने के 15 मिनट के बाद घर से निकला था। राहुल की माँ सावित्री देवी नवादा पुलिस में सिपाही है।

नवादा पुलिस के SDPO ने अजय प्रसाद ने इस मामले में बताया है, “आज दिनांक 8 दिसम्बर, 2023 को नगर थाना नवादा में सूचना मिली कि एक 20 वर्षीय युवक राहुल कुमार पुत्र वासुदेव साव की हत्या एक 30-35 वर्षीय युवक द्वारा चाकू मार हत्या कर दी गई है। पुलिस घटनास्थल पर पहुँच कर हमलावरों की पहचान स्थापित करने का प्रयास कर रही है।”

पुलिस ने बताया है कि घटना का सीसीटीवी फुटेज मिल गया है। इसमें दिखा है कि मृतक राहुल पर चाकू से कई वार किए गए। पुलिस का कहना है कि वह आरोपित की पहचान करने का प्रयास कर रहे हैं। पुलिस ने शव का पंचनामा कर उसे पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया है।

बिहार के नवादा में यह एक सप्ताह के भीतर हुई दूसरी जघन्य हत्या है। इससे पहले 4 दिसम्बर को भी एक महिला और उसकी 6 वर्षीय बच्ची की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया था जो कि मृतका का परिजन ही निकला था।

बिहार की नीतीश सरकार कानून व्यवस्था के मामले विफल रही है। हाल ही में आई राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2021 के मुकाबले वर्ष 2022 में बिहार में 23% अधिक आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। वर्ष 2022 में अपराध के 3.47 लाख मामले दर्ज हुए हैं जो कि 2021 के दौरान 2.82 लाख थे। वहीं वर्ष 2021 के दौरान प्रदेश में हत्या के 2799 मामले सामने आए थे जो कि वर्ष 2022 में बढ़कर 2930 हो चुके हैं।

अलका से बनी अस्तित्व, फिर बहन की सहेली आस्था से कर ली शादी… युवा होने पर इंदौर की लड़की ने करवाया लिंग परिवर्तन, सर्जरी करा के बन गई लड़का

इंदौर से एक ऐसा मामला सामने आया है जहाँ एक महिला लिंग परिवर्तन करवा कर पुरुष बनी और फिर एक अन्य महिला से शादी कर ली। इस शादी को विशेष विवाह अधिनियम के तहत मान्यता भी मिल गई है। शादी करने वाले जोड़े का नाम अस्तित्व-आस्था है। इस विवाह में परिवार के लोग भी शामिल रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश के इंदौर की रहने वाले अस्तित्व सोनी जन्म से लड़की थे। उनके माता-पिता ने इसी के अनुसार उनका नाम अलका सोनी रखा था। हालाँकि, युवावस्था आने पर अलका को यह महसूस हुआ कि वह लड़कियों जैसा नहीं बल्कि लड़कों जैसा महसूस करती हैं।

इसके बाद उन्होंने निजी स्तर पर अपनी पहचान बदल ली। इस काम में उन्हें काफी दिक्कतें आई, उनके परिवार ने भी शुरुआत में बदनामी के डर से उनका साथ नहीं दिया। हालाँकि, उन्होंने अपने मन की सुनते हुए लड़का बन जाने की ठान ली। इसके लिए उन्होंने पुरुषों जैसे दाढ़ी-मूँछ-बाल रखने और वैसे ही कपड़े पहनने चालू कर दिए। इसके बाद वर्ष 2023 में आखिर में उन्होंने अपना लिंग परिवर्तन करवाने का फैसला किया। इसके लिए उन्होंने न्याय एवं और अधिकारिता मंत्रालय के पास आवेदन किया।

न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय से मंजूरी मिलने के पश्चात वह एक मनोरोग विशेषज्ञ से मिले। इसी के साथ इंदौर जिला प्रशासन को उन्होंने आवेदन किया। सारी कागजी प्रकिया पूरी करने उन्होंने मुंबई में मार्च 2023 में अपना ऑपरेशन करवा लिया था।

ऑपरेशन करवाने के बाद वह अपनी बहन की सहेली आस्था को शादी के लिए मना रहे थे जिनके मानने पर उन्होंने आगे शादी की प्रक्रिया चालू की। इसके लिए कुछ दिनों पूर्व इंदौर के कोर्ट में आवेदन दिया था। इस पर विचार करने के बाद अपर कलेक्टर ने उन्हें इस विवाह की अनुमति दे दी। अस्तित्व और आस्था ने 7 दिसम्बर को यह शादी कोर्ट में कर ली जिसमें कुछ परिवारजन भी शामिल हुए। उनकी शादी विशेष विवाह अधिनियम के तहत हुई है। इन दोनों का कहना है कि वह अब वैदिक रीति रिवाज से भी शादी करेंगे।

पास पड़े ₹8000 करोड़ खर्च नहीं कर पाए, केंद्र से माँगते रहे पैसे: पंजाब CM भगवंत मान ने सचिवों को दिए ‘जुगाड़’ खोजने के निर्देश, AAP के प्रोपेगंडा का पर्दाफाश

भीषण आर्थिक संकट का सामना करने वाली पंजाब की ‘आम आदमी पार्टी’ (AAP) की सरकार केंद्र से मिले ₹8000 करोड़ रुपए को खर्च नहीं कर पाई है। अब मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने सचिवों से ऐसे जुगाड़ सोचने को कहा है कि जिससे यह पैसा केंद्र को लौटाना ना पड़े।

पंजाब की सरकार को यह धनराशि केंद्र से विकास कार्यों के लिए मिली थी। वित्त वर्ष 2023-24 के लगभग 8 महीने बीत जाने के बाद भी इसमें से पंजाब सरकार मात्र ₹3000 करोड़ ही खर्च कर पाई है। यह स्थिति तब है जब आए दिन भगवंत मान केंद्र से नए फंड माँगते रहते हैं। पंजाब की खराब आर्थिक स्थिति के चलते भगवंत मान यह तक कह चुके हैं कि उन्हें केंद्र सरकार उनके द्वारा लिए कर्जों पर पाँच साल ना लौटाने की छूट दे। मगर जितना पैसा केंद्र सरकार से मिल रहा है, उनके अधिकारी उसे ही नहीं खर्च कर पा रहे हैं और मान से यह शिकायत कर रहे हैं कि केंद्र उन्हें पैसा नहीं दे रहा।

अंग्रेजी समाचार पत्र ‘इंडियन एक्सप्रेस‘ की एक खबर के अनुसार, हाल ही में मुख्यमंत्री भगवंत मान की राज्य के वरिष्ठ सचिवों के साथ हुई बैठक में यह पूरा मामला उठा। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने सचिवों पर इस बात के लिए गुस्सा जाहिर किया कि 8 महीने निकलने के बाद भी वह पैसा खर्च नहीं कर पाए हैं।

अगर नए बजट तक ऐसा नहीं होता है तो यह पैसा केंद्र सरकार को वापस चला जाएगा। सचिवों ने मुख्यमंत्री को भरोसा दिलाया है कि उन्होंने नए ठेके निकाल दिए हैं और जल्द ही वह फाइनल हो जाएँगे। ऐसे में यह धनराशि खर्च होगी और केंद्र को नहीं लौटानी पड़ेगी।

केंद्र से पहले ही मिले पैसे को खर्च ना कर पाने वाले अधिकारियों ने इस बैठक में भगवंत मान से शिकायत की कि उन्हें केंद्र सरकार ग्रामीण विकास समेत अन्य कई कामों के लिए पैसा नहीं दे रही है। उनकी यह भी शिकायत थी कि केंद्र सरकार स्वास्थ्य विभाग का पैसा भी रोक रहा है। दरअसल, बीते दिनों केंद्र सरकार ने भगवंत मान को हिदायत दी थी कि पंजाब में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों को आम आदमी पार्टी मोहल्ला क्लीनिक बनाकर प्रचार कर रही है, ऐसे में इसकी फंडिंग भी वह खुद करे। इसी को लेकर भगवंत मान की सरकार बौखलाई हुई है।

वित्त वर्ष 2022-23 के अंत तक पंजाब पर वर्तमान में ₹3.12 लाख करोड़ का कर्ज है। वर्ष 2022 में पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार आने से पहले यह कर्ज ₹2.82 लाख करोड़ था। भगवंत मान ने एक बयान में बताया था कि उनकी सरकार ने 18 महीनों में ₹47,107 करोड़ का कर्ज लिया है।

अक्टूबर 2023 में भगवंत मान ने राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित को लिखे गए एक पत्र में माँग की थी कि वह प्रधानमंत्री मोदी को इस बात के लिए मनाएँ कि पंजाब से पाँच वर्षों के लिए कर्ज वसूली रोक दी जाए। इस भीषण आर्थिक संकट के बाद भी पंजाब सरकार केंद्र सरकार से मिले विकास के पैसे को भी खर्च नहीं कर पा रही है। जब पूछा जा रहा है तो आम आदमी पार्टी की सरकार को गोलमोल जवाब दे रहे हैं।

‘भारत माता की जय अनुचित कार्य’: राजस्थान के मिशनरी स्कूल ने अभिभावकों को भेजा नोटिस, 8 छात्रों को किया निलंबित

राजस्थान के बाराँ जिले के अंता में स्थित इमैनुएल स्कूल अपने एक फैसले के कारण विवादों में है। स्कूल ने 8 छात्रों को सिर्फ इसीलिए निलंबित कर दिया, क्योंकि उन्होंने ‘भारत माता की जय’ कहा था। स्थानीय भाजपा नेताओं ने इसे तुगलकी फरमान बताते हुए विरोध दर्ज कराया है। उनका कहना है कि छात्रों को ‘भारत माता की जय’ कहने से रोका गया और एक सप्ताह के लिए 8 छात्रों को निलंबित किया गया। इसके विरोध में परिजनों ने विद्यालय पहुँच कर विरोध प्रदर्शन किया।

अंता के नव-निर्वाचित भाजपा विधायक कँवर लाल मीणा ने भी स्कूल प्रबंधन को फोन कर के कहा है कि वो छात्रों का निलंबन वापस ले। MLA ने पूछा कि आखिर ‘भारत माता की जय’ कहने से छात्रों को क्यों रोका गया? असल में बुधवार (6 दिसंबर, 2023) को ‘श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना’ के अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की हत्या की निंदा करते हुए एक जुलूस निकाला गया था। साथ ही विरोध प्रदर्शन भी चल रहा था, जो स्कूल के पास पहुँचा तो छात्रों ने भी समर्थन में नारेबाजी की।

इन छात्रों में शरद सोनी, कार्तिक मीणा, सौरभ मालव, तक्षित मालव, प्रेम गुर्जर, यथार्थ कुमावत, जतिन और हर्षित नागर शामिल थे। ये सभी कक्षा 9 में पढ़ते हैं। इन्होंने बाहर आकर ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए। इसके बाद स्कूल प्रशासन ने नियमों के उल्लंघन की बात करते हुए इन्हें नोटिस जारी कर दिया। अभिभावकों को भेजे गए पत्र में कहा गया कि कई बार समझाने के बावजूद छात्र नहीं माने, छात्रों का उचित मार्गदर्शन करें ताकि वो विद्यालय में कोई अनुचित कार्य न करें।

परिजन जब बात करने पहुँचे तो विद्यालय प्रशासन ने उनकी एक न सुनी। भाजपा कार्यकर्ताओं की माँग है कि ‘इमैनुएल मिशन स्कूल’ को मिली मान्यता रद्द की जाए। बाराँ के जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) को भी पत्र लिख कर न्याय की गुहार लगाई है। पत्र में पीड़ित छात्रों ने कहा है कि इस फैसले से वो अवसाद में हैं, ऐसे में उन्हें राहत प्रदान की जाए। सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की हत्या में संपत नेहरा और रोहित गोदारा जैसे लॉरेंस बिश्नोई के गुर्गों के नाम सामने आए हैं।

43 गेंद में 193 रन: छक्के-चौके से बनाए 188 रन, दौड़ कर सिर्फ 5 रन – ये है नया वर्ल्ड रिकॉर्ड

हमजा सलीम डार नाम के एक खिलाड़ी ने क्रिकेट जगत में नया रिकॉर्ड कायम कर दिया है। हमजा ने 43 गेंदों में 193 रन जड़ दिए हैं। हमजा ने एक लीग मुकाबले के दौरान यह कमाल किया। हमजा ने यह रिकॉर्ड यूरोपियन क्रिकेट के अंतर्गत स्पेन की टी10 क्रिकेट लीग में बनाया है। इस दौरान हमजा ने छक्कों और चौकों की मदद से 188 रन बनाए और मात्र पाँच रन ही सिंगल और डबल से बनाए।

यह मैच यूरोपियन क्रिकेट के अंतर्गत स्पेन की दो क्लब टीमों – कैटालुनिया जैगुआर्स और सोहाल हॉस्पिटलटेट के बीच हो रहा था। इस मैच में पहले बैटिंग करते हुए कैटालूनिया की टीम की तरफ से हमजा सलीम डार ने यह रिकॉर्ड कायम किया।

28 वर्षीय हमजा सलीम डार अपनी टीम कैटालूनिया जैगुआर्स की तरफ से ओपनिंग करने उतरे थे। इसके पश्चात उन्होंने विरोधी टीम सोहाल हॉस्पिटलटेट के गेंदबाजों को कूटना चालू किया। हमजा ने इस पारी के में 43 गेंदों में ही 193 रन जड़ दिए। उन्होंने पारी के दौरान 22 छक्के और 14 चौके मारे।

सोहाल की तरफ से गेंदबाजी कर रहे गेंदबाजों की हमजा सलीम के विरुद्ध हालत खराब हो गई। सोहाल के एक गेंदबाज मोहम्मद वारिस को तो दो ओवर में 73 रन हमजा ने जड़े। सोहाल के किसी भी गेंदबाज की इकॉनमी 22 से नीचे नहीं रही। हमजा की इस पारी की बदौलत उनकी टीम ने इस मैच में 257 रनों का विशालकाय स्कोर खड़ा किया।

हमजा सलीम डार के नाम अब सबसे कम गेंदों में सबसे अधिक रन बनाने का रिकॉर्ड दर्ज हो गया है। इससे पहले यह रिकॉर्ड हंगरी के लियु डू प्लोय के नाम था। डू प्लोय ने अक्टूबर 2023 में 40 गेंदों में 163 रनों की नाबाद पारी खेली थी जो कि अभी तक रिकॉर्ड मानी गई थी लेकिन हमजा ने दो महीनों के भीतर यह रिकॉर्ड धराशायी कर दिया।

हमजा सलीम डार के साथ खेल रहे उनकी ही टीम के साथी यासिर अली ने 19 गेंदों में 58 रनों की पारी खेली। हमजा का स्ट्राइक रेट इस 193 रन की पारी के दौरान 448.8 का रहा है। इसका मतलब है कि उन्होंने औसतन हर गेंद पर 4 रन से अधिक बनाए।

हमजा की इस धुआँधार पारी की मदद से कैटालुनिया जैगुआर्स ने सोहाल हॉस्पिटलटेट को 153 रनों से हरा दिया जो कि जवाबी पारी में मात्र 104 रन ही बना सकी। हमजा की यह पारी अब सोशल मीडिया पर वायरल है। हमजा सलीम ने इस मैच में मात्र बल्ले से ही नहीं बल्कि गेंद से भी कमाल दिखाया। 193 रन बनाने के बाद सोहाल के खिलाफ गेंदबाजी करते हुए हमजा ने 3 विकेट भी निकाले।