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‘हमारा वोट BJP को’: युवक-युवतियों के बीच PM मोदी का क्रेज देख कर खीझे यूट्यूबर अजीत अंजुम, नहीं चला प्रोपेगंडा तो निकल लिए

राजस्थान विधानसभा चुनावों के लिए शनिवार (25 नवंबर, 2023) को मतदान सम्पन्न हो गया है। राजस्थान में प्रत्येक 5 वर्षों पर सरकार बदलने का चलन रहा है और इस बार भी यही रुझान सामने आ रहे हैं कि सत्ता परिवर्तन होने वाला है। हालाँकि, यह बात कॉन्ग्रेस के लिए दिन भर प्रोपेगंडा चलाने वाले यूट्यूबर अजीत अंजुम को पच नहीं रही है।

अजीत अंजुम लोगों के प्रधानमंत्री के नाम पर वोट देने को लेकर प्रश्न उठा रहे हैं। वह वोटरों को रास्ते में रोक कर लोगों के भाजपा को वोट देने पर चिंता जता रहे हैं।

इसको लेकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। दरअसल, अजीत अंजुम 25 नवंबर को जयपुर की हवामहल सीट पर मतदान के दौरान वोटर्स से बातचीत करने गए थे जहाँ पर पहली बार वोट डालने वाले कुछ वोटर्स थे।

अजीत अंजुम ने इन वोटरों से मतदान के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के काम को देख कर वोट दिया है। इस पर अंजुम खीझ गए और कहा कि मोदी तो यहाँ मुख्यमंत्री बनने आएँगे नहीं। इस पर युवाओं ने कहा कि उन्होंने देश के फायदे के लिए वोट दिया है।

आप इस वीडियो में 41 मिनट के बाद उनकी यह क्लिप देख सकते हैं।

एक अन्य युवती से जब उन्होंने पूछा तो उसने भी कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी को वोट देकर आई है। यह भी अंजुम को अच्छा नहीं लगा। कई युवाओं ने इस बात की शिकायत की कि पूरे शासन के दौरान सचिन पायलट और अशोक गहलोत आपस में ही लड़ते रहे। लोगों ने कहा कि इसी कारण से राजस्थान का विकास नहीं हो पाया।

वोटर्स ने यह भी गिनाया कि बीते कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश में काफी काम किया गया है। राजस्थान में यदि वैसी ही सरकार आ जाए तो यहाँ भी विकास हो सकता है। अजीत अंजुम ने इस दौरान वोटर्स की बातों को मानने से भी इनकार किया।

अजीत अंजुम इस दौरान लोगों को समझाते दिखे कि बीते 9 वर्षों में महँगाई बढ़ी है लेकिन वोटर्स का कहना था कि वह राजस्थान में विकास देखना चाहते हैं और साथ ही महँगाई के बराबर ही कमाई भी बढ़ी है। इस पर अजीत को जब अपने पक्ष की बात नहीं सुनाई दी तो वह वहाँ से हट लिए।

पोलिंग बूथ पर पहुँचने वाले लोगों का कहना था कि राजस्थान सरकार विकास के मामले में पीछे है। उनका यह भी कहना था कि पेपर लीक और रोजगार जैसे बड़े मुद्दे थे जिन्हें कॉन्ग्रेस नहीं सुलझा पाई। एक महिला ने राजस्थान पुलिस की कार्रवाई पर भी अपनी नाराजगी जताई। इससे पहले भी अजीत अंजुम कुछ महिलाओं को परेशान करते हुए नजर आए थे।

AI की मदद से दुनिया की पहली ‘वैदिक सिटी’ बनेगी अयोध्या, टेक्नोलॉजी कंपनी के साथ फाइनल हो गई डील: दिखेगा परंपरा और आधुनिकता का मेल

उत्तर प्रदेश की अयोध्या नगरी 25 जनवरी 2024 भगवान रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा को लेकर सज-सँवर रही है। प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार इसके विकास को लेकर कई पहल भी कर रही है। अयोध्या के विकास के लिए AI तकनीक की मदद ली जा रही है और इसे देश के पहले वैदिक आत्मनिर्भर नगरी के रूप में विकसित किया जा रहा है।

अयोध्या विकास प्राधिकरण ने इसके लिए गुरुग्राम आधारित एक निजी कंपनी अराहास टेक्नोलॉजीज के साथ करार किया है। यह कंपनी AI की मदद से शहर का पहला वैदिक सिटी सस्टेनेबल इंडेक्स प्लेटफॉर्म स्थापित करेगी। इस इंडेक्स की रिपोर्ट के आधार पर सरकार को पता चल सकेगा कि उसके पास क्या संसाधन है और बढ़ते दबाव के अनुसार उसे क्या तैयारी करनी है।

अयोध्या जिले की कुल संख्या 24 लाख से अधिक है। इस तकनीक से यह पता किया जाएगा कि राम मंदिर निर्माण के बाद अगर 10 करोड़ लोग अयोध्या आते हैं तो शहर के वातारण और संसाधनों पर इसका असर पड़ेगा। सस्टेनेबिलिटी इंडेक्स की रिपोर्ट के आधार पर इससे निपटने के लिए पहले से ही योजना बनाई जाएगी, ताकि स्थानीय लोगों को असुविधा ना हो।

AI की मदद से लगभग 24.70 लाख की आबादी वाले अयोध्या शहर के पर्यावरण, सामाजिक और आर्थिक गतिशीलता में अंदर की जानकारी ली जाएगी। इसके साथ-साथ इस प्लेटफॉर्म की मदद से रियल टाइम में निकायों के विकास की प्रगति की निगरानी करने, उसके लिए मानक निर्धारित करने और शहर के अनुकूल नीतियाँ बनाने में मिलेगी।

इस तकनीक के अपनाने के बाद अयोध्या अपना खुद का सस्टेनेबिलिटी डेवलपमेंट इंडेक्स (SDI) जारी करने वाला देश का पहला धार्मिक शहर बन जाएगा। नगर आयुक्त एवं प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विशाल सिंह ने बताया कि सीएम योगी की मंशा के अनुरूप यह इंडेक्स लोगों की अपेक्षाओं को पूरा करने वाला होगा।

वैदिक सस्टेनेबल सिटी इंडेक्स का उद्देश्य शहर की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित एवं पुनर्जीवित करना है। इसके साथ ही यहाँ की आध्यात्मिकता और समग्र कल्याण को बढ़ावा देना, पर्यावरणीय प्रबंधन को नियोजित और नैतिक परंपराओं एवं रिवाजों के माध्यम से आर्थिक समृद्धि एवं विकास को बढ़ावा देना है। आराहास टेक्नोलॉजीज के सीईओ सौरभ राय का कहना है कि अयोध्या विश्वस्तरीय शहर बनेगा।

राय का कहना है, “परियोजना के पहले चरण में लगभग 1 मिलियन डॉलर (8.33 करोड़ रुपए) के निवेश की आवश्यकता होगी। इसे अराहास टेक्नोलॉजीज द्वारा कवर किया जाएगा। वैदिक सस्टेनेबिलिटी सिटी इंडेक्स की पहली रिलीज तिमाही अपडेट के साथ जनवरी 2024 में निर्धारित है।”

विशाल सिंह के मुताबिक, वैदिक सस्टेनेबल सिटी इंडेक्स अयोध्या के लिए दूरदर्शिता को परिभाषित करता है, जो परंपरागत और आधुनिकता का सामंजस्यपूर्ण समिश्रण पेश करेगा। उन्होंने कहा कि अयोध्या विकास प्राधिकरण वैदिक सिद्धांतों पर आधारित शहर के विकास की कल्पना करना चाहता है। इसलिए इस दिशा में AI की मदद ली जा रही है।

सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार ने सस्टेनेबल उपायों के माध्यम से शहर के समग्र विकास में तेजी लाने के लिए इस महीने की शुरुआत में ‘अयोध्या धाम तीर्थ विकास परिषद’ नाम का एक विशेष बोर्ड का गठन किया था। इस समय अयोध्या में प्रतिदिन 35 हजार से 50 हजार की संख्या तक यात्री आते हैं। आने वाले समय में इस संख्या के कई गुना बढ़ने की उम्मीद है।

पॉर्न दिखाता, नंगा नचाता, नशा देता, बलात्कार करता… अशपाक शेख ने जिस हिन्दू महिला से किया ‘लव जिहाद’, 3 साल से उसी की नाबालिग बेटी को बनाता था शिकार

महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में एक ‘लव जिहाद’ की शिकार हिन्दू महिला की नाबालिग बेटी के साथ बलात्कार होने की खबर है। रेप का आरोप महिला के ही प्रेमी पर लगा है जिसका नाम अशपाक शेख है। आरोप है कि शेख पिछले 3 साल से नाबालिग को नशा दे कर उस से बलात्कार कर रहा था। पीड़िता ने अपनी माँ के भी लापता होने की बात कही है। गुरुवार (23 नवंबर 2023) को पुलिस ने केस दर्ज कर के अशपाक को गिरफ्तार कर लिया है। FIR में घटनाओं का समय 1 जनवरी, 2020 से 23 नवंबर, 2023 के बीच बताया गया है। मामले की जाँच जारी है।

यह घटना औरंगाबाद के पुंडलीक नगर थाना क्षेत्र की है। इस मामले की शिकायत ‘विश्व हिन्दू परिषद’ (VHP) से जुड़े सदस्यों ने दर्ज करवाई है। शिकायत में पीड़िता ने बताया कि जब वो महज 2 साल की थी तब उनकी माँ ने अपने पहले पति से तलाक ले लिया था। तलाक के बाद वो भरत नगर इलाके में अशपाक शेख के साथ रहने लगीं थीं। इस दौरान महिला ने एक बेटे को जन्म दिया। इस बच्चे को अशपाक अपनी औलाद नहीं मानता था जिसको ले कर आए दिन मियाँ-बीवी में झगड़े होने लगे।

तब से अब तक 15 वर्षीया पीड़िता अपनी माँ और अशपाक से जन्मे भाई के साथ भरत नगर इलाके में रह रही है। लगभग 3 साल पहले की एक घटना का जिक्र करते हुए नाबालिग ने बताया कि एक दिन वो अपने भाई के साथ किसी शादी में गई थी। इसी दौरान उसकी माँ की कॉल जिन्होंने झगड़ा होने की बात कह कर दोनों को घर वापस बुलाया। जब पीड़िता अपने भाई के साथ घर लौटी तो देखा कि वहाँ काँच के कई टुकड़े पड़े हुए थे। अशपाक के गले में खरोंच दिख रही थी।

पीड़िता को इस दौरान अपनी माँ कहीं नहीं दिखाई दी। पूछने पर अशपफ ने बच्चों को बताया कि वो सबको छोड़ कर चली गई है। अशपाक पीड़िता और उसके भाई को औरंगाबाद से मुंबई ले जाने की भी तैयारी करने लगा। पीड़िता को अशपाक की बातों पर विश्वास नहीं हुआ तो उसने पड़ोसियों से पूछताछ की। पड़ोसियों ने बताया कि उन्होंने घटना के दिन पीड़िता की माँ के सिर पर चोट लगी देखी थी। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि अशपाक को लकड़ी की छड़ी ले कर पीड़िता की माँ के पीछे भागते भी देखा गया था।

इस घटना के बाद अशपाक पीड़िता और समीर को ले कर मुंबई चला गया। यहाँ वो 8 दिनों तक रहा। इसी दौरान एक रात वो फोन पर औरंगाबाद के माहौल की जानकारी ले रहा था। वो पूछ रहा था कि क्या वहाँ सब ठीक है और वो वापस आ सकता है क्या? इस बात को पीड़िता ने सुन लिया। दूसरे दिन सुबह इस फोन के बाद अशपाक पीड़िता और समीर को ले कर वापस औरंगाबाद लौट आया। यहाँ पर वो 1 महीने रहा। इस दौरान एक दिन उसने एक दिन पीड़िता से रेप किया।

थोड़े समय बाद अशपाफ पीड़िता को ले कर औरंगाबाद के ही फुलंब्री नाम की जगह गया। यहाँ वो दूध में चॉकलेट और नशे की गोली खिला कर पीड़िता से रेप करने लगा। ऐसा अशपाक ने कई बार किया। यहाँ से अशपाक नाबालिग पीड़िता को ले कर अपनी बहन इरफाना के घर नरेगाँव चला गया। यह जगह भी औरंगाबाद में ही है। यहाँ उसने एक लड़के के साथ पीड़िता का निकाह तय करने की बात कही। साथ ही पीड़िता की हल्दी की रस्म भी तय होने की जानकारी दी।

नाबालिग पीड़िता ने यह निकाह करने से इंकार कर दिया। इस पर अशपाफ ने पीड़िता को 2 विकल्प दिए। पहले विकल्प में खुद के द्वारा चुने लड़के से निकाह करना और दूसरे में अपने साथ शारीरिक संबंध बनाना था। इन दोनों में से कोई विकल्ल्प न चुनने पर पीड़िता को जान से मारने की धमकी दी गई। इसी डर के साथ अशपफ लगातार नाबालिग से रेप करता रहा। थोड़े समय बाद अशपाक वापस पीड़िता के साथ औरंगाबाद लौट आया। यहाँ पर भी वो पीड़िता को चॉकलेटी रंग की गोलियाँ दूध और पानी में मिला कर खिलाता रहा और उसके साथ दुष्कर्म करता रहा।

आरोपित अक्सर नाबालिग को अपने मोबाइल में पॉर्न फ़िल्में दिखाता था। कई बार तो वो पीड़िता को नंगा हो कर नाचने पर भी मजबूर करता था। 23 अक्टूबर 2023 के दिन शाम लगभग 6 बजे पीड़िता अपनी सहेली व उनकी माँ के साथ कर्णपुरा इलाके में गई। कर्णपुरा औरंगाबाद में ही है। यहाँ से उसे घर लौटने में देर हो गई। घर आने पर अशपाक ने फिर से पीड़िता के साथ रेप का प्रयास किया। इस दौरान पीड़िता ने अशपाक जो जोर से लात मारी और मौक़ा पा कर घर से निकल गई। यहाँ से वो अपनी सहेली के घर पहुँची और रात में वहीँ रुकी। सुबह किसी को दिक्कत न हो इसके लिए पीड़िता बिना किसी को बताए वहाँ से सीधे पुंडलीक नगर पुलिस स्टेशन पहुँची।

लड़की के घर से जाने के बाद अशपाक ने थाने में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। हालाँकि पीड़िता ने बताया कि वो सुरक्षित है और ऐसा अशपाफ अपने बचाव में कर रहा था। पीड़िता ने अपने बयान में बताया कि पिछले 3 साल से वो अशपाक की दरिंदगी का शिकार हो रही है। साथ ही उसने बताया कि पिछले 3 वर्षों से उनकी माँ का कुछ भी अता-पता नहीं। पूछने पर अशपाक बताया है कि वो किसी के साथ भाग गई।

मामले की जानकारी मिलते ही हिन्दू संगठन के सदस्य पहुँचे और उन्होंने पीड़िता की मदद की। पुलिस ने पीड़िता की तहरीर पर IPC की धारा 376, 376 (2)(n), 376 (3), 323 और 504 के साथ पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज किया है। आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

41 मजदूरों को वापस लाने के लिए आई जो अमेरिकी मशीन, वो भी अंदर ही फँस गई: उत्तरकाशी के सुरंग रेस्क्यू में लोहे का टुकड़ा बना रोड़ा, अब इन विकल्पों पर विचार

उत्तरकाशी की सिलक्यारा सुरंग में फँसे 41 मजदूरों को निकालने में अभी तक सफलता नहीं मिल सकी है। सुरंग के अन्दर आए मलबे को हटा कर पाइप धकेलने में लगी ऑगर मशीन एक बार फिर खराब हो गई है और रेस्क्यू तीन दिन से रुका हुआ है।

गौरतलब है कि उत्तरकाशी में आल वेदर परियोजना के तहत बन रही सिलक्यारा सुरंग में 12 नवम्बर, 2023 को सुबह मलबा आने की वजह से 41 मजदूर अन्दर फँस गए थे। उन्हें तब से निकालने का प्रयास जारी है। पहले मलबा हटाने का प्रयास किया गया था लेकिन नया मलबा आने की वजह से ये प्रयास सफल नहीं हुए थे।

इसके पश्चात ऑगर मशीन लाई गई थी जिसके जरिए मलबे के भीतर से लगभग 3 फुट व्यास वाले पाइप डाले जाने थे जिससे मजदूर बाहर आते, लेकिन मशीन के बार-बार खराब होने के कारण यह काम नहीं पूरा नहीं हो पा रहा है। अब प्रशासन मजदूरों के लिए दूसरे विकल्पों पर काम कर रहा है। इससे पहले सुरंग के भीतर एक 6 इंच व्यास वाला पाइप भेजने में सफलता मिली थी जिसके माध्यम से अन्दर कैमरा भेजा गया था। इसी के माध्यम से मजदूरों को कपड़े और खाना, पानी तथा दवाइयाँ भेजी जा रही हैं।

क्या है ऑगर मशीन, क्यों हुई खराब?

अमेरिकन ऑगर्स नाम की कम्पनी यह मशीन बनाती है। यह अमेरिका की कम्पनी है जो कि ड्रिलिंग के लिए मशीनें बनाती है। यह कम्पनी इसी काम के लिए प्रसिद्ध है। उत्तराखंड में काम में ली जा रही मशीन इसी का एक उत्पाद है जिसका नाम 60-1200 है।

यह मशीन मलबे या जमीन के भीतर या बराबर में सीधे-सीधे जाकर रास्ता बनाती है। इससे मलबा भी कम निकलता है और रास्ता भी जल्दी बनता जाता है। मलबे को एक पाइप या अन्य किसी रास्ते निकाला जाता है। मशीन के मुहाने पर एक मिट्टी काटने के लिए हेड लगा होता है जिसके पीछे ड्रिल जैसी मोटी रॉड होती है। इसे जमीन पर बने एक फाउंडेशन पर लगाया जाता है। यह मशीन रास्ता बनाने के साथ ही उसकी स्थिति और अन्य चीजों पर भी तकनीक के सहारे जानकारी देती है।

सिलक्यारा में रेस्क्यू टीम की योजना थी कि वह मलबे के भीतर से इस ऑगर ड्रिलिंग मशीन को भेजेंगे और और इसी के ऊपर से पाइप धकेलते जाएँगे। इसके लिए मशीन का ड्रिल वाला हिस्सा पाइप के अन्दर होते हुए रास्ता बनाता है और बाहर निकाल लिया जाता है। अन्दर भेजे गए एक पाइप में दूसरे पाइप की वेल्डिंग की जाती है और पुनः यही प्रक्रिया दोहराई जाती है।

जानकारी के अनुसार, सुरंग में लगभग 60 मीटर के इलाके में मलबा आया है। मशीन अभी तक 46 मीटर तक पाइप डाल चुकी है, बाकी का काम होना बाकी है। पहले मशीन में अन्य खराबी आ रही थी लेकिन इस बार सामने लोहे एक बड़ा टुकड़ा आने के कारण यह फँस गई है।

ऐसी समस्या रेस्क्यू के दौरान कई बार आई है लेकिन तब मशीन को बाहर निकाल लिया जाता था। इस बार मशीन अन्दर लोहे के टुकड़े से टकरा कर फँस गई है। जानकारी के अनुसार, अभी 32 मीटर का हिस्सा पाइप के अन्दर ही है। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि एक साथ कई ड्रिलिंग वाली रॉड जोड़ी गई थी और यह टूट गईं।

अब क्या होगा?

पाइप के अन्दर फँसे ऑगर ड्रिल को अभी मजदूर काट कर निकाल रहे हैं। यह काम अभी हाथों से ही हो रहा है इसलिए इसकी गति बहुत धीमी है। जानकारी के अनुसार, अभी मात्र 1.5 मीटर/घंटा की रफ़्तार से काम हो रहा है।

मशीन को जल्दी काटने के लिए हैदराबाद से प्लाज्मा कटिंग मशीन मँगाई गई है। यह मशीन इस काम की गति को 4 मीटर/घंटा तक बढ़ा देगी। यह मशीन उत्तरकाशी पहुँच गई है। जल्द से जल्द अब ऑगर ड्रिल के फंसे हिस्से को निकालने का प्रयास चल रहा है।

दूसरे विकल्पों पर भी काम चालू

ऑगर मशीन से पाइप डालने के अलावा दूसरे विकल्पों पर रेस्क्यू टीम काम कर रही है। सुरंग के भीतर पहुँचने के लिए ऊपर की तरफ से भी रास्ता बनाया जा रहा है। जिस पहाड़ी में यह सुरंग बन रही है, वहाँ सही जगह की पहचान करके अब ड्रिलिंग की जाएगी।

जहाँ ऑगर मशीन अभी जमीन के बराबर में ड्रिलिंग कर रही थी वहीं यह मशीन बोरिंग करते हुए अन्दर जाएगी। इस पर काम भी चालू हो गया है। इस काम के लिए लाई गई मशीन सतलुज जल विद्युत् निगम की है। बताया गया है कि इस तरीके से लगभग 68 मीटर का रास्ता बनाया जाएगा।

हालाँकि, अभी भी ऑगर ड्रिलिंग मशीन के हिस्से हटाकर मजदूरों से खुदाई करवाने के लिए विकल्प पर भी विचार चल रहा है। इसलिए सबसे पहली प्राथमिकता 3 फीट वाले पाइप के रास्ते को ही दी जा रही है। आशा की जा रही है कि मशीन के ठीक होने के बाद जल्द ही मजदूर बाहर निकल आएँगे।

जिस SAMU (स्टूडेंट्स ऑफ़ अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी) के 7 आतंकी गिरफ्तार, उसे 2022 में क्लीन चिट क्यों… जबकि 3 साल से था खुफिया एजेंसियों के रडार पर

उत्तर प्रदेश पुलिस की आतंकवाद निरोधक शाखा (ATS) ने नवंबर माह 2023 में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से जुड़े 7 आतंकियों को गिरफ्तार किया। इनमें से अधिकांश SAMU (स्टूडेंट्स ऑफ़ अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी) के सदस्य थे। अब मिल रही जानकारी के मुताबिक SAMU नाम के संगठन पर ख़ुफ़िया एजेंसियों की नजर साल 2020 से ही थी। तब हालाँकि ATS के अलीगढ़ यूनिट के प्रभारी सब इंस्पेक्टर मोहम्मद अकरम खान ने अपनी जाँच में इस संगठन में कुछ भी संदिग्ध या राष्ट्रविरोधी हरकतों में संलिप्त न होने का दावा किया था। 3 साल के बाद अब इसी SAMU से आतंक के आरोपित दबोचे गए।

ऑपइंडिया को उच्च आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक SAMU ग्रुप साल 2020 में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के अंदर CAA-NRC विरोधी हिंसा के दौरान ही ख़ुफ़िया एजेंसियों की नजर में आ चुका था। तब ATS को इस संगठन की निगरानी के ऊपर से निर्देश मिले थे। उस समय अलीगढ़ यूनिट ATS के प्रभारी सुशांत गौड़ हुआ करते थे। उन्होंने इस संगठन की निगरानी शुरू कर दी।

कुछ समय बाद सुशांत गौड़ का ट्रांसफर कहीं अन्यत्र हो गया। उनके ट्रांसफर के बाद अलीगढ़ ATS यूनिट की कमान सब इंस्पेक्टर मोहम्मद अकरम खान को मिल गई। मोहम्मद अकरम खान पूर्व में भी अलीगढ़ के अलग-अलग थानों में तैनात रह चुके थे।

मोहम्मद अकरम के नेतृत्व में चल रही ATS अलीगढ़ यूनिट में हेड कॉन्स्टेबल इरशाद भी हुआ करते थे। इनकी यूनिट ने जाँच की और साल 2022 में अपनी जाँच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंप दी। दरोगा अकरम की जाँच रिपोर्ट में SAMU का किसी भी तरह की देश विरोधी या आतंकी गतिविधियों में संलिप्तता से इनकार किया गया।

एक साल के भीतर ही अब उसी SAMU से जुड़े 7 आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है। साल 2022 के बाद SAMU से कई और कट्टरपंथी जुड़े और धीरे-धीरे यह संगठन अपनी जड़ें गहरी करता चला गया। सवाल उठता है कि क्या 2022 की जाँच रिपोर्ट में कोई चूक हुई थी?

शाहनवाज की गिरफ्तारी के बाद उधड़ी परतें

जाँच रिपोर्ट में क्लीन चिट मिलने के बाद साल 2022 से लेकर पिछले महीने तक SAMU तेजी से फल-फूल रहा था। यह लेकिन एक बार फिर से चर्चा में तब आया, जब दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 2 अक्टूबर 2023 को पुणे ISIS मॉड्यूल के सदस्य शाहनवाज की गिरफ्तारी की। यहीं से SAMU का कनेक्शन जुड़ा।

शाहनवाज़, अरशद वारसी और रिज़वान से दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की हुई पूछताछ में पुणे ISIS मॉड्यूल के तार अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) से जुड़े पाए गए थे। AMU का SAMU ग्रुप तब चर्चा में आया और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के साथ NIA की भी नजरें अलीगढ़ की तरफ मुड़ीं।

दिल्ली पुलिस और NIA की तेजी भाँप कर उत्तर प्रदेश ATS ने भी सक्रियता दिखाई और महज 1 माह से भी कम समय में SAMU के टॉप 7 आतंकियों को गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल अभी भी SAMU से जुड़े फैज़ान बख्तियार और अब्दुल समद मलिक फरार चल रहे हैं। इन दोनों की तलाश में ताबड़तोड़ दबिश दी जा रही है।

एक अन्य संदिग्ध हारिश फारुखी भी एजेंसियों के रडार पर है, जो लम्बे समय से पकड़ से बाहर है। फिलहाल मोहम्मद अकरम खान अभी भी ATS अलीगढ़ यूनिट के प्रभारी हैं। SAMU ग्रुप के खिलाफ नवंबर 2023 में दर्ज FIR में अकरम खान ही वादी हैं।

दूसरों को बताते हैं ‘गोदी मीडिया’, खुद कॉन्ग्रेसी CM के लिए बन गए ‘बाथरूम सिंगर’: पाकिस्तानी हिन्दू क्रिकेटर ने टोका तो चरित्र हनन पर उतर गए राजदीप सरदेसाई

‘इंडिया टुडे’ के एंकर राजदीप सरदेसाई अब पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर दानिश कनेरिया के चरित्र हनन पर उतर आए हैं। हालाँकि, कनेरिया की ‘गुगली’ से वह ‘क्लीन बोल्ड’ भी हो गए हैं। पूरा मामला राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के एक इंटरव्यू से जुड़ा है।

दरअसल, हाल ही में ‘इंडिया टुडे’ के एंकर राजदीप सरदेसाई ने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का इंटरव्यू किया था। इसके लिए वह अशोक गहलोत के चार्टड प्लेन से उनके साथ इंटरव्यू करते हुए गए थे। उन्होंने लगभग 1 घंटे लम्बा इंटरव्यू किया। झूठी खबरें फैलाने के लिए कुख्यात राजदीप ने इस दौरान अशोक गहलोत के लिए गाने गाए। राजदीप ने अशोक गहलोत से मुख्यमंत्री बनने का प्रश्न पूछने के बाद ‘ज़िंदगी के सफ़र में’ और ‘मुसाफिर हूँ यारों’ गाना गाया और खुद को एक बाथरूम सिंगर (नहाते वक्त गाना गाने वाला) बताया।

राजदीप का अशोक गहलोत के लिए गाने गाना सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और लोगों ने उनकी आलोचना की। लोगों ने यह प्रश्न उठाए कि सदैव दूसरों को ‘गोदी मीडिया’ बताने वाले राजदीप अब खुद कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्री के लिए गाने गा रहे हैं।

राजदीप के इसी बरताव पर पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर दानिश कनेरिया ने एक्स (पहले ट्विट्टर) लिखा, “जब बाथरूम सिंगर पत्रकार बन जाते हैं।” साथ ही उन्होंने हँसने वाला इमोजी उपयोग किया। इस पर राजदीप भड़क गए और कनेरिया को आईटी सेल का आदमी बताने और उनका चरित्र हनन करने पर उतर आए।

राजदीप ने लिखा, “जब एक पाकिस्तानी मैच फिक्सर/स्पॉट फ़िक्सर ‘मैसूर पाक’ आईटी सेल का हिस्सा बन जाता है। जाकर अपनी जिन्दगी जियो दानिश कनेरिया। अगली बार आधे घंटे का पूरा इंटरव्यू देखना, ना कि 60 सेकेण्ड की वो क्लिप जो तुम्हें तुम्हारे आईटी सेल के चीफ ने ट्वीट करने को कहा है।”

दरअसल, मैसूर पाक आईटी सेल से राजदीप का अभिप्राय यहाँ भारतीय जनता पार्टी के आईटी सेल से है। कर्नाटक चुनावों पर एक बहस के दौरान भाजपा के आईटी सेल के मुखिया अमित मालवीय ने राजदीप को कॉन्ग्रेस का प्रोपगैंडा फैलाने वाला कहा था जिसके जवाब में राजदीप ने मालवीय के पास मैसूर पाक भेजा था।

भले ही कनेरिया पर मैच फिक्सिंग के कोई सीधे आरोप ना हो लेकिन राजदीप का चरित्र हनन पर उतरना उन्हें भारी पड़ गया। कनेरिया ने स्वयं और ट्विटर पर बाकी लोगों ने राजदीप की धुलाई कर दी। कनेरिया की गुगली ने राजदीप को बोल्ड कर दिया।

कनेरिया ने इस पर लिखा, “कितनी बार राजदीप ने अपनी खबरों को इस तरह से फिक्स किया है कि वह उनके या उनके मास्टर के एजेंडा से मैच करें। वह ‘मैसूर पाक’ नाम का उपयोग दुरूपयोग वैसे ही कर रहे हैं जैसे वह ‘पत्रकार’ शब्द का अपने साथ करते हैं। हालाँकि, मैंने मुकेश अम्बानी का पूरा इंटरव्यू आपके साथ देखा है।”

गौरतलब है कि एक इंटरव्यू के दौरान कारोबारी मुकेश अम्बानी ने राजदीप सरदेसाई से कहा था कि मैं आपको सीरियस लेता ही नहीं हूँ। इस इंटरव्यू के बाद राजदीप की काफी बेइज्जती और खिंचाई हुई थी। अब राजदीप फिर से ट्रोल हो रहे हैं।

एक व्यक्ति ने लिखा कि मैसूर पाक आईटी सेल होना भारत में रह कर पाकिस्तानी आईटी सेल का हिस्सा होने अच्छा है।

दूसरे व्यक्ति ने पूछा कि क्या वो मोहम्मद अज़हरुद्दीन को मैच फ़िक्सर कह सकते हैं, जिनका इंटरव्यू उन्होंने लिया है।

अब राजदीप से कोई जवाब नहीं देते बन रहा है। इससे पहले दानिश सुप्रीम कोर्ट में वकील प्रशांत भूषण की भी गिल्लियाँ उड़ा चुके हैं।

SP भी सस्पेंड, साथ में 6 पुलिस अधिकारी भी: फ्लाईओवर पर PM मोदी का रुका काफिला और खड़े NSG कमांडो मामले में अब एक्शन

पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पंजाब यात्रा के दौरान उनकी सुरक्षा के उल्लंघन के मामले में सात पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। जिन अधिकारियों को निलंबित किया गया है, उनमें फिरोजपुर जिले के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक के अलावा दो डीएसपी रैंक के अधिकारी भी शामिल हैं।

मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने फिरोजपुर के तत्कालीन पुलिस प्रमुख और अब बठिंडा के एसपी गुरबिंदर सिंह को पहले निलंबित कर दिया गया था। 22 नवंबर 2023 के आदेश में कार्रवाई का सामना करने वालों में छह और पुलिसकर्मियों के नाम हैं।

राज्य सरकार के गृह विभाग के आदेश के अनुसार, डीएसपी रैंक के अधिकारी पारसन सिंह और जगदीश कुमार, इंस्पेक्टर जतिंदर सिंह और बलविंदर सिंह, सब-इंस्पेक्टर जसवंत सिंह और सहायक सब-इंस्पेक्टर रमेश कुमार को भी निलंबित कर दिया गया है।

आदेश में कहा गया है कि सभी सात पुलिसकर्मियों को पंजाब सिविल सेवा (दंड और अपील) नियम, 1970 के नियम 8 के तहत कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। इन नियमों के तहत दिए जाने वाले दंड में पदोन्नति रोकने से लेकर सेवा से बर्खास्तगी तक हो सकता है।

बता दें कि इससे पहले साल मार्च 2023 में पंजाब सरकार ने राज्य के तत्कालीन डीजीपी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय, फिरोजपुर के तत्कालीन डीआईजी इन्द्रबीर सिंह, तत्कालीन एसएसपी हरमनदीप हंस के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के आदेश दिए थे। 

प्रधानमंत्री की सुरक्षा में हुई चूक के मामले में केंद्र ने मार्च के पहले सप्ताह में पंजाब सरकार से कार्रवाई में हुई देरी को लेकर जवाब माँगा था। इसके बाद पंजाब सरकार हरकत में आई थी। सरकार ने पूर्व डीजीपी, पूर्व डीआईजी और एसएसपी के खिलाफ कार्रवाई का आदेश देने के अलावा कुछ अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

इनमें तत्कालीन एडीजीपी लॉ एंड ऑर्डर नरेश अरोड़ा, तत्कालीन एडीजीपी साइबर क्राइम जी नागेश्वर राव, तत्कालीन आईजीपी पटियाला रेंज मुखविंदर सिंह, तत्कालीन आईजी काउंटर इंटेलिजेंस राकेश अग्रवाल, तत्कालीन डीआईजी फरीदकोट सुरजीत सिंह और मोगा के तत्कालीन एसएसपी चरणजीत सिंह का नाम शामिल थे।

इन सभी अधिकारियों को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी कर के पूछा गया था कि जाँच समिति की सिफारिश के अनुसार उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही क्यों नहीं शुरू की जानी चाहिए? बाद में इन अधिकारियों ने सरकार को अपने जवाब भेज दिए थे।

गौरतलब है कि इस मामले की जाँच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने रिटायर्ड जस्टिस इंदु मल्होत्रा की अगुवाई में 5 सदस्यों की एक समिति गठित की थी। इस समिति ने 6 महीने पहले ही अपनी जाँच रिपोर्ट पेश कर चुकी है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में राज्य के तत्कालीन मुख्य सचिव अनिरुद्ध तिवारी, डीजीपी सिद्धार्थस चट्टोपाध्याय समेत अन्य अधिकारियों को पीएम की सुरक्षा में चूक के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था।

दरअसल, 5 जनवरी 2022 को पीएम मोदी का विमान बठिंडा में लैंड हुआ था, जहाँ से उन्हें हैलीकॉप्टर से हुसैनीवाला स्थित ‘नेशनल मार्टियर्स मेमोरियल’ जाना था। वहाँ उन्हें ‘राष्ट्रीय शहीदी स्मारक’ में बलिदानी क्रांतिकारियों भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को श्रद्धांजलि अर्पित करनी थी।

बारिश और विजिबिलिटी कम होने के कारण उन्हें मौसम के ठीक होने के लिए 20 मिनट तक इंतजार करना पड़ा। जब मौसम ठीक नहीं हुआ तो निर्णय लिया गया कि सड़क मार्ग से ही प्रधानमंत्री हुसैनीवाला तक का सफर तय करेंगे। जब प्रधानमंत्री का काफिला एक फ्लाईओवर पर पहुँचा तो वहाँ पता चला कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने रास्ता जाम कर के रखा हुआ था।

हुसैनीवाला से 30 किलोमीटर दूर पीएम मोदी का काफिला फँसा रहा। लगभग 15-20 मिनट तक पीएम मोदी वहाँ फँसे रहे। यह प्रधानमंत्री की सुरक्षा में एक बड़ी सेंध था। सड़क मार्ग से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा दो घंटे में तय होनी थी, जिसके लिए पंजाब के पुलिस महानिरीक्षक (DGP) को ज़रूरी प्रबंधन करने के निर्देश दे दिए गए थे।

चिकन फ्राई के लिए पैसे नहीं दिए तो दर्जी शाहिद हुसैन ने बीवी को मार डाला, गर्दन में घोंप दी कैंची

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में शाहिद हुसैन नाम के व्यक्ति ने अपनी बीवी की कैंची घोंप कर हत्या कर दी। कत्ल की वजह चिकन फ्राई मँगाने पर न लाना और बाद में खुद खरीद कर खा लेना बताया जा रहा है। आरोपित पेशे से दर्जी का काम करता है। पुलिस ने शाहिद हुसैन को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया है। मामले की जाँच और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। घटना शनिवार (25 नवंबर, 2023) की है।

गाजियाबाद पुलिस के मुताबिक, यह मामला लोनी थाना क्षेत्र का है। यहाँ मकदूम हुसैन का 50 वर्षीय बेटा शाहिद प्रेम नगर के 100 फुटा रोड के पास रहता है। वह पेशे से टेलर है और अपने ही घर से कपड़े सिलने का काम करता है। इसके लिए उसने घर में ही 3 मशीनें लगवा रखी हैं। शाहिद की बेटियाँ भी अपने अब्बा के काम में हाथ बँटाती हैं। शाहिद ने अपनी बीवी नूर बानो से धागा आदि खरीदने के लिए 600 रुपए उधार ले रखे थे। घटना शनिवार की है। इस दिन शाहिद को लोअर सिलने के लिए किसी की तरफ से ऑर्डर मिला था।

शाहिद ने लोअर पजामा का ऑर्डर देने वालों से 2000 रुपए एडवांस ले कर उसी से अपनी बीवी का 600 रुपए उधार चुकता कर दिया था। थोड़ी देर बाद टेलर शाहिद को चिकन फ्राई खाने का मन हुआ तो उसने अपनी बीवी नूर बानो से फिर पैसों की माँग की। नूर बानो ने अपने शौहर को पैसे देने से इंकार कर दिया जिस पर दोनों के बीच वाद-विवाद हुआ। थोड़े समय बाद नूर बानो ने खुद ही चिकन फ्राई मँगवा लिया। हालाँकि, इसे नूर बानो के बच्चों ने खाने से मना कर दिया। इसी बात को ले कर एक बार फिर से शाहिद और नूर बानो में झगड़ा शुरू हो गया।

पुलिस के आगे अपना गुनाह कबूलते हुए शाहिद ने बताया कि झगड़े के दौरान दोनों के बीच गाली-गलौज भी हुई। इसी के चलते शाहिद को गुस्सा आ गया। उसने घर में रखी कैंची को अपनी बीवी की गर्दन में घोंप दिया। घायल नूर बानो जब तड़पने लगी वो शाहिद मौके से फरार हो गया। नूर बानो के बेटे ने अपनी माँ को दिल्ली के GTB अस्पताल में भर्ती करवाया लेकिन वहाँ पीड़िता की मौत हो गई। पुलिस ने 25 नवंबर को ही शाहिद को खोज निकला और जरूरी कानूनी कार्रवाई के बाद उसे जेल भी दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मृतका के बेटों अरसलान और शाहनवाज ने अपने अब्बा पर घटना की रात शराब पी कर घर आने का आरोप लगाया है। साथ ही बताया कि उनकी अम्मी इस आदत से काफी परेशान भी रहती थीं।

तिरंगे से खूबसूरत कफ़न नहीं होता… 26/11 को हिन्दू आतंक साबित करने की थी साजिश: पूर्व क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद ने तुकाराम ओंबले के बलिदान को किया नमन

मुंबई में 26 नवंबर, 2008 को हुए आतंकी हमलों 15 साल हो गए हैं। मुंबई में ताज होटल, लियोपोल्ड कैफ़े, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, ओबेरॉय ट्रिडेंट, कामा हॉस्पिटल, नरीमन हाउस, मेट्रो सिनेमा और सेंट जेवियर्स कॉलेज को निशाना बनाया गया था। इस हमले में 165 निर्दोष मारे गए थे और 9 आतंकियों को भी सुरक्षा बलों ने मार गिराया था। अब पूर्व क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद ने याद किया है कि कैसे इस हमले के सहारे हिन्दुओं को बदनाम करने की साजिश रच ली गई थी।

उन्होंने एक वीडियो को आगे बढ़ाते हुए ये टिप्पणी की। ये वीडियो बलिदानी कॉन्स्टेबल तुकाराम ओंबले को याद करते हुए अभिषेक नाम के यूजर ने शेयर किया था। वीडियो में एक पुलिस अधिकारी उनके बलिदान पर बात कर रहे हैं। इसमें वो कह रहे हैं, “आपने देखा होगा 55 वर्ष के एक ASI ओंबले अजमल कसाब से भिड़ जाते हैं, एक लाठी के साथ। 5 गोलियाँ पेट में लेते हैं। उसको पकड़ते हैं तो पकड़ ढीली नहीं होने देते हैं। ये है मुंबई पुलिस की साहस, ये है उनकी प्रतिबद्धता।”

पुलिस अधिकारी आगे ‘तिरंगे से खूबसूरत कफ़न नहीं होता’ वाली शायरी भी पढ़ते हैं। वीडियो में एक अन्य पुलिस अधिकारी बताते हैं कि कैसे अगर तुकाराम ओंबले ने सारीय गोलियाँ अपने ऊपर नहीं ली होतीं तो आज हम नहीं होते। वेंकटेश प्रसाद ने इस वीडियो पर टिप्पणी करते हुए कहा कि 15 वर्ष पहले एक साजिश नाकाम हो गई, एक ऐसी साजिश जिसके तहत एक भयानक आतंकी हमले को ‘हिन्दू आतंक’ साबित करना था। उन्होंने तुकाराम ओंबले के अद्वितीय साहस और धैर्य को नमन किया।

वेंकटेश प्रसाद ने याद किया कि कैसे तुकाराम ओंबले ने अपना बलिदान देकर कई जानें बचाईं। याद दिला दें कि गिरफ्तारी के बाद ही मालूम चला था कि पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई और आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा चाहते थे कि अजमल बतौर समीर चौधरी मरे। ताकि दुनिया हिंदुओं पर ऊँगली उठाए और इस पूरे हमले को भगवा आतंक करार दिया जा सके। अपने इसी इरादे को पूरा करने के लिए उस रात मुंबई में घुसने वाले दसों आतंकियों की कलाई पर भगवा और लाल रंग का कलावा बाँधा गया था। जिससे उनके हिंदू प्रतीत होने में कोई संदेह न रह जाए।

राकेश मारिया ने अपनी आत्मकथा लेट मी से इट नाउ (Let Me Say It Now) में मुंबई में 26/11 को हुए आतंकी हमले में एकमात्र जिंदा गिरफ्तार किए गए आतंकी अजमल कसाब को लेकर बड़े खुलासे किए थे। राकेश मारिया ने अपनी किताब में दावा किया है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने 26/11 हमले को हिंदू आतंकवाद का जामा पहनाने की भी कोशिश की थी। 10 हमलावरों को हिंदू साबित करने के लिए उनके साथ फर्जी आईकार्ड भेजे गए थे। कसाब के पास भी एक ऐसा ही आईकार्ड मिला था, जिस पर समीर चौधरी लिखा हुआ था।

26/11 बलिदानियों को श्रद्धांजलि, संविधान से लेकर शादी पर बात: PM मोदी ने ‘वोकल फॉर लोकल’ पर कहा- इस बार हुआ ₹4 लाख करोड़ का कारोबार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (26 नवंबर 2023) मन की बात के 107 वें एपिसोड को संबोधित किया। इस एपिसोड की शुरुआत में पहले उन्होंने 26/11 के बलिदानियों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद संविधान दिवस की देश को बधाई देते हुए इस बात पर खुशी जताई कि आजकल लोग स्वदेशी सामान खरीदने में उत्साह दिखा रहे हैं।

उन्होंने कहा, “आज 26 नवंबर की तारीख है, जिसे कभी भूला नहीं जा सकता है। आज के दिन ही हमारे देश पर सबसे जघन्य आतंकी हमला हुआ। आतंकियों ने मुंबई समेत पूरे देश को हिला दिया था। ये भारत का सामर्थ्य है कि हम उस हमले से उबरे और आज आतंक को कुचल रहे हैं।”

आगे पीएम मोदी ने संविधान दिवस की बधाई देते हुए इससे जुड़े फैक्ट्स बताए और जानकारी दी कि कैसे संविधान को अंतिम रूप देने से पहले उसमें 2000 से ज्यादा संशोधन किए गए थे। इसके अलावा अब तक सभी सरकारों ने अपने हिसाब से 106 बार संशोधन किया है।

उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य की बात ये है कि संविधान का पहला संशोधन ‘बोलने की आजादी’ और ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ में कटौती करने के लिए हुआ था। इसी तरह 44वें संशोधन के जरिए आपातकाल के समय हुई गलतियों को सुधारा गया था। वह बोले कि ये भी बड़ी प्रेरक बात है कि संविधान सभा के कुछ सदस्य मनोनीत किए गए थे, जिसमें से 15 महिलाएँ थीं।

पीएम ने इस बात पर खुशी जताई कि पिछले महीने जो उन्होंने मन की बात वोकल फॉर लोकल होने पर जोर दिया था उसका असर दीवाली पर देखने को मिला। नतीजतन बीते कुछ दिनों के भीतर ही दिवाली, भैया दूज और छठ पर देश में चार लाख करोड़ से ज्यादा का कारोबार हुआ है। और इस दौरान भारत में बने उत्पादों को खरीदने का जबरदस्त उत्साह लोगों में देखा गया। वह बोले कि आजकल घर के बच्चे भी दुकान पर खरीदते समय यह देखते हैं कि उसपर मेड इन इंडिया लिखा है या नहीं।

इसके बाद पीएम मोदी ने इस मन की बात में एक विषय जो उठाया वो विदेश जाकर शादी करने का है। उन्होंने कहा कि विदेशों में जाकर शादी करने का जो नया ट्रेंड बन रहा है क्या वो जरूरी है। भारत की मिट्टी, यहाँ के लोगों के बीच अगर शादियाँ होंगी तो देश का पैसा देश में रहेगा। देश के लोग ही सेवा करेंगे। छोटे-छोटे गरीब लोग भी अपने बच्चों को शादी की बातें बताएँगे।

पीएम ने देश में बढ़ रही डिजिटल पेमेंट की माँग को भी सराहा। इसके साथ उन्होंने देश के युवाओं के इंटेलिजेंस, आइडिया और इनोवेशन पर लोगों का ध्यान केंद्रित कराया और कहा कि 2022 में भारत के पेटेंट आवेदन में 31 फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। पीएम ने मन की बात में ‘जल सुरक्षा’ पर चर्चा की और कहा जल संरक्षण करना जीवन को बचाने से कम नहीं है।

प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ में झारखण्ड, ओडिशा और बंगाल के जन-जातीय इलाकों में एक बहुत प्रसिद्ध नृत्य छऊ का जिक्र किया। और फिर तमिलनाडु के कोयम्बटूर में रहने वाले लोगानाथन का जिक्र किया और बताया कि कैसे वो बचपन में गरीब बच्चों के फटे कपड़ों को देखकर वे अक्सर परेशान हो जाते थे। इसके बाद उन्होंने ऐसे बच्चों की मदद का प्रण लिया और अपनी कमाई का एक हिस्सा इन्हें दान देना शुरू कर दिया। जब पैसे की कमी पड़ी तो लोगानाथन जी ने Toilets तक साफ़ किए, ताकि जरूरतमंद बच्चों की मदद हो सके।