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BPSC पास महिला टीचर, झोपड़ी में जमीन पर बैठ कर जॉइनिंग: बिहार के स्कूल के पास भवन तक नहीं, शिक्षा व्यवस्था का उड़ा मजाक

बिहार का एक वीडियो वायरल हो रहा है जहाँ बीपीएससी पास एक टीचर की जॉइनिंग किसी विद्यालय भवन में नहीं बल्कि झोपड़ी में हुई। दरअसल, यहाँ ना तो स्कूल की कोई बिल्डिंग है और ना ही कोई स्टूडेंट। दूर-दूर तक केवल जंगल ही जंगल दिखाई देता है। यहाँ पर दो-तीन झोपड़ी दिखाई दे रही है। बताया जा रहा है कि इस स्कूल में एक भी बच्चे पढ़ने नहीं आते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम चम्पारण जिले के एक विद्यालय में चयनित हुई एक शिक्षिका का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि चार-पाँच लोग जमीन पर बैठकर  BPSC की नवनियुक्त शिक्षिका की जॉइनिंग करा रहे हैं। वहाँ बैठने के लिए कोई कुर्सी भी नहीं है। जमीन पर गमछा बिछाकर हेड मास्टर बैठे हुए हैं और नई टीचर का स्वागत जमीन पर बैठकर रहे हैं। इससे बिहार की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहा है। 

सोशल मीडिया X पर इस वीडियो को योगेश साहू नामक एक व्यक्ति ने शेयर किया है, जिसमें दिखाया जा रहा है कि बिहार के बेतिया जिले में जमीन पर बैठकर नवनियुक्त बीपीएससी शिक्षिका जॉइनिंग कर रही हैं। ये वीडियो गुरुवार (16 नवंबर, 2023) का बताया जा रहा है। इसमें दिख रहा है कि शिक्षिका जमीन पर बैठकर पेपर पर साइन कर रही है। अगल-बगल में कुछ दूसरे शिक्षक खड़े हैं।

वायरल वीडियो पश्चिमी चम्पारण जिले के बैरिया प्रखंड के सूरजपुर पंचायत के प्राथमिक विद्यालय गोबरही का बताया जा रहा है। नवनियुक्ति शिक्षिका जब जमीन पर बैठकर जॉइनिंग कर रही थी, तभी किसी ने घूम-घूम कर वहाँ का वीडियो बना लिया।

वीडियो के अनुसार, यह स्कूल शहरी क्षेत्र से बाहर है और इसमें सिर्फ दो झोपड़ियाँ हैं जिन्हें स्थानीय लोगों ने बनाया है. विद्यालय में कुल चार शिक्षक हैं, जिसमें एक महिला शिक्षिका भी हैं, लेकिन विद्यालय के 55 बच्चों में उपस्थिति शून्य है. स्कूल के प्रिंसिपल के अनुसार, नवनियुक्त शिक्षिका ने 16 नवंबर को विद्यालय का दौरा किया था। यह वीडियो उसी दिन का बताया जा रहा है। 

गौरतलब है कि वीडियो वायरल होने के बाद जहाँ बिहार की शिक्षा व्यवस्था का सोशल मीडिया पर मजाक उड़ाया जा रहा है वहीं कहा जा रहा है कि प्रिंसिपल हर साल विद्यालय बनाने के लिए विभाग को आवेदन पत्र देते हैं। 2009 में एक बार, विद्यालय बनाने के लिए विभाग ने पैसा भी भेजा था, लेकिन नदी के किनारे स्थित विद्यालय के कारण प्रिंसिपल ने तब उस पैसे को वापस भेज दिया था। उसके बाद से अब तक, विद्यालय बनाने के लिए कोई अन्य पैसा नहीं आया है। जिससे विद्यालय झोपड़ियों के सहारे नाम का खड़ा है जहाँ न कोई भवन है और कोई छात्र। 

10वीं के छात्र से जबरन यौन संबंध बनाने की कोशिश, ईसाई धर्मांतरण कराना चाहती थी शिक्षिका: पीड़ित पिता ने बयाँ किया दर्द, वायरल हुए चैट्स के स्क्रीनशॉट

उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक मिशनरी स्कूल की शिक्षिका पर 10वीं कक्षा के छात्र के साथ शारीरिक संबंध बनाने और फिर ईसाई धर्मांतरण के लिए ब्रेनवॉश करने का मामला सामने आया है। छावनी थाने में इसे लेकर गुरुवार (16 नवंबर, 2023) को 4 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। मामला सेंट एलाईयसिस (Aloysius) स्कूल का है। 16 वर्षीय छात्र के पिता ने शिकायत में कहा है कि परिवार को बच्चे की चैट के माध्यम से आता चला कि शिक्षिका ईसाई मजहब अपनाने और शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव बना रही थी।

पिता ने बताया है कि जब विद्यालय में इस संबंध में शिकायत की गई तो अध्यापिका ने अपने कृत्य को स्वीकार कर लिया और फिर उसके बाद बच्चे को परेशान करने के लिए उसका पता निकलवाने लगी, ताकि मामला न्यायालय तक न पहुँचे। शिक्षिका के भाई ने भी जान-माल को नुकसान पहुँचाने की धमकी दी थी। FIR में आरोपित शिक्षिका ओलिब रोहित पर आरोप लगा है कि उन्होंने अन्य छात्र-छात्राओं का भी स्कूल में धर्मांतरण कराया है। साथ ही विरोधी पक्ष और कुछ मीडिया पोर्टलों पर पीड़ित बच्चे की तस्वीर वायरल करवाने का आरोप भी लगा है।

दोनों के चैट भी वायरल हुए हैं। फेसबुक मैसेंजर के एक चैट में लड़का पूछ रहा है कि आप 7:10 में क्यों आओगी, जिस पर शिक्षिका जवाब दे रही है कि हमें उसी समय पर बुलाया गया है। इसके बाद लड़का कहता है कि आओ जब भी आना है। इसके बाद अन्य चैट्स में बैकग्राउंड दिल की इमोजी वाला दिख रहा है। इसमें शिक्षिका ‘मिस यू, वॉन्ट यू’ लिख रही है, वहीं लड़का भी ‘आई लव यू’ लिख रहा है। एक चैट में हग करने की बात हो रही है। एक चैट में लड़का गुस्सा रहा है, क्योंकि महिला टीचर ने किसी अन्य लड़के की तस्वीर लाइक की है।

फिर वो सफाई देती है कि जिसका पोस्ट उसने लिखे किया है वो उसके भाई जैसा है। इधर लड़का धमकी देता है कि वो भी हर लड़की के पोस्ट पर लाइक-कमेंट करेगा। एक चैट में महिला खुद का दिल टूटा हुआ बता रही है और हमेशा के लिए चली जाने की बात कर रही है। साथ ही वो कहती है कि उसका दिल रो रहा है। वो लिखती है, “तुमने मुझे जीरो बना दिया, मैं बहुत अच्छा था।” उक्त स्कूल केंट कानपुर में स्थित है। कोर्ट ने भी विश्लेषण में पाया कि पीड़ित परिवार वाले दिए गए साक्ष्य और शिक्षिका के फोन में मिले सबूत मेल खा रहे थे।

पीड़ित पिता ने ‘JMD News’ और ‘SP News 365’ के खिलाफ भी पुलिस में प्रार्थना पत्र देते हुए कहा है कि इन्होंने बच्चे की तस्वीर वायरल कर दी। इस बारे में बात करते हुए बच्चे के पिता ने बताया कि जब तक वो अपने बेटे को न्याय नहीं दिला देते, तब तक वो अपनी शिखा नहीं बाँधेंगे। उन्होंने बताया कि उनका एक बेटा और एक बेटी है। जहाँ बेटा छोटा है, वहीं बेटी बड़ी है। उन्होंने पुलिस पर आरोपित शिक्षिका से घूस लेने का भी आरोप लगाया।

उन्होंने आरोप लगाया कि 9 नवंबर को कोर्ट का आदेश आया, जबकि पुलिस ने FIR दर्ज करने में एक सप्ताह की देरी कर दी। उन्होंने SHO पर आरोप लगाया कि उनके खिलाफ जाँच रिपोर्ट तैयार की गई और उन पर ही उल्टा आरोप लगा दिया कि वो महिला के साथ संबंध बनाना चाहते हैं। पिता ने बताया कि थाना प्रभारी अजय सिंह ने इसके बाद शिक्षिका की तरफ से ही शिकायत ले ली। उन्होंने थाने में अपने और अपनी पत्नी से अभद्रता का भी आरोप लगाया।

पीड़ित पिता ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी पत्र भेज कर मामले की जानकारी दी है। उन्होंने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया कि मामला खत्म करने के लिए SHO ने उन पर दबाव बनाया और कई मुकदमों में फर्जी फँसाने की धमकी दी। आरोपित शिक्षिका की उम्र 43 साल बताई जा रही है। एक लोकेश नाम के शिक्षक का भी नाम सामने आया है, जिसके बारे में पीड़ित पिता ने कहा कि आरोपित शिक्षिका एप पति को छोड़ कर उसके साथ कुछ महीने रही है।

लोकेश ने भी बच्चे के पिता को फोन कर के धमकाया। स्कूल के व्हाट्सएप्प ग्रुप में बच्चे और उसके परिवार की पहचान वायरल करने का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि लिंक दिए जाने के बावजूद थाना प्रभारी ने कोई सबूत न मिलने की बात कही। उन्होंने कहा कि ऐसे पुलिस अधिकारी सीएम योगी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बदनाम कर रहे हैं, ताकि जनता उनसे त्रस्त हो जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपित शिक्षिका की तरफ से मोटा पैसा पुलिस ने लिया है।

उन्होंने कहा, “मिशनरियों के पास पैसे की कोई कमी नहीं है। मेरे बेटे के जाल में फँसने के बाद उसके व्यवहार में बदलाव आने लगा था। मेरी पत्नी शाम को पूजा करती थी तो वो आपत्ति जताता था। मंदिर में जाती थी तो रिएक्ट करने लगा था। हम बच्चे को स्कूल नहीं भेज रहे, उसका साल खराब हो रहा है। इस पर पुलिस-प्रशासन कुछ नहीं कर रहा। बच्चा वहाँ नहीं पढ़ पाएगा। हमारे अनुरोध के बावजूद DM को SHO को पत्र नहीं लिखा। दूसरे स्कूल में स्थानांतरित करने की हमारी माँग नहीं मानी गई।”

प्रकरण से जुड़ा वीडियो भी सामने आया है, जिसमें पुलिस पीड़ित बच्चे के माता-पिता से कह रही है कि हमसे मत उलझिए। साथ ही परिवार पर झूठ बोलने का आरोप लगाया गया। पुलिस ने कहा कि आप मुझसे ऐसे बात नहीं कर सकते हो। इस दौरान पीड़ित के पिता कहते हैं कि हाथ क्यों लगा रहे हो। साथ ही जाँच अधिकारी (सब-इंस्पेक्टर) का एक स्टिंग भी सामने आया है, जिसमें वो कहता दिख रहा है कि अधिकारियों के कहने पर सबको कमरे से निकाल कर बच्चे का बयान लिया।

इसमें रोहित नाम का अधिकारी आगे कहता है, “माता-पिता के बिना बयान रिकॉर्ड करना अधर्म नहीं है। कानून अलग चीज है, धर्म-अधर्म अलग चीज है। हमें अधिकारियों द्वारा दिए गए आदेश का पालन करना है और इसमें कुछ गलत हो जाता है तो कोई पाप नहीं है। मेरे पास सारे साक्ष्य हैं कि किसने क्या कहा। बच्चे के साथ गलत हुआ है, उसकी भी एक हद है। मैं माफ़ी माँगता हूँ। जब सारी चीजें हो चुकी हैं तो फोन मैंने नहीं लिया।” ऑपइंडिया के पास वीडियो, FIR कॉपी और अन्य दस्तावेज मौजूद हैं।

जब रिकी पोंटिंग ने शरद पवार को की उँगली, ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी ने धकिया कर मंच से भगा दिया: वर्ल्ड कप से पहले वायरल हुई 17 साल पुरानी Video

सोशल मीडिया पर ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम का एक पुराना वीडियो वायरल हो रहा है। ये वीडियो साल 2006 का है। इस वीडियो में चैंपियंस ट्रॉफी की चैंपियन बनी ऑस्ट्रेलियाई टीम को उस समय बीसीसीआई के अध्यक्ष रहे शरद पवार विजेता ट्रॉफी देने मंच पर पहुँचे थे, जिसमें ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों ने घमंड में चूर होकर उनकी घनघोर बेईज्जती कर दी थी।

ऑस्ट्रेलियाई टीम के उस समय के कप्तान रहे रिकी पोटिंग ने सबके सामने शरद पवार को बुलाकर उनसे विजेता ट्रॉफी छीन ली थी। यही नहीं, इसके बाद जीत के नशे में चूर ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों ने उन्हें पीछे से धक्का देकर मंच से हटा दिया था।

शरद पवार को धक्के मारने वाला वही वीडियो सोशल मीडिय पर 17 साल बाद अब फिर से वायरल है। ट्रेंडुलकर नाम के एक यूजर ने एक्स पर वो वीडियो शेयर कर लोगों को शरद पवार की पुरानी बेईज्जती की याद दिलाई है।

ट्रेंडुलकर ने लिखा है, “भारत को विश्वकप के फाइनल को जीतना इसलिए भी जरूरी है, ताकि ऐसा काम पैट कमिंस जय शाह के नाथ न कर सकें।”

इस वीडियो में साफ तौर पर पोंटिंग और पूरी ऑस्ट्रेलियाई टीम की बदतमीजी साफ-साफ दिख रही है।

इस वीडियो में 30 नंबर की जर्सी पहने डेमियन मार्टिन की बदतमीजी दिखती है, जिसमें वो शरद पवार को पीछे से धक्का देकर मंच से हटा देते हैं।

याद दिला दें कि साल 2006 में हुई चैंपियंस ट्रॉफी में टीम इंडिया सुपर-4 में भी क्वालिफाई नहीं हुई थी। मगर, तब भारत होस्ट था, इसलिए ट्रॉफी देने का काम उस समय बीसीसीआई के चीफ रहे शरद पवार को करना था। जब शरद पवार ये ट्रॉफी देने गए तो ऑस्ट्रेलियाई टीम ने उनकी ये बेइज्जती की, जिसे आजतक क्रिकेट प्रेमी नहीं भुला पाए हैं।

इस वायके के बाद शरद पवार काफी नाराज भी हुए थे। एनसीपी के कार्यकर्ताओं ने मुंबई समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन भी किया था। शरद पवार उस समय बीसीसीआई के अध्यक्ष ही नहीं, बल्कि केंद्रीय कृषि मंत्री भी थे। शरद पवार पर आरोप लगते थे कि देश में किसानों की आत्महत्याओं के मामले में बढ़ रहे हैं, लेकिन उन्हें क्रिकेट से फुरसत भी नहीं थी।

शरद पवार ने इस घटना के बाद ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटरों को बदतमीज कहा था और अड़ गए थे कि उनसे माफी माँगी जाए। बीसीसीआई ने धमकी भी दी थी कि ऑस्ट्रेलियाई टीम की शिकायत आईसीसी से की जाएगी।

इस विवाद के बाद रिकी पोंटिंग पर दबाव बनाकर क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने फोन पर माफी मँगवा दी गई थी और मामले को रफा-दफा कर दिया गया था। भले ही शरद पवार इस बात को अब भुलाने की बात कहते हों, पर हकीकत यही है कि इस क्लिप को देखकर आज भी भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के मन में टीस उठती है।

‘हमास आतंकी संगठन नहीं, नेतन्याहू को गोली मार देनी चाहिए’: इजरायली PM की हत्या के लिए कॉन्ग्रेस MP ने उकसाया, फिलस्तीन के समर्थन में रैली

केरल के कॉन्ग्रेस सांसद ने इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू को गोली मारने की बात कही। दरअसल, कॉन्ग्रेस सांसद ने राजमोहन उन्नीथन ने इज़राइल-हमास युद्ध के बीच केरल के कासरगोड में फिलिस्तीन और हमास के समर्थन रैली में हिस्सा ले रहे थे। इस रैली कॉन्ग्रेस नेता ने हमास की निंदा तो छोड़िए उल्टा इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू एक युद्ध अपराधी बताते हुए उन्हें बिना मुकदमे के सीधे गोली मारने की बात कही।

कॉन्ग्रेस नेता ने कहा कि हमास बंदूक उठाकर केवल अपनी जमीन, वहाँ के लोगों की रक्षा कर रही है। हमास आतंकी नहीं है। यदि कोई हमास को आतंकी कहता है तो उसका कड़ाई से विरोध करना है। कॉन्ग्रेस नेता यहीं नहीं रुके उन्होंने आगे अमेरिका का उदाहरण देते हुए यह भी कहा, “यदि हमास आतंकी है तो हम सब भी आतंकी है।”

कॉन्ग्रेस नेता ने नेतन्याहू को गोली मारने को सही साबित करने के लिए कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, न्यूरमबर्ग ट्रायल (Nuremberg trials) का उपयोग युद्ध अपराधों में शामिल लोगों के लिए किया गया था। इसमें युद्ध अपराधियों को बिना किसी मुकदमे के गोली मार दी गई थी।

कॉन्ग्रेस नेता ने कहा कि अब समय आ गया है कि न्यूरमबर्ग मॉडल का पुनः उपयोग किया जाए। बेंजामिन नेतन्याहू दुनिया के सामने युद्ध अपराधी बनकर खड़े हैं। नेतन्याहू को बिना किसी मुकदमे के गोली मारकर हत्या करने का समय आ गया है क्योंकि वह इस स्तर की क्रूरता कर रहे हैं।

कॉन्ग्रेस नेता खुलेआम फिलिस्तीन के समर्थन में बयानबाजी करते हुए नेतन्याहू के खिलाफ जहर उगला। उन्होंने कहा कि जिनेवा कन्वेंशन के सभी समझौतों को तोड़ने वालों को दंडित किया जाना चाहिए।

बता दें कि केरल की प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी (KPCC) 23 नवंबर इज़राइल-हमास युद्ध के बीच फिलिस्तीनी लोगों के साथ एकजुटता की घोषणा करने के लिए कोझिकोड समुद्र तट पर एक रैली आयोजित करने जा रही है। ऐसे में मीडिया रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस कमेटी के महासचिव केसी वेणुगोपाल फिलिस्तीन समर्थक इस रैली का उद्घाटन करेंगे।

हालाँकि, केरल में हमास और फिलिस्तीन का समर्थन नया नहीं है। वहाँ वामपंथी पार्टियों के साथ ही कट्टरपंथी मुस्लिम भी खुलेआम आतंकियों के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। 

गौरतलब है कि इजरायल-हमास युद्ध 43वें दिन में प्रवेश कर गया है और अब तक हजारों लोग मारे जा चुके हैं। इस युद्ध की शुरुआत तब हुई जब फिलिस्तीनी आतंकवादी समूह, हमास ने इज़रायल पर हमला किया और 1400 से अधिक इजरायलियों को बेरहमी से मार डाला था। वहीं जवाबी कार्रवाई में इजरायली सेना ने गाजा पट्टी और फिलिस्तीन के कुछ हिस्सों पर हमले कर रही है। 

ससुर BCCI अध्यक्ष, बहू के कपड़े पर संग्राम: सुनील गावस्कर की ‘पैंट’ दिखा किया ट्रोल, बोलीं मयंती लैंगर- फाइनल में फुल सूट पहनूँगी

ICC वनडे क्रिकेट वर्ल्ड कप 2023 के फाइनल में रविवार (19 नबंबर, 2023) को भारत और ऑस्ट्रेलिया गुजरात के अहमदाबाद स्थित ‘नरेंद्र मोदी स्टेडियम’ में भिड़ने वाले हैं। ‘स्टार स्पोर्ट्स’ चैनल सैटेलाइट पर इन मैचों का प्रसारण कर रहा है। BCCI (भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड) के अध्यक्ष रोजर बिन्नी की बहू और पूर्व क्रिकेटर स्टुअर्ट बिन्नी की पत्नी मयंती लैंगर बतर एकत्र इस चैनल से जुड़ी हुई हैं। इसी तरह पूर्व सलामी बल्लेबाज सुनील गावस्कर भी बतौर कमेंटेटर एवं विशेषज्ञ इससे जुड़े हुए हैं।

एक मैच के दर्जन दोनों को मैदान पर साथ में देखा गया। इस दौरान मयंती लैंगर और सुनील गावस्कर बातचीत कर रहे थे और इसका सीधा प्रसारण किया जा रहा था। हालाँकि, इस दौरान लोगों ने दोनों के ड्रेस को लेकर मजाक उड़ाना शुरू कर दिया। जहाँ मयंती लैंगर ने ब्लू कोट पहन रखा था, वहीं सुनील गावस्कर ने सफ़ेद शर्ट के साथ ब्लू फुलपैंट। मयंती लैंगर क टाँगों को देख कर लोग कहने लगे कि उनका पजामा सुनील गावस्कर ने पहन लिया है। कुछ लोगों ने तो तस्वीर एडिट कर के मयंती लैंगर को पजामा पहना दिया और सुनील गावस्कर को हाफ पैंट।

लोगों की ट्रॉलिंग के बाद मयंती लैंगर ने इस पर प्रतिक्रिया दी है। इस तस्वीर में वो एक अन्य महिला के साथ एक कमरे में दिख रही हैं, जहाँ कपड़े और जूते पड़े हुए हैं। मयंती लैंगर इस तस्वीर में सेल्फी लेती हुई दिख रही हैं। कुछ लोग तंज कसते हुए ये भी कह रहे थे कि मयंती लैंगर के पास पैंट खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं, इसीलिए उन्होंने सिर्फ कोट पहन रखा है। मयंती लैंगर ने अब लोगों से कहा है कि मैं आप सब की सच्ची चिंताओं को देख कर द्रवित हूँ।

उन्होंने लिखा, “आप सब की चिंताएँ, जिन्होंने मुझे अनगिनत पोस्ट्स में टैग किया है। मेरे परिवार और दोस्तों को बड़ी संख्या में जो तस्वीरें भेजी जा रही हैं। कुछ तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ की गई है, ब्लेजर ड्रेस की क्रूरता को कम कर के दिखाने के लिए। आप सब डरिए मत, मैं फाइनल मैच के लिए हमलोग फुल सूट पहन कर आने में समर्थ हैं।” बता दें कि फाइनल मैच में भी ‘स्टार स्पोर्ट्स’ की तरफ से मयंती लैंगर प्रेजेंटेशन देंगी। महिला स्पोर्ट्स एंकरों में वो काफी लोकप्रिय हैं।

मयंती लैंगर के पति स्टुअर्ट बिन्नी भी भारत के लिए खेल चुके हैं और वो ऑलराउंडर हुआ करते थे। वहीं उनके ससुर रोजर बिन्नी 1983 में वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम के सदस्य रहे हैं। वो भी ऑलराउंडर हुआ करते थे। दोनों ने सितंबर 2012 में शादी रचाई थी।

‘कॉन्ग्रेस सबसे भ्रष्ट पार्टी, नहीं चाहिए इनसे सम्मान’ : सोशल वर्कर जसप्रीत कौर ने ठुकराया IYC का ‘इंदिरा प्रदर्शनी अवार्ड’ , बोलीं- ये सिख नरसंहार के जिम्मेदार​

दिल्ली की युवा सोशल वर्कर जसप्रीत कौर ने कॉन्ग्रेस की युवा विंग भारतीय युवा कॉन्ग्रेस (IYC) के दिए इंदिरा प्रियदर्शनी पुरस्कार को लेने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि कॉन्ग्रेस सबसे भ्रष्ट पार्टी है और सिख नरसंहार के लिए जिम्मेदार है।

कौर ने ये जानकारी शुक्रवार (17 नवंबर) को अपने एक्स हैंडल पर शेयर की। पोस्ट में उन्होंने एक स्क्रीनशॉट डाला जिसमें IYC के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी की ओर से उन्हें ईमेल आया था।

मेल के जवाब में कौर ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा,”मैं इंदिरा प्रियदर्शनी पुरस्कार लेने से इनकार करती हूँ, क्योंकि यह भारतीय युवा कॉन्ग्रेस है, जो सबसे भ्रष्ट पार्टी है और पक्के तौर पर सिख नरसंहार के लिए जिम्मेदार हैं!”

गौरतलब है कि जसप्रीत कौर दिल्ली में ‘तेजस फॉर चेंज फाउंडेशन’ नाम से एक एनजीओ चलाती हैं। इस एनजीओ के जरिए वो वह गरीब, वंचितों और विकलांग बच्चों और युवाओं के लिए काम करती हैं।

उन्हें IYC के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीवी से मिले मेल में लिखा था, ”प्रिय पुरस्कार विजेताओं। हम आपको यह सूचित करते हैं कि भारतीय युवा कॉन्ग्रेस ने 18 नवंबर, 2023 को सुबह 11:00 बजे से जवाहर भवन, नई दिल्ली में ‘इंदिरा प्रियदर्शनी पुरस्कार’ समारोह का आयोजन किया है। आपसे अनुरोध है कि आप अपना कीमती वक्त दें और कार्यक्रम में भाग लें। युवा कॉन्ग्रेस के सदस्यों को मार्गदर्शन, प्रेरणा देने और उत्साह बढ़ाने के लिए अपनी मौजूदगी से इस अवसर की शोभा बढ़ाएँ।”

ऑपइंडिया से जसप्रीत कौर ने की बात

ऑपइंडिया से बात करते हुए जसप्रीत कौर ने कहा, “मैं दिल्ली में ‘तेजस फॉर चेंज फाउंडेशन’ नाम से अपना एनजीओ चलाती हूँ। मेरे एक जानने वाले भी दिल्ली में एक एनजीओ भी चलाते हैं। मैं उनसे जुड़ी थी। उन्होंने मुझसे कहा था कि वह इस इंदिरा प्रियदर्शनी पुरस्कार के लिए मेरा नाम देना चाहते हैं। उस वक्त मुझे नहीं पता था कि यह पुरस्कार कॉन्ग्रेस पार्टी देती है।”

उन्होंने आगे कहा, “कल (17 नवंबर) रात करीब 9:20 बजे मुझे कॉन्ग्रेस पार्टी की आईडी से इस पुरस्कार के लिए ईमेल आया। मैंने कॉन्ग्रेस का नाम पढ़ते ही तुरंत यह पुरस्कार लेने से इनकार कर दिया। मुझे मिले मेल में पुरस्कार पाने वाले लगभग 14 से 15 अन्य लोगों का भी जिक्र है। हालाँकि मैं उन्हें नहीं जानती।”

जसप्रीत कौर ने आगे कहा, ”मुझे पता है कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने 1984 में जिस तरह से सिखों का नरसंहार किया था उसे देखते हुए अगर मैंने इस पार्टी से यह पुरस्कार लिया होता तो ये मेरे पूरे सिख समुदाय के लिए एक अपमानजनक बात होती। मैं किसी भी कीमत पर कॉन्ग्रेस से कुछ भी नहीं लेना चाहती।”

बताते चलें कि इंदिरा प्रियदर्शनी पुरस्कार भारतीय युवा कॉन्ग्रेस सामाजिक कल्याण के कामों, शिक्षा, कला, संस्कृति और खेल जैसे कई क्षेत्रों में योगदान देने वाले युवाओं को देती है। यह पुरस्कार 1995 में शुरू किया गया था और तब से यह हर साल दिया जाता है।

उन्होंने आगे कहा, “सोशल मीडिया पर कई लोग मुझे इसके लिए ट्रोल कर रहे हैं। वे कह रहे हैं कि मैंने पुरस्कार से इसलिए इंकार कर दिया क्योंकि मैं भाजपा से हूँ। मैं भाजपा से जुड़ी नहीं हूँ। लेकिन ट्रोलर्स मेरे पुराने ट्वीट्स (एक्स पर पोस्ट), पोस्ट के स्क्रीनशॉट और तस्वीरें उठा रहे हैं। मैं किसी पार्टी से नहीं हूँ। सच तो यह है कि मैं किसी भी हालात में यह पुरस्कार नहीं लेती फिर चाहे में किसी विशेष पार्टी का समर्थन करती हूँ या नहीं।”

ट्रोल होने के बारे में उन्होंने कहा, ”मैंने ‘मेरी माटी मेरा देश’ अभियान के एक कार्यक्रम में भाग लिया था। यह शिवाजी कॉलेज में आयोजित किया गया था। मुझे वहाँ एनजीओ सदस्य होने से गेस्ट के तौर बुलाया गया था। तजिंदर पाल सिंह बग्गा जी भी वहाँ मौजूद थे। वह राजनीतिक तौर से सक्रिय हैं। मैं नहीं हूँ, लेकिन सिर्फ इसलिए कि मैं एक तस्वीर में उनके जैसे किसी शख्स के साथ देखी थी तो लोगों ने दावा करना शुरू कर दिया कि मैं भाजपा से हूँ। मेरे पास भाजपा में कोई पद नहीं है। मैं उनकी कुछ नीतियों का समर्थन करती हूँ यह सच है, लेकिन मैं बीजेपी की सदस्य नहीं हूँ।”

जसप्रीत कौर पत्रकारिता और जनसंचार में ग्रेजुएट हैं। इसके अलावा वो फ्रेंच भाषा भी सिखाती हैं। उन्होंने दिल्ली में ‘तेजस फॉर चेंज फाउंडेशन’ की नींव दिसंबर 2022 में रखी थी। हालाँकि इसका काम 2023 में शुरू हुआ। यह एनजीओ विकलांग बच्चों और वंचित युवाओं के लिए खेल में उनकी भागीदारी बढ़ाने और उनकी शिक्षा के लिए काम करता है।

उत्तरकाशी में टनल के बाहर बना मंदिर, रेस्क्यू के लिए नई मशीनें इंदौर से आईं: 40 नहीं सुरंग में फँसे हुए हैं 41 मजदूर

उत्तरकाशी के सिलक्यारा से डंडालगाँव के बीच निर्माणाधीन सुरंग में फँसे मजदूरों को निकालने की कोशिशें लगातार जारी हैं। इस बीच पता चला है कि अंदर फँसे श्रमिकों की संख्या 40 नहीं 41 है। इन सभी मजदूरों को बचाने के लिए कल तक सुरंग में ड्रिलिंग का काम हो रहा था। हालाँकि आज के अपडेट में पता चला कि जो अमेरिकी मशीन वहाँ ड्रिल कर रही थी वो काम करना बंद कर दी थी, इस कारण बचाव कार्य को रोकना पड़ा।

कुछ रिपोर्ट्स ने यह भी जानकारी दी है शनिवार (18 नवंबर 2023) को बचाव कार्य पर रोक इसलिए लगाई गई है क्योंकि सुरंग से कुछ चटकने की आवाज आई थी। जिसके बाद ये डर फैल गया कि कहीं सुरंग का कोई और हिस्सा न धँस जाए। इस आवाज के आने के बाद सरकार की हाईवे और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी ने बयान दिया कि सुरंग के और धँसने की आशंका के चलते बचाव अभियान को रोक दिया गया है।

सबसे ज्यादा ध्यान 2 पाइपों को आपस में जोड़ते वक्त देना पड़ रहा है। केवल इसी काम में डेढ़ से 2 घंटे लग रहे हैं। वहीं सुरंग में भी जब ऑगर मशीन डाली जा रही है तो उसके कंपन से संतुलन बिगड़ रहा है इसलिए काम रुक-रुक के हो रहा है। अमेरिकी मशीन के करीब होने के बाद वायु सेना की मदद से इंदौर से देहरादून करीब 22 टन महत्तवपूर्व उपकरणों को पहुँचाया गया है। इस मशीन को बैकअप के लिए इस्तेमाल किया जाना है।

वहीं रेस्क्यू ऑपरेशन में मदद देने के लिए रेल विकास निगम लिमिटेड की ऑस्ट्रेलिया की कंसल्टेंसी कंपनी के एक्सपर्ट भी उत्तरकाशी पहुँचे हैं। नॉर्वे से भी मदद माँगी गई है। इधर प्रदेश मुख्यमंत्री लगातार अधिकारियों से रेस्क्यू मिशन की पल-पल की जानकारी ले रहे हैं तो वहीं PMO के डिप्टी सेक्रेटरी स्तर के अधिकारी रेस्क्यू वाली जगह पर भी पहुँचे और अभियान के बारे में जानकारी ली। सुरंग में फँसे लोगों के लिए बाहर एक मंदिर भी बनाया गया है।

PMO के पूर्व सलाहकार भास्कर खुलबे ने कहा, “हम कोई भी रास्ता तलाशने की एक भी संभावना नहीं छोड़ेंगे क्योंकि जो लोग यहाँ कई दिनों से फँसे हुए हैं उन तक पहुंचना हमारी प्राथमिकता है। हमारे पास किसी भी संसाधन, विकल्प और विचारों की कमी नहीं है, हमें बस कुछ समन्वित कार्रवाई की जरूरत है और हम कोशिश कर रहे हैं टीमें बनाएँ और किसी तरह वहाँ पहुँचें…हम वर्टिकल ड्रिलिंग का विकल्प भी तलाश रहे हैं…हमें विदेशी सलाहकारों से भी मदद मिल रही है…पीएम मोदी का संदेश है कि यह ऑपरेशन जल्द से जल्द किया जाए।”

ऑफिस में बम है… TCS ने महिला को नहीं दी नौकरी, एक कॉल से बेंगलुरु के दफ्तर में मचा दिया हड़कंप: पुलिस ने किया गिरफ्तार

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के होसुर रोड स्थित ‘टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज’ (TCS) के दफ्तर में मंगलवार (14 नवंबर, 2023) को हड़कंप मच गया। दरअसल, इस ऑफिस के B ब्लॉक को फोन पर पूरे ऑफिस को बम से उड़ाने की धमकी मिली थी। इससे वहाँ हड़कंप मच गया।

सूचना मिलते ही पुलिस आनन-फानन में बम स्क्वॉड समेत मौके पर पहुँची। इसके बाद जाँच-पड़ताल शुरू हुई। आखिर में जाँच में सामने आया कि फोन पर बम से उड़ाने की ये फर्जी कॉल थी। बेंगलुरु पुलिस की छानबीन में TCS की छँटनी में निकाली गई एक्स कर्मचारी बी श्रुति शेट्टी का नाम सामने आया। इसके बाद पुलिस ने बुधवार (15 नवंबर, 2023) को उसे उसके घर बेलगावी से गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस की जानकारी के मुताबिक, आरोपित पूर्व कर्मचारी श्रुति शेट्टी ने BBM किया है। उसने एमबीए करने के लिए टीसीएस से इस्तीफा दे दिया था। उसे गुस्सा था कि कंपनी ने इसके बाद फिर से उसे जॉब पर नहीं रखा। उसे जब लगा की कंपनी उसे दोबारा नौकरी पर नहीं रखेगी तो उसे कंपनी पर बहुत गुस्सा आया। उसने गुस्से के चलते बगैर कुछ सोचे-समझे मंगलवार को TCS के ट्रांसपोर्ट हेल्पडेस्क में फोन लगाया। उसने कहा कि बेंगलुरु ऑफिस में बम है। इसके बाद ऑफिस के सब लोग दहशत में आ गए।

जानकारी के मुताबिक, टीसीएस के ट्रांसपोर्ट हेल्पडेस्क के जिस कैब ड्राइवर को इस पूर्व महिला कर्मचारी ने ऑफिस में बम होने की धमकी का फर्जी कॉल किया था उसे वो कंपनी में जॉब के दौरान से ही जानती थी। इस एक्स कर्मचारी ने इस ड्राइवर को नशे की हालत में कॉल की थी।

गौरतलब है कि टीसीएस के हैदराबाद ऑफिस में इसी तरह का वाकया मई में पेश आया था। तब ऐसे ही किसी ने ऑफिस को बम से उड़ाने की फर्जी धमकी दी थी। बाद में जाँच में पाया गया था कि ये कॉल भी कथित तौर पर एक्स कर्मचारी ने की थी।

5 साल की बच्ची को कब्र से निकाला, साथ में सोता मिला मोहम्मद रफीक: फूल चढ़ाने आए पिता के उड़े होश, दरिंदगी की जताई आशंका

वाराणसी में मानवता को शर्मशार करने वाली एक सनसनीखेज घटना सामने आई हैं, जहाँ लक्सा पुलिस ने रेवड़ी तालाब कब्रिस्तान से एक मुस्लिम युवक को शर्मसार करने वाली हरकत करते गिरफ्तार किया है। युवक की पहचान मोहम्मद रफीक के रूप में हुई है। जो कब्रिस्तान में एक दिन पहले दफन की गई 5 साल की मासूम का शव निकालकर उसके साथ कब्रिस्तान के ही एक कोने में सो रहा था। वहीं से पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। 

इस मामले की चर्चा सोशल मीडिया में भी है। लोग ऐसी दरिंदगी पर सख्त से सख्त कार्रवाई की माँग कर रहे हैं और कह रहे हैं कि मरने के बाद भी सुरक्षित नहीं हैं बेटियाँ?

क्या है पूरा मामला 

दरअसल, दशाश्वमेध क्षेत्र के सदानंद बाजार निवासी एक व्यक्ति की 5 साल की बेटी का इलाज के दौरान बुधवार (16 नवंबर, 2023) को हॉस्पिटल में मौत हो गई थी। रात करीब 9:30 बजे बच्ची का शव रेवड़ी तालाब के कब्रिस्तान में दफनाया गया। उसके बाद मैयत में आए लोग घर चले गए। अगले दिन जब बच्ची के पिता कब्र पर पानी डालने और फूल चढ़ाने गए तो उन्हें कब्र की मिटटी हटी हुई लगी।

उन्होंने कब्र को खुदवाया तो उसके अंदर से उनकी बेटी का शव गायब था। इस पर उन्होंने खोजबीन शुरू की तो कब्रिस्तान के ही एक कोने में उनकी बेटी के शव के साथ रेवड़ी तालाब निवासी मोहम्मद रफीक उर्फ छोटू सोया हुआ था। इस पर उन्होंने अपनी बेटी के शव के साथ अनहोनी की आशंका जताते हुए पुलिस को सूचना दी।

मौके पर पहुँची पुलिस ने पिता की शिकायत पर मोहम्मद रफीक को गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही पुलिस ने शव को तत्काल अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इस मामले में बच्ची के पिता ने बेटी के शव के साथ दुष्कर्म का आरोप भी लगाया। वहीं पुलिस जाँच के बाद कार्रवाई की बात कह रही है।

गौरतलब है कि इस संबंध में एसीपी दशाश्वमेध डॉ अवधेश पाण्डेय ने भी घटना की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि दशाश्वमेध थानाक्षेत्र के एक व्यक्ति की 5 साल की लड़की की मृत्यु बिमारी की वजह से हुई थी, जिसका शव रेवड़ी तालाब कब्रिस्तान में दफन किया गया था। वहाँ पर कब्र खोदने वाले मोहम्मद रफी उर्फ छोटू की मदद से कब्र खोदवाकर उसे दफन कर चल आए थे।

एसीपी ने बताया कि मोहम्मद रफी नशे का लती है और रात में दो बजे के करीब उसने मिट्टी हटाकर शव को बाहर निकाल लिया और अपने पास रखकर उसके पास लेट गया था। जिसकी सूचना पिता को अगले दिन लगी और उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। 

बता दें कि पुलिस ने जहाँ इस मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद कार्रवाई की बात कही वहीं स्थानीय लोगों ने कहा कि यदि मुस्लिम कंट्री में ऐसी घटना घाटी होती तो अब तक इसका गला काट दिया गया होता।

टेस्टिंग थी बाक़ी, फिर भी आदित्य ठाकरे ने जबरन कर दिया पुल का उद्घाटन: लोगों की जान खतरे में डालने के लिए दर्ज हुई FIR, बिना अनुमति ब्रिज को कर दिया चालू

शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे के खिलाफ FIR दर्ज हुई है। उनके साथ कई अन्य नेताओं पर भी मामला दर्ज कराया गया है। ये FIR सरकारी कार्य में बाधा डालने, आम लोगों के जीवन को खतरे में डालने जैसे मामलों में दर्ज कराई गई है। BMC ने मुंबई के एनएम जोशी पुलिस स्टेशन में एक पुल के जबरन उद्घाटन के मामले में FIR दर्ज कराई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला डिलाइल रोड ब्रिज लेन के उद्घाटन के सिलसिले में दर्ज किया गया है। इसमें आदित्य ठाकरे के साथ MLC सुनील शिंद, पूर्व महापौर किशोरी पेडनेकर, पूर्व विधायक सचिन अहीर, स्नेहल अंबेडकर समेत 20 से अधिक नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया है। मुंबई के एनएम जोशी पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 143, 149, 326 और 447 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

डिलाइल पुल का जबरन कर दिया उद्घाटन

आदित्य ठाकरे और अन्य नेताओं ने डिलाइल ब्रिज को बिना परमिशन ही खोल दिया। अभी इस ब्रिज से जुड़ी कुछ अनापत्ति प्रमाण पत्र मिलने बाकी हैं। ऐसे में बीएमसी ने कहा है कि इस पुल पर कोई हादसा होता है, तो वो किसकी जिम्मेदारी होगी? अभी पुल की पूरी तरह से जाँच होनी है। इसके बाद इसे अनापत्ति प्रमाण पत्र मिलना था, और फिर इस माह के आखिर तक इसे खोले जाने की योजना थी। हालाँकि, अनापत्ति प्रमाण पत्रों (NOC) के न मिलने की वजह से इसके खुलने की तारीख अभी तय नहीं हुई थी।

वहीं, शिवसेना (उद्धव ठाकरे) गुट के नेताओं का कहना है कि आम लोगों को समस्याएँ हो रही हैं। ये पुल लंबे समय से बनकर तैयार है। ऐसे में उन्होंने BMC को समय दिया था कि वो तीन दिनों के अंदर अपनी सारी प्रक्रियाएँ पूरी कर ले, लेकिन बीएमसी ने ऐसा नहीं किया। जिसके बाद उन्हें खुद ही ये कदम उठाया पड़ा। इस बारे में आदित्य ठाकरे ने 16 नवंबर को एक्स पर पोस्ट भी किया था।

श्रेय लूटने की कोशिश कर रहे यूबीटी ग्रुप के लोग

शिवसेना (शिंदे गुट) के प्रवक्ता किरण पावस्कर ने कहा कि यूबीटी ग्रुप के लोग सिर्फ श्रेय लूटने की कोशिश कर रहे थे। जब वो सत्ता में थे, तब तक इस पुल पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। अब हमारी सरकार और प्रशासन ने पुल को पूरा कराया है, तो श्रेय लूटने की कोशिश में उन्होंने जल्दबाजी में पुल का उद्घाटन कर दिया है। इससे आम लोगों की जान को जोखिम में डाला गया। समय से पहले बिना NOC के ही पुल को खोल देना, जिसकी टेस्टिंग पूरी नहीं हुई है, वो किसी बड़ी दुर्घटना की वजह बन सकता है।