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उत्तर प्रदेश में अब नहीं बिकेंगे हलाल प्रोडक्ट? CM योगी ने दिए कार्रवाई के निर्देश, लखनऊ में 9 कंपनियों पर FIR

उत्तर प्रदेश में हलाल सर्टिफिकेशन से जुड़े उत्पादों की बिक्री पर जल्द प्रतिबंध लग सकता है। बताया जा रहा है कि इस मामले पर खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया है। प्रदेश में हलाल सर्टिफिकेशन को धंधा बनाकर चलाने वाली उन कंपनियों पर कार्रवाई की शुरुआत हो गई है, जो तेल, साबुन, टूथपेस्ट, मधु समेत कई अन्य शाकाहारी उत्पादों को भी हलाल प्रमाण पत्र दे रही हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हलाल सर्टिफिकेशन देने वाली 9 कंपनियों पर लखनऊ में एफआईआर दर्ज कराई गई है। ये शिकायत शैलेंद्र शर्मा ने अज्ञात कंपनियों पर करवाई है। इनके विरुद्ध आईपीसी की धारा 120 b/ 153A/ 298/ 384 /420 /467/ 468 /471/ 505 के तहत केस दर्ज हुआ है।

एफआईआर में हलाल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड चेन्नई, जमीयत उलेमा हिन्द हलाल ट्रस्ट दिल्ली, हलाल काउंसिल ऑफ इंडिया मुम्बई, जमीयत उलेमा महाराष्ट्र मुम्बई आदि का नाम है। इन संस्थाओं पर आरोप है कि ये एक मजहब के नाम पर कुछ उत्पादों पर हलाल प्रमाणपत्र दे रहे हैं जबकि ये देने का उनका अधिकार नहीं है। खान-पान के उत्पादों की गुणवत्ता आदि के प्रमाण पत्र के लिए एफएसएसएआई व आईएसआई जैसी संस्थाओं को अधिकृत किया गया है।

शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि इन सबके पीछे आपराधिक षड्यंत्र वजह हो सकती है। जहाँ हलाल सर्टिफिकेट के नाम पर इकट्ठा हो रही अवैध कमाई से आतंकवादी संगठन व राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को फंडिंग की जा रही हैं। या फिर इसके जरिए उन कंपनियों को वित्तीय नुकसान पहुँचाने का प्रयास हो रहा है जो ऐसे हलाल सर्टिफिकेशन के साथ सामान नहीं बेचतीं।

हलाल क्या होता है?

बता दें कि इस्लाम मजहब के अनुसार, हलाल का मतलब जायज होता है। खाद्य व सौंदर्य उत्पाद पर जब हलाल सर्टिफाइड लिखा जाता है तो उसका अर्थ होता है कि वो उत्पाद मुस्लिमों के इस्तेमाल योग्य है क्योंकि उसमें ऐसा कुछ नहीं डाला गया है जो उनके मजहब में हराम है।

इस्लामी देशों में कोई भी प्रोडक्ट एक्सपोर्ट करने के लिए ये हलाल सर्टिफिकेशन जरूरी होता है। हालाँकि भारत में शाकाहारी वस्तुओं पर इसका प्रयोग क्यों किया जा रहा, ये बात अब तक नहीं समझ आई है। पिछले दिनों भारतीय रेलवे में यात्रा करते वक्त एक यात्री ने इस पर सवाल खड़ा किया था कि उसकी चाय के पैकेट पर हलाल क्यों लिखा है। इस घटना की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी, उसी के बाद ये पूरा मुद्दा संज्ञान में आया।

आपके हर सवाल का पल भर में जवाब दे देता है जो ChatGPT, उसे बनाने वाली कंपनी की अंतरिम CEO बनीं मीरा मुराती: फाउंडर को पद से हटाया गया

दुनिया को मुफ्त और सुरक्षित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) देने के मकसद वाली अमेरिकन कंपनी ओपनएआई (OpenAI) ने शुक्रवार (17 नवंबर,2023) को 34 साल मीरा मुराती को कंपनी के अंतरिम मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का पद सौंपा है। ये वही कंपनी है जिसने 30 नवंबर, 2022 को चैट GPT AI सिस्टम चैटबॉट से दुनिया को रुबरू कराया था। भाषा की दिशा में बातचीत को बेहतरीन बनाने वाले ये AI सिस्टम पल भर में आपके सवाल से जुड़ी हर जानकारी आपके सामने रख देता है।

दरअसल कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर ने इसके पूर्व सीईओ और को फाउंटर सैम ऑल्टमैन को उनके पद से हटा दिया। कहा जा रहा है कि OpenAI को ऑल्टमैन की काबिलियत पर यकीन नहीं रह गया था। इस वजह से उन्हें हटाने का फैसला लिया गया। इससे पहले मुराती कंपनी की मुख्य तकनीकी अधिकारी का पद भी सँभाल चुकी हैं। उन्होंने ChatGPT को बनाने में भी अहम भूमिका निभाई। कई साल तक मीरा मुराती ने चैटजीपीटी और डीएएल-ई जैसे क्रांतिकारी प्रोडक्ट्स के विकास और उन्हें बनाने में OpenAI के लिए काम किया।

अब कहीं जाकर वो अंतरिम सीईओ का पद मिलने से सुर्खियों में आई हैं। कंपनी ने उनको ये पद सौंपते हुए कहा कि मुराती कुशल और बहुत प्रतिभावान है। इससे ये भी साफ हो गया है कि आगे स्थाई सीईओ की नियुक्ति करते वक्त भी उनके नाम पर विचार हो सकता है।

हालाँकि पिछले साल से उन्हें चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर का पद सौंपा गया था। उनके बारे में OpenAI के मौजूदा और पूर्व कर्मचारियों का कहना है कि मुराती कंपनी के संचालन में इस दौरान भी अहम भूमिका निभा रही थीं। उन्होंने ये पक्का करने में बेहतरीन काम किया कि कंपनी के इंजीनियर तय वक्त पर ChatGPT बना लें।

यही नहीं उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट के साथ कंपनी के रिश्तों को नई ऊंचाईयाँ दीं। यही वजह रही कि माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला ने टाइम पत्रिका में उनके बारे में लिखा, “उनके पास तकनीकी विशेषज्ञता, व्यावसायिक कौशल और मिशन के महत्व की गहरी जानकारी के साथ टीम को साथ लाने की काबिलियत है। इसका नतीजा ये हुआ कि मीरा ने अब तक आई कुछ सबसे रोमांचक AI तकनीकों को बनाने में मदद की है।”

इतना ही नहीं वाशिंगटन और यूरोप में ओपनएआई की ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक को आगे बढ़ाने में अहम योगदान दिया। अल्बानिया में साल 1988 में जन्मी और कनाडा में पढ़ी मीरा मुराती एक मैकेनिकल इंजीनियर हैं। ये उनकी तकनीकी कुशलता का ही उदाहरण है कि उन्होंने डार्टमाउथ कॉलेज में अपने ग्रेजुएशन के दौरान ही एक हाइब्रिड रेस कार बना डाली थी।

साल 2013 से 2016 तक उन्होंने एलन मस्क की कंपनी टेस्ला में मॉडल एक्स की सीनियर प्रोडक्ट मैनेजर का पद संभाला। साल 2018 में उन्होंने OpenAI का दामन थामा था। हालाँकि, उनके नाम को देखते हुए उनके भारतीय मूल से होने का भ्रम था, लेकिन उनका सरनेम उनके अल्बानिया से होने की गवाही देता है।

ज़हर से हिन्दू युवक की मौत के पीछे मुस्लिम लड़की, चैट से खुला राज़! अम्मी-अब्बू और मामा सहित अलीशा पर FIR दर्ज, पीड़ित पिता ने बयाँ किया दर्द

उत्तराखंड की देहरादून पुलिस ने अलीशा और उसके अब्बा इम्तियाज़, अम्मी रेशमा और मामा नदीम पर 21 साल के हिंदू युवक रोहित शर्मा को आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज किया है।

सब-इंस्पेक्टर सनोज कुमार के मुताबिक, ये केस रोहित शर्मा के पिता महिपाल शर्मा की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया। शिकायत में उन्होंने बेटे की ‘दोस्त’ अलीशा और उसके परिवार के सदस्यों पर उसे परेशान करने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था।

उनका आरोप था कि इसी वजह से उनके बेटे को अपनी जान लेने जैसा कठोर कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा। ये वाकया देहरादून शहर के पटेल नगर मोहल्ले का है। कथित तौर पर 25 अक्टूबर, 2023 को कोई जहरीला पदार्थ खाने से रोहित शर्मा की 2 नवंबर को एक अस्पताल के ICU में इलाज के दौरान मौत हो गई थी।

‘रोहित को मानसिक तौर पर परेशान किया गया’

रोहित की मौत के बाद पिता महिपाल शर्मा ने 4 नवंबर को अलीशा, उसके अभिभावकों इम्तियाज़ और रेशमा और उसके मामा नदीम के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।

ऑपइंडिया के पास इस केस में दर्ज FIR की कॉपी है। परेशान पिता महिपाल शर्मा ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि पड़ोस पटेल नगर इलाके में ही अपने परिवार के साथ रहने वाली अलीशा ने उसके बेटे को प्यार के जाल में फँसाया। उन्होंने इसमें ये भी दावा किया कि अलीशा और उसके परिवार के सदस्य रोहित को परेशान कर रहे थे। मृतक रोहित के पिता ने ये भी कहा कि आरोपियों ने उनके बेटे से मारपीट भी की थी।

उनका आरोप है कि अलीशा और उसके परिवार के सदस्यों ने उनके बेटे को मानसिक तौर पर इतना परेशान कर दिया कि वो आत्महत्या जैसा कदम उठाने को मजबूर हो गया। इस केस को लेकर सब-इंस्पेक्टर सनोज कुमार ने कहा, “शिकायत के जवाब में चारों आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की धारा 306 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया गया है।”हालाँकि, उन्होंने ये भी कहा कि अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

ऑपइंडिया को मिली FIR की कॉपी

फोन चैट से खुला अलीशा संग अफेयर का राज

गौरतलब है कि ऑर्गेनाइजर वीकली ने 16 नवंबर को इस घटना पर एक खबर छापी थी। इसमें वेब पोर्टल के रिपोर्टर ने मृतक युवक के पिता के साथ हुई बातचीत के अंश शेयर किए। इसमें भी उन्होंने अलीशा और उसके परिवार के सदस्यों पर अपने बेटे की हत्या का आरोप लगाया। उन्होंने खुलासा किया कि वे 25 अक्टूबर, 2023 को बेटे रोहित के जहर खाने के दिन तक वो अलीशा के साथ अपने बेटे के रिश्ते से अनजान थे। महिपाल शर्मा ने अपने मृत बेटे और अलीशा के बीच व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट भी ऑर्गनाइज़र के साथ शेयर किए।

फोटो साभार: ऑर्गेनाइजर वीकली

महिपाल शर्मा के हवाले से वेब पोर्टल ने लिखा, “25 अक्टूबर को कुछ खाने के बाद रोहित बोल नहीं पा रहा था। उसके फोन की जाँच करने पर हमें उसके और अलीशा के बीच एक चैट मिली, जहाँ आयशा ने लिखा था कि उसके परिवार को उनके रिश्ते के बारे में पता चल गया और वह उसका निकाह किसी और से करना चाहता था। रोहित जल्दी से उसके घर गया और वापस लौटने पर उसे उल्टी हुई और आखिरकार वह बेहोश हो गया। उसकी जेब से मेरी पत्नी को चूहे मारने वाली दवा का एक पैकेट मिला।”

मृतक रोहित के पिता ने अलीशा के परिवार पर बेटे की इस अचानक मौत में हाथ होने का आरोप लगाया है। उन्होंने आरोप लगाया, “इम्तियाज़ और उनके परिवार ने रोहित के जहर खाने वाले दिन ही अपना घर छोड़ दिया था। इससे उनके इसमें शामिल होने के बारे में हमारा संदेह गहरा हो गया।”

इस केस के जाँच अधिकारी सब-इंस्पेक्टर सनोज कुमार ने 16 नवंबर, 2023 को वेबपोर्टल को बताया कि आरोपित फिलहाल फरार हैं और पुलिस आरोपितों की तलाश कर रही है। उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि पोस्टमॉर्टम जाँच की गई थी और इसके निष्कर्षों ने इस मामले में FIR स्वीकार करने का आधार बनाया।

जिस टीम के हाथों में वर्ल्ड कप देखना चाहता है पूरा भारत, उसकी जर्सी का रंग देख भड़क गईं CM ममता बनर्जी: कहा- हर चीज का हो रहा भगवाकरण

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी या तो भगवा रंग ही पसंद नहीं करतीं या फिर उन्हें इस रंग से नाराजगी केवल भारतीय जनता पार्टी (BJP) की वजह से है ये तो वहीं बता सकती है। लेकिन, शुक्रवार (17 नवंबर, 2018) को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी टीम इंडिया के खिलाड़ियों को भगवा जर्सी में प्रैक्टिस करते हुए देख कर भड़क गईं और भाजपा पर निशाना साधने लगीं।

उनका बीजेपी पर ये ज़ुबानी हमला ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाले ODI विश्व कप 2023 के फाइनल से महज दो दिन पहले हो रहा है जब पूरे भारत के सिर पर क्रिकेट का बुखार सिर चढ़ कर बोल रहा है। सीएम को इस रंग से इतनी नाराजगी है कि उन्होंने आरोप लगा डाला है कि देश में हर चीज के भगवाकरण की कोशिश की जा रही है जो उन्हें मंजूर नहीं है। भाजपा पर तंज करते हुए सीएम ममता बनर्जी ने भारतीय क्रिकेट टीम की प्रैक्टिस जर्सी का हवाला देते हुए कहा कि सब कुछ भगवा हो गया है।

उन्होंने ये बातें शुक्रवार को मध्य कोलकाता के पोस्ता बाजार में जगधात्री पूजा के उद्घाटन के मौके पर कहीं। इस कार्यक्रम में सीएम बनर्जी ने कहा, “अब सब कुछ भगवा हो रहा है! हमें अपने भारतीय खिलाड़ियों पर गर्व है और मुझे विश्वास है कि वे विश्व चैंपियन बनेंगे, लेकिन जब वे अभ्यास करते हैं तो उनकी पोशाक भी भगवा हो गई है। वे पहले नीले रंग के कपड़े पहनते थे।”

बता दें कि टीम इंडिया की मैच की जर्सी नीले रंग की है और अभ्यास सत्र के दौरान टीम नारंगी किट पहनती है। उन्होंने आगे कहा, “हमारी टीम महान है और हम जीतेंगे, लेकिन भारत को श्रेष्ठता साबित करने के लिए भगवा जर्सी पहनकर अभ्यास करने की जरूरत नहीं है।” सीएम बनर्जी ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा, “हर चीज़ का नाम बदला जा रहा और हर चीज़ को भगवा रंग दिया जा रहा है।”

उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि न केवल क्रिकेट टीम की प्रैक्‍टि‍स जर्सी, बल्‍क‍ि मेट्रो स्टेशनों की पेंटिंग को भी भगवा रंग से रंगा गया है जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है। हालाँकि, सीएम बनर्जी ने बगैर किसी का नाम लिए ये बातें कहीं, लेकिन उनकी बातों से ये साफ था कि वो बीजेपी पर निशाना साध रही हैं। सीएम बनर्जी ने भगवा रंग को लेकर ये भी कहा कि ये पक्षपातपूर्ण राजनीति है।

इस दौरान वो बहुजन समाज पार्टी यानी बसपा (BSP) सुप्रीमो मायावती के बहाने पीएम मोदी पर निशाना साधने से नहीं चूकीं। सीएम बनर्जी ने कहा, “एक बार मैंने सुना था कि मायावती ने अपनी मूर्ति बनवाई है, लेकिन अब ये सामान्य बात हो गई है। अब हर चीज का नाम नमो के नाम पर रखा जा रहा है।” बनर्जी ने आगे कहा, “यह देश जनता का है, न क‍ि सिर्फ एक पार्टी के लोगों का।”

उनकी बात का समर्थन विवादों में घिरी TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने भी किया है। उन्होंने अपने ‘X’ (ट्विटर) हैंडल पर सीएम बनर्जी की तारीफ करते हुए लिखा, “अच्छी सोच को नमो-नमः।” इस दौरान सीएम बनर्जी ने केंद्र सरकार पर राज्य का फंड रोकने का आरोप लगाते हुए कहा कि हजारों मनरेगा मजदूर वंचित रह गए हैं। उन्होंने आगे कहा, “पहले मैंने CPI(M) से लड़ाई लड़ी थी और अब मुझे दिल्ली की सत्ता पर काबिज पार्टी से लड़ना पड़ रहा है।”

सीएम बनर्जी के इस तंज का जवाब देते पश्चिम बंगाल के बीजेपी अध्यक्ष राहुल सिन्हा ने कहा कि ममता बनर्जी बदले की भावना वाला नजरिया रखती हैं। बीजेपी नेता सिन्हा ने कहा, “कुछ दिनों के बाद वो हमारे राष्ट्रीय ध्वज में भगवा रंग होने पर भी सवाल कर सकती है। हम ऐसे बयानों पर प्रतिक्रिया देना भी सही नहीं समझते हैं।”

सरकारी जमीन पर जामा मस्जिद ने कर रखा है कब्जा, दिल्ली हाई कोर्ट ने MCD को लगाई फटकार: कहा- पब्लिक पार्क वापस लो, पुलिस चाहिए तो देंगे

दिल्ली के जामा मस्जिद ने पास के एक पब्लिक पार्क पर अवैध कब्जा किया हुआ है। इसे लेकर मोहम्मद अर्सलान नाम के व्यक्ति ने याचिका दायर की थी। अब मामले पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने ये कब्जा वापस न ले पाने के लिए MCD को फटकारा है। कोर्ट ने कहा है- “हम ऐसी सदी में नहीं रह रहे हैं जहाँ कानून का शासन नहीं है फिर आखिर क्यों MCD ये कब्जा वापस नहीं ले पाई।”

सुनवाई के दौरान MCD ने हाईकोर्ट को बताया कि पब्लिक पार्क पर जामा मस्जिद की अथॉर्थी और शाही इमाम ने कब्जा कर रखा है। उन लोगों ने अवैध रूप से उसे अपने कब्जे में किया हुआ है और उस पर वे ताला भी लगा देते हैं। एमसीडी की ओर से पेश वकील ने हाईकोर्ट को बताया कि वजूखाने के पास बने पार्क में वह लोग एमसीडी अधिकारियों को प्रवेश नहीं करने देते और दिल्ली वक्फ बोर्ड भी पार्क को अपनी संपत्ति बताता है।

MCD की ओर से पेश वकील की बात सुनने के बाद एक्टिंग चीफ जस्टिस मनमोहन और मिनी पुष्कर्ण ने इस बात पर नाराजगी जाहिर की कि आखिर कैसे पब्लिक पार्क पर कब्जा कर लिया गया और अब एमसीडी इतनी मजबूर है कि उसे वापस भी नहीं ले पा रही। पीठ ने कहा-

“सार्वजनिक पार्कों पर कैसे भी कब्जा नहीं हो सकता…आप हमें 21वीं सदी में क्या बताने की कोशिश कर रहे हो? ये सब कैसे हो सकता है। हम हर दिन पर्यावरण की सुरक्षा के लिए कह रहे हैं। हम साँस नहीं ले पा रहे हैं, और आप पार्कों पर कब्ज़ा खो रहे हैं?आप इस पर कब्ज़ा नहीं खो सकते यदि आप पार्क के मालिक हैं, तो आप पार्क को दिल्ली के नागरिकों के लिए सार्वजनिक ट्रस्ट में रखते… ऐसा लगता है कि आपके अधिकारी किसी और दुनिया में रह रहे हैं… आप इस तरह सार्वजनिक पार्क का कब्जा नहीं खो सकते। हम ऐसे देश में नहीं रह रहे हैं, जहाँ कानून का शासन नहीं है…हम 21वीं सदी में रह रहे हैं।”

कोर्ट ने इस केस की सुनवाई करने के बाद कहा है कि MCD कानून के अनुसार सार्वजनिक पार्क पर कब्जा वापस पाने के लिए कदम उठाए। कोर्ट ने कहा कि अगर पुलिस की जरूरत होगी तो उनकी सहायता भी प्रदान की जाएगी। इस तरह पब्लिक पार्क पर प्रशासन पर अपना अधिकार नहीं छोड़ सकता।

बता दें कि जिस पार्क पर जामा मस्जिद के प्रशासन ने कब्जा किया हुआ है। वो नॉर्थ पार्क है। जहाँ एमसीडी को घुसने तक नहीं दिया जाता। उनके मुताबिक साउथ पार्क को भी लेकर विवाद है लेकिन वहाँ वह आ जा पाते हैं और पार्क की देख रेख कर पाते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार इस मामले में मोहम्मद अर्सलान नाम के व्यक्ति द्वारा याचिका दायर की गई थी।

ट्रेनों की भीड़ देखी, कोच घटाने का प्रलाप सुना, पर क्या आपने दिवाली-छठ पर भारतीय रेलवे की मेहनत देखी: प्रोपेगेंडा से अलग है सच्चाई

बिहार जैसे प्रदेशों से रोजगार की तलाश में देश के अलग-अलग हिस्सों में पलायन टुकड़ों में होता है। पर इस पलायित आबादी का एक बड़ा हिस्सा दिवाली और छठ पर एक साथ अपने घरों के लिए रवाना होता है। इसके कारण रेलवे स्टेशन हो या ट्रेन हर जगह भीड़ देखने को मिलती है।

हर साल इस त्योहारी सीजन में ट्रेनों में भीड़ की तस्वीरें, वीडियो वायरल होती है। इसका इस्तेमाल कुछ लोगों अपने एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए करते हैं। प्रोपेगेंडा फैलाते हैं ताकि भारतीय रेलवे को बदनाम किया जा सके।

इसी कड़ी में इस बार यह अफवाह फैलाई गई कि मुनाफा कमाने के लिए इस बार ट्रेनों में जनरल और स्लीपर डिब्बों की संख्या कम कर दी गई है। ट्रेनों में दिखी भीड़ की एक बड़ी वजह इसे बताई गई। लेकिन हकीकत से इसका कोई वास्ता नहीं है। न तो ट्रेनों में पहले के मुकाबले जनरल और स्लीपर डिब्बों में कमी की गई और न ही पिछले सालों के मुकाबले इस बार विशेष व्यवस्थाएँ करने में कोई कोताही बरती गई है। उलटे इस मोर्चे पर लगातार भारतीय रेलवे आगे ही बढ़ रही है।

क्या ट्रेनों में कम कर दिए जनरल और स्लीपर डिब्बे?

भारतीय रेलवे ने बताया है कि ट्रेनों की संरचना में कोई बदलाव नहीं हुआ है। सभी ट्रेनों में पहले की तरह ही कोच लगे हैं। अलबत्ता अकेले पश्चिमी रेलवे ने 139 से ज्यादा स्पेशल ट्रेनें चलाई, जिसकी 1800 से अधिक ट्रिप भी हो चुकी हैं।

पश्चिमी रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) सुमित ठाकुर का अनुसार रेलवे ने न तो कोच घटाए हैं और न ही ट्रेनों में किसी तरह का बदलाव किया है। उन्होंने बताया है कि अकेले मुंबई से ही ट्रेनों में 8 लाख से ज्यादा अतिरिक्त बर्थ लगाए गए हैं। स्टेशनों पर भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। मुंबई डिवीजन के महत्वपूर्ण स्टेशनों पर 800 से अधिक जीआरपी जवानों की तैनाती की गई। खुद डीआरएम समेत वरिष्ठ अधिकारी स्टेशनों पर भीड़ को मैनेज कर रहे हैं।

सुमित ठाकुर ने बताया कि भीड़ को मैनेज करने के लिए भीड़भाड़ वाले स्टेशनों जैसे सूरत इत्यादि में स्टेशनों पर होल्डिंग एरिया भी क्रिएट किया गया है। टेंट वगैरह भी लगाए गए हैं। प्लेटफॉर्म टिकट की सेल को भी रोका गया है, ताकि अधिकृत यात्री ही स्टेशन के भीतर प्रवेश कर सकें। उन्होंने बताया कि त्योहार की वजह से टिकट सेल भी रेगुलेट की गई है। जितनी सीटें हैं, उतनी ही टिकट दी जा रही है।

दावा किया जा रहा था कि ज्यादा कमाई के लिए भारतीय रेलवे ने त्योहार को ध्यान में रखकर चलाई गईं स्पेशल ट्रेनों में जनरल और स्लीपर डिब्बे कम कर दिए गए हैं। इसके अनुसार 22 कोच के ट्रेन में जनरल डिब्बे 4 से घटाकर दो और स्लीपर डिब्बे 7 से घटाकर दो कर दिए गए हैं। इसके कारण उत्तर प्रदेश और बिहार जाने वाली ट्रेनों में भीड़ बढ़ गई है।

इंडिया टुडे ने भी अपनी पड़ताल में इस दावे को गलत पाया है। मीडिया संस्थान ने पाया है कि 22 कोच के ट्रेनों में पहले की तरह ही 6-7 स्लीपर और 4 जनरल कोच लगे हुए हैं। इनकी संख्या में कोई बदलाव नहीं किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार ऐसे ट्रेनों में 3AC कोच की संख्या 6 है, न कि 10 जैसा सोशल मीडिया में दावा किया जा रहा है। इसके अलावा पहले की तरह ही दो 2AC के और 1 1AC के कोच लगे हैं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि दिसंबर 2023 तक 6754 ट्रेनों का परिचालन तय है। यह पिछले साले 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर के बीच चलाए गए स्पेशल ट्रेनों के ट्रिप के मुकाबले ढाई गुणा अधिक है। बीते साल इस समय अंतराल में स्पेशल ट्रेनों कर 2614 ट्रिप हुई थी। इस साल अब तक दिवाली और छठ को लेकर भारतीय रेलवे 2423 स्पेशल ट्रेनों का परिचालन कर चुका है।

गौर करने वाली बात यह है कि इस साल त्योहारी सीजन शुरू होने के बाद करीब 36 लाख लोग ट्रेन से सफर कर चुके हैं। पिछले साल के त्योहारी सीजन के मुकाबले यह करीब करीब दोगुना है।

आँकड़े यह भी बताते हैं कि अप्रैल से अक्टूबर 2023 तक 95.3 प्रतिशत यात्रियों ने सामान्य और स्लीपर कोच में यात्रा की, जबकि केवल 4.7 प्रतिशत ने एसी कोच में यात्रा की है। इस साल 372 करोड़ यात्रियों ने स्लीपर, नॉन-एसी और जनरल कोचों में यात्रा की, जो पिछले साल से 38 करोड़ अधिक है। इन 372 करोड़ यात्रियों में से 18.2 करोड़ ने एसी कोच में यात्रा की, जो पिछले साल की तुलना में 3.1 करोड़ अधिक है। यात्रियों की कुल संख्या बढ़कर 41.1 करोड़ हो गई। गैर-एसी यात्रियों (सामान्य और स्लीपर क्लास) में 92.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है।

रेलवे ने भीड़भाड़ से निपटने के लिए उठाए कई कदम

अब आप आसानी से समझ सकते हैं ट्रेनों में इतनी भीड़ क्यों देखने को मिल रही है। भारतीय रेलवे के इंतजाम बढ़ाने के बावजूद यात्रियों की संख्या का करीब दोगुना हो जाना इसका कारण है। भारतीय रेलवे ने भी कहा है कि वह इस समस्या से अवगत है और इसे दूर करने के लिए कदम उठा रहा है। रेलवे ने त्योहारी सीजन के दौरान चलाई जा रही विशेष ट्रेनों की संख्या में वृद्धि की है। यह मौजूदा ट्रेनों की क्षमता में सुधार करने के लिए भी काम कर रहा है।

‘लीचड़ आदमी, पिटते-पिटते बचे अंकल’: MP में वोट देकर निकल रही महिलाओं के पीछे भाग रहे थे अजीत अंजुम, देखिए कैसे लगी फटकार

वरिष्ठ पत्रकार व यूट्यूबर अजीत अंजुम की एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा जा रहा है कि रिपोर्टिंग के दौरान ‘पिटते-पिटते बचे अजीत अंकल।’

वीडियो में नजर आ रहा है कि कैसे मतदान वाले दिन अजीत अंजुम पोलिंग बूथ से बाहर निकल रही महिलाओं से बात करने का प्रयास कर रहे हैं और बार-बार पूछ रहे हैं कि उन्होंने किसको वोट दिया।

उनके इन सवालों का जवाब कुछ वोटर ठीक ढंग से जवाब देते हैं जबकि कुछ महिलाएँ उन्हें देख असहज हो जाती हैं। वो कहती हैं कि बूथ में कुछ लोग वोट देखकर डलवा रहे हैं। ये सुनते ही अजीत अंजुम उनसे और बात करने के लिए पीछे-पीछे भागते हैं लेकिन महिलाएँ तब तक असहज हो जाती हैं, वो कहती हैं कि जिसकी सरकार बनेगी बन जाएगी। मगर वरिष्ठ पत्रकार फिर भी बाज नहीं आते।

वो पूछते रहते हैं किसकी सरकार बनेगी, उन्होंने किसको वोट दिया है। उनकी इसी हरकत को देखकर कुछ लोग उन्हें पीछे से आकर फटकार लगाते हैं जिन्हें देख अजीत अंजुम थोड़ा घबराते हैं और फिर आगे निकल लेते हैं।

अजीत अंजुम के चैनल पर इस रिपोर्टिंग की पूरी वीडियो है। वह मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर वोटिंग वाले दिन मुरैना जिले के दिमनी क्षेत्र अलग-अलग पोलिंग बूथ पर जाकर रिपोर्टिंग कर रहे थे।

उनकी पूरी वीडियो 41 मिनट 20 सेकेंड की है। 11वें मिनट के स्लॉट के बाद देख सकते हैंउनके साथ ये घटना होती है और उसके बाद आगे वो ये कहते नजर आते हैं कि जिन्होंने उन्हें पकड़कर माहौल को तनावपूर्ण बनाने की कोशिश की वो भाजपा कार्यकर्ता हैं। इसके अलावा जो लोग भी आकर उन्हें बताते कि इस बार नरेंद्र तोमर की सरकार बनेगी, तो वहाँ भी वो यही कहते सुनाई पड़ते कि ये लोग भाजपा कार्यकर्ता हैं।

एक्स पर अब उनकी वीडियो की छोटी सी क्लिप वायरल है। यूजर्स देखकर हैरान हैं कि कोई वरिष्ठ पत्रकार ऐसी हरकत कैसे कर सकता है? कैसे कोई वोटर्स के पीछे सवाल पूछने के लिए इतना पड़ सकता है?

कुछ चुटकी लेते हुए कह रहे हैं कि इन हरकतों पर तो कुटाई होनी ही चाहिए। वहीं कुछ बोल रहे हैं कि अगर ऐसा कुछ इन्होंने राजस्थान या हरियाणा में किया होता तो इनकी ऑन कैमरा पिटाई भी होती।

गुफा में पार्टी, 12 बच्चे, 18 दिन… उत्तरकाशी से पहले थाईलैंड में भी चला था एक रेस्क्यू अभियान, भारतीय इंजीनियरों ने ही दूर की थी पानी की बाधा

तारीख थी 12 नवंबर 2023। उत्तराखंड के उत्तरकाशी में भूस्खलन हुआ। सिल्कयारा सुरंग में काम कर रहे 40 मजदूर फँस गए। इनको बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। इस बचाव अभियान ने लोगों को 2018 में थाईलैंड की एक गुफा में फँसे 12 बच्चों और उनके फ़ुटबॉल कोच की याद दिला दी है। इन्हें 18 दिन बाद बचाया गया था। इस अभियान में दुनियाभर के विशेषज्ञ शामिल हुए थे। एक भारतीय कंपनी और उसके दो इंजीनियरों की भी इसमें महत्वपूर्ण भागीदारी थी।

बच्चों को लेकर गुफा में क्यों गए थे कोच?

शनिवार का दिन था। तारीख थी 23 जून। साल था 2018 का। फुटबॉल प्रैक्टिस के बाच कोच बच्चों को लेकर ‘सरप्राइज पार्टी’ के लिए टैम लोंग खुनाम नांगनोन नेशनल पार्क के एक गुफा में ले गए। भारी बारिश के कारण गुफा में बाढ़ आ गई। शाम के समय पार्क के कर्मचारियों ने गुफा के प्रवेश द्वार पर 12 साइकिलें खड़ी देखी। फिर दुनिया को इन बच्चों के भीतर फँसे होने का पता चला। 24 जून की दोपहर इनको बचाने का अभियान शुरू हुआ। इस बचाव अभियान पर साल 2021 ‘द रेस्क्यू’ नाम से डॉक्यूमेंटरी फिल्म’ भी बनी।

थाईलैंड की गुफा में कैसे फँस गए बच्चे और उनके कोच?

गुफा में फंसे बच्चे 11 से 17 साल के बीच के थे। 25 साल के फ़ुटबॉल कोच इकापॉल चंथावॉन्ग उन्हें गुफा में लेकर गए थे। ये लोग तीन बार पहले भी इस गुफा में जा चुके थे। अमूमन ट्रेनिंग या बर्थ डे सेलिब्रेट करने के लिए जाते थे। लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि एकदम से बारिश होने से वे फँस भी सकते हैं।

23 जून 2018 की ऐसा ही हुआ। बच्चों और उनके कोच के गुफा में जाते ही मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। बाढ़ के पानी से गुफा का रास्ता बंद हो गया। पानी का स्तर लगातार बढ़ने के कारण ये लोग में ओर भीतर जाने को मजबूर हो गए।

थाईलैंड की गुफा में कैसे चलाया गया बचाव अभियान?

थाम लुआंग नांग नॉन 10316 मीटर लंबी और थाईलैंड की चौथी सबसे बड़ी गुफा है। बारिश की वजह से आई बाढ़ के कारण गुफा का मुहाना यानी उसका रास्ता खोजना मुश्किल हो गया। पानी इतना अधिक था कि एक सप्ताह तक ये भी पता नहीं चल पाया कि गुफा के अंदर फँसे बच्चे और उनके कोच जिंदा भी हैं या नहीं।

25 जून को थाई नेवी सील डाइवर्स ने बच्चों और उनके कोच की तलाश में गुफा में प्रवेश किया। लेकिन 26 जून को एक टी प्वाइंट पर बाढ़ के पानी ने गोताखोरों को वापस धकेल दिया। 27 जून को नए सिरे से कवायद शुरू हुई। अभियान में मदद के लिए ब्रिटिश और अमेरिकी सेना ने गोताखर और विशेषज्ञों की एक टीम भी थाईलैंड में थी। लेकिन एक बार फिर बाढ़ के पानी ने गोताखोरों के भीतर प्रवेश करने की कोशिश को नाकाम कर दिया।

बचाव अभियान को अस्थायी तौर पर बंद करना पड़ा। गुफा से पानी बाहर निकालने के लिए इंडस्ट्रियल वाटर पंप लगाए गए। गुफा की छत में नए छेदों की खोज में 600 से अधिक लोग लगे थे। उनकी मदद के लिए ड्रोन भेजे गए। 30 जून को बारिश थमने के बाद अभियान फिर से शुरू हुआ।

1 जुलाई को गोताखोर गुफा के भीतर गए। लेकिन वे उस जगह से बहुत दूर थे जहाँ टीम फँसी थी। 2 जुलाई को की शाम को ब्रिटिश डाइविंग टीम को पता चला कि अंदर फँसे लोग जीवित हैं। 3 जुलाई को एक डॉक्टर और एक नर्स सहित सात गोताखोरों की एक टीम को गुफा में भेजा गया। वे अपने साथ उच्च कैलोरी वाली चीजें और जरूरी मेडिकल का सामान लेकर गए।

इस बीच 6 जुलाई को गुफा में फँसे 13 लोगों तक रसद पहुँचाकर लौटते समय एक पूर्व थाई नौसेना गोताखोर और बचाव मिशन के स्वयंसेवक समन गुनन की संकरे रास्ते पर ऑक्सीजन की कमी की वजह से मौत हो गई। बचाव दल के चीफ ने 7 जुलाई को दावा किया गुफा में फँसी टीम नी में गोता लगाने के लिए तैयार नहीं थी। अंदर टीम तक पहुँचने की कोशिश में 100 से अधिक वेंट ड्रिल किए गए।

इस दौरान फ़ुटबॉल टीम के कोच इकापॉल चंथावॉन्ग का एक लेटर सामने आया। अपनी दादी को लिखे इस लेटर में उन्होंने लड़कों के माता-पिता से माफी माँगी थी। इसके बाद आखिरकार 8 जुलाई को 13 गोताखोर गुफा में गए और चार लड़कों को सुरक्षित बाहर निकाल ले आए। 10 जुलाई को कोच सहित अन्य लड़कों को भी गुफा से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

थाईलैंड की गुफा में 18 दिनों तक कैसे जीवित रहे बच्चे और उनके कोच?

गुफा के भीतर खाने की कमी थी। ऑक्सीजन की कमी थी। बावजूद बच्चे और उनके कोच सकुशल रहे। इसकी वजी कोच इकापॉल चंथावॉन्ग ही थे। दरअसल कोच ने अपनी जिंदगी का करीब एक दशक बौद्ध मठ में बिताया था। अपने इस आध्यात्मिक अनुभव से उन्होंने ध्यान के जरिए बच्चों को भोजन और ऑक्सीजन की कमी होने पर शरीर को उसके अनुसार ढालना सिखाया।

10 हजार लोग बचाव अभियान में थे शामिल

थाईलैंड की गुफा में फँसे 13 लोगों के बचाने के काम में 10 हजार से अधिक लोग शामिल थे। इनमें 100 से अधिक गोताखोर, बचावकर्मी, लगभग 100 सरकारी एजेंसियों के प्रतिनिधि, 900 पुलिस अधिकारी और 2000 सैनिक शामिल थे।

भारत से महाराष्ट्र के सांगली जिले के प्रसाद कुलकर्णी और पुणे के श्याम शुक्ला भी किर्लोस्कर ब्रदर्स लिमिटेड की थाईलैंड बचाव अभियान की 7 सदस्यीय टीम का हिस्सा थे। प्रसाद कुलकर्णी के मुताबिक, “हमारा काम गुफा से पानी निकालना था, जिसमें 90° के तीखे मोड़ थे। लगातार बारिश ने एक बड़ी समस्या खड़ी कर दी थी, क्योंकि जल स्तर कम नहीं हो सका। जनरेटर आधारित बिजली आपूर्ति अनियमित थी। इसलिए, हमें छोटे पंपों का इस्तेमाल करना पड़ा था।”

वहीं किर्लोस्कर में कॉर्पोरेट अनुसंधान और इंजीनियरिंग विकास विभाग के महाप्रबंधक शुक्ला ने इस अनुभव के बारे में बताते हुए कहा था, “लड़कों तक पहुँचना एक मुश्किल काम था। गुफा बहुत संकरी थी और कोई समतल इलाका नहीं था। लेकिन हम गुफा से पानी बाहर निकालने में कामयाब रहे।”

गोताखोर ने आत्मकथा में सब कुछ बताया

बहुत से लोगों ने 2018 की गर्मियों तक रिक स्टैंटन के बारे में सुना तक नहीं था। लेकिन 1980 के दशक में हाई स्कूल छोड़ने के बाद से वो चुपचाप खुद को गुफा गोताखोरी में महारत हासिल करते रहे। उनकी ये महारत थाईलैंड में काम आई।

जब थाई गोताखार रिक स्टैंटन और उनके गोताखोर साथी जोनाथन वोलान्थेन 27 जून को उत्तरी थाईलैंड में थाम लुआंग गुफा में पहुँचे, तब तक उन्होंने मान लिया था कि 12 लड़के और उनके कोच मर चुके होंगे। इसे लेकर उन्होंने अपनी आत्मकथा ‘एक्वानॉट’ में लिखा, “वे जरूर मर चुके होंगे, हमें उनकी लाश जरूर मिलेगी। लेकिन तभी हमने आवाज़ें सुनीं। राहत और खुशी के पल के तुरंत बाद अधिक फिक्र पैदा हो गई। स्टैंटन ने उस वक्त को याद करते हुए लिखा है, “सबसे बुरा तब हुआ जब हमने उन्हें ढूँढ लिया, क्योंकि हमें नहीं पता था कि हम उन्हें कैसे बाहर निकालेंगे।”

नौंवी फेल, पानी ढोने वाला… प्रशांत किशोर ने बताई तेजस्वी यादव की ‘पहचान’ तो बौखला गई लालू यादव की सिंगापुर वाली बेटी

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर इन दिनों पदयात्रा पर हैं। इस दौरान वो लोगों के बीच जाकर उनसे बात करके उन्हें जात-पात से ऊपर उठकर वोट करने को कहते हैं। हाल में उन्होंने इसी क्रम में बिहार के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव पर भी टिप्पणी की।

उन्होंने गुरुवार (16 नवंबर 2023) को बयान देते हुए कहा कि तेजस्वी यादव की पहचान क्या है? वो नव्वा (नौंवी) फेल आदमी हैं। क्रिकेट खेलने गए तो वहाँ पानी ढोते थे। कौन सा ऐसा बड़ा पराक्रम कर दिया। लालू के लड़के हैं इसलिए सब लोग जानते हैं।

पत्रकारों से बात करते हुए वह बोले- इन लोगों को क्या मतलब है इन चीजों से। गया उलूल-जुलूल बकवास किया, लोगों को जाति धर्म में बाँटा… पैसा वसूल करके लोगों को धर्म में बाँटा। जाति के नाम पर लोग गरीबी में मजबूरी में वोट दे देते हैं। उसके बाद नेता बनकर ज्ञान दे रहा है।

उल्लेखनीय है कि प्रशांत किशोर ने तेजस्वी यादव के जीडीपी वाले बयान पर इतनी तल्ख प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अभी आपने कुछ दिन पहले देखा होगा कि महाज्ञानी उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जीडीपी तो सबसे ज्यादा बिहार की है। प्रशांत किशोर बोले- “तेजस्वी को तो यही नहीं पता कि जीडीपी क्या है? बिना कागज देखे अगर वो इसकी परिभाषा बता दें तो हम ये काम छोड़कर तेजस्वी यादव का झंडा ले लेंगे। या बिना कागज देखे जीडीपी की फुल फॉर्म ही लिख दें तो हम मान जाएँगे।” इसके बाद उन्होंने तेजस्वी पर नौंवी फेल वाली टिप्पणी की।

प्रशांत किशोर का बयान आने के बाद शुक्रवार (17 नवंबर 2023) को लालू प्रसाद यादव की बेटी ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी और अपना गुस्सा जाहिर किया। रोहिणी आचार्य ने अपने ट्वीट में लिखा- “ये है कौन? इसको कोई पहचानता भी है। ये भी किसी को बाबू जी बना ले, ताकि किसी का राजनीतिक वारिस बन सके। ये जो कह रहा है वो अपना बाप अपनी दुकानदारी एवं अपने फायदे के हिसाब से समय-समय पर बदलते रहता है।”

रोहिणी आगे लिखती हैं- “कभी मोदी-शाह इसके बाबू जी, कभी पवन वर्मा-नीतीश कुमार इसके बाबू जी। कभी राहुल गाँधी इसके बाबूजी, कभी अभिषेक बनर्जी इसके बाबूजी, कभी जगन रेड्डी इसके बाबूजी तो कभी स्टालिन इसके बाबूजी…अभी फिर से इसने सबसे पहले वालों को अपना बाप बना रखा है सिर्फ नाम नहीं उजागर कर पा रहा है। भाजपा की दलाली करता है इसलिए मीडिया की कृपा दृष्टि इस पर बना रहता है। वरना गली का कुत्ता भी इसको भाव ना दे और चला है तेजस्वी पर कीचड़ उछालने।”

बता दें कि तेजस्वी यादव के अलावा प्रशांत किशोर ने राहुल गाँधी पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा-राजीव गांधी के लड़के हैं राहुल गाँधी इसलिए वह कॉन्ग्रेस के बड़े नेता हैं।
आपके बाबू जी की पार्टी है तो कोई भी नेता बन जाएगा। बाबूजी की दुकान है तो कोई भी जाकर बैठ जाएगा और मालिक हो जाएगा। इसमें आपकी योग्यता क्या है?

अर्जुन रणतुंगा ने BCCI सचिव जय शाह पर लगाए गंभीर आरोप तो श्रीलंकाई सरकार को माँगनी पड़ी माफी, जानें क्या थी वजह जो संसद में देना पड़ा बयान

श्रीलंका के पूर्व कप्तान अर्जुन रणतुंगा द्वारा भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के सचिव और एशियाई क्रिकेट परिषद (एसीसी) के अध्यक्ष जय शाह पर दिए गए बयानों को लेकर श्रीलंका की सरकार ने खेद व्यक्त किया है। रणतुंगा ने शाह पर श्रीलंकाई क्रिकेट में हस्तक्षेप करने और देश में खेल की गिरावट के लिए जिम्मेदार होने का आरोप लगाया था। श्रीलंकाई सरकार ने रणतुंगा के बयानों से खुद को अलग कर लिया है और कहा है कि वे श्रीलंकाई सरकार या लोगों के विचारों को नहीं दर्शाते हैं।

बता दें कि अर्जुन रणतुंगा ने कहा था, “जय शाह श्रीलंका क्रिकेट को चला रहे हैं। जय शाह के दबाव के कारण श्रीलंका क्रिकेट बर्बाद हो रहा है। भारत में एक आदमी श्रीलंकाई क्रिकेट को बर्बाद कर रहा है। वह केवल अपने पिता के कारण शक्तिशाली हैं, जो भारत के गृह मंत्री हैं।”

उनके इस बयान पर विवाद खड़ा हो गया था, जिसके बाद अब श्रीलंकाई सरकार को माफी माँगनी पड़ी है। इस बारे में शुक्रवार (17 नवंबर 2023) को संसद में बात करते हुए श्रीलंका के मंत्री हरिन फर्नांडो और कंचना विजेसेकरा ने रणतुंगा के उस बयान को लेकर खेद व्यक्त किया।

श्रीलंका सरकार के दोनों मंत्रियों ने कहा कि श्रीलंका में जो कुछ भी चल रहा है, उसकी जवाबदेही स्थानीय प्रशासकों की है, न कि बाहरी लोगों की। संसद में मंत्री कंचना विजेसेकरा ने कहा, “हम एक सरकार के रूप में एशियन क्रिकेट काउंसिल के अध्यक्ष जय शाह के प्रति अपना खेद व्यक्त करते हैं। हम अपने संस्थानों की कमियों के लिए जय शाह या अन्य देशों पर अंगुली नहीं उठा सकते।”

वहीं, पर्यटन मंत्री फर्नांडो ने आईसीसी से इस बैन को हटाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आईसीसी के इस बैन से देश पर असर पड़ेगा, क्योंकि अगले साल अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप का आयोजन होना है। अगर ये बैन जारी रहा तो कोई भी देश श्रीलंका का दौरा नहीं करेगा और श्रीलंकाई क्रिकेट को आईसीसी से कोई पैसा नहीं मिलेगा। इसकी वजह से श्रीलंका में क्रिकेट के प्रबंधन की कमर टूट जाएगी।

बता दें कि क्रिकेट विश्वकप 2023 का फाइनल मुकाबला 19 नवंबर को भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच नरेंद्र मोदी स्टेडियम, अहमदाबाद में खेला जाएगा। श्रीलंकाई टीम का सफर इस वर्ल्ड कप में निराशाजनक रहा है। श्रीलंका को बड़ा झटका तब लगा, जब वर्ल्ड कप से बाहर होने के बाद आईसीसी ने सरकारी हस्तक्षेप के चलते श्रीलंकाई क्रिकेट बोर्ड को बर्खास्त कर दिया था। आईसीसी के इस फैसले के बाद अर्जुन रणतुंगा ने बीसीसीआई के सचिव जय शाह पर आरोप लगाया था कि उनके कारण श्रीलंका क्रिकेट बर्बाद हो रहा हैं।