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डीपफेक आज सबसे बड़ी चुनौती, लोगों को शिक्षित करने की जरूरत: जिस AI तकनीक की हिरोइन से लेकर तेंदुलकर की बेटी तक शिकार, उसको लेकर PM मोदी ने चेताया

हाल में डीपफेक (DeepFake) AI तकनीक से रश्मिका मंदाना और काजोल के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। इस तकनीक के गलत इस्तेमाल को लेकर अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चिंता जाहिर की है। पीएम मोदी ने शुक्रवार (17 नवंबर 2023) को डीपफेक के दुरुपयोग को चिह्नित किया और कहा कि मीडिया को इस संकट के बारे में लोगों को शिक्षित करना चाहिए। 

भाजपा के दिल्ली स्थित मुख्यालय में दिवाली मिलन समारोह का आयोजन किया गया था। इस आयोजन में पत्रकारों को भी आमंत्रित किया गया था। वहाँ मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने भारत को ‘विकसित भारत’ बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत केवल शब्द नहीं है, बल्कि यह जमीनी हकीकत है।

बता दें कि कुछ हफ्ते पहले इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब सहित सभी सोशल मीडिया प्लेटफार्मों को 24 घंटे के भीतर डीपफेक कंटेंट हटाने की सलाह दी थी। इसको लेकर सरकार ने साफ कहा है कि ऐसा न करने पर इन प्लेटफॉर्म पर भारतीय कानूनों के तहत आपराधिक और न्यायिक कार्रवाई की जाएगी।

बताते चलें कि बॉलीवुड अभिनेत्रियों से लेकर सेलिब्रेटी तक डीपफेक (DeepFake) का शिकार हो रही हैं। रश्मिका मंदाना, सारा तेंदुलकर, कैटरीना कैफ, ऐश्वर्या राय के बाद अब काजोल इसकी शिकार बनी हैं। बॉलीवुड अभिनेत्री काजोल का एक अश्लील वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में वो कैमरे के सामने कपड़े बदलती नजर आ रही हैं।

अपनी डीपफेक वीडियो वायरल होने के बाद अभिनेत्री रश्मिका मंदाना ने दिल्ली पुलिस में प्राथमिकी भी दर्ज कराई है। दरअसल दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक यूनिट ने इसे लेकर अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पुलिस टीम इस केस की जाँच भी शुरू कर दी है।

अपने इस वीडियो को लेकर रश्मिका मंदाना ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा था, “मुझे अपने ऑनलाइन फैलाए जा रहे डीप फेक वीडियो पर बात करते और इसे शेयर करते हुए बेहद दुख हो रहा है। ईमानदारी से कहूँ तो ऐसा कुछ, न केवल मेरे लिए, बल्कि हममें से हर एक के लिए बेहद डरावना है, जो आज तकनीकी के बेजा इस्तेमाल की वजह से खतरे में हैं।”

रश्मिका ने आगे लिखा था, “मैं आज एक महिला और एक अभिनेत्री के नाते अपने परिवार, मित्रों और शुभेच्छुकों का धन्यवाद करती हूँ क्योंकि वह मेरे सपोर्ट सिस्टम हैं। हालाँकि, अगर ऐसा कुछ मेरे साथ स्कूल या कॉलेज में हुआ होता तो मुझे नहीं मालूम मैंने इसका सामना कैसे किया होता। हमें इससे एक समाज के तौर उससे पहले लड़ना होगा जब तक यह और लोगों की पहचान चुराए।”

इस वीडियो को AI डीपफेक तकनीक से एडिट किया गया था, जिसमें असली और नकली का भेद कर पाना थोड़ा मुश्किल होता है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं टेक्नोलॉजी राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर ने इस पर कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे सभी डिजिटल नागरिकों की सुरक्षा एवं भरोसे को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

सुप्रीम कोर्ट की रोक, फिर भी ताजमहल में नमाज पढ़ने की कोशिश: बंगाल के युवक को CISF जवान ने पकड़ा, लिखित माफीनामे के बाद छोड़ा

आगरा के ताजमहल परिसर में नमाज पढ़ने की कोशिश का मामला सामने आया है। पश्चिम बंगाल के एक युवक ने गुरुवार (16 नवंबर 2023) को ताजमहल गार्डेन में यह कोशिश की। हालाँकि केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवान ने उसे ऐसा करने से रोक दिया। इसके बाद युवक ने यह कहते हुए माफी माँग ली कि परिसर में नमाज पर पाबंदी को लेकर उसे जानकारी नहीं थी।

रिपोर्ट के अनुसार युवक गार्डेन में नमाज पढ़ने के लिए जानमाज बिछा रहा था। लेकिन CISF जवान ने उसे रोक दिया। एक अन्य टूरिस्ट ने इसका वीडियो भी बना लिया। भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) के वरिष्ठ संरक्षण सहायक प्रिंस वाजपेयी ने घटना की पुष्टि की है। उन्होंने कहा, “गुरुवार को एक वीडियो सामने आया और सत्यापन के बाद यह पुष्टि हुई कि पश्चिम बंगाल के एक पर्यटक ने नमाज पढ़ने के लिए ताजमहल के बगीचे में अपनी जानमाज (चटाई) खोल दी थी। सीआईएसएफ कर्मियों ने तुरंत उसे ऐसा करने से रोका।”

पश्चिम बंगाल से आए इस टूरिस्ट को जवान कंट्रोल रूम में ले गए। यहाँ उसने ताजमहल में नमाज अदा करने पर लगी रोक पर हैरानी जताई। लिखित माफीनामे के बाद उसे छोड़ दिया गया। एएसआई अधिकारी वाजपेयी का कहना है कि नमाज पढ़ी नहीं गई थी और युवक ने बाद में नियमों का पालन किया।

वैसे ताजमहल परिसर में नमाज अदा करने का ये पहला मामला नहीं है। 26 मई 2022 हैदराबाद के तीन और आज़मगढ़ के एक व्यक्ति को ताजमहल में बनी मस्जिद में नमाज अदा करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इन सब पर आईपीसी की धारा 153 के तहत केस दर्ज हुआ था।

सुप्रीम कोर्ट में 2018 में ताजमहल परिसर की मस्जिद में बाहरी लोगों के नमाज अदा करने की इजाजत देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि इस ऐतिहासिक स्मारक का संरक्षण सबसे अधिक जरूरी है। तब चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने इस बात पर जोर दिया था कि ताजमहल को संरक्षित किया जाना चाहिए क्योंकि यह दुनिया के सात अजूबों में से एक है।

आगरा जिला प्रशासन ने जनवरी 2018 में आदेश निकाला था कि स्थानीय लोगों को भी नमाज अदा करने के लिए परिसर में प्रवेश से पहले वैध आईडी प्रमाण दिखाना होगा। साथ ही प्रशासन ने हर शुक्रवार को पर्यटकों के लिए बंद रहने वाले ताजमहल परिसर में बाहरी लोगों को प्रवेश पर से रोक लगा दी थी।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कुछ महीने बाद नवंबर में ASI ने भी ताज महल में रोजाना नमाज पढ़ने पर रोक लगा दी थी। ASI ने नवंबर 2018 में शुक्रवार को छोड़कर सभी दिनों में ताजमहल में नमाज अदा करने पर प्रतिबंध लगा दिया था।

मतदान के बीच छत्तीसगढ़ में दो जगह IED ब्लास्ट, बाल-बाल बचे CRPF के जवान: मध्य प्रदेश भाजपा प्रत्याशी पर हमला, गाड़ी के शीशे तोड़े

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के शुक्रवार (17 नवंबर 2023) को मतदान जारी है। इस बीच दोनों जगहों से छिटपुट हिंसा की भी खबरें आ रही हैं। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की सीट पर पथराव किया गया है। वहीं, भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि वे मुख्यमंत्री की दौड़ में नहीं हैं। छत्तीसगढ़ में सुबह 11 बजे तक लगभग 20 प्रतिशत मतदान हुए हैं। वहीं, मध्य प्रदेश में 27.62 प्रतिशत मतदान हुआ है।

दरअसल, नरेंद्र सिंह तोमर के विधानसभा सीट दिमनी के मिरघान गाँव में फिर विवाद हो गया है। यहाँ मतदान कर रहे एक युवक को कुछ लोगों ने लाठी-डंडों से पीट दिया। इसके बाद वहाँ पथराव हो गया। इस दौरान दो लोग घायल हो गए। घायल युवक ने कहा कि उसे मतदान से रोका जा रहा था। दिमनी विधानसभा सीट मुरैना जिले में आता है।

वहीं, भिंड जिले में आने वाले मेहगाँव विधानसभा सीट के मानगढ़ गाँव में कुछ लोगों ने भाजपा प्रत्याशी राकेश शुक्ला पर पथराव कर दिया। लोगों ने उनकी गाड़ी के शीशे भी तोड़ दिए। इसके बाद राकेश शुक्ला ने गोरमी थाना पहुँचकर मामले की शिकायत की है। कहा जा रहा है कि कॉन्ग्रेसी नेताओं ने ग्रामीणों के साथ मिलकर यह हमला किया है।

छिंदवाड़ा से कॉन्ग्रेस सांसद और पूर्व सीएम कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ छिंदवाड़ा विधानसभा सीट के बराड़ीपुर स्थित मतदान केंद्र पर पहुँचे। इस दौरान नगर निगम में विपक्ष के नेता और भाजपा नेता विजय पांडे ने उन्हें मतदान केंद्र के अंदर जाने से रोक दिया। इसको लेकर दोनों नेताओं के बीच बहस हो गई।

अगर छत्तीसगढ़ की बात करें तो कोरबा के कटघोरा नगरपालिका क्षेत्र के वार्ड संख्या 11 के रहमानिया मोहल्ले के लोगों ने मतदान का बहिष्कार कर दिया है। वहीं, धमतरी के सिहावा विधानसभा क्षेत्र में नक्लियों ने कम तीव्रता वाले दो IED ब्लास्ट किए हैं।

यह ब्लास्ट उस वक्त किए गए हैं, जब मतदान कराने वाली टीम इलाके में पहुँची थी। इस इलाके में सुरक्षा बलों ने 5 किलोग्राम विस्फोटक भी बरामद किया है। इस हमले में CRPF के जवान बाल-बाल बच गए हैं। नक्सलियों ने चुनाव बहिष्कार की धमकी दी है। इससे पहले भी नक्सलियों ने चुनाव बहिष्कार की धमकी दी थी।

बता दें कि छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के लिए आज वोट डाले जा रहे हैं। राज्य में सुबह 11 बजे तक कुल 19.65% मतदान हुआ है। इस दौरान सबसे अधिक अभनपुर में 24 प्रतिशत वोट डाले गए हैं। उसके बाद आरंग में 21 प्रतिशत मतदान हुआ। बता दें कि राज्य में कुल 90 में से 20 सीटों के लिए 7 नवंबर 2023 को वोट डाले जा चुके हैं। दूसरे चरण में 70 सीटों के लिए वोटिंग हो रही है।

‘दुआ’ लेने आए कॉन्ग्रेस उम्मीदवार को फकीर ने मारे चप्पल पे चप्पल, साध्वी प्रज्ञा को बताया था ‘डायन’: नेटिजन्स बोले- वोट के लिए टट्टी भी खा लेंगे ये

मध्य प्रदेश में चुनाव से पहले रतलाम से कॉन्ग्रेस प्रत्याशी पारस सकलेचा का एक वीडियो वायरल हुई। इस वीडियो में पारस सकलेचा फकीर बाबा के सामने चप्पल लेकर खड़े दिख रहे हैं। वहीं फकीर बाबा उन्हें दुआ के रूप में चप्पल ही चप्पल मारते दिखाई दे रहे हैं। पारस वही कॉन्ग्रेस नेता हैं जिन्होंने 2019 में साध्वी प्रज्ञा को ‘डायन’ बोला था।

वीडियो में देख सकते हैं कि पारस सकलेचा को वीडियो में नजर आ रहे फकीर बाबा कभी पीठ पर कभी कंधे पर, कभी मुँह पर चप्पल मारते हैं। और ऐसा नहीं कि ये कि वो एक बार मारकर रुकते हैं, देख सकते हैं कि किस तरह वीडियो में वो ताबड़तोड़ चप्पल मारते ही रहते हैं। पीछे से कोई व्यक्ति कहता भी है बस बाबा बस, लेकिन फकीर बाबा नहीं रुकते। इस दौरान कॉन्ग्रेस नेता हँसते-हँसते बस उनकी पैर छूते रहते हैं।

इस वीडियो को देखने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने कॉन्ग्रेस नेता का बहुत मजाक उड़ाया है। कोई कह रहा है कि कॉन्ग्रेस है ही चप्पल खाने लायक तो कोई चुटकी लेते हुए कह रहा है कि बाबा ने दुआ देने में कोई कमी नहीं रखी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कॉन्ग्रेस नेता को चप्पल-चप्पल मारने वाला व्यक्ति कमाल रजा नाम का फकीर है। वह महू नीमच रोड पर घूमते हैं और अपने पास मुराद लेकर आने वाले लोगों को चप्पलों से पीटकर दुआ देते हैं। अपनी फरियाद लेकर तमाम लोग नई चप्पलें लेकर आते हैं ताकि उन्हें उसी से पीटकर कमाल रजा अपनी दुआ दे सकें।

कॉन्ग्रेस नेता समेत तमाम लोगों का मानना है कि इस तरह की दुआ जिन फरियादियों को कमाल रजा ने दी, उनके जीवन में उन्हें सफलता मिली। अब चूँकि पारस सकलेचा भी इस बार चुनावी मैदान में हैं तो अपनी जीत के लिए उन्होंने ये हथकंडा आजमाया है।

पारस सकलेचा का नाम वैसे व्यापमं घोटाले के व्हिसलब्लोअरों में हैं। इसके अलावा साध्वी प्रज्ञा को डायन बोलकर भी वो चर्चा में आए थे। उन्होंने 2019 के चुनावों के वक्त बीजेपी प्रत्याशी रही साध्वी प्रज्ञा को ‘डायन’ कहा था। उन्होंने एक आमसभा को संबोधित करते हुए कहा था- किसी के श्राप से अगर कोई भला आदमी मर जाये तो उसे डायन कहते हैं। उस डायन के श्राप से हेमंत करकरे मर गए लेकिन उसके श्राप से दाऊद इब्राहिम नहीं मरा। सकलेचा ने कहा की वास्तविक साध्वी है तो वह दाऊद इब्राहिम को श्राप से जिससे वो मर जाए।

शावेज के ई रिक्शा पर बैठी थी 5 साल की हिंदू बच्ची, हाथ पकड़कर गन्ना के खेत में ले गया: दरिंदगी कर परिवार सहित हुआ फरार

उत्तराखंड में 5 साल की हिंदू बच्ची से रेप की घटना सामने आई है। आरोपित शावेज ई रिक्शा चलाता है। रिपोर्टों के अनुसार वह घुमाने के बहाने अपने पड़ोस में रहने वाली बच्ची को साथ ले गया था। फिर गन्ने के खेत में ले जाकर उसके साथ दरिंदगी की।

घटना उधम सिंह नगर जिले की किच्छा तहसील की है। पुलभट्टा पुलिस शावेज की तलाश कर रही है। घटना के बाद से वह और उसके परिवार के अन्य सदस्य भी फरार हैं। घटना मंगलवार (14 नंवबर 2023) शाम की है।

रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता की माँ की तहरीर पर पुलिस ने शिकायत दर्ज कर ली है। पीड़ित माँ ने बताया है कि वह मजूदरी करने के लिए घर से बाहर गई थी। इसी दौरान आरोपित ने गन्ने के खेत में ले जाकर उसकी 5 साल की बेटी के साथ दुष्कर्म किया।

फोटो साभार: दैनिक जागरण में 16 नवंबर 2023 को प्रकाशित खबर का स्क्रीनशॉट

बच्ची के साथ इस तरह की घिनौनी हरकत होने से ग्रामीण गुस्से में हैं। गाँव में पुलिस बल की तैनाती की गई है। जानकारी के मुताबिक, यूपी-उत्तराखंड की सीमा से लगे गाँव में ई-रिक्शा चलाने वाले शावेज की नीयत मंगलवार (14 नंवबर 2023) शाम के वक्त घर के बाहर खेल रही बच्ची को देख खराब हो गई। उसने 5 साल की इस बच्ची को ई-रिक्शा में घुमाने का लालच दिया।

आरोपित शावेज ने बच्ची को कुछ दूर जाने ले जाने के बाद गन्ने के खेतों के पास रिक्शा रोक दिया। इसके बाद वो हाथ खींचकर बच्ची को खेत में ले गया और वहाँ उसके साथ बलात्कार किया। बच्ची के रोने-चिल्लाने की आवाज सुन जब गाँव वाले आए तो शावेज मौके पर ही ई रिक्शा छोड़ भाग खड़ा हुआ।

मामले के सूचना मिलते ही पुलभट्टा थाना प्रभारी कमलेश भट्ट पुलिस बल के साथ तुरंत मौके पर पहुँचे। पुलिस ने मौके से आरोपित का ई रिक्शा कब्जे में ले लिया। बच्ची की माँ की शिकायत पर आरोपित के खिलाफ पॉक्सो में केस दर्ज किया गया है। माँ ने बताया है कि इस घटना के बाद से बच्ची बेहद डरी-सहमी है।

पुलिस आरोपित की तलाश में उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। पुलिस क्षेत्राधिकारी ओम प्रकाश शर्मा ने उसकी जल्द गिरफ्तारी करने का भरोसा दिया है।

मुस्लिम परिवार को दीवाली मनाते देख सलमान खान को लगी आग, Video से फैलाई घृणा: कट्टरपंथी बोले- अल्लाह फिलीस्तीन की जगह इनपे कहर बरसा

इंस्टाग्राम पर एक वीडियो सामने आई है जिसमें सलमान खान नाम के यूजर ने मुस्लिम परिवार के दीवाली मनाने पर उनके प्रति नफरत फैलाई है।

वीडियो में दिख रहा है कि एक मुस्लिम परिवार सड़क किनारे दीवाली मना रहा है। इसे शेयर करते हुए सलमान ने लिखा- “मुस्लिम परिवार दीवाली मनाते हुए 100 % रॉन्ग।”

इस वीडियो के नीचे कई कट्टरपंथियों ने भी रिप्लाई किया है। जैसे एक ने लिखा- ये लोग मुस्लिम ही नहीं है। इन्हें इनके पहनावे से मत जाँचो।

एक यूजर लिखता है- अस्तगफिरुल्लाह अल्लाह फिलिस्तीन की जगह जहाँ ऐसे मुस्लिम हैं वहाँ अपना कहर नाजिल फरमा जहाँ मुस्लिम कौम मुस्लिम कौम को ही न समझती हो।

अम्मू अंसारी ने लिखा- इतना भी गुमराह नहीं होना चाहिए मुसलमानों।

मोहम्मद नाफिश ने लिखा- अल्लाह की लानत हो ऐसे लोगों पर।

शहनाज लिखते हैं- इन्हें भी ऐसे ही जलाएँगे टाइम आने दो सबको सबका आजाब मिलेगा।

इनके अलावा ज्यादातर कट्टरपंथियों ने सलमान की वीडियो पर लिखा- ये लोग बोहरा लोग हैं। ये मुस्लिम नहीं होते है। ये कुफ्र होते हैं।

एक कट्टरपंथी यूजर ने लिखा- क्या कोई हिंदू बकरा ईद मनाता है। फिर आखिर कोई मुस्लिम हिंदू त्योहार कैसे मनाते हैं। अगर ऐसा है तो हिंदू को भी बकरा ईद मनानी चाहिए।

इस पोस्ट के सामने आने के बाद अब इस सलमान खान की आईडी को लेकर एक ट्विटर यूजर ने मुंबई पुलिस को शिकायत की है। इस पोस्ट में लिखा गया-

हेलो मुंबई पुलिस, सलमान खान नाम के शख्स नफरत भरे ढंग से मुस्लिमों की दीवाली मनाते एक वीडियो डाली है। वीडियो पर 1 लाख से ज्यादा व्यूज मिल गए हैं। इस ट्वीट के बाद एक्स यूजर्स भी मुंबई पुलिस से सलमान खान के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई करने की माँग उठा रहे हैं।

नूहं में कुआँ पूजन के लिए जा रही महिलाओं पर पथराव, फुटेज के आधार पर मदरसे के तीन छात्र गिरफ्तार: एसपी बोले- कंट्रोल में हालात

हरियाणा के नूहं में ​फिर से तनाव पैदा हो गया है। इस बार में कुआँ पूजन के लिए जा रही हिंदू महिलाओं पर मदरसे से पथराव किया गया। गुरुवार (16 नवंबर 2023) की देर शाम हुई इस घटना में तीन महिलाएँ घायल हुई हैं। नूहं के सामुदायिक चिकित्सा केंद्र में उनका उपचार हो रहा है।

इस घटना के बाद वहाँ दोनों समुदायों के लोग जमा हो गए। पथराव की खबर मिलते ही नूहं पुलिस अधीक्षक नरेंद्र बिजारणिया भारी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुँचे। उन्होंने वहाँ पहुँचकर लोगों से शांत रहने की अपील की।

गौरतलब है कि नूहं में इसी साल 31 जुलाई को ब्रजमंडल यात्रा में शमिल हिंदू श्रद्धालुओं पर हमला हुआ था। अब करीब चार महीने बाद फिर से इसी तरह की घटना सामने आई है। एसपी बिजारणिया ने कहा, “महिलाओं की शिकायत पर FIR दर्ज कर ली गई है… मदरसे से फुटेज आए थे जिसमें 3 लड़के खड़े दिख रहे थे। उसके आधार पर तीनों लड़कों की पहचान की गई है।”

उन्होंने आगे कहा, “इन तीनों को राउंडअप कर लिया गया है और अब इन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा… 8 महिलाओं ने FIR दर्ज कराई है और इन्हें मामूली चोटें आई हैं… हम तीनों लड़कों से पूछताछ कर रहे हैं कि यह घटना क्यों हुई… तीनों बच्चे नाबालिग हैं… हम महिलाओं द्वारा लगाए गए सभी आरोपों की जाँच करेंगे। स्थिति नियंत्रण में है।”

पुलिस के मुताबिक गुरुवार देर शाम करीब 8:20 पर ‘कुआँ पूजन’ के लिए जा रही महिलाओं के एक समूह पर पथराव किया गया। इसमें कई महिलाओं को चोटों आई। नूहं एसपी नरेंद्र बिजारणिया का कहना है कि शाम के वक्त कुछ महिलाएँ कुआँ पूजन के लिए जा रही थीं। पुलिस को शिकायत मिली कि इनके ऊपर मदरसे की तरफ से कुछ बच्चों ने पत्थर फेंके हैं। इसके बाद दोनों समुदायों के लोग इकट्ठे हो गए।

उन्होंने आगे बताया कि पुलिस ने दोनों पक्षों के लोगों को समझा-बुझाकर अपने-अपने घरों की तरफ भेजा। मदरसे के मौलाना मुफ्ती मोहम्मद जाहिद को बुलाया कर जानकारी ली गई है। आरोपितों के खिलाफ त्वरित और उचित कार्रवाई होगी। हम लोगों से शांति बनाए रखने की अपील कर रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक नूहं के वार्ड नंबर 10 में रहने वाले राम अवतार के यहाँ बेटा पैदा हुआ था। रिवाज के मुताबिक उनके परिवार की महिलाएँ कुआँ पूजन के लिए बाजे-गाजे के साथ पास के शिव मंदिर में जा रही थी।

जब ये महिलाएँ मस्जिद के पास से गुजर रही थीं तो लगभग 20 से अधिक मदरसे के बच्चों ने उनपर पथराव किया। इस घटना की जानकारी होते ही हिंदू समुदाय के लोग बड़ी संख्या में मौके पर जमा हो गए।

‘मुझे बंदी बना लिया गया है’: सोशल मीडिया फ्रेंड से मिलने नाइजीरिया गई असम की महिला बॉक्सर, कर लिया अपहरण

असम के गुवाहटी में रहने वाली एक महिला बॉक्सर व सर्टिफाइड जिम ट्रेनर को उनके ‘दोस्त’ ने नाइजीरिया में कथिततौर पर बंधक बना लिया है। महिला बॉक्सर की पहचान ‘बरनाली बौरा सैकिया’ के तौर पर हुई है। बताया जा रहा है कि नाइजीरिया के दोस्त से वह सोशल मीडिया के जरिए संपर्क में आई थीं। इसी के बाद वो उससे मिलने गईं। शुरुआत में तो सब ठीक रहा लेकिन बाद में उन्हें कमरे में बंदी बना लिया गया और उनके घर फोन करके फिरौती के पैसे माँगे जाने लगे।

जानकारी के मुताबिक बरनाली को उनके दोस्त किंग और उसके साथी डेनियल ने बंधक बनाया है। वो लोग महिला बॉक्सर के घर फोन कर करके उनसे फिरौती माँग रहे हैं। अब घरवालों ने इस संबंध में एफआईआर दर्ज करवाई है। शिकायत में बताया गया है कि बरनाली के पति नयन सैकिया के जरिए किंग उनके घर के लोगों को जानने लगा था। धीरे-धीरे बरनाली और वो चैट करने लगे। दोस्ती इतनी घनिष्ठ हो गई कि बरनाली ने एक दिन टूरिस्ट वीजा पर नाइजीरिया जाने का निर्णय लिया और 28 अक्टूबर को बेंगलुरु से लागोस की फ्लाइट लेकर वो नाइजीरिया चली गईं।

नाइजीरिया में जाकर वह किंग से दोस्त बनकर मिलीं, लेकिन उनके उसी दोस्त ने उनको बंदी बना लिया। 3 दिन तक बरनाली अपने घर में संपर्क नहीं कर पाईं। चौथे दिन जाकर किसी तरह उन्होंने अपने घर एक वॉट्सऐप कॉल की और मदद माँगी। उन्होंने बताया कि वो एक कमरे में बंदी बनाकर रखी गई हैं। उन्हें खाने को खाना तक नहीं दिया जाता है

इसी बीच किंग के परिजन भी बरनाली को छोड़ने के बदले उनके घरवालों से फिरौती माँगने लगे और उनको धमकियाँ देने लगे। इस मामले में परिवार ने पुलिस में एफआईआर दर्ज करवाई है। महिला बॉक्सर की बेटी ने बताया- “28 अक्टूबर को मेरी माँ बेंगलुरु से लागोस गई थी। शुरू में सब ठीक था लेकिन कुछ दिनों से उन्हें खाने को कुछ नहीं दिया जा रहा है, उन्हें बंदी बनाकर रख लिया गया है।”

ये शिकायत असम के डिसपुर पुलिस थाने में हुई है। शिकायत में कहा गया कि बरनाली की वापसी की टिकट 13 नवंबर की कराई गई थी लेकिन बरनाली को एयरपोर्ट तक नहीं आने दिया दिया गया। परिजनों ने दिल्ली क्राइम ब्रांच को भी संपर्क किया है। वहीं पति ने भारतीय प्रशासन अधिकारियों से भी मदद माँगी है ताकि उनके हस्तक्षेप से उनकी बीवी आराम से घर आ पाएँ।

पति ने बताया कि शुरू में नाइजीरिया में उनकी बीवी को एक होटल में रखा गया लेकिन बाद में एक कमरे में शिफ्ट कर दिया गया। नयन के अनुसार वह अब तक 5 से 6 लाख रुपए किंग को दे चुके हैं, लेकिन उसने उनकी पत्नी को नहीं छोड़ा है।

‘400 हिन्दुओं को मार डाला, बहुत राहत मिली’: महिला मित्र को ‘Love’ के साथ नेहरू की चिट्ठी, गाँधी ने पूरे बिहार के हिन्दुओं को कहा ‘कुकर्मी’ और ‘पापी’

भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के बारे में काफी कुछ लिखा जा चुका है, चर्चाएँ हो चुकी हैं। उनमें प्रमुख हैं भारत का विभाजन और कश्मीर को लेकर उनकी नीति। देश खंडित हो गया और जम्मू कश्मीर का एक बड़ा हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में चला गया। आपको ये जान कर हैरानी होगी कि जिस व्यक्ति को देश का पहला प्रधानमंत्री बनाया गया, वही हिन्दुओं के नरसंहार पर खुश होता था। लेकिन हाँ, महात्मा गाँधी और जवाहरलाल नेहरू को मुस्लिमों को लेकर बड़ी फ़िक्र रहती थी।

ये तो सबको पता है कि जब भारत को स्वतंत्रता मिलने और सत्ता हस्तांतरण से पहले बंगाल और पंजाब जैसे इलाके विभाजन के कारण दंगों से त्रस्त थे। बंगाल के नोआखली में दंगे सबसे ज़्यादा भड़के हुए थे और ये आग बिहार तक भी फैल गई। तब अंतरिम सरकार चला रहे जवाहरलाल नेहरू भी बिहार पहुँचे और उन्होंने देश की जनता पर ही हवाई बमबारी की धमकी दे डाली। सोचिए, बल-प्रयोग की आवश्यकता कश्मीर में थी तो उस मामले को वो अंतरराष्ट्रीय अदालत में घसीट कर ले गए और उससे पहले दंगों के कारण बौखला कर अपने देश की जनता पर ही हवाई हमले की धमकी देते थे।

उनका ये भाषण गया शहर में हुआ था जब उन्होंने एक जनसभा के दौरान ये धमकी दी थी। उन्होंने कहा था कि नोआखली में जो हुआ वो ठीक नहीं था लेकिन इससे बिहार में जो पाप हुआ वो नहीं धुल जाता। उन्होंने कहा था कि उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि बिहार के सीधे-सादे किसान इस तरह से कैसे पागल हो गए और जानवर बन गए। नेहरू ने यहाँ तक कहा था कि वो हत्याओं से व्याकुल नहीं हैं, क्योंकि सबको एक न एक दिन मरना है। साथ ही उन्होंने कहा था कि अगर कोई पागल हो जाए तो उसे पागलखाने ही भेजना पड़ेगा, ऐसे लोगों के हाथ में सत्ता देने को लेकर विश्वास नहीं किया जा सकता।

अपने ही देशवासियों पर बमबारी की धमकी दी थी जवाहरलाल नेहरू ने

इस दौरान जवाहरलाल नेहरू खुद स्वीकार करते हैं कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बल-प्रयोग करना पड़ा है और सेना का इस्तेमाल करना पड़ा है। उन्होंने कहा था कि जब सरकार को गोलीबारी, मशीनगन से फायरिंग और लोगों पर बमबारी का रास्ता अख्तियार करना पड़े, तो ऐसे में जो दोषी हैं और जो निर्दोष हैं उन सभी को भुगतना पड़ेगा। उन्होंने धमकाया था कि अगर अराजकता कायम रही तो ऐसा होने से इनकार नहीं किया जा सकता। यानी, बंदूकों, मशीनगन और हवाई बम का इस्तेमाल किया जाएगा।

उन्होंने छात्रों से यहाँ तक अपील कर दी थी कि वो गाँवों में जाएँ और लोगों को समझाएँ, अगर इस प्रयास में वो मर भी जाते हैं तो ये श्रेयस्कर होगा, वो व्यक्तिगत रूप से उन्हें इस त्याग के लिए बधाई देंगे। जवाहरलाल नेहरू की ये बातें सुन कर स्पष्ट लगता है कि देश भर में फैले दंगों के कारण वो अशांत थे और इसका असर उनके मानसिक संतुलन पर भी पड़ा था। आम जनता को हवाई हमलों की धमकी देना, छात्रों को मरने के लिए कहना और किसानों को पागल बताना – क्या ये किसी हिसाब से ठीक है?

स्रोत: ‘सेलेक्टेड वर्क्स ऑफ जवाहरलाल नेहरू’, सीरीज 2, वॉल्यूम 1

अब आते है उनके उस पत्र पर, जिसमें उन्होंने हिन्दू किसानों की हत्याओं पर जश्न मनाया था। इसके पीछे एक घटना थी – बिहार की राजधानी पटना से 40 किलोमीटर दूर स्थित स्थित नगरनौसा गाँव की। प्रखर श्रीवास्तव अपनी पुस्तक ‘हे राम‘ में बताते हैं कि कैसे नेहरू की उस धमकी के बाद से पुलिस और फ़ौज के हौसले बुलंद थे। घटना 5 नवंबर, 1946 की है। मद्रास रेजिमेंट ने भीड़ पर गोलीबारी की और 400 हिन्दू मारे गए। बिहार में चर्चा थी कि मृतकों की संख्या 1000 से ऊपर हो सकती है, नेहरू इसे 50-60 तक गिनते रहे।

महिला मित्र पद्मजा नायडू को जवाहरलाल नेहरू का पत्र

उसी दिन रात को जवाहरलाल नेहरू ने अपनी करीबी मित्र और स्वतंत्रता सेनानी सरोजिनी नायडू की बेटी पद्मजा नायडू को एक पत्र लिखा। इस पत्र में उन्होंने लिखा है, “आधी रात के आसपास मैं थका-हारा होने के बावजूद तुम्हें क्यों लिख रहा हूँ, मैं खुद नहीं जानता। इस शाम मैं भागलपुर से हवाई मार्ग से लौटा। पहुँचने पर मुझे पता चला कि फ़ौज ने ग्रामीण इलाके में किसानों की एक भीड़ पर गोलीबारी की है, जिसमें 400 मारे गए हैं। सामान्यतः इस तरह का कुछ मुझे डरा देता, लेकिन क्या तुम यकीन करोगी? मैं ये जान कर अत्यंत चिंतामुक्त हो गया।”

उन्होंने आगे इस पत्र में लिखा है, “बात ये है कि हम बदलती परिस्थितियों के साथ खुद भी बदलते हैं क्योंकि ताज़ा अनुभवों एवं एहसासों की परतें हमारे पुराने विचारों को ढँक लेती हैं। हिन्दू किसानों की भीड़ ने कुछ ऐसा व्यवहार किया है, जो क्रूरता और अमानवीयता की चरम सीमा है। मैं नहीं जानता इन्होंने कितनों को मारा होगा, लेकिन ये संख्या बहुत ज़्यादा होगी। पिछले कुछ दिनों से इन्होंने बिना रोकटोक ये सब किया। इसीलिए, जब मुझ तक खबर पहुँची कि इनमें से 400 को मार डाला गया है, मुझे लगता है संतुलन थोड़ा ठीक किया गया है।”

अपनी अंतरंग मित्र पद्मजा नायडू को जवाहरलाल नेहरू ने लिखा पत्र

पत्र के अंत में वो पद्मजा नायडू को ‘Love’ लिखते हैं। सोचिए, 400 किसानों की हत्या पर जवाहरलाल नेहरू अपनी अंतरंग मित्र को लिखे पत्र में सिर्फ इसीलिए ख़ुशी जता रहे हैं क्योंकि वो हिन्दू थे। क्या ये व्यक्ति सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध उस देश के नेतृत्व के लायक था, जो उस समय विकट परिस्थितियों से गुजर रहा था और जहाँ एक ऐसे नेता की आवश्यकता थी जो उसकी पुरानी महिमा को वापस दिलाए, जनता को एक रख कर वापस अपनी मातृभूमि पर गौरव करना सिखाए।

जवाहरलाल नेहरू ने बाद में डैमेज कंट्रोल के लिए बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉक्टर श्रीकृष्ण सिंह को पत्र लिखा और और उन्हें इस गोलीबारी के संबंध में बयान जारी करने को कहा। इस पत्र में उन्होंने मृतकों की संख्या 250 बताई और ये भी कहा कि ये आँकड़ा तो किसी भी हिसाब से बड़ा है ही नहीं। असल में नेहरू चाहते थे कि इस गोलीबारी से उनका पल्ला झड़ जाए और बिहार सरकार पर सारी जिम्मेदारी चली जाए, नेता सार्वजनिक रूप से ये कह कर उन्हें बचाएँ कि उनके कहने पर कुछ हुआ ही नहीं।

जवाहरलाल नेहरू का तिहरा रवैया देखिए। पद्मजा नायडू को लिखे पत्र में वो आँकड़ा 400 बताते हैं, डॉ श्रीकृष्ण सिंह को लिखे पत्र में 250 और इस घटना के 20 दिन बाद 25 नवंबर, 1946 को वो कॉन्ग्रेस पार्टी के मेरठ अधिवेशन में ये आँकड़ा 50-60 बताते हैं। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने भी नगरनौसा में हुई गोलीबारी का जिक्र अपनी पुस्तक ‘लोकदेव नेहरू’ में किया है। जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें 1952 में राज्यसभा सांसद भी बनाया था।

इसमें उन्होंने स्पष्ट लिखा है कि 1946 में बिहार में भड़के सांप्रदायिक दंगों के दौरान जब नेहरू बिहार आए थे तब वो अपनी ही देखरेख में फ़ौज से काम ले रहे थे। यानी, भारत की आज़ादी से पहले ही फ़ौज नेहरू के हाथों में आ गई थी। रामधारी सिंह दिनकर लिखते हैं कि फौजियों ने जब सैकड़ों हिन्दुओं को मौत के घाट उतार दिया तो पटना में नाराज़गी फ़ैल गई। जब वो नौजवानों के बीच भाषण देने सीनेट हॉल पहुँचे तब लड़कों ने उनका कुर्ता तक फाड़ डाला और उनकी टोपी उड़ा डाली।

तो ये थी जवाहरलाल नेहरू की इज्जत! जवाहरलाल नेहरू मुस्लिमों को बचाने के इरादे के साथ बिहार तो आए लेकिन नोआखली नहीं गए। महात्मा गाँधी ने तो इन दंगों के विरोध में बकरी का दूध और अन्न त्याग कर अर्ध-अनशन शुरू कर दिया था। 6 नवंबर को इसका ऐलान करते हुए उन्होंने पूरे बिहार को पापी कह डाला था। क्या बिहार में अगर कुछ लोगों ने गलती की भी होगी तो क्या इसके लिए सबको पापी कह दिया जाएगा? क्या नोआखली की घटना पर उन्होंने किसी कौम को या किसी पूरे राज्य को पापी कहा? हिम्मत ही नहीं थी। हिन्दू आसान निशाना थे।

नोआखली में क्या हुआ, बिहार तक पहुँची आग

इस लेख में बार-बार नोआखली दंगे की बात आई है तो आपके मन में ज़रूर सवाल उठ रहा होगा कि वहाँ क्या हुआ था। आज ये जगह बांग्लादेश में है, लेकिन अक्टूबर 1946 में यहीं पर हिन्दुओं का भयंकर कत्लेआम किया गया था। इसे भारत के विभाजन के लिए हुई हिन्दू विरोधी हिंसा की शुरुआत कह सकते हैं। इस इलाके में हिन्दू समृद्ध थे, जमींदार थे, मुस्लिमों का जीवन चलाते थे – उन्हीं मुस्लिमों ने उनका कत्लेआम किया। नोआखली और टिप्पेरा में हिंसा भड़काने के पीछे मौलाना सैयद गुलाम सरवर हुसैनी का नाम लिया जा सकता है।

असल में 22-24 मार्च, 1940 में मुस्लिम लीग के लाहौर सत्र में अलग मुस्लिम मुल्क के लिए प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद से ही नोआखली में अल्पसंख्यक हिन्दुओं के खिलाफ माहौल बनाना शुरू कर दिया गया था। सरवर ने अपने भाषणों में हिन्दू देवियों के लिए ‘वेश्या’ शब्द तक का इस्तेमाल किया था। 1930 के दशक में हिन्दुओं के नियंत्रण वाले बाजारों में खुल कर गोमांस की बिक्री शुरू कर दी गई। नोआखली में इस्लामी ‘मियार फ़ौज’ के बैनर तले भीड़ इकट्ठा कर के हिन्दुओं का नरसंहार किया जाता था।

महात्मा गाँधी ने नोआखली पहुँच कर गाँव-गाँव घूमना शुरू किया और नैतिकता की आड़ में हिन्दुओं को बदला न लेने के लिए कहने लगे, हिन्दू मरते रहे। 16 अगस्त, 1946, जिसे मुस्लिम लीग ने ‘डायरेक्ट एक्शन डे’ नाम दिया था, उस दिन कलकत्ता में दंगे हुए थे और 10,000 लोग मरे गए थे जिनमें अधिकतर हिन्दू थे। हुसैन शाहिद सुहरावर्दी उस समय बंगाल का मुख्यमंत्री हुआ करता था और उसने इस्लामी भीड़ को आश्वासन दिया था कि उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।

इसी दौरान गोपाल मुखर्जी के रूप में एक स्थानीय नेता उभरा और उसने कई हिन्दुओं की जान बचाई। उन्हें हम गोपाल पाठा के रूप में भी जानते हैं। अगर मुस्लिम लीग का कलकत्ता को पाकिस्तान में मिलाने का सपना पूरा नहीं हो पाया, उसमें इनका बड़ा योगदान था। उन्होंने महात्मा गाँधी के कहने के बावजूद अपने हथियार सौंपने से इनकार कर दिया था। मुस्लिम लीग ने अंत में उनसे हिंसा रोकने का निवेदन किया और हिन्दुओं की सुरक्षा की गारंटी दिए जाने के बाद उन्होंने बात मानी।

इन्हीं दंगों का असर बिहार में भी दिख रहा था। बिहार में उस साल जून और सितंबर में भी दंगे हो चुके थे। 27 अक्टूबर से लेकर 9 नवंबर तक स्थिति सबसे ज़्यादा बिगड़ गई। भारत के अंतरिम सरकार का गठन 2 सितंबर, 1946 को ही हो चुका था और जवाहरलाल नेहरू इसके मुखिया थे। वो भी मुस्लिमों पर हमले की खबर सुन कर बिहार पहुँचे। ध्यान दीजिए, वो नोआखली नहीं गए जहाँ हिन्दुओं का नरसंहार हुआ था। 5 नवंबर, 1946 को महात्मा गाँधी ने बिहार दंगों के विरुद्ध अनशन की घोषणा कर के इसे तुरंत रोकने को कहा था।

महात्मा गाँधी ने पूरे बिहार को बताया ‘पापी’ और ‘कुकर्मी’

अगले दिन ऑस्ट्रेलियाई अख़बार ‘डेली मिरर’ में खबर छपी थी कि अंतरिम सरकार दंगों की खबर छापने को लेकर भी समाचारपत्रों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रही है। महात्मा गाँधी बिहार दंगों के समय कलकत्ता में थे और नोआखली के लिए जाने वाले थे। उन्हें बिहार में हुए दंगों के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं थी, लेकिन पता नहीं उन्हें किसने बता दिया कि वहाँ केवल मुस्लिम ही मारे जा रहे हैं और इस जानकारी के आधार पर उन्होंने पूछा कि क्या बिहार के 14% मुस्लिमों को बर्बर तरीके से रौंद देना राष्ट्रवाद है?

6 नवंबर, 1946 को उन्होंने कहा था, “मुझे ये कहे जाने की ज़रूरत नहीं है कि मैं कुछ हजार बिहारियों की गलती के लिए पूरे बिहार को पापी न कहूँ। क्या बिहार एक बृजकिशोर प्रसाद और एक राजेंद्र प्रसाद का श्रेय नहीं लेता? मुझे भय है कि अगर बिहार में हिन्दुओं का कदाचार जारी रहा तो दुनिया भारत के सभी हिन्दुओं की निंदा करेगी। बिहारी हिन्दुओं के कुकृत्य कायदे आजम मोहम्मद अली जिन्ना के इस तंज को सही साबित करते हैं कि कॉन्ग्रेस एक हिन्दू संगठन है, भले ही ये अपने पदाधिकारियों में सिख, मुस्लिम, ईसाई, जैन और पारसी नेताओं के होने की बात करता हो।”

उन्होंने बिहारी हिन्दुओं पर भारत को कलंकित करने तक के आरोप मढ़ दिए थे। उन्होंने हिन्दुओं को नीचा दिखाते हुए कहा था कि तुम सब अपने अमानवीयता के लिए पश्चाताप करो और कॉन्ग्रेस नेताओं को आश्वस्त करो कि मुस्लिमों का उतना ही ख्याल रखोगे, जितना अपने भाई-बहनों का। उन्होंने हिन्दुओं को ये तक कहा था कि न सिर्फ मुस्लिमों को वापस बुलाएँ, बल्कि उनके घर बनवाएँ और मंत्रियों से उनकी मदद करने को कहें। ये थे हिन्दुओं के लिए महात्मा गाँधी के शब्द, बाक़ी नोआखली में कितने मुस्लिमों ने उनकी बात मानी ये इसी से समझ लीजिए कि आज ये क्षेत्र बांग्लादेश में है, एक इस्लामी मुल्क में।

कीवी के बाद अब कंगारू की बारी! भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच होगा वर्ल्ड कप 2023 का फाइनल मैच, हेजलवुड-कमिंस-स्टार्क की चुनौती से निपटना होगा

ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता स्थित ईडन गार्डन्स में गुरुवार (16 नवंबर, 2023) को ICC वनडे वर्ल्ड कप 2023 का दूसरा सेमीफाइनल मैच खेला गया, जिसमें ऑस्ट्रेलिया ने दक्षिण अफ्रीका को 3 विकेट से हरा दिया। इसके बाद अब साफ़ हो गया है कि 19 नवंबर को अहमदाबाद स्थित नरेंद्र मोदी स्टेडियम में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच फाइनल मैच होगा और जो जीतेगा वो नया वर्ल्ड चैंपियन बनेगा।

दक्षिण अफ्रीका ने इस मैच में टॉस जीत कर पहले बल्लेबाजी की, लेकिन उसका ये फैसला उसके पक्ष में नहीं गया और टीम मात्र 212 रनों पर ढह गई और पूरे 50 ओवर भी नहीं खेल पाई। दक्षिण अफ्रीका की तरफ से डेविड मिलर ने 116 गेंद पर 101 रन बना कर और हेनरी क्लासेन ने 48 गेंदों पर 47 रन बना कर संघर्ष किया, लेकिन बाक़ी के बल्लेबाज फ्लॉप रहे। जॉस हेजलवुड को दक्षिण अफ्रीका के बल्लेबाज खेल ही नहीं पाए।

उनके 8 ओवरों में मात्र 12 रन ही बने। वहीं कप्तान पैट कमिंस ने न सिर्फ 3 विकेट झटके, बल्कि चेज करते हुए कप्तानी पारी भी खेली। वो अंत तक नाबाद रहे। ऑस्ट्रेलिया की तरफ से जहाँ ट्रेविस हेड ने 48 गेंदों पर 62 रनों की पारी खेली, वहीं उनके साथी सलामी बल्लेबाज डेविड वॉर्नर ने 18 गेंदों पर 29 रनों की तेज़-तर्रार पारी खेली। स्टीवन स्मिथ ने धीमे 30 रन बनाए, वहीं जॉस इंग्लिस ने 7वें नंबर पर उतर कर 28 रन बनाए। लेकिन, चेज में जीत सुनिश्चित किया ऑस्ट्रेलिया के मिशेल स्टार्क ने।

स्टार्क ने जहाँ गेंदबाजी में भी 10 ओवर में 3 विकेट झटके, वहीं बल्लेबाजी करते हुए भी 38 गेंदों पर16 रन जड़ दिए और अपनी टीम को जीत दिलाई। दक्षिण अफ्रीका के विकेटकीपर बल्लेबाज क्विंटन डिकॉक ने इसके साथ ही अपना अंतिम अंतरराष्ट्रीय मैच खेला। उन्होंने अब संन्यास ले लिया है। ऑस्ट्रेलिया इससे पहले 5 बार वनडे वर्ल्ड कप जीत चुका है। ये छठी बार होगा जब वो ट्रॉफी के लिए भिड़ेगा। अब देखना है कि फाइनल में भारत कंगारुओं की चुनौती से कैसे पार पाता है।