Home Blog Page 1383

‘लीचड़ आदमी, पिटते-पिटते बचे अंकल’: MP में वोट देकर निकल रही महिलाओं के पीछे भाग रहे थे अजीत अंजुम, देखिए कैसे लगी फटकार

वरिष्ठ पत्रकार व यूट्यूबर अजीत अंजुम की एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा जा रहा है कि रिपोर्टिंग के दौरान ‘पिटते-पिटते बचे अजीत अंकल।’

वीडियो में नजर आ रहा है कि कैसे मतदान वाले दिन अजीत अंजुम पोलिंग बूथ से बाहर निकल रही महिलाओं से बात करने का प्रयास कर रहे हैं और बार-बार पूछ रहे हैं कि उन्होंने किसको वोट दिया।

उनके इन सवालों का जवाब कुछ वोटर ठीक ढंग से जवाब देते हैं जबकि कुछ महिलाएँ उन्हें देख असहज हो जाती हैं। वो कहती हैं कि बूथ में कुछ लोग वोट देखकर डलवा रहे हैं। ये सुनते ही अजीत अंजुम उनसे और बात करने के लिए पीछे-पीछे भागते हैं लेकिन महिलाएँ तब तक असहज हो जाती हैं, वो कहती हैं कि जिसकी सरकार बनेगी बन जाएगी। मगर वरिष्ठ पत्रकार फिर भी बाज नहीं आते।

वो पूछते रहते हैं किसकी सरकार बनेगी, उन्होंने किसको वोट दिया है। उनकी इसी हरकत को देखकर कुछ लोग उन्हें पीछे से आकर फटकार लगाते हैं जिन्हें देख अजीत अंजुम थोड़ा घबराते हैं और फिर आगे निकल लेते हैं।

अजीत अंजुम के चैनल पर इस रिपोर्टिंग की पूरी वीडियो है। वह मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर वोटिंग वाले दिन मुरैना जिले के दिमनी क्षेत्र अलग-अलग पोलिंग बूथ पर जाकर रिपोर्टिंग कर रहे थे।

उनकी पूरी वीडियो 41 मिनट 20 सेकेंड की है। 11वें मिनट के स्लॉट के बाद देख सकते हैंउनके साथ ये घटना होती है और उसके बाद आगे वो ये कहते नजर आते हैं कि जिन्होंने उन्हें पकड़कर माहौल को तनावपूर्ण बनाने की कोशिश की वो भाजपा कार्यकर्ता हैं। इसके अलावा जो लोग भी आकर उन्हें बताते कि इस बार नरेंद्र तोमर की सरकार बनेगी, तो वहाँ भी वो यही कहते सुनाई पड़ते कि ये लोग भाजपा कार्यकर्ता हैं।

एक्स पर अब उनकी वीडियो की छोटी सी क्लिप वायरल है। यूजर्स देखकर हैरान हैं कि कोई वरिष्ठ पत्रकार ऐसी हरकत कैसे कर सकता है? कैसे कोई वोटर्स के पीछे सवाल पूछने के लिए इतना पड़ सकता है?

कुछ चुटकी लेते हुए कह रहे हैं कि इन हरकतों पर तो कुटाई होनी ही चाहिए। वहीं कुछ बोल रहे हैं कि अगर ऐसा कुछ इन्होंने राजस्थान या हरियाणा में किया होता तो इनकी ऑन कैमरा पिटाई भी होती।

गुफा में पार्टी, 12 बच्चे, 18 दिन… उत्तरकाशी से पहले थाईलैंड में भी चला था एक रेस्क्यू अभियान, भारतीय इंजीनियरों ने ही दूर की थी पानी की बाधा

तारीख थी 12 नवंबर 2023। उत्तराखंड के उत्तरकाशी में भूस्खलन हुआ। सिल्कयारा सुरंग में काम कर रहे 40 मजदूर फँस गए। इनको बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। इस बचाव अभियान ने लोगों को 2018 में थाईलैंड की एक गुफा में फँसे 12 बच्चों और उनके फ़ुटबॉल कोच की याद दिला दी है। इन्हें 18 दिन बाद बचाया गया था। इस अभियान में दुनियाभर के विशेषज्ञ शामिल हुए थे। एक भारतीय कंपनी और उसके दो इंजीनियरों की भी इसमें महत्वपूर्ण भागीदारी थी।

बच्चों को लेकर गुफा में क्यों गए थे कोच?

शनिवार का दिन था। तारीख थी 23 जून। साल था 2018 का। फुटबॉल प्रैक्टिस के बाच कोच बच्चों को लेकर ‘सरप्राइज पार्टी’ के लिए टैम लोंग खुनाम नांगनोन नेशनल पार्क के एक गुफा में ले गए। भारी बारिश के कारण गुफा में बाढ़ आ गई। शाम के समय पार्क के कर्मचारियों ने गुफा के प्रवेश द्वार पर 12 साइकिलें खड़ी देखी। फिर दुनिया को इन बच्चों के भीतर फँसे होने का पता चला। 24 जून की दोपहर इनको बचाने का अभियान शुरू हुआ। इस बचाव अभियान पर साल 2021 ‘द रेस्क्यू’ नाम से डॉक्यूमेंटरी फिल्म’ भी बनी।

थाईलैंड की गुफा में कैसे फँस गए बच्चे और उनके कोच?

गुफा में फंसे बच्चे 11 से 17 साल के बीच के थे। 25 साल के फ़ुटबॉल कोच इकापॉल चंथावॉन्ग उन्हें गुफा में लेकर गए थे। ये लोग तीन बार पहले भी इस गुफा में जा चुके थे। अमूमन ट्रेनिंग या बर्थ डे सेलिब्रेट करने के लिए जाते थे। लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि एकदम से बारिश होने से वे फँस भी सकते हैं।

23 जून 2018 की ऐसा ही हुआ। बच्चों और उनके कोच के गुफा में जाते ही मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। बाढ़ के पानी से गुफा का रास्ता बंद हो गया। पानी का स्तर लगातार बढ़ने के कारण ये लोग में ओर भीतर जाने को मजबूर हो गए।

थाईलैंड की गुफा में कैसे चलाया गया बचाव अभियान?

थाम लुआंग नांग नॉन 10316 मीटर लंबी और थाईलैंड की चौथी सबसे बड़ी गुफा है। बारिश की वजह से आई बाढ़ के कारण गुफा का मुहाना यानी उसका रास्ता खोजना मुश्किल हो गया। पानी इतना अधिक था कि एक सप्ताह तक ये भी पता नहीं चल पाया कि गुफा के अंदर फँसे बच्चे और उनके कोच जिंदा भी हैं या नहीं।

25 जून को थाई नेवी सील डाइवर्स ने बच्चों और उनके कोच की तलाश में गुफा में प्रवेश किया। लेकिन 26 जून को एक टी प्वाइंट पर बाढ़ के पानी ने गोताखोरों को वापस धकेल दिया। 27 जून को नए सिरे से कवायद शुरू हुई। अभियान में मदद के लिए ब्रिटिश और अमेरिकी सेना ने गोताखर और विशेषज्ञों की एक टीम भी थाईलैंड में थी। लेकिन एक बार फिर बाढ़ के पानी ने गोताखोरों के भीतर प्रवेश करने की कोशिश को नाकाम कर दिया।

बचाव अभियान को अस्थायी तौर पर बंद करना पड़ा। गुफा से पानी बाहर निकालने के लिए इंडस्ट्रियल वाटर पंप लगाए गए। गुफा की छत में नए छेदों की खोज में 600 से अधिक लोग लगे थे। उनकी मदद के लिए ड्रोन भेजे गए। 30 जून को बारिश थमने के बाद अभियान फिर से शुरू हुआ।

1 जुलाई को गोताखोर गुफा के भीतर गए। लेकिन वे उस जगह से बहुत दूर थे जहाँ टीम फँसी थी। 2 जुलाई को की शाम को ब्रिटिश डाइविंग टीम को पता चला कि अंदर फँसे लोग जीवित हैं। 3 जुलाई को एक डॉक्टर और एक नर्स सहित सात गोताखोरों की एक टीम को गुफा में भेजा गया। वे अपने साथ उच्च कैलोरी वाली चीजें और जरूरी मेडिकल का सामान लेकर गए।

इस बीच 6 जुलाई को गुफा में फँसे 13 लोगों तक रसद पहुँचाकर लौटते समय एक पूर्व थाई नौसेना गोताखोर और बचाव मिशन के स्वयंसेवक समन गुनन की संकरे रास्ते पर ऑक्सीजन की कमी की वजह से मौत हो गई। बचाव दल के चीफ ने 7 जुलाई को दावा किया गुफा में फँसी टीम नी में गोता लगाने के लिए तैयार नहीं थी। अंदर टीम तक पहुँचने की कोशिश में 100 से अधिक वेंट ड्रिल किए गए।

इस दौरान फ़ुटबॉल टीम के कोच इकापॉल चंथावॉन्ग का एक लेटर सामने आया। अपनी दादी को लिखे इस लेटर में उन्होंने लड़कों के माता-पिता से माफी माँगी थी। इसके बाद आखिरकार 8 जुलाई को 13 गोताखोर गुफा में गए और चार लड़कों को सुरक्षित बाहर निकाल ले आए। 10 जुलाई को कोच सहित अन्य लड़कों को भी गुफा से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

थाईलैंड की गुफा में 18 दिनों तक कैसे जीवित रहे बच्चे और उनके कोच?

गुफा के भीतर खाने की कमी थी। ऑक्सीजन की कमी थी। बावजूद बच्चे और उनके कोच सकुशल रहे। इसकी वजी कोच इकापॉल चंथावॉन्ग ही थे। दरअसल कोच ने अपनी जिंदगी का करीब एक दशक बौद्ध मठ में बिताया था। अपने इस आध्यात्मिक अनुभव से उन्होंने ध्यान के जरिए बच्चों को भोजन और ऑक्सीजन की कमी होने पर शरीर को उसके अनुसार ढालना सिखाया।

10 हजार लोग बचाव अभियान में थे शामिल

थाईलैंड की गुफा में फँसे 13 लोगों के बचाने के काम में 10 हजार से अधिक लोग शामिल थे। इनमें 100 से अधिक गोताखोर, बचावकर्मी, लगभग 100 सरकारी एजेंसियों के प्रतिनिधि, 900 पुलिस अधिकारी और 2000 सैनिक शामिल थे।

भारत से महाराष्ट्र के सांगली जिले के प्रसाद कुलकर्णी और पुणे के श्याम शुक्ला भी किर्लोस्कर ब्रदर्स लिमिटेड की थाईलैंड बचाव अभियान की 7 सदस्यीय टीम का हिस्सा थे। प्रसाद कुलकर्णी के मुताबिक, “हमारा काम गुफा से पानी निकालना था, जिसमें 90° के तीखे मोड़ थे। लगातार बारिश ने एक बड़ी समस्या खड़ी कर दी थी, क्योंकि जल स्तर कम नहीं हो सका। जनरेटर आधारित बिजली आपूर्ति अनियमित थी। इसलिए, हमें छोटे पंपों का इस्तेमाल करना पड़ा था।”

वहीं किर्लोस्कर में कॉर्पोरेट अनुसंधान और इंजीनियरिंग विकास विभाग के महाप्रबंधक शुक्ला ने इस अनुभव के बारे में बताते हुए कहा था, “लड़कों तक पहुँचना एक मुश्किल काम था। गुफा बहुत संकरी थी और कोई समतल इलाका नहीं था। लेकिन हम गुफा से पानी बाहर निकालने में कामयाब रहे।”

गोताखोर ने आत्मकथा में सब कुछ बताया

बहुत से लोगों ने 2018 की गर्मियों तक रिक स्टैंटन के बारे में सुना तक नहीं था। लेकिन 1980 के दशक में हाई स्कूल छोड़ने के बाद से वो चुपचाप खुद को गुफा गोताखोरी में महारत हासिल करते रहे। उनकी ये महारत थाईलैंड में काम आई।

जब थाई गोताखार रिक स्टैंटन और उनके गोताखोर साथी जोनाथन वोलान्थेन 27 जून को उत्तरी थाईलैंड में थाम लुआंग गुफा में पहुँचे, तब तक उन्होंने मान लिया था कि 12 लड़के और उनके कोच मर चुके होंगे। इसे लेकर उन्होंने अपनी आत्मकथा ‘एक्वानॉट’ में लिखा, “वे जरूर मर चुके होंगे, हमें उनकी लाश जरूर मिलेगी। लेकिन तभी हमने आवाज़ें सुनीं। राहत और खुशी के पल के तुरंत बाद अधिक फिक्र पैदा हो गई। स्टैंटन ने उस वक्त को याद करते हुए लिखा है, “सबसे बुरा तब हुआ जब हमने उन्हें ढूँढ लिया, क्योंकि हमें नहीं पता था कि हम उन्हें कैसे बाहर निकालेंगे।”

नौंवी फेल, पानी ढोने वाला… प्रशांत किशोर ने बताई तेजस्वी यादव की ‘पहचान’ तो बौखला गई लालू यादव की सिंगापुर वाली बेटी

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर इन दिनों पदयात्रा पर हैं। इस दौरान वो लोगों के बीच जाकर उनसे बात करके उन्हें जात-पात से ऊपर उठकर वोट करने को कहते हैं। हाल में उन्होंने इसी क्रम में बिहार के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव पर भी टिप्पणी की।

उन्होंने गुरुवार (16 नवंबर 2023) को बयान देते हुए कहा कि तेजस्वी यादव की पहचान क्या है? वो नव्वा (नौंवी) फेल आदमी हैं। क्रिकेट खेलने गए तो वहाँ पानी ढोते थे। कौन सा ऐसा बड़ा पराक्रम कर दिया। लालू के लड़के हैं इसलिए सब लोग जानते हैं।

पत्रकारों से बात करते हुए वह बोले- इन लोगों को क्या मतलब है इन चीजों से। गया उलूल-जुलूल बकवास किया, लोगों को जाति धर्म में बाँटा… पैसा वसूल करके लोगों को धर्म में बाँटा। जाति के नाम पर लोग गरीबी में मजबूरी में वोट दे देते हैं। उसके बाद नेता बनकर ज्ञान दे रहा है।

उल्लेखनीय है कि प्रशांत किशोर ने तेजस्वी यादव के जीडीपी वाले बयान पर इतनी तल्ख प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अभी आपने कुछ दिन पहले देखा होगा कि महाज्ञानी उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जीडीपी तो सबसे ज्यादा बिहार की है। प्रशांत किशोर बोले- “तेजस्वी को तो यही नहीं पता कि जीडीपी क्या है? बिना कागज देखे अगर वो इसकी परिभाषा बता दें तो हम ये काम छोड़कर तेजस्वी यादव का झंडा ले लेंगे। या बिना कागज देखे जीडीपी की फुल फॉर्म ही लिख दें तो हम मान जाएँगे।” इसके बाद उन्होंने तेजस्वी पर नौंवी फेल वाली टिप्पणी की।

प्रशांत किशोर का बयान आने के बाद शुक्रवार (17 नवंबर 2023) को लालू प्रसाद यादव की बेटी ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी और अपना गुस्सा जाहिर किया। रोहिणी आचार्य ने अपने ट्वीट में लिखा- “ये है कौन? इसको कोई पहचानता भी है। ये भी किसी को बाबू जी बना ले, ताकि किसी का राजनीतिक वारिस बन सके। ये जो कह रहा है वो अपना बाप अपनी दुकानदारी एवं अपने फायदे के हिसाब से समय-समय पर बदलते रहता है।”

रोहिणी आगे लिखती हैं- “कभी मोदी-शाह इसके बाबू जी, कभी पवन वर्मा-नीतीश कुमार इसके बाबू जी। कभी राहुल गाँधी इसके बाबूजी, कभी अभिषेक बनर्जी इसके बाबूजी, कभी जगन रेड्डी इसके बाबूजी तो कभी स्टालिन इसके बाबूजी…अभी फिर से इसने सबसे पहले वालों को अपना बाप बना रखा है सिर्फ नाम नहीं उजागर कर पा रहा है। भाजपा की दलाली करता है इसलिए मीडिया की कृपा दृष्टि इस पर बना रहता है। वरना गली का कुत्ता भी इसको भाव ना दे और चला है तेजस्वी पर कीचड़ उछालने।”

बता दें कि तेजस्वी यादव के अलावा प्रशांत किशोर ने राहुल गाँधी पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा-राजीव गांधी के लड़के हैं राहुल गाँधी इसलिए वह कॉन्ग्रेस के बड़े नेता हैं।
आपके बाबू जी की पार्टी है तो कोई भी नेता बन जाएगा। बाबूजी की दुकान है तो कोई भी जाकर बैठ जाएगा और मालिक हो जाएगा। इसमें आपकी योग्यता क्या है?

अर्जुन रणतुंगा ने BCCI सचिव जय शाह पर लगाए गंभीर आरोप तो श्रीलंकाई सरकार को माँगनी पड़ी माफी, जानें क्या थी वजह जो संसद में देना पड़ा बयान

श्रीलंका के पूर्व कप्तान अर्जुन रणतुंगा द्वारा भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के सचिव और एशियाई क्रिकेट परिषद (एसीसी) के अध्यक्ष जय शाह पर दिए गए बयानों को लेकर श्रीलंका की सरकार ने खेद व्यक्त किया है। रणतुंगा ने शाह पर श्रीलंकाई क्रिकेट में हस्तक्षेप करने और देश में खेल की गिरावट के लिए जिम्मेदार होने का आरोप लगाया था। श्रीलंकाई सरकार ने रणतुंगा के बयानों से खुद को अलग कर लिया है और कहा है कि वे श्रीलंकाई सरकार या लोगों के विचारों को नहीं दर्शाते हैं।

बता दें कि अर्जुन रणतुंगा ने कहा था, “जय शाह श्रीलंका क्रिकेट को चला रहे हैं। जय शाह के दबाव के कारण श्रीलंका क्रिकेट बर्बाद हो रहा है। भारत में एक आदमी श्रीलंकाई क्रिकेट को बर्बाद कर रहा है। वह केवल अपने पिता के कारण शक्तिशाली हैं, जो भारत के गृह मंत्री हैं।”

उनके इस बयान पर विवाद खड़ा हो गया था, जिसके बाद अब श्रीलंकाई सरकार को माफी माँगनी पड़ी है। इस बारे में शुक्रवार (17 नवंबर 2023) को संसद में बात करते हुए श्रीलंका के मंत्री हरिन फर्नांडो और कंचना विजेसेकरा ने रणतुंगा के उस बयान को लेकर खेद व्यक्त किया।

श्रीलंका सरकार के दोनों मंत्रियों ने कहा कि श्रीलंका में जो कुछ भी चल रहा है, उसकी जवाबदेही स्थानीय प्रशासकों की है, न कि बाहरी लोगों की। संसद में मंत्री कंचना विजेसेकरा ने कहा, “हम एक सरकार के रूप में एशियन क्रिकेट काउंसिल के अध्यक्ष जय शाह के प्रति अपना खेद व्यक्त करते हैं। हम अपने संस्थानों की कमियों के लिए जय शाह या अन्य देशों पर अंगुली नहीं उठा सकते।”

वहीं, पर्यटन मंत्री फर्नांडो ने आईसीसी से इस बैन को हटाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आईसीसी के इस बैन से देश पर असर पड़ेगा, क्योंकि अगले साल अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप का आयोजन होना है। अगर ये बैन जारी रहा तो कोई भी देश श्रीलंका का दौरा नहीं करेगा और श्रीलंकाई क्रिकेट को आईसीसी से कोई पैसा नहीं मिलेगा। इसकी वजह से श्रीलंका में क्रिकेट के प्रबंधन की कमर टूट जाएगी।

बता दें कि क्रिकेट विश्वकप 2023 का फाइनल मुकाबला 19 नवंबर को भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच नरेंद्र मोदी स्टेडियम, अहमदाबाद में खेला जाएगा। श्रीलंकाई टीम का सफर इस वर्ल्ड कप में निराशाजनक रहा है। श्रीलंका को बड़ा झटका तब लगा, जब वर्ल्ड कप से बाहर होने के बाद आईसीसी ने सरकारी हस्तक्षेप के चलते श्रीलंकाई क्रिकेट बोर्ड को बर्खास्त कर दिया था। आईसीसी के इस फैसले के बाद अर्जुन रणतुंगा ने बीसीसीआई के सचिव जय शाह पर आरोप लगाया था कि उनके कारण श्रीलंका क्रिकेट बर्बाद हो रहा हैं।

ईसाई लड़की से शादी के लिए हिंदू ने किया धर्मांतरण, मंदिर प्रशासन ने नौकरी से निकाला; आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट बोला- कानूनन सही: रिपोर्ट

आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने हिंदू धर्म से ईसाई बनने के बाद श्री ब्रम्हारंभ मल्लिकार्जुन स्वामी वरला देवस्थानम के एक कर्मचारी की सेवा समाप्त करने के फैसले को बरकरार रखा है। हाईकोर्ट ने कहा कि ईसाई धर्म अपनाने के बाद वह शख्स हिंदू नहीं रह गया था और यह धार्मिक संस्थान अधिनियम के खिलाफ था।

न्यायालय ने कहा कि सेवा की समाप्ति भारत के संविधान के अनुच्छेद 16 (5) और आंध्र प्रदेश धर्मार्थ एवं हिंदू धार्मिक संस्थानों और बंदोबस्ती अधिनियम के नियम 3 द्वारा दी गई वैधानिक शक्ति के अनुसार थी। सेवक सेवा नियम, 2000 (एपी नियम, 2000) के नियम 3 के अनुसार, किसी धार्मिक संस्थान या बंदोबस्ती का प्रत्येक पदाधिकारी और सेवक हिंदू धर्म मानने वाला व्यक्ति होना चाहिए।

मामले पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति हरिनाथ एन की पीठ ने कहा, “यदि न्यायालय याचिकाकर्ता के इस तर्क पर विचार करता है कि उसने खुद को ईसाई बनाए बिना एक ईसाई लड़की से शादी की है तो यह शादी विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के प्रावधानों के तहत संपन्न किया जाना चाहिए। विवाह प्रमाण पत्र विशेष विवाह अधिनियम की धारा 13 के तहत जारी किया जाना चाहिए।”

न्यायाधीश ने आगे कहा, “याचिकाकर्ता के मामले में अब तक धारा 13 के तहत कोई प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया है। जहाँ तक विवाह का संबंध है तो यह इंगित करता है कि याचिकाकर्ता ने एपी चैरिटेबल और हिंदू धार्मिक संस्थानों और बंदोबस्ती कार्यालय धारकों और सेवक सेवा नियम, 2000 के नियम 3 से छुटकारा पाने के लिए यह याचिका दायर की है।”

पीठ ने आगे कहा, “जैसा कि उत्तरदाताओं द्वारा दायर होली क्रॉस कैथेड्रल, नांदयाल में विवाह के रजिस्टर में याचिकाकर्ता और उसकी पत्नी का नाम और धर्म ईसाई लिखा हुआ है। याचिकाकर्ता ने उक्त रजिस्ट्रार में अपना हस्ताक्षर भी किया है।”

Verdictum की रिपोर्ट के मुताबिक, दरअसल याचिकाकर्ता को साल 2002 में अनुकंपा के आधार पर श्री ब्रह्मरांभ मल्लिकार्जुन स्वामी वरला देवस्थानम के कार्यालय में रिकॉर्ड सहायक के रूप में नियुक्त किया गया था। साल 2010 में उसने अपने पसंद की लड़की से शादी की और यह शादी कुरनूल जिले के नांदयाल में एक कैथेड्रल पास्टरेट चर्च में संपन्न हुई।

इसको लेकर लोकायुक्त के समक्ष एक शिकायत दायर की गई थी। इस शिकायत में आरोप लगाया गया था कि एपी चैरिटेबल और हिंदू धार्मिक संस्थानों और बंदोबस्ती कार्यालय धारकों और सेवक सेवा नियम, 2000 के नियम 3 का उल्लंघन किया गया है, क्योंकि याचिकाकर्ता ने अनुकंपा के आधार पर रोजगार पाने के समय अपना धर्म छुपाया था।

इसके बाद याचिकाकर्ता को रिकॉर्ड सहायक की सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। याचिकाकर्ता ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि उसने अपना धर्म नहीं छिपाया था और सक्षम अधिकारियों द्वारा जारी किए गए उसके जाति और स्कूल छोड़ने के प्रमाण पत्र में उसकी जाति हिंदू के अनुसूचित जाति में आने वाले माला समुदाय बताई गई है।

याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कहा कि ईसाई धर्म की लड़की से शादी करने पर यह नहीं माना जाना चाहिए कि याचिकाकर्ता ने ईसाई धर्म अपना लिया है। वह अभी भी हिंदू धर्म को मानता है। हालाँकि, पीठ ने याचिकाकर्ता द्वारा दिए गए किसी भी आधार को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

प्राइवेट सेक्टर में स्थानीय लोगों को नहीं मिलेगा 75% आरक्षण, हाई कोर्ट ने रद्द किया हरियाणा सरकार का कानून: कहा- दूसरे प्रदेश से होने के कारण नहीं कर सकते भेदभाव

हरियाणा की खट्टर सरकार द्वारा निजी क्षेत्र की नौकरियों में प्रदेश के निवासियों को 75 प्रतिशत आरक्षण के कानून को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। दरअसल, खट्टर सरकार ने स्टेट एंप्लॉयमेंट ऑफ लोकल कैंडिडेट एक्ट 2020 बनाया था, जिसमें यह प्रावधान किया गया था कि हरियाणा के मूल निवासियों को निजी क्षेत्र में 75 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा।

वहीं इस कानून के खिलाफ फरीदाबाद इंडस्ट्रियल एसोसिएशन व अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में कहा गया था कि प्राइवेट सेक्टर में योग्यता और कौशल के अनुसार लोगों का चयन किया जाता है। अगर नियोक्ताओं से कर्मचारी को चुनने का अधिकार ले लिया जाएगा तो उद्योग कैसे आगे बढ़ सकेंगे। जिसका निजी क्षेत्र की कार्यकुशलता पर बुरा असर पड़ेगा।

हाईकोर्ट ने दिया रद्द करने का आदेश 

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में आज शुक्रवार (17 नवंबर, 2023) को हाई कोर्ट ने इस कानून के खिलाफ दाखिल इन सभी याचिकाओं को सही करार देते हुए हरियाणा की खट्टर सरकार के इस कानून को सिरे से खारिज करते हुए इसे रद्द किए जाने के आदेश दे दिया। 

अपने आदेश में न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति हरप्रीत कौर जीवन की खंडपीठ ने 2021 में हरियाणा राज्य द्वारा बनाए गए कानून को असंवैधानिक और भारत के संविधान के भाग III (मौलिक अधिकारों) का उल्लंघन घोषित कर दिया है।

हाई कोर्ट ने कहा कि राज्य विधायिका की शक्तियाँ राष्ट्रीय हित के लिए हानिकारक नहीं हो सकती हैं और वे सीधे तौर पर केंद्र सरकार की शक्ति का अतिक्रमण नहीं कर सकती हैं।

वहीं कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी टिप्पणी की है कि राज्य किसी निजी नियोक्ता को स्थानीय उम्मीदवारों को नियुक्त करने के लिए मजबूर नहीं कर सकती क्योंकि इससे ऐसे और भी राज्य अधिनियम बन सकते हैं जो पूरे देश में “कृत्रिम दीवारें” खड़ी कर सकते हैं।

इस मामले में कोर्ट ने अपनी बात रखते हुए यह दलील दी गई कि हरियाणा सरकार का प्राइवेट सेक्टर में 75% आरक्षण देने का फैसला योग्य लोगों के साथ अन्याय है। यह कानून उन युवाओं के सांविधानिक अधिकारों का हनन है जो अपनी शिक्षा और योग्यता के आधार पर भारत के किसी भी हिस्से में नौकरी करने को स्वतंत्र हैं। याची ने कहा कि यह कानून योग्यता के बदले रिहायश के आधार पर निजी क्षेत्र में नौकरी पाने की पद्धति को शुरू करने का प्रयास है। ऐसा हुआ तो हरियाणा में निजी क्षेत्र में रोजगार को लेकर अराजकता की स्थिति पैदा हो जाएगी।  

कोर्ट में कहा गया कि प्राइवेट सेक्टर में 75% जॉब्स आरक्षित करने के लिए 2 मार्च, 2021 को लागू अधिनियम और 6 नवंबर, 2021 की अधिसूचना संविधान के प्रावधानों के खिलाफ है। याचिका में रोजगार अधिनियम 2020 को सिरे से खारिज करने की याचिका में माँग की गई थी। जिस पर आज पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए रद्द कर दिया। 

2020 में बना था यह कानून

गौरतलब है कि हरियाणा सरकार ने स्टेट एंप्लॉयमेंट ऑफ लोकल कैंडिडेट एक्ट 2020 बनाया था। इसमें 75% आरक्षण का प्रावधान था। इससे पहले हाईकोर्ट ने इस कानून पर अब तक रोक लगा रखी थी।

मोहम्मद शमी के गाँव में स्टेडियम बनाएगी योगी सरकार, अधिकारियों ने किया जमीन का चयन: क्रिकेट वर्ल्ड कप में मचा रखी है धूम

क्रिकेट विश्वकप 2023 के सेमीफाइनल में मोहम्मद शमी के शानदार प्रदर्शन के बाद उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार ने अमरोहा जिले में स्थित उनके गाँव सहसपुर में एक क्रिकेट स्टेडियम बनाने का फैसला किया है। नौकरशाहों ने इसके लिए भूमि का सर्वेक्षण पहले ही शुरू कर दिया है। बता दें कि भारतीय क्रिकेट टीम के महत्वपूर्ण सदस्यों में से एक शमी ने सेमीफाइनल में 7 विकेट लेकर रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन किया था। वो विश्वकप में अभी तक के सबसे सफल गेंदबाज हैं।

मोहम्मद शमी मूल रूप से उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के हैं, लेकिन वो प्रथम श्रेणी क्रिकेट पश्चिम बंगाल की टीम की तरफ से खेलते हैं। वो गुजरात की टीम की ओर से आईपीएल में खेल रहे हैं। मोहम्मद शमी ने इस विश्वकप में अब तक शानदार प्रदर्शन किया है। उन्होंने अब तक महज 5 मैचों में ही 23 विकेट लिए हैं और वो विकेट लेने वाले खिलाड़ियों की सूची में शीर्ष पर हैं।

जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार (17 नवंबर 2023) को सीडीओ अश्वनी कुमार मिश्र व अन्य अधिकारियों ने जोया विकासखंड स्थित शमी के गाँव का भ्रमण किया। स्टेडियम के लिए जमीन की तलाश की। उनका घर जोया विकासखंड के सहसपुर नवाब में पड़ता है। अब इस गाँव में भव्य क्रिकेट स्टेडियम बनाया जाएगा।

योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण से उस इलाके में खेल के बुनियादी ढाँचे का निर्माण होगा, युवाओं के बीच एक जीवंत क्रिकेट संस्कृति को बढ़ावा देगा और उभरती प्रतिभाओं को अपने क्रिकेट के आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करेगा।

इसके अलावा, स्टेडियम के एक ऐतिहासिक स्थल के रूप में कार्य करने की संभावना है, जो गाँव के भारतीय क्रिकेट में योगदान और मोहम्मद शमी जैसे प्रसिद्ध क्रिकेटिंग आइकन के साथ इसके जुड़ाव का प्रतीक है। ज़िले के प्रभारी मंत्री संजय सिंह गंगवार भी उनके गाँव को विकसित करने की बात कह चुके हैं। प्रशासन ने युवा कल्याण विभाग की तरफ से गाँव में मिनी स्टेडियम बनवाने का निर्णय लिया है। 

शानदार रहा है मोहम्मद शमी का क्रिकेट करियर

बता दें कि मोहम्मद शमी ने अब तक भारतीय क्रिकेट टीम के लिए बेहतरीन प्रदर्शन किया है। वो विश्वकप में अपने 17 मैचों के करियर में 54 विकेट ले चुके हैं। ओवर आल उनके प्रदर्शन की बात करें तो मोहम्मद शमी ने अब तक 64 मैचों में 229 विकेट लिए हैं, जिसमें उन्होंने 12 बार पारी में 4 विकेट और 6 बार पारी में 5 विकेट लेने का कारनामा किया है। टेस्ट मैचों में 118 रन देकर 9 विकेट मैच में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा है। पारी में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 56 रन पर 6 विकेट का रहा है। उन्होंने टेस्ट मैचों में 2 अर्धशतक भी लगाए हैं।

वनडे क्रिकेट की बात करें तो शमी ने 100 मैचों में 194 विकेट हासिल किए हैं। 57 रन देकर 7 विकेट उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा है। शमी ने भारत के लिए 23 टी-20 इंटरनेशनल मैचों में 24 विकेट लिए हैं। शमी साल 2015 के विश्वकप में भी भारत की ओर से सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेदबाज रहे थे।

योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में उत्तर प्रदेश सरकार की यह पहल खेलों को बढ़ावा देने और राज्य में खेल प्रतिभा को पोषित करने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह शमी के प्रति व्यापक सम्मान और प्रशंसा का भी प्रमाण है, न केवल उनके साथी क्रिकेटरों के बीच, बल्कि व्यापक जनता के बीच भी। स्टेडियम क्षेत्र में क्रिकेट गतिविधियों का केंद्र बनने की क्षमता रखता है, भविष्य की पीढ़ियों के क्रिकेटरों को प्रेरित करेगा।

छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में मतदान संपन्न: MP में 71 तो छग में 68% वोटिंग, 3 दिसंबर को आएँगे नतीजे

आज छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान का कार्य संपन्न हो गया। मध्य प्रदेश में जहाँ सभी 230 विधानसभा सीटों पर मतदान हुआ, वहीं छत्तीसगढ़ में दूसरे दौर की 70 विधानसभा सीटों पर मतदान हुआ। शाम के पाँच बजे तक के मतदान के आँकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में 71.16 प्रतिशत और छत्तीसगढ़ में 68.15 प्रतिशत मतदान हुआ।

मध्य प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों के लिए 2,533 उम्मीदवार मैदान में थे। वहीं, छत्तीसगढ़ में दूसरे चरण में 70 सीटों के लिए 958 प्रत्याशियों ने अपनी किस्मत आजमाई। अब सभी के भविष्य का फैसला 3 दिसंबर 2023 को मतगणना के साथ हो जाएगा।

मध्य प्रदेश में मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनुपम रंजन ने बताया कि रतलाम के सैलाना विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक 85.49 प्रतिशत वोट पड़े। उन्होंने बताया कि खिलचीपुर राजगढ़ में मतदान 84.17 प्रतिशत रहा। वहीं, सिवनी के बरघाट विधानसभा क्षेत्र में 84.16 प्रतिशत मतदाताओं ने मतदान किया। वहीं, भिंड में सबसे कम 50.41 प्रतिशत और ग्वालियर दक्षिण में 51.05 प्रतिशत मतदान हुआ

छत्तीसगढ़ में 68 प्रतिशत से ज्यादा मतदान

चुनाव आयोग के आँकड़ों के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण की 70 सीटों पर मतदान का प्रतिशत 68 से ज्यादा रहा। यहाँ की गरियाबंद की नक्सल प्रभावित बिंद्रानवागढ़ सीट के नौ मतदान केंद्रों पर मतदान का काम 3 बजे ही समाप्त हो गया था। वहीं, बाकी की 69 सीटों पर मतदान शाम 5 बजे तक हुआ।

शाम पाँच बजे तक आधिकारिक तौर पर 67.48 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ है। ये आँकड़ा थोड़ा बढ़ सकता है, क्योंकि कुछ लोग मतदान के लिए लाइनों में 5 बजे के बाद भी लगे थे। छत्तीसगढ़ में दूसरे चरण के लिए 18,833 मतदान केंद्र बनाए गए थे।

31000 फीट की ऊँचाई पर उड़ रहा था विमान, घोड़े ने कर दिया परेशान… एयरपोर्ट पर कराई पड़ी इमरजेंसी लैंडिंग

“हमारे प्लेन में एक घोडा है, हमें इमरजेंसी लैंडिंग की जरुरत है…” जी बिलकुल सही पढ़ा आपने। 31000 फ़ीट की ऊँचाई पर उड़ रहे विमान के पायलट ने जब एयर ट्रैफिक कण्ट्रोल को यह ऑडियो सन्देश भेजकर मदद माँगी तो उन्हें भी यकीन नहीं हुआ। मामला गुरुवार 16 नवंबर, 2023 का है।

दरअसल, यह वाकया है बेल्जियम जा रहे एक मालवाहक विमान का, जिसे उस समय आपात लैंडिंग के लिए वापस न्यूयॉर्क लौटना पड़ा जब एक घोड़ा अपने स्टॉल से खुल गया और बेलगाम हो गया। जिसे क्रू नियंत्रित नहीं कर पाया तो पायलट को ATC से मदद माँगनी पड़ी। 

एबीसी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, हवाई यातायात नियंत्रण (ATC) के ऑडियो क्लिप के अनुसार, विमान के शुरुआती उड़ान भरने के 30 मिनट के बाद ही बोइंग 747 कार्गो विमान पर घोड़ा स्टाल से आजाद हो गया अर्थात जहाँ बँधा था वहाँ से खुल गया। 

फ्लाइटराडार24 के अनुसार, बोइंग 747 बमुश्किल 31,000 फीट की ऊँचाई पर था जब एक पायलट ने वापस जान ऍफ़ कैनेडी हवाई अड्डे पर लौटने की बात की। हालाँकि, मदद की अपील का यह ऑडियो वायरल हो गया था जिसके बाद लोग अलग-अलग कयास लगाते हुए नजर आए। 

ATC के ऑडियो में पायलट को यह कहते हुए सुना जाता है, “हम एक मालवाहक विमान हैं, जिसमें एक जीवित जानवर, एक घोड़ा, सवार है। घोड़ा अपनी जगह से फ्री हो गया है। हालाँकि, उड़ान भरने में कोई समस्या नहीं है, लेकिन हमें न्यूयॉर्क वापस जाने की जरूरत है क्योंकि हम घोड़े को संभाल नहीं सकते।”

हालाँकि, लैंडिंग इतना आसान न थी क्योंकि विमान में ईंधन ज़्यादा था। ऑडियो के अनुसार, उड़ान के वजन के कारण उड़ान को बोस्टन के तट से यू-टर्न लेने और मार्था वाइनयार्ड के 10 मील पश्चिम में अटलांटिक के ऊपर लगभग 20 टन ईंधन डंप करना पड़ा। इसके साथ ही पायलट ने एक पशुचिकित्सक को विमान के आने पर जेएफके में उपस्थित रहने का अनुरोध किया।

गौरतलब है कि पूरी बातचीत में यह क्लियर नहीं है कि घोड़ा भागने में कैसे कामयाब रहा, लेकिन विमान के जेएफके में उतरने तक वह अनियंत्रित ही रहा। हालाँकि, विमान सफलतापूर्वक हवाई अड्डे पर लैंड कर गई।

बेहोशी का इंजेक्शन लगाने पर यमन के नागरिक की हो गई मौत, भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को सजा-ए-मौत: बेटी को बचाने कोर्ट पहुँची माँ

इस्लामी हिंसा से ग्रस्त यमन में मौत की सजा भुगत रही भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को बचाने के लिए उनकी माँ वहाँ जाना चाहती है, ताकि वो अपनी बेटी की जिंदगी के बदले ‘ब्लड मनी’ पर बातचीत करके उसका भुगतान कर सकें। इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने भारत सरकार से कहा कि निमिषा की माँ को वहाँ जाने के मामले में फैसला एक सप्ताह के भीतर करे।

चूँकि यमन की यात्रा पर अभी प्रतिबंध लगा हुआ है। ऐसे में निमिषा की माँ को यमन की यात्रा की अनुमति नहीं मिल पा रही है। इसके बाद पीड़ित नर्स की माँ ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया और न्यायालय से गुहार लगाई कि उन्हें यमन जाने की अनुमति दी जाए और इसके लिए वह सरकार को निर्देश दे। इसको देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने भारत सरकार से इस संबंध में त्वरित फैसला लेने के लिए कहा है।

निमिषा प्रिया की माँ की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने इस्लामी मुल्कों में प्रचलित ‘ब्लड मनी’ से संबंधित कोई भी निर्देश देने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार निमिषा प्रिया की माँ को यमन भेजने के बारे में कोई रास्ता जल्द-से-जल्द निकाले। निमिषा की माँ अपनी बेटी यमन जाकर अपनी बेटी की जान के बदले मृतक के परिवार को मुआवजा देना चाहती हैं।

दरअसल, निमिषा प्रिया ने यमनी नागरिक तलाल अब्दो महदी के कब्जे से अपना पासपोर्ट वापस पाने के लिए उसे नशीला इंजेक्शन लगा दिया था। इंजेक्शन के ओवरडोज के कारण उसकी मौत हो गई थी। मौैत होने के बाद महदी के शव को टुकड़े-टुकड़े करके पानी की टंकी में डाल दिया गया था। इस काम में निमिषा की सहकर्मी और यमन की ही नागरिक हनान ने मदद की थी।

जानकारी के मुताबिक, निमिषा की माँ महदी के परिजनों से उसकी बेटी को माफ करने की अपील करना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि अपनी बेटी को बचाने का फिलहाल यही एक तरीका है कि वह ब्लड मनी दे। इससे पहले 13 नवंबर को यमन के सुप्रीम कोर्ट ने फाँसी की सजा के खिलाफ निमिषा की याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद अब यमन के राष्ट्रपति के पास दया याचिका पड़ी है।

निमिषा शादीशुदा हैं। केरल के पलक्कड़ की रहने वाली निमिषा अपने पति और बेटी के साथ पिछले लगभग एक दशक से यमन में काम कर रही थीं। इस बीच यमन में गृहयुद्ध शुरु हो गया तो उनका परिवार भारत आ गया था। हालाँकि, यमनी नागरिक द्वारा पासपोर्ट ले लेने के कारण निमिषा वापस नहीं लौट पाईं।

निमिषा प्रिया पर यमनी व्यक्ति की हत्या का आरोप

निमिषा प्रिया पर आरोप लगे थे कि उन्होंने साल 2017 में एक यमनी नागरिक तलाल अब्दो महदी को ड्रग्स का ओवरडोज दे दिया था, जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई। वहीं, निमिषा ने अपने बचाव में कहा था कि मृतक ने उनका पासपोर्ट छीन लिया था, जिसे वो वापस पाना चाहती थी। निमिषा ने दावा किया था कि उन्होंने महदी को बेहोशी की दवा दी थी। उसकी हत्या करने का इरादा नहीं था।

दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका में दावा किया गया महदी नर्स निमिषा को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित करता था। इसको लेकर निमिषा ने पुलिस में शिकायत की। जेल से छुटने के बाद महदी ने निमिषा का पासपोर्ट अपने पास रख लिया। उसे पाने के लिए ही उसने महदी को बेहोशी का इंजेक्शन दिया, लेकिन उसकी मौत हो गई।

इस मामले में निमिषा प्रिया को मौत की सजा सुनाई गई थी। जानकारी के मुताबिक, 16 नवंबर 2023 को केंद्र के वकील ने उच्च न्यायालय को सूचित किया कि हाल ही में जारी अधिसूचना के तहत यमन के लिए यात्रा प्रतिबंध में ढील दी जा सकती है। इससे भारतीय नागरिकों को विशिष्ट कारणों और सीमित अवधि के लिए देश की यात्रा करने की अनुमति मिल सकती है।

क्या है ब्लड मनी

ब्लड मनी इस्लामी देशों में प्रचलित एक प्रथा है, जिसमें हत्या करने वाले व्यक्ति या उसके परिवार या रिश्तेदार को मृतक परिवार को क्षतिपूर्ति देकर झगड़े को खत्म किया जाता है। क्षतिपूर्ति की राशि पीड़ित परिवार के माँग पर निर्भर करती है। हालाँकि, दोनों परिवार इसके लिए नेगोशिएट कर सकते हैं। यह प्रथा कई और कबायली समूहों में भी पाई जाती है।

ब्लड मनी का उपयोग अक्सर हत्या, घायल होने या अन्य प्रकार के नुकसान के लिए भी किया जाता है। यमन में ब्लड मनी एक आम प्रथा है। यमन के कानून के तहत हत्या के लिए मृत्युदंड का प्रावधान है, लेकिन अगर पीड़ित परिवार आरोपित परिवार से ब्लड मनी का लेने पर सहमत हो जाता है तो मौत की सजा को कम किया जा सकता है या रद्द किया जा सकता है।

निमिषा प्रिया के मामले में उनके परिवार का मानना है कि ब्लड मनी का भुगतान करके उन्हें मौत की सजा से बचाया जा सकता है। हालाँकि, ब्लड मनी का भुगतान करना हमेशा संभव नहीं होता है और यह हमेशा पीड़ित परिवार द्वारा स्वीकार नहीं किया जाता है। कई बार पीड़ित परिवार इतनी राशि माँग लेता है कि आरोपित परिवार के लिए देना संभव नहीं होता है।

ब्लड मनी की प्रथा के कई समर्थक हैं, जो तर्क देते हैं कि यह पीड़ित परिवारों को क्षतिपूर्ति प्रदान करने और अपराध को कम करने का एक तरीका है। हालाँकि, इस प्रथा के कई विरोधी भी हैं, जो तर्क देते हैं कि यह न्याय का एक रूप नहीं है और यह अपराधियों को दंड से बचने की अनुमति देता है।