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चीन सीमा के पास PM मोदी ने मनाई दिवाली, सुरक्षा बलों का बढ़ाया हौसला: हिमाचल प्रदेश के लेप्चा में बोले – इनके त्याग और प्रतिबद्धता से हम सुरक्षित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार 10वीं बार देश के जवानों के साथ दिवाली मनाने के लिए पहुँचे। इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिमाचल प्रदेश के लेप्चा में भारतीय सेना और सुरक्षा बलों के जवानों के साथ दिवाली का त्योहार मना रहे हैं। पीएम मोदी को इस दौरान सुरक्षा बलों के ही यूनिफॉर्म में देखा गया। उन्होंने सैनिकों के साथ बातचीत की। बता दें कि लेप्चा झरना लाहौल-स्पीति जिले में है, जो 13,835 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यहाँ की परिस्थितियाँ कठिन हैं।

एक तरह से ये एक ठंडा रेगिस्तान है। सर्दियों के दौरान पारा माइनस 20 डिग्री सेल्सियस तक भी पहुँच जाता है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से बताया कि वो बहादुर जवानों के साथ दिवाली मनाने के लिए लेप्चा पहुँचे हैं। पीएम मोदी ने इस दौरान वहाँ की स्थिति का भी निरीक्षण किया। 2014 में देश की सत्ता में आने के साथ ही पीएम मोदी अलग-अलग स्थानों पर देश के बहादुर जवानों की हौसलाअफजाई करने के लिए उनके साथ ही दिवाली की खुशियाँ साझा करते आए हैं।

उन्होंने 2014 में सियाचिन, 2015 में अमृतसर, 2016 में लाहौल-स्पीति, 2017 में गुरेज, 2018 में चमोली, 2019 में राजौरी, 2020 में जैसलमेर, 2021 में नौशेरा, 2022 में कारगिल और अब 2023 में लेप्चा में दिवाली मनाई है। पीएम मोदी ने कहा कि लेप्चा में हमारे वीर जवानों के साथ दिवाली मनाना गर्व और गहरी भावनाओं से भरा अनुभव साबित हुआ। उन्होंने कहा कि अपने परिवार से दूर रहने वाले ये रक्षक अपनी प्रतिबद्धता से हमारे जीवन में प्रकाश भरते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “हमारे सुरक्षा बलों का साहस अटल है। अपने परिवार से दूर वो कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में तैनात हैं। उनके त्याग और प्रतिबद्धता हमें सुरक्षित और आश्वस्त रखती है। भारत इन नायकों के प्रति हमेशा कृतज्ञ रहेगा, जो वीरता और संघर्ष की प्रतिमूर्ति हैं।” लेप्चा चीन सीमा के पास है, ऐसे में वहाँ ITBP (इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस) भी तैनात हैं। हिमाचल प्रदेश की 260 किलोमीटर की सीमा चीन से लगती है।

AMU में काम करती है ISIS के ‘अमीर’ की सास: CAA विरोधी प्रदर्शनों में शामिल था Ph.D कर चुका वजीउद्दीन, M.Tech कर छात्रों को पढ़ाता था राकिब

उत्तर प्रदेश पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) 11 नवंबर 2023 (शनिवार) को अलीगढ़ ISIS मॉड्यूल से जुड़े 4 आतंकियों को पकड़ा है। महज नवंबर माह में ही अब तक इस मॉड्यूल के 7 लोग पकड़े जा चुके हैं। इनके नाम अब्दुल्ला अर्शलान, माज़ बिन तारिक, वाजीहुद्दीन, राकिब इमाम अंसारी, नावेद सिद्दीकी, मोहम्मद नोमान और मोहम्मद नाज़िम हैं। ये आतंकी सोशल मीडिया के अच्छे जानकार थे। कुछ अभी AMU से पढ़ाई कर रहे थे तो कुछ पढ़ कर नौकरी और धंधों में लग गए थे। इनमें से एक की सास अलिगढ़ मेडिकल कॉलेज में नर्स भी है।

AMU में स्टाफ नर्स है वज़ीउद्दीन की सास

अब तक पकड़े गए सभी आतंकियों में सबसे बड़ा नाम वजीहुद्दीन है। वजीहुद्दीन को अलीगढ़ ISIS मॉड्यूल में ‘अमीर’ का पद मिला हुआ था। वह मूलतः छत्तीसगढ़ के दुर्ग का रहने वाला है। लगभग 10 साल पहले वजीहुद्दीन दुर्ग से अलीगढ़ आया था। वह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में सामाजिक विज्ञान विषय से शोध (PHD) का छात्र था। ऑपइंडिया को मिली जानकारी के मुताबिक थोड़े समय के बाद वजीहुद्दीन AMU के कट्टरपंथी तत्वों के सम्पर्क में आ गया। वह SAMU नाम के संगठन से जुड़ गया।

ऑपइंडिया को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक वो समय साल 2010 का हुआ करता था। तब हारिश फारुखी नाम का एक कट्टरपंथी अलीगढ़ में आतंकी नेटवर्क खड़ा करने के प्रयास में था। हारिश फारुखी को तब उसके गुट में ‘अमीर’ की पदवी मिला करती थी। वजीहुद्दीन एक अच्छा उपदेशक था जिसने काफी कम समय में SAMU में अपना ऊँचा मुकाम बना डाला। धीरे-धीरे वजीहुद्दीन न सिर्फ देश बल्कि अन्य मजहब विरोधी बयानबाजी करने लगा। बाद में वजीहुद्दीन CAA-NRC के विरोध में हुए हिंसक प्रदर्शनों में शामिल हुआ।

वजीहुद्दीन ने अलीगढ़ में ही निकाह कर लिया। उसकी सास अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में तैनात एक नर्स है। बताया जाता है कि वो वजीहुद्दीन के मज़हबी विचारों से काफी प्रभावित थी। वजीहुद्दीन के 2 साले हैं जिसमें एक अभी कक्षा 12 में पढ़ने वाला नाबालिग है जबकि दूसरा अक्सर बीमार रहता है। गिरफ्तारी से लगभग 3 माह पहले तक वजीहुद्दीन अपनी ही सास के घर रहा था। ATS ने वजीहुद्दीन की सास की घर की भी तलाशी ली है। गिरफ्तारी के समय वजीहुद्दीन की बीवी दुर्ग जिले में थी।

वजीहुद्दीन और अब्दुल्ला अर्शलान मिल कर SAMU का यूट्यूब चैनल चलाते थे। इस चैनल पर खुद वजीहुद्दीन ने अपनी तमाम तकरीरें डाल रखीं हैं। बताया जा रहा है कि अपने साथियों की गिरफ्तारी की सूचना पर वजीहुद्दीन ने भागने का अलग तरीका खोजा था। वह सीधे अलीगढ़ से ट्रेन न पकड़ कर पहले मथुरा गया। वहाँ से उसने दुर्ग की ट्रेन पकड़ी थी। हालाँकि आखिरकार उसे ATS ने दुर्ग से दबोच ही लिया।

M.Tech करने के बाद भी राकिब बना आतंकी

वहीं एक आतंकी राकिब ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में मैकेनिकल इंजीनियरिंग से M.Tech किया है। यह कोर्स साल 2020 में पूरा हुआ था। इसके बाद राकिब छात्रों को पढ़ाने लगा। बताया गया है कि राकिब उस इस्लामिक मिशन स्कूल अलीगढ़ में टीचर के तौर पर पढ़ाया भी है। यह वही स्कूल है जहाँ कभी एक अभिभावक ने राष्ट्रगान न होने और हिंदी बोलने पर बच्ची को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। राकिब ने अपनी लिंक्डइन प्रोफ़ाइल में खुद को अवन्ति लर्निंग सेंटर में JEE/NEET का फैकेल्टी बताया है।

राकिब मूलतः उत्तर प्रदेश के भदोही जिले का रहने वाला है। ऑपइंडिया ने स्कूल के बोर्ड पर लिखे गए नंबरों पर कई कॉल की। हालाँकि फोन किसी के द्वारा नहीं उठाया गया। स्कूल का पक्ष आने पर उसे खबर में अपडेट किया जाएगा।

मछली कारोबारी नोमान

11 नवंबर को राकिब के साथ गिरफ्तार हुआ नोमान सिद्दीकी मूलतः सम्भल जिले का रहने वाला है। उसका उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर में मछली पालन का पुश्तैनी कारोबार है।

होती थीं हिन्दू विरोधी तकरीरें

ऑपइंडिया को मिले एक वीडियो में SAMU से जुड़े अबू बक्र फाज़िली को किसी इंसान के नहीं बल्कि खुदा के ही शासन को स्वीकार करने का ऐलान करते हुए सुना जा सकता है। साल 2015 में यह तकरीर AMU के कैनेडी ऑडिटोरियम में दी गई थी। इस तकरीर में इस्लामी हुकूमत की राह आने वालों को कुचल देने का ऐलान किया गया था। इसके अलावा कई अन्य वीडियो में हिन्दू धर्म पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की गई हैं। इन वीडियो में वजीउद्दीन को भी मंचों पर देखा जा सकता है।

कई आतंकी अभी फरार

अलीगढ़ ISIS मॉड्यूल के कई आतंकी अभी भी फरार हैं जिनकी तलाश में ATS लगी हुई है। इन हारिश फारुखी, रिज़वान, अब्दुल समद मलिक और फैज़ान बख्तियार आदि प्रमुख हैं। हारिश फारुखी का परिवार उत्तराखंड के देहरादून में रहता है। अब्दुल समद मलिक मूलतः संभल और फैज़ान बख्तियार प्रयागराज जिले का रहने वाला है। पकड़े गए आतंकियों से पूछताछ के आधार पर ATS फरार संदिग्धों की गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी हुई है।

बीच पूजा से शंकराचार्य को उठाया, DMK वालों ने जश्न मनाया… दिवाली की आधी रात जब हिन्दू संत के साथ हुआ आतंकियों से भी बदतर व्यवहार, मंदिर पर लहराया था काला झंडा

दिवाली प्रकाश का पर्व है, इस दिन माँ लक्ष्मी की पूजा की जाती है और हिन्दू आतिशबाजी कर के और दीपक जला कर ख़ुशी मनाते हैं। व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए इसके बाद नया साल शुरू हो जाता है। बाजारों में चहल-पहल होती है, अरबों रुपए का कारोबार होता है। हाँ, कुछ सेलेब्रिटीज ज़रूर ‘ज्ञान’ देने आ जाते हैं और हिन्दू त्योहार को बदनाम करते हैं। इन सबके बीच हमें ये भी याद रखना चाहिए कि वो दिवाली का ही मौका था जब शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती को गिरफ्तार किया गया था।

चलिए, फिर से उस प्रकरण को याद करते हैं क्योंकि 2014 के पहले भारत में हिन्दुओं की जो दुर्दशा थी उसके जिम्मेदार लोगों को कभी माफ़ नहीं किया जा सकता। हर पीढ़ी को उनके बारे में बताने की ज़रूरत है। जगद्गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित 4 मठों में से एक है तमिलनाडु का कांची कामकोटि पीठ। जयेन्द्र सरस्वती वहाँ के मुख्य महंत हुआ करते थे। दिवाली की आधी रात को एक अनुष्ठान के दौरान उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। ऐसा लग रहा था जैसे भारत में मुग़ल शासन चल रहा हो।

याद रखिए, ये वही भारत है जहाँ कश्मीर को अपनी बपौती मानने वाले शेख अब्दुल्ला को नज़रबंद भी किया जाता था तो आलीशान कोठियों में। जब अंग्रेजों का शासन था तो महात्मा गाँधी के लिए भव्य आगा खाँ पैलेस को ही जेल बना दिया गया। उसी देश में एक हिन्दू संत को बीच पूजा से गिरफ्तार करवा लिया जाता है, चोर-उचक्कों की तरह पुलिस की गाड़ी से ले जाया जाता है और रात भर न्यायालय में खुले में बिठा कर रखा जाता है – ये हिन्दुओं से घृणा करने वाले सत्ताधीशों के घमंड नहीं तो और क्या सूचित करता है।

दिवाली पर शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती की गिरफ़्तारी

तेलंगाना (तब आंध्र प्रदेश) स्थित महबूबनगर से जयेन्द्र सरस्वती को तमिलनाडु पुलिस ने गिरफ्तार किया था। मामला कुछ यूँ था कि 2004 में चेन्नई के पास स्थित कांचीपुरम के वरदराजस्वामी मंदिर में 3 सितंबर को वहाँ के मैनेजर ए शंकररमण की हत्या कर दी गई थी। तमिलनाडु पुलिस ने शंकराचार्य को ही इसका मुख्य आरोपित बना दिया। ये हत्याकांड मंदिर परिसर में ही हुआ था। उस समय तमिलनाडु में AIADMK की सरकार थी। खुद मुख्यमंत्री जयललिता ने शंकराचार्य की गिरफ़्तारी का आदेश दिया था।

उन्हें गिरफ्तार करने की AIADMK सरकार को इतनी जल्दी थी कि राज्य के तत्कालीन एडिशनल डायरेक्टर-जनरल ऑफ पुलिस KVS मूर्ति को हेलीकॉप्टर से आंध्र प्रदेश भेजा गया। इसके अलावा एक अन्य सरकारी एयरक्राफ्ट भी वहाँ उतरा। तत्कालीन आंध्र प्रदेश की पुलिस को इस संबंध में बताया गया और हैदराबाद से 90 किलोमीटर दूर स्थित महबूबनगर वो सभी गाड़ी से पहुँचे। रात के 11:25 बजे इस गिरफ़्तारी की कार्रवाई को अंजाम दिया गया।

एक्स टेक्सटाइल मिल के गेस्ट हाउस में घुस कर शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती को हिरासत में लिया गया था। उन्हें गाड़ी से हैदराबाद लाया गया और वहाँ से हवाई मार्ग से चेन्नई ले जाया गया। 12 नवंबर, 2004 को सुबह 6 बजे कांचीपुरम के जुडिशल मजिस्ट्रेट उत्तमराजन ने उन्हें 15 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजना का फैसला सुनाया। फिर उन्हें वेल्लोर स्थित केंद्रीय कारगर में ले जाकर बंद कर दिया गया। भारत के इतिहास में किसी दुर्दांत आतंकी के लिए इतनी जल्दबाजी से ऐसी कार्रवाई शायद ही कभी देखने को मिली हो।

14 नवंबर को कांची मठ के वकीलों त्यागराजन और चेलप्पा को जेल में महंत से मिलने की अनुमति दी गई। शंकराचार्य ने बताया कि उन्हें इस मामले में फँसाया गया है और उनके बचाव के लिए सारे कानूनी कदम उठाए जाएँ। उनके खिलाफ IPC की धारा-302 (हत्या), 201 (अपराध की जानकारी छिपाना, सबूत मिटाना), 205 (मुकदमे की कार्यवाही में झूठी पहचान दिखाना), 213 (रिश्वत लेकर आरोपितों को छिपाना), 34 (समान मंशा से कई लोगों द्वारा किसी अपराध को अंजाम देना) और 120B (आपराधिक धमकी) के तहत मामले दर्ज किए गए थे।

मद्रास हाईकोर्ट में दायर की गई जमानत याचिका में शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती ने खुद को निर्दोष बताया। पुलिस ने मठ द्वारा हत्यारों को रुपए दिए जाने का दावा कोर्ट में किया। कहा गया कि शंकररमण ने शंकराचार्य के खिलाफ कई आरोप लगाए थे, इसीलिए उनकी हत्या करा दी गई। जयेन्द्र सरस्वती द्वारा हत्यारों को फोन कॉल किए जाने का दावा भी किया गया। पुलिस मामला साबित होने से पहले ही उन्हें अपराधी बताने लगी। शंकराचार्य की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता राम जेठमलानी ने पुलिस के दावों की धज्जियाँ उड़ा दी थीं।

मद्रास हाईकोर्ट को उन्होंने बताया कि इस मामले में गिरफ़्तारी के लिए सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों तक का पालन नहीं किया गया। एक 70 वर्षीय बुजुर्ग, जो डायबिटीज और ब्लड प्रेशर के मरीज हैं, उन्हें रात के समय गिरफ्तार किया गया। 14 नवंबर तक इस मामले में 17 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका था। इनमें वो 5 लोग भी शामिल थे जिन्होंने हत्या की बात कबूलते हुए आत्मसमर्पण किया था, लेकिन पुलिस ने कहा कि उनकी कोई संलिप्तता है ही नहीं।

बड़ी बात ये है कि एक बुजुर्ग हिन्दू संत को इस तरह से गिरफ्तार किए जाने का तमिलनाडु के सभी राजनीतिक दलों ने स्वागत किया। वामपंथी दल तो एकदम प्रफुल्लित थे। सिर्फ एक भाजपा ही थी जो इस बर्बरता के विरोध में खड़ी थी। DMK नेता करूणानिधि, जो उस समय विपक्ष में थे, उन्होंने इसे एक ईमानदार कार्रवाई बताते हुए इसकी प्रशंसा की। नागालैंड के वर्तमान राज्यपाल, जो उस समय तमिलनाडु में भाजपा के नेता थे, उन्होंने सवाल उठाया कि जब जयेन्द्र सरस्वती के कहीं भागने की कोई आशंका थी ही नहीं, फिर जल्दबाजी में राजनीतिक दबाव में ये गिरफ़्तारी क्यों अंजाम दी गई?

भाजपा के दिग्गज नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील केंद्र की UPA सरकार से की और उन्हें पूजा के लिए सामग्रियाँ व व्यवस्थाएँ उपलब्ध कराने की वकालत की। सोचिए, कांचीपुरम का मठ बंद हो गया था, जिस कमरे में आचार्य दर्शन देते थे वो बंद हो गया, कामकोटि अम्मा मंदिर पर काला झंडा लहरा रहा था और मठ के सभी कर्मचारी उस दिन काली पट्टी पहन कर काम करने आए, उस समय DMK क्या कर रही थी?

द्रविड़ पार्टियों ने एक हिन्दू संत की प्रताड़ना का मनाया था जश्न

आज उदयनिधि स्टालिन सनातन धर्म को डेंगू-मलेरिया बताते हुए इसे खत्म करने की बातें करते हैं, वो यूँ ही नहीं है। उनकी पार्टी ने हिन्दू विरोधी राजनीति कर के और ब्राह्मणों के खिलाफ घृणा का माहौल बना कर अपने लिए एक ऐसे वोट बैंक को तैयार किया है जो हिन्दुओं की पीड़ा को देख कर ताली बजाता है। उस समय भी यही हुआ था। DMK के कार्यकर्ता पटाखे उड़ा रहे थे, जश्न मना रहे थे, गाने बजा कर नाच-गान में लगे हुए थे। आज ये विपक्षी दल प्रेस की स्वतंत्रता की बातें करते हैं, लेकिन शंकराचार्य की गिरफ़्तारी के समय तमिलनाडु पुलिस ने मीडियाकर्मियों से भी धक्का-मुक्की की थी।

शंकराचार्य ने अपने साथ हो रहे इस व्यवहार से क्षुब्ध होकर पुलिस से पूछा था, “क्या मैं वीरप्पन हूँ?” वीरप्पन उस समय का कुछकिता चंदन तस्कर था जिसका खौफ दक्षिण भारत के कई राज्यों में था और जिसे उस साल 19 अक्टूबर को ही एक एनकाउंटर में मार गिराया गया था। खास बात ये है कि सहिष्णु, बेनवॉश्ड और कायर बना दिए गए हिन्दुओं ने शंकराचार्य की गिरफ़्तारी के बाद हिन्दुओं ने उस तरह का कोई आंदोलन भी खड़ा नहीं किया।

जबकि ये वो समय था जब दिल्ली में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान कुरान की प्रति जलाए जाने के अफवाह मात्र से कर्नाटक, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में इस्लामी भीड़ ने सड़क पर उतर कर हिंसा की थी। ‘न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ पर पैगंबर मुहम्मद के अपमान का आरोप लगाते हुए इसके बेंगलुरु स्थित दफ्तर पर हमला कर दिया गया था और संपादक को माफ़ी माँगने के लिए मजबूर कर दिया था। जबकि भारत के मीडिया संस्थानों ने कोर्ट के फैसले से पहले ही शंकराचार्य को अपराधी बता कर उनके खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की थीं, लेकिन उनका कुछ नहीं बिगड़ा।

पिछड़ों के कल्याण के लिए प्रयासरत थे शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती

जबकि जयेन्द्र सरस्वती के बारे में माना जाता है कि वो एक समाजसेवी भी थे जिन्होंने कांची मठ को कर्मकांड के अलावा जन-कल्याण से भी जोड़ा। कई शिक्षा संस्थान स्थापित किए, अस्पताल बनवाए, वेद दर्शन के प्रचार के लिए भारत भ्रमण किया और उत्तर-पूर्वी में गुवाहाटी में जनसेवा संस्थान स्थापित कर भारत की आध्यात्मिक और भौगोलिक एकता को पुष्ट किया। क्या उनकी गिरफ़्तारी इसीलिए की गई क्योंकि आध्यात्मिक चेतना के संचार का काम कर रहे जयेन्द्र सरस्वती से वामपंथी ताकतों, मिशनरियों और इस्लामी कट्टरपंथियों को खतरा था?

शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती को पूरे एक दशक तक प्रताड़ित किया गया। अंततः 2013 में पुडुचेरी की अदालत ने उन्हें दोषमुक्त करार दिया। मीडिया ट्रायल और भारत में हिन्दू विरोधियों की सत्ता होने के कारण उन्हें काफी कुछ भुगतना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट को अंदाज़ा था कि इस मामले में ‘खेला’ किया गया है, तभी इस मामले को पुडुचेरी ट्रांसफर किया गया था। 27 फरवरी, 2018 को उनका निधन हो गया। हिन्दू धर्म के प्रसार और सामाजिक कार्यों के कारण उनकी तुलना रामानुजन से भी हुई।

दलितों के लिए शिक्षा-स्वास्थ्य सुविधाएँ स्थापित करने के लिए उन्होंने जीवन पर्यन्त प्रयास किया। जातिगत भेदभाव के लिए उनके मन या मठ में कोई जगह नहीं थी। वो एक ऐसे संत थे जिन्होंने धारावी की गरीब बस्तियों में भी घुस कर जन-कल्याण के कार्य किए थे। देश की कई दलित बस्तियों में वो घूमे। कई हिन्दू मंदिरों के जीर्णोद्धार में उन्होंने बड़ी भूमिका निभाई। 18 जुलाई, 1935 को जन्मे जयेन्द्र सरस्वती को 1994 में उनके गुरु चंद्रशेखर सरस्वती स्वमिगल के निधन के बाद मठ का दायित्व सौंपा गया था।

मथुरा पुलिस ने एनकाउंटर में फारुख को मार गिराया : मोहसिन के साथ कारोबारी के घर की थी लूटपाट, पत्नी के सिर पर हथौड़ा मार कर दी थी हत्या

उत्तर प्रदेश के मथुरा में पुलिस ने फारुख नाम के एक अपराधी को एनकाउंटर में मार गिराया है। फारुख ने अपने एक और साथी मोहसिन के साथ मिलकर 4 नवम्बर 2023 को मथुरा के ही मुकुट कारोबारी कृष्ण कुमार अग्रवाल की पत्नी की हत्या कर दी थी और उनके सर पर हथौड़े से वार करके घायल कर दिया था।

जानकारी के अनुसार, घटना का दूसरा आरोपित मोहसिन कृष्ण कुमार अग्रवाल का ड्राइवर था। फारुख ने इसी के साथ मिलकर गुरुकृपा विलास में स्थित उनके घर में डकैती की योजना बनाई और 4 नवम्बर को उनके घर में घुस गए।

इस दौरान फारुख ने हथौड़े वार करके कृष्ण कुमार की पत्नी कल्पना अग्रवाल को मार दिया और कृष्ण कुमार पर भी हमले किए। हालाँकि, उनकी जान बच गई और अभी उनका इलाज दिल्ली के अपोलो अस्पताल में चल रहा है। फारुख और मोहसिन ने कृष्ण कुमार के घर से उनकी इनोवा गाड़ी, बड़ी मात्रा में आभूषण और नकद रुपए लूट लिए थे।

जब घटना की जानकारी सुबह लोगों को हुई पुलिस ने अपनी जाँच चालू की। पुलिस ने इस मामले के खुलासे के लिए आठ टीमों को लगाया था। घटना के बाद आसपास के सीसीटीवी की जाँच से सामने आया कि मोहसिन ही घटना की रात घर आया था।

मोहसिन को जब पुलिस ने पकड़ कर पूछताछ की तो उसने पूरी घटना की सच्चाई बता दी। मोहसिन ने बताया कि उसने अपने पड़ोसी फारुख के साथ मिलकर इस डकैती की योजना बनाई थी। वह घटना के बाद कृष्ण कुमार की इनोवा लेकर भी भाग गया था।

कल रात (11 नवम्बर 2023) की रात को पुलिस को यह सूचना मिली कि गोवर्धन रोड पर फारुख को देखा गया है। चेकिंग के दौरान फारुख ने पुलिस की टीम पर फायर कर दिया। पुलिस ने भी फारुख पर जवाबी कार्रवाई में फायर किया जिसमें उसको गोली लगी। मथुरा पुलिस के इस एनकाउंटर में फारुख की मौत हो गई।

फारुख के पास से इनोवा गाड़ी और ₹21.88 लाख नकद और हीरे-सोने के गहने भी बरामद हुए है। उसके पास से बन्दूक और कारतूसें भी बरामद हुई हैं। फारुख पर ₹50,000 का ईनाम घोषित किया गया था।

जानिए क्यों ‘गब्बर सिंह’ ने ‘शोले’ के बाद सलीम-जावेद के साथ कभी नहीं किया काम, अमजद खान को फिल्म से हटाने के लिए दोनों ने रची थी साजिश?

‘गब्बर सिंह’ भारतीय फिल्म जगत का कालजयी पात्र है। साल 1975 में आई फिल्म शोले के इस पात्र से शायद ही ऐसा कोई होगा, जो वाकिफ नहीं होगा। इस पात्र को पर्दे पर जीवंत किया था, मंझे हुए अदाकार अमजद खान। गब्बर सिंह के पात्र की सफलता ने अमजद खान को रातों-रात प्रसिद्धी दिला दी थी। हालाँकि, इस फिल्म के बाद इसके संवाद लेखक सलीम-जावेद के साथ उन्होंने फिर कभी काम नहीं किया।

इस फिल्म में कुख्यात डकैत का किरदार निभा रहे अमजद खान को बेहद क्रूर दिखाया गया है। उनके नाम का इस्तेमाल रोने वाले बच्चों को चुप कराने के लिए माएँ अकसर करती हैं। गब्बर सिंह के डायलॉग भी खूब प्रसिद्ध हुए हैं। ‘अरे ओ सांबा… कितने आदमी थे’, ‘जो डर गया सो मर गया’ जैसे डायलॉग आज भी लोगों की जुबान पर हैं। हालाँकि, इस किरदार के विपरीत वास्तविक जिंदगी में अमजद खान बेहद नरम दिल इंसान थे।

जिस दिन फिल्म शोले को अमजद खान ने साइन किया था, 1973 में उसी दिन उनके बड़े बेटे शादाब खान का जन्म हुआ था। सलीम-जावेद की सलाह पर फिल्म के निर्देशक रमेश सिप्पी ने उन्हें गब्बर सिंह का किरदार ऑफर किया था। ये वो दौर था, जब उनका परिवार भी बढ़ चुका था और उनके पिता जयंत का कैंसर का ईलाज चल रहा था। अमजद खान के लिए ये मुश्किल भरा दौर था।

फिल्म की जब शूटिंग शुरू हुई तो अमजद खान स्थापित अभिनेताओं के बीच नर्वस हो जाते। इस छाप उनकी किरदार पर भी साफ झलकती है। फिल्म की शूटिंग के पहली शेड्यूल में अमजद खान एक भी शॉट नहीं दे पाए। फिल्म के अन्य कलाकारों को लगता था कि अमजद खान अपने किरदार के साथ न्याय नहीं कर पाएँगे। सलीम-जावेद को चिंता होने लगी कि अब इसका दोष उन पर मढ़ा जाएगा।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, आखिरकार सलीम-जावेद ने निर्देशक रमेश सिप्पी से संपर्क किया और कहा, “अगर आप अमजद से संतुष्ट नहीं हैं तो उन्हें बदल दीजिए।” हालाँकि, निर्देशक रमेश सिप्पी ने अमजद खान के साथ ही फिल्म को जारी रखने का निर्णय लिया। फिल्म जब रिलीज हुई तो इसने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। हालाँकि, बाद में अमजद और सलीम-जावेद के बीच मनमुटाव हो गया।

अमजद खान को जब रमेश सिप्पी से उनको लेकर सलीम-जावेद द्वारा की गई बातचीत के बारे में पता चला तो उन्हें गलतफहमी हो गई। इस गलतफहमी को और मजबूत बनाने में अफवाहों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। उन्हें लगा कि जिन लोगों ने उन्हें फिल्म दिलवाई, उन्होंने ही उन्हें फिल्म से हटाने की कोशिश भी की। इसके बाद उन्होंने सलीम-जावेद के साथ फिर कभी साथ काम नहीं किया।

बॉलीवुड इंडस्ट्री में दूसरों के मददगार के रूप में अपनी विशेष पहचान रखने वाले अमजद खान अब इस दुनिया में नहीं हैं। साल 1992 में कार्डियक अरेस्ट से उनका देहांत हो गया। उस समय उनकी उम्र सिर्फ 48 साल थी। हालाँकि, इस छोटी सी उम्र में भी उन्होंने इंडस्ट्री के स्थापित लोगों को भी पीछे छोड़ दिया था। आज यानी 12 नवंबर को अमजद खान की बर्थ एनावर्सरी है।

मक्सिदुल इस्लाम और मुशीदा खातून ने 10 दिन की मासूम को गला घोंटकर मार डाला, प्लास्टिक बैग में पैक कर नदी किनारे फेंका: केरल की घटना

महज 10 दिन की मासूम का दमघोट कर हत्या के मामले में केरल पुलिस ने असम से दो लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों की पहचान मक्सिदुल इस्लाम (Maksidul Islam) और मुशीदा खातून के रूप में हुई है। दोनों ने बच्ची को गला दबाकर मार दिया था और उसके बाद से ही फरार थे।

मनोरमा की रिपोर्ट्स के मुताबिक, लगभग 10 दिन की बच्ची का शव 8 अक्टूबर, 2023  को मुदिक्कल में एक नदी के पास एक निर्जन स्थान पर एक प्लास्टिक बैग से बरामद किया गया था। वहीं अब केरल की पेरुंबवूर पुलिस ने बेटी की हत्या करने और शव को केरल के मुदिक्कल में नदी के पास फेंकने के आरोप में असम से लिव-इन पार्टनर्स को गिरफ्तार किया।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले आरोपित दम्पति ने मासूम बच्ची की गला दबाकर हत्या कर दी क्योंकि वे माता-पिता बनने के लिए तैयार नहीं थे। इतना ही नहीं बच्ची की बेरहमी से गला घोट कर हत्या करने के बाद, उन्होंने शव को प्लास्टिक की थैली में पैक कर दिया और नदी के पास खली जगह पर लावारिश रूप में फेंक दिया।

वहीं इस मामले का पता लगाते हुए पुलिस इलाके में हाल ही में गर्भवती हुई महिलाओं की तलाश करते हुए असम के इस परिवार तक पहुँची। जो एक प्लाइवुड फैक्ट्री में काम करते थे। लेकिन पुलिस मुशीदा को पकड़ने में असफल रही क्योंकि वह अपराध के तुरंत बाद मक्सिदुल के साथ असम भाग गई थी। 

वहीं पुलिस ने इस मामले में जाँच तेज कर दोनों को ढूँढ निकाला। पेरुंबवूर पुलिस के मुताबिक, गर्भधारण को लेकर आपस में झगड़ने के बाद पुरुष और महिला ने अपने बच्चे की हत्या की साजिश रची थी। वहीं गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब आगे की कार्रवाई कर रही है। 

अलीगढ़ ISIS मॉड्यूल के 4 और आतंकी गिरफ्तार, 3 पहले से पुलिस के शिकंजे में: भारत में जिहाद के लिए खड़ी की जा रही थी टीम, चालू थी ट्रेनिंग

उत्तर प्रदेश पुलिस की आतंकवाद निरोधक शाखा (ATS) ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन ISIS से जुड़े 4 अन्य आतंकियों को गिरफ्तार किया है। इनके नाम राकिब इमाम अंसारी, नावेद अंसारी, मोहम्मद नोमान और मोहम्मद नाज़िम हैं। ये सभी मुस्लिम युवाओं को इस्लामिक स्टेट से जोड़ने की कोशिश कर रहे थे। इसके अलावा चारों आरोपित अन्य युवाओं को जिहाद के लिए मानसिक और शारीरिक ट्रेनिंग भी देते थे। पुलिस ने इस गिरफ्तारी की पुष्टि शनिवार (11 नवम्बर 2023) को की है।

मिली जानकारी के मुताबिक ATS को पूर्व में गिरफ्तार अब्दुल्ला अर्शलान, तारिक और वाज़ीउद्दीन से पूछताछ में अहम सुराग मिले थे। इन सुरागों के आधार पर 10-11 नवम्बर की रात को ATS ने अलीगढ़, संभल और आसपास के कुछ जिलों में दबिश दी थी। यह दबिश ISIS के अलीगढ़ मॉड्यूल से जुड़े आतंकियों की तलाश में दी गई थी। इस दौरान लगभग आधे दर्जन संदिग्ध उठाए गए थे। इनसे हुई पूछताछ में आखिरकार राकिब, नावेद, नोमान और नाज़िम को आधिकारिक तौर पर गिरफ्तार किया गया।

पुलिस के मुताबिक पकड़े गए आतंकी ISIS आतंकी अपनी सोच के अन्य लोगों को जिहादी साहित्य बाँटते थे। ये सभी अलीगढ़ और आसपास ISIS का मॉड्यूल खड़ा करना चाहते थे। इन आतंकियों ने गुपचुप तौर पर खुद से जुड़े लोगों को आतंकवाद की ट्रेनिंग भी देनी शुरू कर दी थी। यह ट्रेनिंग सोशल प्लेटफार्म पर ऑनलाइन के साथ कुछ ख़ुफ़िया ठिकानों पर शारीरिक तौर भी होती थी। इन सभी का मकसद भारत में जिहाद के लिए टीम खड़ी करना था। साथ ही ATS कुछ अन्य संदिग्धों से भी पूछताछ कर रही है।

आतंकियों के पास से जेहादी साहित्य बरामद हुए हैं। इन सभी के मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए गए हैं जिसकी फॉरेंसिक जाँच करवाई जा रही है।

बताते चलें कि नवम्बर 2023 महीने में ही ATS अलीगढ़ ISIS मॉड्यूल के अब तक 7 आतंकी गिरफ्तार कर चुकी है। ये सभी उत्तर प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ आदि प्रदेशों के रहने वाले हैं।

जीशान, जावेद, दाऊद… ED ने वक्फ बोर्ड घोटाले में AAP विधायक के 3 करीबियों को गिरफ्तार किया, अमानतुल्लाह खान के ठिकानों से मिला था हथियार-कैश

दिल्ली वक्फ बोर्ड में भर्ती में अनियमितता को लेकर राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान समेत 10 अन्‍य आरोपितों पर फैसला सुना दिया है। मामले में जाँच एजेंसी ईडी ने तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। तीनों के नाम जिशान हैदर, जावेद इमाम, दाऊद नसीर हैं। अदालत ने तीनो को 14 दिनों की हिरासत में भेज दिया है, जहाँ जाँच एजेंसी इनसे पूछताछ करेगी। ये सभी आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान के करीबी बताए जा रहे हैं।

बता दें कि अमानतुल्ला खान दिल्ली वक्फ बोर्ड में चेयरमैन हैं। वहीं वफ्फ बोर्ड मामला से जुड़े भ्रष्ट्राचार मामले में जाँच एजेंसी ED अमानतुल्लाह खान के खिलाफ भी केस दर्ज कर चुकी है। इससे पहले  ED ने 10 अक्टूबर, 2023 को दिल्ली के पाँच ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया था। इस मामले में ED ने अमानतुल्ला खान के घर पर भी छापा मारा था। ED ने ये कार्रवाई दिल्ली एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) की तरफ से दाखिल दो FIR के तहत की थी। ये FIR दिल्ली वक्फ बोर्ड में नौकरियों में अनियमितताओं से जुड़ी है। 

AAP नेता अमानतुल्लाह खान पर 32 लोगों की अवैध नियुक्ति का आरोप

आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्ला खान ने दिल्ली वक्फ बोर्ड के चेयरमैन के रूप में 32 लोगों को अवैध रूप से भर्ती किया था। इसके साथ ही आप विधायक ने अवैध रूप से दिल्ली वक्फ बोर्ड की कई संपत्तियों को किराए पर दिया है। साथ ही अमानतुल्लाह खान पर ये भी आरोप लगाया गया है कि उन्होंने दिल्ली वक्फ बोर्ड के धन का दुरुपयोग किया है। इस मामले में दिल्ली वक्फ बोर्ड के तत्कालीन सीईओ ने इस तरह की अवैध भर्ती के खिलाफ बयान जारी किया था।

अमानतुल्लाह के करीबियों के ठिकानों पर मिला था कैश 

गौरतलब है कि वक्फ बोर्ड में भ्रष्टाचार और अनियमितता के मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने सबसे पहले सितंबर, 2022 में अमानतुल्लाह से पूछताछ की थी। इसी के आधार पर ACB ने चार जगहों पर छापे मारे। करीब 24 लाख रुपए कैश बरामद किया था।

इसके अलावा इस छापेमारी में दो अवैध और बिना लाइसेंस की पिस्टल मिली थीं। कारतूस और गोला-बारूद भी बरामद किया था। बाद में अमानतुल्लाह को इस मामले में गिरफ्तार भी किया गया था। यह गिरफ्तारी आप विधायक के खिलाफ सुबूतों और आपत्तिजनक सामग्री के आधार पर की गई थी।

इसमें कहा गया था कि सीबीआई की एक प्राथमिकी और दिल्ली पुलिस की तीन शिकायतें आप विधायक अमानतुल्लाह खान के खिलाफ ईडी की कार्रवाई का आधार बनीं। खान ने उक्त आपराधिक गतिविधियों से अपराध की बड़ी रकम नकदी में अर्जित की थी और इस नकद राशि को अपने सहयोगियों के नाम पर दिल्ली में विभिन्न अचल संपत्तियों की खरीद में निवेश किया था। हालाँकि, बाद में उन्हें उन्हें 28 दिसंबर 2022 को जमानत पर रिहा कर दिया गया।

बर्खास्त किया गया 4 साल की बच्ची से बलात्कार करने वाला राजस्थान का दरोगा, लगाया गया पॉक्सो और SC-ST एक्ट: गहलोत सरकार में थम नहीं रहा अपराध

राजस्थान के दौसा जिले में चार साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म करने वाले दारोगा को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसे पुलिस सेवा से भी बर्खास्त कर दिया गया है। आरोपित उप-निरीक्षक भूपेंद्र की बर्खास्तगी का आदेश राजस्थान के पुलिस महानिदेशक उमेश मिश्रा ने दिया है। आरोपित के खिलाफ POCSO और ST-SC में मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस के अनुसार, भूपेंद्र ने शुक्रवार (10 नवंबर 2023) को बच्ची को बहला-फुसलाकर अपने कमरे में ले गया और वहाँ उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना की जानकारी सामने आने के बाद लोगों में आक्रोश फैल गया और उसे उसी दिन हिरासत में लिया गया। भाजपा ने इस घटना को सिर्फ राजस्थान के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए कलंक बताया था।

इस घटना को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार पर सवाल खड़े किए थे। वसुंधरा ने इस घटना को लेकर सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा था कि कॉन्ग्रेस ने राजस्थान को जो कुशासन दिया है, उसी का नतीजा है कि बेटियों से दरिंदगी की घटनाएँ थमने का नाम नहीं ले रही हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, एसपी वन्दिता राणा ने विधानसभा चुनाव को देखते हुए सब इंस्पेक्टर भूपेंद्र को राहुवास थाने में ड्यूटी के लिए भेजा था। वहाँ आरोपित एक दूसरे पुलिसकर्मी के किराए के कमरे में रह रहा था। कहा जा रहा है कि जब बच्ची वहाँ खेलने के लिए आई तो उसने बच्ची को बहला-फुसलाकर कमरे में ले गया और उसके साथ दरिंदगी की।

घटना की जानकारी बच्ची के परिजनों को हुई तो पूरे राहुवास क्षेत्र में हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ एकत्रित हो गई। लोगों ने आरोपित सब-इंस्पेक्टर पर कार्रवाई के लिए थाने पहुँचकर घेराव किया। ग्रामीणों ने आरोपित को गिरफ्तार करने और राहुवास थाने के पूरी स्टाफ को हटाने की माँग करते हुए नारेबाजी करने लगे। 

दिवाली-छठ की छुट्टियाँ, फिर भी बिहार में खुले रहेंगे स्कूल: हिन्दू त्योहारों पर जारी किया गया फरमान, पटना के DM बोले – पटाखे न उड़ाएँ

जहाँ एक तरफ पूरे देश में दिवाली की छुट्टियाँ हैं और ख़ुशी का माहौल है, वहीं बिहार की राजधानी पटना में दिवाली के दौरान भी स्कूलों को खुला रखने का फरमान जारी हुआ है। खास बात ये है कि छठ, जो बिहार का सबसे बड़ा पर्व है और जिसे लोक आस्था का महापर्व कहा जाता है – उस दौरान भी ये स्कूल खुले रहेंगे। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सरकार ईद-बकरीद जैसे मौकों पर भी इस तरह के फरमान जारी कर सकती है? अगर ऐसा हो तो कितना ज़्यादा विरोध होगा?

पटना के DM चंद्रशेखर सिंह ने आदेश दिया है कि स्कूल खुले रखे जाएँ। सभी सरकारी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को पत्र लिख कर कहा गया है कि 11 नवंबर से 21 नवंबर तक सभी नव नियुक्त शिक्षकों का इन विद्यालयों में पदस्थापन किया जाना है। वहीं 13 नवंबर से लेकर 21 नवंबर तक छठ की छुट्टियों की घोषणा की गई थी। इसके बावजूद इन स्कूलों को नव नियुक्त शिक्षकों की पदस्थापना के लिए खुला रखने का आदेश जारी किया गया है।

प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिया गया है कि वो इस दौरान स्कूलों में खुद मौजूद रहें और प्रक्रिया को पूरा कराएँ। नए शिक्षकों का योगदान प्रधानाध्यापक द्वारा ही स्वीकृत किया जाता है। प्रिंसिपलों को कहा गया है कि ज़रूरत पड़ने पर वो अपने किसी सहयोगी शिक्षक की सहायता ले सकते हैं। पहले जाँच की जाएगी कि क्या ये शिक्षक वही हैं जिन्होंने BPSC की परीक्षा पास की थी, जिनकी काउंसिलिंग हुई, जिन्हें औपबंधिक पत्र दिया गया।

पटना के जिला पदाधिकारी ने एक वीडियो जारी कर के दिवाली पर पटाखा ने उड़ाने की भी अपील की है। उन्होंने कहा है कि लोगों को ग्रीन दिवाली मनानी चाहिए। वहीं दिवाली-छठ के दौरान ही नए शिक्षकों का स्कूलों में प्रशिक्षण भी होगा। कक्षा संचालन, मध्याह्न भोजन योजना और पाठ्यक्रम को लेकर उन्हें जानकारी दी जाएगी। इनमें प्रखंड स्तर के अधिकारी भी शामिल रहेंगे। सुबह साढ़े 9 से साढ़े 12 तक और दोपहर डेढ़ बजे से 4 बजे तक प्रशिक्षण चलेगा। नए शिक्षकों को किसी संघ का हिस्सा न बनने की सलाह भी दी गई है।