Home Blog Page 1397

पटाखे जलाने पर मोहम्मद वली ने चाकू घोंप कर हिन्दू युवक को मार डाला: सरकारी जमीन पर कर रखा है अवैध कब्जा, हिन्दू संगठनों में आक्रोश

हाल ही में गुजरात के मोरबी में पटाखे जलाने को लेकर हुए झगड़े के बाद मोहम्मद वली जाम नाम के एक मुस्लिम व्यक्ति ने एक हिंदू युवक की हत्या कर दी। इस हत्या से मोरबी क्षेत्र में स्थानीय हिंदू समुदाय और संगठनों में भी काफी आक्रोश है।

बहुत ही मामूली बात पर एक व्यक्ति की हत्या करने के मामले में अब हिंदू संगठनों ने कलेक्टर के यहाँ याचिका पेश कर आरोपितों को कड़ी सजा देने की माँग की है। साथ ही इस याचिका में माँग की गई है कि आरोपितों को सरकारी जमीन पर कब्जा करने और अवैध रूप से निर्माण करने के लिए दंडित किया जाए। 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आरोपित व्यक्ति की पहचान मोहम्मद वली जाम के रूप में हुई है और मृतक व्यक्ति की पहचान राजेश गडवी के रूप में हुई है। प्राप्त जानकारी के आधार पर, 7 नवंबर, 2023 को मोरबी के लाभनगर इलाके का निवासी मुहम्मद वली जाम एक हिंदू परिवार के घर के बाहर पटाखे जला रहा था। मोहम्मद वली लाखा गढ़वी के घर के बाहर पटाखे फोड़ रहा था, लेकिन उसकी पत्नी ने उसे मना किया क्योंकि उसकी तबीयत ठीक नहीं थी।

तभी पटाखों के तेज़ शोर के कारण मोहम्मद और लाखा गडवी में बहस होने लगी। जब पास के निवासी राजेश गढ़वी बीच-बहस में समझौते की पेशकश करने के लिए आगे आए, तो मोहम्मद वली और अधिक आक्रामक हो गया। 

इतना ही नहीं मोहम्मद वली ने अपना चाकू निकालकर राजेश गढ़वी के सीने में घोंप दिया। इसके बाद, गंभीर हालत में गढ़वी को शुरू में मोरबी के नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। लेकिन स्थिति अधिक गंभीर होने के कारण, ऑन-कॉल डॉक्टरों ने राजेश को आगे के इलाज के लिए राजकोट भेज दिया। हालाँकि, राजकोट पहुँचने के बाद भी राजेश की हालत में सुधार नहीं हुआ और अंततः, इलाज के दौरान ही उनका निधन हो गया।

हालाँकि इस मामले में हत्या के बाद ही पुलिस ने घटना का संज्ञान लिया और राजेश गढ़वी की हत्या के आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही, घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने आगे किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए लाभनगर में कुछ सुरक्षा कर्मचारियों को तैनात किया। वहीं घटना से नाराज स्थानीय हिंदू सदस्यों ने इस बीच कलेक्टर से मुलाकात कर याचिका दी जिसमें आरोपितों के खिलाफ GUJCTOC (गुजरात आतंकवाद और संगठित अपराध नियंत्रण) के तहत सख्त सजा की माँग की गई।

आरोपित के खिलाफ पहले से ही कई आपराधिक मामले दर्ज 

बता दें कि इस मामले में विस्तृत जानकारी पाने के लिए ऑपइंडिया ने स्थानीय हिंदू संगठन के प्रमुख सदस्य कमलेश अहीर से संपर्क किया। उन्होंने ऑपइंडिया को बताया, “आरोपित गंभीर आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहा है। इलाके के स्थानीय लोगों में उसकी छवि एक झगड़ालू व्यक्ति के रूप में है और लोग उससे डरते हैं। उसके खिलाफ पहले भी मारपीट समेत कई अन्य आपराधिक मामले दर्ज हो चुके हैं। समाज के लिए खतरा जैसी मानसिकता वाले व्यक्ति के खिलाफ GUJCTOC के तहत कार्रवाई करने के लिए हिंदू संगठनों ने जिला कलेक्टर को एक याचिका दी है। इसके अलावा कमलेश अहीर ने यह भी कहा कि इससे पहले आरोपितों ने एक हिंदू मंदिर पर भी हमला किया था। 

सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा 

मामले के बारे में और अधिक जानकारी देते हुए कमलेश ने ऑपइंडिया को बताया कि आरोपितों ने समाकंठा क्षेत्र में सरकारी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया था। हिंदू युवा वाहिनी और बजरंग दल जैसे संगठनों ने इस मुद्दे को लेकर कलेक्टर को शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने इस शिकायत में दावा किया है कि आरोपित सरकारी जमीन पर अवैध रूप से रह रहा है। इसके अतिरिक्त, उसने सार्वजनिक संपत्ति पर अवैध रूप से कई इमारतें बनाई हैं। हम निर्णायक कार्रवाई चाहते हैं।”

कमलेश अहीर का दावा है कि आरोपितों के खिलाफ पहले भी कई शिकायत किए गए हैं, लेकिन इन प्रयासों को नजरअंदाज कर दिया गया। कमलेश के मुताबिक, अगर आरोपित को उसके पिछले अपराधों के लिए कड़ी सजा मिली होती तो आज राजेश की हत्या नहीं होती। ऑपइंडिया के पास उन दोनों याचिकाओं की प्रतियाँ हैं जो हिंदू संगठनों ने दायर की हैं।

यह लेख मूल रूप से क्रुणाल सिंह राजपूत द्वारा गुजराती में लिखा गया था। मूल लेख का लिंक यहाँ है।

जिस डॉक्टर को सुरक्षाकर्मियों ने पीटा, उसके घर पहुँच कुमार विश्वास ने मनाई दिवाली: भेंट की भगवान श्रीराम की प्रतिमा, माफ़ी माँग दूर किए गिले-शिकवे

कवि कुमार विश्वास की सुरक्षा में तैनात जवानों और डॉक्टर पल्लव वाजपेयी के बीच मारपीट का मामला सामने आया था। जिसमें कुमार विश्वास के सुरक्षकर्मियों पर डॉ पल्लव की पिटाई का आरोप लगा था। वहीं दीपावली पर कुमार विश्वास डॉक्टर पल्लव बाजपेयी के घर पहुँचकर उन्हें दिवाली की बधाई दी, उनसे माफी माँगी। इसके साथ ही कुमार विश्वास ने डॉक्टर के घर पर ही दीपावली मनाई। 

रिपोर्ट के अनुसार, कुमार विश्वास डॉ. पल्लव वाजपेयी से मिलने रविवार (12 नवंबर, 2023) की शाम गाजियाबाद उनके घर गए वहाँ उन्होंने भगवान राम की मूर्ति भेंटकर डॉक्टर के परिजनों से मुलाकात कर माफ़ी माँगी एवं दिवाली की बधाई दी।

कुमार विश्वास ने डॉक्टर से मिलकर उन्हें गले लगा लिया, साथ ही अपने सभी गले-शिकवे मिटाकर रिश्तों को रोशनी से भरने का प्रयास किया। इसके बाद दोनों पक्षों में मेल मिलाप के साथ ही इस मामले में सुलह होने की बात सामने आई है। 

बता दें कि सुरक्षाकर्मियों द्वारा माँ-पिटाई के विवाद में दोनों तरफ से मुकदमा दर्ज हुआ था। वहीं इस मामले को सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कुमार विश्वास ने माफी माँग ली थी। जबकि डॉक्टर की पिटाई के इस मामले में कुमार विश्वास मामले में सीधे तौर पर आरोपित नहीं थे।

दरअसल, विवाद उनके सुरक्षाकर्मियों और डॉक्टर पल्लव वाजपेयी के बीच हुआ था। इस मामले में जहाँ शुरू में कुमार विश्वास ने जहाँ डॉक्टर के काफिले में घुस आने का आरोप लगाया था वहीं डॉक्टर पल्लव का एक वीडियो सामने आया तह जिसमें उनके नाक से खून बह रहा था। वहीं डॉक्टर ने अपनी शिकायत में कहा था कि  9 नवंबर, 2023 की शाम को उनके कार को रोककर कुमार विश्वास के सुरक्षाकर्मियों ने उनकी पिटाई की थी।

गौरतलब है कि मशहूर कवि डॉक्टर कुमार विश्वास ने 9 नवंबर, 2023 की शाम को सोशल मीडिया एक पर पोस्ट किया था कि उनके सुरक्षाकर्मियों की कार को एक कार ने आगे-पीछे से धक्का मार दिया। जब सुरक्षाकर्मी उतरकर उससे बात करने लगे तो कार चालक ने सुरक्षाकर्मियों की पिटाई कर दी। इस मामले में कुमार विश्वास ने आरोप लगाया है कि दूसरी कार में सवार व्यक्ति ने यूपी पुलिस के सिपाही और केंद्रीय सुरक्षाकर्मियों पर हमला कर दिया।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर घटना की जानकारी दी थी। वहीं कुमार विश्वास के आरोप के थोड़ी ही देर बाद डॉक्टर पल्लव वाजपेयी ने भी दावा किया था कि कुमार विश्वास के सुरक्षाकर्मियों ने उनके साथ मारपीट की है। डॉक्टर पल्लव का कहना था कि वह वैशाली के आरोग्य अस्पताल से विजयनगर के निजी अस्पताल में आपात स्थिति के लिए जा रहे थे तभी कुमार विश्वास के सुरक्षकर्मियों ने उनकी पिटाई कर दी।

जिसके बाद दोनों पक्षों ने एक दूसरे के खिलाफ हमला करने की पुलिस से शिकायत की थी। हालाँकि, पुलिस ने इस मामले की जाँच की तो पुलिस ने भी यही कहा था कि कुमार विश्वास के काफिले पर हमले का कोई सुबूत नहीं मिला है। हालाँकि, घटना के अगले दिन कुमार विश्वास के सुरक्षा में व्यस्था में लगे CRPF के कमांडो को बदल दिया गया था। 

‘4 लाख वर्षों से अयोध्या आ रहे श्रद्धालु’: जहाँगीर के समय ही अंग्रेज यात्री ने लिख दिया पर वामपंथियों ने छिपाया – ‘यहाँ हुआ था रामचंद्र का जन्म, दुनिया का तमाशा देखने के लिए अवतार’

अयोध्या में राम मंदिर का सपना साकार हो रहा है और 22 जनवरी, 2023 को उद्घाटन के साथ ही हिन्दुओं के 500 वर्षों के संघर्ष का परिणाम उनके समक्ष भव्य स्वरूप में उपस्थित होगा। इस संघर्ष के पीछे कई हिन्दुओं का बलिदान है, जिन्होंने इस्लामी आक्रांताओं, अंग्रेजों और फिर सेक्युलर सत्ताधीशों के सामने सीना ठोक कर अपने अधिकार की लड़ाई लड़ी। आज उन बलिदानों को याद करने का समय है, लेकिन फिर से ये याद करने का भी समय है कि कैसे एक मंदिर को मस्जिद में परिवर्तित करने के लिए इस्लामी आक्रांताओं ने पूरा इतिहास ही अपने हिसाब से बदल डाला।

उनके जाने के बाद वामपंथी इतिहासकारों ने इसका बीड़ा उठाया और ये साबित करने की कोशिश की कि अयोध्या में कभी राम मंदिर था ही नहीं। ऐसे वामपंथी इतिहासकारों को सुप्रीम कोर्ट तक की फटकार मिली। आज फिर से समय है इतिहास को देखने का, जो हमें भूलना नहीं है। आइए, चलते हैं 17वीं शताब्दी में जानते हैं कि कैसे अयोध्या सदियों से भगवान श्रीराम की भूमि रही है। वामपंथी इतिहासकार तो रामायण और रामचरितमानस तक को नहीं मानते, लेकिन अंग्रेजों के लिखे पर वो क्या कहेंगे?

अगस्त 1608 में विलियम फिंच नाम का एक यात्री भारत आया था। सूरत में वो कैप्टन हॉकिंस के साथ पहुँचा था। बड़ी बात ये है कि वो जब 1608-11 में अयोध्या पहुँचा तो उसने लिखा है कि कैसे यहाँ के लोग भगवान श्रीराम की पूजा करते हैं और प्राचीन काल से ही ये नगर उनसे जुड़ा हुआ है। बता दें कि सर विलियन हॉकिंस ‘ईस्ट इंडिया कंपनी’ के प्रतिनिधि थे। 24 अगस्त, 1608 को जो अंग्रेजों का पहला जहाज सूरत में उतरा था, उसका नाम ‘हेक्टर’ था और विलियम हॉकिंस ही उसके कैप्टन थे।

विलियम हॉकिंग्स ने ही तत्कालीन बादशाह जहाँगीर को पत्र लिख कर भारत में फैक्ट्री स्थापित करने की अनुमति माँगी थी। वो अपने साथ इंग्लैंड के तत्कालीन राजा जेम्स प्रथम का एक पत्र जहाँगीर के लिए लेकर आए थे। उन्हीं के साथ आए विलियम फिंच ने आगरा और अन्य शहरों में रह कर यहाँ की रीति-रिवाज को समझा और मुगलों के काम करने की प्रक्रिया को जाना। उस समय भारत में पुर्तगाली अक्सर कारोबार करते थे और इंग्लैंग को उनके विरोध का सामना करना पड़ा।

खम्भात के सूबेदार से विलियम फिंच ने अनुमति ले ली कि वो अपना माल सूरत में उतार सकता है। बाद में उसके बीमार पड़ने के कारण ही विलियम हॉकिंस को अकेले मुग़ल दरबार में जाना पड़ा था। अंग्रेजों को कपड़ों का व्यापार करने की अनुमति मिली थी। विलियम हॉकिंस को तुर्की भाषा आती थी और इस कारण मुगलों से बातचीत में उन्हें कोई समस्या नहीं हुई। हालाँकि, तब जहाँगीर के करीबी मुक़र्रब खान (जो बाद में कन्वर्ट होकर रोमन कैथोलिक बन गया था) ने ने पुर्तगालियों के इशारे पर अंग्रेजों के काम में अड़ंगा लगाया।

हालाँकि, जहाँगीर को विलियम हॉकिंग्स काफी पसंद आए थे और उसने उन्हें अपने दरबार में रहने का ऑफर दिया। उनके लिए न सिर्फ मासिक वेतन तय किया गया, बल्कि 400 घोड़े भी उनके कमांड में आए गए। हालाँकि, हॉकिंस को मनपसंद अनुमति नहीं मिली और उन्हें वापस जाना पड़ा। हालाँकि, बाद में अंग्रेजों की नौसेना ने लाल सागर में भारत का कारोबार रोका और फिर मुगलों के साथ उनकी डील हुई। फिर सन् 1615 में सर थॉमस रो जहाँगीर के साथ तोहफे लेकर अजमेर पहुँचे।

ये तो थी अंग्रेजों के सूरत और जहाँगीर के दरबार में पहुँचने की कहानी। अब बात करते हैं कि विलियम फिंच ने अयोध्या के बारे में क्या लिखा था, “अयोध्या यहाँ 50 ईसापूर्व से स्थित है। ये एक प्राचीन नगर है। ये एक पवित्र राजा का स्थल है। हालाँकि, अभी इसके अवशेष ही बचे हैं। यहाँ 400 वर्ष पूर्व बने रामचंद्र के महलों और घरों के खँडहर अभी तक हैं। भारतीय उन्हें भगवान मानते हैं, जिन्होंने दुनिया का तमाशा देखने के लिए शरीर धारण किया था।”

विलियम फिंच आगे लिखता है कि वहाँ कई ब्राह्मण रहते हैं, जिनके पास वहाँ आने वाले श्रद्धालुओं के नाम-पता की सूची दर्ज है। उसने ये जिक्र भी किया है कि पवित्र सरयू नदी में स्नान करने के लिए वहाँ हिन्दू आते हैं। वो लिखता है कि कैसे हिन्दू बताते हैं कि इस पवित्र स्नान की प्रक्रिया 4 लाख वर्षों से चली आ रही है। उसने नदी से 2 कोस की दूरी पर स्थित गुफाओं का जिक्र भी किया है, जो काफी संकरी हैं और माना जाता है कि वहाँ भगवान श्रीराम के शरीर का भस्म भूमि को समर्पित किया गया था।

बाबरी ढाँचा तो आपको याद होगा? इसे कारसेवकों ने 1992 में ध्वस्त कर दिया, लेकिन इस ढाँचे की तस्वीर आपने देखी होगी। उस ज़माने की अधिकतर संरचनाएँ आर्किटेक्चर के मामले में समृद्ध होती थी। लेकिन, बाबरी ढाँचा को देख कर ऐसा लगता था जैसे बाबर के सेनापति मेरे बाक़ी ने आनन-फानन में इसे बनवा दिया होगा, क्योंकि इसका प्रारूप बड़ा ही बेकार नज़र आता था। राम मंदिर को ध्वस्त कर उसके ही मलबों से इसे तैयार कर दिया गया।

बग़दाद में विलियम फिंच का संक्रामक पानी पीने के कारण मौत हो गई थी। विलियम फिंच तो छोड़िए, यहाँ तक कि आइन-ए-अकबरी में भी भगवान विष्णु के 10 अवतारों का जिक्र है और इसमें भी लिखा है कि श्रीराम का जन्म अयोध्या में हुआ था। विलियन फिंच ने श्रद्धालुओं की सूची और उनका विवरण रखने वाले ब्राह्मणों का जिक्र किया है। इन्हें हम पंडा कहते हैं। पंडा बड़े धार्मिक स्थलों पर होते ही होते हैं। आज भी आप देवघर चले जाइए, वहाँ पंडों के पास सारे डिटेल्स होंगे आपके पूर्वजों के अगर वो वहाँ जाते रहे होंगे। ये सिर्फ एक उदाहरण है।

‘अर्ली ट्रेवल्स टू इंडिया 1583-1619’ नामक पुस्तक में विलियन फिंच का लिखा हुआ दर्ज है। राम मंदिर के वकील CS वैद्यनाथन ने भी सुप्रीम कोर्ट में इसका जिक्र किया था। इस पुस्तक को इतिहासकार विलियम फोस्टर ने लिखा था। विलियम फिंच के बारे में बता दें कि अंग्रेजी में कश्मीर के बारे में लिखने वाले पहले यात्रियों में उसका नाम आता है। पंजाब, पूर्वी तुर्किस्तान और पश्चिमी चीन को जोड़ने वाले व्यापारिक रूट के बारे में भी उसने लिखा था।

उसने काले बारूद की तरह दिखने वाले चावलों का भी जिक्र किया है। विलियम फिंच ने लिखा है कि देश के अलग-अलग हिस्सों से यहाँ आने वाले श्रद्धालु अपने साथ ऐसे चावल के कुछ दाने प्रसाद के रूप में लेकर जाते हैं। उनका मानना है कि ये हमेशा से चलता आ रहा है। उसने रामचंद्र के खँडहरों में बड़ी मात्रा में सोना होने का दावा भी किया है। उसने ये भी लिखा है कि व्यापारिक दृष्टिकोण से भी अयोध्या समृद्ध है। साफ़ है, ये कारोबार का भी बड़ा स्थल था।

बकौल विलियम फिंच, अयोध्या में घोड़े के सींग बहुतायत में मिलते थे और उनका इस्तेमाल कर के ढाल बनाई जाती थी। साथ ही तरह-तरह के पीने के प्याले बनाने में भी उनका इस्तेमाल किया जाता था। उसने कुछ भारतीयों के हवाले से लिखा है कि इनमें से कुछ सींग काफी दुर्लभ हैं, यहाँ तक कि आभूषणों की तुलना भी उनसे नहीं हो सकती। इसका अर्थ है कि अयोध्या एक महत्वपूर्ण जगह हुआ करती थी, आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए भी और आर्थिक गतिविधियों के लिए भी।

पढ़ें विलियम फिंच ने अयोध्या के बारे में क्या लिखा था

इन सबके बावजूद 500 से भी अधिक वर्षों तक हिन्दुओं को अपने आराध्य देव के जगह पर अपना अधिकार साबित करने के लिए लड़ना पड़ा, बलिदान देना पड़ा और दूसरे पक्ष की क्रूरता का सामना भी करना पड़ा। आज हमें दिवाली पर जगमगाती अयोध्या देखनी है, खुश होना है, लेकिन इसके पीछे का बलिदान और इसका इतिहास नहीं भूलना है। वामपंथी इतिहासकारों को अब जब तथ्यों के साथ जवाब दिया जा रहा है और वो झूठे साबित हो रहे हैं, हमें भी तथ्यों से लैस रहना है।

भजन-कीर्तन में घुस मुस्लिम भीड़ ने महिलाओं-बच्चों को लाठी-डंडों से पीटा, पुजारी को भी मारा: ‘लैंड जिहाद’ से समाधि को हड़पने की साजिश, पिछले साल प्रसाद को मारी थी लात

महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में पूजा करने गए हिन्दू श्रद्धालुओं पर हमला होने की खबर है। इस हमले में मंदिर के पुजारी सहित कुछ महिलाओं को चोटें आई हैं। हमले का आरोप राजू शेख, रज्जाक, सत्तार, नासिर और इब्राहिम के साथ इनके लगभग 40 साथियों पर लगा है। घटना के कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। पीड़ित हिन्दू पक्ष ने पुलिस में तहरीर दी है जिस पर केस दर्ज कर के जाँच की जा रही है। घटना सोमवार (13 नवम्बर, 2023) की है। ऑपइंडिया से बात करते हुए पीड़ित पक्ष ने इस घटना को ‘लैंड जिहाद’ की साजिश करार दिया है।

एक स्थानीय पत्रकार बाबूलाल राठौर ने ऑपइंडिया को बताया कि घटना अहमदनगर राहुरी तालुका की है। यहाँ के गुहा गाँव में एक प्राचीन धर्मस्थल है। हिन्दू पक्ष इसे संत कनिफनाथ महाराज की समाधि बताता है। इसी गाँव और आसपास के मुस्लिम इसे वक्फ बोर्ड द्वारा रिजर्व मुस्लिमों की जमीन बताते हुए पीर की दरगाह होने का दावा करते हैं। हिन्दू पक्ष का आरोप है कि लगभग 1 साल पहले मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने संत कनिफनाथ की समाधि पर डाली गई भगवा चादर को हटा दिया और उसके बदले हरे रंग की चादर बिछा दी।

तब से इस स्थान को ले कर तनाव बना रहता है। हालाँकि, हिन्दू पक्ष ने अपना दावा नहीं छोड़ा। सोमवार (13 नवंबर, 2023) को अमावस्या होने की वजह से हिन्दू पक्ष ने अपनी पारम्परिक प्रथा बताते हुए इस स्थान पर कीर्तन-भजन और भंडारे का आयोजन किया था। इस आयोजन में महिलाओं और बच्चों की अच्छी-खासी तादाद थी। आरोप है कि सुबह 8:30 से 9:00 के बीच में लगभग 40 की संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग प्रार्थना स्थल में घुस गए। इस भीड़ का नेतृत्व राजू दगु शेख, रज़्ज़ाक दगु शेख, सत्तार बशीर शेख, नासिर फतू शेख और इब्राहिम इस्माइल शेख कर रहे थे।

इन सभी ने बिना कुछ बताए कीर्तन-भजन कर रहे लोगों पर हमला बोल दिया। हमलावरों के पास लाठी-डंडे होने का भी दावा किया जा रहा है। इस हमले में महिलाओं और बच्चों के साथ पुजारी शंकर किशन माज़रे की भी पिटाई की गई। अचानक हुई इस घटना में कुछ श्रद्धालु घायल भी हो गए हैं। पुलिस इन सभी का मेडिकल करवा रही है। इस मारपीट का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में भगवा वस्त्र में पुजारी को पीटती भीड़ ‘मार इसको मार’ चिल्लाती सुनाई दे रही है। एक अन्य वीडियो में महिलाओं को चीखते सुना जा सकता है।

मामले की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची। पुलिस को देख कर हमलावर भाग खड़े हुए। घटना की जानकारी आसपास और हिन्दू समाज के लोगों को हुई तो उन्होंने हमलावरों पर कड़ी कार्रवाई की माँग शुरू कर दी। सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारी राहुरी पुलिस थाने में जमा हो गए। पुलिस ने दी गई शिकायत पर केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। अभी तक किसी भी गिरफ्तारी की जानकारी नहीं है। पुलिस का कहना है कि आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। गाँव में फिलहाल शांति है।

मंदिर से जुड़ी जमीन हथियाने की साजिश

ऑपइंडिया ने थाने पर मौजूद हिन्दू संगठन के एक कार्यकर्ता ऋषिकेश से बात की। ऋषिकेश ने हमें बताया कि संत कनिफनाथ समाधि मंदिर लगभग 400 साल पुराना है जो लम्बे समय से हिन्दू आस्था का केंद्र रहा है। उनका दावा है कि महज 10 साल पहले ही मुस्लिमों ने इसे रमजानी शाह की दरगाह बताना शुरू किया था। मुस्लिम पक्ष के इस दावे को ऋषिकेश बांगरे ने समाधि स्थल की लगभग 40 बीघा जमीन को हथियाने की साजिश बता रहे हैं।

बकौल ऋषिकेश, पिछले साल जनवरी 2022 में भी मुस्लिमों ने मंदिर के भंडारे वाले प्रसाद को पैर से मार कर माहौल को साम्प्रदायिक रूप से तनावपूर्ण कर दिया था। ऋषिकेश ने हमें आगे बताया कि मंदिर में पुजारी शंकर किशन माजरे पिछले कई वर्षों से पूजा-पाठ करते आ रहे हैं। वो गुहा गाँव के ही रहने वाले हैं। ऋषिकेश का यह भी दावा है कि 10 साल पहले मुस्लिमों ने इस पर अपना दावा ठोका और हर साल वो अपने विवाद को बड़ा रूप देते जा रहे हैं।

पटाखे जलाने पर 581 FIR! चेन्नई पुलिस ने दिवाली पर धड़ाधड़ दर्ज किए मामले, सनातन को खत्म करने की बात कह चुके हैं DMK के मंत्री उदयनिधि स्टालिन

चेन्नई पुलिस ने तयशुदा घंटों के अतिरिक्त पटाखे जलाने पर 581 FIR दर्ज की हैं। चेन्नई पुलिस ने सुबह 6-7 बजे और शाम को 7-8 बजे के बीच पटाखे जलाने को कहा था लेकिन आरोप है कि कई लोगों ने इस समय के अलावा भी पटाखे जलाए जिसके कारण यह मामले दर्ज किए गए। राज्य के मंत्री और सीएम स्टालिन के बेटे उदयनिधि ने सनातन धर्म को डेंगू-मलेरिया बता कर इसे खत्म करने की बात की थी और तमाम विरोधों के बावजूद अभी तक वो अपने इस बयान पर कायम हैं।

तमिलनाडु की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी कि लोगों को दीपावली के दिन मात्र 2 घंटे पटाखे जलाने की अनुमति दी जाए। इसी के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि पटाखे जलाने का समय यही होगा।

चेन्नई पुलिस द्वारा जारी किए गए बयान में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर पटाखों से जुड़े हुए कुल 581 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से 554 मामले समय सीमा के बाहर पटाखे जलाने, 19 मामले ज्यादा आवाज वाले पटाखे जलाने और 8 मामले पटाखे बेचने को लेकर दर्ज किए गए हैं।

जहाँ तमिलनाडु से पटाखे जलाने पर लोगों के खिलाफ मामले दर्ज करने की खबरें सामने आई हैं वहीं उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से ऐसा कुछ सुनने को नहीं मिला है। तमिलनाडु पुलिस के इस कदम पर उनकी अब सोशल मीडिया पर आलोचना भी हो रही है।

एक वेबसाइट के अनुसार, चेन्नई पुलिस ने पटाखे जलाने वालों को पकड़ने के लिए ‘स्पेशल यूनिट’ का गठन किया था। हर पुलिस थाने में एक सब इंस्पेक्टर और दो कॉन्स्टेबल को इसमें शामिल किया गया था और यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी कि वो पटाखे जलाने वालों को पकड़ें।

सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवम्बर को एक बड़ा फैसला सुनाते हुए पूरे देश में बेरियम पटाखों पर बैन लगा दिया था। यह आदेश सिर्फ दिल्ली-एनसीआर तक सीमित ना होकर पूरे देश पर लागू किया गय था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पटाखों से होने वाला प्रदूषण गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। 

महुआ मोइत्रा को TMC ने दी नई जिम्मेदारी, बनाया जिलाध्यक्ष: कैश-तोहफे लेकर संसद में सवाल पूछने का है आरोप, सांसदी जाने की भी अटकलें

रुपए व उपहार लेकर संसद में प्रश्न पूछने के मामले में घिरीं लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा को तृणमूल कॉन्ग्रेस ने नई जिम्मेदारी दी है। TMC ने सांसद महुआ मोइत्रा को सोमवार (13 नवंबर, 2023 ) को कृष्णानगर (नादिया उत्तर) का पार्टी जिला अध्यक्ष नियुक्त किया है। कहीं न कहीं यह जिम्मेदारी देकर मुख्यमंत्री व तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने परोक्ष रूप से संकेत दे दिया है कि पार्टी महुआ मोइत्रा के साथ खड़ी हैं।

दरअसल, TMC ने सोमवार को राज्य के विभिन्न जिलों में संगठनात्मक बदलाव की सूची प्रकाशित की। और इसी लिस्ट में सांसद महुआ मोइत्रा को कृष्णानगर संगठनात्मक जिले का अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं चोपड़ा के विधायक रुकबानुर रहमान को भी अध्यक्ष बनाया गया है। 

इस नियुक्ति पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए महुआ मोइत्रा ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को धन्यवाद देते हुए कहा कि वह कृष्णानगर के लोगों के लिए हमेशा पार्टी के साथ काम करती रहेंगी।

बता दें कि यह ऐसे समय में हुआ है जब लोकसभा आचार समिति ने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की शिकायत के बाद महुआ मोइत्रा को निष्कासित करने की माँग की है कि उन्होंने उद्योगपति गौतम अडानी के खिलाफ सवाल पूछने के लिए व्यवसायी दर्शन हीरानंदानी से रिश्वत ली थी, जिससे विवाद पैदा हो गया था।

क्यों विवादों में हैं सांसद महुआ मोइत्रा

बता दें कि महुआ मोइत्रा संसद में रुपए और उपहार लेकर सवाल पूछने के आरोप में विवादों में घिरी हैं। जब संसद में ‘रिश्वत के बदले सवाल’ को लेकर हंगामा चल रहा है तो तृणमूल महुआ के साथ है इसे लेकर कोई सीधा बयान नहीं दिया गया था, बल्कि महुआ के मुद्दे को पार्टी ने उनकी अपनी ‘अपनी’ लड़ाई बताया था।

ऐसे में विपक्ष के कई लोग सवाल उठा रहे थे कि आखिर पार्टी महुआ के साथ क्यों नहीं खड़ी है? वहीं अब पार्टी यह बड़ी जिम्मेदारी देकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी महुआ के पक्ष में है।

क्या महुआ मोइत्रा के खिलाफ होगी कार्रवाई?

लोकसभा आचार समिति की रिपोर्ट को लेकर TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने असहमति जताई थी। लोकसभा आचार समिति ने स्पीकर ओम बिरला से रिश्वत मामले में महुआ मोइत्रा को निष्कासित करने की सिफारिश की थी।

बेहतर होगा जीवन, पूरी होगी हर बुनियादी जरूरत: जनजातीय समुदाय को PM मोदी देंगे ₹24 हजार करोड़ की सौगात, शुरू करेंगे PVTG विकास मिशन

देश के जनजातीय वर्ग को सशक्त बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी PVTG (विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह) विकास मिशन लॉन्च करने जा रहे हैं। इस मिशन की शुरुआत जनजातीय गौरव दिवस यानी कि 15 नवंबर से होगी। इस दिन भगवान बिरसा मुंडा की जयंती होती है।

मोदी सरकार जनजातीय समूह के समग्र विकास को सुनिश्चित करने के लिए 24 हजार करोड़ रुपए की योजना शुरू करेगी। इससे पहले 2023-24 के बजट में, विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए प्रधानमंत्री पीवीटीजी विकास मिशन की घोषणा की गई थी।

जानकारी के मुताबिक इस मिशन को 9 मंत्रालयों की 11 योजनाओं के जरिए लागू किया जाएगा। योजना की कुछ शर्तों में भी ढील दी जाएगी। बताया जा रहा है कि मिशन के तहत इन जनजातीय इलाकों में सड़क और टेलिकॉम कनेक्टिविटी, बिजली, हाउसिंग, साफ पेयजल और सफाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण की सुविधा मुहैया कराई जाएगी। साथ ही उनके लिए आजीविका के मौके भी दिए जाएँगे।

बता दें कि 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 75 पीवीटीजी हैं जो 22,544 गाँवों (220 जिलों) में रहते हैं और जिनकी आबादी लगभग 28 लाख है। विशेष रूप से इनमें से भी ज्यादातर घने जंगलों में रहते हैं। यही कारण है कि इनकी बुनियादी जरूरतों की पूर्ति के लिए यह योजना बनाई गई है।

पटाखे ही क्यों, रवीश कुमार चाहते हैं हिन्दुओं का साँस लेना भी कर दिया जाए बैन: पराली पर नहीं फूटा बकार, दिवाली पर घृणा की बौछार

एक पत्रकार है, जो पहले NDTV में था लेकिन जैसे ही गौतम अडानी ने इस मीडिया संस्थान को खरीदा वो पत्रकार वहाँ से भाग खड़ा हुआ और यूट्यूबर बन गया। अब उस पत्रकार को प्रदूषण काट रहा है। प्रदूषण के भी 2 प्रकार हैं। पहले, पंजाब के किसानों द्वारा पराली जलाने के कारण होने वाला प्रदूषण जो पूरे 2 महीने चलता है। ये रवीश कुमार को नहीं काटता था। दूसरा, दिवाली के दिन कुछ घंटे पटाखे फोड़े जाने के कारण हुआ हल्का-फुल्का प्रदूषण। ये रवीश कुमार को बहुत काटता है।

इसका कारण है। कारण ये है कि पराली जलाने वाले वो किसान होते हैं जिन्होंने आंदोलन के नाम पर 3 कृषि कानूनों के खिलाफ राष्ट्रीय राजधानी को 1 वर्ष से भी अधिक समय तक बंधक बना कर रखा था। दिल्ली की सीमाएँ घेर ली गई थीं और दलालों को बचाने के लिए किसानों की आय बढ़ाने के लिए लाए गए कानूनों का विरोध हुआ। दूसरा कारण ये है कि पंजाब में AAP की सरकार है। भाजपा के खिलाफ जो लोग हैं, वो पूरी धरती में आग लगा दें तो भी रवीश कुमार को ठंडक ही महसूस होगी।

वहीं दिवाली पर प्रदूषण का राग अलापने के पीछे कारण है कि ये एक हिन्दू त्योहार है और नरेंद्र मोदी के युग को हिन्दू राष्ट्रवाद के पुनरुत्थान की अवधि के रूप में जाना जाता है। अयोध्या में राम मंदिर का भी उद्घाटन होना है, वहाँ दिवाली पर 22 लाख से भी अधिक दीये जला कर गिलीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया गया। दिवाली पर हर एक पटाखे की चमक रवीश कुमार के लिए महाप्रलय से भी ज़्यादा खतरनाक है, इसका कारण यही है।

सुप्रीम कोर्ट पर तंज, रवीश कुमार के लिए दिवाली से होता है फेफड़ों का रोग

रवीश कुमार लिखते हैं कि AQI की हालत भी संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव जैसी हो गई है। वाह, एकदम सही बात है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र पर तंज कसा है कि युद्ध की विभीषिका को लेकर चेतावनी दी जाती है, निंदा होती है मगर बम बरसते रहते हैं। एक तरह से उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को संयुक्त राष्ट्र बता दिया है और दावा किया है कि उसके आदेश का पालन नहीं हो रहा। इसीलिए, वो सुझाव देते हैं कि सुप्रीम कोर्ट को अब अपना नाम बदल कर ‘टिप्पणी कोर्ट’ रख लेना चाहिए और पटाखे फोड़ने की पूरी छूट दे देनी चाहिए।

उन्होंने हिन्दुओं को दोषी बताने के लिए लिखा है कि आप लाख फेफड़ों का बुरा हाल बताएँगे, लोग पटाखे फोड़ेंगे ही। रवीश कुमार का मानना है कि फेफड़े के रोग के लिए हिन्दू पर्व-त्योहार ही जिम्मेदार हैं। हाँ, ईद बहुत अच्छा है जहाँ एक दिन में ही करोड़ों बकरों को काट कर मुस्लिम खा जाते हैं, न रहता है शरीर और न बचता है फेफड़ा। सब पेट में। दिवाली में जानवर डर जाते हैं, ईद इसका स्थायी समाधान करता है और जानवर को मार ही डाला जाता है। रवीश कुमार खुश होते हैं। दिवाली वाली नाराज़गी चली जाती है।

फेफड़ों की बात की है रवीश कुमार ने तो उन्हें बताना ज़रूरी है कि औसतन सबसे ज़्यादा लंग कैंसर के मरीज हंगरी में हैं, उसके बाद सर्बिया, फ़्रांस और तुर्की का नंबर आता है। दिवाली से हुआ होगा, नहीं? दिवाली के पटाखों से शायद। इस्लामी मुल्क तुर्की में भी दिवाली के कारण ही हुआ होगा, है न? वैसे दिवाली तो पूरे देश में मनाया जाता है, फिर प्रदूषण सबसे ज़्यादा दिल्ली में ही क्यों बढ़ा रहता है हर साल अक्टूबर-नवंबर-दिसंबर में? दिवाली 3 महीने तो नहीं ही चलती है।

रवीश कुमार क्या चाहते हैं? दुनिया भर में 120 करोड़ से भी अधिक हिन्दू हैं, सबको जेल में ठूँस दिया जाए? दिवाली पर पटाखे बैन कर दिए जाएँ, होली पर रंग, महाशिवरात्रि पर पानी, दशहरा पर रावण जलाना और रक्षाबंधन पर राखी को प्रतिबंधित कर दिया जाए? है कि नहीं? हिन्दुओं की धरती पर, सनातन की समृद्ध भूमि पर रह जाए तो सिर्फ ईद और क्रिसमस। शायद रवीश कुमार यही चाहते हैं। तब शायद दुनिया की सारी समस्याएँ ही खत्म हो जाएँगी।

पहले रवीश कुमार को आँकड़ों से जवाब दे देते हैं। फिर उनका ‘इलाज’ भी किया जाएगा। आँकड़े कहते हैं कि पंजाब में पराली जलाने की घटनाएँ 25,000 के पार चली गई हैं। दिवाली के दिन भी ऐसी 1000 घटनाएँ सामने आईं। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के गृह जिले संगरूर में ही सबसे ज़्यादा मामले सामने आए हैं। दिवाली 12 नवंबर को था, जबकि इससे 10 दिन पहले ही NCR के आनंद विहार में AQI 999 पहुँच गया था। इसके लिए क्या जिम्मेदार था? हिन्दुओं का साँस लेना?

जबकि दिवाली के बाद AQI में बहुत ज़्यादा बदलाव नहीं आया है। हर इलाके में सामान्य बदलाव ही आए हैं। ये एक दिन की बात थी, पराली जलाने की प्रक्रिया पूरे 2 महीने चलती है। लेकिन, मजाल कि रवीश कुमार ने पराली को लेकर एक भी ट्वीट किया हो। अगर दिवाली से प्रदूषण होता है तो दिवाली से पहले AQI बढ़ने का क्या कारण है? रवीश कुमार आगे लिखते हैं कि पटाखे छोड़ने के बाद की हवा को ‘पवित्र पवन’ घोषित किया जाए। हर नागरिक का कर्तव्य होगा कि वह खुले मैदान में जाकर इस ‘पवित्र पवन’ का सेवन करे।

हिन्दुओं के साँस लेने पर ही लगे बैन, तब खुश होंगे रवीश कुमार

मैं तो कहता हूँ कि रवीश कुमार को ये माँग करनी चाहिए कि हिन्दुओं का साँस लेना ही प्रतिबंधित कर दिया जाना चाहिए। हिन्दू साँस लेते हैं, कार्बनडाइऑक्साइड छोड़ते हैं और इससे वातावरण में प्रदूषण फैलता है। सबसे अच्छा उपाय यही रहेगा। दिवाली पर पटाखे क्यों, मैं तो कहता हूँ लक्ष्मी पूजन भी बैन किया जाए। सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने माँ लक्ष्मी पर सवाल उठाते हुए उनका मजाक बना ही दिया है। दिवाली पर दीये जलाने से लेकर पारंपरिक परिधान पहनने तक, सब कुछ बैन कर दिया जाना चाहिए।

मैं इस बहस में नहीं पड़ूँगा कि संयुक्त राष्ट्र कितना सफल है और कितना असफल, लेकिन इजरायल-हमास युद्ध के मामले में शुरुआत तो हमास ने किया था न? इस्लामी आतंकियों ने इजरायल में घुस कर डेढ़ हजार निर्दोषों को मार डाला। बच्चों, बुजुर्गों और जानवरों तक को नहीं बख्शा गया। महिलाओं के साथ बलात्कार कर उनकी लाश को नग्न कर जुलूस निकाला गया ‘अल्लाहु अकबर’ नारे के साथ। अब इजरायल ने जवाब देना चालू किया तो रवीश कुमार का गिरोह पूरा का पूरा एक्टिव हो गया।

साथ ही रवीश कुमार ने ‘विश्वगुरु’ वाला तंज भी कसा है। अगर आपने ‘द वैक्सीन वॉर’ फिल्म देखी होगी तो उसमें दिखाया गया है कि कैसे वामपंथी पत्रकार भारत की सफलताओं पर दुखी होते हैं और किसी छोटी सी असफलता पर भी तुरंत ‘विश्वगुरु’ वाला तंज लेकर आ जाते हैं। यही स्थिति है यहाँ भी। अमेरिका का राष्ट्रपति बाइबिल पर हाथ रख कर शपथ ले सकता है, UK के राजा का शपथग्रहण पादरी करा सकते हैं लेकिन हिन्दुओं के देश में हिन्दू अपना त्योहार नहीं मना सकते।

लोकतंत्र में जनता से ऊपर कोई नहीं

जहाँ तक बात सुप्रीम कोर्ट की है, इस देश का सहिष्णु हिन्दू समाज ही है जिसने 500 वर्षों तक अपने लोगों का लगातार बलिदान दिया लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद ही अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हुआ। ये हिन्दू ही हैं, जिनके सबरीमाला मंदिर में सुप्रीम कोर्ट ने परंपराओं को बदल कर नियम-कानून बदल दिया और जब उन्होंने विरोध प्रदर्शन किया तो केरल की वामपंथी सरकार ने सैकड़ों केस दर्ज कर दिए। और हाँ, ये सुप्रीम कोर्ट ने हिन्दू श्रद्धालुओं नहीं बल्कि हिन्दू धर्म से घृणा करने वाले वामपंथियों की माँग पर किया।

प्रजातंत्र में प्रजा से बड़ा कोई नहीं है। ये वो धरती है जहाँ सदियों से सनातन परंपरा फली-फूली है और इस्लामी आक्रांताओं, अंग्रेजों व कॉन्ग्रेस पार्टी की लाख कोशिशों के बावजूद इसे कोई नहीं रोक पाया। पटाखे जलाना अपराध नहीं है, ये हत्या, बलात्कार, चोरी, लूटपाट या फिर जोर-जबरदस्ती नहीं है। हाँ, सड़क पर नमाज पढ़ कर ट्रैफिक बाधित करना जोर-जबरदस्ती है। गैर-हिन्दुओं को जबरन लाखों मस्जिदों से रोज 5 बार अजान सुनना जोर-जबरदस्ती है। इन सब पर ट्वीट किया कभी रवीश कुमार ने?

जो जनता चाहेगी वही होगा। और हाँ, जनता व भीड़ में अंतर है। हिन्दुओं ने सामूहिक अवज्ञा का प्रदर्शन किया है, कट्टर मुस्लिम भीड़ ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाती है और इसे अंजाम भी दे दिया जाता है। रवीश कुमार पराली जलाने की समस्या का समाधान ढूँढने के लिए कहें पंजाब सरकार को, लेकिन तब सबको पता चल जाएगा कि प्रदूषण का कारण क्या था। सहिष्णु हिन्दुओं की उदारता का बार-बार गलत फायदा नहीं उठाया जाना चाहिए। वो कानून हाथ में नहीं लेते हैं, इसका मतलब ये नहीं कि दुनिया की हर समस्या के लिए कोई भी ऐरा-गैरा उन्हें गाली देकर निकल जाए।

ऋषि सुनक ने गृहमंत्री को हटाया, पूर्व PM को बनाया ब्रिटेन का विदेश मंत्री: सुएला ब्रेवरमैन ने लंदन पुलिस को बताया था फिलिस्तीन समर्थक

ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने अपनी गृहमंत्री सुएला ब्रेवरमैन को उनके पद से हटा दिया है। वह सरकार की वरिष्ठतम मंत्रियों में से एक थी। उनकी जगह पर जेम्स क्लीवरले को इंग्लैंड का नया गृहमंत्री नियुक्त किया गया है। ऋषि सुनक ने अपनी कैबिनेट में कई बदलाव किए हैं।

बताया गया है कि सुएला को लंदन पुलिस की आलोचना करने के कारण कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखाया गया है। वह ऋषि की सरकार में अक्टूबर, 2022 से ही गृह विभाग की जिम्मेदारी सँभाल रही थीं। सुएला भी ऋषि की तरह एक भारतवंशी हैं।

बताया जा रहा है कि सुएला ने बीते सप्ताह एक लेख लिखा था जिसमें उन्होंने लंदन पुलिस पर फिलिस्तीन समर्थकों पर नरम रवैया अपनाने का आरोप लगाया था। उन्होंने गाजा निवासियों के समर्थन में निकलने वाली रैलियों को घृणा से भरे मार्च बताया था। उनके इस लेख के बाद दक्षिणपंथियों ने भी लन्दन में प्रदर्शन किया था।

इसके कारण विपक्ष समेत उनकी स्वयं की कंजर्वेटिव पार्टी में भी उनकी आलोचना हो रही थी। इससे पहले उन्होंने कहा था कि ब्रिटेन में बाहरी देशों से आए अवैध लोग रह रहे हैं। इन सबको लेकर उनकी और ऋषि की सरकार की आलोचना हो रही थी।

सुएला ने इससे पहले भी अक्टूबर, 2022 में एक विवादित बयान दिया था जिसमें उन्होंने कहा था कि भारतीय लोग इंग्लैंड में अपनी वीजा अवधि से अधिक रुकते हैं। उनके इस बयान का भी कड़ा विरोध हुआ था। इसकी काफी आलोचना भी हुई थी।

इन्हीं सब कारणों से आज (13 नवम्बर, 2023) को हुए कैबिनेट फेरबदल में ऋषि सुनक ने उन्हें आज इस्तीफ़ा देने को कहा। उनकी जगह पर तुरंत ब्रिटेन के विदेश मंत्री जेम्स क्लीवरले को नियुक्त कर दिया गया। क्लीवरले की जगह पर इंग्लैंड के पूर्व प्रधानमंत्री डेविड कैमरून को विदेश मंत्री बनाया गया है।

गौरतलब है कि सुएला की जड़ें भी भारत से जुड़ी हुई हैं। उनकी माता एक तमिल हिन्दू हैं जो कि मॉरिशस से इंग्लैंड पहुँची थी। उनके पिता भी भारतीय मूल के थे जो कि केन्या से इंग्लैंड पहुँचे थे। उनकी माँ इंग्लैंड के नेशनल हेल्थ सर्विस में नर्स थीं। सुएला ने कैबिनेट से अपने निष्कासन पर कहा है कि यह उनका सौभाग्य रहा है कि वह ब्रिटेन की गृह मंत्री रहीं।

गौरतलब है कि बीते कुछ समय में इंग्लैंड की राजधानी लंदन में कई बड़े प्रदर्शन हुए हैं। इनमें से कुछ प्रदर्शनों में यहूदियों को धमकियाँ भी दी गईं हैं लेकिन लंदन पुलिस ने इन पर कोई कार्रवाई नहीं की है।

गाजियाबाद के रियाजुद्दीन का बैंक अकाउंट, मोबाइल नंबर बिहार के हुसैन का: ₹70 लाख का ट्रांजेक्शन, टेरर फंडिंग का खुलासा होते ही दोनों फरार

उत्तर प्रदेश पुलिस की ATS विंग ने भारत में आतंकवाद फैलाने के लिए पाकिस्तान से की जा रही फंडिंग का खुलासा किया है। इस मामले में उत्तर प्रदेश गाजियाबाद के रियाजुद्दीन और बिहार के पश्चिम चम्पारण निवासी इजहारुल हुसैन को नामजद किया गया है। दोनों पर भारत सरकार को अस्थिर करने, सेना व अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों की जानकारी पाकिस्तान को भेजने का आरोप है।

ATS ने शुक्रवार (10 नवम्बर 2023) को इजहारुल हुसैन और रियाजुद्दीन पर FIR दर्ज की। FIR के मुताबिक गाजियाबाद के भोजपुर थाना क्षेत्र निवासी रियाजुद्दीन और बिहार के पश्चिम चम्पारण में शिकारपुर थाना क्षेत्र के रहने वाले इजहारुल हुसैन के एक-दूसरे से सम्पर्क में होने की सूचना एजेंसी को मिली थी। रियाजुद्दीन ने गाजियाबाद के फरीदनगर की केनरा बैंक ब्रान्च में एक खाता खुलवा रखा है। इस खाते से इजहारुल का मोबाइल नंबर लिंक है।

इस खाते की जाँच में ATS को पता चला कि मार्च 2022 से अप्रैल 2022 के बीच इस खाते से कुछ अन्य खातों के बीच लगभग 65 से 70 लाख रुपए का संदिग्ध लेन-देन हुआ। ये पैसे रियाजुद्दीन ने इजहारुल हुसैन ने देशी विरोधी साजिश के तहत अलग-अलग खातों में भेजे हैं। इस हरकत में पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI के कुछ एजेंट भी शामिल बताए जा रहे हैं। जाँच एजेंसी के मुताबिक इस पैसे का प्रयोग भारतीय सेना सहित देश के अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की ख़ुफ़िया जानकारियाँ पाकिस्तान भेजने के लिए होना था।

ATS के अनुसार रियाजुद्दीन, इजहारुल और कुछ अन्य ISI एजेंट भारत सरकार को अस्थिर करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करना चाह रहे थे। ये सभी आरोपित पाकिस्तान में मौजूद अपने आकाओं से बात करने के लिए अलग-अलग एप का प्रयोग किया करते थे। इन सभी पर IPC की धारा 121- A के तहत कार्रवाई की गई है।

इस FIR में आरोपितों पर जिस 121- A के तहत कार्रवाई हुई है वो सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने या उसकी साजिश रचने की आशंका के तहत लगाई जाती है। इस धारा के प्रावधान में आजीवन कारावास और मृत्युदंड भी शामिल है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक FIR दर्ज होने के बाद से रियाजुद्दीन और इजहारुल हुसैन फरार हैं। ATS इन दोनों की तलाश में दबिश दे रही है।