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यूपी ATS ने ISIS आतंकी वज़ीउद्दीन को छत्तीसगढ़ से दबोचा, AMU से कर रहा था Ph.D: गैंग में मिली थी ‘अमीर’ की पदवी, हिन्दू छात्रों को पढ़ाता था

उत्तर प्रदेश पुलिस की ‘आतंकवाद निरोधक शाखा’ (ATS) ने ISIS की विचारधारा वाले एक और आतंकी को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। गिरफ्तार आतंकी का नाम वज़ीउद्दीन है। वाज़ीउद्दीन अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में शोध (Ph.D) का छात्र है। ATS ने मंगलवार (7 नवम्बर, 2023) को उसे छत्तीसगढ़ के दुर्ग से दबोचा है। बाद में ट्रांजिट रिमांड के जरिए आतंकी को लखनऊ लाया गया है।

ऑपइंडिया को पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, पकड़ा गया आतंकी वज़ीउद्दीन मूलतः छत्तीसगढ़ के दुर्ग का ही रहने वाला है। वह AMU से पीएचडी कर रहा था। वज़ीउद्दीन अलीगढ़ में अपने जूनियर छात्रों को सामाजिक विज्ञान (इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र) विषय पढ़ाता था। इनमें हिंदू छात्रों की भी अच्छी तादाद होती थी। वज़ीउद्दीन को उसकी विचारधारा से जुड़े लोग ‘अमीर’ कह कर पुकारते थे। अमीर शब्द मुस्लिमों में बादशाह की उपाधि माना जाता है। वज़ीउद्दीन सेल्फ रेडिकलाइज़्ड आतंकी बताया जा रहा है।

ATS को वाज़ीउद्दीन के मोबाइल से भड़काऊ और आतंकी साहित्य मिले हैं। फिलहाल उसे ट्रांजिट रिमांड पर दुर्ग से लखनऊ लाया गया है। यहाँ उसे अदालत में पेश कर के रिमांड लेने के प्रयास किए जाएँगे। इस से पहले इसी सप्ताह ATS ने AMU से जुड़े अब्दुल्ला अर्शलान और माज़ बिन तारिक को गिरफ्तार किया था। ये दोनों भी सेल्फ रेडिकलाइज़्ड और ISIS की विचारधारा से प्रेरित बताए गए हैं। वज़ीउद्दीन, अब्दुल्ला अर्शलान और माज़ बिन तारिक पुणे ISIS नेटवर्क से भी कनेक्टेड हैं।

शाहजवाज और अब्दुल्ला की बीवियाँ पहले थीं हिन्दू

इस पूरे मामले में सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पिछले 2 माह के अंदर पकड़े गए 2 अलग-अलग आतंकियों ने हिन्दू लड़कियों से निकाह किए हैं। अक्टूबर माह में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा पकड़े गए आतंकी शाहनवाज ने 2021 में हिन्दू लड़की से निकाह किया था। शाहनवाज की बीवी का पहले नाम बसंती पटेल था जो निकाह के बाद खदीजा मरियम बन गईं थीं।

वहीं नवंबर 2023 के पहले हफ्ते में पकड़े गए आतंकी अब्दुल्ला अर्सलान ने भी हिन्दू लड़की से निकाह किया है। अब्दुल्ला अर्सलान की बीवी मूलतः हाथरस की रहने वाली है। वह AMU की पूर्व छात्रा है जो अब्दुल्ला से अधिक पढ़ी लिखी बताई जा रही है। अब्दुल्ला की बीवी का निकाह पूर्व नाम कीर्ति शर्मा बताया जा रहा है। उनके पिता सरकारी कर्मचारी हैं। अब्दुल्ला का पहले से आपराधिक इतिहास रहा है। ऐसे में कीर्ति शर्मा उसके जाल में कैसे फँसी इस बात की जानकारी जुटाई जा रही है।

‘उम्मीदों का दीया जलाएँ’: दिवाली पर भारतीयों से इजरायल की भावुक अपील, कहा – हमारे 240 बंधकों की सकुशल वापसी के लिए प्रार्थना करें, समर्थन दें

भारत में दीपावली नज़दीक आ चुकी है। लोग प्रकाश के पर्व की तैयारियाँ कर रहे हैं। वहीं, मिडिल ईस्ट में इजरायल और हमास के बीच युद्ध चल रहा है, जिसमें 240 इजरायलियों को हमास ने अभी भी बंधक बनाया हुआ है। इस बीच, भारत में इजरायल के राजदूत ने लोगों से अपील की है कि समस्त भारतीय हमास द्वारा अपहृत और बंदी बनाए गए इजरायलियों की सकुशल वापसी के लिए ‘उम्मीदों का दीया’ जलाएँ। उन्होंने भारतीयों से इजरायल के समर्थन की भी अपील की।

इजरायल के राजदूत नाओर गिलोन ने ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें वो दीया जलाते हुए दिख रहे हैं। गिलोन ने कहा, “हमारे 240 प्रियजनों को हमास के आतंकवादियों ने एक महीने से बंधक बना रखा है। हर दिवाली पर हम दीये जलाकर भगवान राम की वापसी का जश्न मनाते हैं। इस दिवाली में हम आपको हमारे प्रियजनों के वापस आने की उम्मीद में दीया जलाने के लिए आमंत्रित करते हैं। हमें टैग करें और #DiyaOfHope का उपयोग करके अपनी तस्वीरें साझा करें।”

गिलोन ने कहा, “हम भारतीयों से अपील करते हैं कि वे इन नागरिकों के लिए प्रार्थना करें। हम उम्मीद करते हैं कि हम जल्द ही उन्हें उनके परिवारों के पास वापस ला सकेंगे।”

इस बीच इजरायली रक्षा बलों ने अपने अभियानों के दौरान हमास आतंकवादियों से बरामद विभिन्न हथियारों की तस्वीरें जारी कीं। IDF के अनुसार, 7 अक्टूबर को हमास के आतंकवादियों के पास से मिले हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद किया गया है, जिसमें 1493 हथगोले और विस्फोटक, 760 RPG, 427 विस्फोटक बेल्ट, 375 रॉकेट, 106 रॉकेट मिसाइलें शामिल हैं। IDF ने बताया कि ये केवल कुछ हथियार हैं जिनका इस्तेमाल 1400 से अधिक इजरायली नागरिकों के नरसंहार के लिए किया गया था।

इस बीच, इजरायल के प्रधानमंत्री ने कहा है कि गाजा में सुरक्षा की जिम्मेदारी अनिश्चितकाल के लिए अब इजरायल उठाएगा। उनके इस बयान के सीधे मायने है कि गाजा को इजरायल पूरी तरह से हथियारों से मुक्त करना चाहता है, साथ ही सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी अपने पास रखना चाहता है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू ने कहा है कि अगर इजरायल ऐसा पहले करता, तो हमास वाला 7 अक्टूबर को हमले की नौबत ही नहीं आती।

बता दें कि 7 अक्टूबर को हमास के आतंकियों ने जल, थल और वायु मार्ग से हमला बोला था। हमास के आतंकी हमले में 1400 से अधिक इजरायलियों की मौत हो गई, जबकि 240 लोगों को हमास के आतंकी बंधक बनाकर गाजा पट्टी ले गए। इसके बाद इजरायल ने युद्ध की घोषणा कर दी और अभी गाजा को दो हिस्सों में बाँट दिया है। इजरायल के जवाबी हमले में अब तक 10,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। इजरायल लगातार गाजा पर हवाई हमलों के साथ अब जमीनी हमले भी कर रहा है।

अम्मी ने कबूला इस्लाम, मैंने कलमा भी नहीं पढ़ा… कोर्ट ने नहीं मानी दलील, कहा- तुम्हें मुस्लिम ही रहना होगा: 30 साल की महिला को नहीं छोड़ने दिया मजहब

इस्लामी देश मलेशिया की एक अदालत ने एक बार फिर एक महिला को जबरन इस्लाम बने रखने से संबंधित फैसला सुनाया है। दरअसल, महिला ने हाईकोर्ट में इस्लाम छोड़ने की याचिका दाखिल की थी। याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि महिला को इस्लाम धर्म का पालन करना होगा। इससे पहले भी मलेशिया की कोर्ट ने इस तरह के फैसले सुनाए थे।

दरअसल, मलेशिया की मूलनिवासी महिला ने इस्लाम छोड़कर अपनी जनजाति जीवनशैली में लौटने से संबंधित कुआंटान उच्च न्यायालय में एक याचिका दाखिल की थी। जकुन जनजाति से ताल्लुक रखने वाली महिला ने दावा किया कि जब वह केवल दो साल की थी तो उसकी माँ ने उसका धर्म परिवर्तन करा दिया था।

न्यायमूर्ति ज़ैनल आज़मान अब अज़ीज़ ने कहा कि महिला का अंतिम उद्देश्य इस्लाम को त्यागना था। यह एक ऐसा मामला है, जिस पर विचार करना सिविल अदालतों के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। उन्होंने कहा, “मुकदमे का विषय शरिया अदालत के विशेष क्षेत्राधिकार में आता है।”

अदालत ने सुनवाई के दौरान पेश किए गए सबूतों के आधार पर माना कि महिला का पालन-पोषण उसकी धर्मांतरित माँ ने इस्लामी जीवनशैली के अनुसार किया था। ज़ैनल ने पहांग इस्लामी फैमिली लॉ का भी हवाला दिया, जिसमें यह प्रावधान है कि बच्चे उस माता-पिता का धर्म अपनाएँगे, जिनके पास उनकी देखरेख का जिम्मा है।

न्यायाधीश ने कहा कि महिला का पालन-पोषण उसकी माँ ने किया था, इसलिए वह अपनी माँ के धर्म के अधीन है। माता-पिता, दोनों की सहमति इस मामले की परिस्थितियों के लिए प्रासंगिक नहीं थी। उन्होंने कहा कि इस मामले को एम इंदिरा गाँधी से जुड़े मामले में संघीय अदालत के फैसले से अलग किया जाना चाहिए, जिनके बच्चों का उनके पति द्वारा एकतरफा धर्म परिवर्तन किया गया था।

न्यायाधीश जैनल ने कहा, “इंदिरा के मामले में उन्होंने और उनके पूर्व पति ने नागरिक कानून के तहत अपनी शादी पंजीकृत की, लेकिन उन्होंने तीन बच्चों को इस्लाम में परिवर्तित कर दिया। ऐसे मामलों में जहाँ माता-पिता में से कोई एक मुस्लिम नहीं हो, सहमति की आवश्यकता है। लेकिन इस मामले में वादी (महिला) को उसकी माँ ने अकेले ही पाला था।”

अब महिला अब 30 साल की हो गई है। उन्होंने दावा किया कि जब उनकी माँ ने उनका धर्म परिवर्तन कराया था, तब उन्होंने ‘कलमा’ नहीं पढ़ा था, क्योंकि वह बच्ची थी। महिला ने ये भी कहा कि जब वह दो साल की थी, तभी उनकी माँ ने इस्लाम अपनाकर एक मुस्लिम युवक से निकाह कर लिया था।

दरअसल, 4 नवंबर 1995 को वादी की माँ ने इस्लाम अपना लिया और पहांग धार्मिक और मलय सीमा शुल्क परिषद द्वारा उन्हें इस्लामी धर्मांतरण का प्रमाण पत्र दिया गया था। हालाँकि, न्यायालय ने उनकी बात नहीं सुनीं और इस्लाम छोड़कर अपने जनजातीय धर्म में लौटने से संबंधित याचिका खारिज कर दी।

इसी तरह कुछ समय पहले मलेशिया की अदालत ने क्रिश्चियन से मुस्लिम बने एक शख्स को वापस अपने मूल धर्म में जाने पर रोक लगा दी थी। मलेशिया की हाईकोर्ट ने इस्लाम त्यागने के शख्स के आवेदन को खारिज कर दिया। ऐसा ही एक और मामला अगस्त में भी आया था।

दरअसल, 45 वर्षीय व्यक्ति ने साल 2010 में एक मुस्लिम महिला से शादी की थी। महिला से शादी करने के लिए उसने इस्लाम अपनाया था। निकाह के पाँच साल बाद ही यानी 2015 में दोनों का तलाक हो गया। इसके बाद 2016 में उस शख्स ने इस्लाम छोड़ने के लिए शरिया अदालत में एक आवेदन दायर किया, जिसकी इजाजत कोर्ट ने नहीं दी।

उससे पहले इस साल अगस्त में आया था, जब अपने शौहर से तलाक के बाद एक महिला अपने मूल धर्म ईसाई में जाने के लिए आवेदन किया तो उसे खारिज कर दिया गया। महिला ने साल 1995 में इस्लाम अपना कर एक मुस्लिम शख्स से निकाह किया था। इसके बाद साल 2013 में दोनों का सहमति से तलाक हो गया।

महिला ने सिविल हाईकोर्ट से छह आदेशों की माँग की थी, जिसमें यह घोषणा भी शामिल थी कि वह ईसाई धर्म को मानने वाली व्यक्ति है और राज्य के इस्लामी कानून उस पर लागू नहीं होते हैं। देश की शरिया अदालत ने भी उसकी माँग को खारिज कर दिया था। इसके बाद महिला ने सिविल हाईकोर्ट से शरिया अदालत के फैसले को रद्द करने की माँग की थी।

मंदिरों से बाहर होंगे पेरियार, हिंदुओं के धार्मिक स्थल पर ‘कब्जा’ करने वाला बोर्ड भी होगा बंद: तमिलनाडु में ‘सनातन पथ’ पर BJP

तमिलनाडु में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई ने कहा है कि यदि उनकी पार्टी राज्य में सत्ता में आती है, तो वह मंदिरों के बाहर स्थित पेरियार की मूर्तियों को हटा देगी। उन्होंने कहा कि ये मूर्तियाँ हिंदू मंदिरों का अपमान हैं और पार्टी इसे बर्दाश्त नहीं करेगी। तमिलनाडु में मंदिरों के बाहर स्थित पेरियार की मूर्तियों का मुद्दा एक पुराना है। पेरियार एक द्रविड़ नेता था जो अपनी नास्तिकता और ब्राह्मणों के विरोध के लिए जाना जाता था।

उसने मंदिरों से मूर्तियों को हटाने का समर्थन किया, लेकिन तमिलनाडु में कई मंदिरों के बाहर उसकी मूर्तियाँ उसके ही समर्थकों ने स्थापित की हैं, जिस पर लिखा गया है, “भगवान में विश्वास करने वाले लोग मूर्ख होते हैं।”

तमिलनाडु में अब भाजपा ने द्रविड़ राजनीति को सीधे चुनौती दे दी है। तमिलनाडु के फायरब्रांड भाजपा अध्यक्ष के अन्नामलाई ने ऐलान किया है, “ये हमारी प्रतिज्ञा है कि भाजपा के सत्ता में आते ही पेरियार की मूर्तियों को हटा दिया जाएगा।” उन्होंने कहा कि श्रीरंगम रंगनाथर मंदिर से लेकर राज्य के सभी मंदिरों के बाहर लगी ईवी रामासामी नायकर (EVR) की मूर्तियों को तुरंत हटा दिया जाएगा साथ ही मंदिरों की बंदोबस्ती करने वाले हिंदू धार्मिक धर्मार्थ विभाग (HR & CE Department in Tamil Nadu) को भी बंद कर दिया जाएगा।

इस विभाग पर आरोप है कि ये मंदिरों की बंदोबस्ती के बहाने पूरे राज्य के मंदिरों पर अपना एकाधिकार चलाती है और मनमाने तरीके से हिंदुओं को उत्पीड़ित करती है। कई जगहों पर इसने परंपराओं को ताकत पर रखकर पुजारियों की नियुक्ति की है।

तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष अन्नामलाई ने 7 नवंबर को श्रीरंगम रंगनाथर मंदिर के बाहर मंच से कहा, “इसी रंगनाथर मंदिर के बाद 1967 में सत्ता में आई DMK ने एक पट्टी लगाई थी, जिसपर लिखा है – भगवान पर विश्वास करने वाले मूर्ख और धोखेबाज हैं, भगवान पर विश्वास मत करो।” जबकि हिंदू धर्म के लोग शांति से रहने वाले लोग हैं। इसी डीएमके की सरकार में दिसंबर 2006 में पेरियार द्वारा स्थापित सनातन विरोधी संगठन ने पवित्र मंदिर के बाहर 12 फुट ऊँची पेरियर की मूर्ति लगाई, जिसका हिंदुओं ने विरोध किया, लेकिन DMK ने मंदिर के बाहर ही भगवान का विरोध करने वाले की मूर्ति लगाई।

अन्नामलाई ने ऐलान किया, “भाजपा की सरकार बनते ही मंदिर के बाहर लगाई गई ईश्वर विरोधी संदेश वाली शिला पट्टिका को हटाया जाएगा, साथ ही पेरियर की ऐसी मूर्तियाँ जो मंदिरों के बाहर ही लगी हैं, उन्हें भी हटा दिया जाएगा।” उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के मंदिरों में पेरियार की जगह अज़वार (वैष्णव संत) और नयनमारों (शैव संतों) की मूर्तियाँ स्थापित की जाएँगी। तमिल विद्वानों की मूर्तियाँ लगाई जाएँगी। तमिल विद्वान तिरुवल्लुवर की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जिन लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी, उनकी प्रतिमाएँ स्थापित कर उनकी पूजा की जाएगी।

अन्नामलाई का ऐलान – बीजेपी की सरकार बनते ही मंदिरों पर कब्जे वाला विभाग होगा बंद

अन्नामलाई ने डीएमके और सनातन विरोधी राजनीति पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सनातन परंपरा पर किए जा रहे हमलों का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि मुगल शासकों ने इस पवित्र श्रीरंगम रंगनाथर मंदिर को नष्ट करने की कोशिश की और अब स्टालिन का बेटा उदयनिधि कहता है कि वो सनातन धर्म को नष्ट कर देगा।

अन्नामलाई ने आरोप लगाया कि तमिलनाडु का हिंदू धार्मिक धर्मार्थ विभाग मंदिरों की रक्षा के नाम पर बनाया जाता है, लेकिन वो गलत लोगों को पुजारियों और प्रशासकों के पद पर नियुक्ति करता है। उन्होंने कहा, “श्रीरंगम रंगनाथर मंदिर का पूर्वी द्वार, प्रवेश द्वार का टावर गेट ढह गया है। मंदिरों की रक्षा करना चैरिटी विभाग का उद्देश्य है, लेकिन उसे बनाया नहीं गया।” बता दें कि जिस जगह से अन्नामलाई मंच पर संबोधित कर रहे थे, उसके एक तरफ प्रसिद्ध श्रीरंगम रंगनाथर मंदिर का राजा गोपुरम (प्रवेश द्वार) है, तो दूसरी तरफ पेरियार की मूर्ति।

‘डेक्कन क्रॉनिकल’ की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा कि जिस दिन भाजपा की सरकार बनेगी, वो दिन तमिलनाडु के हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (HR और CE) विभाग का आखिरी दिन होगा।

एक अनुमान के मुताबिक, राज्य सरकार ने तमिलनाडु के 38,000 से अधिक मंदिरों पर ‘कब्जा’ कर रखा है। वो मनमाने तरीके से पुजारियों की नियुक्ति करती है और मंदिरों के संरक्षण पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं देती। इस बारे में सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की गई है, जिसपर सुनवाई चल रही है। इसी एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को कहा था कि वो परंपरागत तरीके से चल रहे मंदिरों में पुजारियों की नियुक्ति संबंधी कोई हस्तक्षेप न करे, इसके बावजूद राज्य सरकार ने मंदिरों के मामले में हस्तक्षेप करना जारी रखा है।

कुछ समय पहले ही तमिलनाडु में महिला पुजारियों की नियुक्ति सरकार की तरफ से की गई थी और मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने इसे गलत तरीके से द्रविड़ परंपरा से जोड़ दिया था। स्टालिन ने इसी श्रीरंगम रंगनाथर मंदिर में महिला पुजारी की नियुक्ति को ऐतिहासिक बताते हुए कहा था कि हमने पेरियार के दिल का काँटा निकाल दिया है। स्टालिन ने कहा था, “उन्हें (महिलाओं को) अपवित्र माना गया है। यहाँ तक कि देवी मंदिरों में भी। लेकिन, अंततः परिवर्तन हुआ।”

तमिलनाडु में हमारी द्रविड़ मॉडल सरकार ने सभी जातियों के लोगों को पुजारी के रूप में नियुक्त करके थानथाई पेरियार के दिल से काँटा निकाल दिया है। महिलाएँ अब गर्भगृह में कदम रख रही हैं। इससे समावेशी और समानता का एक नया युग आ रहा है।”

वहीं, एमके स्टालिन का बेटा उदयनिधि स्टालिन सनातन परंपरा को मिटाने की बात करता है। सनातन की तुलना डेंगू-मलेरिया से करता है। उसने कहा था, “कुछ चीजें हैं जिनका हमें उन्मूलन करना है और हम केवल विरोध नहीं कर सकते। मच्छर, डेंगू बुखार, मलेरिया, कोरोना, ये सभी चीजें हैं जिनका हम विरोध नहीं कर सकते, हमें इन्हें मिटाना है। सनातन ​​भी ऐसा ही है। विरोध करने की जगह सनातन ​​को ख़त्म करना हमारा पहला काम होना चाहिए।”

भाजपा से डरती है डीएमके

अन्नामलाई ने कहा कि डीएमके सरकार भाजपा से बहुत डरती है। डीएमके सरकार ने श्रीरंगम मंदिर में लगे कमल के फूल की प्रतिमा को नष्ट कर दिया। कमल का फूल सिर्फ भाजपा का चुनाव चिन्ह ही नहीं, बल्कि देवी लक्ष्मी और देवी सरस्वती से भी जुड़ा है। ये हमारे देश का राष्ट्रीय पुष्प भी है। चूँकि डीएमके भाजपा से डरती है, इसलिए वो एक तरफ भाजपा के झंडे को हटाती है, तो दूसरी तरफ कमल के फूल को नष्ट करती है।

भाजपा कराएगी हिंदुओं को भगवान राम के दर्शन, अयोध्या तक चलेगी ट्रेन

अन्नामलाई ने अपने संबोधन में कहा कि भाजपा तमिलनाडु के हिंदुओं को भगवान राम के दर्शन के लिए अयोध्या लेकर जाएगी। इसके लिए अयोध्या तक सीधी ट्रेन चलाई जाएगी।

अन्नामलाई ने कहा कि 22 जनवरी से भाजपा अयोध्या के लिए सीधी ट्रेन की व्यवस्था करेगी, जो मुफ्त में तमिलनाडु के हिंदुओं को भगवान राम के दर्शन कराने ले जाएगी।

‘और कितना नीचे गिरोगे’: नीतीश कुमार को ‘गंदी बात’ पर PM मोदी ने घेरा, कहा- उन्हें कोई शर्म नहीं

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा सदन में जनसंख्या नियंत्रण को लेकर महिला-पुरुष पर दी गई विवादास्पद टिप्पणी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमला बोला है। पीएम मोदी ने कहा कि नीतीश कुमार को शर्म नहीं है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के इस मुद्दे पर विपक्षी गठबंधन के नेता क्यों चुप हैं?

मध्य प्रदेश के गुना में रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा “विधानसभा में माताएँ और बहनें भी मौजूद थीं। इंडी गठबंधन के नेता ने विधानसभा के अंदर ऐसी भाषा में गंदी बातें कीं। कोई शर्म नहीं है उनको। इंडी गठबंधन का कोई भी नेता उनके खिलाफ कुछ बोलने को तैयार नहीं हुआ है। माता-बहनों की इज्जत ये लोग कैसे कर सकते हैं। कैसा दुर्भाग्य आया देश का। कितना नीचे गिरोगे। दुनिया में देश को नीचा गिराओगे।”

नीतीश कुमार ने 7 नवम्बर 2023 को पहले बिहार विधानसभा और फिर विधानपरिषद में महिलाओं की शिक्षा और उसके जनसंख्या नियंत्रण को लेकर बयान दिया था। उन्होंने कहा था, “अगर पढ़ लेगी लड़की, और जब शादी होगा तब लड़का लड़की का तो जो पुरुष है वो तो रोज रात में शदिया होता है उसके साथ करता है ना उसी में और पैदा हो जाता है। लड़की पढ़ लेती है तो हमको मालूम था कि उ करेगा ठीक है! लेकिन अंतिम में भीतर मत घुसाओ उसको बाहर कर दो! करता तो है।”

वहीं विधानपरिषद में उन्होंने कहा था, “उसी समय लड़की भी जब पढ़ी-लिखी रहती है तो कहती है कि ठीक है, रात में करो लेकिन अपना जो तुमको निकलने लगे तो बाहर निकाल कर फेंक दो। यही कर के लड़की सब अब सबको समझा रही है। ज़रा जान लीजिए। लड़की सब सभी को समझाती है कि अपने पति को कंट्रोल में रखिए।”

अब उन्होंने मीडिया के सामने इन बयानों पर माफी माँग ली है। इससे पहले राज्य के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने उनका यह कहते हुए बचाव किया था कि वह सेक्स एजुकेशन की बात कर रहे थे। इसके विषय में बात होने पर लोग शर्माते हैं।

YouTuber ने ट्रेन की पटरियों पर ही फोड़े पटाखे, धुआँ-धुआँ होने के बाद लिखा – मजेदार एक्सपेरिमेंट: कार्रवाई की तैयारी में रेलवे

वीडियो बनाने और व्यूज पाने के चक्कर में एक यूट्यूबर ने रेल पटरियों पर ही पटाखों से धमाका कर दिया। उसने रेल की पटरियों के बीच में कई पटाखे रख कर जलाए और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर डाला है। वीडियो वायरल होने के के बाद अब रेलवे उस पर कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

यह घटना राजस्थान के अजमेर से फुलेरा के बीच के रेलखंड पर हुई। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के अनुसार, ‘स्टुपिड डीटीएस’ नाम का चैनल चलाने वाले एक शख्स, जिसका नाम यश बताया जा रहा है, उसने यह वीडियो बनाया है।

उसने इस वीडियो को ‘मजेदार एक्सपेरिमेंट’ का नाम दिया है। वायरल वीडियो में वह रेलवे पटरियों के बीच पटाखों में आग लगाते हुए दिखता है, जिसके बाद उसमें से काले रंग का काफी धुआँ निकलता है। यूट्यूबर इस काले धुएँ को प्रदूषण का नाम देते हुए काफी खुश होता है। इस दौरान उसकी बराबर की पटरियों से एक तेल भर कर ले जाने वाली मालगाड़ी भी निकलती है।

इस यूट्यूबर के YouTube चैनल पर 133 सब्सक्राइबर हैं। इस चैनल पर वह लगातार पटाखे जलाने या अन्य तरह के अजीब काम करने के वीडियो डालता रहता है। इससे पहले भी वह कई वीडियो पटाखे जलाने के बना चुका है। उसके इस वीडियो को ‘ट्रेन्स ऑफ़ इंडिया’ नाम के एक अकाउंट ने ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर डाला है। इस अकाउंट ने ‘Stupid DTX’ वाले इस व्यक्ति पर कार्रवाई की माँग की है क्योंकि आग के कारण पहले भी रेलवे को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा था।

रेलवे ने इस वीडियो का संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की बात है। उत्तरी रेलवे के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट ने स्थानीय रेलवे पुलिस बल और अन्य अधिकारियों को टैग करके कार्रवाई करने को कहा है। गौरतलब है कि रेलवे पटरियों को नुकसान पहुँचाने की ऐसी घटनाओं पर जुर्माना और सज़ा भी हो सकती है। बड़ी संख्या में लोग ट्विटर पर वीडियो बनाने वाले शख्स के ऊपर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

इससे पहले भी कई ऐसी घटनाएँ सामने आई हैं जिनमें जानबूझ कर पटरियों पर ऐसी सामग्रियाँ रखी गईं जिससे ट्रेन पलट जाए। अक्टूबर माह में राजस्थान के ही उदयपुर में एक ट्रैक पर पत्थर और लकड़ियाँ रख कर वन्दे भारत ट्रेन को पलटाने की साजिश की गई थी। हालाँकि, ड्राईवर की सूझबूझ से कोई हादसा नहीं हुआ।

ABES के बाद अब सुंदरदीप कॉलेज में गुनाह हुआ ‘जय श्री राम’: छात्रों को गार्ड ने हड़काया, चैलेन्ज देते हुए कहा – बोल के दिखा, फिर बताता हूँ

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में एक कॉलेज में ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने पर विवाद हुआ है। इस बार घटना सुंदरदीप कॉलेज की है जहाँ का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक छात्र को गार्ड द्वारा ‘जय श्री राम’ बोलने पर देख लेने की धमकी देते सुना जा सकता है। हिन्दू संगठनों का दावा है कि कॉलेज मैनेजमेंट ने अपने किए पर माफ़ी माँग ली है। पुलिस ने मामले में तहरीर मिलने पर आगे की कार्रवाई किए जाने का भरोसा दिया है।

यह मामला गाजियाबाद के थाना क्षेत्र वेब सिटी का है। गाजियाबाद के हिन्दू संगठन से जुड़े नेता भूपेंद्र चौधरी उर्फ़ पिंकी ने इस मामले में अपने कार्यकर्ताओं को कॉलेज तक भेजने का दावा किया। ऑपइंडिया से उन्होंने बताया कि सुंदरदीप कॉलेज डासना इलाके में पड़ता है। यहाँ सोमवार (6 नवंबर, 2023) को नए BBA और BCA कोर्स में एडमिशन लेने वाले छात्रों की फ्रेशर पार्टी थी। पार्टी शाम 4:30 पर खत्म हुई। इस दौरान कुछ छात्र ‘जय श्री राम’ बोलने लगे। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

वायरल वीडियो में कॉलेज का सिक्योरिटी इंचार्ज छात्रों से अभद्रता करने लगा और मारपीट पर उतारू दिख रहा है। सिक्योरिटी इंचार्ज से टोन नीचे करने के लिए कहते हुए बोला, “ये सुंदरदीप है। मुझे मत दिखा ABES, मैं बता रहा हूँ तुझे। अंग्रेजी मत बोल तू। हिंदी में समझा दूँगा मैं। अभी रुक।” सिक्योरिटी इंचार्ज ने चैलेन्ज देते हुए कहा कि ‘जय श्री राम’ बोल के दिखा तुझे बताता हूँ। इस दौरान छात्रों के खिलाफ पुलिस भी बुलाने की धमकी दी गई।

इस दौरान मौके से एक महिला प्रोफेसर का भी वीडियो वायरल हुआ है। महिला प्रोफेसर ‘जय श्री राम’ बोल रहे छात्र को डाँटती हुई दिख रही हैं। प्रोफेसर का नाम डॉ दीपा तँवर बताया जा रहा है। हालाँकि, कालेज तक गए हिन्दू रक्षा दल के पदाधिकारियों का दावा है कि सारी गलती सिक्योरिटी सुपरवाइजर राय की है।

मामला तूल पकड़ने पर छात्रों को हड़काने वाले सिक्योरिटी सुपरवाइजर राय ने अपना वीडियो जारी किया। उन्होंने खुद को 14 साल से कॉलेज में कार्यरत बताया और अपने किसी शब्द से किसी को भी आघात पहुँचने पर माफ़ी माँगी। हालाँकि, सुपरवाइजर राय ने अपने वीडियो में बच्चों की नारेबाजी को शोर-शराबा बताते हुए उस से माहौल खराब होने की बात कही।

पुलिस ने अभी तक किसी भी पक्ष से शिकायत न मिलने की बात कही है। मीडिया से बात करते हुए DCP ग्रामीण विवेक यादव ने कहा कि शिकायत मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

हिन्दू रक्षा दल के पदाधिकारी सौरव पंडित ने कॉलेज के अंदर मैनेजमेंट से हो रही बातचीत का वीडियो अपनी प्रोफ़ाइल पर शेयर किया है। वीडियो में छात्रों को हड़काने वाले सुरक्षा सुपरवाइजर के अलावा पुलिस के अधिकारी भी मौजूद दिख रहे हैं। वीडियो में सुपरवाइजर राय अपनी सफाई पेश कर के खुद को बेगुनाह बताने की कोशिश कर रहे हैं। हालाँकि अंत में एक माफ़ीनाम पर सहमति बनी।

कॉलेज के जिस छात्र को ‘जय श्री राम’ बोलने पर हड़काया गया था सौरव पंडित ने उस से भी बात की। छात्र ने बताया कि वो अन्य छात्रों के ग्रुप में था और जब बाकियों ने ‘जय श्री राम’ कहा तो उसने भी नारा लगा दिया। पीड़ित छात्र का आरोप है कि नारे लगाने के बाद उसको सिक्योरिटी सुपरवाइजर राय मारने चढ़ आया था। इस दौरान राय ने कहा, “यहाँ गर्वनमेंट की नहीं बल्कि मेरी ही चलती है।”

ऑपइंडिया से बातचीत करते हुए सौरव पंडित ने बताया कि मामले का शांतिपूर्ण पटाक्षेप हो चुका है। उन्होंने बताया कि सिक्योरिटी गार्ड ने ‘जय श्री राम’ पर चैलेन्ज दिया था जिसे स्वीकार कर लिया गया। कॉलेज की तरफ से किसी भी छात्र पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। बताते चलें कि कुछ ही दिन पहले गाजियाबाद के ABES कॉलेज में ‘जय श्री राम’ बोलने वाले छात्र को प्रताड़ित करने पर विवाद खड़ा हो गया था। तब इस नारे का विरोध करने वाली 2 महिला टीचरों को सस्पेंड करते हुए छात्र पर कोई भी कार्रवाई न करने का भरोसा दिया गया था।

‘कॉन्ग्रेस मतलब बर्बादी, 60 साल में बुंदेलखंड को सिर्फ सूखा दिया’: हाथ छाप की गारंटी के खतरे PM मोदी ने मध्य प्रदेश को बताए

मध्य प्रदेश विधानसभा का चुनाव जोरों पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी भाजपा की जीत को सुनिश्चित करने के लिए पूरे दमखम के साथ जुड़े हैं। उन्होंने बुधवार (8 नवंबर 2023) को दमोह में एक रैली को संबोधित किया और कॉन्ग्रेस पर जमकर हमला बोला। गाँधी परिवार को लेकर उन्होंने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे रिमोट से चलते हैं।

पीएम मोदी ने कहा, “छत्तीसगढ़ में सट्टेबाजी है और राजस्थान में कॉन्ग्रेस के कुकर्मों की ‘लाल डायरी’ है… कॉन्ग्रेस का मतलब है ‘बर्बादी की गारंटी’। कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश में कॉन्ग्रेस ने झूठे वादों की झड़ी लगा दी है। पार्टी जानती है कि मध्य प्रदेश के युवा उनके भ्रष्टाचार के ट्रैक रिकॉर्ड के कारण उन पर भरोसा नहीं करते। 2018 में उन्होंने किसानों का कर्ज माफ करने का वादा किया, लेकिन किसानों ने वादा निभाया 15 महीने तक इंतजार किया और फिर भी कुछ नहीं किया गया।”

नोटबंदी का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “जो लोग नोट के गद्दों पर सोते थे, उनकी नींद उड़ गई थी। मुझे भ्रष्टाचार पर कड़ी कार्रवाई करने के लिए कॉन्ग्रेस मुझे सौ-सौ गालियाँ देती हैं। जो मुझे गालियाँ देते हैं, ये सारे लोग किसी न किसी घोटाले में फँसे हुए हैं। ये लोग चाहे कितनी भी गालियाँ दें, भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई नहीं रुकेगी।”

उन्होंने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार ने इस साल मध्य प्रदेश के लोगों को हजारों करोड़ रुपए भेजे हैं। अगर कॉन्ग्रेस यहाँ गलती से भी आ गई तो 85 प्रतिशत कमीशन तय है। कॉन्ग्रेस फिर से मध्य प्रदेश को बीमारु राज्य बना देगी। उन्होंने युवाओं और गरीबों को कॉन्ग्रेस से सावधान रहने की अपील की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भाजपा का लक्ष्य गरीब का विकास है। कॉन्ग्रेस को लोगों ने 60 साल मौका दिया, लेकिन कॉन्ग्रेस ने बुंदेलखंड को सिर्फ सूखा दिया। उन्होंने कहा, “ये (कॉन्ग्रेस के नेता) किसानों का कर्ज माफ करने की बात करते हैं, लेकिन वे वर्षों तक किसानों को ठगते रहे। ये चुनाव सिर्फ विधायक चुनने के लिए नहीं है, ये प्रदेश के विकास के लिए है।”

पीएम मोदी ने मल्लिकार्जुन खरगे के पाँच पांडव वाले बयान पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उनके रिमोट के सेल जब तक चलते हैं, तब वह सनातन की बुराई करने लगते हैं। जैसे ही सेल खत्म होते हैं, वह पाँच पांडव की बात करने लगते हैं। पीएम ने कहा कि ‘हमें गर्व है कि हम पाँच पांडवों की राह पर चल रहे हैं’।

पीएम मोदी ने जनता को संबोधित करते हुए कहा, “हम भारत की एक गाथा- बुंदेले हर बोलो, हम बचपन में सुनते थे और एक गाथा आज हम दुनिया को सुना रहे हैं। भारत का ये गौरवगान आज संभव न हो पाता, अगर MP का इतना आशीर्वाद मुझ पर न होता। मोदी सिर्फ और सिर्फ आपका सेवक है। आपका जीवन बेहतर हो, आपके जीवन से मुश्किलें कम हो, यही मेरी प्राथमिकता है।”

वो रथयात्रा जिसकी धूल लोग सर से लगाते थे… करिश्मा ऐसा कि गाँधी-नेहरू भी फीके: 96 के हुए लालकृष्ण आडवाणी, बोले PM मोदी – उनके दूरदर्शी नेतृत्व से आगे बढ़ा देश

भारत के पूर्व उप-प्रधानमंत्री और भाजपा के वरिष्ठतम नेता लालकृष्ण आडवाणी आज (8 नवम्बर, 2023) को 96 साल के हो गए हैं। श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए रथ यात्रा निकाल कर आंदोलन खड़ा करने और भाजपा को सत्ता में लाने वाले क्षत्रप आडवाणी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जन्मदिन की बधाई दी है।

लालकृष्ण आडवाणी का जन्म 8 नवम्बर, 1927 को अविभाजित भारत के कराची शहर में हुआ था। वह सिंधी समुदाय से सम्बन्ध रखते हैं। पहले जनसंघ और फिर भारतीय जनता पार्टी की रीढ़ बनने वाले आडवाणी बँटवारे के बाद भारत आ गए थे।

आज से 33 वर्ष पहले यानी 1990 में आडवाणी ने हिन्दुओं को जोड़ने और राम मंदिर निर्माण की माँग के लिए गुजरात के सोमनाथ से अयोध्या तक के लिए रथ यात्रा निकाली। यह 25 सितम्बर को सोमनाथ से निकली थी और इसको अलग-अलग प्रदेशों से होते हुए 30 अक्टूबर, 1990 को अयोध्या पहुँचना था।

इस यात्रा के सारथी वही नरेंद्र मोदी थे, जो आज देश के प्रधानमंत्री हैं। उस समय वे गुजरात भाजपा के संगठन महामंत्री हुआ करते थे। असल में, राष्ट्रीय स्तर पर मोदी का अवतरण इसी रथ यात्रा के जरिए हुआ था। दूसरी तरफ जेपी आंदोलन से निकले नेता लालू यादव को अब इस बात की चिंता सता रही थी कि अब आंदोलन का प्रभाव खत्म हो चुका है और उनका वोटबैंक कहीं खिसक ना जाए। मंडल आरक्षण की राजनीति भी ढीली पड़ रही थी।

इन सबसे पार पाने के लिए लालू ने ‘सेक्युलरिज्म’ शब्द का सहारा लिया। उन्होंने इसी के बहाने आडवाणी की इस रथ यात्रा के पहिए रोक दिए। इस एक कदम का इतना प्रभाव हुआ कि देश कि सत्ता में बैठे प्रधानमंत्री वीपी सिंह की सरकार गिर गई। यह सत्ता ऐसे ही नहीं डोली थी। रथ यात्रा का प्रभाव ही इतना था कि यह जहाँ से निकलता था वहाँ इस पर फूलों की बरसात होती थी। लोग जहाँ से रथ निकलता था वहाँ की मिट्टी अपने माथे पर लगाते थे।

दिल्ली में बैठ कर मानसून के जाने और मशहूर गुलाबी ठंड आने का इंतजार कर रहे राजनीतिक पत्रकार और पंडित चकित थे। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू और महात्मा गाँधी की रैलियाँ देखी थीं, इंदिरा गाँधी का करिश्मा देखा था लेकिन ऐसी कोई रथयात्रा नहीं देखी थी कि जिसकी धूल लोग माथे पर लगाएँ।

इस यात्रा की पूरी जिम्मेदारी वर्तमान प्रधानमंत्री मोदी पर ही थी। हेमंत शर्मा ने अपनी किताब ‘युद्ध में अयोध्या’ में मोदी को इस यात्रा का रणनीतिकार और शिल्पी बताया है। यात्रा के मार्ग और कार्यक्रम को लेकर औपचारिक तौर पर सबसे पहले जानकारी भी मोदी ने ही 13 सितंबर, 1990 को दी थी। कहा जाता है कि इस यात्रा की हर सूचना जिस एक शख्स के पास होती थी वे मोदी ही थे।

यात्रा को रोका जाना दिखाता है कि सेक्यूलर जमात पर किस कदर समुदाय विशेष का मसीहा बनने का भूत सवार था। ‘युद्ध में अयोध्या’ के मुताबिक, 19 अक्टूबर, 1990 को ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के सुंदरनगर गेस्ट हाउस में एक बैठक हुई। बैठक में शामिल होने के लिए आडवाणी रथ यात्रा धनबाद में छोड़कर आए थे। बैठक तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह की पहल पर हुई थी। आडवाणी ने कहा कि वे सरकार गिराना नहीं चाहते। यदि सरकार अध्यादेश लाकर विवादित ढाँचे के आसपास की जमीन विहिप या उसके प्रतिनिधि को सौंपती है तो बीजेपी उसका समर्थन करेगी।

कहा जाता है कि वीपी सिंह नहीं चाहते थे कि मुलायम अकेले मुस्लिमों का मसीहा बने, इसलिए उनके निर्देश पर लालू यादव ने बिहार में ही आडवाणी को गिरफ्तार कर लिया। हेमंत शर्मा ने ‘युद्ध में अयोध्या’ में लिखा है – वीपी सिंह ने एक तीर से दो शिकार किए। आडवाणी को गिरफ्तार करवा मुलायम को पटखनी दी।

आडवाणी की इस रथ यात्रा का प्रभाव था कि पूरे देश से कारसेवक अयोध्या में जुटने लगे। कारसेवक इस बात पर अडिग थे कि मंदिर निर्माण तो होकर रहेगा चाहे तत्कालीन प्रदेश सरकार कितना भी जोर लगा ले।

इसी कड़ी में 30 अक्टूबर, 1990 को अयोध्या में कारसेवकों पर गोली भी चली जिसमें कोठारी बन्धु समेत तमाम कारसेवक मारे गए। एक कारसेवक ने मरते हुए अपने खून से सड़क पर ‘जय श्री राम’ लिखा। यात्रा शुरू होने के बाद एक ओर देश के करोड़ों हिन्दुओं की आस्था के सेवक आडवाणी खड़े थे तो दूसरी तरफ वीपी सिंह, मुलायम सिंह और लालू यादव जैसे नेता कैसे अधिकाधिक मुस्लिम वोट बटोरे जाएं इसके लिए आपस में ही होड़ कर रहे थे।

इस यात्रा के दो सालों बाद बाबरी को भी कारसेवकों ने गिराया और कोर्ट में अपने अधिकार की जमीन के लिए लड़ते भी रहे। आज अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर बन रहा है। जनवरी 2024 में वह भक्तों के दर्शन के लिए तैयार हो जाएगा। लालकृष्ण आडवाणी, स्वर्गीय अशोक सिंहल और स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपेयी उस पीढ़ी में हिन्दू स्वाभिमान जगा रहे थे जिसको दशकों से नेहरू के आदर्शवाद और इंदिरा के साम्यवाद के प्रेम के बूटों तले रौंद दिया गया था।

‘कहीं भी बलात्कार हो, उसमें साधु शामिल होता है’: असम में हिंदुओं के खिलाफ जहर उगलने वाला कॉन्ग्रेस MLA आफताबुद्दीन मोल्ला गिरफ्तार

हिंदुओं के खिलाफ जहर उगलने वाले कॉन्ग्रेस विधायक आफताबुद्दीन मोल्ला (Aftabuddin Mollah) को असम पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। मोल्ला पर हिंदू संतों, पुजारियों और नामघरिया के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप है। उसके खिलाफ दिसपुर थाने में धार्मिक भावनाओं को आहत करने सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज हुआ था।

असम के DGP जीपी सिंह 8 नवम्बर 2023 को बताया कि आरोपित आफताबुद्दीन मोल्ला के खिलाफ असम के दिसपुर थाने में IPC की धारा 295(a), 153A(1)(b) और 505(2) के तहत केस दर्ज हुआ है। आरोपित विधायक को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में शिकायतकर्ता गुवाहाटी के रहने वाले दीपक कुमार दास हैं। शिकायत में दीपक ने विधायक के बयान से अपनी धार्मिक भावनाएँ आहत होने का आरोप लगाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक असम के जलेश्वर से विधायक आफताबुद्दीन मोल्ला ने 4 नवम्बर 2023 को गोलपारा में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा था, “कहीं भी बलात्कार हो उसमें साधु या नामघरिया (वैष्णव मठों की देखरेख करने वाले) शामिल होते हैं। वे हिंदू पुजारियों के गुनाहों को छिपाने के लिए मुस्लिमों पर आरोप लगाते हैं।”

उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल है। कथित तौर पर सभा में शामिल कुछ लोगों ने ताली बजाकर कॉन्ग्रेस विधायक के इस बयान का समर्थन भी किया। मंच पर मुस्लिम समाज और कॉन्ग्रेस से जुड़े लोग मौजूद थे।

मोल्ला पर कार्रवाई की माँग करते हुए बीजेपी ने कहा है कि कॉन्ग्रेस का इतिहास ही हिन्दू विरोधी है। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने वीडियो जारी कर कहा है कि इससे पहले भी कॉन्ग्रेस ने हिन्दू आतंकवाद, राम को काल्पनिक बताना, श्रीकृष्ण द्वारा जिहाद सिखाना जैसी हरकतें करती आई है।