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गले से क्रॉस निकाला, घर से निकाल दी बाइबिल, उठा ली हनुमान चालीसा… जौनपुर में 310 लोगों ने की घर-वापसी, शुद्धिकरण के लिए हुआ हवन

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में 10 साल पहले हिन्दू से ईसाई बनाए गए 36 परिवारों ने घर वापसी की है। इन सभी का वैदिक विधि-विधान से शुद्धिकरण हुआ। घर वापसी करने वाले कुल लोगों की संख्या 310 बताई जा रही है। इसमें मुस्लिम परम्परा को मानने वाले 5 अन्य परिवार के लोग भी शामिल हैं। सनातन में वापस आने वालों में महिलाएँ, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं। इन सभी ने माना कि उन्होंने किसी के बहकावे में आकर हिन्दू धर्म छोड़ दिए थे। सामूहिक घर वापसी का यह कार्यक्रम रविवार (5 नवम्बर, 2023) को सम्पन्न हुआ।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सामूहिक घर-वापसी का यह कार्यक्रम बरसठी थाना क्षेत्र के गाँव सरसरा में आयोजित हुआ था। कार्यक्रम का आयोजन ‘संत रविदास धर्म रक्षा समिति’ द्वारा किया गया। घर-वापसी करने वाले लोगों ने बताया कि लगभग 10 साल पहले उन्हें राजेंद्र चौहान नाम का पादरी मिला था। इस पादरी के प्रभाव में आ कर धीरे-धीरे गाँव और आसपास के 30 परिवार के 310 लोगों ने हिन्दू धर्म छोड़ कर ईसाइ मत अपना लिया था। इन परिवारों में अधिकतर अनुसूचित जाति (SC) वर्ग से थे।

घर-वापसी कार्यक्रम का आयोजन करने वाले लोगों में स्थानीय निवासियों के अलावा काशी के संत मौजूद थे। उन्होंने बताया कि ईसाई मत अपनाने के बावजूद इन सभी परिवारों का इनके मूल धर्म से जुड़ाव बना रहा। ये सभी दुर्गा पूजा में भी शामिल होते रहे। विश्व हिन्दू परिषद के सदस्यों ने सभी को गंगाजल और हनुमान चालीसा दे कर सनातन धर्म की विशेषताओं के बारे में बताया। आयोजकों और घर-वापसी करने वालों ने मिल कर सामूहिक हवन में भी हिस्सा लिया। इस दौरान सभी ने हिन्दू देवी-देवताओं के जयकारे लगाए।

कार्यक्रम के दौरान घर-वापसी करने वालों ने अपने गले से क्रॉस उतार कर और बाइबिल को घर से निकाल कर अपनी जाति के मुखिया को सौंप दिया। इसी बीच मुस्लिम मत को मानने वाले नट बिरादरी के 5 परिवारों ने सनातन धर्म में आस्था जताई। वो सब भी घर वापसी के लिए हो रहे यज्ञ में शामिल हुए और आगे से हिन्दू धर्म में संस्कारों के मुताबिक जीवन जीने का संकल्प लिया।

ट्रायल में लोगों के आकर्षण के केंद्र बन रही ‘वन्दे साधारण’ एक्सप्रेस, ट्रेन के साथ तस्वीरें ले रहे लोग: पुश-पुल तकनीक वाली इस रेलगाड़ी के बारे में जानिए सब कुछ

भारतीय रेलवे में जल्द ही शामिल होने वाली नई ट्रेन ‘वन्दे साधारण’ गुजरात के वड़ोदरा पहुँची है। रेलवे इस ट्रेन का ट्रायल कर रहा है। इसी संबंध में यह पहले चेन्नई की फैक्ट्री से मुंबई और अब मुंबई से सोलापुर आदि होते हुए वड़ोदरा पहुँची है।

इससे पहले इस वन्दे साधारण ट्रेन की कई नई फोटो भी सामने आ चुकी हैं। यह वन्दे साधारण ट्रेन अन्य ट्रेनों से कहीं अलग है। इसके नई तरह के डिजाइन और आकर्षक लुक के कारण इसे सोशल मीडिया पर भी काफी सराहा जा रहा है। जहाँ भी यह ट्रेन पहुँच रही है वहां लोग इसके फोटो वीडियो बना रहे हैं।

अभी वन्दे साधारण का ट्रायल रन किया जा रहा है, इस दौरान इसकी कमियों को परखा जाएगा। यदि सब कुछ सही रहा तो जल्द ही इस ट्रेन को यात्रियों को सेवा के लिए लाया जाएगा। कहा जा रहा है कि रेलवे इस वर्ष के अंत तक इस ट्रेन को आम जनता के लिए चालू कर देगा।

इस ट्रेन के लिए सोशल मीडिया पर भी माँग हो रही है। लोग अपने-अपने क्षेत्रों से वन्दे साधारण ट्रेनों को चलाने की माँग कर रहे हैं। गौरतलब है कि यह ट्रेन वन्दे भारत की तर्ज पर बनाई गई है लेकिन इसका किराया काफी कम होगा। इस ट्रेन को मुख्यतः उन रूट पर चलाया जाएगा जहाँ यात्री प्रीमियम ट्रेनों के साथ ही साधारण ट्रेनों की माँग कर रहे हैं।

इन ट्रेनों के आने से साधारण ट्रेनों में यात्रा करने वाले यात्रियों को काफी सुविधा होगी। ज्यादा साधारण डिब्बे लगे होने के कारण दिवाली, छठ और भाईदूज पर ट्रेनों के लिए होने वाली समस्याओं को भी कम किया जा सकेगा। हालाँकि, इस बार भी भारतीय रेलवे ने छठ और दिवाली पर घर जाने वालों के लिए 400 से अधिक विशेष ट्रेने चलाई हैं।

भारतीय रेलवे ने साधारण ट्रेनों में यात्रा करने वालों के लिए जुलाई में घोषणा की थी। बताया गया था कि इन ट्रेनों को ‘वन्दे भारत एक्सप्रेस’ जैसा ही बनाया जाएगा। यह नॉन-AC ट्रेन होंगी और इनका किराया भी ‘वन्दे भारत एक्सप्रेस’ से कम होगा। इन ट्रेनों को अभी ‘वन्दे साधारण’ ट्रेन कहा जा रहा है।

अब इन ट्रेनों के बारे में और जानकारी सामने आई है। सबसे पहली ट्रेन की कई तस्वीरें भी सामने आई हैं। बताया गया है कि इन ट्रेनों में कुल 22 डिब्बे होंगे। 22 में से 12 डिब्बे स्लीपर, 8 डिब्बे द्वितीय श्रेणी (बैठने वाले) और 2 डिब्बे लगेज रैक के होंगे।

इस ट्रेन में दोनों तरफ एक-एक इंजन लगाया जाएगा। ट्रेन को पुश-पुल तकनीक पर चलाया जाएगा ताकि यह ज्यादा रफ़्तार में चले। पुश-पुल के अंतर्गत आगे वाला इंजन गाड़ी को खींचता है जबकि पीछे लगा हुआ इंजन धक्का लगाता है। यह ‘वन्दे भारत एक्सप्रेस’ से अलग तकनीक है। वन्दे भारत में इंजन के लिए अलग से कोई कोच नहीं होता बल्कि सभी डिब्बे ‘सेल्फ-प्रोपेल्ड’ (खुद से चलने वाले/स्वचालित) होते हैं।

इस ट्रेन के दोनों इंजन WAP-5 सीरीज के होंगे। यह इंजन भारतीय रेलवे की मध्यम दूरी की तेज चलने वाली गाड़ियों में लगाए जाते हैं। इस ट्रेन की अधिकतम रफ़्तार 130 किलोमीटर/घंटा होगी जबकि ‘वन्दे भारत एक्सप्रेस’ 160 किलोमीटर/घंटा की रफ़्तार से चलने में सक्षम हैं।

इस ट्रेन का डिजाइन भी अभी चलने वाली अन्य ट्रेनों से अलग होगा। इन ट्रेनों को ‘वन्दे भारत’ की तरह ही अलग तरीके से डिजाइन किया जाएगा। अभी सामने आई तस्वीरों से पता चलता है कि पहली ‘वन्दे साधारण’ ट्रेन को भगवा और ग्रे रंग में रंगा गया है।

भगवा रंग का इस्तेमाल इससे पहले केरल के कासरगोड से तिरुवनंतपुरम के बीच चलने वाली ‘वन्दे भारत एक्सप्रेस‘ में किया गया था। इसकी सोशल मीडिया पर लोगों ने काफी तारीफ़ की थी। इस ट्रेन का ट्रायल अक्टूबर माह के अंत तक शुरू हो जाने की आशा की जा रही है।

भारत में पहली ‘वन्दे भारत एक्सप्रेस’ फरवरी 2019 में नई दिल्ली से श्री माता वैष्णो देवी कटरा के बीच चलाई गई थी। इसके पश्चात ट्रेन में और सुधार करके ‘वन्दे भारत 2.0’ लाई गई थी। अब तक 34 ‘वन्दे भारत एक्सप्रेस’ चलाई जा चुकी हैं। अभी चलाई जाने वाली ‘वन्दे भारत एक्सप्रेस’ में केवल चेयरकार (कुर्सीयान) ही होते हैं जबकि भविष्य में इसमें स्लीपर डिब्बे भी होंगे। रेलवे ने यह योजना बनाई है कि आने वाले समय में देश में 200 नई ‘वन्दे भारत एक्सप्रेस’ चलाई जाएँ। इसके लिए निविदाएँ भी जारी कर दी गई हैं।

url: Vande Sadharan train spotted in vadodara to be launched soon

‘ये सनातन परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास’: अब हरिगढ़ के नाम से जाना जाएगा अलीगढ़! सर्वसम्मति से पारित हुआ नाम बदलने वाला प्रस्ताव

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले का नाम बदल कर हरिगढ़ करने की कवायद शुरू हो चुकी है। जिले के सभी पार्षदों ने इस बदलाव के लिए अपनी सहमति दे दी है। महापौर के माध्यम से अब यह प्रस्ताव शासन को अंतिम निर्णय के लिए भेजा जाएगा। अलीगढ़ के जनप्रतिनिधियों ने इसे सनातन परम्परा को आगे बढ़ाने का प्रयास बताया है। यह निर्णय सोमवार (6 नवम्बर, 2023) को लिया गया है।

अलीगढ़ के महापौर प्रशांत सिंघल ने ANI से इस बावत बात की है। उन्होंने बताया कि इस माँग को सोमवार को हुई मीटिंग में पार्षद संजय पंडित ने उठाया था। संजय ने इसका एक प्रस्ताव भी बैठक में पेश किया। अलीगढ़ को हरिगढ़ करने की माँग वाले इस प्रस्ताव को सभी पार्षदों ने सर्वसम्मति से स्वीकार भी कर लिया। महापौर के मुताबिक, अब इस प्रस्ताव पर शासन के अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा है। साथ ही उन्होंने सकारात्मकता से आशा जताई कि शासन इस माँग को स्वीकार कर के अलीगढ़ का नाम हरिगढ़ रखेगा।

अलीगढ़ के महापौर प्रशांत सिंघल ने आगे कहा, “हमारी पुरानी सभ्यता, संस्कृति और सनातन धर्म की परम्परा रही है उसको ही आगे बढ़ाते हुए हम सब जनप्रतिनधियों ने यह माँग उठाई है।” बताते चलें कि अगस्त माह 2023 में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की पुण्यतिथि के कार्यक्रम में शामिल हुए उत्तर प्रदेश के डिप्टी CM केशव प्रसद मौर्य ने भी अलीगढ़ को हरिगढ़ कह कर सम्बोधित किया था। तब उन्होंने लोगों से नारे लगवाने के दौरान कहा था, “आप दोनों हाथ उठाकर बोलिए जय श्री राम, अरे हरिगढ़ वालों और जोर से बोलिए जय श्री राम।”

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार इस से पहले भी कई महत्वपूर्ण स्थानों का नामकरण उनके प्राचीन वैदिक नामों से कर चुकी है। इसमें इलाहाबाद को प्रयागराज और फैज़ाबाद को अयोध्या का दिया गया नाम प्रमुख है। हिन्दू संगठन लम्बे समय से अलीगढ़ नाम नाम बदल कर हरिगढ़ करने की माँग उठाते रहे हैं।

‘किसी तरह रोको पराली जलाना, ये राजनीतिक मसला नहीं’: पंजाब सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने चेताया, केजरीवाल सरकार से पूछा – कब चालू होगा स्मॉग टॉवर?

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (7 नवंबर, 2023) को पराली जलाने को लेकर दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बिगड़ती जा रही हवा की गुणवत्ता के मद्देनजर इन सरकारों सख्त निर्देश दिए।

कोर्ट ने कहा कि इन राज्यों से कहा कि किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएँ। सर्वोच्च न्यायालय ने पराली जलाने को वायु प्रदूषण में अहम योगदान करने के तौर पर गिना है। जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस सुधांशु धूलिया की बेंच ने पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान राज्यों के बीच कल एक बैठक करने का निर्देश भी दिया ताकि पराली का जलाना तुरंत बंद हो।

इस दौरान पंजाब सरकार के कोर्ट में पराली जलाने की तुलना हरियाणा से करने पर से बेंच भड़क गई। पंजाब सरकार ने पराली जलाने के मामले में अपना बचाव करते हुए कहा था कि उनके यहाँ से ज्यादा पराली तो हरियाणा में जलाई जा रही है।

इससे नाराज होकर कोर्ट ने कहा आप राजनीतिक बात कर रहें हैं, जबकि ये राजनीतिक मसला है ही नहीं। जस्टिस ने संजय किशन कौल ने पंजाब सरकार को आड़े हाथों लेते हुए आईना दिखाते हुए कहा कि वो बीते दिनों पंजाब से गुजर रहे थे और उन्होंने सड़क के दोनों तरफ पराली जलती हुई खुद देखी है।

जस्टिस कौल ने कहा कि इसे रोकने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे। उन्होंने पंजाब सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि इसे नजरअंदाज करना पंजाब सरकार को महँगा पड़ सकता है। कोर्ट ने ये भी कहा कि पराली को जलाने से रोकने के लिए हम कल तक का भी कतई इंतजार नहीं कर सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “दिल्ली साल-दर-साल गंभीर वायु प्रदूषण से नहीं जूझ सकती। समाधान क्या है? जो दिल्ली को इससे न गुजरना पड़ेगा।” कोर्ट ने आगे कहा कि दिल्ली और पंजाब दोनों में AAP की सरकार है। पराली जलाने के मामले में राजनीतिक दोष और तुलना करने से फायदा नहीं होगा।

कोर्ट ने पंजाब सरकार से कहा कि इसे रोकना आपका काम है, हम ये नहीं जानते की ये कैसे होगा, लेकिन इस पर रोक लगनी ही चाहिए। इसके लिए आपको तत्काल और प्रभावी कदम उठाने होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक की पूरी निगरानी में स्थानीय राज्य गृह अधिकारी को पराली जलाने से रोकने की जिम्मेदारी दी। कोर्ट ने दिल्ली में स्मॉग टॉवर के बंद होने को लेकर खासी नाराजगी जाहिर की।

कोर्ट ने दिल्ली सरकार से सवाल करते हुए कहा कि स्मॉग टॉवर कब काम करेंगे। हम ये नहीं जानते सरकार कैसे इन्हें शुरू करेगी। इन्हें तुरंत शुरू होना चहिए। कोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा कि वो पक्का करें कि खुले में कूड़ा न जले। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और पंजाब से धान की वैकल्पिक फसल तलाशने को कहा।

इसके साथ ही कोर्ट ने दिवाली पर पटाखे जलाने को लेकर भी निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने कहा पर्यावरण को प्रदूषित कर त्योहार नहीं मनाया जा सकता है। अगर आप ऐसा करते हैं तो आप स्वार्थी हैं। कोर्ट ने कहा कि आजकल बच्चों की तुलना में बड़े अधिक पटाखे जला रहे हैं। कोर्ट ने माना कि पटाखे जलाने पर तब-तक पूरी रोक नहीं लग सकती जब-तक की लोग खुद इसके लिए जागरूक न हो। कोर्ट ने ये भी कहा कि राज्य सरकारों को विज्ञापन के जरिए लोगों को पटाखे न जलाने को लेकर जागरूक करना चाहिए।

सरकारी संस्था FSSAI दीपावली को बता रहा ‘जश्न-ए-रोशनी’? सोशल मीडिया पर वायरल हुआ पोस्टर, अब सामने आई सच्चाई

सोशल मीडिया पर एक पोस्टर वायरल हो रहा है। सरकारी संस्था ‘भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI)’ के नाम से वायरल इस पोस्टर में दीपावली को ‘जश्न-ए-रौशनी’ का नाम दिया गया है। इस संबंध में 9 नवम्बर, 2023 को दिल्ली स्थित FSSAI मुख्यालय पर एक कार्यक्रम आयोजन की बात भी पोस्टर में कही गई है।

FSSAI जश्न ए रोशनी

सोशल मीडिया पर यह पोस्टर सामने आने के बाद कई लोगों ने मोदी सरकार पर प्रश्न उठाए और कहा कि आखिर हिन्दू त्योहारों का उर्दू में नाम लिख कर इस्लामीकरण क्यों किया जा रहा है? कई लोगों ने मोदी सरकार पर इस्लामी तुष्टिकरण में लीन होने के आरोप भी लगाए।

एक यूजर आनंद अटल ने लिखा. “जश्न ए रोशनी – यह क्या है… दीपावली है ईद?”

हालाँकि, अब FSSAI ने खुद ही सामने आकर इसकी सच्चाई बता दी है। FSSAI ने ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “FSSAI कथित तौर पर ‘जश्न-ए-रोशनी’ नाम का कोई भी कार्यक्रम आयोजित नहीं कर रहा है, जैसा की सोशल मीडिया में फैलाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर साझा की जा रही तस्वीर ना ही FSSAI ने जारी की है और ना ही उसे मंजूरी दी है।”

गौरतलब है कि FSSAI देश में खाद्य पदार्थों के मानक तय करने एवं जाँचने वाली एजेंसी है जो कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत आती है। यह एजेंसी देश भर में खाने-पीने के सामान का निर्माण करने वाली कम्पनियों, दुकानों और रेस्टॉरेंट आदि को प्रमाण पत्र जारी करती है। इसे 2006 में बनाया गया था।

इससे पहले भी कई बार दीवाली का नाम बदल कर इस्लामिक नाम देने के प्रयास किए गए हैं। कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर ने वर्ष 2020 में दीवाली को ‘जश्न-ए-चिराग‘ बता दिया था। उन्होंने इस शब्द का उपयोग एक टीवी एकंर को दीवाली की बधाई देने के लिए किया था। एक फैशन कम्पनी ‘फैबइंडिया’ ने भी दीवाली को ‘जश्न-ए-रिवाज‘ बताने की कोशिश की थी।

गरीब है एक चौथाई सामान्य वर्ग, सबसे ज़्यादा सरकारी नौकरियाँ यादवों के पास: बिहार विधानसभा में रखे गए जाति जनगणना के आँकड़े, राज्य की महज 7% आबादी ग्रेजुएट

बिहार सरकार ने जातिगत जनगणना के आँकड़ों के बाद अब विधानसभा के पटल पर पूरे बिहार की शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति का आँकड़ा रखा है। ये आँकड़ा जातिवार है। बिहार में कुल 2 करोड़ 76 लाख 68 हजार 930 परिवार हैं, जिसमें से 94 लाख 42 हजार 786 परिवार गरीब हैं। ये कुल परिवारों का 34.13 प्रतिशत आँकड़ा है। इस गणना के हिसाब से बिहार में सामान्य वर्ग के कुल 43 लाख 28 हजार 282 परिवार हैं, जिसका 25 प्रतिशत से अधिक हिस्सा गरीबी में जीवन यापन कर रहा है।

बिहार में आर्थिक आधार पर जातीय आँकड़ा

बिहार विधानमंडल के पटल पर रखी गई रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में पिछड़ा वर्ग के कुल 33.16 प्रतिशत, सामान्य वर्ग के कुल 25.09 प्रतिशत, अति पिछड़ा वर्ग के 33.58 प्रतिशत, अनुसूचित जाति वर्ग के 42.93 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति वर्ग के कुल 42.7 प्रतिशत परिवार गरीब हैं। यही नहीं, सामान्य वर्ग में भूमिहार, ब्राह्मण, राजपूत जैसे तीन सबसे समृद्ध बताई जाने वाली जातियों के करीब 25 प्रतिशत परिवार गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं।

इसमें सबसे ज्यादा भूमिहार के 27.58 प्रतिशत परिवार गरीब हैं, तो ब्राह्मणों के 25.3 प्रतिशत और राजपूतों के 24.89 प्रतिशत और कायस्थों के कुल 13.83 प्रतिशत परिवार गरीब हैं।

अनुसूचित जातियों की स्थिति बदतर

बिहार में अनुसूचित जातियों की आर्थिक रूप से स्थिति बदतर हालत में है। अनुसूचित जातियों में मुसहरों के सबसे ज्यादा 54.64 प्रतिशत परिवार गरीब हैं। अहिरवार के 42.06 प्रतिशत परिवार गरीब हैं, बिहार सरकार के आँकड़ों में बताया गया है कि ‘डोम’ जाति के 53.10 प्रतिशत परिवार गरीब हैं, तो 49.06 प्रतिशत नट परिवार गरीब हैं। दुसाध जाति के 39.36 प्रतिशत परिवार गरीब हैं, तो पासी जाति के 38.24 प्रतिशत, धोबी जाति के 35.82 प्रतिशत परिवार गरीब हैं।

ये है बिहार की शैक्षणिक स्थिति, महज 7 प्रतिशत ग्रेजुएट

बिहार में शिक्षा की हालत बेहद खराब है। पूरे बिहार की करीब एक चौथाई आबादी 5वीं तक भी नहीं पढ़ी है। बिहार की 22.67 प्रतिशत आबादी के पास वर्ग 1 से 5 तक की शिक्षा ही है। वहीं, कक्षा 6 से 8 तक की शिक्षा महज 14.33 प्रतिशत आबादी के पास है। पूरे बिहार के सिर्फ 14.71 लोग ही 9वीं से 10वीं तक की शिक्षा ले पाए हैं, तो 12वीं तक की शिक्षा सिर्फ 9.19 प्रतिशत आबादी के पास है। पूरे राज्य में महज 7 प्रतिशत लोग ही ग्रेजुएट हैं।

बिहार में सबसे ज्यादा नौकरियाँ यादवों के पास, सामान्य वर्ग का भी दबदबा

बिहार सरकार द्वारा सदन में रखे गए आँकड़ों के मुताबिक, सबसे ज्यादा नौकरियाँ बिहार में यादव जाति के पास है। बिहार में 2 लाख 89 हजार 538 नौकरियाँ अकेले यादवों के पास है। दूसरे नंबर पर भूमिहार लोग हैं। भूमिहारों के पास 1 लाख 87 हजार 256 नौकरियाँ हैं। बिहार में कुशवाहा के पास 1 लाख 12 हजार 106 नौकरियाँ हैं। कुशवाहा की कुल आबादी का 2.04 हिस्सा सरकारी नौकरी में है।

सबसे ज्यादा मजबूत कुर्मी हैं। संख्या बल में कम होने के बावजूद कुर्मियों की कुल आबादी का 3.11 प्रतिशत हिस्सा सरकारी नौकरियों में है। कुल 1 लाख 17 हजार 171 सरकारी नौकरियाँ कुर्मियों के पास है। इसके अलावा ब्राह्मणों के पास 1.72 लाख सरकारी नौकरियाँ, राजपूतों के पास 1.71 लाख सरकारी नौकरियाँ और कायस्थों के पास 52.49 हजार नौकरियाँ हैं। सबसे ज्यादा कायस्थों की 6.68 आबादी सरकारी नौकरी में है।

6 साल की बच्ची का गुदा छुआ या भीतर डाली उंगली?: कानूनी दाँव-पेंच में अपराधी की सजा 5 साल कम, दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार (6 नवंबर 2023) को अपने एक फैसले में कहा है कि किसी नाबालिग पीड़िता के प्राइवेट पार्ट को कपड़ों के ऊपर से छूना पॉक्सो एक्ट के तहत पेनिट्रेटिव यौन अपराध नहीं माना जा सकता है। यह मामला 6 साल की एक बच्ची से जुड़ा हुआ है, जिसका यौन शोषण उसके ट्यूशन टीचर के भाई ने 5 अगस्त 2016 को किया था। इस अपराधी को निचली अदालत ने 10 साल जेल और जुर्माने की सजा सुनाई थी। हाई कोर्ट के फैसले में अब दोषी को 5 साल की सजा सुनाई गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला दिल्ली के तीस हजारी न्यायिक क्षेत्र का है। 5 अगस्त 2016 को 6 साल की एक बच्ची अपनी महिला ट्यूशन टीचर के घर पढ़ने गई थी। इस दौरान टीचर का भाई बच्ची को अकेला पाकर उसके साथ छेड़खानी करता है। 3 दिनों बाद 8 अगस्त को इस मामले की शिकायत पुलिस में दी जाती है। पुलिस को दिए गए बयान (CrPC 161) में बच्ची ने बताया कि आरोपित ने उसके प्राइवेट पार्ट (गुदा) पर हाथ लगाया। इसकी वजह से पीड़िता ने खुद को दर्द होने की बात कही। इस आधार पर बच्ची का मेडिकल टेस्ट करवाया गया।

लाहौरी गेट थाना पुलिस ने इस मामले में 9 अगस्त को IPC की धारा 376 व पॉक्सो एक्ट के सेक्शन 6 के तहत FIR दर्ज करके उसी दिन आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। 9 अगस्त को अदालत में पीड़िता ने अपना बयान (CrPC 164) दर्ज करवाया। इस बयान में 6 साल की पीड़ित बच्ची ने बताया कि आरोपित ने उसके प्राइवेट पार्ट (गुदा) में उंगली डाली थी। इसके चलते आरोपित के नाखूनों से पीड़िता के प्राइवेट पार्ट में घाव हो गया था। साथ ही विरोध करने पर गला दबाया और किसी को बताने पर जान से मार डालने की भी धमकी दी थी।

तीस हजारी कोर्ट में यह मामला ट्रायल पर चला और आरोपित को 10 साल की जेल के साथ 5 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई। इसी सजा को आरोपित पक्ष ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका लगा कर चुनौती दी थी। इसी याचिका पर जस्टिस अमित बंसल ने सुनवाई की।

दिल्ली हाईकोर्ट में बचाव पक्ष ने निचली अदालत के फैसले को त्रुटिपूर्ण बताया। आरोपित के वकीलों ने बताया कि निचली अदालत ने पीड़िता के CrPC 161 और CrPC 164 के बयानों में आए विरोधाभास पर ध्यान नहीं दिया। साथ ही मेडिकल रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया, जिसमें बच्ची के मेडिकल परीक्षण में किसी घाव के निशान नहीं पाए गए थे।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने बताया कि आरोपित के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के सेक्शन 6 के तहत अपराध नहीं बनता है। इसी केस की सुनवाई के दौरान ‘सिम्पल टच’ को अदालत ने पॉक्सो एक्ट की धारा 3 (C) के तहत अपराध नहीं माना। जस्टिस बंसल के मुताबिक अभियोजन पक्ष इस बात के सबूत नहीं पेश कर पाया कि पीड़िता को किसी प्रकार की चोट लगी या घाव हुआ था। हालाँकि हाईकोर्ट ने आरोपित को पॉक्सो एक्ट के सेक्शन 10 के तहत दोषी मानते हुए 10 साल की सजा को 5 साल कर दिया।

मात्र साढ़े 27 रुपए में ‘भारत आटा’, 25 रुपए किलो प्याज: जानिए कहाँ-कहाँ मिलेगा, और क्या-क्या कम कीमत पर बेच रही मोदी सरकार

मोदी सरकार ने देशवासियों को कम कीमत पर आटा उपलब्ध करवाने के लिए ‘भारत आटा’ की बिक्री चालू की है। इस ‘भारत आटा’ को बेचने वाली 100 गाड़ियों को सोमवार (6 नवम्बर, 2023) को केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण, वस्त्र और वाणिज्य तथा उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हरी झंडी दिखाई।

अब यह भारत आटा देश ₹27.5/किलोग्राम की दर से केन्द्रीय भण्डार, नैफेड और NCCF तथा इन गाड़ियों से खरीदा जा सकेगा। इसका विस्तार सहकारी और अन्य दुकानों पर भी किया जाएगा, जिससे आसानी से जनता तक इसकी पहुँच हो सके।

इस ‘भारत आटा’ के लिए केंद्र सरकार ने 2.5 लाख मीट्रिक टन गेहूँ को ₹2150/क्विंटल की दर से नैफेड, NCCF और अन्य सहकारी तथा अर्ध-सहकारी संगठनों को दिया गया है। इसको पीस कर ‘भारत आटा’ के रूप में बाजार में उतारा जाएगा। जहाँ दाल 60 रुपए किलो बेचा जाएगा, वहीं प्याज 25 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बेचा जा रहा है।

अभी तक सरकार राशन वितरण योजना के तहत लोगों को गेहूँ कम कीमत पर देती आई है। ‘भारत आटा’ के जरिए उस वर्ग को भी इसमें जोड़ने का प्रयास किया जाएगा जो कि राशन वितरण के दायरे में नहीं है या फिर पैकेटबंद आटा लेना चाहते हैं। केंद्र सरकार पहले से ही बाजार में चना दाल और प्याज, दोनों ही कम कीमतों पर बेच रही है। अब इसमें ‘भारत आटा’ शामिल कर लिया गया है। केंद्र सरकार का कहना है कि उसने यह कदम बाजार में कीमतों को स्थिर रखने के लिए उठाया है।

गौरतलब है कि अन्य निजी कम्पनियों के आटे की कीमत इस समय बाजार में ₹35 से अधिक है। कई आटे की कंपनियाँ ₹50-₹60 में भी आटा बेचती हैं। ‘भारत आटा’ के जरिए ग्राहकों को कम कीमत में आटा लेने का मौका मिलेगा। हाल ही में देश में खाद्य सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने ऐलान किया था कि प्रति व्यक्ति मुफ्त 5 किलो राशन की योजना अगले पाँच वर्षों तक जारी रहेगी। इस योजना से 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन दिया जाएगा।

सरकार का यह कदम महँगाई को कम करने में भी काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध छिड़ने के बाद आए ऊर्जा और खाद्य संकट के कारण महँगाई का कड़ा रुख लगातार बना हुआ है। हालाँकि, सरकार ने अपने क़दमों से इसे नियन्त्रण में किया है लेकिन खाद्य सुरक्षा की दृष्टि से यह कदम भी उठाए जा रहे हैं।

गरीब कल्याण योजना के तहत राशन वितरण, चावल का निर्यात रोकना और कीमत नियन्त्रण के चलते सितम्बर माह में देश में महँगाई का स्तर घट कर 5.02% पर आ गया था। इससे पहले अगस्त माह में यह 6.83% पर था। रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) महँगाई को 2%-6% के बीच रखने का प्रयास रखती है। इससे ज्यादा होने पर वह मौद्रिक नीति में बदलाव पर विचार करती है।

मूर्ति तोड़ कर फेंक दी, मुँह पर कर दी लैट्रिन, मंदिर के प्रांगण में पेशाब किया, भगवा वस्त्रों में भर दिया मल: प्रधान शखावत हुसैन बोले – असामाजिक तत्वों की करतूत

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में एक हिन्दू मंदिर में घुस कर मूर्तियों को क्षतिग्रस्त किया गया है। मंदिर की मूर्ति को तोड़ कर बजरंग बली के मुँह पर लैट्रिन कर दी गई है। परिसर में भगवा वस्त्र में मल भर के रख दिया गया और प्रांगण में पेशाब भी किया गया है। पुलिस ने केस दर्ज कर के आरोपित की तलाश शुरू कर दी है। मंदिर को साफ़ करवाया गया है। सोमवार (6 नवम्बर, 2023) को हुई इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में गुस्सा है।

यह मामला मुरादाबाद जिले के थाना क्षेत्र सोनकपुर का है। यहाँ के अजमत नगर चौपड़ा इलाके में एक प्राचीन शिव मंदिर है। आसपास के हिन्दुओं की आस्था के केंद्र इस मंदिर में तमाम अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियाँ स्थापित हैं। सोमवार की सुबह कुछ स्थानीय लोग मंदिर में पूजा करने पहुँचे तो मंदिर परिसर का माहौल अस्त-व्यस्त दिखा। गर्भगृह के पहले ही भगवा रंग के गमछे में किसी ने मल भर के फेंक रखा था। अभी तक यह कन्फर्म नहीं हो पाया है कि यह मल मानव का है या किसी जानवर का।

इसके अतिरिक्त मंदिर परिसर में पेशाब भी किया गया था। जब श्रद्धालु गर्भगृह के पास पहुँचे तब उन्हें बजरंग बली की मूर्ति टूटी हालत में मिली। अनुमान है कि किसी व्यक्ति ने इस घटना को रात के अँधेरे में अंजाम दिया है। मंदिर के हालत देख कर लोगों में नाराजगी फ़ैल गई। मामले की जानकारी मिलते ही मौके पर पुलिस बल पहुँचा। पुलिस ने फ़ौरन ही अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी। मंदिर परिसर को साफ करवाया गया और नाराज लोगों को समझाया गया।

मंदिर की देखभाल करने वाले भूरेलाल ने बताया कि घटना के समय वो सो रहे थे। सुबह उन्हें पता चला कि बजरंग बली की मूर्ति को थोड़ी दूर ले जा कर फेंक दिया गया है। भूरेलाल जब मूर्ति के पास गए तो देखा कि वो क्षतिग्रस्त है और उसके मुँह पर किसी ने लैट्रीन कर दिया था। भूरेलाल के मुताबिक अभी तक किसी को पकड़ा नहीं जा सका है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि उनको किसी पर शक भी नहीं है और न ही उन्होंने किसी को देखा।

गाँव के प्रधान शखावत हुसैन ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि घटना को किसी असामाजिक तत्व ने अंजाम दिया है।

अमेरिका में यहूदी बुजुर्ग को भारी पड़ा हमास समर्थक से बहस करना, मेगाफोन से वार कर मार डाला: इजरायल के विरोध में रैली, फ्रांस में महिला को मारा था चाकू

संयुक्त राज्य अमेरिका के उत्तरी लॉस एंजिल्स में रविवार (5 नवंबर, 2023) को एक यहूदी बुजुर्ग को इजरायल विरोधी प्रदर्शनकारी के साथ बहस की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।

दरअसल, उत्तरी लॉस एंजिल्स शहर के नजदीक वेस्टलेक विलेज में एक फिलिस्तीन समर्थक रैली आयोजित की गई थी। इस दौरान ही इजरायल विरोधी प्रदर्शनकारी ने यहूदी बुजुर्ग के सिर पर मेगाफोन दे मारा। इससे बुजुर्ग की बुरी तरह घायल हो गए। उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहाँ अधिक खून बहने की वजह से उनकी मौत हो गई।

बुजुर्ग की पहचान पॉल केसलर के तौर पर की गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोमवार (6 नवंबर, 2023) को पुलिस अधिकारियों ने इस हादसे की पुष्टि की। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, रैली के दौरान केसलर और एक युवा इजरायल विरोधी समर्थक के बीच तीखी बहस हुई थी।।

इसके बाद आरोपित ने हाथ में पकड़े मेगाफोन से 65 साल के यहूदी शख्स के सिर पर हमला कर दिया। इस वजह से वो जमीन पर गिर पड़े और उनके सिर से बहुत अधिक से खून बहने लगा। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया जहाँ उन्होंने दम तोड़ दिया।

कथित तौर पर उनकी मौत की वजह ‘ब्रेन हैमरेज’ बताई जा रही है। इस घटना से वेस्टलेक विलेज के नजदीक रहने वाला यहूदी समुदाय सदमे में है। वेंचुरा काउंटी शेरिफ कार्यालय (VSCO) ने एक बयान में कहा कि वो घटना की जाँच कर रहे हैं। उसने नफरत में किए गए अपराध (हेट क्राइम) की आशंका से इनकार नहीं किया है। वहीं आरोपित की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है।

एक बयान में, यहूदी फेडरेशन ऑफ ग्रेटर लॉस एंजिल्स ने कहा, “जबकि हम अपने कानूनी अधिकारियों से अधिक जानकारी मिलने का इंतजार कर रहे हैं। हम आपको याद दिलाते हैं कि अकेले इस साल लॉस एंजिल्स में हुआ यह यहूदियों के खिलाफ हुआ चौथा बड़ा अपराध है।”

यहूदी फेडरेशन ने आगे कहा, “सभ्य समाज में हमारे लोगों के खिलाफ हिंसा की कोई जगह नहीं है। हम सुरक्षा की माँग करते हैं। हम अपने समुदाय के खिलाफ हिंसा बर्दाश्त नहीं करेंगे। हम इसे रोकने के लिए हर मुमकिन कोशिश करेंगे।”

गौरतलब है कि शनिवार (7 अक्टूबर, 2023) को हमास के इजरायल पर खौफनाक हमले के बाद के बाद से ही दुनिया भर में यहूदियों के खिलाफ होने वाले अपराधों में बढ़ोतरी हुई। हाल ही में इजरायल-हमास युद्ध के बीच, फ्रांस के औवेर्गने-रोन-आल्प्स इलाके के ल्योन शहर में एक यहूदी महिला को उसके घर में घुस कर चाकू मार दिया गया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अज्ञात हमलावर ने पीड़िता के पेट में दो बार चाकू मारा। हमलावरों ने अपार्टमेंट के दरवाजे पर नाज़ी प्रतीक (जिसे हेकेनक्रूज़ या हुक्ड क्रॉस भी कहा जाता है) भी बनाया। इसके बाद पीड़िता को स्थानीय अस्पताल में ले जाया गया और हल्की चोटों के लिए उसका इलाज किया गया। बताया जा रहा है कि महिला की उम्र लगभग 30 साल के करीब होगी। उसने घंटी की आवाज सुनकर दरवाजा खोला तो उस पर हमला कर दिया गया।

पीड़िता के वकील स्टीफन ड्रेई ने BFMTV को बताया, “महिला, उसका परिवार और यहूदी समुदाय सदमे में है। जब हमने दरवाजा खोला, तो हमें नहीं पता था कि हम यहूदी-विरोधी हमले का शिकार हो सकते हैं, हत्या की कोशिश की जा सकती है।” इस घटना पर ल्योन के मेयर ग्रेगरी डौसेट ने ट्वीट किया, “हिंसा का ऐसा कृत्य कल्पना से परे है। मैं पीड़िता और उसके रिश्तेदारों को अपना पूरा समर्थन देता हूँ।”