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‘पटाखा बैन पूरे देश में लागू, सिर्फ दिल्ली-NCR नहीं’: दीपावली से पहले सुप्रीम कोर्ट का फरमान, कहा – वायु एवं ध्वनि प्रदूषण कम करने के लिए उठाए जाएँ कदम

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर बैन को लेकर दिया गया आदेश पूरे देश पर लागू होता है, किसी भी अन्य जगह पर आदेश लागू करने के लिए नया आदेश निकालने की जरूरत नहीं है। इसका मतलब है कि पटाखों में इस्तेमाल होने वाले रसायनों और उसके पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कारण बताते हुए पूरे देश में अब ये बैन लागू हो गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए पूरे देश में पटाखों पर बैन लगा दिया है। यह आदेश सिर्फ दिल्ली-एनसीआर तक सीमित नहीं होगा, बल्कि पूरे देश पर लागू होगा। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पटाखों से होने वाला प्रदूषण गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। पटाखों से होने वाला वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण और प्रकाश प्रदूषण लोगों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

‘लाइव लॉ’ की रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान सरकार को निर्देश देने की माँग को लेकर ये याचिका जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस एमएम सुंदरेश की पीठ में दायर हुई थी। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि बेरियम पटाखों पर प्रतिबंध और वायु और ध्वनि प्रदूषण को कम करने के मामले में नए निर्देश देने की आवश्यकता नहीं है। उसका पिछला आदेश देश के सभी राज्यों के लिए बाध्यकारी हैं।

जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस एमएम सुंदरेश की पीठ ने कहा, “इस समय, किसी विशेष आदेश की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि इस न्यायालय ने याचिकाओं की सुनवाई के दौरान कई आदेश पारित किए हैं, जहाँ वायु के साथ-साथ ध्वनि प्रदूषण को कम करने और उससे बचने के लिए कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। इस मामले में भी वही आदेश लागू होंगे। ऐसे में हम स्पष्ट कहते हैं कि राजस्थान राज्य भी इस पर ध्यान देगा और न केवल त्योहारी सीजन के दौरान बल्कि पूरे साल वायु और ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए सभी कदम उठाएगा।

बता दें कि साल 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने कई निर्देश पारित किए थे कि दिवाली से पहले पटाखों में प्रतिबंधित रसायनों का उपयोग न किया जाए। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया था कि पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है और केवल उन्हीं पटाखों पर प्रतिबंध लगाया गया है जिनमें बेरियम का इस्तेमाल होता है। वहीं, 2018 के एक अन्य आदेश के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी निर्देशों के बाद ग्रीन पटाखों को जलाने की अनुमति है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पटाखों से होने वाले प्रदूषण से लोगों को साँस की समस्या, दिल की समस्या, और अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ हो सकती हैं। पटाखों से होने वाला ध्वनि प्रदूषण लोगों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है। पटाखों का उपयोग केवल धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में किया जा सकता है। इन कार्यक्रमों में भी पटाखों का उपयोग सीमित मात्रा में किया जाएगा। पटाखों के निर्माण और बिक्री पर रोक लगा दी गई है।

सिर्फ 1.22% बिहारी ही दूसरे राज्यों में कर रहे काम: संदेह में जाति आधारित जनगणना के आँकड़े, केवल 3.80% लोगों के पास ही दोपहिया वाहन, 9.19% इंटर पास

बिहार सरकार ने जातिगत जनगणना के आँकड़े विधानमंडल के पटल पर रखा। इसमें बताया गया है कि बिहार की अधिसंख्य आबादी, जिसपर प्रवासी होने का ठप्पा लगता है, वो गलत है। बिहार के सिर्फ सवा प्रतिशत लोग ही प्रवासी हैं। बाकी सभी लोग बिहार में ही रहते हैं। बिहार सरकार ने अपनी जातिगत जनगणना के निष्कर्ष जारी किए हैं, जिससे पता चला है कि केवल 1.22 प्रतिशत बिहारी अन्य राज्यों में काम करते हैं।

यह डेटा अतीत में राजनेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए दावों का खंडन करता है, जिन्होंने आरोप लगाया था कि बड़ी संख्या में बिहारी काम की तलाश में अन्य राज्यों में पलायन करने के लिए मजबूर हैं। जनगणना डेटा यह भी दर्शाता है कि 94 प्रतिशत से अधिक बिहारी अपने घरों से जुड़े हैं। इसका मतलब है कि वे या तो बिहार में रह रहे हैं या अन्य राज्यों में काम कर रहे हैं लेकिन नियमित रूप से अपने गृह राज्य लौट रहे हैं। ये आँकड़े संदेह पैदा करने वाले हैं, क्योंकि बिहार के लाखों लोग दिल्ली और मुंबई समेत कई अन्य शहरों में रहते हैं।

बिहार में प्रवासियों की आधिकारिक स्थिति

इस जनगणना के मुताबिक, बिहार में गणना स्थल पर स्थाई रूप से 94.28 प्रतिशत लोग रहते हैं। वहीं, बिहार के अंदर ही अन्य स्थान पर नौकरी या रोजगार करने वालों की आबादी 1.22 प्रतिशत है। इसके अलावा बिहार में ही अन्य जगहों पर शिक्षा के लिए गए लोग कुल 0.39 प्रतिशत हैं। वहीं, अन्य राज्यों में नौकरी या रोजगार करने वाले वालों की संख्या 3.50 प्रतिशत ही है। बिहार की कुल आबादी का 0.17 प्रतिशत लोग दूसरे देशों में काम करते हैं।

वहीं, अन्य राज्यों में शिक्षा ग्रहण करने वालों की संख्या 0.42 प्रतिशत है। इन सबसे में जो सबसे चौंकाने वाला आँकड़ा है, वो है प्रवासी बिहारियों को लेकर किया गया सरकारी दावा। रिपोर्ट के मुताबिक, 94.28 फीसदी लोग बिहार में रह रहे हैं, तो कुल आबादी का केवल 1.22 फीसदी लोग ही बाहर रहते हैं।

गाड़ियों की स्थिति

बिहार में कुल आबादी के 95.49 प्रतिशत लोगों के पास कोई वाहन नहीं है। पूरे राज्य में छह पहिया या अधिक पहिया के वाहन सिर्फ 0.03 प्रतिशत लोगों के पास हैं, तो पूरे राज्य में सिर्फ 0.13 प्रतिशत आबादी के बाद ट्रैक्टर है। वहीं, पूरे राज्य में 0.44 प्रतिशत लोगों के पास ही चार पहिया वाहन हैं। 0.11 प्रतिशत आबादी के पास तीन पहिया वाहन हैं, तो दो पहिया वाहन 3.80 फीसदी लोगों के पास ही है।

बिहार सरकार ने जातिगत जनगणना के आँकड़ों के बाद अब विधानसभा के पटल पर पूरे बिहार की शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति का आँकड़ा रखा है। ये आँकड़ा जातिवार है। बिहार में कुल 2 करोड़ 76 लाख 68 हजार 930 परिवार हैं, जिसमें से 94 लाख 42 हजार 786 परिवार गरीब हैं। ये कुल परिवारों का 34.13 प्रतिशत आँकड़ा है। इस गणना के हिसाब से बिहार में सामान्य वर्ग के कुल 43 लाख 28 हजार 282 परिवार हैं, जिसका 25 प्रतिशत से अधिक हिस्सा गरीबी में जीवन यापन कर रहा है।

बिहार में आर्थिक आधार पर जातीय आँकड़ा

बिहार विधानमंडल के पटल पर रखी गई रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में पिछड़ा वर्ग के कुल 33.16 प्रतिशत, सामान्य वर्ग के कुल 25.09 प्रतिशत, अति पिछड़ा वर्ग के 33.58 प्रतिशत, अनुसूचित जाति वर्ग के 42.93 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति वर्ग के कुल 42.7 प्रतिशत परिवार गरीब हैं। यही नहीं, सामान्य वर्ग में भूमिहार, ब्राह्मण, राजपूत जैसे तीन सबसे समृद्ध बताई जाने वाली जातियों के करीब 25 प्रतिशत परिवार गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं।

इसमें सबसे ज्यादा भूमिहार के 27.58 प्रतिशत परिवार गरीब हैं, तो ब्राह्मणों के 25.3 प्रतिशत और राजपूतों के 24.89 प्रतिशत और कायस्थों के कुल 13.83 प्रतिशत परिवार गरीब हैं।

अनुसूचित जातियों की स्थिति बदतर

बिहार में अनुसूचित जातियों की आर्थिक रूप से स्थिति बदतर हालत में है। अनुसूचित जातियों में मुसहरों के सबसे ज्यादा 54.64 प्रतिशत परिवार गरीब हैं। अहिरवार के 42.06 प्रतिशत परिवार गरीब हैं, बिहार सरकार के आँकड़ों में बताया गया है कि ‘डोम’ जाति के 53.10 प्रतिशत परिवार गरीब हैं, तो 49.06 प्रतिशत नट परिवार गरीब हैं। दुसाध जाति के 39.36 प्रतिशत परिवार गरीब हैं, तो पासी जाति के 38.24 प्रतिशत, धोबी जाति के 35.82 प्रतिशत परिवार गरीब हैं।

ये है बिहार की शैक्षणिक स्थिति, महज 7 प्रतिशत ग्रेजुएट

बिहार में शिक्षा की हालत बेहद खराब है। पूरे बिहार की करीब एक चौथाई आबादी 5वीं तक भी नहीं पढ़ी है। बिहार की 22.67 प्रतिशत आबादी के पास वर्ग 1 से 5 तक की शिक्षा ही है। वहीं, कक्षा 6 से 8 तक की शिक्षा महज 14.33 प्रतिशत आबादी के पास है। पूरे बिहार के सिर्फ 14.71 लोग ही 9वीं से 10वीं तक की शिक्षा ले पाए हैं, तो 12वीं तक की शिक्षा सिर्फ 9.19 प्रतिशत आबादी के पास है। पूरे राज्य में महज 7 प्रतिशत लोग ही ग्रेजुएट हैं।

बिहार में सबसे ज्यादा नौकरियाँ यादवों के पास, सामान्य वर्ग का भी दबदबा

बिहार सरकार द्वारा सदन में रखे गए आँकड़ों के मुताबिक, सबसे ज्यादा नौकरियाँ बिहार में यादव जाति के पास है। बिहार में 2 लाख 89 हजार 538 नौकरियाँ अकेले यादवों के पास है। दूसरे नंबर पर भूमिहार लोग हैं। भूमिहारों के पास 1 लाख 87 हजार 256 नौकरियाँ हैं। बिहार में कुशवाहा के पास 1 लाख 12 हजार 106 नौकरियाँ हैं। कुशवाहा की कुल आबादी का 2.04 हिस्सा सरकारी नौकरी में है।

सबसे ज्यादा मजबूत कुर्मी हैं। संख्या बल में कम होने के बावजूद कुर्मियों की कुल आबादी का 3.11 प्रतिशत हिस्सा सरकारी नौकरियों में है। कुल 1 लाख 17 हजार 171 सरकारी नौकरियाँ कुर्मियों के पास है। इसके अलावा ब्राह्मणों के पास 1.72 लाख सरकारी नौकरियाँ, राजपूतों के पास 1.71 लाख सरकारी नौकरियाँ और कायस्थों के पास 52.49 हजार नौकरियाँ हैं। सबसे ज्यादा कायस्थों की 6.68 आबादी सरकारी नौकरी में है।

बिहार सरकार ने 2022 में जातिगत जनगणना कराई थी। इस जनगणना को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक में याचिकाएं दाखिल की गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया था। बिहार के इस जातिगत जनगणना में पूरे राज्य की आबादी को कवर किया गया था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि डेटा सरकार को बिहार के लोगों को लाभ पहुंचाने वाले नीतियों को तैयार करने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि डेटा बिहार की सामाजिक और आर्थिक स्थितियों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगा।

बिहार पर लगता रहा प्रवासियों की सर्वाधिक संख्या का कलंक!

बता दें कि ऐसी अवधारणा रही है कि बिहार से बहुत से लोग काम के लिए भारत के दूसरे राज्यों में जाते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि बिहार में बेरोजगारी दर अधिक है और जनसंख्या भी अधिक है। साल 2005 में बिहार में बेरोजगारी दर देश में सबसे ज्यादा थी, वहीं 2022 में जम्मू-कश्मीर और राजस्थान के बाद इसकी बेरोजगारी दर तीसरी सबसे अधिक थी। बिहारी प्रवासियों की बड़ी आबादी वाले कुछ राज्यों में शामिल हैं: तमिलनाडु, पंजाब, जम्मू और कश्मीर, राजस्थान, दिल्ली।

इस डेटा ने अतीत में राजनेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए दावों का खंडन किया है, जिन्होंने आरोप लगाया था कि बड़ी संख्या में बिहारी काम की तलाश में अन्य राज्यों में पलायन करने के लिए मजबूर हैं। इस डेटा से बिहार सरकार की नीतियों को प्रभावित करने की संभावना है। सरकार बिहार में नौकरियों के सृजन पर ध्यान केंद्रित करने की संभावना है ताकि लोगों को अन्य राज्यों में पलायन करने से रोका जा सके। आर्थिक रूप से इस डेटा से बिहार सरकार को बिहार में नौकरियों के सृजन पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित करने की संभावना है।

‘रात को लड़का-लड़की सोता है तो उसी में न जाता है पानी भी, पढ़ी-लिखी लड़की कहती है कि निकलने लगे तो बाहर फेंक दो’: नीतीश कुमार के बयान पर NCW बोली – माफ़ी माँगिए

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार विधानसभा में सेक्स को लेकर कुछ ऐसा बयान दिया कि अब राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने संज्ञान लिया है। अब उन्होंने इसी तरह के बयान को विधान परिषद में भी दोहराया है। नीतीश कुमार ने कहा, “सबको अगर पढ़वाएँगे तभी न इसका होगा। अगर लड़की पढ़ जाएगी तो जानते हैं, लड़का-लड़की की जो होती है शादी, न लड़का रोज लड़की के साथ रात में सोता है न। सोता है तो उसी में न जाता है पानी भी, 35 में भी।”

नीतीश कुमार ने आगे कहा, “उसी समय लड़की भी जब पढ़ी-लिखी रहती है तो कहती है कि ठीक है, रात में करो लेकिन अपना जो तुमको निकलने लगे तो बाहर निकाल कर फेंक दो। यही कर के लड़की सब अब सबको समझा रही है। ज़रा जान लीजिए। लड़की सब सभी को समझाती है कि अपने पति को कंट्रोल में रखिए।” इसी दौरान उन्होंने जनसंख्या वृद्धि दर कम होने के आँकड़े भी गिनाए। इस दौरान एक विधायक ने उन्हें याद दिलाया कि वो मुख्यमंत्री हैं, इस तरह की भाषा का इस्तेमाल न करें।

इस पर उन्होंने विरोध करने वालों को बैठने के लिए कहा। अब NCW की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने इन बयानों पर कहा है, “हम पूरे देश की महिलाओं की तरफ से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से त्वरित और स्पष्ट माफ़ी माँगने की माँग करते हैं। महिलाओं को जो सम्मान और प्रतिष्ठा मिलनी चाहिए, विधानसभा में नीतीश कुमार के मूर्खतापूर्ण बयान इसका निरादर है। अपने भाषण के दौरान उन्होंने जिस अपमानजनक और और तुच्छ भाषा का इस्तेमाल किया है, वो समाज पर एक कलंक है।”

NCW अध्यक्ष ने आगे कहा कि एक लोकतंत्र में जब कोई नेता इस तरह का बयान खुले रूप से दे सकता है, हम सोच सकते हैं कि उसके शासन में राज्य में किस तरह की भयावहता होगी। रेखा शर्मा ने कहा कि हम इस तरह के व्यवहार के खिलाफ सख्ती से खड़े हैं और जिम्मेदारी तय करने की माँग करते हैं। बता दें कि इससे पहले नीतीश कुमार ने सोमवार (7 नवंबर, 2023) को ही विधानसभा में भी कुछ ऐसा ही बयान दिया था, जो आपत्ति का विषय बना।

इस बयान में उन्होंने कहा था, “अगर पढ़ लेगी लड़की और वो जब शादी होगा लड़का-लड़की में तो जो पुरुष है वो रोज रात में शादी के बाद करता है न। तो उसी में और पैदा हो जाता है। लेकिन, लड़की जब पढ़ लेती है तो उसको पता है कि करेगा। लेकिन, अंतिम में भीतर मत घुसाओ, उसको बाहर कर दो। करता तो है। तो उसी में आप समझ लीजिए, संख्या घट रही है। पहले 4.4 था, अब घटते-घटते पिछले साल के रिपोर्ट में ये 2.9 पर पहुँच गया है। बहुत जल्दी 2 के पास हम पहुँच जाएँगे।”

बता दें कि नीतीश कुमार जनसंख्या वृद्धि दर की बात करते हुए ऐसा कह रहे थे। इस दौरान उन्होंने विधानसभा में कवरेज के लिए उपस्थित पत्रकारों को भी संबोधित करते हुए कहा कि वो उनके भाषण पर ध्यान दें। बिहार में सोमवार को ही जातिवार जनगणना के आँकड़े भी विधानसभा में टेबल पर रखे गए हैं। लेकिन, नीतीश कुमार के बयान और उस पर वहाँ लगे ठहाकों ने सब गुड़-गोबर कर दिया। इस दौरान उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव भी हँसते दिखे।

कभी लगाया था फिक्सिंग का आरोप, अब कह रहीं – क्रिकेट की समझ नहीं: वर्ल्ड कप में शमी के तगड़े परफॉर्मेंस के बाद बोली बीवी हसीन जहाँ – उसकी जिम्मेदारी है मेरा भरण-पोषण करना

कभी भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी पर मैच फिक्सिंग का आरोप लगाने वाली उनकी बीवी हसीन जहाँ अब खुले आम कह रही हैं कि उन्हें क्रिकेट में कोई दिलचस्पी नहीं है। ‘न्यूज नेशन’ के एक इंटरव्यू में उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे पोस्ट्स को लेकर कहा है कि वो किसी को टारगेट नहीं करती हैं उन्हें अपनी जिंदगी जीने से मतलब है।

दरअसल विश्व कप 2023 में मोहम्मद शामी काफी बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। भारतीय टीम सेमीफाइनल का मुकाबला मुंबई में खेलने जा रही है। दाएँ हाथ के तेज गेदबाज शमी को इस विश्व कप में शुरुआती 4 मैच खेलने का मौका नहीं मिला।

लेकिन शमी ने इसके बाद शानदार वापसी करते हुए 4 मैच में 16 विकेट हासिल किए। इस दौरान दो मैचों में उन्होंने 5 विकेट चटकाए। साउथ अफ्रीका के खिलाफ भी शमी ने दो विकेट हासिल किए। वर्ल्ड कप टूर्नामेंट्स में उनके 45 विकेट हो गए हैं।

उन्हें लेकर गाहे-बगाहे उन पर हमलावर रहने वाली उनकी बीवी हसीन जहाँ हाल ही में इंस्टाग्राम में एक भैंसे के साथ फोटो डालने से सुर्खियों में रही। इसमें उन्होंने इनडायरेक्टली शमी का मजाक उड़ाने की कोशिश की थी। शमी की बीवी ने इस पोस्ट में भैंस की फोटो के साथ लिखा- “मैं और अमरोहा का भैंसा। अभी तो इसका दूध ले रही हूँ कुछ दिन बाद इसका मीट खाऊँगी। अमरोहा का भैंसा।”

इंटरव्यू के दौरान विश्व कप देखने के सवाल पर उन्होंने जवाब दिया, “मैं क्रिकेट नहीं देखती हूँ। मुझे क्रिकेट में दिलचस्पी नहीं है।” जब उनसे पूछा गया विश्व कप आप देख नहीं रही है। आप क्रिकेट भी नहीं देखती है, लेकिन क्रिकेट से आपका नाता रहा है इस पर हसीन जहाँ ने कहा, ” मेरी बेटी बेबो और मुझे किसी को भी क्रिकेट का शौक नहीं है। मेरी बेटी भी कहती हैं कि मुझे क्रिकेट पसंद नहीं है मम्मी।”

इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि आपके लगातार आ रहे पोस्ट ताना कसने वाले है सीधे या परोक्ष तौर पर वो मोहम्मद शमी को टारगेट करते लगते हैं। तो इसके जवाब में हसीन जहाँ बोली, “अब मेरी मर्जी में फन करती हूँ अपनी लाइफ को बिंदास जीती हूँ कोई किसी को भी टारगेट समझता रहे मुझे क्या, मुझे तो अपनी जिंदगी जीने से मतलब है।”

वो आगे कहती हैं, “जबरदस्ती मेरी जिंदगी में उसे घुसाया जा रहा है, मेरा जीवन अच्छा कट रहा है, टेंशन फ्री लाइफ जो होती है वो कट रही है बेबो को लेकर बहुत मस्ती करते हैं।”

हसीन जहाँ से जब ये पूछा गया कि टीम इंडिया विश्व कप 2023 जीतती हैं और शमी का उसमें फाइनल में अहम रोल निभाते हैं तो आपकी साइड से सोशल मीडिया पर कुछ पॉजिटिव वाला पोस्ट आएगा। इसके जवाब में हसीन जहाँ बोली, “मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। उसने मुझसे शादी की है उसकी रिस्पॉन्सबिलिटी है। मेरी और मेरी बच्ची का भरण-पोषण करना। क्रिकेट खेल कर करें अच्छा परफॉर्म कर के करें। बिजनेस करके करें मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। मेरे साथ उसका कोई अच्छा रिलेशन नहीं है कि मैं उसको बेस्ट विशेज दूँगी या कॉन्ग्रेचुलेट करूँगी। ऐसा कुछ भी मेरे दिल में नहीं है। अब लोग इसे अच्छा समझे बुरा समझे मैं केयर नहीं करती।”

भारतीय टीम को सपोर्ट करने के सवाल पर जहाँ ने तुरंत कहा कि जब क्रिकेट ही नहीं देखती हूँ तो क्या, लेकिन चाहूँगी कि अच्छा प्रदर्शन करें और बहुत बड़ी जीत हमारे भारत के नाम करें। इस दौरान हसीन जहाँ ने ये भी आरोप लगाया कि वो लड़-झगड़कर मोहम्मद शमी के साथ टूर पर जाती है, लेकिन वो ऐसा रवैया अपनाते थे कि वो दोबारा उनके साथ टूर पर न जाएँ। हमेशा शमी उनसे उखड़े-उखड़े रहते थे, लड़ाई जैसा माहौल बना कर रखते थे।

गौरतलब है कि ये वहीं हसीन जहाँ हैं जिन्होंने मार्च 2018 में मोहम्मद शमी पर मैंच फिक्सिंग का आरोप लगाया था। तब हसीन जहाँ ने कहा था कि शमी ने दुबई में पाकिस्तान की अलिस्बा नाम की लड़की से पैसा लिया था।

छत्तीसगढ़ में नक्सलियों से मुठभेड़ के साथ संपन्न हुआ मतदान, 20 सीट पर 71% पोलिंग: AK-47 रायफल बरामद, दंतेवाड़ा में IED से भरा टिफिन बम मिला

छत्तीसगढ़ में पहले चरण के मतदान के दौरान सुरक्षा बलों की नक्सलियों से मुठभेड़ हुई, जिसमें सुरक्षा बलों ने एक एके-47 बरामद किया है। मुठभेड़ में घायल 3 जवानों को एयरलिफ्ट कर रायपुर लाया गया। सूत्रों का कहना है कि इस मुठभेड़ में कई नक्सली मारे जा सकते हैं। इस बीच, पहले चरण के लिए 70.87% मतदान दर्ज किया गया है। उधर दंतेवाड़ा में भी टिफिन बम मिला है।

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के पहले चरण में तीन बजे तक 60 प्रतिशत से ज्यादा मतदान हो चुका है। नक्सल प्रभावित इलाकों में भी मतदान की गति अच्छी रही है। हालाँकि, नक्सलियों ने मतदान को बाधित करने की कोशिश की, लेकिन सुरक्षा बलों ने उन्हें नाकाम कर दिया। नक्सलियों ने तीन से चार जगहों पर सुरक्षा बलों पर हमला किया। इन हमलों में कई नक्सली हताहत हुए हैं। इसमें से एक हमला काँकेर जिले के बांदे थाना इलाके में हुआ।

छत्तीसगढ़ पुलिस ने बताया, “काँकेर जिले के बांदे थाना क्षेत्र में नक्सलियों और बीएसएफ और डीआरजी की टीम के बीच मुठभेड़ हो गई। घटना स्थल से AK-47 बरामद किया गया है। इस पूरे इलाके में सर्चिंग जारी है। इस मुठभेड़ में कई नक्सलियों के घायल होने या मारे जाने की संभावना है।”

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, यह घटना बांदे पुलिस स्टेशन की सीमा के भीतर पनावर गाँव में दोपहर करीब 1 बजे हुई, जब सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) की एक संयुक्त टीम अभियान पर निकली थी। मुठभेड़ वाली जगह से एक एके-47 राइफल जब्त की गई। बांदे अंतागढ़ विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है, जो मंगलवार को राज्य चुनाव के पहले चरण में मतदान करने वाले 20 निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है।

3 बजे तक अच्छा मतदान

चुनाव आयोग के मुताबिक, तीन बजे तक सबसे ज्यादा वोटिंग मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में हुई, यहाँ 73 प्रतिशत मतदाताओं ने मतदान किया। इसके अलावा सबसे कम मतदान तीन बजे तक बीजापुर जिले में हुआ। यहां करीब 30 फीसदी मतदाताओं ने ही मतदान किया। वहीं, ओवर आल ये मतदान प्रतिशत 60 प्रतिशत से अधिक रहा। बता दें कि पहले चरण के मतदान के लिए कुल 223 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें 198 पुरुष और 25 महिलाएँ हैं। पहले चरण में 40 लाख 78 हजार 681 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं।

‘एल्विश यादव हाजिर हों’: YouTuber को नोएडा पुलिस का नोटिस, दूसरे थाने में ट्रांसफर किया गया रेव पार्टी और साँप के ज़हर से नशा वाला केस

एक ताजा घटनाक्रम में नोएडा पुलिस ने बिगबॉस विजेता एल्विश यादव को नोटिस जारी किया है। नोटिस में एल्विश को अपना बयान देने के लिए हाजिर होने का आदेश दिया गया है। इसी मामले में गायक फैज़लपुरिया को पहले ही पुलिस का नोटिस मिल चुका है। एक पुराने वीडियो में फैज़लपुरिया और एल्विश एक साथ नजर आ रहे हैं। मामले की जाँच नोएडा पुलिस के थाना सेक्टर 49 से सेक्टर 20 पुलिस स्टेशन को ट्रांसफर कर दी गई है।

नोएडा पुलिस के एक सीनियर अधिकारी ने ANI से बातचीत के दौरान बताया कि इस केस में जेल में बंद 5 आरोपितों का कस्टडी रिमांड लेने की तैयारी चल रही है। कस्टडी रिमांड के लिए पुलिस जल्द ही अदालत में आवेदन करेगी। रिमांड स्वीकृत हो जाने के बाद सभी आरोपितों से इस केस के बारे में विस्तृत पूछताछ की जाएगी। इसी दौरान उन्होंने केस के थाना 49 से ट्रांसफर होने की जानकारी देते हुए अब विवेचना सेक्टर 20 थाने के एक सीनियर इंस्पेक्टर से कराए जाने की बात कही।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने गायक फैज़लपुरिया को भी नोटिस जारी किया है। फैज़लपुरिया एल्विश यादव के करीबी बताए जा रहे हैं। जाँच कर रही पुलिस को एक वीडियो मिला है जिसमें एल्विश और फैज़लपुरिया एक साथ दिखाई दे रहे हैं। 5 महीने पुराने इस वीडियो में साँपों और सँपेरों के भी सीन हैं। नोएडा पुलिस उन तमाम पार्टियों की वीडियो और CCTV फुटेज में जुटाने में लगी है जिसमें एल्विश यादव मौजूद रहे हों। ये पार्टियाँ राजस्थान और दिल्ली में हुईं थीं।

आरोपितों के खिलाफ इस से पहले गुरुग्राम में भी शिकायत दर्ज होने की जानकारी सामने आ रही है। हालाँकि उस पर कोई ठोस एक्शन नहीं लिया गया था। बताते चलें रेव पार्टी में साँपों के जहर के प्रयोग को ले कर नोएडा के सेक्टर 49 थाने में यूट्यूबर एल्विश यादव सहित कुल 6 आरोपितों पर 3 नवंबर, 2023 को FIR दर्ज हुई है। इस मामले में 5 आरोपितों को पहले ही गिरफ्तार कर के जेल भेजा जा चुका है।

‘पढ़ी-लिखी लड़की घुसाने देगी लेकिन बाहर निकाल देगी’: विधानसभा से विवाहित पुरुषों को CM नीतीश कुमार की सलाह – अंतिम में भीतर मत घुसाओ, बाहर कर दो

बिहार विधानसभा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जनसंख्या वृद्धि पर सेक्स एजुकेशन को समझाने के लिए कुछ ऐसा बयान दे दिया है कि इस पर सोशल मीडिया में उनकी आलोचना होने लगी। उन्होंने इस दौरान पति-पत्नी के सेक्स पर लगभग 1 मिनट तक बात की। बिहार विधानसभा के विधायक इस पर हँसते हुए दिखे।

नीतीश ने यह बयान विधानसभा में जनसंख्या वृद्धि पर चर्चा के दौरान दिया, विधानसभा में आज जातिगत जनगणना के आँकड़े भी रखे गए हैं। इसी दौरान नीतीश कुमार ने यह बयान दिया जिस पर उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव समेत सभी नेता हंसने लगे।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, “कि अगर पढ़ लेगी लड़की, और जब शादी होगा तब लड़का लड़की का तो जो पुरुष है वो तो रोज रात में शदिया होता है उसके साथ करता है ना उसी में और पैदा हो जाता है। और लड़की पढ़ लेती है तो हमको मालूम था कि उ करेगा ठीक है! लेकिन अंतिम में भीतर मत घुसाओ उसको बाहर कर दो! करता तो है।”

आगे नीतीश कुमार ने कहा, “उसी में संख्या घट रही है। अब आप जान लीजिए जो संख्या थी पहले, आप पत्रकार लोग भी ठीक समझिए। याद करिए, पहले क्या था 4.3, अब घटते घटते, लास्ट ईयर के पहले जो रिपोर्ट आई है, अभी तो हम कहे हैं और भी नया रिपोर्ट दे दो। उस रिपोर्ट में आया है 2.9, अब हम लोग बहुत जल्दी 2 पर पहुँच जाएँगे।”

नीतीश कुमार के इस बयान पर सदन में मौजूद सभी विधायक हँसने लगे। सदन में काफी देर नीतीश के इस तर्क पर ठहाके लगते रहे। अब इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। सोशल मीडिया पर इसे शेयर करके लोग अलग अलग तरह की प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

एक्स (पहले ट्विटर) पर एक महिला रिनिती चैटर्जी पांडे ने लिखा, “किसी विधानसभा में ऐसी बेहूदा बातें आज़ादी के बाद से किसी ने नहीं कही होगी आज नीतीश कुमार ने सारी हदें पार कर दी थू है।”

अभय प्रताप सिंह ने लिखा, “CM नीतीश कुमार का ये बयान सुनिए… विधानसभा में कोई ऐसा कैसे कह सकता है ?’

ऋषि राजपूत ने लिखा, “नीतीश कुमार ने जो सदन में कहा वह पूरी तरह से अमर्यादित है। मुझे शर्म आ रही है कि नीतीश कुमार मेरे प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं, आज पूरा बिहार शर्मशार हो गया।”

एक डीपफेक वीडियो के पीछे हजारों तस्वीरों की ट्रेनिंग: जानिए उस तकनीक के बारे में जिससे बिकनी मॉडल को बना दिया रश्मिका मंदाना, पॉर्न इंडस्ट्री में भी इस्तेमाल

इन दिनों डीपफेक तकनीक की काफी चर्चा है। यह वही तकनीक है जिसके सहारे एक ब्रिटिश मॉडल ज़ारा पटेल की अंतरंग वीडियो पर भारतीय अभिनेत्री रश्मिका मंदाना का चेहरा लगाया गया। यह वीडियो बाद में खूब वायरल हुआ और रश्मिका ने स्वयं आगे आकर इसकी सच्चाई बताई।

इस वीडियो के बाद से ‘डीपफेक’ शब्द खूब चर्चा में है। डीपफेक दरअसल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित एक ऐसी तकनीक है जिसके जरिए किसी एक व्यक्ति के चेहरे पर दूसरे के चेहरे पर लगाया जाता है। इससे कई फर्जी फोटो, आडियो और वीडियो तैयार होते हैं।

डीपफेक तकनीक का अधिकतर उपयोग फर्जी पॉर्न वीडयो बनाने के लिए होता है। इस तकनीक के जरिए पॉपुलर महिला शख्सियतों की फर्जी पोर्न वीडियो बनाई गई हैं, इस तकनीक का सबसे ज्यादा इसी काम के लिए उपयोग होता है।

कहाँ से आया डीपफेक, कैसे करता है काम?

डीपफेक के सम्बन्ध में ‘द गार्जियन‘ के एक लेख में जानकारी दी गई है कि यह सबसे पहले सोशल मीडिया एप रेडिट (Reddit) पर सामने आया था। तब एक Deepfake नाम के यूजर ने टेलर स्विफ्ट, गल गडोट जैसी अभिनेत्रियों के फर्जी पोर्न क्लिप डाल दिए। इसके बाद से ऐसे वीडियो की बाढ़ आ गई।

डीपफेक तकनीक से वीडियो बनाना एक लम्बी प्रक्रिया है। सबसे पहले जिन दो लोगों के चेहरे आपस में बदले जाने हैं उनके हजारों फोटो वीडियो ‘एनकोडर’ नाम के एक AI आधारित प्रोग्राम पर चलाए जाते हैं। यह तकनीक इन दो चेहरों की समानताएँ परखती है। इसके बाद यह तकनीक इन चेहरों को केवल उनकी समानताओं के आधार पर सीमित कर देती है और एक कंप्रेस्ड इमेज बनाती है।

इसके पश्चात एक और AI तकनीक ‘डीकोडर’ से चेहरा तलाशने को कहा जाता है। आसान भाषा में समझे तो इनकोडर को ‘A’ का चेहरा पढ़ने के लिए तैयार किया जाता और डीकोडर को ‘B’ का चेहरा पढ़ने के लिए तैयार किया जाता है। इसके पश्चात दोनों मशीनों से यह चेहरा बनाने को कहा जाता है लेकिन इस स्थिति में इनकोडर को B का और डीकोडर को A का चेहरा बनाने को कहा जाएगा। ऐसे में मान लीजिए कि B उस फोटो में रो रहा है तो नई फोटो में A रोता हुआ दिखेगा।

इसके अलावा एक अन्य तकनीक जिसका नाम ‘जनरेटिव एड्वर्सियल नेटवर्क’ (GAN) है उसके जरिए भी बनाई जाती हैं। इसमें एक गड़बड़ तस्वीर और एक सही तस्वीर डाली जाती है। AI तकनीक इन दोनों के कोड डिकोड करके फोटो को आपस में मिलाती है। इसमें समय लगता है।

क्या इसे पहचानना नामुमकिन है?

यह बात इस निर्भर करती है कि डीपफेक के जरिए बनाई गई फोटो या वीडियो कितने कौशल से बनाए गए हैं। हालाँकि, इन वीडियो को ध्यान से देखने पर बोलते समय होंठों का मूवमेंट, हाथ-पैर का चलना और चेहरे पर आने वाले अन्य भाव को देख कर पता लगाया जा सकता है कि वीडियो असली है नकली।

समस्या यह है कि अब तकनीक इतनी ज्यादा मजबूत होती जा रही है कि सामान्य व्यक्तियों की पकड़ में कई वीडियो नहीं आने वाली। इनको बहुत ही उच्च क्षमता के कंप्यूटर और आधुनिक तकनीक से लम्बी मेहनत के बाद बनाया जाता है। डीपफेक की समस्या से लड़ने के लिए लगातार बड़े बड़े विश्वविद्यालयों समेत कई कंपनियां रिसर्च कर रही हैं। इसकी कमियों को ढूँढने का लगातार प्रयास किया जाता रहा है जिससे लोग जन सके कि कोई वीडियो फर्जी है नहीं।

‘मेरे पास बाकी थे 5 सेकेंड’: ‘टाइम्ड आउट’ होने वाले एंजिलो मैथ्यूज ने वीडियो शेयर कर ICC से माँगा न्याय, वर्ल्ड कप से बाहर हुए शाकिब अल हसन

श्रीलंका के वरिष्ठ आल राउंडर एंजिलो मैथ्यूज ने दावा किया है कि वो टाइम आउट नहीं थे, बल्कि उनके पास पूरे 5 सेकंड बाकी थे। उन्होंने बाकायदा टीवी फुटेज भी अपने एक्स हैंडल पर शेयर किया है। उन्होंने आईसीसी से ‘न्याय’ की माँग की है। इस बीच, उन्हें आउट करने वाले शाकिब अल हसन विश्वकप से बाहर हो गए हैं। बताया गया है कि वो श्रीलंका के खिलाफ मैच के दौरान ही घायल हो गए थे और अब कम से कम 3-4 सप्ताह के लिए खेल से बाहर हो गए हैं।

मैथ्यूज बोले-मैं तो बेगुनाह था, गलत सजा मिली

श्रीलंका के स्टार ऑल राउंडर एंजेलो मैथ्यूज ने मैच का एक वीडियो शेयर किया। उसमें उन्होंने ये बताने की कोशिश की है कि वो दो मिनट की समय सीमा के अंदर पिच पर पहुँच गए थे और बल्लेबाज़ी के लिए तैयार थे, लेकिन आखिरी वक़्त पर हेलमेट का स्ट्रिप टूट गया था।

अपने दूसरे पोस्ट में मैथ्यूज ने दो तस्वीरें पोस्ट की हैं, जिसमें उन्होंने बताया है कि कैसे वो दो मिनट के अंदर पिच पर पहुँच कर खेलने के लिए तैयार थे, लेकिन इसी बीच उनके हेलमेट का स्ट्रेप टूट गया था। इसमें उन्होंने मैच के फुटेज का टाइम स्टैंप भी दिखाया है।

हर्षा भोगले बोले – मैथ्यूज को आउट दिया जाना सही

इस पूरे विवाद पर जाने-माने क्रिकेट कमेंटेटर और एक्सपर्ट हर्षा भोगले ने विस्तार से चर्चा की है और बताया है कि क्यों मैथ्यूज आउट थे। उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, “आपको अंपायरों पर विश्वास करना होगा। यदि वे कहते हैं कि दो मिनट बीत गए थे, तो उन्होंने ऐसा किया था क्योंकि ये बहुत अनुभवी और बहुत अच्छे अंपायर हैं और उनसे ऐसी गलतियाँ करने की संभावना नहीं है। दूसरा, नियम न जानने की बात कहने से काम नहीं चलने वाला। अगर कोई नियम है और आपने उसे तोड़ा है, तो आप को एक मिनट भी वहाँ रुकने का अधिकार नहीं।”

उन्होंने आगे लिखा, “शाकिब को अपील करने का अधिकार था और यह तय करना हमारा काम नहीं है कि उसे अपील करनी चाहिए या नहीं। यह उसका निर्णय है, वह इसी तरह खेलना चाहता है। हालाँकि, यहाँ मैथ्यूज कोई फायदा नहीं उठा रहे थे।” उन्होंने उदाहरण देते हुए अपनी बात को समझाया कि मैच के दौरान कोई बल्लेबाज अगर गेदबाज या फील्डर को देने के लिए बॉल उठाता भी है, तो उसके खिलाफ अपील नहीं की जाती।

हालाँकि, बल्लेबाज अक्सर पूछ लेते हैं कि क्या वो ऐसा कर सकते हैं। टीक इसी तरह से अगर मैथ्यूज ने अंपायरों से पूछा होता कि क्या उसका हेलमेट बदलना ठीक है, तो मुझे यकीन है कि कोई अपील नहीं होती। हर्षा भोगले ने अपनी बात में आगे कहा कि इस मामले में हमें खेल भावना को लाने की जरूरत नहीं है। मैथ्यूज़ और श्रीलंकाई प्रशंसक निराश और नाराज़ हो सकते हैं लेकिन खेल के नियमों के अनुसार, वो आउट थे।

हर्षा ने एक वीडियो भी शेयर किया। उन्होंने बताया, “5 जनवरी 2007 को गांगुली को टाइम आउट कर दिया गया लेकिन ग्रीम ने इसका उपयोग नहीं किया जो उस समय दक्षिण अफ्रीकी टीम के कप्तान थे। विपक्षी टीम के कप्तान के पास खेल की भावना का सम्मान करते हुए अंपायर से टाइम आउट नियम को नजरअंदाज करने का अनुरोध करने का विवेकाधिकार है। अगर आपको लगता है कि बल्लेबाज से वाजिब वजह के चलते देरी हुई।”

इस मामले में स्टार स्पोर्ट्स ने विशेषज्ञों की टीम से भी बातचीत की है। इस पैनल में इयान बिशप, रमीज रजा, संजय मांजरेकर और संजय बांगर जैसे दिग्गज शामिल थे। उन्होंने नियमों के मुताबिक मैथ्यूज को आउट माना।

हालाँकि, एंजिलो मैथ्यूज का ये कहना है कि वो देर नहीं कर रहे थे और 5 सेकंड का समय उनके पास बचा था। ऐसे में ये मामला दिलचस्प मोड़ ले चुका है। क्योंकि, कहा जा रहा है कि जिस नियम का हवाला देकर उन्हें आउट करार दिया गया, वो नियम उन्होंने तोड़ा ही नहीं। वहीं, इस बीच साकिब अल हसन, जिन्होंने मैथ्यूज के टाइम आउट के लिए अपील किया था, वो अब विश्वकप से ही बाहर हो गए हैं। उन्हें श्रीलंका के खिलाफ मैच के दौरान चोट लग गई थी, लेकिन वो पेन किलर्स और बैंडेड की सहायता से खेलते रहे और अपनी टीम को 3 विकेट से जीत दिलाई।

आँगनवाड़ी की महिलाओं पर बिहार पुलिस ने दिखाया दम, कई बेहोश: वादे से मुकरे नीतीश कुमार तो सड़क पर उतरी हैं सेविका-सहायिका, 1 महीने से बंद हैं 1.15 लाख सेंटर

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार अपने ही वादे से फिरने के बाद सत्ता की हनक मजलूम आँगनवाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं पर उतार रही है। राजधानी पटना में मंगलवार (7 नवंबर, 2023) को अपनी पाँच सूत्रीय माँगों को लेकर बिहार विधानसभा का घेराव करने पहुँची इन महिलाओं को तितर-बितर करने के लिए पुलिस प्रशासन ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इस दौरान कई महिलाएँ बेहोश हो गई। बिहार में 1.15 लाख आँगनवाड़ी केंद्र पिछले एक महीने से भी अधिक समय से बंद हैं।

गौरतलब है कि अपनी माँगों को लेकर आँगनवाड़ी सेविका-सहायिका संघ एक महीने से आंदोलनरत है। इन आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से नीतीश बाबू ने उनका मानदेय दोगुना करने का वायदा किया था, लेकिन वादा पूरा करने की जगह बिहार सरकार इन आंदोलनकारी महिलाओं पर सख्ती कर रही है।

सरकार इनके आँगनवाड़ी केंद्रों पर नोटिस चिपका रही हैं कि अगर उन्होंने ये नहीं खोले तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इससे नाराज आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने भी अपना आंदोलन तेज कर दिया।

गौरतलब है कि मंगलवार को बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन ये आँगनवाड़ी कार्यकर्ता विधानसभा का घेराव करने पहुँची थी। विधानसभा के गेट के बाहर सुबह ही सैंकड़ों की संख्या में ये महिलाएँ वहाँ पहुँची थी। प्रदर्शन को रोकने के लिए वहाँ पुलिस प्रशासन का अमला भी पहुँचा था। वाटर कैनन का इस्तेमाल कर प्रदर्शनकारी आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को वहाँ से हटाया गया। गौरतलब है कि बिहार विधानसभा के 6 से 10 नवंबर तक चलने वाले शीतकालीन सत्र के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए वहाँ 70 मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारी तैनात है।

ऐसे में एंट्री पास के बगैर किसी को भी विधानमंडल परिसर में के जाने की इजाजत नहीं है। इस वजह से यहाँ प्रदर्शन की भी मंजूरी नहीं है। इस बीच आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उनकी 5 सूत्रीय माँगें नहीं मानी गई तो वो चुनाव में ऐसे लोगों को वोट नहीं देंगी। उनका कहना है कि जो हमारी बात सुनेगा, वहीं कुर्सी पर राज करेगा।

आँगनवाड़ी सेविका और सहायिकाओं की माँग है कि राज्य सरकार की दी जा रही अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि 10 हजार रुपए की जाए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में गुजरात की तरह ही बिहार में भी ग्रेच्युटी भुगतान करना पक्का किया जाए।

इसके साथ ही उन्हें केंद्र सरकार द्वारा सरकारी कर्मचारी का दर्जा देते हुए ग्रेड सी और ग्रेड डी में समायोजित किया जाए। उनकी माँग है कि जब तक सरकारी कर्मचारी का दर्जा उन्हें नहीं मिल जाता है, तब-तक सेविकाओं को 25 हजार रुपए और सहायिकाओं को 18 हजार मानदेय हर महीने दिया जाए। योग्य सहायिका को सेविका में बहाली के लिए अतिरिक्त 10 बोनस अंक देने का प्रावधान लागू हो। इसके अलावा, सेविका से सुपरवाइजर में प्रमोशन और सेविका और सहायिका के सभी खाली पदों पर बगैर देरी के बहाली पक्की की जाए।

इस दौरान सदन में बिहार विधान सभा में बीजेपी नेता विजय सिन्हा बोले, “गाँव-समाज में शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली आँगनवाड़ी सेविका बहनों पर महागठबंधन सरकार का लाठी चार्ज करवाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। महागठबंधन की सरकार इनकी आवाज को दबाना चाहती है। सरकार विधानसभा में भी आँगनवाड़ी सेविकाओं के विषय पर जवाब देने से पीछे हट रही है।”

गौरतलब है कि बिहार राज्य आंगनबाड़ी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले सेविका और सहायिकाओं ने शनिवार (4 नवंबर,2023) को सांसद सुशील कुमार सिंह को अपनी माँगों का ज्ञापन सौंपा था। सेविका और सहायिकाएँ इस दौरान, ‘लाल साड़ी करे पुकार, हम नहीं सहेंगे अत्याचार’ का नारा लगाती रहीं।

सांसद सिंह ने उन्हें आश्वासन दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सहानुभूति आपके साथ है। लोकसभा का एक सत्र चलने वाला है। वो 17वीं लोकसभा के कार्यकाल में अध्यक्ष से अनुरोध करेंगे। अगर मौका मिलता है, तो मजबूती से उनकी माँग उठाएँगे। इस बारे में सरकार को पत्र लिखेंगे।