Home Blog Page 1412

‘हमेशा करता रहूँगा सनातन का विरोध, नहीं बदलूँगा बयान’: हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद भी कायम हैं मंत्री उदयनिधि स्टालिन के तेवर, बोले – यह सैकड़ों वर्ष पुराना मुद्दा

तमिलनाडु के मंत्री और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) नेता उदयनिधि स्टालिन ने सोमवार (6 नवंबर, 2023) को सनातन धर्म के खिलाफ अपने रवैये का बचाव करते हुए कहा कि वो सनातन का विरोध जारी रखेंगे, भले ही उन्हें इसके लिए कानूनी कार्रवाई का ही सामना क्यों न करना पड़ा। मद्रास हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ कार्रवाई न होने पर पुलिस को फटकारा था, जिसके बाद उनका ये बयान आया है।

दरअसल, मद्रास हाईकोर्ट ने डीएमके के मंत्री उदयनिधि और पीके शेखर बाबू की सनातन धर्म को लेकर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों पर कार्रवाई न करने पर पुलिस को आड़े हाथों लिया। उच्च न्यायालय ने कहा कि किसी भी शख्स को बँटवारे वाले विचारों को बढ़ावा देने या किसी विचारधारा को खत्म करने का अधिकार नहीं है।

गौरतलब है कि उदयनिधि स्टालिन पहले ‘सनातन धर्म’ की तुलना ‘डेंगू’ और ‘मलेरिया’ से कर चुके हैं। तमिलनाडु सरकार के युवा कल्याण और खेल विकास मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने शनिवार (2 सितंबर, 2023) को कहा कि सनातन धर्म मलेरिया और डेंगू की तरह है और इसलिए इसे खत्म किया जाना चाहिए, न कि केवल इसका विरोध किया जाना चाहिए।

वो सनातन धर्म को मिटाने के लिए आयोजित एक सम्मेलन में बोल रहे थे। अब वो अपने इस बयान के पक्ष में मजबूती से खड़े दिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये कहकर उन्होंने कुछ भी गलत नहीं कहा है और वो अपने इस बयान को लेकर कानूनी नतीजे भुगतने को तैयार हैं। मतलब साफ है कि उन्हें करोड़ों लोगों की भावनाओं की कोई परवाह नहीं और विरोध के बावजूद वो सनातन पर की गई अपनी बयानबाजी से बाज नहीं आने वाले हैं।

उदयनिधि स्टालिन ने कहा, “मैंने कुछ भी गलत नहीं कहा है। मैंने जो कहा वह सही था और मैं इसका कानूनी तौर पर सामना करूँगा। मैं अपना बयान नहीं बदलूँगा। मैंने अपनी विचारधारा की बात कही है। मैंने अंबेडकर, पेरियार या थिरुमावलवन ने जो कहा था उससे ज्यादा कुछ नहीं कहा है। मैं एक विधायक, एक मंत्री या युवा विंग का सचिव हो सकता हूँ और कल शायद नहीं भी, लेकिन एक इंसान होना अधिक महत्वपूर्ण है।”

डीएमके नेता ने आगे कहा, “हम कई सालों से सनातन के बारे में बोल रहे हैं जबकि NEET 6 साल पुराना मुद्दा है। यह (सनातन) कई सौ साल पुराना मुद्दा है, हम इसका हमेशा विरोध करेंगे।”

दुनिया के सबसे अमीर शख्स के बेटे का ‘हिंदी नाम’: जिस भारतीय के ऊपर रखा, वो नोबेल पुरस्कार विजेता, 33 की उम्र में बन गए थे प्रोफेसर

हाल ही में देश के आईटी और इलेक्ट्रॉनिकी मामलों के राज्यमंत्री राजीव चन्द्रशेखर ने खुलासा किया था कि टेस्ला और SpeceX जैसी कंपनियों के मालिक अमेरिकी कारोबारी एलन मस्क ने अपने बेटे का नाम नोबेल विजेता भारतीय-अमेरिकी वैज्ञानिक सुब्रमण्यन चन्द्रशेखर के नाम पर रखा है।

दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क के साथ मिलने के बाद यह जानकारी उन्होंने ‘X’ ( पूर्व मेंट्विटर) पर साझा की। उनकी एलन मस्क से यह मुलाक़ात इंग्लैंड में हुई जहाँ पर वह AI सेफ्टी समिट में हिस्सा ले रहे थे। असल में एलन मस्क ने अपने बेटे के नाम में प्रसिद्ध वैज्ञानिक का नाम उनके प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए शामिल किया है।

इस बात की पुष्टि शिवोन जिल्स ने भी की है। शिवोन एलन के बच्चों की सरोगेट माँ शिवोन जिल्स ने मंत्री राजीव के ट्वीट के जवाब में लिखा, “यह बात सही है। हम उसे शेखर बुलाते हैं लेकिन यह नाम सुब्रमण्यन चन्द्रशेखर की विरासत के सम्मान में चुना गया था।”

नोबेल विजेता भारतीय-अमेरिकी सुब्रमण्यन चन्द्रशेखर का जन्म अविभाजित भारत के लाहौर में वर्ष 1910 में हुआ था। उनके पिता रेलवे में बड़े अधिकारी थे। सुब्रमण्यन चन्द्रशेखर, एक अन्य नोबेल विजेता भारतीय वैज्ञानिक चन्द्रशेखर वेंकट रमन के भतीजे थे।

उनकी स्नातक तक की शिक्षा भारत में ही हुई थी। उन्होंने पहले प्रेसिडेंसी कॉलेज मद्रास और फिर इंग्लैंड में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के ट्रिनिटी कॉलेज से पढ़ाई की। इसके लिए उन्हें सरकार से छात्रवृत्ति मिली थी। वह इसके पश्चात लम्बे समय तक इंग्लैंड में अलग अलग शोध विषयों पर काम करते रहे। उनके शोध का मुख्य क्षेत्र खगोल विज्ञान था।

चन्द्रशेखर ने वर्ष 1936 में अमेरिका के शिकागो विश्वविद्यालय में पढ़ाना चालू किया था। इसके पश्चात वह अपने पूरे कैरियर के दौरान यहीं प्रोफ़ेसर रहे। उनके पास अन्य कई विश्वविद्यालय से भी प्रोफ़ेसर बनने का मौका आया लेकिन वह नहीं गए। उन्हें शिकागो विश्वविद्यालय में मात्र 33 वर्ष की आयु में 1943 में प्रोफ़ेसर का दर्जा दे दिया गया था।

अमेरिका में ही काम करने के दौरान ही उन्होंने वर्ष 1953 में अपनी पत्नी सहित अमेरिकी नागरिकता ले ली थी। वह 1952 से लेकर 1971 तक खगोल विज्ञान के विषय में खबरें छापने वाली एक मैग्जीन के भी सम्पादक रहे।

वर्ष 1983 में उन्हें तारों के ढाँचे और उनके बदलाव पर शोध करने के लिए भौतिकी का नोबेल पुरस्कार दिया गया था। नोबेल पाने के 12 वर्षों के भीतर वर्ष 1995 में उनकी मृत्यु हो गई थी। गौरतलब है कि उनके नाम पर अपने बेटे का नाम रखने वाले एलन मस्क भी अन्तरिक्ष में काफी रुचि रखते हैं। एलन की कम्पनी स्पेसएक्स लगातार इस क्षेत्र में नई खोजें कर रही है।

BJP की महाराष्ट्र पंचायत में बंपर जीत, सहयोगी शिवसेना और NCP के साथ 72% सीटों पर कब्जा: कॉन्ग्रेस ने कहा, पार्टी-सिंबल पर नहीं लड़ा चुनाव

महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने ग्राम पंचायत चुनावों में शानदार जीत हासिल की है। भाजपा के प्रवक्ता केशव उपाध्याय के अनुसार 778 सीटें बीजेपी ने अकेले दम पर जीती हैं। वहीं राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे वाली शिवसेना को 301 जबकि अजीत पवार वाली राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने 407 सीटें जीती हैं।

अभी मतगणना जारी है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चन्द्रशेखर बावनकुले ने हालांकि दावा किया है कि भाजपा 1000 से अधिक ग्राम पंचायतों में जीत चुकी है। उन्होंने मीडिया को बताया कि 1700 पंचायतों में भाजपा और उनके सहयोगी जीत रहे हैं।

महाराष्ट्र के पंचायत चुनावों में एनडीए गठबंधन ने 1486 सीटें जीतकर विपक्षी पार्टियों को लोकसभा चुनावों के नतीजों की एक तस्वीर पेश कर दी है। महाराष्ट्र में एनसीपी में हुई टूट और मराठा आरक्षण आंदोलन की पृष्ठभूमि पर हुए ग्रामपंचायत चुनाव में बीजेपी की गठबंधन ने कॉन्ग्रेस, शिवसेना (UBT) और अजीत पवार वाली एनसीपी के पेशानी पर बल ला दिए हैं।

जहाँ लोकसभा चुनाव से ठीक पहले आए महाराष्ट्र ग्राम पंचायत चुनाव के एकतरफा नतीजों ने सत्ताधारी दल (बीजेपी + शिंदे गुट वाली शिवसेना + अजीत पवार गुट वाली एनसीपी) का मनोबल बढ़ा दिया है। वहीं दूसरी तरफ महाविकास आघाड़ी खेमे के हाथ निराशा लगी है।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में रविवार (5 नवंबर,2023) को 2359 ग्राम पंचायतों के लिए कुल 74 फीसदी वोटिंग हुई। इसमें बीजेपी, शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी की अजित पवार गुट गठबंधन यानी महायुति ने 1486 ग्राम पंचायतों में जीत हासिल की है। वहीं दूसरी तरफ महाविकास अघाड़ी (कॉन्ग्रेस, शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट और एनसीपी शरद पवार गुट) के खाते में महज 569 ग्राम पंचायतों को जीत आई है। इसके अलावा अन्य को 419 ग्राम पंचायतों की जीत पर संतोष करना पड़ा। कुछ ग्राम पंचायतों के नतीजे मंगलवार (7 नवंबर 2023) को घोषित किए जाने हैं।

इस जीत को लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि महाराष्ट्र में ग्राम पंचायत चुनावों में महायुति सरकार की शानदार सफलता कल्याण-उन्मुख सरकार में राज्य के लोगों द्वारा जताए गए विश्वास का एक ठोस प्रमाण है। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए नंबर 1 का स्थान हासिल किया। उन्होंने आगे कहा:

“इस सफलता का पूरा श्रेय भाजपा के सभी कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों को जाता है। आगामी लोकसभा चुनाव में जनता महायुति का साथ देगी और 48 में से 45 से ज्यादा सांसद चुनकर आना तय है।”

महाराष्ट्र ग्राम पंचायत चुनाव में कॉन्ग्रेस को 287, शिवसेना (उद्धव गुट) को 115 और एनसीपी (शरद पवार गुट) को 144 सीटों पर जीत मिली। ऐसी निराशाजनक नतीजों पर कॉन्ग्रेस ने कहा कि ग्राम पंचायत चुनाव पार्टी और उसके चुनाव चिह्न पर नहीं लड़े जाते। आदर्श स्थिति में यह सच भी है लेकिन जमीनी हकीकत यही है कि सभी पार्टियाँ चुनाव लड़ रहे कैंडिडेट को अपना-अपना समर्थन देती हैं।

1 लाख भारतीयों को नौकरी देगा इजरायल, फिलिस्तीनियों को भगाया: यहूदी देश में ज्यादा पैसा कमाते थे लेकिन हमले के बाद विश्वास के लायक नहीं

इजरायल ने इस्लामी आतंकी संगठन हमास के 7 अक्टूबर 2023 के हमले के बाद अपने देश से 1 लाख फिलिस्तीनियों को काम से निकालने की योजना तैयार की है। इन फिलिस्तीनियों की जगह 1 लाख भारतीय कामगारों को इजरायल नौकरियाँ देगा।

एक्स (पहले ट्विटर) पर पत्रकार आदित्य राज कौल ने बताया है कि इजरायल ने भारत से जल्द से जल्द से 1 लाख कामगार उपलब्ध करवाने के लिए कहा है। यह कामगार फिलिस्तीनियों की जगह लेंगे क्योंकि 7 अक्टूबर को हमास के हमले के बाद उनके काम करने पर रोक लगा दी गई है। अब फिलिस्तिनियों को इजरायल रोजगार परमिट नहीं दे रहा है।

भारत और इजरायल के बीच पहले ही 42,000 भारतीयों को इजरायल में काम करने के लिए सहमति बन चुकी है। इसके लिए दोनों देशों के बीच मई 2023 में समझौता हुआ था। यदि अब 1 लाख कामगार भारत से और जाते हैं तो यह संख्या तीन गुने से अधिक हो आएगी।

गौरतलब है कि इजरायल में इस्लामी आतंकी संगठन हमास ने 7 अक्टूबर को हमला करके 1,400 लोगों की हत्या कर दी थी। इजरायल ने इसके जवाब में गाजा और फिलिस्तीन के लोगों पर काम करने से लेकर आने-जाने और अन्य कई प्रतिबन्ध लगा दिए।

इजरायल में काम करने वाले फिलिस्तीनी कामगार, फिलिस्तीन या गाजा में काम करने वाले कामगारों से कहीं अधिक कमाते हैं। हालाँकि, हमले के बाद अब इनके प्रति अविश्वास पैदा हो गया है, इसलिए इनको हटा कर इनकी भरपाई भारत से लाए गए कामगारों से करने की योजना तैयार की जा रही है।

जिन फिलिस्तीनियों को हटाया जा रहा है, उनमें से अधिकाँश कंस्ट्रक्शन के क्षेत्र में काम करते थे। इनके हटने से इजरायल में कामगारों की एकाएक कमी हो गई है। कामगारों की कमी से इस क्षेत्र में रुकावट ना पैदा हो, इसके लिए इजरायली बिल्डर्स असोसिएशन ने सरकार से 50,000-1,00,000 तक भारतीय कामगारों को मंजूरी देने की अपील की है।

इस असोसिएशन के उपाध्यक्ष हाइम फेग्लिन ने कहा, “हम वर्तमान में भारत से बातचीत कर रहे हैं और इजरायली सरकार के इस पहल को मंजूरी देने का इन्तजार कर रहे हैं। हम भारत से 50,000 से 1,00,000 कामगार अलग-अलग सेक्टर में लाने की योजना बना रहे हैं।”

इजरायल में अभी लगभग 18,000 भारतीय कामगार मौजूद हैं। इनमें से अधिकाँश भारतीय सेविकाओं के रूप में मौजूद हैं, जो बूढ़े या बच्चों की देखरेख का काम करते हैं। इसके अतिरिक्त, बड़ी संख्या में भारतीय इजरायल के आईटी जैसे क्षेत्रों में भी काम करते हैं। हमास के हमले में इसी तरह काम करने वाली एक भारतीय महिला घायल भी हुई थी।

गौरतलब है कि बड़ी संख्या में भारतीय पहले ही इजरायल के आसपास के खाड़ी देशों में कंस्ट्रक्शन और अन्य क्षेत्रों में काम करते आए हैं। यहाँ की कठिन परिस्थितियों में भी काम करने के लिए भारतीय कामगारों की प्रशंसा की जाती है। सऊदी अरब, क़तर, UAE जैसे देशों में काम करने वाले भारतीयों की संख्या लगभग 1 करोड़ है।

छत्तीसगढ़ में मतदान की शुरुआत बम ब्लास्ट से, 24 घंटे के भीतर वामपंथी नक्सलियों ने किए 3 धमाके: सुरक्षा बलों के 3 जवान समेत 5 घायल

छत्तीसगढ़ में आज (7 नवम्बर 2023) विधानसभा चुनाव के लिए पहले चरण का मतदान हो रहा है। मतदान शुरू होने से 24 घंटे के भीतर राज्य में नक्सलियों ने 3 IED धमाके किए हैं। इन धमाकों में सुरक्षा बलों के 3 जवान और 2 मतदानकर्मी घायल हुए हैं।

वामपंथी नक्सलियों ने आज मतदान के दिन सुकमा में एक धमाका किया है। सुकमा के टोंडामरका इलाके में यह धमाका किया गया। यह धमाका IED के जरिए किया गया। इस धमाके में केन्द्रीय रिज़र्व पुलिस फ़ोर्स (CRPF) की कोबरा बटालियन के एक जवान घायल हुए हैं। यह जवान भी चुनावी ड्यूटी में लगे हुए थे।

मतदान से एक दिन पहले छत्तीसगढ़ के नक्सल आतंकवाद प्रभावित जिलों कांकेर और नारायणपुर में धमाके किए गए थे। कांकेर में हुए धमाके में सीमा सुरक्षा बल के एक जवान और 2 मतदानकर्मी घायल हो गए हैं।

वहीं नारायणपुर में हुए धमाके में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस का एक जवान घायल हो गया। बताया गया कि यह जवान एक IED बम को डिफ्यूज करने के दौरान हुए धमाके के कारण घायल हुए। यह घटना नारायणपुर जिले के मूढापाधार क्षेत्र में हुई।

गौरतलब है कि नक्सली अपने प्रभाव वाले इलाकों में लगातार लोगों को इस बात के लिए धमका रहे हैं कि वह मतदान ना करें। ऐसा करने पर वह गाँव वालों को मारने की धमकी दे रहे हैं। नक्सलियों ने वर्ष 2023 में छत्तीसगढ़ के अंदर 7 भाजपा नेताओं की हत्या की है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इन हत्याओं को छिटपुट घटनाएँ बताया है।

छत्तीसगढ़ में आज पहले चरण का मतदान हो रहा है। पहले चरण में छत्तीसगढ़ में दुर्ग और बस्तर क्षेत्र की 20 विधानसभा सीटों पर मतदान करवाया जा रहा है। इनमें से अधिकाँश इलाके नक्सल प्रभावित हैं। इस बार इस क्षेत्र के 127 गाँवों में पहली बार मतदान करवाया जा रहा है। इससे पहले नक्सलियों के खतरे के कारण यहाँ मतदान केन्द्र स्थापित नहीं करवाए जाते थे।

1 दिन पहले IED ब्लास्ट, अब छत्तीसगढ़ में मतदान: बस्तर में 60000 सुरक्षा बल सँभालेंगे मोर्चा, बेटिंग एप घोटाले के बीच जानें किन VIP सीटों पर रहेगी नज़र

छत्तीसगढ़ में मंगलवार ( 7 नवंबर 2023 ) को सुबह 7 बजे से ही पहले चरण का मतदान शुरू हो जाएगा। पहले चरण में 20 विधानसभा सीटों पर मतदान होना है। छत्तीसगढ़ की 90 में से 20 विधानसभा सीटों पर ये मतदान दो स्लॉट में कराए जाएँगे, इसके लिए 5304 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। छत्तीसगढ़ में इस बार भ्रष्टाचार और आदिवासियों का मुद्दा अहम है, वहीं शराब का मुद्दा भी छत्तीसगढ़ में अहम भूमिका निभा सकता है। पिछले चुनाव में कॉन्ग्रेस को छत्तीसगढ़ में भारी जीत मिली थी, लेकिन इस बार भाजपा पलटवार करती दिख रही है। बहरहाल, छत्तीसगढ़ में बाकी की 70 विधानसभा सीटों के लिए 17 नवंबर को मतदान होंगे और 3 दिसंबर को मतगणना कराई जाएगी। इसी के साथ साफ हो जाएगा कि छत्तीसगढ़ में कौन सी पार्टी सत्ता में आएगी।

छत्तीसगढ़ में जिन 20 सीटों पर मतदान होना है, वो अधिकतर सीटें नक्सल प्रभावित इलाकों में हैं। इनमें बस्तर, दंतेवाड़ा, कांकेर, कवर्धा और राजनांदगांव जिले शामिल हैं। इसमें से 10 सीटों पर सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान होगा, जिसमें पंडरिया, कवर्धा, खैरागढ़, डोंगरगढ़, राजनांदगांव, डोंगरगाँव, खुज्जी, जगदलपुर, चित्रकूट और बस्तर। वहीं, सुबह 7 बजे से दोपहर 3 बजे तक दस विधानसभा क्षेत्रों मोहला-मानपुर, अंतागढ़, भानुप्रतापपुर, कोनकर, केशकाल, कोंडागांव, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और कोंटा।

चुनाव आयोग के आँकड़ों के मुताबिक, छत्तीसगढ़ चुनाव 2023 के पहले चरण में कुल 40,78,689 मतदाता मतदान करेंगे। जिसमें महिला मतदाताओं की संख्या पुरुष मतदाताओं से अधिक है। इन 40 लाख लोगों में से 19 लाख से अधिक (19,93,936) पुरुष और 20 लाख से अधिक (20,84,675) महिलाएँ हैं। इस बार कम से कम (1.6 लाख) 1,64,299 लोग पहली बार मतदाता हैं और उनकी उम्र 18 से 19 साल के बीच है।

भाजपा और कॉन्ग्रेस में मुख्य मुकाबला

छत्तीसगढ़ चुनाव में कॉन्ग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच कड़ी टक्कर होने की संभावना है। राज्य में वर्तमान में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस की सरकार है। जिन 20 सीटों के लिए पहले चरण में मतदान होगा, उनके लिए 25 महिलाओं समेत कुल 223 उम्मीदवार मैदान में हैं। इस चरण में 20 में से 13 सीटें एससी/एसटी के लिए आरक्षित हैं। खास बात ये है कि 2023 में कॉन्ग्रेस ने इस चरण में अपने छह मौजूदा विधायकों का या तो टिकट काट दिया है, या फिर उनकी जगह किसी और को टिकट दिया है।

इन बड़ी सीटों\चेहरों पर नजर

राजनांदगाँव: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह अपनी सीट राजनांदगाँव से चुनाव लड़ रहे हैं। उसके खिलाफ कॉन्ग्रेस ने गिरिस देवांगन को मैदान में उतारा है। गिरिस देवांगन खनिज विकास निगम के अध्यक्ष हैं, वहीं साल 2008 से ही इस सीट पर रमन सिंह का कब्जा है।

कोंटा: इस सीट पर छत्तीसगढ़ के मंत्री कवासी लखमा चुनाव लड़ रहे हैं। पिछले दो चुनाव में वो जीत दर्ज कर चुके हैं। उसने सामने भाजपा ने सोयम मुका को मैदान में उतारा है। ये सीट आरक्षित है।

कोंडागाँव: मौजूदा विधायक और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम बीजेपी की नई प्रदेश उपाध्यक्ष लता उसेंडी के खिलाफ मैदान में हैं।

बहनुप्रतापपुर: इस विधानसभा क्षेत्र से दिवंगत विधायक मनोज मंडावी की पत्नी सविता मंडावी चुनाव लड़ेंगी।

चित्रकूट: छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद दीपक बैज के सामने बीजेपी के विनायक गोयल हैं।

कवर्धा: इस सीट पर 16 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। भूपेश बघेल सरकार के परिवहन मंत्री मोहम्मद अकबर को कॉन्ग्रेस ने फिर से मैदान में उतारा है, तो भाजपा के विजय शर्मा उन्हें टक्कर दे रहे हैं।

पिछले विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस पड़ी थी भारी

2018 के छत्तीसगढ़ चुनाव में, कांग्रेस ने चरण 1 में मतदान करने वाली 20 सीटों में से 17 सीटें जीतीं। भाजपा ने 2 सीटें जीती थीं, जबकि अजीत जोगी की पार्टी, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ ने 1 सीट जीती थी। कुल मिलाकर, कांग्रेस ने 2018 के चुनावों में छत्तीसगढ़ में जोरदार प्रदर्शन किया था, 90 में से 68 सीटों पर जीत हासिल की थी और कुल वोटों का 43.9 प्रतिशत हासिल किया था।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में मतदान कराना एक बड़ी चुनौती है। नक्सलियों की धमकियों और हमलों के कारण सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना पड़ता है। इसके अलावा, इन क्षेत्रों में मतदान केंद्रों तक पहुँचना भी मुश्किल होता है। छत्तीसगढ़ में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में मतदान कराने के लिए चुनाव आयोग ने कई तरह के उपाय किए हैं। इन उपायों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती, मतदान केंद्रों तक पहुँच में आसानी और मतदाताओं को प्रोत्साहित करना शामिल है। चुनाव आयोग के मुताबिक, इस चरण के मतदान के लिए बस्तर संभाग में 60 हजार जवानों की तैनाती की गई है।

बता दें कि मतदान से एक दिन पहले छत्तीसगढ़ में आईईडी विस्फोट की खबर सामने आई। इस विस्फोट में बीएसएफ जवान समेत दो लोग घायल हो गए। ये धमाका कांकेर में हुआ। पुलिस ने बताया है कि बीएसएफ और डिस्ट्रिक्ट फोर्स की संयुक्त पार्टी कांकेर जिले के थाना छोटेबेटिया के 04 मतदान दलों को लेकर कैम्प मारबेड़ा से रेंगाघाटी रेंगागोंदी मतदान केन्द्र जा रही थी और शाम प्रेशर आईईडी की चपेट में आने से बीएसएफ के आरक्षक चंद्रप्रकाश सेवल और मतदान दल के 02 कर्मचारी घायल हो गए हैं। इसके अलावा नारायणपुर जिले के मुरहादपुर गाँव में भी नक्सलियों द्वारा आईडी प्लांट किया गया था। इसे निष्क्रिय करने के दौरान एक ITBP का कॉन्स्टेबल भी घायल हुआ।

छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर ‘महादेव’ बेटिंग एप के भ्रष्टाचार में शामिल होने के आरोप लगे हैं। वायरल वीडियो में उन्हें 508 करोड़ रुपए दिए जाने का आरोप लगाया गया था।

राज्यपाल पर हमलों की वजह DMK नेताओं के ज़हरीले बयान, अन्नामलाई ने वीडियो शेयर कर साधा निशाना: नागालैंड वालों को ‘कुत्ता खाने वाला’ बताने पर भी की निंदा

तमिलनाडु के राज्यपाल RN रवि पर बार-बार हुए हमलों के पीछे DMK नेताओं का हाथ है। ऐसा दावा किया है तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष एन अन्नामलाई ने। उन्होंने एक डीएमके नेता के भाषण का वीडियो शेयर किया, जिसमें राज्यपाल आरएन रवि के लिए गलत शब्दों का उपयोग तो किया ही गया है, साथ ही उन पर हमलों के लिए लोगों को उकसाया भी गया है। यही नहीं, डीएमके नेता उस वीडियो में नागालैंड के लोगों को ‘कुत्ता’ खाने वाला कह रहा है।

एन अन्नामलाई ने अपने एक्स ( पूर्व में ट्विटर ) हैंडल पर लिखा, “राजभवन पर हालिया हमला डीएमके नेताओं द्वारा माननीय राज्यपाल के खिलाफ ऐसे भद्दे भाषणों का परिणाम है, फिर भी लगता है कि डीएमके ने सबक नहीं सीखा है। हमारे उत्तर पूर्वी भाई-बहनों के गौरव को कुत्ता खाने वालों तक सीमित करना अत्यंत निंदनीय है। जबकि एमके स्टालिन का पॉडकास्ट ड्रामा जारी है। इंडी एलायंस और उसके समावेशी सामाजिक न्याय के मॉडल की नजर में भारत ऐसा है।” उन्होंने जो वीडियो शेयर किया है, उसमें डीएमके नेता नागालैंड के लोगों के बारे में गलत बात बोलता दिख रहा है।

डीएमके नेता उस वीडियो में कहता है, “नागालैंड के लोग, जो कुत्ता खाते हैं, उन्होंने आरएन रवि को वहाँ से भगा दिया। हम तमिलनाडु के लोग तो नमक से खाना खाते हैं और कहीं ज्यादा मजबूत हैं। हम क्या हश्र करेंगे” बता दें कि तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि से सत्ताधारी पार्टी डीएमके का छत्तीस का आँकड़ा है।

भाजपा ने डीएमके को दिया ऑफर, अपने 50 लोगों को भेजो उत्तर और उत्तर-पूर्व भारत, हम देंगे खर्चा

इस बीच एन अन्नामलाई ने डीएमके को पत्र लिखकर कहा है कि वो अपने 50 कार्यकर्ताओं को उत्तर भारत और उत्तर-पूर्व भारत के दौरे के लिए भेजे, जिसके टिकट का खर्च भाजपा उठाएगी। ऐसा करने से डीएमके के लोगों को पूरे भारत को समझने का मौका मिलेगा, क्योंकि वो उत्तर भारतीयों को स्टीरियोटाइप की तरह देखते हैं और उनके प्रति खास नफरत की भावना उनकी पार्टी प्रचारित करती है। उन्होंने लिखा, “श्री एमके स्टालिन जी, तमिलनाडु भाजपा ने डीएमके नेताओं को उत्तर और उत्तर पूर्वी भारत का दौरा करने के लिए 50 ट्रेन टिकटों को प्रायोजित करने की पेशकश की है ताकि उनके मन से अपमानजनक रूढ़िवादिता को दूर करने में मदद मिल सके जिसे आपकी पार्टी सदियों से प्रचारित कर रही है।”

बता दें कि डीएमके नेता राज्यपाल आरएन रवि को तो निशाना बनाते ही हैं, साथ ही उत्तर भारतीयों खासकर सनातन धर्म के खिलाफ लगातार प्रोपेगेंडा फैलाते हैं। उसी कड़ी में डीएमके के नेता और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के मंत्री बेटे उदयनिधि स्टालिन ने सनातन को खत्म करने की बात कही थी। वहीं, राज्यपाल को लेकर उसकी आक्रामकता लगातार दिखी है, क्योंकि राज्यपाल आरएन रवि ने डीएमके सरकार द्वारा पास किए गए कई बिलों को रिजेक्ट कर दिया है। उन्होंने कई ऐसे मामलों को रोक दिया, जो एकतरफा थे। उन्होंने डीएमके नेताओं द्वारा सनातन धर्म पर हमलों को भी गलत बताया था। इसके कुछ दिन बाद ही उन पर हमला हुआ था।

गौरतलब है कि तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई स्थित राजभवन के मुख्य द्वार पर 25 अक्टूबर को पेट्रोल बम से हमला हुआ था। इस दौरान दो बम राजभवन के गेट पर फेंके गए थे, जिससे ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। पुलिस ने बम फेंकने वाले को गिरफ्तार कर लिया था। उस व्यक्ति की पहचान करुक्का विनोद के रूप में हुई थी, जो तीन दिन पहले ही जेल से छूटकर आया था। वो डीएमके का सपोर्टर माना जाता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, करुक्का विनोद तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि से खफा था। दरअसल, जेल में रहते हुए विनोद ने समय से पहले रिहाई की माँग करते हुए राज्यपाल के पास एक याचिका भेजी थी। इस याचिका को राज्यपाल ने खारिज कर दिया था। इतना ही नहीं, राज्यपाल द्वारा मुस्लिम कैदियों को रिहा नहीं करने से भी वह नाराज था। उसने बताया कि इन दोनों कारणों से वह राज्यपाल से बदला लेना चाहता था और उसने इसी वजह से बम फेंका।

क्लास में खोल दी छात्रों की Bumble आईडी, चूति@ जैसे शब्दों का इस्तेमाल: ‘जय श्री राम’ से नफरत करने वाली हमास समर्थक प्रोफेसर समीना का वीडियो वायरल

‘जय श्री राम के नारे’ से नफरत और हमास का समर्थन करने वाली ओ पी जिंदल विश्वविद्यालय की प्रोफ़ेसर समीना दलवई पर छात्र-छात्राओं की निजता भंग करने का आरोप लगा है। उन्होंने अपने एक छात्र की बम्बल आईडी (डेटिंग एप) क्लास में सभी बच्चों के सामने प्रदर्शित की। समीना कथित तौर पर कॉन्ग्रेस हामिद दलवई की पुत्री हैं।

जानकारी के अनुसार, यह घटना सितम्बर 2023 की है। कथित तौर पर समीना ने अपने एक छात्र का बम्बल अकाउंट क्लास में लगे स्मार्ट टीवी पर दिखाया। इस घटना की कुछ वीडियो और इसके बारे में बातचीत अब सोशल मीडिया पर वायरल है।

एक वीडियो क्लिप में दिखता है कि स्मार्ट टीवी पर एक लड़की का बम्बल अकाउंट खुला हुआ है और वह लेक्चर दे रही हैं। टीवी के पास लगे बोर्ड में ‘मल्लू’, ‘आयु’, ‘जगह’ और ‘फ्रेशर’ जैसे शब्द लिखे गए हैं। एक अन्य वीडियो में दिखता है कि समीना ने एक लड़के की आईडी टीवी पर खोली हुई है और हाँ या ना में जवाब माँग रही हैं। ऐसे ही एक दो वीडियो और वायरल हुए हैं।

इस विषय में छात्रों के बातचीत के स्क्रीनशॉट वायरल हुए हैं। एक ऐसे ही फोटो में दिखता है, “पहली बात तो उसका क्लास में बम्बल खोलना ही गलत था। और साथ ही डेटिंग एप पर अकाउंट होना कुछ ऐसी बात है जो कि हम अधिकांश समय किसी से साझा नहीं करते। हमें तब कैसा लगेगा जब कोई हमारी फोटो 40 लोगों के सामने स्क्रीन पर दिखाए।”

अंग्रेजी समाचार वेबसाइट ‘ऑर्गनाइजर‘ ने एक शिकायत पत्र अपने पास होने का दावा किया है जिसमें 23 सितम्बर को समीना के खिलाफ छात्रों ने निजता का उल्लंघन करने के आरोप लगाए गए हैं। बताया गया कि इसके बाद समीना ने अपनी क्लास में फ़ोन लाने पर प्रतिबंध लगा दिया।

यह भी सामने आया कि समीना ने क्लास के भीतर गालियों और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने ‘चूति@’ शब्द का इस्तेमाल भी किया। अब इस मामले में छात्रों ने विश्वविद्यालय से जाँच की माँग की है। हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेनू भाटिया ने कहा है कि वह स्वयं 7 अक्टूबर को खुद ही इस ओपी विश्वविद्यालय में जाएँगी।

समीना हाल ही में विवादों के घेरे आई थी जब उन्होंने विश्वविद्यालय में फिलिस्तीन और इजरायल के मुद्दे पर 1 नवम्बर को आयोजित एक कार्यक्रम में हमास का समर्थन किए जाने पर विवादित ईमेल लिखा था। इस बातचीत में काफी हिन्दू विरोधी बातें हुई थीम जब इसका लोगों ने विरोध किया तो समीना ने लिखा कि वह ‘जय श्री राम’ के नारे कैंपस में देखती हैं लेकिन शांत रहती हैं।

अलीगढ़ से धराए ISIS के आतंकी अब्दुल्ला और माज़, जिहाद के लिए तैयार कर रहे थे फ़ौज: दीपावली पर धमाकों की थी साजिश, AMU से जुड़े तार

उत्तर प्रदेश की एटीएस ने अलीगढ़ से ISIS के दो आतंकियों को गिरफ्तार किया है। इनका कनेक्शन दिल्ली पुलिस के क्राइम ब्रांच द्वारा पकड़े गए शहनवाज और रिजवान जैसे आतंकियों के साथ है। यूपी एटीएस ने 3 नवंबर को सूचना के आधार पर केस दर्ज किया था, और जाँच के बाद छापेमारी कर दो अलग-अलग जगहों से दोनों आतंकियों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आतंकियों के पास से ISIS और अलकायदा से जुड़ा साहित्य भी बरामद किया गया है।

यूपी एटीएस द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, यूपी एटीएस को सूचना मिल रही थी कि कुछ लोग अलीगढ़ में आईएसआईएस की विचारधारा से प्रेरित होकर अन्य लोगों को भी प्रभावित कर रहे हैं। यूपी एटीएस ने ये भी बताया कि दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार आतंकियों के संबंध अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र संगठन स्टूडेंट्स ऑफ अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (SAMU) से हैं। ये लोग आईएसआईएस की विचारधारा से प्रभावित हैं। ऐसे में एटीएस ने जाँच का दायरा बढ़ाया और साक्ष्य जुटाकर अपनी कार्रवाई को अंजाम दिया।

यूपी एटीएस ने बताया कि दोनों आतंकियों के पास से प्रिंटेड साहित्य, आईएसआईएस के प्रोपेगेंडा से भरी पेन ड्राइव व अन्य सामान बरामद हुए। इसके अलावा उनके इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज से अनेक देश-विरोधी और आतंकी विचारधारा समर्थित कई ग्रुपों से जुड़ाव मिला है। इसमें आईएस के साथ ही ‘अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट’ का भी साहित्य सामिल है। यूपी एटीएस ने दोनों को 5 नवंबर को गिरफ्तार किया है। यूपी एटीएस ने दोनों को कोर्ट के सामने पेश किया और हिरासत में ले लिया। दोनों की पहचान अब्दुल्ला अर्सलान और माज़ बिन तारिक के रूप में हुई है।

बड़े आतंकी मॉड्यूल का हिस्सा अब्दुल्ला अर्सलान और माज़ बिन तारिक

बता दें कि अक्टूबर माह की शुरुआत में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कई आतंकियों को दिल्ली से लेकर अलीगढ़ तक गिरफ्तार किया था। ये आतंकी आईएसआईएस का मॉड्यूल संचालित कर रहे थे। दिल्ली पुलिस के इस ऑपरेशन में पता चला था कि शहनवाज, रिजवान और अरशद नाम के आतंकी, जिसमें शहनवाज पुणे में यूएपीए केस में गिरफ्तारी के बाद से फरार था, वो उत्तरी भारत में आईएसआईएस का पूरा मॉड्यूल खड़ा कर रहे थे और दीपावली के त्योहार के समय कई जगहों पर धमाकों-हमलों की फिराक में थे।

शहनवाज ने गुजरात से लेकर यूपी, दिल्ली के कई महत्वपूर्ण जगहों की रेकी भी की थी। इतना ही नहीं, इन आतंकियों ने ट्रेनिंग सेंटर बनाने के लिए जमीन तक तलाश कर ली थी। इसी जाँच में खुलासा हुआ था कि ये आतंकी अलीगढ़ से लेकर प्रयागराज तक मदरसों और मौलानाओं के संपर्क में हैं। वो अपने जैसे लोगों की पूरी फौज खड़ी करने का मंसूबा बनाए हुए थे और बाकायदा उन्हें उनका हैंडलर इसके लिए मदद भी कर रहा था। इसी आईएसआईएस मॉड्यूल से जुड़े दोनों लोगों को यूपी एटीएस ने गिरफ्तार किया है।

शहनवाज मूल रूप से झारखंड का रहने वाला है। वो पुणे जाकर आईएसआईएस से जुड़ गया था और ISIS का स्लीपर सेल तैयार कर रहा था। उसकी गैंग के तमाम सदस्य बम बना कर उसे पास के जंगलों में टेस्ट करने जाया करते थे। विस्फोट की साजिश को अंजाम देने के लिए शाहनवाज की गैंग को चोरी की बाइक की जरूरत थी। शाहनवाज के साथ इस नेटवर्क से जुड़े इमरान और युसूफ को जुलाई 2023 में बाइक चोरी करने के मिशन पर भेजा गया था लेकिन वो पुलिस द्वारा पकड़े गए। हालाँकि, शाहनवाज फरार होने में कामयाब रहा था। उस पर यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया था और वो छिप कर रिजवान के पास दिल्ली में रह रहा था।

उसका साथी रिजवान प्रयागराज तक मदरसों और मौलानाओं के संपर्क में था। उसे लखनऊ से गिरफ्तार किया गया था। वो लखनऊ से पहले नैनी में रह रहा था और लखनऊ जाने के बाद भी उसका प्रयागराज आना जाना रहता था। वो कई मौलानाओं, मदरसों और मस्जिदों के संचालकों के संपर्क में था। इनके संबंधों को भी एजेंसियाँ खंगाल रही हैं। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने रिजवान, शाहनवाज उर्फ शैफी उज्जमा के साथ ही अरशद वारसी को भी गिरफ्तार किया था। ये तीनों दिवाली से पहले देश के विभिन्न हिस्सों में आतंकी हमलों की तैयारी कर रहे थे। उनके निशाने पर अयोध्या का राम मंदिर भी था, जिसकी ये रेकी भी कर चुके थे।

BHU में ‘हिंदुत्व की कब्र खुदेगी’ के नारे, दलित छात्र पर हमला किया, महिला सुरक्षाकर्मी का गला दबाया, जातिसूचक गालियाँ: वामपंथियों के उपद्रव के बाद FIR दर्ज

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी (BHU) के अंदर हिंदुत्व विरोधी और आज़ादी के नारे लगने की खबर है। इस मामले में पुलिस ने कुल 17 नामजद सहित अन्य अज्ञात लोगों पर FIR दर्ज की है। बताया गया है कि आरोपितों ने आज़ादी के नारों का विरोध करने पहुँचे छात्रों पर हमला भी किया। इस हमले में कुछ छात्रों को फैक्चर भी हुआ है। घटना रविवार (5 नवंबर, 2023) की है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

इस मामले की FIR वाराणसी के लंका थाने में 6 नवंबर (सोमवार) को दर्ज हुई है। शिकायत एक छात्रा की तरफ से दर्ज करवाई गई है। पीड़िता का कहना है कि पिछले 2 दिनों से यूनिवर्सिटी के छात्र BHU कैम्पस में धरना दे रहे थे। इस दौरान पीड़िता यूनिवर्सिटी की एक छात्रा व 2 अन्य छात्रों के साथ धरनास्थल पर पहुँची। धरनास्थल पर इन सभी को यूनिवर्सिटी के छात्रों के बजाय कई बाहरी लोग भी दिखाई पड़े। आरोप है कि ये लोग ‘हिंदुत्व की कब्र खुदेगी’ और ‘आज़ादी’ के नारे लगा रहे थे। एक वायरल वीडियो में वामपंथी छात्राओं द्वारा पुलिस के आगे ही ‘मोदी-योगी मुर्दाबाद’ के नारे लगाए जा रहे हैं।

पीड़िता ने अपनी शिकायत में आगे बताया है कि BHU कैम्पस में लग रहे आपत्तिजनक नारों का धरने या छात्राओं के हित से कोई वास्ता न होने की वजह से उन्होंने इस नारेबाजी का विरोध किया। इस विरोध से नाराज हो कर वहाँ मौजूद कई लोगो ने पीड़िता और उसके साथियों पर हमला बोल दिया। पीड़िता ने इन हमलावरों में आकांक्षा शर्मा उर्फ़ आज़ाद, चंदा यादव, रोशन पांडेय, इप्शिता, राजेश कुमार, राणा रोहित, राजीव नयन, सुमन आनंद, अक्षय आदर्श, ऋषि तिवारी, मानव उमेश, अमन सिंह, अमित, अनुपम और विश्वजीत और अनुरति को नामजद करते हुए 15 अज्ञात लोगों के होने का दावा किया। ABVP ने वीडियो शेयर कर के वामपंथी छात्राओं द्वारा महिला सुरक्षाकर्मी का गला दबाने का आरोप लगाया है।

शिकयत में पीड़िता ने आगे बताया कि हमलावरों की भीड़ ने उन्हें और उनके साथियो को घसीट कर मारा। पीड़िता के कपड़ों को खींचा गया और उनके साथ मौजूद एक दलित समुदाय के युवक को जातिसूचक गालियाँ दीं गईं। भीड़ में से कई लोग पीड़ितों को देश लेने की धमकी भी देते रहे। हमले में पीड़िता व उनके साथियों के हाथ, पैर में फैक्चर के साथ आँख के पास घाव हो गया। नामजद आकांक्षा, चंदा यादव, इप्शिता और रिद्धि के पहले भी आपराधिक मामलों में शामिल रहने की जानकारी देते हुए पीड़िता ने खुद को बेहद डरा बताया है।

शिकायत के अंत में पुलिस से सभी आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की गई है। इस शिकायत पर पुलिस ने पीड़िता द्वारा बताए गए सभी 17 आरोपितों को नामजद किया है। बाकी अन्य हमलावरों को अज्ञात में रख कर मामले की विवेचना की जा रही है। इन सभी हमलावरों पर IPC की धारा 147, 323, 504, 506, 505 (2) और 354 (ख) के साथ SC/ST एक्ट में केस दर्ज किया गया। पुलिस मामले की जाँच कर रही है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। एक अन्य वीडियो में वामपंथी छात्राओं को महिला शिक्षिकाओं से अभद्रता करते देखा और सुना जा सकता है।

पीड़ित हैं ABVP से, हमलावर वामपंथी

ऑपइंडिया ने इस मामले में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के पदाधिकारी अभय प्रताप सिंह से बात की। अभय ने हमें बताया कि हमलावर छात्रों में कुछ NSUI और तमाम AISA के हैं। छात्रा आकांक्षा भगत सिंह स्टूडेंट्स मोर्चा (BSM) से बताई गई। अभय का दावा है कि इस संगठन पर नक्सलियों से रिश्तों की जाँच ख़ुफ़िया एजेंसियाँ कर रहीं हैं। हमें बताया गया कि अगर मौके पर ABVP से जुड़े लोग चारों पीड़ित छात्रों को बचाने कुछ लोग न पहुँचे होते तो उनकी मॉब लिन्चिग में हत्या हो जाती।

CAA-NRC हिंसा से भी कनेक्शन

ABVP पदाधिकारी अभय ने हमें बताया कि हमलावरों में प्रमुख चंदा यादव पहले जामिया मिलिया की छात्र थी। वह वामपंथी छात्र संगठन आइसा (AISA) की राष्ट्रीय सचिव हैं। दावा है कि वो CAA-NRC हिंसा के दौरान सरकार के विरोध में और अराजकता फैलाने में काफी सक्रिय रही थी। इन हरकतों के चलते चंदा यादव पर FIR भी दर्ज हुई थी जिसका कोर्ट में ट्रायल भी चलने वाला है। चंदा यादव का CAA-NRC विरोध प्रदर्शनों के दौरान एक फोटो भी सामने आया है जब वो मंच पर हिजाब में दिख रही एक छात्र के बगल खड़ी हो कर डफली बजा रही है।

एक अन्य आरोपित रोशन भी AISA से जुड़ा हुआ है। अभय प्रताप सिंह ने वाराणसी पुलिस पर भी आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई में देरी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि ABVP के छात्रों की पिटाई के दौरान पुलिस बुलाई गई थी। दावा है कि इस दौरान नामजदों में से कुछ लोग हिरासत में भी लिए गए थे लेकिन पुलिस ने थोड़ी दूर जा कर उन्हें छोड़ दिया। अब FIR दर्ज होने के बाद ABVP पदाधिकारी ने उम्मीद जताई है कि आरोपितों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।

हालाँकि आकांक्षा और चंदा यादव ने खुद पर लगे हमले के आरोपों से इंकार किया है। उन्होंने उलटे ABVP पर ही हमले का आरोप लगाया है।