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कश्मीर के मंदिरों के दर्शन के लिए जा रहे चम्पारण के 100 युवा, साथ लेकर जा रहे 20000 चम्पा के पौधे: बिहार के उद्योगपति ने उठाया ‘सद्भावना यात्रा’ का बीड़ा

अगस्त 2019 में मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद-370 को निरस्त करने का निर्णय लिया। इसके बाद से ही लगातार न सिर्फ आतंकियों का सफाया जारी है, बल्कि वहाँ कई विकास कार्य भी चल रहे हैं। जम्मू कश्मीर को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास चल रहे हैं। इसी क्रम में बिहार के उद्योगपति राकेश पांडेय ‘चम्पारण-कश्मीर सद्भावना यात्रा’ निकाल रहे हैं। इसके तहत बिहार के चम्पारण क्षेत्र के 100 युवाओं को कश्मीर की निःशुल्क यात्रा कराई जा रही है।

इसके तहत बिहार के पूर्वी चम्पारण स्थित ‘बापूधाम’ रेलवे स्टेशन से 100 युवाओं का समूह दिल्ली के लिए निकला। दिल्ली पहुँचने के बाद उन्हें कश्मीर के लिए ले जाए जाने की तैयारी चल रही है। राकेश पांडेय के बारे में बता दें कि वो कई देशों में फैली कंपनी ‘ब्रावो फार्मा’ नामक कंपनी चलाते हैं। इसी के तहत उनका ‘ब्रावो फाउंडेशन’ चलाते हैं, जिसके तत्वाधान में ये यात्रा निकाली जा रही है। 100 युवाओं को विमान के माध्यम से पहले दिल्ली से श्रीनगर ले जाया जाएगा।

इन युवाओं को शंकराचार्य मंदिर, त्रेहगाम शिव मंदिर, शारदा पीठ, खीर भवानी मंदिर और मार्तण्ड सूर्य मंदिर जैसे आध्यात्मिक धरोहरों का दर्शन कराया जाएगा। उन्हें बताया जाएगा कि कश्मीर भी भारत की सनातन संस्कृति से जुड़ा हुआ है और ये सनातन की प्राचीन स्थली रही है। इन युवाओं को प्रेरित किया जाएगा कि वो कश्मीर को भी अपने कार्यक्षेत्र के रूप में चुनें, पर्यटन या व्यापार वगैरह के लिए वहाँ आएँ। ये 100 युवा अपने साथ 20,000 चम्पा के पौधे भी चम्पारण से लेकर जा रहे हैं।

उद्देश्य ये है कि जब ये 20,000 चम्पा के पौधे कश्मीर में लहलहाएँगे तो देश की सांस्कृतिक एवं भौगोलिक एकता का प्रतीक बनेंगे। राकेश पांडेय बिहार के मोतिहारी स्थित नरसिंह बाबा प्रांगण में भव्य परशुराम प्रतिमा का भी निर्माण करवा रहे हैं। साथ ही चम्पारण में वो फैक्ट्री भी लगवा रहे हैं, जिससे रोजगार उत्पन्न होगा और इलाके की अर्थव्यवस्था बदलेगा। मोतिहारी के MS कॉलेज, LND कॉलेज, पटना स्थित IIT और वीमेंस कॉलेज में भी उनके सौजन्य से कई कार्य चल रहे हैं।

हिंदुत्व से लेकर दलित-जनजातीय एवं महिलाओं तक, MP में हर मोर्चे पर पिछड़ी कॉन्ग्रेस: यूँ ही नहीं आ गई ‘कपड़े फाड़ने’ की नौबत

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और कॉन्ग्रेस ने पूरी ताकत झोंक दी है। भाजपा ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ अपने अन्य हैवीवेट चेहरों को मैदान में उतार दिया है। वहीं, कॉन्ग्रेस अब भी अपने दो सबसे पुराने और विश्वसनीय चेहरों के दम पर ही मैदान में है। ये अलग बात है कि इन दो ‘मजबूत’ चेहरों में ही कपड़े फाड़ने की नौबत आ चुकी है। दोनों एक-दूसरे के समर्थकों से कह रहे हैं कि वो जाकर सामने वाले के कपड़े फाड़े।

वहीं, कमलनाथ ने तो दिग्विजय सिंह के लिए ये कह दिया कि ‘मैंने दिग्विजय सिंह को गाली खाने के लिए पॉवर ऑफ अटार्नी दी है’। खैर, मध्य प्रदेश में चुनावी मुद्दों की बात करें तो विकास, भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, वादाखिलाफी, जनजातीय मुद्दे, महिला आरक्षण, ओबीसी आरक्षण और हिंदुत्व के साथ ही धार्मिक केंद्रों के विकास भी खास चुनावी मुद्दों में शामिल हैं।

मध्य प्रदेश का चुनावी गणित

मध्य प्रदेश में कुल 230 विधानसभा सीटें हैं, जिन्हें मोटे तौर पर 7 हिस्सों में बाँटा जा सकता है। चंबल रीजन में 34 विधानसभा सीटें हैं। वहीं, बुंदेलखंड में 26, बघेलखंड में 30, महाकोशल में 47, भोपाल रीजन में 20, निमाड़ रीजन में 18 और मालवा रीजन में 55 विधानसभा सीटें हैं। मध्य प्रदेश की 230 सीटों में से 35 सीटें एससी वर्ग के लिए आरक्षित हैं तो एसटी वर्ग के लिए 47 विधानसभा सीटें।

पुराने चेहरों पर टिकी है कॉन्ग्रेस की लीडरशिप

मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस अपने दो पुराने चेहरों- कमलनाथ और दिग्विजय सिंह को ही आगे करके चुनाव लड़ रही है। कमलनाथ मुख्यमंत्री पद के चेहरे हैं, लेकिन खींचतान में दिग्विजय सिंह अपने पूरे लाव-लश्कर के साथ कमलनाथ को दबाव में लेते दिख रहे हैं। कॉन्ग्रेस के बड़े चेहरों में पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी और केसी वेणुगोपाल हैं।

वहीं, रणदीप सुरजेवाला को केंद्र और राज्य की टीमों के साथ समन्वय बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। कॉन्ग्रेस के पास जनजातीय चेहरे के तौर पर कांतिलाल भूरिया हैं, जो पूर्व केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। उन्हें कॉन्ग्रेस ने चुनाव प्रचार कमेटी का अध्यक्ष भी बनाया है।

भाजपा ने फिर से बनाया मोदी को चेहरा, कई ‘बड़े’ सूरमा भी खड़े

भारतीय जनता पार्टी के चुनावी कैंपेन का प्रमुख चेहरा निर्विवाद रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। उनका साथ दे रहे हैं भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और मौजूदा गृहमंत्री अमित शाह। उसके साथ मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव बीएल संतोष भी चुनाव की कमान संभाल रहे हैं।

राज्य की लीडरशिप में शिवराज सिंह चौहान बिना किसी शक के बड़े चेहरे हैं, लेकिन कोई कमीं न छूट जाए, इसके लिए केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को भी बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। भाजपा के पास भूपेंद्र यादव और अश्विनी वैष्णव जैसे महारथी भी हैं तो रॉयल चेहरे के तौर पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी पूरी ताकत झोंक दी है। ग्वालियर संभाव में उनकी पकड़ अब भी काफी मजबूत मानी जाती है।

मध्य प्रदेश का चुनावी इतिहास

मध्य प्रदेश के चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो साल 2018 में भारतीय जनता पार्टी सत्ता में होने के बावजूद 230 में से 109 ही सीटें जीत पाई थी। वहीं कॉन्ग्रेस ने 114 सीटों पर जीत हासिल करके बहुमत पाया था। कमलनाथ के नेतृत्व में सरकार बनी, जो ज्योतिरादित्य सिंधिया की अगुवाई में कॉन्ग्रेस में बगावत होने के बाद गिर गई।

साल 2018 में मत प्रतिशत भाजपा और कॉन्ग्रेस का लगभग बराबर 41 प्रतिशत था। भाजपा ने 35 एससी सीटों में से 18 पर जीत हासिल की थी। वहीं, कॉन्ग्रेस को 17 सीटें मिली थीं। एसटी वर्ग के लिए आरक्षित 47 सीटों में से 30 पर कॉन्ग्रेस को जीत मिली थी तो 16 सीटों पर भाजपा को और एक सीट अन्य के खाते में गई थी।

उससे पहले साल 2013 की बात करें तो भाजपा ने 165 सीटों पर जोरदार जीत दर्ज की थी। कॉन्ग्रेस को महज 58 सीटों पर जीत मिली थी। वहीं, सात सीटों पर अन्य पार्टियों एवं निर्दलीयों को जीत मिली थी। इस चुनाव में भाजपा को एकतरफा 45 प्रतिशत से अधिक वोट मिले थे, जबकि कॉन्ग्रेस महज 36 प्रतिशत वोट ही हासिल कर पाई थी। अन्य के हिस्से में 19 प्रतिशत वोट गए थे।

साल 2019 के लोकसभा चुनाव की भी बात करें तो मध्य प्रदेश की 29 सीटों में से 28 पर भाजपा को जीत मिली थी, तो कॉन्ग्रेस को महज एक सीट से संतोष करना पड़ा था। लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा को 59 प्रतिशत वोट मिले थे, तो कॉन्ग्रेस को महज 35 प्रतिशत ही वोट मिल पाए थे।

मध्य प्रदेश में मतदाता वर्ग का ये है गणित

चुनाव आयोग और इंडिया टुडे के मुताबिक, मध्य प्रदेश में कुल 82 सीटें रिजर्व हैं, जिनमें 35 एससी वर्ग के लिए हैं तो 47 सीटें एसटी वर्ग के लिए। जाति आधारित मतदाता वर्ग की बात करें तो मध्य प्रदेश में 15 प्रतिशत वोटर सामान्य वर्ग के हैं, तो ओबीसी सर्वाधिक 38 प्रतिशत हैं।

वहीं, मध्य प्रदेश में 16 प्रतिशत वोटर एससी वर्ग से हैं तो एसटी, जिसमें जनजातीय वर्ग आता है। कुल 21 प्रतिशत मतदाता हैं। राज्य में 7 प्रतिशत मतदाता मुस्लिम हैं। वहीं, 3 प्रतिशत मतदाता बौद्ध, ईसाई, सिख के साथ अन्य वर्ग के हैं।

मध्य प्रदेश के चुनावी मुद्दे

मध्य प्रदेश में सबसे बड़ा वोटर वर्ग ओबीसी वर्ग का है। राज्य में 38 प्रतिशत ओबीसी निर्णायक भूमिका में हैं। वहीं, 21 प्रतिशत एसटी वर्ग भी सत्ता में बड़ी भूमिका निभाता है। ऐसे में मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान, जो खुद ओबीसी वर्ग से आते हैं वो भाजपा की तरफ से मुख्यमंत्री हैं।

शिवराज सिंह चौहान सभी वर्गों में लोकप्रिय हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद भी ओबीसी वर्ग से ही आते हैं। वहीं, कॉन्ग्रेस की लीडरशिप में कमलनाथ और दिग्विजय सिंह, दोनों ही सामान्य वर्ग के हैं। भाजपा में इनकी काट के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया, नरोत्तम मिश्रा जैसे बड़े चेहरे हैं।

महिलाओं के मुद्दे : कॉन्ग्रेस ने महिलाओं के लिए कुछ मुफ्त की घोषणाएँ की हैं, जबकि शिवराज सिंह चौहान का मुख्य वोटर वर्ग महिलाओं को माना जाता है। वो महिलाओं में काफी लोकप्रिय भी हैं, क्योंकि उनकी अगुवाई में भाजपा सरकार ने महिलाओं को केंद्र में रखकर कई योजनाएँ चलाई हैं। इसमें मध्य प्रदेश सरकार ने साल 2023-24 के बजट का एक तिहाई हिस्सा महिलाओं को केंद्र में रखकर तैयार की गई योजनाओं के लिए घोषित किया है।

शिवराज सिंह चौहान की देखरेख में लाडली बहन योजना चलती है, जिसके तहत अभी तक 1250 रुपए प्रति माह की सहायता महिलाओं को दी जाती थी, इसे बढ़ाकर 3000 रुपए प्रति माह करने का ऐलान किया गया है। शिवराज चौहान ने चुनाव के बाद लाडली बहन योजना की लाभार्थी महिलाओं को 450 रुपए में गैस सिलेंडर देने का वादा किया है, जबकि कॉन्ग्रेस का वादा 500 रुपए में सिलेंडर देने का है। केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण बिल पास करके पहले ही इस मोर्चे पर बाजी मार ली है, और कॉन्ग्रेस कोटे के अंदर कोटा की माँग करके महिला मतदाताओं को लुभाने की कोशिश कर रही है।

केंद्र-राज्य सरकार की योजनाओं का भाजपा को मिल रहा लाभ : भारतीय जनता पार्टी की डबल इंजन सरकार की योजनाओं का बड़ा वर्ग मध्य प्रदेश में है। राज्य में प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, पीएम-किसान योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, पीएम गरीब कल्याण योजना और आयुष्मान भारत योजना के करोड़ लाभार्थी भाजपा के आत्मविश्वास को मजबूत कर रहे हैं।

वहीं, कॉन्ग्रेस बच्चों के लिए मंथली स्कॉलरशिप 500 से 1500 रुपए देने का ‘वादा’ कर रही है। कॉन्ग्रेस ने योजनाओं की काट में 100 यूनिट मुफ्त बिजली, 200 यूनिट बिजली आधे दाम पर और हर महिला को 1500 रुपए प्रति माह के अलावा बेरोजगार युवाओं को भत्ता देने का चुनावी वादा किया है।

आदिवासियों के मुद्दे : मध्य प्रदेश में ओबीसी वर्ग अगर सबसे ताकतवर है भी तो भी आदिवासियों का महत्व इस बात से समझ सकते हैं कि एसटी वर्ग के लिए आरक्षित सीटों में जो बाजी मारता है, वही राज्य में सरकार बनाता है। मध्य प्रदेश में 21 प्रतिशत आबादी एसटी वर्ग की है, जिसके लिए प्रियंका गाँधी वाड्रा ने पेसा (Panchayat Extension to Scheduled Areas-PESA)) के विस्तार का वादा किया है। वहीं, भाजपा के पास देश को पहली जनजातीय राष्ट्रपति देने का गौरवगान है।

ये बड़ा फर्क आपको चुनावी समर में भी दिखेगा। यही नहीं, साल 2021 के सितंबर माह में अमित शाह ने राजा शंकर शाह और उसने बेटे रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस पर जबलपुर में कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रानी कमलापति के नाम पर भोपाल के हबीबगंज रेलवे स्टेशन का ही नामकरण कर दिया है। राज्य में शिवराज सिंह चौहान सरकार जनजातीय हितों को ध्यान में रखकर कई योजनाएँ चलाती हैं।

आदिवासियों के मामले में पेशाब कांड बड़ा चर्चित रहा था। इस मामले में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पीड़ित को न सिर्फ अपने घर बुलाया, बल्कि गंगाजल से उनके पैर भी धोए थे। कॉन्ग्रेस ने इस मामले को उठाने की कोशिश तो की, लेकिन वो इस मुद्दे को भुना नहीं पाई। वहीं, भाजपा ने आरोपित व्यक्तियों पर कड़ी कार्रवाई की और आरोपित जिस विधायक से जुड़ा था, उसे इस बार टिकट ही नहीं दिया है।

ओबीसी आरक्षण : कॉन्ग्रेस एक तरफ ओबीसी का आरक्षण बढ़ाने के नाम पर चुनावी वादे किए जा रही है और आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से अधिक करने की माँग कर रही है, साथ ही वादा भी कर रही है, लेकिन इसके कानूनी पहलुओं पर वो बात नहीं करना चाहती। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में ओबीसी वर्ग के लिए तमाम योजनाएँ चला रही है। ओबीसी वर्ग के चेहरे के तौर पर भाजपा में कई कद्दावर नेता मौजूद हैं।

हिंदुत्व : मध्य प्रदेश में हिंदुत्व बड़ा चुनावी मुद्दा है। हिंदुत्व और विकास की राजनीति के सहारे करीब दो दशकों से मध्य प्रदेश की सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी को चुनौती देने की कोशिश कॉन्ग्रेस जरूर कर रही है, लेकिन हकीकत ये है कि उज्जैन में महाकाल कॉरिडोर से लेकर छिंदवाड़ा के हनुमान कॉरिडोर तक भाजपा ही भारी पड़ रही है। वहीं, रही सही कसर हिंदुत्व और सनातन पर कॉन्ग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियों खासकर डीएमके के नेता उदयनिधि स्टालिन के बयान की तो इसके बाद से कॉन्ग्रेस बैकफुट पर आ चुकी है।

खास बात ये है कि भोपाल में इंडी गठबंधन अपनी पहली संयुक्त रैली करने वाला था, लेकिन स्टालिन के बयान के बाद बैकफुट पर आई कॉन्ग्रेस वो रैली करने की हिम्मत तक नहीं जुटा सकी। फिर मध्य प्रदेश के चुनाव समर के दौरान ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चित्रकूट के तुलसी पीठ जाना अपने आप में भाजपा के हिंदुत्व के बारे में काफी कुछ बता जाता है।

मध्य प्रदेश के चुनाव में मुस्लिम मतदाता कहाँ हैं?

मध्य प्रदेश में कुल 7 प्रतिशत मतदाता मुस्लिम हैं। इतने कम मतदाता होने की वजह से मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस भी मुस्लिमों को नहीं पूछ रही है, वहीं भाजपा की सरकार ने समावेशी विकास कार्यक्रम चलाए हैं। भाजपा का नारा ही है- ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ का।

वहीं, विडंबना देखिए कि जो कॉन्ग्रेस हर समय मुस्लिमों की बात करती रही है, वो खुद भाजपा के सॉफ्ट हिंदुत्व पर उतर आई है और मध्य प्रदेश में मुस्लिमों को पूरी तरह से भुला दिया है। यही वजह है कि भोपाल जैसे मुस्लिमों की अच्छी खासी आबादी वाले क्षेत्रों में भी भाजपा की मजबूत पकड़ है।

बागी और अन्य पार्टियाँ कहाँ?

मध्य प्रदेश में सीधी टक्कर भारतीय जनता पार्टी और कॉन्ग्रेस की है, लेकिन बाकी पार्टियाँ भी खेल बिगाड़ने में जुटी हुई हैं। कहाँ तो इंडी गठबंधन के नाम पर समाजवादी पार्टी भी कॉन्ग्रेस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चुनाव लड़ना चाहती थी, लेकिन कॉन्ग्रेस से मिली दुत्कार के बाद उसे अलग राह पकड़ने पर मजबूर होना पड़ा।

समाजवादी पार्टी ने मध्य प्रदेश में अकेले दम पर चुनाव लड़ने का फैसला कर दर्जनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं। वहीं, बहुजन समाज पार्टी भी मध्य प्रदेश में चुनाव लड़ रही है। इसके अलावा छोटे-मोटे कई दल भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। ऐसे में एक तरफ भाजपा का अकेले होना और दूसरी तरफ कई पार्टियों का अलग-अलग चुनाव लड़ना भी भाजपा को ही मजबूती देता दिख रहा है।

बात बागियों की करें तो बगावत हरेक पार्टी में हुई है। भाजपा में होने वाली बगावतों को थामने के लिए एक बड़ी टीम रही तो इसका ज्यादा असर नहीं पड़ता दिख रहा। वहीं, कॉन्ग्रेस में बागियों के तेवर ऐसे रहे कि करीब आधा दर्जन सीटों पर उसे अपने कैंडिडेट ही बदलने पड़े। फिर कई सीटों पर सपा के साथ उसकी ‘फ्रेंडली फाइट’ भी उसे ही नुकसान पहुँचाती दिख रही है।

कितने मतदाता, कब मतदान और नतीजे कब?

चुनाव आयोग द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, मध्य प्रदेश में कुल 5 करोड़ 61 लाख 36 हजार 229 मतदाता हैं, जिसमें 11 लाख 29 हजार 513 मतदाता पहली बार विधानसभा चुनाव में वोट देंगे। इन मतदाताओं की औसत उम्र 18-19 साल है। मध्य प्रदेश में इस बार 5.05 लाख दिव्यांगजन, 1373 मतदाता थर्ड जेंडर के और 6 लाख 53 हजार 640 लाख मतदाता वरिष्ठ नागरिक हैं, जिनकी उम्र 80 वर्ष से अधिक है। इनका मतदान दोनों ही पार्टियों पर निर्णायक असर डालने वाला है।

इस बार चुनाव आयोग ने पूरे राज्य में मतदान केंद्रों की संख्या घटा कर 64 हजार 523 कर दिया है, जबकि साल 2018 के विधानसभा चुनाव में 65 हजार 367 मतदान केंद्र बनाए गए थे। मध्य प्रदेश में 17 नवंबर 2023 को मतदान होना है। 3 दिसंबर 2023 को चुनाव परिणाम घोषित किया जाएगा।

‘कट्टर इस्लामी सोच के खिलाफ खड़े हों गीता-उपनिषद मानने वाले हिन्दू’: जिसने बनाई हमास, उसके ही बेटे ने कहा- इजरायल के पीछे एकजुट हो दुनिया

आतंकी संगठन हमास की स्थापना करने वाले शेख हसन यूसुफ के सबसे बड़े बेटे मोसाब हसन यूसुफ ने मंगलवार (31 अक्टूबर, 2023) को कहा कि वक्त आ गया है कि इस आतंकी संगठन के खिलाफ खड़ा हुआ जाए। हसन यूसुफ ने हमास आतंकवादियों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए भारत के लोगों और हिंदुओं की तारीफ की है। उन्होंने ‘सन ऑफ हमास’ नाम से किताब भी लिखी है।

टाइम्स नाउ को दिए इंटरव्यू में 45 वर्षीय मोसाब हसन यूसुफ ने कहा कि कट्टर मुस्लिम किसी और के साथ नहीं रह सकते हैं और न ही वे ऐसा करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “हिंदुओं को कोई परेशानी नहीं है, ईसाई और यहूदी भी सह-अस्तित्व में हैं। हिंसा केवल कट्टर मुस्लिमों की ओर से ही क्यों आती है?”

उन्होंने आगे कहा, “मुझे बाकी दुनिया से कोई परेशानी नहीं है। भारतीयों को कोई दिक्कत नहीं है। ईसाई, यहूदी, हम सभी सह-अस्तित्व में हैं। हमास और किसी भी अन्य इस्लामी आंदोलन को ख़त्म करने की ज़रूरत है। हमें इसे बहुत खुले तौर पर और स्पष्ट तरीके कहना होगा। आतंकवाद स्वीकार नहीं है।”

फिलिस्तीन के आतंकी संगठन हमास से अलग होने के बाद युसूफ इजरायल की सिक्योरिटी एजेंसी शिन बेट के लिए जासूसी का काम कर चुके हैं। 2000 के दशक की शुरुआत में दूसरे इंतिफादा (विद्रोह) के दौरान आतंकवादी हमलों को नाकाम करने और शिन बेट की मदद करने की उनकी कोशिशों के लिए उन्हें “ग्रीन प्रिंस” का खिताब दिया गया।

उन्हें हमास के फाउंडर शेख हसन यूसुफ ने छोड़ दिया था। शेख हसन को 60 अन्य हमास नेताओं के साथ बीते महीने अक्टूबर में वेस्ट बैंक में रेड के दौरान गिरफ्तार किया गया था।

मोसाब हसन यूसुफ ने खुलासा किया कि उन्होंने कट्टर इस्लामी विचारधारा को खारिज कर दिया और हिंसा को न कहने के लिए उन्हें लगभग मौत से गुजरना पड़ा है। उन्होंने कहा, “मेरे देश ने मुझसे किनारा कर लिया। मुझे शैतान करार दिया गया। ऐसा इसलिए है क्योंकि मैंने हिंसा, रक्तपात और आत्मघाती बम हमलों को ना कहा है। वे हर उस शख्स के साथ यही करते हैं जो उनके तरीके से अलग होता है। मैं दोनों पक्षों को जानता हूँ और इस हक के आधार पर मैं कहता हूँ कि हमें इजरायल के पीछे एकजुट होना होगा।”

इंटरव्यू में आगे यूसुफ ने यह भी कहा कि हमास की मानसिकता को खत्म करने की जरूरत है। युसूफ ने कहा, “उन्हें यह बताने की ज़रूरत है कि ये जिंदगी जीने का तरीका नहीं है। उन्होंने क्रूरता भरे काम किए हैं। हम ऐसे समूह को स्वीकार नहीं करते जो इस्लामिक राज्य बनाने के लिए पूरी मानवता पर हावी होना और शासन करना चाहता है। धरती किसी एक मजहब की नहीं है। यह हमास या कट्टर मुस्लिमों का नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा, “हमास ‘स्वतंत्रता सेनानी’ नहीं है जैसा कि कई लोग दावा कर रहे हैं। वे जोकरों का एक समूह हैं जो सबको इनकार कर जी रहे हैं। हमास का नागरिकों पर क्रूर हमले करने का एक लंबा इतिहास रहा है।” इस दौरान हमास फाउंडर के बेटे ने भगवान कृष्ण, गीता और उपनिषदों को मानने वाले भारतीयों और हिंदुओं से कट्टर इस्लामी विचारधारा के खिलाफ आवाज उठाने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा, “भारत में मेरी सेना, जो लोग कृष्ण और गीता और उपनिषदों को समझते हैं, उन्हें कमर कसने और दुनिया में इस अल्पसंख्यक समुदाय को दिखाने की जरूरत है कि कट्टर मुस्लिमस्वीकार्य नहीं हैं। जिस तरह से वे हिंसा फैलाते हैं और जिस तरह से वे अपना एजेंडा हासिल करना चाहते हैं वह स्वीकार्य नहीं है। भारतीयों को आगे बढ़ना चाहिए, हिंसा के रास्ते नहीं। लेकिन उन्हें दृढ़ रहना चाहिए और किसी भी तरह की इस्लामी दखलअंदाजी को स्वीकार नहीं करना चाहिए।”

उन्होंने यह भी कहा कि हमास सिर्फ एक राजनीतिक आतंकवादी समूह नहीं है। यह एक मजहबी आतंकवादी समूह है। युसूफ ने कहा, “अगर यह एक राजनीतिक समूह होता, तो हम उन पर समझौता करने और समाधान निकालने और हिंसा छोड़ने के लिए पर्याप्त दबाव डाल सकते थे। लेकिन हमास झुक नहीं सकता क्योंकि वे मरना पसंद करते हैं न कि अपनी विचारधारा छोड़ना। वे खुद को जिहादी मानते हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि हमास का एकमात्र मिशन इजरायल को नेस्तानाबूद करना है। हमास फाउंडर के बेटे ने कहा, “वे अपने इस्लामिक राज्य बनाने की शर्त के तौर पर 10 मिलियन यानी एक करोड़ इजरायलियों को स्थानांतरित होने के लिए मजबूर करना चाहते हैं। हम उन्हें वह नहीं दे सकते जो वे माँग रहे हैं।”

मोसाब हसन यूसुफ ने इस दौरान ये भी खुलासा किया कि गाजा पट्टी में हमास के मौजूदा फिलिस्तीनी नेता याह्या सिनवार अल-शिफा अस्पताल के नीचे छिपे हुए हैं। यूसुफ ने यह भी कहा कि वह खुद को बचाने के लिए अस्पताल में मरीजों को ढाल के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं।

इससे पहले फॉक्स न्यूज के इंटरव्यू में युसूफ ने कहा था,”गाजा को हमास से मुक्त कराकर इजरायल फिलिस्तीनी लोगों पर सबसे बड़ा उपकार कर रहा है।”

गौरतलब है कि 7 अक्टूबर को, 2,500 से अधिक हमास आतंकवादियों ने जमीन, हवा और समुद्र से इज़रायल पर हमला किया। इसमें 1,400 लोग मारे गए, जिनमें से अधिकांश आम नागरिक थे। इसके साथ ही 30 बच्चों सहित 230 लोगों का अपहरण कर लिया था। वहीं हमास के हमले के बाद इजरायल ने गाजा पर जवाबी हमला किया जो अभी तक जारी है।

‘बजरंग बली की गदा से होगा तालिबान का इलाज’: राजस्थान के ‘योगी’ को CM योगी ने बताया अपना ही रूप, बोले – यूपी में हुआ होता कन्हैया लाल जैसा हत्याकांड तो…

राजस्थान के विधानसभा चुनाव में भी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जलवा सिर चढ़ कर बोल रहा है। अलवर में नाथ संप्रदाय के एक और योगी है – बाबा बालकनाथ। योगी आदित्यनाथ उनके लिए चुनाव प्रचार करने बुधवार (1 नवंबर, 2023) को पहुँचे, जहाँ उन्होंने इस्लामी कट्टरपंथ के खिलाफ भी आग उगला। सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि तालिबान का इलाज हनुमान जी की गदा से होगा। उन्होंने राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार पर तुष्टिकरण का आरोप लगाते हुए कहा कि इस बार जनता इसे सबक सिखाएगी।

सीएम योगी ने इजरायल-हमास युद्ध का भी जिक्र किया। उन्होंने याद किया कि कैसे उदयपुर में कन्हैया लाल तेली की हत्या कर दी गई थी। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार में अयोध्या में भव्य राम मंदिर बन रहा है, जबकि कॉन्ग्रेस इस मुद्दे का समाधान नहीं चाहती थी। उन्होंने कहा कि कश्मीर में भी अनुच्छेद-370 को निरस्त कर के आतंकवाद का खात्मा किया गया। उन्होंने कहा कि इजरायल अपनी रक्षा के लिए चुन-चुन कर निशाना साध रहा है।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गाजा में इजरायल तालिबानी मानसिकता को कुचलने का काम कर रहा है, आतंकवाद सभ्य समाज के लिए सबसे दबा कलंक है। बता दें कि बाबा बालकनाथ अलवर के तिजारा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। उनके लिए चुनाव प्रचार करते हुए सीएम योगी ने भाजपा सरकार की योजनाओं का जिक्र किया और कॉन्ग्रेस सरकार में लूट-खसोट को मुद्दा बनाया। सीएम योगी की उपस्थिति में बाबा बालकनाथ ने नामांकन का पर्चा भी भरा।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर निशाना साधते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राजस्थान का मुख्यमंत्री आवास अब ‘फतवा हाउस’ बन चुका है, जहाँ से सनातन धर्म के विरोध में ऐलान किए जाते हैं। उन्होंने याद किया कि कैसे राजस्थान में श्रीराम के जयकारों पर प्रतिबंध लगा दिए जाते हैं और धार्मिक कार्यक्रमों पर सख्त कानून लागू कर दिए जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अगर कन्हैया लाल हत्याकांड यूपी में हुआ होता तो हत्यारों का क्या अंजाम होता ये बताने की जरूरत भी नहीं है।

उन्होंने ध्यान दिलाया कि कैसे राजस्थान में गोवंश को भी नुकसान पहुँचाया जाता है। उन्होंने कहा कि आज भारत एक नए भारत के रूप में है। सीएम योगी ने बताया कि कैसे यूपी में बुलडोजर ने गुंडागर्दी खत्म कर दी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इसी तरह राजस्थान में भाजपा की सरकार आते ही सभी गुंडे घरों में कैद हो जाएँगे। उन्होंने बाबा बालकनाथ को अपना ही रूप बताते हुए उन्हें आते देने की अपील की। उन्होंने बिना नाम लिए तिजारा से कॉन्ग्रेस प्रत्याशी इमरान खान पर भी निशाना साधा। बता दें कि बाबा बालकनाथ भी नाथ संप्रदाय से ही आते हैं।

400 साल पुराने मंदिर की खुदाई में मिले घड़े, था कुछ ऐसा कि भाग खड़े हुए मजदूर: पूरे इलाके में चर्चा

उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर जिले में एक प्राचीन मंदिर की मरम्मत के समय खुदाई के दौरान 2 मटके मिलने की खबर है। इन मटकों को चमत्कारी समझकर मजदूरों ने काम बंद कर दिया और अपने घर लौट गए। ग्रामीणों के मुताबिक, मटके के अंदर राख जैसा कुछ सामान है। प्रशासन ने मौके पर पहुँचकर मटकों को सील कर दिया और उन्हें एक जगह रखवा दिया है। फिलहाल मंदिर के पुनर्निर्माण का काम फिर से शुरू कर दिया गया है। घटना मंगलवार (31 अक्टूबर 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला शाहजहाँपुर जिले के तिलहर थाना क्षेत्र का है। यहाँ के गाँव हरनोखा में हिंदू समाज का 400 साल पुराना एक मंदिर है। यहाँ माता फूलमती की पूजा होती है। मंदिर प्राचीन है, इसलिए गाँव के लोग आपस में सहयोग करके मिस्त्री और मजदूर लगाकर इसका जीर्णोद्धार करवा रहे थे। इसी बीच मंगलवार को एक दीवार की नींव खुदाई के समय मिट्टी में दबे 2 घड़े मिले।

इन घड़ों के मुँह कपड़े से बाँधकर रखा गया था। बताया जा रहा है कि ये घड़े काफी प्राचीन समय से मिट्टी में दबाए गए थे। घड़ों को देखकर वहाँ काम कर रहे मजदूरों में सनसनी फ़ैल गई। वो इसे किसी दैवीय चीज से जोड़कर देखने लगे और फ़ौरन काम बंद कर दिया। थोड़ी देर बाद सभी मजदूर घर लौट गए। हालाँकि, कोई भी शख्स इन घड़ों को खोलकर देखने की हिम्मत नहीं जुटा पाया।

इस खबर के फैलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर जुटना शुरू हो गए। मामले की जानकारी प्रशासन को दी गई तो स्थानीय थाने से स्टाफ पहुँचे। उन्होंने अपनी देखरेख में घड़ों का परीक्षण किया। इस संबंध में ऑपइंडिया ने वहाँ के ग्रामीणों से बातचीत की। ग्रामीणों का कहना है कि इन घड़ों में कोई बहुमूल्य चीज नहीं मिली है। घड़ों में राख जैसा कुछ बताया जा रहा है।

ऑपइंडिया को ग्राम प्रधान शांति देवी के प्रतिनिधि कमलेश यादव ने बताया कि प्रशासन के समक्ष जाँच कराई गई घड़ों में राख मिली है। कमलेश ने यह भी बताया कि घड़ों को उसी हालत में मंदिर के एक हिस्से में सहेजकर रख दिया गया है। ग्रामीणों ने इसे मंदिर का सामान माना है। इसके बाद मंदिर के जीर्णोद्धार का काम फिर से शुरू करवा दिया गया है।

हिन्दू बच्ची को स्कूल से उठा ले गया मुस्लिम युवक, फिर किया बलात्कार: सब्जी बेचता था आरोपित, गुजरात पुलिस ने ट्रेन से दबोचा

लव जिहाद के मामले और हिंदू महिलाओं और लड़कियों पर अत्याचार बढ़ रहे हैं। इस बीच राजकोट में 9वीं कक्षा में पढ़ने वाली 13 साल की हिंदू नाबालिग को एक मुस्लिम युवक द्वारा अगवा करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि आरोपित काफी समय से नाबालिग का पीछा कर रहा था और जब वह स्कूल पहुँची तो गेट से ही उसने नाबालिग का अपहरण कर लिया। हालाँकि, अपहरण के बाद दर्ज की गई शिकायत के आधार पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और आरोपित को द्वारका जाने वाली ट्रेन से गिरफ्तार कर लिया। 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, राजकोट के हुडको मार्केट में सब्जी बेचने वाले आर्यन शशीफ बलोच नाम के एक मुस्लिम युवक ने 9वीं कक्षा में पढ़ने वाली 13 साल की हिंदू लड़की का अपहरण कर लिया। घटना वाले दिन दोपहर 12 बजे जब नाबालिग स्कूल जा रही थी तो आरोपित ने उसका पीछा किया और उसे स्कूल के गेट से उठा लिया। फिर नाबालिग के चाचा ने इस मामले में भक्तिनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई तो पुलिस तुरंत एक्शन मोड में आ गई और घटना की रात आरोपित को राजकोट रेलवे स्टेशन से द्वारका जाने वाली ट्रेन से उठा लिया। 

नाबालिग को स्कूल से उठा ले गया था आरोपित 

नाबालिग के चाचा की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के मुताबिक, उनकी 13 साल की भतीजी कोठारिया रोड स्थित एक स्कूल में 9वीं कक्षा में पढ़ती है। पिछले 30 अक्टूबर, 2023 को लड़की की दादी उसे दोपहर में स्कूल छोड़ने गई, लेकिन जब शाम को वापस लेने गई तो नाबालिग नहीं मिली। इसके बाद चिंतित परिवार ने नाबालिग की तलाश की लेकिन वह नहीं मिली,  जिसके बाद तुरंत ही मामले की सूचना भक्तिनगर पुलिस स्टेशन को दी गई। जिसके बाद भक्तिनगर पुलिस ने संदेह के आधार पर आरोपित के पिता से पूछताछ की तो पता चला कि आरोपित व्यवसाय दुकान या घर पर मौजूद नहीं है। 

इस बीच सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल लोकेशन के आधार पर जाँच करते हुए पुलिस को पता चला कि आरोपित आर्यन शशीफ बलोच के फोन की वर्तमान लोकेशन राजकोट रेलवे स्टेशन थी, और यह भी पता चला कि आरोपित नाबालिग के साथ भागने के लिए द्वारका जाने वाली ट्रेन में बैठा था। जिसके बाद पुलिस ने आरोपित को ट्रेन से ढूँढ़कर गिरफ्तार कर लिया और नाबालिग को छुड़ा लिया। नाबालिग के चाचा की शिकायत पर पुलिस ने आर्यन बलोच के खिलाफ आईपीसी की धारा 363, 354 (k) और POCSO एक्ट की धारा 8 के तहत मामला दर्ज कर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। 

मामले पर अधिक जानकारी के लिए हमने भक्तिनगर पुलिस स्टेशन से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन अधिकारियों की व्यस्तता के कारण संपर्क नहीं हो सका। 

सब्जी बेचता है आरोपित 

बता दें कि नाबालिग के चाचा ने भी शिकायत में कहा है कि आरोपित और उसके पिता हुडको मार्केट में उनकी दुकान के पास सब्जी बेचने का कारोबार करते हैं। नाबालिग अक्सर दुकान पर आती थी, जिसके कारण आर्यन बलोच की नजर उस पर पड़ गई। वह नाबालिग के स्कूल आते-जाते समय उसके घर के पास एक पान की दुकान पर बैठता था। इससे पहले भी उसने नाबालिग को बात करने के लिए बुलाया था, लेकिन जब परिवार को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने आरोपित को डाँटकर भगा दिया। 

आरोपित की गिरफ्तारी के बाद पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि आर्यन बलोच उनकी बेटी के नाम पर सोशल मीडिया अकाउंट चला रहा है। उसके पास नाबालिग की तस्वीरें हैं और उनके जरिए वह उनकी बेटी को ब्लैकमेल करता था। इसके साथ ही परिवार की यह भी माँग है कि नाबालिग का मेडिकल टेस्ट कराया जाए ताकि रेप की पुष्टि हो सके।

जिस चाकू से काटता था मांस, बॉयफ्रेंड जौहर महमूद ने उसी से महिला हिन्दू डॉक्टर को काट डाला: पुलिस ने दायर की 1249 पन्नों की चार्जशीट

जम्मू में 7 मार्च 2023 को सुमेधा शर्मा नाम की एक हिंदू महिला दंत चिकित्सक की मांस काटने वाला चाकू घोंपकर हत्या कर दी गई थी। हत्या का आरोप महिला डॉक्टर के बॉयफ्रेंड डॉक्टर जौहर महमूद गनी पर लगा था। इसी के साथ उस समय जौहर ने खुद को अपने जीवन से परेशान बताकर आत्महत्या का भी प्रयास किया था। इस मामले में अब जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है।

1249 पेजों की यह चार्जशीट मंगलवार (31 अक्टूबर 2023) को दाखिल हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने चार्जशीट में आरोपित डॉक्टर के खिलाफ पर्याप्त सबूत पेश करने का दावा किया है। इस मामले में जम्मू के जानीपुर थाने में FIR संख्या 27/2023 के तहत केस दर्ज हुआ था। आरोपित डॉ जौहर पर IPC की धारा 302 और 323 के तहत कार्रवाई हुई थी।

इस मामले की जाँच के लिए इस विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया गया था। इस विशेष जाँच दल में पुलिस अधीक्षक रमनीश गुप्ता, विशाल शूर और सचित शर्मा नाम के 2 SDPO के साथ सिकंदर चौहान और राकेश शर्मा नाम के 2 इंस्पेक्टर शामिल हुए थे। इसके बाद पुलिस ने उसके पति जौहर महमूद गनी को गिरफ्तार कर लिया गया है।

गौरतलब है कि जम्मू के तालाब तिल्लो के गोल पुली क्षेत्र की निवासिनी सुमेधा दिल्ली में रहकर एमडीएस की पढ़ाई कर रही थी। उनकी दोस्ती जम्मू के ही पमपोश कॉलोनी के रहने वाले जौहर से हुई थी। उस समय दोनों सियोडा गंग्याल डेंटल कॉलेज से बीडीएस की पढ़ाई कर रहे थे। पढ़ाई के दौरान होली की छुट्टी में सुमेधा अपने घर के बजाय सीधे जौहर के पास चली गई थी।

यहीं पर किसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ और जौहर ने किचन से मांस काटने वाला चाकू लाकर सुमेधा को मार डाला था। घटना के बाद जौहर ने खुद पर भी चाकुओं के वार किया था। पुलिस ने मौके पर पहुँच कर सुमेधा की लाश को कब्ज़े में लिया था। साथ ही जौहर को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। बाद में जौहर को कस्टडी में लेते हुए जेल भेज दिया गया था।

जज को फाँसी चढ़ाने गया था, खुद जेल चला गया: IIT और अमेरिका से पढ़े शख्स को 6 महीने की सज़ा, हाईकोर्ट बोला – न्यायपालिका का सम्मान कीजिए

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति को न्यायालय की अवमानना का दोषी मानते हुए 6 महीने के लिए जेल भेज दिया है। यह व्यक्ति अपनी याचिकाएँ ना स्वीकार किए जाने के कारण गुस्सा था और इसीलिए एक जज को फाँसी की सजा करवाना चाहता था।

हाईकोर्ट ने नरेश शर्मा नाम के शख्स द्वारा दाखिल की गई तीन याचिकाएँ जाँची जिसमें नरेश ने दिल्ली हाईकोर्ट के एक जज के विरुद्ध अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे और सुप्रीम कोर्ट के विषय में भी कई बातें कहीं थी।

दरअसल, नरेश शर्मा ने दिल्ली हाई कोर्ट के समक्ष एक याचिका डाली थी जिसमें स्वतंत्रता के बाद अब तक भारत सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए उनकी जाँच की मांग की गई थी। इस याचिका को 27 जुलाई 2023 को एक जज वाली बेंच ने खारिज कर दिया था।

इससे क्रोधित होकर नरेश शर्मा ने इस फैसले के विरुद्ध याचिका खारिज करने वाले जज के विरुद्ध अभद्र भाषा और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए पुनर्विचार याचिकाएँ दाखिल की थीं। इस पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने नरेश के विरुद्ध न्यायलय की अवमानना के तहत नोटिस जारी किया था। इसी सिलसिले में 1 नवम्बर 2023 को सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट की सुरेश कुमार कैत और शैलिंदर कौर वाली दो सदस्यीय बेंच ने नरेश को न्यायालय की अवमानना का दोषी मानते हुए उसे 6 महीने की जेल की सजा सुनाई और ₹2000 का जुर्माना भी लगाया। कोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया कि उसे आज ही तिहाड़ जेल में बंद किया जाए।

कोर्ट ने कहा कि वह नरेश शर्मा की याचिका से स्तब्ध है। नरेश ने अपनी याचिका में जज को ‘चोर’ बताया था। कोर्ट ने यह भी कहा कि शर्मा को अपनी गलती का एहसास भी नहीं है और वह अपने कहे पर कायम है। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता IIT मुंबई और कानपुर से पढ़ा था, अमेरिका के बड़े संस्थानों में भी स्टडी की थी, इसलिए उसे भारत के संविधान का सम्मान करना चाहिए और न्यायिक प्रक्रिया में विश्वास रखना चाहिए।

देर से आए पीरियड, इसीलिए गोली खा रहीं फिलिस्तीन की औरतें: गाजा में इजरायली बमबारी से हाइजीन की दिक्कत, अधिकतर अस्पताल भी बंद

इस्लामी आतंकी संगठन हमास के 7 अक्टूबर को इजरायल पर हमले के बाद अब गाजा की महिलाएँ परेशानी में पड़ गई हैं। इजरायल-हमास के हमले के जवाब में गाजा पर बमबारी कर रहा जिसके कारण महिलाएँ अपना पीरियड आगे बढ़ा रही हैं।

दरअसल, इसके पीछे गाजा में साफ़-सफाई, पानी की कमी और बाकी दवाइयों का ना होना बड़ा कारण है। गाजा की नाकेबंदी के कारण कोई भी सामान वहाँ नहीं पहुँच रहा है। गाजा में इन महिलाओं को सैनिटरी नैपकिन, मेंस्टुरल कप और पीरियड्स के दौरान होने वाली समस्याओं से बचाने वाली दवाइयाँ उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।

ये महिलाएँ अस्पताल भी डॉक्टरों की सलाह लेने नहीं जा पा रही हैं क्योंकि अधिकांश अस्पताल गाजा में घायलों का इलाज कर रहे हैं या फिर बंद हो गए हैं। ऐसे में ये महिलाएँ इसी पीरियड लेट करवाने वाली दवाई का सहारा दर्द और बाकी समस्याओं से बचने के लिए ले रही हैं। हालाँकि, इस तरह की दवाएँ इनके स्वास्थ्य को नुकसान भी पहुँचा सकती हैं।

फिलिस्तीनी महिलाओं की इस हालत के पीछे इस्लामी आंतकी संगठन हमास बड़े स्तर पर जिम्मेदार है। जहाँ एक ओर युद्ध की वजह से महिलाओं को दवाइयाँ और बाकी जरूरी वस्तुएँ नहीं मिल पा रहीं वहीं हमास के आतंकी गाजा के भीतर पहुँचने वाली मदद को भी लूट रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र और बाकी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा गाजा के भीतर गया राहत का सामान लगातार आतंकी हितों कि पूर्ति के लिए लूटा जा रहा है। हमास के आतंकी पहले से गोदामों में रखा हुआ सामान भी लूट रहे हैं। इन करतूतों में गाजा के नागरिक भी शामिल हैं। वहीं इजरायल ने भी गाजा के भीतर आतंकियों को निशाना बनाने और हवाई हमलों में तेजी लाई है। इजरायली सुरक्षा बलों ने गाजा के भीतर जबालिया कैम्प पर हमला किया है जिसमें बड़ी संख्या में आतंकियों के मारे जाने की सूचना है।

7 अक्टूबर को हमास के हमले के जवाब में इजरायल द्वारा किए गए हवाई हमलों में अब तक गाजा के भीतर 8000 से अधिक आतंकियों की मौत हो चुकी है। इजरायल छोटे स्तर पर गाजा के भीतर जमीनी ऑपरेशन भी कर रहा है। इस बीच गाजा और मिस्र के बीच की राफाह क्रॉसिंग से विदेशियों की निकासी 1 नवम्बर से चालू हो गई है।

जॉर्ज सोरोस को एलन मस्क ने किया नंगा, कहा- चुनाव प्रक्रिया में हेरफेर करना चाहता है वामपंथी अरबपति, मानवता से करता है घृणा

टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने रेडियो होस्ट जो रोगन के साथ मंगलवार (31 अक्टूबर) को 2 घंटे 40 मिनट लंबे पॉडकास्ट पर बात की। इस दौरान मानव सभ्यता को खतरे में डालने के लिए वामपंथी अरबपति जॉर्ज सोरोस पर हमला भी बोला।

एलन मस्क ने कहा, “मेरी राय में, (सोरोस) मूल रूप से मानवता का दुश्मन है, घृणा करता है। वह ऐसे काम कर रहा है जो सभ्यता को नुकसान पहुँचा रहे हैं।” एलन मस्क ने जिला अटॉर्नी (डीए) की नियुक्ति सुनिश्चित करने के लिए सोरोस की आलोचना की, जो अपराधियों पर मुकदमा चलाने से इनकार करते हैं, जिससे प्रमुख अमेरिकी शहरों में  अपराधियों की संख्या बढ़ती है। 

टेस्ला के सीईओ ने कहा, “ऐसे जिला अटॉर्नी (डीए) का चुना जाना जो अपराधियों पर मुकदमा चलाने से इनकार करते हैं… यह सैन फ्रांसिस्को, एलए और कई अन्य शहरों में प्रमुख समस्या का हिस्सा है। तो आप ऐसा क्यों करेंगे? वह अन्य देशों में भी इसी तरह की चीजों को आगे बढ़ा रहे हैं।

एलन मस्क ने कहा, “जॉर्ज इस समय काफी बूढ़े हो चुके हैं… लेकिन वह मध्यस्थता करने में माहिर हैं। यह सबको पता है कि उसने ब्रिटिश पाउंड को नुकसान पहुँचाया था… मुझे लगता है कि इसी तरह से उसने शुरूआती पैसा कमाया।” उन्होंने संकेत दिया कि कैसे वामपंथी अरबपति अपने पैसे के दम पर स्थानीय चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश कर करे हैं।

एलन मस्क ने आगे कहा, “सोरोस को पता है कि वास्तव में कानूनों को बदलने की ज़रूरत नहीं है, आपको बस उन्हें लागू करने के तरीके बदलने की ज़रूरत है… यदि कोई भी कानूनों को लागू करने के सही तरीके को नहीं चुनता है, या कानूनों को अलग-अलग तरीके से लागू किया जाता है, तो यह कानूनों को बदलने जैसा ही है।”

यह पहली बार नहीं है कि उन्होंने घोर वामपंथी अरबपति सोरोस को लताड़ा है। बल्कि इसी साल मई की शुरुआत में भी एलन मस्क ने दोहराया था कि जॉर्ज सोरोस मानवता से घृणा करते हैं। “आप मानते हैं कि वे अच्छे इरादे हैं। तो ऐसा नहीं हैं। वह सभ्यता के ताने-बाने को नष्ट करना चाहते हैं। सोरोस को मानवता से नफरत है।”

जॉर्ज सोरोस द्वारा वित्त पोषित समूह ने 2020 के अमेरिकी चुनावों को किया प्रभावित 

दरअसल, जॉर्ज सोरोस को लोकतंत्र को नष्ट करने, शासन में बदलाव लाने और मतदाताओं की स्वतंत्र निर्णय लेने की प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर उथल-पुथल के लिए जाना जाता है। 

बता दें कि एलन मस्क द्वारा ट्विटर के अधिग्रहण के बाद जारी किए गए आंतरिक दस्तावेजों से यह बात साफ़ हो गई थी कि हंगेरियन-अमेरिकी अरबपति सोरोस के ओपन सोसाइटी फाउंडेशन (ओएसएफ) द्वारा वित्त पोषित एक समूह (फर्स्ट ड्राफ्ट न्यूज) ने जो बाइडेन की कहानी को दबाने में मदद की थी। 

अकेले इसी कदम ने 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे पर असर डाला  था। पिछले साल मई में भी OSF द्वारा वित्त पोषित 2 लॉ फर्मों ने (फ्री प्रेस और मीडिया मैटर्स फॉर अमेरिका) ने प्रमुख कॉर्पोरेट ब्रांडों को ट्विटर पर विज्ञापनों को फंडिंग करने के अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने के लिए लिखा था।

अकेले इस कदम ने 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे पर असर डाला। पिछले साल मई में, OSF द्वारा वित्त पोषित 2 वकालत समूहों (फ्री प्रेस और मीडिया मैटर्स फॉर अमेरिका) ने प्रमुख कॉर्पोरेट ब्रांडों को ट्विटर पर विज्ञापनों को वित्त पोषित करने के अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने के लिए लिखा था।

जॉर्ज सोरोस और उनका भारत विरोधी एजेंडा

भारत 2023 की शुरुआत से ही सभी मोर्चों पर ‘वैचारिक युद्ध’ लड़ रहा है। इस साल 16 फरवरी को, जॉर्ज सोरोस ने अडानी-हिंडनबर्ग विवाद का फायदा उठाया और भारत की मोदी सरकार पर तीखा हमला किया।

उन्होंने दावा किया, ”मोदी और बिजनेस टाइकून अडानी करीबी सहयोगी हैं। उनकी किस्मत आपस में जुड़ी हुई है…अडानी एंटरप्राइजेज ने शेयर बाजार से फंड जुटाने की कोशिश की, लेकिन वह असफल रही। अडानी पर स्टॉक में हेराफेरी का आरोप है। जिससे उनका स्टॉक ताश के पत्तों की तरह ढह गया।

सोरोस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर क्रोनी कैपिटलिज्म का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “मोदी इस विषय पर चुप हैं, लेकिन उन्हें विदेशी निवेशकों और संसद में सवालों के जवाब देने होंगे।”